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बाप बेटी का अनोखा प्यार

तभी पापा ने हल्का सा धक्का मारा। भला पापा का बांस जैसा हथियार इतनी आसान से कहां जाता, पापा ने फिर से अपने लंड को मेरी गांड पर रख कर धक्का मारा पर इस बार भी वो मेरी गांड मैं ना जा कर एक साइड की ओर मुड़ गया.

तो पापा मेरी तरफ देख शैतानी से मुस्कुराते हुए बोले

"नीलम ! यह एक मेहमान तुम्हारी चौखट पर आया खड़ा है. बेचारे की नजर कमजोर है और उसकी एक ही आँख है. इसलिए वो तुम्हारे घर में नहीं जा पा रहा. तुम उसे थोड़ा रास्ता बता दोगी ताकि वो अंदर आ सके?"

मैं भी पापा को शरारत से बोली

"पापा ! आप के मेहमान का मेरे घर के अंदर स्वागत है. उसे अंदर भेज दीजिये मैं तो उसका कब से इन्तजार कर रही हूँ.."

पापा बोले

"बेटी! तुम एक काम करो कि उसको पकड़ कर घर के दरवाजे पर रखो मैं उसे धक्का दे कर अंदर भेज देता हूँ. तुम अपने हाथ से पकड़कर अच्छे से लगा कर रखो मैं धक्का मारता हूं। ठीक है?"

तो मैंने शर्माते हुए पापा से कहा,

"जी पापा ! आपका यह मेहमान तो बहुत मोटा है और घर का दरवाजा बहुत तंग है, ये अंदर नहीं जाएगा। कहीं मेरे घर का पिछले दरवाजा टूट फूट ही न जाए "

तो पापा बोले

"नीलम ! तुम ऐसे पकड़ कर गेट पर रखो तो सही. यह अंदर चला जाएगा।( फिर पापा मेरी आंखो में देख मुस्कुराहट से बोले), चला जाएगा सब औरतों के अंदर चला जाता है तो क्या तुम्हारे अंदर नहीं जाएगा रही बात मोटे की जितना मोटा है उतना ही तो मजा देता है। तुम अंदर तो आने दो इसे."

मैं पापा के लौड़े की मोटाई से थोड़ा सा डरी थी कि ये 9 इंच का और इतना मोटा मेरे अंदर कैसे जायेगा."

मैं पापा के गले लग कर कान में बोली

"पापा प्लीज़ आराम से चोदना, मेरी रसभरी गांड आज तक किसी भी लण्ड से नहीं चुदी है, यह मेरा गांड में पहली बार है तो मैं आपके लण्ड के हिसाब से तो कली हूं, मेरे प्यारे पापा आपका लंड बहुत मोटा और लम्बा है इस कली को मसल कर बर्बाद न करना,"

पापा ने मेरे होंठों को अपने मुंह में भर लिया और कहा

"बेटी तुम बिलकुल भी चिंता न कर. एक बार इसे अंदर करने दे फिर इस मज़े को तू जीवन में कभी नहीं भूलेगी, थोड़ा सा दर्द होगा पर उसे झेल जा नीलम ."

फिर मैंने होंसला करते हुए पापा के लण्ड को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसके सुपाडे को अपनी गांड के छेद पर रख दिया. पापा का सुपाड़ा मोटे टमाटर जैसा था उसने गांड को पूरा ढक लिया था

पापा का लंड तो बहुत ज्यादा लम्बा और मोटा था। मैं जानती थी कि मुझे पापा से चुदवाने में बहुत ज्यादा तकलीफ़ होने वाली है लेकिन मुझे ये भी मालूम था कि मुझे मज़ा भी खूब आयेगा।

पापा ने अपने लंड का सुपाड़ा मेरी गांड के मुँह पर रखते हुए कहा, “बेटी ! आज मैं पहली बार तुम्हारी गांड की चुदाई करने जा रहा हूँ। तुम चाहे जितना भी चीखोगी या चिल्लाओगी मैं एक भी नहीं सुनुँगा क्यों कि चाहे पहली बार गांड मरवाने में दर्द तो होता है पर इसी तरह की चुदाई में औरत को मज़ा आता है और वो अपनी पहली बार की चुदाई को सारी ज़िन्दगी याद करती है। मैं गांड में पूरा का पूरा लंड घुसाते हुए आपको बहुत बुरी तरह से चोदुँगा!”

मैंने कहा, “पापा प्लीज़! ऐसा मत करो। मुझे बहुत दर्द होगा। मैं मर जाऊँगी!”

वो बोले, “फिर मुझसे मुझसे अपनी गांड मरवाने का इरादा छोड़ दो। मैं नहीं चोदूँगा!”

इतना कह कर उसने अपना लंड मेरी गांड के मुँह पर से हटा लिया। मैं ठीक उसी तरह से तड़प उठी जैसे कईं दिनों के भूखे के सामने से खाने की थाली हटा ली गयी हो।

मैंने कहा, “अच्छा पापा ! जैसी आपकी मर्जी आप जैसे चाहो मुझे चोदो। मैं तुम्हें मना नहीं करूँगी!”

