• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

बहू नगीना और ससुर कमीना

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
तभी राजीव एक बॉक्स लेकर आया और दीवान पर बैठा और उसके चूतरों को जी भर कर दबाया और चूमा।फिर वो उसके गाँड़ के भूरे छेद को सहलाया। फिर उसने एक पतला सा नक़ली लंड निकाला और उसमें जेल मला और फिर मालिनी की गाँड़ में डाला और अंदर बाहर करने लगा।

राजीव: बेटा अब तो ये नहीं दुखता ना?

मालिनी: आऽऽह नहीं पापा। अब ठीक लगता है। हाऽऽयययय।

राजीव ने अपनी लूँगी निकाली और मालिनी को बोला: बेटा मेरे लौड़ा सहला दे ना प्लीज़। बहुत गरम हो गया हूँ तेरी मस्तानी गाँड़ देखकर। वो उसके लौंडे को पकड़कर सहलाने लगी।

राजीव ने अब नम्बर २ का लण्ड डाला और उसे हिलाने लगा और पूछा: बेटा ये कैसा लग रहा है?

मालिनी: पापा आऽऽऽऽह ये थोड़ा सा दुखा था पर अब अच्छा लग रहा है। उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽ।

क़रीब ५ मिनट के बाद अब राजीव नम्बर ३ वाला लम्बा और थोड़ा मोटा लंड डाला और मालिनी : आऽऽऽऽऽऽह पाआऽऽऽऽपा दर्द कर रहाआऽऽऽऽ है।

राजीव: बस बेटा थोड़ी देर बस, फिर मज़ा आएगा। वो हिलाते जा रहा था।

मालिनी: आऽऽऽऽह पाआऽऽऽपा अब अच्छा लगाआऽऽऽऽऽऽ। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मस्त लग रहा है । हाऽऽऽऽय्य उम्म्म्म्म्म्म कहकर वो अपनी गाँड़ उछालने लगी। अब वो बोली: पापा प्लीज़ बुर में ऊँगली डालो नाआऽऽऽऽऽऽऽ। आऽऽऽऽहहह बहुत मज़ाआऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽ है पाआऽऽऽऽऽपा।

शिवा आँखें फाड़े देख रहा था कि पापा उसकी गाँड़ में मोटा नक़ली लंड भी डालकर हिला रहे थे और एक हाथ उसकी बुर में भी घुसा कर उसकी बुर में उँगलियाँ कर रहे थे। मालिनी भी उनके लंड को दबाकर आऽऽऽहहह पाआऽऽऽऽऽऽपा। उम्म्म्म्म्म मैं गयीइइइइइइ कहकर झड़ने लगी।

शिवा भी अपना लंड दबाकर पागल हुए जा रहा था ।

अब राजीव बोला : बेटा मज़ा आया? मेरे ख़याल से तुम्हारी गाँड़ इसके लिए ही खुजा रही थी। फिर उसने नक़ली लंड निकाला और कहा: देखो क्या मस्त फैल गयी है तुम्हारी गाँड़? अब बस एक इससे मोटा वाला ले लोगी कल तो तय्यार हो जाओगी गाँड़ मरवाने के लिए।

इसके बाद जो मालिनी ने कहा उसको सुनकर शिवा अपने लंड का माल अपने रुमाल में गिरा बैठा। वो अपना हाथ अपनी गाँड़ में ले जाकर छेद में ऊँगली फेरकर बोली: हाँ पापा ये तो बहुत बड़ा हो गया। अब आप मेरी गाँड़ की सील तोड़ दो। बुर की सील शिवा ने तोड़ी और गाँड़ की आप तोड़ दो।

शिवा सोचा कि उफफफफ ये लड़की क्या से क्या बन गयी है। पापा ने तो इसको पक्की रँडी बना दिया है।

तभी घंटी बजी, राजीव: लगता है बाई आ गयी। मैं जाता हूँ। तुम दरवाज़ा खोल दो।

मालिनी ने अपनी साड़ी नीचे की और दरवाज़ा खोलने गयी। राजीव समान लेकर अपने कमरे में चला गया। शिवा भी बाहर आया और ऊपर चढ़ कर सीढ़ी को ऊपर खिंचा और चुपचाप बाहर चला गया। वो दुकान जाते समय मोबाइल से आयशा को फ़ोन किया और उसको सब आज की बातें बताया।

आयशा: हम्म मतलब ससुर और बहु पूरा मज़ा ले रहे है।

शिवा: उफफक मैं क्या बताऊँ? मेरे पास शब्द नहीं हैं ।

आयशा: आपको ग़ुस्सा आया। या उत्तेजना हुई?

शिवा: सच कहूँ तो मैं बहुत उत्तेजित हो गया था और मैंने मूठ्ठ भी मार ली ।

आयशा हँसकर बोली: आह और मेरा नुक़सान करा दिया ।

दोनों हँसने लगे।

आयशा: मैं आज उसको २ बजे फ़ोन करूँगी। अगर वो उत्तेजित होगी तो आज भी मिलने आएगी। उसे आगे की कहानी सुननी है।

शिवा: वो तो मुझे भी सुननी है।

आयशा: ठीक है आपको भी सुना दूँगी। अच्छा कुछ काम बना तो बताऊँगी। बाई ।

शिवा भी फ़ोन काटकर सोचते हुए दुकान पहुँचा। उसे पता था कि शायद आज पापा और मालिनी साथ ही नहाएँगे और चुदाई भी होगी। वो सोचा कि काश वो ये देख पाता ।

उधर आज भी राकेश १० बजे सबके जाने के बाद सरला के पास आके बैठा और उसकी जाँघ सहलाकर बोला: मम्मी आप बहुत थक जाती हो ना? मेरी नौकरी लगने दो आपको महारानी बना कर रखूँगा । नौकर ही घर का काम करेंगे ।

सरला: तू बहु ले आना, तो मुझे आराम मिल जाएगा।

राकेश: मम्मी फिर वही बात? मुझे शादी करनी ही नहीं। मेरी तो आप ही दुल्हन हो । वो उसकी गोद में लेट कर उसकी चूची साड़ी के पल्लू को गिराकर ब्लाउस के ऊपर से ही दबाने लगा।

सरला उसके गाल चुमी और बोली: आह्ह्ह्ह्ह तेरी यही बातें तो मेरी सारी थकान उतार देतीं हैं बेटा। फिर दोनों एक मादक चुम्बन में लीन हो गए। सरला जानती थी कि वो अब उसे बिना चोदे छोड़ेगा नहीं। उसकी बुर भी पनियाने लगी और उसने पैंट के ऊपर से उसका लंड पकड़ लिया और दबाकर मस्त होने लगी।

उधर श्याम को चैन नहीं था। वो बार बार ये सोचता कि सरला और राकेश ग़लत कर रहे है। आख़िर वो सोचा कि कम से कम राजीव को तो वो ये बता ही सकता है। वो राजीव को फ़ोन किया ।

राजीव: हेलो श्याम कैसे हो भाई बड़े दिन बाद फ़ोन किया ।

मालिनी इस समय बाई के साथ किचन में थी।

श्याम: भाई बात ही कुछ ऐसी है। आपसे सलाह करनी थी।

राजीव: हाँ हाँ बोलो।

श्याम: वो क्या है ना कि अब कैसे बोलूँ ? बड़ा अजीब लग रहा है।

राजीव: अरे बोलो यार । सरला के बारे में है क्या?

श्याम: हाँ मगर आपको कैसे पता?

राजीव: यार वो माल है ही ऐसी कि उसके पीछे कोई ना कोई पड़ा ही रहेगा। बोलो क्या हुआ?

श्याम: यार इस बार तो इसने हद कर दी। जानते हो आजकल अपने बेटे से चुदवा रही है। उसे और राकेश को मैंने चुदाई करते देखा है।

राजीव थोड़ा सा चौंका फिर बोला: ओह तो ये बात है। देखो भाई मैं इसे ग़लत नहीं मानता। वो एक मस्त सेक्सी औरत है जिसे भरपूर चुदाई चाहिए। वो उसे राकेश या शायद शिवा ही दे सकते हैं। अब तुम उसका उतना ख़याल तो रख नहीं पाते। इसलिए वो अगर राकेश से चुदवा रही है तो तुमको बुरा नहीं लगना चाहिए।

श्याम: ओह आप ऐसा सोचते हो? मतलब वो अगर शिवा से भी चुदवा ले तो आपको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा?

राजीव मन में सोचा कि वो तो शिवा से चुदवा ही चुकी है। फिर बोला: नहीं मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। अच्छा ये बताओ कि उसने तुमसे चुदवाने से कभी मना किया क्या?

श्याम: नहीं कभी नहीं। वो तो बीचारी महवारी में भी गाँड़ मरवा लेती है । इस मामले में कभी कोई शिकायत का मौक़ा नहीं दी।

राजीव: फिर क्या समस्या है? तुम भी चोदो और राकेश को भी चोदने दो। दोनों मज़ा लो उससे । एक बात बोलूँ चुदाई में रिश्तों की कोई अहमियत नहीं होती। चुदाई औरत और आदमी के बीच होती है बस ।

श्याम: इसका मतलब है कि आप भी अपनी बहु से ये सब कर सकते हो?

राजीव मन ही मन हँसा और बोला: हाँ अगर बहु को ऐतराज़ नहीं हो तो? वैसे मैं बेटी महक से भी कर सकता हूँ अगर उसे ऐतराज़ ना हो तो।

श्याम: ओह बड़ी विचित्र सोच है आपकी? अच्छा रखता हूँ।

श्याम सोचने लगा कि मेरी भी तो दो बेटियाँ हैं तो क्या मैं उनके साथ सम्बंध बना लूँ? ये तो बड़ी ही फ़ालतू सी बात लगती है।

उधर मालिनी बाई को घर भेजकर राजीव के कमरे में गयी । अभी दिन के १२:३० बजे थे। राजीव कुर्सी पर बैठ कर उसका ही इंतज़ार कर रहा था। वो अब तक नहाया नहीं था।

राजीव अपने कमरे ने बिना नहाए मालिनी के आने का इंतज़ार कर रहा था। मालिनी आयी और बोली: पापा आप अभी तक नहाए नहीं?

राजीव: बेटा आज तो तुम्हारे साथ ही नहाने का तय था ना।

मालिनी: पापा मैं तो एक बार शिवा के साथ नहा ली हूँ ना।

राजीव: मेरे साथ भी नहा लो। क्या फ़र्क़ पड़ता है।

मालिनी: ठीक है पापा जैसा आप बोलो। वैसे हम कल भी साथ नहा सकते हैं।

राजीव: कोई बात नहीं बेटा कल ही साथ नहा लेंगे। तो फिर मैं नहा लेता हूँ।

मालिनी: ठीक है पापा आप नहाओ , मैं थोड़ी देर में आती हूँ।

राजीव नहाने चला गया और मालिनी किचन में काम निपटाने लगी।

राजीव नहा कर तय्यार होकर आया और मालिनी को बोला: बेटा मैं ज़रा बैंक का कुछ काम निपटा कर आता हूँ।

मालिनी : ठीक है पापा।

राजीव के जाने के बाद मालिनी घर के काम निपटा रही थी तभी आयशा का फ़ोन आया: हाय कैसी हो?

मालिनी: ठीक हूँ। आप कैसी हो? मैं आपको फ़ोन करने ही वाली थी।

आयशा: किस लिए।

मालिनी: बस ऐसे ही। वैसे भी कल बात आधी रह गयी थी ना।

आयशा शरारत से हँसी: कैसी बात?

मालिनी भी हँसी: अरे वही आपकी शादी की बात जो आप बता रही थीं ।

आयशा: ओह वो बात? तो उसके लिए तो तुम कल आने वाली थी ना।

मालिनी: अरे मैं आज भी फ़्री हूँ। आप बोलो तो चार बजे आ जाऊँ?

आयशा: तुम्हारा ससुर तुमको आने देगा?

मालिनी: वो क्यों रोकेंगे? उनका काम करके ही आऊँगी ना।

इस पर दोनों हँसने लगे। आयशा बोली कि वह उसका इंतज़ार करेगी। फिर आयशा ने शिवा को फ़ोन किया और बताया कि मालिनी आएगी । तो वो फिर से बात सुनने की विनती किया और आयशा ने मान लिया।

मालिनी आयशा से मिलने का सोचकर थोड़ा उत्तेजित होने लगी थी। ख़ैर थोड़ी देर बाद राजीव वापस आया और अपने हाथ में एक मिठाई का डिब्बा लाया था। वो राजीव के पीछे पीछे उसके कमरे में गयी और पूछी: पापा क्या लाए हैं?

राजीव: तुम्हारे लिए मलाई रबड़ी लाया हूँ।

मालिनी ख़ुशी से बोली: पापा ये तो मेरी मनपसंद मिठाई है।

राजीव उसको अपनी बाँह में खींचकर बोला: बेटा तभी तो लाया हूँ अपनी मीठी गुड़िया के लिए। वैसे बाई गयी क्या? मालिनी ने हाँ में सिर हिलाया। अब वह मालिनी के होंठ चूमने लगा। मालिनी भी उससे चिपट गयी। राजीव के हाथ उसके पीठ को दबा रहे थे। वो ब्लाउस के नीचे से उसकी चिकनी कमर को सहला रहा था। अब वो उसके मोटे चूतरों को पकड़कर अपने से चिपका लिया और मालिनी अपने बुर का हिस्सा उसके पैंट के सामने भाग से चिपका कर मस्त होकर उसके होंठ चूसने लगी। अब वो मालिनी की साड़ी खोलकर उसका ब्लाउस भी निकाला और अब ब्रा में क़ैद मालिनी के चूचों को वो दबाने लगा। अब उसने ब्रा भी निकाली और पेटिकोट का नाड़ा भी खोला और उसको पूरी नंगी करके मज़े से उसने नंगे बदन पर हाथ फेरने लगा।

मालिनी बिस्तर पर लेटी और वो भी अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया। अब वो उसके बग़ल में लेटकर उसकी चूचियाँ सहलाया और निपल को ऐंठ कर उसे मस्त कर दिया । फिर बहुत देर तक चूमा चाटी होती रही। वो: ६९ का मूड है?

मालिनी: ठीक है पापा। वो ये कहकर उसके ऊपर आने लगी।

राजीव: रुको एक मिनट। फिर वो मिठाई लाया और उसकी चूचियों में मलने लगा और फिर उसकी जाँघों ,पेट,चूतरों , गाँड़ और बुर के ऊपर भी मलाई को मला। फिर वो मालिनी से भी यही करने को कहा। मालिनी हँसी और मलाई को उसकी छाती उसकी जाँघों और चूतरों पर मलने के बाद वह उसके लौड़े और बॉल्ज़ पर भी मली । अब राजीव उसकी चूचियों के ऊपर से मलाई चाटने लगा। मालिनी सी सी कर उठी। अब वो उसके पेट और जाँघों से भी मलाई चाटा। इस तरह वो उसके चूतरों की भी मलाई चाटा। मालिनी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी। वो गाँड़ और बुर को छोड़कर सब जगह की मलाई चाट चुका था।

अब वो मालिनी से बोला: बेटा अब तुम चाटो पर लौड़े के आसपास को छोड़ देना। अब वो। भी उसकी छाती पेट जाँघें चाटी और बोली: पापा मलाई बड़ी स्वाद है। इसको ऐसे भी खाते हैं मुझे तो पता ही नहीं था। अब सिर्फ़ लंड के ऊपर और बॉल्ज़ के आसपास की मलाई बची हुई थी। अब राजीव बोला: बेटा चलो ऊपर आ जाओ,६९ की पोजीसन में । वो उलटी होकर अपनी गाँड़ को उसके मुँह के ऊपर रखी और ख़ुद अपना मुँह उसके लंड पर रखी और उसके लंड पर लगी मलाई चाटने लगी। फिर वो उसके बॉल्ज़ और नीचे होकर उसकी बालों से भरी गाँड़ भी बड़े प्यार से चाटी। उधर राजीव भी अपना मुँह उसकी बुर में डालकर उसकी मलाई चाटा और फिर उसकी गाँड़ भी चाटा। अब वो दोनों पूरी तरह से ओरल सेक्स में लग गए। मालिनी की बुर में जिस तरह से जीभ डालकर वो उसे मस्त कर रहा था मालिनी को लगा वो झड़ जाएगी। वो उठकर बैठी और सीधी होकर उसके लंड को पकड़कर अपनी बुर ने घुसा ली और उसके ऊपर चिल्ला कर: उम्म्म्म्म आऽऽऽऽऽऽह हाऽऽऽय्य मरीइइइइइइ कहकर उसको चोदने लगी। अब राजीव भी उसकी चूचियाँ मसल कर नीचे से अपनी कमर उछालकर उसकी मस्ती को दुगुना करने लगा। अब मालिनी: आऽऽऽऽऽहहह पाआऽऽऽऽऽऽऽऽपा कहकर झड़ने लगी। राजीव भी ह्म्म्म्म्म्म ओह्ह्ह्ह्ह कहकर झड़ने लगा। अब दोनों लस्त होकर पड़े हुए थे तो मालिनी बोली: पापा मलाई रबड़ी इतनी स्वाद कभी नहीं लगी जितनी आपके लंड के ऊपर से चाट कर लगी थी। राजीव हँसकर: हाँ मुझे भी तुम्हारी गाँड़ और बुर में इतना मीठा स्वाद कभी नहीं आया। अब वो दोनों हँसने लगे।

अब मालिनी ने उसको चूमते हुए कहा: पापा आज मैं फिर आयशा के घर जाऊँगी।

राजीव : अरे क्यों अब क्या हो गया?

मालिनी ने सफ़ाई से झूठ बोला: पापा वो आज और अपने कुछ प्रॉडक्ट्स दिखाएगी। बस मैं चार बजे जाऊँगी और एक घंटे में ही आ जाऊँगी।

राजीव: ठीक है बेटा जाओ। वैसे इस आयशा के मम्मे काफ़ी बड़े हैं जैसे तुम्हारी माँ के हैं। एक बार चुदवा दो ना उसको?

मालिनी: पापा आप भी ना, बस अब फ़ालतू बातें मत करिए।

शाम को मालिनी आयशा के घर पहुँची। आज आयशा ने टॉप और स्कर्ट पहना हुआ था। मालिनी साड़ी ब्लाउस में थी। दोनों गले मिलीं। आयशा चाय बनाकर लायी और तबतक मालिनी आयशा के द्वारा दी हुई एक एल्बम की तस्वीरें देख रही थी। कोई उन तस्वीरों को देख कर सोच भी नहीं सकता था कि इतनी अजीब फ़ैमिली है। तस्वीरों में असलम और आयशा थे और उसके ससुर सास और देवर भी था। सब बड़े ख़ुश दिख रहे थे। कुछ तस्वीरें तो पहाड़ों की थीं जहाँ पूरा परिवार मस्ती से घूम रहा था। कौन कह सकता है कि ये परिवार रिश्तों में चुदाई में विश्वास करते हैं।

आयशा चाय लायी और दोनों चाय पीने लगे। आयशा ने पहले ही फ़ोन कनेक्ट कर दिया था शिवा के फ़ोन से । थोड़ी देर इधर उधर की बातें की और फिर आयशा बोली: अभी ससुर से चुदवा के आयी हो क्या?

मालिनी: हाँ और क्या? जवान बहु को छोड़ेंगे थोड़ी ना? आज तो उन्होंने स्पेशल चुदाई की। मलाई रबड़ी वाली चुदाई। फिर वो विस्तार से उसको आज की चुदाई का क़िस्सा सुनाई। आयशा मस्त होकर बोली: तेरे ससुर भी मेरे ससुर की तरह नयी नयी आसान और तरीक़े खोजते हैं।

( उधर शिवा उसके मुँह से ये सब सुन कर वो मस्ती से भर गया। उफफफ पापा भी क्या क्या आयडिया लगाते हैं।मलाई रबड़ी लगाकर ।उफफफफ )

मालिनी: अच्छा ये सब छोड़ो और उस दिन जब आपको आपकी अम्मी असलम के घर लेकर गयी तो क्या हुआ वहाँ विस्तार से बताओ।

आयशा हँसकर उसका हाथ पकड़ कर सहलाती हुई बोलने लगी: ठीक है सुनो-------////////----

अम्मी मुझे लेकर अपने चचेरे भाई के यहाँ पहुँची। वो असलम के अब्बा थे। दोनों भाई बहन गले मिले। मुझे लगा कि दोनों ज़रा ज़्यादा देर ही आपस में चिपके थे। फिर अलग हुए और उन्होंने मेरे सामने ही कहा: भाई जान ये मेरी बेटी आयशा है और में इसके लिए असलम का हाथ माँगने आयी हूँ।

असलम के अब्बा जिनका नाम वाहिद है मुझे घूरते हुए बोले: हाँ हाँ क्यों नहीं ? ये तो बहुत प्यारी बच्ची है । इसकी और असलम की जोड़ी ख़ूब सही रहेगी।

वो मेरी छातियों को घूरे जा रहे थे। फिर उन्होंने असलम को आवाज़ दी और मैंने उसे पहली बार देखा। वो बहुत सुन्दर थे और थोड़े दुबले पतले थे। असलम के अब्बा बोले: बेटा ये आयशा है। इनकी अम्माँ इसका रिश्ता तुम्हारे लिए लाई है। बोलो पसंद है? ये शर्मा कर बोले: जी अब्बा पसंद है। ये भी मेरे बदन और ख़ासकर चूचियाँ देख कर बोले थे।

असलम की अम्मी उसकी सौतेलि माँ थी। वो बोली: हाँ इनकी जोड़ी मस्त जमेगी। उनका नाम सलमा था। तभी एक लड़का समोसे लेकर आया । वो अजमल था। सलमा का बेटा और असलम का सौतेला भाई। वो मेरी उम्र का ही था।

अम्मी तो पूरी तैयारी से आयी थी। वो बोली: आज सगाई कर देते हैं। क्या कहते हो भाई जान?

वाहिद: हाँ हाँ क्यों नहीं? सलमा चलो सगाई की तैयारी करो । शाम को कुछ रिश्तेदारों और पड़ोसियों को बुला लो और फिर सगाई कर देते हैं । पर इसके अब्बा तो आ ही नहीं पाएँगे?

अम्मी: कोई बात नहीं है। उनको बहुत काम था। शादी का पूरा इंतज़ाम तो वही करेंगे। अब हम सब बैठकर समोसा खाते हुए बातें करने लगे। फिर दोपहर का खाना खाकर सलमा मुझे लेज़ाकर एक कमरे में बिठा आइ और वहाँ असलम और अजमल आए। अब हम तीनों बातें करने लगे। अजमल तो मुझे भाभी भी बोलने लगा। असलम की आँखें बार बार मेरी बड़ी चूचियों पर चली जाती थीं । मेरी आँख भी असलम के पैंट के उभार को देखी क्योंकि वहाँ एक ज़बरदस्त उभार बन गया था। असलम और उसका भाई वहीं एक बिस्तर पर लेट गए और मैं कुर्सी पर बैठी थी।

तभी मुझे पिशाब लगी और मैं पूछी: बाथरूम कहाँ है? अजमल मुझे लेकर दो कमरे पार किया और एक कॉमन बाथरूम में ले गया। मैं उसे थैंक्स कहकर अंदर गयी।

जब मैं बाहर आयी तो देखी कि अजमल वहाँ नहीं था। मैं धीरे धीरे उस कमरे की ओर जाने लगी जहाँ से आयी थी। तभी एक कमरे के सामने मुझे कुछ सिसकियों की आवाज़ें आयीं। मैं रुकी और खिड़की के पास जाकर धीरे से पर्दा हटाकर अंदर झाँकी तो मेरा सिर ही घूम गया। अंदर मेरी अम्मी और असलम के अब्बा बिस्तर पर चिपके हुए लेटे थे। अम्मी की ब्लाउस के हुक खुले हुए थे और मेरे होने वाले ससुर उसमें मुँह डालकर मेरी अम्मी की चूचियाँ चूस रहे थे। उन्होंने चूचियाँ ब्रा से बाहर निकाल रखी थी।

अम्मी सीइइइइइइइ उइइइइइइ कहे जा रही थी। अब ससुर ने अपना पजामा निकाला और वो चड्डी नहीं पहने थे। उफफफ क्या काला सा बहुत मोटा लंड था। मेरे अब्बा से भी ज़्यादा ही मोटा और लम्बा था। अम्मी बड़े प्यार से उनका लंड पकड़ी और सहलाने लगी और बोली: उफफफ कितना मिस करती हूँ इसको। आऽऽऽहहह कितना गरम है । इसको अंदर डालिए भाई जान बहुत दिन हो गए इसको लिए हुए।

ससुर: सच में मैं भी तुम्हारी बुर को बहुत याद करता हूँ। वो अम्मी की साड़ी उठाकर उनकी जाँघें सहलाते हुए अम्मी की बुर सहलाने लगे। अम्मी पैंटी नहीं पहनती थीं। अब वो उठे और अम्मी को बोले: लौड़ा चूसोगी नहीं क्या?

