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मालिनी अब शिवा का लंड चूसने लगी। अब भी दोनों मर्दों के हाथ उसके बदन पर घूम रहे थे।
शिवा : वैसे पापा , मम्मी का सबसे बुरा हाल कल्लू टेलर ने किया था । वो इसी से अपने ब्लाउस वग़ैरह सिलवाती थीं । वो मुझे साथ उसकी दुकान पर हमेशा साथ में ले जाती थीं । मैं एक छोटे से कमरे में बैठ जाता था और मम्मी अंदर चली जाती थी दूसरे कमरे में । दोनों कमरों के बीच में एक पर्दा था। मैं परदे को बिलकुल ज़रा सा हटाकर अंदर झाँकता था और मुझे कल्लू और मम्मी साफ़ दिख जाते थे। उस दिन कल्लू मम्मी के ब्लाउस का नाप ले रहा था। उसने एक पजामा और कुर्ता पहना था। वो मम्मी की साड़ी के पल्लू को गिराकर नाप लेने लगा। वो मम्मी की चूचियाँ छूने का कोई भी मौक़ा नहीं छोड़ रहा था। वो मम्मी की निपल के ऊपर एक टेप का हिस्सा लगाया और चूचियों के ऊपर से घुमाकर नाप ले रहा था। फिर वो ब्लाउस के अंदर ऊँगली डालकर कहा: ढीला है आपका ब्लाउस । ज़रा टाइट बना दूँ।
मम्मी: हाँ बना दो। आऽऽऽऽहाह । मैं चौंक कर देखा कि ये आवाज़ क्यों निकाली मम्मी ने? मैंने देखा कि वो अब मम्मी की चूचियाँ ब्लाउस के ऊपर से दबा रहा था। उसका पजामा आगे से बहुत ऊपर उठा हुआ था । वो मम्मी के पीछे आकर नाप लेने के बहाने उनकी गाँड़ से चिपक गया था और पजामा का आगे का हिस्सा उनकी गाँड़ में घुसा रहा था। उफफफफ पापा, अब मम्मी का कंट्रोल छूटने लगा था। वो अब कल्लू का विरोध नहीं कर पा रही थी। अब कल्लू ने भी नाप लेने का दिखावा बंद किया और मम्मी के कंधे को चूमने लगा और बोला: आऽऽऽह क्या माल हो मेरी जान। एक बार सेवा का मौक़ा दे दो। मस्ती से भर दूँगा। एक बार चुदवा लो ना मेरी जान। यह कहते हुए उसने मम्मी की साड़ी के ऊपर से बुर को भींच लिया। मम्मी उफफफफ कर उठी और बोली: आऽऽऽह। छोड़ो ना मुझे।
कल्लू: अरे बोलो ना कब आऊँ तुम्हारे घर चुदाई के लिए?
मम्मी: आऽऽऽह ठीक है कल १२ बजे आ जाओ घर पर। पर किसी से बात नहीं करना इस बारे में वरना बहुत बदनामी हो जाएगी।
कल्लू मज़े से भरकर: अरे किसको बताऊँगा? कोई फ़िकर मत करो। अब वह उनकी साड़ी उठाया और नीचे से उनकी जाँघ और बुर सहलाने लगा। अब मम्मी उइइइइइ कहकर बोली: बस बाक़ी का कल कर लेना। नाप तो ले लिया ना।
वह मम्मी की गाँड़ मसलकर बोला: क्या मस्त मोटी गाँड़ है। उफफफफ मज़ा आ जाएगा चोदने में।
मैंने एक बात नोटिस किया कि उसने मम्मी को अपना लंड नहीं छूने दिया। उसने ऐसा क्यों किया ये मुझे दूसरे दिन पता चला।
राजीव: उफफफ क्या वो एक टेलर से भी चुदवा चुकी है?
मालिनी: पापा, अगर आप एक कामवाली की ले सकते हो तो वो एक टेलर को दे दीं तो क्या हुआ?
राजीव मालिनी की गाँड़ दबाकर बोला: तो क्या तुम भी किसी टेलर या माली से चुदवा लोगी।
मालिनी हँसकर: मेरे लिए तो दो दो आशिक़ है मैं क्यों कहीं और जाऊँ? ये कहकर वो एक एक हाथ में दोनों के लंड को पकड़कर सहला दी। फिर बोली: हाँ शिवा फिर क्या हुआ?
शिवा: फिर कल्लू मम्मी को अपनी बाँह में दबोचकर उनके होंठ चूसा और एक बार और ब्लाउस के अंदर हाथ डालकर उनकी चूचियाँ मसला और फिर नीचे बैठ कर उनकी साड़ी उठाई और उनकी जाँघ चूमने लगा और बुर में भी मुँह घुसेड़ कर पता नहीं क्या क्या करने लगा।
मम्मी : उइइइइइइइ बस करोओओओओओओ । बाक़ी का कल कर लेना। ये कहकर अपने आप को छुड़ाई और कपड़े ठीक करके बाहर आयी। हम दोनों वापस घर आ गए।
अगले दिन मैं स्कूल से १२ बजे आकर अपनी जगह पर आकर जम गया। मुझे उत्सुकता थी कि मम्मी को कल्लू जैसा आदमी कैसे चोदता है। सही समय पर वो आया और आते ही मम्मी को पकड़कर अपने से चिपकाकर चूमने और चूसने लगा। फिर वो मम्मी की साड़ी और ब्लाउस उतारा और ब्रा के ऊपर से उनकी चूचियों को मस्ती से दबाया। मम्मी आऽऽऽह करके बोली: आऽऽऽऽऽऽह थोड़ा धीरे से दबाओ ना। वो जैसे कुछ सुना ही नहीं। अब उसने उनकी पेटिकोट का नाड़ा खोला और उसे नीचे गिरा दिया। अब वो मम्मी को ब्रा और पैंटी में देखकर मस्ती से भर गया और उनके मोटे चूतरों को दबाकर बोला: साली मस्त माल है तू तो।
मैं हैरान रह गया कि जो आदमी कल तक मम्मी को आप कहकर बात करता था। अब सीधे तू पर आ गया है। फिर वो उनकी ब्रा खोला और उनकी चूचियों पर टूट पड़ा। उफफफफ कितनी ज़ोर से दबा रहा था मानो उनको निचोड़कर दूध ही निकाल देगा। मम्मी आऽऽऽऽऽहहह चिल्लाई। पर वो बिलकुल ध्यान नहीं दे रहा था। अब वो उनकी पैंटी भी निकाला और उनकी बुर को अपने पंजे में दबाने लगा। मम्मी उफफफफ कर उठी तभी उसने तीन मोटी मोटी उँगलियाँ अंदर डाल दीं । मम्मी इस अचानक हमले से हड़बड़ा गयीं और बोली: आऽऽह क्या कर रहे हो? इतनी जल्दी क्या है?
