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बिनाश दूत बिकास-विकास की वापसी complete

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धनुषटंकार पूजा को एक विशेष कक्ष में ले गया । कक्ष में पहुंचकर उसने दीवार पर लगा बटन दवा दिया । बटन दबाते ही फर्श पर थोड़ा-सा हिस्सा अपने स्थान से हटता चला गया । वहां लोहे की सीढ़ियाँ नजर आने लगी ।

पहले धनुषटंकार और उसके पीछे पूजा उतरते चले गए । सीढियां एक लंबी सी गेलरी मे जाकर समाप्त हुई ।

वे दोनो चुपचाप गैलरी मे बढ़ते रहे । गैलरी के दोनो और कुछ कक्ष वने हुए थे । धनुषटंकार ने अपने सूट की जेब में एक चाबी निकाली और कक्ष नंबर पांच का ताला खोलकर उसमें प्रविष्ट हो गया । वह कक्ष खाली था । धनुष्टंकार ने कोट की ऊपरी जेब से एक अजीब सी आकृति की चाबी और निकाली तथा फर्श पर एक कोने में बने नन्हें-से छिद्र में लगातार तीन बार दाई तरफ घुमाई । उसके घूमाते ही कक्ष के सामने की दीवार अपने स्थान से हट गई । पूजा को लेकर वह उसी में प्रविष्ट हो गया और उस कक्ष में पहुचकर धनुषटंकार ने वही चाबी बाईं ओर एक दीवारं के छेद में फंसाकर पुन: उसी प्रकार तीन बार घुमाई । इस वार उस कक्ष का फर्श हट गया एक बार उन्हें पुन: लोहे की सीढियां तयं करनी पड़ी । इस बार एक अन्य गैलरी में पहुच गए ।

यह गैलरी भी एकदम सूनी पडी थी ।

"बड़े लंबे तहखानों में कैद का रखा है ?" पूजा ने कहा ।

उत्तर में धनुषटंकार ने डायरी पर लिखा----" पूछो मत पूजा डार्लिग, एक-से-एक धुरंधर इंसान यहाँ कैद है । अगर कैद इतनी सुरक्षित न होती तो सिगंही जैसा आदमी भला अभी तक कैसे ठहर जाता?"

इस गैलरी के दोनों और कक्ष बने हुए थे लेकिन ये कक्ष अन्य कक्षों की अपेक्षा अधिक मजबूत थे----क्योंकि फौलाद के बने हुए थे ।

कक्ष के समीप पहुँचकर धनुष्टंकार ने अपनी जुराब से एक विशेष चाबी निकाली और कक्ष के फौलादी द्वार में वने एक छिद्र में डालकर पूरे पांच बार झटका दिया, तब वह भारी दरवाजा खुला ।

पूजा और धनुष्टंकार ने देखा ---- ठीक सामने

विजय बेहद मोटी जंजीरों मे कैद था । उसे फौलादी फर्श पर जंजीरों मे लिटाया गया था ।

प्रत्येक जंजीर का फौलादी सिरा कमरे के फ़र्श में गड़े मजबूत कुंदों तक गया था । बिजय केवल करवट इत्यादि लेने के लिए हिल सकता था ।

पूजा ने देखा…कमरा अंदर से ठीक किसी टंकी की भाति गोल था । दीवारे एकदम चमकदार थी, मानों स्टील की वनी हो । किसी भी दीवार में सरलता से अपना मुंह देखा जा सकता था ।

खोलने से पहले घनुषटंकार ने रिबॉंल्वर निकालकर पूजा की तरफ़ तान दिया था ताकि विजय को पूरी तरह दिखा सके कि उसे कैद करके लाया गया था ।

जंजीरों में जकड़े विजय ने करवट ली । उसकी ओर देखा एकदम बोला । "

" आओ ---- आओं , बंदर मियाँ क्या हाल है?"

'बंदर' शब्द सुनते ही धनुषटंकार ने बिजय को इस तरह घूरा जैसे खा जाएगा । लेकिन कदाचित इस बात का लिहाज कर गया कि विजय उसका स्वामी था वरना बंदर कहने वाले की कनपटी वह गर्म कर देता था । एक मिनट तक वह विजय घूरता रहा,

फिर रिवाल्बॅर के संकेत से उसने पूजा को फर्श पर कुछ कडो के बीच लेटने का संकेत किया ।

कडो में जंजीरों के टुकडे फसे हुए थे । पूजा उन कडो के बीच लेट गई ।

एक बटन दबाने से ये जंजीरे कडो के बीच पड़े इंसान को अपने में जकंड़ लेती थी ।

धनुषटंकार वह बटन दबाने के लिए जैसे ही मुड़ा उसी पल एक कमाल हुआ... पूजा ने जंजीर का एक दुकड़ा पूरी शक्ति के साथ विद्युत गति से घुमाकर धनुषटंकार के जिस्म पर मारा ।

पूजां से इस प्रकार की उम्मीद तो स्वप्न में भी नहीं थी, क्दाचित्त इसीलिए वह मात खा गया ।

झन्नाती हुई जंजीर उसके जिस्म पर पडी ।

उसके कंठ सेर एक कराहट सी निक्ली और दूसरी ओर पलट गया ।

रिवॉल्वर उसके हाथ से छूटकर कक्ष के फर्श पर गिर गया । पूजा के जिस्म में जैसे बिजंली भरं गई थी ।

बडी तेजी के साथ उसने जंप मारकर धनुषटंकार को दबोच लिया ।

बेचारा धनुषटंकार । उसे संभलने का अवसर भी नही मिला ।

पूजा तो इस समय जैसे भयानक शातिंर हो उठी थी ।

उसने धनुषटंकार को सिंरसे ऊंचा उठाया और पूरी शक्ति से फर्श पर दे मारा ।

धनुषटंकार के कंठ से एक चीख निकल गई । और इस प्रकार--पूजा ने एक बार भी तो धनुषटंकार को संभलने का अवसर नहीं दिया ।

उसने धनुषटंकार इतनी मार लगाई कि अंत में वह बेहोश होने के लिए बाध्य हो गया ।

जंजीरों में ज़कड़ा हुआ व्रिजय चमत्कृत सा यह सव कुछ देख रहा था।

धनुषटंकार से छुटकारा पाकर पूजा ने उसकी जेबों की तलांशी लेनी शुरू की ।

" वाह! ! पूजा देवी!" विजय वहां पडा-पड़ा प्रशंसनीय स्वर से बोला-“यानी कि क्या पैंतरे दिखाए हैं! जी चाहता है एक गर्मागर्म झकझकी सुना दु !" विजय अपने ही मे था !

पूजा तेजी के साथ उसकी तरफ़ घूमी, उसकी उन्हें लाल हो रही थी ।

चेहरे पर घृणात्मक भाव वे । वह विजय को बड़ी खूंखार निगाहों से घूरती हुई गुर्राई-“अभी तुमने देखा ही क्या है, कमाल तो अब देखना ।"

उसका इतना कहना था कि विजय के मस्तिष्क को एक तीव्र झटका लगा । बरबस ही उसके मुह से निकला--" अरे, .मम्मी!"

“तुमने ठीक पहचाना ।" पूजा बोली, जो वास्तव में जैक्सन ही थी-"पूजा का मेकअप करने अतिरिक्त मेरे पास कोई चारा नहीं था । मेकअप की तारीफ तुम्हें करनी होगी क्योंकि वो खतरनाक लडका भी नहीं पहचान सका ।”

" अजी लड़के साले को गोली मारो!" विजय बोला----" हम यानी उस लड़के के गुरु नहीं पहनाने । जब तुमने कमाल दिखाने शुरू किए हम यही सोचते रहे कि पूजा जैसी मासूम लड़की इतने खतरनाक खेलु कैसे जान गई? कसम खाल लंगोटे चाले की, हम तो तुम्हें उस समय पहचाने जब तुम हम पर भी गुर्राकर आई । उस समय तुम्हारी प्यारी-प्यारी आंखों ने हमें बता दिया कि तुम पूजा नहीं हमारी मम्मी हो !"

...................

कहने के एकदम बाद ही बडी अदा के साथ विजय ने बाई आंख दबा दी ।

जैक्सन के होंठों पर एक प्यारी मुस्कान नृत्य कर उठी, फिर बोली---" बोलो विजय, विकास का तख्ता पलटने में मेरा साथ दोगे?” यह प्रश्न करते समय जैक्सन ने बड़े ध्यान से विजय का चेहरा पढा ।

"अरे क्या बात करती हो मम्मी?" विजय चहका…"तख्ता नहीं, हम तो उसे ही पलटने के मूड में है । तुम हमे वहाँ तक ले चलो । वैसे बाई दी वे, तुम्हें लड़के के अपराधी बनने में क्या दिक्कत है? वह तुम्हारी मैंजोरिटी में आ रहा से तुम खुद ही उसे यहा तक लाई थी?" विजय ने प्रश्न किया ।।

" मै कितनी भी बड्री अपराधी सही मिस्टर विजय!" जैक्सन ने सफेद झूठ बोला-----" लेकिन न जाने क्यों इस मासूम से प्या र सा होगया है । वह तो अपना जीवनं बर्बाद करने पर तुला हुआ है , लेकिन मैं कभी ऐसा नहीं चाह सकती ।"

" वेऱी गुड मम्मी !" विजय पुन: चहका'-"यानी कि तुम्हारे विचार हमारे विचारों की केटली में आ मिले हैं ।"

" अब जैसा भी तुम समझे !”

