S
StoryPublisher
Guest
तारिक के घर में सब खाना खाने के लिए डाइनिंग टेबल पर पहुँचे। चारु और शमा ने सिर्फ़ फ़्रॉक ही पहनी थी बिना ब्रा और पैंटी के। राजीव और तारिक सिर्फ़ चड्डी में थे। लड़कियों ने खाना लगाया और जब वो प्लेट्स वगेरह टेबल पर रख रहीं थीं तब दोनों मर्दों ने उनकी फ़्रॉक ऊपर करके मस्ती से उनकी गाँड़ दबायी। चड्डी में अब दोनों के लंड आधे खड़े हो चुके थे। लड़कियों के भी निपल्ज़ तन चुके थे और फ़्रॉक के ऊपर से साफ़ नज़र आ रहे थे। सबने खाना खाया।
खाने के बाद सब सोफ़े पर बैठ कर बातें करने लगे।
राजीव: यार कबसे बिटिया को लगा रहे हो? सील तो तुमने ही तोड़ी होगी ना?
तारिक हँसकर शमा को अपनी गोद में खींचा और उसकी फ़्रॉक ऊपर करके उसकी टाँगें फैला दिया। अब उसकी नंगी बुर राजीव और पास बैठी चारु को साफ़ खुली हुई दिखाई से रही थी। राजीव का लंड तनने लगा। तारिक बोला: मैं इसकी साल भर पहले सील तोड़ा था। याद है ना शमा? वह उसकी बुर सहलाते हुए बोला।
शमा: आऽऽऽह अब्बा सब याद है। बहुत दुखा था पहली बार। कितना ख़ून भी निकला था।
तारिक उसके गाल चूमकर बोला: पर अब तो मज़ा आता है ना!
शमा : जी अब्बा अब तो बहुत मज़ा आता है।
राजीव: कैसे शुरू हुआ सब? आओ चारु तुम भी मेरे गोद में बैठो। अब चारु उसकी गोद में बैठी और वह भी उसकी स्कर्ट उठाकर उसकी टाँगे फैलाकर तारिक और शमा को दिखाकर उसकी बुर सहलाने लगा।
तारिक चारु की बुर को घूरते हुए बोला: क़रीब तीन साल पहले इसकी अम्मी की एक ऐक्सिडेंट में मौत हो गयी थी। इसे सम्भालने के लिए मैंने एक औरत रख ली जो कि घर का काम भी करे और इसकी देखभाल भी करे। उसका नाम निशा था और उम्र क़रीब ३५ साल की थी । वह शादीशुदा थी और सुबह आती थी और रात को अपने घर जाती थी। शमा जवान हो रही थी और इसकी चूचियाँ अब नीबू से बढ़कर छोटे संतरे के आकार की हो गयीं थीं । इसकी अम्मी के जाने के बाद मैंने सेक्स नहीं किया था और बदन की भूक़ बढ़ती जा रही थी। एक दिन मैं दोपहर को जल्दी आ गया। मेरे पास घर की एक चाबी रहती थी। मैं अंदर आया तो घर बिलकुल शांत था। मैं सोचा कि शमा सो रही होगी स्कूल से वापस आकर । जब मैं शमा के बेडरूम में पहुँचा तो मेरे होश उड़ गए। शमा बिस्तर पर लेटी थी और उसकी फ़्रॉक ऊपर हो गयी थी और उसकी ढीली पैंटी के साइड से उसकी बुर का काफ़ी हिस्सा नंगा दिख रहा था। उसकी बुर के पास छोटे छोटी नरम से बाल भी दिख रहे थे। उफ़्फ़्फ़्फ क्या दृश्य था । मैं वैसे भी सेक्स का प्यासा था ही। फिर मेरा ध्यान इसकी सख़्त अमरूदों पर गया जो कि फ़्रॉक से आधे बाहर आकर झाँक रहे थे। पहली बार इसके बारे में मेरे मन में ऐसे विचार आए और मेरा खड़ा हो गया अपनी सगी बेटी की उभरती हुई जवानी देखकर।
वह शमा की बुर सहलाते हुए उसके गाल को चूमकर बोला।
राजीव का लंड अब पूरा तन गया था और चारु अपनी गाँड़ हिलाकर बोली: आऽऽऽह अंकल आपका तो पूरा खड़ा हो गया।
राजीव : ऐसी बात सुनकर खड़ा नहीं होगा क्या? हाँ फिर क्या हुआ?
तारिक: मैं अपने आप को कंट्रोल किया और दूसरे कमरे में गया तो वहाँ का दृश्य और भी उत्तेजक था। मेरे बेडरूम में शांति टी वी पर ब्लू फ़िल्म देख रही थी। वह मेरी सी डी के कलेक्शन में से एक फ़िल्म लेकर डीवीडी प्लेअर में लगाई हुई थी। उसकी सलवार पूरी नीचे थी और वह अपनी बुर में दो ऊँगलियाँ डालकर उइइइइइइ सीईईई कर रही थी। मैं काफ़ी देर तक उसे देखता रहा। तभी उसका फ़ोन बजा। वह बोली: हेलो।
वो:——-/-/
शांति: हाँ अभी खाना खाया। अभी बेबी यानी शमा के साथ टी वी देख रहीं हूँ।
वो:-/-/—
शांति अपनी ऊँगली हिलाती हुई: हाय्य्य्य्य नहीं कुछ नहीं ऊँगली दब गयी सब ठीक है।
वो:-/-///—-
शांति: हाँ हाँ रात को कर लेना। मैंने कभी मना किया है। तुम ही तो थकावट का बोल कर सो जाते हो। आऽऽऽह्ह्ह । वह अब शायद झड़ना चाहती थी। वह बोली: चलो रात को जो चाहे कर लेना। अभी रखती हूँ।
वो:—///—-
शांति: हाँ हाँ दवाई लगा लूँगी ऊँगली में। ज़्यादा नहीं लगी है। बाई । वह फ़ोन काटी और अपनी एक चूची को कुर्ते के ऊपर से दबाकर अपनी बुर में फिर से तीन उँगलियाँ डालकर हिलाने लगी। अब मुझसे नहीं रहा गया। मैं अंदर आया और वह उछल पड़ी और कपड़े ठीक करने लगी। मैं बोला: ये क्या हो रहा है मेरे कमरे में? वह घबरा कर बोली: कुछ नहीं साहब बस कपड़े ठीक कर रही थी।
मैंने कहा: और ये टी वी पर क्या चल रहा है? वहाँ अब एक आदमी पर दो औरतें चढ़ीं हुई थीं और आवाज़ के साथ चुदाई चालू थी। वह घबरा कर रोने लगी। मैंने उसे देखा और बाहों में जकड़ लिया। फिर उसके होंठ चूमते हुए बोला: क्या बात है बहुत गरम हो रही हो? चूत में उँगलियाँ कर रही हो? अरे हमारा लंड है ना ऊँगली की क्या ज़रूरत है रानी?