कल्लू मम्मी की बुर में उँगलियाँ अंदर बाहर करते हुए बोला: उफफफफ रँडी साली पूरी गीली हो गयी है चुदवाने के लिए और साली नाटक करती है।
अब मम्मी डर गयी कि कहाँ फँस गयी । उनके चेहरे पर उलझन के भाव स्पष्ट थे। अब वो उनकी गाँड़ को दबाने लगा और उनको बिस्तर पर लगभग पटक ही दिया और उलटा लिटा कर उनके चूतरों को दबाते हुए वहाँ ज़ोर ज़ोर से चपत भी मारने लगा। मम्मी चिल्लाए जा रही थी पर उसे जैसे कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था। मम्मी के दोनों गोले बिलकुल लाल हो गए थे। तभी उसने मम्मी की गाँड़ के छेद पर थूका और एक ऊँगली अपनी मुँह में डालकर गीला किया और फिर उनकी गाँड़ में डाल दिया। मम्मी उइइइइइइ कर उठी।
अब वो अपना कुर्ता पजामा और चड्डी निकाला और उसका लंड देखकर मैं तो मानो काँप गया। कम से कम १० इंच लंबा और मेरी कलाई जितना मोटा एकदम काला लौड़ा काली झाँटो से बाहर निकला हुआ किसी खम्भे की माफ़िक़ तना हुआ था और उसके नीचे बड़े बड़े बॉल्ज़ झूल रहे थे। इतना बड़ा लौड़ा मैंने कभी नहीं देखा था और मुझे डर लगा कि पता नहीं बेचारी मम्मी का क्या होगा? अब कल्लू मम्मी की गाँड़ को ऊपर किया और उनकी गाँड़ की दरार में अपना मुँह डाल कर चूसने लगा। मम्मी उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ कहकर आवाज़ें निकाल रही थीं। अब वो मम्मी को और ऊपर किया और उनकी बुर में पीछे से ही अपना लौड़ा डालने लगा। जबतक मम्मी को कुछ समझ में आता तब तक उसका आधा लौड़ा उनकी बुर में समा गया था। वो दर्द से चिल्लाई: हाऽऽऽय्यय क्या डाल रहे हो? उफफफफ इतना बड़ा? दुख रहा है । आऽऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह मरीइइइइइइइइइइइ। निकाआऽऽऽऽऽऽऽलो बाआऽऽऽऽऽऽहर । पर कल्लू कहाँ सुनने वाला रहा वो और ज़ोर से धक्का लगाकर पूरा दस इंचि अंदर करके मम्मी की कमर को कसकर पकड़ कर पूरी ताक़त से धक्के मारकर उनको चोदने लगा। मम्मी की घुटी हुई चीख़ों से मानो उसे कोई मतलब ही नहीं था।
क़रीब दस मिनट के बाद वो मम्मी की बुर से अपना गीला लौड़ा बाहर निकाला और मम्मी को पलट दिया । अब वो उनके ऊपर आकर उनकी चूचियाँ चूसने लगा । मैंने देखा कि मम्मी की आँखों में आँसू आ गए थे। अब वो उठा और अपना लण्ड उनके मुँह के सामने रखा और मम्मी ने पहली बार उसका विशाल लौड़ा देखा और डर के बोली: आऽऽऽऽह इतना बड़ा ? अब वो उसे मम्मी के मुँह में डाल दिया और मम्मी पूरा मुँह खोकर भी उसे ढंग से चूस नहीं पा रही थी। उनकी आँखों से आँसू निकले ही जा रहे थे। पर उस कमीने पर कोई असर नहीं पड़ा। अब वो उनके मुँह को थोड़ी देर चोदा फिर वो मम्मी की टांगो को घुटनों से मोड़ा और पूरा फैला दिया और बीच में आकर अपना लौड़ा फिर से अंदर डाला और मम्मी को अपने ताक़तवर बदन के नीचे पूरी तरह से दबोचकर चुदाई में लग गया। उसने क़रीब मम्मी को एक घंटे तक बुरी तरह से चोदा। पहली बार मैंने मम्मी को चुपचाप पड़े हुए चुदवाते देखा। वो बिलकुल एक लाश सी पड़ीं थी और कल्लू पागलों की तरह उनको चोदे जा रहा था। वो बीच बीच में मम्मी की चूचियों को मसल देता था और मम्मी के होंठ और दूध भी चूसता था।
अचानक वो तेज़ी से धक्के मारने लगा और झड़ गया। जब उसने अपना लौड़ा निकाला तो मम्मी की बुर पूरी सूजी हुई और लाल सी दिखाई दे रही थी और उसने से ढेर सारा सफ़ेद रस निकल कर बाहर गिर रहा था।
कल्लू: आऽऽऽह क्या मस्त टाइट बुर है तेरी इस उम्र में भी साली रँडी। मज़ा आ गया। साली दूसरी छोकरियाँ तो मर जाऊँगी चिल्लाकर मेरा दिमाग़ ख़राब कर देती हैं, पर साली कुतिया मज़े से ले ली मेरा लौड़ा ।
मम्मी आँखों में आँसू लिए वैसे ही पड़ी रहीं और बोली: अच्छा अब तुम जाओ। मेरा बेटा आने वाला है।
वो दाँत निपोरते हुए कपड़े पहना और जाते हुए बोला: जब फिर चुदवाना हो बुला लेना मेरी रँडी कुतिया ।
उसके जाने के बाद भी मम्मी बहुत देर तक वैसी ही पड़ी रही और फिर हिम्मत करके उठी और लंगड़ाते हुए बाथरूम में गयी।
उस दिन मम्मी दिन भर ठीक से चल नहीं पा रही थी। पापा, आपने पूछा तो बहाना बना दीं थीं कि मसल खिंच गयी है टाँग की। अगले दो दिन वो मुझे साथ लेकर गैनोकोलोजिस्ट के पास गयीं । तीन चार दिन लगे उनको सामान्य होने में।
राजीव: ओह फिर वो कल्लू को फिर से बुलाई?
