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बाप बेटी का अनोखा प्यार

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StoryPublisher

Guest


मैं अमृतसर में रहती हूं मैं कॉलेज में पढ़ती हूं और बीए थर्ड ईयर की स्टूडेंट हूं मेरी उम्र 21 साल है

मेरी हाइट 5 फुट है मेरा शरीर भरा हुआ है मेरा फिगर अच्छा है 34-28-34 का मुझे टाइट कपड़े पहनने का बहुत शौक है और मुझे लड़को को तड़पाना बहुत्त अच्छा लगता है मैं अपनी दोस्तो में सबसे सेक्सी और स्मार्ट थी कॉलेज के सभी लड़के मुझ पर लाइन मारते थे मुझे भी ये सब अच्छा लगता था .

मेरे कॉलेज में 3 बॉयफ्रेंड थे जिनके साथ मैं एक एक बार सेक्स कर चुकी थी ये कहानी मेरी और मेरे पापा की चुदाई की है हम घर में चार मेंबर है मैं मेरी मां मेरा भाई और मेरे डैड मेरे पापा की उम्र 50 साल है लेकिन वो बहुत ही कम उम्र के लगते है उन्हें देखकर कोई ये नहीं कह सकता की वो 50 के होंगे वो 40-41 साल के जवान लगते है और रोजाना एक्सरसाइज की वजह से उनकी बॉडी भी पूरी शेप में है

अब मैं स्टोरी पर आती हूं बात गर्मियों में कॉलेज की छुट्टियों की है मेरा कॉलेज आउट ऑफ़ स्टेशन था और मैं हॉस्टल में रहती थी गर्मी की छुट्टियों में मैं घर वापिस जाती थी और इस बार भी मैं घर वापिस आ गई मेरे सब बॉयफ्रेंड मुझसे दूर हो गए थे और मुझे दुख था की अब मैं 2 महीने सेक्स नहीं कर पाऊंगी

मैं घर आ गई मैं कॉलेज से बहुत मॉडर्न हो चुकी थी और बहुत फ्रैंक भी मैंने मिनी स्कर्ट और शर्ट डाली हुई थी

मैं घर के अंदर आ गई और सब से मिली और सब बहुत खुश हो गए उसके बाद मैं पापा से मिली, पापा भी बहुत खुश हुए

उन्होंने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और बोले

“नीलम तुम मर्यादाओं को भूल गई हो ? जो ऐसी ड्रेस मेरे सामने डाली हुई है.”

तो मैंने कहा ओके पापा आगे से ऐसी ड्रेसेस नहीं पहनूंगी मुझे थोड़ा गुस्सा आया और थोड़ा दुख भी हुआ

उसके बाद रात हो चुकी थी तो हम सब बैठ कर बातें करने लगे

पापा ने पूछा की नीलम तेरी पढ़ाई कैसी चल रही है

तो मैंने कहा की ठीक चल रही है पापा

उसके बाद सब यूं ही बातें करने लगे और उसके बाद सोने के लिए चले गए मेरा अपना अलग एक रूम है और मैं काफी बोर हो रही थी घर आकर कॉलेज में तो हर टाइम फ़्लर्ट करती थी मैं लेकिन अब मैं घर में आ गई थी

तो मैंने अपने आप को कण्ट्रोल करने की ठान ली बट मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था मैं अपने रूम में बेड पर लेटी हुई थी और मेरे दिमाग में सेक्स चल रहा था और मैं हॉट हो रही थी मैंने अपने रूम का डोर लॉक किया और अपने फोन में ब्लू मूवीज देखने लगी और मज़ा करने लगी

मूवी में किसिंग सीन चल रहा था बॉय और गर्ल दोनों ही न्यूड थे मुझे भी गर्मी चढ़ने लगी और मैंने अपनी नाइटी को ऊपर कर दिया और उतार दिया ऊपर चादर ओढ़ ली और मूवी को देखते देखते अपने मम्मों को मसलने लगी मुझे मज़ा आने लगा था उसके बाद जब मूवी में चुदाई होने लगी तो मैंने अपनी बीच वाली उंगली को अपनी चूत पर रगड़ा और अंदर दे दिया

मैं अपनी फिंगर को चूत में देकर आगे पीछे करने लगी जिससे में हॉट हो रही थी मेरे मुंह से हलकी हलकी सिसकारियां निकालने लगी मैं मूवीज को देख कर जोर जोर से अपनी चूत में उंगलियां करने लगी थोड़ी देर बाद मेरा पानी निकल आया और में शांत हो गई उसके बाद मुझे चेन की नींद आ गई

मेरी तो ये सोच कर हालत ख़राब हो रही थी की मैं बिना सेक्स किए 2 महीने कैसे काटूंगी मैंने अपनी दोस्त को फ़ोन किया तो उसने कहा की मैंने घर आकर अपने कजिन ब्रदर के साथ अफेयर कर लिया है वो मुझे खूब चोदता है तो मैंने कहा की मैं क्या करू तो उसने कहा की तू भी कोई ऐसा ही जुगाड़ कर ले

फिर उसने फोन काट दिया अब मैं सोचने लगी की मैं ऐसा जुगाड़ कैसे करू मेरे तो सारे रिश्तेदार भी दूर है और मेरा ब्रदर भी छोटा है उसके बाद मेरा ध्यान एक ही शक्स पर गया

वो थे मेरे पापा पहले मैंने सोचा की नहीं ये गलत है ऐसा नहीं होना चाहिए लेकिन मैं तो हवस में अंधी हो चुकी थी तो मैंने ये सोचा की अगर मेरी फ्रंड ये सब कर सकती है तो में क्यों नहीं कर सकती घर की बात घर में ही रह जाएगी और किसी को पता भी नहीं लगेगा.

फिर मैं ये सोचने लगी की पापा को मनाया कैसे जाये वो तो बहुत ही स्ट्रिक्ट नेचर के है मैं रात भर यही सोचती रही पहले मैंने ये पता लगाने की सोची की पापा औरतों को देखते है या नहीं तो मैंने सुबह से अपने मिशन पर काम करना शुरू कर दिया

अगली सुबह जब पापा सुबह सुबह वॉकिंग करने गए तो मैं भी उसी टाइम उठी और वॉकिंग करने के बहाने पापा का पीछा करने लगी पापा घर के बाहर निकल चुके थे मैं भी पापा के पीछे पीछे वॉकिंग कर रही थी हमारे घर के बाहर ही एक पार्क था इसलिए बिना किसी प्रॉब्लम के हम जब मर्जी आ जा सकते थे

मैं पापा के पीछे पीछे थी और पापा आगे अब मैंने नोट किया की पापा रास्ते में जा रही सब सेक्सी लड़कियों और औरतों को देख रहे थे वो लड़कियों को एक्सरसाइज करते हुए देखते थे अब मुझे पता चल गया था की मेरे पापा एक नंबर के ठरकी पापा है, मतलब की काम बन जायेगा और में खुश हो गई.

मेरे दिमाग में एक प्लान चल रहा था मैंने सोचा की क्यों ना पापा को गरम किया जाये ताकि वो खुद ही मेरी प्यास बुझाने के लिए तैयार हो जाएँ.

पापा पार्क में पेड़ के साथ वाली चेयर पर बैठे हुए थे और योग कर रहे थे.

मैं पापा के सामने आ कर खड़ी हो गई मेरी बैक वाली साइड पापा को नजर आ रही थी मैं मुंह पर कपड़ा लगाकर खड़ी थी मैंने टाइट ट्रैक सूट डाल रखा था मैंने सोचा क्यों ना मैं पापा के सामने एक्सरसाइज करू उन्हें ये भी पता नहीं लगेगा कि मैं उनकी बेटी हूं और काम भी हो जायेगा.

तो मैंने अपनी ट्रैक जैकेट उतार दी अब मैं सैंडो और टाइट लोअर में थी और एक्सरसाइज करते टाइम मेरी गांड पापा वाली साइड थी. मैं सेक्सी पोज़ बना बना कर एक्सरसाइज कर रही थी मैंने हलकी सी नजर घुमा कर देखा तो पापा मेरे फिगर को ही देख रही थे.

वो हवस की नजरो से देख रहे थे. मेरा मन एकसाइटेड हुआ और मैं जोर जोर से अपनी गांड हिला हिला कर एक्सरसाइज करने लगी. मैंने पापा को एकदम तड़पा दिया था फिर में जैकेट पहन कर वहां से घर आ गई और बैठकर न्यूज़ पेपर पढ़ने लगी .

थोड़ी देर बाद पापा आ गए जैसे ही पापा ने मुझे देखा वो मुझे देख कर थोड़े शोक हो गए .

उन्हें अब समझ में आ गया था की जिसे वो घूर घूर कर देख रहे थे वो उनकी बेटी थी. मैंने कहा गुड मॉर्निंग पापा. तो उन्होंने टेंशन में जवाब दिया मैंने जानबूझकर कहा क्या हुआ पापा सब ठीक तो है ना ?

तो उन्होंने कहा हां बेटी सब कुछ ठीक है. उसके बाद पापा नहाने चले गए. जब पापा नहा कर बाहर आए तो उनका शरीर देख कर मई तो पागल हो गई मेरा तो दिल कर रहा था की अभी जाकर पापा के सीने से लिपट जाऊ लेकिन मैंने कण्ट्रोल किया.

उसके बाद मैं नहाने चली गई मुझे पापा का शरीर याद आ रहा था तो मैंने नहाते वक्त अपनी चूत में उंगलियां कर ली और अपने आप को शांत कर लिया . उसके बाद सबने नाश्ता किया और पापा ऑफिस चले गए फिर मैंने घर में बैठे बैठे सोचा की ऐसा क्या करू जिससे पापा अपने आप ही मेरी चूत मारने के लिए तैयार जाए .

यही सोचते सोचते शाम हो चुकी थी पापा घर आए तो मैं तैयार होकर बैठी थी क्योकि मां ने कहा था की पापा के साथ मार्किट चली जा कुछ सामान मंगवाना है तो मैं तैयार थी मैंने ब्लैक कलर की मिनी स्कर्ट और रेड कलर का टॉप डाला हुआ था जो की में डेट पर डालती थी

थोड़ी देर बाद पापा घर आए और मां ने कहा की बेटी के साथ मार्किट जाकर जरा सामान ले आओ तो पापा ने कहा ठीक है.

मैं पापा के पास आई तो पापा मुझे ऊपर से लेकर नीचे तक घूरने लगे. मुझे लगा आज फिर डांट पड़ेगी पर पापा ने मुझे मिनी स्कर्ट पहनने पर कुछ भी नहीं कहा था में खुश हो गई की पापा को मैं पसंद हूं.

पापा ने स्माइल करते हुए कहा कि चलें बेटी ?

तो मैंने कहा जी पापा .

पापा तो कार ले कर जाना चाहते थे पर मैंने सोचा की यदि पापा को पटाना है तो स्कूटर ज्यादा ठीक रहेगा तो मैंने पापा को कहा

"पापा! मार्किट में तो बहुत भीड़ होती है. आप स्कूटर ले कर चलें तो आसान रहेगा। और रास्ते में मैं भी स्कूटर चलाना की थोड़ी प्रक्टिस कर लूंगी। बहुत देर से स्कूटर नहीं चलाया है."

पापा मान गए , शायद वो भी चाहते थे क्योंकि स्कूटर पर उन्हें अपनी बेटी के कामुक शरीर के ज्यादा पास होने का मौका मिलता।

खैर हम बाप बेटी स्कूटर पर चल पड़े.

हम मार्किट की तरफ निकाल गए पापा की नजरे मेरी मिनी स्कर्ट पर थी मैं अनजान होने का नाटक कर रही थी मुझे लगने लगा कि पापा मेरी तरफ अट्रेक्ट होने लगे है मैं एक्साइटीड़ थी.

अब पापा मुझसे अब पहले से काफी ज्यादा बात करने की कोशिश करने लगे।

यहां तक कि मेरे पापा अब कोई ना कोई बहाने मुझसे मजाक भी करने लगे।

मैं समझ गई कि पापा मेरे में इंटरेस्ट ले रहे थे।

उनको भी अब शायद लग रहा था कि घर में ही एक मस्त माल चोदने के लिए है तो उसका फायदा उठाया जाए।

उन्हें क्या पता कि यहां खुद उनकी बेटी कब से चुदने को तैयार बैठी है।

मैं तो इस चक्कर में थी कि किसी तरह कुछ मामला आगे बढ़ जाए।

मैंने सोचा कि क्यों ना अभी गरम लोहे पर चोट की जाए.

जब हम घर से थोड़ी दूर आ गए वहां पर खुली सड़क थी और दोनों ओर जंगल ही था. कोई आता जाता भी नहीं था.

मैंने वहां पर कुछ कोशिश करने का सोचा और पापा से कहा

"पापा! यहाँ खुली जगह है. और जंगल है. आप पीछे बैठिये और मुझे थोड़ा स्कूटर चलाने की प्रैक्टिस करने दें. मैंने बहुत दिनों से स्कूटर नहीं चलाया है."

मैं चाहती थी कि जब पापा पीछे बैठे तो उनका लंड मेरी चूत को स्पर्श करे और अगर एक बार ऐसा हो गया तो शायद पापा खुद पर कंट्रोल न रखें और मुझे चोद डालें।

पापा पीछे बैठ गए और मुझे आगे बैठने को कहा तो मैं जान बुझ कर उनसे चिपकी हुई बैठ गई मैंने देखा कि मुझे उनके लंड ने टच नहीं किया था मतलब अभी वो शांत था।

पापा ने मेरी दोनो बाहों के साइड से स्कूटर का हेंडल पकड़ा और मुझे भी हेंडल पकड़ने को कहा और फिर मुझे स्कूटर सिखाने लगे मैं जान भूज कर अपने बाजू दबा देती थी ताकि पापा के बाजू मेरे मुम्मों को टच करने लगें ऐसा करने से मुझे अब मेहसूस हो रहा था कि पापा का लंड खड़ा है होने लगा है मुझे अपनी पीठ पर कोई चीज़ टच करती महसूस हो रही थी।

अब मैं पापा के लंड पर बैठना चाहती थी तो कोई बहाना ढूंढने लगी।

मैंने एक स्कीम सोची और फिर मैंने अपनी चप्पल नीचे गिरा दी और स्कूटर रोक कर कहा कि पापा मैं चप्पल ले कर आई।

जब मैं चपल लेकर आई तो मैंने चोरी से देखा कि पापा का लंड फफक रहा है। मैं जान भुज कर पापा के पेट से सट कर बैठ गई

और इस बार उनका लंड मेरे चूतड़ों के नीचे दब गए तो पापा बोले नीलम कैसे बैठी हो जरा आगे हो कर बैठो तो मैंने कहा कि आगे तो बहुत ही थोड़ी सी जगह है और स्कूटर चलाने लगी।

पापा का लंड मेरे चूतड़ों के नीचे ही दबा हुआ था फनकार रहा था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मेरी चूत गीली हो रही थी। लेकिन मैं तो अंजान बनी बैठी थी जैसे कुछ पता ही नहीं हो कि उनका लंड मैं दबा के बैठी हूँ।

मैंने पापा से कहा कि आप हेंडल छोड़ दीजिए मैं चलाती हूं तो मैं धीरे-धीरे स्कूटर चलाने लगी और पापा ने दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़ ली और अंजाने में ही उनसे मेरे स्तन टच हो गए तो मुझे लगा कि पापा अपना कंट्रोल खो रहे हैं क्योंकि मैंने महसूस किया कि उनके हाथ मेरे मुम्मों को हल्का हल्का टच करने की कोशिश कर रहे थे.
 
मैं तो यही चाहती थी कि मुझे और क्या चाहिए था। पापा का लंड अभी भी मेरी चूतड़ों के नीचे फंस रहा था। मैंने पापा से कहा कि एक मिनट जरा आप हैंडल को पकड़ लीजिये ताकि मैं जरा ठीक हो कर बैठ जाऊं और मैं थोड़ा और पीछे को हो कर बैठ गई ताकि उनका लंड मेरे नीचे से निकल न पाए।

अब शायद पापा समझ गए थे कि मैं भी उनसे चुदवाना चाहती हूँ, या कम से कम मैं उनके लौड़े का मजा तो ले ही रही हूँ, इस लिए वो भी चुपचाप बैठे रहे और उनका लौड़ा मेरे चूतड़ों के नीचे ही दबा रहा. वो बोले कुछ नहीं और मजा लेते रहे.

उनकी भी भावनाएं मेरे लिए काफी हद तक बदल तो चुकी ही थी, तो उन्होंने भी शायद यही सोचा की मौका मिल रहा है तो लगे हाथ वो भी मजे ले ही लें. और शायद वो भी सोच रहे थे कि इस तरह यदि उनकी प्यारी बेटी गर्म हो जाये तो शायद उन्हें भी इसके आगे यानि मुझे चोद पाने का मौका मिल जाये.

आखिर वो भी तो चूत मारने का कोई मौका ढूंढ ही रहे थे.

अब मेरे दिमाग में तेजी से सोच रहा था कि क्या करें जिस से बात थोड़ी और आगे को बढ़ सके.

अचानक मेरे दिमाग में एक आइडिया आया।

मैंने पापा से पूछा- पापा, यहां टॉयलेट किधर है, मुझे जाना है।

जबकि मुझे पता था कि वहां कोई टॉयलेट नहीं है।

पापा बोले- बेटा, यहां तो कोई टॉयलेट नहीं है। तुम्हें बाहर खुले में ही करना पड़ेगा।

मैंने नखरा दिखाते हुए कहा- ना बाबा ना ... खुले में कैसे करूंगी।

इस पर पापा ने कहा- क्या हुआ बेटा। यहाँ कोई भी तो नहीं है. तुम थोड़ा साइड में स्कूटर ले लो और वहां झाडीओं के पास जा कर कर लो।

मैंने कहा- नहीं में वहां अकेली कैसे अकेली जाऊँगी, मुझे डर लग रहा है।

तब पापा ने कहा- कोई बात नहीं बेटा, कोई चिंता की बात नहीं है, अच्छा ऐसा करते हैं की मैं भी पेशाब कर लूँगा. ठण्ड है न तो मुझे भी पेशाब आ रहा है. चलो दोनों बाप बेटी कर लेते हैं.

(पता नहीं पापा को सच में पेशाब आया था या वो भी मेरी तरह कोई चाल चल रहे थे )

हम दोनों एक साइड में चले गए जहाँ कोई नहीं आता था और वो जगह सुनसान थी.

मैंने कहा- आप यहीं रहियेगा, मैं आ रही हूं.

और फिर मैं एक तरफ बढ़ गई और एक ऐसी जगह चुनी जहाँ से पापा मुझे देख सकते थे.

जानबूझ कर मैं ऐसी जगह में पेशाब करना चाह रही थी ताकि मैं इन्हें अपनी गांड दिखा सकूं।

एक झाडी के पास पहुंच कर मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो पापा मुझे देख रहे थे।

मैंने कहा- प्लीज़ जाइयेगा मत!

पापा ने कहा- ठीक है।

फिर मैंने अपनी स्कर्ट को ऊपर कर लिया और पैंटी को नीचे तक खिसका दिया,और जानबूझकर बैठने में थोड़ा टाइम लिया ताकि पापा मेरी गोरी-गोरी गांड देख सकें।

और फिर धीरे से बैठ कर पेशाब करने लगी, साथ में मेरी नंगी गांड की नुमाइश करने लगी।

मेरे पेशाब करने में छरछराहट की आवाज भी सन्नाटे में गूँज रही थी।

मैंने पापा को आवाज दे कर कहा "पापा आप भी पेशाब कर लीजिये ताकि फिर आप के पेशाब करने में समय खराब न हो.

पापा तो मेरी गांड देखने में मस्त थे, मेरी आवाज़ सुन कर पापा ने भी वहीँ खड़े खड़े अपना पैजामा खोला और वहीं खड़े खड़े अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और पेशाब करने लगे.

पापा मेरी नंगी गांड देखते हुए पेशाब करने की कोशिश कर रहे थे, पर पापा का लौड़ा तो पहले से ही टाइट था और अब अपनी प्यारी बेटी की गांड के दर्शन करने से और भी टाइट हो चूका था तो उनके लण्ड से पेशाब बहुत ही कम स्पीड से निकल रहा था.

पेशाब करने के बाद मैं खड़ी हो गई और एक बार फिर लेगिंग ऊपर करने में थोड़ा समय लिया ताकि एक बार और पापा मेरी गांड देख सकें।

फिर एकदम से पापा की तरफ घूम गयी जैसे मुझे पता ही न हो कि पापा वहीं खड़े हो कर पेशाब कर रहे थे.

पापा का लौड़ा मेरी ओर तना हुआ और तीर की तरह खड़ा था. मेरे अचानक उठने और उनकी तरफ घूम जाने के कारण पापा को लण्ड को पाजामे में करने और ढंकने का मौका ही नहीं मिल पाया.

वो एकदम से घबरा से गए और लंड को पजामे के अंदर करने की कोशिश करने लगे।

उनका लंड अभी पजामेके बाहर था ही और खड़ा था जिसे वे पजामे के अंदर डालने की कोशिश कर रहे थे। पर क्योंकि उनके लौड़े से पेशाब निकल रहा था तो बेचारे उसे एकदम से अंदर भी नहीं कर सकते थे. आप लोग तो जानते ही हैं कि जब आदमी के लंड से पेशाब निकल रहा होता है तो उसे एकदम से बंद नहीं किया जा सकता। तो पापा के लंड से पेशाब थोड़ी देर तक निकलता रहा और मैं उसे देखती रही. पापा पहले तो थोड़ा घबरा रहे थे पर जब उन्होंने मुझे कोई इतराज करते न देखा तो वो भी थोड़ा संतुष्ट हो गए और पूरा पेशाब किया और फिर अपने लौड़े को जो अब तक पूरा तन चूका था, को अंदर किया।

पर मुझे लगा की पापा इतनी तेजी से फिर भी अपना लण्ड अंदर नहीं कर रहे थे जितना करना चाहिए था.

मैं समझ गई थी कि वे जानबूझकर अपना लंड मुझे दिखा रहे हैं।

तो मैं भी आंखें फाड़े उनका लंड देख रही थी।

पापा ने जब मुझे कुछ भी बोलते या कोई इतराज करते न देखा तो उन्होंने बड़े ही आराम से और धीरे धीरे अपना लण्ड पूरा समय ले कर पजामे में अंदर किया और इतनी देर मैंने भी पापा के लण्ड के खूब दर्शन किये.

हालाँकि मैंने पहले भी कई बार पापा का लण्ड देखा था पर आज पहली बार पापा के सामने उनकी जानकारी में उनका खड़ा हुआ लौड़ा देखा. और पापा ने भी मुझे लण्ड ठीक से दिखाया था.

यह निष्चय ही हमारे आपसी संबंधों में एक अगले स्तर की कारवाही थी.

मैंने अपनी गांड दिखा कर और पापा ने अपना लण्ड दिखा कर यह तो बता ही दिया था की हम बाप बेटी असल में क्या चाहते हैं.

बस अब देर थी तो बाप बेटी के संबंधों की समाज की आपसी दिवार गिरने की.

पापा का लण्ड देख कर मैं हल्का मुस्कुरा दी।

उधर पापा को तो जैसी इसी बात का इंतज़ार था, मेरी मुस्कराहट देख कर,उनके दिल में यदि कोई छोटा मोटा डर था भी तो निकल गया.

पापा भी मुस्कुरा पड़े।

वो भी समज रहे थे कि मैं और पापा दोनों अब खुलकर मजे लेना चाह रहे हैं।

इस पेशाब करने के वाकये ने माहौल को सेक्सी बना दिया था।

मेरी चूत से भी पानी निकल कर मेरी पैंटी को हल्का-हल्का गीला कर रहा था इसलिए मैं भी शर्म लाज छोड़ कर मजे लेने का मूड आ चुकी थी।हम मार्किट पहुंच गए थे वहां बहुत ही भीड़ थी तो हमने स्कूटर को पार्किंग में लगा दिया और भीड़ में चले गए बाजार में सेल लगने के कारण बहुत ही ज्यादा भीड़ थी

मैं आगे चल रही थी पापा पीछे चल रहे थे अचानक से भीड़ में धक्का मुक्की होने लगी हम भीड़ में फंस गए थे मुझे आगे से धक्के आ रहे थे और पापा को पीछे से धक्के लग रहे थे धक्का लगने के कारण पापा मेरे पीछे से टच हो गए थे उनका लंड मेरी गांड में टच हो गया.