"तो फिर जल्दी हमे आजाद करो ।"

" अलफांसे इत्यादि कहां हैं?" जैक्सन ने प्रश्न किया ।

" सब यहीं कैद किए गए हैं ।" विजय ने कहा…“ज़ल्दी से सामने वाली दीवार पर लगा नीचे से तीसरा बटन दबा दो, इन जजंरों का संबंध उसी से है । बटन दबाते ही हम आजाद हो जाएंगे ।"

जैक्सन ने वेसा ही किया और विजय आजाद होगया ।
 
धनुषटंकार की तलशी लेकर उसकी जेब से समी चाबियां और उसका करामाती प्लास्टिक का धनुष तीर और माउथआर्गन निकाल लिया था ।

“सभी कक्षों के ताले इस चाबी से खुल जाएंगे ।" विजय ने उस चाबी की ओर संकेत करके कहा जिससे धनुषटकारं ने जेक्सन के सामने इस कक्ष का लॉक खोला था ।

धनुष्टंकार का धनुष विजय ने संभाला। रिवॉल्वर जैक्सन ने और कक्ष से बाहर गैलरी में आ गए । उसके बाद जैसे कोई कठिनाई रह ही नही गई थी ।

अशरफ, अलफांसे,सुभ्रांत और उसके सहयोगिर्यों को आजाद कर लिया गया ।

तब विजय ने कहा । …… "क्या उस चमार चोटी के चचा को भी आजाद करा लेना चाहिए?"

" मेरा बिचार यह है कि उसे यहीँ छोड़ दो !" जैक्सन ने कहा- "अब विकास का तख्ता पलटने के लिए-हम लोग ही काफी है क्योंकि उससे यह खतरा है कि वह विकास के बाद फिर मंगल-सम्राट बनने का प्रयास न करे और इस स्थिति में वह संपूर्ण विश्व के लिए खतरा वन सकता है ।"

" मै तुम्हारे इस विचार से सहमत नहीं हूं मम्मी ।" विजय ने ने जैक्सन की बात इसलिए काटीं क्योकि उसके दिमाग में आ गया था कि कहीं ऐसा तो नहीं कि जैक्सन ही मगंल सम्राट बनना चाहती हो! इस सुरक्षा के लिए सिगंही को आजाद करना उचित ही रहेगा । यही सोचकर यह बोला-----" यह नहीं सोचना चाहिए कि विकास का तख्ता उलटने के लिए हम काफी हैं क्योंकि यहां उसकी शक्तियां बहुत अधिक बढ गईं । सिंयही की शक्ति भी हमारे साथ हो जाए तो क्या बुराई है और जहां तक सिगंही के मंगल सम्राट बनने का भय है, उसका इलाज यह है कि हम यह हैडक्वार्टर उड़ा देगे, फिर न रहेगा बास न बजेगी बांसुरी ।"

"तुम्हारा क्या विचार है?" जैक्सन ने अंलफांसे से प्रश्न था ।

अलफासे भी विजय के प्वाइंट कौ समझ गया था इसलिए बोला…'बिज़य की बात उचित है ।"

उसके बाद सबकी राय विजय से मिल गई । जिस कक्ष में सिगंही कैद था उसे खोला गया ।

सिगंही ने उन सबको कक्ष में प्रविष्ट होते देखा और अभी बोलना चाहता था कि पहले बिजय बोल पडा ।

" कहो प्यारे वनस्पति चचा! डालडा के डिब्बे बने हुए हो ।"

"वेटे,…बड़े मजे में हूं ।" मुस्कराकर सिंयही बोला…“बड़े चहक रहे हो ।"

" चहकने की तो बात है चचा !" विजय बोला------" जरा से लड़के ने बड़े बड़े धुरंधरों की मिट्टी पलीत कर दी है ।"

"उस अकेले की कुछ बिसात नहीं है बेटे ।" सिगंही ने कहा---"लेकिन समझना पडेगा कि उनके साथ जो कार्टून ट्राइप जानवरं और बंदर है बड़े करामाती हैं । वह जो कुछ भी कर . रहा है, उन्हीं के बूते पर! "

" चचा ! इतना असहाय तो तुम्हें मेने कभी नहीँ देखा ।" विजय ने उसे चिढाने वाले स्वर में बोला-------"इतने दिन से यहां पड़े हो तुम कुछ भी नहीं कर सके?"

“ये कैद मैने ही बनवाई थी बेटे! बैसे मैंने सुना है, आप लोग भी काफी दिनों से यहां आराम फरमा रहे है !" सिंगही के होठों पर चिंर-परिचित मुस्कान थी ।

" चचा ! छोडो इन बातो को । अब. ये बताओं कि तुम्हारे साथ क्या किया जाए?"

“छोड्रो भी विजय! " काफी देर से शांत ख़ड़ा अलफांसे बोला------" समय बहुत कीमती है । अर्गर विकास को मालूम है गया तो सारा प्लान चौपट हो जाएगा ।"

विजय को अलफांसे की बात् उचित ही लगी । अतः सिगंही को भी जाजाद कर दिया गया । .

उसे भी सारा प्लान समझा दिया गया । अंत में विजय सभी से संबोधित होकर बोला ।

"'एक बात सब कान खोलकर सुन लो, वह यह कि अगर किसी ने लड़के की जान लेने की कोशिश की तो मैं सबसे पहले उस जान लेने वाले का बंटाधार कर दुंगा ।"

उसके इस वाक्य पर सबने एक-दूसरे को देखा, फिर जैक्सन बोली--" कया मतलब? तुम तो यह तक कह चुके हो कि तुम अपने हाथ से विकास की हत्या करोगे ?"

" विकास की नहीं मम्मी, बल्कि अपराधी बिकास की ।" विजय ने कहा'--"लेकिन अगर अपराधी विकास की हत्या नहीं कर सकूंगा, तब विकस की हत्या करनी आवश्यक हो जाएंगी ।

“मैं तुम्हारी इस गोलमोल बात का मतलब नहीं समझ. पाया?" अलफांसे ने कहा ।

" मुंग की दाल में भीमसेनी काजल मिलाकर खाया करो लूमड़ भाई, तब मेरी बात आसानी से तुम्हारी समझदानी-में दाखिल हो जाया कृरेगी ।" विजय बोला-"मेरा मतलब सिर्फ इतना है कि तुम, जानते हो कि लड़का बार बार ये कह-रहा है कि अपराधी बनने के बाद भी वह भारत लौटेगा तो भी दुनिया उसका कुछ नहीं बिगाड सकेगी अब जरा बुद्धि के पट खेलकर ये सोचो कि वो हमारा चेला है । कोई भी बात तथ्यों के साथ कहता है । संभव है वास्तव में उसके पास कोई ऐसा प्वाइंट हो. .और हम सबका उद्देश्य केवल यही है कि विकास वही बन जाए जो यह पहले था । अगर यह वहीँ बनता है तो ठीक है और अगर वह अपनी जिद पर अड्रा रहता है तो उसका अंत मेरे हाथ से निश्चित है !"

विजय की बात भली प्रकार सब समझ गए ।

उसके बाद बिकास के विरुद्ध इन लोगों का यह ग्रुप चल पड़ा ।

सारा कार्य एक योजना के अंतर्गत होना था ।

...............................

मंगल के सम्राट के रूप में विकास सिंहासन पर, विराजमान था ।

टुम्बकटू उसके दाईं ओर खड़ा अपनी अजीबो-गरीब सिगरेट में कश लगा रहा था ।

दरबार पूरी तरह भरा हुआ था ।

बीचो बीच कुछ कुर्सियों पर बंदी के रूप मे विश्वभर के जासूस बैठे थे । उनके चारों तरफ सशस्त्र लोग उल्टे खड़े हुए थे । जब से मंगल की धरती पर कदम रखा था, तब से उन्हें कुछ भी करने का लेशमात्र भी अवसर नही मिला था ।

मंगल की धरती पर कदम रखते ही उन्हें टुम्बकटू और जाम्बू के साथियों ने न केवल कैद कर लिया था बल्कि उनके सभी शस्त्र भी अपने कब्जे में कर लिए थे ।

दरबार मे उपस्थित अन्य लोगों के साथ साथ विश्व के जासूसों की दृष्टि मी विकास पर जमी हुई थी ।

माइक सोच रहा था यह 'ज़रा-सा लड़का कहां-से-कहाँ पहुंच गया?

ग्रीफित के दिमाग में था कि लडका जो कुछ कर रहा है वह ठीक नहीं कर रहा है ।

चंगेज खा तो विकासं को सामने देखकर भी यह विश्वास नहीं कर पा रहा था कि यहीँ वह मासूम लडका है जिसने पूरे अमेरिका की नाक मे दम कर दिया है ।

अख्तर, हैबलकर और फांगसांग के दिलों में विकास के प्रति ईष्यों हो रही थी ।

रहमान न जाने क्यों विकास से सहानुभूति रखता था ।।

इंजलिग और क्लार्क रॉबर्ट तो विकास के सौंदर्य पर मुग्ध थे ।

ब्लेक ब्वाॅय सोच रहा था कि आखिर इस लड़के को विश्वभर के भेड्रिए-रूपी जासूसों से कैसे बचाया जा सकता है, साथ ही उसका दिमाग ठिकाने कैसे लाया जा सकत्ता है?