वो बोले, “फिर ठीक है!”

मैंने भी सोच लिया था कि एक बार तो गांड में लौड़ा घुसना ही है तो आज ही यह हो जाये। बस अब हम बाप बेटी त्यार थे मेरी गांड के उद्धघाटन के लिए.मैं मचलने लगी, पापा ने थोड़ा सा लंड का दबाव गांड पर दिया.

पापा का लण्ड गांड में नहीं जा रहा था, मैं कसमसाने लगी लंड बाहर छिटक जा रहा था।

पापा ने कहा

"नीलम ! लण्ड का सर थोड़ा मोटा है. इसलिए अंदर नहीं घुस रहा. तुम एक करो कि तुम थोड़ा थूक अपनी गांड और मेरे लौड़े पर लगा दो. इस से थोड़ी चिकनाई हो जाएगी.

अब मैं बिलकुल फस गयी थी. चाह कर भी हिल नहीं सकती थी. खैर जो होगा देखा जायेगा सोच कर मैंने थोड़ा थूक अपनी उँगलियों में लेकर अपनी गांड के छेद पर लग लिया और थोड़ा पापा के सुपाडे पर लगा दिया। फिर मैंने लण्ड को पकड़ कर अपनी गांड की कसी हुई दरार में घिसने लगी।

जब गांड खूब चिकनी हो गई.तो पापा ने मेरी गांड पर अपने सुपाड़े को दबाया. सुपाड़ा छोटे से मुलायम छेद को फ़ैलाने लगा, गांड की दीवारें साइड में खुलने लगी. और मैं दर्द से कसमसाने लगी. पापा से भी अब रुकना मुश्किल हो रहा था तो उन्होंने मेरी गांड में कस कर एक धक्का मारा. पर गांड पापा के लण्ड के हिसाब से इतनी छोटी थी की आधा सुपाड़ा ही अंदर घुस पाया.

मैं चिल्लाई " आ आ सी सी पापा आराम से. सी सी आह आह उई मां उई उई उफपापा आराम से करो बहुत दर्द हो रहा है आ आह। "

पापा मेरे ऊपर लेट गये और मेरी बालों में उंगलियां डाल कर सहलाने और किस करने लगे.

मेरी तो आँखों में आंसू आ गए थे.

फिर पापा मेरी चूची को अपने हाथों से सहलाने लगे, जिस से मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने पापा की आंखों में देखा। पापा ने शरारत से मुझे आँख मार दी. मैं तो शरमा गई.

पापा ने पूछा "कैसा लग रहा है?"

मैं हल्के से मुस्कुरा दी पापा ने पूछा "अब और डालूं अंदर?"

मैंने शरमाते हुए हाँ में इशारा किया और मैंने पापा के लण्ड को पकड़ कर धीरे से अंदर की तरफ दबाया तो सुपाड़ा धीरे धीरे रास्ता पकड़ कर अंदर जाने लगा मेरी गांड का छेद धीरे-धीरे फैलने लगा।

मुझे दर्द होने लगा. "सी सी आह आह उई मां उई उई उफ पापा आराम से करो बहुत दर्द हो रहा है आ आह."

मेरी आँखों में से आंसू बहने लगे. मेरी आंखों फैलने लगी, मैं मुठ्ठी में चादर भींच कर दर्द को सहने लगी, पापा ने लंड धीरे से बाहर निकाल लिया और फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। मुझे फिर से दर्द हुआ। पापा मेरे ऊपर ही लेट गए और आराम से बोले

"नीलम ! तुम्हारी गांड में पहली बार मार रहा हूँ तो दर्द हो रहा है. पर तुम कोई चिंता न करो. तुम मेरी बहुत ही प्यारी बेटी हो. मैं तुम्हे दर्द देने का तो सोच भी नहीं सकता. बहुत ही आराम से मारूंगा तुम्हारी गांड . ताकि तुम्हे अच्छा भी लगे और मजा भी आये."

मैं बोली "आई लव यू पापा , आप मुझे कितने आराम से चोद रहे हो फिर भी दर्द हो रहा है."

पापा ने कहा "नीलम ! तुम्हारी गांड में पहली बार है इसलिए दर्द हो रहा है. थोड़ी देर बाद बहुत मजा आयेगा आज के बाद सिर्फ मज़े ही मज़े हैं. बस आज थोड़ा सा दर्द सहन कर लो अपने पापा के लिए.."

मैंने पापा को चूमते हुए कहा

"पापा आप के लिए तो मैं जान भी दे सकती हूँ. दर्द तो क्या चीज है,"

पापा खुश हो गए और पापा ने लंड धीरे से बाहर निकाल लिया और फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। अब उनका सुपाड़ा थोड़ा और अन्दर जा चुका था.

पापा ने फिर लंड बाहर निकाल कर फिर हल्के से धक्का लगाया अब लंड 2 इंच घुस चूका था लंड की मोटाई से रसभरी गांड का छेद बहुत फैल कर, पापा के लंड पर कस गया था.