मैंने कुर्ते के ऊपर से उसकी चूची दबाई और ठोस चूची के मज़े से भर गया। मैं बोला: रानी क्या पति सही से नहीं चोदता?
वह शर्मा कर; जी छोड़िए ना साहब । शर्म आती है।
मैंने महसूस किया कि मेरे चुम्बन और चूचि मरदन से वह गरम हो रही थी। मैंने अपना एक हाथ उसकी खुली सलवार के अंदर डाला और पैंटी के अंदर से उसकी पूरी गीली चूत पर सहलाना शुरू किया। अब वह चुपचाप मज़ा ले रही थी। विरोध बंद हो चुका था। फिर मैंने उसे नंगी किया और ख़ुद भी नंगा हो गया। मैंने उसे अपने ऊपर उलटा लिटा किया ताकि हम ६९ की पोसीजन में आ गये। अब मैं उसकी बुर चूस रहा था और वह मेरा लंड। उसके लंड चूसने से पता चल रहा था कि उसे चूसने में बहुत मज़ा आता है। अब मैंने उसे नीचे किया और उसके ऊपर चढ़कर उसकी चुदाई शुरू की। वो बहुत ज़ोर ज़ोर से आऽऽऽऽह उइइइइइइ चिल्लाने लगी। मैं भी कई दिनों के बाद चोद रहा था इसलिए ख़ुद भी उत्तेजना से भरकर आऽऽऽऽह ह्म्म्म्म्म चिल्लाए जा रहा था। हम चुदाई में इतने मस्त थे कि हम भूल ही गए कि साथ वाले कमरे में शमा सो रही है।
अब शमा भी बोल उठी: और अंकल मेरी नींद खुली क्योंकि बहुत अजीब अजीब सी आवाज़ें आ रहीं थीं । मैं उठकर अब्बा के कमरे में आयी और खिड़की से झाँकी -तो देखा कि टी वी में एक सेक्सी फ़िल्म लगी थी और उधर बिस्तर पर अब्बा और शांति अपनी फ़िल्म चला रहे थे।
यह कहकर वह हँसने लगी। तारिक ने उसकी बुर को मसला और वह हाऽऽऽऽय अब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्बाऽऽ दुखता है ना बोल पड़ी।
तारिक: हाँ तभी मेरी निगाह खिड़की पर गयी और वहाँ इसको देखकर मैं थोड़ा हड़बड़ा गया। पर अब मै झड़ने वाला था इसलिए रुका नहीं गया और शमा की आँखों में देखते हुए उसकी ज़बरदस्त चुदाई करते हुए मै झड़ने लगा। वह भी चिल्लाकर झड़ रही थी। उसके अपनी जाँघें भींचकर मेरे लंड को अपनी बुर में मस्त जकड़ लिया था। अब मैं उसके ऊपर से हटा और उसके बग़ल में लेट गया। फिर मैंने खिड़की की ओर देखा तो शमा वहाँ नहीं थी। मैंने शांति की चूची दबाकर कहा: तुम तो शादीशुदा हो फिर क्यों ऊँगली डाल रही थी बुर में?
शांति: साहब मेरा पति मुझे संतुष्ट नहीं कर पता। वह बहुत जल्दी झड़ जाता है। पाँच दस धक्के मारता है और सी सी करके झड़ जाता है और मैं प्यासी रह जाती हूँ।
मैंने उसके होंठ चूसे और कहा: चलो अब मेरे से चुदवा लिया करना। मैं भी प्यासा हूँ और तुम भी। पर एक दिक़्क़त आ गयी है।
निशा मुझसे लिपटकर मेरा लंड सहलाकर बोली: कैसी दिक़्क़त साहब ?
मैं बोला: अरे शमा ने हमारी चुदाई देख ली है।
निशा: ओह ये तो गड़बड़ हो गयी साहब । अब क्या करेंगे?
मैं: पता नहीं । शायद वह ग़ुस्सा होगी मेरे से । चलो जाकर समझाता हूँ उसे।
मैं उठकर कपड़े पहना और बाहर आकर शमा के कमरे में आया। शमा पेट के बल लेटी हुई थी और चुपचाप रो रही थी। मैंने आकर उसके पास बैठा और उसकी पीठ सहला कर बोला: बेटी नाराज़ हो अपने अब्बा से?
ये चुप रही और मैं झुका और उसके गाल सहलाकर बोला: बेटी रो रही हो? एक बात बोलूँ ?
शमा: जी अब्बा।
मैं: बेटी देखो मैं एक मर्द हूँ और मेरी शारीरिक ज़रूरतें हैं जो तुम्हारी अम्मी पूरी करती थी। अब उनके ना होने से मैं थोड़ा परेशान रहता हूँ। आज निशा को जब अपनी जवानी से खेलते हुए देखा तो मानो पागल हो गया। वो भी प्यासी है क्योंकि उसका पति उसको संतुष्टि नहीं कर पाता। मैं बोले जा रहा था और शमा मुझे ऐसी निगाहों से देख रही थी कि मानो कुछ समझ नहीं आ रहा हो। मुझे अपनी बेवक़ूफ़ी पर हँसी आयी। ये बेचारी कमसिन इन बातों को क्या समझेगी।
पर तब मैं हैरान रह गया जब ये एकदम से उठी और आकर मेरे तरफ़ देखते हुए अपनी टांगों को फैलाकर मेरी गोद में बैठ गयी और मेरे गले में अपनी बाँह डालकर बोली: अब्बा मैं कुछ नहीं जानती बस आप निशा को अभी निकालो। और अम्मी की ज़िम्मेदारी मैं निभाऊँगी निशा नहीं। मैं तो अवाक् सा होकर इसकी तरफ़ देखता रह गया। उसकी सख़्त चूचियाँ मेरे सीने से सटी हुईं थीं। उसकी बुर मेरे सोये हुए लंड पर थी और उसकी एक एक टाँग मेरे कूल्हों को मानो जकड़ी हुई थी। मेरा हाथ उसकी पीठ सहलाने लगा और मैं बोला: बेटी तुम अपनी अम्मी की सब ज़िम्मेदारियाँ निभा सकती हो सिवाय इसके जो मैं निशा के साथ कर रहा था। मेरा हाथ उसकी ब्रा के स्ट्रैप पर पड़ा और मेरे अंदर अहसास हुआ कि एक कमसीन जवानी मेरे गोद में बैठी है। अब मेरे लंड ने अपना सर उठाना शुरू कर दिया था।
तभी शमा ने मानो बम फोड़ा और मेरी आँखों में देखकर बोली: अब्बा वह काम भी मैं ही करूँगी आपके साथ, जो आप निशा के साथ कर रहे थे।
मुझे तो काटो ख़ून नहीं। ये क्या बोल रही है ये नादान लड़की। मैंने कहा: बेटी मैं तुम्हारा अब्बा हूँ हम ये नहीं कर सकते। समाज और धर्म इसकी इजाज़त नहीं देते।
शमा: अब्बा अगर सलमा कर सकती है तो मैं क्यों नहीं?
