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मालिनी दुगुना मज़ा लेकर अपने कपड़े उठायी तो राजीव बोला: बेटी कपड़े क्या करोगी? जाओ बाथरूम से फ़्रेश होकर आ जाओ।
मालिनी: पापा आप भी कुछ भी कहते हो? मैं नंगी नहीं रहूँगी।
शिवा: अच्छा ऐसा करो सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट पहन लो। और कुछ नहीं।
राजीव: चलो वैसा करो जैसा शिवा कहता है। और हम भी सिर बनियान और चड्डी में रहेंगे ।
मालिनी चुपचाप चली गयी।
शिवा और राजीव भी बाथरूम जाकर फ़्रेश हुए और बनियान और चड्डी पहनकर पानी पीने लगे।
शिवा: पापा आप चाय पीयोगे क्या? मैं बना देता हूँ।
राजीव: चलो मैं भी साथ में बनाता हूँ। मालिनी ख़ुश हो जाएगी। दोनों किचन में थे तभी शिवा का फ़ोन बजा। आयशा थी लाइन पर। राजीव ने उसका नाम पढ़ा तो बोला: उसका फ़ोन उठा और स्पीकर पर कर दे। और खुलकर बात कर।
शिवा: हाय आयशा कैसी हो? असलम कहाँ है?
आयशा: वो तो ऑफ़िस गए। आप कहाँ हो दुकान पर ना?
राजीव ने हाँ कहने का इशारा किया और शिवा: हाँ दुकान पर ही हूँ ।बोलो क्या हुआ?
आयशा: यहाँ क्या होना है? आप बताओ वहाँ क्या चल रहा है?
शिवा :बस अभी एक राउंड मालिनी की चुदाई कर ली है। अब दुकान में हूँ।
आयशा: तो पापा के साथ कोई विडीओ की बात नहीं हुई?
राजीव के नहीं कहने से वो: नहीं अभी तक नहीं हुई।
आयशा: मैं सोची कि आपकी बात हो गयी होगी और आप और आपके पापा मिल कर मालिनी की ले रहे होंगे।
शिवा : तुम्हारे ससुर और सास कब आ रहे हैं?
आयशा: अरे उनके आने में तो अभी हफ़्ता है । इसीलिए मैं सोच रही थी कि आप मुझे अपने पापा से उनके आने के पहले ही चुदवा देते। उनके आने के बाद तो ये तीनों मेरी दिन रात बजाते रहेंगे। अपने अब्बा के सामने असलम भी ज़रा ज़्यादा ही गरम हो जाते हैं।
शिवा: चलो मैं पापा से बात करता हूँ । फिर तुमको कॉल करूँगा। फिर वो फ़ोन काट दिया।
राजीव: यार ये तो साली बहुत गरम रँडी है। बहुत मज़ा आएगा इसको चोदने में। राजीव फिर से अपना लौड़ा दबाकर बोला।
शिवा: पापा यहाँ तो उसे आप चोद नहीं सकते क्योंकि मालिनी को सब बताना पड़ेगा। आपको उसके घर जाना पड़ेगा। फिर उस असलम का क्या किया जाये जो कि मालिनी की लेने के पीछे पड़ा है ?
राजीव: ह्म्म्म्म चलो कुछ सोचते हैं। अभी तो दो चार दिन सिर्फ़ बहु का ही ध्यान रखा जाए। ठीक है ना?
शिवा: जी पापा ठीक है।
अब वो दोनों चाय बनाकर लाए तो मालिनी अभी वापस नहीं आयी थी। तभी वह अपने कमरे से बाहर आयी। शिवा और राजीव का मुँह खुल गया। उफफफफ क्या लग रही थी। ब्लाउस से बिना ब्रा के उसके निपल्ज़ साफ़ साफ़ दिखाई पड़ रहे थे। और पेटिकोट काफ़ी नीचे बँधा होने से उसके गोरे पेट का काफ़ी हिस्सा नंगा दिख रहा था। गहरी नाभि किसी को भी मस्त कर सकती थी। जब वो आकर किचन में गयी तो उसके पिछवाड़े की उठान को देखकर दोनों के मुरझाए लंड फिर से अकड़ने लगे। वो किचन में झुककर पानी का बोतल निकाली और पानी पीकर वापस आयी। शिवा बोला: उफफफफ क्या मस्त दिख रही हो। सच में पापा ने दबा दबा कर तुम्हारे मम्मे बहुत बड़े कर दिए है।
राजीव: बदमाश कहीं का। मैंने अकेले ने बड़े किए है? और जो तू रोज़ उनको चूसता है और दबाता है, उसका कुछ नहीं?
