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बहू नगीना और ससुर कमीना

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मालिनी अब शिवा का लंड चूसने लगी। अब भी दोनों मर्दों के हाथ उसके बदन पर घूम रहे थे।

शिवा : वैसे पापा , मम्मी का सबसे बुरा हाल कल्लू टेलर ने किया था । वो इसी से अपने ब्लाउस वग़ैरह सिलवाती थीं । वो मुझे साथ उसकी दुकान पर हमेशा साथ में ले जाती थीं । मैं एक छोटे से कमरे में बैठ जाता था और मम्मी अंदर चली जाती थी दूसरे कमरे में । दोनों कमरों के बीच में एक पर्दा था। मैं परदे को बिलकुल ज़रा सा हटाकर अंदर झाँकता था और मुझे कल्लू और मम्मी साफ़ दिख जाते थे। उस दिन कल्लू मम्मी के ब्लाउस का नाप ले रहा था। उसने एक पजामा और कुर्ता पहना था। वो मम्मी की साड़ी के पल्लू को गिराकर नाप लेने लगा। वो मम्मी की चूचियाँ छूने का कोई भी मौक़ा नहीं छोड़ रहा था। वो मम्मी की निपल के ऊपर एक टेप का हिस्सा लगाया और चूचियों के ऊपर से घुमाकर नाप ले रहा था। फिर वो ब्लाउस के अंदर ऊँगली डालकर कहा: ढीला है आपका ब्लाउस । ज़रा टाइट बना दूँ।

मम्मी: हाँ बना दो। आऽऽऽऽहाह । मैं चौंक कर देखा कि ये आवाज़ क्यों निकाली मम्मी ने? मैंने देखा कि वो अब मम्मी की चूचियाँ ब्लाउस के ऊपर से दबा रहा था। उसका पजामा आगे से बहुत ऊपर उठा हुआ था । वो मम्मी के पीछे आकर नाप लेने के बहाने उनकी गाँड़ से चिपक गया था और पजामा का आगे का हिस्सा उनकी गाँड़ में घुसा रहा था। उफफफफ पापा, अब मम्मी का कंट्रोल छूटने लगा था। वो अब कल्लू का विरोध नहीं कर पा रही थी। अब कल्लू ने भी नाप लेने का दिखावा बंद किया और मम्मी के कंधे को चूमने लगा और बोला: आऽऽऽह क्या माल हो मेरी जान। एक बार सेवा का मौक़ा दे दो। मस्ती से भर दूँगा। एक बार चुदवा लो ना मेरी जान। यह कहते हुए उसने मम्मी की साड़ी के ऊपर से बुर को भींच लिया। मम्मी उफफफफ कर उठी और बोली: आऽऽऽह। छोड़ो ना मुझे।

कल्लू: अरे बोलो ना कब आऊँ तुम्हारे घर चुदाई के लिए?

मम्मी: आऽऽऽह ठीक है कल १२ बजे आ जाओ घर पर। पर किसी से बात नहीं करना इस बारे में वरना बहुत बदनामी हो जाएगी।

कल्लू मज़े से भरकर: अरे किसको बताऊँगा? कोई फ़िकर मत करो। अब वह उनकी साड़ी उठाया और नीचे से उनकी जाँघ और बुर सहलाने लगा। अब मम्मी उइइइइइ कहकर बोली: बस बाक़ी का कल कर लेना। नाप तो ले लिया ना।

वह मम्मी की गाँड़ मसलकर बोला: क्या मस्त मोटी गाँड़ है। उफफफफ मज़ा आ जाएगा चोदने में।

मैंने एक बात नोटिस किया कि उसने मम्मी को अपना लंड नहीं छूने दिया। उसने ऐसा क्यों किया ये मुझे दूसरे दिन पता चला।

राजीव: उफफफ क्या वो एक टेलर से भी चुदवा चुकी है?

मालिनी: पापा, अगर आप एक कामवाली की ले सकते हो तो वो एक टेलर को दे दीं तो क्या हुआ?

राजीव मालिनी की गाँड़ दबाकर बोला: तो क्या तुम भी किसी टेलर या माली से चुदवा लोगी।

मालिनी हँसकर: मेरे लिए तो दो दो आशिक़ है मैं क्यों कहीं और जाऊँ? ये कहकर वो एक एक हाथ में दोनों के लंड को पकड़कर सहला दी। फिर बोली: हाँ शिवा फिर क्या हुआ?

शिवा: फिर कल्लू मम्मी को अपनी बाँह में दबोचकर उनके होंठ चूसा और एक बार और ब्लाउस के अंदर हाथ डालकर उनकी चूचियाँ मसला और फिर नीचे बैठ कर उनकी साड़ी उठाई और उनकी जाँघ चूमने लगा और बुर में भी मुँह घुसेड़ कर पता नहीं क्या क्या करने लगा।

मम्मी : उइइइइइइइ बस करोओओओओओओ । बाक़ी का कल कर लेना। ये कहकर अपने आप को छुड़ाई और कपड़े ठीक करके बाहर आयी। हम दोनों वापस घर आ गए।

अगले दिन मैं स्कूल से १२ बजे आकर अपनी जगह पर आकर जम गया। मुझे उत्सुकता थी कि मम्मी को कल्लू जैसा आदमी कैसे चोदता है। सही समय पर वो आया और आते ही मम्मी को पकड़कर अपने से चिपकाकर चूमने और चूसने लगा। फिर वो मम्मी की साड़ी और ब्लाउस उतारा और ब्रा के ऊपर से उनकी चूचियों को मस्ती से दबाया। मम्मी आऽऽऽह करके बोली: आऽऽऽऽऽऽह थोड़ा धीरे से दबाओ ना। वो जैसे कुछ सुना ही नहीं। अब उसने उनकी पेटिकोट का नाड़ा खोला और उसे नीचे गिरा दिया। अब वो मम्मी को ब्रा और पैंटी में देखकर मस्ती से भर गया और उनके मोटे चूतरों को दबाकर बोला: साली मस्त माल है तू तो।

मैं हैरान रह गया कि जो आदमी कल तक मम्मी को आप कहकर बात करता था। अब सीधे तू पर आ गया है। फिर वो उनकी ब्रा खोला और उनकी चूचियों पर टूट पड़ा। उफफफफ कितनी ज़ोर से दबा रहा था मानो उनको निचोड़कर दूध ही निकाल देगा। मम्मी आऽऽऽऽऽहहह चिल्लाई। पर वो बिलकुल ध्यान नहीं दे रहा था। अब वो उनकी पैंटी भी निकाला और उनकी बुर को अपने पंजे में दबाने लगा। मम्मी उफफफफ कर उठी तभी उसने तीन मोटी मोटी उँगलियाँ अंदर डाल दीं । मम्मी इस अचानक हमले से हड़बड़ा गयीं और बोली: आऽऽह क्या कर रहे हो? इतनी जल्दी क्या है?

कल्लू मम्मी की बुर में उँगलियाँ अंदर बाहर करते हुए बोला: उफफफफ रँडी साली पूरी गीली हो गयी है चुदवाने के लिए और साली नाटक करती है।

अब मम्मी डर गयी कि कहाँ फँस गयी । उनके चेहरे पर उलझन के भाव स्पष्ट थे। अब वो उनकी गाँड़ को दबाने लगा और उनको बिस्तर पर लगभग पटक ही दिया और उलटा लिटा कर उनके चूतरों को दबाते हुए वहाँ ज़ोर ज़ोर से चपत भी मारने लगा। मम्मी चिल्लाए जा रही थी पर उसे जैसे कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था। मम्मी के दोनों गोले बिलकुल लाल हो गए थे। तभी उसने मम्मी की गाँड़ के छेद पर थूका और एक ऊँगली अपनी मुँह में डालकर गीला किया और फिर उनकी गाँड़ में डाल दिया। मम्मी उइइइइइइ कर उठी।

अब वो अपना कुर्ता पजामा और चड्डी निकाला और उसका लंड देखकर मैं तो मानो काँप गया। कम से कम १० इंच लंबा और मेरी कलाई जितना मोटा एकदम काला लौड़ा काली झाँटो से बाहर निकला हुआ किसी खम्भे की माफ़िक़ तना हुआ था और उसके नीचे बड़े बड़े बॉल्ज़ झूल रहे थे। इतना बड़ा लौड़ा मैंने कभी नहीं देखा था और मुझे डर लगा कि पता नहीं बेचारी मम्मी का क्या होगा? अब कल्लू मम्मी की गाँड़ को ऊपर किया और उनकी गाँड़ की दरार में अपना मुँह डाल कर चूसने लगा। मम्मी उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ कहकर आवाज़ें निकाल रही थीं। अब वो मम्मी को और ऊपर किया और उनकी बुर में पीछे से ही अपना लौड़ा डालने लगा। जबतक मम्मी को कुछ समझ में आता तब तक उसका आधा लौड़ा उनकी बुर में समा गया था। वो दर्द से चिल्लाई: हाऽऽऽय्यय क्या डाल रहे हो? उफफफफ इतना बड़ा? दुख रहा है । आऽऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह मरीइइइइइइइइइइइ। निकाआऽऽऽऽऽऽऽलो बाआऽऽऽऽऽऽहर । पर कल्लू कहाँ सुनने वाला रहा वो और ज़ोर से धक्का लगाकर पूरा दस इंचि अंदर करके मम्मी की कमर को कसकर पकड़ कर पूरी ताक़त से धक्के मारकर उनको चोदने लगा। मम्मी की घुटी हुई चीख़ों से मानो उसे कोई मतलब ही नहीं था।

क़रीब दस मिनट के बाद वो मम्मी की बुर से अपना गीला लौड़ा बाहर निकाला और मम्मी को पलट दिया । अब वो उनके ऊपर आकर उनकी चूचियाँ चूसने लगा । मैंने देखा कि मम्मी की आँखों में आँसू आ गए थे। अब वो उठा और अपना लण्ड उनके मुँह के सामने रखा और मम्मी ने पहली बार उसका विशाल लौड़ा देखा और डर के बोली: आऽऽऽऽह इतना बड़ा ? अब वो उसे मम्मी के मुँह में डाल दिया और मम्मी पूरा मुँह खोकर भी उसे ढंग से चूस नहीं पा रही थी। उनकी आँखों से आँसू निकले ही जा रहे थे। पर उस कमीने पर कोई असर नहीं पड़ा। अब वो उनके मुँह को थोड़ी देर चोदा फिर वो मम्मी की टांगो को घुटनों से मोड़ा और पूरा फैला दिया और बीच में आकर अपना लौड़ा फिर से अंदर डाला और मम्मी को अपने ताक़तवर बदन के नीचे पूरी तरह से दबोचकर चुदाई में लग गया। उसने क़रीब मम्मी को एक घंटे तक बुरी तरह से चोदा। पहली बार मैंने मम्मी को चुपचाप पड़े हुए चुदवाते देखा। वो बिलकुल एक लाश सी पड़ीं थी और कल्लू पागलों की तरह उनको चोदे जा रहा था। वो बीच बीच में मम्मी की चूचियों को मसल देता था और मम्मी के होंठ और दूध भी चूसता था।

अचानक वो तेज़ी से धक्के मारने लगा और झड़ गया। जब उसने अपना लौड़ा निकाला तो मम्मी की बुर पूरी सूजी हुई और लाल सी दिखाई दे रही थी और उसने से ढेर सारा सफ़ेद रस निकल कर बाहर गिर रहा था।

कल्लू: आऽऽऽह क्या मस्त टाइट बुर है तेरी इस उम्र में भी साली रँडी। मज़ा आ गया। साली दूसरी छोकरियाँ तो मर जाऊँगी चिल्लाकर मेरा दिमाग़ ख़राब कर देती हैं, पर साली कुतिया मज़े से ले ली मेरा लौड़ा ।

मम्मी आँखों में आँसू लिए वैसे ही पड़ी रहीं और बोली: अच्छा अब तुम जाओ। मेरा बेटा आने वाला है।

वो दाँत निपोरते हुए कपड़े पहना और जाते हुए बोला: जब फिर चुदवाना हो बुला लेना मेरी रँडी कुतिया ।

उसके जाने के बाद भी मम्मी बहुत देर तक वैसी ही पड़ी रही और फिर हिम्मत करके उठी और लंगड़ाते हुए बाथरूम में गयी।

उस दिन मम्मी दिन भर ठीक से चल नहीं पा रही थी। पापा, आपने पूछा तो बहाना बना दीं थीं कि मसल खिंच गयी है टाँग की। अगले दो दिन वो मुझे साथ लेकर गैनोकोलोजिस्ट के पास गयीं । तीन चार दिन लगे उनको सामान्य होने में।

राजीव: ओह फिर वो कल्लू को फिर से बुलाई?

शिवा: नहीं पापा फिर कभी नहीं बुलाई। वो एक बार ही में उसको समझ गयीं थीं कि वो कितना बड़ा जानवर है।

राजीव: तो ये क्या उसका आख़री प्रेमी था? या इसके बाद भी किसी से चुदवाई थी?

शिवा: कल्लू के बाद वो बस वो अपने कज़िन राहुल से फँसी थीं । राहुल मामा और उनका रिश्ता क़रीब ३ महीने चला और फिर आख़िर बार वो राहुल मामा की शादी में ही उनसे आख़ीर बार चुदिं । ये पंजाब की बात है।

राजीव: उस साले राहुल पर मुझे शुरू से ही शक था। वो सविता को बहुत घूरता था और दीदी दीदी कहता था। बहन चोद साला उससे राखी बँधवाता था और उसकी ही लेता था। उसका चचेरा भाई था वो। अच्छा तुमने क्या देखा बताओ ज़रा?

शिवा आगे बोलता चला गया-----/

पापा, आपको याद है जब पहली बार राहुल मामा घर पर आए थे तो मम्मी ने कितना बढ़िया स्वागत किया था उनका? मामू भी उनको घूरते रहते थे। एक बार मैं सुबह उठा तो देखा कि मामू किचन में जा रहे हैं। मैं चुपचाप उनके पीछे गया और देखा कि मामू वहाँ किचन में काम कर रही मम्मी को पीछे से पकड़कर उनसे लिपटे हुए थे और उनके कंधे चूम रहे थे । वो अपनी कमर हिलाकर मम्मी की गाँड़ में अपना लंड रगड़ रहे थे।

मामू: आऽऽऽह मेरी जान क्या गाँड़ है तुम्हारी मस्त गद्देदार । वो मम्मी की गाँड़ दबाकर बोले। आज दोपहर को अपनी फुद्दी दे दो ना दीदी।

मम्मी हँसकर: कमीना , मेरी फुद्दी तो ऐसे माँग रहा है जैसे खाने के लिए रोटी माँग रहा है। चल हट अभी कोई आ जाएगा।

मामू: दीदी पहले चुदाई के लिए हाँ करो तभी छोड़ूँगा । वो मम्मी की चूचियों को नायटी के ऊपर से ही दबा कर बोला।

मम्मी: आऽऽह अच्छा ठीक है १२ बजे कर लेना । अब छोड़ ना बदमाश कहीं का।

मैं समझ गया कि आज भी दोपहर को प्रोग्राम जमेगा। मैं उस दिन भी स्कूल से जल्दी आ गया और मैंने अपनी पुरानी जगह से देखना शुरू किया। अभी कमरे में मम्मी अकेली थी और वो ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़े होकर अपने बग़लों में सेण्ट लगा रही थीं। तभी मामू आ गया और आकर बोला: अरे दीदी आपके बदन की महक बहुत मस्त है आप वहाँ ख़ुशबू क्यों लगा रही हो? वह आकर उनकी बग़लों को उठाया और वहाँ नाक डालकर सूँघने लगा। अब वो मम्मी को बिस्तर पर गिरा दिया और ख़ुद भी उनके ऊपर चढ़ गया और एक लम्बे चुम्बन का आदान प्रदान होने लगा। फिर मामू ने उनकी चूचियाँ दबाईं और बोले: दीदी आज रँडी की तरह चुदवाओ ना प्लीज़ ।

मम्मी: अच्छा वो कैसे चुदवाती है?

मामू: वो पहले धीरे धीरे नंगी होती है, फिर वो अपनी गाँड़ मटका कर और चूचियाँ दबाकर और हिला हिला कर मर्द को मस्त करती हैं। फिर उनका लंड चूसती है और फिर मज़े से गाँड़ उछालकर चुदवाती है।

मम्मी: बस !! ये तो मैं तुम्हारे लिए कर ही सकती हूँ मेरे राजा भय्या।

ये कहकर वो मस्ती से खड़ी हुई और साड़ी में ही अपनी गाँड़ हिला कर मामू को दिखाने लगी। फिर वो साड़ी खोली धीरे धीरे और मटक कर चल के दिखाई पेटिकोट और ब्लाउस में कुछ ऐसे //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f447.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f447.svg

उफफफ पापा मुझे विश्वास नहीं हुआ कि मम्मी ये सब भी कर सकती हैं। फिर वो अपना ब्लाउस भी खोली और पेटिकोट भी नीचे गिरा दी। अब वो ब्रा और पैंटी में अपनी गाँड़ हिला कर दिखाने लगी।

ब्रा और पैंटी निकाल कर वो पूरी नंगी होकर अपने चूचे हिलायीं और गाँड़ भी मटकाने लगीं।

फिर वो आगे को होकर झुकी और अपनी गाँड़ मामू को दिखाईं । फिर अपनी चूचियाँ ख़ुद ही दबाई और मामू को दिखाई हिला हिला कर। उफफफ पापा वो पक्की रँडी लग रही थीं । मामू भी मस्ती से नंगे होकर अपना मोटा लौड़ा मम्मी को दिखाए और मम्मी कुतिया की तरह ज़मीन पर बैठी और मामू का लौड़ा चाटने और चूसने लगीं। वो उनके बॉल्ज़ भी चाट रही थी।

राजीव: उफफफ ये सविता को क्या हो गया था? शिवा: सच में पापा , वो एकदम रँडी की तरह लग रहीं थीं। फिर मामू बोले: चलो अब लेटो बिस्तर पर चुदाई शुरू करते हैं। अब मम्मी बिस्तर पर लेट गयीं । आपको पता वो पेट के बल लेट गयी। एकदम मस्त लग रही थीं । उनकी गाँड़ देखकर मामू का मोटा लौड़ा झटके मारने लगा।

अब मामू ने उनकी गाँड़ उठाई और नीचे हाथ डालकर उनकी चूचिया मसलने लगे। फिर अपना मोटा लंड मम्मी की बुर में घुसेड़ दिया और मम्मी मज़े से सिसकारी लेती हुई बोली: आऽऽऽऽहहह कितना मस्त लंड है भाई तेरा। उफफफ दबा और जोओओओओओओओओर से भाअअअअअअअइ । और चोओओओओओदो। फ़ाआऽऽऽऽड़ो मेंएएएएएएरि फुद्दीइइइइइइइइइइइइ। और वो अपनी गाँड़ पीछे करके मामू का पूरा लंड अंदर निगलने लगी।

अब मम्मी बोली: रुक भाई मैं ऊपर आती हूँ, तू भी क्या याद करेगा की क्या मज़ा दिया था दीदी ने?

यह कह कर वो ऊपर आ गयीं और उनका लौड़ा अपनी फुद्दी में डालकर ऊपर नीचे होकर चुदाई का भरपूर मज़ा लेने लगीं।

अब कुछ देर बाद मम्मी बोलीं: आऽऽऽऽह भाअअअअअअइइ अब ऊपर आकर तुम करो।

फिर मामू ऊपर आए और क़रीब आधे घंटे की ज़बरदस्त चुदाई के बाद मामू झड़े और मम्मी भी चिल्लाई जा रहीं थीं: आऽऽऽऽऽह मैं गयीइइइइइइइ।

अब दोनों शांत हो कर पड़े थे। मम्मी चुदाई के बाद कुछ इस तरह से पड़ीं थीं। //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f447.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f447.svg । वो कपड़े पहनने जा रहीं थीं। पर मामू ने उनको रोका और जी भर के उनकी जवानी का दर्शन किया फिर बहुत सारा चुम्बन लिया और फिर वो दोनों बाहर आए।

राजीव: तुमने कितनी बार उनकी चुदाई देखी?

शिवा: कई बार । पर आख़िर बार की बहुत भयानक चुदाई थी। और वो भी पंजाब में हुई थी। आपको याद है मामू की शादी तय हो गयी थी तो वो मम्मी को लेने आए थे। आप नहीं जा पाए थे और मम्मी हमेशा की तरह मुझे साथ लेकर पंजाब चलीं गयीं थीं मामू के साथ। रास्ते भर ट्रेन में मामू और मम्मी हँसी मज़ाक़ करते रहे ।जब हम मामू के घर पहुँचे तो वहाँ कई रिश्तेदार आ चुके थे। मम्मी तड़प रही थी मामू से अकेले में मिलने के लिए पर कोई जुगाड़ नहीं बन पा रहा था। ख़ैर शादी का दिन भी आ गया था। मम्मी ने बहन द्वारा की जाने वाली सब रस्में कीं । मामू भी दूल्हा बने हुए थे और मम्मी को यहाँ वहाँ छू भी रहे थे। अब अचानक मामू ने मम्मी को धीरे से कुछ कहा, मम्मी मुस्कुरा उठी। मैं चौकन्ना हो गया । मुझे पता चल गया था कि कुछ होने वाला है। पर समझ नहीं आ रहा था कि वो कैसे मिलेंगे इतनी भीड़ भाड़ में?