मैं धीरे-धीरे चीख रही थी "सी सी आह आह उई मां उई उई उफ पापा , आराम से करो मैं मर जाऊंगी उई मां आ बहुत दर्द हो रहा है आ आह."

मैं पीछे खिसकने लगी.और बोली- "आआ ह्ह्ह पापा ... आराम से डालो, मुझे दर्द हो रहा है मैं मर जाऊंगी पापा सी सी आ आह आ उई मां आराम से करो'

पापा मेरी चूचियों को सहलाने लगे जिससे मैं वो दर्द को सहन कर लूँ.

पापा के मेरी चूची सहलाने से मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो पापा ने मेरी आंखों में देख कर पूछा

"कैसा लग रहा है?"

मैं हल्के से मुस्कुरा दी बोली "हाय पापा बहुत ही अच्छा लग रहा है. आई लव यू, बस आप आराम से करो मुझे बहुत दर्द हो रहा है."

पापा ने मुस्कुराते हुए पूछा "नीलम ! अब और अंदर डालूं?"

मैंने शरमाते हुए हाँ में गर्दन हिलाई और मुस्कुरा कर पापा को चूमने लगी.

फिर पापा ने धीरे से अंदर की तरफ दबाया तो लण्ड लगभग दो इंच और अंदर घुस गया।

मैं जोर से चीखी "सी सी आह आह उई मां उई उई उफ पापा । आराम से करो मुझे बहुत दर्द हो रहा है."

पापा तो अनुभवी जानते थे कि मैं पहली बार उनका मोटा लण्ड ले रही हूँ तो चाहे वो कितनी भी कोशिश करें दर्द तो होना ही है.

इसलिए पापा ने मेरे होंठों पर अपने हाथ को रखा और मेरे मुंह को बंद करते हुए एक जोर का धक्का मारा। धक्का इतना जोरदार था कि पापा का लौड़ा आधा अंदर घुस गया. मेरी तो चीख निकल गयी. मेरी चीख इतनी तेज थी कि यदि पापा ने मेरे मुंह को बंद न किया होता तो शायद पूरी गली में भी सोये लोगों की भी नींद खुल जाती और वो मुझे बचाने दौड़े चले आते।

मैं रोती रही और मेरे आंसू बहते रहे. पापा मेरे आंसुओं को प्यार से चूमते और चाटते रहे.

थोड़ी देर बाद पापा ने पुछा

"नीलम ! बेटी , कुछ दर्द कम हुआ क्या? आई लव यू बेटी , थोड़ा सा बर्दास्त करो तभी तुमको मजा आएगा।"

मैं सिसकते हुए बोली "आहहह.. आ ह ह् आऊ.. आ ...आऊच सी ....सी.. पापा बहुत दर्द हो रहा है, मेरी गांड फट जायेगी, मैं मर जाऊंगी प्लीज़ रुक कर करो।

पापा रुक कर एक हाथ से निप्पल मसलने लगे जिससे मुझे थोड़ा सा आराम आया. मेरी गांड में पानी निकलने लगा जिससे चिकनाहट बढ़ गई 1 मिनट बाद पापा ने मेरी आंखों में देखा और धीरे से कहा

"बेटी! कैसा लग रहा है?"

मैं मुस्कुराते हुए बोली

"पापा आई लव यू,आई लव यू पापा पर आपने तो मेरी जान ही निकाल दी, पर अब दर्द कम है और हल्की सी गुदगुदी हो रही है."

पापा ने पूछा "अब और करूं?"

मैं बोली "नहीं पापा इतना ही रहने दो. आज इतना ही ठीक है. अगली बार चाहे पूरा अंदर कर लेना। वैसे पापा अभी कितना अंदर है? "

पापा कहा

"खुद ही हाथ लगा कर देख लो."

मैंने हाथ लगा कर देखा और बोला कि अभी तो केवल 5 इंच घुसा है अभी 4 इंच बाहर है.

तभी पापा ने मेरी चूचियाँ सेहलानी शुरू कर दी. अब दो ही मिनट में मेरा दर्द ख़तम हो मैं धीरे धीरे सिसकारियां मारने लगी.

अनुभवी पापा समझ गए की अब मौका है. उन्होंने साइड में पड़ी मेरी पैंटी उठा कर मेरे मुंह पर रख दी और जब समझ पाती, उन्होंने अपने चूतड़ों को कस कर अपनी पूरी ताकत लगा कर शायद अपने जीवन का सबसे तगड़ा धक्का मारा।

मेरी गांड बेचारी तो उस धक्के को सहन नहीं कर पायी और उसने लौड़े को रास्ता दे दिया. पापा का लण्ड अपने रस्ते की सारी रुकावटों को तोड़ता हुआ जड़ तक अंदर घुस गया. पूरा लौड़ा मेरी गांड में घुस गया और पापा की जांघें मेरे चूतड़ों से आ कर मिल गयी जैसे दो प्रेमी आपस में गले मिल रहे हों.

