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बिनाश दूत बिकास-विकास की वापसी complete

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"घबराओ मत पिताजी!” टुम्बकटू अजीब-से स्वर में बोल----" उसका प्रबंध भी हम करके आए हैं यानी कि हमारे इस सुंदर-सलोने जिस्म पर रबर का लिबास है !"

कांप उठा सिंगही ।।। कितना खतरनाक है ये कार्टून ।।

“वेरी गुड़ अक्सा" बिकास चहका----“तुमने तो वास्तव में कमाल कर दिया । अब जरा जल्दी से दादाजान को मुर्गाजान वना दो । मै जरा इस बेरहम को बता दूं जिंदगी क्या होती है?” उसका संकेत तुगलामा की तरफ़ था ।

"क्यो वे बूढे?” अचानक टुम्बकटू सिगंही के सिर पर चपंत जमाता हुअ बोला-----" बच्चा ठीक कह रहा है क्या?”

सिगंही का भयानक चेहृरा क्रोध से लाल हौ गया । वह्न कभी ऐसी विषम परिस्थिति में नहीं फ़सा था मगर उसकी समझ, में भी नहीं आ रहा था कि आखिर वह इस कार्टून का करे क्या?

कुछ सोचते हुए उसने वेहद फुर्ती के साथ कक्ष के द्धार की ओर जंप लगाई लेकिन तभी टुम्बकटू कह्र उठा--“अबे प्यारे धर्म बाप वूढ़ऊ तो साला दुमं दबाकर भागता है ।”

लेकिन विकास भला अब कहां सुनता? उसे तो वह दृश्य याद आ गया, जब तुगलामा ने उसके जिस्म पर हंटर बरसाए थे ।।

बस -वह भी तुगलामा की तरफ़ बढा ।

सड़ाक .सड़ाक .सड़ाकं ।

दनादन हंटर बरसाए चला गया विकास, जैसे पागल हो गया हो ।

हालाकि इस क्रिया में उसके बदन में पीड़ा की बड़ी तीव्र लहर दौडती थी लेकिन वह बरसता ही चला गया । तुगलामा किसी भैंसे की भांति डकराने लगा ।

इघर बिकास उसके जिस्म से गोश्त नोच रहा था, उधर टुम्बकटू सिगंही से कह रहा था ।

"देखो खूसट मियां, तुम्हारा यार कैसा डकरा रहा है!" सिंगहीँ का सारा शरीर क्रोध से कांप रहा था ।।

"सिगंही से टकराकर पछताओगे टुम्बकटू ।" सिगंही गुर्राया ।।

“तुमसे पहले भी कई बार कह का चुका हूं बड़े मियां कि अब तुम्हारे बस का यह रोग नहीं रह गया ।

टुम्बकटू आराम से अपनी अजीब-सी सिगरेट सुलगाता हुआ बोला…"अब तुम्हें संन्यास ले लेना चाहिए।"

उसी पल सिगंही ने सोचा कि टुम्बकटू असावधान है, विधुत गती से उसने टुम्बकटू पर जंप लगा दी । छलावे जैसी फुर्ती साथ टुम्बकटू ने एक घूंसा सिगंही के जबड़े पर मारा, लेकिन इस बार सिगंही भी पलटकर गिरा नहीं बल्कि उसने झट टुम्बकटू के गन्ने जैसै जिस्म को अपनी बांहों में कस लिया ।

सिगंही.......सिंगही हैं, जोंक कहा जाता है ।

विश्व का कोई भी व्यक्ति सिगंही की इस जोंक वालीं पकड़ से मुक्त नहीं हो सकता । टुम्बकटू का गन्ने जैसा जिस्म सिगंही की उसीं पकढ़ में आ चुका था ।

टुम्बकटू ने मचलनां चाहा मगर सिगंही की पकड़ शिकंजे की भांति सख्त थी । टुम्बकटू को लगा कि उसकी छोटी-छोटी हड्डियां अब कड़कड़ की आवाज के साथ टूट जाएंगी । सिगंही की पकड़ का कसाव बढता ही गया ।

अब टुम्बकटू को महसूस हुआ कि सिगंही की शारीरिक शक्ति गज़ब की हैं । उसने हजारों प्रयास किए किंतु सिगंही की पकड़ अडिग चट्टान वनी हुई थी । टुम्बकटू की श्वास क्रिया रुकने लगी ।

उसे अहसास हुआ कि अगर कुछ पल और ऐसी पकड़ रही तो यह खतरनाक व्यक्ति उसका अत कर देगा ।

ये विचार दिमाग में आते ही टुम्बकटू ने अजीब क्रिया शुरू कर दी । उसका जिस्म फूलता चला गया-किसी शेषनाग की भाँति, जैसे कोई शेषनाग अपना फ़न फूला ले ।। जैसे टुम्बकटू के जिस्म में पंप से हवा भरी जा रही हो । उसका जिस्म फूलता ही चला गया, फूलता

ही चला गया । गन्ने जैसा टुम्बकटू अब अच्छा हैल्पी आदमी नजर आने लगा ।

सिगंही टुम्बकटू की हरकत पर चौका अवश्य था ।ज्यों ज्यों टुम्बकटू का जिस्म फूलता जा रहा था, त्यों-त्यौ उसकी पकड़ सखा होती जा रहीं थी । हाथो का दायरा बढता जा रहा था ।।

तब, जबकि टुम्बकटू का जिस्म फूलकर काफी मोटा हो क्या किंतु सिगंही की पकड से किसी प्रकार का कोई अंतर नहीं आया । एकदम जैसै किसी फुटबाल की हवा निकाल दी गई हो, ऐक ही झटके से आश्चर्यजनक ढंग से टुम्बकटू का जिस्म पिचककर साधारण अवस्था में आ गया ।

बस-----यहीं सिगंही मात खा गया ।

उसकी पकड़ यानी हाथों का दायरा टुम्बकटू के फैले हुए जिस्म के बराबर हो गया था जबकि टुम्बकटू ने एकदम अपना जिस्म पतला कर लिया । हाथो का दायरा एक पल के लिए टुम्बकटू के फूले हुए शरीर के बराबर रह गया । इसी एक पल में टुम्बकटू सिंगही के दायरे से गायब हो गया ।

" क्यों वे खूसट सारा दम निकालना चाहता… था ?" टुम्बकटू सिगंही पर हावी हो गया ।

उधर विकास ने मारते-मारते तुंगलामा की चमडी उघेड़ दी-पंद्रह मिनट बाद ।

तुंगलामा तो बेहोश फ़र्श पर पड़ा था । उसके जिस्म का सारा गोश्त उधड़ा हुआ था ।

सिंगही को टुम्बकटू ने कसकर रेशर्म की डोरी से बांध दिया था । वैसे भी बहोश पड़ा था ।

विकास ने टुम्बकटू की तरफ देखा और बोला-" जिओ लंबू अकल !! आज तुम ने सिद्ध कर दिया किं तुम इन सव हरामियों के सरदार हो ।"

“बचा लिया धर्म बाप, वरना चटनी वन जाती ।"

"लेकिन आप अचानक आ कैसे गए अंकल?"

"अवे हम हर जगह अचानक ही आते हैं ।” टुम्बकटू-एक, पैर पर खडा होता हुआ बोला…"तेरे आने के बाद अपन तो प्यारे

निंद्रारानी से मिलने चले गए थे । पता नहीँ, कितने, समय बाद तुम्हारे सेवक जाम्बू ने जगाया ।"

" लेकिन......!"

" लेकिन की पूंछ बीच में मत अड़ा वरना रेल की पटरी की तरह की लम्बी हो जाएगी !"

टुम्बकटू तपाक से बोला…"मैं जानता हूं तू ये पूछेगा कि उन्होंने हमें जगाया कैसे? तो प्यारे बापू जान बात यू है कि जागने पर तुम्हारे जाम्बू ने हमेँ बताया कि वह पहले भी हमे पूरे ग्रुप के साथ जगार्ने की चेष्टा कर चुका था, लेकिन हम जागे नहीं, जगा वह हमें इसलिए रहा था कि तुम्हारा ये बंदर की औलाद गायब हो गया था......

..........जब वहुत देर तक यह वापस-नहीं लौटा तो उन्होंने मुझे दुबारा जगाने की कोशिश की । इस चेष्टा मैं अचानक जाम्बू का हाथ मेरे स्विच पर लग गया । अगले ही पल मेरा चपत उसके कान पर पड़ा यानी कि हमं जग गए । तब उन्होंने बताया कि ये साला बंदर गायब है, हम फौरन समझ गए कि कहा चला गया होगा? उन्होंने हमें यह भी बताया के इस बूढे खूसट ने तुम्हें , मंगल सम्राटं बना दिया है । सो हम यहां के लिए तैयार हो गए । तुम्हारा बो साला जाम्बू भी हमारे साथ आने के लिए बच्चों की तरह जिद कर रहा था । बडी मुश्किल से समझाकर हम यहाँ आए । शेष समाचार कल इसी समय विविध भारती से सुनाए जाएंगे ।" टुम्बकटू के अंतिम शब्दों को सुनकर विकास के होंठो पर मुस्कान दौड गई ।

तभी धनुषटंकांर के जिस्म मेँ हरकत हुइ ।

कदाचित उसकी चेतना वापस लौट रही थी । अगले कुछ ही पलो पश्चात धनुषंटंकार _ उठकर खडा हो गया । ठीक इस प्रकार-जैसे उसे पिछली घटनाएं याद्र आ गई हों और लड़ने के लिए तैयार हो ।।

उसके खड़े होते ही टुम्बकटू बोला----" बस....बस बंदंर वेटे, धमा-चौकडी बंद हो गई ।”

धनुषटंकार ने कक्ष का जायजा लिया । स्थिति देखते ही बह समझ गया कि सफलता मिल गई है । वह फुर्ती के साथ उछला झट अपने पैर से जूता निकालकर, दो-दो जूते खीचकर सिगंही और तुंगलामा के बेहोश जिस्म में मारकर अपना क्रोध जाहिर किया ।

टुम्बकटू और विकास मुस्कराकर रह गए ।

तभी धनुषटंकार ने टुम्बकटू के दो तीन चुंबन लिए ।
 
विकास अब'कुछ काम की बात सोच रहा था ।

जिन चार सैनिको का कार्यकम इस कक्ष तक पहुचते समय बंदर धनुषटंकांर ने किया था, उनकी लाशो को धधकती हुई इस्पात की भट्टियों के हवाले कर दिया गया । यह सारा कार्यं इतनी सतर्कता के साथ किया गया था कि तीनो शैतानों के अतिरिक्त किसी को भनक तक न पड्री थी । कुछ देर तक कक्ष मैं मानव गोश्त जलने की दुर्गघ फैली ऱही ।। उसके बाद सब कुछ उन धधकती भट्ठियों में जलकर खाक हो गया ।

सिंगहीं को भली प्रकार से बाँधकर एक ऐसे गुप्त तहखाने में कैद कर लिया गया जिसकी जानकारी केवल मगंल-सम्राट अथवा उसके बिशेष सहयोगियों को थी ।

यह तहखाना सिगंही ने बिकास को पहले ही दिखा दिया था ।

वास्तव में अव विकासं मंगल सम्राट बना ।

तुंगलामा ने एक विशेष मरहम की ईजाद की थी, जिसे स्वयं तुंगलामा ने अपने घायल जिस्म और विकास को लगाया ।

तीन दिन मेँ ही सारे जख्म आश्चर्यजनक रूप से समाप्त हो गए ।

जाम्बू और उसके दल को स्वयं टुम्बकटू जाकर पूरी घटना बता गया था ।। उसने कहा था कि पहले विकास को मंगल-सम्राट बनाना सिगंही की साजिश थी, लेकिन उसकी साजिश को विफल करके उन्होंने वास्तव मे विकास को मगंल--सम्राट बना दिया है ।अत उसका दल अब समझे कि मंगल की सत्ता उन्हीं के हाथ में यानी अब उन्हें मंगल-सम्राट के विरुद किसी प्रकार की कोई कार्रवाही करने की आवश्यकता नहीं है ।

