• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

बहू नगीना और ससुर कमीना

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date


तभी दरवाज़े में खट खट हुई और चारु घबरा कर उसकी गोद से उठी और वो भी उठा और बोला: अरे बेटी घबराओ मत । देखता हूँ कौन है?

इसके बाद वो चारु के सामने बड़ी बेशर्मी से अपना खड़ा लंड ऐडजस्ट किया और चारु का चेहरा शर्म से लाल हो गया । वो उसकी ये हरकत को ग़ौर से देखी थी। फिर वो मुस्कुरा कर उसके गाल चूमा और जाकर दरवाज़ा खोला। सामने चपरासी खड़ा था और उसके हाथ में चारु का फ़ोल्डर था। वो बोला: आप सतनाम साहब से बात कर लो वो ऐसा बोले हैं।

चपरासी के जाने के बाद करन ने दरवाज़ा बंद कर दिया और आकर चारु के साथ सट कर बैठ गया और फ़ोल्डर खोला और फिर सतनाम को फ़ोन लगाया: हेलो हाँ भाई बोलो।

सतनाम: यार मैंने तो उसका अड्मिशन ओके कर दिया है। पर उसकी फ़ोटो देखकर मन डोल गया है। यार तू तो साला पक्का मज़ा ले रहा होगा। मेरा भी काम बना दें ना यार।

करन: यार ये भी कोई पूछने की बात है। तेरा भी काम बन जाएगा। थोड़ी ठंड रख अभी। अच्छा बाई और थैंक्स।

फिर वो चारु को प्यार से देखा और बोला: बेटी बधाई हो तुम्हारा अड्मिशन हो गया। देखो सतनाम ने साइन कर दिया और ये लो मैंने भी साइन कर दिया। ये कहकर वो भी साइन कर दिया। अब वो बोला: बधाई हो बेटी । आओ थोड़ा सा प्यार कर लें। ये कहकर वो उसे हल्के से अपनी गोद में खिंचा और वो चुपचाप आकर उसके लंड के ऊपर बैठ गयी। अब वो बिना हिचकिचाए उसके गाल चूमने लगा और उसकी चूचियाँ दबाने लगा । और हाँ इस बार उसने अपने हाथ का दबाव थोड़ा बढ़ा दिया था। और वो आऽऽऽऽह अंकल कर उठी। अब वो उसकी गाँड़ को अपने लंड पर दबा रहा था और गाल और होंठ चूसते हुए उसकी चूची मसल रहा था। चारु को लगा कि वो मस्ती से पागल हो जाएगी। उसकी पैंटी गीली होने लगी थी। अब वो आऽऽऽऽह करने लगी। उसे लंड की रगड़ जींस के ऊपर से अपनी गाँड़ और बुर में महसूस हो रही थी। ना चाहते हुए भी उसकी कमर हिलने लगी थी। उसे वो रगड़न बहुत मस्त लग रही थी। अब करन ने उसका टॉप उठाया और उसकी ब्रा के ऊपर से वो उसकी चूचियाँ दबाने लगा।

चारु ने अपना हाथ टॉप पर ले जाकर उसे नीचे कर दिया और बोली: आऽऽऽह अंकल नहीं कपड़े मत उतारिए। प्लीज़।

करन: बेटी मैंने उतारे कहाँ ? मैं तो सिर्फ़ थोड़ा ऊपर किया था। उसने फिर से टॉप को उठाया और उसकी चूचियाँ ब्रा के ऊपर से ही मसलने लगा। उफफफफ क्या अमरूद की तरह सख़्त चूचियाँ थीं । अब उसने एक हाथ नीचे लेज़ाकर उसकी बुर की जगह को जींस के ऊपर से ही पंजे में लेकर दबाना शुरू किया। वो मस्ती से अपनी कमर हिलाने लगी। अब करन ने उसकी जींस का जीप खोला और अपना एक हाथ उसकी ओपनिंग में डाल दिया। उसने सीधे एक ही झटके में अपना हाथ उसकी पैंट से होते हुए उसकी पैंटी के अंदर डाल दिया। अब उसका हाथ उसकी झाँटों से भरी बुर में चला गया। वो अपनी उँगलियों से उसकी झाँटें सहलाया और बोला: बेटी, बहुत झाँटें बढ़ा रखीं हैं? साफ़ नहीं करती क्या?

चारु शर्माकर: आऽऽऽऽह अंकल हाथ निकाल लीजिए ना प्लीज़ ।

करन: बस अभी निकाल लेता हूँ। आऽऽऽहहह कितनी गीली हो रही है तुम्हारी बुर। वो अपनी ऊँगली उसकी बुर में चला कर बोला : बेटी झाँटें साफ़ किया करो। तभी तो इसे प्यार करने का मज़ा आएगा। कैसे साफ़ करती हो?

चारु: आऽऽऽह अंकल कैंची से साफ़ करती हूँ। आऽऽऽहहह।

करन एक ऊँगली उसकी क्लिट पर चलाकर: बेटी, क्रीम का इस्तेमाल करो और बिलकुल चिकनी रखो तभी तो पूरा मज़ा आएगा जब मैं इसे प्यार करूँगा। ठीक है ना? अब वो भी अपना लंड उसकी गाँड़ में रगड़ने लगा और मस्ती से भर कर आऽऽऽऽह्हा बेएएएएएएएटी कहकर अपनी पैंट में झड़ने लगा।

चारु अपनी कमर हिलाकर: आऽऽऽऽऽऽहहह अंकल उइइइइइइइ हाऽऽवायययय । जीइइइइइइ ठीइइइइइइक है। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ।

तभी करन का पूरा हाथ भीग गया। जवान लड़की अपना फ़ौवारा छोड़ दी। अब करन ने अपना गीला हाथ बाहर निकाला और हाँफती हुई चारु को दिखाकर उसे चाटने लगा। चारु की आँखें हैरानी से फैल गयीं और वो बोली: छी ये आप क्या कर रहे हैं।

करन मुस्कुरा कर बोला: बेटी शहद चाट रहा हूँ। मस्त स्वाद है और क्या ख़ुशबू है। वैसे मेरी पैंट भी भीग गयी है। वो सामने से लंड के ऊपर से गीलापन दिखाकर बोला: बेटी मैं भी इसके सामने अपना ब्रीफ़ केस रख कर छिपाऊँगा। वो अपनी ऊँगली फिर से चाटा।

चारु: छी क्या कह रहे हैं? गंदी जगह की चीज़ गंदी ही होगी ना।

करन: बेटी ये तो स्वर्ग का द्वार है। ये कैसे गंदी हो सकती है। बस अगली बार तुम झाँटें साफ़ करना क्रीम से फिर देखकर कैसा मज़ा देता हूँ। यह कहते हुए उसने चारु की जींस की जीप बंद कर दी। चारु की जींस थोड़ी गीली हो गयी थी नीचे से जैसे उसने पिशाब कर दिया हो।

चारु: अंकल देखिए ना पूरी गीली दिख रही है। उफफफ लोग क्या सोचेंगे?

करन: अरे बेटी वो नीचे की तरफ़ है। खड़ी हो जाओ। देखो वो तुम्हारी जाँघों के बीच छिप गयी ना। बेकार परेशान हो रही हो।

फिर वो भी खड़ा हुआ और उसको अपनी बाँहों में भरकर बोला: बेटी सच बताओ। मज़ा आया कि नहीं?

चारु शर्माकर: आया तो पर अंकल यह ग़लत है। अब आप ऐसा फिर नहीं करिएगा। प्लीज़ ।

करन उसके होंठ चूमते हुए उसकी गोल गोल गाँड़ को जींस के ऊपर से दबाकर बोला: उफफफ क्या मस्त गाँड़ है। वैसे बेटी ये तो ट्रेलर था असली पिक्चर तो अभी बाक़ी है।

चारु अपने आप को छुड़ाती हुई बोली: उफफफ अंकल छोड़िए ना प्लीज़ । घर जाना है देर हो रही है।

करन: अच्छा लो अपना फ़ोल्डर । अब बताओ कब मिलोगी? तुम्हारे स्टेज शो की भी प्लानिंग करनी है ना? एक काम करो मोबाइल नंबर दे दो ताकि मैं प्रोग्राम की प्लानिंग करके तुमको बता दूँ।

फिर दोनों ने एक दूसरे के नम्बर शेयर किए। जाने से पहले करन ने एक बार और उसको पकड़कर चूमा और उसकी चूचियाँ और गाँड़ दबाकर कहा: बाई बेटी फिर मिलते हैं।

चारु बाहर आयी और उसने फ़ोल्डर अपनी बुर के सामने रखा ताकि उसकी गीली पैंट किसी को ना दिखे।

उधर उसके बाहर जाते ही करन ने राजीव को फ़ोन लगाया और कहा: भाई आपका काम हो गया। आज इस कुँवारी जवानी को मैंने सेक्स का पहला पाठ पढ़ा दिया है। फिर वो उसके साथ हुए पूरे घटना क्रम के बारे में उसे बताया। राजीव पूरा सुनकर बोला: तो वो झड़ गयी? वाह यार कमाल कर दिया। थैंक्स यार । मैं तुमसे बाद में बात करूँगा वो आती दिख रही है।

जब वो कैंटीन के पास पहुँची तो वहाँ उसे राजीव मिला और उसे देखकर वो बाहर आया और दोनों कार में बैठे। राजीव ने नोटिस किया था कि वो फ़ोल्डर को सामने रखकर कुछ छिपा रही है। उसे पता था कि वो क्या छुपा रही है। वो मन ही मन मुस्कुराया।

राजीव: बेटी अड्मिशन हो गयी?

चारु: जी अंकल हो गयी। थैंक्स ।

राजीव: मेरा दोस्त है ही ऐसा। उसने मदद की ना?

चारु का चेहरा करन की हरकतों को याद करके लाल हो गया और वो बोली: जी अंकल ने पूरी मदद की।

फिर मन में सोची और क्या क्या किया वो आपको कैसे बताऊँ?

राजीव उसको तिरछि निगाहों से देखते हुए बोला: अंकल अच्छे हैं ना?

चारु लाल होकर: जी जी अच्छे हैं। वो मुझे स्टेज पेरफ़ोरमेंस में भी मदद करेंगे। मैं क्लासिकल डान्स सीखी हूँ ना।

राजीव: वाह ये तो बढ़िया रहेगा । आज हमको भी घर में दिखाना अपना डान्स । ठीक है ना?

चारु: आज नहीं कल दिखाऊँगी। आज थक गयीं हूँ।

राजीव मुस्कुराया कि उँगलियों से झड़ कर ही इतना थक गयी हो। जब चुदाई होगी तो क्या करोगी?

वो मज़े से बात करते हुए घर पहुँचा ।

 
घर पहुँचकर सबसे पहले चारु कॉमन बाथरूम में गयी। उसके वाले बेडरूम में अटैच बाथरूम नहीं था । वो जाकर अपनी जींस और पैंटी उतारी । फिर उसने देखा कि दोनों भीगीं हुईं थीं। उसने उनको वॉशिंग मशीन में डाला और स्कर्ट और धुली पैंटी पहनकर वो बाहर आयी। राजीव की आँखें उसका पीछा कर रहीं थीं। वो समझ गया कि उसने कपड़े क्यों बदले है। वो उठकर उसी बाथरूम में गया और जाकर वॉशिंग मशीन में उसकी जींस और पैंटी को देखा और बाहर निकाल कर उसकी पैंटी की सामने की गीली जगह को सूँघा और मस्ती से सोचा कि आऽऽह क्या मस्त बास है। तभी उसने उसमें कुछ बाल लगे देखे तो वो समझ गया कि करन के हाथों ने जब छेड़ा होगा तो कुछ बाल टूट कर शायद गिर गए होंगे। वो नरम बालों को सहलाया और अपना खड़ा लंड दबाकर सोचा कि चलो काम शुरू हो गया है। अब वो बाहर आया और आकर मालिनी को खाना लगाने को बोला ।

खाना खाते हुए उसने चारु से पूछा: बेटी करन ने तुम्हें कुछ खिलाया कि नहीं ?

चारु: नहीं अंकल वो कुछ नहीं खिलाए। वो सोची बस सब जगह दबाए।

राजीव सोचा कि अब जल्दी ही वो तुमको लंड खिलाने के चक्कर में होगा। वो मन ही मन सोचा कि देखो ऊँट किस करवट बैठता है। मुन्नी बोली: दीदी कैसा कोलेज है। एक बार मुझे भी ले जाकर दिखाओ ना।

चारु: नहीं अभी नहीं । पहले मैं तो वहाँ कुछ दिन पढ़ लूँ फिर ले जाऊँगी। वो सोची कि मुन्नी को देखकर कहीं करन अंकल उसके साथ भी वो सब ना कर बैठें जो उसके साथ किए हैं।

खाना ख़त्म होने के बाद सब थोड़े देर टी वी देखे और फिर अपने अपने कमरे में आराम करने चले गए। बिस्तर पर पड़ी हुई चारु उन लमहों को फिर से जीने लगी जो करन अंकल के साथ उसने कुछ घंटे पहले बिताए थे। उफफफ क्या जादू था अंकल के हाथों में। उसने देखा कि मुन्नी सो गयी थी । उसका हाथ अपनी चूचियों पर चला गया और वो उनको दबाने लगी। फिर वो याद की कैसे अंकल ने उसकी पैंटी में हाथ डालकर उसे पागल कर दिया था। उसका हाथ अपनी पैंटी में चला गया और वो अपनी उँगलियाँ बुर पर चलाने लगी। अब उसकी घुटी हुई सिसकियाँ निकलने लगीं और वो अपनी गाँड़ हिलाकर मस्ती से सी सी करके झड़ने लगी। जो उसे पता नहीं था वो ये था कि उसकी इस हरकत का एक दर्शक भी था जो खिड़की से झाँक कर उसकी जवानी का मज़ा ले रहा था। राजीव ने भी अपना लौड़ा लूँगी से बाहर किया हुआ था और सड़का मार रहा था। वो भी उस कुँवारी जवानी के मस्ती में झड़ते हुए बदन को देखता हुआ ख़ुद भी अपने हाथ में झड़ गया। उसने अपना रस लूँगी में ही पोछा और मुस्कुरा कर बाथरूम में चला गया।

उस दिन और कुछ ख़ास नहीं हुआ। अब वो अपनी योजना का अगले लेवल का सोचा और अपनी आलमारी से एक पुराना फ़ोन निकाला और उसमें एक नया सिम कार्ड डाला और फ़ोन चालू करके उसमें कुछ नंगी फ़ोटो डाली । उन फ़ोटो में सिर्फ़ लड़की के नंगे अंग दिख रहे थे जिसे मर्द चूस या चाट रहे थे। ताज़ा जवान हुई कमसिन लड़की के अमरूद और चिकनी बुर का मज़ा लेते हुए मर्द और उनके बड़े लौड़े चूसती हुई लड़कियाँ उन फ़ोटो में थीं । उसने ये फ़ोटो चारु के फ़ोन में भेज दीं। ये उसकी योजना का अगला पड़ाव था। वो सोचा कि अगर चारु ने शिकायत की तो इसका मतलब होगा कि वो अभी पूरी तरह तय्यार नहीं है। और अगर वो चुप रही तो मामला आगे बढ़ाया जाएगा।

चारु सोकर उठी तो मोबाइल चेक की। वो फ़ोटो देखकर चौंक गयी। उफ़्फ़्फ़क कितनी गंदी फ़ोटो थीं । उसका फ़ोन मुन्नी भी इस्तेमाल करती थी इसलिए वो फ़ोटो को कई बार अच्छे से देखी और बड़े बड़े लौड़े देखकर वो डर सी गयी। फिर उसने फ़ोटो डिलीट कर दी। उसे अपनी पैंटी में फिर से गीलापन महसूस हुआ और उसके निपल्ज़ की घुंडियाँ भी तन गयीं। वो सोची ये किसका काम हो सकता है? शायद करन अंकल का? तभी उसको करन अंकल का मेसिज आया और उन्होंने लिखा: कैसी हो प्यारी बिटिया? तुम्हारी याद आ रही है। और हाँ बाल साफ़ करना मत भूलना। मैं तुम्हारे स्टेज पर्फ़ॉर्मन्स की डेट तय करने वाला हूँ। अच्छी तरह से प्रेक्टिक्स कर लो।

चारु ने लिखा: जी अंकल। थैंक्स।

करन: मुझे याद कर रही हो या नहीं?

चारु: अंकल आज तो आपसे मिली ही थी।

करन: अरे बेटी मेरा मतलब है आज जो मैंने तुमको प्यार किया वो मिस कर रही हो कि नहीं?

चारु: अंकल प्लीज़ ये सब मत लिखिए मुझे शर्म आ रही है।

करन: अच्छा चलो बाई। और हाँ ये मेसिज डिलीट कर देना। और हाँ बाल साफ़ ज़रूर कर लेना।

चारु: जी अंकल कर लूँगी। बाई।

चारु ने सोयी हुई मुन्नी को देखा और वह अपने हाथ से अपनी पैंटी के ऊपर से अपनी बुर को खुजा बैठी । उफफफफ ये उसे क्या होता जा रहा है? ये करन अंकल भी कितनी बेशर्मी से मुझे नीचे के बाल साफ़ करने को बोल रहे हैं। आऽऽऽऽह मुझे तो पता नहीं कि क्रीम भी कहाँ से लाऊँगी। फिर वो सोची कि मालिनी दीदी को पूछती हूँ।

शाम को मालिनी जब किचन में चाय बना रही थी तो चारु उसके पास खड़ी उसकी मदद कर रही थी। उसने मौक़ा देखा और पूछी: दीदी, आजकल मुझे नीचे खुजाल मचती है। क्या करूँ?

मालिनी: अच्छा ऊपर या अंदर?

चारु: दीदी ऊपर ही। शायद बाल ज़्यादा हो गए हैं । वो शर्मा कर बोली।

मालिनी मुस्कुराई और बोली: इसमें शर्माने की क्या बात है। मेरे बाथरूम में वीट क्रीम है। कल सुबह नहाने के पहले लगा लेना और थोड़ी देर बाद रुई से पोंछ लेना। सब बाल निकल जाएँगे और तुम्हारी वो मस्त चिकनी हो जाएगी। वैसे अभी तक कैसे करती थी?