और बागरोफ ।।

वो बागारोफ ही क्या जो एक पल भी चुप रह जाए. जब से वह इस दरबार में विकास के सामने आया था, एक लाख उनहत्तर हजार गालियां सुना चुका था और बराबर चालू था ।

" बेटा फूकनी के! एक बात कान खोलकर सुन ले या तो ये मार-काट करनी बंद कर दे अन्यथा हम तेरा मुरब्बा वना देंगे ।"

--"पहले भी कह चुका हू ग्रांड अब्बा कि मेरे देश से सी.आई.ए का जाल हटवा दो, मान जाऊंगा ।"

“वह बाद में सोचने की बात है, ऊंटनी की औलाद ।" बागारोफ जैसे एकदम गर्म हो गया------“अगर नहीं माना तो ये समझ ले कि हम तुझे मंगल से उठाकर धरती पर फेंक देगे ।"

कुछ देर तक उनके बीच ऊटपटांग बाते होती रही, फिर अचानक विकास ने उनसे ध्यान हटाकर टुम्बकटू से कहा ।

"लंबू अंकल! धनुषटंकार अभी तक नहीं आया ?"

"आता ही होगा बापूजान !" टुम्बकटू ने धीरे से लहराकर कहा ।

" आप जरा देखो लंबू अंकल !" विकास ने कहा---" कहीँ कोई गडबडी तो नहीं है?”

"अजी गडबडी करने वाले की टांगे न तोड़ दूगां ।" टुम्बकटू ने अपने पतले-दुबले जिस्म को फुलाने की चेष्टा कंरत्ते हुए कहा--- “अभी देखकर आता हू कि क्या राग है । बैसे बापूजान स्वन सुन्दरी नजर नहीं आ रही?"

“अपने कक्ष में होगी ।"

"कहीँ वो किसी तरह की गड़बड्री न कर दे" । टुम्बकटू ने कहा……"सबसे पहले उसी को देखता हूं।" कहकर टुम्बकटू वहां से चला गया ।

तभी बिकास ने एक नजर सारे दरबार पर डाली प्रभावशाली स्वर में बोला----दरबार की कार्यवतम्ही भी शुरू की जाए !"

तभी जम्बूरा अपने हाथों पर चलता हुआ थोड़ा आगे आकर आदर के साथ बोला-----“सबसे पहले आज दरबार में मैँ अपने और अपने कुछ साथियों की एक प्रार्थना महामहिम के सामने रखना चाहता हू ।"

"बोलो !" विकास ने कहा…“ उचित होने पर मानी जाएगी !"

“हम लोग महामहिम सिगंही के दर्शन करना चाहते है ।"

“जाम्बूरा !" विकास खतरनाक स्वर में गुर्रा उठा-----" ये वेवकूफी की प्रार्थना करने का क्या मतलब? महान सिगही की ओर से पहले ही घोषणा की जा चुकी है कि वे किसी नइं ईजाद में व्यस्त है ।

"हम जानते हैं महामहिम! " जम्बूरा ने उसी आदर के साथ कहा----" लेकिन हम क्षणमात्र के लिए उनके दर्शन करना चाहते है !"

" आखिर ये जिद क्यों?” गुर्राया बिकास-------" तुम जानते हो कि दरबार में जिद की सजा क्या?"

अभी जम्बूरा कुछ कहना ही चाहता था कि अचानक दरबार में टुम्बकटू की आवाज गूंजी ।

"ठहरो विकास । आज़ दरबार विसर्जित कर दो ।"

"क्यो ?” कहते हुए विकास की निगाह दरबार के द्वार की ओर उठ गई ।

दरवाजे पर दृष्टि पढ़ते ही विकास बुरी तरह सिंहासन से उछल पड़ा । उसकी आखें वहीं नीची होकर रह गई ।

वहाँ टुम्बकटू खड़ा था, उसके साथ पूजा भी थी । पूजा को यहा देखकर ही वह बुरी तरह उछल पड़ा था ।।
 
पूजा की हालत भी पूरी तरह अस्वस्थ थी । वह बुरी तरह रो रही थी । अचानक ही मुह से निकला------" क्या हुआ पूजा, धनुषटंकार कहा गया तुम्हारे कपडे ? कपडे क्यों बदले ?"

"ये समय बातों मे खोने का नहीं हैं विकास! " टुम्बकटू तेजी के साथ बोला----"घपला हो चुका है । समय बहुत कम हैं । जैक्सन पूजा के मेकअप में तुम्हारा पास आई थी ।"

…"क्या......!” विकास चिहुक उठा---------"क्या बक रहे हो तुम ?"

" ये क्या घपला है महामहिम !" जान्बूरा के स्वर मे आदरात्मक भाव एकदम गायब हों गया… “महामहिम सिगंही कहां है ? "

" बको मत ।" पागल-सा होकर विकास दहाड़ उठा ।

“अब यहां तुम्हारे आदेश नहीं चलेगे बेटे!" अचानक वहां सिगंही की अन्दाज गुजीं----"अब तुम जान्बूरा को चुप नहीं र्करा सकते । एक बार फिर पासा पलट चुका है ।"

सबसे बूरी तरह चौका विकास ।

सबने इधर-उधर देखा ।

सिंगही कहीं भी नजर नहीं आया ।

विकास के दिमाग में यह बात तेजी से र्कोंध गई कि बड़े बड़े शातिर जो उसकी कैद में थे आजाद हो गए स्थिति उसके हाथों से निकल गई है ।

" जाम्बूरा! जैक्सन ने जो तुमसे कहा था, बह एकदम ठीक है ।" सिगंही की आवाज गुजीं--------" यह तुम्हारा दुश्मन है !"

सारे दरबार में जैसे सनसनी-सी फैल गई ।

एक बार को तो बिकास का दिमाग कुंठित होकर रह गया ।

उसकी समझ में नहीं आया कि इस बिगडी हुई परिस्थिति में वह क्या करे? लेकिन शीघ्र ही संभलकर चीखा ।

“जाम्बू वक्त जा गया है…सिंगही के आदमियों को खाक में मिला दो ।”

-"टकराव से कोई फायदा नहीं विकास !" दरबार के एक अन्य द्वार से अंदर प्रविष्ट होता हुआ सिगंही गर्जा---- “अब तुम कुछ नहीँ कर सकोगे। तुम्हारे विजय और अंलफासे जैसे गुरु तुम्हारे साथ बगावत कर चुके ।"

सिगंही के हाथ में एक टामीगन दबी हुईं थी ।

पहले द्वार पर टुम्बकटू और पुजा खड़े हुए थे ।

पूजा बेचारी तो मासूम-स्री खडी सिसक रही थी जबकि टुम्बकटू का दिमाग तेजी से काम कर रहा था । अभी वह कुछ करना ही चाहता था कि तभी एक साथ दो टामीगनों की नाले उसके जिस्म से चिपक गई और एक रस्सी'का फंदा उसकी सिगरेट जैसी पतली गर्दन मे जा फसां और पीछे से गुर्राहट उभरी ।।

" …अगर चालाकी दिखाई नमूने जिस्म छलनी कर दूंगा ।" यह गुर्राहट निश्चित रूप से अलफासे की थी । उसके साथ दूसरी टामीगन लिए अशरफ खड़ा था ।

" अगर जरा भी कोई हरकत की बेटे तो समझ तो कि टामीगन की गोलियां रहम नाम की किसी वस्तु को नहीं जानती ।"

"बिकासा जाम्बू और उसके अन्य साथियों से कह दो कि आत्मसमर्पण कर दें ।" सिगंही भयानक ढंग से गुर्राया-" कोईं शक्ति अब तुम्हें नहीं बचा सकती... !"

अभी सिंगही अपनी बात पूरी तरह कह भी नहीँ पायां था कि न जाने कहां से जंप मारकर घनुषटंकार सीधा सिंगही के टानीगन वाले हाथ पर गिरा । सिगही को स्वप्न में भी यह उम्मीद नहीं थी फि क्दाचित इसीलिए वह मात खा गया । टामीगन उसके हाथ से निकल गई ।

"बिकास !" टुम्बकटू चौख पड़ा- “अमेरिका को उडा दो ।"

बस उस एक पल मे हाॅल मे अनेक कोनो पर भिन्न भिन्न घटनाएँ हुई ।

इधर टुम्बकटू का जिस्म इस लपका कि अशरफ और अलफासे समझ भी ना सके कि छलावे जैसी फुर्ती वाला टुम्बकटू कहां गायब हो गया । उसी पल विकास ने सिहांसन से नीचे जंप लगा दी । उसका रूख उस कक्ष की ओर था जहां पर विनाशकारी मशीन रखी थी । उस समय विकास पर जैसे खून सवार था ।।

इधर बागरोफ एक गाली का उचारण करता हुआ जाम्बूरा के उपर जा गिरा ।

माइक किसी अन्य मंगल मानब से भिड़ गया । रहमान ने भी अपना शिकार थाम लिया । चंगेज खां अभी मूखों की भांति खडा ही था कि उल्टे मानव की एक जोरदार लात उसके जबड़े पर पडी चीख के बीच एक भद्दी-सी गाली निकालता हुआ, वह किसी अन्य उल्टे मानव के हाथ लग गया।

क्लार्क रोंबर्ट और क्विजलिंग भी भिड़ चुके थे ।

धनुषटंकार के हाथ लगा फांगसांग । बंदर पर तो खून स्वर था । फांगसांग के बाल पकडे और उसे पूरे हालॅ मे खिचेडते हुए अःक जोरदार घक्का दिया ।

मजे की बात यह कि फांगसांग सीधा चंगेज खां के ऊपर आ गिरा । चंगेज खां ने उसे लगे हाथों लपक लिया ।

धनुषटंकार ने अपना दूसरा शिकार संभाल लिया ।

....... इधर टुम्बकटू तो पागल हो गंया था ।

… जो भी उसके समीप आता, बह एक चाटें में उसका भेजा फाड देता ।

वह बराबर सिगंही की तरफ़ बढ रहा था जो खुद अनेक जासूसों से जूझ रहा था ।

अलफांसे और अशरफ़ भी एक साथ कई उल्ले मानवो से भिड़े हुए थे.