जाम्बू को विश्वास दिला दिया गया कि वक्त आने पर सिंगहीँ उसके हवाले कर दिया जाएगा ताकि वह अपने भाई की हत्या का प्रतिशोध ले सकै । जाम्बू चमत्कृत्त था कि इन शैतानों ने मिलकर कितनी जल्दी सिगंही का तख्ता पलट दिया! था । कक्ष नंबर पच्चीस में होने वाली घटनाओं का किसी को पता नहीं चला ।

और इस समय विकास मंगल-सम्राट के रूप में हीरे जडित सिंहासन पर विराजमान था ।

धनुषटंकार उसकी गोद में बैठा ~ दनादन शराब पी रहा था और टुम्बकटू सिंहासन के दवाई और लहरा रहा था । वह अपनी विचित्र सिगरेट का आनंद ले रहा था ।

विकास के सुंदर जिस्म पर हीरे…जबाहृरार्तों से र्जड़ा हुआ चमचमाता लिबास था गोरे मस्तक पर एक मुकुट था ।

उसका दरबार सजा हुआ था । सेवक लोग श्रद्घा के साथ शीश नवाए खड़े थे । उल्टे लोग यानी मंगल निवासियों की टाग हाथों की भाति जुड़कर श्रद्घा से झुक गई थी । सेवक लोग विकास के सौंदर्य से प्रभवित थे ।

"मिस्टर जावेद !" विकास ने प्रभावशाली स्वर में पुकारा ।

"सेवक हाजिर है महामहिम! ” एक उल्टा मानव आगे बढा और श्रद्धा के साथ पैरों को झुकाकर बोला ।

"हमारे दरबार और प्रजा में यह घोषणा कर दी जाए कि उनके भूतपूर्व सम्राट और हमारे दादा यानी सम्राट सिगंही बिज्ञान के एक विशेष अबिष्कार में उलझे हुए है और कुछ दिनो तक

तो वे अपनी प्रयोगशाला में रहकर एकाग्र मन से कार्य करना चाहते है । अत कुछ दिनो के लिए हम लोगों के सामने नहीं आ सकेंगे । उनका कहना हैं कि अगर उनका आविष्कार पूरा हो गया तो मंगल जनता को बेहर्द लाभ होगा !!"

" जैसी आज्ञा महामहिम!" जावेद ने आदर के साथ कहा ।

इस प्रकार के अनेक आदेश जारी करने के बाद विकास सिंहासन से उठा ।

तभी हाॅल में धीमा-धीमा संगीत गूंजने लगा । वहं संगीत सम्राट के दरबार विसर्जन का प्रतीक था । सिंहासन की सीढियां उतरता हुआ विकास नीचे आया । समस्त सेवक आदर साथ खडे थे । विकास ने अपने बॉडीगार्ड के रूप मे टुम्बकटू और धनुष्टंकार को ही चुना था ।।

बिकास किसी सग्राट की भांति ही चाल चल रहा था ।

इस समय वह बारादरी में से गुजर रहा था । संगीत के हल्के-हल्के झनाके हो रहे थे ।

जिधर से सम्राट विकास निकलकर जाता, उधर से सेनिको की एक एड्रियां फैलती, जुड़ती और बज उठती । धनुषटंकार विकास के कधें पर बैठा था । टुम्बकटू उसकै साथ साथ चल रहा था ।

कुछ क्षणोंपरांत विकास अपने कक्ष में प्रविष्ट हो गया । पलक झपकते ही टुम्बकटू ने कक्ष अंदर से बोल्ट किया और दनाक से विकास के सिर पर चपत मारंकर बोला-“क्यों साले धर्म बाप । सम्राट बनकर तो हमारी तरफ देखता भी नहीं ।"

"तमीज से बात करों ।” विकास क्रोध से गुर्राया-" तुम हमारे बॉंडीगार्ड हो।"

" अबे.........!" टुम्बकटू बोला----"साले हम पर गुर्राता है । अभी जाता हू दरबार मे, सबको बताता हूं कि के बूढा कैसा आविष्कार कर रहा है?” कहता हुआ टुम्बकटू द्वार की तरफ़ बढा ।।

लेकिन तभी चौकां ।

उसी पल धनुषटंकार उछलकर उसके सामने आ गया । बह उसे घूड़की दे रहा था । उसे देखकर टुम्बकटू अचानक अपनी अजीब हंसी के साथ हंस पड़ा ।

विकास ने भी कहकहा लगाया ।

धनुषटंकार भी खुशी से उछल उछलकर तालियां बजाने लगा ।।

"इस मौज…मस्ती के बाद अचानक बिकास गंभीर होता चला गया ।

“लंबू अंकल, समय कम है । मेरे विचार से अब काम की बात की जाए।"

"जरूर बच्चे !" टुम्बकटू लहराया ।

“मेरे विचार से अब तो गुरु लोग भी मंगल पर पहुचने वाले होंगे ।"

" बड़ा नेक बिचार है बच्चे !"

"हमैं दो कार्य करने है लंवू अंकल !" विकास धीरे से बोला-" पहला तो स्कीन वाले कमरे से गुरु लोगों की स्थिति देखना दूसरा अमेरिका को मजा चखाने के लिए जल्दी से जल्दी कोई प्रबंध करना ।"

" ठीक बापूजान !” टुम्बकटू बोला ।

धनुषटंकार को जैसे इन बातो से कोई मतलब ही नही था । वह एक तरफ़ बैठा हुआ गटागट शराब पी रहा था ।।

"तो आप दोनों स्कीनों वाले कमरे में पहुच जाएं, मै दूसरा कार्य करता हूं ।” इस प्रकार विकास उन दोनों को काम सौंपकर गुप्त तहखाने मे पहुच गया । तुगलामा और सिगंही क्रो अलग-अलग कमरे र्मे कैंद कर लिया गया था ।

अंदर विकास ने कैदखाने का दरवाजा बंद कर लिया तुगलामा की तरफ घूमा । ,, तुंगलामा कैदखाने की छत पर उल्टा लटका हुआ था ।

उसके समीप पहुँचते पहुँचते विकास के मासूम चेहरे पर -कठोरता उभर आई आंखों मे खून उतर आया । इस समय उसकी आखों के सामने वही दृश्य उभर आया, जंब तुगलामा ने भयानक कहकहे लगाते हुए उस पर हंटर बरसाए थे । इस समय तुंगलामा बेहोश था ।

तहखाने में एक तरफ पानी रखा था-उसके छींटे तुंगलामा के चेहरे पर मारकर विकास ने उसें चेतना दी । उसके होश में आते ही विकास गुर्राया----"तुंग वेटे ! या तो चुपचाप कह दो जो मैं चाहता हू-----वरना आज तुम्हें पता लगेगा कि बेरहमी क्या होती है !”

"तुम क्या चाहते हो?" तुंग ने संयमित स्वर में कहा ।

"विश्व बिनाश का वह फार्मूला, जो तुम सिगंही के लिए ईंज़ाद कर रहे थे।”

"कभी नहीं !" तुंग चीखा । '

लेकिन तभी विकास के भारो वूट की ठोकर उसके चेहरे पर पड्री वह गुर्राया ।।

" जानता हूं चीनी सूझामर कि तू बातो का भूत नहीँ है ।" कहते हुए बिकास ने झट एक ताजा ब्लेड निकल लिया अगले ही पल तुंग के जिस्म पर कपड़े का एक रेशा तक नहीं था । वह एकदम नंगा था-पैदा होने वाले बच्चे की तरह नंगा उल्टा लटका हुआ ।

विकास की आखों से लहू बरस रहा था । …

उसने एक बार पुन: खूनी स्वर में चेतावनी दी कि अगर वह अपनी भलाई चाहता है तो उसे फार्मूले की ईजाद जल्दी से जल्दी करे लेकिन तुग नहीं माना और परिणाम......

वही पुराना मगर भयानक !!

लडका अपनी दरिंदगी पर उतर आया ।।
 
ब्लेड का एक कोना नाभि के पास रखा और सीने तक खींचता ही चला गया । तुंग चीखा-चिल्लाया मगर विकास तो कसाई था । वह कसाई जिस पर बकरे के मिमियाने का कोई असर नहीं पडता ।।

तुगलामा की खाल किसी कपड़े की भांति फटती चली गई । खून एकदम बह निकला परंतु विकास ने तुरंत ब्लेड का कोना जिस्म के अन्य भाग पर रखा और खीचता चला गर्या । तुंगलंमा पुन चीखा, परंतु निरर्थक !

इस प्रकार बिकास ने तुंग के जिस्म की खाल जगह-जगह से कपडे की भातिं फ़ाड डालीं । सारा हाथ और ब्लेड खून से लथपथ हो गया नीचे की सारी धरती खून से लथपथ हो गई ।। असहनीय पीड़ा से तुंग तड़प रहा था। ।

बिकास का चेहृरा खूंनी भेडिए की भाँति धधक रहा था । अगले ही पल उस का हाथ चला और तुग का बाय कान अपने स्थान से गायब, फिर दायां कान फिर एक-एक करके पैरों की द्गसों उंगलियां काट डाली ।

तुंगलामा सह न सका और चीखता-चीखता बेहोश हो गया - लेकिन वो विकास था..........

कसाई-दुर्दांत, बेरहम, जल्लाद ।

नहीं माना, जिद थी । सो अड़ गया ।

पानी के छींटे मारकर उसने तुगलामा को चेतना प्रदान की ।। होश में आते ही वह चीख पड़ा लेकिन बिकास उसके बाल पकडकर दो-तीन झटके देता हुआ गुर्राया ।।

"क्यों चीनी सूअर, इतनी-सी बेरहमी मे ही होश गवा दिए! अभी तूने देखा क्या है कुत्ते अब देख कहते हुए विकास ने एक… अंगूठे और ऊंगली का नाखून ब्लेड द्वारा कटी हुई दरार मे लगाया और खाल को खींचता ही चला गया शैतान । जैसे प्याज का छिलका उतारा जाए ।

तुगलामा भयंकर पीड़ा से चिंघाड़ उठा लेकिन विकास ने उसकी खाल यूं ही नोच-नोचकर फेक दी । अब तुंग जैसे केवल गोश्त का एक लोथड़ा रहं गया ।

वह पुन: बेहोश हो गया मगर इस वार लड़के ने अजीब हरकत की । छत के कुदों में वंधी हुई दो और रस्सी लटक रही थी । ।

"तुरंतं विकास ने उन तीनों रस्सिर्यो की मदद से तुंगं को किसी झूले के पटरे की तरह धरती के लेबिल में बांध दिया । बह ररिसयों पर इस प्रकार लटका हुआ था जैसे धरती पर कोई इंसान पट होकर लेट जाए । उसकी कमर वाला भाग छत की तरफ़ था और चेहरे वाला नीचे ।

एक पहिए बाली मेज को खिसकाकर विकास उसके नीचे ले आया ।

मेज इतनी ऊँची थी कि तुंग का झूले के पटरे जैसा लटका हुआ जिस्म मेज से कुछ ही ऊपर था । होश आते ही तुंगतामा फिर चीखने लगा ।"

" अब भी मान जाओ तुंग; वरना...... ।” विकास ने अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया । लेकिन तुंग ने कोई जवाब नहीं दिया । वह चीखता ही रहा ।