चारु: दीदी कैंची से छोटे कर लेती थी। पर अब ज़्यादा ही बढ़ गए हैं।

मालिनी मुस्कुरा कर बोली: चलो कोई बात नहीं कल साफ़ कर लेना।

फिर चारु सबके लिए चाय लाई। राजीव की आँखें चोरी छुपे उसकी जवानी को तौल रही थी। वो बोला: और चारु सब ठीक है? अब करन से कब मिलोगी? वो तो स्टेज पर्फ़ॉर्मन्स की बात कर रहा था ना?

चारु सोचने लगी कि क्या क्या मेसिज भेज रहे हैं ? बाल काटने वाला? उफफफ अंकल भी ना। वो बोली: हाँ , पर मुझे भी तो प्रैक्टिस करनी होगी। दीदी यहाँ कोई क्लासिकल डान्स सिखाता है क्या?

राजीव: हाँ बेटी मैं एक गुरुजी को जानता हूँ। वो सिखा देगा तुमको। यही पास में रहता है।

चारु ख़ुश होकर: ठीक है अंकल प्लीज़ बात कर लीजिए ना उनसे । मैं सीख लूँगी और मेरी प्रैक्टिस भी हो जाएगी।

राजीव मन ही मन में सोचा कि हाँ बिलकुल प्रैक्टिस होगी पर सिर्फ़ डान्स की नहीं और भी चीज़ों की। वो बोला: हाँ हाँ क्यों नहीं बेटी, बात करके बताता हूँ।

बाद में राजीव ने अपने कमरे में जाकर अपने दोस्त सतीश से बात की : हाय सतीश, वो तेरी बहु को डान्स सिखाता था ना वो एक गुरु जी? उसका नम्बर है क्या?

सतीश: अरे वो साला बड़ा कमीना है। बहु को डान्स सिखाने के बहाने वो उसको छेड़ने लगा। बहू ने शिकायत की तो बेटे ने जाकर उसकी पिटाई कर दी।

राजीव: यार थोड़ा अर्जेन्सी है उसका नम्बर दे दे । मैं ख़ुद वहाँ मौजूद रहूँगा तब तो वो बिटिया के साथ गड़बड़ नहीं कर पाएगा ना?

सतीश: हाँ ये ठीक रहेगा। मैं अभी नम्बर भेज देता हूँ।

राजीव ने नम्बर मिलने के बाद गुरुजी को फ़ोन किया: गुरुजी मैं राजीव बोल रहा हूँ। मुझे अपनी भतीजी को क्लासिकल डान्स सिखाना है। आपसे कब मिलूँ?

गुरुजी: आप कल सुबह आ जायीये । बच्ची की उम्र क्या होगी?

राजीव: यही १८ के आसपास।

गुरुजी: ओह ठीक है आप ले आइए।

राजीव ने ठीक है कहकर फ़ोन रख दिया।

सुबह से चारु उठी तो करन का मेसिज आया हुआ था: GM बेबी कैसी हो? रात को मुझे मिस की क्या? और हाँ आज बाल साफ़ ज़रूर कर लेना।

वो सोची कि क्या अंकल हैं । हर समय मेरे बालों के पीछे पड़े रहते हैं। वो लिखी: GM जी साफ़ कर लूँगी।

शिवा के दुकान जाने के बाद वो मालिनी के बाथरूम में गयी और वहाँ से वीट क्रीम लेकर आयी और बाथरूम में घुस गयी। फिर उसने मालिनी के कहे अनुसार अपनी झाँटें साफ़ की। नहाते हुए वो अपनी बुर सहलाई और महसूस करी कि सच में कितनी चिकनी लग रही है। फिर वो नहा कर बाहर आइ।

 
उधर राजीव क़रीब १० बजे गुरुजी से मिलने अकेले ही गया और उसके घर के सामने पहुँचकर घंटी बजाया। गुरुजी ने दरवाज़ा खोला। वो एक ४५ साल का हट्टा कट्टा आदमी था। उसने बनियान और धोती पहनी थी। उसने ड्रॉइंग रूम को ही क्लासरूम बनाया हुआ था। वहाँ सब वाद्य यंत्र रखे थे।

राजीव: गुरुजी नमस्कार। मैं ही राजीव हूँ।

गुरुजी: आइए बैठिए । जब दोनों बैठ गए तो राजीव पूछा: गुरुजी आप यहाँ अकेले रहते हैं?

गुरुजी: हाँ जी अकेला रहता हूँ। पर मेरी एक सहयोगी महिला है जो १० बजे से शाम के ६ बजे तक रहती है। वो मुझे बच्चों को सिखाने में सहयोग देती है। वो अभी आती ही होगी।

राजीव: हमारी बिटिया ने डान्स सीखा हुआ है उसे बस प्रैक्टिस कराना है ताकि वो स्टेज पर्फ़ॉर्मन्स से सके।

गुरुजी: हाँ हाँ क्यों नहीं । मेरे सिखाए कई बच्चे बहुत नाम कमायें हैं।

राजीव हल्की सी आवाज़ में बोला: वैसे मैंने सुना है कि आप लड़कियों को डान्स के साथ और बहुत कुछ सिखाते हैं। ये कहते हुए उसने आँख मारी।

गुरुजी: क्या क्या मतलब? ये क्या कह रहे हैं आप?

राजीव: वो सतीश बता रहा था कि उसकी बहू के साथ आप कुछ ग़लत काम किए थे?

गुरुजी: नहीं नहीं वो लड़की ही बदमाश थी। वो मुझे फँसाना चाहती थी, जब मैंने मना किया तो मुझे ही बदनाम कर दिया।

राजीव उठते हुए : ओह तब तो आप मेरे किसी काम के नहीं। असल में मैं चाहता था कि आप बिटिया को डान्स भी सिखाए और जवानी का पाठ भी पढ़ाएँ। पर आप तो शायद इसके लिए तय्यार नहीं हैं । कोई दूसरा ढूँढता हूँ।

गुरुजी: अरे अरे ऐसा नहीं है । अगर आप चाहते हो तो सब हो जाएगा। हे हे ।

राजीव वापस बैठा और बोला: ध्यान से सुनो मैं चाहता हूँ कि आप उसको डान्स के साथ थोड़ा छेड़ो भी। उसके अंगों से खेलो और उसको गरम करके मज़ा दो जवानी का पर उसकी चुदाई नहीं करना। वरना मैं तुम्हारा सत्यानाश कर दूँगा। समझे?

गुरुजी: अरे जैसा आप चाहोगे वैसा ही होगा। पर मुझे क्या मिलेगा?

राजीव: तुमको मैं काफ़ी पैसा दूँगा और मज़ा भी तो लोगे कमसीन जवानी का?

दोनों हँसने लगे तभी एक औरत अन्दर आयी । उसने साड़ी पहनी थी और स्लीव्लेस ब्लाउस पहना था। उसकी आधी चूचियाँ नंगी दिख रही थी। साथ ही पूरी पीठ भी नंगी थी। साफ़ लगता था कि बहुत आधुनिक महिला है। वह झुकी और गुरुजी के पैर छुए और राजीव के सामने उसकी बड़ी सी गाँड़ आ गयी। वो उफफक कर उठा। अब उसने राजीव को भी नमस्ते किया।

राजीव समझ गया कि ये औरत इसकी साथी है उलटे सीधे कामों में। वो उठते हुए बोला: तो मैं कब लाऊँ बिटिया को?

वो मुस्कुराकर बोला: ४ से ५ शाम को भीड़ नहीं रहती मैं बिटिया का स्पेशल ध्यान रख सकूँगा।

राजीव: ठीक है मैं शाम को लेकर आता हूँ। वैसे भी ये जगह हमारे घर से बिलकुल पास है। फिर वो उस महिला को घूरते हुए चला गया।

घर पहुँचकर वो चारु को ख़ुशख़बरी सुनाया और कहा: बेटी शाम को ४ से ५ एक घंटे की ट्रेनिंग होगी। ठीक है ना?

वो ख़ुशी से: जी अंकल। जब तक कोलेज नहीं खुलेगा मैं ट्रेनिंग लेती रहूँगी।

उस दिन फिर से राजीव ने अश्लील फ़ोटो भेजे। पर उसने एक भी फ़ोटो चुदाई का नहीं भेजा था। चारु मस्ती में आकर बाथरूम में टोयलेट की सीट पर बैठी और फ़ोटो देखकर गरम होती रही। फिर उसने मोबाइल से सभी फ़ोटो डिलीट कर दिया । फिर वो बाहर आयी और आने के पहले अपनी गीली बुर को खुजाई।

दोपहर को फिर से करन का मेसिज आया: क्या कर रही हो?

चारु: बस खाना खाया अभी।

करन: बाल साफ़ किए या नहीं?

चारु के गाल गुलाबी हो गए । उफ़्फ़्फ़क क्या अंकल हैं बस एक ही सवाल बार बार? वो: जी हाँ कर लिया।

करन: वाउ ।मस्त चिकनी हो गयी होगी? आऽऽहाह मेरा मन कर रहा है अभी मैं तुम्हारे पास आ जाऊँ और तुम्हारी चिकनी बुर को चूम लूँ।

चारु: छी क्या कह रहे हैं? पर उसे लगा कि ये पढ़ कर ही वो गरम हो गयी थी। फिर उसके आँखों के आगे वो फ़ोटो घूम गयीं जिसने आदमी एक लड़की की बुर चाट रहा था। उफफ क्या सच में करन अंकल वैसे ही उसकी बुर चाटेंगे। हे भगवान ये सोच कर ही मेरी बुर कितनी गरम हो गयी है।

करन: चलो बाई ।

चारु: बाई। चारु का हाथ अपनी बुर पर चला गया और वो वहाँ खुजाने लगी।

उधर राजीव ने करन को फ़ोन किया और पूछा: कहाँ तक बात आगे बढ़ी चारु के साथ?

करन : आज तो उसने मेरी बात मान कर अपनी झाँटें साफ़ कर ली। आप फ़ोटो भेज रहे हो ना जैसे बात हुई थी।

राजीव: हाँ वो बड़े चाव से देख रही है। आजकल वो टोयलेट में थोड़ा ज़्यादा ही समय लगाती है।

करन: बस अब आप बोलो क्या करना है?

राजीव: अब वो एक गुरुजी से डान्स सीखेगी और मज़े भी लेगी। तब तक आप इंतज़ार करो। फिर उसका डान्स पर्फ़ॉर्मन्स करेंगे । यही ठीक रहेगा। चलो रखता हूँ ।

तभी बहुत ज़ोर से गिरने की आवाज़ आयी । वो बाहर आया और देखा किमुन्नी फिसलकर ज़मीन में गिरी हुई थी और उसका स्कर्ट ऊपर हो गया था और उसकी पैंटी दिखाई रही थी। हमेशा की तरह चारु टोयलेट में फ़ोटो देख रही थी और मालिनी शायद सो रही थी। राजीव ने देखा कि मुन्नी की स्कर्ट पूरी ऊपर हो जाने से उसकी पैंटी दिखाई दे रही थी जो शायद ढीली थी पुरानी होने के कारण । क्योंकि उसकी जाँघें अलग अलग पड़ी थीं इसलिए वो एक साइड में हो गयी थी। वहाँ से उसकी बुर की एक फाँक और थोड़े से घुंघराले बाल साफ़ दिखाई दे रहे थे। राजीव की हालत ख़राब होने लगी ऐसा मादक दृश्य देखकर। फिर उसे होश आया कि बच्ची गिरी हुई है तो वो मुन्नी को प्यार से उठाया और वो चिल्लाई: आऽऽऽं दर्द हो रहा है।

राजीव ने उसको अपनी गोद में एक छोटे से बच्चे की तरह उठा लिया उसका एक हाथ उसकी गोरी जाँघों के नीचे था और दूसरा हाथ उसकी बग़लों के बीच में था और उसके मस्त अमरूदों से टकरा रहा था। वो उसको ले जाकर बिस्तर पर लिटाया और बोला: कैसे गिर गयी बेटी?

मुन्नी: वो अंकल जी फिसल गयी थी ना।

राजीव उसकी जाँघों को सहलाकर कहा: कहाँ दुःख रहा है बेटी?

मुन्नी अपने घुटने के ऊपर छू कर बोली: यहाँ दर्द हो रहा है।

राजीव अपना हाथ ले जाकर उसके घुटने के ऊपर से उसकी जाँघ को दबाने लगा। राजीव मस्ती से भर गया । उफफफ क्या चिकनी मस्त जाँघें हैं ।वह स्कर्ट उठाया और पैंटी को घूरते हुए उसकी जाँघ सहलाते हुए पैंटी को छुआ और बोला: यहाँ भी दर्द हो रहा है क्या?

मुन्नी: नहीं इसके नीचे।

तभी उसे किसी के आने की आवाज़ आयी और चारु कमरे में आयी और मुन्नी को देखकर बोली: क्या हुआ?

तब मुन्नी ने उसे पूरी बात बताई और वो मूव क्रीम लाकर उसकी जाँघ में लगाकर उसे आराम देने लगी। फिर राजीव ने आख़री बार उसकी मस्त जाँघों को देखा और कमरे से बाहर आते हुए बोला: मुन्नी बेटा अब आराम है ना?

मुन्नी : जी अंकल ।

फिर वो बोला: चारु, अब एक घण्टे में हम गुरुजी के पास जाएँगे। तय्यार रहना।

चारु: जी अंकल।

राजीव अपने कमरे में आया और सीधे बाथरूम में गया और आज बहुत दिनों के बाद मुन्नी की फाँक याद करके मूठ्ठ मारने लगा। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या गोरी बुर थी जिसके अंदर की गुलाबी पंखुड़ी भी थोड़ी सी दिखी थी। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कहकर वो ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा। तभी नरम नरम बाल उसकी आँखों के सामने आए और वो झड़ने लगा। वो हाँफते हुए सफ़ाई किया और आकर बिस्तर पर लेता और गुरुजी और चारु के बारे में सोचने लगा।

 
friends mujhe lagta hai ye kahani mujhe ab update nahi karni chahiye kyonki bahut kam user is kahani par aakar honsala badhate hain
 
चार बजे के कुछ पहले राजीव तय्यार होकर ड्रॉइंग रूम में आया तभी चारु भी बाहर आयी । वो उसे देखता ही रह गया। नीले टॉप और नीली जींस में वह बहुत प्यारी लग रही थी। राजीव: अब मुन्नी का दर्द कैसा है?

चारु: ठीक है अंकल । अब चलें?

राजीव बोला: हाँ चलो। वो जानबूझकर उसके पीछे पीछे चलने लगा ताकि उसकी छोटी गोल गोल गाँड़ जो जींस से चिपकी हुयी थी,को देखने का मज़ा ले सके। राजीव यह भी सोच रहा था कि उसने आज पहली बार आदमी के लंड सहलाती हुई लड़की का फ़ोटो भी भेजा है। ज़रूर इसको पसंद आया होगा।

क्योंकि गुरुजी का घर पास ही था तो वो पैदल ही निकले और वहाँ पहुँचकर राजीव ने घंटी बजाई। दरवाज़ा थोड़ी देर बार गुरुजी ने खोला। उनका चेहरा लाल सा था। राजीव सोचा लगता है कुछ मज़ा ले रहा था ये।गुरुजी की आँखें चारु की कमसिन जवानी को मानो तौल सी रही थी। राजीव सोचा कि साला बड़ा ठरकी लगता है। चारु ने उसके पैर छुए और वो उसकी नंगी बाहों से उसे पकड़कर उसे उठाया और उसके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। फिर तीनों ड्रॉइंग रूम में बैठे और तभी वो औरत आयी । गुरुजी ने उसका नाम रुचि बताया। अब राजीव बोला: गुरुजी ये नृत्य सीखी हुई है। बस थोड़ी सी आप प्रैक्टिस करा दीजिए ताकि स्टेज पर बढ़िया पर्फ़ॉर्मन्स दे सके।

गुरुजी: बेटी, चलो कुछ नृत्य कर के दिखाओ। हम भी देखें कि कितना सीखी हुई हो?

चारु झिझकी फिर खड़ी हुई और अपना नृत्य दिखाने लगी। उसकी टॉप में फँसे अमरूद जब ऊपर नीचे होते तो दोनों मर्दों के हाथ बरबस ही अपने लंड पर चले जाते। उसकी गाँड़ का मटकना भी उनको मदहोश किए जा रहा था। फिर वो हाँफते हुए रुकी तो गुरुजी बोले: बेटी बहुत शानदार। पर अभी तुमको बहुत कुछ और भी सीखना है। ठीक है ना?