मालिनी हँसकर : अच्छा अब आप लोग लड़िए मत । आप दोनों की कृपा का फल है । वो अपने मम्मे अपने दोनों पंजों में दबाकर बेशर्मी से बोली: वैसे कौन मेरे लिए अब बड़े साइज़ की ब्रा लाएगा? पापा या शिवा।
राजीव: शिवा लाएगा अपनी दुकान से । वैसे बहु रानी बिना ब्रा के ज़्यादा सेक्सी दिखती है। हैं ना शिवा?
शिवा: बिलकुल पापा सही कहा आपने । इसके तो इतने सख़्त और तने हुए हैं कि ब्रा की ज़रूरत ही नहीं है।
मालिनी: अगर नहीं पहनूँगी ना तो लटक जाएँगे।
शिवा हँसकर: अच्छा जानू ला देंगे। चलो चाय पियो।
मालिनी : क्या बात है आजकल मेरी बड़ी सेवा हो रही है? कभी जूस कभी चाय?
राजीव: बेटा सेवा करेंगे तभी तो मेवा मतलब तुम्हारी बुर मिलेगी।
सब हँसने लगे और चाय पीने लगे।
तभी मालिनी अपने बाल बाँधने के लिए हाथ उठाई और उसके बाल रहित चिकने बग़ल उनके सामने थे। दोनों बाप बेटा चिकनी बग़लों से गरम होने लगे ।हाथ उठने से आधी चूचियाँ भी ब्लाउस से बाहर आ गयीं थीं।
चाय पीने के बाद मालिनी ने कप उठाए और किचन में रखने गयी। क्योंकि उसने पैंटी नहीं पहनी थी इसलिए उसकी गाँड़ में पेटिकोट फँस गया था । उसके दोनों हाथों में कप था । वो किचन में चली गयी। शिवा और राजीव की आँखें मालिनी की गाँड़ में फँसे हुए कपड़े को देखकर फटी रह गयीं। उफफफफ क्या मादक और कामुक दृश्य था। उभरे हुए चुतरों के बीच दरार में फ़ंसा कपड़ा अभी भी वैसे ही था जब वो वापस आयी और सोफ़े पर बैठने लगी।
राजीव: रुको बेटी अभी मत बैठो।
मालिनी बैठने जा रही थी तभी वो रुक गयी और पूछी: पापा क्या हुआ?
राजीव उसको अपने पास बुलाया और उसको घुमाकर उसकी गाँड़ की दरार से कपड़ा निकाला और बोला: बेटी ये कपड़ा फ़ँसा हुआ था।
शिवा: पापा क्या क़िस्मत है कपड़े की । क्या मज़ा आया होगा कपड़े को? काश मैं इस दरार में फँस जाऊँ।
सब ये सुनकर हँसने लगे। तभी राजीव बोला: जानती बहु ऐसे ही एक बार मैंने तुम्हारी मम्मी की गाँड़ में फ़ंसा हुआ पेटिकोट का कपड़ा निकाला था। वैसे तुम्हारी मम्मी की गाँड़ तो और भी बड़ी बड़ी है। मस्त माल है वो भी। शिवा तुम्हारी सास को भी यहाँ बुला लो ना। वह भी हमारी चुदाई में शामिल हो जाएगी।
मालिनी: छी पापा । कभी कभी आपकी बात मुझे बड़ी अजीब लगता है। अब बेचारी मेरी मम्मी इसमें कहाँ से आ गयीं?
राजीव : अब शिवा ने तुमको तो बताया नहीं ना कि वह अपनी सास को चोद चुका है। आख़िर वो हम दोनों से अलग अलग चुदवा चुकी है तो इकठ्ठे चुदवाने में क्या हर्ज है?
मालिनी: छी मैं शर्म से मर जाऊँगी। अभी बाप बेटे से एक़साथ करवाने में भी अजीब लग रहा था।
शिवा: वही तो अजीब लगा था ना? पर बाद में मज़ा आया या नहीं?