वस-लड़के को फिर ताव आ गया । वह पुन: शैतानियत पर उतर आया । मेज के नीचे भिन्न-भिन्न स्थानो पर सात विना चिमनी के लैंप रखे हुए थे । विकास ने तेजी के साथ जेब से लाइटर निकालकर सातो जला दिए ।

सातो के ऊपरी भाग से आग की लौ लपलपाने लगी । मगर अभी ये लौ तुंग के जिस्म को स्पर्श नहीं कर रही थी ।

" जिंदा इंसानो को एकदम भट्ठी में झोंक देना बेरहमी नहीं होती चीनी सुअर विकास खूंखार स्वर में गुर्रा उठा--“भट्ठी में झोंक देने से इंसान की जान एकदम निकल जाती है--बेरहमी इसे कहते है ।" कहते-कहते विकास ने सारे, लैंपों की बत्तियां ऊपर कर दी और रो पड़ा तुग विलख पड़ा ।

सातों लैंपों की लौ उसके जिस्म के भिन्न-भिन्न अगों को छूने लगीं ।

उसका बिना खाल का जिस्म-मात्र गोश्त का लोथड्रा, उस पर गोश्त को जलाते हुए ये लैप । एक लैंप की लो । तुंग की ठोढी का गोश्त पका रही थी. दूसरी गरदन, तीसरी छाती, चौथी पेट, पाचबी जाधो के बीच, छडी दाया पैर, सातवी बया पैर । बिलख उठा तुंग रो पड़ा । गोश्त जलने की दुर्गध सारे तहखाने में फैल गई ।

कोन होगा इतना बेरहम जो जिंदा इंसानो का गोश्त आभ मे सेक दे ।

कोई कहां तक सहे? तुंग पुन बेहोश हो गया । उसकी आखें चीखते-चीखते बंद होने लगी लेकिन पास ही पानी का जग लिए खडा था बेरहम कसाई ।

उसने पानी के छीटे उसके चेहरे पर मारे और बोला…… 'बेहोश नहीं होने दूंगा तुंग बेटे । मेरा नाम विकास है । मुझें दरिदा कहते हे । तुम मुझे बेरहमी सिखाने चले थे। अगर तुम से झुकने लगा तो जी लिया विकास । चंद्रशेखर और भगतसिंह के देश का रहने वाला हूं-ईट का जवाब पत्थर मेरा सिद्धांत है ।" कहते हुए उसने पुनः पानी के छींटे उसके चेहरे पर मारते हुए बोला--" मेरी बात मानोगे या नहीँ?"

टार्चंर की भी कोई सीमा होती है, दरिंदगी का भी एक दायरा होता है ।

लेकिन इस शेतान की बेरहमी का तो कोई दायरा ही नहीं । कोई कितना सहे? कोई नही सह सकता । तुंगलामा टूट गया ।

रोते-विलते- उसने हा कर दी और तुरंत बेहोश हो गया । इस बार विकास ने उसके चेहरे पर पानी के छींटे नहीं मारे ।

शेतान के प्यारे-प्यारे गुलाबी होठों पऱ बेहद मीठी मुस्कान दोड़, गई । आंखें चमक उठी ।

तभी तहखाने का द्धार खटखटाया गया ।

बिकास तेजी के साथ उधर घूमकर बोला ।

" कौन है ?"

"हमारे सिवा कौन हो सकत है धर्म बाप?" बाहर से टुम्बकटू की आवाज आई----"दरबाजा खोलो ।"

आगे बढकर विकास ने दरवाजा खोल दिया ।

सामने था टुम्बकटू उर उसके कंधे पर बैठा धनुषटंकार ।

दरवाजां खुलते ही दोनो की नाक में मानव शरीर जलने की दुर्गघ का भभका आया, एकाएक टुम्बकटू बोला ।

“क्या हो गया है बापूजान ?"

"जरा तुंग से प्यार-मौहब्बत की बाते हो रही थ्री ।" कहता हुआ मुस्कराकर विकास सामने से हट गया । टुम्बकटू घनुषटंकार ने तहखाने का दृश्य देखा । देखते ही दोनों के अंतर्मन कांप उठे । दोनों का कलेजा हिलकरं रह गया । एक पल के लिए तो वे उस वीभत्स दृष्ट को देखते ही रह गए ।।

टुम्बकटू जैसे इंसान का ब्रदन भी पत्ते की भांति काप उठा ।

तुगलामा की अजीब हालत थी-बिना खाल का यानी गोश्त के लोथड़े की मानव आकृति। दोनों कान गायब ।। नाक नदारद, पैरों की उंगलियां फ़र्श पर । उसका भुनता हुआ जिस्म । खून से लथपथ फर्श इत्यादि ।

एक ही पल. में दोनों सब कुछ समझ गए। , झपटकर टुम्बकटू ने सारे लेप बुझा दिए । धनुषटंकार कूदकर मेज़ पर खडा हो गया । विकासं ने पलटकर उन की तरफ देखा तो देखता ही रह गया । दोनों की आँखों में खून था । वे विकास को घूर रहे थे, टुम्बकटू गुर्रा उठा।।

" विकास! ! यह तुम्हारा कसाईपन पसंद नहीं ।"

धनुषटंकार ने भी तुरंत अपनी डायरी पर यूं लिखा । "गुरु मुझे आपके इस रूप से घृणा है।"

" सवाल पसंद का ऩही है लंवू अंकल तुम भी सुनो धनुषटंकार…किसी की घृणा से मुझ पर कोई अंतर नहीं पडता ।"

बिकास उन दोनों की आखो में आखें डाले कहता जा रहा था-------" सवाल सिद्धातों का । विकास का सिद्धांत है कि ईट का जवाबं पत्थर से दो । ये सूअर मुझे वेरहमी सिखाना चाहता था । अब से पहले मै जासूस बनना चाहता था लंबु अंकल और आपको पता होना चाहिए कि जासूस वही होता है जो बेरहम हो । जासूस के गुणों मे बेरहमी भी एक गुण होता है !"

" लेकिन अब तुम अपराधी हो !"

“जौ अपराधी बेरहम नहीं होगा, वह कभी सफल नहीं हो सकता हैं !' विकास कहता ही चला गया -" इससे मुझे काम लेना था, लातों का भूत बातों से माना नहीं ।।”

" लेकिन टार्चर की भी एक सीमा होती है !'

"ये भीमा बहाँ समाप्त होती है जहां इंसान टूट जाए।" विकास का उत्तरं एकदम सपाट था ।

चुप रह गया टुम्वकटू उसे कोई जवाब नहीं सूझा जबकि विकास बोलता ही चला गया ।

" इधर देखो लंबू अंक्ल तुम भी सुनो धनुषटंकारा इसी सूअर ने बिकास को भट्ठी मैं झोंक देगा चाहा था, मैने तो इसे भट्ठी मे भी नहीं झोंका फिर आप क्यों नाराज हैं?"

"लेकिन टुम्बकटू बोला---"तुम ये सब करौ तो

अच्छा नहीं लगता, कितने प्यारे लगते हो तुम और.......!"

" सूरत पर मत जाओ लंबू अंकल, सुरत धोखा देती हैं ।!"

न जाने क्यो टुम्बकटू ने अधिक विरोध करना उचित नहीं समझा । कदाचित यह सोचकर कि यह लडका जिद्दी अपनी जिद के आगे किसी की नहीं चलने देता । अत बहस व्यर्थ होगी । धनुषटंकार भी चुप था ।

“तैयार हुआ ?" टुम्बकटू ने प्रश्न किया ।

" बिल्कुल हुआ !" विकास ने कहा , फिर विषय परिवर्तन करता हुआ बोला…"गुरु लोगों से संबंध मिला?"

"अभी तो नही ।"

" आओ फिर कोशिश करते है।" विकास टुम्बकटू से कहने के वाद धनुषटंकार की और मुड़कर बोला--" तुम साबधानी से तुगलामा के जिस्म पर इसका मरहम लगा दो ।"

इसके बाद बिकास और टुम्बकटू तहखाने से बाहर निकल गए ।।

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संपूर्ण अमेरिका चोंक पडा !

न केवल चौंक पडा , बल्कि कांप उठा । घटना ही ऐसी थी ।

न्यूयार्क । अमेरिका की भूतपूर्व राजधानी । घटना वहां की है ।

अमेरिका की सर्वोत्तम जासूसी संस्था ।

सी आई ए ।

इसी संस्था के चीफ़ का नाम था -

फ्रिदतोफ नार्वें । सर्वविदित, सर्वविख्यात । सभी जानते वे कि फ्रिदतोफ नार्वे सी आईं ए का चीफ़ था लेकिन इस व्यक्ति के साथ बडी अजीब-सी घटना पेश आई । ऐसी अजीब कि सरकारी मशीनरी हिलकर रह गई ।

फ्रिदतोफ नार्वें को देखते ही प्रत्येक व्यक्ति पहले कहकहा लगाता, फिर भयभीत…होता और फिर आतंकित हो उठता ।

सी आई ए के चीफ के साथ यह घटना हुई उर सी आई ए कुछ कर भी न सकी ।।

सीक्रेट सर्विस के एजेंट तक कुछ न कर सके ।

असफ़लता.. बिफलता ।

बस…यही सब कुछ रह गया !! पुरा अमेरिका आतकित था ।

क्रीमिया!

यह नाम था फ्रिदतोफ की बीबी का । जाहिर है, क्रीमिया ही फ्रिदतोफ के सबसे निकटतम साथी थी । बीबी होने के साथ-साथ क्रीमिया सी-आई-ए से संबंधित फ्रिदतोफ के कार्यो में सहयोगी भी थी यानी वह स्वयं भी सीआईए के उच्च पद पर आसीन थी । रात-रात भर वे दोनों पति-पत्नी सी.आईं.ए के नए हथकंडों पर विचार करते रहते थे । कौन-सा एजेंट कहां नियुक्त करना है,।। कौन-से देश का तख्ता किस ढंग से उल्टा जा सकता है, कौन-से ग्रुप को किस कार्य के लिए कितना धन देना आवश्यक है, इत्यादि । विचार-विमर्श के विषय होते थे ।

सहयोगी के स्थान पर क्रीमिया की अगर फ्रिदतोफ की साथी कहा जाए तो उचित होगा ।।

कहने की आवश्यकता नहीं कि अमेरिकी सरकार फ्रिदतोफ की सुरक्षा का कड़ा प्रबंध रखती दी , लेकिन इसका क्या किया जाए कि इतना सब कुछ होने पर भी यह बिचित्र घटना घट गई । इतनी बिचित्र कि सारा अमेरिका चकरा गया ।

क्रीमिया यानी फ्रिदतोफ की बीबी स्वयं इस अजीब घटना पर पूरे विश्वास के साथ ऐसा प्रकाश न डाल सकी जिससे कुछ संतुष्टि हो सकती ।

अन्युकोई तो भला जान ही क्या सकता था? जो भी जासूस इस अनहोनी घटना की तह तक पहुचना चाहता था, उसका सबसे पहला शिकार होता क्रीमिया । परंतु जब वह क्रीमिया के बयान से कोई ऐसा रास्ता नहीं निकाल पाता जहां से वह आगे बढ़ सके तो हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाता, यदि इससे अधिक करता तो वह केवल इतना ही कि इस पर आश्चर्य प्रकट कर डालता ।

क्रीमिया स्वयं परेशान चमत्कृत थी ।

उसकी तो स्वयं-ही कुछ में नहीं आ रहा था और ऊपर से वे और मुसीबत पैदा कर देते थे । पूछताछ करने बाले जासूस और रिपोर्टर जो अलग-अलग ग्रुपो में आते संपूर्ण घटना विस्तार से सुनना चाहते ।

विवश होकर क्रीमिया वही घिसे…पिटे चंद शब्द दोहराने पड़ते थे जिन्हें वह इतनी बार कह चुकी थी कि नीद में भी बड़बड़ाने लगती थी ।