चारु: जी गुरु जी।

गुरुजी: बेटी चलो मैं नृत्य करता हूँ तुम मेरी नक़ल करो।

अब गुरुजी नृत्य करने लगे और चारु उनकी नक़ल करने लगी। राजीव की आँखें चारु के ऊपर नीचे होते हुए स्तनों से हट ही नहीं पा रही थी। अब गुरुजी चारु को बोले: बेटी तुम जब आगे झुकती हो तो तुम्हारे पैर ठीक से नहीं फैलते । चलो मैं सिखाता हूँ।

अब वो उससे चिपक कर उसके पीछे खड़ा हुआ और चारु को आगे की ओर झुकने को बोला। जैसे ही चारु झुकी उसकी गाँड़ पीछे को होकर गुरुजी के आगे के हिस्से से चिपक गयी। वो हल्का हल्का हिलने लगा और राजीव ने साफ़ देखा कि वो अपना लौड़ा उसकी गाँड़ में रगड़ रहा था चारु को भी वहाँ कुछ कड़ा सा अहसास हुआ। उधर रुचि राजीव को देखी और आँख मार दी। वो भी मुस्कुराया और अपना लंड एडजस्ट किया जिसे रुचि ने बड़े प्यार से देखा। वो अब अपने साड़ी का पल्लू गिरा दी थी ताकि राजीव उसके आधे नंगे बूब्ज़ देख सके। उधर अब गुरुजी उसकी बग़ल में हाथ डालकर उसको एक पैर पर घूमना सिखा रहे थे और ये करते हुए उसके हाथ उसके सख़्त अमरूदों से बार बार छू रहे थे। इस तरह की गुरुजी की हरकतों से चारु गरम होने लगी।

फिर गुरुजी आकर सोफ़े में बैठे और रुचि से बोले: अब तुम इसको सिखाओ।

राजीव ने गुरुजी को मुस्कुरा कर कहा: आपने बड़े अच्छे से सिखाया।

उधर रुचि अब अपनी साड़ी का पल्लू बांधी और उसकी दोनों चूचियाँ बाहर को निकली हुई साफ़ दिखाई से रही थी। वो चारु के सामने खड़ी हुई और उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ चारु के अमरूदों से टकरा रहे थे। अब वो उसके दोनों हाथों को पकड़कर अपनी कमर हिलाकर नाचने लगी। चारु भी अपनी कमर उसके साथ हिलाने लगी। कहाँ चारु की पतली कमर और छोटी सी मस्त गाँड़ और कहाँ रुचि की मोटी कमर और बड़ी सी गाँड़। उफफफ क्या दृश्य था । दोनों नाचे जा रहीं थी।

फिर जब वो रुकी तो राजीव और गुरुजी खड़े होकर ताली बजाए। तब रुचि ने गुरुजी के पाँव छुए और गुरुजी ने उसको अपनी बाहों में भींचकर कहा: शाबाश बहुत अच्छे । रुचि की बड़ी बड़ी चूचियाँ गुरुजी के चौड़े सीने में मानो मसली जा रही थी। उसकी देखा देखी चारु भी गुरुजी के पाँव छुई और गुरुजी ने उसे भी अपनी बाँह में भींच लिया। चारु के अमरूद मानो उनके चौड़े सीने में धँस गए। आज पहली बार वो किसी मर्द की बाँह में आयी थी। पिछले दिनों से कुछ नंगी तस्वीरों का भी असर उसपर होने लगा था। उसे गुरुजी का कड़ा बदनबहुत आनंद दे रहा था। अब रुचि राजीव के भी पाँव छुई तो राजीव हैरानी से गुरुजी को देखा तो वो उसे आँख मार दिया। राजीव ने भी गुरुजी की देखा देखी उसको अपने से चिपका लिया और उसकी बड़ी बड़ी छातियों को अपने सीने से दबाकर मस्त हो गया।

अब चारु भी रुचि की नक़ल करते हुए राजीव के पैर छुई और अब राजीव ने उसको भी पहली बार अपनी बाहों में लपेट लिया और उसके सख़्त अमरूदों को अपनी छाती पर महसूस करके अपना लौड़ा खड़ा कर बैठा। उसकी पैंट से उभरा हुआ लौड़ा चारु की नाभि में धँसने लगा था। वो वहाँ अपने पेट पर उसके कड़ेपन का अहसास करके हैरानी से अंकल को देखी। वो उसको देखकर मुस्कुराए और बोले: वाह बिटिया क्या नृत्य किया है। तुम तो स्टेज में आग लगा दोगी। यह कहकर राजीव उसकी पीठ सहलाया और उसके ब्रा के स्ट्रैप को सहलाया और फिर धीरे से उसे अलग किया। चारु पीछे हुई और कनख़ियों से उसके पैंट के उभार को देखी और अब उसको कोई शक नहीं था कि वो अंकल का लिंग ही था। उफफफ कितना बड़ा लग रहा है। जब राजीव ने देखा की वो छिपी निगाह से उसके लौड़े को देख रही है तो वो अपने लौड़े को पैंट के ऊपर से दबा दिया। अब चारु की आँखें फैल गयीं और वो शर्माकर अपना चेहरा घुमा ली।

गुरुजी की तेज़ आँखों से ये मंज़र बच नहीं सका।

वो बोला: चलो थोड़ा सा ब्रेक ले लो फिर बाक़ी की प्रैक्टिस करते हैं। रुचि बोली: चलो मैं आप सबके लिए चाय लाती हूँ। वो अपनी बड़ी गाँड़ मटकाती हुई चली गयी। अब चारु को राजीव ने अपने पास बिठाया और वो बैठी और दोनों मर्दों के बीच में आ गयी। गुरुजी ने उसकी एक जाँघ पर हाथ रखा और उसे ऊपर नीचे सहलाते हुए बोले: बेटी तुममें अद्भुत प्रतिभा है। बस थोड़ा मेहनत करोगी तो बहुत आगे तक जा सकती हो। अब राजीव भी उसकी दूसरी जाँघ सहलाने लगा और बोला: बेटी मैं आज बहुत ख़ुश हुआ तुम्हारे अंदर का कलाकार देख कर। वाह क्या नाचती हो। शाबाश ।

चारु की दोनों जाँघें जींस के ऊपर से दोनों मर्द सहलाते जा रहे थे और उसको चने के झाड़ पर चढ़ाते जा रहे थे। चारु दोनों की बातों से बहुत ख़ुश हो रही थी और उनके हाथ भी उसे मस्त कर रहे थे। तभी गुरुजी ने अपना हाथ ज़रा ज़्यादा ही ऊपर लेकर उसकी जाँघों के जोड़ तक ही ले गए। चारु का बदन काँप उठा। राजीव ने इसे नोटिस किया । अब जब गुरुजी का हाथ घुटने की तरफ़ गया तो वह ख़ुद अपना हाथ उसकी जाँघों के जोड़ तक ले गया। एक बार फिर से वो सिहर गयी। अब बारी बारी से दोनों उसकी बुर के पास तक अपना हाथ ले जा रहे थे और बातें भी करते जा रहे थे।

तभी रुचि एक ट्रे में चाय लाई और सबको चाय देने लगी। दोनों मर्दों ने उसके आने के बाद भी उसकी जाँघों को सहलाना चालू रखा। चारु की पैंटी गीली होने लगी थी। उफ़्फ़्फ़क ये दोनों क्या कर रहे हैं। अब वो उठी और रुचि को बोली: आंटी बाथरूम कहाँ है?

रुचि ने इशारा किया और वो चली गयी। अब रुचि बोली: आप दोनों तो इस बेचारी के पीछे हाथ धो कर पड़ गये हैं।

तब गुरुजी मुस्कुरा कर बोले: चलो वो चली गयी है अब तुम्हारे पीछे पड़ जातें हैं। यह कहकर वो उसकी एक गाँड़ दबाने लगे और बोले: राजीव जी रुचि के बदन का ये हिस्सा सबसे सेक्सी है। आपका क्या ख़याल है?

राजीव हँसकर उसकी दूसरी गाँड़ दबाता हुआ बोला: हाँ ये सच है। वैसे भी ये भी बहुत मस्त हैं। वो उसकी चूचि दूसरे हाथ से दबाकर बोला। इस पर सब हँसने लगे।

उधर चारु बाथरूम में जाकर अपनी जींस और पैंटी नीचे की और अपनी बुर पर हाथ फेरी तो उसके गीलेपन से वो हैरान हो गयी। फिर वो मूतने लगी और बाद में साफ़ करने बाहर आयी।

जैसे ही वो बाहर आने लगी तो उसको कुछ आवाज़ें सुनाई दीं। वो चुपचाप उस दरवाज़े के झिरी से झाँकी और वो हैरान होकर देखी कि दोनों मर्द रुचि की गाँड़ और चूचियाँ मसल रहे थे। वो भौंचक्की रह गयी और उसकी आँखों ने सामने वो नंगी तस्वीरें आ गयीं जिनमे ये सब दिखाते हैं। रुचि ने भी हाथ बढ़ाकर राजीव के लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ा और दबाकर हँसने लगी। अब चारु के लिए ये सब बर्दाश्त के बाहर हो गया तो वो खाँसी और बाहर आयी। उसके आने की आवाज़ सुनकर सब सामान्य अवस्था में आ गए।

वो बाहर आयी और आकर सामने के सोफ़े में बैठी और चाय पीने लगी। सब चाय पी रहे थे।

गुरुजी चाय पीने के थोड़े देर बाद बोले: चलो अब प्रैक्टिस शुरू करें?

चारु जी कहकर खड़ी हुई। अब वो उसे बोले: बेटी अब मैं तुमको कुछ मुद्राएँ बताऊँगा तुम उनकी नक़ल करना। अब वो बहुत कठिन कठिन स्टेप्स लेने लगे जो चारु नहीं कर सकी। वो फिर उसके हाथ को पकड़ना अपने से सटा कर उसको मुद्राएँ सिखाने लगे। अब उसके बदन का एक एक हिस्सा चारु के बदन को रगड़ रहा था। चारु की गाँड़ उसकी धोती के सामने के हिस्से से , उसकी पीठ उसकी छाती से और उसके हाथ उसकी कमर पर थे। वो बार बार उसका पेट और कमर सहलाता था। राजीव ने देखा कि उसके हाथ अब सिखाने के बहाने उसकी चूचियों को भी बार बार छू जाते थे। राजीव ने उत्तेजनावश अपने पैंट के ऊपर एक तकिया रखा और फिर अपने बग़ल में बैठी रुचि का हाथ पकड़कर तकिए के नीचे डाल दिया। रुचि भी मोटे लंड को सहलाकर मस्ती से दबाने लगी।

नाचते हुए अचानक चारु का पैर फिसला और वो गिरने लगी। उसे बचाने के लिए गुरुजी लपके और उनके दोनों हाथ उसके अमरूदों पर आ गए और वो उसे दबाकर पकड़े और चारु को गिरने से बचा लिया। चारु की आऽऽऽऽऽह निकल गयी। अब वो सीधी खड़ी हुई पर गुरुजी के हाथ मानो वहाँ चिपक से गए थे। उधर अचानक चारु की निगाह तकिए के नीचे चल रहे अभियान पर पड़ी तो वो समझ गयी कि रुचि अंकल का लंड सहला रही है। वैसे है जैसे आज की फ़ोटो में देखा था। उसे दुगुना मज़ा आ रहा था। एक तो गुरुजी उसके अमरूद दबा रहे थे दूसरे अंकल रुचि से अपना लंड दबवा रहे थे। अचानक उसे होश आया और वो बोली: गुरुजी अब छोड़िए मैं अब नहीं गिरूँगी। गुरुजी झेंप कर उसके अमरूद से हाथ हटाए। रुचि ने भी हाथ निकाल लिया।

अब चारु गरम हो गयी थी वो बोली: आज के लिए इतना ही काफ़ी है। बस अंकल अब घर चलते हैं।

फिर वो दोनों बाहर आए तो रास्ते में राजीव पूछा: बेटी वो गुरुजी का हाथ तुम्हारे वहाँ ( वो उसके अमरूदों की ओर इशारा करते हुए) लग गया था इसलिए तुम घबरा गयी क्या?

चारु शर्म से लाल होकर बोली: नहीं अंकल वो तो – वो तो – मुझे गिरने से बचाने के किए उनका हाथ वहाँ चला गया था।

राजीव: बेटी थोड़ा सा ज़्यादा देर पकड़े रहे। ज़ोर से दबाया तो नहीं ना?

चारु ने शर्म से सिर झुकाकर कहा: नहीं अंकल ।

राजीव: अरे बेटी क्या होता है ना, कभी ज़ोर से दबा तो इनमे दर्द भी होता है। मेरे ख़याल से तुम्हारा कभी किसी ने दबाया नहीं है। कोलेज में बच कर रहना , लड़के बहुत बदमाश होते हैं। ज़ोर से भी दबा देते हैं।

अचानक चारु के मुँह से निकल गया: जैसे आप और गुरुजी आज रुचि आंटी का दबा रहे थे?

राजीव हैरानी से: क्या कह रही हो बेटी?

चारु: मैंने बाथरूम से सब देखा था।

अब राजीव सकपका कर: वो तो हम उससे मज़ाक़ कर रहे थे। बस ऐसे ही।

चारु: अंकल मैंने सब देखा है कि आप दोनों क्या क्या कर रहे थे?उसका सब कुछ दबा रहे थे और वो तकिया वाला भी देखा है।

अब राजीव थोड़ा बेशर्म हुआ और बोला: देखो बेटी , वो रुचि ख़ुद ही मेरा पकड़कर दबा रही थी तो मैं क्या करता। पर एक बात बोलूँ प्लीज़ ये सब मेरी बहू से मत कहना , वरना वो मेरे बारे में क्या सोचेगी?

चारु राजीव के नाटक को नहीं समझ पायी। वो चाहता था कि इसी बहाने सेक्स की बातें होती रहें और चारु सोचे कि वो उसे कंट्रोल कर रही है।

चारु: पर अंकल आप ऐसे क्यों किए? आप इतने बड़े आदमी हैं , कितनी बदनामी हो सकती है आपकी?

राजीव भोला सा बन कर: सच कह रही हो बेटी। पर एक बात बताऊँ तुम किसी से कहना नहीं, ठीक है?

चारु: नहीं कहूँगी।

राजीव उसको दिखाकर अपने पैंट के ऊपर से लंड को दबाकर बोला: बेटी जब ये तंग करता है तो इंसान को कुछ नहीं दिखता। तुम तो जानती हो कि मेरी बीवी का देहांत हुए कई साल हो गए हैं। और ये प्यासा है इसलिए जब इसे रुचि सहलाने लगी तो मुझे बहुत मज़ा आया। प्यासे को जैसे पानी मिल गया हो।

चारु बड़ी अजीब सी स्तिथि में पड़ गयी थी क्योंकि वो बात को कहाँ से कहाँ ले गया था और अब उसको अपना लंड दबाकर भी दिखा रहा था। ये तो अच्छा था कि रास्ता सुनसान था वरना उफफफ क्या हाल होता। चारु की बुर फिर से पनियाने लगी। ब्रा के अंदर उसके निपल भी कड़े हो गए थे। वह अब चुपचाप चलती रही।

राजीव फिर बोला: लगता है बेटी नाराज़ हो गयी है। अच्छा अब मैं उस रुचि को अपना लण्ड कभी नहीं पकड़ने दूँगा, अब तो ठीक है ना?

राजीव ने जान बुझ कर लंड शब्द का इस्तेमाल किया था। चारु यह सुनकर स्तब्ध रह गयी कि अंकल ये कैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं? वो बोली: जी जी ठीक है।

राजीव: और बेटी उसकी चूचियाँ और गाँड़ भी नहीं दबाऊँगा।

चारु को लगा कि वो शर्म से गड़ जाएगी। उफ़्फ़ ये अंकल उसके साथ ये कैसी बातें कर रहे हैं? वो बोली: गुरुजी भी तो ते सब कर रहे थे। कितनी अजीब बात है?

राजीव: बेटी दुनिया में कोई आदमी इस सबसे अछूता नहीं है और ना ही कोई औरत। अब गुरुजी को ही लो। वो इतने अच्छे कलाकार हैं पर हैं तो आदमी ना। आज जब ग़लती से तुम्हारी चूचियों पर उनका हाथ पड़ गया तो उनको वहाँ से हाथ हटाने का शायद मन ही नहीं कर रहा था। इसी लिए बड़ी देर तक पकड़े रहे। शायद बहुत मज़ा आ रहा होगा उनको?

चारु अब सन्न रह गयी की अंकल कैसी बातें कर रहे हैं और ये चूचियाँ शब्द जैसे हथोड़े सा लगा उसको। स्कूल में वो ये सब शब्द सुन चुकी थी और उनको वो गंदे शब्द मानती थी।

उसके मुँह से निकला : ओह ।

राजीव बोले जा रहा था: और जहाँ तक रुचि की बात है , वो भी तो एक भरीपूरी औरत है। अभी तक शादी नहीं हुई है। उसको भी मज़ा लेने का मन करता होगा। वो भी मेरी तरह बेचारी प्यासी होगी। शायद गुरुजी अपनी प्यास उससे बुझाते होंगे । तुम समझती हो ना प्यास बुझाने का मतलब?

चारु शर्म से लाल होकर: अंकल घर आ गया। और वो अपनी गाँड़ हिलाते हुए भागती हुई घर में घुस गयी।

राजीव मुस्कुराया और सोचा कि आज की घटनाएँ सही दिशा में जा रही है। वो अपना लंड मसल दिया।

 
राजीव घर आके अपने कमरे में गया। चारु सीधा बाथरूम में गयी और वहाँ जाकर मोबाइल खोली और अपनी जींस नीचे की और पैंटी भी नीचे खिसकाई और फ़ोटो देखते हुए अपनी बुर में ऊँगली करने लगी। उसका हाथ कभी कभी अपने निपल पर भी चला जाता था और फिर बुर में वापस चला जाता था। जल्दी हो वह सिसकियाँ भरते हुए झड़ने लगी। राजीव और गुरुजी की हरकतों और बातों ने उसको बहुत उत्तेजित कर दिया था और अब झड़ कर वो शांत हो गयी थी। फिर वो अपने कमरे में जाकर लेट गयी।

उधर राजीव को भी चैन नहीं था। वो लूँगी पहन कर मालिनी के कमरे पहुँचा। मालिनी करवट के बल लेटी हुई थी और गर्भवती होने के कारण उसकी गाँड़ काफ़ी चौड़ी लग रही थी। वह आकर उसके पास बैठा और उसके गाल पर हाथ फेरा और दूसरा हाथ गाँड़ पर फेरा। मालिनी ने आँख खोली और बोली: ओह पापा आप ? कब वापस आए? चारु की ट्रेनिंग ठीक रही?

राजीव: हाँ बहू ठीक रही। तुम्हारी तबियत कैसी है? अब डॉक्टर को कब दिखाना है? वो उसकी गाँड़ दबाकर उसे चूमते हुए बोला।

मालिनी: पापा अभी कोई ज़रूरत नहीं है। अगले महीने बुलाई है।

अब वो सीधी हुई और उसकी नज़र राजीव की लूँगी में बने तंबू पर पड़ी तो वो उसको पकड़कर बोली: पापा ये क्यों खड़ा है? कुछ चाहिए क्या इसे?

राजीव: बहू तुम तो अपने छेद बंद कर दी इस बिचारे के लिए। अब ये क्या करे?