शिवा: नहीं पापा फिर कभी नहीं बुलाई। वो एक बार ही में उसको समझ गयीं थीं कि वो कितना बड़ा जानवर है।
राजीव: तो ये क्या उसका आख़री प्रेमी था? या इसके बाद भी किसी से चुदवाई थी?
शिवा: कल्लू के बाद वो बस वो अपने कज़िन राहुल से फँसी थीं । राहुल मामा और उनका रिश्ता क़रीब ३ महीने चला और फिर आख़िर बार वो राहुल मामा की शादी में ही उनसे आख़ीर बार चुदिं । ये पंजाब की बात है।
राजीव: उस साले राहुल पर मुझे शुरू से ही शक था। वो सविता को बहुत घूरता था और दीदी दीदी कहता था। बहन चोद साला उससे राखी बँधवाता था और उसकी ही लेता था। उसका चचेरा भाई था वो। अच्छा तुमने क्या देखा बताओ ज़रा?
शिवा आगे बोलता चला गया-----/
पापा, आपको याद है जब पहली बार राहुल मामा घर पर आए थे तो मम्मी ने कितना बढ़िया स्वागत किया था उनका? मामू भी उनको घूरते रहते थे। एक बार मैं सुबह उठा तो देखा कि मामू किचन में जा रहे हैं। मैं चुपचाप उनके पीछे गया और देखा कि मामू वहाँ किचन में काम कर रही मम्मी को पीछे से पकड़कर उनसे लिपटे हुए थे और उनके कंधे चूम रहे थे । वो अपनी कमर हिलाकर मम्मी की गाँड़ में अपना लंड रगड़ रहे थे।
मामू: आऽऽऽह मेरी जान क्या गाँड़ है तुम्हारी मस्त गद्देदार । वो मम्मी की गाँड़ दबाकर बोले। आज दोपहर को अपनी फुद्दी दे दो ना दीदी।
मम्मी हँसकर: कमीना , मेरी फुद्दी तो ऐसे माँग रहा है जैसे खाने के लिए रोटी माँग रहा है। चल हट अभी कोई आ जाएगा।
मामू: दीदी पहले चुदाई के लिए हाँ करो तभी छोड़ूँगा । वो मम्मी की चूचियों को नायटी के ऊपर से ही दबा कर बोला।
मम्मी: आऽऽह अच्छा ठीक है १२ बजे कर लेना । अब छोड़ ना बदमाश कहीं का।
मैं समझ गया कि आज भी दोपहर को प्रोग्राम जमेगा। मैं उस दिन भी स्कूल से जल्दी आ गया और मैंने अपनी पुरानी जगह से देखना शुरू किया। अभी कमरे में मम्मी अकेली थी और वो ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़े होकर अपने बग़लों में सेण्ट लगा रही थीं। तभी मामू आ गया और आकर बोला: अरे दीदी आपके बदन की महक बहुत मस्त है आप वहाँ ख़ुशबू क्यों लगा रही हो? वह आकर उनकी बग़लों को उठाया और वहाँ नाक डालकर सूँघने लगा। अब वो मम्मी को बिस्तर पर गिरा दिया और ख़ुद भी उनके ऊपर चढ़ गया और एक लम्बे चुम्बन का आदान प्रदान होने लगा। फिर मामू ने उनकी चूचियाँ दबाईं और बोले: दीदी आज रँडी की तरह चुदवाओ ना प्लीज़ ।
मम्मी: अच्छा वो कैसे चुदवाती है?
मामू: वो पहले धीरे धीरे नंगी होती है, फिर वो अपनी गाँड़ मटका कर और चूचियाँ दबाकर और हिला हिला कर मर्द को मस्त करती हैं। फिर उनका लंड चूसती है और फिर मज़े से गाँड़ उछालकर चुदवाती है।
मम्मी: बस !! ये तो मैं तुम्हारे लिए कर ही सकती हूँ मेरे राजा भय्या।
ये कहकर वो मस्ती से खड़ी हुई और साड़ी में ही अपनी गाँड़ हिला कर मामू को दिखाने लगी। फिर वो साड़ी खोली धीरे धीरे और मटक कर चल के दिखाई पेटिकोट और ब्लाउस में कुछ ऐसे //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f447.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f447.svg
उफफफ पापा मुझे विश्वास नहीं हुआ कि मम्मी ये सब भी कर सकती हैं। फिर वो अपना ब्लाउस भी खोली और पेटिकोट भी नीचे गिरा दी। अब वो ब्रा और पैंटी में अपनी गाँड़ हिला कर दिखाने लगी।
ब्रा और पैंटी निकाल कर वो पूरी नंगी होकर अपने चूचे हिलायीं और गाँड़ भी मटकाने लगीं।
फिर वो आगे को होकर झुकी और अपनी गाँड़ मामू को दिखाईं । फिर अपनी चूचियाँ ख़ुद ही दबाई और मामू को दिखाई हिला हिला कर। उफफफ पापा वो पक्की रँडी लग रही थीं । मामू भी मस्ती से नंगे होकर अपना मोटा लौड़ा मम्मी को दिखाए और मम्मी कुतिया की तरह ज़मीन पर बैठी और मामू का लौड़ा चाटने और चूसने लगीं। वो उनके बॉल्ज़ भी चाट रही थी।
राजीव: उफफफ ये सविता को क्या हो गया था? शिवा: सच में पापा , वो एकदम रँडी की तरह लग रहीं थीं। फिर मामू बोले: चलो अब लेटो बिस्तर पर चुदाई शुरू करते हैं। अब मम्मी बिस्तर पर लेट गयीं । आपको पता वो पेट के बल लेट गयी। एकदम मस्त लग रही थीं । उनकी गाँड़ देखकर मामू का मोटा लौड़ा झटके मारने लगा।
अब मामू ने उनकी गाँड़ उठाई और नीचे हाथ डालकर उनकी चूचिया मसलने लगे। फिर अपना मोटा लंड मम्मी की बुर में घुसेड़ दिया और मम्मी मज़े से सिसकारी लेती हुई बोली: आऽऽऽऽहहह कितना मस्त लंड है भाई तेरा। उफफफ दबा और जोओओओओओओओओर से भाअअअअअअअइ । और चोओओओओओदो। फ़ाआऽऽऽऽड़ो मेंएएएएएएरि फुद्दीइइइइइइइइइइइइ। और वो अपनी गाँड़ पीछे करके मामू का पूरा लंड अंदर निगलने लगी।
अब मम्मी बोली: रुक भाई मैं ऊपर आती हूँ, तू भी क्या याद करेगा की क्या मज़ा दिया था दीदी ने?