हाँल में एक हुड़दंग था---भयानक हुडदंग।।

मार-काट, चीख-पुकार, उठा-पटक का बाजार गर्म था । किसी की कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि कौन दोस्त है और कौन दुश्मन?

..........................

उल्टे मानवों में भी दो दल थे-----एक जाम्बू का और दूसरा जाम्बूरा का ।

हर पल जाम्बू का यही प्रयास थे कि किसी तरह वह रास्ता साफ करके सिगंही तक पहुंच जाए ताकि सिगंही से अपने भाई की हत्या का बदला ले सके ।

उल्टे लोगों के बिचित्र हथियार भी चल रहे थे ।

पूरे हालॅ मे युद्ध स्थल का दृष्य उपस्थित था ।

लेकिन .... लेकिन असल मुजरिम हाॅल से गायब था ।

विकास ।।

विकास के साथ पूजा भी नजर नही आ रही थी ।

......................
 
इन शातिरों ने पूरी योजना एक क्रम के साथ बनाई थी । सिगंही, अलफांसे , अशरफ़ को हाॅल में भेजा गया था ।

जैक्सन ने कहा था कि बिकास को बचाने के लिए आवश्यक है कि वे समस्त साधन ही समाप्त कर दिए जाएँ, जिनके बूते पर वह अमेरिका को हिलाने की चेष्टा करके अपना जीवन बरबाद कर है ।

जब वे साधन ही नहीं रहेगे तो विकास अपंग हो जाएगा और वह कुछ नहीं कर सकेगा ।

इसी बात को मद्देनजर रखते हुए जैक्सन ने कहा था कि चीन के खूंखारतम वैज्ञानिक तुगलामा को खत्म करना भी आवश्यक है ।

इस बात के लिए प्रिसेज़ ने स्वयं को नियुक्त किया था।

इस समय उसके हाथ मे एक टामीगन थी और वह प्रयोगशाला में पहुच चुकी थी ।

प्रयोगशाल में पहुचने के बाद एक क्षण भी व्यर्थ नहीं किया । इससे पूर्व कि कोई कुछ समझ, पाता ।

रेट .रेट. .रेट ।

बिना किसी पूर्व सचना के जैक्सन की गन गरज उठी । पलक झपकते ही प्रयोगशाला में उपस्थित दस वैज्ञानिक देर हो गए ।

अपने जीवन मौत के बारे में सोचने का उन्हे एक अवसर तक नहीं मिला था ।

प्रयोगशाला में पहले से उपस्थित केवल एक इंसान जिंदा रह गया था-तुंगलामा।

आखे फाड़े वह आश्चर्य के साथ सामने खड्री अप्सरा को देख रहा था ।।

................................

जैक्सन के गुलाबी होंठो पर इस समय बहुत ही मधुर मुस्कान थी लेकिन तुंगलामा को वही मुस्कान ऐसी लगी जेसे मौत मुस्करा उठी हो ।

जैक्सन के चेहरे पर अब पूजा का मेकअप नहीं था । उसके हाथ में टामीगन थी और तुगलामा अमी तक आश्वर्य के सागर में गोते लंगा रहा था ।

सोचा…क्या है यह औरत?

पलक झपकते ही दस जीते-जागते इंसानो को मौत के घाट उतार दिया, फिर भी मुस्करा रही है ।

सोचकर कांप उठा तुंगलामा ।

जैक्सन उसके-ठीक सामने टामीगन लिए खडी थी । नाल से अब भी धुएं की लकीर निकल रही थी । प्रत्येक पल तुगलामा को यहीँ खतरा था कि कहीं यकीन एक बार पुन: न गरज उठे ।

उसने कुछ बोलने का प्रयास किय-लेकिन आवाज गले मे ही फंसकर'रह गई ।

-“बोलो!" जैक्सन खनखनाते स्वर में बोली-“तुम भी मरना चाहते हो?"

तुगलामा के फरिश्ते तक कांप उठे ।

कापते स्वर में बोल फूटा----" क...क...क्या मतलब ?"

" मतलब ये कि तुम्हें भी यही मौत पसंद है?” स्वर में जहर-सी कड़वाहड़ थी ।'

"न. . .न. . .नहीँ!" तुंगलामा बुदबुदा उठा ।

" तो फिर मेरे लिए काम करोगे?” जैक्सन ने कबा------" मंगल-सम्राट विकास नहीं बल्कि में हू ।"

उसके हाथ से टामीगन देखकर तुंगलामा अभी हां ही करने वाला था कि तुरंत उसे विकास के यातना देने के बेरहम तरीके याद आ गए ।

उसकी पीछे की सात पुश्ते तक कांप उठी । उसके मुंह से एकदम निकल गया ।

"'नही ।" ।

सुनते ही जैक्सन के सुन्दर मुखड़े पर अजीब-से खतरनाक आव उभर आए ।

टामीगन पर उसकी पकड सख्त हो गई । बडी तीक्ष्ण दृष्टि से उसने तुगलामा को घूरा और गुर्राई-" इंकार का अंजाम. केवल यहीं हो सकता जो इन सबका हुआ है ।"’

वेचारा तुंग । फंस गया ।

वह तो एक खिलौना बनकर रह गया, था ।

चाहे जो अपेने लिए काम करवा ले, बोला----" अगर आप कहती हैं तो…!"

"धांय । तभी एक फायर के धमाके से पूरी प्रयोगशाला गूज उठी । तुगलामा के कंठ से एक चीख निकली । गोली उसका माथा फोड़कर गुद्दी से निकल गई थी ।

उसके सिर का भुन्तास उड़ गया है एक पल तड़पने तक का उसे अवसर नहीं मिला था ।

सुप्तावस्था में वह फर्श पर जा निरा ।

विधुतगति से जैक्सन प्रयोगशाला के द्वार की ओर पलटीं ।

एक अन्य फायर के साथ उसकी टामीगन झन्नाकर उसके हाथ से दूर जा गिरी ।

अबाक-सी जैक्सन द्धार पर देखती रह गई ।

द्वार के बीचोबीच पूजा खडी थी ।
 
पूजा को देखते ही जैक्सन लगभग उछल पडी । उस भोली-भाली मासूम-सी लड़की के हाथ में टामीगन थी ।

सुन्दर मुखड़े पर ऐसे कठोर भाव थे किए एक बार को तो जैक्सन जैसी अपराधिनी भी कांप गई ।

समूचे संसार का ज्वालामुखी जैसे केवल पूजा की ही आखों मे सिमट आया था ।

किसी घायल शेरनी की भांति वह जैक्सन को घूर रही थी ।

“पूजा ।" जैक्सन के मुह से अभी केवल इतना ही निकला था कि पूजा गुर्रा उठी ।

“एन सी सी में मैंने अच्छी निशानेबाजी खीखी है । अपने इन्हीं हाथों से अपने भाई का खून कर दिया …मौत से डरने वाला गद्दार चीनी कीडा ..... उसके लिए यहीं मौत… सबसे अच्छी थी । उसे ज्यादा गोली मारना गोलियों की तौहीन थी ।"

" लेकिन…!"

"बक्रो मत जलील औरत? पूजा ने बीच मे ही चीखकर पुन: जैक्सन की बात काट दी………"मेरे विकास का सारा प्लान तेरी वजह से फेल हुआ है । तूने मेरा ही मेकअप करके मेरे विकास को धोखा दिया । उसके उन्हीं, गुरु को जो हमेशा उसका साथ देते थे, उसका दुश्मन बना दिया है -------

यहां का हर इंसान विकास के खून का प्यासा है । ये सब तेरे कारण हुआ है तेरे कारण । मुझें सोती को. पकडा. बेहोश किया और बाथरूम मे डाल दिया खुद पूजा....!” कहने के बाद आगे की बात उसने खुद छोड़ दी क्योंकि बात इन्ही शब्दों में पूरी थी, आगे बोली ------" और तब भी उस कीड़े को बरगलाना चाहती थी । मै तुझें जिंदा नही छोडूगी…किसी भी कीमत पर नहीं, तुम्हारा अंत मेरे हाथों से होगा !"

कहने के साथ ही।

धाय......!

पूजा के पास तो जैसै समय ही नहीं था । विना सोचे-समझे उसने प्रिसेज जैक्सन पर फायर झोंक दिया ।

बह जानती थी कि उसका निशाना एकदम सच्चा है लेकिन वो भोली नादान पूजा भला क्या जानती थी कि प्रिसेज जैक्सन क्या चीज है । संगआर्ट की माहिर जैक्सन न केवल खुद को बचा गई बल्कि हवा मे तैरता हुआ उसका

जिस्म पूजा पर आकर गिरा । पूजा बेचारी इस अप्रत्याशित घटना से एकदम घबरा गंई ।

उसके बाद पूजा भला कौन-भी शक्ति से जैक्सन का मुकाबला कर सकती थी ।

जैक्सन ने एक कैरेटं उसकी कनपटी पर मारी ।

पूजा के हाथ से न केवल टामीगन गिर गई बल्कि स्वयं भी वह एक चीख के साथ फर्श परं जा गिरी ।

जैक्सन ने पूजा से भिड़ना अपनी शान के खिलाफ़ समझा और फुर्ती के साथ उसने कमरे से बाहर जंप लगा दी ।

अपनी ओर से पूजा भी पूर्ण सतर्कता के साथ उठकर बाहर झपटी ।

लेकिन जैक्सन गायब हो चुकी थी । वैसे इस प्रकार को आवाजे बराबर गूंज रही थी जिनसे सिद्ध था कि इस इमारत में भयानक युद्ध जारी है ।

पूजा उस कक्ष की ओर लपकी जहां पर वह मशीन थी जिसके जरिए विनाश फैलाया जाना था ।।

..........................................