मालिनी: आप तो बस मुझे बर्बाद करने पर ही तुले हैं।
शिवा: जानू एक बार हाँ कह दो फिर देखो कि कितना मज़ा आएगा? ये झिझक छोड़ो । आप भी समझाओ ना पापा इसको।
राजीव : शिवा बिलकुल ठीक कह रहा है। सच में शुरू में थोड़ी देर अजीब लगेगा पर उसके बाद बस मज़ा ही मज़ा।ज़रा सोचो कि दोनों माँ बेटी एक ही बिस्तर पर अग़ल बग़ल नंगी पड़ी होगी और एक पर शिवा और दूसरे पर मैं चढ़ा हुआ हूँगा। और हम भी बदल बदल के चुदाई करेंगे। बाप बेटा और माँ बेटी , उफफफफ क्या कॉम्बिनेशन होगा? वो चड्डी के ऊपर से ही अपना लौड़ा दबाकर बोला।
शिवा भी अपना लौड़ा मसलकर बोला: मान जाओ जानू। अभी फ़ोन करके उनको कल बुलाते हैं। और पूरी रात मज़ा लेंगे चारों । सुबह उनको वापस भेज देंगे। बोलो क्या कहती हो?
मालिनी: आप उनको सब बता दोगे बुलाने से पहले? या यहाँ आने पर बताओगे?
शिवा: इसमें बताना क्या है? बहाने से बुला लेंगे। और रात में मज़ा कर लेंगे। बस इतनी सी तो बात है।
मालिनी थोड़ा सा चिंतित होकर: क्या बहाना बनाएँगे?
राजीव: अरे मैं अपने अकेलेपन का बहाना बनाऊँगा। तुम हाँ बोलो तो अभी फ़ोन करूँ?
शिवा: जानू प्लीज़ हाँ बोल दो ना।
मालिनी ने दोनों के दबाव में हथियार डालके कहा: ठीक है जो आपकी मर्ज़ी हो करो पर ये सब मुझे बड़ा अजीब लग रहा है। वो काफ़ी परेशान होंगी ये जानकर कि मैं अपने ससुर से भी करवा रही हूँ।
शिवा: अरे कोई परेशान नहीं होंगी। वो चुदाई को बुरा नहीं मानती। पापा आप फ़ोन करो। स्पीकर मोड में रखना ताकि हम भी सुन सकें।
राजीव ने फ़ोन लगाया: हेलो सरला क्या हाल है?
मालिनी: पापा आप भी कुछ भी कहते हो? मैं नंगी नहीं रहूँगी।
शिवा: अच्छा ऐसा करो सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट पहन लो। और कुछ नहीं।
राजीव: चलो वैसा करो जैसा शिवा कहता है। और हम भी सिर बनियान और चड्डी में रहेंगे ।
मालिनी चुपचाप चली गयी।
शिवा और राजीव भी बाथरूम जाकर फ़्रेश हुए और बनियान और चड्डी पहनकर पानी पीने लगे।
शिवा: पापा आप चाय पीयोगे क्या? मैं बना देता हूँ।
राजीव: चलो मैं भी साथ में बनाता हूँ। मालिनी ख़ुश हो जाएगी। दोनों किचन में थे तभी शिवा का फ़ोन बजा। आयशा थी लाइन पर। राजीव ने उसका नाम पढ़ा तो बोला: उसका फ़ोन उठा और स्पीकर पर कर दे। और खुलकर बात कर।
शिवा: हाय आयशा कैसी हो? असलम कहाँ है?
आयशा: वो तो ऑफ़िस गए। आप कहाँ हो दुकान पर ना?
राजीव ने हाँ कहने का इशारा किया और शिवा: हाँ दुकान पर ही हूँ ।बोलो क्या हुआ?
आयशा: यहाँ क्या होना है? आप बताओ वहाँ क्या चल रहा है?
शिवा :बस अभी एक राउंड मालिनी की चुदाई कर ली है। अब दुकान में हूँ।
आयशा: तो पापा के साथ कोई विडीओ की बात नहीं हुई?
राजीव के नहीं कहने से वो: नहीं अभी तक नहीं हुई।
आयशा: मैं सोची कि आपकी बात हो गयी होगी और आप और आपके पापा मिल कर मालिनी की ले रहे होंगे।
शिवा : तुम्हारे ससुर और सास कब आ रहे हैं?