मेरे फिर से चीख निकल गयी और इतना दर्द हुआ कि मैं बता नहीं सकती.

मैंने अपने नाखून पापा की नंगी पीठ में गड़ा दिए और दर्द के मारे इतनी जोर से उनकी पीठ में नाखून मारे कि पापा की पीठ में खून निकल आया.

मैंने अपने मुंह में भरी अपनी पैंटी को निकाल फेंका और रोने लगी. मैं चिल्लाते हुए बोल रही थी.

"ओह पापा ! मैं मर गयी. पापा चुद गयी आपकी नीलम . फट गयी मेरी गांड , चीथड़े चीथड़े हो गयी है. अरे माँ कोई तो बचा लो मुझे, फाड् दी पापा ने अपनी बेटी की नाजुक सी गांड। घुसा दिया पापा ने घोड़े जैसा लण्ड मेरी कमसिन गांड में. हाय मैं क्या करूँ, बचा लो कोई मुझे, पापा निकाल लो अपना लौड़ा, मुझे नहीं चुदवाना आपसे। "

रोते रोते मेरी आँखें आंसू बहा रही थी और मैं पापा को लौड़ा निकालने की बिनती कर रही थी. पर आज पहली बार पापा मेरी मुश्किल से बेखबर लग रहे थे. उनपे तो मेरे आंसुओ या मेरे रोने का जैसे कोई असर ही नहीं हो रहा था.

पापा काफी देर ऐसे ही मेरी पीठ के ऊपर लेटे रहे और मैं रोती रही. पापा का लण्ड उसी तरह पूरा मेरी गांड में घुसा रहा.

पापा मुझे प्यार से बोले

"नीलम बेटी! सॉरी कि तुम्हे इतना दर्द हुआ. पर जितना दर्द होना था हो चूका. मेरा लौड़ा तुम्हारी गांड की लिए बड़ा है तो जब भी पहली बार अंदर जाता, तो दर्द तो होना ही था. इसलिए मैंने आज पूरा डाल ही दिया,अपने पापा को माफ़ कर दो. हाथ लगा कर देख लो सारा लौड़ा चला गया है. तुम्हारी गांड ने पूरा ले लिया है अंदर. बस अब मजे ही मजे हैं. "

मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर चेक किया, पापा का पूरा लौड़ा मेरी प्यारी गांड को पूरा फैला कर घुसा हुआ था. और पापा के दोनों टट्टे (बॉल्स) मेरी गांड से ऐसे चिपके पड़े थे जैसे फेविकोल से चिपका दिए गए हों.

मैं भी कोई पहली बार तो चुदा नहीं रही थी, तो जानती थी की काम हो गया है. मेरी इतने दिनों की तपस्या सफल हो गयी है. भगवान् ने मुझे पापा के लण्ड का प्रशाद दे दिया है. वो हो गया है जिस के लिए मैं (और पापा भी) कब से तड़प रहे थे और कोशिश कर रहे थे. और आखिर मैं अपने पापा से गांड चुदवाने में कामयाब हो ही गयी थी.

धीरे धीरे मेरा रोना कम हो गया. पापा जान रहे थे कि मेरा दर्द थोड़ा काबू में आ रहा है.

अब पापा ने थोड़ा लण्ड बाहर खींच कर दोबारा डालना चाहा पर मेरी गांड तो दर्द के कारण सूख गयी थी.

पापा ने लौड़ा बाहर कोशिश करी तो मेरी गांड पापा के लण्ड से इस तरह चिपक गयी थी किं लण्ड के साथ मेरी गांड का मांस भी बाहर को आने लगा.

इससे मुझे फिर दर्द होने लगा और मैंने पापा को कहा

"हाय पापा बाहर नहीं निकालिये. अंदर ही रहने दीजिये। "

पापा मेरी आँखों में देख कर मुस्कुराते बोले

"नीलम ! तुम भी अजीब हो. अभी रो रो कर चिल्ला रही थी कि पापा बाहर निकाल लो अब निकाल रहा हूँ तो निकालने नहीं दे रही हो। "

मैं भी शरारत से मुस्कुराते बोली

"पापा ! मेरी मर्जी है. मैं चाहे निकालने को बोलू या अंदर डालने को. आप को क्या? मेरे घर में पहली बार यह मेहमान आया है. तो इतनी जल्दी क्या है. थोड़ी देर तो इसे अंदर रहने दो. "

पापा भी हंस पड़े.

थोड़ी देर पापा ऐसे ही मेरी पीठ पर पड़े रहे और मेरी छातियां चूसते रहे. अब मेरा दर्द काम हो गया था. मुम्मे चूसे जाने और दर्द ख़त्म हो जाने से मेरी गांड में फिर से गीलापन आ गया था. और मेरा मन कर रहा था कि अब पापा गांड की चुदाई शुरू कर दें. पर पापा थे की जैसे चुदाई भूल ही गए थे और ऐसे अपना लण्ड डालें पड़े थे जैसे उनका अपना लौड़ा नहीं बल्कि किसी और का लौड़ा उनकी बेटी की गांड में हो.