मालिनी: पापा चूस दूँ क्या? बस यही छेद खुला है इसके लिए।

राजीव: हाँ बहू प्लीज़ चूस दो बहुत गरम हो गया है तुम्हारी गाँड़ देखकर? वो झूठ बोला क्योंकि उसकी गरमी का कारण तो चारु की कमसिन जवानी थी।

मालिनी: चलिए लूँगी खोलिए और यहाँ बैठिए। वो उठती हुई बोली। राजीव ने लूँगी खोली और उसका लौड़ा बाहर ऊपर नीचे हो रहा था। मालिनी ने बड़े प्यार से उसे सहलाया और फिर उसे चूमने लगी । अब वो उसे जीभ से पूरी लम्बाई में चाटी और फिर चूसने लगी। राजीव दोनों पैर फैला कर बैठे हुए उसके सिर को अपने लौड़े पर ऊपर नीचे होते देख रहा था। अब वो उसे डीप थ्रोट देने लगी और उसके बड़े बॉल्ज़ भी सहलाने लगी। जल्दी ही राजीव आऽऽऽऽऽह करके अपना रस उसके मुँह में छोड़ने लगा जिसे वो पीती चली गयी। फिर उसने जीभ से उसका लौड़ा चाटकर साफ़ किया और उठकर बाथरूम में चली गयी। राजीव थोड़ी देर उससे बात किया और फिर आकर अपने कमरे की ओर जाने लगा। तभी अचानक वो रुका और चारु के कमरे के सामने आकर खिड़की के परदे से अंदर झाँका। अंदर चारु पेट के बल सो रही थी और उसकी स्कर्ट ऊपर तक चढ़ कर उसकी गदराई जाँघों का दर्शन करा रही थी। मुन्नी सीधी लेटी थी और उसकी स्कर्ट से उसकी पैंटी साफ़ दिख रही थी। पैंटी पुरानी थी इसलिए शायद इलास्टिक ढीला सा हो चुका था। इसलिए जाँघ और पैंटी के गैप से उसकी बुर दिखाई पड़ रही थी। राजीव अपने कमरे में गया और बाईनाकुलर यानी दूरबीन लेकर आया और मुन्नी की पैंटी पर फ़ोकस किया। उफफफफ उसकी फाँक और रोएँ से बाल साफ़ दिख रहे थे। क्या माल है ये लड़की भी- वो सोचा। उधर अचानक चारु ने नींद में अपनी पैंटी के ऊपर से अपनी बुर खुजाई। पता नहीं लड़की क्या सपना देख रही थी। उसकी पैंटी भी अब दिखने लगी। फूली हुई बुर उसकी भी पैंटी से उभरी हुई मस्त लग रही थी।

राजीव मुस्कुराकर अपने कमरे में चला गया। उफफफफ क्या मस्त माल है दोनों- वो सोचा।

शाम को वो बाहर घूमने चला गया। जब वो वापस आया तो चारु ड्रॉइंग रूम में बैठी किताब पढ़ रही थी। उसके दोनों पैर ऊपर थे और जुड़े हुए थे। राजीव बाहर ही परदे के पीछे रुक गया और अंदर झाँकने लगा। अचानक चारु अपनी टाँगें खोली और अपनी बुर को पैंटी के ऊपर से खुजायी। और फिर से किताब पढ़ने लगी। पर वो जाँघों को फैली ही रहने दी। उसे क्या पता था कि कोई उस पर नज़र रखे हुए है। राजीव ने देखा कि इसकी पैंटी भी पुरानी थी और ढीली भी थी। उफफफफ इसकी भी बुर की फाँकें दिख रही थीं और बुर बिलकुल चिकनी थी बिना बाल के। वो समझ गया कि ये सब करन की बातों के कारण हुआ है। वो ही इसको बाल साफ़ करने को कहा था। तभी मालिनी और मुन्नी की बातें करने की आवाज़ें आयीं किचन से।

अब राजीव अंदर आकर चारु के पास बैठा और धीरे से बोला: बेटी, अपनी दीदी को सब कुछ बताया तो नहीं ना?

चारु ने ना में सिर हिला दिया।

राजीव: बेटी अच्छा किया। वो बेकार में दुखी होती। मेरी बहू बहुत अच्छी है।

चारु: पर अंकल आप ऐसा काम करते ही क्यों हैं?

राजीव ने अपनी पैंट के ऊपर से अपने लंड को दबाकर कहा: बेटी जब ये खड़ा होता है ना, तब आदमी को सही ग़लत की समझ नहीं रहती। अब तुम्हारे पास तो ये है नहीं, तुम क्या समझोगी?

मालिनी का चेहरा शर्म से लाल हो गया। वो बोली: छी अंकल आप कैसी बातें करते है?

राजीव: बेटी इसमें ग़लत कुछ भी नहीं है। वैसे जब इसमे ( उसकी बुर की ओर इशारा करके )खुजली होती है ना,तब लड़की को भी कुछ ग़लत नहीं लगता। सही कहा ना?

चारु: उफ़्फ़ अंकल आपसे बात करना मुश्किल है। वो यह कहकर खड़ी होने लगी। तभी वहाँ मालिनी और मुन्नी चाय लेकर आए। वो वापस से बैठ गयी। सबने चाय पीते हुए गप्पें मारी।

शिवा के आने के बाद सब ड्रॉइंग रूम में ही इकठ्ठे थे और तभी शिवा बोला: चारु इतना डान्स सीख रही हो कुछ हमें भी करके दिखाओ।

सबके ज़ोर देने पर वो खड़ी हुई और डान्स दिखाने लगी। क्योंकि उसने स्कर्ट पहनी थी इसलिए जब वो झुकती या घूमती तो स्कर्ट उठ जाती और शिवा और राजीव उसकी पैंटी और गदराई जाँघें देखकर मस्त हो जाते। शिवा ने भी नोटिस किया कि कैसे पैंटी से उभरी हुई बुर और फाँकें अलग से बहुत सेक्सी लग रही थीं। वो समझ गया कि आज उसे मालिनी से अपना लौड़ा चूसवाना ही पड़ेगा ।राजीव उसकी पैंटी से बाहर आती गोरी गाँड़ का भी दीवाना हो चला था। उसकी गठिली चूचियाँ भी उछाल मार रही थीं।

डान्स ख़त्म होने के बाद सबने तालियाँ बजायीं और फिर खाना खाने के लिए उठ गए।

खाने के बाद सब अपने अपने कमरे में चले गए और राजीव ने आज चुदाई की तस्वीरें चारु के मोबाइल पर भेजीं। उधर मुन्नी सो गयी थी और जैसे ही फ़ोटो आयीं चारु धीरे से उठकर ड्रॉइंग रूम में आकर बैठी और मोबाइल चालू कर देखने लगी। वो सोची कि कहीं मोबाइल की रौशनी से मुन्नी जग ना जाए। अब आज की तस्वीरें तो सिर्फ़ चुदाई की ही थीं। वो उसे देखकर गरम होने लगी।

उधर राजीव अपने कमरे से ये सोचकर निकला कि शायद बिस्तर में पड़ी लड़की फ़ोटो का मज़ा ले रही होगी । पर जैसे ही वो बाहर आने लगा वो रुका क्योंकि ड्रॉइंग रूम में रौशनी सी दिखाई दी। अब वो देखा कि चारु मोबाइल में देख रही है और उसने अपनी स्कर्ट उठाई और अपना हाथ पैंटी के अंदर डाल दिया। उसका हाथ ऊपर नीचे हो रहा था याने कि उसकी उँगलियाँ अंदर बाहर हो रही थीं। उफफफफ कमसिन जवानी की ये अदा राजीव को अंदर तक गरम कर गयी और वो लूँगी से अपना लौड़ा बाहर निकालकर इस अनोखे मादक दृश्य का आनंद लेने लगा। उधर चारु अब मोबाइल को देखते हुए उसे सोफ़े के एक हाथ पर रखा और दूसरा हाथ अपनी चूचि पर रखकर निपल मसलने लगी। एक हाथ बुर पर और दूसरा चूचि पर ज़्यादा देर नहीं रख पाई और घुटी हुई चीख़ निकालकर वो झड़ने लगी। राजीव चुपचाप सब देख रहा था और उसके मुँह पर मानो एक विजयी मुस्कान थी। वो सोने चला गया।

 
अगली सुबह गुरुजी का फ़ोन आ गया कि मैं बाथरूम में गिर गया हूँ और पैर की हड्डी टूट गयी है इसलिए अब ट्रेनिंग नहीं हो पाएगी।

राजीव चारु को ये बात बताने के लिए उसके कमरे में गया और वहाँ वो मोबाइल पर कुछ देख रही थी। वो जाकर बिस्तर पर उसके पास बैठ गया। अभी चारु नायटी ही में थी। वो उसे गुरुजी वाली बात बताया। ये सुनकर चारु उदास हो गयी। तब राजीव उसकी बाँह सहलाकर बोला: बेटी मेरी करन से बात हो गयी है । वो बोला है कि कोलेज खुलने के दस दिन बाद ही तुम्हारा एक स्टेज परफ़ॉरमेंस करा देगा।

चारु का रंग फिर से खिल गया, वो बोली: सच अंकल, फिर कोई बात नहीं। वैसे भी मुझे सब पहले से ही आता है। मैं घर में ही प्रैक्टिस कर लूँगी।

राजीव उसके पैर सहला कर बोला: बेटी जब तुम इनको हिलाकर नाचती हो तो बहुत अच्छा लगता है।

चारु: थैंक यू अंकल। उसे अंकल का खुरदरा हाथ अपनी चिकनी टाँग पर भला लग रहा था।

राजीव: बेटी आज करन के यहाँ चलें क्या? उसके साथ आगे का प्रोग्राम बनाते हैं।

चारु उत्साह से: हाँ चलिए ना प्लीज़।

राजीव उसके पैर को आख़री बार सहलाते हुए बोला: ठीक है बेटी । मैं बताता हूँ।

बाहर आकर राजीव अपने कमरे में आया और करन को फ़ोन लगाया। उसने गुरुजी वाली बात बताई और बोला: यार ये अब गरम होने लगी है। मेरी फ़ोटो और तुम्हारे sms अपना काम कर रहे हैं। अब आज मैं इसको लाता हूँ तेरे घर। तू इसको और गरम करना और मैं तेरी बहू का ध्यान रखूँगा। क्या कहता है यार?

करन: देख यार जहाँ तक चारु का सवाल है मैं उसे सम्भाल लूँगा और रही बात मेरी बहू कि तो वो तुझे ख़ुद ही पटानी होगी।

राजीव: ठीक है तो हम ११ बजे तक आते हैं। बाई।

राजीव ने नाश्ता करते हुए चारु से कहा: बेटी ११ बजे चलना है करन के यहाँ।

शिवा: पापा आप तो इसको बड़ी कलाकार बना कर हो मानोगे।

मुन्नी: अंकल मैं भी चलूँ आप दोनों के साथ?

राजीव के लंड ने झटका मारा, पर इसके पहले वो कुछ बोलता चारु बोली: तू वहाँ बोर हो जाएगी। हम तो काम की बातें करेंगे। वो सोची कि शायद आज करन अंकल उसके साथ कुछ मज़ा करेंगे। मुन्नी अगर वहाँ हुई तो बात नहीं बन पाएगी। आख़िर सेक्सी फ़ोटो और मेसजेज़ का असर तो हो रहा था उसकी खिलती जवानी पर।

मालिनी: मुन्नी तुम उदास नहीं हो । हम कोई अच्छी सी मूवी देखेंगे। ठीक है? मुन्नी ने हाँ में सिर हिला दिया।

समय पर राजीव एक तंग जींस और टी शर्ट और स्पोर्ट्स शू पहन कर बाहर आया तो मालिनी बोली: पापा आज तो आप मस्त माल दिख रहे हो। जी करता है आपको खा जाऊँ।

राजीव हँसकर मालिनी के गाल चूमा और उसकी गाँड़ दबाकर बोला: बस अब जल्दी से तुम माँ बनो और वापस से चुदवाना शुरू करो। ये उपवास बड़ा मुश्किल है झेलना।

तभी चारु बाहर आयी और राजीव अलग होकर उसे देखा। वो एक मस्त टाइट टॉप पहनी थी और स्कर्ट भी घुटनो से बहुत ऊपर थी। उफफ क्या मस्त जवानी थी उसकी । पता नहीं मालिनी को क्यों लगा कि ये लड़की ज़्यादा दिन नहीं बचेगी इस शिकारी से जो उसका ससुर है।

ख़ैर राजीव और चारु घर से निकले और राजीव उसके पीछे चलता हुआ उसकी गाँड़ से चिपकी पैंटी की लकीरें देख रहा था। वो उसकी छोटी गोल गोल गाँड़ देखकर सोच रहा था कि जल्दी ही उसके हाथ इन नंगी गोलाइयों पर होगा। उसका लंड ये सोचकर अकड़ने लगा। थोड़ी दूर पर एक ऑटो वाला आकर रुका। उसमें पहने से एक मोटी महिला बैठी थी। और कोई ऑटो ना देखकर वो दोनों मजबूरन उसी में बैठे। चारु उस महिला के बग़ल में जा बैठी और राजीव किनारे में चारु के साथ बैठा। जगह कम होने के कारण चारु को अपनी एक गाँड़ राजीव की जाँघ पर रखनी पड़ी। राजीव ने भी भरपूर फ़ायदा उठाया। जब भी ऑटो स्पीड ब्रेकर पर उछलता वह चारु को कमर से लपेट लेता और उसके गोरे नंगे पेट को सहला देता। वह उसके नरम बदन के अहसास से भी मस्ती से भर गया था।

जब वो करन के घर पहुँचे तो करन ने उनका स्वागत किया। करन राजीव के गले मिला और चारु को भी अपने पास खींचकर उसके गाल चूम कर उसे प्यार किया मानो वो एक जवान लड़की नहीं बल्कि छोटी सी बच्ची हो।

जब ये बैठ गए तब करन की बहु आयी और आकर राजीव को नमस्ते की और चारु को हेलो कहकर उसके पास उसका हाथ पकड़कर बैठ गयी।

राजीव ने देखा कि निलू ने क़ुर्ती और लेग्गिंग पहनी हुई थी। उसके बड़े कुल्हे मस्त दिखाई दे रहे थे। चूचियाँ भी टाइट क़ुर्ती में फँसी हुई सी बहुत बड़ी नज़र आ रही थी। अब वो कई लंड खाकर भारी बदन की हो चुकी थी। २१ साल की छोटी सी उम्र में ही। राजीव को करन के द्वारा बतायी हुई सब बातें याद थी कि कैसे वो कई मर्दों और करन के साथ भी मज़ा करती है।

तभी एक नौकर चाय लाया। राजीव ने देखा कि उसकी उम्र क़रीब ४०/४२ साल की थी। काफ़ी तगड़ा आदमी था। उसका नाम रामू था। राजीव सोचने लगा कि पिछली बार जब मैं यहाँ आया था तो ये नहीं था आज अचानक कहाँ से आ गया।

तभी करन बोला: यार ये रामू है। कल ही वापस आया है छुट्टी से ।हमारा बहुत ही पुराना नौकर है।

राजीव उसको देखकर मुस्कुरा दिया। वो सोचा कि कहीं बहू या करन की पत्नी से इसका कोई चक्कर तो नहीं है।

तभी अंदर से करन की पत्नी आयी और सबसे मिली। वो एक धार्मिक महिला सी थी और थोड़ी देर बातें करके वो मंदिर चली गयी अपने गुरुजी के दर्शन करने।

अब चारु बोली: अंकल वो आप बोल रहे थे ना कि स्टेज परफ़ॉरमेंस के बारे में बताएँगे ?

राजीव: अरे वो बाद में बात करेंगे। ये शतरंज कौन खेलता है?

करन: मैं और बहू खेलते हैं।

राजीव: निलू बेटी चलो हमारे साथ भी दो दो हाथ आज़मा लो।

निलू ख़ुशी से : हाँ जी चलिए खेलते हैं।

करन: अच्छा मैं ऐसा करता हूँ कि चारु को कोलेज ले जाकर स्टेज वगेरह दिखा देता हूँ। तब तक तुम दोनों खेलो। हम वापस आते हैं थोड़ी देर में। ठीक है निलू?

निलू: जी पापा ठीक है।

चारु और करन बाहर चले गए। राजीव और निलू आमने सामने बैठे और शतरंज का खेल शुरू हुआ। राजीव ने देखा कि रामू बार बार वहाँ के चक्कर मार रहा था।

थोड़ी देर बाद राजीव ने निलू को ताड़ना चालू किया। कभी उसकी क़ुर्ती से झांकती उसकी क्लीवेज़ तो कभी उसकी मस्त मोटी जाँघ और जब वो अपनी टाँग हिलाती तो उसकी गाँड़ का एक हिस्सा भी उसे दिख जाता था। तभी निलू ने राजीव का हाथी मारा और बोली: अंकल आप मुझे घूरना छोड़कर खेल में ध्यान लगाइए वरना हार जाएँगे।

राजीव बेशर्मी से: अरे बेटी हार भी गया तो क्या हुआ ? आख़िर तुम जैसी ख़ूबसूरत लड़की से कौन जीतना चाहेगा।

निलू हँसकर: वाह अंकल क्या कहने आपके?मेरी ख़ूबसूरती का इससे क्या लेना देना?

राजीव: बेटी अगर तुम्हारे जैसी कोई सुंदरी सामने बैठी हो तो कोई क्या ध्यान लगा पाएगा। पता नहीं तुम्हारे ससुर बेचारे का क्या हाल होता होगा?

निलू चौंकी और बोली: मतलब ?

राजीव: अरे बेटी तुम्हारे जैसी परी सी लड़की जब दिन भर आँखों के सामने हो तो बेचारे इंद्र देव का भी मन डोल जाएगा करन का किस खेत की मूली है। वह तो तुम पर लट्टू हो ही चुका होगा।

निलू: क्या अंकल वो मेरे ससुर हैं आप कुछ भी बोल रहे हैं।

राजीव: बेटी मेरे घर में भी तुम्हारी जैसे एक प्यारी सी बहू है । मैं तो उसको बहुत प्यार करता हूँ। सच पूछो तो मेरे बेटे से भी ज़्यादा।

निलू चौकी: प्यार मतलब स्नेह ना?

राजीव: स्नेह तो करता ही हूँ पर प्यार भी करता हूँ। वैसा जैसा मर्द और औरत करते हैं ।

निलू: आपका मतलब है कि- मेरा मतलब है यानी कि –

राजीव: हाँ बेटी हम सेक्स करते हैं। फिर धीरे से बोला: वैसे ही जैसा तुम और करन करते हो।

निलू का चेहरा सफ़ेद हो गया। वो हकला कर बोली: आप क्या क्या कह रहे हैं।

राजीव: अरे बेटी ये बात सिर्फ़ मेरे तक ही रहेगी। वो कुछ दिन पहले करन को ज़्यादा चढ़ गयी थी तब वो नशे में मुझे तुम्हारे और अपने बेटे के बारे में सब बता गया। घबराओ मत ये राज मेरे तक ही रहेगा।

अब निलू शर्मा कर नीचे देखने लगी। राजीव उठ कर उसके पीछे आकर खड़ा हुआ और बोला: बेटी हम दोनों एक ही नाव पर सवार हैं ।तुम अपने ससुर से मज़े कर रही हो और मैं अपनी बहू से । वह झुका और उसके कंधे सहलाकर बोला: और बेटी ये रामू भी तो तुमको मज़े दे ही रहा है। इस बार राजीव ने अंधेरे में तीर चलाया था।

शायद तीर निशाने पर लगा क्योंकि निलू चौंकी और बोली: क्या क्या मतलब ? पापा ने ऐसा कहा?