तभी मम्मी ग़ायब हो गयीं । पर मामू तो दुल्हे थे इसलिए मुझे अभी भी दिख रहे थे। शादी २ घंटे के बाद यहीं होनी थी। शमियाना घर के सामने ही लगा था एक ख़ाली मैदान में। अचानक मैंने देखा कि मामू अपने दोस्तों से कुछ बोले और अकेले पीछे की तरफ़ चले गए। फिर मैंने उनका पीछा किया और देखा कि वो शामियाने का कपड़ा उठाकर बाहर चले गए पीछे की ओर जहाँ पेड़ और झाड़ियाँ थीं । मैं समझ गया कि कुछ प्रोग्राम बन गया है। मैं भाग कर घर की छत पर पहुँचा और पीछे की तरफ़ देखा और सन्न रह गया। वहाँ शामियाने के पीछे एक पेड़ के साये में मम्मी और मामू चिपके खड़े थे। थोड़ा अँधेरा सा था पर मुझे पता था कि वे दोनों ही इतनी हिम्मत कर सकते हैं। अब मम्मी नीचे बैठी और मामू ने अपना पजामा नीचे गिरा दिया और मम्मी उनका लंड चूसने लगीं। बड़ी देर बाद मामू ने मम्मी को उठाया और उनकी सलवार खोल दी । अब मम्मी पेड़ के सहारे आगे को झुकी और मामू ने पीछे से अपना लौड़ा उनकी फुद्दी में डाला और उनको बेतहाशा चोदने लगे। मम्मी भी अपनी गाँड़ पीछे करके चुदवा रहीं थीं ।

मैं हैरान रह गया कि मामू शादी के सिर्फ़ एक घंटे पहले भी मम्मी से चुदाई में लगा है। मस्त चुदाई के बाद दोनों कपड़े ठीक किए और फिर अलग अलग रास्ते से वापस जनवासे में आ गए और थोड़ी देर बाद मामू की शादी भी हो गयी।

राजीव: साला बड़ा ही कमीना इंसान है ये इसने अपनी बहन की चुदाई कीं वो भी अपनी शादीके बस एक घंटे पहले? उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या क्या हुआ मेरे साथ और मुझे कोई ख़बर ही नहीं हुई।

शिवा: पापा उसके कुछ दिनों बाद आप ठीक हो गए और फिर मैंने एक दिन आपके कमरे से ज़बरदस्त चुदाई के साथ मम्मी की सिसकारियाँ सुनी तो मैं समझ गया कि अब सब नोर्मल हो गया है। उसके बाद मैंने मम्मी को और किसी से चुदवाते नहीं देखा।

मालिनी: मुझे मम्मी से कोई शिकायत नहीं है। आख़िर जब पापा ठीक हो गए तो वो भी नोर्मल जीवन जीने लगी ना। वो जो कुछ भी कीं पापा की बीमारी की वजह से कीं थीं।

राजीव: चलो अब जो दुनिया में नहीं है उससे क्या नाराज़ होना? चलो शिवा तुम मालिनी को चोद लो और फिर सोते हैं।

शिवा: पापा आप नहीं चोदेंगे इसे?

राजीव: नहीं मेरा अब मन नहीं है तुम ही कर लो।

अब शिवा मालिनी के ऊपर आकर उसकी ज़बरदस्त चुदाई किया क़रीब आधा घंटा और फिर दोनों थक कर सो गए।राजीव उनकी तरफ़ करवट लेकर लेटा हुआ उनकी चुदाई देख चुका था और बीच बीच में मालिनी की चूचि भी मसला था।

राजीव की आँखों से नींद ग़ायब थी, वो अब भी शिवा द्वारा बताई हुई बातों को सोच रहा था।
 
अगले दिन सुबह मालिनी सबसे पहले उठी और सबके लिए चाय बनाई । अभी उसने एक नायटी डाल ली थी और उसके नीचे कुछ नहीं पहना था । जब वो दोनों बाप बेटा को जगाने आयी तो शिवा वहाँ नहीं था। उसने राजीव को उठाया और राजीव ने उठते हुए उसको अपने ऊपर खींच लिया और उसके गाल चूमने लगा।

मालिनी ने उसकी नंगी छाती को सहलाकर कहा: पापा आप अप्सेट हो क्या मम्मी के बारे में सुनकर?

राजीव उसकी चूचि दबाकर: नहीं बेटा , अब ठीक है। वो बेचारी तो रही नहीं, उससे क्या नाराज़ होना? और फिर वो समय ही ऐसा था कि बीमारी की वजह से मैं उसकी इच्छा पूरी नहीं कर पाता था। वैसे भी मेरे ठीक होने के बाद वो किसी से नहीं मिली। यही बहुत सही हुआ ना?

मालिनी ने पापा के आधे खड़े लौड़े को सहलाकर कहा: हाँ पापा ये तो है बाद में वो सम्भल गयी। चलिए अब उठिए चाय पी लीजिए।

राजीव उठकर मालिनी की गाँड़ सहलाया और बोला: शिवा कहाँ है?

तभी शिवा अंदर आया और बोला: सुबह सुबह पापा बहु मज़ा ले रहे हैं? वो भी पापा की तरह ही नंगा था और उसका बड़ा लौड़ा नीचे को लटक कर झूल सा रहा था।

मालिनी और राजीव हँसने लगे। फिर सब चाय पीने लगे।

शिवा: पापा आज आयशा को बुला लो, अगर उसकी तबियत ठीक हो तो।

राजीव: मुझे तो मालिनी से परमिशन लेनी होगी। बोलो मालिनी क्या कहती हो?

मालिनी: वाह जैसे मेरे मना करने से आप उसको नहीं बुलाएँगे।

वो सोफ़े पर बैठी थी और शिवा उसके बग़ल में बैठा था। अब राजीव भी उठकर आया और मालिनी के बग़ल में ही बैठ गया। राजीव ने एक हाथ मालिनी की जाँघ पर रखा और नायटी के ऊपर से उसे सहलाने लगा। शिवा भी एक जाँघ पर हाथ फेर रहा था।

अब मालिनी ने मस्ती में आकर एक एक हाथ में दोनों के लंड पकड़ लिए और सहलाने लगी और बोली: सच में मैं बहुत लकी हूँ जो आप दोनों मुझे इतना प्यार करते हो। वो बारी बारी से दोनों के गाल चुमी। अब वो दोनों भी उसकी एक एक चूचि दबाने लगे। कमरे में मस्ती का माहोल बनने लगा था।

राजीव: क्या बेटा सुबह सुबह ही नायटी पहन ली? देखो हमारे लंड कैसे खड़े हैं तुम्हें मज़ा देने के लिए? चलो उतारो इसको और चुदाई करते हैं।

शिवा ने मुस्कुराकर उसकी नायटी उतारनी शुरू की और मालिनी भी खड़ी होकर उसकी मदद की। राजीव ने उसे आगे की ओर झुकाया और दोनों उसकी लटकी हुई चूचियाँ दबाकर चूसने लगे। मालिनी भी उनके लंड सहलाए जा रही थी।

शिवा: आऽऽऽह मेरी जान अब लंड चूसो ना।

मालिनी अब नीचे बैठकर दोनों के लंड बारी बारी से चूसने लगी। शिवा अब उठा और जाकर उसको आधा उठाया और उसकी गाँड़ की दरार में अपना मुँह घुसेड़कर बुर चाटने लगा। मालिनी ह्म्म्म्म्म्म्म आऽऽऽऽऽह करने लगी। अब राजीव बोला: आओ बेटा मेरे लंड पर बैठो। वह उठी और अपने पाँव फैलाकर उसके लंड के ऊपर अपना बुर रखकर बैठ गयी। उसका मोटा लंड उसकी बुर में घुसता चला गया। अब शिवा उसके सामने आया और अपना लंड उसके मुँह के पास ले आया। वो उसे चूसकर अपनी कमर उछालकर चुदवाने लगी। वो उन्न्न्न्न्न्न्न्न आऽऽऽऽऽह ह्म्म्म्म्म्म्म चिल्लाए जा रही थी।

क़रीब दस मिनट के बाद राजीव उसे उठाया और शिवा को बैठने का इशारा किया। अब वो शिवा का लंड बुर में और राजीव का मुँह में लेकर मज़े से चुदवा रही थी। राजीव और शिवा उसकी चूचि और गाँड़ सहला रहे थे। अब मालिनी उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ कहकर झड़ने लगी और शिवा भी नीचे से लंड उछालकर झड़ने के करीब आ गया। उधर राजीव भी बहुत गरम हो चुका था। अब वो अपना लंड मुँह से निकालकर अपने हाथ से उसे मुठियाने लगा और शिवा समझ गया कि पापा आज उसको अपना रस पिलाने वाले हैं। पता नहीं उसे क्या हुआ कि वो भी मालिनी को अपनी गोद से उठाके सोफ़े में बिठाया और वो ख़ुद भी अपने लंड को पापा की तरह ही मूठ्ठी में भरकर ज़ोर से उसके मुँह के पास हिलाने लगा।

मालिनी समझ गयी कि आज उसको दोनों का रस पीने को मिलने वाला है, वो उत्तेजित होकर अपना मुँह खोली ताकि पूरा रसपान कर सके। राजीव ने अब अपने लौड़े का रस छोड़ना शुरू किया। मालिनी के होंठ और गाल में सफ़ेद गाढ़ा रस गिरता चला गया। उधर शिवा भी क्लाइमैक्स पर पहुँचा और झटके से झड़ने लगा। जल्दी ही मालिनी का पूरा मुँह बाप बेटे के गाढ़े सफ़ेद रस से पूरा भर गया। वो भी अब जीभ निकालकर उनका लौड़ा बारी बारी से चाटने लगी। उसने चाटकर दोनों के लौड़े पूरा साफ़ कर दिया। अब शिवा उठा और बोला: आऽऽह मेरी जान चलो उस आइने में देखो क्या रँडी लग रही हो। राजीव भी उसकी गाँड़ दबाकर उसको आइने के सामने ले गया। अब दोनों उसके पीछे खड़े थे । मालिनी अपने आप को देखकर शर्मा गयी। उसके मुँह पर सफ़ेद रस सब जगह चिपका सा था। अब वो बाथरूम की ओर दौड़ गयी।

क्योंकि बाई आने वाली थी इसलिए सबने कपड़े पहन लिए। शिवा नाश्ता करके दुकान जाते हुए बोला: पापा आयशा को बुलाना होगा तो मुझे फ़ोन कर दीजिएगा।

क़रीब १२ बजे अब मालिनी और राजीव बैठे थे अब बाई जा चुकी थी। मालिनी: पापा मैं नहीं चाहती कि आप अभी आयशा पर ध्यान दो। अभी मुझे आप दोनों से ही चुदवाना है एक महीने तक ताकि मैं आपमें से किसी के भी बच्चे की माँ बन सकूँ।

राजीव चौक कर: ओह ऐसा ? तो क्या अब तक तुम कोई पिल्ज़ ले रही थी ?

मालिनी: बस एक दिन ली थी जब असलम ने किया था। मैं आप दोनों से ही बच्चा चाहती हूँ बाहर वाले से नहीं।

राजीव उसे प्यार से देखा और बोला: ठीक है बेटा जैसा तुम चाहोगी वैसा ही होगा। अब हमारे घर में तभी कोई बाहर वाला आएगा जब तुम प्रेगनेंट हो जाओगी। ठीक है ना?

मालिनी जाकर प्यार से उसके गोद में बैठी और उसके गले में बाहँ डाली और बोली: थैंक यू पापा। आप बहुत अच्छे हो। शिवा भी ये बात मान जाएँगे ना?

राजीव: वो भी तुमको बहुत प्यार करता है ज़रूर तुम्हारी भावनाओं की क़द्र करेगा। वह उसे चूमते हुए बोला।

तभी शिवा का फ़ोन आया और वो बोला: पापा आयशा का क्या फ़ैसला किया? वो मुझे फ़ोन की थी कि क्या वो आपसे चुदवा सकती है?

राजीव: मेरी बहु नहीं चाहती कि अभी बाहर वाले इस घर में चुदाई के लिए आएँ। आज अगर आयशा आएगी तो फिर असलम भी आयेगा कल को। वो अभी हमारे बच्चे की माँ बनना चाहती है। ठीक है?

शिवा : सच में पापा? वाऽऽह ठीक है मैं मना कर देता हूँ आयशा को। यह कहकर वो फ़ोन रख दिया।

मालिनी: आप सच में अपने बेटे का मन जानते हो। वो एकदम से मान गए आयशा को मना करने के लिए।

राजीव: अरे बेटा सच में हम दोनों तुझे बहुत प्यार करते हैं। और अब आज से तुमको माँ बनाने की कोशिश शुरू । ठीक है ना?

वो हँसती हुई उसको चूम ली। फिर राजीव बोला: बेटा तो फिर ये कोशिश अभी से शुरू कर दें?

मालिनी हँसकर बोली: पापा नेकि और पूछ पूछ। चलिए।

वो दोनों उठकर बेडरूम में आए और राजीव ने बहुत प्यार से मालिनी को नीचे लिटाके चोदा और फिर पूरा रस गहराई तक जा कर उसकी बुर में छोड़ा।

वो बोला: बेटा बस आज से रस अंदर गहराई में ही छोड़ेंगे हम बाप बेटा ताकि तुम जल्दी से जल्दी माँ बन जाओ।

मालिनी मुस्कुरा कर अपनी टाँगें उठायी रखी और बोली: हाँ मैं भी महसूस कर रहीं हूँ कि रस बहुत अंदर तक गया है।

फिर दोनों बाथरूम से आए और लिपट कर आराम करने लगे।

शाम को शिवा आया और डिनर के बाद दो राउंड चुदाई हुई।हालाँकि राजीव ने उसकी गाँड़ भी मारी पर रस उसकी बुर में ही डाला। इस तरह से दोनों ने अपना रस उसकी बुर में ही छोड़ा।

पति और ससुर के लगातार कई दिनो की चुदाई से आख़िर में मालिनी का मासिक धर्म नहीं हुआ और वो राजीव और शिवा को बोली: मेरा प्रेग्नन्सी टेस्ट करवा लीजिए।

शिवा किट लेकर आया और राजीव और शिवा की आँखों के सामने मालिनी बाथरूम में आकर अपनी नायटी उठाई और आधी बैठ कर उस स्ट्रिप पर मूतने लगी। सी सी की आवाज़ से दोनों मर्दों के लौड़े अकड़ने लगे। उफफफ क्या मस्त दृश्य था एक जवान लड़की अपने पति और ससुर के सामने बेशर्मी से मूत रही थी। उसकी बुर से निकालता पिशाब दोनों मर्दों को साफ़ दिखाई पड़ रहा था। शिवा ने स्ट्रिप पकड़ी थी सो उसके हाथ में भी थोड़ा सा पेशाब लगा। फिर शिवा ने स्ट्रिप हटा ली पर मालिनी आधी उठी हुई मूतती रही। दोनों मंत्र मुग्ध से उसकी बुर को देखते रहे। अब वो उठी और अपनी नायटी नीचे की।

अब तीनो उस स्ट्रिप के रंग बदलने का इंतज़ार किए। जैसे ही स्ट्रिप ने रंग बदला तीनों ख़ुशी से भर गए और एक दूसरे से लिपट कर बधाइयों देने लगे। राजीव आगे से और शिवा पीछे से उससे चिपके हुए थे और उसे प्यार किए जा रहे थे। मालिनी भी उन दोनों को चूमे जा रही थी।

शिवा ने उसके पेट को सहलाया और बोला: पापा ये बच्चा आपको दादा कहेगा या पापा?

राजीव हँसकर: मुझे दादा ही कहेगा चाहे मैं उसका सच में दादा ही हूँ या फिर बाप।

मालिकी शर्मा कर उन दोनों से चिपक गयी।

फिर उस दिन सब प्लान बनाते रहे कि बच्चे का क्या नाम होगा ? कौन से स्कूल में जाएगा और ना जाने क्या क्या।

मालिनी बोली: हमको ये ख़ुश ख़बरि महक दीदी को भी देनी चाहिए।

राजीव: हाँ मैं उसे फ़ोन भी करने वाला था कि अब डिलीवरी के लिए यहाँ ही आ जाए। अमेरिका में कौन ध्यान रखेगा उसका?

शिवा: हाँ पापा उसे यहीं बुला लेते हैं। मेरा भांजा यहीं हमारे घर में ही होना चाहिए ।

राजीव उसको फ़ोन लगाया: हेलो बेटा कैसी हो?

महक: पापा ठीक हूँ।

राजीव: बेटा हम तीनों यहाँ बैठे हैं और फ़ोन स्पीकर मोड में है। बताओ कैसी हो? और डिलेवरी के लिए यही आ जाओ ना।

महक: हाँ पापा मैं भी यही सोच रही हूँ।

राजीव : आ जाओ बेटा हम सबको बहुत अच्छा लगेगा । वैसे एक ख़ुश ख़बरी हमें भी देनी है।

महक: वो क्या पापा?

राजीव: बेटा मालिनी भी माँ बनने वाली है।

महक ख़ुशी से : सच पापा? वाह क्या ख़ुश ख़बरी है। मालिनी बहुत बहुत बधाई हो।

मालिनी: थैंक यू दीदी। बस आप जल्दी से यहाँ आ जाओ।

महक: और मालिनी कैसा चल रहा है तुम्हारा डबल मज़ा?

मालिनी चौंकी और राजीव को देखी । राजीव हँसकर: बेटा मैंने हमारे बारे में सब महक को बता रखा है। उससे कोई बात छुपी नहीं है?

मालिनी: ओह पापा आप भी ना? सब बता दिया?

महक: हाँ सब बताया हुआ है। अच्छा ये तो बताओ कि बच्चा पापा का है या शिवा का?

मालिनी: वो तो कभी पता नहीं चलेगा, पर शिवा को वो पापा और पापा को वो दादा ही बोलेगा।

महक हंस पड़ी: क्या फ़र्क़ पड़ता है परिवार का ही बच्चा होगा ना? वैसे तुमको पापा बे बताया या नहीं कि मेरे पेट में भी पापा का ही बच्चा है। ये उसके पापा और नाना दोनों हैं। हा हा ।

शिवा: हाँ पापा बे बताया है और सच में बड़ी ख़ुशी की बात है कि वो मेरा भाई भी होगा और भांजा भी।

राजीव: तुम्हारी डिलीवरी अगले महीने में है ना?

महक: जी पापा मैं बस दस दिन में आती हूँ।

शिवा: और बच्चे को कम से कम पाँच महीने का करके ही भेजेंगे। ठीक है ना?

महक: हाँ ठीक है। हमको यहाँ काफ़ी छुट्टी मिल जाती है।

मालिनी: और जीजा जी ठीक है?

महक: हाँ सब बढ़िया । चलो रखती हूँ।

अब शिवा बोला: पापा आपने कहा था कि मैं भी दीदी को चोद सकूँगा। अब वो आएगी तो डिलीवरी के कितने बाद चुदवा सकेगी?

राजीव: हाँ अभी तो वो चुदवा ही नहीं सकती। और डिलीवरी के बाद भी वो कम से कम एक महीना नहीं चुदवा पाएगी।

मालिनी: तब तक आपको संतोष करना होगा और मेरे से ही काम चलाना होगा।

उसकी इस बात पर सब हंस पड़े।

शिवा: पापा आज इसकी प्रेग्नन्सी को सेलब्रेट करते हैं ना? चलिए बाहर खाना खाते हैं।

राजीव: एक शर्त पर कि कुछ शरारत भी करेंगे।

शिवा: कैसी शरारत?

राजीव: मुझे नहीं पता। पर कुछ तो करेंगे। ऐसा करते हैं कि मालिनी को वो जो एक मैं माडर्न ड्रेस लाया था वो पहनाते हैं। मिनी स्कर्ट और टॉप। और नीचे पैंटी भी नहीं पहनेगी। बस फिर कुछ शरारत करेंगे हम सब।

मालिनी: वाह ये क्या बात हुई? क्या आप मुझे सबके सामने नंगी करना चाहते हो?

राजीव: सबके सामने नहीं बस कोई ख़ास एक दो के सामने।

शिवा : आऽऽऽह पापा बहुत मज़ा आएगा। चलो डार्लिंग तय्यार हो जाओ।

मालिनी: पता नहीं आप लोग क्या करने वाले हो? ठीक है मुझे क्या है।

अब सब तय्यार हुए और जब बाहर बैठे शिवा और राजीव के सामने मालिनी आयी और बोली: आप चाहते हो कि मैं ऐसे बाहर जाऊँ?

शिवा और राजीव का मुँह खुला रह गया। उसका टॉप उसकी आधी चूचियाँ ही ढक रहा था। और पूरा पेट नंगा था। स्कर्ट भी टाइट था और उसके गाँड़ के उभार को और ज़्यादा सेक्सी बना रहा था। स्कर्ट जाँघ के ऊपरी हिस्से तक चढ़ी हुई थी और उसकी गुदाज जाँघें बिजली गिरा रहीं थीं।

राजीव अपने लंड को पैंट के ऊपर से दबाकर बोला: उफफफ जानू क्या दिख रही हो? मस्त माल हो।

शिवा: आऽऽऽह सही में पापा। अच्छा पैंटी पहनी हो क्या? ज़रा स्कर्ट उठाकर दिखाओ ना।

मालिनी ने स्कर्ट उठाकर दिखाया और उसकी चिकनी बुर सामने थी। उफफफ उसने पापा की इच्छा के अनुसार पैंटी भी नहीं पहनी थी।

राजीव: बेटा पिछवाड़ा भी दिखाओ ना।

मालिनी स्कर्ट उठाए हुए ही घूमी और उसकी मस्त गाँड़ देखकर बाप बेटा मस्ती से भर गए।

शिवा: जानू गाँड़ खोलो ना तुम्हारा मस्त छेद देखना है।

मालिनी: उफफफ आप लोग भी ना ? यह कहकर वो अपने दोनों चूतरों को फैलायी और उसके मस्त खुले हुए भूरे छेद को देखकर बाप बेटा मस्त होकर अपना अपना लौड़ा दबाने लगे।

मालिनी अब स्कर्ट ठीक की और बोली: आप सच में चाहते हो कि मैं ऐसे ही जाऊँ?

शिवा : आऽऽह जान बिलकुल ऐसी ही चलो ।

अब मालिनी ने देखा कि दोनों के पैंट में तंबू तना हुआ है तो वह बोली: आप दोनों का खड़ा सामान साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा है। आपने भी चड्डी नहीं पहनी है क्या?

राजीव: चड्डी तो पहनी है पर तुम्हारी जवानी का जलवा पागल कर देने वाला है।

फिर दोनों ने अपना लौड़ा पैंट में ठीक किया और सब बाहर आए। राजीव भी शिवा के साथ कार में आगे बैठा और मालिनी पीछे बैठी। अब राजीव पीछे मुड़कर बोला: बेटा ज़रा जाँघों को फैलाओ तो।

मालिनी ने जाँघें फैलाईं और राजीव उसकी बुर देखकर बोला: बेटा बस ऐसे ही बैठना रेस्तराँ में जब मैं बोलूँ। शिवा ने भी पीछे का शीशा ठीक किया और उसकी बुर देखकर बोला: जानू बाल कब बनाए थे? मस्त चिकनी दिख रही है।

मालिनी: दो दिन पहले ही साफ़ किया है।

राजीव: बेटा ज़रा वहाँ हाथ फेरो ना।

मालिनी: उफफफ पापा क्या क्या करवा रहे हो अपनी बहू से? यह कहकर वो अपनी बुर में हाथ फेरकर राजीव और शिवा को मस्ती से भर दी। मालिनी सोच रही थी कि पापा उससे पता नहीं क्या करवाने वाले हैं रेस्तराँ में? वह अब गरम होने लगी थी।

रेस्तराँ में पहुँचकर राजीव ने एक कोने की गोल टेबल पसंद की। वो और शिवा मालिनी को बीच में लेकर बैठे। उनकी बग़ल की टेबल पर दो आदमी बैठे थे जो कोट और टाई में थे किसी कोरपोरेट से लगते थे। वो शराब पी रहे थे और उम्र से ५० के आसपास के लगते थे । राजीव ने मालिनी को ऐसा बिठाया था ताकि वो उन दोनों के सामने पड़ती थी।

अब तक मालिनी अपनी जाँघ मिलाकर बैठी थी। राजीव ने देखा की वो दोनों लगातार मालिनी के टॉप से झाँकती बड़ी बड़ी चूचियों को ताड़ रहे थे। मालिनी की जाँघे उनको वैसे भी नहीं दिख सकती थी क्योंकि वो टेबल के नीचे थीं ।

अब राजीव ने मालिनी को कहा : बेटा वो जो दो आदमी बैठे है उनको थोड़ा सा लाइन मारो।

मालिनी: छी पापा वो क्यों?