मैं धक्का लगने का नाटक करते हुए पीछे की तरफ अपने आप धकेलने लगी और पापा के लंड का स्पर्श पा लिया . लंड मेरी गांड के साथ सट गया था और भीड़ ज्यादा होने के कारण किसी को पता नहीं चल रहा था अब मैं और पापा एक दूसरे के साथ साथ आ गए थे.

मेरा पूरा जिस्म मेरे पापा के सीने से लग रहा था मुझे मज़ा रहा था और मैं हॉट हो रही थी. और पापा का लंड भी खड़ा सख्त हो रहा था मैं पापा को और सेड्यूस करने लगी और अपनी गांड को हिलाने लगी अब मेरी गांड पापा के लंड को घिस रही थी और मैं अपना कण्ट्रोल खोती जा रही थी.

पापा का भी कण्ट्रोल लूस हो रहा था और पापा भी अपना लंड मेरी गांड पर लगा रहे थे. अचानक मैंने महसूस किया की पापा के दोनों हाथ मेरी कमर पर है उन्होंने मुझे कमर से पकड़ा हुआ है. मैं हैरान हो गई थी मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. पापा ने अपना कण्ट्रोल खो दिया था और उन्होंने अपना एक हाथ मेरी मिनी स्कर्ट के अंदर डाल दिया और मेरी गांड को ऊपर से सहलाने लगे.

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था लेकिन मैं ऐसे रियेक्ट कर रही थी की जैसे भीड़ बहुत ज्यादा है मैं खुश हो गई थी की आखिर मैंने पापा को सेड्यूस कर ही दिया. वो अपने साथ से मेरी गांड सहलाये जा रहे थे. थोड़ी देर हमने मज़े लिए उसके बाद वो नार्मल हो गए और हम भीड़ में से निकल गए.

हम मार्किट में शॉपिंग करने लगे. लेकिन पापा ने मुझसे बात नहीं की मैंने भी नहीं की. हम शॉपिंग करने के बाद घर आ रहे थे तो पापा ने मुझे कहा की नीलम जो भी हुआ उसको भूल जाओ और किसी को मत बताना .

तो मैंने कहा “कोई बात नहीं पापा. डोंट वरी. ऐसी गलतिया हो जाती है. आखिर हो तो आप भी एक मर्द.”

मैंने ये कहकर एक सेक्सी स्माइल देकर ग्रीन सिग्नल दे दिया पापा भी मुस्कुराये और कहा की “बेटी अब समझदार हो गई है.”

थोड़ी देर के बाद हम दोनों स्कूटर के पास आये घर जाने के लिए, तो देखा कि स्कूटर का अगला पहिया पंचर हो गया था.

पास में कोई दूकान नहीं थी. तो पापा ने एक जान पहचान वाले दूकानदार के पास स्कूटर रख दिया और कहा कि वो उसे कल ले जायेंगे.

फिर हमने घर जाने के लिए कुछ और इंतजाम करने का सोच. मैं तो नाराज़ थी क्योंकि मैं सोच रही थी कि वापिसी में भी पापा से कुछ मजे ले लुंगी और अपनी कार्यवाही को कुछ और आगे ले जाउंगी पर सब गड़बड़ हो गया.

फिर हमने बस से ही जाने का सोचा।

15 मिनट बीत चुके थें पर बस का कोई नमोनिशान नहीं था.

“उबर बुला लूं क्या ?”.

“रहने दो पापा … बेकार में पैसे खर्च होंगे. बस अभी आ जायेगी.”

मैंने कहा. “उबर पे पैसे बर्बाद ना करके उसी पैसों से आप मुझे एक साड़ी खरीद देना.”

“अच्छा ? दो तीन सौ में कहाँ से आयेगी साड़ी ?”.

“दो तीन सौ में कुछ और पैसे मिला लेना पापा …”. मैं हँसते हुए बोली.

कुछ देर में ही उनकी बस आ गई.

“आजाओ पापा …”.

“इसमें नहीं नीलम … बहुत भीड़ है.”.

“पापा … यहाँ कि सारी बसें ऐसे ही भीड़ वाली आती हैं… चलो.”

जगदीश को आराम से सफर करने कि आदत पड़ी थी, बस में अंदर घुसते ही भीड़ देख कर उसका दिमाग़ घुमने लगा. मैं इन सब में निपुण थी, मैंने अपने पापा का हाथ पकड़ा और भीड़ में जगह बनाती हुई बस के एकदम पीछले हिस्से में चली गई.

भीड़ तो वहाँ भी कम नहीं थी पर बस के पिछले हिस्से में कम से कम आने जाने वाले लोगों कि धक्को से बचा जा सकता था. मुश्किल से खड़े होने कि जगह मिली थी उन्हें, दोनों एक दूसरे के अगल बगल खड़े हो गये, बस चल पड़ी.

“अच्छा नीलम … यहाँ कि सारी बसें ऐसे ही भीड़ वाली आती हैं ?”.

“हाँ पापा … तो ? वैसे आज थोड़ी ज़्यादा ही भीड़ है इस बारिश कि वजह से… रोज़ नहीं होता इतना… पर…”.

मैं जिस जगह खड़ी थी उसके पीछे एक आदमी बड़ा सा बैग लिये खड़ा था. उस बैग कि वजह से मैं ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी और बार बार ठोकर लग रही थी.

“इधर आ जा नीलम .”.

पापा ने जब ये ध्यान किया तो उसने अपने सामने थोड़ी सी जगह बना ली और मैं वहाँ घुस कर अपने पापा के आगे खड़ी हो गई. अब पीठ अपने पापा के तरफ थी और धक्के मुक्के से बचाने के लिये पापा पीछे खड़े थें.

पापा मेरे लिये इतने रक्षात्मक थें ये देख कर मैं मन ही मन मुस्कुराई पर कुछ बोली नहीं. मुझे अपने पापा के साथ नोंक झोंक वाला रिश्ता ही ज़्यादा भाता था, औपचारिकता वाला नहीं !

बाहर बारिश होने कि वजह से दिन के वक़्त भी अच्छा खासा अंधेरा छा गया था, बस कि सारी खिड़कीयां बंद थी तो अंदर बस में भी अंधकार ही था, जो जहाँ था वहीं चुपचाप खड़ा था, हिलने डूलने कि तो जगह ही नहीं थी. कुछ देर कि यात्रा के बाद पापा और मैं अब शिथिल हो गयें थें…

पापा ने अपनी बेटी को अपने सामने खड़े होने कि जगह तो दे दी थी पर वो आरामदायक नहीं हो पा रहा था, मेरा तो उसे पता नहीं. दरअसल, उसकी बेटी का बदन उसके जिस्म से एकदम चिपक गया था, उसपे उसकी बेटी का सलवार कमीज़ और खुद उसका पतलून और शर्ट भीग कर तर बतर हो चुका था.

शुरू में काफी देर तक उसने कोशिश कि, की उसका शरीर अपनी बेटी के बदन से ना सटे, पर पीछे से पड़ रहे लोगों की भीड़ के दबाव को वो ज़्यादा देर तक रोक नहीं पाया. मुसीबत तब हुई जब आखिरकार पापा के कमर का नीचला हिस्सा उसकी बेटी के नितंब में जा सटा.

इतना तो फिर भी ठीक था पर सबसे शर्मनाक स्थिति तब आई जब पापा की टांगों के बीच वाला हिस्सा उसकी बेटी की कमीज़ और सलवार में लिपटी पानी से गीली हुई चूतड़ों के मध्य की पतली दरार के बीचो बीच फंस गया !

पापा बस यही सोच रहा था की उसकी बेटी पता नहीं क्या सोच रही होगी, शायद उसे कुछ महसूस ही ना हो रहा हो, ना ही हो तो बेहतर है ! पापा की कमर और दोनों जांघो वाला हिस्सा अब मैं के गांड़ की दोनों गोल उभारों में सट गया था जबकि उसका लण्ड वाला हिस्सा उन दो गोल गुंबदो के बीच घुस गया था !

अनुभूति तो आखिर अनुभूति ही होती है जो इंसान महसूस करता है और जिसका तर्क हर वक़्त ना खोजना संभव है और ना समझना. पापा को भी जब किसी नरम मुलायम गद्दे जैसी अपनी बेटी के गांड़ का उभार अनुभव हुआ तो ना चाहते हुए भी, या फिर यूँ कहें, की उसकी इच्छा के विरुद्ध, उसका लण्ड उसकी पैंट में फूलने लगा !!!

पानी में पूरी तरह से भीगे होने के कारण उसके पतलून के अंदर उसका अंडरवीयर भी ढीला और लचीला हो गया था, जिसकी वजह से उसका अंडरवीयर ज़्यादा देर उसके लण्ड के बढ़ते उभार और आकार को दबा नहीं पाया. उसका लण्ड उसके जांघिये में नीचे की ओर मुड़े हुए ही खड़ा होने लगा!

मेरी ओर से अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं हुई थी. परिस्थिति हाथ से बाहर जाता देख पापा ने धीरे से अपनी कमर पीछे खिसका कर अपने लण्ड को अपनी बेटी की गांड़ की दरारों से बाहर निकाला, और थोड़ा पहलू होने की कोशिश की ताकि वो उसकी गांड़ से ना सटे.

पर इस प्रयास में चूंकि पीछे से भीड़ का काफी दबाव था, उसका लण्ड बाहर तो निकला पर इस बार वापस जाकर मेरी बाई गांड़ के गुंबद पे टिक गया. और ये मैंने बहुत ही अच्छे से बिना किसी गलतफहमी के महसूस भी किया !!!

“आप ठीक है न पापा ? मैं थोड़ा हटूं क्या ?”. मैंने अपनी गर्दन पीछे की ओर बस इतना सा घुमा कर पूछा की उसकी आँख पापा के आँख से ना मिले.

“हाँ!”. पापा ने जितना हो सका अपनी आवाज को स्वाभाविक बना कर कहा, जैसे की कुछ हुआ ही ना हो.

मैंने अपने पापा का लण्ड साफ अपनी गांड़ पर महसूस कर लिया था, थोड़ा अजीब लगा पर मैं जानती थी की ये जान-बूझकर नहीं था. मैंने अपनी गांड़ थोड़ी सी हिला कर ठीक करना चाहि पर उससे मामला और बिगड़ गया !

मेरी इस हरकत से पापा का लण्ड घिसट कर वापस मेरी गांड़ की दरार में फिट हो गया और इस बार पापा का नीचे मुड़ा हुआ लण्ड जांघिये में थोड़ी सी जगह पाकर सीधे ऊपर की ओर उठ गया !!!
 
पापा और मैं इतने सालों से एक साथ रह रहें थें, पापा ने कभी भी ऐसा महसूस नहीं किया था जैसा वो अब कर रहा था. ऐसी बात नहीं है की वो कभी अपनी बेटी के इतना करीब ना गया हो, इससे ज़्यादा करीबी और क्या हो सकती है.

पर हमेशा से एक सामान्य बाप बेटी रहे इन दोनों के बीच अभी जो भी हो रहा था, ऐसा क्यूं हो रहा था !! दोनों बाप बेटी सामने ऊपर की तरफ बस का rod पकड़े खड़े थें. पापा का मुँह अपनी बेटी के भीगे खुले बालों के ठीक पीछे था…

उसके बालों से आ रही बारिश के पानी और शैम्पू की घुली मिली महक ने मानो बेटी और उसके बीच का संकरा फासला कम कर दिया था. अभी तक तो पापा असमंजस में था की क्या हो रहा है और वो क्या करे और क्या ना करे, पर अब जब उसका लण्ड पूरी तरह से टाईट ठनक कर खड़ा हो गया तो उसने समझ लिया की वो अपनी ही सगी बेटी के बदन से सट कर कामोत्तेजित हो रहा था !!!

अब पापा के पास बस एक ही रास्ता था… ये टेस्ट करना की उसकी बेटी क्या चाहती है, अगर वो तिनका भर भी आपत्ती दिखायेगी तो उसे तुरंत खुद को रोक लेना होगा. पापा ने अपनी कमर हल्के से सामने की ओर बढ़ाई तो मेरी गांड़ के बीच रगड़ खा कर उसके लण्ड का चमड़ा पीछे खिसक कर खुल गया और उसका मोटा सुपाड़ा बाहर निकल आया. पापा का लंड इतना फूल गया था कि वो उनकी अंडरवियर टाइट हो रहा था .

अब पापा अपने भीगे पतलून में अपने खड़े लौड़े का सुपाड़ा खोले अपनी बेटी की गोल गदराई चूतड़ से टिका खड़ा था !!! मेरा रहा सहा शक भी अब जाता रहा की जो कुछ भी हो रहा था वो अनजाने में हो रहा था. वो समझ गई की उसके पापा बेचारे परिस्थिति के सताये कामोन्मादित हो रहें थें. परिस्थिति के सताये और मारे ही कहेंगे ना…

क्यूंकि मैं समझ रही थी आज तक उसके पापा ने ना जाने कितनी बार मुझे नाईटी में और पजामे में देखा था, पर कभी भी मुझ पे गंदी नज़र नहीं डाली थी. आज का दिन मगर कुछ और ही था… मन ही मन मैं थोड़ा मुस्कुराई, पर कुछ ना बोली, चुप रही.

इधर पापा का मन बढ़ गया जब उसकी बेटी की ओर से ऐसा कोई इशारा नहीं हुआ जिसके द्वारा वो अपनी असहमति दिखाए. फिर क्या था, उसने एकदम धीरे धीरे मेरी नरम गांड़ में अपना लण्ड ठेलना शुरू किया. उसके खड़े लण्ड का सुपाड़ा तो पहले ही खुल चुका था, सो अपने पानी में गीले भीगे पैंट के अंदर अपना लौड़ा घिसने में उसे ऐसी आनंद की अनुभूति होने लगी की वो बयां नहीं कर सकता था !

अभी उसने तीन चार बार ही अपना लण्ड रगड़ा होगा की बस रुक गई… कोई ठिकाना आया था. वो थोड़ा संभल कर खड़ा हो गया पर उसने देखा की जितने लोग बस से उतरे नहीं उससे ज़्यादा लोग चढ़ गयें, भीड़ और बढ़ गई थी. बस फिर से चल पड़ी.

“अभी दूर है क्या नीलम ?”. पापा ने अपनी बेटी के मूड का जायजा लेने के मकसद से पूछा.

“हाँ पापा … ये बस दूसरे मार्ग से जाती है ना. आपकी बाइक में तो ज़ल्दी हो जाता है.”. मैंने तुरंत जवाब दिया, पर अभी भी पीछे नहीं मुड़ी.

“हाँ …”.

पापा ने इधर उधर आस पास के लोगों को देखा पर सभी अपने में मगन और परेशान खड़े थें… बस में दो अच्छे घराने के बाप बेटी क्या कर रहें थें इसमें शायद ही किसी को रूचि हो !!!

पापा अपना दाया हाथ नीचे सरका के अपने पतलून तक ले गया और पैंट की ज़िप यानि चैन खोल दी. मैं पीछे देख तो नहीं पा रही थो पर वो समझ गई की उसके पापा अब कोई और नई शैतानी करने वाले हैं. मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा…

अपने पतलून के अंदर हाथ डाल कर पापा ने अपना खड़ा लण्ड अपने जांघिये से बाहर निकाल लिया और फिर पैंट कि ज़िप वापस लगा ली. अब उसका लण्ड अंडरवीयर से बाहर लेकिन पतलून के अंदर था. उसने ऐसा इसलिये किया था ताकि उसके लण्ड को अपनी बेटी के चूतड़ का ज़्यादा से ज़्यादा स्पर्श मिल सके.

अब उसने अपनी बेटी कि गीली कमीज़ उठा कर सीधे उसके सलवार में लिपटी गांड़ में अपना लण्ड सटा दिया और उसकी कमीज़ से वो हिस्सा ढक दिया, जिससे अगर कोई देखे तो सिर्फ ये समझे कि दोनों बस ऐसे ही बाकि यात्रियों कि तरह खड़े हैं !

मेरी तो जैसे साँस ही रुक गई पब्लिक में अपने पापा कि इस साहसी हरकत को देख कर ! मैंने अपने भीगे बालों और गर्दन पर अपने पापा कि गरम साँसे महसूस कि… पापा अब पहले से और ज़्यादा सट कर खड़ा हो गया था. अब पापा के लण्ड और मेरी गांड में सिर्फ उनके पैन्ट और मेरी स्कर्ट के कपडे का ही अंतर था.

टी शर्ट के अंदर ढकी मेरी गांड़ में पापा अब खुल कर लण्ड घिसने रगड़ने लगा. मेरी मांसल पुष्ट गांड़ कि गोलाईयां उसके लण्ड को इतना सुकून और आनंद देंगी, ये उसे अभी अभी पता चला था ! अपने पूरी तरह से उत्तेजित हो चुके लण्ड से पापा ने ठेल ठेल कर अपनी बेटी कि स्कर्ट और उसके अंदर पहनी पैंटी को उसकी चूतड़ कि फांक में घुसा दिया था.

मुझेतो मन ही मन हँसी आने लगी अपने पापा कि बेचैनी देख कर. अति कामोत्तेजना में पापा को पता ही नहीं चला कि कब रुकना है और उसने अपना लण्ड अपनी बेटी कि टाईट गांड़ में कुछ ज़्यादा ही घिस दिया था, इस वजह से वो स्खलित होने के करीब पहुंच गया.

उसने तुरंत अपना लण्ड मेरी गांड़ से हटा लिया और साँस रोक कर अपना माल गिरने से रोकने कि कोशिश करने लगा. इस कोशिश में उसके पेट मे बल पड़ गया, मगर अब काफी देर हो चुकी थी, उसका लण्ड उसके पैंट में एकदम से बड़ा होकर फूल गया और उसका वीर्य निकल आया !!!

जब पापा ने देखा कि अब कोई फायदा नहीं तो उसने वापस अपना लण्ड अपनी बेटी कि स्कर्ट में घुसा दिया और झड़ने लगा. उसका गाढ़ा वीर्य पतलून के कपड़े से बाहर रिस रिस कर बहने लगा. मैंने जब अपनी स्कर्ट में गांड़ और जांघो पर गरम गरम मलाई जैसी चिकनी रस के एक के बाद दूसरी धार को गिरता हुआ महसूस किया तो वो समझ गई कि उसके पापा का काम तमाम हो चुका है !!!

20 सेकंड के अंदर ही पापा कि पिचकारी पूरी खाली हो गई. उसके पैर अचानक से हुए इस शीघ्रपतन से काँप रहें थें और उसने बड़ी मुश्किल से खुद को अपनी बेटी के ऊपर गिरने से रोका था. मैंने अपने हाथ से अपनी गांड़ में घुस चुकी पैंटी और स्कर्ट को निकाला और अपने कपड़े ठीक करने लगी. पर पापा का काम अभी ख़त्म नहीं हुआ था !

अभी अभी थोड़ी सी शिथिल हुई मैंने अचानक अपने पापा का दाया हाथ सीधे अपनी चूत पे रेंगता हुआ महसूस किया. पापा चूत स्कर्ट के ऊपर से ही सहलाने लगा !

पापा अचानक से इतने बेशरम कैसे हो गयें ???… मैं बेचारी ये सोच ही रही थी कि पापा ने स्कर्ट के इलास्टिक में अपनी ऊँगलीयां फंसा दी…

हाय !… पापा पागल हो गयें थें क्या… इतने लोगों के बीच भरी बस में अपनी सगी बेटी को नंगा करना चाहते थें क्या ??? घबरा कर मैंने तुरंत अपने पापा का हाथ पकड़ कर उन्हें रोक लिया. पापा रुक तो गया… उसने अपनी बेटी कि स्कर्ट का नहीं खोला मगर अब अपना हाथ स्कर्ट के अंदर ही डाल दिया.

लेकिन मैंने स्कर्ट इतनी टाईट बाँध रखी थी कि मुश्किल से पापा का हाथ अंदर घुस पाया और पापा बेचारे सिर्फ पैंटी का ऊपरी हिस्से वाला इलास्टिक ही छू पायें थें !!! अब ये तो कुछ ज़्यादा ही हो रहा था… मैं एकाएक अपने पापा के तरफ मुड़ कर खड़ी हो गई. पापा को ये अंदेशा नहीं था कि उसकी बेटी अचानक आमने - सामने हो जायेगी. उसने झट से अपनी नज़र घुमा ली.

“पापा ! मम्मी को फोन किया कि हम लेट हो जायेंगे ?”. मैंने पूछा.

पापा समझ गया कि मैं जानबूझ कर ज़ोर से बोल रही थी और “पापा ” शब्द पर ज़्यादा दबाव डाल रही थी ताकि आस पास खड़े लोगों को उनकी हरकतों पे कोई शक ना हो. पापा कि हिम्मत नहीं हुई कि अपनी बेटी से आँख मिला सके… उसने कोई जवाब नहीं दिया… उसका गला सूख रहा था. मैं अब सीधे उसकी आँखों में देख रही थी.

“कितनी भीड़ है पापा … मैं गिर जाउंगी.”. मैंने अचानक अपने दाये हाथ से अपने पापा का कमर पकड़ लिया और बाये हाथ से बस का डंडा पकड़े खड़ी रही.

पापा को और किसी इशारे कि ज़रूरत नहीं थी… वो समझ गया कि उसकी बेटी के साथ उसने जो कुछ किया था वो उसे अच्छा लगा हो या ना पर इतना तो तय था कि वो नाराज़ नहीं थी… उसकी बेटी के गोल मम्मे अब उसकी छाती से दब रहें थें.

उसकी कमीज़ बारिश में भीगे होने के कारण पापा महसूस कर पा रहा था कि मेरे दोनों निप्पल खड़े हो गयें थें. उसे अब बस में अपनी बेटी के अलावा कोई दिखाई नहीं दे रहा था ! पापा का पैंट मेरी स्कर्ट से ढक गया था…

उसने अंदर हाथ डाल कर अपने पैंट कि ज़िप खोल दी और इस बार अपना लण्ड पतलून से बाहर निकाल लिया. मुझेअपने पापा कि इस हरकत पे अब कोई आश्चर्य नहीं हो रहा था… सबसे नज़र बचा कर वो दोनों जो कुछ भी कर रहें थें उससे अब मुझेएक अजीब सा यौन किंक मिलने लगा था !!!

पापा का लण्ड अब अपने खुद के पेट और उसकी बेटी के पेट के बीच में दबा पड़ा था और ऊपर से बेटी कि स्कर्ट से पूरी तरह ढका हुआ था. मैंने उसके लण्ड का चिकना सुपाड़ा अपनी नाभी में टच होता महसूस किया… अफ़सोस कि अपने पापा का लौड़ा देख नहीं पा रही थी… पर उसके स्पर्श से इतना तो अंदाज़ा लगा लिया था कि पापा का लौड़ा अच्छा खासा बड़ा होगा.

पापा धीरे धीरे अपनी कमर हिला कर अपना लण्ड अपनी बेटी के पेट और नाभी में रगड़ने लगा. अब वो सीधा अपनी बेटी कि नज़रों से नज़रें मिलाये खड़ा था. उसका चेहरा अपनी बेटी के चेहरे के इतने पास था कि उसका तो मन कर रहा था उसे चुम ही ले. चूंकि पापा का लण्ड अभी अभी झड़ा था, सो उसके लण्ड में ज़्यादा गर्मी नहीं आ रहा था पर उसका मन कर रहा था कि वो फिर एक बार माल गिराये.

“अब हम पहुँचने ही वाले हैं पापा …”. मैंने अपने पापा को आगाह किया!!!

पापा ने धीरे से अपना सिर हिला कर हामी भरी और लण्ड घिसता रहा… पर अब इससे बात नहीं बनने वाली थी… उसने तुरंत बेटी कि स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर अपना लण्ड पकड़ लिया और मूठ मारने लगा ! मैं अपने पापा का साथ देने के लिये उसके कमर को सहलाने लगी और अपनी जांघे पापा के पैरों में सटा दिया.