राजीव झूठ बोला: हाँ और क्या? क्या तुम सोचती हो कि तुम रामू से चुदवाओगी और तुम्हारे ससुर को इसका पता नहीं चलेगा? वो जानबूझकर ऐसा दिखा रहा है कि वो अनजान है। वो अब उसके कंधे सहलाकर मस्त हो रहा था। वो बैठी हुई निलू के पीछे अब भी खड़ा था।

निलू: ओह । वो सोची कि अंकल तो अब खुल कर गंदे शब्द भी बोलने लगे। वैसे उसे शुरू से ही राजीव की क़द काठी पसंद थी और आज तो वो वैसे भी छैला बनकर आया था। वो कुछ सोचकर मुस्करायी और बोली: अंकल आपका क्या इरादा है?

राजीव ने हाथ नीचे लेज़ाकर उसकी चूचियों पर रखा और बोला: बेटी बस आज तो तुमको जी भर के चोदना है।

निलू हँसी: उधर चारु के साथ पापा क्या कर रहे होंगे?

राजीव हँसकर : सही कहा तुमने । वो भी उसके साथ मज़ा ले रहा होगा। वो अब उसके कंधे चूमता हुआ उसकी चूचियाँ दबाकर बोला: बेटी तुम्हारी चूचियाँ तो इस छोटी सी उम्र में ही मस्त गदरा गयी है । उफफफफ क्या माल हो तुम।

निलू: आऽऽऽऽह्हा अंकल धीरे से दबाओ ना दुखता है। चारु की अभी तो बहुत छोटी है ना अंकल । उसको भी आप कर लिए हो क्या?

राजीव: नहीं बेटी अभी कुँवारी है। पर ज़ायदा दिन नहीं रहेगी। चलो ना बेडरूम में चलते हैं। हमारे पास एक घंटा से ज़्यादा समय नहीं है।

वो हँसते हुए उठी और बोली: शायद पापा आज ही उसकी कुँवारी जवानी को फाड़ देंगे।

राजीव उसकी गाँड़ सहला कर: नहीं आज वो उसे सिर्फ़ गरम करेगा। उसकी पहली चुदाई मेरे द्वारा ही होगी।

अब वो दोनों बेडरूम की ओर चल पड़े। रामू कहीं दिखाई नहीं दिया।

उधर चारु को अपनी कार में बिठाकर करन कोलेज के लिए निकला। कार में बैठी चारु की स्कर्ट थोड़ा ऊपर उठ गयी थी। करन उसकी एक नरम गदराई जाँघ को सहलाकर बोला: आऽऽऽऽह बेटी क्या चिकनी जाँघ है तुम्हारी। और हाँ मैं तुमको धन्यवाद देना चाहता हूँ।

चारु: वो किस लिए अंकल?

करन: बेटी वो इसलिए कि तुमने मेरी एक रिक्वेस्ट मान ली थी।

चारु: कैसी रिक्वेस्ट?

करन उसकी बुर की तरफ़ ऊँगली करके बोला: वहाँ की सफ़ाई करने की। तुमने बताया था ना कि बाल साफ़ कर लिए थे।

चारु के गाल लाल हो गए वो बोली: छी अंकल आप भी बहुत गंदे हैं।

करन हे हे कहकर हँसने लगा।

कोलेज में कोई ज़्यादा लोग नहीं थे अभी खुला जो नहीं था। वो उसको लेकर ऑडिटॉरीयम में गया। छोटे शहर की लड़की इतना भव्य स्टेज और ऑडिटॉरीयम देखकर चकित रह गयी। वह उसकी पीठ सहलाते हुए उसकी ब्रा के स्ट्रैप पर हाथ फिरा कर बोला: देखो बेटी इस स्टेज में तुम नाचोगी और यहाँ मौजूद सैकड़ों लोग तुम्हारे लिए तालियाँ बजाएँगे। यह कहते हुए वह अपना हाथ उसकी पीठ से खिसका कर उसकी गाँड़ की गोलाइयों पर ले गया और उनको मस्ती से दबाने लगा। चारु तो कल्पना की दुनिया में चली गयी थी जहाँ सब उसका नृत्य देखकर तालियाँ बजा रहे हैं। जब उसे ध्यान आया कि अंकल उसकी गाँड़ सहला रहे है , तो वो बोली: उफफफ अंकल क्या कर रहे हैं? कोई देख लेगा।

करन उसके गाल चूमा और बोला: बेटी यहाँ कोई नहीं है देखने वाला। चलो अब ऑफ़िस चलते हैं।

वो दोनों ऑफ़िस पहुँचे और उसने चाय मँगाई। चाय पीते हुए वो उसकी सुंदरता की तारीफ़ करता रहा। चारु को बहुत शर्म आ रही थी।

करन ने देखा कि बात आगे नहीं बढ़ रही है तो उसने राजीव को एक मेसिज भेजा कि वो उसे मिस्ड कॉल दे ।

थोड़ी देर बाद उसके फ़ोन की घंटी बजी। वो बोला: हाय हाँ हाँ बोलो।

राजीव फ़ोन काट चुका था और वो नाटक करते हुए बोला: हाँ हाँ समझ गया। पर क्या स्टेज ४ महीने के लिए बंद हो जाएगा। ओह चलो मैं सोचता हूँ। कहकर उसने फ़ोन बंद करने का नाटक किया।

चारु: अंकल क्या हुआ?

करन: बेटी वो कह रहे हैं कि ऑडिटॉरीयम तीन चार महीने के लिए मरम्मत में जाएगा। इसका मतलब है कि तुम्हारा प्रोग्राम अभी नहीं हो सकेगा।

चारु: ओह अंकल प्लीज़ कुछ करिए ना। आप इसको कुछ दिन के लिए टाल दीजिए ताकि मेरा प्रोग्राम हो जाए।

करन: हाँ कोशिश तो कर ही सकता हूँ पर मुझे क्या फ़ायदा होगा? तुम तो मुझे प्यार करने ही नहीं देती।

चारु आकर उसके सामने खड़ी हो गयी और बोली: मैंने आपको कब मना किया है प्यार करने को।

अब करन ने हाथ बढ़ाया और चारु को अपनी गोद में खींच लिया और उसे ज़ोर से गाल में प्यार किया और बोला: जाओ दरवाज़ा बंद करके आओ। फिर प्यार करते हैं।

चारु जाकर दरवाज़ा बंद की और आकर ख़ुद से उसकी गोद में बैठ गयी। अब करन मस्ती से भरकर उसके गाल चूमा और फिर उसके होंठ चूसने लगा। चारु को अब अपनी गाँड़ के नीचे कुछ सख़्त सा चुभने लगा। वो भी अब मस्तियाने लगी और तभी करन ने उसकी एक चूचि हल्के से सहलाई। चारु उफ़्फ़्फ़क कर उठी और बोली: अंकल किसी को फ़ोन करके आउडी की मरम्मत आगे बढ़ाइए ना।

करन : एक शर्त पर। अगर आज तुम मुझे वो जगह चूमने दोगी जहाँ के तुमने बाल साफ़ किए हैं।

चारु लाल होकर: छी अंकल क्या बोल रहे हैं?

करन: अरे बेबी वो तो स्वर्ग से भी ज़्यादा सुंदर जगह है। अच्छा तुम बस एक झलक दिखा दो बस।

चारु: पहले आप फ़ोन तो करिए। वो अपनी गाँड़ को उसके लौड़े पर ऐडजस्ट करके बोली।

अब करन ने हाथ बढ़ाया और उसकी स्कर्ट ऊपर की और पैंटी के ऊपर से उसकी बुर को पंजे में दबाया और बोला: उफफफ कितनी गीली है तुम्हारी पैंटी। सू सू कर दी हो क्या?

चारु : आऽऽऽऽऽह अंकल हाऽऽऽऽऽथ हटाइए नाआऽऽऽऽऽ। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ प्लीज़ ।

करन: अगर फ़ोन करूँगा तो यहाँ हाथ रखे हुए ही करूँगा। बोलो क्या कहती हो?

चारु: अच्छा आप फ़ोन तो लगाओ।

करन उसकी बुर दबाता हुआ अपना फ़ोन देकर बोला: लो तुम इसमे ऐड्मिन ढूँढो और मेरी बात कराओ।

चारु ने फ़ोन लगाया और करन ने फ़ोन अपने हाथ में लेकर कहा: यार तुम आउडी को एक महीने के बाद मरम्मत में लेना क्योंकि हमको वहाँ एक शो करना है। ये कहते हुए अभी भी उसका हाथ चारु की बुर को पैंटी के ऊपर से दबा रहा था।

उधर से पता नहीं क्या कहा गया पर करन बोला: हाँ बस ठीक है । मैं जैसा कह रहा हूँ वैसा कर दीजिए। यह कह कर वो फ़ोन काट दिया। फिर दूसरा हाथ चारु की एक चूचि पर रखा और बोला: चलो बेटी तुम्हारा काम तो हो गया। अब हमारा काम कर दो। चारु शर्मा गयी।

 
राजीव और निलू जब बेडरूम में पहुँचे तो राजीव बोला: बेटी बेडरूम बहुत बढ़िया सजाया हुआ है।

निलू: बस यही तो बढ़िया है पति तो नकारा मिला है। ये तो ससुर जी मेरा ध्यान रखते हैं इसीलिए यहाँ रहती हूँ। वरना कब की चली जाती।

राजीव: रोज़ चोदते हैं क्या वो?

निलू: नहीं दो दिन में एक बार।

राजीव: अब राजीव अपने कपड़े खोलते हुए बोला: और रामू?

निलू: वो तो दिन में दो तीन बार कर लेता है जब उसको मौक़ा मिलता है। और मौक़ा ना मिलने पर एक बार भी नहीं।

राजीव: अरे बेटी कपड़े तो खोलो । देखो मैं तो चड्डी में आ गया हूँ।

निलू हँसकर : हाँ और जो कुछ चड्डी से दिख रहा है वो काफ़ी बड़ा लग रहा है। यह कहकर वो अपनी क़ुर्ती उतार दी। अब ब्रा में उसकी भारी चूचियाँ ग़ज़ब ढा रही थीं। उसके हाथ अब अपनी लेग्गिंग को उतारने लगे। जल्दी ही वो अब पैंटी और ब्रा में आ गयी थी।

राजीव उसकी मस्त जवानी को देखता ही रह गया। क्या माल है वो सोचा। सफ़ेद ब्रा और सफ़ेद ही पैंटी में उसकी जवानी का एक एक अंग मानो आग बरसा रहा था। राजीव की चड्डी में उसका लौड़ा पूरा तन गया और उसका टोपा बाहर झाँक रहा था। उफफफफ क्या लाल टोपा है और कितना बड़ा है- वो सोची।

अब राजीव आकर बिस्तर पर लेट गया और निलू को पास आने का इशारा किया। वो आकर उसके पास लेटने लगी तो राजीव ने खींचकर उसे अपनी बदन के ऊपर लिटा लिया। अब वो उसके होंठ चूसने लगा और उसके हाथ उसकी गरदन से होकर उसकी पीठ पर घूम रहे थे। फिर वो हाथ नीचे ले जाकर उसकी चिकनी क़मर सहलाने लगा और फिर उसके गोल गोल मोटे चूतरों को सहलाने और दबाने लगा। वो भी उसके सिर को अपने दोनों हाँथों में लेकर उसके होंठ चूसे जा रही थी। साफ़ पता चलता था कि अनुभवी गुड़िया है।

अब राजीव ने अपना हाथ उसकी गाँड़ की दरार में डाला और वहाँ रगड़ने लगा। निलू आऽऽऽऽह कर उठी और अपनी बुर को उसके लौड़े पर रगड़ने लगी। राजीव अपने हाथ ऊपर को लाया और उसकी ब्रा के हुक को खोल दिया और निलू को ऊपर उठाकर उसकी ब्रा निकाल दिया । निलू अपने कमर के ऊपर के हिस्से को उठाई हुई थी और उसके बड़े बड़े सख़्त अनार राजीव के मुँह के सामने थे। वो मज़े में भर कर उनको सहलाया और दबाने लगा। वो चूचियाँ दबाते हुए उनके निपल्ज़ को भी मसलने लगा। निलू आऽऽऽऽहाह कर उठी। अब वो अपनी पैंटी में क़ैद बुर को उसके लौड़े पर और ज़ोर से दबाने लगी। अब राजीव भी उसकी चूचियाँ चूसने और काटने लगा। निलू उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी और अपना हाथ नीचे ले जाकर उसकी चड्डी के ऊपर से उसके लौड़े को दबाने लगी।

राजीव बोला: बेटी अब ६९ करें क्या ?

निलू: आऽऽऽऽह हाँ अंकल करती हूँ।

अब वो ख़ुद उलटी हुई और अपना मुँह उसकी चड्डी के ऊपर लाकर उसकी चड्डी को सूँघने लगी। उसके मर्दाने गंध से मानो उसकी बुर में गंगा जमुना बह उठी। उसकी पैंटी में फँसी बुर राजीव के मुँह के सामने थी। वो मस्त होकर अपना मुँह उसकी पैंटी पर रखा और उसे चाटा और सूँघा। फिर वो उसकी पैंटी को एक साइड में करके उसकी बुर को नंगी किया और वहाँ अपनी नाक डाल दिया। फिर उसने अपनी जीभ निकाली और उससे बुर के छेद को कुरेदने लगा। निलू हाऽऽऽऽऽययय कर उठी।

अब निलू मस्त होकर राजीव की चड्डी को निकाली और उसके लौड़े को आज़ाद कर दिया। उसकी आऽऽह निकल गयी- उफ़्क्फ़्फ़्फ़्फ़ कितना मस्त लौड़ा है । बिलकुल मामा के जैसा है उनका भी इतना ही मोटा और लम्बा है। वो अब प्यार से उसे चूमने लगी और जीभ से पूरी लम्बाई को चाटने लगी। उसने बड़े बड़े बॉल्ज़ भो सहलाए और एक एक बॉल को मुँह में लेकर चूसने और चाटने लगी।

उधर राजीव भी उसकी कमर से उसकी पैंटी को निकाला और अब उसके मोटे चूतरों को चूमने और काटने लगा। फिर वो उसकी गाँड़ को चाटने लगा और जीभ से उसके छेद को सहलाने लगा। अब वो नीचे होकर उसके बुर को भी चूसने और चाटने लगा। उसकी बुर ने बुरी तरह से आँसू बहाना चालू किया। और वो अब उसमें दो ऊँगलियाँ डालकर अंदर बाहर करने लगा।

निलू भी मस्ती से अपनी गाँड़ हिलाकर अपनी बुर उसके मुँह पर रगड़ने लगी। अब राजीव उसकी बुर चाटते हुए अपनी एक गीली ऊँगली उसकी गाँड़ के छेद में डाला और उसे हिलाने लगा। निलू चिल्लाई: आऽऽऽह अंकल उइइइइइइइइ । अब चोओओओओओओओदो ना। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ अब नहीं रुक सकती। आऽऽऽऽऽहहह।

राजीव मुस्कुराया और उसको पलट कर अपने नीचे किया और उसकी जाँघों को फैलाया और उसकी टाँगे उसकी छाती पर रखा और अपना तगड़ा लौड़ा उसके बुर के छेद में डाल दिया। अब वो ऊपर से धक्के लगाने लगा और वो गरम माल अब नीचे से कमर उछालकर उसका साथ देने लगी। फ़च फ़च की आवाज़ और हाऽऽऽऽऽऽययय मरीइइइइइइइइ। आऽऽऽऽऽह और जोओओओओओओर से चोओओओओओओदो । अंकल । उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ।

अब राजीव की गाँड़ तेज़ी से ऊपर नीचे होने लगी। निलू अब चिल्लाई: आऽऽऽऽऽह्हा मैं तो गयीइइइइइइइ। अब वो अपनी दोनों जाँघों को भींची और उसके लौड़े को अपनी बुर में जकड़ सी ली। अब राजीव भी उत्तेजना से भरकर ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर उसके अंदर झड़ने लगा।

थोड़ी देर बाद जब वो दोनो सुस्ता रहे थे तो राजीव ने खिड़की के पास हलचल देखी और उसे वहाँ परदे के पीछे से रामू झाँकता हुआ दिखा। वो मन ही मन मुस्कुराया और बोला: एक बात तो बताओ। जब तुम्हारी सास दिन भर बाहर ही रहती है तो तुमको रामू से रोज़ चुदवाने में दिक़्क़त क्या है?

निलू हँसकर : अरे अंकल सासु माँ ही तो असली दिक़्क़त है। असल में पापा अब मम्मी को चोदने में इंट्रेस्ट नहीं लेते। उनको छोटी लड़कियाँ पसंद हैं । वो उनको कोलेज में आराम से मिल जाती है। और मैं तो हूँ ही उनकी सेवा के लिए। पर सासु माँ की प्यास रामू ही बुझाता है। वो रात को इनके कमरे में जाता है और पापा के सामने ही उसी बिस्तर पर मम्मी को चोदता है।

राजीव: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ यह कैसा आदमी हो गया है करन ? मुझे तो हैरानी हो रही है। अपनी बीवी को दूसरे के सामने चुदता देखता है। उफफफफ।

फिर अचानक राजीव को याद आया कि शिवा भी तो अपनी बीवी को उससे चुदते देखता ही है। हाँ पर वो ख़ुद भी तो उसे चोदता है।

निलू: अरे अंकल इतना ही नहीं वो गुरु जी भी जिनके आश्रम मम्मी जाती हैं पक्का चुदक्कड है। मम्मी उससे चुदवाने ही तो जाती हैं वहाँ।

राजीव: तुमको कैसे पता है ये सब?

निलू हँसकर: अरे रामू सब बताता है ना। और वो एक अजीब बात बताता है।

राजीव: क्या?

निलू: यह कि सासु माँ पापा से नहीं चुदवाती है सिर्फ़ रामू से चुदवाती है।

राजीव: वो क्यों?