शिवा भी उत्तेजित होकर: अरे बस थोड़े मज़े के लिए यार और क्या?

मालिनी चुप रह गयी। अब वो उनको लाइन मारने लगी। वो उनको देखकर अपना टॉप ऐडजस्ट करती और कभी उनको देखकर मुस्कुरा देती। अब वो भी उसमें इंट्रेस्ट लेने लगे। वो उसको देखकर मुस्कुराए । राजीव और शिवा ऐसा दिखा रहे थे मानो उनको कोई ख़बर ही नहीं हो।उनकी भी शराब आ गयी थी और दोनों बाप बेटा पीने लगे।

थोड़ी देर बाद राजीव के कहने पर शिवा और वो दोनों ऐसे दिखाए मानो नशे में हों। अब राजीव ने मालिनी को धीरे से कहा: बेटा अब अपनी कुर्सी घुमाओ और उनको पहले अपनी जाँघ दिखाओ। फिर बुर के भी दर्शन करवा देना। मालिनी भी अब गरम हो चली थी। उसने बातें करते हुए अपनी कुर्सी घुमाई और अब उसकी स्कर्ट उन दोनों के सामने थीं । वो दोनो उसकी जाँघों को घूरने लगे। अब राजीव बोला: बेटा अब अपनी जाँघ पर हाथ फेरों। मालिनी वैसा ही की और वो दोनों आँख फाड़े उसे देखते रहे। अब वो पापा के कहने पर एक टाँग के ऊपर दूसरा टाँग रखी तो उसकी स्कर्ट ऊपर तक चढ़ गयी और अब उन दोनों आदमियों की आँख और बाहर को आ गयीं। शिवा सोचा कि उफफफफ कितनी नंगी दिख रही थी मालिनी। अब मालिनी आगे को झुकी और शिवा को बोली: पापा चाहते क्या हैं?

उसके आगे झुकने से शिवा को उसकी टॉप से उसकी आधी चूचि दिख रही थी। वो थोड़ा सा साइड में हुआ ताकि वो दोनों उसकी आधी नंगी चूचियाँ देख कर मस्त हो जाएँ।

अब वो दोनों आदमी अपनी टाई ढीली किए और कोट उतार कर कुर्सी पर रखे। जब वो खड़े हुए कोट उतारने के लिए तो मालिनी को उनका पैंट का सामने का उठा हुआ हिस्सा साफ़ दिखाई दिया। जब वो बैठे तो उनके हाथ पैंट पर आ गए थे और कोई देखता तो समझ जाता कि वो अपना लौड़ा मसल रहे हैं।

अब राजीव बोला: बेटा चलो अब जन्नत के दर्शन कराओ उनको।

मालिनी शिवा की ओर देखी तो वो भी इशारा किया कि करो। अब वो अपनी जाँघें खोली और उसका मुँह उन दोनों आदमियों की तरफ़ था। राजीव ऐसी शक्ल बनाया था मानो नशे में हो। शिवा भी नशे में होने का नाटक कर रहा था। दोनों आदमी अब जैसे ही उसकी खुली जाँघों के बीच देखे और वहाँ पैंटी ना देखकर मानो पागल से हो गए। क्या दृश्य था मालिनी की बुर साफ़ दिखाई दे रही थी। हर टेबल पर मोमबत्ती रखी थी। उनको मालिनी की चिकनी बुर साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी। अब शिवा के इशारे को समझ कर मालिनी अपनी बुर सहलाने लगी। वह दोनों आँखें फाड़कर देख रहे थे और अपना लंड सहला रहे थे।

अब उन दोनों ने देखा कि शिवा और राजीव क़रीब क़रीब नशे में सोए हुए से थे तो एक आदमी उठा और मालिनी को उसका लंड पैंट के ऊपर से उभरा हुआ साफ़ साफ़ दिखा और वो आकर शिवा के पास वाली सीट पर बैठ गया और अब वो अपनी कुर्सी को घुमाया और अब वो मालिनी की बुर से सिर्फ़ दो फ़ीट पर था। मालिनी थोड़ा सा डरी पर राजीव ने चुपचाप इशारा किया कि होने दो। अब वो आदमी ठीक सामने बैठ कर उसकी बुर देख रहा था। मालिनी अभी भी बुर सहला रही थी। वो अपनी जीभ अपने होंठ पर फेर रहा था। अब मालिनी भी बहुत उत्तेजित हो चुकी थी और अपनी दो ऊँगली अंदर डालकर बुर में अंदर बाहर करने लगी। वो आदमी अब खुल कर अपना लौड़ा पैंट के ऊपर से दबाने लगा। अचानक उसकी उत्तेजना उसके होशोंहवास उड़ा दी और वो शिवा और राजीव को नशे में समझ कर अपना एक हाथ मालिनी की जाँघ पर रख दिया। मालिनी का बदन काँप उठा। उसे लगा कि ज़्यादा ही हो रहा है । वो फिर से पापा को देखी तो वो आँख मार दिए।

अब उस आदमी ने थोड़ी देर उसकी जाँघ सहलाई और फिर अपना हाथ उसकी जाँघों के बीच में ले गया। वहाँ उसका हाथ मालिनी की गीली उँगलियों से टकराया और मालिनी ने अपना हाथ बाहर निकाल लिया। अब वो आदमी अपने हाथ से उसकी बुर को सहलाया और फिर उसने दो उँगलियाँ अंदर डालकर हिलाना चालू किया। मालिनी की घुटी हुई सिसकारियाँ निकल गयीं। उसने इधर उधर देखा तो सब खाना खाने में व्यस्त थे। और शिवा और राजीव के चेहरों पर मंद मंद मुस्कान थी। अब वो आदमी जल्दी से हाथ हिलाकर मस्ती से भरने लगा।

जहाँ ये बैठे थे वो एक तरफ़ किनारे पर टेबल लगी थी। अचानक वो आदमी अपनी उँगलियाँ निकाला और गीली उँगलियाँ चाटने लगा। अब दूसरा आदमी भी मस्त हो चुका था । वो उठा और आकर कुर्सी लेकर मालिनी से सट कर बैठ गया। वो बिना देर किए मालिनी की टॉप के अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियाँ दबाने लगा। जहाँ वो बैठा था उसके कारण मालिनी को कोई नहीं देख सकता था सिवाय राजीव और शिवा के । जो उसे देखकर भी नहीं देखने का नाटक कर रहे थे। अब दृश्य यह था कि एक आदमी उसकी गीली बुर में उँगलियाँ कर रहा था और दूसरा उसकी चूचियाँ दबा रहा था। अब एक आदमी ने मालिनी का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया। वो उसको दबाने लगी और ख़ुद ही दूसरे के पैंट के ऊपर से उसका लंड भी दबाने लगी। शिवा और राजीव इतने गरम हो गए थे कि उनको लगा की कहीं वो पैंट में झड़ ना जाए।

उधर मालिनी अब झड़ने वाली थी और वो अपनी जाँघे खोलने और बंद करने लगी। और सीइइइइइइ कर उठी। अब वो अपनी गाँड़ हिलाकर झड़ने लगी। तभी उसके दोनों हाथ भी गीले हो गए। वो दोनों पैंट में ही झड़ गए थे। अब सब शांत हो चुके थे । एक आदमी बोला: मोबाइल नम्बर दो ना बेबी । कल दिन में मिलेंगे।

मालिनी ने शिवा को हिलाया और कहा: चलो घर चलें ?

वो दोनों हड़बड़ा कर अपनी सीटों पर वापस चले गए। उनके पैंट के सामने गीले धब्बे साफ़ दिखाई दिए। बाद में वो अपना कोट उठाकर अपनी पैंट के आगे रखकर चले गए।

शिवा मुस्कुराया: मज़ा आया जान ? तुम तो मज़े से झड़ीं।

राजीव: तो याद रहेगा ना ये अनुभव? हम सब देख रहे थे कि तुमको कितना मज़ा आ रहा है।

मालिनी: अब जल्दी से खाना खाइए और घर चल कर मुझे तबियत से चोदिए आप दोनों। उफफफफ कितना गरम कर दिया है आप सबने मुझे। आऽऽऽऽहहहह ।

दोनों बाप बेटा मुस्कुरा दिए।

 
अब खाना खाकर तीनों रेस्तराँ से बाहर आए और कार में बैठने लगे तो मालिनी बोली: पापा आप पीछे बैठो मेरे पास। अब शिवा कार चलाने लगा और उधर मालिनी ने जो किया उसकी कल्पना दोनों मर्दों ने नहीं की थी। अब तक रात के दस भी बज चुके थे ट्रैफ़िक इस वक़्त कम हो चुका था । मालिनी ने अपना हाथ अपने टॉप के अंदर डाला और अपनी एक चूचि बाहर निकाली और उसे अपने हाथ में लेकर राजीव के मुँह की ओर ले गयी। राजीव ने मुँह खोलकर उसकी चूचि को अंदर लिया और चूसने लगा। मालिनी ने उसका एक हाथ पकड़ा और अपनी दूसरी चूचि पर रख दिया। अब राजीव उसकी एक चूचि चूसते हुए दूसरी दबाने लगा। मालिनी उइइइइइइइ आऽऽऽऽऽह करके सिसकियाँ भरने लगी। शिवा भी आइने से पीछे की ओर देखकर उत्तेजित हो उठा। मालिनी अब आऽऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽपा कहते हर पैंट के ऊपर से उनका लौड़ा दबाने लगी।

कार के अंदर अब सेक्स की गरमी फैलने लगी थी। अब मालिनी बोली: आऽऽऽह पापा अब बुर चूसिए ना प्लीज़। शिवा और राजीव हैरान रह गए कि ये अब कितना खुल गयी है। ये कहकर वो अपना स्कर्ट उठाई और ऊपर करके नीचे से नंगी हो गयी। अब वो दरवाज़े पर पीठ सटाई और अपनी टांगों को उठाकर फैलाई और एक पैर सामने वाली सीट पर और दूसरा पैर राजीव के कंधे पर रखी और राजीव के सामने उसकी बुर पूरी खुली हुई दिख रही थी। अब राजीव रुक नहीं सका और झुक कर उसकी बुर चाटने लगा। मालिनी : उइइइइइइ मॉआऽऽऽऽऽऽऽऽ उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ पाआऽऽऽऽऽऽऽपा क्याआऽऽऽऽऽ चूउउउउउउउउस रहें हैं उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ । राजीव की जीभ उसकी बुर के एक एक कोने का मज़ा ले रही थी। उसने दो उँगलियाँ भी अंदर कर दीं और उनको अंदर बाहर करने लगा और जीभ से उसकी क्लिट को छेड़कर उसे मस्ती से भरने लगा। अब मालिनी की गाँड़ के दोनों गोलाइयों के नीचे एक एक हाथ देकर वो उसकी बुर को ऊपर उठाया और ज़ोर से चूसने और चाटने लगा। अब मालिनी आऽऽऽऽऽहहह पाआऽऽऽऽऽऽऽपा मैं गयीइइइइइइइ कहकर उसके मुँह में अपना रस एक फ़ौवारे की माफ़िक़ छोड़ने लगी। राजीव अपनी प्यारी बहू का कामरस पीता चला गया। अब मालिनी आऽऽऽह करके शांत हो कर पड़ गयी। राजीव ने उसकी टांगों को नीचे किया और उसकी स्कर्ट भी नीचे की और अब उसे अपने से चिपका कर बोला: बेटा मज़ा आया?

मालिनी उसको चूमकर: आऽऽऽह पापा बहुत मज़ा आया। मस्त चूसे अभी आप। सच ने मुझे रिलीज़ की बहुत ज़रूरत थी। आऽऽऽऽह अब ठीक लग रहा है।

शिवा: तुम तो शांत हो गयी अब हम दोनों का क्या होगा?

मालिनी हँसकर : आप दोनों मुझे फिर से गरम कर लीजिएगा । इसमे क्या समस्या है?

अब कार घर के सामने रुकी और तीनों घर में घुसे। मालिनी सीधे बाथरूम गयी और जब वहाँ से बाहर आयी तो दोनों मर्द मस्त हो गए। वो पूरी नंगी थी। वो आकर बिस्तर पर लेट गयी और अपने पैरों को फैलाकर अपनी बुर दिखाते हुए बोली: अब आप लोग आओ और मुझे गरम करो और फिर मुझे जी भर के चोदो। वो अपनी जाँघें फैलाईं और घुटनो को मोड़कर अपनी छाती की ओर रखी। उफफफफ क्या मादक दृश्य था। राजीव सोचा कि बहु कैसे अपनी टाँगें फैलाकर चुदाई के लिए अपने पति को और ससुर को आमंत्रण दे रही है। अब दोनों ने अपने कपड़े उतारे और पूरे नंगे होकर मालिनी को बीच में रखकर बिस्तर पर आ गए। अब मालिनी और उत्तेजित करने वाली हरकत कर रही थी। वह अपनी दोनों चूचियाँ दबाकर अपनी गाँड़ उछालकर ऐसा दिखा रही थी मानो चुदवा रही हो। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ अब दोनों मर्दों के लिए कंट्रोल सम्भव नहीं था। दोनों उस पर टूट पड़े और उसके गाल, होंठ और जीभ चूसने लगे। मालिनी ने अपनी जीभ निकाल ली थी जिसे बारी बारी से दोनों चूस रहे थे । फिर दोनों चूचियाँ चूसे और शिवा ने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी जिसे वो भी चूसने लगी। जब शिवा ने देखा की मालिनी अब गरम हो गयी है तो वह नीचे जाकर उसकी बुर चाटने लगा और फिर उसमें अपना लौड़ा डाल कर चोदने लगा। राजीव अब अपना लौड़ा मालिनी के मुँह के पास लेकर आया और वो उसे साइड से चूसते हुए शिवा से चुदवाने लगी। शिवा क़रीब १५ मिनट चोदने के बाद आऽऽऽहहह कहकर झड़ गया।

उसके झड़कर अलग होते ही राजीव ने अपना लौंडा उसके मुँह से निकाला और नीचे जाकर एक तौलिए से मालनी की बुर साफ़ की और फिर उसमें अपना लौड़ा डाला और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। अब मालिनी भी उइइइइइइइ पापाआऽऽऽऽऽ उन्न्न्न्न्न्न्न कहकर झड़ने लगी। राजीव भी और चार पाँच धक्के मारा और झड़ गया।

शिवा: पापा आज हम दोनों बहुत जल्दी झड़ गए ना?

राजीव: हाँ बेटा क़रीब ३ घंटे से उत्तेजित हुए जा रहे थे तो जल्दी झड़ना ही था। उफफफफ उन दोनों आदमियों को बहू ने क्या मज़ा दिया? वो साले भी क्या याद रखेंगे? हैं ना बेटा?

मालिनी: जी पापा मैं उनको उत्तेजित करते करते ख़ुद बहुत गरम हो गयी थी। अब जाकर बुर शांत हुई है। वो उठकर बाथरूम जाती हुई बोली।

शिवा और राजीव भी मुस्कुराने लगे उसकी बात सुनकर।

अब सब सो गए।

अगले दिन चाय पीते हुए शिवा बोला: पापा मालिनी को आज गैनोकोलोजिस्ट को दिखा लाइए।

मालिनी: अभी से क्यों? एक दो महीने बाद चलेंगे ना।

राजीव: नहीं बेटी, इन सब चीज़ों में लापरवाही नहीं करनी चाहिए। मैं तुमको उसी नरसिंग होम में ले जाऊँगा जहाँ तुम्हारी सास को ले जाता था। वो लेडी डॉक्टर बहुत अच्छी है ।

मालिनी: ठीक है पापा जैसे आप चाहो।

शिवा के दुकान जाने के बाद क़रीब १२ बजे मालिनी तय्यार होकर आयी और राजीव को बोली: पापा चलें?

राजीव अख़बार पड़ रहा था । उसने सिर उठाया और प्यार से बोला: वाह बिटिया आज तो बहुत सज रही हो इस साड़ी में । वो उठा और आकर मालिनी का गाल चूमा और हाथ को उसकी गाँड़ पर फिराया और बोला: देखो साड़ी में तुम्हारी गाँड़ क्या मस्त उभरी हुई दिखती है।

फिर उसकी गाँड़ सहलाते हुए बोला: आज पैंटी पहनी हुई हो? क्या बात है?

मालिनी: वाह पापा कैसे नहीं पहनूँगी? डॉक्टर सोचेगी कि मैं पैंटी ही नहीं पहनती? अब चलिए ना प्लीज़।

राजीव हँसकर उसकी कमर सहलाया और बोला: चलो चलते हैं।

कार तो शिवा ले गया था सो उन्होंने ऑटो किया। पूरे रास्ते ऑटो उछलता और मालिनी की चूचियाँ राजीव के हाथ से टकराती और वो मुस्कुरा देता।

नरसिंग होम में राजीव ने पता किया तो उसे बताया गया कि लेडी डॉक्टर तो एक महीने की छुट्टी पर है पर एक दूसरे डॉक्टर देखेंगे। राजीव ने दूसरे डॉक्टर की पर्ची बनवा ली। जब वो उसके चेम्बर में पहुँचे तो पता चला की वो तो आदमी है औरत नहीं। मालिनी ने कहा: पापा मैं आदमी से चेक अप नहीं करवाऊँगी।

राजीव: अरे बेटा डॉक्टर से कैसी शर्म ? मैं मिल कर आता हूँ तुम यहीं बैठो।

थोड़ी देर बाद राजीव बाहर आया और बोला: चलो बेटा वो एक बहुत ही बुज़ुर्ग इंसान है । तुम आराम से चेक करवा लो।

मालिनी कुछ नहीं बोल पायी और राजीव के साथ अंदर चली गयी। अंदर डॉक्टर बैठा था ।पूरा गंजा उम्र क़रीब ६० साल। डॉक्टर: आओ बेटी बैठो। तुम अपने पति के साथ नहीं आयीं?

मालिनी: जी वो दुकान पर हैं । ये मेरे ससुर हैं।

डॉक्टर: चलो ठीक है। मैंने कुछ टेस्ट लिखे हैं। उनको पहले करवा लो। बाद में फिर आना और मैं तुम्हारा चेक अप करूँगा।

मालिनी: जी वो वो कोई लेडी डॉक्टर नहीं है क्या?

डॉक्टर हँसकर: नहीं वो तो अभी छुट्टी पर है। पर घबराओ नहीं जब मैं तुम्हारा चेक अप करूँगा तो एक नर्स भी साथ रहेगी। ठीक है ना?

मालिनी: जी ये ठीक रहेगा, थैंक्स ।

अब डॉक्टर की पर्ची लेकर राजीव मालिनी को लेकर ख़ून और पेशाब का सैम्पल दिलवाया और बाद में वो फिर से डॉक्टर के चेम्बर में वापस आए। डॉक्टर के चेम्बर में अब एक नर्स भी आ चुकी थी। वो एक ३५/३६ साल की थोड़ी भारी बदन की औरत थी। वो मालिनी को देखकर मुस्करायी और बोली: चलो आप अंदर आ जाओ। उसने वहाँ लगे परदे के पीछे बनी बेंच की ओर इशारा किया।

डॉक्टर राजीव से बोला: आपको बाहर इंतज़ार करना होगा।

राजीव मालिनी के कंधे को सहलाया और बोला: बेटा मैं बाहर बैठा हूँ। तुम जाँच करवा लो। राजीव के बाहर जाते ही नर्स मालिनी को बोली: आप अपनी साड़ी खोल दो और बेंच पर लेट जाओ। मालिनी ने साड़ी खोली और पास में रखे एक कुर्सी पर रखी और लेट गयी। अब डॉक्टर अंदर आया और मालिनी को देखकर बोला: बेटी ये तुम्हारी पहली प्रेग्नन्सी है ना?

मालिनी: जी डॉक्टर।

डॉक्टर उसके ब्लाउस के ऊपर से अपने स्टेथोस्कोप को लगा कर जाँच करने लगा। उसकी उँगलियाँ उसकी चूचि के उस हिस्से को छू रही थीं जो कि ब्लाउस से बाहर झाँक रहा था। अब वो बोला: नर्स ब्लाउस उतारना पड़ेगा । इनके ब्रेस्ट्स की भी जाँच करनी होगी।

मालिनी हड़बड़ा कर : वो क्यों डॉक्टर? इनका डिलीवरी से क्या सम्बंध?

डॉक्टर हँसते हुए: बेटी, कैसे सम्बंध नहीं है। बच्चे को दूध इनसे ही पिलाओगी ना? हमको देखना होगा कि ब्रेस्ट्स में कोई गठान तो नहीं है। कई बार हार्मोन की गड़बड़ी से ऐसा हो जाता है। और फिर तुम बच्चे को दूध भी नहीं पिला पाओगी।

मालिनी उसकी इस बात से थोड़ी उलझन में पड़ गयी।तब तक नर्स उसके ब्लाउस का हुक खोलने लगी। उधर वो अब उसके पेट को दबाकर चेक कर रहा था। पता नहीं मालिनी को ऐसा क्यों लगा कि वो उसको चेक करते हुए उसके चिकने पेट को सहला भी रहा था। अब तक ब्लाउस के दोनों पल्ले नर्स ने खोलकर अलग कर दिए थे। अब ब्रा से उसके मस्त चूचे झाँक रहे थे। वो देखी कि अब डॉक्टर का ध्यान भी उसकी चूचियों पर ही था। डॉक्टर ने अपना लंड ऐडजस्ट किया और मालिनी की आँखों से उसकी ये हरकत छुपी नहीं रही।

अब डॉक्टर बोला: नर्स इसकी ब्रा भी निकाल दो ताकि ब्रेस्ट्स की पूरी जाँच हो सके।

नर्स के इशारे पर मालिनी आधी उठी और नर्स ने उसकी ब्रा का स्ट्रैप खोल दिया। अब वो फिर से लेटी और नर्स ने ब्रा के कप हटाए और उसकी मस्त गोल गोरी और सख़्त चूचियाँ नर्स और डॉक्टर को मानो चुनौती दे रहीं थीं । उसके निपल पूरे तने हुए थे।

डॉक्टर बोला: नर्स तुम इनकी जाँच करो तब तक मैं नीचे की जाँच शुरू करता हूँ।

वो उसके पेटिकोट का नाड़ा खोलते हुए बोला: बेटी ज़रा अपनी कमर उठाओ तुम्हारा पेटिकोट नीचे करना है।

मालिनी: आह डॉक्टर आप पेटिकोट उठाकर देख लीजिए ना। वो अपनी बात पर ही शर्मा गयी और बोली: मेरा मतलब है चेक अप कर लीजिए ।

डॉक्टर: बेटी ऐसे अच्छी तरह से चेक नहीं हो पाएगा। कमर उठाओ।

अब तक नर्स ने उसकी एक चूचि दबानी शुरू की और मालिनी आऽऽऽहाह कर उठी और उसी समय वह अपनी कमर भी उठा दी। डॉक्टर ने उसका पेटिकोट नीचे खिसका कर उतार दिया।

डॉक्टर ने उसकी जाँघों को सहलाया और कहा:बेटी तुम्हारी जाँघें काफ़ी चिकनी और भरी हुई हैं । इसका मतलब तुम्हारा शरीर स्वस्थ है। उधर नर्स अब भी उसकी एक चूचि दबाए जा रही थी। डॉक्टर ने नर्स को कहा: देखो निपल भी चेक कर लेना। अब वह उसकी पैंटी को देखा और बोला: बेटी यहाँ नीचे से तुमको कोई डिस्चार्ज सा होता है क्या?