पापा अपनी बेटी के बदन, उसकी जांघ, उसकी चूचियाँ, सबका स्पर्श करते हुए , मूठ मारने लगा. उसकी मेहनत जल्द ही रंग लाई… उसके लण्ड का पानी छूट पड़ा. वीर्य कि पहली तीन चार धार तो इतनी तेज़ थी कि स्कर्ट के अंदर होती हुई ब्रा तक पहुंच गई.

फिर पेट और स्कर्ट पर गिरने लगी और फिर पापा ने झड़ता हुआ लौड़ा तुरंत अपने पैंट में घुसा लिया और बाकि का माल अपने पतलून के अंदर गिराने लगा. उसकी बेटी ने अगर उसकी कमर ना पकड़ी हुई होती तो बेचारा उत्तेजना के मारे गिर ही गया होता ! फिर भी वो थोड़ा सा लड़खड़ा गया तो पास खड़े एक आदमी ने उसे टोका.

“ओ भाई… थोड़ा संतुलन बना के रहो… तब से देख रहा हूं !”

“भाईसाहब… सॉरी !”. पापा कि आवाज गले में अटक गई.

मुझे हँसी आ गई अपने पापा कि हालत देख कर. उनका स्टॉप आ गया था… दोनों ने अपने अपने कपड़े ठीक किये, पापा ने अपना शर्ट बाहर कर लिया ताकि उसके पैंट में बना लण्ड का तंबू और वीर्य का गीलापन का पता ना चले और बस से उतर गयें. मौसम हमारे पक्ष में था, अभी भी तेज़ बारिश हो रही थी, सो उसके और उसकी बेटी के कपड़ों पे लगा वीर्य ऐसे ही धुल गया.

हम दोनों बाप बेटी अब बस से उतर कर घर को चल दिए. पापा के दोनों हाथ हमारे सामान से भरे हुए थे.

घर के पास पहुंचे तो घर के गेट पर ताला लगा हुआ था. पापा ने मुझे कहा

"नीलम बेटा! चाबी मेरी पैंट को जेब में है. मेरे हाथ भरे हुए हैं. तुम मेरी जेब से चाबी निकाल लो."

मैंने पापा की कोई शरारत नहीं समझी और पापा के पैंट की जेब में हाथ डाल दिया।

चाबी जेब मैं नहीं थी. मैंने कहा तो पापा ने मुस्कुराते हुए कहा

"अच्छी तरह से देखो। चाबी वहीँ होगी। "

मैंने हाथ और अंदर तक घुसाया तो मेरा हाथ पापा के तने हुए लौड़े पर लग गया. मैं समझ गयी कि पापा नई शरारत कर रहे हैं.

तो मैंने अभी अनजान बनने का नाटक करते हुए पापा के लण्ड पर उँगलियाँ घुमाते हुए कहा.

"पापा जेब में तो कुछ नहीं है."

पापा ने मुस्कुराते हुए कहा

"बेटी! और कहाँ होगी चाबी? तुम्हारे ताले की चाबी तो यही होनी चाहिए"

मैं अब समझ गयी कि पापा मेरे किस ताले की चाबी की बात कर रहे हैं.

पापा शैतानी कर रहे थे. मैं उसी तरह अनजान होने का नाटक करते हुए बोली।

"पापा! मेरे ताले की नहीं। बल्कि घर के ताले की चाबी चाहिए।"

पापा हँसते हुए फिर बोले "बेटी! घर भी तुम्हारा है और ताला भी तुम्हारा ही है. जो चाबी तुम्हारा ताला खोलेगी वो तो यही होनी चाहिए।"

मैं भी गर्म हो ही रही थी, बस में हुए घटना के बाद तो मुझे लग रहा था कि मेरी चुदाई की इच्छा जल्दी ही पूरी होने वाली थी.

मैंने एक बार फिर से पापा के लण्ड पर और उनके सुपाडे पर उँगलियाँ चलाई और अपने नाखूनों से पापा के सुपाड़े पर रगड़ा और हाथ बाहर निकाल कर कहा

"पापा यहाँ तो नहीं है चाबी। आप शायद कहीं भूल रहे हो."

पापा ने फिर बात सँभालते हुए बोला "बेटा! तो फिर दूसरी जेब में चेक करो. शायद उस जेब में होगी।"

मैं अब क्या करती, मझा तो मुझे भी आ ही रहा था तो मैंने अपना हाथ पापा के दुसरे जेब में डाला।

चाबी वहां थी. पर अब मैं शरारत करने के मूड में आ गयी थी तो चाबी के ऊपर से हाथ आगे ले जा कर फिर से उनके लौड़े पर फेरते हुए बोली

"पापा! चाबी तो यहाँ भी नहीं मिल रही."

पापा मेरी शरारत समझते हुए बोले
 
"नीलम अब मेरी तो दो ही जेबें है. अच्छी तरह से देखो चाबी जरूर मिलेगी।"

अब मैं कितनी देर तक नाटक कर सकती थी तो मैंने एक बार अच्छी तरह से जेब के अंदर से ही पापा के लण्ड पर हाथ फेरा और अच्छी तरह से उनके लौड़े तो टटोल कर फिर चाबी बाहर निकाल ली.

पापा तो इस सब से बहुत मस्त तो गए थे. उनका लौड़ा तो बांस की तरह सख्त हो कर तन गया था. और झटके मार रहा था.

फिर हम घर के अंदर आ गए और पापा ने सामान टेबल पर रख दिया।

मम्मी अभी घर में नहीं थी. शायद कहीं गयी थी तो पापा खली घर देख कर फिर शरारत के मूड में आ गए और मुझे बोले कि नीलम आज कल चोरों का डर रहता है. तुम गेट को अंदर से ताला लगा दो.

मैं समझ रही थी की पापा ताला लगवाने को कह रहे हैं तो इसका कोई तो मतलब होगा। पर मैं समझ नहीं पायी , पर ताला ले कर लगाने लगी.

गेट लॉक करने के वक्त मुझे देर लग रही थी.

इतने में पापा ने पीछे से मेरी कमर को टच करते हुए मेरी मदद की.

मेरी हिप में उन्होंने अपने लंड का पूरा प्रेशर डाला हुआ था.मेरी मदद करने के बहाने से वे अपने लंड के उभार को मेरी गांड पर रगड़ने लगे थे.

कहीं न कहीं मुझे भी ये नाटक अच्छा लग रहा था.

हम दोनों लॉक करने में इतने व्यस्त हो गए कि शरीर के साथ क्या हो रहा था, भूल ही गए थे.

पापा- बेटा लॉक थोड़ा टाइट हो गया है, रुको.

वे अपने उभार को पीछे मेरी दरार में रगड़ते हुए हिल रहे थे.

मैं- हां पापा, आप आराम से करो.

मैं हिप पर थोड़ा दबाव बनाकर खड़ी थी!

पापा का लौड़ा पहले से ही तना हुआ था. और वो उसे मेरी गांड की दरार में घुसा रहे थे.

मेरी ड्रेस हिप के बीच में चली गई थी.

पापा ने अपने लौड़े के जोर से मेरी स्कर्ट को मेरे चूतड़ों में घुसा दिया था. हम कुछ देर इसी तरह नाटक करके मजे करते रहे आखिरकार लॉक हो गया और वे पीछे हट गए.

मैं पीछे से पापा को छेडते हुए बोली

"पापा! किचन में सामान रख कर नहा लेना। आपके कपडे भीग गए हैं."

यह कहते हुए मैं शरारत से मुस्कुरा रही थी. पापा मेरी मुस्कराहट से समझ गए कि मैं किस कपडे के भीगने की बात कर रही हूँ.

पापा मेरे पास आये और मेरी चूतड़ों पर एक प्यार से थप्पड़ मारते हुए बोले

"नीलम! तुम बहुत बिगड़ गयी हो. कपडे भी तो तुम्हारे ही कारण भीग गए हैं."

यह कह कर वे मुस्कुराते हुए चले गए. मैं भी तौलिया ले कर अपने कमरे में नहाने चली गयी.

पापा को उत्तेजित करने और पटाने का मेरा यह अभियान ठीक चल रहा था.

मम्मी अभी भी नहीं आयी थी. मुझे विश्वास था की यदि मैं इसी तरह से कोशिश करती रही तो जल्दी ही पापा से चुदवाने में सफल हो जाउंगी और फिर हम बाप बेटी के मजे ही मजे हैं.

इसी तरह हम बाप बेटी शरारत करते मजे करते रहे. थोड़ी देर में मम्मी भी आ गयी.

मम्मी के आने से हम दोनों बाप बेटी सावधान हो गए।

पापा के सामने पड़ने पर वे और मैं दोनों एकदम नॉर्मल रहे।

हालांकि मैंने महसूस किया कि पापा चोरी से कई बार मुझे देख रहे थे, साथ ही मुझसे किसी ना किसी बहाने ज्यादा बात भी कर रहे थे।

खैर … फिर रात हुई, सबने खाना-पीना खाया और फिर रोज की तरह हम सब कमरे में आ गए।

मैंने कपड़े पहने और नाइट बल्ब जला कर बिस्तर पर आ गई.

यह सिलसिला दो दिन तक चला.

इस बीच पापा मुझसे अब पहले से काफी ज्यादा बात करने की कोशिश करने लगे।

यहां तक कि मेरे पापा अब कोई ना कोई बहाने मुझसे मजाक भी करने लगे।

उनको भी अब शायद लग रहा था कि घर में ही एक मस्त माल चोदने के लिए है तो उसका फायदा उठाया जाए।

उन्हें क्या पता कि यहां खुद उनकी बेटी कब से चुदने को तैयार बैठी है।

अब मैं भी पापा के पास किसी ना किसी बहाने से जाने लगी।

अगले दिन शाम को मम्मी को थोड़ा बुखार आ गया था. तो पापा ने मम्मी को दवाई दी और एक नींद की गोली भी दे दी ताकि उनको आराम मिल सके.

रात में हम सब अपने कमरे में चले गया.

मैंने अपने कमरे की लाइट बंद कर दी और बिस्तर पर आकर लेट गई।

मैं अँधेरे में ही बिस्तर पर लेटी रही।

मेरी आँखों में नींद नहीं आ रही थी. कितने दिनों से चुदाई नहीं हुई थी तो चूत में खूब खुजली जो हो रही थी.

काफ़ी देर तक करवट बदल-बदल कर सोने की कोशिश करने लगी मगर नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी।

आंख बंद कर सोने की कोशिश की तो पिछले 3-4 दिनों में मेरे साथ जो भी हुआ था, ये सब सोच कर मुझे थोड़ी उत्तेजना भी होने लगी।

फिर मैं मोबाइल पोर्न मूवी देखते हुए अपनी चूत सहलाने लगी।

मूवी देखते हुए मेरी एक्साइटमेंट बढ़ने लगी तो मैंने अपनी पैंटी उतार दी।

अब मैं सिर्फ स्कर्ट और टी-शर्ट में थी।

जब से मैंने पापा को पटाने के बारे में सोचा था तब से मैं डैड-डॉटर वाली पॉर्न मूवी ज्यादा देखने लगी थी।

तभी मैंने मोबाइल में टाइम देखा तो रात के 11.45 हो गए।

मूवी देखते हुए मैं अपनी नंगी चूत भी सहलाती जा रही थी।

अभी मूवी देखते हुए थोड़ी देर बीता था कि मुझे कुछ आवाज आयी।

मैंने टाइम देखा तो 12.15 बज रहे थे।

तो मैंने तुरंत मोबाइल बंद किया और आवाज सुनने की कोशिश करने लगी।

जैसे ही मेरी निगाह दरवाजे के नीचे से गई तो परछाई से समझ गई कि कोई खड़ा है।

मैंने तुरंत हाथ से अपनी आंखों को ढक कर सोने का नाटक करने लगी।

मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

मैं समझ गई थी कि मम्मी के सो जाने के बाद मेरे पापा धीरे से मुझे सोती हुई देखने आए हैं। पापा ने मम्मी को बुखार की दवाई के साथ साथ नींद की भी तो दवा दी थी. तो शायद पापा हिम्मत करके मेरे कमरे में आ रहे थे.

अभी मेरी ये सोच ही रही थी कि कमरे का दरवाजा धीरे से बहुत थोड़ा सा खुला।

पापा को लगा होगा कि शायद अंदर नाइट बल्ब जल रहा होगा।

मगर अंदर एकदम अंधेरा था।

कुछ देर रुकने के बाद पापा ने दो बार धीरे से मेरा नाम लेकर बुलाया- नीलम। ..... नीलम !

पापा शायद कन्फर्म करना चाहते हैं कि मैं जागी हूं या सो रही हूं।

जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो उनको भरोसा हो गया कि मैं गहरी नींद में हूँ।

इसके बाद उन्होंने दरवाजे को थोड़ा और खोला और धीरे से हाथ अंदर डाल कर स्विच की तरफ ले जाने लगे।

मैं हाथ से आंखों को ढके चोरी से पापा की हरकत देख रही थी।

जैसे ही पापा का हाथ स्विच की तरफ बढ़ा मैं समझ गई कि वे नाइट बल्ब जला कर मुझे देखना चाह रहे हैं।

यह सोचकर ही मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

सच कहूं तो मुझे पसीना आने लगा था … पर मैं चुपचाप उसी तरह लेटी रही।

पापा ने हाथ बढ़ाकर नाइट बल्ब जला दिया। आज पापा खुद कुछ करने जा रहे थे. वरना अभी तक तो मैं ही पापा को उत्तेजित कर रही थी.

उन्होंने बनियान और अंडरवियर पहना हुआ था।

1 मिनट तक वे दरवाज़े से ही देखते रहे।

वहीं मेरी तरफ से कोई हरकत ना होने पर उनकी थोड़ी हिम्मत बढ़ गई थी और वे दरवाज़े से कमरे के अंदर मेरे बिस्तर के पास आ गए।

अब मैं अपने पापा के सामने लेटी थी।

मेरी छोटी सी स्कर्ट मेरी जांघों को पूरा ढक नहीं पा रही थी और पापा बिस्तर के बगल खड़े होकर मेरी चिकनी नंगी जांघों को निहार रहे थे।

तभी पापा ने धीरे से अपना हाथ बढ़ा कर मेरी स्कर्ट को ऊपर कर दिया।

मैंने अपनी पैंटी पहले ही उतार ली थी जिससे मेरी नंगी चूत उन के सामने थी।

मेरी सांस जोर-जोर से चल रही थी।

पापा को शायद उम्मीद नहीं थी कि मैंने पैंटी नहीं पहनी होगी।

इसलिए उनकी आंखें एकटक मेरी चूत पर टिक गईं।

अभी मैं कुछ सोचती कि तभी अचानक पापा ने अपने दोनों हाथ से अपने अंडरवियर को पकड़ कर नीचे खिसका दिया।

चड्डी नीचे खिसकते ही उनका लंड झटके से बाहर आ गया।

इसके बाद वे अपने लंड को धीरे-धीरे एक हाथ से हिलाने लगे।

पापा को इस तरह अपनी चूत को देखते हुए मुठ मारते देख एक्साइटमेंट और अजीब सी फीलिंग से मेरा शरीर और चेहरा गर्म होने लगा था।

उधर पापा खिसक कर बेड के बगल आ गए और मेरी चूत के पास आकर खड़े हो गए।

मैं बेड के किनारे की तरफ ही थी इसलिए अब पापा के लंड और मेरी जांघ के बीच मुश्किल से 6 इंच की दूरी थी।

चुपचाप मैं उसी तरह लेटी रही।

मेरी तरफ से कोई हरकत ना होते देख पापा की हिम्मत बढ़ती जा रही थी और वे इतने एक्साइट हो गए थे कि पापा झुक कर अपने एक हाथ से धीरे से मेरी चूत के ऊपर मेरी झांटों को सहलाने लगे।

पापा ने जैसे ही मेरी चूत को छुआ, वैसे ही मेरी बदन में करंट सा दौड़ गया।

मेरा उत्तेजना के मारे शरीर हल्का सा हिल गया.

यह देख पापा रुक गये और जल्दी से उन्होंने अपना अंडरवियर ऊपर कर लिया।

वे डर गये थे कि कहीं मेरी नींद न खुल जाए।

मगर करीब आधा मिनट तक रुककर पापा ने रुक कर चेक किया कि मैं जग तो नहीं गयी।

मैं भी सांस रोके उसी तरह पड़ी रही।

मुझे लगा ऐसा ना हो कि पापा घबरा कर लौट जाएं।

खैर जब पापा ने सुनिश्चित कर लिया कि मैं गहरी नींद में हूँ तो उन्होंने फिर से अपने अंडरवियर को थोड़ा नीचे खिसका कर लंड को बाहर निकाल लिया।

इस बार शायद पापा कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं थे तो उन्होंने मुझे हाथ से छुआ तो नहीं लेकिन वे मेरी चूत को देखते हुए मुठ मारने लगे।

अभी मुठ मारते हुए करीब 2-3 मिनट हुए थे कि पापा के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली और अचानक उनके लंड से धार के साथ वीर्य निकल गया।

जैसे ही वीर्य निकला तो पापा ने तेजी से अपने लंड को दोनों हाथ से ढकने लगे।

शायद वे नहीं चाह रहे थे कि उनका वीर्य मेरे ऊपर गिरे या कमरे में इधर-उधर गिरे।

लेकिन उन्हें शायद अंदाजा नहीं था कि वे इतनी जल्दी और तेजी से झड़ जाएंगे।

पापा के लंड का गाढ़ा गाढ़ा वीर्य मेरी चूत, जाँघ और चादर पर फैल गया।

पहले पापा ने अपने लंड को लुंगी से पौंछा, फिर मेरी जांघ और चूत पर फैल लंड के पानी को धीरे से पौंछने की कोशिश करने लगे।

मगर मेरी नींद खुलने के डर से बस हल्का सा ही पौंछ कर वो तेजी से कमरे से बाहर निकले और फिर धीरे से दरवाजे को बंद कर चले गए।

अभी भी मेरी झांगों और चूत पर पापा के वीर्य का ढेर पड़ा था.

कमरे से बाहर निकलते वक्त पापा ने घबराहट और जल्दबाजी में नाइट बल्ब बंद नहीं किया।

मैं थोड़ी देर उसी तरह लेटी रही।

जब पापा के सीढ़ी से नीचे उतरने की आवाज सुन ली, उसके बाद मैं धीरे से उठ कर बैठी।

नीचे देखा तो फर्श पर भी वीर्य फैला हुआ था।

मैंने बाथरूम में जाकर पहले अपनी जांघ और चूत पर फैले वीर्य को उंगली पर लेकर सूंघा. मुझे उसकी खुशबू अच्छी लगी.

फिर मैंने अपनी वो ऊँगली अपने मुंह में डाल ली और पहली बार अपने प्यारे बाप का वीर्य चखा।

पापा का वीर्य बहुत ही स्वादिष्ट था. मैंने पहली बार अपने पापा का माल का स्वाद लिया था. फिर तो मैंने अपने सारे बदन पर से वीर्य चाट चाट कर साफ किया।

फिर कमरे में आकर बेड की चादर उठाई और उसी चादर से फर्श को भी साफ कर रख दिया और फिर दूसरी चादर बिछाई और फिर कपड़े पहन कर सो गई।अगले दिन सुबह 8 बजे मेरी नींद खुली।

मैं उठी और हाथ-मुंह धोकर गंदी वाली चादर को लेकर नीचे आ गई।

नीचे आई तो देखा कि पापा चाय पीते हुए पेपर पढ़ रहे थे।

मम्मी भी उनके साथ बैठ कर चाय पी रही थी।

मेरे हाथ में चादर देख कर पापा थोड़े सकपका गए.

अभी मैं कुछ कहती, तभी मम्मी बोली- नीलम बेटी , ये चादर क्यों लेकर आई हो?

मैंने पापा की ओर देखा तो वे अखबार पर आंख गड़ाये हुए थे मगर ध्यान मेरी तरफ ही था।

उन्हें देख कर साफ पता चल रहा था कि वे घबराए हुए हैं।

उन की हालत देख कर मुझे मन ही मन हंसी आ रही थी, फिर भी मैं संभलती हुई बोली- अरे यह गंदी हो गई थी मम्मी!

इतना कह कर मैं जानबूझ कर चुप हो गई।

मैं सोच रही थी कि अब मम्मी पूछेंगी जरूर कि कैसे गंदी हो गई।

मम्मी बोलीं- अभी तो कल सुबह ही बिछाई थी इतनी जल्दी कैसे गंदी हो गई?

मैंने जानबूझ कर थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा- अरे … कल सोने जा रही थी तभी गिलास का पानी गिर गया था इसलिए इसे हटा दिया था और दूसरी चादर बिछा कर सो गई थी।

दरअसल मैं पापा को ये जताना चाह रही थी कि मैं भी मम्मी से झूठ बोलकर कुछ छुपा रही हूं।

मैंने पापा की ओर देखा तो वे अभी भी पेपर पर नज़र गड़ाये बैठे थे।

मेरा जवाब सुन कर वे शायद थोड़े नॉर्मल हो गए।

हालांकि वे अभी भी मुझसे नज़र बचा रहे थे।

मुझे लगा कि कहीं ऐसा ना हो कि पापा ज्यादा घबरा जाएं और फिर बात आगे ही ना बढ़े और यहीं पर खत्म हो जाए।

इसलिए मैंने पापा की घबराहट दूर करने के लिए खुद ही उनसे बात करने लगी और कहा-

"पापा! आज बड़ी देर तक चाय पी रहे हैं पापा … आपको ऑफिस नहीं जाना क्या?"

और फिर मैं जाकर उनके बगल बैठ गई और चाय पीने लगी।

पापा थोड़े नॉर्मल होते हुए बोले- अरे अभी 8 बजे हैं

फिर मैंने और भी थोड़ी इधर-उधर की बातें कर उनकी घबराहट एकदम दूर करने की कोशिश की।

उसके बाद पापा तैयार होकर ऑफिस चले गए।

मैं भी अपने कमरे में आ गयी.

मेरा तो दिन ही नहीं कट रहा था।

बस सोच रही थी कि जल्दी से रात हो जाए ताकि पता चले कि आज फिर पापा आते हैं या नहीं।

किसी तरह रात हुई और खाना खाकर पापा-मम्मी भी अपने कमरे में चले गए और मैं भी ऊपर अपने कमरे में आ गई।

मैंने कपड़े बदले और छोटी स्कर्ट और टी शर्ट पहन ली।टी शर्ट और स्कर्ट के नीचे मैंने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी क्योंकि कल जो हुआ था वो तो अचानक हुआ था लेकिन आज मैने जानबूझकर इसलिए नहीं पहना कि पापा को लगे कि मैं रोज बिना पैंटी के सोती हूँ।

फिर नाइट बल्ब जलाकर कर लाइट को ऑफ कर दिया।

अँधेरा रहेगा तो पापा को नाइट बल्ब ऑन करना पड़ेगा इसलिए मैंने पहले ही नाइट बल्ब ऑन कर दिया था।

साथ ही मैने चादर के ऊपर एक तौलिया बिछा कर लेटी थी ताकि अगर आज फिर पापा के लंड से पानी निकले तो बिस्तर पर ना पड़े।

कुल मिलाकर मैं पापा को यह अहसास दिलाना चाह रही थी कि क्या होने वाला है, ये मैं जान रही हूं।

आज क्या होगा, ये सोच कर मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था।

अपनी चूत सहलाते हुए बेसब्री से पापा का इंतज़ार करने लगी।

रात के करीब पौने एक बजे मुझे सीढ़ियों से हल्की सी आवाज आयी.