निलू:ये पता नहीं । आप पूछ लीजिएगा ना। वो आँख मारते हुए बोली।

राजीव : ये मैं नहीं पूछ सकता। अच्छा अब चलो वो दोनों आने वाले होंगे।

निलू उठकर बाथरूम में गयी और टोयलेट के सीट पर बैठकर मूतने लगी । राजीव भी अंदर आया और उसको बोला: बेबी ज़रा गाँड़ उठाओ ना । तुम्हारी बुर से मूत निकलते देखने का मन है । वो मुस्कुराई और थोड़ा सा उठ गयी। राजीव उसकी मूत देखकर और सी सी की सीटी सुनकर मस्ती में आकर वहाँ हाथ ले गया और उसकी बुर से निकलने वाली गरम धार को महसूस करके बोला: जवानी में सब कुछ मस्त होता है बेबी। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या गरम मूत है। ह्म्म्म्म्म्म्म। फिर वो उठी और फ़्लश करके हैंड शॉवर से अपनी बुर और गाँड़ धोने लगी। अब राजीव भी मूतने लगा। निलू भी उसके लंड को देख रही थी जिसमें से मोटी धार निकली जा रही थी। अब राजीव भी आकर अपने लंड को शॉवर से साफ़ किया और दोनों बाहर आकर कपड़े पहने।

राजीव: फिर आज रामू से चुदवाओगी या नहीं?

निलू हँसकर: अंकल वो ज़रूर छिप कर हमारी चुदाई देखा होगा। और आपके जाते ही मुझसे बोलेगा चुदवाने के लिए। पर अभी मैं थक गयी हूँ ना इसलिए सिर्फ़ चूसकर उसको शांत करूँगी। दो घंटे के बाद ही चुदवाऊँगी ।

राजीव: हाँ वो हमको देखा है। मैंने उसे खिड़की के पास देखा था।

वो दोनों हँसने लगे और बाहर आकर करन और चारु का इंतज़ार करने लगे। तभी रामू पानी लेकर आया। राजीव ने देखा कि उसकी पैंट में एक बड़ा सा तंबू बना हुआ था जिसे वो अपने हाथ से छिपाने की कोशिश कर रहा था।

उधर चारु करन के सामने उसकी टांगों के बीच में खड़ी थी और करन के हाथ उसकी बाँह सहलाते हुए उसकी कमर पर आ गए थे। चारु उसकी अहसानमंद थी और ख़ुद भी करन की हरकतों से गरम हो गयी थी। करन के हाथ अब उसकी गाँड़ को दबा रहे थे। उसने उसकी स्कर्ट उठायी और उसकी पैंटी के अंदर हाथ डाला और उसकी गाँड़ की नरम गोलाइयों को दबाने लगा। चारु को आऽऽऽह निकल गयी। अब वो टॉप के ऊपर से उसके नए उगे अनारों को दबाने लगा और बोला: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ बेटी क्या सख़्त अनार हैं तुम्हारे? ज़रा टॉप ऊपर करो ना। वो ये कहकर ख़ुद ही उसका टॉप ऊपर किया और छोटी सी ब्रा में क़ैद उसके अनारों ने जैसे उसे दीवाना बना दिया। वो उनको अब ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा। फिर उसने ब्रा का हुक खोला और उसकी ब्रा के कैप को ऊपर हटाकर उसके मस्त अनारों को बाहर निकाला और उसकी दूधिया छातियों की सख़्त गोलायीयों को देखकर वो मस्ती से एक चूचि को मुँह में और दूसरी को हाथ में लेकर चारु की बुर को गरम करने लगा।

जब भी वो निप्पल को चूसता या मसलता वो हाऽऽऽऽय्य कर उठती। फिर उसने उसकी स्कर्ट को साइड से खोला और उसे नीचे गिराकर पैंटी में क़ैद उसकी बुर को सहलाया और बोला: उफफफफ बेटी देखो तुम्हारी बुर कैसी रो रही है। उसे अंकल का अटेन्शन चाहिए। अब वो उसकी बुर को पैंटी के ऊपर से दबाया और फिर उसकी पैंटी नीचे करके उतार दी।

चारु: अंकल प्लीज़ इसको मत उतारिए कोई आ जाएगा।

करन: अरे बेटी आज कोई नहीं आएगा। आज छुट्टी है और वैसे भी कोलेज अभी नहीं खुला है। चलो तुम यहाँ सोफ़े पर बैठो। करन उसे सोफ़े पर बिठाया और ख़ुद नीचे क़ालीन पर घुटने के बल बैठा और उसकी टांगों को फैलाकर अपने कंधों पर रख लिया। अब उसके सामने चारु की रस टपकाती बुर पूरी तरह से मस्त किसी कली की तरह धरी थी जिसे खिलने का और फूल बनाए जाने का इंतज़ार था। वो प्यार से उसकी बुर की लम्बाई में हाथ फेरा और उसकी गीली बुर के रस को अपनी ऊँगली में लगाकर मुँह में डालकर चूसने लगा। चारु आँखें फ़ाड़े उसकी ये हरकत देख रही थी। फिर वो झुका और उसकी बुर को दनादन चूमने लगा। उसने टांगों को थोड़ा और उठाया और उसकी गाँड़ के छेद को भी चूम लिया और अपनी जीभ से उसे भी छेड़ने लगा।

चारु मज़े से भरकर आहें भरने लगी। अब वो पूरी बुर को होंठ और जीभ से चाटने लगा। चारु उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ चिल्लाने लगी। यह उसका पहला अनुभव था और वो मस्ती से भरी हुई अपनी गाँड़ हिलाकर उसके मुँह को अपने बुर पर रगड़ कर मज़े को दुगुना कर रही थी। अब करन भी अपनी जीभ को गाँड़ के छेद से लेकर बुर के छेद तक चला रहा था और फिर उसकी क्लिट को भी छेड़ रहा था। उसने एक ऊँगली उसकी कुँवारी बुर के अंदर भी वहाँ तक डाली ,जहाँ तक कोई अवरोध नहीं मिला। जब उसकी कुँवारी झिल्ली से उसकी ऊँगली टकराई तो चारु आऽऽऽऽह अंकल दुखता है कहकर उसे रोक दी। जीभ की मस्ती तो जारी ही थी। अब चारु के लिए ये आनंद झेलना मुश्किल हो गया और वो ज़ोर से चिल्लाकर उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मैं मरीइइइइइइइइइइ कहते हुए अपना रस एक फ़ौवारे की तरह करन के मुँह में छोड़ने लगी जिसे वो पीता चला गया। फिर वो उसकी बुर और गाँड़ को चूमकर उठा और अपने रुमाल से अपना मुँह पोंछा और मुस्कुराया और बोला: बेटी मज़ा आया?

चारु शर्मा कर: जी अंकल । आऽऽह आपको गंदा नहीं लगा। आप मेरी सू सू भी पी गए। वो स्कर्ट पहनते हुए बोली।

करन हँसकर: अरे बेटी वो सू सू नहीं था वो तो कामरस था। उफफफफ क्या स्वाद था। वैसे तुमको तो मज़ा मिल गया पर मेरा मज़ा अभी अधूरा ही है। वो अपने पैंट के ऊपर से अपने लंड को दबाकर बोला।

चारु भोलेपन से बोली: ओह अंकल आपने तो कुछ कहा नहीं। मुझे क्या पता कि मुझे क्या करना है? ये कहकर वो अपनी ब्रा ठीक करने लगी।

करन मुस्कुराया और उसके हाथ को पकड़कर उसे ब्रा ठीक करने से रोकते हुए बोला: चलो मैं बताता हूँ क्या करना है। पहले इन मस्त अमरूदों को नंगे ही रहने दो । अब मेरे पैंट की बेल्ट और जीप खोलो।

वह उसकी पैंट की बेल्ट खोली और फिर जब जीप नीचे की तो उसका हाथ उसके लंड के कड़ेपन को महसूस किया और वो काँप उठी। अब करन की पैंट नीचे गिर चुकी थी और चड्डी में फूला हुआ लंड साफ़ दिख रहा था और वहाँ एक गीला सा धब्बा भी था। करन ने चारु का हाथ अपने लंड पर रखा और उसे दबाने लगा। फिर बोला: बेटी अब इसको भी उतार दो।

चारु उसकी चड्डी में हाथ डालके उतारने लगी तो लंड के फँसने के कारण वो नहीं निकाल पायी। फिर करन ने हाथ डालकर अपना लंड टेढ़ा किया और चड्डी निकाल कर अपना लंड उसके सामने किया। चारु की आँखें फैल गयीं । यह पहला लंड था जो वो देख रही थी और वो भी इतने क़रीब से।

उसके छेड़ पर सफ़ेद सा रस जमा सा था। करन को मालूम था कि वो ज़्यादा देर अपने को रोक नहीं पाएगा सो वो बोला: बेटी चलो बाथरूम में चलते हैं।

चारु कुछ नहीं समझते हुए भी उसके पीछे पीछे बाथरूम में चली गयी। वहाँ वो उसका हाथ पकड़कर अपने लंड पर रखा और बोला: बेटी इसको ऐसे हिलाओ वो उसको हिलाकर सिखाते हुए बोला। चारु को उसका कड़ा और गरम लंड बहुत मस्त लगा और वो जैसे कहा गया था वैसे ही लंड को मूठ्ठी में लेकर आगे पीछे हिलाने लगी। करन भी उसकी बाहर झाँक रही चूचियाँ दबाकर अपनी कमर हिलाने लगा। सिर्फ़ पाँच मिनट में हो करन आऽऽऽऽह करके अपना वीर्य गिराने लगा और चारु आँख फाड़कर उसका सफ़ेद रस झटके के साथ टोयलेट में गिरते देखने लगी। थोड़ी देर बाद उसने चारु का हाथ हटाया और हांफते हुए अपना लंड तौलिए से साफ़ करके उसे अंदर पैंट में डाल लिया और बाहर चला गया। चारु ने अपने हाथ में सफ़ेद रस लगा देखा और वो उसे उत्सुकतावश सूँघी और उसके गंध से थोड़ी विचलित हुई और फिर चुपचाप हाथ धोने लगी। अपनी ब्रा और टॉप ठीक करके वो भी बाहर आयी।

अब दोनों साथ में ही कमरे से बाहर निकले और कार से करन उसे अपने घर की ओर ले गया।

जब वो घर में घुसे तो राजीव और निलू अभी भी शतरंज खेल रहे थे। इनको देखकर वो उठे और सब सोफ़े पर बैठकर बातें करने लगे।

राजीव: हो गयी सब स्टेज पर्फ़ोर्मन्स की बात?

करन: हाँ बेटी को हमारा ऑडिटॉरीयम बहुत पसंद आया।

चारु: अंकल वो बहुत बड़ा और सुंदर है।

निलू: चलो ये बढ़िया हो गया। हम भी तुम्हारा प्रोग्राम देखेंगे। चलो चारु अभी सबको चाय पिलाते हैं। रामू बाज़ार गया है सामान लाने आता ही होगा।

चारु और निलू किचन में चली गयी। राजीव ने धीरे से पूछा: कैसा रहा? कुछ मस्ती किए?

करन मुस्कुराकर: हाँ यार पूरी मस्ती हुई।

राजीव: अबे साले चोद दिया क्या?

करन: अरे नहीं यार। बस ऊपर से मज़ा लिया। पूरी नंगी होकर मज़ा दी। ख़ूब चूसा उसके अनार और उसकी बुर भी।

राजीव: आऽऽऽऽह वो झड़ी क्या? और तुम्हारा कुछ की?

करन: हाँ वो मस्ती से झड़ी और मेरा भी हिलाई और झाड़ दी। मस्त गरम माल है। जल्दी ही चोद लो अब उसको। और हाँ मस्त कुँवारी है मैंने उसकी झिल्ली भी चेक कर ली है।

राजीव: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या यार साला मैं फिर से गरम हो गया।

करन: और तुम्हारी बात बनी निलू के साथ? या सिर्फ़ शतरंज ही खेलते रहे?

राजीव: अरे वाह कैसे ना बनती। तुम्हारी बहू तो मस्ती का ख़ज़ाना है। क्या प्यारी लौड़िया है। मस्त जवान चुदा हुआ माल। क्या अनुभवी हो गयी है लड़की सिर्फ़ २१ साल में ही।

करन: हाँ वो तो है।

तभी रामू हाथ में थैला लेकर आया और किचन में चला गया।

राजीव ने पूछा: यार जवान बहू के घर में इस साँड़ को क्यों रख छोड़ा है ? ये तो साला निलू को ठोक ही देगा। राजीव मस्ती में आकर बोला , उसे सब पता था पर वो देखना चाहता था की करन की क्या प्रतिक्रिया होती है।

करन: नहीं यार ये पुराना नौकर है। ये ऐसा नहीं करेगा।

राजीव सोचा कि साला ये अपनी बीवी चुदवाता है इस नौकर से और मुझे बेवक़ूफ़ समझ रहा है। वो सामने से बोला: वैसे आज तुम्हारी बहू ने कहा है कि मैं तुमसे पूछ लूँ और अगर तुमको कोई ऐतराज़ ना हो तो वो मुझसे जब मौक़ा मिले चुदवाने को तय्यार है। बोलो क्या कहते हो?

करन: अरे यार इसमें क्या बात है जब चाहे मज़ा ले लो उसके साथ। मुझे क्यों ऐतराज़ होने लगा। वैसे भी मुझे कोलेज में कमसिन लड़कियों की कोई कमी नहीं है। मुझे तो उनके साथ ही मज़ा आता है।

राजीव ने उसे थैंक्स कहा।

उधर रामू किचन में गया और सामान रखा और बोला: लाओ मैं चाय बना देता हूँ। चारु उस समय पानी पी रही थी। तभी उसने देखा कि रामू का एक हाथ निलू की एक गाँड़ को दबा रहा था। निलू उसको घूरकर हटने का इशारा की और वो आँख मारकर हट गया। चारु समझ गयी कि इन दोनों के बीच में कुछ है । उसे थोड़ा अजीब लगा पर वो चुप रही।

सब चाय पिए और फिर मिलने का कहकर राजीव और चारु चले गए।

 
राजीव और चारु घर पहुँचे तो २ बज चुके थे । सब खाना खाए और फिर आराम करने चले गए। राजीव ने कई चुदाई की फ़ोटो चारु को भेजी और करन ने भी अश्लील मेसिज भेजे जैसे: बेबी मज़ा आया बुर चूसवाने में? कैसा लगा मेरा लंड? पसंद आया ना? वगेरह वगेरह।

चारु आज वैसे भी पहली बार बुर चूसवा कर मस्ती से भरी हुई थी ऊपर से ये मेसिज आग में घी का काम कर रहे थे और वो फ़ोटो तो उसकी बुर में आग ही लगा रही थी।

वो उठी और टोयलेट में जाकर ऊँगली से अपनी जवान बुर को शांत की। फिर आकर सो गयी। मुन्नी भी सोयी हुई थी।

तभी शिवा का फ़ोन आया मालिनी को: जान शाहरुख़ की नयी फ़िल्म आयी है चलोगी क्या?

मालिनी: हाँ चल सकते हैं । पर सभी जाएँगे ना?

शिवा : पापा से पूछ लो कि वो जाएँगे ना? बाक़ी सब तो जाएँगे ही।

मालिनी फ़ोन लेकर राजीव के कमरे में गयी । वो लूँगी पहनकर कुर्सी पर बैठा कुछ पढ़ रहा था। वो बोली: पापा फ़िल्म चलोगे? शिवा का फ़ोन है टिकेट ले रहा है?

राजीव ने फ़ोन लेकर शिवा को कहा: मालिनी को इस हालत में फ़िल्म ले जाना ठीक होगा क्या? तू ऐसा कर अपनी सालियों को दिखा ला । मैं मालिनी का ध्यान रखूँगा।

मालिनी ने रोनी सूरत बनाकर कहा: क्या पापा मुझे जाना है।

राजीव उसे प्यार से अपनी गोद में खींचा और उसके मोटे पेट को सहला कर बोला: बेटी ऐसे समय में भीड़भाड़ वाली जगह से परहेज़ करना चाहिए। फिर फ़ोन पर बोला: तुम तीन टिकट ले आओ। तुम और लड़कियाँ चले जाना।

शिवा: ठीक है पापा । कहकर फ़ोन काट दिया।

शाम को जब शिवा आया तो वो तीन टिकट राजीव को देकर बोला: पापा आप लड़कियों को लेकर फ़िल्म देख आओ। मैंने इसी की कैमरा प्रिंट सीडी में ख़रीद ली है। मैं और मालिनी इसे ही देख लेंगे।

मालिनी ख़ुश होकर बोली: ये आपने ठीक किया। हम घर पर ही देख लेंगे।

राजीव: ठीक है जैसा तुम कहो। चलो लड़कियों तय्यार हो जाओ।

अब राजीव भी तय्यार होने चला गया। वो सोच रहा था कि आज एक मौक़ा मिला है उसका पूरा फ़ायदा उठाऊँगा। उसने कपड़े पहने और बाहर आया । थोड़ी देर बाद मुन्नी बाहर आइ । उसे देखकर राजीव के लंड ने एक झटका मारा। वह एक छोटा सा टॉप पहने थी जिसमें से उसके सख़्त अमरूद अपनी चोंच निकाले खड़े थे। उसकी स्कर्ट भी घुटनों से ऊपर थी जिसमें से उसकी अब जवान हो रही जाँघें ग़ज़ब ढा रहीं थीं । उसने ऊँची एड़ी का सैंडल पहना था जो उसकी छोटी मगर गोल गाँड़ को काफ़ी उभार रहा था।

राजीव मस्ती से उसे देखा और बाला: बेटी इतनी हील वाली सैंडल में गिर ना जाना।

मुन्नी: अंकल मैंने ये चारु की पहनी है। पहली बार पहनी हूँ । ये कहते हुए वह चली किचन की ओर पानी पीने और तभी उसका पैर मुड़ा और वो धड़ाम से पास ही पड़े सोफ़े पर गिर गयी और उसकी स्कर्ट ऊपर उठ गयी। अब उसकी दोनों टाँगें ऊपर हो गयी थी। उसके बीच से गुलाबी पैंटी और उसमें उसकी बुर की सूजन और फाँक साफ़ दिखाई दे रही थी। राजीव उसकी मदद करने के बहाने उसको उठाने लगा और उसके हाथ उसके सख़्त अमरूदों पर पड़े वो सिहर उठा। उफफफ क्या अनुभव था ।उसके हाथ उसके जाँघों पर भी आए और वो वहाँ भी उनके चिकनेपन का अहसास उसके लंड को खड़ा कर गया। वह पैंटी से उसकी बुर को बिलकुल पास से घूरकर बोला: बेटी चोट तो नहीं लगी?