यह कह कर वो ऊपर आ गयीं और उनका लौड़ा अपनी फुद्दी में डालकर ऊपर नीचे होकर चुदाई का भरपूर मज़ा लेने लगीं।
अब कुछ देर बाद मम्मी बोलीं: आऽऽऽऽह भाअअअअअअइइ अब ऊपर आकर तुम करो।
फिर मामू ऊपर आए और क़रीब आधे घंटे की ज़बरदस्त चुदाई के बाद मामू झड़े और मम्मी भी चिल्लाई जा रहीं थीं: आऽऽऽऽऽह मैं गयीइइइइइइइ।
अब दोनों शांत हो कर पड़े थे। मम्मी चुदाई के बाद कुछ इस तरह से पड़ीं थीं। //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f447.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f447.svg । वो कपड़े पहनने जा रहीं थीं। पर मामू ने उनको रोका और जी भर के उनकी जवानी का दर्शन किया फिर बहुत सारा चुम्बन लिया और फिर वो दोनों बाहर आए।
राजीव: तुमने कितनी बार उनकी चुदाई देखी?
शिवा: कई बार । पर आख़िर बार की बहुत भयानक चुदाई थी। और वो भी पंजाब में हुई थी। आपको याद है मामू की शादी तय हो गयी थी तो वो मम्मी को लेने आए थे। आप नहीं जा पाए थे और मम्मी हमेशा की तरह मुझे साथ लेकर पंजाब चलीं गयीं थीं मामू के साथ। रास्ते भर ट्रेन में मामू और मम्मी हँसी मज़ाक़ करते रहे ।जब हम मामू के घर पहुँचे तो वहाँ कई रिश्तेदार आ चुके थे। मम्मी तड़प रही थी मामू से अकेले में मिलने के लिए पर कोई जुगाड़ नहीं बन पा रहा था। ख़ैर शादी का दिन भी आ गया था। मम्मी ने बहन द्वारा की जाने वाली सब रस्में कीं । मामू भी दूल्हा बने हुए थे और मम्मी को यहाँ वहाँ छू भी रहे थे। अब अचानक मामू ने मम्मी को धीरे से कुछ कहा, मम्मी मुस्कुरा उठी। मैं चौकन्ना हो गया । मुझे पता चल गया था कि कुछ होने वाला है। पर समझ नहीं आ रहा था कि वो कैसे मिलेंगे इतनी भीड़ भाड़ में?
तभी मम्मी ग़ायब हो गयीं । पर मामू तो दुल्हे थे इसलिए मुझे अभी भी दिख रहे थे। शादी २ घंटे के बाद यहीं होनी थी। शमियाना घर के सामने ही लगा था एक ख़ाली मैदान में। अचानक मैंने देखा कि मामू अपने दोस्तों से कुछ बोले और अकेले पीछे की तरफ़ चले गए। फिर मैंने उनका पीछा किया और देखा कि वो शामियाने का कपड़ा उठाकर बाहर चले गए पीछे की ओर जहाँ पेड़ और झाड़ियाँ थीं । मैं समझ गया कि कुछ प्रोग्राम बन गया है। मैं भाग कर घर की छत पर पहुँचा और पीछे की तरफ़ देखा और सन्न रह गया। वहाँ शामियाने के पीछे एक पेड़ के साये में मम्मी और मामू चिपके खड़े थे। थोड़ा अँधेरा सा था पर मुझे पता था कि वे दोनों ही इतनी हिम्मत कर सकते हैं। अब मम्मी नीचे बैठी और मामू ने अपना पजामा नीचे गिरा दिया और मम्मी उनका लंड चूसने लगीं। बड़ी देर बाद मामू ने मम्मी को उठाया और उनकी सलवार खोल दी । अब मम्मी पेड़ के सहारे आगे को झुकी और मामू ने पीछे से अपना लौड़ा उनकी फुद्दी में डाला और उनको बेतहाशा चोदने लगे। मम्मी भी अपनी गाँड़ पीछे करके चुदवा रहीं थीं ।
मैं हैरान रह गया कि मामू शादी के सिर्फ़ एक घंटे पहले भी मम्मी से चुदाई में लगा है। मस्त चुदाई के बाद दोनों कपड़े ठीक किए और फिर अलग अलग रास्ते से वापस जनवासे में आ गए और थोड़ी देर बाद मामू की शादी भी हो गयी।
राजीव: साला बड़ा ही कमीना इंसान है ये इसने अपनी बहन की चुदाई कीं वो भी अपनी शादीके बस एक घंटे पहले? उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या क्या हुआ मेरे साथ और मुझे कोई ख़बर ही नहीं हुई।
शिवा: पापा उसके कुछ दिनों बाद आप ठीक हो गए और फिर मैंने एक दिन आपके कमरे से ज़बरदस्त चुदाई के साथ मम्मी की सिसकारियाँ सुनी तो मैं समझ गया कि अब सब नोर्मल हो गया है। उसके बाद मैंने मम्मी को और किसी से चुदवाते नहीं देखा।
मालिनी: मुझे मम्मी से कोई शिकायत नहीं है। आख़िर जब पापा ठीक हो गए तो वो भी नोर्मल जीवन जीने लगी ना। वो जो कुछ भी कीं पापा की बीमारी की वजह से कीं थीं।
राजीव: चलो अब जो दुनिया में नहीं है उससे क्या नाराज़ होना? चलो शिवा तुम मालिनी को चोद लो और फिर सोते हैं।
शिवा: पापा आप नहीं चोदेंगे इसे?