मैं परेशान हो रही थी. जल्दी से चुदाई करवाना चाहती थी. मैंने पापा को कहा

"पापा ! बस भी कीजिये, अब कुछ करो ना, मैं मरी जा रही हूँ. अब रहा नहीं जाता. अपना काम चालू करो."

पापा समझ रहे थे की चुदाई का समय आ गया है पर मुझे छेड़ते हुए बोले

"क्या करूँ बेटी ? कुछ बताओगी तो ही कुछ करूंगा ना."

अब मैं एक बहु कैसे अपने पापा को कहती कि पापा अपनी बेटी की गांड मारनी शुरू कर दो. आखिर वो मेरे पापा थे.

मैंने अपनी गांड ऊपर को धक्का देते हुए पापा को इशारा किया, पर पापा छेड़खानी के मूड में थे तो उसी तरह पड़े रहे और बोले

"नीलम ! क्या चाहती हो. मुंह से बोलो ना, मैं समझा नहीं. "

अब आखिर मैं बेशरम हो कर, पर आँखें मूँद कर बोल ही पड़ी

"पापा ! बहुत हो गया, अब और मत सताओ, बस जल्दी लण्ड को अंदर बाहर करना शुरू कर दो. चोद दो अपनी बेटी को पापा , अब रहा नहीं जा रहा. जल्दी और जोर से गांड मारो अपनी नीलम की ."

पापा मुस्कुरा पड़े और फिर मुझे छेड़ा

"नीलम ! अभी तो तुम कह रही थी कि मेरा मेहमान तुम्हारे अंदर आया है. तो बाहर न निकालो, अब अंदर बाहर करने को कह रही हो. "

मैं भी आँखें खोल कर पापा को प्यार से छेड़ते हुए बोली

"मेरा शरीर है और मेरा घर है. मेरी अपनी गांड है मैं मेहमान को अंदर ही रखूँ या अंदर बाहर करुँ, आप को क्या? मेरी मर्जी है, मेहमान ने अंदर काफी देर आराम कर लिया है अब उसे कहो कि कुछ काम शुरू करे। "

पापा भी मुस्कुरा पड़े.

पापा ने भी अब देर करना उचित ना समझा और थोड़ा सा अपना लण्ड खींच कर फिर से अंदर धकेल दिया.

मुझे हल्का सा दर्द हुआ, मैंने अपनी आँखें बंद कर ली, पापा मेरी हालत जानते थे, पर उन्होंने रुका नहीं और लगभग 2 इंच लौड़ा खींच कर जोर से दोबारा अंदर धकेल दिया. फिर लगभग 3 इंच लण्ड निकल कर डाला, मैं अपने दांत भींचे चुप चाप लेती रही. पापा मेरी तरफ देखते हुए आँख के इशारे से हे पूछे क्या ठीक सो हो रहा है? और मैंने गर्दन ही हिला कर उन्हें चालू रहने का इशारा किया.

पापा हर बार पिछली बार से थोड़ा सा अधिक लण्ड बाहर खींचते और जोर से अंदर ठोक देते, इस तरह करते करते थोड़ी ही देर में मेरी गांड में उनका पूरा लौड़ा आराम से अंदर बाहर हो रहा था. अब पापा अपने लण्ड के टोपे तक लौड़े को बाहर निकाल लेते और फिर एक जोरदार धक्के से अंदर धकेल देते.

अब मेरी गांड में बहुत कम दर्द हो रहा था. जितना भी दर्द था वो सहन करने योग्य था, तो अब में भी आराम से चुदाई के मजे ले रही थी.

पापा पूरी तेजी से चोदने लगे।

उनका लंड रेल के पिस्टन की तरह 100 की स्पीड से मेरी गांड के अंदर बाहर हो रहा. था. मुझे बहुत ही मजा आ रहा था.

मैं आनंद में सिसकियाँ ले रही थी और चिल्ला रही थी,

"पापा ! और जोर से करो, चोद दो पापा अपनी बेटी को, जोर जोर से चोदो अपनी नीलम की गांड को पापा . फाड़ दो मेरी गांड को। बहुत प्यासी है यह पापा , इस निगोड़ी ने मुझे बहुत परेशान किया है, टुकड़े टुकड़े कर दो मेरी गांड के आज। आह आह आह पापा , चोद लो अपनी बेटी की प्यारी सी मुनिया. "

मुझे पता नहीं चल रह था की आनंद में मैं क्या क्या बोल रही थी. मेरे दिमाग में तो बस पापा से चुदाई ही चल रही थी.