मालिनी की उसी समय आऽऽऽऽऽऽह निकली क्योंकि नर्स अब उसके निप्पेल को दबा रही थी। वो बोली: आऽऽऽऽह नहीं कोई आऽऽऽऽऽऽह नहीं कोई डिस्चार्ज नहीं होता उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ।

डॉक्टर: बेटी पर तुम्हारी पैंटी तो गीली लग रही है। वो पैंटी पर लगे धब्बे को सहला कर बोला।

मालिनी सोची कि मेरी चूचि दबाओ और मुझे पैंटी में देख करके मुझे अपना फूला हुआ लंड पैंट के ऊपर से दिखा कर गरम करते रहो और क्या मैं गीली नहीं हूँगी? उसे अपनी बुर पसीजती सी महसूस की। वो सामने से कुछ नहीं बोली।

अब नर्स उसकी दूसरी चूचि दबाने लगी। और डॉक्टर ने फिर से उसकी पैंटी पर हाथ फेरा। और बोला: बेटी कमर उठाओ ताकि पैंटी उतार सकूँ।

मालिनी ने चुपचाप अपनी कमर उठायी और डॉक्टर ने उसकी कमर सहलाते हुए उसकी पैंटी में दो उँगलियाँ डालकर उसे उतारने लगा। मालिनी ने अपने पाँव उठाए और उसने पैंटी निकाल दी और उसे ध्यान से देखकर बोला: बेटी देखो ये बहुत गीली हो रही है। फिर वो उसे नाक के पास लेज़ाकर सूँघने लगा। मालिनी के गाल शर्म से लाल हो चुके थे। डॉक्टर: बेटी मैं ये चेक कर रहा हूँ कि कोई इन्फ़ेक्शन तो नहीं है ना?

मालिनी सोची कि महा कमीना है ये बुड्ढा ? ऐसे कोई इन्फ़ेक्शन चेक करता है?

डॉक्टर : बेटी ज़रा अपनी टाँग मोड़ो और जाँघे फैलाओ।

तभी नर्स उसके दोनों दूध एक साथ दबाने लगी और वो आह्ह्ह्ह्ह करके अपनी टाँगें मोड़कर फैला दी। अब डॉक्टर उसकी बुर को पास से देखने लगा और बोला: बेटी बहुत साफ़ रखती हो इसको। लगता है आज ही साफ़ किए हैं बाल। वो उसकी बुर के चिकनेपन का अहसास करते हुए बोला।

मालिनी: आऽऽऽहब नहीं ३ दिन हो गए ।

डॉक्टर: लगता है आपके पति को चिकनी बुर पसंद है ? इसी लिए इतनी चिकनी कर रखी है?

मालिनी चौंकी कि कैसी अश्लील बात कर रहे हैं ये? वो चुप रही । पर डॉक्टर अब उसकी बुर के ऊपर हाथ फेरकर उसके चिकनेपन का अहसास करके वो मस्ती से भरने लगा। मालिनी की चूचियाँ नर्स दबाए जा रही थी और डॉक्टर बुर सहलाए जा रहा था । मालिनी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ आऽऽऽऽऽह करने लगी। अब डॉक्टर ने अपनी दो उँगलियाँ उसकी बुर के अंदर डालीं और बोला: आऽऽऽऽं बड़ी टाइट है बेटी तुम्हारी बुर। बहुत स्वस्थ है सब कुछ तुम्हारा? अब वो उँगलियाँ अंदर बाहर करने लगा और मालिनी की हालत ख़राब होने लगी और वो ना चाहकर भी अपनी गाँड़ उछालकर अपनी बुर में ऊँगली करवाने लगी और हल्के से चिल्लाई: उइइइइइइइ आऽऽऽऽहहह । अब डॉक्टर ऊँगली निकाला और उसे चूसने लगा। मालिनी हैरानी से उसे देखने लगी और डॉक्टर बेशर्मी से मुस्कुराकर बोला: बेटी चेक कर रहा हूँ कि सब ठीक है ना?

मालिनी: आऽऽऽह डॉक्टर ये हाऽऽय्य ग़लत है उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़।

डॉक्टर: बेटी चेक कर रहा हूँ ना? इसमें ग़लत क्या है ? तुमको भी तो मज़ा आ रहा है ना? यह कहकर उसने फिर से ऊँगली अंदर डाली और अंदर बाहर करने लगा। उधर नर्स ने उसके निपल्ज़ को मसलना शुरू किया और डॉक्टर उसकी बुर को ऊँगली से चोदते हुए अपना मुँह वहाँ ले गया और अपनी जीभ से उसकी बुर के क्लिट को कुरेदने लगा। अब मालिनी रुक नहीं पा रही थी और वह उइइइइइइइइ मॉआऽऽऽऽऽऽऽ कहकर अपनी गाँड़ उछालने लगी और उसका सिर पकड़कर अपनी बुर में दबा दी। अब डॉक्टर मज़े से बुर चूसते हुए मालिनी की बुर से निकलने वाले फ़व्वारे को पीने लगा। मालिनी अब भी उसके सिर को अपनी बुर पर दबाए जा रही थी। अब मालिनी ने उसका सिर छोड़ा और आऽऽह करके लेट गयी। अब नर्स भी पीछे हट गयी। अब डॉक्टर उठकर सामने आकर उसकी चूचियाँ दबाकर बोला: बेटी तुम्हारी चूचियाँ बिलकुल ठीक है काफ़ी बड़ी बड़ी है । बेटी अभी ३८ की ब्रा तो पहनती होगी ना?

मालिनी: आऽऽह हाँ ३८ की ही पहनती हूँ। आऽऽऽह अब छोड़िए ना। आपकी जाँच हो गयी होगी ना? आपने जो किया वो ग़लत है डॉक्टर।

डॉक्टर ने अपना हाथ अपनी पैंट के ज़िपर पर ले जाकर उसे खोलते हुए कहा: अरे कितना मज़ा आया तुमको। बस बेटी थोड़ा सा इसको चूस दो और एक बार चोद लेने दो, फिर चली जाना।

अचानक मालिनी को ना जाने क्या हुआ , वो उठ गयी और अपनी ब्रा का स्ट्रैप लगायी और ब्लाउस के हुक भी लगाई। नीचे से वो अभी भी नंगी थी। डॉक्टर बोला: ये क्या कर रही हो? सुनो तो?

मालिनी ने अनसुना करके अपनी पैंटी उठाई और उसे अपने पर्स में डाल ली और पेटिकोट पहन ली। अब वो साड़ी पहन्ने लगी। अपना मुँह ठीक किया बाल सँवारे और बाहर आकर बोली: पापा चलिए।

राजीव: हो गया चेक अप ?

मालिनी: हाँ हो गया। आप जा कर दवाई की पर्ची ले आओ।

राजीव अंदर जाकर दवाई की पर्ची लाया और मालिनी को लेकर दवाई की दुकान से दवाई ख़रीदा और ऑटो में बैठ कर बोला: बेटा क्या बात है तुम थोड़ी उखड़ी हुई हो?

मालिनी: पापा आपसे मैंने कहा था ना कि मुझे लेडी डॉक्टर को दिखाइए । आप सुनते तो हो नहीं ।

राजीव उसकी बात सुनकर समझ गया कि कुछ गड़बड़ हो गयी है। पर वो ऑटो वाले के सामने बात नहीं कर सका।

घर पहुँचकर राजीव बोला: चलो खाना खाते हैं।

मालिनी: चलिए पहले अपने कमरे में। वहाँ पहुँचते ही मालिनी अपनी साड़ी उतारने लगी। फिर वह अपना पेटिकोट भी उतारी और बोली: पापा चलिए कपड़े उतारिए जल्दी से।पेटिकोट उतरते हो वो नीचे से नंगी हो गयी थी क्योंकि पैंटी तो उसके पर्स में थी। राजीव उसे नंगी देखकर गरम होने लगा।वह अब पैंट और शर्ट उतार दिया। अब वो अपना ब्लाउस भी खोल दी और ब्रा भी उतार दी। अब तक राजीव भी चड्डी उतार दिया था और बिस्तर पर आकर लेट गया। उसका आधा खड़ा लंड देखकर मालिनी मस्ती से भर गयी और सीधे उसके ऊपर आकर उसके होंठ चूसने लगी। फिर वह अपनी चूचि को अपने हाथ में पकड़कर अपने ससुर के मुँह में डाल दी जिसे वो चूसने लगा। फिर वो चूचि बदली और उसे भी चूसवाई । राजीव के हाथ अब उसके बदन पर घूम रहे थे।

तभी मालिनी का फ़ोन बजा । शिवा था वो बोला: जानू डॉक्टर ने क्या कहा?

मालिनी: सब ठीक है मेरा। अब आप फ़ोन रखो मुझे पापा से अभी चुदवाना है। आऽऽऽऽऽहहहह । पापा और चूसो मेरी चूचि। हाऽऽय्य्य्य्य्य । पाआऽऽऽऽपा। शिवा फ़ोन काटो प्लीज़ । बाद में सब बताऊँगी। और वो फ़ोन काट दी।

शिवा हैरान हो गया कि मालिनी इतनी चुदासि क्यों हो रही है? वो मुस्कुराया कि ज़रूर अस्पताल में कुछ हुआ होगा। फिर उसने लैप्टॉप चालू किया और पापा के बेडरूम के कैम में अपनी बीवी और अपने पापा की चुदाई देखने लगा। उफफफफ मालिनी तो पापा से वैसे ही चुदवा रही थी जैसे मम्मी पापा के दोस्तों से चुदवाती थीं । वो अपना लंड बाहर निकाल कर अपने कैबिन में मूठ्ठ मारने लगा।

उधर मालिनी उठकर ६९ की पोज़ीशन में आयी और उसका लौड़ा चूसने लगी। वह भी उसकी बुर चूस रहा था और उसकी गाँड़ भी दबा रहा था। अब मालिनी उठी और आकर उसके लंड को अपनी बुर में डालकर ऊपर नीचे होकर चुदाई में लग गयी।

राजीव नीचे से अपना लौड़ा उछालकर उसकी बुर में पेलता हुआ बोला: आऽऽऽऽह जानू क्या हुआ अस्पताल में जो इतना गरम हो गयी हो?

मालिनी: आऽऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽपा बस आपकी बहू चुदी नहीं बाक़ी सब कुछ तो हो ही गया था। आऽऽऽऽऽहहहह। साआऽऽऽऽऽऽला बड़ा कमीनाआऽऽऽऽऽऽ था। आऽऽऽऽहहह ।

राजीव: क्या उसने तुमको चोदा भी?

मालिनी: आऽऽह्हा नहीं मैंने उसे चोदने नहीं दिया। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ पापा मैं गयीइइइइइइइइइ। अब वो झड़ने लगी।

राजीव उसको पलट कर उसके ऊपर आया। उसने तौलिए से उसकी बुर का पानी साफ़ किया और फिर उसकी टांगों को अपने कंधों पर रखा और फिर से उसे चोदने लगा। अब मालिनी फिर से गरम हो गयी और मज़े से गाँड़ उछालकर चुदवाने लगी। थोड़ी देर की ज़बरदस्त चुदाई के बाद दोनों झड़ कर शांत हो गए।

उधर शिवा भी अपना पानी छोड़ने लगा।

अब मालिनी अपने ससुर से लिपटकर पड़ी रही और धीरे से उसने उसको पूरी कहानी सुनाई उस डॉक्टर की।

राजीव: अरे बेटा तो क्या हुआ चुदवा लेती उससे? मज़ा आ जाता तुमको भी।

मालिनी: पापा मैं बस आपसे और शिवा से ही चुदवाना चाहती हूँ। बाहर वालों से नहीं।

राजीव ने प्यार से उसकी चूचि दबाई और बोला: ठीक है बेटी जैसी तुम्हारी मर्ज़ी। तुम शिवा से बात तो कर लो।

मालिनी: चलो पापा खाना खाते हैं। खाने के बाद कर लूँगी।

शिवा ने अब लैप्टॉप बंद किया।

फिर दोनों खाना खाने लगे।

 
रात को शिवा आया और मालिनी की डॉक्टर के साथ हुए अनुभव को सुनकर गरम हो गया और उसकी जबरदस्त चुदाई किया।

अगले कुछ दिन ऐसे ही बीते।

और फिर महक के वापस आने का प्रोग्राम बना और उसे लेने के लिए तीनों एयरपोर्ट गए। थोड़ा जल्दी पहुँच गए थे। आज मालिनी ने राजीव के अनुरोध पर टॉप और जींस पहनी थी। क्या मस्त दिख रही थी। राजीव ने तो घर पर उसकी गाँड़ सहलाकर उसको कहा था कि मस्त गाँड़ दिखती है बेटा जींस में? तभी शिवा भी ने टॉप के ऊपर से एक चूचि दबाकर कहा था कि क्या मस्त उभार हैं तुम्हारे। वो झूठा ग़ुस्सा दिखा कर बोली थी कि वहाँ की प्रेस ख़राब हो जाएगी और सबको पता चल जाएगा कि कोई दबाया है इसको। इस पर सब हँसने लगे थे।

अभी यहाँ एयरपोर्ट में राजीव मालिनी को एक लड़की को दिखाकर बोला: देखो वो गुलाबी टी शर्ट वाली लड़की की चूचियाँ तुमसे कितनी बड़ी हैं । तुम्हारी भी इस साइज़ की हो जाएगी तब मज़ा आएगा।

मालिनी चिढ़कर: जाइए ना उसी के पास । आप अब मेरे पास तो आइएगा ही मत।

शिवा मुस्कुराया और बोला: पापा उसकी ब्रा निकालते ही चूचियाँ लटक जाएँगी। मालिनी की तो मस्त तनी रहती हैं।

राजीव: हाँ वो तो है । अरे वो काली जींस वाली की गाँड़ तो देखो। बेटी तुम्हारी गाँड़ इतनी बड़ी होगी तो दुगुना मज़ा आएगा।

इसके पहले की मालिनी कुछ जवाब देती। भीड़ में इनको महक आती दिखी। अभी उसका सिर्फ़ चेहरा ही दिख रहा था। सब उसको हाथ हिलाकर मुस्कुराए और वो भी ख़ुशी से हाथ हिलाई। वो अपना सामान ट्रॉली में लेकर आ रही थी। जैसे ही वो बाहर आयी तो सब चौक गए। वो एक गाउन सा पहनी थी जो कि उसके आधे दूध को ही ढाँक रहा था। उसका पेट बहुत बड़ा अलग सा दिखाई दे रहा था। तभी वो सामने आयी और राजीव से लिपट गयी और राजीव ने उसकी पीठ पर हाथ फेरकर कहा: बेटी सब ठीक है ना? इतना लम्बा सफ़र करके आयी हो।

महक: हाँ पापा सब ठीक है। और फिर अपने पेट पर हाथ फेरकर मुस्कुरा कर बोली: और आपका बेबी भी ठीक है।

अब वो मालिनी से लिपटी और उसके गाल चूमकर बोली: हाय मालिनी कैसी हो। दो दो मर्दों को मेनेज कर रही हो।

मालिनी शर्माकर : दीदी आप भी ना, कहीं भी कुछ भी बोल देती हो।

शिवा मुस्कुराकर: तो इसमें ग़लत क्या है? अब वो भी महक से लिपट कर बोला: दीदी आपको बहुत मिस किया। महक अपनी बड़ी बड़ी छातियाँ उसके चौड़े सीने में दबाकर शिवा को मस्ती से भर दी।

शिवा नीचे उसके गाउन से झाँक रहीं चूचियों को देखकर बोला: आऽऽऽह दीदी बहुत बड़ी हो गयीं है ये। उफ़्फ़ लगता है जीजा जी बहुत दबाते हैं। पिछली बार इतनी बड़ी नहीं थीं ।

महक हँसकर : चल बदमाश।

अब सब बाहर निकल कर कार में बैठे। सामने शिवा और मालिनी बैठे और पीछे राजीव और महक बैठे।

राजीव ने कहा: मैं शिवा की बात का जवाब देता हूँ।

शिवा: पापा कौन सी बात का?

राजीव: यही कि महक के दूध इतने बड़े कैसे हो गए?

मालिनी पलट कर पीछे देखी और शिवा भी शीशे में देखा कि पापा ने ये बात महक की एक चूचि को नीचे से ऊपर की ओर अपने हथेली में मानो तौलते हुए कहा : असल में महक का एक बॉय फ़्रेंड है वहाँ जॉन । ये उसका किया धरा है।

महक हँसकर : हा हा सही कहा आपने। कुछ उसका किया धरा है बाक़ी का आपका किया हुआ है। मॉ बनने वाली हूँ ना तो दूध बड़े हो ही जाते हैं।और पापा ये तो आपका ही किया हुआ है। हैं कि नहीं?

शिवा: वाह दीदी आपने आख़िर पापा को ज़िम्मेदार ठहरा ही दिया। वैसे दीदी, एक बात बोलूँ? जब से पापा मालिनी की लेने लगें है ना इसकी भी चूचियाँ और गाँड़ मस्त बड़ी हो गयीं हैं। और गाल भी भर गए हैं।

मालिनी हँसकर उसकी जाँघ पर एक चपत लगाई और बोली: दीदी देखो ना , ये कुछ भी बोले जा रहे हैं।

महक: वैसे मालिनी इन कुछ महीनों में तुम मस्त गदरा गयी हो। पहले की तुलना में मस्त जवान हो गयी हो।

सब हँसने लगे। राजीव का हाथ अभी भी महक की जाँघ सहला रहा था।

घर पहुँचकर सब सोफ़े में बैठे और मालिनी सबके लिए चाय लायी। चाय पीते हुए सब बातें करने लगे। अभी १० बजे थे। बाई अपना काम कर रही थी।

राजीव: बेटा जाओ फ़्रेश हो जाओ और फिर बाद में बातें करेंगे । आज संडे है शिवा भी घर में ही रहेगा।

मालिनी: दीदी आपको क्या पसंद है मैं वही खाना बनाऊँगी।

महक: मैं सब खा लेती हूँ। अच्छा अब मैं नहा लेती हूँ।

क़रीब १२ बजे सब फिर से इकठ्ठे हुए। अब बाई जा चुकी थी। राजीव अब बनियान और लूँगी में था और शिवा एक शॉर्ट और टी शर्ट में था। मालिनी अब एक गाउन पहनी हुई थी। तभी महक एक ढीला सा गाउन पहनकर बाहर आइ और आकर राजीव के पास बैठ गयी। जैसे ही वो सोफ़े पर बैठी उसकी चौड़ी गाँड़ और फैल सी गयी। राजीव ने उसके कमर के पास सहलाया और कहा: बेटी नहाकर अच्छा लगा?

महक: जी पापा बहुत अच्छा लगा। तभी मालिनी सबके लिए जूस लायी और सब पीने लगे। अब सभी बातें करने लगे।

मालिनी: दीदी आपका घर अमेरिका में तो बहुत बड़ा होगा?

इसके पहले कि महक कुछ बोल पाती राजीव बोल उठा: हाँ इसका घर ही बड़ा है बाक़ी सब इसकी क़िस्मत में छोटा ही है।

मालिनी: क्या मतलब पापा?

राजीव: अरे हमारे जमाई बाबु का हथियार छोटा सा है। बताओ घर बड़ा होने से क्या होगा? महक को तो हथियार भी तगड़ा चाहिए था ना?

महक: पापा आप भी कहाँ की बात को कहाँ ले जाते हैं ? वैसे भी मैं कौन उनके छोटे हथियार के भरोसे हूँ? मेरे पास वहाँ जॉन था और यहाँ आप भी तो हैं। ये कहकर वो राजीव के लंड को लूँगी के ऊपर से दबा दी और सहलाने लगी।

मालिनी ये देखकर सिहर उठी कि कैसी सगी बेटी अपने पापा के लंड को सबके सामने सहला रही है। शिवा की भी आँखें फैल गयीं।

राजीव: ऐसे हैरानी से मेरी बेटी को क्यों देख रहे हो? ये सब तो मैं तुमको पहले ही बता चुका हूँ। वह यह कहते हुए उसकी एक चूचि को दबाने लगा। मालिनी ने देखा कि महक की बहुत बड़ी चूचि पापा के हाथ में भी नहीं आ रही थी। मालिनी के निप्पल्स कड़े होने लगे और शिवा की शॉर्ट में भी तंबू तन चुका था।

महक: पापा मुझे गरम मत करो । मेरा सेक्स पिछले चार महीने से बंद है। अभी बीस दिन में बेबी होगा और उसके बाद भी १५/२० दिन सेक्स नहीं हो पाएगा । तब तक सबर ही करना होगा।

शिवा: ओह आपको तो अभी बहुत दिन ऐसे ही रहना होगा।

राजीव: बेटी ओरल सेक्स तो करती होगी ना?

महक: नहीं वो भी काफ़ी दिनों से नहीं किया।

राजीव: उसमें कोई बुराई नहीं है। तुम लंड चूस भी सकती हो और बुर भी चटवा सकती हो। उसमें कोई समस्या नहीं होगी। मैं तुम्हारी मम्मी के साथ आख़री दिनों तक ओरल सेक्स करता था।

महक: ठीक है पापा। ओरल कर लूँगी।

राजीव: तो बेटा गाउन उतारो ना। हम सब देखना चाहते हैं कि अब तुम्हारा पेट कैसे दिखता है?