अम्मी किसी भूक़े की तरह उनके लौड़े पर टूट पड़ी और उसे चूसने लगी। ससुर: आऽऽऽऽऽहहह ह्म्म्म्म्म्म कहकर उसके मुँह को अपने लंड पर दबाने लगे। फिर वो बोले: चलो अब चोदता हूँ। अम्मी ने लौड़े से मुँह हटाया और सीधे लेट गयीं और अपने घुटने मोड़ कर अपनी जाँघें फैला दीं। ससुर उसमें अपना मुँह डाले और थोड़ी देर बुर चूसे और अम्मी की सिसकियाँ मानो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थीं। अब वो अपना लंड अम्मी की बुर में डाले और उनको बेतहाशा चोदने लगे। अब अम्मी भी उइइइइइइ आऽऽऽहहह करने चुदवाने लगी। क़रीब आधे घंटे की रगड़ाई के बाद वो दोनों शांत हुए। मेरी बुर पूरी गीली हो चुकी थी। अब अम्मी को चूमकर वो बोले: आह बहुत दिन बाद मिली तुम। पिछली बार हमारी चुदाई तुम्हारे घर में हुई थी एक साल हो गए उस बात को।

अम्मी: हाँ आपने मुझे और आयशा के अब्बा ने सलमा भाभी को चोदा था। ये तो अब भी सलमा को याद करते हैं।

मैं सन्न रह गयी कि मेरी सास भी मेरे अब्बा से चुदवा चुकी है।

ससुर: वैसे आयशा भी मस्त जवान हो गयी है। क्या छातियाँ है उसकी , बिलकुल तुम पर ही गयी हैं। वो अम्मी की छातियाँ दबाकर बोले।

अम्मी: इसलिए तो मैं उसकी शादी कर रही हूँ। कहीं बाहर वालों के चक्कर में ना पड़े और शादी के बाद उसका शौहर उसका ख़याल रखे।

ससुर आँख मारकर: हाँ हाँ क्यों नहीं असलम भी रखेगा और हम भी रखेंगे।

अम्मी: पहले असलम को अच्छे से सुहागरत और हनीमून मना लेने देना। फिर आप उसको जो करना है , बाद में ही करना। यह नहीं कि दोनों बेटा और बाप पहले दिन से ही उस पर टूट पड़ो।

ससुर अम्मी की जाँघ सहलाकर: अरे ऐसा ही होगा। पहले असलम से तो ठीक से काम बना ले वो। हम बाद में अपना काम बना लेंगे। अब बच्ची को कोई डराना थोड़े ही है।

मैं हैरानी से सुन रही थी किमेरा इस घर में क्या होने वाला है और वो भी अम्मी की मर्ज़ी से ।

तभी सलमा अंदर आयी और बोली: अगर आप लोगों का हो गया हो तो चलो शाम की सगाई की तय्यारियाँ कर लें?

वो दोनों हँसे और बाथरूम से फ़्रेश होकर सलमा के सामने ही कपड़े पहने और फिर बाहर निकल गए। मैं भी वापस असलम और अजमल के वापस आयी। वहाँ वो दोनों सो गए थे। खाना खाकर लेटे थे सो शायद नींद आ गयी। मैं बाहर आके बड़े हाल में गयी तो वहाँ ससुर और सास और अम्मी थे। वो सगाई की थाल सज़ा रहे थे। मुझे देखकर ससुर बोले: आओ बेटा मेरे पास आओ और यहाँ बैठो। मैं उनके पास बैठ गयी और वो मुझसे स्कूल की और मेरे शौक़ वगेरा की बातें करने लगे। मैंने देखा कि बात करते करते वो मेरी चूचियों को घूरने लगते और मेरी सलवार में से मेरी जाँघों की शायद गोलाइयों का अन्दाज़ लगा रहे थे। मेरी आँखें भी उनकी पजामा में से उनके उभार की ओर चली जाती थी।

शाम हुई और हमारी सगाई भी हो गयी। अब जब हम घर जाने के लिए निकले तो पूरा परिवार हम माँ बेटी तो छोड़ने बाहर तक आया। दरवाज़ा छोटा सा था। सबके साथ होने के कारण भीड़ सी हो गयी थी। तभी मैं जब बाहर निकल रही थी तो मैंने महसूस किया कि एक हथेली मेरे एक चूतर को दबोच कर दबा रही है। मैं उफफफ करके पीछे मुड़ी और मेरे ससुर की नज़र मुझसे मिली। वो मुस्कुरा रहे थे और चूतर दबाए जा रहे थे। मैं जल्दी से बाहर आयी और वो मेरी चूतर से हाथ हटा दिए ।

मैं ऑटो में बैठ कर सोची कि क्या ससुराल है जहाँ ससुर ज़्यादा बेताब है दूल्हे से ,दुल्हन की लेने के लिए।

शिवा अबतक बहुत उत्तेजित हो चुका था , फ़ोन पर ये सब सुनकर। उधर मालिनी का हाथ साड़ी के ऊपर से अपनी बुर पर जा चुका था।

आयशा ने मालिनी की हालत देखी और मुस्कुराकर उसकी बुर को दबाकर बोली: कुछ करूँ क्या इसको?

मालिनी: आह अभी नहीं अभी कहानी आगे बताओ।

 
आयशा बोले जा रही थी------

हम घर पहुँचे तो अब्बा मेरी सगाई का सुनकर थोड़ा सा दुखी दिखे। उनका माल जो हाथ से निकला जा रहा था। वो अम्मी के सामने मेरे को प्यार से गले लगाकर बोले: बेटी बहुत बहुत बधाई। और अम्मी के जाते ही बोले: बेटा मेरा क्या होगा?

मैं: अब्बा मैं आती रहूँगी ना । वैसे भी असलम तो दुबला पतला है। पता नहीं उसमें आपकी वाली बात होगी भी नहीं?

अब्बा ख़ुश होकर: ये ठीक है बेटी, इस तरह से ठीक रहेगा। कौन सा दूर है तुम्हारी ससुराल। अच्छा आज रात जो आऊँगा मैं तुम्हारे पास ठीक है?

मैं शर्माकर: ठीक है अब्बा।

वैसे भी मैं ख़ुद बहुत गरम थी अम्मी और ससुर की चुदाई देख चुकी थी ।

रात को अब्बा आए तो मैं धुत्त सो रही थी। वो मेरे पास आकर लेट गए। मैंने ख़ुद ही सिर्फ़ एक नायटी पहनी थी। ब्रा पैंटी उतारकर सोयी थी ताकि मेरे अब्बा को सब काम का सामान आराम से हासिल हो जाए। अब्बा भी मज़े से मेरी चूचियों को दबाए और मेरे होंठ चूमने लगे। मैं हड़बड़ाकर उठी: ओह अब्बा आप? मैं तो डर गयी थी।

अब्बा: हम्म वाऽऽऽऽह ब्रा निकाल के सोई हो। मस्त लगते हैं बेटी तेरी चूचियाँ । उफफफफ कितने सख़्त और मासूम सी हैं । फिर मेरी नायटी ऊपर करके वो मेरे चूतर सहलाते हुए बोले: आऽऽऽऽह पैंटी भी निकाल रखी है। लगता है अब्बा के लंड के लिए तय्यार बैठी हो।

मैं: आप तो बोले थे ना कि रात को आओगे। इसीलिए सब निकाल कर इंतज़ार करी और नींद आ गयी।

अब्बा: आह बेटा मस्त जवानी है तेरी, चल अब नायटी भी निकाल और मुझे अपनी जवानी दिखा। मैं हँसकर अपनी नायटी उतारी और अब्बा की आँखें चमक उठीं। वो मुझे लिटाकर मेरे दूध चूसने लगे और मेरे निपल्ज़ को जीभ से मस्त करने लगे। मेरी सिसकियाँ निकलने लगीं। बाद में मुझे चोदते हुए वो बड़बड़ा रहे थे : आऽऽह क्या टाइट बुर है बेटी। हाऽऽऽय तू अपनी बुर अब अपने शौहर को देगी। आऽऽऽऽह । मेरा क्या होगा? ह्म्म्म्म्म । वो तेरा ससुर भी बड़ा चोदू है। वो तुझे बहुत मज़ा देगा । ह्म्म्म्म्म ।

मैं: आऽऽह अब्बाआऽऽऽऽ और ज़ोर से चोओओओओओओओओदो । आऽऽह क्या ससुर से भी चुदवाना होगा? उइइइइइइइ ।

अब्बा: हाँ बेटी वोहि तो असली मज़ा देगा। वो लड़का तो अभी नादान ही होगा। पर उसका बाप महा चुदक्कड है।

मैंने तो उनको अम्मी को चोदते देखा ही था, पर अनजान बन के बोली: अब्बा आपको कैसे पता?

अब्बा थोड़े से हड़बड़ाए और फिर बोले: बेटा वो पता चल जाता है । ऐसी बातें छुपती नहीं।

मैं समझ गयी की वो बात को घुमा गए हैं। वो अम्मी और मेरे ससुर की चुदाई की बात मुझसे छिपाना चाहते हैं पर मुझे तो सब पता ही था।

अब वो बोले: अब बातें बंद करो और चुदाई का मज़ा लो।

अब वो धक्के मार मार कर मुझे लस्त कर दिए और मैं पूरी तरह से शांत होकर पड़ी रही। अब्बा मेरी बुर की सफ़ाई किए और मुझे प्यार करके सोने अम्मी के कमरे में चले गए।

कुछ दिनों में मेरी शादी हो गयी। और मैं असलम की दुल्हन बन गयी। सुहाग रात को असलम ने मुझे तीन बार चोदा और मैं एक बार झड़ी। अभी वो सच में नादान था। पर मैं भी नादान होने का नाटक कर रही थी। अब समय ठीक ही चलने लगा। धीरे धीरे वो सीखने लगे और अब सच में मुझे मज़ा आने लगा था उनके साथ। ससुर जिनको अब मैं पापा कहूँगी वो भी मुझे घूरते रहते थे और मौक़ा मिलता तो मेरी बाँह सहला देते और कभी पीछे हाथ फेर देते और ऐसा जताते जैसे कुछ हुआ ही नहीं। अम्मी भी मेरा पूरा ध्यान रखती थी। शादी को अभी दो महीने ही हुए थे कि असलम को दुबई में एक जॉब मिल गया। वो बहुत ख़ुश था और मैं परेशान। मैं बोली कि मैं आपके बिना कैसे रहूँगी? तो वो बोले कि मैं हर दो महीने में आता रहूँगा । अच्छा काम है और पैसे भी ज़्यादा हैं। मैं मन मसोस कर रह गयी और वो दुबई चला गया। अब पापा की आँखों में वासना साफ़ दिखाई देती थी। तीन चार दिन बाद ही मैं चुदासि हो गयी तो मुझे अब्बा की याद आयी। मैं मायके जाने का कह कर अपने घर गयी। मेरा मक़सद तो अब्बा से चुदवाना ही था। और अब्बा भी मुझे देखकर बहुत ख़ुश हुए और अम्मी के सामने ही लिपटा कर बोले: तो हमारी बेटी उदास है, दामाद दुबई चला गया है इसलिए ना?

अम्मी: और क्या कोई ऐसे बीवी को २ महीने छोड़ कर भला जाता है। आप तो मुझे दो दिन के लिए भी मायके नहीं जाने देते थे।

अब्बा मुझे अब भी लिपटा हुए थे और मेरे गालों को चूमकर बोले: बेटी मैं हूँ ना कोई समस्या नहीं होगी।

तब अम्मी जो बोलीं वो मुझे हैरत में भर गया। वो बोलीं: हाँ बेटा अभी जितने दिन यहाँ है तेरे अब्बा तेरे साथ सो जाएँगे। ठीक है ना?

मैं शर्म से लाल होकर बोली: अम्मी क्या बोल रही हो?

वो हँसकर बोलीं: हा हा मुझे सब पता है । हम दोनों एक दूसरे से कुछ नहीं छिपाते। और हाँ तुम जब ससुराल वापस जाओगी ना तो मैं असलम के अब्बा से कह दूँगी कि वो भी तुम्हारा ख़याल रखेंगे।

अब्बा: हा हा उसका कल फ़ोन आया था , वो बोला कि बहु बहुत परेशान है असलम के जाने के बाद । वो कल रात तुम्हारे कमरे में झाँका था जब तुम अपनी बुर में ऊँगली कर रही थी।

मैं शर्मा कर बोली: छी बहुत गंदे आदमी है । कोई बहु के कमरे भी झाँकता है क्या?

अब्बा: बेटा असलम के बिना तू बहुत प्यासी हो जाएगी। तेरा ससुर तुझे बहुत मज़ा देगा। उससे चुदवाने में कोई हर्ज नहीं है। तेरी अम्मी उसकी चचेरी बहन है , वो भी उससे चुदवा लेती है। अब तुमसे क्या छिपाना मैंने भी तेरी सास को चोदा हुआ है। इस हमाम में हम सब नंगे हैं बेटी।

अब सब हँसने लगे। अब अब्बा मेरी चूचि दबाकर अम्मी से बोले: देखो असलम ने इसकी चूचियों को काफ़ी बड़ा कर दिया है।

अम्मी: आपने भी तो मेरे संतरों को आम बना दिया था एक साल में ही चूस चूस कर। वो भी चूसता होगा हैं ना बेटी?

मैं: उगफफ अम्मी उनका ध्यान तो पूरे टाइम मेरी चूचियों पर ही रहता है। या तो चूसेंगे या दबाएँगे। बहुत प्यार करते हैं मुझे।

अब्बा भी मेरी चूचि दबाकर बोले: मैं भी तो तुमको बहुत प्यार करता हूँ।

मैं तीन दिन मायके में रही और रोज़ रात को अब्बा मेरी दो बार लेते थे । फिर अम्मी ने बताया कि मायके से बुलावा आया है। मैं वापस जाने लगी तो अम्मी और अब्बा दोनों ने बहुत प्यार किया और अम्मी बोली: बेटी तेरे ससुर आज रात को तेरे साथ सोएँगे। उनका ख़याल रखना। अब जब तक असलम वापस नहीं आता वो तेरा पूरा ख़याल रखेंगे। हमारी बात हो गयी है। और हाँ तेरी सास और देवर शादी में जाएँगे तो ससुर का अच्छी तरह से ख़याल रखना।

मैं शर्मा कर और मन ही मन ख़ुश होकर हाँ बोलकर ससुराल चली गयी। वहाँ सिर्फ़ पापा ही घर पर थे। वो मुझे देखकर बहुत ख़ुश हुए और बोले: बहु अच्छा किया वापस आ गयी वरना मुझे खाना भी ख़ुद ही बनाना पड़ता।

शाम हो गयी थी सो मैंने खाना बनाया और मीठा भी बनाया। पता नहीं मुझे क्यों लग रहा था कि आज मेरी दूसरी सुहागरात है। मेरी बुर में खुजली मची हुई थी और मेरे निपल उत्तेजना से तने हुए थे।

मैं पसीना पोंछते हुए किचन से बाहर आयी और बोली: पापा खाना लगा दूँ क्या?

पापा मुझे बड़े प्यार से देख कर बोले: बेटा इतनी जल्दी क्या है? थोड़ा दो गिलास पानी और बर्फ़ लाओ।

मैं समझ गयी की आज शायद पीने का प्रोग्राम बना रहे हैं। पर दो गिलास क्यों?

मैं सब ले आइ और वो एक बोतल खोले जो कि मुझे बाद में पता चला की व्हिस्की थी। फिर उन्होंने दो पेग बनाए और मुझे अपने पास बैठने का इशारा किया। सोफ़े में हम अग़ल बग़ल बैठ गए। वो मुझे एक पेग दिए। मैंने मना किया: पापा मैं ये कभी नहीं ली हूँ।

पापा: अरे आज तुम कई चीज़ पहली बार लोगी। चलो ये ले लो। बहुत मज़ा आएगा।

मेरे मना करने पर वो नहीं माने और मुझे एक घूँट लेना ही पड़ा। मैं: उफफफ पापा ये तो बहुत कड़वा है।

पापा: बेटा एक दो घूँट के बाद स्वाद लगने लगेगी। पियो और पियो।

मैं मना करते करते पूरा पेग पी गयी और अब मुझे नशा आने लगा। मैं: पापा अब बड़ा अच्छा लग रहा है।

पापा: मैंने कहा था ना ? अब मज़ा लो और वो एक पेग और बना दिए। अब वो बोले: बेटा असलम की याद तो आती होगी ना?

मैं: जी पापा आती है।

पापा: तभी उस दिन रात को नीचे ऊँगली कर रही थी?

मैं: छी पापा क्या आप मेरे कमरे ने झाँकते रहते हो?

पापा: वो क्या था बेटा उस रात मैं बाथरूम जा रहा था तो तुम्हारे कमरे से आऽऽह की आवाज़ आयी तो मैं सोचा कि तुम किसी तकलीफ़ में तो नहीं हो। बस यही देखने खिड़की से झाँका और तुमको अपनी बुर में ऊँगली करते देखकर बहुत दुख हुआ। बेटा आख़िर हम मर गए हैं क्या? एक बार बोलती तो असलम से ज़्यादा प्यार कर देते।

मैं भी नशे में बेशर्म हो गयी थी: पापा आपको ख़ुद सोचना चाहिए था अब कोई बहु अपने मुँह से ख़ुद थोड़ी ना बोलेगी।

वो ख़ुश होकर: आह बेटी दिल ख़ुश कर दिया। आओ मेरी गोद में बैठो और देखो आज पापा कैसे तुम्हें प्यार करता है। मैं उनके गोद में बैठी। मैंने सलवार कुर्ता पहना था और वो बनियान और लूँगी में थे। जैसे ही उनकी गोद में बैठी उनका खूँटा मेरी गाँड़ में चुभा और मैं उइइइइ कर उठी।

आयशा बोले जा रही थी और मालिनी सुनते हुए बीच बीच में अपनी बुर खुजा लेती थी। आयशा हँसकर: क्या हुआ मालिनी बुर खुजा रही है? चूस दूँ क्या उस दिन जैसे?

( शिवा का भी लंड तना हुआ था और वो अपने कैबिन में मूठ्ठ मार रहा था फ़ोन पर सब सुनकर)

मालिनी: अभी नहीं , जब तुम्हारी कहानी ख़त्म होगी उसके बाद हम ६९ करेंगे। जैसे तुम अपने सास के साथ करती थीं।

आयशा हँसी और उसकी चूचि मसल कर बोली: ठीक है आगे का सुनो-----

 
आयशा बोले जा रही थी-------

वो मुझे गोदी में बिठाकर प्यार करते हुए मेरे गाल चूमने लगे। उनके हाथ मेरे बदन में घूमने लगे थे। वो मेरे कमर को सहलाकर मेरे कंधे और होंठ चूमने लगे। शराब ने मुझे भी बेशर्म कर दिया था । मैं भी उनका पूरा साथ देने लगी। वो मेरा होंठ चूसते हुए मेरे मुँह में अपनी जीभ डालकर मेरे को गरम करने लगे। मैं भी मस्ती से उनकी जीभ चूसने लगी। उनका हाथ अब मेरी चूचियों पर आ गया था और वो मुझे बोले: बेटा चलो बिस्तर पर चलते हैं।

मैं उठी और उन्होंने मेरी गाँड़ को दोनों पंजों में दबोच लिया और मस्ती से दबाकर बोले: बेटा बहुत मस्त माल हो गयी हो। आज तो मज़ा ही आ जाएगा।

कमरे में वो मेरा कुर्ता और सलवार उतारे और मुझे ब्रा और पैंटी में देखकर बोले: सालों के बाद ऐसी मस्त जवानी का दीदार कर रहा हूँ। वो मेरे बदन को आगे और पीछे से देखकर मस्ती से भर गए और अपनी बनियान उतार दिए। बहुत घने बाल थे उनकी छाती पर। मस्त मर्दाना बदन था। मेरी बुर पानी छोड़ने लगी। अब पापा ने मेरी ब्रा खोली और खड़े खड़े ही मेरी चूचियाँ देखकर बोले: उफफफ क्या मस्त दूध हैं तेरे । लगता है असलम ने ख़ूब दबाकर चूसा है। अब वो ख़ुद उनको दबाने लगे और उन पर चुंबनों की बारिश करने लगे। मैं भी गरम होकर उनकी लूँगी खींचकर उतार दी। उनकी चड्डी में से उनका लौड़ा बाहर आकर एक जाँघ पर सीधा लेटा हुआ था। मैंने चड्डी में हाथ डाला और उनके गरम मोटे लौड़े का अहसास करने लगी। उफफफफ क्या मस्त लौड़ा था। अब्बा से भी बड़ा था उनका। अब वो मुझे बिस्तर पर लिटा दिए और मेरे ऊपर आकर मुझे चूमने लगे। बार बार वो मुझे बोल रहे थे: आऽऽह क्या मस्त जवानी है तुम्हारी । जी करता है खा जाऊँ। बेटी चूचि पिलाओ ना। मैं भी मस्ती में आकर एक चूचि को हाथ में ली और उनके मुँह में दे दी। वो उसे चूसने लगे। मैंने हाथ हटा लिया तो बोले: बेटा अपने हाथ से ही पिलाओ।

मैं भी अब मस्त हो चुकी थी। मैंने अपना एक हाथ अपनी चूचि पर रखे रहा और उनको पिलाती रही। अब वो बोले: बेटी अब दूसरी पिलाओ। तो मैंने अब दूसरी चूचि भी अपने हाथ से पकड़कर उनके मुँह में दे दी। वो क़रीब २० मिनट मेरी चूचियाँ चूस चूस कर उनको लाल कर दिए। अब तक मैं बहुत गरम हो चुकी थी। मैंने ही उनका लौड़ा मसलना शुरू का दिया। वो पागल हो चुके थे मज़े से । अब वो नीचे आकर मेरे पेट को चुमें और मेरी नाभि में भी जीभ फिराने लगे। फिर नीचे आकर मेरी जाँघें सहलाए और उनको भी चूमा। मैंने जोश में ख़ुद ही अपनी जाँघें फैला दी और अपनी बुर उनको दिखाने लगी। वो भी मस्ती से बुर पर हाथ फेरे और बोले: आह क्या मस्त चिकनी बुर है। क्या मस्त फूली हुई है। फिर वो उसे चूमने लगे और जल्द ही जीभ घुसेड़कर मुझे सिसकियाँ लेने पर मज़बूर कर दिए।

अब मैं अपनी गाँड़ उठाकर उनकी जीभ का मज़ा ले रही थी। तभी वो बोले: बेटी मुझे चुदाई के समय गंदी बात करना अच्छा लगता है। तुम बुरा तो नहीं मानोगी ना?

मैं: आऽऽह पापा बस अब डाल दो । बातें बाद में कर लेना। अच्छी बात करो या गंदी बात बस मुझे अभी चोद दो।

पापा : आऽऽह बेटी सच कह रही हो। अब वो अपना लौड़ा मेरी बुर में रखे और हल्के से दबाकर अपना मोटा सुपाड़ा मेरी बुर के अंदर डाल दिए । मेरी आऽऽह निकल गयी और वो बोले: बेटी रुकूँ या डालूँ?

मैं : आऽऽऽऽऽह डालो पापा डालो। पूरा अंदर डाल दो। आपका तो बहुत मस्त है।

अब वो पूरा अंदर डाले और फिर मेरी चुदाई में लग गए । वो मेरे होंठ चूसते हुए मेरी चूचियाँ मसल रहे थे और मस्त धक्के मार रहे थे। अब वो बोले: बेटी गंदी बात करूँ।

मैं अब नीचे से अपनी गाँड़ उछालकर बोली: हाऽऽऽय जो करना है करो। बस ऐसे ही चोदते रहो।

पापा: आऽऽह बेटी बहुत मज़ा आ रहा है। आह कैसा लग रहा है बेटी। मज़ा आ रहा है?

