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मैंने कहा- बाबूजी प्लीज़… मुझे पता है आप क्या करना चाहते हैं… प्लीज़ ऐसा मत करिए… यह बहुत लंबा है….बाबूजी प्लीज़… ऐसा मत करना..!
और मैं चीखने लगी।
ससुर जी ने कहा- बहू, तुझे मुझ पर भरोसा होना चाहिए… ऐसा कुछ नहीं होगा और ये सब मैं तुझे मज़े देने के लिए ही कर रहा हूँ।
फिर उन्होंने वो पट्टी जिस पर बॉल लगी हुई थी। मेरे मुँह को ऊपर किया और मेरे बाल पकड़ कर मेरे मुँह में डाल दी और मेरे सर के पीछे वो पट्टी बाँध दी। मैं अब चिल्ला भी नहीं पा रही थी। मुँह के अन्दर वो बॉल थी।
मेरे चिल्लाने पर बस ‘गूं… गूं’ की आवाज़ आ रही थी…!
मैंने सर उठा कर देखा वो बाईब्रेटर पर बेबी आयल लगा रहे थे। फिर वो मेरे पीछे चले गए। मुझे अब कुछ पता नहीं चल रहा था कि वो क्या कर रहे हैं।
तभी उनकी उंगलियाँ मुझे अपनी चूत पर महसूस हुई। उन्होंने 2 उंगलियाँ मेरे अन्दर डाल दी थीं, वो सूखी थीं तो मुझे दर्द होने लगा… मैं ‘गूं… गूं’ करने लगी।
मुझे लगा कि उन्होंने काफ़ी सारा बेबी आयल अपने हाथ में लेकर मेरी चूत के ऊपर डाल दिया और फिर दोनों उंगलियाँ अन्दर-बाहर करने लगे।
अब मुझे उतना दर्द नहीं हो रहा था…तभी मुझे अपनी चूत के होंठों पर उस बाईब्रेटर का एहसास हुआ। बाबूजी हल्के-हल्के उसे मेरी चूत में डाल रहे थे पर उन्होंने उससे अभी ऑन नहीं किया था।
मुझे मेरी चूत में बहुत तेज़ दर्द होने लगा क्योंकि वो बाईब्रेटर करीब 3 इंच मोटा था।
मेरे मुँह से… ‘गूं… गूं’ ही निकल रहा था, मैं चीखना चाहती थी पर मेरा मुँह बँधा हुआ था।
ससुरजी ने मेरे बाल अपने बायें हाथ से पकड़ लिए और अपने दायें हाथ से बाईब्रेटर को मेरी चूत में डालने लगे। मेरी चीख निकल रही थी, पर बाहर आवाज़ नहीं आ पा रही थी। करीब 3 इंच वो बाईब्रेटर अब मेरे अन्दर था। ससुर जी उससे धीरे-धीरे और अन्दर किए जा रहे थे।
‘उफफफ्फ़.. ओह…गगगघ…ओह्ह…!’ बहुत दर्द हो रहा था।
मुझे लगा कि आज मेरी चूत फट जाएगी।
ससुरजी- बहू… तू मेरी कुतिया है और आज तेरी चूत फाड़ दूँगा मैं, बड़ा मज़ा आ रहा है ना और अंदर ले। थोड़ी हिम्मत और रख…
अब उन्होंने एक तेज़ झटका मारा और वो बाईब्रेटर करीब 7 इंच मेरे अंदर समा गया।
मेरी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा, चूत में इतना दर्द हो रहा था कि ऐसा लगता था जैसे किसी ने उसमें लोहे की मोटी रॉड घुसा दी हो।
ससुर जी बाईब्रेटर को मेरी चूत में ही डाल कर मेरे आगे आ गए और मेरा मुँह उठा कर देखने लगे। मेरी आँखों से पानी आ रहा था और मुँह बँधा हुआ था।
मैंने आँखों से ही ससुर जी से अर्ज की क्योंकि मेरे हाथ तो बँधे हुए थे। तभी ससुर जी फिर पीछे गए और करीब एक इंच बाईब्रेटर और अन्दर कर दिया।
मेरी जान निकलने लगी ‘उफफ्फ़…अहह…’ मैं तड़पने लगी।
तभी उन्होंने बाईब्रेटर ऑन कर दिया, वो मेरी चूत के अन्दर हिलने लगा, मुझे बहुत सनसनी होने लगी। मुझे लगा जैसे मेरी चूत से पानी भी बहने लगा था। वो बड़ा अजीब सा एहसास था… मेरी चूत के होंठ एकदम फ़ैल गए थे। मुझे लगा जैसे मेरे चूतड़ अपने आप ही बाईब्रेटर के साथ हिलने लगे। वो बाईब्रेटर का पूरा साथ दे रहे थे। मुझे बाईब्रेटर ऑन करने से थोड़ा दर्द कम हो गया था और मज़ा आने लगा था।
अब ससुर जी मेरे सामने आ गए। तभी उन्होंने मेरा मुँह खोल दिया।
‘उफ़फ्फ़… बाबूजी… प्लीज़… बचाओ मुझे.. उफफफ्फ़.. आहहओह…!’ मैं तड़प रही थी और वो सोफे पर बैठ कर मुझे देखने लगे।
मैंने कहा- प्लीज़ बाबूजी… ओह… बहुत दर्द हो रहा है, थोड़ा सा बाहर निकाल दो… प्लीज़..!