शिवा अपने लंड को दबाने लगा था। महक: देखो पापा शिवा कितना गरम हो गया है। मैं अकेले कपड़े नहीं उतारूँगी, सबको उतारने होंगे।

राजीव: बिलकुल सही कहा। चलो मालिनी तुम भी उतारो ताकि महक को ये ना लगे कि वो अकेली ही नंगी हो रही है।

मालिनी भी थोड़ी झिझक के साथ उठी। अब तक महक अपना गाउन उतार दी थी और ब्रा में उसके बड़े बड़े दूध , उसका बड़ा सा पेट जिसमें बेबी रेस्ट कर रहा था और उसकी मस्त गदराई जाँघें और उसमें से झाँकती उसकी फूली हुई बुर जो झाँटों में छिपी सी थी साफ़ दिखाई देनी लगी। अब तक मालिनी ने भी अपना गाउन उतार दिया था। दोनों लड़कियों ने पैंटी नहीं पहनी थीं । महक मालिनी का कसा बदन देख कर बोली: आह पापा क्या मस्त बदन है इसका। मेरा भी ऐसा ही था पर देखो ना अब कितना बेडोल हो गया है। वह मालिनी की ब्रा में क़ैद चूचियाँ , उसकी चिकनी बुर और सपाट पेट देख कर बोली थी।

शिवा: दीदी ज़रा पलट कर गाँड़ दिखाओ ना। गाउन से तो बहुत सेक्सी दिख रहा था।

महक पलटी और दोनों मर्दों को अपना पिछवाड़ा दिखाने लगी। दोनोंके मुँह से आह निकल गयी। शिवा: आह पापा क्या मस्त गाँड़ का उठाव है। उफफफफ । वो अपना लंड दबाकर बोला।

राजीव: मालिनी तुम भी अपनी गाँड़ दिखाओ ज़रा। ज़रा तुलना करें दोनो की?

मालिनी भी पलट कर खड़ी हुई। तभी महक को ना जाने क्या सूझी , वह आगे को होकर सोफ़े को पकड़कर अपने चूतरों को दिखाती हुई अपनी टांगों को दूर दूर किया । फिर वो अपने दोनों हाथ से अपने चूतर फैलायी और अपनी गाँड़ का छेद और बालों में छुपी गुलाबी बुर सबको दिखाने लगी। मालिनी भी उसकी देखा देखी यही की। और उसकी गाँड़ और बुर भी सबके सामने थी।

अब शिवा का सबर का बाँध टूट गया और वो उठा और नीचे घुटनों के बल बैठा और अपनी दीदी की चूतरों की दरार में अपना मुँह घुसेड़कर उसकी गाँड़ और बुर चाटने लगा। महक की आऽऽऽऽहहह निकल गयी।

तभी राजीव भी आकर मालिनी की गाँड़ और बुर चाटने लगा। थोड़ी देर बाद राजीव ने इशारा किया और शिवा और राजीव ने अपनी जगह बदल ली। अब दोनों लड़कियाँ आऽऽऽऽऽह उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ करने लगीं। तभी शिवा ने अपना शॉर्ट उतारा और अपना लंड बाहर निकाला। राजीव भी अपनी लूँगी निकाल दिया। दोनों के लंड ऊपर नीचे हो रहे थे।

अब राजीव बोला: चलो बिस्तर पर चलते है।

महक पलटी और पहली बार अपने भाई का लंड देखी और वो उसको पकड़कर बोली: पापा आपके बेटे का लंड भी आपके जैसा ही है। वो शिवा का लंड सहलाते हुए बोली: मेरे बेटे का भी लंड ऐसा ही बड़ा सा होगा। आपका ही बेटा है ना?

अब सब बेडरूम में आए। शिवा: दीदी ब्रा उतारो ना। आपकी चूचियाँ बहुत मस्त दिख रही हैं , मुझे चूसना है।

राजीव: बेटा ये झाँटे क्यों उगा रखी है? साफ़ नहीं करती हो आजकल?

महक: पापा इतना बड़ा पेट बीच में आ जाता है कुछ दिखता ही नही नीचे का। साफ़ क्या करूँगी।

राजीव: कोई बात नहीं बेटा। हम अभी साफ़ कर देंगे। क्यों शिवा?

शिवा: पापा मैं साफ़ कर दूँगा। वैसे अब आगे से मालिनी का भी मुझे ही तो करना ही पड़ेगा क्योंकि अब तो इसका पेट भी फूलेगा ना?

महक अपनी ब्रा उतारी और उसके विशाल स्तन देखकर बाप बेटा मस्त हो गए। राजीव: आऽऽऽऽह बेटी ये तो कम से कम ४४ साइज़ के हो गए?

शिवा आकर उनको सहलाया और बोला: हाँ पापा मालिनी से बहुत बड़े हैं दीदी के। राजीव भी आकर दूसरी चूचि दबाकर बोला: उफफफफ कितने बड़े कर लिए कुछ महीनों में। अब वो दोनों खड़े खड़े ही उसकी एक एक चूचि चूसने लगे। दोनों के हाथ महक की एक एक गाँड़ की गोलाइयों को भी मसल रहे थे। फिर राजीव ने महक की गाँड़ पर हाथ फेरकर कहा: बेटी ये भी बहुत फैल गयी है। बहुत मादक लगते हैं ,ये जब हिलते हैं तुम्हारे चलने के समय।

अब तक मालिनी भी ब्रा खोल चुकी थी। मालिनी के नंगे बदन को देखकर महक बोली: सच में तुम्हारा बदन बहुत सेक्सी है । कहीं भी एक ओऊँस भी अतिरिक्त चरबी नहीं है। मेरा तो बदन बहुत बेडौल हो चला है।

मालिनी: दीदी बच्चे की डिलीवरी के बाद सब ठीक हो जाएगा।

अब राजीव और शिवा अपने अपने मोटे लौड़े लेकर लेट गए और महक राजीव के लौड़े को और मालिनी शिवा के लंड को सहलाने लगी। जल्दी ही दोनों उनको चूसने लगीं। थोड़ी देर बाद महक बोली: ला मुझे थोड़ी देर मेरे भाई का भी चूसने दे। अब दोनों ने लंड बदल लिए। राजीव और शिवा के हाथ उनकी चूचियों को दबाए जा रहे थे।

महक से अपना लंड शिवा पहली बार चूसवा रहा था। वो नोटिस किया कि महक को लंड चूसने में महारत हासिल है। वो अपने एक हाथ से उसके बॉल्ज़ को सहला रही थी और लौड़े को गले के अंदर अपने टॉन्सिल्ज़ में दबाकर शिवा को मज़े से पागल कर रही थी। जल्दी ही वह डीप थ्रोट भी देने लगी। दीदी का मुँह जिस तरह से उसके लौड़े पर ऊपर नीचे हो रहा था उसे देखकर वो बहुत उत्तेजित हो गया और वासना में भर कर उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ मसलने लगा। अब शिवा की आऽऽऽऽऽह निकल रही थी। तभी मालिनी उठकर अपने ससुर पर सवार हो गयी और उसे चोदने लगी।

महक अपना मुँह उसके लौड़े पर रखकर चूसते हुए अपने पापा और उसकी बहू की मस्त चुदाई देखने लगी। सच में बहु कितनी मस्ती और प्यार से अपने ससुर से मज़ा कर रही थी। मालिनी कितनी ख़ुश क़िस्मत है जो उसे दो दो प्यार करने वाले मिले हैं । और एक वो है जिसका मर्द ही चुदाई में नकारा है। तभी शिवा आऽऽऽऽह दीइइइइइइदी कहकर उसके मुँह में झड़ने लगा और वो उसका पूरा रस पीती चली गयी। फिर उसने जीभ से उसके लौड़े को चाटकर साफ़ किया और बोली: म्म्म्म्म्म शिवा क्या मस्त स्वाद है तुम्हारे रस का।

शिवा: थैंक्स दीदी। मुझे भी बहुत मज़ा आया। आप मस्त चूसती हो। मैं भी आपकी बुर चूस दूँ क्या?

महक मालिनी और राजीव की चुदाई देखती हुई बोली: हाँ चूस दे । ये कहकर वो सीधी लेटी और अपनी जाँघे फैला दी। शिवा उसकी टांगों के बीच आकर उसकी बुर को फैलाया और गुलाबी बुर उसके सामने खुली हुई थी । वो अपनी जीभ से उसकी बुर को चाटा और चूसने लगा।हालाँकि बालों के कारण उसको थोड़ी तकलीफ़ हो रही थी। बार बार बाल मुँह में फँस रहे थे टूट कर। महक भी आऽऽऽह्ह कर उठी और फिर वो उसकी बुर को जीभ से मानो चोदने लगा। वो भी अपनी गाँड़ उछालकर उसका सिर अपनी बुर में दबाने लगी। शिवा ने अपना मुँह अब नीचे की तरफ़ किया और महक की भूरि मस्त गाँड़ का छेद उत्तेजना से सिकुड़ और खुल रहा था। वो जीभ से उसकी गाँड़ चाटा और फिर अपनी ऊँगली में थूक लगाकर एक ऊँगली गाँड़ के छेद में अंदर डालकर अंदर बाहर करने लगा। उसका मुँह वापस उसकी बुर चाटने लगा। जीभ उसकी क्लिट को कुरेदने लगी। महक की अब आऽऽऽऽऽऽऽह उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ निकलने लगी।

उधर मालिनी अब आऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽऽपा उइइइइइइइइ मरीइइइइइइइइ ओओओओओओओओ ऊँनन ऊँननन कहकर अपनी कमर ज़ोर ज़ोर से दबाकर झड़ने लगी। राजीव अभी भी झड़ा नहीं था। उसने मालिनी को अपने ऊपर से हटाया और करवट लेकर अपना लंड महक के मुँह में डाल दिया जिसे वो चूसने लगी। मालिनी अपनी शांत बुर को तौलिए से पोंछते हुए सोच रही थी कि उफफफ क्या दृश्य है महक का भाई उसकी बुर चाट रहा है और उधर उसका बाप उससे अपना लंड चूसवा रहा है। राजीव अब महक की बड़ी बड़ी चूचियाँ भी दबा रहा था।

अब जल्दी ही महक शिवा के मुँह में अपना पानी छोड़ दी और राजीव ने भी महक के मुँह में अपना पानी छोड़ दिया।

अब सब शांत होकर पड़े रहे।

 
अगले कुछ दिन ऐसे ही बीते। महक मालिनी को बाप और भाई से चुदवाते देखती और ख़ुद भी ओरल सेक्स करती । इसी तरह दिन बीतने लगे और फिर एक रात महक को बहुत दर्द हुआ और उसे अस्पताल में एडमिट करना पड़ा । वहाँ बाहर राजीव और शिवा खड़े थे, मालिनी घर पर ही थी। सुबह डॉक्टर ने बताया कि महक को बेटा हुआ है और माँ बेटा स्वस्थ हैं। सब बहुत ख़ुश हुए और मालिनी भी फ़ोन पर यह सुनकर वहाँ आ पहुँची। थोड़ी देर बाद नर्स बच्चे को बाहर लायी और सुंदर बच्चे को देखकर सब बधाई देकर उसे प्यार किए।

राजीव डॉक्टर से पूछकर अंदर गया और महक के माथे और गाल को चूमकर बधाई दिया। महक ने मुस्कुरा कर उसे भी बधाई दी और कहा: पापा आपको भी बधाई। आप फिर से पापा बने हो। दोनों मुस्कुरा उठे। मालिनी ने हाथ बढ़ाकर राजीव के पैंट के ऊपर से उसके लंड को सहलाकर कहा: सब इसकी कृपा का फल है। राजीव उसके गाल को चूमा और बोला: इसके पापा को फ़ोन करके ख़ुश ख़बरी दे दी है। वो बहुत ख़ुश हुआ।

महक भी मुस्कुरा दी और बोली: आपके दामाद ने किया क्या है? जो किया वो तो इसने किया है। वो फिर से उसके लौड़े को सहलाकर बोली।

दोनों मुस्कुराने लगे।

अगले तीन दिनों तक अस्पताल में आना जाना लगा रहा। फिर डॉक्टर ने उनको घर जाने की इजाज़त दे दी।

घर पर सब बहुत व्यस्त थे बच्चे के आने से काम बढ़ गया था। ख़ैर कुछ दिन और बीत गए। अब महक थोड़ी स्वस्थ दिखने लगी थी। आज वो अपने बच्चे को दूध पिला रही थी । उसकी एक बड़ी सी चूचि पूरी बाहर थी और बच्चा मज़े से उसे चूस रहा था । वो बैठी हुई थी और अपनी एक चूचि को हाथ से पकड़ी थी जिसका निपल बच्चे के मुँह में था। मालिनी उसके पास बैठ कर बातें कर रही थी। शिवा दुकान जा चुका था। तभी राजीव अंदर आया और उसकी चूचि को घूरता हुआ बोला: वाह देखो कितने मज़े से तुम्हारा दूध पी रहा है ये। अच्छा अभी मैं बाज़ार जा रहा हूँ कुछ चाहिए क्या?

महक: मुझे कुछ नहीं चाहिए, पर मालिनी को आपका लंड चाहिए। मेरे चक्कर में आप लोग आजकल इसको नहीं चोदते ।

मालिनी : क्या दीदी कुछ भी बोल रही हो। यहाँ बच्चे का इतना काम निकलता है कि मैं शाम तक थक जाती हूँ और सो जाती हूँ।

राजीव: अरे मालिनी का काम तो मैं अभी कर ही दूँगा बाज़ार से आकर। तब तक बाई भी चली जाएगी। पर मेरा काम तुम कब करोगी?

महक: आपका कौन सा काम करना है मुझे?

राजीव: तुमको अपना दूध पिलाना है मुझे। सच बहुत दिन हो गए किसी लड़की का दूध पिए हुए।

महक हंस कर: अच्छा आप बाज़ार से आइए और मेरा दूध पी लीजिएगा और मालिनी को चोद भी लीजिएगा। ठीक है ना?

राजीव मुस्कुरा कर: बिलकुल ठीक है। चलो अभी आता हूँ।

मालिनी: पापा मेरी लिस्ट रख लिए हैं ना ?

राजीव: हाँ रख लिया हूँ। फिर वो चला गया।

महक: मालिनी चल आज पापा तुमको अच्छे से चोद देंगे।

मालिनी हँसकर: आपका दूध पीने के बाद ही ना। दोनों हँसने लगीं।

राजीव जब वापस आया तो बाई जा चुकी थी। वो आकर महक के पास बैठा और बोला: बाबा कब सोया?

महक: वो तो दूध पीते पीते ही सो गया था।

राजीव: तो पूरा पिला दिया या कुछ मेरे लिए भी बचाया ?

मालिनी: दीदी के पास बहुत दूध है । आपके लिए भी बचा होगा। वैसे शिवा भी रात को बोल रहे थे कि दीदी का दूध पीना है। आज से तीन तीन बच्चे हो जाएँगे दूध पीने वाले।

महक: तू भी पी लेना। फिर सब ही मेरे बच्चे बन जाओगे।

इस पर सब हँसने लगे।

राजीव: चलो ना महक दूध पिलाओ ना। वो हँसकर अपना गाउन के हुक खोली और ब्रा में से उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ मस्त लग रहीं थीं। वो अपने ब्रा का हुक सामने से खोली और अब उसने दोनों पल्ले अलग किए । उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ राजीव और मालिनी के सामने थीं । राजीव ने देखा कि उसने सफ़ेद दूध की एक बूँद भी निपल के ऊपर आयी हुई थी । अब महक ने अपनी एक चूचि हाथ में लेकर कहा: आइए चूसिए और दूध पी लीजिए।

राजीव झुका और महक की एक चूचि चूसने लगा। महक अपनी चूचि को दबाकर दूध निकाली और राजीव इसे पीने लगा। करीब पाँच मिनट पीने के बाद महक बोली: पापा अब बस करो । सब आप पी जाओगे तो बाबा को क्या पिलाऊँगी?

जैसे ही राजीव ने उसकी चूची से मुँह उठाया एक धार सी दूध की गिरती चली गयी। वो जीभ से उसे भी चाट लिया और बोला: उम्मम्म क्या स्वाद है बेटी तुम्हारा दूध। म्म्म्म्म्म्म।

महक मुस्कुराकर उसके लंड को पैंट के ऊपर से दबाकर बोली: उफफफ पापा आपका तो खड़ा हो गया है, अब मालिनी को चोद दो ना। यह कहते हुए उसने अपना दूध अंदर किया और गाउन बंद कर लिया।

राजीव उठकर अपने कपड़े उतारने लगा और बोला: जैसा आपका आदेश मेरी प्यारी बिटिया रानी। चलो बहू रानी उतारो कपड़े।

मालिनी भी मुस्कुराकर कपड़े निकालने लगी। राजीव नंगा होकर बोला: यहाँ बाबा सो रहा है। चलो मेरे कमरे में चलते है।

तीनों उसके कमरे में पहुँचे और राजीव बिस्तर पर लेट गया और अपना खड़ा लंड सहलाने लगा। अब महक उसके बॉल्ज़ को सहलाने लगी। राजीव ने अपने ऊपर आयी मालिनी को चूमना शुरू किया। मालिनी उसके ऊपर आकर उसके होंठ चूस रही थी। महक अब लंड सहलाकर मस्ती में आकर उसे चूसने लगी। राजीव मालिनी की चूचियाँ मसलकर मस्ती से चूस रहा था। महक ने मालिनी की गाँड़ के पीछे से उसकी बुर सहला कर उसे मस्त करना शुरू किया। मालिनी ने अपनी गाँड़ उठा दी ताकि महक उसकी बुर को अच्छे से सहला सके। अब कमरा गरम होने लगा था। महक: मालिनी तुम पापा के ऊपर आकर चुदाई करो। और पापा अब आप और शिवा उसके ऊपर आकर नहीं चोदना वरना पेट दबेगा।

मालिनी राजीव के ऊपर आइ और उसके लंड को पकड़कर अपनी बुर में समा ली। अब वो ऊपर नीचे होकर अपनी गाँड़ हिलाकर चुदाई में लग गयी। राजीव भी उसकी चूचियाँ मसल रहा था। दोनों मस्ती में थे। अब राजीव अपने हाथ उसकी पीठ पर लेकर सहलाते हुए उसके चूतरों को दबाने लगा। पर मालिनी ने उसका हाथ हटाकर अपनी चूचियों पर रखा और उसे दबाने का इशारा किया। राजीव उसकी चूचियाँ और निपल्ज़ मसलने लगा। जल्दी ही मालिनी की चीख़ें गूँजने लगीं।मालिनी के उछलने से पलंग हिलने लगा। महक बग़ल में बैठी चुदाई को मज़े से देख रही थी। वो राजीव के बॉलस को सहलाने लगी जिसके ऊपर मालिनी के बुर से निकलने वाला रस गिरे जा रहा था। वो चिल्लाए जा रही थी: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ पाआऽऽऽऽऽऽपा आऽऽऽऽऽऽऽऽह मज़ाआऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽ रहाआऽऽऽऽ है। हाऽऽऽऽऽऽऽय मैं गयीइइइइइइइइ। उधर राजीव भी अपनी गाँड़ नीचे से उछालकर झड़ गया। महक के हाथ में अब राजीव का और मालिनी का रस मालिनी के बुर से बह कर आ रहा था। वो मुस्कुराई और अपनी उँगलियों में लगा रस चाटने लगी और बोली: म्म्म्म्म्म्म कितना मस्त स्वाद है म्म्म।

फिर उस दिन और कुछ ख़ास नहीं हुआ। शाम को शिवा आया और मालिनी ने जब उसे बताया कि पापा ने आज महक का दूध पिया है तो वो भी बोला: दीदी मुझे भी आपका दूध पीना है।

महक हंस कर: अच्छा भाई पी लेना रात को । ठीक है ना?

वो ख़ुश होकर बोला: ठीक है दीदी रात को ज़रूर पिला देना।

रात का खाना खा कर सब महक के कमरे में इकठ्ठे हुए। और महक अपने बेटे को दूध पिला रही थी। उसने अपने दोनों दूध बारी बारी से उसे पिलाए और उनको नंगा ही रहने दिया। बाप बेटा उसके दूध को सहलाए और महक बोली: आप लोग चलो मैं पापा के कमरे में आती हूँ। मालिनी किचन का काम ख़त्म करने लगी। राजीव और शिवा आकर नंगे होकर बिस्तर पर बैठ कर अपना अपना लौड़ा सहलाने लगे और लड़कियों का इंतज़ार करने लगे।

पहले महक आयी और उनको देखकर बोली: वाह यहाँ तो मालिनी को चोदने की पूरी तय्यारी है। फिर वो आकर दोनों के बीच में बैठ गयी और एक एक हाथ में उनके लौड़े पकड़कर सहलाने लगी।

शिवा: दीदी दूध बाहर निकालो ना पीना है।

महक मुस्कुराई और अपना गाउन उतारी और अपने दूध बाहर निकाली। अब उसके बड़े बड़े दूध बाहर आकर हिल रहे थे। निपल्ज़ से दूध की एक बूँद अभी भी गिर रही थी। शिवा ने अपने होंठों पर जीभ फेरी और अपना मुँह एक दूध पर रखा और चूसने लगा। उधर राजीव ने भी उसका दूसरा दूध मुँह में लिया और दूध पीने लगा।

तभी मालिनी अंदर आयी और देखी कि महक अपने पापा और भाई को दूध पिला रही है और वो इनके लौड़े सहला रही थी। उफफफ क्या उत्तेजित करने वाला दृश्य है- वो सोची। तभी शिवा ने मालिनी को देखा और बोला: आऽऽऽह मालिनी क्या मस्त दूध है दीदी का । आओ तुम भी पियो ना। वो महक का दूध पकड़कर उसको दिखा कर बोला। मालिनी थोड़ा हिचकिचाई ।तब महक बोली: आओ मालिनी जब सब पी रहे हैं तो तुम भी पी लो।

अब शिवा ने हटकर मालिनी के लिए जगह बनाई और मालिनी भी उसका एक दूध पीने लगी। बग़ल में राजीव दूसरा दूध चूसे जा रहा था। फिर महक बोली: चलो अब छोड़ो मुझे। रात को मुझे बेटे को भी पिलाना होगा।

अब राजीव और मालिनी हट गए और राजीव ने मालिनी की चूचियाँ दबाकर कहा: आओ बेटी अब चुदाई करते है।

मालिनी मुस्कुराई और नीचे उतर कर अपने कपड़े निकाली और नंगी होकर बिस्तर के बीच में लेट गयी। तब राजीव बोला: बेटी आज महक ने कहा है ना कि अब तुम इस पोज़ीशन में नहीं चुदवाओगी तुम उठो और मैं नीचे आता हूँ। फिर वो शिवा से बोला: बेटा तुम मेरे बाद इसकी बुर चोदोगे या गाँड़ मारोगे?