विकासं पर तो जेसे खून सवार हो चुका था । उसके चेहरे पर वे ही वहशीपन के भाव थे जो उसके चेहरे पर उस समय आते थे जव वह आपे से बाहर हो जाता था ।

सर्वविदित है कि जब वह आपे से बाहर होता है हो किसी की इज्जत नहीं करता । कुछ-न-कुछ उल्टा पुल्टा-कर डालता है । ऐसे समय में वह किसी की नहीं सुनता । जो सोचता है, बही करता है ।

वह जान गया था कि एक-से-एक बड़े शातिर न केवल उसका तख्ता पलटने के लिए प्रयत्नशील है बल्कि काफी हद तक सफल भी हो चुके हैं ।

वह यह भी समझता था कि अब उसका तख्ता पलटने में अधिक देर नहीं है ।

वह हांल में से भाग आया था।

अब तो केवल एक ही बात उसके दिमाग में थी, विनाश, प्रलय..... अमेरिका का अंत ।

अब चाहे कुछ भी हो जाए, वह अमेरिका को खाक में मिलाकर छोडेगा ।

सारा हेडक्वार्टर युद्धस्थल वना हुआ था । चारो और से मार-काट और चीख पुकार की-आबाजे आ रही थीं ।

उसके हाथ में भी एक रायफल थी और तेजी के साथ उसी कक्ष की ओर बढ़ रहा था जिसमें वह विनाशकारी मशीन थी ।

जैसे ही वह उस कक्ष में प्रविष्ट हुआ, चौंककर एकदम ठिठक गया ।

उस के पास ही टामीगन हाथ में थामें विजय गुरु खड़े थे ।

सुभ्रांत और उसके दोनों सहयोगी उस मशीन को चेक कर रहे थे ।

"अगर जल्दी बता सकत्ते हो तो सुभ्रांत मियां कि इसकी कार्यविधि क्या है तो बताओ बरना वो लड़का आ गया तो हुल्लड़ मचा देगा ।" विजय का वाक्य अभी पूरा ही हुआ था कि…!

धांय धांय धांय--, !

सुभ्रांत के दोनों सहयोगी चीखों के साथ परलोक सिधार गए ।

और एक गोली ने कमाल कर दिखाया कि विजय की टानीगन उसके हाथ से निकलकर काफी दूर जा गिरी ।

विजय का हाथ झनझनाकर रह गया ।

"मैं आ गया हूं गुरु?" एक गुर्राहट विकास के मुह से निकली । . .

कांप उठा विजय ।

विकास के इरादे उसे भयानक लगे किन्तु फिर भी संयमता के साथ बोला-----"आ गये हो तो आओ प्यारे । बोलो, ठंडा पीयोगे या गर्म?"

…"आप इस कक्ष से एकदम बाहर चले जाएं, बरना.......!"

… “अबे !" विजय ने किसी, भटियारिन की भाति हाथ नचाया…“यानी कि गुर्राकर आता है! अबे, हम गुरु न हुए साले पानी के बताशे हो गए । बेटा , एक झापड़ मार दिया तो चमरगिद्धर वना दूगा ।"

" मै मजाक के मूड में नहीं हूँ गुरु!" विकास पुर: खतरनाक स्वर मे गुर्राया-"बहुत इज्जत हो ली । आप फौरन इस कक्ष से बाहर निकल जाएं । कसम तुम्हारी-अमेरिका को खाक में मिला दूगां !"

"ऐसा अब नही होगा बेटे !" विजय बोला--------" अब हम विजय दी ग्रेट यहा हैं।"

"तभी तो कहता हूँ गुरु कि बाहर निकल जाओ वरना .......!"

" वरना.....।" एक चीख के साथ एकदम विजय भी गुर्रा उठा------" क्या करोगे ?"

" मैं सुभ्रांत को गोली से उडा दूगा ।" उसके स्वर में एक भयानक गुर्राहट थी ।

"गुर्राओ मत लड़के!" विजय भी ताव खा गया…"तुमसे पहले खाना सीखा है ! इस को गोली से क्या उडाएगा यहाँ चला गोली, अपने गुरु के पर । सीना छलनी कर दे अबे । शर्म

किसकी करता है? चला गोली, गुरु का सीना छलनी करदे, इसलिए तुझे सब कुछ सिखाया, था? नही विकास, नहीं, आज विजय यहां से नहीं हटेगा , पहले गुरु को मारना होगा । तब तू माऩवता का इतना बडा हत्यारा वन सकेगा ।"

"नहीं गुरू, नहीं !" वह चीखा-----" हट जाओं मेरे सामने से, मैं मंजिल के बहुत करीब हूं गुरुं! अब मुझें वापस मत लौटाओ। वो तो मानवता के दुश्मन है गुरु! खून का बदला खून है,विनाश का बदला विनाश । भारत को समझा क्या है उन्होंने? प्रलय मचा दूगा, गुरु ! खून की नदियां बहा दूगा । अमेरिका की धरती को लाशों से पाट दूगा । श्मशान बना दूंगा, तुम हट जाओ गुरू, तुम हट जाओं! के अपने बच्चे को सफल होने दो।"

“जिसे तुम सफलता समझ रहे हो विकास, वो तुम्हारी के सबसे बडी हार है ।" बिजय चीखा-------" अमेरिका का अत तुम्हारा लक्ष्य नहीं, बल्कि भारत से सी-आई-ए का अंत तुम्हारा लक्ष्य है !"

"अमेरिका के अंत के विना वो लक्ष्य प्राप्त नहीं होगा गुरू !" विकास चीख पडा ।

"होगा विकास । जरूर होगा ।" विजय उससे अधिक जोर से चीखा-" भारत से सी-आई-ए का अंत होगा लेकिन तुम्हें ये विनाश नहीं करने दूगा । यह मेरी लाश पर से गुजरकर कर सकोगे और गुरू को लाश में भी तुम्हें हीँ बदलना होगा । लड़के बिछा दे अपने गुरू की लाश, फिर सारी धरती लाशों से पाट देना, तोड दे मर्यादा की उन दीवारो को जो गुरू-चेले के बीच होती हैं । इतिहास में एक नया पृष्ठ तू भी जोड़ दे ताकि आने वाली पीढी जान ले । ऐसे गद्दार चेले भी हुए है ।”

विकास की आंखो मे आंसू आ गए ।

विजय के शब्द तीर की तरह सीने में जा लगे, परंतु फिर भी बह चीखा------" गुरू, नहीं, मुझें बच्चा मत समझो, मुझे बहलाओ मत ! अगर मैंने आज अमेरिका को लाशों से नहीं पाटा तो कभी मेरा भारत सी-आई-ए से मुक्त नहीं हो पाएगा गुरु! कभी नहीं । ये कुत्ते भारत पर यूं ही कब्जा जमाते रहेंगे, मेरे हिंदुस्तान की युवा पीढी को इसी तरह पथभ्रष्ट करते ऱहेगे ।" विकास चीख तो रहा था लेकिन पीङा से उसके नेत्र छलछला उठे ।।

विजय को एक धक्का सा लगा , विकास की पीड़ा देखकर एक बार तो उसके दिमाग में आया कि जो कुछ विकस कर रहा है, वह सही है । वह हट जाए, विकास को मनमर्जी करने दे, लेकिन नहीँ…ऐसा वह कैसे …करने देगा? इधर विकास की देशभक्ति देखकर सुभ्रांत भी लड़के को देखता ही रह गया । उसे तो एक ही पल में विकास से सहानुभूति-सी हो गई ।

"नही विकास! " विजय भी कराह उठा-"नहीं, मेरे बच्चे! मैं तुमसे वादा करता हूं कि भारत से सी-आई-ए का जाल हटाकर रहूँगा, लेकिन उसके बदले में ये विनाश नहीं होने दूंगा । मैं तेरा जीवन इस तरह बरबाद नहीं होने दूंगा । विकास, तुझे लेकर तो तेरे गुरु ने बड़े सपने देखे है । मैं तुझे ऐसा अपराधी नहीं बनने दूंगा कि फिर कभी वापस ही न लौट सके । मेरे जीते-जी ये नहीं होगा विकास! अगर यही चाहता है तो पहले एक गोली मेरे सीने के पार कर दे ।"
 
"नही अंकल, नहीं!" विकास कराह उठा ---"'ये आप क्या कह रहे हैं ।" कहते हुए उसने राइफल फेक दी और पागलों की तरह झपटकर विजय के चरणों में गिर गया ।

विजय जैसे पत्थरदित्त इंसान की आंखो में भी आंसू आ गए । सुभ्रांत तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि यह लड़का इतना महान भी हो सकता है ।

लपककर बिज़य ने विकास को चरणों से उठा लिया और गले से लगाकर बोला-" बड्री देर से लाइन पर आया साले !" कहते समय विजय का स्वर रुंध गया ।

"मुझे माफ कर देना गुरु, माफ कर देना ।"

"माफ किया साले दिलजले! माफ़ किया ।" विजय वातावरण को सामान्य बनाने की चेष्टा करता हुआ बोला'--"पहले तो हमारे सिर चढ़ता है, गुरु लोगों की इज्जत का बंटाधार करता है और अंत में चरणों में गिरकर क्षमा मांगता है । गुरु लोगों को खीचने का एक अच्छा तरीका निकाला है ।"

" अब जल्दी से इस मशीन को नष्ट कर दो गुरू ।" विकास ने शीघ्र ही लाइन पर आते हुए कहा।।

" ओके प्यारे ! " विजय ने कहा और उसके साथ ही विजय ने अपनी जेब से एक लाइटर निकालकर उस मशीन में आग लगा दी ।

मशीन क्योकि ¸ भिन्न-भिन्न प्रकार के ज्वलनशील पदार्थों से भीगी हुई थी इसलिए मशीन ने तुरंत आग पकड ली ।

उधर बिकास ने पुन; अपनी राइफल उठाकर कक्ष में रखी स्कीन पर फायर किए ।

दो मिनट बाद ही उस सारे कमंरे को नष्ट करके गुरु-चेले और सुभ्रांत बाहर आए ।

कक्ष पूर्णतया आग की लपटों से घिर गया था ।

पूरे हैडक्यार्टर में अभी तक हुल्लड़बाजी मची हुई थी ।

अभी वे अधिक दूर नहीं पहुचे थे कि अचानक गैलरी से दौडते ही पूजा सामने आ गई ।एक पल के लिए तो विकास और पूजा अपलक एक…दूसरे को देखते रह गये जैसे एक…दूसरे की आंखों में डूबना चाहते हों, तभी विजय बोला ।

"अबे ओ बेटा दिलजले! पहाल कारण तो ये कि नारी जाति के चक्कर मे पड़ा और दूसरा गुरू लोगों के सामने होश में रहना चाहिए !"