राजीव: नहीं मेरा अब मन नहीं है तुम ही कर लो।
अब शिवा मालिनी के ऊपर आकर उसकी ज़बरदस्त चुदाई किया क़रीब आधा घंटा और फिर दोनों थक कर सो गए।राजीव उनकी तरफ़ करवट लेकर लेटा हुआ उनकी चुदाई देख चुका था और बीच बीच में मालिनी की चूचि भी मसला था।
राजीव की आँखों से नींद ग़ायब थी, वो अब भी शिवा द्वारा बताई हुई बातों को सोच रहा था।
शिवा : वैसे पापा , मम्मी का सबसे बुरा हाल कल्लू टेलर ने किया था । वो इसी से अपने ब्लाउस वग़ैरह सिलवाती थीं । वो मुझे साथ उसकी दुकान पर हमेशा साथ में ले जाती थीं । मैं एक छोटे से कमरे में बैठ जाता था और मम्मी अंदर चली जाती थी दूसरे कमरे में । दोनों कमरों के बीच में एक पर्दा था। मैं परदे को बिलकुल ज़रा सा हटाकर अंदर झाँकता था और मुझे कल्लू और मम्मी साफ़ दिख जाते थे। उस दिन कल्लू मम्मी के ब्लाउस का नाप ले रहा था। उसने एक पजामा और कुर्ता पहना था। वो मम्मी की साड़ी के पल्लू को गिराकर नाप लेने लगा। वो मम्मी की चूचियाँ छूने का कोई भी मौक़ा नहीं छोड़ रहा था। वो मम्मी की निपल के ऊपर एक टेप का हिस्सा लगाया और चूचियों के ऊपर से घुमाकर नाप ले रहा था। फिर वो ब्लाउस के अंदर ऊँगली डालकर कहा: ढीला है आपका ब्लाउस । ज़रा टाइट बना दूँ।
मम्मी: हाँ बना दो। आऽऽऽऽहाह । मैं चौंक कर देखा कि ये आवाज़ क्यों निकाली मम्मी ने? मैंने देखा कि वो अब मम्मी की चूचियाँ ब्लाउस के ऊपर से दबा रहा था। उसका पजामा आगे से बहुत ऊपर उठा हुआ था । वो मम्मी के पीछे आकर नाप लेने के बहाने उनकी गाँड़ से चिपक गया था और पजामा का आगे का हिस्सा उनकी गाँड़ में घुसा रहा था। उफफफफ पापा, अब मम्मी का कंट्रोल छूटने लगा था। वो अब कल्लू का विरोध नहीं कर पा रही थी। अब कल्लू ने भी नाप लेने का दिखावा बंद किया और मम्मी के कंधे को चूमने लगा और बोला: आऽऽऽह क्या माल हो मेरी जान। एक बार सेवा का मौक़ा दे दो। मस्ती से भर दूँगा। एक बार चुदवा लो ना मेरी जान। यह कहते हुए उसने मम्मी की साड़ी के ऊपर से बुर को भींच लिया। मम्मी उफफफफ कर उठी और बोली: आऽऽऽह। छोड़ो ना मुझे।
कल्लू: अरे बोलो ना कब आऊँ तुम्हारे घर चुदाई के लिए?
मम्मी: आऽऽऽह ठीक है कल १२ बजे आ जाओ घर पर। पर किसी से बात नहीं करना इस बारे में वरना बहुत बदनामी हो जाएगी।
कल्लू मज़े से भरकर: अरे किसको बताऊँगा? कोई फ़िकर मत करो। अब वह उनकी साड़ी उठाया और नीचे से उनकी जाँघ और बुर सहलाने लगा। अब मम्मी उइइइइइ कहकर बोली: बस बाक़ी का कल कर लेना। नाप तो ले लिया ना।
वह मम्मी की गाँड़ मसलकर बोला: क्या मस्त मोटी गाँड़ है। उफफफफ मज़ा आ जाएगा चोदने में।
मैंने एक बात नोटिस किया कि उसने मम्मी को अपना लंड नहीं छूने दिया। उसने ऐसा क्यों किया ये मुझे दूसरे दिन पता चला।
राजीव: उफफफ क्या वो एक टेलर से भी चुदवा चुकी है?
मालिनी: पापा, अगर आप एक कामवाली की ले सकते हो तो वो एक टेलर को दे दीं तो क्या हुआ?
राजीव मालिनी की गाँड़ दबाकर बोला: तो क्या तुम भी किसी टेलर या माली से चुदवा लोगी।
मालिनी हँसकर: मेरे लिए तो दो दो आशिक़ है मैं क्यों कहीं और जाऊँ? ये कहकर वो एक एक हाथ में दोनों के लंड को पकड़कर सहला दी। फिर बोली: हाँ शिवा फिर क्या हुआ?
शिवा: फिर कल्लू मम्मी को अपनी बाँह में दबोचकर उनके होंठ चूसा और एक बार और ब्लाउस के अंदर हाथ डालकर उनकी चूचियाँ मसला और फिर नीचे बैठ कर उनकी साड़ी उठाई और उनकी जाँघ चूमने लगा और बुर में भी मुँह घुसेड़ कर पता नहीं क्या क्या करने लगा।
मम्मी : उइइइइइइइ बस करोओओओओओओ । बाक़ी का कल कर लेना। ये कहकर अपने आप को छुड़ाई और कपड़े ठीक करके बाहर आयी। हम दोनों वापस घर आ गए।
अगले दिन मैं स्कूल से १२ बजे आकर अपनी जगह पर आकर जम गया। मुझे उत्सुकता थी कि मम्मी को कल्लू जैसा आदमी कैसे चोदता है। सही समय पर वो आया और आते ही मम्मी को पकड़कर अपने से चिपकाकर चूमने और चूसने लगा। फिर वो मम्मी की साड़ी और ब्लाउस उतारा और ब्रा के ऊपर से उनकी चूचियों को मस्ती से दबाया। मम्मी आऽऽऽह करके बोली: आऽऽऽऽऽऽह थोड़ा धीरे से दबाओ ना। वो जैसे कुछ सुना ही नहीं। अब उसने उनकी पेटिकोट का नाड़ा खोला और उसे नीचे गिरा दिया। अब वो मम्मी को ब्रा और पैंटी में देखकर मस्ती से भर गया और उनके मोटे चूतरों को दबाकर बोला: साली मस्त माल है तू तो।
मैं हैरान रह गया कि जो आदमी कल तक मम्मी को आप कहकर बात करता था। अब सीधे तू पर आ गया है। फिर वो उनकी ब्रा खोला और उनकी चूचियों पर टूट पड़ा। उफफफफ कितनी ज़ोर से दबा रहा था मानो उनको निचोड़कर दूध ही निकाल देगा। मम्मी आऽऽऽऽऽहहह चिल्लाई। पर वो बिलकुल ध्यान नहीं दे रहा था। अब वो उनकी पैंटी भी निकाला और उनकी बुर को अपने पंजे में दबाने लगा। मम्मी उफफफफ कर उठी तभी उसने तीन मोटी मोटी उँगलियाँ अंदर डाल दीं । मम्मी इस अचानक हमले से हड़बड़ा गयीं और बोली: आऽऽह क्या कर रहे हो? इतनी जल्दी क्या है?