मैं: हाँ पापा बहुत मज़ा आ रहा है। वो अब बहुत अंदर तक लंड डालकर पूरा दबाते थे। मेरी बुर बहुत बुरी तरह से खुल चुकी थी।

वो: असलम भी ऐसा ही चोदता है क्या? आह्ह्ह्ह्ह।

मैं: आऽऽह पापा वो तो अभी सिख रहे हैं। आप तो पक्के खिलाड़ी हो।

वो: ह्म्म्म्म्म ऐसा लग रहा है जैसी मेरी बहु रँडी है। मादरचोद कैसे गाँड़ उठाकर चुदवा रही है। ह्ह्ह्ह्ह्ह्म्म्म साली छिनाल कितनो से फडवा चुकी है रँडी साली।

मैं एक मिनट के लिए हक्की बक्की रह गयी कि पापा को ये अचानक क्या हो गया है। फिर मैं बोली: आऽऽऽऽह पापा आप बहुत पक्के चुदक्कड हो जो अपनी बहु को भी नहीं छोड़ा । आऽऽहाह और ज़ोर से करो पाआऽऽऽऽऽपा।

वो: साली माँ और बेटी दोनों रंडियां हैं। आऽऽऽऽह क्या चुदवाती हैं दोनों?

मैंने नाटक करते हुए कहा: आऽऽऽह आपने अम्मी को भी किया है। हाऽऽऽऽऽऽऽय ।

वो: अरे वो तो पक्की रँडी है। साली मज़े से चुदवाती है। आऽऽऽहहह ।

अब मैं रुक नहीं पा रही थी सो चिल्लाई: आऽऽऽऽह पाआऽऽऽपा मैं तो गयीइइइइइइइ।

पापा भी जल्दी ही हम्म कह कर झड़ गए।

अब पापा ने बड़े प्यार से मेरी बुर को कपड़े से पोंछा और बोले: बेटी मैं तुझे गालियाँ दे रहा था, सॉरी । मैं असल में जब बहुत गरम हो जाता हूँ ना तो ऐसे ही गालियाँ बकने लगता हूँ।

मैं : कोई बात नहीं पापा। मुझे बुरा नहीं लगा।

उसके बाद थोड़ी देर आराम करके अब्बा ने मुझसे लौड़ा चूसवाया और फिर उलटा लिटा के मेरे पिछवाड़े को उठाकर वहाँ मस्ती से दबाए और गाँड़ के छेद को भी जीभ से कुरेदे। मैं उफफफफ कर उठी। फिर वो मेरी बुर भी चाटे और उसकी अवस्था में पीछे से अपना लौड़ा मेरी बुर में डालकर मेरी चुदाई में लग गए। इस बार मैं दो बार झड़ी और वो एक बार झड़े।

अगले दिन वो मेरी गाँड़ मारे और मैं एक दिन पूरा ठीक से चल भी नहीं सकी। वो मेरी गाँड़ के दीवाने हो गए थे। अब वो रोज़ मेरी आगे और पीछे से चुदाई करते। ये सिलसिला तब तक चला जब तक मेरी सास और देवर वापस नहीं आ गए।

मेरी सास और मैं जब अकेले थे किचन में तो सास बोली: तो पापा से मज़ा ले लिया ना?

मैं शर्मा कर बोली: जी अम्मी । अब तक मैं भी समझ गयी थी कि यहाँ कोई छिपाकर कुछ नहीं होता।

वो हँसी: तो कौन ज़्यादा मज़ा देता है असलम या पापा?

मैं: दोनों । पर असलम तो पता नहीं कब आएँगे?

अम्मी: तो ठीक है ना पापा का लेती रह। क्या समस्या है?

मैं: और अम्मी आपका क्या?

अम्मी हँसकर: अरे वो हम दोनों को संभाल लेंगे। तू क्यों फ़िक्र करती है। तभी पापा अंदर आए और बोले: क्या बातें कर रहीं हैं सास बहु।

अम्मी हँसकर: आपकी तारीफ़ कर रहीं हैं, बुराई नहीं कर रही हैं। बहु आपकी चुदाई की दीवानी हो गयी है ,ऐसा बोल रही है।

मैं शर्माते हुए बोली: हाय अम्मी आप कुछ भी बोल रहीं हैं। इस पर पापा और अम्मी हँसने लगे।

पापा ने हाथ बढ़ाकर अम्मी को पीछे से कसकर पकड़कर कहा: बड़े दिनों बाद आइ हो। बहुत याद आती थी तुम्हारी। ये कहते हुए मेरे सामने ही उनकी दोनों चूचियाँ दबाकर अपना लौड़ा उनकी सलवार के ऊपर से ही उनकी गाँड़ में दबाने लगे। मैं शर्माकर बाहर जाने लगी तो मेरा हाथ पकड़कर बोले: अरे बहु कहाँ जा रही हो? अब वो मेरी भी एक चूचि दबाने लगे और बोले: आज सास बहु को एक साथ चोदूँगा, ठीक है ना?

अम्मी हँसकर: ठीक है चोद लीजिएगा। मगर अभी तो खाना बनाने दीजिए ना।

वो हँसे और हम दोनों के चूतर दबाकर बाहर चले गए। अब हम दोनों भी हँसने लगे। उस रात पापा ने मेरी और अम्मी की एक ही बिस्तर पर ली। क्या मज़ा आया था उस रात। पहले उन्होंने अम्मी की ज़बरदस्त चुदाई की। फिर मेरे ऊपर आके मुझे भी चोदे। असलम के वापस आने का समय हुआ तो मैं पापा से बहुत मज़े ले चुकी थी।

जिस दिन असलम वापस आने वाले थे पापा ने उसके एक रात पहले मुझे दो बार चोदा। सुबह वो बोले: बेटा अब असलम के साथ पूरा मज़ा करना। उसे भी तो बहुत प्यास लगी होगी तुम्हें चोदने की। ख़ूब मस्त करना उसको। ठीक है ना? वैसे उसे पता चल ही जाएगा कि तुम चुदवा रही हो क्योंकि तुम्हारी बुर अब काफ़ी खुल गयी है। पहले बहुत टाइट होती थी ना। और ये भी तो अब बड़े हो गए हैं वह मेरी चूचि दबा कर बोले।

मैं मस्ती से उनके लौड़े को लूँगी के ऊपर से दबाकर बोली: पापा मैं इसे भी ख़ुश कर दिया कर दिया करूँगी जब असलम घर से बाहर जाया करेंगे।

पापा मुझे अपनी बाहों में भरकर बोले : क्यों नहीं बेटा । फिर वो मेरे होंठ चूस कर मस्त हो गए।

आयशा देखी कि मालिनी अब मस्त होकर अपनी बुर खुजाए जा रही थी तो वो उसकी जाँघ के ऊपर हाथ रख कर बोली: बहुत खुजा रही है ? चलो आओ मस्ती करते हैं। वो उसका हाथ पकड़कर उठायी और बेडरूम में ले गयी। जाते जाते वो टेलेफ़ोन उठा ली और उसे बेड के साथ वाले टेबल पर रखा ताकि शिवा उनके सेक्स का भी मज़ा ले ले।

( उधर शिवा आयशा की सेक्सी कहानी सुनकर एक बार झड़ चुका था। पर वो अभी भी अपना कड़ा लौड़ा दाबकर मूठ्ठ मारे जा रहा था। )

अब आयशा ने मालिनी के होंठ पर अपने होंठ रखे और वो दोनों एक दूसरे के चुम्बन में डूब गए उसके हाथ मालिनी की साड़ी खोलने लगे। अब वो ब्लाउस भी खोली और पेटिकोट का नाड़ा खोली और अब मालिनी ब्रा और पैंटी में थी। वो ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाके उनको चूमने लगी। उसने अपने कपड़े भी उतारे और अब वो मालिनी को लिटाकर उसके ऊपर आ गयी और उसको चूमने लगी। मालिनी के हाथ भी उसकी पीठ पर दौड़ रहे थे। आयशा ने उसकी ब्रा खोली और और उसकी चूचियाँ दबाने लगी और मुँह में लेकर चूसने भी लगी। अब मालिनी उइइओइइइइइ कहकर उत्तेजित होकर उसका सिर अपनी चूचियों पर दबाने लगी। अब उसने भी आयशा की ब्रा के हुक खोले और उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को सहलाने लगी। उग्ग्फ़्फ़्फ़्फ़ कैसा अजीब अनुभव है ये तो – वो सोची। अब आयशा उठी और अपने दूध हाथ में पकड़कर उसके मुँह में दे दिया। वो अब मस्ती से सिसकियाँ भरने लगी। फिर वो अपने दूध मालिनी के मुँह में देकर उससे मस्ती से चूसवायी। अब वो नीचे होकर उसके पेट और नाभि को चुमी और अब पैंटी में मुँह डालकर बोली: उफफफ क्या मस्त गीली हो गयी है तुम्हारी पैंटी । और वो पैंटी को चाटने लगी। अब वो उसकी पैंटी उतारी और अपना मुँह उसकी बुर में डालकर बोली: उफफफ क्या मस्त गंध है ह्म्म्म्म्म्म्म। अब वो उसकी बुर में दो ऊँगली डाली और अंदर बाहर करने लगी। मालिनी बुरी तरह उत्तेजित होकर आऽऽऽहहह करने लगी। थोड़ी देर में वो उसकी बुर चाटने लगी। अब मालिनी उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽ कहकर अपनी गाँड़ उछालकर मस्ती से मज़े लेने लगी।

( शिवा को मालिनी को आहें सुनाई दे रही थीं , वो पागल सा हो रहा था और ज़ोर से मूठ्ठ मारने लगा।)

जल्दी ही आयशा उठी और अपनी पैंटी निकाली और घूमकर मालिनी के ऊपर ६९ की पोज़ीशन में आ गयी। मालिनी की आँखों के सामने आयशा की खुली हुई बुर थी। उसने पहली बार किसी की बुर इतने पास से देखी थी। वो भी उसको गंध से मस्त होकर उसे सहलाने लगी। अब उसने भी २ उँगलियाँ अंदर डालीं और पूरी गीली बुर में उसे अंदर बाहर करने लगी। फिर उसने भी अपना मुँह उसकी गुफ़ा में डाल दिया और उसको चूसने लगी। उसके सामने उसकी फूली हुई बुर थी और वो अब जैसे आयशा उसकी क्लिट के साथ जीभ से खेल रही थी वह भी वैसा ही करने लगी। अब आयशा अपनी गाँड़ नीचे करके अपनी बुर उसके मुँह में दबा रही थी और ख़ुद भी उसकी बुर में मानो घुसे जा रही थी। जल्दी ही दोनों सिसकियाँ लेते हुए झड़ने लगीं।

थोड़ी देर शान्त रहने के बाद आयशा: मज़ा आया जानू?

मालिनी: झूठ नहीं बोलूँगी, मुझे नहीं पता था कि एक औरत दूसरी औरत को इतना सुख दे सकती है। वैसे तुम शिवा से भी ज़्यादा अच्छा चूसती हो?

आयशा हसंकर : और तुम्हारे ससुर से ?

मालिनी: आऽऽऽह वह भी इतना ही मज़ा देते हैं जैसे तुमने अभी दिया। वो भी प्यार से चूसते हैं मेरी बुर।

( शिवा का लौड़ा दूसरी बार पानी छोड़ दिया। )

अब मालिनी बोली: अच्छा चलती हूँ। तुम्हारी बाक़ी की कहानी कल सुनूँगी। ठीक है ना?

आयशा: ठीक है। कल असलम को भी रोक लूँ क्या? तुम्हें मज़ा दे देगा।

( शिवा के कान खड़े हो गए कि मालिनी क्या बोलेगी?)

मालिनी: नहीं अभी उनको बीच में मत लाओ। अगर शिवा बोलेगा कि अदला बदली करनी है तब की तब देखेंगे।

आयशा उसके होंठ चूमकर: ठीक है डॉर्लिंग जैसा तुम चाहोगी वैसा ही होगा।

मालिनी शाम को ६ बजे अपने घर पहुँची तो ससुर चाय बना रहे थे। वो: ओह पापा सॉरी बहुत देर हो गयी।

राजीव ने उसको अपनी बाँह में भरा और प्यार करते हुए बोला: कोई बात नहीं बेटा चाय पीओ। रोज़ तुम बनाती हो तो आज मैं सही। उसमें क्या है?

फिर चाय पीते हुए वो उसकी जाँघ सहलाकर बोला: बेटा आयशा का सामान देख लिया?

मालिनी क्या बोलती? उसने उसका सब सामान देखा और चूसा भी। वो बोली: जी पापा उसके पास अच्छे प्रॉडक्ट्स हैं।

राजीव चाय पीकर उसको गोद में बिठाकर बोला: बेटा आज तुम्हारी गाँड़ में सबसे बड़े साइज़ का नक़ली लंड डालना है। उसके बाद तुम गाँड़ आराम से मरवा लोगी।

मालिनी: ठीक है पापा जैसा आप कहें मैं तय्यार हूँ।

अब राजीव उसे अपने कमरे ने लजाकर उसके कपड़े खोलकर उसको नंगी किया और पेट के बल लिटाया और उसके कमर के नीचे एक तकिया रखा जिससे उसकी गाँड़ ऊपर को उठ गयी। वो अपना डिब्बा लाया और उसमें से सबसे छोटा लंड निकाला और जेली के साथ उसकी गाँड़ में अंदर किया। मालिनी आऽऽहहह पापा कर उठी। इसके बाद वो उसे अंदर बाहर किया ५ मिनट तक। राजीव: बेटा अब ये छोटे वाले से तो दर्द नहीं होता है ना?

मालिनी: नहीं पापा।

इस तरह से वो हर ५ मिनट के बाद साइज़ बड़ा करता गया।

अब वो : बेटा अब सबसे बड़ा डाल रहा हूँ। बताना कैसा लगा?

अब वो धीरे से जेल लगा हुआ ८ इंचि मोटा नक़ली लौड़ा अंदर डाल और मालिनी उइइइइइइ माँआऽऽऽऽ कर उठी। वो: आऽऽऽऽह पापा दुखता है।

राजीव: बस बेटा अभी मज़ा आएगा ।अब वो और जेल लगाकर इसको गाँड़ मारने लगा,नक़ली लौड़े से । अब मालिनी उइइइइइइइ आह्ह्ह्ह्ह उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी।

राजीव ने उसको और ऊपर उठाया कमर से पकड़कर और अपना लौड़ा उसकी बुर में डाल दिया। नक़ली लौड़ा अभी भी उसकी गाँड़ में फंसा पड़ा था। वो उसकी चूचियाँ मसलकर उसे चोदने लगा। मालिनी: आऽऽऽऽऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽपा और ज़ोर से उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ चोओओओओओओओदो आऽऽऽहहह कहकर वो अपनी कमर दबाकर झड़ने लगी। अब राजीव भी उसकी बुर में अपना रस डालकर झड़ गया। बाद में राजीव ने उसकी गाँड़ से नक़ली लण्ड बाहर निकाला और एक शीशा लेकर उसकी गाँड़ का छेद उसकी टाँगे उठाकर उसे दिखाकर बोला: बेटा अब तुम्हारी गाँड़ देखो पूरी खुल गयी है। देखो छेद कितना बड़ा दिख रहा है।

मालिनी ख़ुद अपनी गाँड़ के छेद को आइने में देखकर हक्की बक्की रह गयी। कितना बड़ा सा खुला मुँह दिख रहा था छेद का।

वो बोली: ओह पापा ये तो बहुत खुला दिख रहा है। अब तो आपका मोटा वाला भी चले जाएगा इसमें ।

राजीव: वही तो बेटा कल मैं इसका उद्घाटन करूँगा और इसकी सील तोड़ूँगा।

मालिनी: ठीक है पापा, जैसा आप चाहो। वह उससे चिपट गयी और दोनों एक दूसरे को चूमने लगे।

 
शिवा के आने के पहले मालिनी और राजीव मस्ती करके तय्यार होकर बैठे थे। शिवा आया और बोला: पापा मुझे कल सुबह दो दिनों के लिए मुंबई जाना होगा। वहाँ हमारे सप्लाइअर्ज़ की मीटिंग है जिसमें वो हमको कुछ नए परोडक्ट्स के बारे में बताएँगे।

राजीव अपनी ख़ुशी छिपाकर: हाँ हाँ ज़रूर जाओ बेटा। सबसे मिलोगे तो तुम्हारे ज्ञान में वृद्धि होगी।

मालिनी: पर मैं आपके बिना कैसे रहूँगी? मुझे भी ले चलिए ना?

शिवा: अरे तुम वहाँ क्या करोगी? मैं तो सुबह से शाम तक व्यस्त रहूँगा । तुम होटेल के कमरे में अकेले क्या करोगी?

राजीव: शिवा ठीक कह रहा है बेटा। तुम बोर हो जाओगी।

अब शिवा बोला: ठीक है चलो पापा आज हम सब बाहर खाना खाते हैं।

मालिनी: अरे मैंने खाना बना लिया है। उसका क्या होगा?

शिवा: अरे वो फ्रिज में रखो और चलो बड़ा मूड है बाहर खाना खाने का।

पापा: हाँ चलो बहुत दिन से कोई आउटिंग भी नहीं हुई है।

शिवा: ठीक है मैं नहा लेता हूँ फिर खाना खाएँगे। यह कहकर वह अपने कमरे में आया। आते ही वो खिड़की से हल्का सा पर्दा उठाकर पापा और मालिनी को देखने लगा। वो देखा कि मालिनी भी उठी और उसके पीछे जाने लगी। राजीव ने उसे खींचकर अपनी गोद में बिठाया और उसके होंठ चूमकर बोला: अरे बेटी ऐसा मौक़ा फिर कहाँ मिलेगा। हम दो दिन पति पत्नी की तरह रहेंगे। मज़ा आ जाएगा।

मालिनी हँसकर: तो क्या अभी पति पत्नी की तरह नहीं रहते हम?

राजीव: बेटी रात की चुदाई का अलग ही मज़ा है। और फिर रात भर साथ में सोने को भी मिलेगा। वो बहु की चूचियाँ दबाकर बोला।

मालिनी: आह पापा छोड़िए ना। शिवा रास्ता देख रहे होंगे।

राजीव: और एक बात कल जब तुम्हारी गाँड़ मारूँगा ना, तो एक दिन तुम थोड़ा लँगड़ा कर चलोगी। शिवा रहेगा तो पूछेगा क्या हुआ, अब वो परेशानी भी नहीं है।

मालिनी: पापा आपने तो पूरी प्लानिंग कर ली है। वो भी अपने हाथ को उनकी लूँगी पर रखकर उसके लौड़े को दबाकर मस्त हो गयी।

शिवा सब देख रहा था और सोचा कि कितनी बेशर्मी से अपने ससुर के साथ ये अब पेश आती है। वो अपना खड़ा लंड दबा रहा था।

मालिनी: अच्छा अब छोड़िए ना।

राजीव उसके होंठ चूस कर बोला: और हाँ एक दिन बाई को छुट्टी दे देना। उस दिन मैं तुमको पूरे दिन रात नंगी रखूँगा।

मालिनी हँसकर अपने को छुड़ाईं : मैं नहीं नंगी रहने वाली दिन भर।

राजीव पीछे से बोला: देखेंगे कैसे नहीं रहती हो? और वो हँसने लगा। अब वो भी तय्यार होने चला गया।

शिया मालिनी को आते देखकर बाथरूम में घुस गया और नहाने लगा।

मालिनी ने उसके और अपने कपड़े निकाले और कपड़े उतारे।

शिवा नहाते हुए सोच रहा था कि ये उसका मुंबई वाला प्लान शायद हिट रहेगा। असल में शाम को असलम का फ़ोन आया और वो बोला था: यार आज मालिनी और आयशा ने ६९ किया। तुमने तो सब सुना ही होगा। मुझे कब दिलवा रहे हो मालिनी की?

शिवा: हाँ यार मालिनी तो साली मस्त गरम माल बनती जा रही है। यार मुझे पापा और उसको चुदाई करते देखने की बड़ी इच्छा है।

असलम: अरे वो तो बहुत सिम्पल सी बात है। तू दो दिन के लिए बाहर चला जा और वो दोनों मस्त मियाँ बीवी की तरह रहेंगे और चुदाई करेंगे।

शिवा: ओह पर मैं कैसे देखूँगा?

असलम: इसका भी इंतज़ाम हो जाएगा। मेरे पास एक आदमी है वो पैसे लेगा और दो केम तुम्हारे घर के ड्रॉइंग रूम और बेडरूम में फ़िट कर देगा। तुम अपने लैप्टॉप में सब देख सकते हो। उसको सिर्फ़ तुम्हारे घर में आधा घंटा रहना पड़ेगा।

शिवा: वाह क्या प्लान है। मैं आज रात का ही प्लान बनाता हूँ।

इस तरह शिवा ने प्लान बनाया था कि वो दो दिन के लिए असलम के घर में रहेगा। असलम ने अपना आदमी तय्यार कर दिया था जो कैम फ़िट करेगा जब ये सब खाना खाने बाहर जाएँगे।

ये सब इसी योजना के अनुसार हो रहा था।

शिवा नहाकर बाहर आया और तो मालिनी ब्रा और सलवार में थी और सलवार बदलने जा रही थी। वह मुस्कुरा कर बोला: जान मस्त भर रहा है तुम्हारा बदन। उफफफफ क्या माल होती जा रही हो। वो उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही दबा दिया। फिर उसकी जाँघों को सहलाया और सलवार के ऊपर से उसकी मस्त फूली हुई बुर को दबाकर बोला: हम्म और ज़्यादा फूल गयी है मेरी मस्तानी। फिर हाथ चूतरों पर ले गया और उनको दबाकर बोला: उफफफफ ये भी मस्त होते जा रहे हैं।

मालिनी हँसकर बोली: कल दो दिन के लिए जा रहे हो तो बीवी माल लगने लगी है। वाह ?

शिवा: रानी आज रात को मस्ती से चुदवाना क्योंकि दो दिन वहाँ तो उपवास ही रहेगा।

वो शिवा से लिपट कर बोली: ये भी कोई पूछने की बात है। जी भर के मज़े लेंगे आज रात को। ठीक है ना?

शिवा उसको लिपटाकर : बिलकुल मेरी जान। वो उसके होंठ चूसने लगा जैसे थोड़ी देर पहले उसने पापा को चूसते देखा था।

फिर दोनों तय्यार होकर बाहर आए तो राजीव उनका इंतज़ार कर रहा था। राजीव को आँखों में मालिनी की सुंदरता को देख कर चमक आ गयी। बाहर निकलते हुए उसने मालिनी की कमर में चिमटी काट दी और वो उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी। शिवा ने सब देखा और ना देखने का नाटक किया। उसने देखा कि पापा का हाथ बाहर निकलते समय बहु के मोटे चूतरों को दबा भी रहा था। उसके लौड़े ने सिर उठाना शुरू कर दिया।

वो सब बाहर आकर कर कार में बैठे । फिर वो वापस उतरा और बोला: मैं अपना पर्स भूल गया हूँ। एक मिनट में आया।

उसके जाने के बाद राजीव जो कार में पीछे बैठा था उसने आगे को सीट पर बैठी मालिनी की चूचि दबाकर कहा: रात की कुछ चुदाई की प्लानिंग हुई?

मालिनी हँसकर: आऽऽह पापा ज़ोर से मत दबाओ। हाँ हुई है बोले हैं कि मस्ती से चुदवाना क्योंकि दो दिन उपवास रहेगा। आऽऽऽह बस करिए ना।

उधर शिवा घर के अंदर नहीं गया और योजना के अनुसार उसने घर की चाबी एक सामने रखे गमले के नीचे डाल दी। ताकि वो असलम का आदमी आकर कैम लगा सके। उसने sms कर दिया उस आदमी को ।अब वो वापस आया तो कार में उसे मालिनी की क़ुर्ती उसकी चूचियों के ऊपर से मुड़ी तुड़ि सी दिखी तो वो समझ गया कि पापा ने उसकी चूचियाँ मसलीं है अभी । वो अपने लौड़े में फिर से सरसराहाट महसूस किया। वो कार चलाते हुए साथ बगल में बैठी मालिनी को देखता और मुस्कुरा देता।

रेस्तराँ में तीनो एक गोल टेबल पर बैठे। मालिनी दोनों के बीच में ही बैठी थी। शिवा ने ऐसा टेबल चुना था जो कि थोड़े अंधेरे में था और अलग सा था।

शिवा: पापा बीयर मँगाऊँ क्या?