शिवा: पापा आप बुर में डालो और मैं आज गाँड़ मारूँगा। काफ़ी दिन से इसकी टाइट गाँड़ नहीं मारी। ये कहते हुए वह लूब ले कर आया। अब राजीव नीचे लेटा और महक उसका लंड चूसने लगी। मालिनी भी उसके बॉल्ज़ चूसी और चाटने लगी। फिर मालिनी आकर उसके ऊपर चढ़ी और लौड़े को बुर में सरका लिया। अब महक शिवा का लंड चूसने लगी। फिर वो उसमें लूब लगायी और दो उँगलियों में लूब लगाकर मालिनी की गाँड़ में डाली और आगे पीछे करके अच्छे से चिकनी कर दी उसकी गाँड़ की सुराख़। फिर महक बोली: ले भाई अब डाल अपना लंड इसकी मस्त गाँड़ में। वो अपने हाथ में भाई का लौड़ा पकड़ी और अपनी भाभी की गाँड़ के छेद से सटा दी। शिवा ने एक धक्का मारा और उसका लौड़ा आधा अंदर घुस गया। अब वो मज़े से उसकी गाँड़ मारने लगा। मालिनी भी अपनी कमर उछालकर डबल चुदाई के आनंद में डूबने लगी। वो चिल्लाने लगी: आऽऽऽँहहह मस्त लग रहाआऽऽऽऽ है। हाऽऽऽऽऽऽय्य क्या मज़ाआऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽ है। उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽ और जोओओओओओर से चोओओओओओओओदो। फ़ाआऽऽऽऽऽऽड़ दो मेरीइइइइइइइइ।

महक हैरानी से मालिनी को देख रही थी जो मारे मज़े के बड़बड़ाए जा रही थी। राजीव और शिवा उसकी चूचियाँ भी दबा रहे थे।। महक अपने भाई के बॉल्ज़ को सहला रही थी। तभी शिवा आऽऽऽऽह कहकर झड़ने लगा। फिर मालिनी और राजीव भी झड़ गए। अब सब लेटकर सुस्ताने लगे।

जीवन ऐसे ही चल रहा था।

 
कुछ दिनों बाद महक डॉक्टर से मिली और उसने उसकी जाँच कर कहा कि वो अब स्वस्थ है और अब सामान्य जीवन जी सकती है मतलब अब चुदवा सकती है। उस रात शिवा और राजीव ने उसे जम कर चोदा। चुदाई भी सभी आसनों में हुई। उसकी गाँड़ को भी उन दोनों ने नहीं छोड़ा। अब मालिनी और महक बिस्तर पर पड़ी रहतीं और दोनों बाप बेटा उन पर जब मर्ज़ी चढ़ जाते और ज़बरदस्त चुदाई कर देते। इसी तरह एक महीना बीत गया और फिर महक अपने बच्चे के साथ वापस अपने पति के पास अमेरिका चली गयी।

शिवा और राजीव महक को बहुत मिस करते और मालिनी को चोद कर ही मस्त रहते। अब मालिनी का भी पेट फूलने लगा था और अगले कुछ दिनों में वो भी चुदवाने लायक नहीं रहेगी इस बात का इल्म था दोनों बाप बेटे को। शिवा ने दबी ज़बान में आयशा का ज़िक्र छेड़ा था पर राजीव ने उसे मना कर दिया था। अब शिवा अपनी सास की बात किया तो मालिनी ने मना कर दिया। शिवा को ऐसा लगने लगा था कि अब कुछ दिनों में ही चुदाई के लाले पड़ेंगे। उन दोनों के लौड़े बुर के लिए तरसेंगे।

इसी तरह दिन बीतते गए और एक दिन महिला गैनोकोलाजिस्ट ने मालिनी को कहा: बेटी अब तुमको सेक्स से बचना होगा।

मालिनी ने शर्माकर पूछा : क्या मुँह में ले सकती हूँ?

डॉक्टर मुस्कुराकर बोली: हाँ हाँ क्यों नहीं। बस अंदर मत डलवाना।

मालिनी झिझकते हुए: वो वो क्या है ना- मेरा मतलब है

कि याने—

डॉक्टर: बेटी पूछो ना जो पूछना है।

मालिनी धीरे से: क्या पीछे ले सकती हूँ?

डॉक्टर हँसकर: नहीं दोनों छेद में नहीं। असल में पीछे लोगी तो भी बच्चे पर लिंग का दबाव पड़ सकता है।

मालिनी: ओह । ठीक है मैं ध्यान रखूँगी।

अगले दिन उसने ये बात अपने पति और ससुर को बतायी तो दोनों का मुँह उतर गया।

राजीव : कोई बात नहीं बेटी । चूस दिया करना। इसी से काम चला लेंगे।

शिवा: हाँ मालिनी ये समय भी कट ही जाएगा।

इसी तरह दिन कट रहे थे। चुदाई पूरी तरह बंद हो चुकी थी बस लंड चूसवा कर ही दोनों मर्द गुज़ारा कर रहे थे।

ऐसे समय में एक दिन सुबह सुबह राजेश ( मालिनी के भाई )का फ़ोन आया । वो रो रहा था और बोला: दीदी श्याम ताऊजी और ताईजी नहीं रहे।

मालिनी: ये कैसे हुआ?

राजेश: ताई के ज़िद करने पर ताऊजी उनको लेकर एक मंदिर जा रहे थे पर रास्ते में उनका ऐक्सिडेंट हो गया और दोनों उसमें मारे गए। आप जल्दी से आ जाओ क्योंकि मम्मी अकेली दोनों बहनों को नहीं संभाल पा रही हैं।

मालिनी: हम अभी निकलते है और दो घंटे में पहुँचते हैं।

अब मालिनी शिवा से लिपट कर रोने लगी। राजीव और शिवा ने उसको सम्भाला और सब श्याम के घर के लिए निकल पड़े। मालिनी बोली: बेचारी मुन्नी और चारु पर क्या बीत रही होगी। वो दोनों तो एकदम से ही अनाथ हो गयीं।

जब ये सब वहाँ पहुँचे तो घर पर काफ़ी भीड़ थी। चारु और मुन्नी मालिनी से लिपट कर रोने लगीं। शिवा भी उनको चुप कराया और पानी पिलाया। फिर वो दोनों अंकल कहकर राजीव से भी लिपट कर रोने लगीं। राजीव ने दोनों के कंधे सहलाए और उनकी पीठ सहलाकर बोला: बेटी ये ईश्वर की मर्ज़ी है इसके आगे किसका बस चला है। अचानक ये कहते हुए उसके दोनों हाथ उन लड़कियों के पीठ पर ब्रा की पट्टी पर पड़े और उसने अपने लंड में कुछ सनसनी महसूस की। फिर वो अपने कमीनेपन पर ख़ुद ही शर्मिंदा हुआ और उनसे अलग हो गया।

फिर राजीव ने वहाँ का सब इंतज़ाम किया और दाह संस्कार राजेश के हाथों सम्पन्न हुआ।

तीन दिनों के बाद सब रीति रिवाज पूरा करके परिवार साथ में बैठा और भविष्य के बारे में विचार होने लगा।

सरला: मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है कि आगे का क्या होगा? राजेश की पढ़ाई पूरी हो गयी है और इसकी नौकरी पास के एक छोटे से क़सबे में लग गयी है। अब इसको तो वहाँ जाना होगा। मुझे भी इसके साथ ही जाना होगा। इसके खाने पीने का ध्यान रखने के लिए।

मालिनी सोची कि खाने का ध्यान या इसके लंड से चुदवाने का ध्यान??? छी मम्मी ऐसे समय में भी अपनी चुदाई के इंतज़ाम में ही लगी हुई है वो भी अपने बेटे से ।

शिवा: फिर ये दोनों यहाँ अकेले कैसे रहेंगी? चारु को तो इस साल कोलेज में भर्ती होनाहै और मुन्नी भी ११वीं में जाएगी। ये तो गड़बड़ हो जाएगा। राजेश वाले क़सबे में तो कोई ढंग का कोलेज है नहीं।

मालिनी: पापा क्या हम इन दोनों को अपने घर रखकर इनकी पढ़ाई जारी रखवा सकते हैं?

राजीव ने एक नज़र दोनों लड़कियों पर डाली। चारु ने सलवार कुर्ता पहना था और उसकी ३२ की चूचि टाइट क़ुर्ती में ग़ज़ब ढा रही थी। मुन्नी स्कर्ट और टॉप में थी। उसकी चूचियाँ ३० की हो गयी होंगीं और जाँघें भी स्कर्ट से मस्त गदराई दिख रही थी। राजीव के लंड ने एक अंगड़ाई सी ली। फिर वो बोला: हाँ हाँ बेटी क्यों नहीं, महक का कमरा तो ख़ाली है। ये दोनों वहाँ आराम से रह लेंगी और इनका कोलेज और स्कूल में भी अड्मिशन हो जाएगा।

सरला: पर श्याम की दुकान और इस घर का क्या होगा?

राजीव: ऐसा करते हैं कि ये घर और दुकान बेच देते है। और सारा पैसा राजेश और इन दोनों लड़कियों में बाँट देते हैं। इनके अकाउंट में जमा करवा देंगे। इससे इनकी पढ़ाई और शादी का ख़र्च भी निकल आएगा।

सबको ये बात पसंद आयी और राजीव ने एक दलाल को काम पर लगाया ताकि वो प्रॉपर्टी बेच सके।

रात को खाना खाकर राजीव बोला: आओ सरला थोड़ा टहल लेते हैं।

वो और सरला बाहर निकल कर टहलने लगे।

राजीव: और राजेश ख़ुश रखता है ना?

सरला: हाँ बहुत ध्यान रखता है मेरा।

राजीव: तो उसकी शादी करोगी या ख़ुद ही मज़े लेते रहोगी अपने जवान बेटे की जवानी का।

सरला: वो तो अभी शादी की बात ही नहीं करता। आप सुनाओ आप और आपका बेटा मालिनी को ख़ुश रखते हो ना?

राजीव: ये भी कोई पूछने की बात है। वो मेरी लाड़ली बहू है।

सरला: ये तो बताइए कि बच्चा किसका है?

राजीव: क्या फ़र्क़ पड़ता है? आख़िर ख़ून तो हमारा ही होगा ना। वैसे सच में हमें भी पता नहीं है।

सरला: ये दोनों जवान लड़कियाँ आपके घर रहेंगी तो आप तो इनको छोड़ोगे नहीं। है ना?

राजीव: अरे क्या बोलती हो। अभी तो बच्चियाँ हैं दोनों।

सरला: कोई बच्चियाँ नहीं है १८ के आसपास हो गयी है दोनों। पूरी जवान हैं और मैंने आपको उनकी चूचियों को घूरते भी देखा है।

राजीव: अरे तुम भी कल्पना करती रहती हो।

अब वो एक पार्क में आ चुके थे जो सूना सा था। राजीव की चुदाई तो कई दिनों से बंद ही थी सो वो सरला की कमर में हाथ डाला और उसको अपने से सटाकर उसके होंठ चूसने लगा। वो भी उससे चिपक कर उसका साथ देने लगी। अब राजीव उसकी मोटी गाँड़ को सहलाकर मस्ती से भरने लगा। सरला ने भी पैंट के ऊपर से उसके लंड को दबाना चालू कर दिया। जल्दी ही राजीव ने उसके ब्लाउस के हुक खोले और हाथ अंदर डालकर उसकी चूचियाँ दबाने लगा। सरला आऽऽऽऽऽह कर उठी। वो उसे पार्क में एक कोने में लेज़ाकर उसकी साड़ी उठाने का इशारा किया और अपना पैंट का जीप खोलकर अपने लौड़े को बाहर निकाला। सरला एकदम से ज़मीन पर बैठी और उसके लंड को चूसने लगी। फिर वो खड़ी हुई और राजीव ने उसको घुमाया और वो पेड़ के सहारे खड़ा किया। फिर वो आगे की ओर झुककर अपनी गाँड़ पीछे को उठाकर खड़ी हो गयी। राजीव ने उसकी साड़ी और पेटिकोट उठाया और नीचे झुककर वहाँ अपना मुँह डालकर उसकी गाँड़ और बुर चाटने लगा। फिर जब वो देखा कि उसकी बुर गीली हो गयी है तो वो अपना लौड़ा उसकी बुर में सेट किया और एक झटके से अपना मोटा लंड उसकी बुर में पेल दिया। सरला भी आऽऽऽह करके अपनी बुर पीछे करके चुदवाने लगी। राजीव भी अब ज़ोर से धक्का मारने लगा। फ़च फ़च की आवाज़ सरला की बुर से आने लगी थी। अब सरला सी सी कर रही थी। क़रीब २० मिनट की चुदाई के बाद सरला की घुटी हुई चीख़ें गूँजने लगीं। और फिर दोनों झड़ने लगे।

सरला ने सीधे खड़े होते हुए अपनी बुर को अपने पेटिकोट से पोंछा और राजीव भी एक रुमाल से अपना लंड साफ़ किया और उसे अंदर कर लिया अपने पैंट के अंदर। दोनों ने कपड़े ठीक किए और घर की ओर वापस चल पड़े।

रास्ते में सरला फिर से उसको छेड़ीं : तो मेरी भतीजियों को तो आप छोड़ने वाले नहीं हो। है ना?

राजीव : अरे क्या अनाप शनाप बकी जा रही हो उन बच्चियों के बारे में। अच्छा राजेश के साथ कब जा रही हो?

सरला: बस ३/४ दिन में । आप कब वापस जाओगे।

राजीव: बस चारु और मुन्नी का समान इकट्ठा कर देना तो कल ही चले जाएँगे।

जब वो वापस घर पहुँचे तो शिवा की दोनों ओर उसकी सालियाँ बैठी बातें कर रहीं थीं । मालिनी सामने बैठी राजेश कि साथ TV देख रही थी।

राजीव ने ध्यान से लड़कियों को देखा और सोचा कि सरला सही कहती है लड़कियाँ जवान हो चुकी हैं-- उसने अपना लौड़ा दबाकर सोचा।

 
अगले दिन राजीव दोनों लड़कियों को उनके सामान के साथ अपने घर ले आया। कार में मालिनी शिवा के साथ आगे बैठी और राजीव के साथ चारु और फिर मुन्नी बैठीं थी । रास्ते भर वह चारु की जींस में फँसी जाँघें देखता रहा और मुन्नी की स्कर्ट से दिखाई देती गोरी चिकनी जाँघें भी मस्त लग रही थी। टॉप के ऊपर से उनकी छोटी चूचियाँ भी ग़ज़ब ढा रही थीं । उसका लौड़ा पैंट में तन गया था पर उसने कोई भी ग़लत हरकत नहीं की क्योंकि वो लड़कियों को अभी से डराना नहीं चाहता था। वो पहले ये समझना चाहता था कि ये दोनों कितनी खेली खाई हुई हैं या फिर बिलकुल भोली हैं जैसा कि दिखती हैं।

घर पहुँचकर उनको महक का कमरा दे दिया गया। वो उसमें सेटल होने लगीं। अगले कुछ दिनों कुछ ख़ास नहीं हुआ। लड़कियों के स्कूल और कोलेज अभी खुले नहीं थे। और दोनों घर पर ही रहतीं थीं । घर पर चारु और मुन्नी दोनों टॉप और स्कर्ट ही पहनती थीं । बाहर जाने के समय चारु पैंट या सलवार पहनती थी। दिन भर उनकी गदराई जाँघें देखकर राजीव की हालत पतली हो जाती थी और बड़ी समस्या यह थी कि मालिनी की चुदाई भी बंद थी और अब इन लड़कियों के आने से ख़ुल्लम ख़ुल्ला मस्ती भी बंद हो गयी थी। रात को मालिनी राजीव के कमरे में आकर उसका लौड़ा चूस देती थी या वो मालिनी के कमरे में जाकर अपना लौड़ा चुसवा लेता था।

उधर शिवा भी चुदाई के लिए व्याकुल था । उसने आयशा को पटा लिया और घर में बिना बताए वो उसे दुकान से जाकर चोद आता था। अब उसकी वासना थोड़ी शांत हो जाती थी। अभी तक उसके मन में अपनी सालियों के लिए बुरे विचार नहीं आए थे।

मालिनी भी लड़कियों के खाने पीने का पूरा ध्यान रखती थी। बरामदे में जहाँ कपड़े सूखते थे वहाँ आजकल राजीव को दो छोटी ब्रा और दो पैंटी सूखती हुई दिखती थी। वो जनता था कि ये इन लड़कियों की ही हैं । उसका मन और व्याकुल हो जाता। इसी तरह दिन कटने लगे थे।

शाम को सब बैठे बातें कर रहे थे तब चारु बोली: अंकल मुन्नी का स्कूल में अड्मिशन का समय आ गया है।

राजीव: हाँ मैंने बात कर रखी है ।दो तीन दिनों में, मैं मुन्नी को स्कूल ले जाऊँगा और वहाँ भर्ती करा दूँगा। वैसे तुम्हारा अड्मिशन का क्या सोचा?

चारु: अंकल मैं तो बी कोम करूँगी, नैशनल कोलेज से । वहाँ मेरी अड्मिशन हो जाएगी ना?

राजीव: हाँ बेटी क्यों नहीं होगी? उस कोलेज का ट्रस्टी मेरा दोस्त है। पर अभी उसमें तो समय है ना?

चारु: जी अंकल अभी १० दिन हैं ।

राजीव: बेटी ऐसा करेंगे हम उस दोस्त के घर जाकर उसे अगले हफ़्ते ही मिल लेंगे ताकि वो तुम्हारे लिए सीट पहले से रोक ले। ठीक है ना?

चारु: जी अंकल ठीक है।

मालिनी: चलो तुम दोनों की समस्या पापा ने हल कर दी। अब कोई चिंता मत करो सब हो जाएगा।

फिर सब खाना खाने बैठ गए।

अगले कुछ दिन सामान्य बीते। फिर राजीव मुन्नी को बोला: बेटी कल सुबह अपने सभी पेपर तय्यार रखना । हम तुम्हारे स्कूल जाएँगे अड्मिशन के लिए।

अगले दिन राजीव मुन्नी को लेकर घर से बाहर आया। मुन्नी ने आज सफ़ेद टॉप और काली स्कर्ट पहनी थी। बहुत मस्त लग रही थी । राजीव ने एक ऑटो रोका और उसने पहले से एक आदमी बैठा था । राजीव उसकी बग़ल में बैठा और मुन्नी एक साइड में बैठी। उसकी स्कर्ट कम जगह को वजह से ऊपर चढ़ गयी थी और राजीव का बैग हाथ से गिर गया ऑटो के फ़्लोर पर। वो उसे उठाने को झुका तो उसकी आँखें उसकी जाँघों की जोड़ पर चली गयी वहाँ उसने देखा की मुन्नी ने आज काली पैंटी ही पहनी थी। बुर का उभार बाहर निकला हुआ साफ़ दिखाई दिया और राजीव के लौड़े ने मानो बग़ावत कर दी और तनने लगा।

वो सोचा कि उफफफफ इसकी इतनी मस्त उभरी हुई है तो चारु की कैसी होगी? वो अपना लौड़ा मसल दिया। अब वो बैग उठाकर सीधे बैठा और उसकी कोहनी मुन्नी की बाँह से रगड़ने लगी। जब ऑटो थोड़ा उछलता तो वो अपनी कोहनी मुन्नी की चूचि से रगड़ देता। मुन्नी को राजीव की इन हरकतों पर तनिक भी संदेह नहीं हुआ।

ख़ैर वो स्कूल पहुँचे और राजीव उसे लेकर प्रिन्सिपल के ऑफ़िस पहुँचा। वहाँ ऑफ़िस के बाहर वेटिंग रूम बना था। वहाँ स्टूल पर एक क़रीब ४० साल की गोरी थोड़ी मोटी सी औरत बैठी थी। राजीव ने उसे एक पर्ची ने नाम लिख कर दिया और बोला: प्रिन्सिपल से मिलना है।

वो बोली: थोड़ा रुकिए अभी कोई अंदर है।

राजीव और मुन्नी वहाँ कुर्सी में बैठ कर इंतज़ार करने लगे। तभी उस औरत का मोबाइल बजा और वो अभी आती हूँ कहकर चली गयी।

जब क़रीब १० मिनट हो गए और वो औरत नहीं आयी तो राजीव उठकर ऑफ़िस के दरवाज़े के पास गया। शायद दरवाज़ा अंदर से बंद था। वो साथ बने लम्बी काँच की खिड़की के पास गया और अंदर झाँका तो परदे के कारण उसे कुछ नहीं नज़र आया। उसके आगे एक और काँच की लम्बी सी खिड़की थी । अब वो वहाँ से भी झाँका और वहाँ का पर्दा थोड़ा सा हटा हुआ था। उफफफ अंदर का दृश्य देखकर वो जैसे पागल हो गया। अधेड़ उम्र का प्रिन्सिपल अपनी कुर्सी पर बैठा था और उसके पास एक ताज़ा जवान लड़की स्कर्ट और टॉप में खड़ी थी। वो उसकी पीठ सहला कर बोल रहा था: बेटी मैं तुमको पास कर दूँगा पर तुमने पेपर बहुत ख़राब किया है। आख़िर मुझे भी तो कुछ मज़ा दो अगर मुझसे मदद चाहिए तो। यह कहते हुए उसने अपना हाथ उसकी स्कर्ट के अंदर डाला और राजीव समझ गया कि वो उसके छोटे छोटे चूतरों को दबा रहा है। फिर वो अपना हाथ उसके टॉप के ऊपर ले गया और उसके अमरूदों को भी मसलने लगा।

राजीव ने सोचा कि लड़की शायद मुन्नी या चारु की उम्र की होगी। फिर उसने उसका टॉप और ब्रा एक साथ उठा दी और उसकी नंगी चूचियों को देखकर बोला: आऽऽऽह बेटी क्या जवानी आइ है तुम पर। ये कहते हुए वो उसके अमरूद मसलने लगा। लड़की की सिसकियाँ गूँजने लगीं। अब वो अपनी कुर्सी से उठा और लड़की को अपने टेबल पर बग़ल से पकड़कर बिठाया और फिर उसके स्कर्ट को ऊपर करके वो अपना मुँह उसके जाँघों के बीच डाला और जाँघों को चूमते हुए चाटने लगा। शायद वह उसकी पैंटी को एक तरफ़ करके उसकी बुर चाटने लगा था। लड़की की सिसकियाँ निकले जा रही थीं। उसने उसके अमरूदों को मसलते हुए उसकी बुर चाटकर उसको स्खलित कर दिया। अब वो लड़की लम्बी लम्बी साँस ले रही थी । फिर वो जल्दी से नीचे उतरी और कपड़े ठीक की और बाहर भाग गयी। इसके बाद प्रिन्सिपल ने अपना पैंट खोल और उसमें से एक छोटा सा पतला सा लंड निकाला और उसको मूठ्ठी में लेकर आगे पीछे करके दो मिनट में झड़ गया। फिर रुमाल से साफ़ किया और अपना कपड़ा ठीक करके अपनी सीट पर बैठ गया। तभी राजीव को पीछे से आवाज़ सी आयी तो वो आड़ में छुप गया और तभी उसने देखा कि वो अधेड़ औरत वापस आकर राजीव की पर्ची लेकर अंदर गयी और मुस्कुराकर बोली: ले लिया मज़ा जवानी का?