मुन्नी: नहीं अंकल बच गयी। पर अब ये सेंडल अब नहीं पहनूँगी।

राजीव उसकी जाँघ को ऊपर तक सहलाया और बोला: हाँ लगता है चोट नहीं लगी। चलो अब सैंडल बदल ही लो। वह अब नीचे बैठा और उसकी बुर को घूरते हुए उसकी सैंडल निकाल दिया। अब वो उसकी पिंडिल्यां सहलाकर बोला: जाओ बेटी दूसरी सैंडल पहन लो।

मुन्नी ने देखा कि अंकल उसकी पैंटी को घूर रहे हैं तो वो शर्मा गयी और उठकर भाग गयी। तभी चारु तय्यार होकर आयी और बोली: अंकल मैं कैसी दिख रही हूँ?

राजीव ने इस सवाल के जवाब देने के पहले इसका पूरा फ़ायदा उठाया और उसे ऊपर से नीचे तक घूरते हुए बोला: वाह बेटी ये पतली सी टॉप तुम पर बहुत फब रही है। वो उसकी जवानी की दहलीज़ पर खड़ी चूचियों को देखा और बोला: सच टॉप बहुत सुंदर है। फिर नीचे देखा और बोला: वाह स्कर्ट भी बहुत प्यारी है। वो उसकी जवान जाँघों को घूरकर बोला: बेटी तुम आज मस्त दिख रही हो। पिक्चर हॉल में तुमको लड़कों से बचाना होगा।

चारु हँसने लगी और बोली: ओह अंकल आप भी ना। तभी मुन्नी आ गयी सैंडल बदलकर।

राजीव: अच्छा मालिनी शिवा, हम लोग जा रहे हैं।

शिवा अपने कमरे से बाहर आया: ठीक है पापा। कार ले जायिये।

अब राजीव लड़कियों को लेकर कार में बैठा और मॉल में पहुँचा। जब वो सिनमा हॉल में पहुँचा उसने देखा कि कई लड़के इन लड़कियों को घूर रहे थे । वो सोचा कि वो सोच रहे होंगे कि ये बूढ़ा नहीं होता तो मस्ती कर लेते।

ख़ैर जब वो हॉल के अंदर पहुँचे और सीट पर बैठे तो राजीव ने देखा की उनकी बीच की सीट है। सबसे पहले मुन्नी बैठी फिर राजीव और उसके बाद चारु बैठी। मुन्नी और चारु की साथ की ३/४ सीट ख़ाली थी दोनों तरफ़ की। थोड़ी देर में मुन्नी की बग़ल की सीट में एक क़रीब ४५ साल का अधेड़ और उसकी पत्नी आकर बैठे। और इधर चारु के साथ वाली सीट पर एक ३० साल का आदमी एक १८/१९ की लड़की के साथ आकर बैठा।

हॉल में अंधेरा हुआ और फ़िल्म चालू हुई। राजीव का ध्यान लड़कियों की तरफ़ भी था। अचानक उसने देखा कि चारु का पड़ोसी अपनी साथ वाली लड़की को छूने लगा। लड़की ने सलवार क़ुर्ती पहनी थी। वो लड़का उसके कंधे पर एक हाथ रखा और उसकी एक चूचि दबाने लगा। चारु का ध्यान फ़िल्म देखने में था। राजीव ने चारु के कान में कहा: बेटी देखो एक फ़िल्म तुम्हारे बग़ल में भी चल रही है। वो चारु को ये दिखा कर गरम करना चाहता था। उसका तीर निशाने पर बैठा। चारु अब साथ वाले की फ़िल्म देखना शुरू की।

अब वो आदमी लड़की को चूमने लगा और उसका हाथ पकड़कर अपने पैंट के ऊपर से अपने खड़े लंड पर रखा और उसे दबाने लगा। अब वो उसकी दूसरी चूचि भी दबाने लगा। फिर उसने सलवार का नाड़ा खोलने की कोशिश की। लड़की ने विरोध किया पर उसकी ज़िद के आगे वो कमज़ोर सी पड़ गयी । अब नाड़ा खोलकर वो आदमी उसकी सलवार में अपना हाथ डाला और उसके ऐक्शन से साफ़ लगा कि वो पैंटी को उठाकर उसके अंदर हाथ डाला था। अब वहाँ पर उसकी उँगलियाँ मचलने लगी और वो लड़की भी उइइइइइ उफफफफ की दबी हुई आवाज़ें निकालने लगी। चारु आँख फाड़े ये सब देख रही थी और उसकी घुंडियाँ भी ब्रा के अंदर तन गयीं थीं और बुर गीली होने लगी थी। तभी राजीव जो ये सब ध्यान से देख रहा था धीरे से चारु के कान में बोला: देखो बेटी उसे कितना मज़ा आ रहा है? कैसे सी सी कर रही है।

चारु सकपका गयी और चुप रही। तब राजीव उसके जाँघों को सहलाने लगा और बोला: ऐसा मज़ा कभी लिया तुमने?

चारु कैसे बोलती कि करन तो इससे भी ज़्यादा मज़ा दे चुका है। वो नहीं में सिर हिला दी। अचानक राजीव ने अपना हाथ उसकी जाँघ सहलाते हुए ऊपर तक लेज़ाकर उसकी पैंटी को छुआ । अब चारु सिहर उठी और अपनी जाँघों को चिपका लिया। इस चक्कर में राजीव का हाथ वहाँ फँस गया। वो बोला: बेटी मेरा हाथ तो छोड़ो । अब चारु ने फिर से जाँघें चौड़ी की ताकि वो हाथ निकाल ले पर राजीव ने अब हाथ बढ़ाकर उसकी बुर को पैंटी के ऊपर से ही दबोच लिया। अब चारु की घुटी सी उइइइइइइइ निकल गयी।

तभी वो लड़का अपनी पैंट की जीप खोला और अपना लंड बाहर निकाला। चारु सोची कि हे भगवान कितना बड़ा है इसका? करन अंकल का तो इससे काफ़ी छोटा था। अब वो लड़की उसे अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी। लड़के का एक हाथ उसकी सलवार में अभी भी घुसा हुआ हरकते कर रहा था। दूसरा हाथ उसकी एक चूचि दबा रहा था। अब चारु भी विरोध करना बंद कर दी और राजीव की उँगलियों का मज़ा लेने लगी। राजीव ने अब अपनी उँगलियाँ पैंटी के साइड से उसकी चिकनी बुर पर लगा दी थीं। अब वो उसके कान में बोला: उफफफ बेटी तुम्हारी तो मस्त चिकनी है।

चारु: आऽऽऽह अंकल उइइइइइइ।

अब राजीव ने भी एक पंजा उसकी एक चूचि पर जमाया और उसे दबाकर ऊपर से ही निपल को छेड़ने लगा। चारु की सीइइइइइइ निकल गयी। अब राजीव ने उसका हाथ पकड़कर अपने लंड पर रखा और वो पैंट के ऊपर से उसे महसूस करके सिहर उठी। उसे लगा कि ये तो और भी बड़ा और मोटा लग रहा है। वो हल्के से दबाने लगी।

अचानक मुन्नी की घुटी हुई चीख़ सुनाई दी और राजीव उसे देखा तो वो हैरान रह गया। मुन्नी की एक चूचि उसके बग़ल में बैठा वो ४५ साल का अधेड़ दबा रहा था। मुन्नी की हल्की सी चीख़ से वो डरकर अपना हाथ हटाया। अब राजीव ने भी चारु को छोड़ा और उधर चारु के बग़ल वाला आदमी भी थोड़ा सा हल्ला सा सुनकर अपने लंड को अंदर कर लिया।

राजीव ने मुन्नी को धीरे से पूछा: बिटिया क्या हुआ? सब ठीक है?

मुन्नी ने चुप रहना ही बेहतर समझा और बोली: जी ठीक है।

राजीव: ठीक है बेटी कोई बात हो तो मुझे बताना।

मुन्नी : अंकल आप यहाँ बैठिए मेरी जगह मैं आपकी जगह बैठ जाऊँ?

राजीव उठा और मुन्नी को अपनी सीट दे कर उसकी सीट पर ख़ुद बैठ गया। मुन्नी के हल्के से हड़बड़ाने के कारण सबका खेल बंद हो गया था।

राजीव ने थोड़ी देर बाद एक हाथ मुन्नी की जाँघ पर रखा और उसे सहलाते हुए धीरे से उसके कान में कहा: बेटी क्या ये आदमी तुम्हारे साथ कोई गड़बड़ किया?

मुन्नी शर्म से सिर झुका ली। ऐसा उसके साथ पहली बार हुआ था। वो चुप रही। राजीव : बेटी बताओ ना क्या उसने तुम्हारी छाती दबाई?

मुन्नी ने चुपचाप हाँ में सिर हिला दिया।

कमीना राजीव: बेटी क्या बहुत ज़ोर से दबा दिया क्या? बहुत दुखा क्या?

मुन्नी सवालों से परेशान सी होकर: नहीं अंकल ज़ोर से नहीं दबाया था।

राजीव: फिर बेटी तुम चिल्लाई क्यों? धीरे से दबाया होगा तो मज़ा आया होगा ना?

मुन्नी क्या कहती । वो बोली: छोड़िए ना अंकल । जाने दीजिए ना।

राजीव का हाथ अब उसकी जाँघ से ऊपर होता हुआ उसकी पैंटी को छू रहा था। अब मुन्नी भी थोड़ा सा असहज होने लगी। तभी वो फिर से पूछा: बताओ ना वो कब से धीरे धीरे दबाकर तुमको मज़ा दे रहा था?

मुन्नी: बस थोड़ी देर ही किया। फिर जब ज़ोर से दबाया तो मुझे दुखा और फिर वो हाथ हटा लिया।

राजीव उसके कान में फुसफुसाकर: बेटी जब वो देर तक धीरे से दबा रहा था ना तो तुमको बुरा नहीं लगा ना?

बेचारी मुन्नी: नहीं अंकल।

राजीव: इसका मतलब मज़ा आया ना उसमें ?

मुन्नी: उफफफ अंकल प्लीज़ बस करिए ना।

राजीव: अरे बेटी मैं तो बस इतना बताना चाहता था कि ये काम अगर प्यार से और आराम से किया जाए तो इसने बहुत मज़ा है। एक काम करना इंटेरवल के बाद तुम चारु के साथ कुर्सी बदल लेना। फिर देखना कि क्या होता है?

मुन्नी को कुछ समझ नहीं आया पर वो चुपके से हाँ में सिर हिला दी।

इंटेरवल में सब बाहर गए और राजीव ने उनको बहुत खिलाया और पिलाया। वापस आकर अब चारु उस ४५ साल के अधेड़ के साथ बैठी और राजीव फिर से बीच में और अब मुन्नी आख़िर में उस नौजवान के साथ बैठी जो कि अपनी लौड़िया के साथ मस्ती करने ही आया था।

फ़िल्म के चालू होने के थोड़ी देर बाद वो लड़का फिर से अपनी लौंडिया के साथ चालू हो गया।वह उसकी एक चूचि दबाने के साथ फिर से उसकी सलवार के ऊपर से उसकी बुर दबाने लगा। अब राजीव ने मुन्नी के कान में कहा: बिटिया देखो वो भय्या क्या कर रहा है?

मुन्नी ने देखा और वो सन्न रह गयी। तभी उस लड़की ने ख़ुद ही अपनी सलवार का नाड़ा खोला और अब लड़के ने उसमें अपना हाथ डाला और उसकी बुर में ऊँगली करने लगा। लड़की ने भी मस्ती में आकर लड़के के पैंट पर हाथ रखा और उसका लंड ऊपर से ही दबाने लगी। लड़के ने उसे पैंट खोलने को कहा और वो जीप नीचे की और हाथ अंदर डालकर उसका मस्त लंड बाहर निकाल कर उससे खेलने लगी। मुन्नी मस्ती से भर गयी और और उसे लगा कि उसकी बुर गीली होने लगी है। अब राजीव उसके कान में बोला: देखो कैसे जवानी का मज़ा ले रहे हैं दोनों? है ना?

मुन्नी क्या बोलती। वो शर्मा गयी । तब राजीव ने अपना हाथ सीट के पीछे से ले जाकर उसकी एक चूचि पर रखा और हल्के से दबाते हुए बोला: देखो इस लड़की को कितना मज़ा आ रहा है?

राजीव का दूसरा हाथ उसकी स्कर्ट को उठाने लगा और वह जाँघ भी सहलाते जा रहा था। अब राजीव ने मुन्नी का हाथ पकड़कर अपने पैंट के ऊपर रखा और मुन्नी ने थोड़ा सा विरोध किया पर जल्दी ही वो ख़ुद से उसके मोटे लंड को दबाने लगी। अब मुन्नी भी मज़े में आ गयी थी। पहली बार वो सेक्स का मज़ा लूट रही थी। तभी राजीव ने उस लड़के को कहा: अरे बेटा लंड चूसवाओ ना? देखो ये बिटिया भी देख रही है। इसको दिखाओगे तभी तो सीखेगी।

वो लड़का कुटीलता से मुस्कुराया और बोला: वाह अंकल चिड़िया फ़ंसा रहे हो मेरे दम पर। ठीक है चूसवाता हूँ। फिर वो लड़की को चूसने का इशारा किया और वो उसका लंड चूसने लगी। मुन्नी की आँखें मानो फट सी गयीं थी। उफफफफ क्या मज़ा ले रही थी वो लड़की। अब राजीव मुन्नी की दूसरी चूचि भी सहलाया और अपना हाथ उसकी पैंटी पर ले जाकर उसकी बुर को दबाने लगा। मुन्नी के लिए ये पहला अनुभव था वो आऽऽहहह कर उठी। उस लड़की ने अपना सिर उठाया और मुन्नी से बोली: चूसोगी?

मुन्नी ने ललचाई निगाह से गीले लंड को देखा और नहीं में सिर हिला दिया। तभी राजीव ने एक अजीब हरकत की। उसने मुन्नी का हाथ पकड़ा और उसे उस गीले लंड पर रख दिया । थूक से सने गरम लंड को पकड़ते ही मुन्नी को झटका सा लगा। और वो उसे वैसे ही सहलाने लगी थी जैसे वो राजीव का पैंट के ऊपर से सहला रही थी। अब उसके दोनों हाथ में एक एक लंड था जिसे वो दबा कर मस्ती से भर रही थी। उसकी पैंटी बहुत गीली हो चुकी थी मानो वो पेशाब कर दी हो।

तभी राजीव की निगाह चारु पर पड़ी तो वो मुस्कुरा उठा । चारु की एक चूचि उस अधेड़ के हाथ में थी और उसका एक हाथ उसकी स्कर्ट में घुसा हुआ था । वो मस्ती में ख़ुद भी उस अधेड़ का लंड दबा रही थी पैंट के ऊपर से । राजीव दोनों बहनों की मस्ती देखकर बहुत ख़ुश हो गया। वो सोचा कि अब चारु को जवानी का पाठ पढ़ाने का समय आ गया है। वैसे मुन्नी भी लाइन में खड़ी है – वो सोचा। अब वो मुन्नी की पैंटी में हाथ अंदर किया और मस्ती से भर गया। क्या मासूम सी बुर थी और कितने नरम रोएँ थे। उफफफफ एक ऊँगली भी अंदर नहीं गयी। क्या मज़ा आएगा इस छेद को खोलने में- वो सोचा। मुन्नी भी उइइइइइइइ कहकर अपनी गाँड़ पीछे की मानो ऊँगली के हमले से बचने की कोशिश करी हो। वो लड़का राजीव की हरकत देखकर मुस्कुराया और राजीव को आँख मारा और मानो बोला कि लगे रहो अंकल।

इसी तरह की मस्ती में फ़िल्म ख़त्म होने वाली थी। अब सबने अपने कपड़े ठीक किए। राजीव ने अपना रुमाल मुन्नी को दिया तो उसने अपना गीला हाथ साफ़ किया। जब रौशनी हुई तो सभी के चेहरे वासना से लाल थे।

चारु बाहर आकर बोली: अंकल वाशरूम जाना है।

मुन्नी: मुझे भी।

राजीव: ठीक है किसी रेस्तराँ में चलते हैं । वहीं सू सू कर लेना।

वो जान बूझकर सू सू बोला। वो दोनों शर्मा गयीं।

अब बाहर आते हुए राजीव ने दोनों लड़कियों के बीच चलते हुए उनकी कमर में हाथ डाले और उनके कमर को सहलाते हुए कार तक पहुँचा। फिर कार रेस्तराँ में रोका और वो अंदर गए। अंदर एक कोने की टेबल पर बैठे और वेटर को बुलाया और पूछा: वाश रूम कहाँ है?

वेटर ने हाथ से इशारा किया। तो दोनों लड़कियाँ खड़ी हो गयीं।

वेटर: आप एक के बाद एक जाओ क्योंकि एक ही वाशरूम है।

चारु: मुझे ज़ोर की आयी है। कहकर वो पहले चली गयी।

राजीव सोफ़े में मुन्नी के साथ बैठा था। वो उसकी जाँघ सहलाकर और आँख मारकर बोला: बिटिया फ़िल्म में मज़ा आया ना?

मुन्नी शर्मा कर सिर झुका ली।

राजीव ने पूरी बदमाशी पर उतरते हुए उसके स्कर्ट को उठाकर उसकी पैंटी में हाथ डाला और फिर से कहा: बिटिया यहाँ मस्त खुजली हुई ना? वो पूरी बुर को पंजे से दबाते हुए बोला।

मुन्नी: आऽऽऽऽह अंकल छोड़िए ना, मेरी सू सू निकल जाएगी।

राजीव जो कर रहा था किसी को दिखाई नहीं दे सकता था क्योंकि उसको टेबल का कवर छुपा रहा था। अब वो बोला: बेटी वाशरूम में जाकर इसको ऊँगली से ऐसे ही सहलाना। तुमको बहुत मज़ा आएगा। फिर जब तुम झड़ोगी ना तो तुमको स्वर्ग का मज़ा आएगा। ठीक है ना? ऐसे ऐसे करते रहना। वो अपनी ऊँगली को उसकी बुर के छेद और उसकी क्लिट पर चलाता हुआ बोला। मुन्नी बड़बड़ाने लगी: सीइइइइइइइइ उइइइइओओओ अंकल हाऽऽऽऽऽऽऽथ निकाआऽऽऽऽऽऽऽलो नाआऽऽऽऽऽऽऽ। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ।

तभी चारु वापस आयी तो वो बहुत रिलेक्सेड दिख रही थी। उसे देखकर मुन्नी खड़ी हुई और वाशरूम की ओर भागी।

राजीव चारु को अपने पास बिठाया और उसकी जाँघ सहलाकर उसकी बुर को पैंटी के ऊपर से दबाकर बोला: बेटी लगता है बुर में ऊँगली चला कर आ रही है। बहुत रिलेक्सड लग रही हो।

चारु हड़बड़ाकर: क्या क्या बोल रहे हैं आप? अंकल हाथ हटाइए ना कोई देख लेगा।

राजीव: अभी हटा लूँगा बस इतना बता दो कि बुर में ऊँगली करके आयी हो ना?