राजीव: मैं तो विस्की लूँगा।

शिवा: तो मैं भी विस्की ही लूँगा। मालिनी तुम्हारे लिए वाइन मँगाऊँ क्या?

मालिनी: मैंने कभी पी नहीं है। आप लोग लीजिए।

राजीव: अरे बेटी वाइन तो आजकल सब लड़कियाँ लेती हैं। थोड़ा सा ले लो।

मालिनी: ठीक है आप जब इतना बोल रहे हैं तो ले लेती हूँ।

राजीव उसकी जाँघ पर हाथ रख कर दबाया। वो मस्ती से भर गया। शिवा ने सब ऑर्डर कर दिया।

मालिनी ने डरते डरते वाइन चखा और बोली: पापा स्वाद इसका अजीब है। पर वो दो घूँट पी गयी।

शिवा और राजीव भी अपना पेग लगाने लगे। क़रीब दस मिनट तक सब बातें करते हुए अपना पहला पेग ख़त्म किए। मालिनी को हल्का सा नशा सा होने लगा था। अब राजीव उसकी एक जाँघ दबाए जा रहा था। शिवा ने अपना हाथ उसकी दूसरी जाँघ पर रखा और दोनों बाप बेटा उसकी एक एक जाँघ दबाकर मस्त होने लगे। पर दोनों को पता नहीं था कि दूसरे का हाथ कहाँ है। मालिनी भी मस्ती से भरी जा रही थी। अब शिवा ने दूसरा पेग बनाया और पापा को दिया। पर उसने अपने लिए छोटा सा पेग बनाया और पानी मिला दिया। मालिनी भी मज़े से दूसरा गिलास वाइन का पी रही थी। जल्दी ही मालिनी नशे में आ गयी। राजीव भी तीसरे पेग के बाद मस्ती से नशे में आ गया था। शिवा भी अब ऐसे नाटक कर रहा था कि मानो उसे भी चढ़ गयी हो। पर सच तो ये था कि वो पूरे होश में था।

अचानक उसकी नज़र पापा के हाथ पर पड़ी जो कि मालिनी की जाँघ सहला रहा था।

शिवा: पापा मैं ज़रा बाथरूम होकर आता हूँ। वो कहकर लड़खड़ाने का अभिनय करते हुए चला गया।

उसके जाते ही राजीव मालिनी की ओर झुका और उसके होंठ चूम लिया। उसके हाथ अब उसको जाँघों के जोड़ पर आ गए थे और वो उसकी बुर को दबाया और बोला: आऽऽऽऽह बेटा पैंटी नहीं पहनी हो?

मालिनी: नहीं पापा। अब मुझे पैंटी के बिना ही अच्छा लगता है। राजीव ने उसकी सलवार के ऊपर से ही अपनी ऊँगली उसकी बुर में डाली और गीली होती बुर से ऊँगली निकाल कर उसे चाटा। मालिनी भी नशे में अपनी जाँघें फैला दी ताकि ससुर का काम आसान हो जाए। उधर शिवा घूमकर पीछे से आया और चुपचाप पास की टेबल पर बैठकर इन दोनों की हरकत देखने लगा। उसने साफ़ देखा कि कैसे पापा का हाथ उसकी सलवार के ऊपर से उसकी बुर में घुसा हुआ था और कैसे पापा ने अपनी ऊँगली चाटी।

राजीव: बेटी सलवार का नाड़ा खोल दे ना। नंगी बुर सहलाने का मन हो रहा है।

शिवा हैरानी से देखा कि मालिनी ने अपना नाड़ा खोला और थोड़ा सा उठकर शायद सलवार को नीचे खिसकाई ताकि ससुर का हाथ बुर में आराम से चले जाए। शिवा बहुत गरम हो चुका था ये सब देखकर।

अब शिवा को पापा का हिलता हुआ हाथ दिखाई दे रहा था और मालिनी की सिसकियाँ सुनाई दे रही थीं।

अचानक मालिनी बोली: उफफफ पापा हटिए शिवा आते होंगे।

अब राजीव हाथ को बाहर निकाला और उँगलियां चाटने लगा।

अब शिवा आकर मालिनी के साथ वाली सीट पर बैठा और ऐसा दिखाया मानो बहुत नशा हो गया हो।

मालिनी: शिवा देखो थोड़ी सी वाइन बची है मुझे डाल दो ना। बहुत मस्त लग रहा है।

शिवा ने उसके लिए एक और गिलास बनाया। अब वो बोला: पापा आप खाना ऑर्डर कर दो मैं थोड़ा आराम कर लेता हूँ। ये कहकर वो अपनी कुर्सी की पीठ पर अपने सिर को रखा और अधलेटा सा होकर अपनी आँखों में अपनी कलाई रखकर सोने का अभिनय करने लगा।

शिवा को मालिनी ने आवाज़ दी पर वो ऐसा दिखाया मानो सो रहा है। उसकी आँखें उसकी कलाई के पीछे थोड़ी सी खुलीं हुईं थीं। इसका अन्दाज़ ससुर बहु को नहीं था।

राजीव धीरे से बोला: बेटा वो सो गया है तुम ज़रा मेरा चूस दो ना। ये कहकर उसने अपना लंड बाहर निकाला। मालिनी भी मस्ती से भरी थी सो नीचे झुकी और ससुर का लंड चूसने लगी। शिवा को सब साफ़ दिखाई पड़ रहा था और उसका लंड पूरी तरह से तन चुका था। राजीव का भी हाथ उसकी चूची को दबा रहा था और एक हाथ उसकी बुर के अंदर था।

शिवा मज़े लेने के लिए आऽऽऽऽह करा तो मालिनी एकदम से उठी और अपनी सलवार ठीक की। राजीव ने भी अपना लंड ठीक किया। तभी वेटर आया और ऑर्डर लेकर चला गया।

शिवा फिर से सोने का अभिनय करने लगा। अबके राजीव नीचे आकर उसकी सलवार नीचे करके उसकी बुर चूसने लगा मालिनी की धीमे धीमे सिसकियाँ निकल रही थीं।

तभी शिवा ने फिर एक हम्म की आवाज़ निकाली और राजीव उठकर अपनी जगह में बैठ गया। शिवा चाहता था कि दोनों गरम रहें मगर झड़ें ना।

तभी खाना लगा और शिवा भी सबके साथ खाना खाया। वापस जाने के समय भी शिवा लदखड़ाने का नाटक किया और कार पापा ने चलाई। वो पीछे सोने का अभिनय करता रहा। रास्ते में भी मालिनी ने ससुर के लंड को पैंट के ऊपर से सहलाया और वो भी उसकी चूचियाँ दबाता रहा।

घर पहुँचकर शिवा पापा और मालिनी के सहारे से अपने बिस्तर पर पहुँचा और पेट के बल लेटा और सोने का नाटक किया। राजीव : बेटा ये तो लगता है टुन्न हो गया है। तुम कपड़े बदल कर आ जाओ। ये कहकर वो उसकी गाँड़ मसल दिया। मालिनी हँसकर हाँ में सिर हिलाई ।

मालिनी थोड़ी देर शिवा को देखती रही और अपने कपड़े उतारी और पूरी नंगी होकर एक नायटी डाली और अपनी बुर खुजाकर ससुर के कमरे की ओर चली गायी।

उसके बाहर जाते ही शिवा भी उठा और खिड़की से उसको पापा के कमरे में घुसते देखा और जल्दी से आकर खिड़की के परदे को हटाया और अंदर का दृश्य देखकर वो मस्त हो गया।

राजीव बिस्तर पर नंगा पड़ा था और अपना लौड़ा सहला रहा था और वो बोला: बेटा मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था।

मालिनी ने भी अपनी नायटी उतारी और पूरी नंगी अपने ससुर के ऊपर आकर लेट गयी। अब दोनों लम्बे चुम्बन में खो गए।

शिवा को मालिनी के मोटे चूतर दिख रहे थे जो ससुर के लंड पर अपनी बुर रगड़ने के कारण हिलते दिख रहे थे। अचानक वो उठी और अपना सीना ऊपर की और राजीव उसकी चूचियाँ दबाकर चूसने लगा। फिर वो ६९ की पोज़ीशन में आयी और राजीव का लौड़ा चूसने लगी और वो भी उसकी बुर और गाँड़ चाटने लगा।

शिवा को लगा कि वो उत्तेजनावश झड़ ना जाए।

अब मालिनी फिर से उठी और ससुर के लौड़े को अपनी बुर में इस तरह से ली कि उसकी पीठ राजीव के सामने थी। उसकी उछलती चूचियाँ बहुत मादक लग रहीं थीं। राजीव थोड़ा सा उठा और उनको मसलने लगा। अब मालिनी चिल्लाकर उसके लौड़े पर अपनी बुर उठा कर मानो पटक रही थी और चिल्लाई: उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽऽऽपा फ़ाआऽऽऽऽऽऽऽऽडो हाऽऽऽऽऽऽऽययय। वो अपने सिर को ज़ोर ज़ोर से पीछे की ओर करके अपनी मस्ती का इज़हार करे जा रही थी। अब दोनों ह्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगे।

शिवा अपनी बीवी और अपने पापा की चुदाई live देख रहा था । उसने तो प्लान किया था कि वो कैम में देखेगा। पर वाह रे भाग्य यहाँ तो सब कुछ सामने से देखने को मिल गया। अब वो अपने कमरे में आया और बाथरूम में जाकर फ़्रेश होने लगा। उसका लौड़ा अभी भी खड़ा था।

जब मालिनी अपने कमरे में आइ तो शिवा को बिस्तर पर ना देखकर थोड़ा सा घबराई। तभी बाथरूम से शिवा बाहर आया और बोला: अरे तुम कहाँ थीं ?

मालिनी हड़बड़ाकर : वो वो किचन में थी पानी पीने गयी थी।

शिवा : चलो अब मैं अच्छा फ़ील कर रहा हूँ। चलो आओ चुदाई करते हैं।

मालिनी थोड़ा परेशान हुई क्योंकि वो अभी तक बाथरूम नहीं गयी थी। उसकी बुर में पापा का वीर्य अभी भी लगा हुआ था। वो बोली: मुझे पिशाब करना है, मैं अभी आयी।

शिवा मन ही मन मुस्कुराया और बोला: ठीक है आओ ।

मालिनी बाथरूम में जाकर अच्छी तरह से सफ़ाई की और वापस आकर अपनी नायटी उतारकर पूरी नंगी हो गयी जैसे अभी थोड़ी देर पहले ससुर के सामने हुई थी। यहाँ भी बिस्तर पर वही दृश्य था , शिवा पूरा नंगा था और अपना लौड़ा सहला रहा था। वो जानबूझकर पापा की नक़ल कर रहा था मालिनी को परेशान करने के लिए।

मालिनी थोड़ी सी चौकी और फिर वैसे ही उसके ऊपर आकर लेटी जैसे पापा के ऊपर लेटी थी। अब उनके होंठ जुड़ गए और दोनों एक दूसरे की जीभ और होंठ चूसने लगे। मालिनी अब फिर से गरम होने लगी थी। उसने वैसे ही अपना सीना ऊपर किया और शिवा वैसे ही उसकी चूचियाँ दबाकर चूसने लगा। उसके बाद ६९ और उसके बाद उसी आसान में चुदाई। मालिनी को लगा कि वह एक ही पिक्चर को दो बार देख रही है। हीरोइन तो वही है बस हीरो बदल गया है। क़रीब २५ मिनट की चुदाई के बाद दोनों झड़े। मालिनी के सोने के बाद वो उठा और चुपचाप बाहर जाकर गमले के नीचे से चाबी उठा लाया। अब वो ड्रॉइंग रूम में कैम को खोजा। उसे sms आया था कि उसने उसको दीवाल घड़ी के अंदर छुपाया है। वो ध्यान से देखा तो पाया कि सच में घड़ी के अलार्म स्पीकर के साथ वो ऐसा लगा था मानो स्पीकर का ही हिस्सा हो। उसने बताया था कि ऐसा ही एक कैम पापा के कमरे में भी लगा है।

अब वो संतुष्ट होकर लैप्टॉप खोला और उसके द्वारा भेजे हुए लिंक से उसने अपने लैप्टॉप को चेक किया। और उसके सामने ड्रॉइंग रूम में बैठे लैप्टॉप पर ख़ुद की फ़ोटो आ गयी। फिर उसने दूसरा कैम देखा और वहाँ पापा सोते हुए दिख रहे थे।

वो सोचा कि इस बन्दे ने बिलकुल सही काम किया है। अब उसका लंड ये सोचकर खड़ा होने लगा कि अब पापा और मालिनी को वो हमेशा अपनी नज़रों के सामने रख सकेगा

उसने sms करके उस आदमी और असलम को बता दिया कि वो काम ठीक से कर गया है। अब वो मुस्कुराकर अपना लंड दबाकर सोने चला गया। कल सुबह उसे मुंबई जाना था पर असल में वो दो दिन असलम के घर में रहेगा। वह अपनी योजना पर मुस्कुराया।

फिर वो भी सो गया। सुबह सुबह नींद में वो सपना देखा कि वो और पापा मालिनी की एक साथ चुदाई कर रहे हैं। और वो सपने में देखा कि असलम भी अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा है। तभी अचानक मालिनी ने उसे उठाया और चाय के लिए बोली।

सुबह तय्यार होकर शिवा सामान लेकर मुंबई का कहकर निकला और सीधे आयशा के घर पहुँच गया। अभी असलम भी घर पर था और नाश्ता करके उठा ही था। वो दोनों हाथ मिलाए और असलम बोला: मुंबई में आपका स्वागत है। अब वो तीनों हँसने लगे। आयशा अभी भी नायटी में थी। वो सामने से खुलने वाली नायटी थी। उसके बड़े मम्मे बहुत मस्त उभरे हुए दिख रहे थे।

आयशा: आपने लैप्टॉप देखा कि वहाँ घर पर क्या हो रहा है?

शिवा : अभी कहाँ देखा गाड़ी चला रहा था ना। चलो खोलता हूँ। वो सोफ़े पर बैठकर लैप्टॉप खोला और उसके अग़ल बग़ल असलम और आयशा भी बैठे और लैप्टॉप देखने लगे।

उसने बेडरूम के कैम में देखा तो कमरे में पापा बैठे थे और अख़बार पढ़ रहे थे। ड्रॉइंग रूम भी ख़ाली था।

शिवा: लगता है मालिनी किचन में है। अब तक तो बाई भी आ गयी होगी।

असलम: अरे रीवाइंड करो और देखो कि तुम्हारे जाने के बाद पिछले २० मिनट में क्या हुआ?

आयशा: हाँ वहीं मस्त सेक्सी सीन होगा ससुर बहु का।

शिवा ने रीवाइंड किया और सबकी आँखें जैसे लैप्टॉप पर जम गयीं। शिवा बाहर आ रहा था और मालिनी उसे दरवाज़े तक छोड़ने आइ और उसको एक लिप किस दी और बाई कहकर दरवाज़ा बंद की।

जैसे ही वो अंदर आयी राजीव ने अपनी बाँहें खोल दी और वो उनमें समा गयी। अब वो दोनों एक दूसरे के होंठ चूमने और चूसने लगे। राजीव के हाथ उसकी पीठ और उसके चूतरों को सहला रहे थे। फिर उसके हाथों ने उसकी नायटी को ऊपर किया और वो उसके गोल गोल नंगे चूतरों को दबाने लगा। वो बोला: आऽऽऽह बेटा क्या फ़ीलिंग हो रही है। आज से कल तक तुम सिर्फ़ मेरी बीवी रहोगी। है ना? वो अब उसकी गाँड़ की दरार को रगड़कर बोले जा रहा था।

मालिनी भी अपना सामने का हिस्सा उसके लौड़े पर दबाकर बोली: हाँ पापा आज और कल मैं सिर्फ़ आपकी हूँ।

असलम विडीओ देखकर अपना लंड मसलकर बोला: उफफफ क्या मस्त गाँड़ है। पता नहीं साली कब देगी?

आयशा: आप तो मरे ही जा रहे हो उसकी फाड़ने के लिए।

अब तीनों हँसने लगे।

उधर राजीव बोला: बेटा नहाने के बाद आज तुम्हारी गाँड़ का उद्घाटन करूँगा। ठीक है ना?

मालिनी: जी पापा ठीक है। आज कर ही दीजिए ,बहुत दिन हो गए नक़ली लंड डालते हुए, अब आपका असली वाला चाहिए, मेरी गाँड़ को। भले फट जाए तो भी कोई ग़म नहीं।

तभी दरवाज़े की घंटी बजी। दोनों अलग हुए और मालिनी ने दरवाज़ा खोला और बाई अंदर आयी।

अब शिवा बोला: अब कुछ देर के लिए कुछ नहीं होगा। बाई के जाने के बाद ही वो कुछ करेंगे।

अब उसने लैप्टॉप को ऑनलाइन कर दिया था। पापा अभी भी पेपर पढ़ रहे थे, तभी मालिनी अंदर आयी । पापा मुस्कुराए और बोले: बाई कब तक जाएगी?

मालिनी हँसी: बड़े बेचैन हो रहे हैं आप? बस एक घंटे में चले जाएगी। वो जाकर पापा के पास खड़ी हुई।

राजीव ने उसकी नायटी के ऊपर से उसकी जाँघ सहलायी और बोला: उफफक जान बर्दाश्त नहीं हो रहा है। देखो? ये कहकर वो अपनी लूँगी हटाकर अपना लौड़ा दिखाए। उफफफ क्या लम्बा और मोटा पूरा खड़ा था।

मालिनी प्यार से उसको अपनी मूठ्ठी में भरकर सहलाकर बोली: पापा अभी से खड़ा कर लिए? अभी एक घंटा सबर करिए। चलिए तब तक आप नहा लीजिए।

राजीव उसकी बुर को नायटी के ऊपर से दबोचकर बोला: बेटा आज तो हम साथ ही नहाएँगे। उसके बाद मस्त चुदाई होगी।

मालिनी: ओह पापा आप भी ना । मेरे पीछे ही पड़े हो साथ में नहाने के लिए। चलो ठीक है आज आपकी ये इच्छा भी पूरी कर दूँगी। अब छोड़िए बहुत सा काम बचा है।

राजीव ने उसको चूमा और वो बाहर निकल गयी।

असलम: अब एक घंटा इंतज़ार करो। और वो जब बाथरूम में नहाएँगे तो भी तुमको दिखाई नहीं देंगे। हाँ अगर दरवाज़ा खोलकर नहाएँगे तो शायद कैम दिखा सकेगा। अच्छा अब मुझे ऑफ़िस जाना है। बेस्ट ओफ लक । वैसे आयशा आज कितनी बार चुदवाओगी शिवा से ? वो आयशा की चूचि दबाकर बोला।

आयशा: उफफफ धीरे से दबाओ ना। मुझे क्या पता ? अपनी बीवी को ससुर से चुदता देखकर क्या पता कितना गरम होंगे और कितनी बार करेंगे?

सब हँसने लगे। शिवा: यार तू लंच में आएगा ना तो दोनों मिलकर इसे चोदेंगे। उसके पहले एक बार ही करूँगा बस अब तो ठीक है ना?

असलम आयशा को अपनी बाहों में भींचकर बोला: ओके डार्लिंग हैपी फ़किंग । और उसके होंठ चूमकर बाहर चला गया।

अब आयशा बोली: आपके लिए चाय लाती हूँ। आप टीवी देखो।

बाद में वह नहाने चली गयी और वो टीवी देखता रहा।

वो नहाकर आयी तो उसने एक गाउन सा पहना था जो सामने से रस्सी से बांधा था और साफ़ लग रहा था कि उसने उसके नीचे ब्रा नहीं पहनी थी क्योंकि उसके लम्बे निपल साफ़ दिखाई दे रहे थे। वो साक्षात काम की मूर्ति सी लग रही थी। शिवा का लण्ड तनने लगा।

तभी उसकी निगाह लैप्टॉप पर पड़ी और वो देखा किमालिनी पसीना पोंछती हुई अंदर आयी और पापा ने उसे अपनी गोद में खींच लिया। शिवा की आँखें अब लैप्टॉप पर चिपक गयी थी और वो आयशा के सामने अपना लौड़ा मसल रहा था।

आयशा मुस्कुराई और उसकी पैंट का बेल्ट खोली और उसकी पैंट उतार दी। अब चड्डी ने उसका लौड़ा फूला हुआ बहुत सेक्सी दिख रहा था। वो उसकी चड्डी पर लगी हुई एक बूँद प्रीकम को चाटी और उसके लौड़े को चड्डी के ऊपर से ही चाटने लगी। अब वो भी अपनी नज़र उठाई और देखने लगी कि ससुर बहु क्या कर रहे हैं? शिवा की आँखें तो जैसे लैप्टॉप से चिपक गयी थीं।

राजीव मालिनी के कंधे और गले के हिस्से को चूमा और बोला: बेटी बहुत पसीना आया है, चलो नायटी उतार दो।

मालिनी: पापा मैंने इसके नीचे कुछ नहीं पहनी हूँ। पूरी नंगी ही जाऊँगी।

पापा उसकी चूची दबाकर: अरे ब्रा तो पहनी हो बेटा। हाँ नीचे कुछ नहीं है। वैसे भी कपड़े पहनकर नहाओगी क्या? चलो उतारो।

ये कहकर वो उसकी नायटी उतार दिए और मालिनी ने भी इसमें उनको सहयोग किया। अब वो सिर्फ़ ब्रा में पापा की गोद में बैठी थी। पापा उसके बदन को चूम रहे थे और वो उसकी ब्रा का हुक खोले और उसको भी निकाल दिया। अब उसकी मस्त चूचियाँ दबाकर वो उसकी एक बाँह उठाए और उसकी बग़ल को सूंघकर बोले: हम्म क्या मस्त गंध है म्म्म्म्म्म । उफफक क्या मादक लड़की हो तुम। अब वो उसके पेट और नाभि को सहलाकर बोले : उफ़्फ़ क्या चिकना बदन है तुम्हारा। अब वो उसकी जाँघ सहलाकर बोले: बेटी मस्त गदरा गयी हो। सच, अब जाकर तुम गदराई जवानी वाला माल बनी हो। वो उसकी बुर को पंजे में दबोचकर आऽऽह कर उठे।

इधर शिवा का बुरा हाल था। अब आयशा ने उसकी चड्डी खोल दी थी और उसका लौड़ा सहलाते हुए बीच बीच में उसे चूस भी देती थी।

उधर पापा बोले: चलो बेटी अब नहा लेते हैं। मालिनी खड़ी हुई और पापा ने भी अपनी बनियान उतार दी और मालिनी ने मस्ती में आकर उसकी लूँगी खींच दी। अब वो दोनों नंगे थे और राजीव उसे अपने से चिपकाकर उसे प्यार किए जा रहा था। मालिनी के हाथ पापा के तने हुए लौड़े को सहला रहे थे।

अब पापा बोले: चलो बाथरूम में । मैं तौलिया लेकर आता हूँ। मालिनी बाथरूम में घुसी और टोयलेट की सीट पर बैठकर मूतने लगी। अब तक सब साफ़ दिखाई दे रहा था क्योंकि दरवाज़ा खुला था। अब राजीव तौलिया लेकर आया और उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। शिवा बोला: उफफफ ये क्या पापा ने तो दरवाज़ा ही बंद कर दिया।

आयशा उसका लौड़ा चूसकर बोली: ओह चलो कोई नहीं चुदाई तो बिस्तर पर ही होगी। थोड़ा इंतज़ार कर लो।

शिवा ने उसे उठाया और उसका गाउन खोला और उसे निकाल दिया वो पूरी नंगी थी अब। उफफफ क्या मस्त दिख रही थी, अभी अभी नहाई हुई जवानी । उसका लौड़ा मानो पागल सा होकर ऊपर नीचे हुआ जा रहा था। अब वो उसे लेकर सोफ़े में लिटाया और उसकी चूचियों पर जाकर टूट सा पड़ा। वो उनको दबाया और चूसा और फिर उसके निपल्ज़ को भी ऐंठने लगा। आयशा की सिसकियाँ गूँज रही थी। अब वो उसकी जाँघों को उठाकर फैलाया और उसके बुर को चूमने लगा। आयशा आऽऽऽह कर उठी। थोड़ी देर बाद वो बोली: आऽऽऽह बस करो वरना मैं झड़ जाऊँगी। वो उठा और सोफ़े पर बैठा और आयशा को बोला: बेबी आओ मेरे गोद में बैठकर लंड अंदर लो। वह अपनी पीठ शिवा की तरफ़ करके उसकी गोद में बैठी और उसका लौड़ा अपने बुर में लेकर आऽऽऽह करके ऊपर नीचे होने लगी। अब उसकी उछलती हुई चूचियों को शिवा मस्ती से दबा रहा था।

तभी आयशा बोली: आऽऽहाह देखो दोनों बाथरूम से बाहर आ रहे हैं।

शिवा ने भी लैप्टॉप को देखना शुरू किया।

उधर जो दृश्य शिवा नहीं देख सका उसने कुछ ख़ास नहीं हुआ था। बाथरूम में राजीव और मालिनी चिपककर शॉवर से नहाए और एक दूसरे के बदन में साबुन लगाए। आज राजीव ने उसकी गाँड़ के छेद को अच्छी तरह से साफ़ किया और वो भी राजीव के एक एक अंग को साफ़ की। फिर शॉवर लेकर एक दूसरे के बदन को सुखाए और बाहर आ गए। बाहर दोनों बिलकुल नंगे ही आए थे।

शिवा और आयशा अपनी चुदाई करते हुए उनको देख रहे थे। आयशा अपनी गाँड़ उठाकर उसके लौड़े को अपनी बुर में रगड़कर मस्त हुई जा रही थी।

मालिनी आकर बिस्तर पर पीठ के बल लेट गयी और राजीव आलमारी से डिब्बा उठा लाया जिसने नक़ली लंडों का सेट था। वो जेल लेकर उन सब लंडों में मला और हाथ साफ़ करके उसको चूमने लगा और उसकी चूचियाँ भी पिया । उसकी बुर को थोड़ा चाटकर वो बोला: बेटा उलटी हो जाओ। मालिनी पलट गयी और पेट के बल लेटी और अपनी गाँड़ उठा दी ताकि पापा तकिया लगा लें नीचे। अब उसकी गाँड़ उठी हुई बहुत मादक और कामुक दिख रही थी। पापा उसके चूतरों को चूमकर चाटने लगे और फिर उन्होंने चूतरों को फैलाया और उसकी गाँड़ के छेद में ऊँगली करने लगे और फिर झुक कर उसे जीभ से कुरेदने लगे। अब वो दो उँगलियों में जेल लिए और गाँड़ के छेद में डाले और अंदर बाहर करने लगे। मालिनी: आऽऽह पापा मस्त लग रहा है।

पापा: बेटा अब नक़ली लंड डालता हूँ। ठीक है ना?