मैं समझ गयी कि पापा आ रहे हैं।

फिर कल रात की तरह मैंने पीठ के बल लेट गयी और अपने हाथ को मोड़कर आँखों को ढक लिया कि चोरी से उनकी हरकतों को देख सकूं।पापा ने धीरे से कमरे का दरवाजा खोला, फिर 10-15 सेकेण्ड तक दरवाजे पर ही रुके रहे।

शायद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि नाइट बल्ब पहले से जल रहा होगा।

खैर 10-15 सेकेण्ड रुकने के बाद वे धीरे से दबे पाँव कमरे में आये और बेड के पास आकर खड़े हो गये।

आज पापा ने हाफ पैंट और बनियान पहना हुआ था।

पापा बेड के पास बिलकुल मेरे बगल खड़े थे।

आंखों को मैंने हाथों से ढक रखा था, इस वजह से मुझे उनका चेहरा तो नहीं दिख रहा था लेकिन पेट से नीचे का पूरा हिस्सा दिख रहा था।

मैंने स्कर्ट और टी शर्ट पहनी थी … पापा करीब 15-20 सेकेण्ड तक ऐसे ही खड़े रहे।

फिर धीरे से झुककर उन्होंने मेरी स्कर्ट के निचले हिस्से को पकड़ा और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खिसकाने लगे।

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

फिर पापा ने स्कर्ट को पूरा ऊपर की तरफ खिसका कर मेरे पेट पर कर दिया।

अब आज एक बार फिर मेरी नंगी चूत पापा की आँखों के सामने थी।

पापा ने कल की तरह चूत या झांटों को छूने की हिम्मत नहीं दिखाई।

उसके बाद पापा सीधे खड़े हो गये और फिर वही हुआ जो मैं सोच रही थी।

उन्होंने अपनी हाफ पैंट को पकड़ कर नीचे खिसका दिया।

जैसे ही उन्होंने पैंट नीचे खिसकाया उनका लण्ड एक झटके से बाहर आ गया।

उनका लण्ड करीब-करीब खड़ा था।

पापा धीरे धीरे अपने लण्ड की चमड़ी को आगे पीछे कर मुठ मारने लगे।

तभी अचानक पापा ने लण्ड को हिलाना छोड़ दिया और अपने दोनों हाथ को धीरे से बेड के किनारे रखा और फिर नीचे झुकने लगे।

मैं समझ नहीं पायी कि वे क्या करने जा रहे हैं।

तभी मैंने देखा कि पापा अपना मुंह मेरी चूत के पास लाकर नाक से मेरी चूत को सूंघने लगे।

मेरी सांस धौंकनी की तरह चल रही थी।

मैं बिना हिले डुले सो रही थी।
 
करीब 15 सेकेण्ड तक मेरी चूत को सूँघने के बाद वे वापस खड़े हो गये।

इस बार जब खड़े हुए तो उनका लण्ड एकदम टाइट खड़ा था।

अब पापा थोड़ा आगे खिसकर बेड से एकदम सट कर खड़े हो गये।

उनका लण्ड करीब-करीब मेरी चूत के ठीक ऊपर था।

अब वे तेजी से अपने लण्ड को हिलाकर मुठ मारने लगे।

करीब 5 मिनट तक बीते होंगे कि उन्होंने अपनी कमर को तेजी से हिलाना शुरू किया और अचानक तेज झटके और धार के साथ रुक-रुक कर उनके लण्ड से पानी निकलने लगा जो मेरी चूत, जाँघ, स्कर्ट और तौलिये पर फैल गया।

झड़ने के बाद भी करीब 4-5 सेकेण्ड तक पापा उसी तरह लण्ड को पकड़े खड़े रहे और फिर अपने पैंट से को ऊपर खिसका कर उसी से लण्ड को साफ कर पूरा पहन लिया।

और फिर मेरे ऊपर चूत और जांघ पर फैले लण्ड के पानी को बिना साफ किये कमरे से बाहर निकले और धीरे से दरवाजा बंद कर चले गये।

इसके बाद मैं धीरे से बिस्तर से उठी और दरवाजे को अंदर से लॉक करके लाइट जलाई।

मैंने देखा कि पापा के वीर्य की कुछ बूंद नीचे जमीन पर भी गिरी थी।

चूंकि मैंने चादर के ऊपर तौलिया डाल लिया था इसलिए चादर बच गई थी।

मगर तौलिये और स्कर्ट पर पापा के लंड का पानी पड़ा था।

मैंने बाथरूम में पानी से अपनी चूत और जांघ को साफ किया और फिर फर्श पर पड़े वीर्य को तौलिये से साफ किया और दूसरे कपड़े पहने।

फिर मोबाइल में सुबह 8 बजे का अलार्म लगा कर मैं सो गई।

मैंने 8 बजे का अलार्म इसलिए लगाया था क्योंकि यही समय था जब पापा और मम्मी चाय पीते हैं।सुबह 8 बजे अलार्म बजने पर नींद खुल गई।

मैं उठी और धीरे से कमरे का दरवाजा खोला और चोरी से नीचे झांक कर देखा तो पापा और मम्मी डाइनिंग टेबल पर चाय पी रहे थे।

मेरी योजना थी कि जैसे मैं कल चादर कर नीचे गई थी, उसी तरह आज स्कर्ट और तौलिया लेकर जाऊंगी और मम्मी से धोने को कहूंगी।

मैं वापस कमरे में आई और स्कर्ट और तौलिया लेकर नीचे पहुंची।पापा मेरे हाथ में स्कर्ट और तौलिया देखकर फिर थोड़े परेशान हुए.

मगर मैंने बिना उनकी तरफ देखे मम्मी से कहा- मम्मी, ये स्कर्ट और तौलिया मशीन में धोने के लिए डाल देना।

मम्मी बोलीं- ये तो साफ कर के रखी थी गंदी कैसी हो गई?

मैंने कहा- अरे अभी बाथरूम में लेकर गई थी तो नीचे गिर गया था।

पापा फिर समझ रहे थे कि मैं झूठ बोल रही हूं।

मैं पापा को यही जताना भी चाह रही थी कि मैं जानबूझ कर झूठ बोल रही हूं।

फिर मैं एकदम नॉर्मल होकर पापा से बात करने लगती जैसे कुछ हुआ ही न हो।

अब मैं बिना पैंटी के सोती … कभी सिर्फ कुर्ती में तो कभी सिर्फ लांग टी-शर्ट में!

और रोज रात में पापा मेरे कमरे में आते और मुझे नंगी देखकर मुठ मारकर चले जाते।

खैर इस बीच पापा का डर काफी कम हो गया था क्योंकि वो अपना वीर्य मेरी चूत और जांघ के साथ ही जो कुछ भी मैं पहनी रहती चाहे स्कर्ट, कुर्ती, टीशर्ट उस पर गिरा कर चले जाते थे.

उन्हें डर नहीं लगता था कि मैं जगूंगी और अपने ऊपर लंड का पानी देखूंगी तो क्या सोचूंगी।

हालांकि वे अभी भी मुझे छूने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे.

बस आते थे और मुझे नंगी देखकर मुठ मारकर चले जाते थे।

और मैं रोज उठकर अपने शरीर पर और जमीन पर फैले वीर्य को साफ करती।

सुबह वीर्य वाले कपड़े लेकर पापा को सुनाती हुई मम्मी को धोने के लिए देती और हमेशा कोई न कोई झूठ बोलती।

ऐसा करीब 5-6 दिन तक चलता रहा।

लेकिन मैं अब थोड़ा और बात आगे बढ़ाने के मूड में थी।

मगर समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं।पापा को कन्फर्म हो गया था कि उनका ये सारा खेल मैं जानती हूँ और मैं भी मजे ले रही हूँ उनकी इस हरकतों का।

फिर अगली सुबह जब मैं नीचे गयी तो रोज की तरह मम्मी-पापा बैठकर चाय पी रहे थे।

तभी मम्मी बोलीं- आज दोपहर तक अम्मा (मेरी नानी) आ रही हैं,

गुडडू (मेरे छोटे वाले मामा) उन्हें लेकर आएंगे। तो पापा ऑफिस रेलवे स्टेशन जाएंगे उन्हें लेने!

मैंने हैरानी से पूछा- अचानक कैसे नानी के आने का प्लान बन गया?

मम्मी बोलीं- अरे कल रात 12 बजे के करीब गुड्डू का फोन आया था कि अम्मा की तबीयत थोड़ी खराब लग रही है तो आज वे उन्हें लेकर डॉक्टर को दिखाने आएंगे।

मैं रसोई में मम्मी की मदद करने चली गई।

नानी और मामा के आने की बात सुनकर मेरा मूड थोड़ा ख़राब हो गया था क्योंकि जब भी मामा और नानी आते थे तो मम्मी और नानी बेडरूम में पापा नीचे लॉबी में दीवान पर और मामा कमरे में ऊपर सोते थे।

मुझे लग रहा था कि जब तक नानी और मामा रहेंगे तब तक रात वाला प्लान नहीं हो पाएगा.

क्योंकि अभी तो मम्मी के सो जाने के बाद पापा रात में ऊपर आ जाते थे.

मगर अब ऊपर मामा सोएंगे तो पापा डर से नहीं आएंगे क्योंकि मामा अक्सर रात में पानी पीने या बाथरूम जाने के लिए ज़रूर उठते हैं।

करीब 3 बजे पापा, नानी और मां को लेकर घर आ गए।

थोड़ी देर चाय वगैरह पीने के बाद फिर पापा, माँ और नानी डॉक्टर के यहाँ चले गए दिखाने।

शाम को करीब 6 बजे वे लोग लौटे तो बताया कि डॉक्टर ने दवा दी है और एक हफ्ते बाद फिर बुलाया है. कोई घबराने वाली बात नहीं है।

फिर मामा तुरंत वापस जाने के लिए तैयार हो गए बोले कि 8 बजे वाली ट्रेन पकड़ कर वे वापस चले जाएंगे।

नानी को यहीं रुकना था.

एक हफ़्ते बाद वे वापस आकर डॉक्टर को दिखा का नानी को वापस ले जायेंगे।

मामा के जाने के बाद मम्मी तुरंत खाने की तैयारी में लग गई क्योंकि नानी ज्यादा देर से नहीं खाती थी।

रात में हम सभी साथ खाना खा रहे थे.

तभी पापा ने मम्मी से कहा- ऐसा है, अम्मा जी और तुम यहां नीचे सो जाना. मैं ऊपर सोनू वाले कमरे में सो जाऊंगा।

मम्मी बोलीं- ठीक है।

मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा, मैं तो समझ रही थी कि पापा ऊपर सोने के लिए प्लान क्यों कर रहे हैं।

रात 9.30 बजे तक हम सबने खाना खा लिया।

फिर मैं मम्मी के साथ रसोई में काम करने लगी।

पापा टीवी देखने लगे और नानी कमरे में चली गई।

करीब 10 बजे पापा ऊपर जाते हुए मम्मी से बोले- मैं सोने जा रहा हूं।

और फिर मुझसे बोले- बेटा ऊपर आना तो मेरे लिए पानी लेती आना।

मैंने कहा- ठीक है पापा!

और फिर पापा सोने चले गए।

मैं थोड़ी देर रसोई का काम खत्म कर नानी के पास कमरे में आ गई और उनसे बात करने लगी।

थोड़ी देर में मम्मी भी कमरे में आ गई।

फिर हम तीनों बैठ कर बात करने लगी।

करीब 11 बजे मैं मम्मी से बोलीं- मैं सोने जा रही हूं अब!

मम्मी बोलीं- अपने पापा के लिए पानी लेती जाना!

मैं ‘ठीक है’ बोल कर कमरे से निकल कर रसोई में पानी लेने चली गई।

पानी लेकर मैं जैसे ही सीढ़ी के पास आई तो ऊपर मैंने पापा को तेजी से पीछे हटते हुए देखा।

हालांकि पापा नहीं जान पाये कि मैंने उन्हें देख लिया है।

मुझे लगा कि शायद वे पानी के लिए बुलाने आ रहे होंगे मगर मुझे पानी लेके आती देखकर वापस चले गये होंगे।

मैं ऊपर आयी तो देखा कि लॉबी की लाइट बंद थी और पापा के कमरे का दरवाजा भी बंद था।

तब मैं सोचने लगी कि अभी तो पापा यहीं खड़े थे मगर मुझे देखने के बावजूद कमरे में जाकर दरवाजा क्यों बंद कर लिया है।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि पापा ने ऐसा क्यों किया है।

मगर दिमाग में ये भी चल रहा था कि कहीं ऐसा तो नहीं कि पापा कुछ प्लान बनाकर बैठे हों।

मेरा दिल धड़कने लगा.

मैं दरवाजे के पास गई और धीरे से डोर हैंडल घुमा कर दरवाजे को थोड़ा सा खोला तो देखा कि कमरे में नाइट बल्ब जल रहा है और पापा बिस्तर पर सो रहे हैं।

तब मैं दरवाजा पूरा खोल कर अंदर आ गई और धीरे से 2 बार पापा को आवाज दी.

मगर वे जगे नहीं।

मैं समझ गई कि पापा जगे हैं मगर सोने का नाटक कर रहे हैं।

मगर मैं अभी भी समझ नहीं पा रही थी कि वे आखिर ऐसा क्यों कर रहे हैं।

फिर मैं उनके बिस्तर के पास गई, बगल की टेबल पर पानी का गिलास रख दिया और उनकी तरफ देखा तो वे उसी तरह आंख बंद कर पीठ के बल लेटे हुए थे।उन्हें अपने एक हाथ को अपने माथे पर इस तरह रखना था कि उनकी आंख छुप गई थी।

वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे गहरी नींद में हैं।

अचानक मेरी निगाह नीचे उनकी कमर की तरफ गईं तो मेरा दिल धक्क से रह गया।

दरअसल पापा लुंगी पहन कर सो रहे थे और उनकी लुंगी आगे से खुल कर अगल-बगल हटी थी और उसमें से उनका लंड आधा बाहर निकला हुआ था।पापा ने अंडरवियर भी नहीं पहना था.

अब मैं सारा माजरा समझ गई।

पापा वही कर रहे थे जो मैं रात में उनके साथ करती थी।

थोड़ी देर तक मैं ऐसी ही खड़ी रही।

मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूं।

एक तरीके से पापा मुझे अपना लंड देखने का खुला निमंत्रण दे रहे थे।

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

मेरी नज़र उनके लंड पर गई तो देखा कि इस बार वे लुंगी से करीब-करीब पूरा बाहर आ गया था और उसमें हल्का सा तनाव भी था।

मैं कमरे के अंदर आ गई और दरवाजा धीरे से बंद कर दिया और फिर धीरे से पापा को आवाज दी- पापा … पापा!

पापा बिना कुछ बोले लेटे रहे.

वे यह जताना चाह रहे थे कि वे बेहद गहरी नींद में हैं।

मैं बेड के पास गई और थोड़ी देर खड़ी रही।

मेरी नज़र कभी पापा के लंड पर तो कभी उनके मुँह की तरफ जा रही थी।

मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूं और कैसे करूं।फिर मैंने हाथ बढ़ाकर पापा के घुटनों के पास रखा और धीरे से हिलाए एक बार फिर उन्हें जगाने की कोशिश की और आवाज दी- पापा … पापा!

मगर पापा कुछ नहीं बोले और उसी तरह लेटे रहे।

जब पापा कुछ नहीं बोले तो मैं बिस्तर के ठीक बगल में उनके लंड के पास जाकर घुटनों के बल बैठ गयी।

अब पापा का लंड ठीक मेरे चेहरे के सामने था।

मेरी निगाह पापा के लंड पर थी जिसमें अब तनाव बढ़ रहा था।

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और सांस धौंकनी की तरह चल रही थी।

हालांकि इतनी देर में मेरी उत्तेजना और हिम्मत दोनों बढ़ गई थी।

मैंने एक हाथ से पापा के लंड को धीरे से पकड़ा।

जैसा ही मैंने लंड को पकड़ा, लंड हल्के से झटके के साथ और टाइट हो गया।

थोड़ी देर इसी तरह लंड को पकड़े रहने के बाद मैंने लंड को पूरा मुट्ठी में भर लिया और धीरे-धीरे लंड को हिलाने लगी।

अब तक पापा का लंड एकदम गर्म और पत्थर की तरह हो चुका था।

मेरा मन कर रहा था कि लंड को मुँह में भरकर चूस लूँ।

मुझसे अब बर्दाश्त भी नहीं हो रहा था।

मैंने लंड को हिलाना बंद कर दिय और उसकी त्वचा को पूरा नीचे खींच दिया।

नाइट बल्ब की रोशनी में लंड का मोटा सा गुलाबी सुपारा फूल कर चमक रहा था, जिसे देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया।

मैं झुकी और जीभ निकल कर लंड के सुपारे को हल्का सा चाट लिया।

मैंने जैसे ही शरीर से पापा के लंड को चाटा मेरे शरीर में हल्की सी झुरझुरी दौड़ गई.

वहीं पापा के शरीर में हल्का झटका लगा।

ऐसा लग रहा था कि शायद पापा को भी उम्मीद नहीं थी कि मैं उनके लंड को चाटूंगी भी!

दो-तीन बार लंड के सुपारे को जीभ से आइसक्रीम की तरह चाटने के बाद मेरी हिम्मत और एक्साइटमेंट दोनों बढ़ गयी थी।

वैसे भी पापा और मैं दोनों एक दूसरे से खेल रहे थे, ये पापा और हम दोनों जान रहे थे।

इस वजह से अंदर का डर खत्म हो गया था।

करीब 20-25 सेकेण्ड तक पापा के लण्ड को आइसक्रीम की तरह चाटने के बाद थूक से चिकने हो चुके उनके सुपारे को पूरा मुंह में भरकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।

शायद पापा के लंड से थोड़ा-थोड़ा पानी निकल रहा था क्योंकि लंड चूसते हुए मुझे हल्का-हल्का नमकीन का स्वाद भी आ रहा था।

मेरी तो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई थी।

मैं अब तेजी से मुंह को आगे पीछे कर लंड चूस रही थी.

अभी लंड चूसते हुए 2 मिनट हाय हुए कि पापा हल्का-हल्का अपनी कमर को हिलाने लगे।

मैं समझ गई कि वे झड़ने वाले हैं.

इसलिए मैं और तेज-तेज उनके लंड को हाथ से हिलाते हुए चूसने लगी।

तभी पापा का शरीर एकदम अकड़ गया और वे तेजी से अपने कमर को हिलाने लगे और मेरे मुंह में झड़ गए।

उनके लंड से तेज धार निकली और सीधा मेरे गले में चली गयी, जिसे मैं गटक गई।

उसके बाद पापा ने हल्का-हल्का झटका लेते हुए अपने लंड का पूरा पानी मेरे मुंह में निकाल दिया।

लंड के गाढ़े नमकीन पानी से मेरा मुंह पूरा भर गया.
 
थोड़ा पानी मेरे मुंह से निकल कर बाहर मेरे हाथ और लंड पर भी फ़ैल गया.

बाकी जो मुंह में बचा था, वो सारा नमकीन पानी बिना लंड को मुंह से निकले, एक ही झटके में पी गई।

पूरा पानी निकल जाने के बाद भी मेरे लंड को मुंह में लेकर कुछ देर चूसती रही।

उसके बाद मैंने लंड को मुंह से निकाला और पापा की लुंगी पर ही अपने हाथ का साफ किया और उनके लंड को भी हल्का सा पौंछ कर साफ कर दिया।

फिर मैं धीरे से खड़ी हुई और दरवाजा खोल कर बाहर आ गई और वापस बंद कर अपने कमरे में आ गई और दरवाजा बंद कर सीधा बिस्तर पर लेट गई।

मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मैं अभी-अभी अपने पापा का लंड चूस कर आई हूँ।

मेरे मुँह में अभी भी लंड के पानी का थोड़ा नमकीन स्वाद था.

अभी तक मैंने ये सब पापा बेटी सेक्स मूवी देखी थी और मैं आज खुद ही अपने पापा का लंड चूस के आ रही थी … ऐसा लग रहा था जैसा मेरा कोई सपना देख रही हूं।

वैसे मुझे लग रहा था कि शायद पहली बार मैंने पापा का लंड चूसा था इसलिए एक्साइटमेंट में पापा जल्दी झड़ गए थे।

वहीं मेरी चूत पूरी तरह पनिया गई थी.

मैं पापा के लंड को चूसने के बारे में मुझे याद कर अपनी चूत को सहलाने लगी.

मेरा मन कर रहा था कि एक बार फिर वापस कमरे में जाऊं और लंड को दोबारा मुंह में लेकर चूसते हुए अपनी चूत सहलाऊं।

यहीं सोचते-सोचते मैं उत्तेजित होने लगी और तेजी से हाथ से अपनी चूत रगड़ने लगी.

और फिर मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया।

चूत का पानी निकलने के बाद मैं आंख बंद कर लेट गयी और मुझे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।अगले दिन सुबह जब हम उठे तो मैं रोज की तरह नीचे आयी, मम्मी और पापा चाय पी रहे थे. नानी भी पास ही बैठी थी.

पापा अखबार पढ़ रहे थे.

उस में हमारे शहर में चल रहे किसी साधु बाबा के कथा का इश्तिहार था.

वो कथा रोज दोपहर 3 बजे से शाम को 6 बजे तक होती थी. नानी ने जब यह सुना तो वो माँ से बोली की वो उस कथा को सुनना चाहती हैं. उस दिन संडे भी था तो पापा को भी छुटी थी. मम्मी और नानी ने उस में जाने का प्रोग्राम बना लिया। और मुझे भी साथ चलने को कहा. पर उस दिन पापा भी घर पर ही थे तो मुझे यह एक सुनहरी मौका लगा की घर पर पापा से कुछ छेड़छाड़ करुँगी तो मैंने पढाई का बहाना बना कर घर पर ही रहने का बोल दिया।

पापा भी खुश हो गए. पापा ने कहा की वे मम्मी और नानी को कार से छोड़ आएंगे और शाम को ले भी आएंगे।

मैं पापा के चेहरे पर आयी हुई ख़ुशी को साफ़ साफ़ अनुभव कर सकती थी. मैं भी समझ रही थी कि पापा क्यों खुश है?

हम लोगों ने जल्दी खाना खा लिया और फिर पापा कार में चल पड़े। मैं भी उनके साथ चल पड़ी ताकि वापिसी में कुछ देर और ज्यादा पापा के साथ अकेली रहने का मौका मिल सके.

मम्मी और नानी को छोड़ कर हम वापिस आ रहे थे. मैंने पापा को आइसक्रीम खाने का कहा तो पापा ने एक आइसक्रीम की दूकान पर कार रोक ली.

आइसक्रीम पार्लर पर पापा ने मुझे पुछा की मुझे क्या खाना है तो मैंने पापा की आँखों में देखते हुए कहा कि

"पापा मुझे तो कुल्फी या चॉकोबार ही पसंद है, उसे मैं चूस चूस कर कहती हूँ."

पापा मेरी आँखों की चमक देख कर ही समझ रहे थे कि में किस चॉकोबार की बात कर रही हूँ तो वो भी शरारत से बोले

"नीलम मुझे तो आइसक्रीम ही पसंद है. मैं आइसक्रीम की डिब्बी में अपनी जीभ घुसा कर पूरी आइसक्रीम चाट चाट कर खाना पसंद करता हूँ. मुझे आइसक्रीम मैं पूरी जीभ डाल कर चाटना ही अच्छा लगता है."

मैं शर्मा गयी. हम दोनों ही बात को समझ रहे थे.

पापा ने मेरे लिए चॉकोबार ली और अपने लिए आइसक्रीम ली. फिर हम कार में आ कर बैठ गए और वहां पर पापा ने मुझे चॉकोबार पकड़ाई और आंखे मेरी आंखे मैं डाल कर मुझे चॉकोबार खिलाने लगे और खुद अपनी जीभ आइसक्रीम की डिब्बी में घुसा कर मुस्कुराते हुए अपने मुंह को खोल आइसक्रीम खाते हुए आँखो के इशारे से बताने लगी कि अभी मुझे तुमने अपनी आइसक्रीम इस तरह आइसक्रीम खिलानी है.

पापा : नीलम कैसे लगी तुम्हें चॉकोबार ?

पापा फिर से प्यार से देखते हुए कहते हैं " मुझे आइसक्रीम बहुत अच्छी लगती है, कितनी मलाईदार होती है?"

और ये बात बोलते ही एक चेहरे की मुस्कान आ गयी. मैं पापा को देख कर अपने होठों पर फिराने लगी।

मेरे जैसी खूबसूरत लड़की की इस जानलेवा अदा पर कोई मर्द कैसे बच सकता था पापा भी मेरी कामुक अदा देख कर कहा चुप रहने वाले थे मेरी आंखो में देखते हुए अपने हाथ को जींस में खड़े अपने लंड को सहलाते बोले वो तुम लड़कियों को मलाईदार क्रीमी आइसक्रीम पसंद ज्यादा होती है अब तुम्हें रोज बढ़िया ब्लैक चोकोबार आइसक्रीम खिलाऊंगा.