लोग उसे परेशान न करे ,इसलिए उसने अपना बयान अखबारों में छपवाने के साथ-साथ रेडियो पर मैं भी प्रसारित करवा दिया ।

बयान कुछ इस प्रकार था-आप भी ध्यान से पढे, कदाचित कुछ समझ पाएं ।

तब..... ।

जबकि घटना धटी------उस दिन से पहली रात को मैं (क्रीमिया) मेरे पति यानी फ्रिदतोफ लाइब्रेरी में बैठे सी आई ए से संबंधित किसी अनावश्यक गुत्थी पर विचार-विमर्श कर रहे थे मगर हम उस गुत्थी को सुलझा नहीं पा रहे थे । हमारा यह प्रयास रात के एक बजे तक जारी रहा था ।

अंत में वे (फ्रिदतोफ) शेष कार्य को

को कल पर टालकर उठ गए । यहाँ मैं यह भी बता दू कि मेरे पति किसी भी जानवर से सख्त घृणा करते थे । हां तो हम उठे और वे ही बाते करते हुए अपने कमरों के पास आए । यहाँ यह भी बताना अवश्यक है कि हम अपने बनाए नियमानुसार महीने में पन्द्रह दिन एक ही कमरे में सोते और पंद्रह दिन अलग-अलग कमरों मे । लेकिन ये कमरे बराबर-बराबर ही हुआ करते थे । वे अपने प्रत्येक. सिद्धांत के बड़े पक्के थे । ये दिन अलग-अलग कमरों में सोने के चल रहे थे । अपने कमरे के समीप पहुंचकर न जाने उन्हें क्या सूझा कि नोकर को जगाकर चाय बनाने का आदेश दिया । उनकी इस हरक्त पर मै अवाक रह गई क्योंकि उनके नियमो में रात को चाय पीना शामिल नहीं था । यह बात नौकर भी जानता था । वह भी उनके मुख से चाय की बात सुनकर अवाक-सा रह गया । वह अपनी आश्चर्यचकित मुद्रा लिए चाय बनाने चला गया । न जाने क्यों मै भी कुछ बोल ना सकी । तभी वे मुझसे बोले।

" आओ क्रीमिया, चाय पीएं ।" अत: वे मुझे अपने कमरे में ले गाए, हम पुन: उसी गुत्थी पर विचार करने लगे । चाय इत्यादि पीने के पश्चात हम दोनो उठे । चाय के बर्तन वहीं रह गए क्योकि नौकर पुन: सो चुका था । हमने उसे जगाना उपयुक्त नहीं समझा । वे मुझे अपने कमरे के दरवाजे तक विदा करने आए गुडनाइट कहकर लगभग डेढ बजे विदा ली ।।

मैं अपने कमरे में आई, कपडे इत्यादि बदलकर बत्ती बुझा कर बिस्तर पर लेट गई । कुछ देर तक तो वही गुत्थी मेरे दिमाग में चकराती रहीं लेकिन शीघ्र ही नीद आ गई । इतना मुझे याद है कि जब मैं सोई तो उनके कमरे की लाइट भी बुझ चुकी थी ।

कमरा भी उन्होंने मेरे सामने ही अंदर से बंद कर लिया था ।।

और फिर सुबह । जब आंखें खुली तो आश्चर्य से फैल गई क्योंकि मैंने अपने पति की स्थिति में न केवल एक बहुत बड़ा परिवर्तन पाया बल्कि उन्हें, वडी ही हास्यास्पद स्थिति मैं देखा ।

सबसे पहले यानी जब मेरी आंखें खुलीं तो मैंने उनके कमरे में एक बिल्ली की आवाज सुनी । ने चौकी, चकराकर रह गई । वास्तव में इस कोठी में किसी जानवर का होना उसी प्रकार आश्चर्यजनक था जैसे पश्चिम से सुर्य का उदय होना क्योंकि मैं पहले भी कह चुकी हू कि उन्हें जानवरों से सख्त नफ़रत थी । इतनी सख्त नफ़रत कि वह जानवर का नाम तक सुनना पसंद नहीं करते थे । किंतु आज सुबह-ही-सुवह मुझें इस घटना ने आश्चर्य में डाल द्विया । रहस्य जानने के लिए मैं जल्दी से उठी । जिस्म पर नाइट गाउन डाला, डोरी बांधती हुई मैं अपने कमरे से बाहर निकल आई । उनके कमरे से निरंतर म्याऊ-म्याऊ की आवाजे आ रही थी।

मेरी जिज्ञासा भडकी ।

मैं तेजी के साथ दस्वाजा खटखटाने के विचार से आगे बढी लेकिन उस समय मेरा आश्चर्य और अधिक बढ क्या जब देखा कि दरवाजा अंदर से बद नहीं है यूं हीँ उढ़का हुआ है । मुझें अच्छी तरह याद था कि रात उन्होंने दरवाजा अदर से बंद कर लिया था लेकिन आखिर यह खुल कैसे गया? क्या वह सोकर उठ चुके हैं?

लेकिन यह बात मेरे को स्वीकर न हुई क्योंकि वह हमेशा देर से जागते थे । साल में शायद ही कोई दिन ऐसा होता हो, जब यह स्वयं

जागते हो, हमेशा मैं ही उन्हें जगाया करती थी ।

मतलब यह कि मेरे लिए प्रत्येक पल चौंका देने वाला था ( जब मेने रहस्य जानने के लिए दरवाजे को धकेला तो…
 
उफ, काप उठी मैं । कितना विचित्र दृश्य था! हास्यास्पद, आश्चर्यजनक भयानक दृश्य । उस दृश्य को मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती । दिमाग हवा में चकराने लगा । दरबाजा खोलते ही मैने देखा कि समस्त कमरा अस्त-व्यस्त पड़ा हुआ है । फर्नीचर उल्टा हो गया था । पलंग का बिस्तर फर्श पर पडा था । प्याले और प्लेटों के कांच फर्श पर बिखरे पड़े थे । केवल केतली बची हुई थी शायद इसलिए बच गई थी कि वह कुछ ऊचाई पर रखी थी ।

उनकी स्थिति--उफ एकदम आश्चर्यजनक!

उनके कपड़े वेहद अस्त…व्यस्त थे । नाइट गाउन बिल्कुल उलूटा पहने हुए थे यानी गाउन का कालर घुटनों की तरफ था निचला भाग गले में । पायजामे का एक यायचा ऊपर कर लिया था ।

सब कुछ चमत्कृत कर देने वाला था ।

बह किसी विल्ली की भाँति घुटनों के बल फर्श पर बैठे हुए थे , किसी बिल्ली की भाति ही वार--बार जीभ निकालकर फर्श पर पडी हुई उस चाय को चाट रहे थे_ जो कप इत्यादि के फूट जाने के कारण पत्ती के साथ बिखर गईं थी । मेरे लिए यह कम आश्चर्य की बात नहीं थी । मेरी समझ में नहीं आया कि यह सब क्या है? दरवाजा खुलने की ध्वनि ने शायद उन्हें आकर्षित किया । उन्होंने अपना चेहरा ऊपंर उठाया, चेहरा देखकर मैं दंग रह गई । सच जानिए, मुझें रोना आ गया । मेरी आंखो में आसूं आ गए । उनका चेहरा किसी तवे की भाँति काला था । उनकी नाक और कान कटे हुए थे । कटी हुई नाक के नीचे किसी बिल्ली की भाँति ही मुछो के नाम पर दस-बारह बाल थे, आंख के ऊपर उनकी भौ नहीं थी ।

"म्याऊ-म्याऊ! की ध्वनि दो वार उनके मुख से निकली । मुझे कुछ समझ नहीं आरहा था । एक तरफ़ दुख था तो दूसरी तरफ गहन आश्चर्य भी । मैंने देखा वह मुझे अपनी चमकीली आखो से एकटक घूर रहे थे ।

न जाने क्यों मुझे डर लगने लगा । मैंने साहस करके उन्हें पुकारा---" आप.....यह क्या हुआ आपको?"

"म्याऊ.. म्याऊ?" उनके मुख से पुन: दो बार यही आबाज निकली और वह र्दोड़कर पलंग के नीचे घुस गए । पलंग के नीचे वह बिल्कुल इस प्रकार घुसे थे जैसे कोई बिल्ली इंसान क्रो देख भयभीत हो जाए ।

मैंने एक वार पुन: उन्हें पुकारा । मैं आगे बढी लेकिन बह फिर उसी प्रकार मयाऊ मयाऊ कर सहमते हुए पीछे हट गए ।। जितनी बार भी मेने उन्हें पुकारा वह सहमकर और पीछे हट गए जैसे वह वास्तव में ही बिल्ली हो ।

में आश्चर्य के साथ भय की अनुभूति महसूस कर रही थी ।

मेरा दिल चाह रहा था कि मैं रोंऊं, खूब रोऊं उनसे लिपटकर लेकिन बह तो जैसे मेरे पास ही नहीं आना चाहते थे । एकाएक मै और बुरी तरह चौकी । इस बार चौकने का कारण भी बडा अजीब था

बह पूरी तरह बिल्ली तों बन ही चुके थे।

मगर इस वार चोंकने का कारण उनके गेले में लटकी हुई बह टीन की प्लेट थी जिस पऱ बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था. .,

यह वो शख्श है जो भ्रारत सरकार का तख्ता सी आई ए के बूते पर उखाडना चाहते है !"

. इस इबारत को देखकर मैं बुरी तरह चौकीं लेकिन कुछ कुछ इस सबका उद्देश्य भी समझ गई । विकास नाम के इस शैतान से मैं. ही . . नहीं, सारी अमेरिका भली भांति परिचित है । .

एक वार बह हमारे देश में प्रलयंकारी विकास के नाम से हंगाम कर चुका है । इस शैतान का नाम उस पट्टी पर पडते ही मैं कांप उठी । मेरे होश फाख्ता हो गए । मुझे लगा कि वह खूबसूरत लेकिन खतरनाक लड़का मेरे आस-पास ही कहीं मंडरा रहा है बल्कि मुझे लगने लगा कि अव पूरा अमेरिका किसी खतरे से घिरने वाला है । इस नाम को पढकर मैं पागल-सी हो गई । मैं चीखी-चिल्लाई जिसको सुनकर सभी नौकर इकट्ठे हो गए । उसके बाद अनेक लोगों ने उसे बिल्ली के रूप में मयाऊं-मयाऊं करते देखा ।।

मैं भविष्यवाणी कर सकती हू कि आने वाले समय में यह शेतान अमेरिका के लिए काल है । . .यह था क्रीमिया का अखबार मे र्प्रकाशित बयान ।

घटना आश्चर्य से परिपूर्ण थी ।

जासूसों को केवल एक ही रास्ता नजर आया-बह था चाय के जरिए यानी चाय में तो किसी ने कुछ नहीं मिला दिया था ? लेकिन जब यह सोचा गया कि अगर चाय में कुछ होता तो क्रीमिया पर भी तो उसका प्रभाव पड़त्ता-बस यहीं आकर यह रास्ता भी बंद हो जाता ।।

इधर वैज्ञानिक रिपोर्टरों ने चाय को टेस्ट करकै बताया कि उसमे किसी प्रकार की अशुद्धि नहीं मिली हुई है । सारा अमेरिका हतप्रभ था ।

फ्रिदतोफ को पकडकर एक पिंजरे में बंद कर दिया गया था । वहीं पडा-पडा वह बिल्ली की भांति मयाऊ-मयाऊ कर रहा था । यह सब कुछ वह था जो अमारिका की साधारण जनता पर खुला हुआ था । इसके अतिरिक्त और भी कुछ गुप्त बात ऐसी थी जो अघिक भयानक थी, जिसे अगर जनता के सामने प्रकाशित कर दिया जाता तो अमेरिका की जनता भड़क उठती ।

सरकारी मशीनरी खतरे मे धिर जाती । क्या थी वे गुप्त बाते?