पापा अपने हाथ से मम्मो को मसलने लगे। उन के ऐसा करने से मेरे जिस्म में मस्ती सी फैलने लगी। इधर मेरी गांड अंदर ही अंदर उनके लंड को ऐसा दबा रही थी जैसे उसका रस निकाल लेना चाहती हो। सच में अगर कोई लड़का, अनुभवहीन आदमी चुदाई कर रहा होता तो मेरी गांड की गर्मी से वो अब तक झड चुका होता।
 
लेकिन ये पापा थे जो मेरी गांड की गर्मी को बर्दाश्त करते हुए अब तक टिके हुए थे। मेरी गांड से गरम गरम पानी निकल केर नीचे चादर को गीला कर रहा था।

मैं अपनी कमर हिलाने लगी। मेरे मूह से कराह निकल रही थी । मुझे दर्द तो हो रहा था लेकिन इतना नहीं कि मैं बर्दाश्त न कर सकूं।

एक बार फिर पापा मेरे मम्मो का रस निचोड़ने लगे। मुझे काफी राहत मिल रही थी। कुछ देर इंतजार के बाद उन्हें ने हल्के हल्के धक्के मारने शुरू कर दिए।

वो किसी भी लड़की को खुश करने में माहिर थे। एक मंझा हुआ खिलारी, जो गांड मरने का लुत्फ ना सिर्फ खुद उठा रहा था बल्कि मुझे भी दे रहा था।

फिर पापा ने अपना लौड़ा मेरी गांड से निकला और मुझे बिस्तर पर पीठ के बल लिटा दिया , फिर उन्होंने मेरी टांगें उठा कर अपने कन्धों पर रख ली और झट से अपना लौड़ा मेरी गांड के छेड़ पर रख कर एक ही धक्के से अंदर कर दिया।

अब पापा आहिस्ता-आहिस्ता चुदाई करते हुए मेरे जिस्म को चूम रहे थे, मैं भी आनंद ले रही थी, आहें भर रही थी।

मैंने अपने पापा को अपनी बाँहों में कस लिया और उन के पूरे चेहरे पर चुम्मो की बरसात कर दी। इस सारे वक्त में मेरी आंखें बंद थीं।

पापा :- मजा आया बेटी?

मैं:- (सर हां मुझे हिला केर) ह्ह्ह्म्म्म्म....

पापा :- तो आंखें खोल के बोलो ना...

मैं:- (ना मुझे सर हिला केर) उउन्नन्नहहुउउउ....

पापा :- अब मैं इतना बुरा हूँ? कि तुम मुझे देखती भी नहीं.

मैं:- (फोरन आंखें खोल केर) खबरदार! ख़ुद को आइन्दा बुराँ नहीं कहना आप ने..आप तो मेरे सब से प्यारे पापा हो.!

पापा :- मुझे तो ऐसा ही लगा, क्यू कि के तुम ने अब तक अपनी आंखें बंद रखी थीं।

मैं:- अगर आप मुझे अच्छा ना लगे होते तो आप को अपना जिस्म जो मेरा सब से ज्यादा कीमती चीज है नहीं देती। आज के बाद ये बात अपने ज़ेहन में ना लाइयेगा.

पापा :- तो आँखों से आँखें मिला के बोलो ना अपने पापा को कि " चोदो ना मेरे पापा मेरी गांड को," ताकि पापा को भी मजा आये।.

मैं:- मुझे शर्म आती है.

पापा :- किस से? मुझसे?

मैं:- हां!

पापा :- मुझसे कैसी शर्म। अब तो मैं तुम्हारी गांड में अपना पूरा लंड डाल कर चुदाई कर रहा हूँ। और तुमने तो खुद अपना हाथ से चेक करके देख लिया है कि सारा लौड़ा अंदर जा चूका है. तो अभी भी शर्म बाकि है क्या?.

मैं कुछ नहीं बोली.

पापा :- अच्छा! अब मुझे समझ. जब तक मैं तुम्हारी गांड में अपना लंड पूरा डाल के धक्के नहीं मारता रहता, तब तक तुम्हारी शर्म पूरी तरह खत्म नहीं हो सकती।

मैं:- अब ऐसी बात नहीं है.

पापा :- तो क्या पूरा लंड ना डालूँ?

मैं:- मैने ये भी तो नहीं कहा.

पापा :- तो क्या करूँ न? बोलो....!

मैं:- (उन के कान में) मेरी गांड में अपना सारा तो डाल दिया है और अब और भी जो बाकि रह गया है वो भी कर लो कहीं कल आप यह ना कह सको कहो कि कुछ कसर रह गई। कि मेरी नीलम ने मुझे इस ढंग से गांड मारने से मना कर दिया. जो करना है दिल खोल के कर लो।

मुझे खुद को पता नहीं कि ये लफ्ज कैसे मेरे मुंह से निकल गए शायद गांड मारने का ही नतीजा था. । लेकिन इन का नतीज़ा ये हुआ के पापा ज़ोर ओ शोर से मेरी गांड मारने करने लगे। उन्होंने मेरी दोनों टांगें हवा में उठा के पूरी तरह से खोल दीया और अपना लंड मेरी गांड में अंदर बाहर होता देखने लगे ।

उन की इस तरह चुदाई से मैं दो बार झर चुकी थी। लेकिन इधर वो मजा से मेरी गांड मार रहे थे । उन के तेज़ धक्को से मेरे मम्मे हिल रहे थे। कभी वो उनसे खेलते तो कभी मेरी कमर पकड़ कर तेज़ झटके मारते।

इतनी देर और इतनी तेज चुदाई से तो मेरी गांड में जलन होने लगी। कुछ देर मैंने बर्दाश्त किया। लेकिन फिर मैं उनको रोकने की कोशिश करने लगी। तब उन्हें ने अपने धक्के रोके या मुझसे वजह पूछी। तो मैने उनको बता दिया.