मालिनी: जी पापा बस अब मज़ा दे दो।

पापा ने उसकी गाँड़ में एक एक करके सब लंड डाले और जब सबसे मोटा लंड निकाला तो शिवा की आँख फैल गयी क्योंकि उसकी गाँड़ का छेद बहुत ज़्यादा ही खुला सा लग रहा था।

मालिनी: उफफफफ पापा अब अपना डाऽऽऽऽऽऽऽल दो ना। हाऽऽयय्य।

अब पापा ने अपने लौड़े में जेल मला और एक बार फिर से मालिनी के छेद में और ख़ूब सारा जेल डाला और अब अपना लौड़े का सुपाड़ा उसके छेद में रखा और हल्के से दबाया।

मालिनी : आऽऽऽऽऽहहह पाआऽऽऽऽपा डाआऽऽऽऽऽऽलो । उइइइइइइइ माँ मरीइइइइइइइइइ। अब पापा का सुपाड़ा अंदर जा चुका था और वो अब भी दबाए जा रहे थे और धीरे धीरे पूरा लंड अंदर उसकी गाँड़ में धँसे जा रहा था।

अचानक आयशा ने महसूस किया कि अब शिवा जोश में आकर नीचे से अपने लंड का धक्का मारे जा रहा था। आयशा भी मस्ती से : उन्न्न्न्न्न्न उन्न्न्न्न्न उफ़्फ़्फ़्फ़् निकल रही थी। वो भी उछल कर चुदवा रही थी।

उधर पापा का पूरा लौड़ा उसकी गाँड़ में घुस गया था और मालिनी: उइइइइइइइइ मेरीइइइइइइइइइ फटीइइइइइइइइइ।

पापा: बेटा बहुत दुःख रहा है क्या ? वो अपना लौड़ा फँसायें हुए ही बोले।

मालिनी: आऽऽऽह पापा । अब नहीं दुःख रहा है। जब आप डाले थे तब दुखा था। हाऽऽऽऽय्य पापा अब धक्के मारो ना। बहुत खुजा रही है मेरी गाँड़। उइइइइइइइओओ।

अब शिवा की आँख मालिनी की गाँड़ में चिपक गयी थी। वो पापा के धक्के का जवाब नीचे से अपनी गाँड़ उछालके दे रही थी। बिस्तर पर ससुर बहु की ज़बरदस्त चुदाई चल रहीथी और मालिनी मस्ती में : उफफफफ और माआऽऽऽऽऽरो पाआऽऽऽऽऽपा फाड़ोओओओओओओओ। चोओओओओओओदो । उइइइइइइइ मज़ाआऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽ है पाआऽऽऽऽऽप्पा । फ़ाऽऽऽऽऽऽऽड़ दो मेंएएएएएएएएएरि गाँड़। ह्म्म्म्म्म्म्म ।

अब वो अपनी ऊँगली ले जाकर अपनी बुर को रगड़ने लगी। शिवा को वो किसी रँडी से कम नहीं लग रही थी।

पापा बोले: आऽऽह बेटा अपनी बुर से हाथ निकालो। मैं सहलाता हूँ तुम्हारी बुर। अब वो ख़ुद उसकी बुर में उँगलियाँ डाले और उसकी पनियायी हुई बुर को रगड़ने लगे। वो उसकी क्लिट को भी एक ऊँगली से रगड़ते हुए मस्त धक्के मारकर उसकी गाँड़ फाड़ने में लगे रहे। थप्प थप्प की आवाज़ आ रही थी और मालिनी अब अपने क्लाइमैक्स की तरफ़ बढ़ रही थी। वो बड़बड़ाने लगी: उइइइइइइइ पाआऽऽऽऽऽऽपा मैं तो गयी।वो अपनी गाँड़ नीचे दबाकर अपनी बुर में पापा की उँगलियों को और गाँड़ में पापा के मस्ताने लंड को महसूस करके झड़ती चली गयी और राजीव का पूरा हाथ उसके कामरस से भीग गया। वो अपना हाथ निकाला और उसे चाटकर उसकी गाँड़ को और ज़ोर से चोदने लगा। अब मालिनी उन्न्न्न्न्न्न उन्न्न्न्न्न कहकर चुपचाप पड़ी थी और पापा का लौड़ा उसकी गाँड़ को मस्ती से भर रहा था। तभी पापा भी ह्म्म्म्म्म्म आऽऽऽहहह। बेएएएएएएएटी मैं भी गयाआऽऽऽऽऽऽऽऽ। कहकर झड़ने लगे। वो अब पूरी तरह से मालिनी की पीठ पर लेट गए। उन्होंने अपना वज़न अपनी बाहों पर रखा हुआ था।

उधर शिवा भी आयशा की बुर में नीचे से अपना लंड दबाकर चोद रहा था। अब वो दोनों भी ससुर और बहु के साथ साथ झड़ने लगे।

अब ससुर और बहु मज़े सेलेटे हुए थे । पापा: बेटा नीचे दुःख रहा है क्या?

मालिनी: हाँ पापा दुःख रहा है जलन सी हो रही है। आपने भी तो बेरहमी से मेरी गाँड़ मारी है।

पापा उठकर उसके छेद को चेक किए और बोले: ठहरो सफ़ाई करके आओ । मैं क्रीम लगा दूँगा। जलन कम हो जाएगी।

वो उठी और बाथरूम जाने लगी तो उसकी लगड़ाहट साफ़ दिखाई पड़ रही थी।

उसे देखकर आयशा बोली: आपके पापा तो बहुत अच्छे हैं। उन्होंने लगता है कई दिन मालिनी की गाँड़ को नक़ली लंड से ढीला करके आज आख़िर में चोदे हैं। मेरे ससुर ने तो बस मूड बना और मेरी गाँड़ फाड़ दी। मैं तो दो दिन तक ठीक से चल भी नहीं पाई थी।

अब मालिनी बाहर आयी और अभी भी लँगड़ा रही थी। पापा ने उसे उलटा लिटाया और उसकी गाँड़ की जाँच की और वहाँ क्रीम लगाके बोले: बेटा शाम तक आराम आ जाएगा। फिर वो भी बाथरूम चले गए।

अब वो दोनों लिपटकर सो गए।

आयशा भी बाथरूम से बाहर आकर अपना गाउन पहनी और शिवा बाथरूम जाने के लिए उठ ही रहा था कि असलम का फ़ोन आ गया: हाय शिवा क्या हाल है? क्या ख़बर है?!

शिवा: बस पापा ने अभी अभी अपनी बहु की गाँड़ का उद्घाटन कर दिया। और अब फटी हुई गाँड़ में क्रीम लगाकर सो गए हैं।

असलम: हा हा , क्रीम भी लगा दिए? बढ़िया। और तुमने आयशा की ली कि नहीं?

शिवा: हाँ यार ससुर बहु की चुदाई देखते हुए हमने भी एक राउंड कर लिया।

असलम: वह भाई चलो बढ़िया। अब आराम करो। मैं थोड़ी देर में आता हूँ फिर साथ में आयशा की लेंगे। ठीक है ना?

शिवा: हाँ हाँ बिलकुल। लो आयशा से बात करो ।

आयशा: एक बात बोलूँ असलम? मुझे तो शिवा के पापा से बुर और गाँड़ मरवानी है। बस इसका इंतज़ाम करो। उफफफफ क्या चुदाई की है उन्होंने मालिनी की। मज़ा ही आ गया।

असलम हँसकर: ठीक है वो भी हो जाएगा मेरी जान। चलो मिलते हैं लंच पर। यह बोलकर उसने फ़ोन काट दिया।

 
उस दिन गाँड़ मरवाने के बाद मालिनी दिन भर थोड़ा लँगड़ाती रही। राजीव ने शाम को भी उसकी गाँड़ में बड़े प्यार से क्रीम लगाई। यह सब शिवा और आयशा ने देखा । इसके पहले असलम खाना खाने आया तो शिवा और उसने मिलकर आयशा की ज़बरदस्त चुदाई की। बदल बदल कर उसके मुँह , बुर और गाँड़ में लंड डाला। असलम तीन बजे चला गया था।

राजीव और मालिनीड्रॉइंग रूम में चाय पीकर बातें कर रहे थे तभी राजीव पूछा: बेटा अब पीछे का दर्द कैसा है?

मालिनी: पापा जलन तो अभी भी हो रही है।

राजीव उठकर अपने कमरे से एक क्रीम लाया और मालिनी ने अपनी सलवार खोली और दीवान में उलटी लेट गयी। राजीव ने उसकी गाँड़ के छेद को चेक किया और बोला: बेटा कल तक ठीक हो जाएगी। यह कहकर उसने ख़ूब सारी क्रीम एक ऊँगली में लगाई और उसकी गाँड़ में ऊँगली डालकर थोड़ा सा घुमा दिया। मालिनी: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ पाआऽऽऽऽऽपा। दुखता है।

राजीव अपनी ऊँगली निकाला और बोला: बस बस हो गया बेटा।

मालिनी सीधी होकर सलवार पहनी और तभी राजीव ने उसे दिखाकर अपनी ऊँगली सूंघी और बोला: म्म्म्म्म्म मस्त गंध है।

मालिनी झूठा ग़ुस्सा दिखाकर बोली: पापा जाइए हाथ धो कर आइए।

राजीव हँसकर अपनी ऊँगली सूंघता हुआ हाथ धोने चला गया।

उसके बाद कुछ ख़ास नहीं हुआ।

शाम को असलम आया और सब चाय पीने लगे। तभी असलम जो कि लैप्टॉप देख रहा था बोला: देखो कुछ प्रोग्राम बन रहा है।

उधर ड्रॉइंग रूम में अब मालिनी राजीव की गोद में बैठी थी और वो बोला: बेटा चलो तुमको कुछ गिफ़्ट दिलाता हूँ। रात का खाना भी बाहर खाएँगे। तुम बाई को कल आने से मना कर देना। कल बस मैं और तुम और कोई नहीं बीच में हमारे। ठीक है ना?

मालिनी: पापा बाई काम करके चली जाएगी। आप उसको क्यों मना कर रहे हो?

राजीव: बेटा कल हम दोनो दिन रात पूरे नंगे रहेंगे। बाई के होने से काम बिगड़ेगा ना।

मालिनी: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ पापा क्या बात करते हैं। पूरे रात दिन नंगा। छी ऐसे भी कोई करता है क्या?

राजीव: अरे मैं तो तेरी सासु माँ को तो कई बार ऐसे नंगी रखता था बच्चों के पैदा होने से पहले।

शिवा हैरान रह गया कि उसकी माँ के बारे में भी इस तरह की बातें हो रही हैं।

असलम आयशा से बोला: सच में ये बुढ़उ तो बहुत ही कमीना है। यार शिवा बुरा नहीं मानना ।

शिवा: हाँ यार सच में ये मालिनी जैसी प्यारी लड़की को एक रँडी में बदल रहा है। देखो क्या हो रहा है?

वहाँ लैप्टॉप में अब राजीव उसकी चूचियाँ दबाकर उसके होंठ चूस रहा था। वो बोला: जानू चलो लौड़ा चूसो ना। बहुत मन कर रहा है तुम्हारे मुँह में झड़ने का।

मालिनी हँसकर बोली: चलिए दीवान पर लेटिए मैं चूसती हूँ।

वो लूँगी खोलकर लेटा और वो उसकी जाँघों को सहलायी और उसके लौड़े को ऊपर उठाई और उसके बॉल्ज़ को चूमने लगी और फिर जीभ से चाटने भी लगी। अब वो उसके लंड को भी चूसी और चाटी। क़रीब २० मिनट चूसने के बाद वो आऽऽह करके झड़ गया और मालिनी उसके वीर्य को पीती चली गयी। आख़री बूँद भी उसने सुपाडे के छेद से चाटी और फिर बोली: पापा आपका वीर्य कितना गाढ़ा है।

राजीव: अरे बेटा इसीलिए तो लड़कियाँ फट से गर्भ से हो जाती हैं मुझसे चुदवा कर ।

शिवा पापा की इस बात से चौंका। इसका क्या मतलब हुआ?

मालिनी: वो तो सच है पापा कि आप कई लड़कियों को माँ बना चुके हो। इसका मतलब ये हुआ ना कि मैं भी अब माँ बन जाऊँगी?

राजीव: बिलकुल बेटा अब तुम्हारी बारी है। मुझे तो पूरा विश्वास है कि इस महीने तुम अपना पिरीयड मिस करोगी।

मालिनी: पापा वो बच्चा आपको दादा बोलेगा या पापा?

राजीव: बोलेगा तो दादा ही मगर हम दोनों को तो पता ही होगा कि वो हमारा ही बच्चा है।

शिवा सन्न रह गया। ये क्या नई बात हो रही है?

असलम: यार शिवा तू उसका पापा भी होगा और भाई भी।

शिवा: यार सच में पापा ने कई लड़कियों को माँ बनाया है क्या? बड़ा अजीब लगता है ये सुनकर।

असलम: वैसे जिस तरह से मालिनी की चुदाई करते हैं उससे पता लगता है कि क्या मर्दाना बदन है। यार मैं तो रिकॉर्डिंग देखकर ही मस्ती में आ गया हूँ।

उधर मालिनी अब बाथरूम से बाहर आयी और बोली: पापा बताइए कहाँ चलना है?

राजीव: बेटा तुम्हारे लिए गिफ़्ट लेंगे और खाना भी बाहर खाएँगे।

शिवा देखा कि पापा कपड़े बदल रहे हैं। उन्होंने मस्त सेंट भी स्प्रे किया। वो तो बहु को घुमाने ले जाने को ऐसे तय्यार हो रहे थे मानो कोई गर्ल फ़्रेंड घुमाने ले जा रहे हैं। उधर मालिनी जब तय्यार होकर राजीव के कमरे में आयी तो शिवा असलम आयशा और राजीव सब की आऽऽऽह निकल गयी। सच में आज वो बहुत सुंदर और मादक दिख रही थी। गदराया मांसल बदन साड़ी में लिपटा हुआ और भी कामुक दिखाई पड़ रहा था। असलम अपने लौड़े को दबाकर बोला: देखना अभी अंकल इसे चोद देंगे। क्या माल दिख रही है साली।

शिवा ये सोचकर बहुत उत्तेजित हो चुका था कि उसकी बीवी कितनी कामुक दिख रही है? उफफफ पता नहीं पापा क्या करेंगे इसके साथ अभी?

राजीव पलटके जब बहु को देखा तो मानो उसकी साँस ही रुक गयी। वो बोला: उफफफफ बेटा क्या लग रही हो? किसी हीरोइन की तरह सुंदर लग रही हो। आज मुझे बाज़ार में तुम्हारा ध्यान रखना पड़ेगा। तुमको कोई उठाकर ना ले जाए।

मालिनी मुस्कुराती हुई: पापा आपके रहते कोई मेरे पास आने की हिम्मत नहीं करेगा। वो उसकी टी शर्ट से बाहर झाँक रहे बाँह की मछली को दबाकर बोली।

दोनों हँसने लगे और राजीव ने बहु को अपनी बाहों में ले लिया और उसके गाल और होंठ चूमने लगा। मालिनी भी उसे चूमने लगी। अब मालिनी हँसकर बोली: क्या पापा आप मेरी पूरी लिपस्टिक़ खा गए। मुझे फिर से लगानी पड़ेगी।

थोड़ी देर बाद वो बाहर चले गए और शिवा असलम से बोला: देखो पापा मेरी बीवी को ना सिर्फ़ चोद रहे हैं बल्कि उसको घुमा भी रहे हैं और उसको अपने बच्चे की माँ भी बनाने जा रहे हैं । उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ये सब बर्दाश्त के बाहर हो रहा है। वो अपना लौड़ा दबाकर बोला।

आयशा: मतलब आप अंकल से लड़ाई करोगे?

असलम: अरे नहीं इसका मतलब है कि उत्तेजना बर्दाश्त से बाहर हो रही है। यही ना?

शिवा : हाँ यार कितना इक्साइटिंग है ये सब । उफफफ पापा भी मस्ती से मज़ा दे रहें हैं अपनी लाड़ली बहु को।

आयशा उसके पैंट को खोली और उसका मस्ताना लौड़ा बाहर निकालके चूसने लगी। असलम मस्ती से उन दोनों को देख रहा था। सिर्फ़ पाँच मिनट में ही शिवा आऽऽऽऽहहह कहकर उसके मुँह में झड़ गया। आयशा उसका रस पीकर बोली: बहुत गरम हो गए थे आप। अब अच्छा लगा?

शिवा: आऽऽऽऽह सच में बहुत अच्छा लगा ।

फिर वो बातें करते हुए मालिनी और पापा का इंतज़ार करने लगे।

रात को क़रीब १० बजे मालिनी और पापा आए। दोनों साफ़ साफ़ पिए हुए दिख रहे थे। लगता था पापा ने बहु को पिला दिया था। मालिनी के हाथ में कुछ डिब्बे थे जो कि शायद पापा ने उसे दिलाए थे। अब शिवा और वो दोनों लैप्टॉप पर झुक कर देखने लगे। पापा ने बहु को पकड़ा और कहा : चलो बेटा मेरे कमरे में ही चलो। वो दोनों कमरे में आए। अब उसने बहु को बाँह में भरकर चूमना शुरू किया। अब वो बोला: बेटा ये कपड़े पहन कर बताओ ना।

मालिनी भी मुस्कुराई: ठीक है पापा। अब वो उसके सामने ही साड़ी खोली और फिर ब्लाउस और पेटिकोट भी उतारी। दूधिया बदन ब्रा और पैंटी में बहुत सेक्सी दिखाई दे रहा था। अब तक राजीव भी सिर्फ़ चड्डी में आ चुका था। वो ऐसे ही बिस्तर पर पैर लटका कर बैठ गया। उसका लंड अलग से फूला हुआ दिखाई पड़ रहा था।

मालिनी ने अब डिब्बा खोला और उसमें से एक लिंगरी निकाली और बाथरूम में चली गयी। थोड़ी देर में वो बाहर आयी और राजीव उसे मस्त निगाहों से देखने लगा। मालिनी के निपल्ज़ बाहर थे । चूचियाँ आधी से ज़्यादा नंगी थीं। नीचे भी एक जाँघ पूरी नंगी थी। पेट भी आधा नंगा था। उसकी गहरी नाभि दिखाई दे रही थी। उसकी बुर का हिस्सा भी साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था और फाँकें और बीच का हिस्सा भी मस्त लग रहा था। वो किसी मॉडल की तरह चलकर राजीव को मस्त कर रही थी। अब वो गोल गोल गाँड़ मटका मटका कर चल के दिखा रही थी। गाँड़ की दरार में फँसी हुई रस्सी मस्त दिख रही थी। राजीव अपने लंड को चड्डी के ऊपर से मसल कर बोला: उफफफ क्या मस्त माल दिख रही हो बेटा । आओ मेरी गोद में बैठो।

शिवा अपना लंड दबाकर : देखो किसी रँडी से कम लग रही है क्या? पापा भी आज इसको बुरी तरह चोदेंगे देखना तुम लोग?

वह आकर राजीव की गोद में बैठी और राजीव ने उसके कंधे चूमे और उसकी छातियों के निपल्ज़ को दबाने लगा जो कपड़े से बाहर झाँक रहे थे। मालिनी उइइइइइ कर उठी। अब वो उसकी लिंगरी का ऊपरी हिस्सा निकाले और उसकी गोल गोल चूचियों को दबाकर चूसने लगे। फिर वो उसको उठाये और उसकी नीचे का हिस्सा भी निकाल दिए और अपनी चड्डी भी उतारे और बोले: बेटा बस आज जो हम नंगे हुए हैं तो अब परसों सुबह ही कपड़े पहनेंगे शिवा के आने के पहले।

अब वो दोनों बिस्तर पर एक दूसरे की ओर करवट लेकर लेटे और चिपक कर चुम्बन में डूब गए। राजीव का हाथ उसके बदन से खेल रहा था और वो उसकी चूचियाँ और कमर के साथ चूतरों को भी दबा रहा था। मालिनी का हाथ भी उसके पीठ और चूतरों से होता हुआ उसके लौड़े पर आ गया था। वह उसे मुठियाने लगी। वह उसके बड़े बॉल्ज़ भी सहला रही थी।

शिवा और वो दोनों भी देख रहे थे। और सब गरम हुए जा रहे थे।

अब राजीव बोला: बेटा आओ ६९ करते हैं। वो उलटी होकर करवट में ही लेट गयी और अपनी एक टाँग उठा ली और राजीव ने अपना मुँह उसकी बुर में डाल दिया और चूसने लगा। वह भी उसका लंड और बॉल्ज़ चूसने लगी।अब वो बोला: बेटी चलो ऊपर आकर मुझे चोदो।

मालिनी ऊपर आयी और अपनी बुर ने उसका लौड़ा डाली और बोली: पापा मैं नीचे रहूँ या ऊपर चोदोगे तो आप ही। मैं तो हर हाल में सिर्फ़ चूदूँगी ही।

राजीव हँसने लगा और नीचे से धक्के मारने लगा और उसकी चूचियाँ मसलने लगा। मालिनी कमर उछालकर चुदवा रही थी। पलंग बुरी तरह हिल रहा था और फ़च फ़च की आवाज़ आ रही थी। मालिनी: पापा आऽऽऽह मज़ाआऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽ है। अब आऽऽऽऽऽप ऊपर अअअअअअअअओ नाआऽऽऽऽऽऽ।

राजीव उसको अपने से सटा कर पलटा और ऊपर आकर उसकी चूचियाँ दबोचकर ज़बरदस्त तरीक़े से चोदने लगा। मालिनी भी हाय्याय पाआऽऽऽऽऽपा और जोओओओओओओओओओओर से चोओओओओओओदो । उइइइइइइइइ माँआऽऽऽ। राजीव की कमर पिस्टन की तरह आगे पीछे हो रही थी।

असलम: उफफफ इस उम्र में भी इतना दम। सही में यार अंकल तो साँड़ हैं।

तभी मालिनी अपनी गाँड़ उछाल कर चिल्लाई: आऽऽऽऽऽऽऽह उन्न्न्न्न्न्न पापा मैं तो गयीइइइइइइइइइ ।

राजीव साँस लेने के लिए रुका और अपना लौड़ा उसकी पूरी तरह गीली बुर से बाहर निकाला । अब वो पास के टेबल से क्रीम उठाया और मालिनी को उलटा लिटाया और उसकी गाँड़ में क्रीम लगाया २ उँगलियों की मदद से । फिर अपने लौड़े में भी क्रीम लगाया और धीरे से उसकी कमर को ऊपर की ओर खींच कर उसे चौपाया बनाया और उसकी गाँड़ में अपना लौड़ा दबाने लगा। मालिनी: आऽऽऽऽऽह पापा उफफफफ दुखता है।

राजीव: बस बेटा अभी आराम मिलेगा। ये कहकर उसने अपना लौड़ा उसकी गाँड़ में अंदर तक पेल दिया।

मालिनी: उफफफफ पापा मरीइइइइइइइइइ।

अब राजीव ने धीरे धीरे आधा लंड निकालके धक्के मारने शुरू किए। मालिनी उन्न्न्न्न ऊँननन कहकर मज़े से भरने लगी।

शिवा आँखें फाड़े देख रहा था किपापा अब बहु की गाँड़ भी उसी स्पीड से मार रहे थे जैसे बुर मारी थी। अब थप्प थप्प की आवाज़ आ रही थी जो कि पापा की जाँघें उसके चूतरों से टकराने की वजह से आ रही थीं। अब बहु रानी भी अपनी गाँड़ पीछे करके पूरा लौड़ा अंदर ले रही थी और बड़बड़ा रही थी: आऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽऽपा मज़ाआऽऽऽऽऽ आऽऽऽ गयाआऽऽऽऽ। आऽऽऽऽऽह मुझे नहीं पता था आऽऽऽऽऽह कि इसमे भी इतना मज़ा है उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़। और जोओओओओओओओर से फ़ाआऽऽऽऽऽऽड़ दो पाआऽऽऽऽऽऽऽपा मेरी गाँआऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽड़ ।

अब राजीव भी अपने क्लाइमैक्स की तरफ़ बढ़ रहा था सो उसने उसकी बुर में तीन उँगलियाँ डाली और अंदर बाहर करने लगा। जब उसका झड़ने वाला था तब वो उसकी क्लिट को मसला और अब दोनों एक साथ झड़ गए।

राजीव अब उसके ऊपर से हट कर बग़ल में लेटा और वो ऐसे ही उलटी पड़ी रही। उसकी गाँड़ के छेद से सफ़ेद रस बाहर आ रहा था ।

राजीव: बेटा मज़ा आया ना? रात की चुदाई का मज़ा और ही ज़्यादा आता है। है कि नहीं?