प्रिन्सिपल उसको अपने पास आने का इशारा किया और जब वो उसके पास आकर खड़ी हुई तो उसकी मोटी गाँड़ पर हाथ फेरा और उसे दबाकर बोला: हाँ मस्त माल है। फिर आएगी वो । अरे ज़रा अपनी गाँड़ तो दिखाओ जानू। वो औरत हँसकर अपनी साड़ी और पेटिकोट उठा दी और वो उसकी नंगी मस्त गाँड़ दबाकर मज़े लेने लगा।

वो बोली: आपसे मिलने एक आदमी एक लौड़िया के साथ आया है। मिल लो बहुत देर से इंतज़ार कर रहे हैं।

प्रिन्सिपल उसकी चूचियाँ दबाकर बोला: चलो भेज दो ।

अब राजीव जल्दी से वहाँ से हटकर अपनी कुर्सी पर बैठ गया। तभी वो औरत बाहर आयी और उनको अंदर जाने का इशारा किया। राजीव और मुन्नी अंदर गए तो वो मुन्नी को घूरते हुए बोला: आइए बैठिए।

फिर राजीव ने मुन्नी के सब पेपर दिखाए और स्कूल में अड्मिशन की बात की। उसके नम्बर अच्छे थे इसलिए कोई परेशानी नहीं हुई। पर प्रिन्सिपल बीच बीच में मुन्नी को ताड़ता रहता था। फिर राजीव ने चेक जमा किया और अड्मिशन करवा कर वो मुन्नी को लेकर वापस आया। रास्ते में वो सोचा कि प्रिन्सिपल साला लम्पट है पता नहीं मुन्नी को भी तंग करेगा क्या। वो सोचा कि मालिनी से बोलूँगा कि वो मुन्नी को सावधान कर दे।

यही विचार करते हुए वो दोनों घर पहुँच गए।

दोपहर को खाना खाकर जब लड़कियाँ अपने कमरे में आराम कर रहीं थीं तब वो मालिनी के कमरे में गया । मालिनी लेटी हुई थी करवट में। वह उसकी मोटी गाँड़ सहलाया और बोला: आज जिस स्कूल में मुन्नी का अड्मिशन कराया है वहाँ का प्रिन्सिपल साला महा हरामी है। तुम मुन्नी को समझा देना कि उससे दूर रहे और अगर वो उसे कुछ बोले तो तुमको बताए।

मालिनी: ऐसा क्या कर दिया उसने?

वह उसकी गाँड़ दबाते हुए बोला: अरे एक लड़की से मज़े ले रहा था और एक औरत की भी गाँड़ मसल रहा था। यह कहकर उसने मालिनी को पूरे विस्तार से बात सुनाई। मालिनी ने देखा कि उसके लूँगी में तंबू तन गया है तो वो उसको पकड़कर सहलाने लगी। अब राजीव उठा और दरवाज़ा बंद किया और लूँगी उतार दिया और बोला: साला वो सब देखकर मैं बहुत गरम हो गया हूँ। ज़रा झाड़ दे ना।

मालिनी उसके लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगी। वह उसके लंड को जीभ से चाट भी रही थी और उसके बॉल्ज़ को सहला भी रही थी। फिर उसने उसके बॉल्ज़ को चाटना शुरू किया और साथ ही पूरा लंड लम्बाई में चाटकर उसको मस्ती से भरने लगी।

 


थोड़ी देर बाद उसने मालिनी के मुँह से लंड निकाला और मालिनी को करवट के बल लिटा दिया और उसका गाउन उठा दिया और उसकी मोटी गाँड़ अब उसके सामने थी। वो उसे दबाकर बोला: आऽऽऽऽऽह बेटी क्या मस्त हो गयी है तुम्हारी गाँड़। मैं इसकी दरार में लंड रगड़कर झड़ूँगा। घबराओ नहीं अंदर नहीं डालूँगा।

अब वो उसके पीछे आकर लेट गया और अपना लंड उसकी गाँड़ की दरार में डाला और मालिनी ने अपनी एक जाँघ ऊपर उठा दी। लौड़ा सेट होने के बाद उसने अपनी दोनों जाँघों को जोड़ लिया ।अब लंड उसकी गाँड़ की दरार में फँस सा गया। अब वो उसे आगे पीछे करने लगा। नरम नरम माँस के स्पर्श से उसका लौड़ा झटके मारने लगा और वो और तेज़ी से अपना लंड रगड़ने लगा। मालिनी भी अपनी गाँड़ आगे पीछे करके और अपनी जाँघों के बीच उसका लौड़ा दबाकर उसको मज़ा देने लगी। जल्दी ही राजीव हाँफने लगा और आऽऽऽहहह कहकर उसकी गाँड़ की दरार में अपना रस छोड़ने लगा।

पूरा झड़ने के बाद वो उठकर एक तौलिया लाया और बड़े प्यार से अपनी बहू की गाँड़ में लगा अपना रस साफ़ किया और फिर मालिनी को चूमकर बोला: अच्छा बेटा अब तुम आराम करो । मैं भी आराम करता हूँ।

मालिनी मुस्करायी और सीधी लेटकर अपना गाउन ठीक करके सोने की कोशिश करने लगी।

कुछ दिनों के बाद चारु का अड्मिशन का समय भी आ गया। राजीव का दोस्त करन उस कोलेज का ट्रस्टी था । राजीव ने उससे फ़ोन से बात की और करन ने उसे घर पर ही बुला लिया। राजीव और चारु तय्यार होने के लिए अपने अपने कमरे में गए। राजीव टी शर्ट और जींस में बाहर आया तो मालिनी बोली: पापा क्या मस्त माल लग रहे हो। मन करता है कि आपको चूम लूँ। वो इधर उधर देखी और किसी को भी ना पाकर वो उसके होंठ चूम ली। दोनों हँसने लगे।

तभी वहाँ चारु आयी और राजीव उसे देखते ही रह गया। उसने आज एक टाइट जींस पहनी थी और टॉप भी टाइट ही था और स्लीव्लेस भी था। क्या मस्त माल लग रही थी। नई जवानी भी क्या चीज़ होती है। मस्त गोलाइयाँ ब्रा में तनी हुई थीं और पिछवाड़ा भी मस्त गोल गोल था। जींस कमर के नीचे तक थी और पतली गोरी कमर मस्त लग रही थी। छोटी सी गहरी नाभि भी बहुत मादक लग रही थी। आज तक राजीव को वो कभी इतनी सेक्सी नहीं लगी थी।

मालिनी भी राजीव को देखकर समझ गयी कि बेचारी चारु अब ख़तरे में आ गयी है। वो सोची कि मैं क्या कर सकती हूँ। अब राजीव उसको देखकर बोला: बेटी बहुत प्यारी लग रही हो। तुमको देख कर ही अड्मिशन दे देगा कोई भी।

इस पर सब हँसने लगे। अब राजीव ने चारु की कमर में हाथ डाला और बोला: चलो बेटी चलते हैं।

मालिनी सोची कि बेचारी ये लड़की तो अब गयी काम से।

उधर चारु को बड़ा अजीब लगा कि अंकल ने उसकी कमर पर हाथ रखा है पर वो कुछ नहीं बोली। उधर ऑटो में भी राजीव उसके साथ बहुत सट कर बैठा और उसको कोई बिल्डिंग या माल या सिनमा हॉल दिखाता जाता और कभी उसकी जींस में कसी जाँघ तो कभी उसकी नंगी चिकनी बाँह सहला देता। चारु को बड़ा अजीब लग रहा था। वो जवान हो चुकी थी और सब समझने लगी थी। ऐसा उसके साथ पहले भी हो चुका था । स्कूल के दो टीचर उसे कई बार इस तरह से सहला चुके थे और तब वो चुपचाप वहाँ से हट गयी थी।

ख़ैर करन का घर आ गया और वो दोनों उसके शानदार घर के अंदर गए। दरवाज़ा एक १९/२० साल की लड़की ने खोला । वो साड़ी पहनी थी और उसके कपड़े थोड़े मुड़े हुए से थे। राजीव मन ही मन मुस्कुराया क्योंकि वो जानता था कि ब्लाउस में और साड़ी में कुछ ख़ास जगह मुड़ने के निशान क्यों पड़ते हैं। वो सोचा कि लगता है इसका पति अभी इसे दबा रहा होगा।

अंदर ड्रॉइंग रूम में करन बैठा था और उसने अपनी गोद में एक तकिया सा रखा हुआ था। राजीव को देखकर वो मुस्कुराया और उसे अपने पास बिठाया। चारु ने करन को कहा: नमस्ते अंकल जी।

करन उसे घूरता हुआ बोला: नमस्ते बेटी। बैठो । तो तुम्हारी अड्मिशन की बात है। लाओ पेपर दिखाओ।

चारु ने उसे पेपर दिए तो वो उसकी गोलाइयों को घूरकर पेपर देखा और बोला: बेटी तुम्हारा रिज़ल्ट तो बहुत अच्छा नहीं है। चलो फिर भी मैं कोशिश करूँगा । तुम ऐसा करना कि कल ३ बजे के आसपास कोलेज आ जाना। यही सामने में है कोलेज। मैं बात करूँगा कि कैसे तुम्हारी मदद कर सकूँगा।

राजीव: ठीक है भाई हम कल आ जाएँगे।

करन: अरे तुम क्या करोगे आ कर। मेरे पास ये पेपर हैं ना। इसको ही भेज देना मैं कर दूँगा जैसा भी बनेगा इसकी मदद।

राजीव: चलो ये ठीक है। और सुनाओ कैसा चल रहा है। तुम्हारा बेटा कहाँ है? दिखाई नहीं दे रहा है।

करन: अरे वो तो काम से मुंबई गया है ४/५ दिनों के लिए।

राजीव चौंका कि इसका मतलब है कि बहू का पति है ही नहीं घर में । फिर साड़ी और ब्लाउस के मुड़े हुए निशान? ओह तो क्या करन भी अपनी बहू से मज़ा कर रहा है? और ये तकिया इसलिए रखा होगा ताकि लंड का खड़ा हुआ रूप सामने ना आ जाए।लगता है कि साला मेरे जैसा ही कमीना है।

तभी उसकी बहू चाय लाई और राजीव ने देखा कि सच में ब्लाउस के ऊपर चूचि मसले जाने वाले निशान हैं । उफफफ क्या मज़ा कर रहा है ये साला करन? क्या मस्त उभरे हुए चूतर हैं इस लड़की के और चूचियाँ भी मस्त हो चली हैं। लगता है रेग्युलर खुराक लंड की मिल रही है। उसका लंड भी ये सोच कर गरम होने लगा। वो सोचा कि क्या कोई तरीक़ा हो सकता है करन से ये सब बात निकलवाने का। फिर उसे एकदम से याद आया कि दारू करन की हमेशा से कमज़ोरी रही है। अब वो बोला: बहु तुम चारु को अपने कमरे में ले जाओ और बातें करो । हम दोनों दोस्त भी कई दिनों के बाद मिलें हैं हम भी कुछ पुरानी यादें ताज़ा कर लेते हैं।

उन दोनों के जाने के बाद राजीव बोला: यार भाभी दिखाई नहीं देती।

करन: यार वो साधु संतों के चक्कर में पड़ी रहती है। अक्सर घर से ४/५ दिन बाहर रहती है।

राजीव: ओह तो बीवी और बेटा दोनों बाहर और तुम और बहू घर में। वाह भाई मज़े हैं तुम्हारे।

करन झेंपकर: अरे इसमें मज़े का क्या? और तुम सुनाओ तुम्हारे यहाँ क्या ख़बर है? और ये लड़की कौन है?

राजीव ने उसे बताया कि बहू माँ बनने वाली है और ये चारु बहू की कज़िन है।

राजीव: यार चलो आज शाम कहीं बैठते हैं। बहुत दिन हो गए तुम्हारे साथ दारू नहीं पी ।

करन : हाँ यार चलो आज बैठते हैं । शाम को रॉयल क्लब में आ जाना । मैं वहाँ एक टेबल बुक कर लूँगा।

राजीव: बस हम दोनों ही होने चाहिए और कोई नहीं।

करन: हाँ बस हम दोनों ही होंगे।

फिर इधर उधर की बातें करके शाम को मिलने का वादा करके राजीव और चारु अपने घर के लिए चल पड़े। रास्ते भर राजीव यही सोच रहा था कि आज करन को पिलाकर वो उसकी और उसकी बहू के रिश्ते का सच जान लेगा। और फिर चारु के लिए आगे की प्लानिंग करेगा। वैसे करन की बहू भी काफ़ी स्वीट है- वो अपना लंड मसल कर सोचा। अचानक उसने देखा कि चारु कनख़ियों से उसके हाथ को देख रही थी जो लौड़ा मसल रहा था। राजीव झेंप गया और हाथ हटा लिया।

चारु की आँख अंकल के पैंट के उठे भाग पर पड़ी और वो समझ गयी कि अंकल वैसे ही उत्तेजित हो गए हैं जैसे उसके टीचर हो जाया करते थे जब उसे छूते थे। वो इतना तो समझ रही थी कि अंकल कुछ सोचकर उत्तेजित हो रहे है। पर वो पक्के से नहीं कह सकती थी कि इसका उससे कोई वास्ता है या नहीं?

आख़िर ये सब क्या हो रहा है? और अचानक उसने देखा कि अंकल अब उस उठी हुई जगह को दबाने लगे। अब तो चारु की पैंटी भी गीली होने लगी। वैसे ही जैसे टीचर के पैंट के उभार को देखकर हो जाती थी,पता नहीं क्या होने वाला है।

तभी वो दोनों घर के पास पहुँचे और ऑटो से उतर कर घर की ओर चल पड़े।

घर आकर मालिनी को अकेले में पाकर राजीव बोला: बेटी ये करन भी साला बदमाश है। अपनी बहू को लगता है लगा रहा है। फिर उसने उसे पूरी बात बताई। और ये भी बताया कि आज रात को खाना उसके साथ ही खाएगा।

उसने अपने मन में चल रहे चारु के लिए संघर्ष की बात नहीं की। उसे ख़ुद समझ नहीं आ रहा था कि वो चारु के साथ क्या करे?

शाम को शिवा आया और राजीव बोला: बेटा आज मैं खाना बाहर करन के साथ खाऊँगा। मुझे चारु का अड्मिशन पक्का करना है। वो इस कोलेज का ट्रस्टी है।

शिवा : ठीक है पापा , आप घर की चाबी ले जाओ ताकि अगर लेट हो जाओ तो कोई दिक़्क़त नहीं होगी किसी को। चाहो तो कार भी ले जाओ।

राजीव: नहीं कार नहीं चाहिए । मैं टैक्सी से आऊँगा अगर ज़्यादा रात हो गयी तो।

राजीव चला गया और घर में सब खाना खाए और सोने चले गए। शिवा आज भी आयशा को चोद कर आया था तो चुपचाप सो गया।

 


उधर राजीव समय पर क्लब पहुँचा तो करन एक कुर्सी टेबल पर बैठा उसका इंतज़ार कर रहा था। दोनों ने थोड़ी देर गप्पें मारी और दारू पीने लगे। करन तीन पेग ले चुका था और राजीव ने अभी पहला पेग भी ख़त्म नहीं किया था। जल्दी ही करन नशे में बहकने लगा। टेबल एक कोने में थी और उनकी बात कोई सुन नहीं सकता था।

राजीव: यार क्या दिन थे वो भी जब हम साथ में लड़की पटाया करते थे। क्या मज़ा आता था?

करन: हाँ यार शादी के पहले काफ़ी मज़ा किए । है ना?

राजीव: हाँ यार । सही कहा। शादी के बाद बस एक खूँटे से बंध गए।

करन: यार तू बँधा होगा, मैं तो कभी भी मौक़ा मिले तो यहाँ वहाँ मुँह मार लेता था।

राजीव: सच में? भाभी को शक नहीं हुआ कभी?

करन: अरे अपना काम इतना सही होता था कि शक की कोई गुंजाइश ही नहीं होती थी। असल में कोलेज में नौकरी के लिए लड़कियाँ और औरतें आतीं थीं और उनको नौकरी में लेने के लिए मैं अपने आप को ख़ुश करने को कहता था। ज़्यादातर मान जाती थीं और ऑफ़िस के बग़ल में एक कमरे में ही मज़े से उनकी ले लेता था। सच कहता हूँ कि प्रभु की दया से कभी मस्त जवानियों की कमी नहीं हुई।

राजीव पूरा झूठ बोलते हुए कहा: यार बड़ी क़िस्मत वाला है तू। साला यहाँ तो बीवी से काम चलाकर उम्र गुज़ार दी।

करन: हाँ यार इस मामले में तो क़िस्मत वाला निकला पर ----

राजीव उसके उदास चेहरे को देखा और उसके लिए एक और पेग बनाया और कहा: यार उदास क्यों हो गया। सब कुछ तो है तेरे पास। इतना रुतबा , पैसा, बेटा और बहू । आख़िर क्या कमी है?

करन उदासी से बोला: बहुत बड़ी कमी है यार। मेरा बेटा – अब कैसे कहूँ--

राजीव: अरे बोल ना क्या हुआ उसे?

करन ने एक घूँट में पेग ख़ाली किया और बोला: यार वो वो गे है। साला गांडू है।

राजीव सन्न रह गया और बोला: तुझे कैसे पता?

करन : एक साल पहले एक बार मैं टूर पर गया था और प्लान से एक दिन पहले हो वापस आ गया था। पत्नी हमेशा की तरह साधु मंडली में गयी हुई थी। मैंने नौकर से पूछा कि बेटा कहाँ है? वो बोला कि ऊपर वाले कमरे में दारू की पार्टी चल रही है। मेरी दारू की बोतल लेकर उसके दो दोस्त शायद मज़े कर रहे हैं। मैं ग़ुस्से में ऊपर गया तो मुझे दरवाज़े से अजीब सी आवाज़ें सुनाई पड़ीं। मैं चुपचाप खिड़की से अंदर झाँका तो मेरे होश उड़ गए। मेरा बेटा पूरा नंगा था और एक लड़के का चूस रहा था और दूसरा उसके पिछवाड़े की बजा रहा था । उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ एक बाप के दिल पर क्या गुज़री होगी तुम सोच ही सकते हो। मैं चुपचाप वहाँ से नीचे आ गया।

राजीव: ओह ये तो बड़ी अजीब बात हुई। फिर क्या हुआ?

करन : अगले दिन मैंने उसे बहुत भला बुरा कहा और ये सब बंद करने को कहा। जानते हो वो क्या बोला?

राजीव: क्या बोला?

करन: वो बोला कि आप भी तो रोज़ नई लड़कियों और औरतों के साथ सब कुछ करते हो। अगर मैंने भी वो कर लिया जिसमें मुझे मज़ा आता है तो आपको क्या? मेरे बहुत समझाने पर भी वो अपनी आदत सुधारने को राज़ी नहीं हुआ। तो मैंने उसे एक बात कही कि वो शादी कर ले शायद इससे उसमें सुधार आ जाएगा। वो पहले मना करता रहा। पर आख़िर में मेरे और अपनी माँ के दबाव में वो मान गया। अब हम लोग उसके लिए बहू ले आए।

करन बातें करते हुए साँस लेने को रुका तो राजीव ने एक पेग और बना दिया।

राजीव: फिर क्या हुआ? वो सुधर गया?

करन: शादी के बाद सुहाग रात को मैं बहुत टेन्शन में था कि सब कुछ ठीक से हो जाए। मैंने अभी तक इसकी माँ को भी नहीं बताया था इसकी आदत के बारे में। मैंने पत्नी से कहा कि बहु से पूछो सब ठीक से हो गया रात को? पत्नी ने उसको पूछा और वो बोली कि ये तो आकर सो गए। मुझसे बात तक नहीं की।

राजीव: ओह ये तो बड़ी परेशानी वाली बात हो गयी। फिर?

करन: फिर मैंने बेटे से बात की। वो बोला कि मेरे मन में लड़की के लिए कोई उत्तेजना ही नहीं होती और मुझसे यह सब नहीं होगा। मेरे लाख समझाने का भी उसपर कोई असर नहीं हुआ। वो रात को ग़ायब हो जाता था। बहू अकेली सोती थी। वो अपनी आदतों से मजबूर था। इसी बीच बहू के मायके के फेरे का समय आने लगा। उस दिन मेरी पत्नी २ दिनों के लिए मंदिर गयी थी ।बेटा भी एक दिन से ग़ायब था। मैंने उसे फ़ोन किया तो वो बोला कि मैं रात को एक दोस्त के घर रहूँगा। मुझे बहुत अपराध बोध हुआ और मैं बहु के कमरे में गया। वह करवट लेकर सोयी हुई थी अभी रात के सिर्फ़ दस ही बजे थे। मैंने उसकी पीठ सहलायी और आवाज़ दी : निलू बेटा क्या सो गयी अभी से?

निलू सीधी हुई और उठने लगी। मैंने उसे कंधे से पकड़कर कहा: नहीं नहीं लेटे रहो बेटा। मैं तो बस यूँ ही तुमको देखने आ गया था। घर में कोई नहीं है हम दोनों के सिवाय।

वो चुपचाप पड़ी रही फिर बोली: पापा आपने इनकी शादी ज़बरदस्ती की थी क्या मेरे साथ? इनको कोई दूसरी लड़की पसंद है क्या?

मैं क्या बोलता कि इस साले को लड़का पसंद है लड़की पसंद ही नहीं है। मैंने कहा: नहीं बेटा ऐसी तो कोई बात नहीं है। एक बात पूँछ , हालाँकि मुझे पूछना नहीं चाहिए --क्या तुम दोनों का मिलन हुआ है या नहीं?