पापा :- बस इतनी सी बात? मुझे पहले बता देना था. इसका तो आसान सा इलाज है मेरे पास।

मैं:- वो क्या?

पापा :- बस देखती जाओ।

ये कह कर पापा ने अपना लंड बाहर निकाल लिया. और अपने लंड के सुपाडे को गांड के छेड़ पर रगड़ने लगे. मेरी गांड को थोड़ा आराम मिलने लगा। कुछ देर पहले तक मेरी गांड टाइट थी, उसका छेद भी छोटा सा था लेकिन अब उसका छेद कुछ बड़ा दिखायी दे रहा था। उसकी वजह थी पापा का मूसल। जिस ने पता नहीं कितने अंदर तक मेरी गांड को खोल दिया था। मैं इन्ही ख्यालो में खोई हुई थी के पापा के लंड से पेशाब की धार निकल कर मेरी गांड पर गिरने लगी। मुझे इस से दर्द होने लगा। जाहिर है जब एक जख्मी गांड पर नमकीन पानी डालेंगे तो क्या होगा ।

मेरी कराह सुनने के बावज़ूद पापा नहीं रुके। बल्कि अब तो उन्होंने अपने लंड का सुपाड़ा मेरी गांड में फिट कर दिया और पेशाब करने लगे । मुझे बहुत अजीब लग रहा था. गरम गरम पेशाब मुझे अपने अंदर तक महसूस हो रहा था। कुछ ही देर में मेरी गांड पूरी तरह उन के पेशाब से भर गई। मेरे अंदर तक कुछ देर दर्द हो रहा था, लेकिन फिर हमें दर्द के ख़तम होने के बाद मुझे मजा आया।

मेने अपनी टांगें पापा की कमर के गिर्द लपेट दी और उनको अपनी तरफ खींचने लगी। उनके लिए ये सिग्नल था कि वो दोबारा से मेरी चुदाई करें। और उन्होंने भी ऐसा ही किया. वो ताबड़ तोड़ धक्के लगा कर मेरी गांड को खोलने लगे. जब पापा अपना लौड़ा बाहर को निकालते तो मेरी गांड से पेशाब भी बाहर निकलने लगता और जब पापा फिर धक्का मार कर लौड़ा अंदर डालते तो पेशाब रुक जाता है। ये एक अजीब सी सनसनी थी, जिस को लफ़्ज़ों में नहीं बताया जा सकता। सिर्फ महसस ही कर सकते हैं.. मस्ती में एक बार फिर मेरी आंखें बंद हो गयी ।

मेरी आंखें तो मजे से बंद थी और मैं नीम बेहोसी की हालत में थी,

फिर पापा ने लण्ड बाहर निकाल लिया और मुझे खड़ा कर दिया और मेरी दोनों टांगों के नीचे से हाथ डाल कर मुझे अपनी गोद में उठा लिया।

और पापा नीचे से ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगे। इस पोजीशन में उन के धक्के का सब से ज्यादा असर मेरी गांड पर हो रहा था।

उन के धक्के की वजह से मेरी गांड बार बार पानी छोड़ रही थी। आप यकीन करें या ना करें, अगले 3 मिनट में झरने की कगार पर पहुँच गई।

उन की चुदाई से मेरी टांगें कांप रही थी, मेरा पूरा जिस्म ख़राब था। मैं बेहाल हो के उन की छाती पर गिर गई.

मेरे मुंह से आआह्ह्ह... निकल रही थी । इस पोजीशन में उनका लंड अपनी पूरी जड़ तक मेरी गांड में जा रहा था। वो इसी तरह मुझे उछालते हुए चोद रहे थे और मैं उनके गले में अपने बाज़ू डाले अपनी गांड में अंदर बाहर होते लंड को मजा ले रही थी। मेरी गांड का पानी नीचे बहता हुआ पापा के लंड और उनकी गेंदों को गीला करता हुआ नीचे चादर पर गिर रहा था।

मेरे शरीर में अब अजीब ही हलचल होने लगी थी. मैं समझ गयी की मेरा काम होने वाला है.

मैंने पापा के गले में डाली हुई अपनी बाहें कस ली और पापा के कान में हौले से कहा

"पापा ! मुझे कुछ हो रहा है. मैं मर जाउंगी कुछ कीजिये ना. मुझे कुछ अलग सा लग रहा है. और साथ ही अपनी स्पीड भी तेज करें। "

पापा अनुभवी थे तो समझ गए कि मेरा होने वाला ही है. खुद पापा का भी स्खलन नजदीक ही था. तो पापा ने फिर से मुझे बेड पर लिटा दिया पर लिटाते समय भी उन्होंने ध्यान रखा कि उनका लौड़ा मेरी गांड से निकल न जाये.