कल्लू मम्मी की बुर में उँगलियाँ अंदर बाहर करते हुए बोला: उफफफफ रँडी साली पूरी गीली हो गयी है चुदवाने के लिए और साली नाटक करती है।
अब मम्मी डर गयी कि कहाँ फँस गयी । उनके चेहरे पर उलझन के भाव स्पष्ट थे। अब वो उनकी गाँड़ को दबाने लगा और उनको बिस्तर पर लगभग पटक ही दिया और उलटा लिटा कर उनके चूतरों को दबाते हुए वहाँ ज़ोर ज़ोर से चपत भी मारने लगा। मम्मी चिल्लाए जा रही थी पर उसे जैसे कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था। मम्मी के दोनों गोले बिलकुल लाल हो गए थे। तभी उसने मम्मी की गाँड़ के छेद पर थूका और एक ऊँगली अपनी मुँह में डालकर गीला किया और फिर उनकी गाँड़ में डाल दिया। मम्मी उइइइइइइ कर उठी।
अब वो अपना कुर्ता पजामा और चड्डी निकाला और उसका लंड देखकर मैं तो मानो काँप गया। कम से कम १० इंच लंबा और मेरी कलाई जितना मोटा एकदम काला लौड़ा काली झाँटो से बाहर निकला हुआ किसी खम्भे की माफ़िक़ तना हुआ था और उसके नीचे बड़े बड़े बॉल्ज़ झूल रहे थे। इतना बड़ा लौड़ा मैंने कभी नहीं देखा था और मुझे डर लगा कि पता नहीं बेचारी मम्मी का क्या होगा? अब कल्लू मम्मी की गाँड़ को ऊपर किया और उनकी गाँड़ की दरार में अपना मुँह डाल कर चूसने लगा। मम्मी उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ कहकर आवाज़ें निकाल रही थीं। अब वो मम्मी को और ऊपर किया और उनकी बुर में पीछे से ही अपना लौड़ा डालने लगा। जबतक मम्मी को कुछ समझ में आता तब तक उसका आधा लौड़ा उनकी बुर में समा गया था। वो दर्द से चिल्लाई: हाऽऽऽय्यय क्या डाल रहे हो? उफफफफ इतना बड़ा? दुख रहा है । आऽऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह मरीइइइइइइइइइइइ। निकाआऽऽऽऽऽऽऽलो बाआऽऽऽऽऽऽहर । पर कल्लू कहाँ सुनने वाला रहा वो और ज़ोर से धक्का लगाकर पूरा दस इंचि अंदर करके मम्मी की कमर को कसकर पकड़ कर पूरी ताक़त से धक्के मारकर उनको चोदने लगा। मम्मी की घुटी हुई चीख़ों से मानो उसे कोई मतलब ही नहीं था।
क़रीब दस मिनट के बाद वो मम्मी की बुर से अपना गीला लौड़ा बाहर निकाला और मम्मी को पलट दिया । अब वो उनके ऊपर आकर उनकी चूचियाँ चूसने लगा । मैंने देखा कि मम्मी की आँखों में आँसू आ गए थे। अब वो उठा और अपना लण्ड उनके मुँह के सामने रखा और मम्मी ने पहली बार उसका विशाल लौड़ा देखा और डर के बोली: आऽऽऽऽह इतना बड़ा ? अब वो उसे मम्मी के मुँह में डाल दिया और मम्मी पूरा मुँह खोकर भी उसे ढंग से चूस नहीं पा रही थी। उनकी आँखों से आँसू निकले ही जा रहे थे। पर उस कमीने पर कोई असर नहीं पड़ा। अब वो उनके मुँह को थोड़ी देर चोदा फिर वो मम्मी की टांगो को घुटनों से मोड़ा और पूरा फैला दिया और बीच में आकर अपना लौड़ा फिर से अंदर डाला और मम्मी को अपने ताक़तवर बदन के नीचे पूरी तरह से दबोचकर चुदाई में लग गया। उसने क़रीब मम्मी को एक घंटे तक बुरी तरह से चोदा। पहली बार मैंने मम्मी को चुपचाप पड़े हुए चुदवाते देखा। वो बिलकुल एक लाश सी पड़ीं थी और कल्लू पागलों की तरह उनको चोदे जा रहा था। वो बीच बीच में मम्मी की चूचियों को मसल देता था और मम्मी के होंठ और दूध भी चूसता था।
अचानक वो तेज़ी से धक्के मारने लगा और झड़ गया। जब उसने अपना लौड़ा निकाला तो मम्मी की बुर पूरी सूजी हुई और लाल सी दिखाई दे रही थी और उसने से ढेर सारा सफ़ेद रस निकल कर बाहर गिर रहा था।
कल्लू: आऽऽऽह क्या मस्त टाइट बुर है तेरी इस उम्र में भी साली रँडी। मज़ा आ गया। साली दूसरी छोकरियाँ तो मर जाऊँगी चिल्लाकर मेरा दिमाग़ ख़राब कर देती हैं, पर साली कुतिया मज़े से ले ली मेरा लौड़ा ।
मम्मी आँखों में आँसू लिए वैसे ही पड़ी रहीं और बोली: अच्छा अब तुम जाओ। मेरा बेटा आने वाला है।
वो दाँत निपोरते हुए कपड़े पहना और जाते हुए बोला: जब फिर चुदवाना हो बुला लेना मेरी रँडी कुतिया ।
उसके जाने के बाद भी मम्मी बहुत देर तक वैसी ही पड़ी रही और फिर हिम्मत करके उठी और लंगड़ाते हुए बाथरूम में गयी।
उस दिन मम्मी दिन भर ठीक से चल नहीं पा रही थी। पापा, आपने पूछा तो बहाना बना दीं थीं कि मसल खिंच गयी है टाँग की। अगले दो दिन वो मुझे साथ लेकर गैनोकोलोजिस्ट के पास गयीं । तीन चार दिन लगे उनको सामान्य होने में।
राजीव: ओह फिर वो कल्लू को फिर से बुलाई?