"कुछ गुप्त बाते हैं मिस्टर माइक, जिन्हें साधारण जनता के सामने प्रकट नही किया जा सकता ।" स्रीकेट सर्विस का चीफ़ अपने सामने बैठे माइक से कह रहा था ।

माइक दो दिन पूर्व ही भारत से वापस लोटा था । बह विकास की हत्या करने के उदेश्य से भारत गया था लेकिन घटनाचक्र कुछ इस प्रकार बना कि वह सफ़ल न हो सका ।

फ्रिदतोफ़ की घटना का पता लगते ही उस सिलसिले मे सीक्रेट सर्विस के चीफ ने माइक को तुरंत याद किया था ।।

"'क्या वे गुप्त बाते बताई जा सकती है सर?" माइक ने प्रश्न किया ।

" तुम्हें सीक्रेट सर्विस की तरफ़ से इस केस पर नियुक्त किया जा रहा है । चीफ़ बोले-"इसलिए तुमसे कोई भी रहस्य छुपाना उचित नहीं होगा ।" चीफ़ कहते ही चले गए----"तुम्हें फ्रिदतोफ वाली घटना के विषय में तो विदित होगा ही?”

" केवल इतना ही जितना अखबार में प्रकाशित हुआ ।"

“सबसे पहले तुम यह पढो ।" चीफ ने एक कागज माइक की तरफ़ बढाते हुए कहा---" “यह कागज फ्रिदतोफ की एक जेब से मिला है । इसके विषय मे स्वयं फ्रिदतोफ की बीबी क्रीमिया को भी कुछ ज्ञान नही है !*

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"हरामजादो अमेरिकन हुक्मरानों !'

कैसा मजा आया ? फ्रिदतोफ को आदमी से बिल्ली बना दिया लाख कोशिशों के बाद भी अब उसे आदमी नही बना सकोगे ।। सुना हैं कि यह व्यक्ति सी आई ए. का चीफ है । उसी सी आई ए का जिसका जाल मेरे प्यारे भारत में फैला हुआ है । जो विश्व के नक्शे से मेरे देश का नामो-निशान मिटां देना चाहती हैं, जो भारत मे गृह युद्ध छिडबाना चाहती है ।।

मैने अमेरिका को सबक सिखाने की सौगंध ली है । अभी तो तुमने मेरा पहला कमाल देखा है । केवल एक ही व्यक्ति को बिल्ली बनाया गया है लेकिन तुम्हें पता है कि विकास हर कार्य चुनौती देकर करता है । कल सुबह तुम्हारे देश में अनेक अधिकारी 'बिल्ली बन चुके होंगे । फिर तुम्हें उन बिल्लीयों से इश्क लडाना है ।

यह केवल श्रीगणेश है । एक बार फिर कहता हूं-मेरे देश से सी आई ए का जाल हटा लो वरना..... वरना भारत से पहले अमेरिका तबाह हो जाएगा । विकास विनाशदूत बनकर सारे अमेरिका में विनाश फैला देगा ।

यह तुम्हारे लिए खुली चुनौती है आमेरिकन कुत्तों । अगर भलाई चाहते हो तो विकास को विनाश दूत बनने से रोक लो ।

विनाशदूत-----विकास
 
पत्र का अंत करते-करते माइक के जिस्म में झुरझुरी-सी दोड़ गई । हृदय काप उठा माइक का । उंसने गरदन उठाकर चीफ़ की-तरफ़ देखा-उनके चेहरे पर बारह बज रहे थे ।

माइक बोला ।

" यह लडका तो सर विजय का भी बाप निकला ।"

"बिज़य ने कभी अमेरिका के विरुद्ध कोई कदम नहीं उठाया ।" चीफ गंभीरता के साथ बोला ।

"सर यह लड़का कुछ सनकी-सा है । एक वार जों बात दिमाग में आ जाती है, उसके पीछे यह लड़का पागल हो जाता है ।"

लेकिन तुम जानते हो इस लड़के से अमेरिका की जनता कितनी भयभीत है 1” चीफ बोला----“इसके नाम मात्र से अमेरिका का बच्चा-बच्चा कांप उठता है । पिछली बार जब यह प्रलयंकारी विकास' के नाम से यहां छा गया था, तभी से अमेरिका की जनता इससे बुरी तरह भयभीत है । जिस लड़के ने 'माफिया' जैसी संस्था के दांत खट्टे कर दिए, बह साधारण नहीं हो सकता । अगर यह सब साधारण जनता के सामने पेश कर दिए जाए तो अमेरिका मे आंतक छा जाएगा ।।"

" अब मुझें क्या करना होगा सर?”

"देखो ।।" चीफ़ उसे समझाने वाले भाव में बोला-----"एक आदमी का बिल्ली बन जाना एक्रदम अजीब और अनहोनी घटना है।। जनता में आतंकं फैलने के लिए यह बात कम नहीं है लेकिन इससे, भी खतरनाक बात यह है कि इस घटना के साथ उस शैतान का नाम जुडा हुआ है जिसे यहां के लोग प्रलयंकारी विकास के नाम से जानते है । यह नाम इस घटना से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है ।”

“जी मैं समझ रहा हु, लेकिन ।"

"लेकिन क्या?"

" मेरे विचार से विकास मंगल ग्रह पर चला गया है, लेकिन फिर ये घटना ?"

"ये सब तुम्हारे सोचने का बिषय है ।" चीफ गभीर स्वर मे बोले------" हो सकता है कि उसऩे केवल तुम्हें धोखे में रखने के लिए यह खबर फैलाई हो कि यह मंगल ग्रह पर जा रहा है ।।"

"मेरे विचार से यह सब वह मंगल ग्रह से ही कर रहा है !"

…“क्या बेवकूफी की बात कर रहे हो? मालूम है! मंगल ग्रहं यहां से कितनी दूर है?”

" कितनी भी दूर हो सर ।" माइक ने' कहा------" यह तो आप भी मानेगे कि इस तरह आदमी को बिल्ली बना देना वैज्ञानिक करिश्मा है और जहाँ तक हम जानते हैं, विकास वैज्ञानिक नहीं है ।--------->>>>>

यह भी आप जान चुके हैं कि बिकास अपराधी वन चुका है । प्रिंसेज जैक्सन ने विकास को बताया था कि मंगल ग्रह पर सिगंही का शासन है । यह भी आप जानते है कि सारे बड़े बड़े अपराधी इस लड़के को प्यार करते हैं । मेरे विचार से सिंगही इस लड़के की सहायता कर रहा है । वे सब फार्मूले सिंगही ने विश्व-विजय करने के प्रयास हेतु जुटाए होगें और वही फार्मूले बिकास को सौंपकर वह उसकी मदद कर रहा होगा ।" माइक ने अपना विचार प्रकृट किया ।

"लेकिन मंगल ग्रह में रहकर... ।"

"आप यह क्यों भूल जाते है कि टुम्बकटू जैक्सन, अलफांसे सिगंही जैसे अपराधियों का संरक्षण उसे प्राप्त है? सिंगही के एजेंट पूरे विश्व में फैले हुए है । सिंगही के पास ऐसे यंत्र भी होंगे , जिनके जरिए बह मंगल ग्रह पर बैठा-बैठा धरती पर उपस्थित अपने एजेंटों से बात कर सके । संभव्र है यह सब उन्हीं एजेंटों के जरिए हो रहा है ।"

“खैर जो भी है, अब तुम अपना कार्य कहां से शुरू करना चाहृते हो ?"

"सबसे पहले ने फ्रिदतोफ़ को देखना चाहूगा !"

“फ्रिदतोफ़ अभी अपने घर पर है । तुम वहां जा सकते हो ----मैं फोन पर क्रीमिया को सूचित कर दूंगा ।"

" ओ.के सर !* माइक ने उठते हुए कहा !

इस प्रकार तीस मिनट पश्चात माइक फ्रिदतोफ की कोठी पर था । कोठी के बाबरी अपार भीड थी । पुलिस वालो को माइक के लिए विशेष आदेश थे, अत: उसे अंदर ले जाया गया । जव वह अदर पहुंचा तो सबसे पहले उसकी मुलाकात क्रीमिया से हुई । क्रीमिया यूं तो एक साहसी युबती थी लेकिन फिर भी इस समय उसके प्यारे नेत्रो मे आसूं थे ।वह एक कमरे में एक पारदर्शी शीशे के सामने खडी थी ।

उस शीशे के पार देख रही थी । उस शीशे के पार एक अन्य कमरा था । उस कमरे में एक पिंजरा रखा था जिससे फ्रिदतोफ़ बंद था । वह ऱहं-रहृकरं बिल्ली की भांति मयाऊ मयाऊ" कर उठता था । क्रीमिया एकटक अपने पति को देख रही थी । माइक जब वहां पहुचा तो उसके साथ एकं पुलिस की इंस्पेक्टर और दो कास्टेबल भी थे ।।

क्रीमिया आहट पाकर उनकी तरफ मुडी, माइक उसकी तरफ़ देखकर गंभीर स्वर में बोला ।

"आप सी आई ए की प्रमुख अधिकारी हैं । आपको इस तरह नर्वस नही हो जाना चाहिए !"

"मैं अधिकारी होने के साथ-सांथ उनकी पत्नी, भी हूँ…मिस्टर ....? "

" माइक ।" बह बोला-----" मुझे माइक कहते है ।"

"आप नहीं जानते कि पति को इस स्थिति में देखकर पत्नी पर क्या गुजरती है?”

"आप चिंता न करेंज मिस क्रीमिया! सब ठीक हो जाएगा ।"

माइक ने सांत्वना देनी चाही ।

"कुछ ठीक नहीं होगा ।" अचानक पगाल-सी होकर चीख पडी क्रीमिया ---" उस खतरनाक शैतान पर सारा अमेरिका भी काबू नहीं पा सकेगा । वह......वह सबको विल्ली बना देगा-सारे अमेरिका को ।"

माइक चुप हो गया । वह जान गया कि क्रीमिया के दिमाग पर विकास भूत बनकर सवार हो गया है । क्रीमिया विकास से बुरी तरह प्रभावित और भयभीत है ।

उसने क्रीमिया से अधिक बात करना उचित नहीं समझा बल्कि शीशे के पास पिंजरे में कैद फ्रिदतोफ़ को देखने लगा । बह बडे ध्यान से फ्रिदतोफ को देख रहा था ।

अचानक माइक के दिमाग में धमाका-सा हुआ । एक अजीब-सी बात उसके दिमाग में आ गई । वह तेजी से , इंस्पेक्टर की तरफ घूमा और बोला-----" मिस्टर इंस्पेक्टर कहीं से चूहे का प्रबंध करो ।" चौंक पड़ा इंस्पेक्टर ।।

क्रीमिया भी और दोनों कांस्टेबल भी ।।

सबने चौककर माइक की तरफ़ देखा ।

सब सोच रहे थे------कौन है यह व्यक्ति? बेहद घाघ । क्रीमिया को लगा कि यह आदमी कोई बहुत बड़ा जासूस है । अभी वे आश्चर्य से उसका मुंह ताक ही रहे थे कि माइक पुन: बोला ---" सुना नहीं इंस्पेक्टर, क्या कहा है मैंने ?"

" ओके सर ।" इंस्पेक्टर ने जल्दी से एकदम अलर्ट होकर कहा…"अभी लीजिए ।" उसके बाद वह एक कांस्टेबल की तरफ़ मुडकर बोला…"जल्दी से एक चूहे का प्रबंध करो" ।

आश्चर्य में डूबी मुखाकृति लेकर कांस्टेबल वहां से चला गया ।
 
माइक ने इंस्पेक्टर क्रो अगला यह आदेश दिया-“दूसरे कमरे में जाकर फ्रिदतोफ़ क्रो पिंजरे से बाहर कर दो।"

इस तरह.....!!