विकास चुप हो गया ,पूजा चौंकी एकदम बोली ।

" विकास ये तुम्हारे साथ?"

"हां पूजा !" विकास बोला----" गुरु से संधि हो गई है । मैंने खुद बह विनाशकारी मशीन तबाह कर दी है ।"

" विकास! " भावावेश में कहकर पूजा विकास से लिपटकर बोली-" मै भी तो यह चाहती थी विकास! लेकिन तुम मान ही नहीं रहे थे, इसलिए तुमसे कहने का साहस नहीं हुआ । अब हम् दोनों अपने वतन लौटेगे मेरे देवता ! मै हमेशा तुम्हारे साथ रहूगी. .हमेशा ।"

"ओं लड़की!" बीच से बोला विजय-- "यहां शर्म करों ! लड़का'हमारी इज्जत करता है और बैसे भी धंटी बनकर हमेशा के लिए इसके गले में लटकने की कोशिश मत कर । इसके दिमाग में अजीब-अजीब खुराफते आती हैं, अगर किसी दिन मारा गया तो ।"

पूजा ने एकदम विजय के होंठों पर अपना हाथ रखकर उसे चुप करा दिया।

बड़ी भावुक-सी होकर बोली-" ऐसा मत कहना भैया ! भैया! विकास के लिए ऐसा कभी मत कहना । इन्हें मेरी भी उम्र लग जाए । मैं अपने वक्त से पहले ही मर जाऊं मेरी उम्र लेकर जीएं . . ऐसा मत कहना भैया ।"

विजय, विकास सुभ्रांत पूजा को देखते ही रह गए ।

विजय ने सोचा---"कैसी है लडकी? कितना त्याग है इसके प्रेम में? वास्तव में पूजा के ही योग्य हैं । उसे भी तो उसने कितना प्यारा संबोधन दिया है- भैया! न जाने क्यों विजय का दिलं भी कराह उठा ।

" जिसे पूजा जैसी बलिदानी लड़की मिले वो भाग्यशाली ही हो सकता है !" सुश्रात के मुंह से बरबस ही निकल गया । विकास तो पागल-सा अभी तक पूजा की आंखों से झांक रहा था । इधर विजय ने भी महसूस किया कि उसे भावनाएं घेर रही है ।

उसने तुरंत सिर को झटका देकर काम की बात की ।

"क्यों प्यारे दिलजले! अब मंगल से भागने का क्या प्लान है?"

" भागने का पूरा प्रबंध है गुरुं?" विकास ने कहा !

" आपने जाम्बू का अड्डा तो देखा ही है, वहीं सिंगही का ग्लोबनुमा यान मैंने पहले ही सुरक्षा के लिए खडा कर दिया है हम उसी के जरिए यहाँ से निकल सकते हैं, लेकिन…!"

“लेकिन क्या?”

"मेरे बिचार से गुरु! यहां से निकालने से पहले तुंगलामा को ही खत्म कर दे ताकि वह फिर कभी ऐसा विनाशकारी फार्मूला न बना सके !"

विकास ने कहा ।

"उसे मैंने खत्म कर दिया !" पूजा झट से बोल पडी ।

एक बार पुन तीनों पूजा को देखते रह गए ।

फिर विजय बोला…"वेरी गुड विकास, तुम पूजा और सुभ्रांत को लेकर जाम्बू के अड्डे पर गलोब में पहुचो, मै अभी आता हूं !"

"आप यहां क्या करेंगे गुरु?"

“मैं इस हेडक्वार्टर को ही नष्ट करके आऊंगा ।"

"लेकिन कैसे गुरु?" विकास बोला---" "ये हेडक्वार्टर तो फौलाद का बना हुआ है कैसे नष्ट होगा?"

" उसका तरीका मुझें तुमसे नहीं पूछना है बेटे दिलजले । " विजय ने कहा-----" बहुत दिनों से मेरे दिमाग में इस हेडक्वार्टर को ऩष्ट करने का एक अच्छा तरीका है, तुम चलो!"

" गुरु, आप अकेले? साथ मैं भी चलूं?"

“जिद नहीं विकास! " विजय ने आदेशात्मक स्वर में कहा-----" तुम जानते हो कि इस हैडक्वार्टर मेँ एक-एक इंसान तुम्हारे खून का प्यासा है । फिर पूजा और सुभ्रांत को सुरक्षित ले जाना भी आवश्यक है !"

"ओके गुरू ।" विकास ने कहा--"अपने साथ धनुषटंकार, अलफांसे गुरु और लंबू अंकल को लाना न भूलना ।” कहता हुआ विकास विदा हुआ ।

विजय के हाथ में गन थी । उसका रुख हाल की ओर था ।

तेजी के साथ भागता हुआ विजय हाल की ओर बढ रहा था । हालॅ के समीप पहुचते- पहुंचते उसे कई उल्टे मानवों का सामना करना पड़ा लेकिन विजय क्योकि अब देर करना गंबारा नहीं था, इसलिए प्रत्येक उल्टे मानव से मिलते ही एक बार विजय की टामीगन खांसती और परिणामस्वरूप सामने वाता कूच कर जाता था ।

तब जबकि वह हाल के दरवाजे पर पहुचा उसने देखा.---- हाल में अभी तक भयानक युद्ध जारी था । हाँल की धस्ती लाशों से पट गई थी । खून से सन्नी पडी थी ।

विजयं की टामीगन ने भी गरजना शुरू कर दिया । उल्टे मानव गिरने लगे ।

अलफांसे इस समय खून से लथपथ था ।

वह चार-पांच उल्टे मानवों से धिरा हुआ था । विजय ने पलक झपंकते ही उन सबका सफाया कर दिया और तुरंत अलफांसे के करीब पहुंचकर पीछे से उसका कॉलर पकड़ा , धीरे से बोला ।

" बहुत हो लिया प्यारे लूमड भाई!"

"विकास कहां हैं?” अलफांसे गुर्रा उठा ।

""वो ठीक है लूमड़ भाई! जरा मेरे साथ आओ ।” कहकर वह अलफांसे को हालॅ से बाहर खीच ले गया ।

अलफासे ने भी कोई आपत्ति नही की ।

हाॅल के बाहर जाकर विजय बोला… "मैं इस हैडक्वाटर को नष्ट करने वाला हूं , बेटे लूमड फोरन टुम्बकटू अशरफ को लेकर जाम्बू के अड्डे पर पहुचों , विकास तुम्हें वही मिलेगा !'

" ओके !' अलफांसे ने कहा और विना किसी प्रकार की टिम्पाणी किए उसने हाँल में जंप लगा दी । विजय ने पुनः हाल में पहुंचकर ब्लैक ब्वाॅय को पकडा उसे अपने साथ ले लिया ।

हालांकि इस प्रयास में विजय को कई लोगो से टकराना पडा था लेकिन जब ब्लैक व्वाय को साथ लेकर हाँल से बाहर निकला तौ ब्लैक ब्वाॅय बोला ।

" विकास कहां है सर? वह ठीक तो है न? कहीँ आपने । "

"सबको उस साले अपराधी की चिंता है ।" विजय ने कहा-------": हमारी चिंता किसी को नहीं है? खेर, छोडो लडका लाइन पर आ गया है कि जाम्बू के अड्डे पर पहुंच चुका, तुम मेरे फाथ आओ !"

" कहां सर?"

"हमें यह हेडक्वार्टर खत्म करना हैं ।"

" लेकिन कैसे सर?” ब्लैक व्वाॅय बोला-" यह तो फौलाद का वना हुआ है ।"
 
" तुम मेरे साथ आओ प्यारे ! हम क्या किसी फौलाद से कम हैं?” कहने के साथ ही उसुने ब्लैक ब्वाॅय को साथ लिया और हेडक्वार्टर से बाहर निकल गया । बाहर मौत जैसी वीरानी थ्री । सारे जबान हैंडक्वार्टर के अंदर हो रहे युद्ध में भाग ले रहे थे ।

चलता-चलता ही विजय ब्लैक ब्वाॅय से बोला-" प्यारे काले लड़के तुम जासूसों के सांथ आए हो । यहां से तुम्हारा उन्हीं के साथ लौटना मुनासिब होगा ।"

" आप कहना क्या चाहते हैं सर ?"