फिर पापा ने जो स्पीड पकड़ी कि मैं आप सब को क्या बताऊं. इतनी जोर जोर से पापा ने चोदना शुरू किया कि मेरी तो अंदर तक सारी नसें ही हिलने लगी.

मेरे मुंह से आह आह की आवाजें अपने आप निकल रही थी और मैं चिल्ला रही थी

"पापा ! तेज और तेज. बस मैं गयी अरे मेरे पापा में मर गयी. पापा गांड फट गयी आपकी बेटी की अपने पापा से. पापा अपना माल डाल दो अपनी नीलम की गांड के अंदर."

मैं बेख्याली में ना जाने क्या क्या बोल रही थी.

अचानक मैंने अपनी टाँगें अपने पापा की पीठ पर जोर से कस ली और चिल्लाई

"पापा ! मैं गयी। मेरा हो गया पापा । हे भगवान् हो गया मेरा."

और इसके साथ ही मेरी गांड ने फूलना पिचकना शुरू कर दिया और इधर मेरी चूत ने भी अपना पवित्र पानी पापा के लण्ड पर छोड़ना शुरू कर दिया.

पापा के साथ यह मेरी गांड मारने की पहली चुदाई थी तो मेरा इतना माल निकला कि मैं जैसे बेहोश ही हो गयी. मुझे कुछ भी होश न रहा बस अपने पापा की बाँहों में झड़ती रही.

उधर पापा के लण्ड पर जब मेरा पानी लगा तो पापा के भी मुंह से एक चीख जैसी निकली और उन्होंने फटाफट 5 - 6 धक्के मार कर अपना लौड़ा मेरी गांड में अंदर तक घुसेड़ दिया. और पापा का लौड़ा खुद ब खुद फूलने लगा और फिर उसके छेद से पापा के वीर्य की पिचकारियां छूटने लगी. पापा ने पहली बार अपनी बेटी चोदी थी तो उनका इतना वीर्य निकला कि मेरी गांड भर गयी और इतना मोटा लौड़ा घुसा होने पर भी उनका गाढ़ा गाढ़ा माल मेरी गांड से बाहर आने लगा.

पापा भी निढाल हो कर मेरे ऊपर ही गिर गए. हम दोनों अपनी पहली चुदाई से इतना थक गए थे कि काफी देर तक हम दोनों पापा बहु एक दुसरे की बाँहों में लेटे रहे.

कुछ देर के बाद पापा उठे और मुझे भी उठाया. हम दोनों बहुत खुश थे जैसे जीवन में कुबेर का खजाना मिल गया हो।

पापा ने मुझे पूछा "नीलम ! मजा आया?"

मैं:- "पापा बहुत मजा आया लेकिन अभी भी गांड में बहुत दर्द हो रहा है."

पापा ने बोला "कोई बात नहीं. अभी तुम्हे दर्द की गोली ले दूंगा. सब ठीक हो जायेगा. पहली बार इतने हलब्बी लण्ड से चुदी हो ना तो दर्द तो होगा ही. अगली बार बहुत कम दर्द होगा और उसके बाद तो मजे ही मजे हैं. तुम्हे मेरे लौड़े की आदत जो हो जाएगी. "

फिर पापा ने एक बार फिर से मुझे चूमा और एक आखिरी बार मुझे घुमा दिया और मेरी गांड को पीछे से चाटा।

अब चुदाई तो हो चुकी थी. अब सब हो जाने के बाद मुझे पापा से शर्म जैसी आ रही थी.

चाहे हमने कुछ भी कर लिया था पर आखिर थे तो वो मेरे पापा ही,, शायद पापा का भी यही हालत थी,

पापा मेरी चुदाई एक बार और करना चाहते थे पर मेरी गांड इतनी दर्द कर रही थी कि मेरी इच्छा होते हुए भी हिम्मत नहीं हो रही थी.

मेरे पापा अनुभवी आदमी थे. उन्होंने भी दुबारा चोदने का नहीं कहा. और मुझे चूम कर बाथरूम में चले गए.

हम दोनों को मालूम जो था कि अब हम पापा बेटी में यह जो प्यार का रिश्ता बन गया है यह चलता रहेगा.

मैं भी पापा की चुदाई और प्यार के बारे में सोचती हुई लेट गयी.

थोड़ी देर में हमें मम्मी और नानी को लेने सत्संग में जाना था. इधर हम बाप बेटी ने तो अपना पूरा सत्संग कर लिया था.

फिर हम दोनों मम्मी और नानी को लेने चले गए.

घर में किसी को भी हमारे बीच हुए सम्भन्ध का पता नहीं चला।

इस तरह मेरा अपने पापा से सम्बन्ध बन गया है जो आज तक चल रहा है.

The end
 
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