मैं पापा की इस हरकत पर समझ रही थी कि पापा मुझे कोन सी चोकोबार आइसक्रीम खिलाने की बात कर रहे हैं ये बात सुनते ही मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया।

इसी तरह शरारत करते और दो अर्थी बातें करते हुए हमने अपनी अपनी चॉकोबार और आइसक्रीम चाट ली.

मैंने इस तरह से चाट चाट कर और अपने मुंह में पूरा डाल कर चॉकोबार चूसी कि जैसे पापा का लण्ड चूस रही होऊं और पापा ने भी पूरी जीभ से चाट चाट कर आइसक्रीम चाटी जैसे मेरी चूत को चाट रहे हों.

पापा का लौड़ा खड़ा हो गया था जिसे वो बार बार दबा कर सेट कर रहे थे मेरी भी चूत पूरी गर्म हो चुकी थी और गीली हो गयी थी.

आइसक्रीम ख़त्म होने पर हम घर वापिस आ गए.

घर आ कर हम अंदर आ गए। पापा ने मुझे कहा कि नीलम तुम घर का दरवाजा अंदर से बंद कर दो ताकि कोई आ न सके.

वैसे तो मम्मी और नानी थे नहीं और उन्हें शाम को हमें ही लेने जाना था तो आना तो किसी ने भी नहीं था. पर पापा पूरी प्राइवेसी चाहते थे ताकि खुल कर मजे कर सकें।

हमारे घर में अंदर से वो पुराने ढंग का कुंडा था जिस में एक लम्बा सा डंडा होता है और वो दूसरी तरफ एक गोल कुण्डी में जाता है और फिर उसे नीचे करके उस में ताला लगा सकते हैं.

मैंने वो कुंडा लगाना चाहा पर वो थोड़ा सख्त था. उस का डंडा दूसरी तरफ के छेद में जा नहीं रहा था.

मुझे शरारत सूझी और मैंने पापा को कहा

"पापा! यह इस के छेद में डंडा नहीं घुस रहा है.आप कोशिश करके देखिये तो."

यह कहते हुए मैं झुक कर कुंडा लगाने की कोशिश करती रही.

पापा मेरे पास आ गए. और बोले

"नीलम! कोई बात नहीं, मुझे टाइट छेद में डंडा घुसाने का काफी अनुभव है. तुम चिंता मत करो. मैं आराम से छेद में डंडा घुसा दूंगा।"

यह कहते हुए पापा मेरे पीछे से मेरी पीठ से चिपक गये।

पापा ने अब अपने लंड का थोड़ा सा दबाव मेरी पीठ पर डाला लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा तो उनकी हिम्मत और बढ़ गई और उन्होंने अपने लौड़े का पूरा दबाब मेरी गांड पर डाल दिया.

पापा का लण्ड लोहे की तरह सख्त हो चूका था. और पापा ने थोड़ा हिल कर लौड़े को चूतड़ों से अब मेरी गांड की दरार में घुसा दिया और एक धक्का दे कर लौड़े को गांड की दरार में फंसा दिया.

अब घर में हम दोनों बाप बेटी ही तो थे, तो इतनी भी क्या जल्दी थी, कोई आने वाला तो था नहीं, तो मैंने सोचा कि थोड़ा छेड़खानी चलने देती हूँ.

तो मैंने थोड़े गुस्से से कहा कि पापा आप क्या कर रहे हैं तो उन्होंने डर कर एक दम से अपनी कमर पीछे कर ली और लौड़ा मेरी गांड में से निकल गया.

तो मैं डर गई कि कहीं वो चले ही ना जाएं, इसके लिए मैंने अपनी गांड को थोड़ा पीछे कर दिया तन की उनको ये एहसास हो सके कि ये मेरा नकली गुस्सा है।

पापा समझ गए और उन्होंने अपने लंड का दबाव फिर से और बड़ा दिया मेरी गांड पर,

मुझे तो मजा आ रहा था और मैं तो खुद तैयार थी चुदवाने को बस नखरे दिखा रही थी।

फिर जब मैंने कुछ नहीं कहा उन्हें तो पापा मेरे से चिपक गए और अपने हाथ मेरी कमर के चारों ओर डाल कर मुझे पकड़ लिया. और बोले

"नीलम! लगता है छेद थोड़ा तंग है और डंडा उसके हिसाब से मोटा है. इसी लिए आराम से घुस नहीं रहा. कोई बात नहीं मुझे घुसाना आता है. मुझे लगता है कि डंडे और छेद पर थोड़ा तेल लगाना पड़ेगा।

जब चिकनाई हो जाएगी तो आराम से डंडा घुस जायेगा।" यह कहते हुए पापा ने अपने लौड़े का एक झटका मेरी गांड में लगा दिया।

मेरी तो चूत में पापा की बात सुन कर बहुत पानी आ गया. मैं समझ रही थी की पापा क्या दो अर्थी बात बोल रहे हैं.

पापा यह कह कर मेरी गर्दन पर चुंबन करने लगे। मुझे परम आनंद आ रहा था।

मैंने उनसे कहा कि आआह्ह्ह... पापा लगता है आपको माँ की बहुत याद आ रही है तो वो बोले कि तुम्हें कैसे पता तो मैंने कहा कि तभी आप मुझे तंग कर रहे हो तो वो बोले कि नहीं मुझे तो मेरी बेटी तुमपे प्यार आ रहा है

मैं:- हाँ मैं जानती हूँ यह आपका प्यार तभी तक है जब तक माँ नहीं आ जाती. फिर आप माँ के साथ ही चिपके रहेंगे और मेरी ओर तो देखेंगे भी नहीं.

पापा :- अरे नीलम ऐसा क्यों बोलती हो. मैं तो तुमसे बहुत प्यार करता हूँ. यह ठीक है की तेरी माँ के आ जाने के बाद मुझे कुछ समय उसे भी तो देना पड़ेगा, पर तुम्हे थोड़े ही न भूल सकता हूँ. तू तो मुझे बहुत प्यारी है,

कहते हुए पापा ने मुझे कन्धों से पकड़ लिया और मेरी गर्दन पर चूमने लगे.

मुझे बहुत आनंद आ रहा था.

पापा - हाय

मैं- पापा क्या हुआ?

(अस्ल में मैंने अपने चूतड़ थोड़ा पीछे को धकेल दिए थे तो पापा का लण्ड मेरी गांड में और अंदर घुस गया तो पापा के मुंह से आनद से आह निकल गयी थी,)

मैंने बात को घुमाते हुए कहा

"पापा! आप चिकनाई लगा दीजिये ताकि कुण्डी का डंडा घुस जाये और हम अंदर जा सकें।

पापा मुझे छोड़ कर जाना नहीं चाहते थे क्योंकि उनका लौड़ा मेरी गांड में लगा हुआ था. मैं कुण्डी लगाने के बहाने झुकी हुई थी और हम दोनों बाप बेटी को बहुत आंनद आ रहा था.

पापा बोले "बेटी नीलम! अभी तेल कहाँ ढूंढेंगे, मैं थोड़ा थूक लगा देता हूँ, उस की चिकनाई से भी डंडा घुस जाता है."

मैं क्या बोलती बस चुप रही.

फिर पापा बोले

"नीलम! पर मैं अकेला ही क्यों थूक से अपना हाथ गन्दा करूँ, ऐसा करो कि तुम छेद में थूक लगा कर चिकना कर दो और मैं डंडे पर थूक लगा देता हम फिर डंडा आराम से छेद में घुस जायेगा।"

अब तक बातचीत काफी कामुक हो गयी थी. मैं भी उसी टोन में बोली

"हाय पापा! आप छेद में चिकना कीजिये मैं तो डंडे पर थूक लगा दूँगी।"

यह कह कर मैंने अपनी ऊँगली पर थोड़ा थूक लिया और कुण्डी के डंडे को एक हाथ से पकड़ कर दुसरे हाथ से इस तरह ऊपर से नीचे तक थूक लगाने लगी जैसे मेरे हाथ में कुण्डी का डंडा नहीं बल्कि पापा का लण्ड हो,

पापा भी मेरी हरकत देख कर गर्म हो गए. उन का लौड़ा और भी टाइट हो गया.

उन्होंने अपने हाथ में थोड़ा थूक लिया और उसे कुण्डी के छेद में ऊँगली से अंदर तक इस तरह लगाने लगे जैसे मेरी चूत में लगा रहे हों.

हम दोनों बाप बेटी कामुकता की आग में जल रहे थे. घर में हम दोनों की सिवाए कोई नहीं था.

पापा ने कहा

"नीलम! अब छेद और डंडा दोनों चिकने हो गए है. देखो अब कैसे डंडा आराम से टाइट छेद में घुसता है."

यह कह कर उन्होंने छेद पर डंडा रखा और एक ही झटके से उसे पूरा अंदर कर दिया।

डंडा घुसते ही मेरी चीख निकल गयी मानो डंडा कुण्डी में नहीं बल्कि पापा का लौड़ा मेरी चूत में घुस गया हो.

मैं बात को सँभालते बोली

"पापा! आप ने तो एक ही झटके में पूरा घुसेड़ दिया। छेद फट जाता तो. थोड़ा आराम से अंदर करना था ना। "

पापा मुस्कुराते हुए बोले, "नीलम! कोई बात नहीं। तुम चाहती हो तो धीरे धीरे और आराम से ही अंदर करूँगा। तुम चिंता मत करो."

यह कह कर पापा ने अपना लौड़ा एक बार फिर से मेरी गांड में धक्का मारा, जैसे मुझे कह रहे हो कि मैं अपनी बेटी को आराम से चोदुँगा।

अब कुण्डी लग गयी थी तो हम दोनों बाप बेटी अंदर आ गए. और अपने कपडे बदलने के लिए अपने अपने कमरे में चले गये।

मैं अपने कमरे की तरफ जा रही थी तो पापा पीछे से बोले

"नीलम! कपडे बदल कर आ जाओ. यहीं बैठते है."

फिर थोड़ा रुक कर बोले

"गर्मी बहुत है, हो सके तो थोड़े कपडे पहनना। चाहे तो स्कर्ट ही पहन लेना।"

मैं समज गयी कि पापा के मन मैं भी मौके का लाभ उठाने का मन है.

कमरे में जाने के बाद मैंने सोचा कि आज ही मौका है , माँ और नानी घर पर नहीं हैं. तो मैं कोशिश करूँ तो शायद पापा से चुदवा ही लूँ.

यह सोच कर मैंने एक पतली सी टी शर्ट पहनी और उसके नीचे ब्रा नहीं पहनी। मैं चाहती थी कि पापा को आगे बढ़ने का मौका दूँ.

फिर मैंने एक छोटी सी स्कर्ट पहनी पर उसके नीचे पैंटी पहन ली. मैंने सोचा कि एकदम से नंगी होना भी ठीक नहीं है.

मैं कमरे से बाहर आयी तो पापा सोफे पर बैठे थे.

मैंने पूछा कि "पापा! चाय पीयेंगे?"

पापा को मुझे पास बिठाने का मौका लगा तो बोले "नीलम! चाय तो पी लूंगा पर यदि तुम भी पास में बैठ कर साथ चाय पियोगी।"

मैं पापा और अपने लिए दो कप चाय बना कर लायी और सोफे पर पापा के पास बैठ गयी. हम दोनों चाय पीने लगे.

पापा ने भी एक बनियान और पजामा पहना था.

पापा मेरी ओर देख कर मुस्कुराते हुए बोले

"नीलम! तुम इस स्कर्ट और टी शर्ट में बहुत सूंदर लग रही हो" यह कहते हुए पापा ने अपना एक हाथ मेरी टांग पर रख दिया और उसे सहलाने लगे.

मैं पापा को आगे बढ़ते देख कर खुश हो गयी और अपनी टाँगे फैला दी ताकि पापा को मेरी जाँघे सहलाने में आसानी हो.

पापा मुस्कुरा रहे थे और बात करते हुए लगातार स्कर्ट के ऊपर से मेरी जांघ सहलाते जा रहे थे।

उनके सहलाने से स्कर्ट थोड़ा ऊपर आ गयी थी जिसमें घुटनों के ऊपर मेरी जांघ भी थोड़ी दिखाई देने लगी थी।

हालांकि इससे आगे बढ़ने की हिम्मत अभी पापा की नहीं हो रही थी।

मेरी चूत भी थोड़ी-थोड़ी गीली होने लगी थी।

पापा मेरी जाँघ को धीरे-धीरे सहलाते रहे और धीरे धीरे उनका हाथ ऊपर ही ऊपर जा रहा था.
 
ऐसा लग रहा था कि जल्दी ही उनका हाथ चूत तक पहुँच जायेगा. और मैं मन ही मन कुढ़ रही थी कि हमेशा तो मैं पैंटी के बिना पापा के पास आती हूँ, और आज जब मौका है की पापा मेरी चुदाई कर दें, तो मैं पैंटी पहन कर आ गयी. खैर अभी कुछ नहीं हो सकता था तो मैं चुप ही रही.

पापा समझ गये कि अब मैं भी चुदासी हो रही हूँ और खुलकर मजे लेना चाह रही हूँ।

मेरी चुप्पी से पापा की हिम्मत बढ़ गयी.

वे अभी तक स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी जांघ सहला रहे थे पर इसके बाद उन्होंने धीरे से अपना हाथ स्कर्ट के अंदर डाल दिया और सीधा मेरी नंगी जांघों को सहलाने लगे।

पापा के मेरी जांघ सहलाने से और लुंगी के नीचे तने लण्ड को देखकर मेरे ऊपर भी मस्ती छाने लगी और मेरी गीली हो चुकी चूत भी कुलबुलाने लगी थी।

मन तो कर रहा था कि टीशर्ट उठाकर चूची नंगी करके चूसने के लिए बोल दूँ, फिर लुंगी के अंदर हाथ डालकर सीधा लण्ड पकड़ लूँ और मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दूँ।

मेरी सांस तेजी से चल रही थी जिससे टाइट टीशर्ट में गोल-गोल चूचियां ऊपर नीचे हो रही थीं।

उत्तेजना में चूचियों के निप्पल तन गये थे जो टीशर्ट में साफ दिख रहे थे।

पापा एकदम ललचायी निगाह से मेरी चूचियों को देखते हुए स्कर्ट के अंदर हाथ डाले हुए मेरी नंगी जाघों को सहलाए जा रहे थे।

वे भी समझ चुके थे कि मैंने ब्रा नहीं पहनी है।

हम दोनों क्या बात करें ... समझ में नहीं आ रहा था.

साथ ही हम दोनों ही समझ रहे थे कि आगे क्या होना है।

लेकिन कैसे शुरू करें ... यह हम दोनों को ही समझ में नहीं आ रहा था।

उत्तेजना के चलते पापा के उनके होंठ सूख गये थे जिसे वह बार-बार जीभ से चाट कर गीला कर रहे थे।

उन्हें बार-बार होंठ चाटते देख मैंने धीरे से पूछा-

"प्यास लग रही है क्या पापा?"

पापा मेरी तरफ देखकर कामुक आवाज में धीरे से बोले-

"हाँ बेटा, होंठ सूख रहे हैं कुछ पीने का मन कर रहा है।"

मैं धीरे से बोली-

"पानी लाऊँ?"

कामुकता में पापा की आवाज कांपने लगी थी, वह मेरी चूचियों की तरफ देखते हुए बोले-

"पानी नहीं ... कुछ और पिला दो बेटा!"

मैं भी एकदम मस्त चुदासी हो चुकी थी उत्तेजना के चलते मेरी आवाज भी हल्का से कंपकंपाने लगी थी और मैं धीरे से बोली-

"दूध पीएंगे?"

कामुकता और वासना के चलते मेरा चेहरा गर्म हो गया था और ऐसा लग रहा था कि चूत में चींटियाँ रेंग रहीं हों।

उधर वासना में पापा की आँखें लाल हो गयी थीं और उत्तेजना के चलते वह भी खुद पर काबू नहीं रख पा रहे थे।

वे इतना आगे झुक चुके थे और उनका चेहरा मेरी चूचियों के इतना पास था कि उनकी गर्म साँसों को मैं चूचियों पर महसूस कर रही थी।

वासना के नशे में पापा की आवाज़ भी हल्का सा कंपकंपाने लगी थी।

वे धीमी और कंपकंपाती आवाज में बोले-

"पिला दो बेटा!"

मैं :- "पापा फ्रिज का ठंडा दूध पिएंगे या गर्म दूध?"

पापा :- "बेटी हो सके तो ताज़ा दूध पिला दो."

मैं :-"पापा ताज़ा दूध अभी कहाँ से मिलेगा?"

पापा :-"नीलम चाहो तो तुम पीला सकती हो, सब तुम्हारे ऊपर निर्भर है,"

मैं :-"पापा यह भी तो संभव है कि जहाँ से ताज़ा दूध आप पीना चाहते हों, वहां अभी दुध ही न आता हो,"

पापा :-"बेटी फिर भी कोशिश करने में क्या हर्ज है? शायद आ ही जाये"

और यह कह कर पापा फिर से मेरे मम्मों की ओर देखने लगे..

पापा के सीधा ही यह कहने से मेरी चूत में फिर से पानी आ गया.

पर अभी मेरी हिम्मत नहीं हो पायी की मैं अपनी टी शर्ट ऊपर उठा कर अपनी नंगी छाती पापा के मुंह में दे दूँ.

मेरे लिए खुद को रोक पाना अब बर्दाश्त के बाहर हो चुका था।

मेरी चूचियां, पापा के मुंह के ठीक सामने थीं।

उत्तेजनावश मेरी चूचियों की निप्पल कड़ी हो गयी थीं जो टीशर्ट के ऊपर से साफ पता चल रही थीं।

पापा की निगाह बार-बार उसी पर जा रही थी।

टेबल सोफे के इतना पास था कि मेरे और पापा के घुटने आमने-सामने से एक दूसरे से टच कर रहे थे।

मेरी निगाह पापा के पाजामे की तरफ गयी तो वहां पर उनके लण्ड का तनाव साफ दिख रहा था।

तनाव देख कर साफ पता लग रहा था कि उनका लौड़ा पूरा खड़ा हो गया है. । ध्यान से देखने पर पापा के लौड़े का सुपाड़ा भी दिखाई दे रहा था.

ऐसे माहौल में मेरी चूत भी हल्का-हल्का पनियाने लगी थी।

मैं बिना कुछ बोले बस धीरे से हंस दी।

पापा समझ गये कि मेरी हंसी में भी हाँ है।

मुझे लग रहा था की बस अभी पापा मेरी टी शर्ट ऊपर करके मेरी चूचीयां नंगी कर देंगे और अपने मुंह में डाल कर चूसना शुरू कर देंगे.

पापा को सूझा नहीं कि वो क्या कहें तो बात को घुमाते हुए बोले

"नीलम! चाहे तुम जवान हो गयी हो पर मेरे लिए तो तुम सदा ही एक वही छोटी सी बच्ची हो जो स्कूल से आते ही मेरी गोद में चढ़ जाती ही और फिर मेरे लाख कहने पर भी मेरी गोद से उतरती ही नहीं थी, सदा कहती थी कि पापा मुझे आप की गोद में बैठना बहुत अच्छा लगता है, और अभी देखो कितने साल हो गए हैं जब से तुम मेरी गोद में आ कर नहीं बैठी हो,"

मैं समझ रही थी कि पापा के मन में क्या है, मुझे भी पापा को पटाने का यह एक और सुनहरी मौका लगा तो मैंने प्यार से कहा

"पापा मैं तो सदा ही आपकी वही छोटी सी बेटी हूँ. आप ही मुझे अपनी गोद में नहीं बिठाते. मेरा तो कितना मन करता है की मैं आपकी गोद में बैठूं. जैसे पहले बैठती थी,"

यह कह कर मैंने एक तरह से पापा को खुला इशारा कर दिया कि मैं उनकी गोद में बैठने को तैयार हूँ.

पापा के लिए भी यह एक मौका था. उन्होंने तुरंत बात को पकड़ लिया और बोले

"नीलम! मैं तो सदा तुम्हे गोद में बैठाने को तैयार हूँ. चाहो तो आज ही आ जाओ. पापा की गोद तो तुम्हारे लिए सदा तैयार है,"

यह कह कर पापा ने मुझे खुला आमंत्रण दे दिया और जिसे मैंने तुरंत लपक लिया.

मैंने मुस्कुरा कर कहा-

"पापा मुझे कभी मौका ही नहीं मिला आपकी गोद में बैठने का?"

पापा ने जांघ पर हाथ रखे हुए ही मुझसे हंसकर धीरे से बोले-

"वैसे सच तो यही है कि तुम्हें गोद में बैठाने का मौका नहीं मिला। मैं भी काफी व्यस्त रहता हूँ न। "

फिर वो मुस्कुराते हुए बोले

" आओ आज अपने पापा की गोद में बैठ जाओ। कुछ दिन बाद जब तुम्हारी शादी हो जाएगी तो शादी के बाद तो अपने पति की ही गोद में बैठोगी मेरी गोद में थोड़े ही आओगी फिर."

पापा ने बिलकुल साफ़ बता दिया कि वो मुझे एक बाप की तरह नहीं बल्कि एक मर्द की तरह गोद में बिठाना चाहते है. मैं तो तैयार थी ही,

दोअर्थी और कामुकता भरी बातचीत से अब हम दोनों पर धीरे-धीरे वासना का बुखार चढ़ने लगा था।

मैं थोड़ा डर गयी और बात को पलटते बोली

फिर मैं बोली

"पापा वैसे मुझे याद है कि जब मैं छोटी थी तो मैं आपकी गोद में बैठ जाती थी और आपने भी मुझे गोद में बहुत खिलाया था।"

पापा मुस्कुराते हुए बोले-

"मेरा तो अभी ये भी मन में है कि तुम्हें गोद में बैठा लूँ!"

इस बात पर मैंने भी जानबूझकर मजे लेते हुए कहा-

"हाँ ... मैं तो अभी भी तैयार हूँ. आपका मन हो तो कहिए मैं अभी आपकी गोद में बैठ जाऊँ?"

ठरकी पापा की आँखों में वासना साफ झलक रही थी।

वे मुस्कुराकर बोले-

"अरे वाह ... आ जाओ बेटा मेरी गोद में!"

मैंने कहा-

"तो इसमें कौन सी बड़ी बात है ... अभी आपके गोद में बैठ जाती हूँ।"

मैं जान रही थी कि अभी हमारे पास काफी समय है, घर में हम दोनों बाप बेटी ही तो हैं और कोई आने वाला भी नहीं है.

और मैं भी अब थोड़ा मजा लेना चाह रही थी।

मैं मुस्कराती हुई खड़ी हो गयी।

पापा थोड़ा पीछे होकर सोफे पर पीछे टेक लेकर बैठ गये और अपने जांघों को फैलाकर मुझे गोद में बैठने की पूरी जगह दे दी।

मैं पापा की ओर पीठ किये हुए पापा की गोद में बैठने लगी.

गोद में बैठते हुए मैंने पूरा टाइम लिया और आराम से झुक कर उनकी गोद में अपनी गांड टिकाई , मैं जानबूझ कर धीरे धीरे बैठ रही थी, ताकि पापा को मेरी गांड ठीक से दिखाई दे।

पर पापा ने तो उस मौके का ज्यादा ही लाभ उठाया. जब में गोद में बैठने लगी तो उन्होंने धीरे से मेरी स्कर्ट का पिछला कपडा ऊपर उठा दिया.

इस से मेरे चूतड़ नंगे हो गए. पापा को निराशा तो हुई क्योंकि उनको लग रहा था की मैंने पैंटी नहीं पहनी होगी और उन्हें मेरी नंगी गांड देखने का सौभाग्य प्राप्त होगा. पर मैंने कच्छी पहन राखी थी,

इस बात से वैसे तो पापा से अधिक मैं खुद निराश थी. काश आज मैंने पैंटी ही न पहनी होती,

पर उनकी गोद में बैठते ही मुझे उनके तने हुए लौड़े का एहसास हुआ.