बीस मिनट पश्चात कांस्टेबल एक चुहेदान में कैद चूहा ले आया । उस समय तक फ्रिदतोफ को पिंजरे से बाहर निकल दिया गया था परंतु था वह उसी कमरे मे कैद । माइक ने कांस्टेबल से वूहेदान लिया ।

क्रीमिया, इंस्पेक्टर दोनों कांस्टेबल बड्री दिलचस्पी के साथ माइक की कार्य-प्रणाली देख रहे थे ।

उसने एक ऐसी नाली के मुह पर चूहेदान रखा जो सीधी उसी कमरे में खुलती थी जिसमें फ्रिदतोफ़ था । नाली के मुंह पर चूहेदान रखकर खोल दिया । उसमें कैद मोटा ताजा चूहा झट नाली के रास्ते कमरे के फर्श पर कूद गया ।

उसी पल जैसे विजली कौधी ।

फ्रिदतोफ की दृष्टि जैसे ही चूहेदान पर पडी, पल भर के लिए उसकी आंखें अजीब-से ढंग से चमकी और .......

ठीक विल्ली जैसी फुर्ती और स्टाइल मे .. ।

वडी तेजी के साथ वह चुहे पर झपटा ।

शायद ही कोई चूहा ऐसा होता हो जो बिल्ली की झपट से स्वयं को बचा पाए । लेकिन दुख के साथ कहना पड़ता है कि यह उन बिरलों में से नहीं था । एक झपट में बिल्ली बने फ्रिदतोफ़ ने उसे अपने पंजे मे दबा लिया ।

संभी आश्चर्य के साथ यह देख रहे थे ।

अगले ही पल

फ्रिदतोफ ने हाथ मे दवा हुआ चुहा, अपने मुँह में लिया और ...... उफ! अपने पैने दातों से उसने चुहे की खाल एक एक तरफ फेंक दी ।।

चूहा तो मर चुका था किंतु चूहे के कच्चे गोश्त मे फ्रिदतोफ ने एकदम अपने दांत गडा दिए .

फिदतोफ़ उस चूहे को चिगल-चिगलकर खा रहा था ।

कैसा बीभत्स दृश्य था । क्रीमिया देख न सकी । पहले सिसकी और फिर चीख मारकर धड़ाम से फर्श पर गिर गई ।

इंस्पेक्ट और कास्टेबल उसकी तरफ झंपटे लेकिन वह बेहोश हो चुकी .थ्री ।

माइक बराबर फ्रिदतोफ को देख रहा था । फ्रिदतोफ़ ने भी शायदं शायद क्रीमिया की चीख सुन ली थी , तभी तो बह पिंजरे की आड में पहुंचा और आराम से चुहे के स्वादिष्ट गोश्त को खूब चिगल-चिंगल कर खाने लगा ।।

माइक की आंखो में एक अजीब-सी चमक आती जा रही थ्री ।

अगला दिन-सारे अमेरिका के लिए जैसे कहर का दिन था ।

सारे अमेरिका में जैसे कोहराम मच गया हो ।

कोई गिनती नहीं थी । पता नहीं अमेरिका के कितने अधिकारियों की हालत फ्रिदतोफ़ जैसी हो गई । अमेरिकी सेना के न जाने कितने अधिकारी विल्ली वन गए थे । सी आई ए के कितने ही एजेंट "मयाऊं-मयाऊ' कर रहे थे । राजनैतिक नेता बिल्ली बने, अपने कमरे में चूहे तलाश कर रहे थे ।।

अमेरिका की जनता भयभीत हो उठी ।

अखबार चीख पड़े ।

सबकी जुबान पर केबल एक ही नाम था ।

विकास विकास विकास विकास !

भय.. आतंक विनाश का प्रतीक! !!

माइक परेशान ।

सीक्रेट सर्विस बौखलाई ।

सी आई ए के एजेंटों के भय से थर-थर कांपते जिस्म ।

अधिकारियों के चेहरे सफेद । सबके चेहरों पर भय, आतंक ।

बिल्ली बने हुए सभी अधिकारियों की जेबों मे वे ही विकास के धमकी भरे खत ।

अमेरिकन सरकार कहां तक छुपाती?

प्रेस रिपोर्टर को वे खत मिले ।

पत्र अखबांरो में छप गए ।

तभी तो… सबके दिमागों में केवल एक ही नाम था…विकास ।।

जैसे साक्षात यमदूत का नाम हो ।

अमेरिका की जनता अपील करने लगी कि भारत से सी अई ए का जाल उठा लो…वस्ना ...वरना .वह शैतान सारे अमेरिका को विनाश की खाई में झोंक देगा । किसी को नही छोड़ेगा । सारे अमेरिका को बिल्ली बना देगा ।

विल्ली---विल्लियों का देश ।।

बड़े-बड़े अधिकारियों की काफ्रेस हुई लेकिन परिणाम-ठाक के तीन पात ।।

जूत-पत्रम होकर रह गया । किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए?

कैसे इस खतरनाक लड़के को रोका जाए?
 
इसे लडके पर तो जनून सवार हो गया है । सी आई ए के एजेंटों को आदेश भी दें तो क्या? क्या करे सी आई ए ?

सीकेट सर्विस के चीफ ने माइक की खिंचाई की । बेचारा माइका ।। क्या करे वो? बौखला गया ।। विकास को कैसे रोके?

जैकी! !

यानी जैकी आर्मस्ट्राग । विकास का चौथा गुरु । विजय का भी गुरु । उसे जासूसों का देवता कहा जाता था ।। जैकी एक अखबार का क्राइम रिपोर्टर था । वह भी बुरी तरह बौखलाया हुआ था । वह क्या जानता था कि जिस लड़के को उसने स्वयं जासूसी के, अनेक पैतरे सिखाए हैं, यहीं एक दिन अमेरिका के लिए काल वन जाएगा । वह जानता था कि विकास अपरिमित शक्ति और विलक्षण बुद्धि का मालिक है । उसे भी वे दिन याद हैं जब उसके पास ट्रेनिंग ले रहा था और अचानक बह माफिया के विरुद्ध भडक गया था । तब उसके मना करने पर भी यह लड़का माफिया से टकरा गया था ।।

इस बार विकास अपराधी वन गया-क्या सचमुच वह अमेरिका को समाप्त कर देगा ।

सोचता-सोचता कांप उठा जैकी ।

अमेरिका को समाप्त करना है तो एक स्वप्न जैसी बात लेकिन उसके साथ विश्व के बड़े-बड़े अपराघी है जो विश्व सम्राट बनने के ख्वाब देखते है । न जाने कितनी बार उन अपराधियों ने अपनी वैज्ञानिक शक्तियों से सारे विश्व को खतरे में डाल दिया हे…तो. .तो. . .क्या .उऩ शक्तियों से अमेरिका को समाप्त करना कठिन है?

नहीं ।

कठिन तो हो सकता है लेकिन असंभव नही । कोई उस लडके का क्या बिगाड लेगा? बह तो मंगल ग्रह पर बैठा है । वह तो बिल्कुल अपराधी वन गया है । अपराधियों वाले हथकंडे आजमा रहा है । उसे अगर मालूम होता है कि एक दिन यह लड़का अमेरिका के लिए इतना बड़ा खतरा बन जाएगा तो बह कभी उसे जासूसी के हथकंडे न सिखता । उसका स्वप्न तो यह था कि विजय की तरह विकास भी एक महान जासूस वने लेकिन-इस बेवकूफ़ लडके ने यह क्या किया? अपनी जरा-सी सनक के लिए अपना सारा जीवन बर्बाद कर लिया-अपराधी वन गया ।

इन्हीं बिचारो में उलझा हुआ जैकी अपने घर पहुचा । उसके घर का वातावरण भी बड़ा अजीब-सा हो गया था ।।

उसकी पत्नी यानी जुलिया-विकास को वेहद प्यार करती थी…बिल्कुल अपने बेटे की तरह । जैकी का एक बेटा भी था, नाम---"हैरी आर्मरट्रांग !"

बिकास का हमउम्र, जो स्वयं भी प्रलयंकारी विकास बाले अभियान मे जैकी और जुलिया को धोखा देकर विकास के साथ चला गया था।

हैरी और जुलिया इस समय पास ही एक सोफे पर वैठे थे ।और सामने दीबार पर टंगे हुए विकास के चित्र को देख रहे थे । न क्यों जूलिया की आँखों आंसू थे ।

हैरी के चेहरे पर अजीब-सी कठोरता थी ।।

चित्र में विकास बडी मोहक मुस्कान के साथ मुस्करा रहा था ।

कैसा मासूम-सा लगता था । कमरे में सन्नाटा था ।

तभी वहाँ जैकी ने प्रबेश किया ।।

तभी वहाँ जैकी ने प्रवेश किया । जैकी की हालत बड्री खराब ही । अस्त-व्यस्त बाल, परेशानियों से घिरा चेहरा ।

जूलिया हैरी ने जैकी की तरफ़ देखा । जैकी की आखें लाल थी । साहस जूलिया बोली ।

" क्या वास्तव में यह सब विकास कर रहा है?"

" बको मत !" झुंझला उठा जैकी-----" तुम हमेशा बेवकूफी की बाते करती हो । सारे अमेरिका में केवल तुम्ही ऐसी हो सबके पीछे विकास के होने में संदेह हैं । तुम जानती हो बह खतरनाक शैतान हमेशा इसी तरह की हरकत करता है । अपना काम करके हमेशा उनके पीछे अपना नाम छोड़ जाना उसकी आदत है । उसका दिमाग खराब हो गया है ।" वह विकास के चित्र की तरफ बढता हुआ बोला---" मुझी से सब कुछ सीखकर वह मेरे ही देश का दुश्मन बन गया है । अगर मेरे सामने आ जाए तो मैं उसे जिन्दा नहीं छोडूंगा । फेक दो इस तस्वीर को! यह अमेरिका का दुश्मन है । यहां इसका कोई काम नहीं ।" कहते हुए जैकी ने दीवार से विकास की शीशे से जड्री तस्वीर उताकर क्रोध से फर्श पर दे मारी । केस अलग जा गिरा । शीशा टूटकर चूर-चूर हो गया ।

"डेड्री !" अचानक हैरी चीख पड़ा----" यह आपने क्या किया?"

"बको मत ।" जैकी गुर्रा उठा । बह हमारा दुश्मन है !"

"क्यो डैडी-बिकास हमारा दुश्मन क्यों है?" हैरी दृढता के साथ बोला-----'‘विकास मेरा दोस्त है-सच्चा दोस्त ।"

"जैकी का लड़का होकर बेवकूकी की बाते करता है, नादान लड़के!-" जैकी गुर्रा उठा-"दोस्ती उससे होती है जो दुश्मन न हो । देश का दुश्मन, कभी दोस्त नहीं हो सकता । हर इंसान के लिए पहले देश है, बाद में सब कुछ । अपने उसी शेतान दोस्त के कर्मों से शिक्षा लो हेरी…उसने अपने देश का हित सोचा । सोचो, तुम भी सोचो! क्या अमेरिका को समाप्त करने से पहले उसने यह सोचा कि अमेरिका में उसका गुरू जैकी भी है? उसे मां की तरह प्यार करने वाली जूलिया भी है? तुम. . .तुम उसके दोस्त वनते हो!........