शिवा: नहीं पापा फिर कभी नहीं बुलाई। वो एक बार ही में उसको समझ गयीं थीं कि वो कितना बड़ा जानवर है।
राजीव: तो ये क्या उसका आख़री प्रेमी था? या इसके बाद भी किसी से चुदवाई थी?
शिवा: कल्लू के बाद वो बस वो अपने कज़िन राहुल से फँसी थीं । राहुल मामा और उनका रिश्ता क़रीब ३ महीने चला और फिर आख़िर बार वो राहुल मामा की शादी में ही उनसे आख़ीर बार चुदिं । ये पंजाब की बात है।
राजीव: उस साले राहुल पर मुझे शुरू से ही शक था। वो सविता को बहुत घूरता था और दीदी दीदी कहता था। बहन चोद साला उससे राखी बँधवाता था और उसकी ही लेता था। उसका चचेरा भाई था वो। अच्छा तुमने क्या देखा बताओ ज़रा?
शिवा आगे बोलता चला गया-----/
पापा, आपको याद है जब पहली बार राहुल मामा घर पर आए थे तो मम्मी ने कितना बढ़िया स्वागत किया था उनका? मामू भी उनको घूरते रहते थे। एक बार मैं सुबह उठा तो देखा कि मामू किचन में जा रहे हैं। मैं चुपचाप उनके पीछे गया और देखा कि मामू वहाँ किचन में काम कर रही मम्मी को पीछे से पकड़कर उनसे लिपटे हुए थे और उनके कंधे चूम रहे थे । वो अपनी कमर हिलाकर मम्मी की गाँड़ में अपना लंड रगड़ रहे थे।
मामू: आऽऽऽह मेरी जान क्या गाँड़ है तुम्हारी मस्त गद्देदार । वो मम्मी की गाँड़ दबाकर बोले। आज दोपहर को अपनी फुद्दी दे दो ना दीदी।
मम्मी हँसकर: कमीना , मेरी फुद्दी तो ऐसे माँग रहा है जैसे खाने के लिए रोटी माँग रहा है। चल हट अभी कोई आ जाएगा।
मामू: दीदी पहले चुदाई के लिए हाँ करो तभी छोड़ूँगा । वो मम्मी की चूचियों को नायटी के ऊपर से ही दबा कर बोला।
मम्मी: आऽऽह अच्छा ठीक है १२ बजे कर लेना । अब छोड़ ना बदमाश कहीं का।
मैं समझ गया कि आज भी दोपहर को प्रोग्राम जमेगा। मैं उस दिन भी स्कूल से जल्दी आ गया और मैंने अपनी पुरानी जगह से देखना शुरू किया। अभी कमरे में मम्मी अकेली थी और वो ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़े होकर अपने बग़लों में सेण्ट लगा रही थीं। तभी मामू आ गया और आकर बोला: अरे दीदी आपके बदन की महक बहुत मस्त है आप वहाँ ख़ुशबू क्यों लगा रही हो? वह आकर उनकी बग़लों को उठाया और वहाँ नाक डालकर सूँघने लगा। अब वो मम्मी को बिस्तर पर गिरा दिया और ख़ुद भी उनके ऊपर चढ़ गया और एक लम्बे चुम्बन का आदान प्रदान होने लगा। फिर मामू ने उनकी चूचियाँ दबाईं और बोले: दीदी आज रँडी की तरह चुदवाओ ना प्लीज़ ।
मम्मी: अच्छा वो कैसे चुदवाती है?
मामू: वो पहले धीरे धीरे नंगी होती है, फिर वो अपनी गाँड़ मटका कर और चूचियाँ दबाकर और हिला हिला कर मर्द को मस्त करती हैं। फिर उनका लंड चूसती है और फिर मज़े से गाँड़ उछालकर चुदवाती है।
मम्मी: बस !! ये तो मैं तुम्हारे लिए कर ही सकती हूँ मेरे राजा भय्या।
ये कहकर वो मस्ती से खड़ी हुई और साड़ी में ही अपनी गाँड़ हिला कर मामू को दिखाने लगी। फिर वो साड़ी खोली धीरे धीरे और मटक कर चल के दिखाई पेटिकोट और ब्लाउस में कुछ ऐसे //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f447.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f447.svg
उफफफ पापा मुझे विश्वास नहीं हुआ कि मम्मी ये सब भी कर सकती हैं। फिर वो अपना ब्लाउस भी खोली और पेटिकोट भी नीचे गिरा दी। अब वो ब्रा और पैंटी में अपनी गाँड़ हिला कर दिखाने लगी।
ब्रा और पैंटी निकाल कर वो पूरी नंगी होकर अपने चूचे हिलायीं और गाँड़ भी मटकाने लगीं।
फिर वो आगे को होकर झुकी और अपनी गाँड़ मामू को दिखाईं । फिर अपनी चूचियाँ ख़ुद ही दबाई और मामू को दिखाई हिला हिला कर। उफफफ पापा वो पक्की रँडी लग रही थीं । मामू भी मस्ती से नंगे होकर अपना मोटा लौड़ा मम्मी को दिखाए और मम्मी कुतिया की तरह ज़मीन पर बैठी और मामू का लौड़ा चाटने और चूसने लगीं। वो उनके बॉल्ज़ भी चाट रही थी।
राजीव: उफफफ ये सविता को क्या हो गया था? शिवा: सच में पापा , वो एकदम रँडी की तरह लग रहीं थीं। फिर मामू बोले: चलो अब लेटो बिस्तर पर चुदाई शुरू करते हैं। अब मम्मी बिस्तर पर लेट गयीं । आपको पता वो पेट के बल लेट गयी। एकदम मस्त लग रही थीं । उनकी गाँड़ देखकर मामू का मोटा लौड़ा झटके मारने लगा।
अब मामू ने उनकी गाँड़ उठाई और नीचे हाथ डालकर उनकी चूचिया मसलने लगे। फिर अपना मोटा लंड मम्मी की बुर में घुसेड़ दिया और मम्मी मज़े से सिसकारी लेती हुई बोली: आऽऽऽऽहहह कितना मस्त लंड है भाई तेरा। उफफफ दबा और जोओओओओओओओओर से भाअअअअअअअइ । और चोओओओओओदो। फ़ाआऽऽऽऽड़ो मेंएएएएएएरि फुद्दीइइइइइइइइइइइइ। और वो अपनी गाँड़ पीछे करके मामू का पूरा लंड अंदर निगलने लगी।
अब मम्मी बोली: रुक भाई मैं ऊपर आती हूँ, तू भी क्या याद करेगा की क्या मज़ा दिया था दीदी ने?