पापा की गोद में बैठते ही पाजामे के अंदर पापा के तने हुए लण्ड को मैं साफ महसूस कर रही थी जो ठीक मेरी गांड के नीचे था।

पापा के लण्ड को अपनी गांड पर महसूस करते ही मेरी चूत एकदम गीली हो गयी।

मैं जानबूझकर बोली-

"पापा अब तो हो गयी गोद में बैठाने की तमन्ना पूरी? अब उठ जाऊं?"

पापा ने अपने दोनों हाथों को मेरी कमर के अगल-बगल से लाकर एक हाथ मेरे जांघ पर रख दिया और दूसरे हाथ को मेरे पेट पर रखकर कसकर मुझे पकड़ते हुए बोले-

"बस बेटा, थोड़ी देर और बैठी रहो ना ऐसे ही! अच्छा लग रहा है। कितनी देर के बाद तो अपने पापा की गोद में बैठी हो, थोड़ा अपने पापा का दिल तो भर जाने दो "

मैं भी कहाँ उठना चाहती थी, यह तो मैं झूठमूठ हो बोल रही थी, मन तो कर रहा था की इसी तरह पापा की गोद में बैठी रहूं.

पापा अभी तक जहाँ स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी जाँघों को सहला रहे थे अब वह स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर मेरी चिकनी नंगी जांघ को सहलाने लगे थे।

साथ ही अपने लण्ड को मेरी गांड पर दबाए हुए थे।

मैं- "अच्छा तो कब तक बैठी रहूंगी इसी तरह? आपको तो मजा आ रहा है।"

पापा- "प्लीज थोड़ी देर बैठी रहो ना ... तुम्हें मज़ा नहीं आ रहा क्या?"

मैं मुस्कुराती हुई बोली- " कुछ खास तो नहीं।"

अब मैं भी आराम से गोद में बैठी हुई मजे लेने लगी और बात करते हुए किसी न किसी बहाने अपनी गांड को पाजामे के ऊपर से ही पापा के लण्ड पर हल्का-हल्का रगड़ रही थी।

वहीं बात करते हुए मैंने अपनी जांघों को दोनों ओर थोड़ा फैला दिया और पापा को सहलाने के लिए और जगह दे दी।

पापा भी समझ रहे थे कि अब मैं भी मजा लेने के मूड में आ गयी हूँ।

इससे पापा की हिम्मत थोड़ी बढ़ी और अब वे धीरे-धीरे अपने दोनों हाथों को जांघों पर घुटनों की तरफ से ऊपर की और सरकाते हुए ले आए और जांघों के ऊपरी हिस्से सहलाने लगे।

पापा बोले- "काश, तुम मेरे साथ हमेशा इसी तरह घर में ही रहती और रोज मैं तुम्हें इस तरह अपनी गोद में बैठाता!"

बात करते हुए मैं अपनी गांड को पापा के लण्ड पर हल्का-हल्का रगड़ती जा रही थी।

वहीं पापा भी अपने लण्ड को मेरी गांड पर दबाए हल्का-हल्का अपनी कमर को हिला रहे थे।

हम आपस में बातें भी कर रहे थे।

तभी पापा बोले- "बेटा, थोड़ा एक मिनट के लिए उठोगी तो मैं थोड़ा पैर ठीक कर लूँ फिर आराम से ठीक से गोद में बैठ जाना।"

मैंने 'ठीक है' बोलकर अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठा दिया.

तो पापा अपने पैरों को थोड़ा फैलाया और फिर ऐसा लगा जैसे मेरी स्कर्ट को पीछे से कुछ किए।

उसके बाद मुझसे बोले-

"हाँ अब बैठ जाओ बेटा!"

मैंने अब खुद ही अपना मुंह पापा की ओर कर लिया था.ताकि पापा को देखती भी रहूं।

जैसे ही मैं वापस उनकी गोद में बैठी मैं समझ गयी पापा ने क्या किया है।

दरअसल पापा ने अपने लंड को एडजस्ट कर ठीक मेरी गांड के नीचे कर लिया था अब पापा के लण्ड का गर्म गर्म सुपाड़ा ठीक मेरी गांड के छेद पर था.

हमारी कामुक बातचीत से पापा की हिम्मत और बढ़ गयी थी जिससे अब वह मेरी जांघ सहलाना छोड़कर मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया और बैठे-बैठे ही अपनी कमर को हल्का-हल्का हिलाते हुए अपने लण्ड को मेरी गांड पर रगड़ने लगे।

पापा ने बात करना बंद कर दिया था और उनके मुंह से धीमी-धीमी सिसकारी निकल रही थी।

मेरा भी मन अब बात करने में कम था और सारा ध्यान अपनी जांघों के बीच पनियायी चूत पर आ गया था जिसकी खुजली अब बर्दाश्त के बाहर हो रही थी।

मैं भी हल्का-हल्का कमर हिलाते हुए उनका साथ दे रही थी।

हम दोनों एकदम चुप थे बस हमारे शरीर हिल रहे थे।

अब पापा और मैं खुल कर गांड पर लण्ड रगड़ रहे थे.

हम दोनों की साँसे बहुत तेज चल रही थी,

पर चाहे पोर्न कहानिओं में कितना ही लिखा जाये, पर असल मैं और भारतीय समाज में बाप बेटी के बीच के सामाजिक सम्बन्धो और बंधनो का टुटना इतना आसान नहीं है,

मैं पापा की गोद में उनके लौड़े पर अपनी गांड घिसने की कोशिश कर रही थी और उधर पापा भी अपना नंगा लौड़ा मेरी गांड पर रगड़ रहे थे पर फिर भी वो तेजी और वो रगड़ाई नहीं हो पा रही थी,

मैं तेज तेज और ज्यादा मजा लेना चाहती थी, अब हम दोनों बाप बेटी जान तो रहे ही थे कि हम क्या कर रहे हैं, बस आपसी सम्बन्धो का ही बंधन था.

पापा का लण्ड पाजामे और उनकी अंडरवियर के बीच था और मैंने भी कच्छी पहनी हुई थी. चाहे पापा ने स्कर्ट पीछे से ऊपर उठा दी थी पर फिर भी इतने कपड़ों के कारण हमें लण्ड चूत रगड़ाई का वो मजा नहीं आ रहा था.

पापा बहाने से बोले

"नीलम! मुझे पेशाब आया है. जरा उठना मैं पेशाब करके आता हूँ."

पापा बाथरूम में गए और थोड़ी देर बाद आ कर बैठ गए.

जब में दुबारा उनकी गोद में बैठी तो मुझे उनकी शरारत का पता चला.

असल में बाथरूम में जा कर पापा ने अपनी अंडरवियर निकाल दी थी.

अब मेरी गांड और पापा के लौड़े में सिर्फ मेरी पैंटी और उनके पाजामे का कपडा ही था.

अब पहले से कहीं ज्यादा मजा आ रहा था.मैंने एक चाल सोची और पापा से कहा

"पापा मुझे याद है की बचपन में जब मैं आपकी गोद में बैठती थी तो आप मुझे गुदगुदी करते थे. और मैं बहुत हंसती और आपकी गोद में उछलती थी,"

पापा गोद में उछलने की बात से समज गए कि मेरे मन में क्या है, यह उनके लिए भी एक सुनहरी मौका था.

पापा मेरी बगलों में हाथ डाल कर मेरी कांखों में ऊँगली घुमाते बोले

"मुझे सब याद है नीलम। मैं तो कब से तुम्हे उसी तरह गुदगुदी करना चाह रहा था. मैं तुम्हे गुदगुदी करता हूँ. "
 
असल में अभी उनका लण्ड मेरी गांड दी दरार में घिस रहा था. पापा शायद अब डायरेक्ट मेरी चूत पर हमला करना चाहते थे.

मैं तो तैयार थी ही,

पापा ने फिर धीरे से अपना हाथ मेरे पीछे ले जा कर मेरी स्कर्ट को पीछे से ऊपर उठा दिया था जिस से मेरी गांड फिर से नंगी हो गयी थी.

मैंने अपनी टाँगे पूरी चौड़ी कर ली ताकि मेरी चूत का मुँह पूरा खुल जाये,

मुझे अपने पर बहुत गुस्सा आ रहा था की बेवकूफ तुमने आज पैंटी क्यों पहनी, यदि न पहनी होती तो आज पापा द्वारा अभी गुदगुदी के बहाने से तुम्हारी चूत का उद्घाटन समारोह हो जाता.

पर फिर मैंने सोच पर यदि मैंने कच्छी न पहनी होति तो शायद फिर पापा भी अपना लौड़ा अंडरवियर से बाहर न निकालते। खैर अब जो भी है उसी से मजा लेते हैं और कोशिश करती हूँ की पापा आज मुझे चोद ही दें.

पापा मुस्कुराते हुए बोले - "नीलम! बोलो तो क्या मैं फिर से तुम्हे गुदगुदी करु?"

मैं हँसते से बोली "पापा आप की मर्जी है,"

पापा को इशारा मिलते ही उन्होंने मेरी बगलों में हाथ डाल कर मुझे गुदगुदाना शुरू कर दिया.

मैं भी इस तरह नाटक करने लगी की जैसे मुझे बहुत गुदगुदी हो रही हो और मैंने हँसते हुए पापा की गोद में उछलना शुरू कर दिया.

पापा गुदगुदी तो थोड़ी कर रहे थे पर मैं उनकी गॉड में उछल ज्यादा रही थी,

असल में मैं चाह रही थी की पापा का लण्ड जो अब बहुत टाइट हो चूका था. और इस समय मेरी गांड पर रगड़ रहा था किसी तरह मेरी चूत के ऊपर आ जाये.

मैं हिलने के बहाने से अपनी गांड थोड़ी पीछे कर रही थी और अपनी चूत आगे ला रही थी,

पापा भी शायद मेरी इच्छा समझ गए थे. वो भी जानते तो थे ही की लौंडिया दाना चुगना चाह रही है, उन्होंने भी कोशिश करनी शुरू कर दी की किसी तरह लौड़ा जो मेरे चूतडों के नीचे दबा पड़ा है, बाहर आ जाये ताकी वो उसे मेरी चूत पर सेट कर सकें.

पापा ने एक हाथ से गुदगुदी करते हुए दूसरा हाथ हमारी जांघों के बीच लाया, मैंने पापा को मौका देने के लिए हंसने का नाटक करते हुए अपनी आँखें बंद कर ली.

और अपनी टांगों पर जोर देते हुए अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठा ली। और अपनी टांगें पुरी तरह से चौड़ी कर ली.

पापा ने तुरंत अपना लौड़ा मेरी गांड के नीचे से निकाला और मेरी चूत (जिसका मुंह अब पूरा खुल चूका था) की फांकों के बीच फंसा दिया.

ज्योंही पापा के लौड़े का गर्म गर्म सुपाड़ा मेरी चूत के मुंह के बीच आया मेरे मुंह से एक जोर की आह निकल गयी. पापा के मुंह से भी उतने ही जोर की आह की आवाज़ आयी,

अब स्थिति यह थी की पापा का लौड़ा जो कि सिर्फ पाजामे के अंदर , पूरी तरह से नंगा था. मेरी पैंटी में ढकी हुई चूत के मुंह में लगा हुआ था.

हम दोनों ही बाप बेटी जन्नत के साक्षात् दर्शन कर रहे थे और स्वर्गिक आनंद का अनुभव ले रहे थे.

पापा ने फिर से गुदगुदी करनी शुरू कर दी और इस बहाने से उन्होंने मेरी चूत में धक्के देने शुरू कर दिए.

मुझे भी बहुत ही मजा आ रहा था.

मैंने भी गुदगुदी का बहाना लेते हुए पापा के लौड़े पर अपनी चूत घिसनी शुरू कर दी.

हम दोनों बाप बेटी बहुत जोश में आ चुके थे और पापा जोर जोर से मेरी चूत में ऐसे धक्के लगा रहे थे की यदि मैंने पैंटी न पहनी होती तो अब तक तो कभी का पापा का पूरा लण्ड उनकी बेटी की चूत में जड़ तक घुस गया होता.

हम दोनों बाप बेटी गुद्गुदी कम और धक्का पेल ज्यादा कर रहे थे.

हम दोनों की ही सांसे बहुत तेज चल रही थी,

मेरी चूत में पानी आ रहा था और ऐसा लग रहा था की मेरा निकलने ही वाला है,

मैंने सोचा की अब जब इतना सब कुछ हो ही गया है तो शर्म कैसी?

और मैंने तेज तेज अपनी चूत पापा के लण्ड के सुपाडे पर रगड़नी चालू कर दी.

पापा के भी धक्के अब बहुत तेज और जोरदार हो गए थे. पापा ने इतना ध्यान रखा की धक्कों की रफ़्तार में भी उनके लण्ड का सुपाड़ा उनकी बेटी की चूत के मुंह से हिलने न पाए.

हम दोनों के मुंह से आह आह और हु हूँ की आवाज़ निकल रही थी.

बहुत मजा आ रहा था. मैंने सोचा शायद आज काम बन ही जाये और हम बाप बेटी की चुदाई हो जाये,

पापा ने अपना अंडरवियर निकाल कर इशारा तो दे ही दिया था, तो मैंने भी सोचा कि किसी बहाने अपनी पैंटी भी निकाल दूँ.

पर पापा दी गोद मैं उनके लौड़े पर चूत घिसने से इतना मजा आ रहा था तो उठ कर बाथरूम जाने का मन नहीं था.

मैंने साइड में रखा चाय का कप उठा लिया जैसे चाय पीना चाहती होऊं, पर गुदगुदी के बहाने से हिलने के कारण मैंने जान बूझ कर थोड़ी चाय अपनी गोद में गिरा ली.

चाय तो मेरी स्कर्ट पर ही गिरी थी, पर मैंने उछलने का ऐसा नाटक किया कि चाय मेरी पैंटी तक गिर गयी है.

मैं चिल्लाने का नाटक करते बोली

"ओह पापा! चाय मेरी पैंटी तक गिर गयी है. बहुत गर्म लग रहा है. मुझे उठने दो मुझे पैंटी निकालनी पड़ेगी।"

पापा मेरा नाटक समझ रहे थे, तो बात पकड़ते हुए बोले

"नीलम! अब सिर्फ पैंटी निकालने के लिए बाथरूम कहाँ जाओगी। ऐसा करो यही उठ कर अपनी पैंटी निकाल दो. स्कर्ट तो पहनी ही है."

मैं समझ रही थी कि पापा मुझे एक पल के लिए भी जाने नहीं देना चाहते तो मैंने भी उन्हें और आनंद देने के लिए बोलै

"पापा! मेरे हाथ में तो चाय का कप है. ऐसा करती हूँ, कि मैं खड़ी हो जाती हूँ, आप मेरी पैंटी उतार दो."

(चाय का कप रख भी सकती थी मैं, पर जब बात चुदाई तक लानी हो तो पैंटी पापा के हाथों से ही उतरवानी होगी ना। )

पापा तो खुश हो गए.

मैं उठ कर खड़ी हुई और पापा ने मेरी स्कर्ट ऊपर उठा कर अपनी उँगलियाँ मेरी पैंटी के दोनों किनारों में डालने की बजाए आगे की तरफ से डाली। यानि पैंटी की साइड में न डाल कर एक हाथ मेरी चूत के ऊपर और दूसरा पीछे मेरी गांड के ऊपर से डाला, पैंटी उतारने के लिए.

पापा निश्चय ही मेरी चूत को टच करना चाहते थे. मेरी तो चूत में तो पानी की जैसे बाढ़ ही आ गयी.

पापा ने धीरे से पैंटी को नीचे खिसकाना शुरू किया। क्योंकि पापा ने स्कर्ट थोड़ा ऊपर करी थी तो मैंने उसे ऊपर ही पकड़ लिया।

अब पापा पैंटी उतारते तो मेरी चूत नंगी उनके चेहरे के सामने आती और उन्हें अपनी प्यारी बेटी का स्पष्ट दर्शन होता।

चाहे पापा पहले कईं बार मेरी नंगी चूत कमरे में देख चुके थे पर यह होश में जागते हुए पहला मौका था.

पापा ने धीरे धीरे मेरी पैंटी नीचे खींची। और मेरी गीले चूत पापा के आँखों के सामने आ गयी. क्योंकि मैं पापा की गोद में खड़ी थी, तो मेरी चूत उनके चेहरे के बिलकुल सामने ही थी.

चूत बिलकुल गीली थी, और पानी छोड़ रही थी. पैंटी उतारते पापा ने अपनी उँगलियाँ मेरी चूत की दरार में रगड़ दीं और पीछे वाले हाथ की उँगलियाँ मेरी गांड की दरार में रगड़ दीं. मेरे मुंह से एक आह निकल गयी.

पैंटी उतरते शर्मा कर झट से पापा की गोद में बैठ गयी.

अब मैं बिलकुल नंगी थी, चाहे मेरी चूत स्कर्ट से ढकी थी, पर नीचे की रगड़ की लिए तो नंगी ही थी ना. और पापा के लौड़े और मेरी चूत में सिर्फ अब पापा के पाजामे का पतला सा कपडा था.

पापा ने फिर से गुदगुदी शुरू कर दी और उस बहाने से मेरी चूत की दरार में अपने लौड़े रगड़ना चालू कर दिया।

अब तो मजे की इंतिहा ही हो गयी थी.

पापा के लौड़े का सुपाड़ा मेरी चूत के बिलकुल छेद पर आ गया था और चिपक गया था. गुदगुदी के बहाने से पापा उस के धक्के मार रहे थे.

यदि बीच में पाजामे का कपडा ना होता तो अब तक को कभी का उनका लण्ड मेरी चूत में घुस चूका होता।

खैर बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी।

पापा और मैं दोनों बाप बेटी गुदगुदी के बहाने से मजा कर रहे थे.

मैं पापा से मुस्कुराती हुई बोली

"पापा! आप ने आज मुझे बहुत बढ़िया सी चॉकोबार खिलाई है. और मुझे शॉपिंग भी करवाई है. आप का दिल बहुत बड़ा है."

पापा पर तो वासना का भूत सवार था तो मुस्कुराते हुए और मेरी चूत पर अपने लण्ड का धक्का मारते हुए बोले

"नीलम! पापा का दिल ही नहीं और भी बहुत कुछ बड़ा है."

लौड़े के धक्के से मैं गनगना गयी और मुस्कुराते हुए अपनी चूत को पापा के लौड़े पर आगे धकेलते हुए बोली

"पापा! हाँ वो तो मुझे भी पता है. कि बहुत बड़ा है. मुझे कब से चुभ रहा है."

पापा आगे बढ़ते बोले

"तुम्हारी माँ को तो इसकी चुभन बहुत अच्छी लगती है. तो क्या तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा. चुभ रहा है तो उसे पकड़ कर एक साइड में कर दो."

अब तो बात खुल कर होने लगी थी. पापा ने साफ़ साफ़ लौड़ा पकड़ने को बोल दिया। मैंने भी मौके का फ़ायदा उठाया और बोली

"पापा ऐसे कैसे पकड़ लूँ."

पापा ने झट से मेरी एक चूची को पकड़ लिया और बोले

"अरे ऐसे पकड़ कर एक साइड में कर दे ना। "

मैं तो मस्त ही हो गयी. यह आज पहली बार था कि पापा ने सरेआम मेरी चूची पकड़ ली थी। मैंने भी कोई कोशिश नहीं की उसे छुड़वाने की , अता चूची अभी भी पापा के हाथ में ही था. पापा ने मुझे कोई एतराज करते ना मेरे मुम्मे को धीरे धीरे सहलाना और मसलना भी शुरू कर दिया।

मैंने सोचा कि आज तो कुछ हो ही जाए तो बोली

"पापा! आप तो मेरी टी शर्ट के ऊपर से पकड़ रहे है, पर आप ने तो कोई टी शर्ट नहीं पहनी तो मैं क्या करूँ?"

पापा ने अपना हाथ मेरी शर्ट के अंदर घुसेड़ कर मेरी चूची को नंगी पकड़ लिया और पूरी छाती को मसलते बोले

"अरे नीलम! मेरा मतलब इस तरह कपडे के अंदर हाथ डाल कर पकड़ ले."

अब मैंने भी और ज्यादा लेट करना ठीक नहीं समझा और पापा के पाजामे में हाथ डाल कर पापा के लौड़े को अपने हाथ में पकड़ लिया।

पापा के मुंह से एक जोर की आह निकल गयी.

अब दिन के उजाले में दोनों बाप बेटी एक दुसरे के अंगों से खेल रहे थे.

मैंने पापा के लौड़े को एक बार मसला और फिर छोड़ कर कहा

"पापा यह तो बहुत बड़ा है और गर्म भी बहुत है. मेरा हाथ न जल जाये।"

वैसे तो मैं पापा का लौड़ा चूस चुकी थी पर अब सरेआम मजा कर रही थी तो थोड़ा तो नखरा करना ही था.

पापा को भी लग रहा था की आज उन्हें अपनी प्यारी बेटी की चुदाई करने का मौका मिल सकता है. तो पापा मुझे चूमते हुए बोले

"नीलम! तुम्हे वैसे ही लग रहा है. कोई बड़ा नहीं है. चाहे तो इसे पाजामे से बाहर निकाल कर देख लो."

यह कहते हुए पापा पाजामे का नाडा खोल कर अपना नंगा लण्ड जो अब लोहे की तरह सख्त हो चूका था. को बाहर निकाल लिया। पर मैंने भी इस सब के बीच में पापा के लौड़े को अपने हाथ से नहीं छोड़ा और उसे उसी तरह सहलाती रही.

मैं बोली "हाँ पापा! आपका यह तो सच में बहुत बड़ा है. मुझे डर लग रहा है. देखो आपका यह कितने गुस्से में है और कैसे गुस्से में फुंकार रहा है.

पापा मेरी चूची को एक हाथ से मसलते रहे और बोले

"नीलम! यह पापा का "यह" क्या बोल रही है. इसका नाम बोल ना. इसे लण्ड या लौड़ा कहते है. "

मैंने शर्माने की पूरी एक्टिंग करते हुए कहा

"हाय पापा! आप तो पूरे ही बेशर्म हो रहे हो. कोई बाप भला अपनी बेटी के हाथ में अपना लण्ड थोड़े हो ना पकड़ाता है? और इसे देखो कैसे गुस्से में हिल रहा है?"

पापा मेरी मसखरी समझ रहे थे कि मैं अब लण्ड जैसे शब्द बोल रही थी और पापा के लौड़े को सेहला भी रही थी.

पापा बोले

"नीलम बेटा! यह गुस्से में नहीं है. बल्कि तुम्हारे हाथों में आ कर बहुत खुश है और ख़ुशी के मारे मचल रहा है. देखो अपने चेहरे की एक आँख (लौड़े के छेद) से कैसे तुम्हे देख रहा है और देखो इसकी एकमात्र आँख में ख़ुशी के आंसू आ रहे है."

पापा के लौड़े ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. प्रिकम की एक बूँद उनके लण्ड के छेद पर थी पापा बारे में कह रहे थे.

मैंने पापा के लौड़े के सुपाडे पर हाथ फेरते हुए प्रिकम को उस पर मल दिया।

पापा बोले

"बेटी देखो तुम्हे देख कर मेरा लण्ड कितना खुश है. इसे एक प्यार भरी पप्पी दे दो. बेचारा तुम्हारे प्यार के लिए तरस रहा है,"

मैं :- हाय पापा ! क्या बोल रहे हो. भला इस पर भी कोई पप्पी करता है.

पापा:- बेटी! इस पर किस करने में तो औरतोँ को बहुत मजा आता है. तुम्हारी मम्मी तो रोज सोने से पहले इस पर किस करती है. बल्कि अच्छी तरह से चूसती भी है. उसके बिना तो उसे नींद ही नहीं आती. तुम भी पापा के लौड़े किस दे दो.

मैं नादाँ बनने का नाटक करते हुए बोली

"पापा! मुझे नहीं आता. आप बता दीजिये ना."

हालाँकि मैं पिछले दिन ही पापा के लण्ड को चूस कर उसका जूस पी चुकी थी. पर नाटक तो करना ही था ना.

पापा ने मुस्कुराते हुए कहा

"नीलम! तुम अपने दोनों होंठों को गोल करके मेरे लौड़े के सुपाडे पर रखो को फिर जीभ से इसकी एकमात्र आँख पर प्यार करो."

यह कहते हुए पापा मेरे सामने खड़े हो गए और अपना पजामा खोल कर परे फेंक दिया। पापा का हलब्बी लण्ड मेरे चेहरे के सामने झूल रहा था.

मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था. और मैं ज्यादा समय खराब करने के हक़ में नहीं थी. तो मैंने अपने होंठ पापा के लण्ड पर रख दिए और होंठों के अंदर से अपनी जीभ पापा के सुपाडे पर फेरनी शुरू कर दी. पापा के मुंह से आनंद भरी सिसकारियां निकलने लगी. वो चाहते थे कि मैं उनके पूरे लौड़े को मुंह में ले लूँ तो वे मेरे बालों में प्यार से हाथ फेरते हुए बोले

"नीलम बेटी! बहुत अच्छा लग रहा है. तुम्हारे प्यार करने से देखो मेरा लौड़ा कैसे उछल रहा है ख़ुशी से. तुम उसे और अधिक अपने मुंह में ले कर चूसो।"

पापा ने फिर मुझे अच्छा ढंग से लौड़ा चुसवाने के लिए उठाया और वो मुझे अपनी बाहों में ले कर किस करने लगे, वो मेरे नाज़ुक होठों को किसी जंगली की तरह चाट रहे थे। वो ऐसे मेरे मूह को चूस चाट रहे थे जैसे खा जाईंगे।

इस बाद में मैं भी उनका साथ देने लगी। लेकिन वो जैसे मेरे पूरे मुँह को चाट और मेरे होंठों को चूस रहे थे। कुछ ही देर में मेरा पूरा मुँह उन के थूक से भीग चुका था। मेरी टी शर्ट अब नीचे धूल चाट रही थी, मैं अब पूरी नंगी थी , और पापा के हाथ मेरे मासूम निपल्स को मरोड रहे थे।

उनके ऐसा करने से मुझे तकलीफ होती। और मेरे मुँह से आआह्ह्ह… निकल जाती लेकिन उनको इस की ज़रा भी परवा नहीं थी।
 
इस के बाद उन्होंने मेरे मम्मो पर हमला कर दिया। वो तो जैसे मेरे मम्मो को खा जाना चाहते थे। कभी मेरे मम्मो को पूरा मुँह में लेने की कोशिश करते तो कभी मेरे निपल्स पर दांत गड़वा देते। कुछ ही देर में मेरे मम्मो पर पहले की तरह लाल, नीले निशान पर गए।

फिर पापा ने मुझे जमीन पर बिठा दिया और मैंने झट से उनके लण्ड को अपने मुंह में भर लिया, जैसे किसी बच्चे को अपनी प्यारी लॉलीपॉप मिल गयी हो.

पापा के मुँह से आआह्ह्ह… की आवाज़ निकल गई। जिससे साफ़ पता चलता था कि उनको मज़ा आया है।

मैंने अब आहिस्ता आहिस्ता उनके लंड को मुँह में चूसना शुरू कर दिया। उनका शानदार लंड मेरे लिए किसी मज़ेदार आइसक्रीम से कम नहीं था। मैं अब पूरे मन से उनका लंड चूसने लगी। साथ-साथ में अपने दोनों हाथों से उनके टट्टों को सहलाते हुए प्यार करने लगी।

जिसका नतीजा यह हुआ कि कुछ ही पलों में उनका लंड पूरी तरह से लोहे की तरह सख्त और खड़ा हो गया। जो किसी तरह 10 इंच से कम नहीं था। उनका आधा लंड मेरे मुँह में अंदर बाहर हो रहा था। मेरी पूरी कोशिश के बजह से मेरे दांत कभी कभी उनके लंड से टकरा जाते हैं। जिस से उनके मुँह से दर्द भरी आआह्ह निकल जाती है।

पापा :- आआआह्ह… ख्याल से बेटी तुम्हारे दांत मेरे लंड पर लग रहे हैं। आआआह्ह… कितना गरम मुँह है तुम्हारा। बहुत मज़ा आ रहा है। आआआह्ह… बेटी साथ साथ मेरे टट्टों को प्यार कर दो। काफी टाइम इनकी सेवा नहीं हुई। प्लीज बेटी।

उनकी ये बात सुनते हुए मेरे उन बॉल्स से अपना मुँह लगा दिया। पापा के लण्ड की शानदार सुगंध मेरे नाक के रास्ते मेरे जिस्म में फैल गई। लेकिन ये सब मेरे लिए किसी तरह के नशे से कम नहीं थी। मैं पूरे शौक से उन बॉल्स पर अपनी ज़बान का जादू चलाने लगी। मैंने उन बॉल्स को अपने मुँह में लेने की काफ़ी कोशिश की, लेकिन वो टेनिस बॉल साइज़ के गोले भला कहाँ मेरे छोटे से मुँह में आते हैं? आँखिर काफ़ी देर उन बॉल्स को चाटने के बाद जब मैं उनका लंड चाटने लगी.

मैं तो ये सब दिल से एन्जॉय कर रही थी। और तो और पापा का लौड़ा मेरे लिए किसी मज़ेदार कैंडी से कम नहीं था।

अब मैं उनके लंड को मुँह में लेने लगी तो उन्होंने मेरा सिर पकड़कर लिया।

पापा :- बेटी अपना मुँह पूरा खोलो। ताकि तुम्हें मेरा लंड चूसने में आसानी हो।

मेरा मुँह खुद बा खुद खुल गया। जैसे मैं उन के लण्ड का बेसब्री से इंतज़ार कर रही हूँ। और फिर उनका लंड चूसना शुरू कर दिया। वो मेरे सर को सहलाते हुए इधर-उधर हिल रहे थे।

कुछ देर बाद वो अपने लंड को मेरे मुँह से निकाल मेरे चेहरे पर रगड़ने लगे। इस के बाद फिर से अपना लंड मेरे मुँह डाल दिया। जिसको मैं चूसने लगी। अब पापा बार बार यही कर रहे थे, कभी मेरे मूँह में लंड डालकर अंदर बाहर करते तो कभी मेरे थूक से भीगे अपने लंड को मेरे चेहरे पर रगड़ते।

मेरा सारा मेकअप वगैरह मेरे पूरे चेहरे पर फैल चुका था। अब पापा मेरे मूँह में लंड डालकर तेज़ी से अंदर बाहर कर रहे थे। वो शायद अब झरने के करीब थे इस लिए लंबी लंबी सांसें ले रहे थे.

तभी उन्होंने अपना लंड मेरे गले तक डाल दिया और तेज तेज झटके लगाने लगे. मैं जान रही थी कि पापा का स्खलन आ रहा है.

उनके झटके इतने तेज और जोरदार थे की उनका लौड़ा मेरे गले के अंदर टकरा रहा था. मैंने उनके लौड़े की जड़ में अपने हाथ से पकड़ लिया ताकि वो मेरे गले में न लगे, पर मैं और भी तेजी से लौड़े को चूसती रही.

पापा के मुंह से अचानक एक जोर की आह निकली और रह रह कर उनका जिस्म और लंड झटके खाने लगा . उन के लंड से अमृत रुपी पानी की धारें निकल कर मेरे गले तक जा रही थीं.

जिन को मैं तेज़ी से अपने पेट में उतार रही थी. पता नहीं क्यू! उनकी मन्नी का टेस्ट मुझे खोया की तरह लग रहा था. मेरा दिल चाह रहा था कि मैं ये खाती जाऊं. आखिर कुछ देर बाद उनका वीर्य का झरना बंद हुआ. और उन्होंने अपना लंड मेरे मुंह से निकाल लिया. बिना कुछ कहे मैंने उनका लंड पकड़कर लिया और अच्छी तरह से चाट कर साफ कर दिया।

पापा कुछ देर के लिए वहां बैठ गए। और अपने आपको ठीक करने लगे। शायद आज काफी टाइम बाद झड़े थे और पूरे तरीके से, इसके लिए वो काफी थकावट महसूस कर रहे थे।

पापा :- आआआआह्ह्ह…. मज़ा आ गया बेटी। तुम कमाल हो। मैं तो खुश नसीब हूँ कि तुम मुझे मिली हो।

मैं वॉशरूम गयी और खुद को साफ़ किया, खुद को शीशे में देखकर एक बार तो यकीन नहीं हुआ कि ये मैं ही हूँ। मेरा पूरा चेहरा और बाल इस वक़्त बिगड़े हुए थे। जैसे पता नहीं कितने लोगों ने मेरे साथ ज़बरदस्ती की हो। मैं इस वक़्त किसी चीप रंडी से कम नहीं लग रही थी। मेरा मेकअप, मेरी लिपस्टिक मेरे पूरे चेहरे पर अजीब तरह से फैली हुई थी।

अंदर ही अंदर मैं पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी। पिछले कुछ दिनों से बढ़ती मेरी प्यास फिलहाल बुझ चुकी थी।

बस अब देर थी तो पापा से चुदवाने की.

मुझे पूरी आशा थी कि आज मेरी यह इच्छा भी पूरी हो जाएगी।मेरा मन तो कर रहा था कि अब पापा मुझे चोद भी दें. पर समय काफी हो चूका था. नानी और मम्मी को भी लेने जाना था.

तो ना चाहते हुए भी हम उन्हें लेने चले गए.

अगले दिन फिर मम्मी और नानी ने शाम को उस सत्संग में जाने का कहा. मैं और पापा खुशी से त्यार हो गए.

शाम को हमने मम्मी और नानी को सत्संग में छोड़ा, मम्मी को मेरे सत्संग में ना जाने और पापा के साथ घर पर ही रहने पर कोई शक ही नहीं हो सकता था क्योंकि हम दोनों तो बाप बेटी थे.

पर मम्मी को क्या पता था की बाप बेटी घर पर क्या गुल खिलने वाले हैं.

उन्हें छोड़ कर हम दोनों वापिस घर आ गए.

हम दोनों बाप बेटी जानते थे कि आज क्या होने वाला है. पापा का लौड़ा तो पहले से ही सख्त हो चूका था और मेरी चूत में भी पानी की नदी बह रही थी,

घर में आ कर कुण्डी लगाते ही पापा ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और मुझे चूमते हुए ड्राइंगरूम में आ गए.

पापा सोफे पर बैठ गए मैं अभी भी पापा की गोद में ही थी,

मुझे शर्म आ रही थी क्योंकि हम दोनों जानते थे कि क्या होने वाला है.

पापा ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूमना शुरू कर दिया और अपने हाथ को मेरी टी शर्ट में डाल कर मेरे मम्मों को सहलाना शुरू कर दिया।

पापा का लौड़ा लोहे की तरह सख्त हो चूका था.और मेरे चूतड़ों में चुभ रहा था. मेरा मन तो कर रहा था की पापा के लण्ड को अपने हाथों में ले लूँ पर शर्म आ रही थी।

पापा मेरी हालत समझ गए और उन्होंने चुपचाप अपना पाजामे का नाडा खोल दिया और मेरा हाथ पकड़ कर अपने लौड़े पर रख दिया। मैंने भी देर न करते हुए पापा के लौड़े को पकड़ लिया और टोपे से लेकर लौड़े की जड़ तक उसे प्यार से सहलाने लगी.

पापा ने मुझे चूमते हुए पुछा।

"नीलम बेटी! कल पापा का लौड़ा चूसने में मजा आया था? "

मैंने शर्म से सिर्फ गर्दन हिला कर हाँ में जवाब दिया।

पापा फिर बोले

" तो आज भी मजा लेना चाहती हो, अगर कहो तो उस से भी अधिक आनंद दूँ?"

मैं समझ नहीं पायी कि अधिक मजा कैसे आएगा।

मैंने हैरानी से पापा की तरफ देखा। तो पापा मुस्कुराते बोले

"बेटी! लण्ड चूसने या चूत चटवाने से भी कहीं अधिक मजा तो चुदवाने में आता है, क्या आज अपने पापा से चुदवाना चाहोगी। बहुत मजा आएगा पापा के इस लौड़े से चुदोगी तो."

मैं क्या बोलती आखिर वो मेरे पापा थे. चाहे मैं पापा से चुदवाना चाहती थी पर ऐसे कैसे हाँ बोल सकती थी. तो मैंने शर्म से अपना मुंह पापा की छाती में छुपा लिया।

पापा फिर मुझे सहलाते हुए बोले

"नीलम! बतलाओ ना. चुदवाना चाहती हो ना अपने पापा से? लोगी क्या अपने पापा का लौड़ा?"

मुझे बहुत शर्म आ रही थी, मैंने पापा को जफ्फी डाल ली और अपनी बाहें पापा के गले पर लपेट लीं और अपना मुंह पापा के कान पर ला कर धीरे से बोली

"हाँ पापा! बहुत मन कर रहा है. अपने पापा से चुदवाने को. चोद लीजिये आज अपनी प्यारी बेटी को."

यह कहते हुए मुझे बहुत शर्म आ रही थी, पर मैं आज का मौका खोना नहीं चाहती थी तो पापा को हाँ कर दी.

पापा बहुत खुश हो गए.

पापा से अब तो एक पल की भी देरी सहन नहीं हो पा रही थी तो वे तुरंत मेरी टी शर्ट उतर कर ब्रा के ऊपर से ही मेरे दूध पर टूट पड़े और बुरी तरह से दोनों दूध को चूमने लगे।

जल्द ही पापा ने मेरे दूध को ब्रा के बाहर निकाल लिया और मेरे निप्पलों को चूसने लगे।

मैं बहुत जोश में थी और जोर जोर से ‘आआह आआह … ऊऊईई ऊऊईई’ कह रही थी।

पापा ने मेरा मुँह बंद किया और बोले- आवाज मत करना, चुपचाप रहना!

अब उन्होंने मुझे बुरी तरह से अपने सीने से चिपका लिया और बुरी तरह से सभी जगह चूमने लगे।

जल्द ही उन्होंने मेरी ब्रा भी निकाल दी और मुझे लेटा कर मेरे दूध को बुरी तरह से चूसने लगे।

मेरी चूत ने जमकर पानी छोड़ना शुरू कर दिया था और लगातार पानी निकलने से मेरी पैन्टी गीली हो गई थी।

जल्द ही पापा मुझे चूमते हुए मेरी पैन्टी तक जा पहुँचे और मेरी पैन्टी भी निकाल फेंकी।

अब मैं पूरी तरह से नंगी हो गई थी और पापा ने मेरे दोनों पैरों को फैला दिया।

पहले उन्होंने मेरी चूत को हाथों से छुआ और फिर अपना मुंह मेरी चूत में लगा दिया।

पापा अपनी जीभ निकालकर मेरी चूत को चाटने लगे और फिर मेरी चूत को मुँह में भरकर बुरी तरह से चूसने लगे।

मैं किसी तरह से अपने आप को रोक रही थी कि मुँह से आवाज न निकले और बुरी तरह से बिस्तर पर मचल रही थी।

बस पापा और मैं एक दूसरे के अंगों को महसूस कर रहे थे।

पापा बिना रुके मेरी चूत को चाट रहे थे और मैं सोफे पर इधर उधर मचल रही थी।

काफी देर तक पापा मेरी चूत को चाटते रहे और मैं ज्यादा देर तक उनकी जीभ का रगड़ना बर्दाश्त नहीं कर पाई और झड़ गई।

मेरी चूत से गर्म पानी की धार फूट पड़ी और पापा उस पानी को भी चाटते चले गए।

जल्द ही पापा ने मेरी चूत का एक एक बूंद पानी चाट कर साफ कर दिया।

मैं निढाल होकर सोफे पर लेट गईं।

इसके बाद भी पापा नहीं रुके और मुझे दुबारा गर्म करने की कोशिश करते हुए लगातार मेरी चूत को चाटते रहे।

कुछ ही देर में मेरे बदन में वासना की आग दुबारा से भड़क उठी और एक बार फिर से मैं गर्म हो गई।

अब पापा ने भी अपनी चड्डी निकाल दी और जल्दी से मेरे ऊपर आकर मेरे गालों को चूमते हुए मेरे होंठों को चूमने लगे।

पापा ने मेरी दोनों जांघों को फैला दिया और और अपने लंड से मेरी चूत को मसलने लगे।

पहली बार मुझे उनके लंड का अनुभव हुआ लेकिन अभी मैंने पापा का लंड देखा नहीं था।

पापा के लंड का आकार काफी मोटा लग रहा था और काफी गर्म भी था।

वे लंड को मेरी चूत के छेद पर ऊपर नीचे रगड़ रहे थे और लगातार मेरे होंठों को चूम रहे थे।

फिर पापा ने छेद पर लंड लगाया और मुझे जोर से जकड़ लिया और लंड को चूत में डालने की कोशिश करने लगे।

काफी प्रयास के बाद भी उनका लंड चूत में नहीं जा पाया क्योंकि मेरी चूत उनके लंड के हिसाब से छोटी ही थी।

भले मेरा बदन भरा हुआ और गदराया हुआ था लेकिन उस वक्त मैं केवल 19 साल की ही थी और अभी तक मुझे किसी ने छुआ तक नहीं था।

उनका लंड इतना मोटा था कि वह बार बार फिसलकर कही मेरी जांघ पर चला जाता था तो कभी मेरे पेट की तरफ चला जाता था।

एक बार लंड थोड़ा सा ही अंदर जा पाया था कि मैं जोर से उछल पड़ी.

पापा ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपनी बांहों में खींच लिया।

मैं भी खुशी खुशी उनकी बांहों में चली गई और पापा ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया।

मुझे गोद में उठाये हुए पापा मुझे बेडरूम में ले गए।

बेडरूम में लेजाकर पापा मेरे होंठों पर टूट पड़े और मैंने भी उनका साथ देते हुए अपने आप को उनको सौम्प दिया।

पापा लगातार मेरे होंठों को चूम रहे थे। मैं तो पूरी तरह से नंगी थी.

जल्द ही पापा ने भी अपने कपड़े निकाल दिए और केवल अन्डरवियर में रह गए।

काफी देर तक हम दोनों बिस्तर के बाहर ही एक दूसरे को चूमते सहलाते रहे और फिर पापा ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गए।

पापा ने एक झटके में ही मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरे तने हुए दूध पर टूट पड़े।

वे मेरे दूध को अपनी मुठ्ठी में भरकर मसलने लगे और निप्पलों को चूसने लगे।

उनके निप्पल चूसने से मेरे पूरे बदन में आग लग गई और मैं बिस्तर पर मछली की तरह मचलने लगी।

मैं जोर जोर से बस यही कह रही थी- आआह पापा … आह पापा … ऊऊईई मम्मीई … पापा आराम से … आआह ऊऊऊ ऊऊ ऊऊईई!

पापा लगातार मेरे दूध को चूस रहे थे और मेरे बदन को सहलाते जा रहे थे।

जल्द ही पापा खुद भी नंगे हो गए।

अब हम दोनों एक दूसरे के नंगे बदन को सहला रहे थे और चूम रहे थे।

हम दोनों एक दूसरे से बुरी तरह से लिपटे हुए थे और कभी मैं पापा के ऊपर होती कभी पापा मेरे ऊपर हो जाते थे।

काफी देर तक हम दोनों के बीच ऐसे ही आलिंगन चलता रहा और फिर पापा ने मुझे लेटा कर मेरे दोनों पैरों को फैला दिया और मेरी छोटी सी खूबसूरत चूत उनके सामने आ गई।

उन्होंने मेरे जांघों को जकड़ लिया और अपना मुंह मेरी चूत पर लगा दिया।

पापा अपनी जीभ निकाल कर मेरी चूत को बुरी तरह से चाटने लगे।

मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था और पापा उस पानी को पूरा ही चाट रहे थे।

मेरे बदन में जैसे आग ही लग चुकी थी और मुझे अब बस ऐसा लग रहा था कि कितनी जल्दी पापा अपना लंड मेरी चूत में डाल दें और मेरी इतने दिनों की गर्मी को शांत कर दे।

पापा मेरी चूत को बुरी तरह से चाट रहे थे और मैं जोर जोर से ‘आआह पापा … आआह पापा ’ कर रही थी।

पापा भी मुझे बुरी तरह से गर्म कर रहे थे और लगातार मेरी चूत को चाट रहे थे।

काफी देर बाद जब मैं बुरी तरह से मदहोश हो गई और मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मैं अपने हाथ बिस्तर पर पटकने लगी तब पापा ने मेरी चूत चाटना बंद किया।

अब पापा ने मेरी टाँगों को फैलाकर अपने हाथ में फ़सा लिया और मेरे ऊपर लेट गए।

पापा का विशाल मोटा लंड बिल्कुल मेरी चूत के छेद पर लगा हुआ था।

अब वह पल आ गया था जब मेरी पापा के लौड़े से पहली चुदाई होने वाली थी.

और हम दोनों के बीच का इतने दिनों का रिश्ता अपने मुकाम पर पहुँचने वाला था।

पापा का लंड पहली बार मेरी चूत के अंदर जाने के लिए बिल्कुल तैयार था और मैं भी चुदाई के लिए बिल्कुल तैयार थी।

लेकिन मुझे पता था कि पापा का विशाल लंड मेरी छोटी सी चूत के लिए काफी बड़ा है और मुझे बहुत दर्द भी होने वाला था.

लेकिन इन सब को भुलाकर उस वक्त मुझे बस ऐसा लग रहा था कि बस आज पापा मुझे चोद ही दें।

उस वक्त मेरे बदन की गर्मी अपने उफान पर थी और मैं हर दर्द सहने के लिए तैयार थी।

पापा मेरे ऊपर लेटे हुए थे और फिर उन्होंने मेरे गालों को चूमते हुए कहा- तुम तैयार हो न?

“हाँ पापा !”

मेरी हाँ सुनते ही पापा ने मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और अपने लंड पर जोर देना शुरू कर दिया।

लंड का सुपाडा चूत को फैलाकर अंदर छेद में गया और मेरे मुँह से निकला- सीईई ईईई ईईई पापा आ!

उस वक्त तक मुझे लगा कि लंड तो आराम से अंदर जा रहा है लेकिन ये मेरी गलतफहमी थी लंड तो अभी बस चूत के थोड़ा अंदर गया था।

इसके बाद पापा ने और जोर लगाया और लंड चूत में धंसने लगा और मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी चूत के अंदर कोई गर्म रॉड डाल रहा है।

पापा ने मुझे जोर से जकड़ लिया और मैं भी उनसे चिपक गई।

जैसे ही पापा ने थोड़ा और जोर दिया लंड मेरी चूत के हर बंधन को तोड़ता हुआ आधा अंदर चला गया।

मेरे मुंह से जोर से चीख निकली- ऊऊईई ईईई मम्मीई ईईईई आ आआ आआह!

मेरी आँखों के सामने जैसे अंधेरा छा गया और उनसे आंसुओं की धार निकल पड़ी।

मैं पापा को जोर जोर से धक्का देने लगी और किसी तरह से उनसे छूटने की कोशिश करने लगी.

लेकिन पापा ने मुझे जबरदस्त तरीके से जकड़ लिया था जिससे मैं हिल भी नहीं पा रही थी।

जल्द ही पापा ने एक जोर का धक्का लगा दिया और पूरा का पूरा लंड चूत को चीरता हुआ अंदर तक चला गया।

मैं तो दर्द से जैसे पागल सी हो गई थी और बुरी तरह से चिल्ला रही थी।

पापा बार बार मेरे मुँह को बंद कर रहे थे लेकिन दर्द के कारण मैं उनका हाथ झटक दे रही थी।

मैं जोर जोर से कह रही थी- पापा निकाल लो … निकाल लो प्लीज … निकाल लो. मैं नहीं सह पाऊंगी. प्लीज निकाल लो।

पापा मेरी बातों को अनसुना करते हुए एक दो बार लंड को बाहर करते हुए फिर से अंदर पेल दिए जिससे उनका लंड अच्छे से मेरी चूत में सेट हो गया।

उनका लंड इतना मोटा था कि चूत के अंदर हवा तक जाने की जगह नहीं थी।

इतने दिनों तक पापा ने मेरे बदन में चुदाई की जो गर्मी भरी थी वो उस वक्त हवा हो गई थी।

उस वक्त मुझे समझ में आया कि पापा में सबके रहते हुए मुझे क्यो नहीं चोदा था अगर घर वालो के रहते हुए मेरी चुदाई हुई होती तो मेरी चीखे सुनकर पता नहीं क्या हो जाता।

पापा को चुदाई का बहुत अनुभव था और वे उस वक्त अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल कर रहे थे।

वे चुपचाप मेरे ऊपर लेटे हुए थे और उनका लंड मेरी चूत में धंसा हुआ था।

काफी देर तक पापा ऐसे ही बिना कुछ किये मेरे ऊपर लेटे रहे और मेरे गालों और जांघों को सहलाते रहे।

काफी देर बाद मेरे अंदर दर्द की लहर धीमी होने लगी और धीरे धीरे दर्द कम होने लगा।

पापा लगातार मेरी जांघ पर अपनी उंगली चला रहे थे और एक बार फिर से मेरी चूत से पानी निकलना शुरू हो गया था।

मेरे बदन में वासना की लहर फिर से दौड़ने लगी थी और मेरी चीखें मदहोश करने वाली सिसकारियों में बदल गई थी।

अब पापा ने भी आहिस्ते आहिस्ते लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.