पर उन्होंने कुछ नहीं किया तो मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं… मुझे चूत में अब अजीब सा सुख मिलने लगा। बाईब्रेटर ऑन था। मैं अपने चूतड़ हिला-हिला कर पूरे मज़े लेने लगी।
‘उफ़फ्फ़…ओह..’
तभी ससुर जी ने मेरे बाल पकड़ कर मेरा मुँह ऊपर उठा दिया, मैंने देखा तो होश उड़ गए। उनका लण्ड आज पहली बार मेरी आँखों के सामने था। करीब 7 इंच लंबा और 2 ½ इंच मोटा, एकदम बेसबॉल के बैट की तरह लग रहा था।
उसके ऊपर का सुपाड़ा एकदम टमाटर की तरह लाल था।
ससुर जी- देख मेरा लण्ड कैसा सूखा पड़ा है बहू और तू बाईब्रेटर के मज़े ले रही है..! चल… चूस इसे..!
मैंने कभी अताउल्ला का लण्ड भी नहीं चूसा था, कोई लण्ड कैसे चूस सकता है.. ससुर जी यह क्या कह रहे थे?
मुझे बड़ी घिन आ रही थी, मैंने अपने होंठ नहीं खोले।
तभी ससुरजी ने मेरे बाल पकड़ कर मेरा मुँह ऊपर की तरफ खींच दिया। मैं दर्द से चीखी और तभी उन्होंने अपना लण्ड एक झटके में मेरे मुँह में डाल दिया, मेरी फिर आवाज़ बंद हो गई और मुझे लगा जैसे मेरी साँस ही रुक जाएगी। एकदम गर्म-गर्म लण्ड था उनका।
वो मेरे मुँह में झटके देने लगे, उन्होंने मेरे बाल अभी भी पकड़े हुए थे और पीछे से बाईब्रेटर ने मेरा बुरा हाल किया हुआ था।
ससुर जी- बहू, इससे आराम से चूस… देख तेरे दांत ना लगें इस
और मैं चीखने लगी।
ससुर जी ने कहा- बहू, तुझे मुझ पर भरोसा होना चाहिए… ऐसा कुछ नहीं होगा और ये सब मैं तुझे मज़े देने के लिए ही कर रहा हूँ।
फिर उन्होंने वो पट्टी जिस पर बॉल लगी हुई थी। मेरे मुँह को ऊपर किया और मेरे बाल पकड़ कर मेरे मुँह में डाल दी और मेरे सर के पीछे वो पट्टी बाँध दी। मैं अब चिल्ला भी नहीं पा रही थी। मुँह के अन्दर वो बॉल थी।
मेरे चिल्लाने पर बस ‘गूं… गूं’ की आवाज़ आ रही थी…!
मैंने सर उठा कर देखा वो बाईब्रेटर पर बेबी आयल लगा रहे थे। फिर वो मेरे पीछे चले गए। मुझे अब कुछ पता नहीं चल रहा था कि वो क्या कर रहे हैं।
तभी उनकी उंगलियाँ मुझे अपनी चूत पर महसूस हुई। उन्होंने 2 उंगलियाँ मेरे अन्दर डाल दी थीं, वो सूखी थीं तो मुझे दर्द होने लगा… मैं ‘गूं… गूं’ करने लगी।
मुझे लगा कि उन्होंने काफ़ी सारा बेबी आयल अपने हाथ में लेकर मेरी चूत के ऊपर डाल दिया और फिर दोनों उंगलियाँ अन्दर-बाहर करने लगे।
अब मुझे उतना दर्द नहीं हो रहा था…तभी मुझे अपनी चूत के होंठों पर उस बाईब्रेटर का एहसास हुआ। बाबूजी हल्के-हल्के उसे मेरी चूत में डाल रहे थे पर उन्होंने उससे अभी ऑन नहीं किया था।
मुझे मेरी चूत में बहुत तेज़ दर्द होने लगा क्योंकि वो बाईब्रेटर करीब 3 इंच मोटा था।
मेरे मुँह से… ‘गूं… गूं’ ही निकल रहा था, मैं चीखना चाहती थी पर मेरा मुँह बँधा हुआ था।
ससुरजी ने मेरे बाल अपने बायें हाथ से पकड़ लिए और अपने दायें हाथ से बाईब्रेटर को मेरी चूत में डालने लगे। मेरी चीख निकल रही थी, पर बाहर आवाज़ नहीं आ पा रही थी। करीब 3 इंच वो बाईब्रेटर अब मेरे अन्दर था। ससुर जी उससे धीरे-धीरे और अन्दर किए जा रहे थे।