मालिनी: जी पापा सच में बहुत मज़ा आया। पर परसों के बाद शिवा आ जाएँगे तो यह मज़ा बंद हो जाएगा।

राजीव: बेटा दिल छोटा मत करो। कोई ना कोई रास्ता निकालेंगे रात की चुदाई का।

मालिनी मुस्कुराई: ठीक है पापा। देखो क्या होता है?

राजीव: अच्छा बेटा एक बात बोलूँ तुमको क्या लगता है कि अगर शिवा को ये पता चला कि तुम और मैं फँसे हुए हैं तो वो कैसा रीऐक्ट करेगा?

मालिनी: पापा शायद मुझे तलाक़ ही दे दे । क्या पता?

राजीव: वो मेरी गारंटी है कि नहीं देगा। वो भी तो तुमसे बेवफ़ाई कर चुका है तुम्हारी माँ को चोद कर।

मालिनी: हाँ वो तो है। मैंने इस बारे में सोचा ही नहीं।

राजीव: अच्छा बेटा अगर कभी ऐसी स्तिथि बने कि शिवा और मैं मिलकर तुम्हारी और तुम्हारी माँ के साथ चुदाई करें, तो तुम्हारा क्या रीऐक्शन होगा?

मालिनी: ओह क्या ये सम्भव है?

राजीव: हाँ सम्भव है पर तुम इसके लिए तय्यार होगी?

मालिनी: वैसे पापा आप और शिवा मुझे चोदते ही हो। और मम्मी भी आपसे और शिवा से चुदवा ही चुकी है। बस अब आप सबको साथ में होकर चुदाई की बात कर रहे हो ना?

राजीव: हाँ वही तो?

मालिनी: मुझे कोई समस्या नहीं है पर शिवा शायद नहीं मानेंगे।

राजीव: अरे वो मुझ पर छोड़ दो। चलो सोया जाए अब?

फिर वो नंगे ही लिपट कर सो गए।

उधर शिवा बोला: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या रँडी की तरह पापा के बग़ल में पड़ी है और अब बुर और गाँड़ मरवा कर कितनी शांति से लेटी है देखो। पर ये पापा सामूहिक चुदाई का क्या बोल रहे हैं। और हे भगवान ! मालिनी को पता है कि मैंने उसकी माँ को चोदा है। आज तक उसने मुझे कभी नहीं पूछा?

असलम: यार तुम्हारे परिवार में बहुत कुछ चल रहा है जो तुमको अभी पता नहीं है।

शिवा: हाँ यार ऐसा ही लगता है। पर मालिनी क्या बोली सुना? उसे सामूहिक चुदाई मंज़ूर है? ये मैंने कभी नहीं सोचा था कि वो इस तरह की चुदाई के लिए हाँ कर देगी? उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मेरा तो दिमाग़ ही घूम गया है।

असलम: लगता है जल्दी ही तुम्हारे परिवार में चुदाई का धमाल होने वाला है।

आयशा: ये सब अब छोड़ो। आऽऽऽऽह अब चलो ये तो झड़ गए। चलो अब आप दोनों मुझे भी शांत करो। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ असलम मुझे तो अंकल से चुदवाना ही है। ये कैसे होगा तुम जानो।

उसके बाद आयशा की ज़बरदस्त चुदाई हुई और उसकी बुर और गाँड़ की आग को दोनों जवानों ने पूरी तरह से शांत कर दिया।

सोने से पहले शिवा ने लैप्टॉप चेक किया। दोनों ससुर बहु नंगे ही लिपटकर सो रहे थे।

वो भी सो गया और सपने में देखा कि वो और पापा दोनों मालिनी को ऐसे ही चोद रहे हैं, जैसे अभी आयशा चुदवाई थी।

 
रात को करींब ३ बजे राजीव को पेशाब लगी। वो मोबाइल उठाया और टाइम चेक करने लगा। तभी बिजली चली गयी और घर में अँधेरा हो गया। मालिनी नंगी एक चादर ओढ़ के सो रही थी। वो मोबाइल का टॉर्च चालू किया और बाथरूम से फ़्रेश होकर वापस आया और टोर्च को दीवाल घड़ी की ओर करके टाइम देखा। तभी उसने ध्यान दिया कि वहाँ कुछ अजीब सी लाइट चमक रही थी। वो घड़ी के पास आया और उसने फिर से टोर्च की रोशनी की घड़ी पर। वह देखा कि कोई लेंस सा था जो कि चमक रहा था। वो घड़ी को धीरे से नीचे लाया और उसकी साँस रुक सी गयी। उफफफफ ये तो स्पाई कैम का लेंस था। उसने कुछ सोचा और लेंस को वैसे ही रहने दिया। घड़ी को वापस अपनी जगह पर रख दिया।

तभी बिजली आ गयी। वो चुपचाप ड्रॉइंग रूम में जाकर वहाँ की घड़ी चेक किया और वहाँ के कैम को भी देखा और फिर किचन और मालिनी के बेडरूम में भी चेक किया। उसे पता चल गया था कि सिर्फ़ दो ही कैम थे। उसे पक्का विश्वास था कि ये काम शिवा का ही है। उसे शक हो गया है कि मैं मालिनी को चोद रहा हूँ। इसीलिए उसने ये किया है। वो और शिवा कैम के बारे में जानते थे क्योंकि उन्होंने दुकान में भी लगा रखे थे। अब वो आकर बिस्तर पर लेटा और अपने बॉल्ज़ खुजाते हुए सोचने लगा कि इससे शिवा को क्या हासिल होगा? इस सबूत का वो किस तरह से इस्तेमाल कर सकता है? वह कुछ सोचा और मुस्कुराने लगा कि हाँ ये ही सम्भव है। उसका लौड़ा अकड़ने लगा और वह सोती हुई मालिनी के भोले चेहरे को देखा और मन ही मन बोला: बहु तुमको मुझसे कोई अलग नहीं कर सकता। शिवा भी नहीं। वह झुक कर उसके गाल को चूमा और मालिनी उसकी चौड़ी छाती में घुसकर सो गयी। उसने अपने आप को शांत किया और एक कुटिल मुस्कान के साथ सो गया।

अगली सुबह मालिनी की नींद खुली तो वह बहुत शर्मिंदा हुई कि कल उसने पापा के साथ मस्ती के चक्कर में शिवा को एक बार भी फ़ोन नहीं किया। उसे हैरानी भी थी कि शिवा का फ़ोन भी क्यों नहीं आया। वह चुपचाप नंगी ही ड्रॉइंग रूम में आयी और शिवा को फ़ोन लगायी।

उधर शिवा और असलम आयशा को बीच में दबाकर सो रहे थे जब शिवा का फ़ोन बजा। वो उठा और जाकर ड्रॉइंग रूम से फ़ोन मिलाया। साथ ही लैपटॉप भी चालू किया। वो चालू होने लगा।

मालिनी: गुड मॉर्निंग । आपने कल फ़ोन ही नहीं किया?

शिवा: जानू मेरी बेटरी डेड हो गयी थी। कॉन्फ़्रेन्स में भी बहुत देर हो गयी थी।

मालिनी: आप ठीक तो है ना? वापस कब आएँगे?

शिवा: कल सुबह आ जाऊँगा।

अब तक लैप्टॉप चालू हो गया था। शिवा देखा कि मालिनी पूरी नंगी बैठी है सोफ़े पर। उसकी ठोस बड़ी छातियाँ और लम्बे काले निपल बहुत सेक्सी दिख रहे थे। अब वो उठी और झुक कर फ्रिज से पानी की बोतल निकाली और शिवा उसके मादक पिछवाड़े को देखकर सोचा: उफफफ क्या माल है। मेरा माल है पर मेरा ही जी नहीं भरता इसको इस हाल में देखकर, तो बिचारे पापा का क्या दोष है।

शिवा और मालिनी थोड़ी देर प्यार भारी बातें किए । मालिनी हाथ उठाकर अपनी बग़ल खुजाई और अपनी छाती भी खुजाई। उसे क्या पता था कि शिवा उसे देख रहा है। फिर वो बाथरूम जाने के लिए उठी और अपनी बुर खुजा कर बोली: अच्छा रखती हूँ। बाथरूम जाना है। ये कहकर वह अपने कमरे के बाथरूम में घुस गयी। वह उसकी मटकती गाँड़ देखता ही रह गया। शिवा का लण्ड पूरा तन गया था। अब उसने पापा के बेडरूम को देखा तो पाया कि पापा अभी भी सोए हुए थे। वो भी नंगे ही थे और एक चादर से आधा बदन ही ढका हुआ था। अब वो लैप्टॉप को चालू रखा और फ़्रेश होने बाथरूम में घुसा । वो एक लूँगी ही पहना था। वो चाय बनाने किचन में गया। थोड़ा खोजने पर सब सामान मिल गया और तीन कप चाय बना के वो बेडरूम में पहुँचा। आयशा अभी अभी उठकर बैठी थी और असलम को उठा रही थी। उसने एक बिना ब्रा के टॉप और स्कर्ट पहनी थी। असलम भी लूँगी में ही था।

आयशा : वाह आप तो चाय बना लाए। कुछ इनको भी सिखाइए ना।

शिवा: घर में मैंने भी कभी नहीं बनाई है मालिनी के आने के बाद से । हाँ पहले मैं बनाता था।

असलम: आऽऽऽह सुबह से लैप्टॉप देखा ?

शिवा: हाँ मालिनी का फ़ोन आया था । नंगी ही है अभी भी। लगता है सच में वो दोनों आज नंगे ही रहेंगे। वैसे नोर्मल बात कर रही थी।

असलम: चल मैं भी आता हूँ देखने कि वहाँ क्या हो रहा है? पहले फ़्रेश हो जाता हूँ।

आयशा: आगे का क्या सोचा है? क्या ये सबूत दिखाओगे पापा और मालिनी को?

शिवा उसकी नंगी टाँगों पर हाथ फेरकर बोला: उससे क्या होगा? वैसे भी मैं ये सब इसलिए तो कर नहीं रहा हूँ।

आयशा: सच बताओ ना क्या चाहते हो?

शिवा: मैं उनकी चुदाई का हिस्सा बनना चाहता हूँ बस और कुछ नहीं।

आयशा: तो फिर इसमें समस्या क्या है ? जाकर बोल दो ना सीधे सीधे। वो तो मान ही जाएँगे।

शिवा: हिम्मत नहीं जुटा पाता । यही सच है।

आयशा खड़ी हुई और अपनी स्कर्ट ठीक करके उसके पास से जाने लगी। शिवा उसको पकड़ लिया और बोला: पैंटी पहनी हो क्या?

आयशा हँसकर : ख़ुद ही चेक कर लो ना?

शिवा ने उसकी स्कर्ट उठाई और बिना पैंटी की उसकी मस्त गाँड़ और बुर देखकर बोला: यार तुम भी मालिनी की तरह एक गरम औरत हो। ह्म्म्म्म्म। वह उसके बुर और चूतरों को सहलाया और चिकने बदन के स्पर्श से मज़े से भर उठा।

आयशा हँसती हुई चली गयी। शायद वो दूसरे कमरे का बाथरूम उपयोग करेगी शिवा सोचा।

वो फिर लैप्टॉप को देखा और वहाँ अब पापा और मालिनी नंगे सोफ़े पर बैठ कर चाय पी रहे थे।

राजीव जानता था कि शिवा उनको देख रहा है। वो फ़ैसला किया कि उसको ऐसा शो दिखाएगा कि वो भी क्या जीवन भर याद रखेगा। अब वो चाय पीते हुए उसकी चूचियाँ सहला कर बोला: बेटा रात को मज़ा आया ना?

मालिनी: जी पापा बहुत मज़ा आया। पर ये नंगे बैठना बड़ा अजीब लग रहा है। सिर्फ़ नायटी पहन लूँ?

राजीव: अरे नहीं । इसी में तो मज़ा है मेरी बहू रानी। वो उसके निपल्ज़ ऐंठ कर बोला।

मालिनी: उफफफफ पापा सुबह सुबह क्या कर रहे हो?

राजीव: बेटा सुबह की चुदाई भी मस्त होती । आओ शुरू करते हैं।

अब वो आकर सोफ़े में बैठा और मालिनी को अपनी गोद में बिठाकर उसकी चूचियाँ चूसने लगा। बारी बारी से दोनों चूचियाँ चूसकर बोला: बेटा जब माँ बनोगी ना। तो मैं इसका ही दूध चाय में पीऊँगा । ठीक है ना? वैसे जब तुम्हारी सास दो बार माँ बनी थी तो वो भी मुझे दो दो साल इसका दूध चाय में पिलाती थी।

शिवा का लण्ड खड़ा हो गया था और असलम बोला: साला तेरा बाप कुत्ता है। तेरी स्वर्गीय माँ के बारे में कुछ भी बोले जा रहा है।

शिवा अपना लंड रगड़ते हुए बोला: उफफफफ यार तू मेरी माँ को नहीं जानता ना इसलिए ऐसा कह रहा है।उफफफ क्या माल थी वो भी अपने ज़माने में।

आयशा हैरानी से : क्या कह रहे हो ?

शिवा: हाँ सच कह रहा हूँ। बहुत गरम माल थी मेरी मम्मी भी। पापा शायद उनकी तरफ़ ध्यान नहीं देते थे हम बच्चों के बड़े होने के बाद। इसलिए मम्मी ने अपनी ही मज़े और मस्ती का सामान तय्यार किया हुआ था।

असलम: ओह शायद इसीलिए तुम अपने पापा के साथ मालिनी को चोदने की फ़ैंटसी लेकर आगे बढ़ रहे हो। सही कहा ना?

शिवा: हाँ सच है मैंने मम्मी को कई तरह से रंगरेलियाँ मनाते हुए देखा है। इसलिए मुझे भी ये सब करने की इच्छा होती है।

असलम: पर शादी तक तो तुम बिलकुल कुँवारे थे । उस समय कैसे कंट्रोल किया?

शिवा: हाँ शादी तक मैंने अपने आप को पूरा कंट्रोल किया था और सोचा था कि मम्मी जैसे कभी नहीं बनूँगा। पर शादी के बाद एक बार जो सेक्स का चस्का लगा तो बस पुरानी फंतासी वापस ज़ोर मारी और उसकी चक्कर में अपनी सास को भी चोद दिया। अब तो मन वेरायिटी चाहता है जैसे मम्मी चाहती थीं। ये है सच्चाई।

आयशा: बेचारा शिवा। इस काम में हम तो हमेशा तुम्हारे साथ रहेंगे। पर क्या ये हो सकता है की आपकी मम्मी मस्ती करती थीं और पापा को भनक भी नहीं होती होगी ?

शिवा: शायद नहीं होती होगी। क्योंकि कल मालिनी भी बोली थी ना कि पापा ने कई लड़कियों को माँ बनाया है। मुझे नहीं लगता है कि मम्मी को इसकी कुछ भी ख़बर थी।

असलम: तुम इतने विश्वास से कैसे कह सकते हो?

शिवा: इसलिए कि मैंने कभी पापा और मम्मी को इस मुद्दे पर लड़ते नहीं देखा।

आयशा: हो सकता हो तुमको पता नहीं चला हो।

शिवा: हो ही नहीं सकता क्योंकि मैं एक वोएर हूँ। मतलब मुझे पापा मम्मी के बेडरूम में ताँक़ झाँक करने की आदत थी। मैंने उनको कई बार चुदाई करते भी देखा था।

कमरे में पिंडरोप चुप्पी छा गयी। असलम और आयशा सोचने लगे कि शिवा और ऐसा चरित्र? अविश्वनीय सा लगता है।

उधर लैप्टॉप में सबकी निगाह चिपक गयी थी। मालिनी अब पापा के घुटनों के बीच आकर उनका लण्ड चूस रही थी। राजीव इस ऐंगल से बैठा था ताकि सब कुछ कैम में साफ़ साफ़ दिखे। फिर मालिनी उठी और राजीव ने बैठे हुए उसकी एक टाँग अपने कंधे पर रखी और उसकी बुर चूसने लगा। मालिनी आऽऽऽह कर उठी। अब राजीव उसको उठाकर सामने अपनी गोद में बिठाया और मालिनी अपने हाथ से उसके लौड़े को अपनी बुर में डाली और ऊपर नीचे होने लगी। राजीव उसके दोनों चूतरों को पकड़कर फैलाकर उसे चोद रहा था।वो झुक कर उसकी चूचि भी चूस रहा था। थोड़ी देर बाद वो उसे उठाया और घुमाया ताकि उसकी पीठ राजीव की तरफ़ हो जाए और इस हालत में फिर से मालिनी ने लौड़ा अंदर अपनी बुर में डाला और चुदवाने लगी।

इस पोज़ीशन में शिवा लोगों को सब कुछ साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था,यही राजीव चाहता था कि शिवा सब कुछ अच्छे से देख ले।यहाँ तक कि लंड अंदर बाहर होते हुए भी दिख रहा था । थोड़ी देर बाद राजीव उसको फिर से उठाया और उसको इस तरह से घोड़ी बनाया ताकि उसकी चुदाई सबको कैम में दिखाई दे। वह अब सोफ़े के सहारे खड़ी थी और झुक कर आगे को हो गयी थी। इसकी लटकी हुई चूचियाँ दबाकर वो उसके पीछे आके उसको चोदने लगा।

 


शिवा देखा कि कैसे पापा का मस्त लौड़ा असकी बीवी की बुर में अंदर बाहर हो रहा था। अब राजीव उसके चूतरों पर चपत लगाने लगा और बोला: आऽऽऽऽह क्या चिकनी लौड़िया है मेरी जान। उफफफ कितना चोदूँ दिल नहीं भरता। आऽऽऽऽऽह साऽऽऽऽऽऽऽल्ली रँडीइइइइइइइइइइ। ले और ले।

मालिनी भी मस्ती में आकर अपनी गाँड़ को पीछे दबाकर: उइइइइइइ आऽऽऽऽऽह और जोओओओओओओओर से चोओओओओओदो अपनी रँडीइइइइइइइ बहूउउउउउउ को । फ़ाआऽऽऽऽऽऽड़ दो मेरी चूउउउउउउउउत पाआऽऽऽऽऽऽऽपा।

अब वो दोनों झड़ने लगे। राजीव ने अपना लौड़ा बाहर निकाला और मालिनी के मुँह के पास अपना लौड़ा ले आया। अब मालिनी भी रँडी की तरह उसे चूसने लगी और वो झड़ने लगा। मालिनी उसका पूरा रस पिये जा रही थी। वो सुपाडे को जीभ से चाट कर शांत भी की।

शिवा बड़बड़ाने लगा: आऽऽऽह मालिनी तो मम्मी की तरह पूरी रँडी बनती जा रही है। आऽऽऽह्ह्ह्ब्ब।मम्मी भी ऐसा ही चुदवाती थी ।हाऽऽऽऽय्य ।

वो अपना लंड दबाए जा रहा था। आयशा उस पर तरस खाई और उसका लंड पैंट से बाहर निकाली और उसे चूसने लगी। जल्दी ही वोझड़ गया और आयशा भी उसका पानी पी गयी। असलम ने आयशा को नंगी किया और वहीं उसको चोदने लगा। जल्दी ही चुदाई की आवाज़ों से कमरा गूँज उठा और वो दोनों भी झड़ गए।

आयशा : शिवा आप किसकी मम्मी की बात कर रहे हो अपनी या मालिनी की?

शिवा: आऽऽऽहहह मैं अपनी मम्मी की बात कर रहा हूँ। वो भी ऐसे ही लंड का रस पीतीं थीं जैसे तुमने और मालिनी ने अभी पिया।

शिवा की निगाह अभी भी लैप्टॉप पर ही थी। दोनों ससुर बहू बाथरूम से फ़्रेश होकर आ गए थे और दीवान में साथ ही लेटे हुए थे। राजीव का हाथ अभी भी अपनी बहू के चिकने बदन पर घूम रहा था। मालिनी का हाथ भी ससुर की छाती पर था और वो उसके बालों से खेल रही थी।

शिवा: देखो ऐसा लगता है ना कि प्रेमी और प्रेमिका प्यार कर रहे हैं। कौन बोलेगा ससुर और बहू हैं ये दोनों।

आयशा: चलो ना जी भर के मज़े ले लेने दो। कल तो आप पहुँच ही जाओगे।

असलम नाश्ता करके ऑफ़िस चला गया। शिवा भी नहा के नाश्ता किया और लैप्टॉप भी देखता रहा। पापा और मालिनी ने नंगे ही नाश्ता किया। बाद ने टी वी देखे एक दूसरे से लिपट कर। मालिनी अब उसका लंड सहला रही थी।

असलम के जाने के बाद आयशा आकर शिवा के साथ बैठ कर लैपटॉप देख रही थी। राजीव और मालिनी अभी भी नंगे दीवान पर लेते हुए एक दूसरे के बदन से खेल रहे थे।

मालिनी: उफफफ पापा आपने तो थका ही दिया। कितने आसनो में अपनी बहु को मज़ा दिया आपने।

राजीव: बेटा सच में बहुत मज़ा आ रहा है। कल से तुम मेरे साथ नहीं सोओगी ये सोच कर मैं उदास हुए जा रहा हूँ।

मालिनी हँसकर : मुझे भी तो अपने पति को समय देना है।

राजीव जानता था कि शिवा रिकॉर्डिंग देखेगा या क्या पता लाइव ही देख रहा हो। सो वह बोला: बेटा एक बात बताओ अब तो तुम दिन में मेरी बीवी और रात को शिवा की बीवी की तरह ही रहती हो। अगर मैं ये बात शिवा को बता दूँ और वो मान जाए तो हर समय तुम हम दोनों की बीवी की तरह साथ में रह सकती हो।

मालिनी: उफ़्फ़ पापा ये कैसे हो सकता है? ये बात शिवा क्यों मानेंगे?