आयशा: अरे उनके आने में तो अभी हफ़्ता है । इसीलिए मैं सोच रही थी कि आप मुझे अपने पापा से उनके आने के पहले ही चुदवा देते। उनके आने के बाद तो ये तीनों मेरी दिन रात बजाते रहेंगे। अपने अब्बा के सामने असलम भी ज़रा ज़्यादा ही गरम हो जाते हैं।
शिवा: चलो मैं पापा से बात करता हूँ । फिर तुमको कॉल करूँगा। फिर वो फ़ोन काट दिया।
राजीव: यार ये तो साली बहुत गरम रँडी है। बहुत मज़ा आएगा इसको चोदने में। राजीव फिर से अपना लौड़ा दबाकर बोला।
शिवा: पापा यहाँ तो उसे आप चोद नहीं सकते क्योंकि मालिनी को सब बताना पड़ेगा। आपको उसके घर जाना पड़ेगा। फिर उस असलम का क्या किया जाये जो कि मालिनी की लेने के पीछे पड़ा है ?
राजीव: ह्म्म्म्म चलो कुछ सोचते हैं। अभी तो दो चार दिन सिर्फ़ बहु का ही ध्यान रखा जाए। ठीक है ना?
शिवा: जी पापा ठीक है।
अब वो दोनों चाय बनाकर लाए तो मालिनी अभी वापस नहीं आयी थी। तभी वह अपने कमरे से बाहर आयी। शिवा और राजीव का मुँह खुल गया। उफफफफ क्या लग रही थी। ब्लाउस से बिना ब्रा के उसके निपल्ज़ साफ़ साफ़ दिखाई पड़ रहे थे। और पेटिकोट काफ़ी नीचे बँधा होने से उसके गोरे पेट का काफ़ी हिस्सा नंगा दिख रहा था। गहरी नाभि किसी को भी मस्त कर सकती थी। जब वो आकर किचन में गयी तो उसके पिछवाड़े की उठान को देखकर दोनों के मुरझाए लंड फिर से अकड़ने लगे। वो किचन में झुककर पानी का बोतल निकाली और पानी पीकर वापस आयी। शिवा बोला: उफफफफ क्या मस्त दिख रही हो। सच में पापा ने दबा दबा कर तुम्हारे मम्मे बहुत बड़े कर दिए है।
राजीव: बदमाश कहीं का। मैंने अकेले ने बड़े किए है? और जो तू रोज़ उनको चूसता है और दबाता है, उसका कुछ नहीं?
मालिनी हँसकर : अच्छा अब आप लोग लड़िए मत । आप दोनों की कृपा का फल है । वो अपने मम्मे अपने दोनों पंजों में दबाकर बेशर्मी से बोली: वैसे कौन मेरे लिए अब बड़े साइज़ की ब्रा लाएगा? पापा या शिवा।
राजीव: शिवा लाएगा अपनी दुकान से । वैसे बहु रानी बिना ब्रा के ज़्यादा सेक्सी दिखती है। हैं ना शिवा?
शिवा: बिलकुल पापा सही कहा आपने । इसके तो इतने सख़्त और तने हुए हैं कि ब्रा की ज़रूरत ही नहीं है।
मालिनी: अगर नहीं पहनूँगी ना तो लटक जाएँगे।
शिवा हँसकर: अच्छा जानू ला देंगे। चलो चाय पियो।
मालिनी : क्या बात है आजकल मेरी बड़ी सेवा हो रही है? कभी जूस कभी चाय?
राजीव: बेटा सेवा करेंगे तभी तो मेवा मतलब तुम्हारी बुर मिलेगी।
सब हँसने लगे और चाय पीने लगे।
तभी मालिनी अपने बाल बाँधने के लिए हाथ उठाई और उसके बाल रहित चिकने बग़ल उनके सामने थे। दोनों बाप बेटा चिकनी बग़लों से गरम होने लगे ।हाथ उठने से आधी चूचियाँ भी ब्लाउस से बाहर आ गयीं थीं।
चाय पीने के बाद मालिनी ने कप उठाए और किचन में रखने गयी। क्योंकि उसने पैंटी नहीं पहनी थी इसलिए उसकी गाँड़ में पेटिकोट फँस गया था । उसके दोनों हाथों में कप था । वो किचन में चली गयी। शिवा और राजीव की आँखें मालिनी की गाँड़ में फँसे हुए कपड़े को देखकर फटी रह गयीं। उफफफफ क्या मादक और कामुक दृश्य था। उभरे हुए चुतरों के बीच दरार में फ़ंसा कपड़ा अभी भी वैसे ही था जब वो वापस आयी और सोफ़े पर बैठने लगी।
राजीव: रुको बेटी अभी मत बैठो।
मालिनी बैठने जा रही थी तभी वो रुक गयी और पूछी: पापा क्या हुआ?