उसने यह सोचा कि तुम भी इसी अमेरिका मे रहते हो जिसका वह दुश्मन वन गया है ।"

"बिकास ने जो कुछ किया है, ठीक ही किया डैडी!” हैरो कठोर स्वर में बोला ।

"क्यो?” चीख पड़ा जैकी-''तुम्हारा दिमाग खराब हो गया हैरी !"

"मैं ठीक कह रहा हूँ डैडी !” हैंरी बोलता ही चला गया-----" जरा आप भी सोचिए! जिस तरह हमारे देश ने भारत में सी आईं ए का जाल फैला रखा है, जिस तरह हमारी सी आई

ए भारत का तख्ता पलट देना चाहती है । अगर उस तरह अमेरिका में किसी भारतीय जासूसी संस्था का जाल होता, अगर भारत अमेरिका का तख्ता पलटना तो.... तो. .आप क्या करते?”

"बको मत !", जैकी चीख पड़ा ।

"बक नहीं रहा हू डैडी, कड़वा सच कह रहा हूं ।" हैरी बिल्कुल बेखौफ कहता ही चला गया…" आप चाहे जो करते डैडी लेकिन मैं तो वही ,करता जो विकस ने किया है । अगर मेरे देश में भारत की जासूसी संस्था का जाल होता तो सचमुच मैं उसी तरह अपराधी बनकर भारत से बदला लेता, जैसे बिकास आज अमेरिका से ले रहा है !"

" हैरी .....!"

" चीखो मत डैडी!" हैरी गुर्रा उठा--- "सच्चाई सुनी तो बौखला उठे । आप ही सोचिए देशभक्ति से भी बडी एक भावना है…मानव-भक्ति! विश्व…भक्ति! आप केवल अपने देश को क्यों प्यार करते हैं, पूरै विश्व को प्यार कीजिए-पूरी मानव जाति के हित की सोचिए । माना कि आज विश्व अनेक देशो में बंटा हुआ है लेकिन हर देश में मानव रहता है डैडी! इन देशों में सहयोग भावना क्यो नहीं है? क्यो एक देश, दूसरे देश को खा जाना चाहता डै? किसी देश को क्या जरूरत पडी कि दूसरे देश में अपने जासूसों का जाल बिछाए?

" हैरी !" जैकी जैसे पागल होकर बूरी तरह क्रोध से चीख पड़ा

“तुम्हारे बिचारों से गद्दारी की बू आ रही है । अगर कोई और सुन लेगा तो सोचेगा, तुम विकस के साथी हो ।”

"अगर सच्ची बात करना गद्दारी है डैडी! तो समझ तो हैरी गद्दार है ।" हैरी जैसे पागल हो सा गया था…"माना डैडी कि आज विकास हमारा दुश्मन है । कसम मां के दूध की, अगर मेरे सामने… आ जाए तो उसे गोली मार दूं । लेकिन मेरा दिल जानता है कि सारा दोष उसका नहीं है । यमवह अगर अपने देशे केलिए अमेरिका का दुश्मन वन सकता है डैडी तो मै भी अपने देश के लिए उसे गोली से उडा सकता हूं लेकिन साथ ही अमेरिका को इस बात के लिए बाध्य कर दूंग । डैडी कि भारत से सी आई ए का जाल हटा लो ।"

जैकी हेरी को देखता ही रह गया।

हैरी का चेहरा तमतमा रहा था । जिस्म क्रोध से कांप रहा था । जैकी को लगा कि हैरी द्वारा कहा गया एक…एक शब्द सत्य है । उसे भी दिल-ही-दिल में मान लेना पडा कि यह ठीक है और यह उनका फर्ज है कि वे किसी भी तरह इस दुश्मन को समाप्त कर दे लेकिन यह बात भी अपनी जगह दृढ़ थ्री कि भारत में सी.आई.ए का जाल गलत है । मानव हित को देखते वह समाप्त होना ही चाहिए ।

जैकी यह सोचता ही रह गया और हैरी ने आगे बढकर विकास का फोटो उठाया, एक बार घूरा फिर एकदम उस फोटो को झटके से फाड़ दिया । फोटो के टुकडों को एक साथ मिलाकर चार करता हुआ बोला ।

"तुम मेरे देंश के दुश्मन हो विकास में तुमसे बदला लूंगा ।" ये शब्द कहते समय उसके चेहरे पर संसार भर की कठोरता उभर आई थी लेकिन...लेकिन...लेकिन जुलिया और जैकी ने बिल्कुल साफ देखा हैरी के चेहरे पर कठोरता अवश्य थी लेकिन उसकी आंखों में आंसू थे ।

जैसे उसके अपने ही कहे हुए शब्द उसके दिल में किसी तीर की भांति लगे हों!

न चाहते हुए भी जैकी और जुलिया तक की आंखो मे आँसू तेर गए ।

सर्जिबेण्टा निरंतर अपनी गति के'साथ मंगल ग्रह ही तरफ़ अग्रसर था । उसके एक विशेष कक्ष में विजय, अलफासे, जैक्सन, सुभ्रांत और पूजा उपस्थित थे ।
 
सुभ्रांत के तीनो सहयोगी बड्री सतर्कता के साथ सर्जिबेण्टा का चालन कर रहे थे ।

" बेटा लूमड़ मियां! ” विजय अलफांसे को बोर करने पर तुला हुआ था…" अब तक अपना दिलजला मंगल पर पहुंच गया होगा!"

"मेरे विचार से तो वह सिंगही की कैद में पड़ा होगा ।" सुभांत बोला ।

"अपने विचार की पोटली बनाकर हाजमे की गोली के साथ हजम कर जाओं प्यारे प्रोफेसर भाई!" विजय अपनी ही धुन में बोला---"अपने दिलजले के साथ जो साला लंबा कार्टून है न, वो चचा का बाप है ।"

"ज़ब वहां सिंगही सम्राट वना हुआ है तो भला कोई भी शक्ति उसका क्या बिगाड लेगी?" सुभ्रांत ने कहा ।

"वे तीनों महाशैतान हैं प्रोफेसर ।।" अलफांसे सुभ्रांत से बोला------" वे रसगुल्ले नहीं है जो सिगंही जीभ पर रखते ही हजम कर कर जाएगा ।"

"'इस बेकार की बहस में क्या रखा है मिस्टर अलफांसे!" अचानक जैक्सन बोल पडी-" हमें यह देखना चाहिए कि मंगल , तक पहुचने में अब कितना समय लगेगा ।"

" देखो मम्मी! साला अपना कित्तना बदमाश है!" विजय बोला-“खुदं तो साला एक्सप्रेस से निकल गया और हमें यहाँ बैलगाड्री में छोड़ गया । पता नहीं चरकचूं करती हुई कब मंजिल पर पहुँचे !"

"केवल पंद्रह दिन और लगने हैं मिस्टर विजय !" जैक्सन ने कहा ।

" विजय......!" अचानक, कक्ष में अशरफ की आवाज गूंजी…"कोईं हमसे संबंध स्थापित करने की चेष्टा कर रहा है ।"

"हाय !” विजय ने थर्ड क्लास ढंग से अपनी छाती पर हाथ मारा और एकदम उछलकर खड़ा हो गया----" कहीं साला अपना दिलजला तो नहीं है?" उसके साथ ही सब खड़े हो गये और चालक कक्ष की तरफ़ बढे । सबसे पीछे पूजा थी, वह अपने में गुम थी । जिस दिन से विकास गया था, न जाने क्यों-वह खुश रहना चाहकर भी खुश न रह सकी थी । जब वे सब चालक कक्ष में पहुंचे, सबसे पहले बिजय ट्रांसमीटर पर झुका ।

उसी पल. . . ।

जैसे दूसरी तरफ वाले का प्रयास एकदम सफ़ल हो गया हो यानी एकदम संबंध स्थापित हो गया । चालक कक्ष में लगी एक स्कीन पर झटका-सा लगा और उस पर एक आकृति स्पष्ट दिखाई देने लगी । एक झटके के साथ सबकी दृष्टि उस तरफ उठ गई ।

सवके दिल धक्क सेरह गए।

स्कीन पर सबके दिल का टुकड़ा था-विकास

पूजा का दिल बड्री तेजी से धड़क्ले लगा ।

विजय, अलफांसे, अशरफ, जैक्सन इत्यादि तो उस लड़के को देखते ही रह गए । कैसा सुदर लग रहा था! मासूम सा बेहद प्यारा लड़का, मस्तक पर ताज, मंगल सम्राट के रूप वह वहुत सुन्दर लग रहा था ।

“गुरु लोगों को मेरा चरणस्पर्श ।" विकस की आबाज कक्ष है में गूंजी ।

सब चौक पड़े, सबसे पहले बोला विजय ।

" अबे दिलजले, क्यों हमारे चरणों की दुर्गति करने पर तुले हुए हो? अरे हम तेरे नहीं, तू हमारा गुरु है । अबे प्यारे, ये तो बताओ ये माथे पर क्या लटका रखा है?"

"आपका बच्चा, मंगल सम्राट बन गया है गुरू!"

"हाय. . .यानी कि वनस्पति चचा की लुटिया डुबो दी ।"

" सिगंही दादा मेरी कैद में पड़े हैं गुरु! अब मंगल पर अपके बच्चे का शासन चल रहा है । आप क्यो चुप हैं क्राइमर अकंल कुछ बोलो । लगता है बच्चे से नाराज हो?"

" तुमने अपने गुरु को समझा नहीं विकास ।" अलफांसे गभीर स्वर मे बोला…" तुमने सोचा कि मैं तुम्हारे साथ धोखा करके विजय के सार्थ मिलकर तुम्हारे खिलाफ साजिश रच रहा हूं ।"

" जब मुझे पता लगा गुरू तो बड़ा दुख हुआ ।"

"तुम्हारी गलतफ़हमी बिकास ।" अलफांसे प्रभावशाली स्वर मे बोला-----"विजय के साथ वह साजिश नकली थी । वह तो मैने विजय से केवल इसलिए कहा था ताकि विजय मंगल की तरफ़ चलने के लिए तैयार हो जाए ।"

" सच गुरू ?"

"तुम मेरे दिल को क्या समझोगे विकास !"

"क्षमा करना गुरू-विकास जैसे एकदम पश्चाताप-सा करने लगा-"आपको गलत समझकर मैंने यह गलत कदमम उठाया । आपका वच्चा आपके चरणों में गिरकर क्षमा मांगता है गुरु! लेकिन आपके आशीर्वाद से आपका बच्चा आपकी अनुपस्थिति में भी सफल रहा गुरु । अमेरिका को मैने पहला सबक तो दे दिया है" ।

“अरे !" जैक्सन बोली------"क्या किया तुमने?"

" सब देखना चाहते हैं तो मैं दिखा रहा हूं ।" विकास ने कहा …"देखो गुरु ।"

इसके साथ ही स्क्रीन पर से विकास का चेहरा हट गया । अब वहां एक ऐसे इंसान का दृश्य उभर आया जो बिल्ली वन चुका था ।

कक्ष में मय्ऊं-मयाऊं की आवाज गुंजने लगी । सब बड़े ध्यान से उसे देख रहे थे, तभी विकास की आवाज गूंजी ।

" यह आप अमेरिका की धरती का दृश्य देख रहे है गुरु । यह व्यक्ति अमेरिका की मिलिट्री में मेजर के पद पर था लेकिन अब बेचारा बिल्ली वन चुका है । इसे किसी चूहे की तलाश है ताकि अपना स्वादिष्ट भोजन कर सके !"

" क्या मतलब?"

" मतलब यह गुरु कि ये पूरी तरह विल्ली वन चुका है !"