और मेरे मुंह से बेहद गंदी गंदी आवाजें निकलने लगी- आआ आऊ ऊऊऊ ऊऊ आआ आऊ ऊह पापा लल्लऊऊऊ पापा आआह ऊऊह!

उस वक्त पापा बेहद आहिस्ते आहिस्ते मुझे चोद रहे थे लेकिन अब मुझे दर्द की जगह मजा आ रहा था।

मेरी उंगलियां पापा की पीठ पर चलने लगी थी और मेरे होंठ पापा के सीने को चूम रहे थे।

अब तक पापा भी समझ चुके थे कि अब मुझे चुदाई में मजा आ रहा है इसलिए पापा ने भी चुदाई की रफ्तार तेज करनी शुरू कर दी।
 
पापा के धक्कों की रफ्तार तेज होती जा रही थी और मेरी सिसकारियों की आवाज भी कमरे में गूंजती जा रही थी।

सारा कमरा मेरी कामुक आवाज से गूंज रहा था- अई अई ऊह ऊऊह आह आअ आह ऊऊई उई अई मम्मीई ऊऊई अई फ़फ़ ऊऊफ़ पापा आआह ओह आआह ऊऊई मम्मीई अई!

जल्द ही पापा की रफ्तार इतनी तेज हो गई थी कि पूरा पलंग जोर जोर से हिलने लगा था और पापा के धक्के मेरे पेट पर जोर जोर से बज रहा था।

अब तक पापा को समझ आ गया था कि मुझे दर्द नहीं हो रहा है और मैं चुदाई का मजा ले रही हूं.

इसलिए पापा ने अपने दोनों हाथ मेरे चूतड़ के नीचे लगाकर मेरे चूतड़ को हवा में उठा लिया और अपनी पूरी रफ्तार से धक्के लगा लगा कर मेरी चुदाई करने लगे।

मेरी चूत पूरी तरह से पानी से भर गई थी और चुदाई करते समय फच्च फच्च की आवाज निकलने लगी।

जल्द ही पापा ने अपना लंड बाहर किया और मुझे घुटनों पर होने के लिए कहा।

मैं समझ गई कि वे मुझे घोड़ी बनने के लिए कह रहे हैं और मैं चुपचाप घोड़ी बन गई।

पापा अब मेरी गांड की तरफ थे और पीछे से उन्होंने मेरी चूत में लंड डाल दिया।

उन्होंने मेरी कमर को पकड़ा और धक्के देना शुरू कर दिया।

मेरे दोनों दूध नीचे की तरफ लटकते हुए तेजी से झूल रहे थे और पापा दनादन धक्के लगा रहे थे।

इस पोजीशन में चुदाई को मैं ज्यादा समय तक बर्दाश्त नहीं कर पाई और जल्द ही झड़ गई।

चूत का गर्म गर्म पानी बिस्तर पर टपक रहा था और पापा लगातार चुदाई किये जा रहे थे।

कुछ देर बाद एक बार फिर से पापा ने अपना लंड बाहर किया और अब उन्होंने मुझे पलंग के नीचे खड़ी कर दिया और मेरी एक टांग उठाकर पलंग पर रख दिया.

फिर पापा ने अपना एक हाथ मेरी कमर पर कसा और लंड को चूत में पेल दिया।

उन्होंने मुझे अपने सीने से लगा लिया और दूसरे हाथ से मेरी गांड थामकर धक्के देना शुरू कर दिया।

उनका लंड किसी मशीन की तरह मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा था और मेरे दोनों दूध उनके सीने पर दबे जा रहे थे।

ऐसे ही चोदते हुए पापा ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और मुझे उछाल उछाल कर मेरी चुदाई शुरू करने लगे।

पापा के हर पोजीशन में मुझे अलग ही मजा आ रहा था।

मेरी पहली ही चुदाई में पापा ने इतने सारे पोजीशन में मुझे चोद लिया था।

पापा लगभग 40 मिनट से मुझे चोद रहे थे और मैं दो बार झड़ चुकी थी लेकिन पापा का अभी तक पानी नहीं निकला था।

पापा पोजिशन बदल बदल कर मुझे चोदे जा रहे थे और मैं बिंदास होकर अपनी पहली चुदाई का मजा ले रही थी।

इसके बाद पापा ने मुझे खड़े खड़े ही घोड़ी बना लिया और पीछे से आकर मेरी चुदाई करने लगे।

इस बार पापा के धक्के इतने ज्यादा जोरदार थे कि मेरा पूरा बदन हिल गया था।

मेरी गांड में फट फट करते हुए धक्के पड़ रहे थे और मेरे दूध बुरी तरह से इधर उधर उछल कूद कर रहे थे।

जल्द ही पापा ने मुझे बुरी तरह से जकड़ लिया और उनका गर्म फव्वारा मेरी चूत के अंदर ही फट गया।

उनके गर्म गर्म पानी से मेरी चूत पूरी भर गई थी और मेरे जांघों से होकर जमीन पर टपक रहा था।

पापा ऐसे ही लंड डाले हुए मुझे बिस्तर पर लेटा दिए और मेरे ऊपर ही लेट गए।

उनका लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर धसा हुआ था लेकिन जल्द ही उनका लंड ढीला होकर चूत से बाहर निकल आया।

पापा मुझसे अलग हुए और हम दोनों काफी देर तक नंगे बदन बिस्तर पर लेटे रहे।

मैं बुरी तरह से थक चुकी थी और अब मेरी हिम्मत जवाब दे चुकी थी।

पापा भी थक गए थे और फिर वे मेरे नंगे बदन से लपट कर लेट गए।

मेरा तो पूरा बदन दर्द से टूट रहा था। पर मुझे ख़ुशी थी की मैंने अपने पापा से आखिर चुदवा ही लिया।

फिर मैंने बाथरूम जाकर पेशाब किया और अपने नंगे बदन को आईने में देखा तो मेरे दूध और जांघ पर लाल निशान पड़ गए थे जो पापा के मसलने के कारण बने थे।

हम दोनों ही कब से चुदाई के प्यासे थे और हम दोनों को ही चुदाई की भूख थी।

अब मुझे बाहर किसी लड़के की कोई जरूरत नहीं थी.

मुझे घर पर ही एक अनुभवी लंड मिल गया था और इसके बारे में कभी किसी को भी पता नहीं चलेगा।

हम दोनों बाप बेटी थोड़ी देर तक इसी तरह लेटे रहे , पापा मेरी चूचियों को सहलाते रहे और मैं उसी तरह पापा के लण्ड को सहलाती रही.

थोड़ी देर में पापा का लण्ड फिर से खड़ा होने लग गया.

मुझे भी फिर से पेशाब लग रही थी तो मैंने बाथरूम में जाने को बोला तो पापा ने कहा कि उन्हें भी पेशाब आया है तो हम दोनों बाथरूम में जाने को उठे.

मैं तो नंगी ही थी, अब चुदाई होने के बाद मुझे शर्म आ रही थी. तो मैंने अपनी टी शर्ट उठाई तो पापा उसे पकड़ कर बोले

"नीलम! क्या जुल्म करती हो? अब जब तक तुम्हारी मम्मी नहीं आ जाती तुम नंगी ही रो. तुम मुझे ऐसे बहुत अच्छी लगती हो. देखो मैं भी तो नंगा ही हूँ."

मुझे शर्म लग रही थी तो पापा ने मुझे गोद में नंगी ही उठा लिया और मुझे बाथरूम में ले गए.

वहां मैं बैठ कर पेशाब करने लगी तो पापा ने मुझे रोक दिया। और मुझे गोद में उठा लिया।

मैंने अपनी टाँगे पापा की कमर के गिर्द जकड़ ली, पापा का लौड़ा पूरा सख्त हो चूका था. पापा ने उसे मेरी चूत के छेद पर टिका दिया और मुझे पेशाब करने को बोलै।

मैं तो पापा की हरकतों पर गनगना ही गयी. पापा तो चुदाई के कितने शरारतें जानते थे.

मैंने उसी तरह पापा की गोद में लटके लटके ही मूतना शुरू कर दिया। मेरा मूत सीधा पापा के लौड़े पर गिर रहा था.

पापा को मेरे गर्म गर्म मूत का एहसास हुआ तो उन्होंने भी मूतना शुरू कर दिया।

क्योंकि पापा का लौड़ा मेरी चूत के छेद पर टिका हुआ था तो पापा का पेशाब सीधे मेरी चूत में गिरने लगा.

मुझे बड़ा अजीब लग रहा था पर मजा भी बहुत आ रहा था। जिंदगी में पहली बार किसी लौडे पर पेशाब कर रही थी और उस का पेशाब मेरी चूत में जा रहा था.

थोड़ी देर में पेशाब बंद हो गया तो पापा ने मुझे नीचे जमीन पर खड़ा कर दिया।

मैं पानी का डिब्बा ले कर अपनी चूत धोने लगी तो पापा ने मुझे तुरंत रोक दिया और प्यार से बोले

"नीलम बेटी! इस तरह अपने बाप के लंड पर पेशाब करने के बाद पानी से साफ नहीं करते। बल्कि मुंह से साफ़ करते हैं. तुम मेरे लौड़े को चूस कर साफ़ करो और मैं तुम्हारी चूत को चाट चाट कर साफ़ करूँगा.

मुझे बड़ा अजीब लग रहा था पर अच्छा भी लग रहा था तो मैं पापा के पैरों के पास बैठ गयी और पापा के लौड़े को मुंह में भर लिया और चूस चूस कर बिलकुल साफ़ कर दिया। पापा का लण्ड बिलकुल आसमान की तरफ ऊपर को सर उठा कर खड़ा था.

फिर मेरी बारी थी तो पापा ने मुझे घोड़ी बना कर खड़ा कर दिया और पीछे आ कर मेरी टांगों के बीच बैठ गए.

मेरी गांड बिलकुल पापा के मुंह के सामने थी। मेरी गोरी गोरी गांड का छेद पापा के सामने खुल रहा था.

पापा ने पीछे से मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया। और थोड़ी ही देर में उन्होंने मेरी चूत से सारा पेशाब साफ़ कर दिया।

फिर पापा ने मुझे दुबारा से गोद में उठा लिया और मेरे चूतड़ों के नीचे हाथ डाल कर अपनी कमर पर ले लिया। मैंने भी फिर से अपनी टांगें उनकी कमर पर लपेट ली और पापा के लौड़े को अपनी चूत पर ले लिया ताकि कमरे में वापिस जाने तक भी उनके लौड़े की चुभन अपनी चूत पर लेती रहूं। पापा का लौड़ा बिलकुल तन गया था लगता था कि चुदाई का दूसरा दौर आने वाला है.

पापा ने अपनी एक ऊँगली मेरी गांड के छेद पर रख दी और कमरे में जाते जाते मेरी गांड के सुराख को कुरेदते रहे. मुझे अजीब और अलग सी सनसनी हो रही थी. अच्छा भी लग रहा था तो चुप रही,

कमरे में आ कर पापा ने मुझे फिर से बेड पर लिटा दिया।

हम दोनों एक दूसरे को चूमते रहे। मैं पापा की कमर को सहलाती रही। वो मेरे होंठों को चूमता रहा और मेरे मम्मोंको मसलता रहा और मुझसे कहने लगा, “नीलम! मुझे तुम्हे चोद कर बहुत अच्छा लगा. मैंने आज तुम्हे चोद कर अब आधी औरत बना दिया है।!”

मैंने कहा, “आधी कैसे? अब तो आपने मुझे पूरी तरह से औरत बना दिया है! इतनी जोर से अपने पुरे लौड़े से तो चोदा है आपने अपनी बेटी को?”

वो बोले , “अभी मैंने तुम्हे पूरी तरह से औरत कहाँ बनाया है? थोड़ी देर बाद मैं तुम्हे पूरी तरह से औरत बना दूँगा!”

मैंने कहा, “वो कैसे?”

वो बोले, “अभी तो मैंने सिर्फ चूत की ही चुदाई की है। जब मैं गाँड भी मार लूँगा तब तुम पूरी तरह से औरत बन जाओगी!”

मैंने कहा,“प्लीज़। ऐसा मत करो। मेरी चूत में पहले से ही बहुत दर्द हो रहा है। अगर आपने आज ही मेरी गाँड भी मार दोगे तो मैं तो बेड पर से उठने के काबिल भी नहीं रह जाऊँगी!”

वो बोले , “तो क्या हुआ! मैं आपको आज पूरी तरह से औरत बना कर ही दम लूँगा! क्या तुम आज कोई कसर छोड़ना चाहोगी? क्या तुम पापा की पूरी औरत नहीं बननी चाहोगी। नीलम! देखो मेरा लण्ड तो तुम्हारी नरम नरम गांड को देख कर कब से तड़फ रहा है. प्लीज आज मना मत करो और मुझे अपनी गांड भी मारने दो. अभी तुम्हारी मम्मी और नानी के आने में देर है. तब तक एक राउंड गांड का भी हो जाये।"

मैं पहली बार गांड मरवाने में बहुत डर रही थी. ऊपर से पापा का लौड़ा बहुत ही मोटा और लम्बा था. चूत मरवाने में ही मेरी जान निकल गयी थी गांड मरवाने का सोच कर तो मुझे पसीने ही आ गए.

मेरा डर देख कर पापा पैर से मेरे चूतड़ों को सहलाते बोले

"नीलम! देखो एक न एक दिन तो तुम्हे मुझसे गांड मारवानी ही है. तो क्यों न तुम्हारी गांड का उध्गाटन आज ही हो जाये? यदि गांड मरवाने में दर्द भी हुआ तो तुम मम्मी को कोई भी बहाना कर देना की तुम गिर गयी थी और चोट लग गयी है."

मैंने भी सोचा कि जब एक दिन गांड मरवानी ही है तो क्यों न आज ही गांड भी मरवा ही लूँ.तो में पापा से बोली

"पापा! मेरी गांड बिलकुल कुंवारी है. इस का आप ही उध्गाटन कर रहे हो. ऊपर से आप का हथियार तो बहुत ही बड़ा है. मेरी चूत भी अभी तक दर्द कर रही है. प्लीज आप जरा प्यार से गांड मारना।"

मेरी इजाजत मिलते ही पापा खुश हो गए और उनके लौड़े ने ख़ुशी से उछल उछल कर अपनी प्र्सनता जाहिर की.

पापा बोले , “नीलम! तुम मेरा लंड सहलाओ, अब मैं गांड की चुदाई करुँगा। "

मैं तो पापा के लंड की दीवानी हो चुकी थी। मैंने उसी वक्त उनके लंड को हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी। पापा ने मेरे मम्मोंको मसलते हुए मेरे होंठों को चूमना शुरु कर दिया। थोड़ी ही देर में लंड टाइट हो गया। वो बोले ,

“अब थोड़ी देर तक मुँह में लेकर चूसो इसे। इससे मेरा लंड और ज्यादा टाइट हो जायेगा!”

मैंने पापा के लंड को अपने मुँह में ले लिया और तेजी के साथ चूसने लगी। लंड चूसना मुझे बेहद अच्छा लग रहा था। मैं लंड चूसती रही और वो जोश में आ कर आहें भरते हुए मेरे मम्मों को मसलते रहे । थोड़ी ही देर में लंड पूरी तरह से टाइट हो गया।

अब काफी देर हो रही थी. मैं ज्यादा समय नहीं लेना चाहती थी क्योंकि मेरी गांड को पापा के लण्ड के लिए तरस रही थी. चुदाई को मरी जा रही थी मैं.

तो मैंने पापा को कहा

"पापा ! अब तो आप का लौड़ा गीला हो गया है. प्लीज देर न लगाएं और इसे जल्दी से मेरे अंदर डाल दें."

पापा समझ गए की उनकी बेटी चुदाई के लिए तैयार है. तो उन्होंने कहा

"नीलम ! ऐसा करो की तुम बेड के किनारे पर हाथ रख कर घोड़ी बन जाओ और मैं पीछे से तुम्हारी गांड मैं लण्ड घुसाता हूँ. "

मैं तो गांड मरवाने के लिए हर आसन में तैयार थी. बस लौड़ा मेरे अंदर घुसना चाहिए था.

अब मुझ से कंट्रोल करना मुश्किल लग रहा था, जिसका सबूत मेरी गांड अब मूव हो कर खुद ऊपर नीचे हो रही थी। पापा की बार मेरी चूची चुस्ते ऊपर उठ कर मेरे होठों को चूसने लगते तो मेरी साँसें तेज चलने लगती और मैंने पापा को अपनी बाहो में कस लिया और आलिंगन में कामुक आवाज बोली

"पापा ! क्या कर रहे है बस कीजिए ना.अब तो डाल दीजिये न अंदर "

मैं किसी मछली की बहुत तड़प रही थी और बेड पर अपनी दोनों बाहें फैला अपनी मुट्ठी मैं चद्दर को भींच कर कस कर चिल्ला रही थी "आआआह्हह्हह्ह जीइइइइइइइ ये क्या कर रही है है गुदगुदी हो रही है आआआआह्हह्हह्ह धीरेईईईईईई रुक जइए ना पापा जीईईईईईईईईईईईईई रुक जाइए ना बस भी कजिए आआआआआआह्हह्हह्ह."

पर पापा अब कहां रुकने वाले थे। मैं भी पापा का जोश बढ़ाने के लिए उनका साथ दे रही थी और पापा मेरे ऊपर चढ़े अपने मुँह को मेरे मुँह में डाले मेरी चुचियों को दबा रहे थे. कुछ देर इसी तरह मेरी चूचियां चूसते रहे।

मैं काम उत्तेजना में "सी आह आह उई मां उई" करने लगी और बोली

"पापा मुझे कुछ हो रहा है प्लीज कुछ करो."

पापा ने कहा

"क्या करूं, मैं तो तैयार ही हूँ. बताओ न क्या करें?"

मैं बोली

"मुझे शर्म आती है प्लीज करो ना."

पापा बोले

"जब तक खुलकर नहीं बोलोगी तो मुझे कैसे पता चलेगा कि क्या करना हैं. ऐसे शर्म से तुम्हे भी मजा नहीं आएगा ।"

तो मैं बोली

"पापा अब रहा नहीं जाता। जल्दी से अपना यह हथियार मेरी गांड में डाल दो। ठोक दो उसे मेरे अंदर ही, मुझे चोदो।"

पापा बोले

"नीलम ! क्या कहा? जरा और खुलकर बोल मुझे सुनाई नहीं दिया."

वो मुस्कुरा रहे थे।

मैं बोली

"मुझे चोदो पापा , घुसेड़ दो. अपना लंड मेरी गांड में और अपनी नीलम की गांड मार लो, अपनी बेटी को प्यार से चोदना, दर्द मत देना, मेरे पापा आई लव यू।"

मुझे पता नहीं लग रहा था की कामवासना की आग में जल रही मैं कह क्या रही हूँ. दिमाग काम ही नहीं कर रहा था.

मैं तो जैसे पागल ही हो रही थी. पापा का गधे जैसा मोटा लंड मैंने अपने हाथ में पकड़ लिया।

हे राम क्या शाही लंड था पापा का और मेरा एक हाथ अपनी गांड पर चला गया

मेरी गांड तड़फ रही थी, और मैं अपनी गांड को सहलाने लगी

सब से बड़ी बात उनकी टांगों के बीच किसी शेर की तरह दहाड़ता लंड जिसकी तो मेरी दीवानी हो चुकी थी मेरी नज़र पापा के घोड़े जैसे लंड पर टिक गयी.

आंखो के सामने मुझे मेरे पापा ही पापा दिखायी दे रहे थे। उनका वो मजबूत गठेला शरीर, मजबूत कंधे, उनका चौड़ा सीना और सीना के घने बाल और सब से बड़ी बात उनकी टांगों के बीच किसी शेर की तरह दहाड़ता लंड जिसकी तो मैं दीवानी हो चुकी थी.

सच मेरे पापा का क्या शाही लंड था अब इस शाही लंड पर मेरा नाम लिखा था आज मेरी गांड की आग को पापा अपने उसी शाही लंड से गांड के अंदर डालकर मेरी गांड के अकड़ को ठंडा कर रहे होंगे.

मेरे अंदर भयानक आग लगी हुई

सोचने लगी कि पापा मुझे कैसे और किस पोजीशन में चोदेंगे। और मैं पापा का साथ कितना दूंगी

अब मेरी पिच पापा के द्वारा बल्लेबाज़ी करने के लिए पूरी तरह से तैयार करा दी

मेरी गांड भी अपने लिंग महाराज से मिलने को बेकरार थी.

पापा बोले " हम दोनो में शर्म का क्या काम, मेरी बेटी। मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ. अगर तुम भी मुझसे प्यार करती हो तो मेरी आंखो में देख कर बोलो।"

तो मैंने पापा की आंखो मैं देख कर कहा

"पापा मुझे शर्म आती है. पर पापा आई लव यू. पापा बस अब देर मत कीजिये और जल्दी से मेरी गांड मारिये "

और तेजी से ये बोल कर अपना मुंह पापा की छाती में छुपा लिया और पापा ने मुझे अपनी बाहों में समेट लिया और मुझे सहलाने लगे।

मेरे पापा के सीने से चिपकी हुई थी अलग ही दुनिया मेरी थी।

मेरे से अब सहन करना मुश्किल हो रहा था. मैंने अपने हाथ में पकडे हुए पापा के लण्ड को अपनी गांड पर टिका दिया. पापा का लण्ड बहुत गर्म था.

मेरी गांड से भी बहुत भाफ निकल रहा था. गांड इतनी गीली हो गयी थी कि लौड़ा बिना तेल या किसी चिकनाई के भी घुस सकता था.

मैं पापा के लण्ड के सुपाडे को अपनी गांड की दरार में रगड़ने और घिसने लगी.

पापा समझ रहे थे कि उनकी बेटी बहुत प्यासी हो चुकी है. वो शायद इसी समय का इन्तजार कर रहे थे. क्योंकि वो जानते थे कि उनका लण्ड बहुत मोटा और बड़ा है. मैं अपने पापा से पहली बार गांड मरवाने वाली हूँ तो मैं उनका लौड़ा सहन नहीं कर पाऊँगी. क्योंकि मुझे अभी तक इतने मोटे लौड़े की आदत नहीं है.

इसीलिए पापा चाहते थे कि मेरी वासना हद से ज्यादा बढ़ जाए और गांड बिलकुल गीली हो जाये तो ही चुदाई करनी चाहिए उन्हें.

उस समय तो पापा का लंड किसी पागल सांड की तरह दिख रहा था जो किसी लहलहाते खेत के पास खड़ा हो कर उस खेत को उजाड़ने के लिए तैयार हो। पापा मेरी दोनों टांगों के बीच थे और उनका घोड़े के जैसा लंड मेरे तालाब में उतर कर मेरे तालाब की गहराई को मापने के लिए मचल रहा था।

मैं घोड़ी बनी खड़ी थी और मैंने अपना हाथ पीछे ले जा कर पापा का लौड़ा पकड़ लिया और

मैं उनके सुपाडे को गांड में रगड़ रही थी.

पापा के लंड का सुपाड़ा अपनी नई नवेली रानी, मेरी गांड के साथ चुम्मा चाटी कर रहा था उसे बेहला फुसला रहा था। पापा के लौड़े का गरम गरम स्पर्श अपनी गांड पर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरी गांड पर कोई गरम गरम लोहे की रॉड रख दी हो.

मैं बुरी तरह से डर भी रही थी क्योंकि अब मेरी गांड का बाजा बजने वाला था.
 
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