चारु: हाँ हाँ बस अब छोड़ दीजिए प्लीज़ ।

राजीव ने उसकी बुर से हाथ हटाया और बोला: अच्छा लो हाथ हटा दिया।

तभी मुन्नी आयी और वो भी अब रिलेक्सड लग रही थी।

वो आकर उसके सामने बैठी। तभी वेटर नाश्ता लाया और सबने खाया। चारु बोली: मुझे आइस क्रीम खानी है। अब वो दो सोफ़्टि ले आयी और दोनों लड़कियाँ उसे चाटने लगी। राजीव मुस्कुराया और सोचा कि जल्दी ही ये उसका लौड़ा ऐसे ही चूसेंगी।

 
घर जाने के बाद वह कपड़े बदला और डिनर के बाद वो अपने कमरे में चला गया। सोने से पहले उसे ध्यान आया कि कमरे में पानी नहीं है। वह किचन जाकर फ्रिज खोला तभी उसे पीछे से कुछ आवाज़ आयी । उसने देखा कि मुन्नी नायटी में खड़ी थी। वो भी शायद पानी लेने ही आयी थी।

राजीव: बिटिया पानी चाहिए क्या?

मुन्नी: जी अंकल। राजीव ने उसके लिए भी एक बोतल निकाली और उसे देते हुए बोला: तो ये बताओ रेस्तराँ के वाशरूम में ऊँगली की या नहीं? वह उसकी बुर की ओर इशारा करते हुए बोला।

मुन्नी शर्म से लाल होकर: क्या अंकल कितनी गंदी बात करते हैं आप?

राजीव: अरे इसमें गंदा क्या है? सब लड़कियाँ करती हैं। बताओ ना उस समय तुम बहुत गरम हो गयी थी। जैसे मैंने करके बताया था किया या नहीं?

मुन्नी सिर झुकाकर: जी हाँ किया।

अब राजीव मुस्कुराकर उसके पास आया और उसको अपनी बाँहों में भरकर उसके गाल चूमकर बोला: वाह मज़ा आ गया। इसका मतलब है अब तुम जवान हो गयी हो। अब जवानी का मज़ा लो मेरी रानी बिटिया। अब वो उसको एक बच्ची की तरह गोद में उठाया और किचन के प्लाट्फ़ोर्म पर बिठाया। अब उसकी चूचियाँ उसके आँखों के सामने थीं। वो हड़बड़ा कर बोली: अंकल प्लीज़ छोड़िए ना। कोई आ जाएगा।

राजीव उसकी दोनों चूचियों पर एक एक हाथ रखा और हल्के से दबाते हुए बोला: अरे सब सो रहे हैं। मज़ा करो। फिर वह झुककर उसके होंठ चूसने लगा। मुन्नी को कोई भी मर्द इस तरह से पहली बार चूम रहा था। वो सिहर उठी और बोली: उफफफफ अंकल छोड़िए ना। आऽऽऽहहह प्लीज़।

उधर राजीव ने उसकी नायटी जो अब तक उसकी जाँघ तक उठ गयी थी, को और उठाया और उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी बुर को सहलाया और बोला: उफफफ बिटिया तुम तो मस्त जवान हो गयी हो। देखो कितनी फूल गयी है तुम्हारी बुर। फिर पैंटी की साइड से उँगलियाँ अंदर डालकर बोला: उफफफफ क्या रेशम से नरम बाल हैं तुम्हारे।

मुन्नी का बदन सिहर उठा और वो बोली: उइइइइइइ अंकल प्लीज़ छोओओओओओओओओड़िये नाआऽऽऽऽऽऽ। आऽऽऽऽऽहहह । अब राजीव की ऊँगली उसकी बुर के अंदर थोड़ी सी घुसी थी।

मुन्नी ने राजीव को पीछे किया और प्लेटफ़ार्म से कूदी और क़रीब करींब भागकर अपने कमरे में घुस गयी। राजीव ने अपनी ऊँगली चाटी और मुस्कुराते हुए अपने कमरे में चला गया।

अगले दिन इतवार था इसलिए शिवा घर में था। दोपहर को खाना खाकर सब आराम करने चले गए। शिवा राजीव के कमरे में आकर कुछ बिज़नेस की बातें करने लगा और कुछ सलाह माँगने लगा।

उधर मालिनी शिवा का इंतज़ार की और जब वो नहीं आया तो वह उठकर राजीव के कमरे में जाने के लिए निकली । वो रास्ते में चारु और मुन्नी के कमरे में खिड़की से झाँकी तो देखी कि दोनों सोयी हुई लगीं। वो अब राजीव के कमरे में घुसी।

उधर चारु ने मालिनी को अपने कमरे में झाँकते हुए देखा था, वो सोची कि दीदी मेरे कमरे में क्यों झाँकी? वो फिर से सोने की कोशिश करने लगी।

इधर मालिनी जब कमरे में पहुँची तो राजीव बिस्तर पर बैठा था और शिवा पास ही एक कुर्सी पर बैठा था। मालिनी अंदर आती हुई बोली: आज बाप बेटा क्या सलाह कर रहें हैं इतना? फिर शिवा से बोली: आपको सोना नहीं है क्या?

राजीव ने मालिनी की बड़ी हो चुकी गाँड़ पर हाथ फेरते हुए कहा: अरे बेटी अभी चला जाएगा ना। कुछ काम की बात कर रहा है ना। मालिनी भी मज़े से अपनी गाँड़ सहलाने का आनंद लेते हुए बोली: ठीक है मैं भी सुनु ज़रा आप दोनों क्या बातें कर रहे हो?

राजीव उसके मोटे पेट पर हाथ फेरा और बोला: चलो काम की बात ख़त्म करो। अब ये बताओ कि ये श्रीमान कब बाहर आएँगे?

मालिनी हँसकर : अभी एक महीना है पापा।

शिवा भी उसके दूसरे चूतर को दबाता हुआ बोला: पापा बस अब बहुत हो गया। सच में ये बाहर आए तो हम फिर से मालिनी की चुदाई चालू करें।

राजीव हँसकर: सच बेटी उपवास ज़्यादा लम्बा नहीं हो गया?

मालिनी भी हँसी और राजीव की गोद में बैठती हुई बोली: हाँ पापा सच में बहुत लम्बा हो गया। मैं भी बहुत मिस करती हूँ। राजीव ने उसके गाल चूमे और उसकी एक छाती दबाकर बोला: बेटी अब रहा नहीं जाता।

शिवा: मालिनी पापा का लंड चूस दो ना। इतना तड़प रहें हैं तो।

मालिनी: मैंने कभी मना किया है क्या? उनको चूसवाना होगा तो ख़ुद ही बोलेंगे ना। है ना पापा?

अब शिवा कुर्सी से उठा और हाथ बढ़ाकर उसकी दूसरी चूचि दबा दिया और बोला: ठीक है पापा आप जानो और आपकी बहु । मैं क्यों बीच में बोलूँ?

मालिनी शिवा के लंड को लोअर के ऊपर से दबाई और बोली: आप कहाँ जा रहे हो। यहीं रहो और उसने थोड़ा ज़ोर से उसका आँड़ दबा दिया। शिवा की चीख़ निकल गयी: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या करती हो? दुखता है ना?

जब शिवा चीख़ा ,ठीक उसी समय चारु बाहर हाल में आयी थी क्योंकि उसे नींद नहीं आ रही थी। वो सोची कि मैं टी वी देख लेती हूँ। वो शिवा की आवाज़ से चौंकी और उस कमरे की खिड़की के पास आकर धीरे से पर्दा हटाई और अंदर झाँकी। अंदर का दृश्य देखकर मानो उसकी आँखें बाहर ही आ गयीं।

अंदर मालिनी राजीव की गोद में बैठी थी और वो उसकी एक चूचि दबा रहा था और उसके गाल भी चूम रहा था। शिवा सामने खड़ा नीचे होकर मालिनी के होंठ चूस रहा था और मालिनी शिवा का लंड सहला रही थी लोअर के ऊपर से ।शिवा उसकी दूसरी चूचि दबा रहा था। शिवा अपनी जीभ मालिनी के मुँह में डाल दिया था और मालिनी उसे चूसने लगी। अब मालिनी ने शिवा का लोअर नीचे किया और उसका लंड बाहर निकाला और उसे चूसने लगी।

चारु हैरानी से देख रही थी कि उसकी दीदी अपने ससुर की गोद में अधनंगी बैठ कर अपनी चूचि दबवाते हुए अपने पति का लंड चूस रही है। वो सोची कि ये क्या बड़े लोग ऐसे होते हैं? उसका हाथ अपने आप अपनी बुर पर चला गया और वो उसे रगड़ने लगी।

उधर मालिनी मज़े से शिवा का लंड चूस रही थी। अब राजीव ने उसकी क़ुर्ती उतार दी और अब वो सिर्फ़ ब्रा में थी। उफफफफ कितने बड़े हो गए थे दीदी के दूध । पहले तो बहुत छोटे होते थे। लगता है अंकल और जीजा ने दबा दबा कर बहुत मस्त कर दिए हैं-वो सोची।

अब उसकी ब्रा का हुक भी राजीव ने खोला और उसके गोरे पुष्ट दूध सबके सामने थे। अब राजीव दोनों को हाथ में लेकर दबाने लगा। अचानक शिवा बोला: जानू लंड को अपनी चूचियों के बीच लो ना।

मालिनी ने उसका लंड अपने मुँह से बाहर किया और शिवा ने उसको बड़ी बड़ी चूचियों के बीच में डाला। राजीव उन दोनों को दबाकर शिवा के लंड को दबोच लिया उसकी चूचियों के बीच में। अब शिवा अपनी कमर हिलाने लगा और राजीव उसकी चूचियाँ दबाकर शिवा के लंड को घर्शन का मज़ा देने लगा। मालिनी जब उसका लंड ऊपर आता तो उसे जीभ और होंठों से चूस और चाट लेती ।

फिर राजीव बोला: चलो अब इसको बिस्तर पर लिटाओ । मुझे भी तो मज़ा लेना है। शिवा पीछे हटा और मालिनी खड़ी हुई। राजीव ने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और सलवार नीचे गिर गयी। मालिनी ने पैंटी नहीं पहनी थी सो वो पूरी नंगी हो गयी। क्या फूला हुए पेट था। राजीव ने प्यार से पेट सहलाया और फिर उसकी मस्त चूचियाँ दबाकर चूसा। शिवा उसकी गाँड़ सहलाकर बोला: पापा देखो मालिनी की गाँड़ कितनी बड़ी हो गयी है।

राजीव ने उसे घुमाया और गाँड़ सहलाकर बोला: हाँ बेटा सच में बहुत क़ातिल हो गयी है बहू की गाँड़।

चलो बेटी अब लेटो बिस्तर पर। अब मालिनी लेटी और शिवा और राजीव भी अब नंगे हो गए।

चारु की तो साँस रुक ही गायी। हे भगवान कितने बड़े लंड हैं बाप और बेटे के। करन अंकल का तो बहुत पतला और छोटा था इनसे। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कितना दुखेगा जब दीदी के अंदर जाएगा- वो सोची। पर उसे ये समझ नहीं आ रहा था कि उसकी दीदी अपने ससुर से क्यों ये सब करवा रही थी।

अब मालिनी के अग़ल बग़ल दोनों आदमी लेटे और उसकी एक एक चूचि दबाकर उसको चूमने लगे। फिर वो उसकी एक एक चूचि चूसने लगे। क़रीब १० मिनट चूसने के बाद राजीव उसे करवट में लिटाया और उसके मुँह के सामने अपना लंड रखा और वो उसे चूसने लगी। उसकी बड़ी बड़ी गाँड़ के बीच में शिवा ने अपना लंड फँसाया और वहाँ रगड़ कर मस्ती से बोलने लगा: आऽऽऽऽऽऽह जाऽऽऽऽऽऽन क्या मस्त गाँड़ है। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ एकदम चिकनी। आऽऽऽऽऽऽऽहहह करके वो उसकी गाँड़ की दरार में धक्के मारने लगा। थोड़ी देर बाद शिवा आऽऽऽऽऽऽऽह कहकर उसकी गाँड़ की दरार में झड़ने लगा।

अब राजीव भी उठकर अपना गीला लंड जो मालिनी के थूक से सना हुआ था लाकर उसकी गाँड़ की दरार में डाला और उसको वहाँ रगड़ने लगा। शिवा का वीर्य वहाँ उसके लिए लूब का काम कर रहा था। अब जल्दी ही वो भी उसके विशाल नितम्बों का सुख लेता हुआ आऽऽऽह करके झड़ गया।

मालिनी: हो गया आप दोनों का? अब मैं वाशरूम जाकर सफ़ाई कर लूँ ?

राजीव: हाँ हाँ बेटी जाकर सफ़ाई कर लो।

शिवा: जान मैं आऊँ क्या सफ़ाई करने में मदद कर दूँगा।

राजीव: अरे नालायक पूछता क्या है? जा उसकी मदद कर दे। वो इतने मोटे पेट के कारण ठीक से झुक भी तो नहीं सकती।

शिवा हँसकर उसके साथ बाथरूम चला गया। राजीव वहीं पड़े तौलिए से अपना लंड पोछने लगा।

चारु की ऊँगली अब उसके बुर पर तेज़ी से चलने लगी। वो राजीव के मुरझाए लंड को भी प्यार से देख रही थी और फिर अपनी चीख़ दबाकर उइइइइइइइ करके झड़ गयी। उसकी पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी। वह भी बाथरूम में जाकर अपनी सफ़ाई की और पैंटी को वॉशिंग मशीन में डाली और अपने कमरे में आकर एक पैंटी आलमारी से निकाल कर पहनी। वो अब भी दीदी के अपने ससुर के साथ सम्बंध को नहीं समझ पा रही थी वो भी जीजाजी के सामने। उफफफफ ये क्या हो रहा है?उसे याद आया कि राजीव अंकल बोले थे कि सबसे बड़ा रिश्ता मर्द और औरत का चुदाई का है और बाक़ी सब रिश्ते बाद में आते हैं। क्या ये सच है? उसे अंकल से इस बारे में और बात करनी होगी।

बाद में मालिनी और शिवा अपने कमरे में चले गए। राजीव भी चारु और मुन्नी की मुनिया के बारे में सोचते हुए सो गया।

फिर २/३ दिन कुछ ख़ास नहीं हुआ क्योंकि राजीव की तबियत थोड़ी सी ख़राब थी।

अब मुन्नी का स्कूल खुल गया था और वो नए स्कूल जाने लगी थी। शिवा के जाने के बाद मालिनी और चारु घर पर रहते थे। राजीव का बुखार अब उतर गया था।फिर भी वो आराम ही कर रहा था।

उस दिन मुन्नी के जाने के बाद मालिनी राजीव के कमरे में आयी और बोली: आपके बीमार होने से और बाहर ना जाने के कारण कई सामान ख़त्म हो गया है। मैं ज़रा बाज़ार जाती हूँ और कुछ सामान ले आती हूँ। चारु यहीं रहेगी अगर कुछ आपको लगे तो उसे आवाज़ दे देना।

राजीव ने मालिनी को अपनी गोद में खींचा और कहा: ना बेटी तुम इस हालत में अब कहीं नहीं जाओगी। फिर उसके गाल चूमा और बोला: मैं अब काफ़ी ठीक हूँ मैं ही सब ले आऊँगा। फिर वो उसे प्यार से गोदी से उतारा और तय्यार होने लगा।

मालिनी: अच्छा मगर आप अकेले मत जाओ। मैं चारु को भी भेज देती हूँ आपके साथ। कोई आपके साथ रहेगा तो मुझे शांति रहेगी।

राजीव: वैसे ज़रूरत नहीं है मगर जैसा तुम चाहो।

थोड़ी देर बाद चारु भी तय्यार होकर आयी। आज उसने एक टाइट स्लीव्लेस टॉप और हिप हगिंग जींस पहनी थी। टॉप से उसकी गहरी नाभि दिखाई दे रही थी। राजीव सोचा कि नाभि इतनी सेक्सी है तो असली छेद कितना सेक्सी होगा। वो उसके पीछे पीछे चलने लगा और मटकती गोल गाँड़ का दर्शन करके मस्त होता गया।

राजीव: बेटी पैदल ही चलोगी या ऑटो कर लें?

चारु: अंकल पैदल ही चलते हैं, इस गली से होकर बहुत पास पड़ेगा।

राजीव मुस्कुराकर उसके साथ चलने लगा और बोला: बेटी उस दिन तो फ़िल्म देखते हुए तुमने बड़ा मज़ा किया?

चारु जानती थी कि अंकल ये बात अकेले में ज़रूर छेड़ेंगे।

वो चुपचाप चलती रही। राजीव फिर से पूछा: बताओ ना बेटी उस अधेड़ आदमी का लंड तुम बड़े प्यार से सहला रही थी। वो भी तुम्हारी बुर सहला रहा था और तुम्हारी चूचि दबा रहा था। मैं समझ गया था कि तुम बहुत मज़े कर रही हो।

चारु जवाब देने से बचने के लिए तेज़ चलने लगी और आगे बढ़ गयी। अब राजीव : बेटी आऽऽऽह ऐसे ही आगे आगे चलो। उफफफफ तुम्हारी गोल गोल गाँड़ क्या मटक रही है।

चारु झटके से रुकी और साथ साथ चलने लगी। अब राजीव ने उसका हाथ पकड़कर दबाया और बोला: बताओ ना मज़ा आया या नहीं उस दिन?

पता नहीं चारु को क्या हुआ वो एक झटके में बोला बैठी: और आपको मज़ा आया या नहीं दीदी के साथ बुरा काम करते हुए?

 
Back
Top