राजीव उसको अपने पास बुलाया और उसको घुमाकर उसकी गाँड़ की दरार से कपड़ा निकाला और बोला: बेटी ये कपड़ा फ़ँसा हुआ था।
शिवा: पापा क्या क़िस्मत है कपड़े की । क्या मज़ा आया होगा कपड़े को? काश मैं इस दरार में फँस जाऊँ।
सब ये सुनकर हँसने लगे। तभी राजीव बोला: जानती बहु ऐसे ही एक बार मैंने तुम्हारी मम्मी की गाँड़ में फ़ंसा हुआ पेटिकोट का कपड़ा निकाला था। वैसे तुम्हारी मम्मी की गाँड़ तो और भी बड़ी बड़ी है। मस्त माल है वो भी। शिवा तुम्हारी सास को भी यहाँ बुला लो ना। वह भी हमारी चुदाई में शामिल हो जाएगी।
मालिनी: छी पापा । कभी कभी आपकी बात मुझे बड़ी अजीब लगता है। अब बेचारी मेरी मम्मी इसमें कहाँ से आ गयीं?
राजीव : अब शिवा ने तुमको तो बताया नहीं ना कि वह अपनी सास को चोद चुका है। आख़िर वो हम दोनों से अलग अलग चुदवा चुकी है तो इकठ्ठे चुदवाने में क्या हर्ज है?
मालिनी: छी मैं शर्म से मर जाऊँगी। अभी बाप बेटे से एक़साथ करवाने में भी अजीब लग रहा था।
शिवा: वही तो अजीब लगा था ना? पर बाद में मज़ा आया या नहीं?
मालिनी: आप तो बस मुझे बर्बाद करने पर ही तुले हैं।
शिवा: जानू एक बार हाँ कह दो फिर देखो कि कितना मज़ा आएगा? ये झिझक छोड़ो । आप भी समझाओ ना पापा इसको।
राजीव : शिवा बिलकुल ठीक कह रहा है। सच में शुरू में थोड़ी देर अजीब लगेगा पर उसके बाद बस मज़ा ही मज़ा।ज़रा सोचो कि दोनों माँ बेटी एक ही बिस्तर पर अग़ल बग़ल नंगी पड़ी होगी और एक पर शिवा और दूसरे पर मैं चढ़ा हुआ हूँगा। और हम भी बदल बदल के चुदाई करेंगे। बाप बेटा और माँ बेटी , उफफफफ क्या कॉम्बिनेशन होगा? वो चड्डी के ऊपर से ही अपना लौड़ा दबाकर बोला।
शिवा भी अपना लौड़ा मसलकर बोला: मान जाओ जानू। अभी फ़ोन करके उनको कल बुलाते हैं। और पूरी रात मज़ा लेंगे चारों । सुबह उनको वापस भेज देंगे। बोलो क्या कहती हो?
मालिनी: आप उनको सब बता दोगे बुलाने से पहले? या यहाँ आने पर बताओगे?
शिवा: इसमें बताना क्या है? बहाने से बुला लेंगे। और रात में मज़ा कर लेंगे। बस इतनी सी तो बात है।
मालिनी थोड़ा सा चिंतित होकर: क्या बहाना बनाएँगे?
राजीव: अरे मैं अपने अकेलेपन का बहाना बनाऊँगा। तुम हाँ बोलो तो अभी फ़ोन करूँ?
शिवा: जानू प्लीज़ हाँ बोल दो ना।
मालिनी ने दोनों के दबाव में हथियार डालके कहा: ठीक है जो आपकी मर्ज़ी हो करो पर ये सब मुझे बड़ा अजीब लग रहा है। वो काफ़ी परेशान होंगी ये जानकर कि मैं अपने ससुर से भी करवा रही हूँ।
शिवा: अरे कोई परेशान नहीं होंगी। वो चुदाई को बुरा नहीं मानती। पापा आप फ़ोन करो। स्पीकर मोड में रखना ताकि हम भी सुन सकें।
राजीव ने फ़ोन लगाया: हेलो सरला क्या हाल है?