मैं अवाक् होकर उसे देखते रह गया। सलमा उसकी ममेरी बहन है। इसका मतलब है कि क्या सलमा को उसका बाप याने मेरा साला ज़फ़र चोद रहा है?
मैं: तुमको कैसे पता कि सलमा ज़फ़र से चु— मतलब ये सब करती है?
शमा: अब्बा जब वो पिछले महीने आयी थी तब मैंने मज़ाक़ मज़ाक़ में पूछा था कि तेरी छातियाँ इतनी बड़ी कैसे हो गयीं हैं अभी से ? किसी से दबवाती है क्या? मेरे स्कूल में कई लड़कियाँ बताती हैं कि जो अपनी छातियाँ दबवाती हैं उनकी बड़ी हो जाती हैं । वो हँसने लगी और फिर बहुत पूछने से उसके मुँह से निकल गया कि वो अपने अब्बा से मज़ा ले रही है।
मेरा लंड अब पूरा तन गया था और शमा अब मेरी गोद में उसे पूरा अहसास कर रही थी। वह अपनी गाँड़ हिलाई और मुझे समझ आ गया था कि उसे समझ में आ गया है कि ये मेरा लंड ही है जो उसकी बुर से टकरा रहा है। फिर भी मैं बोला: बेटी देखो मुझे विश्वास नहीं आ रहा है। ज़फ़र भाई ऐसा कैसे कर सकते हैं।
शमा: अब्बा आप उनसे ही पूछ लो ना। फ़ोन कर लो।
मैंने ज़फ़र को फ़ोन लगाया: यार ज़फ़र कैसे हो?
ज़फ़र: मस्त हूँ भाई जान। आप कैसे हो? शमा ठीक है ना?
मैं: अरे साले सांब शमा के लिए ही फ़ोन किया है। वह कह रही है कि वह अपनी मम्मी की सब ज़िम्मेदारियाँ निभाना चाहती है। मैंने उसे समझाया कि एक के अलावा वह सभी ज़िम्मेदारी निभा सकती है। पर वह नहीं मान रही है। एक ज़िम्मेदारी समझे ना वही मर्द और औरत वाली।
ज़फ़र की आवाज़ बंद सी हो गयी। वह बोला: भाई जान इसमें मैं क्या बोल सकता हूँ। आपने मुझे ये बताने को फ़ोन किया क्या?
मैं: अरे यार मैंने भी शमा को समझने की कोशिश की है कि बाप बेटी में यह रिश्ता नहीं हो सकता। पर वह तुम्हारा और सलमा का उदाहरण दे रही है।
ज़फ़र को फिर से साँप सूंघ गया। वह चुप रहा।
मैं: देखो यार अगर सच भी है तो मैं किसी को बोलने वाला तो हूँ नहीं। अब सलमा के मुँह से ये निकल गया। तुम उसे मारना नहीं। बच्ची है वह भी ना।
ज़फ़र ने गहरी साँस ली और बोला: हाँ भाई सच है। पिछले एक साल से मै उसे चो- मतलब कर रहा हूँ। पर ये लड़की भी ना कोई बात इसके पेट में पचती ही नहीं।
मैं: अरे भाई चलो कोई बात नहीं। ये मेरे पास भी सीक्रेट ही रहेगा। पर ये तो बताओ भाभी को पता है?
ज़फ़र: हाँ सब कुछ उसकी रज़ामंदी से ही हुआ है। असल में मुझे सलमा के स्कूल बैग से ऐसी किताबें मिली जिनमे खुल कर चुदाई हो रही थी। जब मैंने उसे डाँटा तो वह रोने लगी।बाद में उसने अपनी अम्मी को बताया कि उसे सेक्स करने की बहुत इच्छा होती है और वो चार पाँच दिनों में ही किसी लड़के से चुदवाने वाली थी। बस तभी हमने यह तय किया कि वह बाहरवालों से चुदवाए इससे तो अच्छा है कि घर की बात घर में ही रहे। वैसे भी सलमा की अम्मी की तबियत काफ़ी ख़राब रहती है। इसलिए मुझे भी खुराक की कमी हो रही थी। इस तरह क़रीब साल भर से सलमा मुझसे चुद रही है। यही सच है।
उसकी बात सुनकर मेरा लंड तन कर दर्द कर रहा था और मेरा एक हाथ उसकी पीठ से होकर उसकी गाँड़ की गोलायियाँ नापने लगा था।
अब मैं ओह चलो रखता हूँ कहकर फ़ोन बंद किया और अब दोनों हाथ से उसकी गाँड़ सहलाने लगा। फिर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी के अंदर डाला और पूरे नंगे चूतडों को दबाकर मस्ती से भरने लगा। मेरे होंठ अब शमा के होंठ चूसने लगे थे।
तभी शमा बोली: अब्बा निशा को निकालो अभी के अभी। वह हमारे घर में अब काम नहीं करेगी।
मैं शमा की ज़िद के आगे झुका और उसे अपनी गोद से हटाया। मैंने अपने लंड को एडजस्ट किया जिसे शमा ध्यान से देख रही थी। फिर मैं आलमरी से पैसे निकाला और किचन में जाकर निशा से कहा: देखो निशा सब गड़बड़ हो गया है। शमा ने हमको देख लिया है और वह तुम्हें निकालने की ज़िद पर अड़ गयी है। इसलिए ये तुम्हारी तनख़्वाह और ये ऊपर से दो हज़ार लो और कल से काम पर नहीं आना। वह चुपचाप पैसे लेकर रोते हुए घर से बाहर चली गयी। मुझे ख़राब लगा पर मैं मज़बूर था।
मैं वापस आया तो शमा फिर से लेट गयी थी। मैं उसके पास आकर बोला: बेटी एक बार फिर से सोच लो। ये ग़लत होने जा रहा है। एक बार हम आगे बढ़ गए तो वापसी नहीं हो सकेगी। अभी भी सोच लो।
पर शमा पर तो भूत सवार था। वह मुझे अपने ऊपर खींचकर मेरे होंठ पर अपने होंठ रख दी और मेरे हाथ भी उसकी सख़्त चूचियों पर आ गए। उसके बाद कहाँ रुक सकते थे। बस वह दिन है और आज का दिन है हम दोनों बाप बेटी बिना चुदाई के रह ही नहीं सकते। हैं ना शमा बेटी? अब तारिक उसकी फुद्दी सहलाकर बोला।