विकास की आवाज गूजी--“केवल यही नहीं बल्कि अमेरिका के अनगिनत अधिकारी बिल्ली बने चूहों को दूंढ रहे हैं । इस खेल का श्रीगणेश मैंने सी आई ए. के चीफ मिस्टर फ्रिदतोफ से किया था । इस समय पूरे अमेरिका मे हा-हाकार है । वहां के बच्चे-बच्चे की जुबान पर आपके बच्चे का नाम है ।"

" यह क्या बेवकूफी है दिलजले?" कांप उठा विजय ।

"यह बेवकूफी नहीं गुरु, मेरा प्रण है जो पूरा होने जा रहा है ।" बिकास का सख्त स्वर उभरा-"आपके बच्चे ने आपके चरणों की सौगंध ली है कि अमेरिका से बदला लेगा और मेरा वहीं क्रम जारी है । गुरु ! एक बार विकास को अमेरिका ने प्रलयंकारीके रूप में जाना था , इस बाऱ बिनाशदूत के रूप में जानेगा ।"

" इसका का मतलब यह कि अब तुम पूरी तरह अपराधी वन गए ?"

“अब नहीं गुरु, अपराधी तो मे बहुत पहले वन चुका हूं ।" बिकास सपाट स्वर में कहता गया…“जिसको भी मैंने बिल्ली बनाया, हरेक की जेब में मेरा एक पत्र है और वह पत्र अमेरिकी के हर अखबार मे छाया हुआ है।"

……“तो तुम माने नहीं !" . . .

" आप भी वह पत्र पढो गुरू !" विकास के इन शब्दों के साथ ही स्क्रीन के दृश्य मेँ परिवर्तन आया।

बिल्ली बने हुए मेजर के स्थान पर टाइप किया…हुआ एक पत्र स्क्रीन पर नजर आने लगा । सबने बड़े ध्यान से और तेजी के साथ

उसे पढा । कक्ष में उपस्थित कोई भी इंसान नहीं था जो पड़ते-पड़ते कांप न उठा हो ।

कुछ ही देर बाद स्क्रीन के दृश्य में परिवर्तन आया । अब स्क्रीन पर विकास नजर आने लगा ।

तभी अलफांसे …"मैं नहीं जानता था विकास, तुम इस तरह की हरकत कंरोगे । विश्व की निगाहों में मैं तुम्हें अपराधी नहीं बनाना चाहता था ।"

“अब तुम अपराधी वन गए हो दिलजले । भारत से अब तुम्हारा कोई नाता नही ।" विजय गुर्रा उठा !"

"‘यह मत समझे विजय गुरु कि विकास आपके दिल की भावनाओं से अनभिज्ञ है । विकास जानता है कि आपने विकास को भारत का ही नहीं बल्कि विश्व का एक महान जासूस बनाने का स्वप्न देखा है । विकास जानता है गुरु कि विकास के लिए अपके दिल के लिए में अथाह पेम है । विकास यह भी जानता है गुरु कि विकास को बर्बाद होते, आप नहीं देख सकते ।"
 
" सब कुछ जानते हुए भी तुमने मेरे सारे सपनो को चूर-चूर कर दिया ।"

"नहीं विजय गुरु नहीं! आपके सपने साकार होगे, आपकी इच्छाएं पूरी होंगी । आपके साए में पलकर विकास जासूस बनेगा गुरू--विश्व का सबसे बड़ा जासूस !"

"अब तो तुम सबसे बड़े अपराधी बन गए हो दिलजले! " विजय बोला------"सारा विश्व तुम्हारे पीछे पड़ जाएगा, विश्व का एक-एक इंसान तुम्हारे खून का प्यासा होया । तुमने अपना जीवन बर्बाद कर लिया विकास ! तुम्हारे इस अपराधी जीवन को मैं स्वयं अपने हाथ से गोली मारकर समाप्त कर दूगा । तुम्हारा खून मेरे हाथों होगा विकास! तुम्हें मैं मारूंगा ।"

" नहीं गुरु! आपका विकास जासूस बनेगा ।"

" अब ऐसा नहीं हो सकता विकास!" विजय के स्वर में तड़प थी------" अब तो पूरे विश्व के लिए तुम अपराधी हो । अमेरिका यूएनओ. के जरिए तुम्हें भारत से ले लेगा, हम भी तुझे

बचा नहीं सकेंगे ।"

“नहीँ गुरु नहीं!" विकास का दुढ़ स्वर उभरा-------" यकीन करो मेरा, यह सब नहीं होगा । विकास की वापसी होगी गुरु! विकास भारत आएगा । आपके बच्चे को कोई रोक नहीं सकेगा गुरु! विकास फिर अपके चरणों में आएगा, आपके साए में जासूस बनेगा । यू. एन .ओ भी आपके बच्चे का कुछ बिगाड़ नहीं सकेगा गुरू !"

" तुम इतने आगे बढ चुके हो विकास कि वापस नहीं जा सकते ।" विजय के स्वर में जैसे पीड़ा थी ।

"आपका बच्वा वापस आएगा गुरु ! ज़रूर आएगा । कोई नहीं रोक सकेगा ।" विकास दृढता के साथ कहता ही जा रहा था-----"अगर अपराधी बना हूं तो कुछ सोचकर । आगे तो जरूर बढा हूं गुरु! लेकिन मेरा स्थान आप ही केवल में है ।"

विजय गंभीर हो गया था ।

जव से जैक्सन ने अमेरिका की हालत देखी थी, तब से वह भी गंभीर थी ।

पूजा तो जैसे एकटक स्क्रीन पर उभरे विकास को देख रही थी ।

अलफांसे भी आश्चर्यजनक रूप से चुप था ।

अशरफ सोच रहा था-कहां पहुच गया वह लड़का । इतने वड़े--वड़े शातिरों को धोखा देकर आखिर अपनी मंजिल पर पहुच ही गया । यह विकास का कैसा रूप सामने आया है । जैसा अक्सर सिंगही और जैक्सन का आया करता है ।

" तुम चुप क्यों हो पूजा?” अचानक बिकास पूजा से, संबोधित हुआ ।

चौकी पूजा, दिल में मीठा-सा दर्द उठा । बोलना चाहा मगर बोल न फूटा ।

" जिस दिन से गए हो बेटे दिलजले, उसी दिन से इसकी हालत विन मजनू की लैला जैसी है ।"

" माफ़ करना पूजा !" विकास गंभीर स्वर में पूजा से बोला-"गुरु लोगों की हरकतों के कारण तुम्हें भी धोखा देना पडा । लेकिन तुम उदास मत होना । मैं तुम्हारा इतना ख्याल नहीं रख सकता जितना गुरू लोग रखेंगे ।"

पूजा में तो कुछ बोलने का साहस ही नहीं था परंतु विजय अवश्य बोल पडा ।

" क्यों वे दिलजले यहां भी कन्याबाजी से बाज नहीं आया और वो भी गुरूओं के सामने ही !"

" चाहे.मैं कछ भी करू गुरु लेकिन छुपाता नहीं हूँ । सुनो गुरू, . कान खोलकर …मैं पूजा से प्यार करता हूं इसलिए नहीं कि बह एक नारी और मै एक पुरुष हूं बल्कि इसलिए कि पूजा भी एक वहुत बड्री देशभक्त है-बहन के दिल से पूछो गुरु कि भाई को वह कितना चाहती है लेकिन जिस बहन ने देश के हित हेतु भाई को गोली मारी हो, क्या वो प्यार की हकदार नहीं है? गुरु ऐसे ही देशभक्तों प्यार की जरूरत है ।

पूजा, पूजा के योग्य है गुरु । अगर पुजा के त्याग को यह कहकर टाल देगे कि पूजा एक नारी है और आप नारियों से दूर भागते है तो यह आपकी भूल होगी । आप यह भूल जाइए कि पूजा एक नारी है । उसके त्याग को याद रखिए, उसके बलिदान को याद रखिए।”

"एक दिन ऐसा जाएगा कि तुम त्याग को भूल जाओगे और पूजा याद रहेगी ।"

और......... उधर विकास की बाते सुनकर पूजा की आखों में आसू आ गए !!

. . . . न जाने क्यो?

तभी विकास की आवाज आई------"खैर, आप लोग पद्रह दिन पश्चात मेरे पास पहुंच जाएंगे! तब तक के लिए विदा------!"

" अबे सुन तो दिलजले!" विज़य एकदम बोला।

"बोलो गुरु ।"

"जरा यह बताओ कि अपनी वापसी की बात तुम इतने दावे से…कैसे कर रहे हो ?"

"वक्त बताएगा गुरु मेरे पास पूरा प्रबंध हैं ।"

इस अतिम वाक्य के साथ ही विकास का चेहरा गायब हो गया ।

सबके दिल धक्क से रह गए, कुछ पलों के लिए तो वहां गहन सन्नाटा छा गया।

मानो कोई मौत होगई हो।

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सिंयुडाड ज्यूरेज ।।

यह नाम था अमेरिका के एक प्रमुख नगर का, संक्षेप में लोग उसे ज्यूरज कहा करते थे ।

अभी एक ही घटा पूर्व तो ज्यूरेज की स्थिति पूर्णतया सामान्य थी । प्रत्येक कार्यं दिनचर्या की भाति विनी किसी विरोध के चल रहा था ।

लेकिन .........

अभी तीस ही मिनट पूर्व वहां आश्चर्यजनक परिवर्तन हुआ था ।

आधा घंटां पूर्व वातावरण बिल्कुल साफ था । वेज्ञानिक, भविष्यवाणी भी यहीं थी कि वातावरण साफ़ रहेगा लेकिन अचानक लोगों ने देखा कि गगन पर घने बादल छाने लगे ।

साधारण जनता ने पहले तो कोई ध्यान नहीं दिया लेकिन वैज्ञानिक अवश्य चौके थे और शीघ्र ही ये बादल साधारन जनता के लिए भी चौकने का कारण बन गए!

ये बादल, प्राकृतिक बादलों से कुछ पृथक थे ।

बादल के स्थान पर अगर उसे धुएं की संज्ञा दी जाए तो अधिक उचित होगीं ।

साधारणतया धरती से जितनी ऊचाई पर बादल होते हैं, उसके मुकाबले यह धुआं कम ऊँचाई पर आबारा-सा घूम रहा था ।

धुआं एकदम काला था-काजल की भांति नितांत प्याला काला ! अपारदर्शी ।

पहले यह धुआं कछ कम था । परंतु प्रत्येक पल वह बढता ही गया यानी तीस मिनट के अंदर ही धुआँ बढकर इतना गहन हो गया कि संपूर्ण ज्यूरज अंधेरे की चादर से लिपट गया ।

ज्यूरेज के निवासी चमत्कृत थे।

दिन के....... दिन के बारह बजे , रात के बारह बजे का समा देखने को मिल रहा था । प्रत्येक घर की लाइट जल गई । सरकारी रोड लैंप भी जगमगाने लगे । ऐसे आसार नजर आ रहे थे मानो यह धुआं अभी गरजकर बरसेगा ।

लोग भयभीत, चमत्कृत, परेशान और उत्सुक थे ।

मौसम विभाग के दिमागी पुर्जे ढीले पड़ गए थे ।

सारा ज्यूरज गहन अंधकार के आगोश में समा गया ।

दफ्तर बंद हो गए ।

मिलो में काम रुक गया । सभी कार्य असामान्य हो गया । लोग जल्दी-जल्दी अपने परिवार के पास पहुचने का प्रयास करने लगे ।

अचानक काजल-से काले बादलों में जोरदार गर्जना हुई ।

ऐसी गर्जना जैसी कभी किसी बादल मे नहीं हुई । बिजली चमकने से गर्जना तो होती थी लेकिन इतनी तेज कभी नहीं । एक-एक इंसान काप उठा । एक पल के लिए ठीक ऐसा ही चमचमाता हुआ प्रकाश जैसा बिजली कौंधने पर होता है । वह प्रकाश एकदम गायब हो गया घुप्प अंधेरा ।
 
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