"कहना र्सिफै मैं ये चाहता हूं प्यारे काले लड़के कि मैं पूजा, विकास, अशरफ, धनुषटंकार, सुभ्रांत और अलफासे , सिंगही के एक गलोबनुमा यान के जरिए यहां से दुम दबाकर भाग रहे है, हम सीधे अमेरिका जाएंगे ।"

" लेकिन वहां आप क्या करेगे सर?”

" दो किलो आने के हिसाब से भुट्टे बेचेंगे बेटा !" विजय बोला------" मिया-काले लड़के क्यों तुमने अपनी अक्ल को घास ¸चरने भेज रखा है? जरा बुद्धि से सोचो कि क्या विकास का अभियान खत्म हो गया? क्या भारत से सी..आई...ए का जाल ख़त्म हो गया?"

" नही सर !"

"तो फिर प्यारे बात को यों समझो कि हमने लड़के को इस बात पर मनाया है कि हम सी-आई ए का पतन करने में उसका साथ देगे वरना बो तो सारे अमेरिका की बखिया उधेड़ने पर उतारू था !"

"आप कैसे साथ देंगे सर?” ब्लेक ब्वाॅय ने पूछा ।

"यहृ हमारे सोचने की बात है प्यारे लाल! " विजय ने कहा…"तुम जरा जल्दी से कुछ खास बाते सुनो! पहली बात तो यह है कि तुम्हें विश्व के अन्य जासूसो के साथ ही मंगल ग्रहं से रवाना. होना है क्योंकि अगर तुम हमारे साथ हो लिए तो विश्व में यह बदनामी होने का खतरा कि भारत के जासूस विश्व के दुश्मन है क्योकि अपराधी विकास का साथ देने से यह संभव है। "

" मै आपका मतलब समझ रहा हूं सर । "

" तुम्हारे बाल-बच्चे खुश, रहे ।" विजय ने एकदम दुआ-सी दी-----और देखो एक बात का और ख्याल रखना कि जो सभी जासूस निर्णय ले तुम्हें केवल उसी पर चलना है, चाहे वह निर्णय हमारे विरूद्ध ही हो !"

" ओके सर !"

और इसी प्रकार की बाते करता हुआ विजय ब्लैक ब्वाॅय के साथ वहां पहुच गया, जहां पहुंचना चाहता था । ये वही चट्टाने थीं जहां विकास, टुम्बकटू का यान उतरा था जिसके विषय मे पता चला था कि वास्तव में वे चट्टाने नहीं बल्कि एक बिशाल जीव है ।।

इस जीव का नाम 'हिम्बोरा' था । "हिम्बोरा' मंगल का एक ऐसा जानवर हैँ जो अपरिमित शक्ति का मालिक हैं जो मुह से आग उगलता है ।

पांच-पांच वर्ष तक एक ही स्थान पर खडा रहता है लेकिन जब उठता है तो प्रलय मचा देता है ।

उसके चट्टानी जिस्म से जहरीला पसीना बह रहा था ।

( हिम्बोरा के विष्य में विस्तृत जानकारी हेतु पढे-'अपराघी विकास' और 'मंगल सम्राट विकास' जो एक साथ 'टू इन वन’ विशेषांक के रूप में प्रकाशित हो चुके हैं )

" इसको हिम्बोरा बोलते हैं प्यारे काले लडके ।" विजय बोला------" चट्टाने नहीं बल्कि अत्यधिक विशालकाय जानवर है । यह मुंह से आग उगलता है । यहीं उस हैंडक्वार्टर को नष्ट कर सकता है ।"

"लेकिन यह उठेगा कैसे सर ?"

"इसे उठाना होगा प्यारे! " विजय बोला-----------" तुम मेरे साथ-साथ "हिंम्बोरा' का मुह खेलने, की चेष्टा करो । हम इसे जगाएंगे और इससे हेडक्वार्टर नष्ट करवाएंगे ।"

'लेकिन क्या यह जरूरी है सर! कि यह हेडक्वार्टर की और दौड़ेगा?" ब्लैक ब्वाॅव बोला।

" कोई जरूरी नहीं है प्यारे! ” विजय ने कहा…“लेकिन जब हम चाहेंगे तो इसे हैडक्वार्टर की ओर दौडना पड़ेगा--" सुनो !" विजय थ्रोड़ा गंभीर होकर बोला-" हम द्रोनों किसी ऐसी बस्तु की बैक से इसे जगाएंगें-ज़हां इसके मुंह से निकलने बाली आग का कोई प्रभाव न पड़े । वैसे ये वात ध्यान रखना की है कि इसके इस विशालकाय जिस्म पर विकास 'इत्यादि का यान तक उतर गया लेकिन इसे मालूम तक नहीं हुआ । इस बात को देखते हुए इसे जगाना भी एक समस्या ही होगी] छोडो इस समस्या को, जगाने का तरीका तो वहुत पहले से हमारे दिमाग में है । हां, तो तुम मेरा प्लान आगे सुनो । इसे जगाकर मैं इसके आगे-आगे भागूगा ।"

"क्या ऽ ऽ ऽ ? यह आप क्या कह रहे हैं सर?"

“र्चोंको मत प्यारे काले लड़के ।” विजय बोला-----" तुमने अभी तक सीक्रेट सर्विस के चीफ की कुर्सी पर बैठकर आदेश दिए है । तुम तो एजेंट को आदेश दे डालते हो कि केस जल्दी-से-जल्दी सॉल्व होना चाहिए लेकिन तुम क्या समझो कि एजेंट किन-किन खतरों से धिरता है? तुम्हें क्या पता कि फील्ड में क्या होता है?”

-“लेकिन सर! ये तो एकदम मौत के मुह में छलांग लगाने वाली बात है ।" ब्लेक ब्वाॅय बोला----"अभी-अभी आपने बताया कि हिम्बोरा अपने मुंह से दूर-दूर तक आग बरसाता है । फिर आप इस भयानक जानवर से किस प्रकार बच सकेंगे?”

"चिंता मत करो प्यारे काले लड़के! भागने में तो हम पहले ही दुम दबाए बैठे हैं !" विजय ने कहा-"तुम उसी स्थान पर छुपे रहना । यहीं से निकलकर मैं हैडकवार्टर की ओर दौडूगा । सरलता से अनुमान लगा सकते है कि हिम्बोरा पीछे होगा और मैं हेडक्वार्टर मे घुस जाऊंगा ।"

"लेकिन सर, हेडक्वार्टर के साथ आप..... ।"

"बोलो मत प्यारे, ये प्लान हमारा है । माना कि खतरनाक प्लान है लेकिन तुम चिंता मत करो, हम भी पूरे है । होगा कुछ नहीं, तुम केवल तमाशा देखोगे । आओ! इसका मुंह खोले ।"

ब्लैक ब्वाॅय विजय को यह खतरनाक खेल खेलने की इजाजत देने के लिए कदापि तैयार नहीं था लेकिन वह यह भी जानता था कि अब विजय के दिमाग में जो आ चुका है, यह उसे करके ही हटेगा ।

इस खतरनाक खेल में ब्लैक ब्वाॅय को विजय की मौत नजर आ रही थी परंतु विजयं को न मानना था और न ही माना ।

शीघ्र ही उन्होंने हिम्बोरा का विशालकाय चेहरा ढूंढ लिया । बिजय ने सतर्कता के साथ अपने चारों ओर देखा हिम्बोरा के चेहरे के ठीक सामने एक विशाल पत्थर पड़ा था । यह पत्थर उसके चेहरे से लगभग दो फ्लॉग पर रहा होगा । न जाने क्यों ब्लैक ब्वाॅय का दिल बडी तेजी से धड़क रहा था ।

उसने ध्यान से हिम्बोरा का चेहरा देखा ।

चेहरा ऐसा था जैसे कोई वहुत बड़ा ढोल हो ।

दो बड्री-बडी भयानक कटोरे जैसी आँखें थी ।

किसी हौज की तरह उसका मुंह था ।

नाक के नाम पर दो बड़े-बड़े सूराख थे । सुराख इतने बड़े थे कि एक सुराख से एक इंसान एक बार में सरलता के साथ सुराख मे से होकर हिम्बोरा के अंदर पहुच सकता था ।

वह वडा भयानक लग रहा था । ब्लैक ब्बॉंय कांप उठा । बिजय के जिस्म में भी झुरझुरी सी दोड़ गई ।

फिर वे दोनों शांति के साथ इस विशाल पत्थर की बैक में चले गए । अभी तक हिम्बोरा ने उसे देखा नही था क्योकि अभी तक वह अपने कटोरे जैसी आखे बंदं किए आराम से पडा था । पत्थर के पीछे पहुंचकर विजय ने कहा……'"देखो प्यारे काले लड़के!"

कहने के साथ ही विजय ने अपनी टामीगन का मुह खोल दिया ।

रेट.......रेट की गर्जना के साथ अनेक गोलियाँ उसके चेहरे से टकराकर छितरा गई । हिम्बोरा को इन गोलियों से किसी भी प्रकार की हानि नही पहुँची थी । वह उसी प्रकार आराम से लेटा हुआ था ।

"ये तो साला पुरा आराम-पसंद है! " विजय ने कहा फिर उसके होज-से मुह का निशाना लेकर लगातार तीन किए । गोलियां उसके मुह में धंसती चली गईं । इस बार हिम्बोरा की सेहत पर जैसे असर पडा । उसके भारी चेहरे में कुछ कंपन हुआ ओर उसने फटाक से क्टोरे जैसी मौटी आखे खोल दी । एक पल के लिए तो विजय और ब्वाॅय देखते ही रह गए । उसकी आखें किसी ज्वालामुखी लावे की भाति लाल थी ।

टामीगन पर बिजय की पकड़ अत्यधिक सख्त हो गई । उसने ब्लैक ब्वाॅय से कहा ।

"तो प्यारे काले लडके! अब समय आ गया है । तुम किसी भी कीमत पर इस पत्थर की बैक से मत निकलना ।" कहने के तुरंत पश्चात एक बार पुन: उसकी टामीगन जोर से गरजी ।

सनसनाता हुआ शोला हिंम्बोरा की दाई आख में धंस गया । उसकी आख फूट गई ।

और फिर.....