शमा: जी अब्बा ।
राजीव की गोद में चारु बैठी थी और वह भी उसकी बुर सहला रहा था। राजीव बोला: यार तुम्हारी कहानी तो बड़ी गरम कर गयी मुझे। आऽऽह शमा बेटी आओ मेरे पास। उफ़्फ़्फ क्या मस्त हॉट लौंडिया हो तुम।
तारिक भी चारु को बोला :आओ बिटिया मेरे पास ।
लड़कियाँ अदल बदल हो गयीं। राजीव ने शमा को अपनी गोद में उलटा लिटाया और उसकी फ़्रॉक ऊपर करके उसके मस्त चूतडों को सहलाने लगा। उसकी देखा देखी तारिक ने भी चारु की गाँड़ सहलाना शुरू कर दिया। दोनों लौंडियाँ मस्ती ले रहीं थीं अब राजीव शमा के चूतडों को फैला कर उसके छेद को सहला कर मस्ती से बोला: आऽऽह भाई क्या मस्त गाँड़ है बिटिया की। मस्त खुली हुई है। फिर वह उसके छेद पर थूका और थूक से गीली अपनी दो उँगलियों को उसकी गाँड़ में डालकर अंदर बाहर करते हुए बोला: उफ़्फ़्फ कितनी टाइट गाँड़ है बिटिया की। मज़ा आएगा मारने में।
तारिक भी अब चारु की गाँड़ में एक सूखी ऊँगली डाला और बोला। आऽऽह चारु की तो बिलकुल टाइट है।
राजीव: यार क्रीम लगाकर मारना। वरना बेचारी मर जाएगी।
तारिक: हाँ यार । बहुत मस्त गाँड़ है । चलो बेडरूम में चलते हैं और मज़े करते हैं।
राजीव: यार एक ही बिस्तर पर इनकी लेते हैं।
तारिक: चलो मेरे बेडरूम में चलते हैं। वो दोनों उन लड़कियों को गोद में उठाकर बेडरूम में ले गए।
तारिक ने चारु की फ़्रॉक उतारी और उसकी चूचियाँ चूसने लगा। राजीव भी शमा की फ़्रॉक निकाल कर चूचियाँ चूसने लगा। अब तारिक ने चारु से घोड़ी बनने को कहा और वो उसे घोड़ी बनाकर बिस्तर के कोने में लेकर आया और झुक कर उसकी गाँड़ को ऊपर किया और दरार में मुँह डालकर वहाँ चुम्बन लेने लगा। फिर जीभ से गाँड़ सहलाकर अपनी जीभ से कुरेदते हुए उसकी बुर भी चाटने लगा। चारु आऽऽऽऽह चिल्ला रही थी। राजीव ने भी यही शमा के साथ करने लगा और वह भी उइइइइइ चिल्ला उठी। थोड़ी देर में दोनों लौंडियों की बुर पानी छोड़ने लगीं थीं ।अब तारिक उठा और जाकर क्रीम लाया और चारु की गाँड़ में दो ऊँगली में क्रीम लपेट कर डाला और अंदर बाहर करने लगा।क्या मस्ती भरा दृश्य था । दो दो कमसिन जवानियाँ अपनी गाँड़ ऊपर करके बिस्तर के कोने में घोड़ी बनी हुई थीं। उनके पीछे खड़े होकर दोनों मर्द अपने लंड लहरा रहे थे।
तारिक ने चारु की गाँड़ में उँगलियाँ अंदर बाहर की और चारु आऽऽऽह्ह्ह कर उठी। फिर वह अपने लंड पर भी क्रीम लगाया और चारु की गाँड़ में अपना लंड धीरे से दबाने लगा। सुपाड़ा उसके गाँड़ के छल्ले को फैलाकर अंदर घुसता चला गया। चारु आऽऽऽऽऽहह करके चिल्लाई और लंड अंदर घुसता चला गया।
अब राजीव ने भी क्रीम लेकर शमा की गाँड़ में लगाई और फिर अपने लंड में लगाकर अपना लंड उसकी गाँड़ ने पेला और शमा हाऽऽऽऽऽय्य मरीइइइइइइइ चिल्लाई: आऽऽऽपका बहुत मोओओओटा है अंकल जीइइइइइइइ।
अब थप्प थप्प की आवाज़ के साथ दोनों मज़े से गाँड़ मरवाने लगीं। अब राजीव ने अपना लंड निकाला और कहा : तारिक यहाँ आओ और अपनी बेटी की मारो। मैं चारु की मारता हूँ।
अब दोनों लड़कियाँ बदलकर उनकी गाँड़ ठोकने लगे।
थोड़ी देर बाद वो फिर से लड़कियाँ बदलकर उनकी गाँड़ चोदने लगे। अचानक शमा चिल्लाई: आऽऽऽह्ह अब मेरी चूत मारो अंकल जी। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ प्लीज़ ।
अब राजीव ने अपना लंड उसकी गाँड़ से निकाला और नीचे करके उसकी चूत में डाला और बुरी तरह से चोदने लगा। अब तो शमा मानो दीवानी हो गयी और चिल्लायी: आऽऽऽऽह और ज़ोर से हाऽऽऽय फ़ाऽऽऽऽऽड़ दो मेरी फुद्दी उफ़्फ़्फ़्फ । वो अपनी गाँड़ दबाकर चुदवाने लगी। कमरा फ़च फ़च मी आवाज़ से गूँज उठा। तारिक अभी भी चारु की गाँड़ ही मार रहा था। वो बोल रहा था; आऽऽऽऽह क्या चिकनी और टाइट गाँड़ है। वह अपनी दो उँगलियाँ उसकी बुर में डालकर उसकी क्लिट सहलाकर चारु को मस्त कर रहा था। तभी चारु आऽऽऽऽहह उइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी और उसकी उँगलियाँ गीली होने लगी। तभी वह भी उसकी गाँड़ में झड़ने लगा।
उधर राजीव भी शमा की चूत फाड़ते हुए झड़ने लगा और शमा भी आऽऽऽऽऽह करके झड़ती चली गयी।
वासना का भूत उतर गया था और सब शांत पड़े थे। अब राजीव बोला: यार अब हम घर जाएँगे। बहुत मज़ा आया। फिर सब तय्यार हुए और एक दूसरे को चूमकर फिर मिलने का बोल कर राजीव और चारु अपने घर को चले गए।
खाने के बाद सब सोफ़े पर बैठ कर बातें करने लगे।
राजीव: यार कबसे बिटिया को लगा रहे हो? सील तो तुमने ही तोड़ी होगी ना?