राजीव: अगर वो मान गया तो तुमको कोई ऐतराज़ होगा क्या?

मालिनी: आऽऽह पापा वो मानेंगे नहीं और मुझे तलाक़ दे देंगे।

राजीव: अगर वो तलाक़ दे देता है तो मैं तुमसे शादी कर लूँगा। तब तो ठीक है ना?

शिवा आयशा को बोला: देखो पापा क्या क्या बोल रहे हैं? उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या कमीना आदमी है मेरा बाप? वो अपना लौड़ा दबाकर बोला जो कि फिर से खड़ा हो चुका था।

आयशा: और तुम कम कमीने हो जो अपनी बीवी को अपने बाप से चुदता देख कर ख़ुश हो रहे हो ? ये अच्छा मौक़ा है तुम्हारे लिए। तुम और तुम्हारे पापा दोनों मालिनी को एक साथ चोदना चाहते हो अपनी बीवी की तरह। फिर मुश्किल क्या है? वो शिवा का लौड़ा लोअर के ऊपर से दबाते हुए बोली।

शिवा: मुश्किल है शुरुआत कैसे हो? कौन पहले बोले और कैसे मालिनी को मनायें ?

आयशा: ये काम तो मैं भी कर सकती हूँ। अब वो लम्बे लम्बे स्ट्रोक मारकर उसका लौड़ा सहला रही थी।

उधर मालिनी: पापा ,क्या शिवा ऐसी बात के लिए कभी भी राज़ी हो सकते हैं?

राजीव: अरे उसकी छोड़ो। अपनी बताओ कि तुमको इस तरह के इंतज़ाम में कोई ऐतराज़ है क्या?

मालिनी: इसका मतलब है कि आप दोनों मुझे एक साथ प्यार करेंगे? और मैं रात को किसके साथ सोऊँगी?

राजीव: अरे कोई प्लान बन ही जाएगा । अगर शिवा मान गया तो हम तीनों एक ही बिस्तर पर भी सो सकते है। उसमें क्या हर्ज है।

शिवा ने अपना लोअर नीचे किया और लौड़ा बाहर निकाला और आयशा को बोला: अपना गाउन उतारो और मेरे लंड पर बैठो। वह अब बहुत उत्तेजित हो गया था।

आयशा हँसते हुए नंगी हुई और उसकी ओर पीठ करके उसके गोद में बैठी और लौड़े को अपनी बुर के अंदर कर ली और धीरे धीरे गाँड़ उछालने लगी। इस पोज़ीशन में वह दोनों लैप्टॉप देख पा रहे थे।

शिवा: उफफफफ पापा वही कह रहे हैं जो मैं चाहता हूँ। आऽऽऽहाह । वो नीचे से अपनी कमर उछाल कर बोला।

मालिनी: उफफफ पापा आप दोनों के साथ रात भर और वो भी नंगे । आऽऽहहह मेरी बुर गीली होने लगी है पापा।

राजीव ने उसकी जाँघों को फैलाया और उसकी बुर में दो ऊँगली डालकर बाहर निकाला और बोला: आऽऽह सच बिलकुल गीली हो चुकी हो। अभी तो चुदीं थी फिर गरम हो गयी? वो अपनी उँगलियाँ चाटने लगा।

मालिनी: उफफफफ पापा आप ऐसी बातें करेंगे तो गरम नहीं होऊँगी क्या?

राजीव: इसका मतलब है कि तुम भी यही चाहती हो। वो फिर से उसकी बुर में उँगलियाँ डाल के अंदर बाहर करते हुए बोला।

शिवा भी मालिनी की एक तरह से हाँ सुनकर जोश में आकर नीचे से अपनी गाँड़ उछालकर आयशा को चोदने लगा।

अब राजीव ने मालिनी को सीधे लिटाया और उसकी टाँगें मोड़कर ऊपर उठाकर फैलायी और उनके बीच में अपना मुँह घुसाकर उसकी बुर चाटने लगा।

मालिनी भी अपनी कमर उछालकर उसके मुँह पर अपनी बुर दबाकर मस्ती से बोली: आऽऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽऽपा । मस्त लग रहाआऽऽऽऽऽऽऽ है। उफफफफ पाआऽऽऽपा कैसा लगेगा जब आप दोनों मुझे आऽऽऽऽहहह चोओओओओओओदेंगे !!!!

राजीव भी अब जल्दी जल्दी अपनी जीभ और होंठों के मदद से उसे मस्ती से भरने लगा था।

शिवा मालिनी की बात सुनकर जोश में आकर चुदाई करने लगा।

इधर आयशा भी अपनी गाँड़ उछालकर चुदवा रही थी और शिवा उसकी चूचियाँ दोनों पंजों में दबोचकर मसल रहा था। आयशा भी अब आऽऽऽऽऽह उइइइइइइइज माँआऽऽऽऽऽऽऽ चिल्ला रही थी।

जल्दी ही राजीव ने अपना हमला तेज़ किया और एक ऊँगली को थूक से गीला करके उसकी गाँड़ में भी डाल दिया। अब उसकी जीभ मालिनी की क्लिट को छेड़ रही थी और अब मालिनी डबल हमले से घायल होकर आऽऽऽऽऽऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽऽऽऽपा मैं गयीइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी। उसने अपनी जाँघें भींच लीं और राजीव का मुँह वहाँ जैसे दो मुलायम खम्बों के बीच फँस सा गया। वह उसकी बुर से निकालता रस पिए जा रहा था।

उधर मालिनी का स्खलन आयशा और शिवा को भी उत्तेजित कर गया और वो भी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ह्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगे।

बाद में शिवा आयशा जब फ़्रेश होकर बैठे तो शिवा बोला: अब जब मालिनी भी हम दोनों से एक साथ चुदाई के लिए तय्यार है, तो आगे कैसे बढ़ा जाए ?

आयशा: मैं उसको बताऊँ कि आप भी यही चाहते हो?

शिवा: हाँ ये एक सम्भावना हो सकती है। पर पापा को कैसे बताएँगे?

आयशा: मुझे अपने पापा से चुदवा दो । मैं उनको भी बता दूँगी।

शिवा: आऽह तुम्हारे पास तो हर चीज़ का जवाब रहता है।

वो दोनों लैप्टॉप में देखे। अब मालिनी थक के सो गयी थी। राजीव अपने कमरे में बाथरूम में था। करवट में सोयी हुई मालिनी की बड़ी ठोस गाँड़ मस्त दिखाई दे रही थी।

तभी असलम का फ़ोन आया। आयशा: हाँ बोलो?

असलम: क्या हो रहा है?

आयशा: बस अभी एक राउंड चुदाई हुई है। लैप्टॉप पर बहु की बुर ससुर को चाटते देखकर हम दोनों भी जोश में आकर चुदाई कर लिए।

असलम: बढ़िया। अब क्या हो रहा है वहाँ?

आयशा: आज मालिनी ने मान लिया कि वो शिवा और उसके पापा से एक साथ चुदवाने को तय्यार है।

असलम: वाह ये बढ़िया हो गया। अब तो शिवा के मन की हो जाएगी।

आयशा: और मेरे भी मन की हो जाएगी। मैं भी शिवा के पापा से चुदवा लूँगी।

असलम हँसकर: वो बाद में चुदवाना। अब्बा का फ़ोन आया है कि वो और अम्मी अगले हफ़्ते हमारे यहाँ आएँगे।

आयशा ख़ुशी से : आऽऽह सच तब तो मज़ा आ जाएगा। कितने दिन हो गए दोनों से मज़ा लिए हुए।

शिवा चुपचाप उसकी बातें सुन रहा था। वो सोचा कि ये भी अपने ससुर से चुदवाने को मरे जा रही है जैसे मालिनी की प्यास अपने ससुर से बुझ रही है।

उधर असलम ने फ़ोन काट दिया था।

उस दिन जब असलम खाना खाने आया तो आयशा को एक राउंड चोदा। शिवा अपने लैप्टॉप पर ही था और उस समय पापा और मालिनी खाना खा रहे थे और अब भी वो दोनों पूरे नंगे ही थे। पापा ने मज़ाक़ में बहू की चूचियों पर दहीं मला और फिर उसे चाट कर साफ़ किया । शिवा का लौड़ा फिर खड़ा होने लगा। अब पापा ने अपने लौड़े और बॉल्ज़ पर भी दहीं लगाया और अब मालिनी ने उसे चाटकर साफ़ किया और खा गयी। शिवा सोच रहा था कि पापा को खाना खाते हुए भी सेक्स दिखाई दे रहा है । क्या सेक्सी आदमी है पापा भी?

इसी तरह अलग अलग तरीक़े से सेक्स का मज़ा लेते रहे ससुर और बहू । शिवा अब अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसको मसलने लगा।

असलम के जाने के बाद आयशा भी सो गयी। शिवा अभी भी लैप्टॉप से चिपका हुआ था। अब पापा ने मालिनी को अपने साथ लिटाया और दोनों सो गए। शिवा ने अपना कुछ काम निपटाया और जब वो दोनों सोकर उठे तो पापा ने मालिनी को कहा: बेटा आओ ६९ करते हैं। फिर ६९ के बाद मालिनी को ऊपर चढ़ाकर वो मस्त चुदाई का मज़ा लिए। आज मालिनी ऊपर सवारी करके पहले ख़ुद झड़ी और फिर अपने ससुर को भी झड़ने पर मजबूर कर दी।

उस रात भी पापा ने मालिनी के साथ ६९ किया और बाद में उसे अपने मुँह पर अपनी बुर रखकर बिठाया। और फिर आख़िर में उसकी ज़बरदस्त चुदाई किए।

रात में शिवा और असलम ने भी आयशा को एक साथ चोदा।

अगले दिन सुबह सुबह शिवा अपने घर पहुँचा। मालिनी ने उसका स्वागत उससे लिपट कर किया। उसकी हरकत से कोई कह नहीं सकता था कि ये लड़की अभी अभी पापा के कमरे से नंगी निकली है और कपड़े पहनकर आयी है पति से मिलने। उधर राजीव भी बाहर आया और शिवा ने उसको भी नमस्ते किया। राजीव ने बड़े प्यार से उसको गले लगाया। शिवा सोच रहा था कि कौन सोच सकता है कि ये मेरे पापा मेरी बीवी को चोद रहे हैं। इनका व्यवहार कितना सामान्य है।

अब वो अपने कमरे में गया तो मालिनी उसके पीछे आयी और कमरे में आते हुए उससे चिपक गयी और उसको चूमने लगी मानो बरसों की प्यासी हो। शिवा उसकी हरकत से हैरान रह गया। वह भी उसको चूमने लगा। जल्दी ही दोनों गरम हो गए और शिवा ने उसके कपड़े खोल दिया और ख़ुद भी नंगा होके उसको लिटाया और ऊपर आकर उसकी चूचियाँ चूसने लगा। वो सोचा कि दो दिन से पापा कितना चूसें हैं इनको। अब वो पूरे जोश से उसको चोदने लगा। मालिनी भी अपनी गाँड़ उछालकर नीचे से उसका साथ देने लगी। बीस मिनट की चुदाई के बाद वो दोनों झड़ गए। उनको पता नहीं था कि राजीव चुपचाप खिड़की से उनकी चुदाई देख रहा था। वो सोचा कि सच में मेरा बेटा चुदाई के मामले में मुझ पर ही गया है।

अब वो अपने कमरे में चला गया। वो सोचा कि इसका मतलब है कि शिवा को ससुर बहू की चुदाई से कोई समस्या नहीं है। वरना वह अपनी बीवी से नाराज़ होता और ऐसे मज़े से उसको नहीं चोदता। वह सोचा कि उसका ख़याल सही है कि शिवा भी यही चाहता है कि मालिनी मुझसे भी चुदे ।

पर क्या सच में वो चाहता है कि हम तीनो साथ में चुदाई करें ? फिर अचानक उसको एक आइडिया आया और वह मुस्कुराया। वह जानता था कि आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है। उसने अपना लंड दबाया।

तभी मालिनी अंदर राजीव के कमरे में आयी और बोली: पापा नाश्ता लगाऊँ क्या?

राजीव मालिनी को अपने गोद में खींचकर बोला: क्यों चुदवा लिया शिवा से ?

मालिनी हँसी और बोली: जैसा बाप वैसा बेटा। दो दिन बाद मिले हैं छोड़ने वाले थोड़े ही थे। पूरी घिसाई कर डाले हैं। वो नायटी के ऊपर से अपनी बुर खुजा के बोली।

राजीव भी हँसा और बोला: चलो सुबह सुबह तुम्हारी मस्ती हो गयी। फिर उसको चूमकर बोला : मज़ा तो तभी आएगा जब तुम हम दोनों से साथ में चुदवाओ। वो उसकी गाँड़ दबाकर बोला।

मालिनी: उफफफ पापा ये कैसे हो सकता है। अच्छा अब जाती हूँ वो नहाकर आ रहे होंगे ।

राजीव उसकी बुर को नायटी के ऊपर से दबाकर बोला: चलो इसको मज़ा तो मिला ना सुबह सुबह ।

दोनों हँसने लगे।

मालिनी किचन जाकर काम में लग गयी। जब सब नाश्ता कर रहे थे तब राजीव पूछा: अब बताओ तुम्हारी मुंबई की कॉन्फ़्रेन्स कैसे रही?

शिवा चौंक कर : ठीक ही रही पापा। वैसे कुछ ख़ास फ़ायदा नहीं हुआ जाने का। चलो घूम आए।

राजीव: तुम्हारा ध्यान कॉन्फ़्रेन्स में नहीं होगा, इसीलिए तुमको लगता है कि कोई फ़ायदा नहीं हुआ।

शिवा फिर से चौंका: क्या मतलब ?

राजीव: अगर तुम काम में पूरा ध्यान दोगे तभी ना तुमको कुछ फ़ायदा होगा।

मालिनी उठकर किचन में गयी और फ्रिज से पानी निकलाने लगी और गिलास में भरने लगी।

राजीव ने उसकी अनुपस्थिति का फ़ायदा उठाया और धीरे से बोला: तुम्हारा ध्यान तो अपने लैप्टॉप पर था जिसमें तुम ये देख रहे थे कि मैं और बहू क्या कर रहे हैं? सही कहा ना मैंने? इन घड़ियों में तुमने कैम इसीलिए लगाया था ना, कि देख सको कि मैं और बहू कैसे मज़ा करते हैं?

शिवा के चेहरे से हवाइयाँ उड़ने लगीं । वो हैरानी और शर्म से अपनी नज़रें झुका लिया।

राजीव मन ही मन मुस्कुराया और सोचा कि मुझे अपनी बीवी के साथ मस्ती करते देखकर इसने कोई आपत्ति नहीं की बल्कि शर्मा रहा है। सब वैसे ही हो रहा है जैसे मैंने सोचा था। वो मज़े से अपने बेटे की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करने लगा।

 
शिवा शर्मिंदा होकर बैठा था जब मालिनी पानी लेकर वापस आइ। राजीव ने देख लिया था कि शिवा विरोध के मूड में नहीं था। वो मन ही मन ख़ुश हुआ और बोला: बेटी तुमको पता है कि इस शिवा ने क्या किया है?

मालिनी ने सवालिया नज़रों से राजीव को देखा।

शिवा: पापा प्लीज़ रहने दीजिए ना।

राजीव: क्या रहने दूँ? तुमने काम ही ऐसा किया है? बहु इसने यहाँ घर में कैम लगायें हैं ताकि वह हम दोनों की चुदाई देख सके। राजीव ने जान बूझकर चुदाई शब्द का उपयोग किया था।

मालिनी का चेहरा सफ़ेद हो गया। वो हैरानी से शिवा और राजीव को देखने लगी। फिर उसे समझ में आया कि हे भगवान कितना अनर्थ हो गया है। वो भाग कर अपने कमरे में घुस गयी और बिस्तर पर औँधी गिर कर रोने लगी। उसे लगा कि सब कुछ ख़त्म हो गया। अब शिवा उसे तलाक़ दे ही देगा। वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगी।

उधर शिवा: पापा आपको मालिनी को बताने की क्या ज़रूरत थी?

राजीव: वाह कैसे नहीं बताता। तुमको ये सब करते हुए शर्म नहीं आयी?

शिवा धीरे से बोला: पापा आपको भी अपनी बहु के साथ ये सब करना चाहिए था? ये ग़लत नहीं है?

राजीव: नहीं ये ग़लत नहीं है क्योंकि मैंने बहु पर कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं की है। वह एक सुंदर औरत है और मैं भी एक ज़रूरत मंद मर्द हूँ। तुम्हारी मम्मी को गए इतने दिन हो गए हैं। मैंने कौन सी दूसरी शादी कर ली।

शिवा: पापा शायद मालिनी रो रही है, चलिए उसे चुप कराते हैं।

राजीव और शिवा उठकर मालिनी के कमरे में पहुँचे तो वो हिचकियाँ मार के रो रही थी। वो पेट के बल उलटा लेटी थी और नायटी ऊपर उठ जाने के कारण उसकी टाँगे घुटनो तक नंगी थीं । रोने के कारण उसका बदन हिले जा रहा था। शिवा और राजीव उसके मोटे नितम्बों को देखकर मस्त हो गए। अब उसकी एक तरफ़ शिवा और एक तरफ़ राजीव बैठे और राजीव बोला: बेटी क्यों रो रही हो? चलो चुप हो जाओ। वह उसकी पीठ सहला कर बोला। शिवा भी उसके कंधे सहलाया और बोला: जानू चुप हो जाओ।

अचानक मालिनी ने अपना सिर उठाया और उसका आँसुओं से भीगा चेहरा शिवा के सामने था। वह शिवा को बोली: आप मुझे माफ़ कर दो । मैं बहक गयी थी। मैं अब पापा के साथ ये सब कभी नहीं करूँगी। आप मुझे एक अलग से किराए का घर ले दो। मैं आपके साथ वहाँ भी रह लूँगी। प्लीज़ मुझे तलाक़ मत दीजिए।

शिवा उसकी बातें सुनकर बोला: अरे पगली ये सब क्या बोल रही हो? मैं तुमको कोई तलाक़ नहीं दूँगा। और वैसे भी पापा ने तुमको बहकाया है। वो दूसरी शादी का बोल कर तुमको तनाव देते थे। पर तुम ये सब छोड़ो । मैं हूँ ना।

मालिनी शिवा की गोद में सिर रखकर सिसकियाँ भर रही थी। शिवा उसके आँसू पोंछकर बोला: चलो मुँह धो लो।

मालिनी: वैसे मुझे ऐसा बनाने में आपका भी हाथ है?

शिवा: मेरा? वो कैसे?

मालिनी: आपने मेरी मम्मी से सम्बंध बनाए तो मेरे मन में भी एक बदला लेने की इच्छा जागी और मैंने आपके पापा से सम्बंध बना लिए।

राजीव हँसा और बोला: तो चलो हो गया ना हिसाब बराबर। चलो शिवा ने तुम्हारी माँ चोद दी और तुमने उसके बाप से चुदवा लिया। हिसाब बराबर हो गया ना? अब रोना धोना बंद करो और मुँह धो कर आओ।

मालिनी ने राजीव की बात अनसुनि कर दी और शिवा को बोली: अब क्या होगा? क्या हम अलग रहेंगे?

शिवा: नहीं हम सब साथ ही रहेंगे और वैसे भी ये तो घर की ही बात है ना। तुम किसी बाहर वाले से तो चुदवाई नहीं हो ना? पापा तो अपने है ना?

राजीव हँसकर: हाँ बिलकुल जैसे तुम्हारी मम्मी भी शिवा की अपनी सास ही थी ना। है ना शिवा?

शिवा: पापा आप भी ना। बार बार इसकी मम्मी को क्यों बीच में ले आते हैं?

मालिनी: मैं सच कहती हूँ कि मैंने पापा का बहुत विरोध किया। पर मेरे दिल में डर बैठ गया था कि पापा दूसरी शादी करेंगे तो आपका क्या होगा। पापा तो बहुत दिनों से कोशिश में लगे थे पर मैंने कई दिनों तक इनको हाथ नहीं लगाने दिया । पर आख़िर में मजबूर हो गयी और मैं इनको और मना नहीं कर पाई। मुझे माफ़ कर दीजिए प्लीज़।

अब शिवा उसके गाल चूमा और बोला: मैं तुमसे बिलकुल नाराज़ नहीं हूँ। इस लिए अब चुप हो जाओ। और ये बात मन से निकाल दो कि हम अलग रहेंगे। मैंने देखा है कि तुम और पापा एक दूसरे को कितना पसंद करते हो। दोनों एक दिन रात पूरे नंगे रहे और रात दिन प्यार करते रहे।

मालिनी शर्म से लाल होकर: आऽऽऽऽह आपने सब देख लिया?

राजीव : और क्या ? इसने सब देख लिया है। अब तुम चुप हो जाओ और परेशान ना हो।

शिवा: मैं तुमको बहुत प्यार करता हूँ। और अब पता चल गया है कि पापा भी तुमको बहुत प्यार करते हैं। तुम भी हम दोनों को बहुत प्यार करती हो, ऐसी हालत में हम सब साथ ही रहेंगे ना।

अब राजीव फिर से हँसा और बोला: अरे मेरी प्यारी बहू , हम सब साथ रहेंगे। अब शिवा को जब सब पता ही है और वो हमारी चुदाई देख ही चुका है। तो अब छिपाना कैसा? अब तुम खुलकर हम दोनों की बीवी बनकर रहोगी।और अपनी जवानी हम बाप बेटे पर लुटाओगी। हैं ना शिवा?

शिवा मुस्कुरा दिया।

ये कहकर राजीव ने एक बहुत ही बोल्ड हरकत की और मालिनी के एक नितम्ब को सहलाने लगा।

मालिनी: आह पापा क्या कर रहे हैं? हाथ हटायिए ना।

राजीव: अरे बेटा अब क्यों शर्मा रही हो। अब तो खुल कर अपनी जवानी का मज़ा दो हम दोनों बाप बेटे को।

यह कहकर वो अपने पंजे में उसकी एक गाँड़ को दबाने लगा। शिवा उसकी इस हरकत से गरम होने लगा । उधर राजीव ने शिवा का एक हाथ पकड़ा और उसको मालिनी के दूसरे नितम्ब पर रख दिया। शिवा भी मस्ती से भर गया। वह भी उसकी मस्त मोटी गाँड़ दबाने लगा। आऽऽऽह यही वो पल थे जिनका उसे इंतज़ार था । आज वो और पापा दोनों मालिनी की एक एक गाँड़ मसल रहे हैं। बिलकुल वैसे ही जैसे कई साल पहले पापा के दोनों दोस्त मम्मी की एक एक गाँड़ मसल रहे थे और वो रोशनदान से छुपकर अपनी मम्मी को पापा के दो दोस्तों से मज़ा करते देखा करता था।

मालिनी ने महसूस किया कि उसकी गाँड़ पर दोनों के ही हाथ हैं। वो अजीब सा अनुभव की और गरम होने लगी। उसका मुँह शिवा की गोद में था और वो महसूस करके कि उसका लौड़ा खड़ा हो रहा है मस्ती से भरने लगी और बोली: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ आप लोग ये क्या कर रहे हो? आऽऽऽह। छी हाथ हटाओ ना। छोड़ो मुझे।

तभी शिवा देखा कि राजीव ने उसकी नायटी उठानी शुरू की और शिवा के मुँह से निकल गया: जानू कमर उठाओ ना प्लीज़।

राजीव उसकी बात सुनकर मुस्कुराया। यहाँ शिवा ख़ुद चाहता था कि उसकी बीवी उसके बाप के सामने नंगी हो जाए। अब राजीव का भी लौड़ा खड़ा होने लगा।

मालिनी भी अब विरोध नहीं की और गरम होकर अपनी गाँड़ उठा दी और राजीव ने नायटी कमर तक चढ़ा दी और उसके गोरे गोरे मोटे चूतर अपनी छटा बिखेरने लगे। अब शिवा और राजीव उसके एक एक चूतर मसलने लगे और शिवा ने देखा कि पापा ने बहू की गाँड़ की दरार में भी अपना हाथ सरका दिया था। शिवा को यह दृश्य बहुत ही कामुक लगा और तभी मालिनी ने उसके लौड़े को लोअर के ऊपर से पकड़ा और सहलाने लगी। कमरा गरमाने लगा था।

तभी शिवा का फ़ोन बजा। फ़ोन राजीव ने उठाया और नाम पढ़ा – असलम।

शिवा के तो प्राण सूख गए वो जल्दी से फ़ोन लेकर काट दिया। राजीव को उसकी हरकत से थोड़ी हैरानी हुई।

तभी मालिनी बोली: मुझे छोड़िए अभी । मुझे नहाना है।

राजीव उसकी गाँड़ और बुर के छेदों को सहलाकर बोला: बेटी एक बार चुदवा लो ना? अब तो बाप बेटा साथ में चोदेंगे।

शिवा: हाँ मालिनी चलो ना एक राउंड हो जाए।

मालिनी: अभी नहीं। आप लोग भी नहा लो और मैं भी नहा लेती हूँ। अभी बाई भी काम करेगी। आज आप दुकान मत जायीये ना प्लीज़।

शिवा उसको चूमकर: ठीक है जानू, शाम को चला जाऊँगा।

राजीव उसकी बुर और गाँड़ को सहला कर बोला: ठीक है जैसा तुम कहो। फिर वो ड्रॉइंग रूम में चला गया। शिवा भी वहाँ आ गया क्योंकि मालिनी नहाने चली गयी थी। वो अपना फ़ोन उठाया और असलम को मेसिज किया- सब ठीक है। बाद में बात करूँगा।

राजीव: ये असलम क्यों फ़ोन किया था?