‘उफफफ्फ़.. ओह…गगगघ…ओह्ह…!’ बहुत दर्द हो रहा था।
मुझे लगा कि आज मेरी चूत फट जाएगी।
ससुरजी- बहू… तू मेरी कुतिया है और आज तेरी चूत फाड़ दूँगा मैं, बड़ा मज़ा आ रहा है ना और अंदर ले। थोड़ी हिम्मत और रख…
अब उन्होंने एक तेज़ झटका मारा और वो बाईब्रेटर करीब 7 इंच मेरे अंदर समा गया।
मेरी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा, चूत में इतना दर्द हो रहा था कि ऐसा लगता था जैसे किसी ने उसमें लोहे की मोटी रॉड घुसा दी हो।
ससुर जी बाईब्रेटर को मेरी चूत में ही डाल कर मेरे आगे आ गए और मेरा मुँह उठा कर देखने लगे। मेरी आँखों से पानी आ रहा था और मुँह बँधा हुआ था।
मैंने आँखों से ही ससुर जी से अर्ज की क्योंकि मेरे हाथ तो बँधे हुए थे। तभी ससुर जी फिर पीछे गए और करीब एक इंच बाईब्रेटर और अन्दर कर दिया।
मेरी जान निकलने लगी ‘उफफ्फ़…अहह…’ मैं तड़पने लगी।
तभी उन्होंने बाईब्रेटर ऑन कर दिया, वो मेरी चूत के अन्दर हिलने लगा, मुझे बहुत सनसनी होने लगी। मुझे लगा जैसे मेरी चूत से पानी भी बहने लगा था। वो बड़ा अजीब सा एहसास था… मेरी चूत के होंठ एकदम फ़ैल गए थे। मुझे लगा जैसे मेरे चूतड़ अपने आप ही बाईब्रेटर के साथ हिलने लगे। वो बाईब्रेटर का पूरा साथ दे रहे थे। मुझे बाईब्रेटर ऑन करने से थोड़ा दर्द कम हो गया था और मज़ा आने लगा था।
अब ससुर जी मेरे सामने आ गए। तभी उन्होंने मेरा मुँह खोल दिया।
‘उफ़फ्फ़… बाबूजी… प्लीज़… बचाओ मुझे.. उफफफ्फ़.. आहहओह…!’ मैं तड़प रही थी और वो सोफे पर बैठ कर मुझे देखने लगे।
मैंने कहा- प्लीज़ बाबूजी… ओह… बहुत दर्द हो रहा है, थोड़ा सा बाहर निकाल दो… प्लीज़..!
पर उन्होंने कुछ नहीं किया तो मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं… मुझे चूत में अब अजीब सा सुख मिलने लगा। बाईब्रेटर ऑन था। मैं अपने चूतड़ हिला-हिला कर पूरे मज़े लेने लगी।
‘उफ़फ्फ़…ओह..’
तभी ससुर जी ने मेरे बाल पकड़ कर मेरा मुँह ऊपर उठा दिया, मैंने देखा तो होश उड़ गए। उनका लण्ड आज पहली बार मेरी आँखों के सामने था। करीब 7 इंच लंबा और 2 ½ इंच मोटा, एकदम बेसबॉल के बैट की तरह लग रहा था।
उसके ऊपर का सुपाड़ा एकदम टमाटर की तरह लाल था।
ससुर जी- देख मेरा लण्ड कैसा सूखा पड़ा है बहू और तू बाईब्रेटर के मज़े ले रही है..! चल… चूस इसे..!
मैंने कभी अताउल्ला का लण्ड भी नहीं चूसा था, कोई लण्ड कैसे चूस सकता है.. ससुर जी यह क्या कह रहे थे?
मुझे बड़ी घिन आ रही थी, मैंने अपने होंठ नहीं खोले।
तभी ससुरजी ने मेरे बाल पकड़ कर मेरा मुँह ऊपर की तरफ खींच दिया। मैं दर्द से चीखी और तभी उन्होंने अपना लण्ड एक झटके में मेरे मुँह में डाल दिया, मेरी फिर आवाज़ बंद हो गई और मुझे लगा जैसे मेरी साँस ही रुक जाएगी। एकदम गर्म-गर्म लण्ड था उनका।
वो मेरे मुँह में झटके देने लगे, उन्होंने मेरे बाल अभी भी पकड़े हुए थे और पीछे से बाईब्रेटर ने मेरा बुरा हाल किया हुआ था।
ससुर जी- बहू, इससे आराम से चूस… देख तेरे दांत ना लगें इस