तारिक हँसकर शमा को अपनी गोद में खींचा और उसकी फ़्रॉक ऊपर करके उसकी टाँगें फैला दिया। अब उसकी नंगी बुर राजीव और पास बैठी चारु को साफ़ खुली हुई दिखाई से रही थी। राजीव का लंड तनने लगा। तारिक बोला: मैं इसकी साल भर पहले सील तोड़ा था। याद है ना शमा? वह उसकी बुर सहलाते हुए बोला।
शमा: आऽऽऽह अब्बा सब याद है। बहुत दुखा था पहली बार। कितना ख़ून भी निकला था।
तारिक उसके गाल चूमकर बोला: पर अब तो मज़ा आता है ना!
शमा : जी अब्बा अब तो बहुत मज़ा आता है।
राजीव: कैसे शुरू हुआ सब? आओ चारु तुम भी मेरे गोद में बैठो। अब चारु उसकी गोद में बैठी और वह भी उसकी स्कर्ट उठाकर उसकी टाँगे फैलाकर तारिक और शमा को दिखाकर उसकी बुर सहलाने लगा।
तारिक चारु की बुर को घूरते हुए बोला: क़रीब तीन साल पहले इसकी अम्मी की एक ऐक्सिडेंट में मौत हो गयी थी। इसे सम्भालने के लिए मैंने एक औरत रख ली जो कि घर का काम भी करे और इसकी देखभाल भी करे। उसका नाम निशा था और उम्र क़रीब ३५ साल की थी । वह शादीशुदा थी और सुबह आती थी और रात को अपने घर जाती थी। शमा जवान हो रही थी और इसकी चूचियाँ अब नीबू से बढ़कर छोटे संतरे के आकार की हो गयीं थीं । इसकी अम्मी के जाने के बाद मैंने सेक्स नहीं किया था और बदन की भूक़ बढ़ती जा रही थी। एक दिन मैं दोपहर को जल्दी आ गया। मेरे पास घर की एक चाबी रहती थी। मैं अंदर आया तो घर बिलकुल शांत था। मैं सोचा कि शमा सो रही होगी स्कूल से वापस आकर । जब मैं शमा के बेडरूम में पहुँचा तो मेरे होश उड़ गए। शमा बिस्तर पर लेटी थी और उसकी फ़्रॉक ऊपर हो गयी थी और उसकी ढीली पैंटी के साइड से उसकी बुर का काफ़ी हिस्सा नंगा दिख रहा था। उसकी बुर के पास छोटे छोटी नरम से बाल भी दिख रहे थे। उफ़्फ़्फ़्फ क्या दृश्य था । मैं वैसे भी सेक्स का प्यासा था ही। फिर मेरा ध्यान इसकी सख़्त अमरूदों पर गया जो कि फ़्रॉक से आधे बाहर आकर झाँक रहे थे। पहली बार इसके बारे में मेरे मन में ऐसे विचार आए और मेरा खड़ा हो गया अपनी सगी बेटी की उभरती हुई जवानी देखकर।
वह शमा की बुर सहलाते हुए उसके गाल को चूमकर बोला।
राजीव का लंड अब पूरा तन गया था और चारु अपनी गाँड़ हिलाकर बोली: आऽऽऽह अंकल आपका तो पूरा खड़ा हो गया।
राजीव : ऐसी बात सुनकर खड़ा नहीं होगा क्या? हाँ फिर क्या हुआ?
तारिक: मैं अपने आप को कंट्रोल किया और दूसरे कमरे में गया तो वहाँ का दृश्य और भी उत्तेजक था। मेरे बेडरूम में शांति टी वी पर ब्लू फ़िल्म देख रही थी। वह मेरी सी डी के कलेक्शन में से एक फ़िल्म लेकर डीवीडी प्लेअर में लगाई हुई थी। उसकी सलवार पूरी नीचे थी और वह अपनी बुर में दो ऊँगलियाँ डालकर उइइइइइइ सीईईई कर रही थी। मैं काफ़ी देर तक उसे देखता रहा। तभी उसका फ़ोन बजा। वह बोली: हेलो।
वो:——-/-/
शांति: हाँ अभी खाना खाया। अभी बेबी यानी शमा के साथ टी वी देख रहीं हूँ।
वो:-/-/—
शांति अपनी ऊँगली हिलाती हुई: हाय्य्य्य्य नहीं कुछ नहीं ऊँगली दब गयी सब ठीक है।
वो:-/-///—-
शांति: हाँ हाँ रात को कर लेना। मैंने कभी मना किया है। तुम ही तो थकावट का बोल कर सो जाते हो। आऽऽऽह्ह्ह । वह अब शायद झड़ना चाहती थी। वह बोली: चलो रात को जो चाहे कर लेना। अभी रखती हूँ।
वो:—///—-
शांति: हाँ हाँ दवाई लगा लूँगी ऊँगली में। ज़्यादा नहीं लगी है। बाई । वह फ़ोन काटी और अपनी एक चूची को कुर्ते के ऊपर से दबाकर अपनी बुर में फिर से तीन उँगलियाँ डालकर हिलाने लगी। अब मुझसे नहीं रहा गया। मैं अंदर आया और वह उछल पड़ी और कपड़े ठीक करने लगी। मैं बोला: ये क्या हो रहा है मेरे कमरे में? वह घबरा कर बोली: कुछ नहीं साहब बस कपड़े ठीक कर रही थी।
मैंने कहा: और ये टी वी पर क्या चल रहा है? वहाँ अब एक आदमी पर दो औरतें चढ़ीं हुई थीं और आवाज़ के साथ चुदाई चालू थी। वह घबरा कर रोने लगी। मैंने उसे देखा और बाहों में जकड़ लिया। फिर उसके होंठ चूमते हुए बोला: क्या बात है बहुत गरम हो रही हो? चूत में उँगलियाँ कर रही हो? अरे हमारा लंड है ना ऊँगली की क्या ज़रूरत है रानी?