यह कह कर वो ऊपर आ गयीं और उनका लौड़ा अपनी फुद्दी में डालकर ऊपर नीचे होकर चुदाई का भरपूर मज़ा लेने लगीं।
अब कुछ देर बाद मम्मी बोलीं: आऽऽऽऽह भाअअअअअअइइ अब ऊपर आकर तुम करो।
फिर मामू ऊपर आए और क़रीब आधे घंटे की ज़बरदस्त चुदाई के बाद मामू झड़े और मम्मी भी चिल्लाई जा रहीं थीं: आऽऽऽऽऽह मैं गयीइइइइइइइ।
अब दोनों शांत हो कर पड़े थे। मम्मी चुदाई के बाद कुछ इस तरह से पड़ीं थीं। //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f447.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f447.svg । वो कपड़े पहनने जा रहीं थीं। पर मामू ने उनको रोका और जी भर के उनकी जवानी का दर्शन किया फिर बहुत सारा चुम्बन लिया और फिर वो दोनों बाहर आए।
राजीव: तुमने कितनी बार उनकी चुदाई देखी?
शिवा: कई बार । पर आख़िर बार की बहुत भयानक चुदाई थी। और वो भी पंजाब में हुई थी। आपको याद है मामू की शादी तय हो गयी थी तो वो मम्मी को लेने आए थे। आप नहीं जा पाए थे और मम्मी हमेशा की तरह मुझे साथ लेकर पंजाब चलीं गयीं थीं मामू के साथ। रास्ते भर ट्रेन में मामू और मम्मी हँसी मज़ाक़ करते रहे ।जब हम मामू के घर पहुँचे तो वहाँ कई रिश्तेदार आ चुके थे। मम्मी तड़प रही थी मामू से अकेले में मिलने के लिए पर कोई जुगाड़ नहीं बन पा रहा था। ख़ैर शादी का दिन भी आ गया था। मम्मी ने बहन द्वारा की जाने वाली सब रस्में कीं । मामू भी दूल्हा बने हुए थे और मम्मी को यहाँ वहाँ छू भी रहे थे। अब अचानक मामू ने मम्मी को धीरे से कुछ कहा, मम्मी मुस्कुरा उठी। मैं चौकन्ना हो गया । मुझे पता चल गया था कि कुछ होने वाला है। पर समझ नहीं आ रहा था कि वो कैसे मिलेंगे इतनी भीड़ भाड़ में?
तभी मम्मी ग़ायब हो गयीं । पर मामू तो दुल्हे थे इसलिए मुझे अभी भी दिख रहे थे। शादी २ घंटे के बाद यहीं होनी थी। शमियाना घर के सामने ही लगा था एक ख़ाली मैदान में। अचानक मैंने देखा कि मामू अपने दोस्तों से कुछ बोले और अकेले पीछे की तरफ़ चले गए। फिर मैंने उनका पीछा किया और देखा कि वो शामियाने का कपड़ा उठाकर बाहर चले गए पीछे की ओर जहाँ पेड़ और झाड़ियाँ थीं । मैं समझ गया कि कुछ प्रोग्राम बन गया है। मैं भाग कर घर की छत पर पहुँचा और पीछे की तरफ़ देखा और सन्न रह गया। वहाँ शामियाने के पीछे एक पेड़ के साये में मम्मी और मामू चिपके खड़े थे। थोड़ा अँधेरा सा था पर मुझे पता था कि वे दोनों ही इतनी हिम्मत कर सकते हैं। अब मम्मी नीचे बैठी और मामू ने अपना पजामा नीचे गिरा दिया और मम्मी उनका लंड चूसने लगीं। बड़ी देर बाद मामू ने मम्मी को उठाया और उनकी सलवार खोल दी । अब मम्मी पेड़ के सहारे आगे को झुकी और मामू ने पीछे से अपना लौड़ा उनकी फुद्दी में डाला और उनको बेतहाशा चोदने लगे। मम्मी भी अपनी गाँड़ पीछे करके चुदवा रहीं थीं ।
मैं हैरान रह गया कि मामू शादी के सिर्फ़ एक घंटे पहले भी मम्मी से चुदाई में लगा है। मस्त चुदाई के बाद दोनों कपड़े ठीक किए और फिर अलग अलग रास्ते से वापस जनवासे में आ गए और थोड़ी देर बाद मामू की शादी भी हो गयी।
राजीव: साला बड़ा ही कमीना इंसान है ये इसने अपनी बहन की चुदाई कीं वो भी अपनी शादीके बस एक घंटे पहले? उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या क्या हुआ मेरे साथ और मुझे कोई ख़बर ही नहीं हुई।
शिवा: पापा उसके कुछ दिनों बाद आप ठीक हो गए और फिर मैंने एक दिन आपके कमरे से ज़बरदस्त चुदाई के साथ मम्मी की सिसकारियाँ सुनी तो मैं समझ गया कि अब सब नोर्मल हो गया है। उसके बाद मैंने मम्मी को और किसी से चुदवाते नहीं देखा।
मालिनी: मुझे मम्मी से कोई शिकायत नहीं है। आख़िर जब पापा ठीक हो गए तो वो भी नोर्मल जीवन जीने लगी ना। वो जो कुछ भी कीं पापा की बीमारी की वजह से कीं थीं।
राजीव: चलो अब जो दुनिया में नहीं है उससे क्या नाराज़ होना? चलो शिवा तुम मालिनी को चोद लो और फिर सोते हैं।
शिवा: पापा आप नहीं चोदेंगे इसे?
राजीव: नहीं मेरा अब मन नहीं है तुम ही कर लो।
अब शिवा मालिनी के ऊपर आकर उसकी ज़बरदस्त चुदाई किया क़रीब आधा घंटा और फिर दोनों थक कर सो गए।राजीव उनकी तरफ़ करवट लेकर लेटा हुआ उनकी चुदाई देख चुका था और बीच बीच में मालिनी की चूचि भी मसला था।
राजीव की आँखों से नींद ग़ायब थी, वो अब भी शिवा द्वारा बताई हुई बातों को सोच रहा था।