शिवा: वो पापा ऐसे ही कोई काम होगा।

फिर राजीव पूछा: ये कैम किसने फ़िट किया था?

शिवा उसको सब विस्तार से बताया । राजीव: वैसे तुम्हारी सास का क्या हाल है? हाल में बात हुई क्या?

शिवा: नहीं पापा बहुत दिन से बात नहीं हुई है।

तभी मालिनी की आवाज़ आयी : आओ नहा लो आप।

शिवा उठकर अपने कमरे में गया और अपना मोबाइल वहीं छोड़ गया। तभी फ़ोन बजा । राजीव ने देखा कि फिर से असलम का ही था। वो जल्दी से उठाया और खाँसकर बोला: हेलो।

असलम को खाँसी की आवाज़ में शिवा की आवाज़ नहीं समझ में आइ और वो बोला: यार तू आज सुबह जल्दी में अपने कपड़े यही छोड़ गया है। नहाने के बाद रात वाले कपड़े भी यही पड़ें है। कल आकर ले जाना। आयशा धुलवा कर रखेगी।

राजीव: अच्छा । कहकर खाँसने लगा। ताकि असलम उसकी आवाज़ ना पहचान सके।

असलम: अरे क्या हुआ बहुत खाँस रहा है। अच्छा ये बता जब तू घर पहुँचा तो भाभी अभी भी नंगी थी जैसे रात में तेरे पापा के साथ नंगी चुदवाने के समय थी? या कपड़े पहन चुकी थी?

राजीव सन्न रह गया । उफफफ ये शिवा भी असलम को अपनी बीवी और अपने बाप की चुदाई दिखा दिया है। ये लड़का भी पागल हो गया है क्या? कोई अपने घर की बात इस तरह बाहर वालों से बताता है भला?

राजीव खाँसके: कपड़ों में थी।

असलम: लो आयशा से भी बात करो। वो भी मरे जा रही है ये जानने को कि तुम अब क्या करोगे अपनी बीवी और अपने बाप के साथ?

तभी आयशा की आवाज़ आइ: फिर मेरे शेर अब तक मालिनी को चोदे की नहीं? मेरी तो गाँड़ और फुद्दी दोनों लेकर ही मानते हो। मालिनी की भी गाँड़ तो आपके पापा खोल ही चुके हैं अब आप कब लोगे उसकी गाँड़?

राजीव सोचा कि उफफफ हमारे घर की हर बात इन दोनों को मालूम है। ये नालायक शिवा ने क्या कर दिया?

वो खाँस कर: बाद में बताऊँगा। पापा आ गए। वो यह कहकर खाँसकर फ़ोन काट दिया।

राजीव सोच में डूब गया कि बात इस तरह बिगड़ जाएगी वो कभी सोचा नहीं था। इसका मतलब ये हुआ कि शिवा मुंबई गया ही नहीं और वो असलम के घर में था जहाँ सबने ससुर बहू की चुदाई और नंगे बदन का मज़ा लिया और आयशा भी शिवा से अच्छे से चुदी है। वो अपना सिर हिलाया और सोचा कि जैसे हर सवाल का एक जवाब होता है। इस परिस्थिति से भी कोई ना कोई रास्ते से निपट ही लेंगे। वो भी नहाने चला गया।

 
राजीव और शिवा नहा कर ड्रॉइंग रूम में इकठ्ठे हुए।मालिनी अभी भी किचन में ही थी। राजीव : चलो शिवा बाज़ार होकर आते हैं। बेटी कुछ मंगाना है क्या बाज़ार से ?

मालिनी: जी पापा लिस्ट बनाकर रखी है अभी लाई।

वो लिस्ट लेकर आयी तो दोनों उसे देखते ही रह गए। उसने आज एक बहुत ही सुंदर साड़ी पहनी थी और ब्लाउस स्लीव्लेस था और लो कट था जिसमें से उसकी गहरी क्लीवेज़ साफ़ दिख रही थी।

राजीव लिस्ट लेकर उसके हाथ को पकड़ा और बोला: उफफफ बेबी क्या मस्त दिख रही हो? वह उसकी कलाई सहलाने लगा।

वो मुस्कुराई और बोली: पापा छोड़िए ना , अभी बाई है यहाँ।

राजीव ने अपना मुँह उसके खुले पेट पर रखकर उसकी नाभि को चूमा और जीभ से चाटा और बोला: उफफफफ आज बहुत महक रही हो बेटी।

शिवा आँखें फाड़े ससुर बहू की प्रेम लीला देख रहा था और उसके लौड़े ने सिर उठाना शुरू कर दिया था। अब मालिनी शिवा को देखी और उसके पास आइ और बोली: आपको भी मेरी तारीफ़ में कुछ कहना है क्या?

शिवा उसको खींचकर अपनी गोद में बिठाया और बोला: मुझे तुम्हारे लब चूसने हैं। और वो उसके होंठ चूसने लगा। मालिनी थोड़ी देर मज़े से चूसवाई फिर बोली: आऽऽह छोड़िए अब । बाक़ी का बाई के जाने के बाद के लिए रखिए।

वह खड़ी हुई शिवा ने उसके गाँड़ को सहलाया और बोला: पापा आपने अच्छा किया इसकी गाँड़ खोल दी। आज मैं तो इसकी गाँड़ ही मारूँगा।

मालिनी हँसती हुई जाने लगी तो राजीव बोला: बेटी मटक के चल कर दिखाओ ना।

वो हँसी और गाँड़ मटका कर किचन में घुस गयी।

वो बाई का काम ख़त्म होने का इंतज़ार करने लगे।

शिवा और राजीव बाज़ार चले गए। रास्ते में राजीव बोला: ये बताओ कि तुमने हमारी विडीओ असलम और उसकी बीवी से क्यों शेयर की?

शिवा अब दूसरी बार ग़लत क़िस्म से पकड़ा गया था। वो बोला: पापा आपको कैसे पता?

राजीव: मुझे तो ये भी पता है कि तुम मुंबई गए ही नहीं थे और असलम के घर में आयशा की चुदाई कर रहे थे ।

शिवा हैरान होकर: पापा पर ये आपको कैसे पता चला?

अब राजीव ने उसे असलम और आयशा से हुई बात के बारे में बताया। शिवा समझ गया कि पापा ने अपनी चतुराई से उन लोगों से सब निकलवा लिया होगा। वो बोला: पापा मुझे माफ़ कर दीजिए। पता नहीं मैंने ऐसा क्यों किया? मगर ये सच है कि मुझे आयशा को चोदने में मज़ा आता है। ख़ासकर जब उसका पति और मैं दोनों मिलकर उसे चोदतें हैं।

राजीव: तो क्या तुम मालिनी को भी असलम से चुदवाओगे?

शिवा: अगर मालिनी ख़ुद से चाहेगी तो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं होगा।

राजीव: बेटा मैं सोचता था कि मालिनी घर की अमानत है उसे घर में ही रहना चाहिए। अब हम दोनों से तो चुदेगी ही, बाहर वालों से उसे क्यों चुदवाएँ?

शिवा: पापा चुदाई मर्ज़ी से होनी चाहिए फिर चाहे घर वालों से हो या बाहर वालों से क्या फ़र्क़ पड़ता है। बस बदनामी नहीं होनी चाहिए।

राजीव: हाँ यह सही कहा तुमने बस बदनामी नहीं होनी चाहिए।

शिवा हँसकर: और पापा वैसे भी आपने इतने मज़े लिए है पर कभी किसी को भनक नहीं लगने दी। है ना?

राजीव हँसकर: हाँ बेटा ये सही है। अगर तुम कैम नहीं लगाते तो इसकी भी भनक नहीं होती तुम्हें।

शिवा: पापा, मम्मी ने क्या क्या मज़े किए होंगे, आपको कभी भनक नहीं लगी होगी। है ना?

राजीव चौंक कर: मतलब? कैसे मज़े?

शिवा हँसकर : पापा मेरा मतलब है अगर उन्होंने भी इस तरह से मज़े लिए होंगे तो आपको थोड़े ना पता चला होगा?

राजीव: ओह मगर सविता ऐसी नहीं थी।

शिवा सोचा कि ये सही समय नहीं है ये बताने का कि मम्मी कैसी औरत थी और उसने क्या क्या देखा है इसी घर में ? वो बोला: पापा असलम और आयशा वाली बात अभी मत बताना मालिनी को। ये सही समय पर हम बताएँगे। ठीक है ना?

राजीव: ठीक है । मैं उसे नहीं बताऊँगा।

शिवा: वैसे पापा आपसे मालिनी को चुदते देखकर आयशा बार बार बोली थी कि उसे आपसे चुदवाना है।

राजीव: सच ऐसा बोली थी? फिर तो यार उसकी ये इच्छा पूरी करनी होगी। वो लोअर के ऊपर से अपना लंड खुजा के बोला।

शिवा उसकी उत्तेजना को और बढ़ाने की सोचाऔर बोला: पापा वो भी अपने ससुर से चुदवा रही है और उसके सास के साथ भी वो लेज़्बीयन सेक्स करती है।

राजीव उत्तेजित होकर: वाह सच में तब वो तो मस्त माल होगी। जल्दी से दिलवाओ उसकी।

शिवा: पापा असलम भी तो मालिनी की लेना चाहता है। अगर वो मानेगी तो असलम भी आयशा को आपके नीचे लाने को तय्यार हो जाएगा।

राजीव: अरे मालिनी बाहर वाले के लिए जल्दी से नहीं मानेगी।

शिवा: पापा हम दोनों कोशिश करेंगे तो शायद मान जाए।

राजीव: ठीक है देखते हैं।

फिर वो बाज़ार से सामान ख़रीदे और वापस घर आए। दोनों सोच में डूबे हुए थे। घर वापस आने पर मालिनी सामान सम्भालकर ड्रॉइंग रूम में आयी और अपने पल्लू से पसीना पोछने लगी।

दोनों मर्द उसको बड़ी प्यार भरी नज़रों से देख रहे थे।

राजीव: हमारी बहू थक गयी लगता है। आओ मेरे पास तुम्हारे कंधे दबा दूँ।

मालिनी हँसकर : पापा आप कंधे तो क्या दबाओगे पर ये पक्का है कि और बहुत कुछ दबा दोगे।

शिवा भी हँसकर : वो जो भी दबाएँगे उसमें तुमको मज़ा ही आएगा ना। जाओ दबवा लो।

मालिनी मुँह बनाकर: मुझे नहीं दबवाना । अभी बिलकुल थक गयी हूँ। थोड़ी देर चैन से बैठूँगी।

शिवा : पापा मैं मालिनी के लिए निम्बू का रस बना कर लाता हूँ। इसकी थकावट कम हो जाएगी।

राजीव: चलो मैं भी तुम्हारी मदद करता हूँ।

अब मालिनी हैरानी और प्यार भरी नज़रों से उन दोनों को देखती ही रह गयी और वो किचन में जाकर ख़ूब बर्तन इधर उधर करके आख़िर में जूस लेकर ही आए। शिवा ट्रे में तीन गिलास जूस लेकर आया। राजीव ने ट्रे में से एक गिलास मालिनी को दिया और बोला: लीजिए महारानी जी आपका जूस।

शिवा: पापा इसका नहीं निम्बू का जूस। शिवा राजीव के पास ही बैठ गया। मालिनी दूसरे सोफ़े पर बैठी थी।

इस पर तीनों हँसने लगे। अब सब जूस पीने लगे।

मालिनी: आऽऽह सच में इसको पीकर जान में जान आ गयी। आप दोनों को धन्यवाद।

शिवा: अगर तुम आराम करना चाहो तो कर लो।

मालिनी: अरे नहीं मैं ठीक हूँ। मुझे क्या हुआ है?

राजीव: सच में तुम ठीक हो?

मालिनी: हाँ हाँ मैं ठीक हूँ। ऐसा क्यों पूछ रहे हैं आप?

राजीव: वो क्या है ना अगर तुम ठीक हो ना तो कपड़े उतारो ना। हम भी देखें कि तुम कितनी ठीक हो?

मालिनी: उफफफ पापा आप भी ना। मुझे आपकी बात सुनकर बड़ा अजीब लग रहा है। पता नहीं मुझसे ये कैसे होगा आप दोनों के सामने।

शिवा: पापा आप भी अन्याय कर रहे हो। जब हम दोनों कपड़े पहनकर बैठे हैं तो भला उसे शर्म नहीं आएगी क्या?

राजीव: सही कहा। पता नहीं मुझे ये क्यों नहीं सूझा।

वो उठा और अपनी शर्ट और लोअर उतारके सिर्फ़ एक चड्डी में आ गया। शिवा भी सब उतार के चड्डी में आ गया। मालिनी दोनों बाप बेटे के हट्टे कट्टे बदन को देखकर अपनी बुर में गिलेपन का अहसास करने लगी। दोनों की चड्डी में से फूला हुआ लौड़ा साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था। अब दोनों फिर से बैठ गए और शिवा बोला: चलो जानू अब तुम्हारी बारी है।

मालिनी चुपचाप खड़ी हुई और अपनी साड़ी उतार दी। ब्लाउस और पेटिकोट में उसकी भरी हुई जवानी बहुत मादक लग रही थी।

राजीव: आऽऽऽह्हा बहु ज़रा मटक कर चल के दिखाओ ना।

वह अपना लंड दाबकर बोला।

मालिनी मुस्कुराई और अपनी गाँड़ मटका कर चल कर दिखाई। शिवा भी अब अपना लंड मसलने लगा था। अब मालिनी अपना ब्लाउस खोली और धीरे से हाथ उठाके उसे भी निकाली। उसकी बाल रहित चिकनी बग़लें देखते ही बनती थीं। अब वो ब्रा और पेटिकोट में थी। उफफफफ क्या मज़ेदार दृश्य है शिवा सोचा। अब वो अपनी ब्रा का स्ट्रैप भी खोली और धीरे से उसे भी निकाली। अब उसके मादक उन्नत उरोज उसके ससुर और पति के सामने थे। वो उनको एक एक हाथ में लेकर उन दोनों को दिखाई और बोली: ये पापा का और ये शिवा का। ठीक है ना?

दोनों बाप बेटा जैसे उसकी हरकतों से दीवाने हुए जा रहे थे। दोनों ने हाँ में सिर हिलाया। अब वो अपनी पेटिकोट का नाड़ा खोली और पलट कर खड़ी हो गयी। अब उसकी मस्तानी गाँड़ से कपड़ा ज्यों ज्यों नीचे आ रहा था उसकी हसीन गोरी गाँड़ उनके सामने आती जा रही थी। पूरी नंगी होकर वो अपने पैरों से पेटिकोट को झुककर निकाली और अपनी जाँघों को अलग की ताकि उसका ख़ज़ाना साफ़ साफ़ दिख जाए। उसकी बुर और गाँड़ को देखकर दोनों मस्ती से लंड मसलने लगे। अब वो पलटी और उसकी चिकनी बुर का थोड़ा सा हिस्सा ही दिखाई दे रहा था। अब वो राजीव के पास आयी और आकर उसके सामने उकड़ूँ बैठी। शिवा उसे ध्यान से देख रहा था।वह राजीव की छाती सहलायी और सहलाते हुए नीचे को आइ। वह उसकी मांसल जाँघों को भी सहलायी और उनको अलग करी। अब मालिनी ने अपना हाथ चड्डी के ऊपर से उसके लौड़े पर रखा और अपना मुँह डालकर उसकी चड्डी के ऊपर से गीले हिस्से को चाटा। फिर चड्डी में हाथ डालकर अपने ससुर के मस्त लौड़े को पकड़कर बाहर निकाली और चड्डी उतार दी। अब वो उसके लंड को सहलायी और सुपाड़ा अपने मुँह में लेकर उसके प्रीकम को जीभ से चाटी। शिवा बग़ल में बैठा इस दृश्य का मज़ा ले रहा था और सोच रहा था कि मैं इस बार बग़ल में बैठके ये सब देख रहा हूँ और अपनी मम्मी को यही सब करते मैं कमरे के रोशनदान से देखा करता था। उफफफफ मम्मी भी मामा लोगों का ऐसा ही चूसती थी। मालिनी का मुँह अब ऊपर नीचे हो रहा था। राजीव अब उसकी एक चूचि दबा रहा था और शिवा को भी दूसरी चूचि दबाने का इशारा किया । अब बाप बेटा उसकी एक एक चूचि दबा रहे थे और उसके निपल भी मसल रहे थे।

अब मालिनी ने अपना मुँह वहाँ से हटाकर शिवा को देखा और उसकी तरफ़ खिसक गयी और उसने शिवा के साथ भी वही सब किया जो अभी अभी उनसे पापा के साथ किया था। जब वो उसका लंड चूस रही थी तो भी उसकी मस्त चूचियाँ दोनों बाप बेटा दबा रहे थे। अब मालिनी खड़ी हुई और राजीव ने उसकी बुर में अपना मुँह डाल दिया। वो अपनी एक जाँघ उठाके उसके कंधे पर रखी जिससे वो उसकी पूरी बुर मस्ती से चाटने लगा। शिवा उठा और उसके पीछे जाकर उसकी गाँड़ के छेद को सहलाया और वहाँ जीभ ले जाके उसे कुरेदने लगा।

मालिनी मस्ती से भरकर : उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ पाआऽऽऽऽऽऽऽपा में झड़ जाऊँगीइइइइइइइइ। छोड़ो मुझे। ये कहकर वो राजीव के मुँह को बाहर की ओर धकेली। अब शिवा भी पीछे से हट गया।

मालिनी शिवा से बोली: उफफफ आप पीछे क्या कर रहे थे।

शिवा: रानी आज तुम्हारी गाँड़ मारूँगा। पापा ने तो तुम्हारी गाँड़ खोल ही दी है। उसी की जाँच कर रहा था।

मालिनी हँसने लगी। शिवा उसकी एक बाँह ऊपर किया और उसके बग़ल को चूमने और जीभ से चाटने लगा। राजीव भी उसका देखा देखी उसकी दूसरी बग़ल चाटने लगा।

राजीव: उफफक क्या मस्त गंध है।

शिवा: हाँ पापा बहुत ही मादक है ये गंध । वो उसकी बग़ल चाटते हुए बोला।

अब राजीव बोला: चलो मैं नीचे लेटता हूँ, तुम मेरे ऊपर आ जाओ और शिवा तुम इसकी पीछे से आकर गाँड़ मार लेना। पर पहले मेरे कमरे से KY jel ले आओ । शिवा जाकर जेल ले आया।

राजीव दीवान पर लेट गया था और उसकी कमर एकदम से दीवान के एक कोने तक पहुँच गयी थी। अब उसका खड़ा लंड पूरे उफ़ान पर था। मालिनी उसके ऊपर चढ़ी और उसका लंड अपनी गीली बुर में घुसा लिया। शिवा उसके पीछे से आकर उसके बड़े चूतरों के पीछे आकर खड़ा हो गया और उसकी गाँड़ के छेद में लूब लगाया। अब वो अपने लंड पर भी लूब लगाया और उसके सुपाडे को गाँड़ के छेद में रखा और अंदर को दबाने लगा। मालिनी ने अपने गाँड़ की मसल्स को बाहर की तरफ़ धकेला और सुपाड़ा अंदर घुस गया।

मालिनी: आऽऽऽहहह धीरे से करोओओओओओओ ना।

राजीव ने अपने हाथ से उसकी चूचियाँ मसली और शिवा ने उसके चूतरों को फैलाकर अपना लंड अंदर दबाना जारी रखा। अब मालिनी की गाँड़ में उसका लंड घुसता चला गाया। शिवा उसकी गाँड़ की कसावट से मस्त होकर बोला: उफफफफ क्या तंग छेद है रानी तुम्हारा। आऽऽऽऽऽह मज़ा आऽऽऽऽऽ गयाआऽऽऽऽऽऽ।

अब वो नीचे खड़े खड़े ही धक्का मारने लगा। अब मालिनी आगे पीछे होने लगी और सामने से ससुर का और पीछे से पति के मस्त लंड का दुगुना मज़ा लेने लगी। शिवा बीच बीच में उसके मोटे चूतर दाबकर उनपर एक चपत भी लगा देता था।

कमरा फ़च फ़च और ठप्प ठप्प की आवाज़ों से गूँजने लगा था।

मालिनी उत्तेजना से भर कर चिल्लाने लगी : आऽऽऽऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽऽपा मस्त लग रहा है झाऽऽयय्य शिवा फ़ाआऽऽऽऽऽऽऽऽड़ दो मेरीइइइइइइइइ गाँड़।

अब वो पागलों की तरह उछलकर चुदवा रही थी। वह पीछे की ओर गाँड़ दबाकर पूरा शिवा का लंड भी अपनी गाँड़ में निगल रही थी।

दोनों बाप बेटा उसकी बेशर्मी देखकर मस्त हो रहे थे। शिवा सोच रहा था कि ये तो मम्मी की तरह ही एक रँडी लग रही है। उसे याद था कि पापा जब बीमार पड़े थे तो मम्मी ऐसे ही उनके दो दोस्तों से चुदवाती थी बिलकुल इस रँडी की तरह। वो पुरानी बातें यादकरके और ज़्यादा गरम हो गया। और झड़ने लगा। वो जल्दी जल्दी कमर हिलाकर चिल्लाया: आऽऽऽऽऽह साआऽऽऽली रँडीइइइइइइइ ले मेरा लंड ले और ले । वो झड़ गया और उसका वीर्य मालिनी की गाँड़ से बाहर निकलने लगा।

अब मालिनी भी चिल्लाई: आऽऽऽह पापा मैं भी गयीइइइइइइइइ।

राजीव भी जल्दी से नीचे से अपनी कमर उछालकर बोला: आऽऽऽह बेटी मैं भी गयाआऽऽऽऽऽऽऽ।

अब मालिनी राजीव के ऊपर लस्त होकर पड़ी हुई थी। शिवा बिस्तर पर ही बैठ गया था। और मालिनी की पीठ सहला रहा था।

तीनों की जब सांसें सामान्य हुई तो राजीव बोला: मज़ा आया तुम दोनों को?

शिवा: उफ़्फ़ पापा इतना मज़ा आया कि मैं बयान नहीं कर सकता।

मालिनी: हाँ पापा बहुत मज़ा आया। सच में दोनों छेदों में लंड का मज़ा ही कुछ और है। उफफफ क्या बताऊँ कितना अच्छा लग रहा था।

राजीव शिवा की ओर देखकर मुस्कुराता हुआ बोला: चलो अब सब परदे उठ गए हैं। अब मज़ा ही मज़ा लेना है। सही कहा ना? पर तुम बहू को रँडी क्यों कह रहे थे?

शिवा: पापा सॉरी जोश में मुँह से निकल गया।

मालिनी: सच बोलूँ ? मुझे बड़ा अच्छा लगा जब आप मुझे रँडी बोले। इसका मतलब है कि अब मैं चुदवाना सीख गयी हूँ। है ना?

यह सुनकर राजीव और शिवा मुस्कुरा उठे।

 
Back
Top