मैंने कुर्ते के ऊपर से उसकी चूची दबाई और ठोस चूची के मज़े से भर गया। मैं बोला: रानी क्या पति सही से नहीं चोदता?
वह शर्मा कर; जी छोड़िए ना साहब । शर्म आती है।
मैंने महसूस किया कि मेरे चुम्बन और चूचि मरदन से वह गरम हो रही थी। मैंने अपना एक हाथ उसकी खुली सलवार के अंदर डाला और पैंटी के अंदर से उसकी पूरी गीली चूत पर सहलाना शुरू किया। अब वह चुपचाप मज़ा ले रही थी। विरोध बंद हो चुका था। फिर मैंने उसे नंगी किया और ख़ुद भी नंगा हो गया। मैंने उसे अपने ऊपर उलटा लिटा किया ताकि हम ६९ की पोसीजन में आ गये। अब मैं उसकी बुर चूस रहा था और वह मेरा लंड। उसके लंड चूसने से पता चल रहा था कि उसे चूसने में बहुत मज़ा आता है। अब मैंने उसे नीचे किया और उसके ऊपर चढ़कर उसकी चुदाई शुरू की। वो बहुत ज़ोर ज़ोर से आऽऽऽऽह उइइइइइइ चिल्लाने लगी। मैं भी कई दिनों के बाद चोद रहा था इसलिए ख़ुद भी उत्तेजना से भरकर आऽऽऽऽह ह्म्म्म्म्म चिल्लाए जा रहा था। हम चुदाई में इतने मस्त थे कि हम भूल ही गए कि साथ वाले कमरे में शमा सो रही है।
अब शमा भी बोल उठी: और अंकल मेरी नींद खुली क्योंकि बहुत अजीब अजीब सी आवाज़ें आ रहीं थीं । मैं उठकर अब्बा के कमरे में आयी और खिड़की से झाँकी -तो देखा कि टी वी में एक सेक्सी फ़िल्म लगी थी और उधर बिस्तर पर अब्बा और शांति अपनी फ़िल्म चला रहे थे।
यह कहकर वह हँसने लगी। तारिक ने उसकी बुर को मसला और वह हाऽऽऽऽय अब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्बाऽऽ दुखता है ना बोल पड़ी।
तारिक: हाँ तभी मेरी निगाह खिड़की पर गयी और वहाँ इसको देखकर मैं थोड़ा हड़बड़ा गया। पर अब मै झड़ने वाला था इसलिए रुका नहीं गया और शमा की आँखों में देखते हुए उसकी ज़बरदस्त चुदाई करते हुए मै झड़ने लगा। वह भी चिल्लाकर झड़ रही थी। उसके अपनी जाँघें भींचकर मेरे लंड को अपनी बुर में मस्त जकड़ लिया था। अब मैं उसके ऊपर से हटा और उसके बग़ल में लेट गया। फिर मैंने खिड़की की ओर देखा तो शमा वहाँ नहीं थी। मैंने शांति की चूची दबाकर कहा: तुम तो शादीशुदा हो फिर क्यों ऊँगली डाल रही थी बुर में?
शांति: साहब मेरा पति मुझे संतुष्ट नहीं कर पता। वह बहुत जल्दी झड़ जाता है। पाँच दस धक्के मारता है और सी सी करके झड़ जाता है और मैं प्यासी रह जाती हूँ।
मैंने उसके होंठ चूसे और कहा: चलो अब मेरे से चुदवा लिया करना। मैं भी प्यासा हूँ और तुम भी। पर एक दिक़्क़त आ गयी है।
निशा मुझसे लिपटकर मेरा लंड सहलाकर बोली: कैसी दिक़्क़त साहब ?
मैं बोला: अरे शमा ने हमारी चुदाई देख ली है।
निशा: ओह ये तो गड़बड़ हो गयी साहब । अब क्या करेंगे?
मैं: पता नहीं । शायद वह ग़ुस्सा होगी मेरे से । चलो जाकर समझाता हूँ उसे।
मैं उठकर कपड़े पहना और बाहर आकर शमा के कमरे में आया। शमा पेट के बल लेटी हुई थी और चुपचाप रो रही थी। मैंने आकर उसके पास बैठा और उसकी पीठ सहला कर बोला: बेटी नाराज़ हो अपने अब्बा से?
ये चुप रही और मैं झुका और उसके गाल सहलाकर बोला: बेटी रो रही हो? एक बात बोलूँ ?
शमा: जी अब्बा।
मैं: बेटी देखो मैं एक मर्द हूँ और मेरी शारीरिक ज़रूरतें हैं जो तुम्हारी अम्मी पूरी करती थी। अब उनके ना होने से मैं थोड़ा परेशान रहता हूँ। आज निशा को जब अपनी जवानी से खेलते हुए देखा तो मानो पागल हो गया। वो भी प्यासी है क्योंकि उसका पति उसको संतुष्टि नहीं कर पाता। मैं बोले जा रहा था और शमा मुझे ऐसी निगाहों से देख रही थी कि मानो कुछ समझ नहीं आ रहा हो। मुझे अपनी बेवक़ूफ़ी पर हँसी आयी। ये बेचारी कमसिन इन बातों को क्या समझेगी।
पर तब मैं हैरान रह गया जब ये एकदम से उठी और आकर मेरे तरफ़ देखते हुए अपनी टांगों को फैलाकर मेरी गोद में बैठ गयी और मेरे गले में अपनी बाँह डालकर बोली: अब्बा मैं कुछ नहीं जानती बस आप निशा को अभी निकालो। और अम्मी की ज़िम्मेदारी मैं निभाऊँगी निशा नहीं। मैं तो अवाक् सा होकर इसकी तरफ़ देखता रह गया। उसकी सख़्त चूचियाँ मेरे सीने से सटी हुईं थीं। उसकी बुर मेरे सोये हुए लंड पर थी और उसकी एक एक टाँग मेरे कूल्हों को मानो जकड़ी हुई थी। मेरा हाथ उसकी पीठ सहलाने लगा और मैं बोला: बेटी तुम अपनी अम्मी की सब ज़िम्मेदारियाँ निभा सकती हो सिवाय इसके जो मैं निशा के साथ कर रहा था। मेरा हाथ उसकी ब्रा के स्ट्रैप पर पड़ा और मेरे अंदर अहसास हुआ कि एक कमसीन जवानी मेरे गोद में बैठी है। अब मेरे लंड ने अपना सर उठाना शुरू कर दिया था।
तभी शमा ने मानो बम फोड़ा और मेरी आँखों में देखकर बोली: अब्बा वह काम भी मैं ही करूँगी आपके साथ, जो आप निशा के साथ कर रहे थे।
मुझे तो काटो ख़ून नहीं। ये क्या बोल रही है ये नादान लड़की। मैंने कहा: बेटी मैं तुम्हारा अब्बा हूँ हम ये नहीं कर सकते। समाज और धर्म इसकी इजाज़त नहीं देते।
शमा: अब्बा अगर सलमा कर सकती है तो मैं क्यों नहीं?