निलू मुँह उतारकर: पापा मिलना तो तब होगा जब ये मेरे पास आएँगे। ये तो जैसे मुझसे बचते हैं । पता नहीं मेरा क्या होगा? और वो ये कहकर रोने लगी। मुझे उसपर बहुत दया आइ और मैंने उसको चुप कराने की कोशिश की। और इस दौरान पता नहीं क्या हुआ कि वो मेरे बाहों में आ गयी और मैं उसे अपने से सटा कर चुप कराने लगा। उसकी १८ साल की ताज़ी जवानी ने मेरे दिल में पाप जगा दिया और मैं उसे अपने से लिपटा कर प्यार करने लगा। मैं उसे चूमने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी। अब मेरे हाथ उसके मस्त कड़े अमरूदों पर आ गए थे और मैंने उनको हल्के से दबाया और वो मस्ती से सी सी कर उठी। मुझे पता नहीं क्यों लगा कि ये ऐसी मस्ती पहले भी कर चुकी है। एक नयी लड़की और खेली खाई लड़की में अंतर करने की समझ तो मुझमें थी ही। अब वो मेरे होंठ वैसे चूस रही थी जैसे कोई अनुभवी चूसता है। मैं तो उसकी कसी जवानी के आभास से ही मदहोश हो चुका था । सो मैंने उसका ब्लाउस का हुक खोला और उसे उतार दिया। ब्रा में कसे उसके कड़े अमरूद देख कर मैं तो पागल सा हो गया। मैंने उनको ब्रा के ऊपर से ही दबाया और वो मस्ती से सिसकियाँ भर उठी। मैंने खींचकर उसे अपनी गोद में बिठा लिया और उसके ब्रा का स्ट्रैप खोकर उसकी नंगी मस्त गोल सख़्त चूचियों को दबाने लगा। उसके निपल्ज़ पूरे तन गए थे और मैंने उनको भी मसला और फिर उस लड़की ने मुझे हैरान कर दिया । उसने मेरा मुँह पकड़ कर अपनी चूचियों पर रख दिया और मानो बोल रही हो कि लो चूसो इनको। मैंने उनको बारी बारी से चूसना शुरू किया और वो मस्ती से आऽऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽपा चिल्लाने लगी। अब वो अपनी गाँड़ के नीचे मेरा खड़ा लौड़ा महसूस की और बोली: आऽऽऽऽऽह पापा आपका नीचे चुभ रहा है। और ये कहकर वो अपनी गाँड़ मटकाई और मेरे लौड़े को अपनी गाँड़ में ठीक से सेट करी।

राजीव अपना लंड दबाकर बोला: आऽऽऽऽऽऽह साली खेली खाई हुई थी। फिर क्या हुआ?

करन: फिर मैंने उसकी साड़ी और पेटिकोट उतारा और उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी चूची चूसते हुए नीचे जाकर उसकी पैंटी भी खोल दी। वो अपनी गाँड़ उठाकर उसे पूरी बेशर्मी से उतरवाई। अब उसकी मस्त चिकनी बुर देखकर मैं पागल सा होकर उसकी बुर चूमने और चाटने लगा। वो अपनी गाँड़ उछालकर उसे चटवा रही थी। अचानक वो बोली: आऽऽऽह पाआऽऽऽपा अब डाल दीजिए ना। मैं अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसने ध्यान से देखा और अपनी टाँग उठाकर फैला दीं । मेरा लंड औसत ६ इंच का है पर मोटा है। उसने उसे देखकर कोई हैरानी का भाव नहीं दिखाया। मैं भी उसकी टांगों के बीच आकर उसकी बुर खोला और उसमें अपना लंड डाला और धीरे से धक्का दिया। आधा लंड आराम से चला गया। वो उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ करके अपनी ख़ुशी जताई और अगले ही धक्के में वो पूरा लंड निगल गयी। फिर जो चुदाई शुरू हुई तो उसने बहुत मज़े से अपनी गाँड़ उछालकर चुदवाने लगी। मैंने कई लड़कियाँ इस उम्र की चोदीं थीं पर कोई भी इतना अनुभवी नहीं थी जितना निलू मेरी बहू थी। क़रीब आधा घंटा चुदाई के बाद वो चिल्ला कर झड़ने लगी और मैं भी अपना रस उसके अंदर डाल कर मस्ती से उसके बग़ल में लेट गया।

राजीव अपना लंड दबाकर: आऽऽह तो बेटे की जगह सुहागरात तुमने मना ली। वाह क्या बात है। फिर?

करन: फिर उस रात मैं उसे दो बार और चोदा। अब वो मुझसे खुल चुकी थी । मैंने उसे पूछा कि किसने तुम्हारा उद्घाटन किया है? तो वो बतायी कि उसके सगे मामे ने दो साल पहले उसकी बुर का उद्घाटन किया था वो मेरी ही उम्र का था। फिर उसके बाद उसे एक टीचर ने और बाद में उसके पापा के दोस्त ने भी चोदा था। उसकी चुदाई सभी बड़ी उम्र के आदमियों ने ही की थी। इसलिए उसे मुझसे चुदवाने में कोई परेशानी नहीं हुई। अब मैं उसे जब मौक़ा मिलता था चोद लेता था। वो मायके से फेरा लगाकर आयी और अपने पापा के दोस्त और मामा से भी चुदवा करके आयी। अब वो मुझसे कुछ नहीं छुपाती थी। एक दिन उसने मुझे बताया कि उसे पता चल गया है कि मेरा बेटा गे है क्योंकि उसने फ़ोन पर उसे किसी लड़के से बात करते हुए सुन लिया था। मैंने उसे कहा कि किसी से कहना नहीं। तो वो एक शर्त पर मानी कि वो जब चाहे अपने मामा या अंकल से चुदवा सकती है। मुझे उसकी बात माननी पड़ी। बस यही है मेरी कहानी। बताओ मैंने ठीक किया या नहीं?

राजीव: यार क्या बोलूँ ? मुझे तो लगता है की आपके पास कोई चारा ही नहीं था। वैसे सच में माल बहुत मस्त है तुम्हारी बहू ।

करन: वैसे जिस मस्त लौड़िया तो तुम लेकर आए थे वो भी माल है यार। मेरा तो दिल उस पर भी आ गया है।

राजीव: ओह ऐसा ? जहाँ तक मैं जानता हूँ चारु एक सीधी साधी लड़की है। अभी खेली नहीं है। मन तो मेरा भी करता है कि उससे मस्ती कर लूँ पर पता नहीं क्यों कर नहीं पता। थोड़ी सी झिझक होती है।

करन: ओह ऐसा क्या ? फिर क्या करोगे?

राजीव: तुम ऐसा करना जब वो कल अड्मिशन के लिए आएगी तो उसको थोड़ा सा परेशान करना। मौक़ा मिले तो कम नम्बर का डर दिखाकर हाथ भी फेर लेना। उसे थोड़ा जवानी का मज़ा चखा देना। चुदाई नहीं करना वरना बात बिगड़ सकती है। बस ऊपर से मज़ा ले लेना।

करन खिंसे निपोरा और बोला: ठीक है यार जैसा तुम कहो।

राजीव: वैसे तुम्हारी बहु से मस्ती करने का कोई चान्स हो सकता है?

करन: यार मैं नहीं जानता कि वो मानेगी या नहीं। पर हाँ तुम ट्राई मार सकते हो। अगर वो पट जाए तो मुझे कोई दिक़्क़त नहीं है। वैसे भी वो पूरे ज़माने से चुदवा ही रही है मामा से और अपने बाप के दोस्त से और पता नहीं किस किस से । तुम भी अगर मज़ा ले लोगे तो उसकी कौन सी बुर घिस जाएगी।

राजीव ने देखा कि करन को अब बहुत चढ़ गयी थी। वो बोला: चलो यार अब चलते हैं। बहुत देर हो गयी है।

अब दोनों बाहर आए और करन कार में बैठते हुए बोला: कल चारु को भेज देना यार । जैसा तुमने कहा है हो जाएगा।

वो चला गया और राजीव भी घर के लिए वक ऑटो कर लिया। रास्ते में वो सोच रहा था कि कल चारु के साथ पता नहीं क्या होगा?

 
घर पहुँचकर राजीव अपने कमरे में जाकर कपड़े बदला और फिर पता नहीं क्यों या शायद नशे की वजह से वो लड़कियों के कमरे की ओर गया। वो खिड़की से पर्दा हटा कर झाँका और देखा कि दोनों बहने सो रही हैं। मुन्नी की एक टाँग नींद में अपनी बहन की टाँग पर चढ़ी थी और इसी कारण उसका स्कर्ट ऊपर को हो गया था और उसकी मस्त दूधिया मांसल जाँघे और चूतर की गोलाइयाँ पैंटी से बाहर झाँकती दिख रही थीं। राजीव का लंड लूँगी में बड़ा होने लगा। फिर वो चारु को देखा और वो भी करवट सो रही थी। उसका गाउन भी ऊपर चढ़ गया था और उसकी भी जाँघें गदराई हुई साफ़ दिख रही थी। वो अपना लंड मसलता हुआ मालिनी के कमरे में गया और देखा कि वो और शिवा सो रहे थे

राजीव ने धीरे से मालिनी को हिलाया तो वो आँख खोली और बोली: पापा आप अभी आए क्या?

राजीव: हाँ तुम सो गयी थी क्या?

मालिनी: बस नींद आने ही वाली थी। कहिए क्या बात है?

राजीव उसका हाथ पकड़कर लूँगी के अंदर से अपना लंड पकड़ाकर बोला: बस बेटी ये तंग कर रहा है तो सोचा कि शायद तुम जाग रही होगी तो इसका कुछ कर दोगी।

मालिनी: शिवा, आप जाग रहे हो क्या?

शिवा: हाँ अभी नींद खुली है। बोलो क्या कहना है?

मालिनी: मैं पापा का यहाँ चूसूँ या उनके कमरे में चले जाऊँ?

शिवा: यहीं चूस लो अब तो मैं भी जाग ही गया हूँ।

राजीव वहीं बिस्तर पर अपनी लूँगी निकाल कर बैठ गया। वो पलंग के हेड रेस्ट से टिक कर बैठ गया। उसका लम्बा मोटा लौड़ा उत्तेजना वश ऊपर नीचे हो रहा था। अब मालिनी करवट ली और नीचे होकर उसके लौड़े को मुँह में लेकर तरीक़े से चूसने और चाटने लगी। शिवा उठकर बाथरूम गया और आकर बिस्तर पर बैठ कर अपनी बीवी को अपने बाप का लौड़ा चूसते देखने लगा। अब उसका लौड़ा भी खड़ा हो चुका था। उसने मालिनी का गाउन उठाया और उसकी गाँड़ की दरार में अपना लौड़ा फँसा दिया और रगड़कर मस्ती से आऽऽऽऽह करने लगा। वो मालिनी के मुँह को भी पीछे से देख रहा था जो पापा के लौड़े पर ऊपर नीचे हो रहा था। मालिनी की गाँड़ के छेद से उसका लंड बार बार घिस रहा था। मालिनी ने पति के लंड को अपनी जाँघों में फ़ाँसा और मज़े से गाँड़ और मुँह हिलाने लगी। क़रीब १५ मिनट के बाद दोनों बाप बेटा आऽऽऽऽऽऽह ह्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगे। मालिनी राजीवकी मलाई पूरी खा गयी। शिवा भी उसकी गाँड़ की दरार में रस छोड़ा और उठकर बाथरूम चला गया। राजीव ने वहाँ रखे तौलिए से मालिनी की गाँड़ पोंछी जहाँ शिवा का रस भरा हुआ था। तभी शिवा बाहर आया और बोला: पापा आप क्यों साफ़ किए ? मैं आकर साफ़ कर देता ना।

राजीव मुस्कुरा कर बोला: हमारी रानी बिटिया की गाँड़ गंदी थोड़े रहने देंगे।

इस पर सब हँसने लगे। फिर राजीव अपने कमरे में सोने चला गया।

अगले दिन राजीव ने शिवा को कार छोड़ने को कहा और कार में चारु को करन के कोलेज ले गया । आज चारु ने जींस की पैंट और टॉप पहना था। बड़ी ही मस्त दिख रही थी काले टॉप में। उसका दूधिया रंग मस्त खिल रहा था। वहाँ पहुँचकर वो बोला: बेटी वो तुमको अकेले बुलाया है। मैं सामने इसी कैंटीन में बैठा हूँ। तुम उसे ये ना बोलना कि मेरे साथ आयी हो।

चारु: ठीक है अंकल मैं उनके ऑफ़िस जाती हूँ। वो अपना फ़ोल्डर लेकर चली गयी। राजीव उसको जाते देखते रहा और उसकी जींस में कसी गोलाइयों को देखकर अपना लंड मसला और सोचा कि इस मासूम बिटिया का आज जीवन की सच्चाई से सामना होगा। वो जाकर कैंटीन में बैठ गया।

उधर चारु पहली बार अकेले इस तरह कोलेज में जा रही थी। वह पूछकर करन साहब के ऑफ़िस पहुँची और वहाँ जाकर एक आदमी से बोली: करन सर से मिलना है।

वो: आपोईंटमेंट है क्या?

चारु : हाँ हाँ बोलना चारु आयी है।

चपरासी अंदर गया और बाहर आके बोला: जाइए साहब बुला रहे हैं।

चारु अंदर गयी तो वहाँ करन एक सोफ़े पर बैठा था । ये ऑफ़िस रेग्युलर ऑफ़िस नहीं था। बल्कि एक ड्रॉइंग रूम जैसे था। करन को देखकर उसने नमस्ते की और वो उसके सामने वाले सोफ़े पर बैठ गयी। करन ने मुस्कुरा कर उसका स्वागत किया और बोला: बेटी अकेले आने में कोई परेशानी तो नहीं हुई?

चारु ने झूठ बोला: नहीं अंकल कोई परेशानी नहीं हुई।

उसके बाद करन ने उसे फ़ोल्डर दिखाने को कहा और वो उठकर फ़ोल्डर लेकर उसके पास आइ । वो बोला: बेटी यहीं पास में बैठ जाओ। वो उसके पास बैठ गयी। वो फ़ोल्डर देखने का नाटक किया और बोला: ऐसा करता हूँ इसे एक और ट्रस्टी के पास भेजता हूँ । देखें वो क्या बोलता है? फिर उसने चपरासी को घंटी बजाकर बुलाया और उसको फ़ाइल सतनाम साहब को देने को बोला। फिर वो सतनाम को फ़ोन लगाया और बोला: यार एक लड़की का फ़ोल्डर भेज रहा हूँ। उसके नम्बर थोड़े कम हैं । ज़रा उसका अड्मिशन मैनज्मेंट के कोटे से करना है । बहुत प्यारी बच्ची है और जान पहचान वाले की है। थोड़ा देख कर बताओ।

फिर वो चारु से बोला: देखो मैंने कह तो दिया है। ।देखते हैं क्या होता है?

चारु: थैंक्स अंकल ।

करन: वैसे बेटी एक बात बताओ कि तुम्हारे नम्बर कम क्यों आए हैं? पढ़ाई में ध्यान नहीं देती क्या?

चारु: नहीं अंकल ऐसा नहीं है। मैं तो सोच रही थी कि मेरे नम्बर काफ़ी अच्छे हैं। पता नहीं आप क्यों ऐसा कह रहे हैं कि नम्बर कम हैं?

करन: अरे बेटा कॉम्पटिशन बहुत बढ़ गया है। तुम्हारे नम्बर तो कम से कम २% कम हैं कट ऑफ़ से । चलो देखते हैं क्या हो सकता है? वैसे कोई BF का भी चक्कर है क्या?

चारु शर्मा कर: नहीं अंकल मेरा कोई BF नहीं है।

करन: ओह चलो सतनाम को बोल तो दिया है , थोड़ा इंतज़ार करो।

चारु मुँह उतार कर: ठीक है अंकल।

करन: अच्छा बेटी पढ़ाई के अलावा और क्या शौक़ है?

चारु: कुछ ख़ास नहीं अंकल बस मूवीज़ और म्यूज़िक का शौक़ है।

करन: डान्स का शौक़ भी तो होगा?

चारु: वो बस ऐसे ही थोड़ा बहुत शास्त्रीय डान्स सीखा है।

करन : वाह वाह बढ़िया। चलो कुछ हमें भी दिखाओ। मुझे कलाकार बहुत पसंद है।

चारु: पर सर यहाँ कैसे? कोई आ गया तो कितना अजीब लगेगा?

करन: अरे कोई नहीं आएगा। चलो मैं दरवाज़ा अंदर से बंद कर देता हूँ। जब तक सतनाम का फ़ोन आता है तुम अपना डान्स दिखाओ ना।

यह कहकर वो कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया और आकर सोफ़े पर बैठ गया।

चारु झिझकती हुई खड़ी हुई और वो कमरे के बीच में आकर खड़ी हुई और फिर ता ता थैया गाते हुए नाच दिखाने लगी। करन की आँखें उसके बदन से चिपकी हुई थी। वो कमीना कहाँ इस तरह के डान्स को समझता था। वो तो उसके बदन के एक एक उभार और कटाव को देखकर मस्ती से भर रहा था। उसके पैंट के ऊपर एक बड़ा सा उभार बन गया था।

जब डान्स दिखाकर वो हाँफते हुए रुकी तो उसकी छातियाँ ऊपर नीचे होकर ग़ज़ब का दृश्य प्रस्तुत कर रही थीं । अब करन उठा और जाकर चारु को दोनों बाहों से पकड़ा और बोला: वाह बेटी क्या शानदार पेरफोमेंस दिया तुमने । वह ये कहते हुए उसकी बाँह सहलाने लगा और उसकी उँगलियाँ साइड से उसकी चूचियों से रगड़ने लगीं। फिर वो उसके गालों को अपने दोनों हाथों में भर लिया और झुककर उसका माथा चूमा और बोला: वाह मुझे तुम्हें कुछ इनाम देना चाहिए। बोलो क्या दूँ?

चारु: जी जी मुझे कुछ नहीं चाहिए बस मेरा अड्मिशन करवा दीजिए।

करन उस पर झुका और उसके गाल चूम लिया और बोला: अरे वो तो हो ही जाएगा। मैं तुमको कुछ और भी देना चाहता हूँ। अब वो ये कहते हुए उसको अपनी बाहों में भरा और उसके कंधे चूमकर बोला: बहुत बड़ी कलाकार हो। मैं तुमको कोलेज में भी स्टेज में मौक़ा दिलाऊँगा अपने नृत्य प्रदर्शन का।

चारु के मन में एक दबी इच्छा थी कि वो कभी स्टेज में सबको अपना नृत्य दिखाए। वो बहुत ख़ुश होकर बोली: थैंक्स अंकल मुझे भी बहुत मन है स्टेज परफ़ोरमेंस का।

करन को उसकी कमज़ोरी का पता चल गया। वो बोला: वाह चलो ये बढ़िया हुआ। मैं तुम्हारे अकेले का प्रोग्राम रखाऊँगा कोलेज में। अब वो उसका हाथ पकड़कर सोफ़े पर बिठाया और उसका हाथ अपने हाथ में लेकर सहलाते हुए बोला: बेटी कुछ और भी मन में है तो बताओ। मैं तुम्हारी जैसी प्यारी सी बिटिया के लिए कुछ भी कर सकता हूँ।

चारु अनजाने में जाल में फँसती गयी और बोली: अंकल मैं बड़े लेवल पर अपना पर्फ़ॉर्मन्स दिखाना चाहती हूँ।

करन बड़े प्यार से उसके हाथ को सहलाता हुआ बोला: बेटी तुम चाहोगी तो मैं इस शहर के सबसे ऑडिटॉरीयम में तुम्हारा परेफ़ोरमेंस करवा दूँगा। वो उसके कंधे पर हाथ रखा और उसके कंधे और बाँह को सहलाने लगा।

चारु उत्तेजित होकर: सच अंकल? मैं बहुत प्रैक्टिस करूँगी और बहुत अच्छा प्रोग्राम दूँगी।

करन: बिलकुल बिटिया बहुत अच्छा प्रोग्राम देना । तुम्हारा तो बड़ा नाम होगा पर इस अंकल को क्या इनाम दोगी?

चारु: अंकल मैं भला आपको क्या दे सकती हूँ?

करन: अरे आओ मेरी गोद में बैठकर एक पप्पी ही दे दो। वो तो दे सकती हो ना ।

चारु शर्मा कर उठी और उसकी गोद में बैठ गयी। करन को विश्वास नहीं हुआ कि ये लड़की स्टेज की इतनी दीवानी है। वो उसको अपनी बाँह में भरा और उसके गाल चूमे और बोला: बेटी जब तुम बहुत बड़ी और सफल कलाकार हो जाओगी तो इस अंकल को पहचानोगी कि नहीं?

चारु : अंकल मैं आपकी हमेशा अहसानमंद रहूँगी।

अब वो उसके गाल चूमते हुए उसके कंधे कान और फिर नाक और आख़िर में उसके होंठ चूमा। चारु सिहर उठी। उसका यह पहला अनुभव था। वो थोड़ा सा झिझकी। पर करन तो उसके होंठ चूसे ही जा रहा था। अब चारु को अपने निपल्ज़ कड़े होते हुए महसूस हुए और वो आँख बंदकर अपने होंठ चूसवाने लगी। जब करन ने देखा कि चारु गरम हो रही है तो वो हिम्मत करके उसके एक दूध पर हाथ रखा और मानो उसे टटोला और उसके ब्रा के ऊपर से उसके निपल को हल्के से दबाया। अब चारु की सिसकी निकल गयी। करन का हौसला बढ़ा और वो उसकी एक चूचि हल्के से दबाने लगा। करन ने अपनी दोनों जाँघे सटाई हुई थी जिसमें उसका लंड फँसा हुआ था। अब वो अपनी जाँघें अलग किया और उसका लंड पैंट के ऊपर से तंबू बनाया। अब वो चारु की दोनों बग़लों में हाथ डाला और उसे ऊपर किया और फिर सीधे अपने लंड पर बिठा लिया। चारु को अपनी गाँड़ के नीचे एक कड़ी चीज़ का अहसास हुआ और वो जवान लड़की समझ गयी कि ये क्या हो सकता है? तभी बिना समय गँवाये करन उसकी दोनों चूचियाँ दबाने लगा आहिस्ते आहिस्ते से । अब चारु मज़े के सागर में डूबने लगी और अपनी आँख बंद कर ली। वो सोची कि उफफफफ क्या अहसास है? नीचे से तंबू अब उसकी जींस की दरार में घुसा जा रहा था और उसकी कुँवारी बुर में हलचल मचने लगी थी और वो मानो आँसू बहाने लगी थी। अब करन पीछे से उसका कंधा चूमते हुए उस मासूम लड़की को जवानी का पाठ पढ़ा रहा था।

 
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