मैं अवाक् होकर उसे देखते रह गया। सलमा उसकी ममेरी बहन है। इसका मतलब है कि क्या सलमा को उसका बाप याने मेरा साला ज़फ़र चोद रहा है?
मैं: तुमको कैसे पता कि सलमा ज़फ़र से चु— मतलब ये सब करती है?
शमा: अब्बा जब वो पिछले महीने आयी थी तब मैंने मज़ाक़ मज़ाक़ में पूछा था कि तेरी छातियाँ इतनी बड़ी कैसे हो गयीं हैं अभी से ? किसी से दबवाती है क्या? मेरे स्कूल में कई लड़कियाँ बताती हैं कि जो अपनी छातियाँ दबवाती हैं उनकी बड़ी हो जाती हैं । वो हँसने लगी और फिर बहुत पूछने से उसके मुँह से निकल गया कि वो अपने अब्बा से मज़ा ले रही है।
मेरा लंड अब पूरा तन गया था और शमा अब मेरी गोद में उसे पूरा अहसास कर रही थी। वह अपनी गाँड़ हिलाई और मुझे समझ आ गया था कि उसे समझ में आ गया है कि ये मेरा लंड ही है जो उसकी बुर से टकरा रहा है। फिर भी मैं बोला: बेटी देखो मुझे विश्वास नहीं आ रहा है। ज़फ़र भाई ऐसा कैसे कर सकते हैं।
शमा: अब्बा आप उनसे ही पूछ लो ना। फ़ोन कर लो।
मैंने ज़फ़र को फ़ोन लगाया: यार ज़फ़र कैसे हो?
ज़फ़र: मस्त हूँ भाई जान। आप कैसे हो? शमा ठीक है ना?
मैं: अरे साले सांब शमा के लिए ही फ़ोन किया है। वह कह रही है कि वह अपनी मम्मी की सब ज़िम्मेदारियाँ निभाना चाहती है। मैंने उसे समझाया कि एक के अलावा वह सभी ज़िम्मेदारी निभा सकती है। पर वह नहीं मान रही है। एक ज़िम्मेदारी समझे ना वही मर्द और औरत वाली।
ज़फ़र की आवाज़ बंद सी हो गयी। वह बोला: भाई जान इसमें मैं क्या बोल सकता हूँ। आपने मुझे ये बताने को फ़ोन किया क्या?
मैं: अरे यार मैंने भी शमा को समझने की कोशिश की है कि बाप बेटी में यह रिश्ता नहीं हो सकता। पर वह तुम्हारा और सलमा का उदाहरण दे रही है।
ज़फ़र को फिर से साँप सूंघ गया। वह चुप रहा।
मैं: देखो यार अगर सच भी है तो मैं किसी को बोलने वाला तो हूँ नहीं। अब सलमा के मुँह से ये निकल गया। तुम उसे मारना नहीं। बच्ची है वह भी ना।
ज़फ़र ने गहरी साँस ली और बोला: हाँ भाई सच है। पिछले एक साल से मै उसे चो- मतलब कर रहा हूँ। पर ये लड़की भी ना कोई बात इसके पेट में पचती ही नहीं।
मैं: अरे भाई चलो कोई बात नहीं। ये मेरे पास भी सीक्रेट ही रहेगा। पर ये तो बताओ भाभी को पता है?
ज़फ़र: हाँ सब कुछ उसकी रज़ामंदी से ही हुआ है। असल में मुझे सलमा के स्कूल बैग से ऐसी किताबें मिली जिनमे खुल कर चुदाई हो रही थी। जब मैंने उसे डाँटा तो वह रोने लगी।बाद में उसने अपनी अम्मी को बताया कि उसे सेक्स करने की बहुत इच्छा होती है और वो चार पाँच दिनों में ही किसी लड़के से चुदवाने वाली थी। बस तभी हमने यह तय किया कि वह बाहरवालों से चुदवाए इससे तो अच्छा है कि घर की बात घर में ही रहे। वैसे भी सलमा की अम्मी की तबियत काफ़ी ख़राब रहती है। इसलिए मुझे भी खुराक की कमी हो रही थी। इस तरह क़रीब साल भर से सलमा मुझसे चुद रही है। यही सच है।
उसकी बात सुनकर मेरा लंड तन कर दर्द कर रहा था और मेरा एक हाथ उसकी पीठ से होकर उसकी गाँड़ की गोलायियाँ नापने लगा था।
अब मैं ओह चलो रखता हूँ कहकर फ़ोन बंद किया और अब दोनों हाथ से उसकी गाँड़ सहलाने लगा। फिर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी के अंदर डाला और पूरे नंगे चूतडों को दबाकर मस्ती से भरने लगा। मेरे होंठ अब शमा के होंठ चूसने लगे थे।
तभी शमा बोली: अब्बा निशा को निकालो अभी के अभी। वह हमारे घर में अब काम नहीं करेगी।
मैं शमा की ज़िद के आगे झुका और उसे अपनी गोद से हटाया। मैंने अपने लंड को एडजस्ट किया जिसे शमा ध्यान से देख रही थी। फिर मैं आलमरी से पैसे निकाला और किचन में जाकर निशा से कहा: देखो निशा सब गड़बड़ हो गया है। शमा ने हमको देख लिया है और वह तुम्हें निकालने की ज़िद पर अड़ गयी है। इसलिए ये तुम्हारी तनख़्वाह और ये ऊपर से दो हज़ार लो और कल से काम पर नहीं आना। वह चुपचाप पैसे लेकर रोते हुए घर से बाहर चली गयी। मुझे ख़राब लगा पर मैं मज़बूर था।
मैं वापस आया तो शमा फिर से लेट गयी थी। मैं उसके पास आकर बोला: बेटी एक बार फिर से सोच लो। ये ग़लत होने जा रहा है। एक बार हम आगे बढ़ गए तो वापसी नहीं हो सकेगी। अभी भी सोच लो।
पर शमा पर तो भूत सवार था। वह मुझे अपने ऊपर खींचकर मेरे होंठ पर अपने होंठ रख दी और मेरे हाथ भी उसकी सख़्त चूचियों पर आ गए। उसके बाद कहाँ रुक सकते थे। बस वह दिन है और आज का दिन है हम दोनों बाप बेटी बिना चुदाई के रह ही नहीं सकते। हैं ना शमा बेटी? अब तारिक उसकी फुद्दी सहलाकर बोला।
शमा: जी अब्बा ।
राजीव की गोद में चारु बैठी थी और वह भी उसकी बुर सहला रहा था। राजीव बोला: यार तुम्हारी कहानी तो बड़ी गरम कर गयी मुझे। आऽऽह शमा बेटी आओ मेरे पास। उफ़्फ़्फ क्या मस्त हॉट लौंडिया हो तुम।
तारिक भी चारु को बोला :आओ बिटिया मेरे पास ।
लड़कियाँ अदल बदल हो गयीं। राजीव ने शमा को अपनी गोद में उलटा लिटाया और उसकी फ़्रॉक ऊपर करके उसके मस्त चूतडों को सहलाने लगा। उसकी देखा देखी तारिक ने भी चारु की गाँड़ सहलाना शुरू कर दिया। दोनों लौंडियाँ मस्ती ले रहीं थीं अब राजीव शमा के चूतडों को फैला कर उसके छेद को सहला कर मस्ती से बोला: आऽऽह भाई क्या मस्त गाँड़ है बिटिया की। मस्त खुली हुई है। फिर वह उसके छेद पर थूका और थूक से गीली अपनी दो उँगलियों को उसकी गाँड़ में डालकर अंदर बाहर करते हुए बोला: उफ़्फ़्फ कितनी टाइट गाँड़ है बिटिया की। मज़ा आएगा मारने में।
तारिक भी अब चारु की गाँड़ में एक सूखी ऊँगली डाला और बोला। आऽऽह चारु की तो बिलकुल टाइट है।
राजीव: यार क्रीम लगाकर मारना। वरना बेचारी मर जाएगी।
तारिक: हाँ यार । बहुत मस्त गाँड़ है । चलो बेडरूम में चलते हैं और मज़े करते हैं।
राजीव: यार एक ही बिस्तर पर इनकी लेते हैं।
तारिक: चलो मेरे बेडरूम में चलते हैं। वो दोनों उन लड़कियों को गोद में उठाकर बेडरूम में ले गए।
तारिक ने चारु की फ़्रॉक उतारी और उसकी चूचियाँ चूसने लगा। राजीव भी शमा की फ़्रॉक निकाल कर चूचियाँ चूसने लगा। अब तारिक ने चारु से घोड़ी बनने को कहा और वो उसे घोड़ी बनाकर बिस्तर के कोने में लेकर आया और झुक कर उसकी गाँड़ को ऊपर किया और दरार में मुँह डालकर वहाँ चुम्बन लेने लगा। फिर जीभ से गाँड़ सहलाकर अपनी जीभ से कुरेदते हुए उसकी बुर भी चाटने लगा। चारु आऽऽऽऽह चिल्ला रही थी। राजीव ने भी यही शमा के साथ करने लगा और वह भी उइइइइइ चिल्ला उठी। थोड़ी देर में दोनों लौंडियों की बुर पानी छोड़ने लगीं थीं ।अब तारिक उठा और जाकर क्रीम लाया और चारु की गाँड़ में दो ऊँगली में क्रीम लपेट कर डाला और अंदर बाहर करने लगा।क्या मस्ती भरा दृश्य था । दो दो कमसिन जवानियाँ अपनी गाँड़ ऊपर करके बिस्तर के कोने में घोड़ी बनी हुई थीं। उनके पीछे खड़े होकर दोनों मर्द अपने लंड लहरा रहे थे।
तारिक ने चारु की गाँड़ में उँगलियाँ अंदर बाहर की और चारु आऽऽऽह्ह्ह कर उठी। फिर वह अपने लंड पर भी क्रीम लगाया और चारु की गाँड़ में अपना लंड धीरे से दबाने लगा। सुपाड़ा उसके गाँड़ के छल्ले को फैलाकर अंदर घुसता चला गया। चारु आऽऽऽऽऽहह करके चिल्लाई और लंड अंदर घुसता चला गया।
अब राजीव ने भी क्रीम लेकर शमा की गाँड़ में लगाई और फिर अपने लंड में लगाकर अपना लंड उसकी गाँड़ ने पेला और शमा हाऽऽऽऽऽय्य मरीइइइइइइइ चिल्लाई: आऽऽऽपका बहुत मोओओओटा है अंकल जीइइइइइइइ।
अब थप्प थप्प की आवाज़ के साथ दोनों मज़े से गाँड़ मरवाने लगीं। अब राजीव ने अपना लंड निकाला और कहा : तारिक यहाँ आओ और अपनी बेटी की मारो। मैं चारु की मारता हूँ।
अब दोनों लड़कियाँ बदलकर उनकी गाँड़ ठोकने लगे।
थोड़ी देर बाद वो फिर से लड़कियाँ बदलकर उनकी गाँड़ चोदने लगे। अचानक शमा चिल्लाई: आऽऽऽह्ह अब मेरी चूत मारो अंकल जी। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ प्लीज़ ।
अब राजीव ने अपना लंड उसकी गाँड़ से निकाला और नीचे करके उसकी चूत में डाला और बुरी तरह से चोदने लगा। अब तो शमा मानो दीवानी हो गयी और चिल्लायी: आऽऽऽऽह और ज़ोर से हाऽऽऽय फ़ाऽऽऽऽऽड़ दो मेरी फुद्दी उफ़्फ़्फ़्फ । वो अपनी गाँड़ दबाकर चुदवाने लगी। कमरा फ़च फ़च मी आवाज़ से गूँज उठा। तारिक अभी भी चारु की गाँड़ ही मार रहा था। वो बोल रहा था; आऽऽऽऽह क्या चिकनी और टाइट गाँड़ है। वह अपनी दो उँगलियाँ उसकी बुर में डालकर उसकी क्लिट सहलाकर चारु को मस्त कर रहा था। तभी चारु आऽऽऽऽहह उइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी और उसकी उँगलियाँ गीली होने लगी। तभी वह भी उसकी गाँड़ में झड़ने लगा।
उधर राजीव भी शमा की चूत फाड़ते हुए झड़ने लगा और शमा भी आऽऽऽऽऽह करके झड़ती चली गयी।
वासना का भूत उतर गया था और सब शांत पड़े थे। अब राजीव बोला: यार अब हम घर जाएँगे। बहुत मज़ा आया। फिर सब तय्यार हुए और एक दूसरे को चूमकर फिर मिलने का बोल कर राजीव और चारु अपने घर को चले गए।