उसके हौज जैसे मुंह से ऐसी भयानक गर्जना निकली कि वह पत्थर तक डगमगा गया जिसके पीछे वे दोनों थे । मंगल की धरती तो में एक कंपन-सा आया, जैसे भूकंप आ गया हो ।

तभी वातावरण में इस तरह की आवाज गूँजी जैसे भयानक तूफान आ गया हो । भयंकर आग की लपटे उसके हौज जैसे मुंह से निकलीं और उस पत्थर को छू लिया ।

पत्थर और उसीके मुह के बीच का जर्रा-जर्रा खौफ़नाक आग की लपर्टों में लिपट गया ।

तभी टामीगन संभाले हुए विजय ने पत्थर से बाहर जंप लगा दी । ब्लैक व्वाॅय का कलेजा हिलकर रह गया ।

तभी एक झटके के साथ हिम्बोरा अपने स्थान से उठकर खडा हो गया 1 उसके खड़े होते ही सारी धरती इस तरह काप उठी मानों कई ज्वालामुखी एक-साथ अपना बेडा खोल बैठे, हों ।

वह पत्थर जिसके पीछे ब्लैक व्वाॅय था, बडी तेजी के साथ एक तरफ लुढक गया ।
 
ब्लैक व्वाॅय अगर परिस्थिति पहचानकर स्वयं न लुढक जाता तो वह भारी पत्थर के नीचे दबकर शहीद हो जाता ।

ज़र्रा-ज़र्रा काप रहा था ।

पहाड़ जैसे जिस्म का मालिक हिम्बोरा जब खडा हुआ तो ऐसा लगा जैसे एक पर्वत के ऊपर दूसरा पर्वत रखकर ऊचाई बढा दी गई हो । ब्लेक व्वाॅय ने देखा कि पहाड़ जैसे हिम्बोरा ने भागते हुए विजय को देख लिया । एक बार फिर उसकी फुंकार से वातावरण कांपा और आग की भयंकर लपटें विजय पर झपटी । ब्लैक ब्वाॅय ने साफ़ देखा कि विजय उस आग से लिपट: गया ।

ब्लैक ब्वाॅय के कंठ से एक चीख निकल गई ।

विजय का यह भयानक अत उसके सामने हो गया था ।

लेकिन अगले ही पल ब्लैक ब्वाॅय के कंठ से प्रसन्नता में डूबी चीख निकल गई ।

आश्चर्य से उसकी आखें फैल गईं 1 आग के साफ होते ही ब्लैक ब्वाॅय ने साफ देखा कि.......

................कि विजय पर उस आग का लेशमात्र भी प्रभाव नहीं हुआ था । वह उसी तेजी के साथ भागता चला जा रहा था ।. .

हिम्बोरा भी अपना भारी जिस्म लेकर'उसके पीछे भाग लिया । धरती डगमगाने लगी ।

लेकिन विजय बेतहाशा भागता जा रहा था । क्या कोई प्रथम विजेता भागेगा! सिर-पर-पैर रखकर वह दौडता ही जा रहा था । हां उसके पीछे हिम्बोरा आग उगलता हुआ भाग रहा था । लेकिन भारी जिस्म होने के कारण हिम्बोरा के भागने की गति अधिक नहीं थी , विजय के मुकाबले तो कुछ भी नहीं थी ।

रह-रहकर वह फुफकार के साथ विजय पर आग बरसा रहा था । मगर आग विजय का जिस्म स्पर्श करते-ही उसके जिस्म को विना किसी प्रकार की हानि पहुचाए बापस लौट जाती।

विजय बेतहाशा हैडक्यार्टर की और भाग रहा था ।

इसी क्रम के साथ विजय हैडक्वाटर के काफी समीप पहुंच गया । तभी उसने देखा किं सामने से अलफासे, अशरफ और धनुषटंकार भागते चले आ रहे थे ।

वे तीनों इस दुश्य को देखकर कांप गए ।

तीनों की आँखों में भयानकं भाव उभर जाए ।

यह खौफनाक के दृश्य देखकर तीनों यही समझे कि विजय फंस गया ।

अलफांसे के हाथ में टामीगन थी ।

उसके जबड़े सख्ती के साथ एक-दूसरे पर जम गए ।

उसने टामीगन सीधी की हिम्बोरा पर खाली कर दी । लेकिन हिम्बोरा के जिस्म से टकराकर गोलियां शहीद होगई, तभी भागता हुआ विजय चीखा ।

" मेरी चिंता मत करों लूमड़ भाई! तुम फौरन वहीं पहुचो । मैं खुद भी पहुंच रहां हू।"

विजय की ये आवाज त्तीनो के कान में पड्री और तीनों चमस्कूत्त रह गए ।

अलफासे को जीवन में एक बार फिर मानना पड़ा कि विजय जैसा कोई अन्य इंसान होना असंभव है ।

तभी विजय फिर चीखा------" तुम लोग इसकी आग से बचकर रहना वरना बंटाधार तो जाएगा ।"

तभी हिम्बोरा एक बार फिर घूमा । एक बार फिर विजय का जिस्म आग की लपटो मे घिरा लेकिन कोई प्रभाव न देखकर अलफासे बुदबुदा उठा -----" ओह तो यह बात है । वास्तव मे विजय तुम दुनिया के सबसे बुद्धिमान और खतरनाक इंसान हो !"

उनके देखते ही देखते विजय और हिम्बोरा उनके पास से निकल गये । हिम्बोरा पागलों की भाँति गर्जना करता हुआ विजय के पीछे ही भाग रहा था, विजय ही उसका सबसे बडा दुश्मन हो । अलफासे इत्यादि की ईर हिम्बोरा :ने कोई ध्यान नही दिया । बैसे भी वे सभी दूर खड़े थे।

इधर विजय अब हैडक्वार्टर के करीब पँहुच गया था ।

भागते भागते ही उसका द्विमाग अब बड़ी तेजी से काम कर रहा था । अब उसे यह सोचना था कि, यह बचेगा कैसे?

वह जानता था कि उसके हेडक्वार्टर में प्रविष्ट होते ही आग बरसाता हुआ हिम्बोरा हेडक्वार्टर की इमारत को पल भर में समाप्त कर देगा ।

सोचता हुआ विजय अगले ही पल हेडक्वार्टर के नजदीक खडा था ।

हिंम्बोरां के भागने के कारण हैडक्वार्टर तक हिल रहा वा । हैडक्वार्टर के अंदर लड़ने वाले कदाचित इस प्रकार की गर्जना से पहचान गए थे कि आज हिम्बोरा इधर आ रहा है ।

तभी अनेक उल्टे लोन साथ में धरती निवासी यानी कुछ जासूस भागते हुए इमारत से बाहर निकले ।

उस समय विजय हैडक्वार्टर के करीब ही पहुच चुका था जिसने भी यह खौफ़नाक दृश्य देखा था उसकी अंतरात्मा तक दहलकर रह गई ।

सब दूर दूर हट गए । कोई भी हिम्बोरा के सामने आने का साहस नहीं कर सकता था ।

इसलिए हिम्बोऱा से दूर हट जाने के लिए जिसको भी जहां जगह मिली, यह भाग लिया ।

हिम्बोरा की गति क्योकिं विजय के मुकाबले कम थी, इसलिए वह विजय से काकी पीछे था और फिर वह वक्त आया, जब विजय सबके साथ भागता हुआ हैडक्वाटर में प्रविष्ट हो गया । बस--------इस खतरनाक खेल को खेलने को खेलने का यही क्षण सबसे अधिक कीमती था ।

वह इस गैलरी मे था ।

उसने पहले ही एक स्कीम बना रखी थी इसीलिए भागने का रास्ता और प्रबंध भी उसके दिमाग मे पहले ही था ।।

गैलरी की फौलादी दीवार मे काफी ऊपर एक इतना बड़ा रोशनदान था जिसमें से एक इंसान सरलता के साथ आर पार हो सकता था ।

उस रोशनदान से बंधी हुई एक रस्सी विजय पहले ही लटका गया था । पलक झपकते ही वह बंदरो की भाँति उसी रस्सी पर चढता चला गया और अगले ही पल वह रोशनदान पर था ।

उसने बाहर देखा कि पागलों की तरह भागता और आग बरसाता हुआ हिम्बोरा हेडक्वार्टर के बहुत करीब आ चुका था । लेकिन अभी विजय के पास इतना समय था कि वह कुछ करिश्मा दिखा सके , छत रोशनदान से अधिक दूरी पर नहीं थी ।

वह फुर्ती के साथ रोशनदान पर लटका और किसी दक्ष नट की भाति एक ही कला मे फौलादी हैडक्वार्टर की छत पर पहुंच गया ।

उसके बाद तेजी के साथ हैडक्वार्टर की छत-ही-छत पर दाएं सिरे की ओर भागता जा रहा . था ।

अंतिम सिरे पर पहुचते ही.....

..

कमाल कर दिया विजय ने ।

उसने हैडक्वार्टर की छत से नीचे जंप लगा दी ।

जैसे ही उसका जिस्म परती से टकराया, उधर हिम्बोरा का जिस्म हैडक्वार्टर से टकराया । आग की लपटों ने अपनी भयानक जीभ फैलाई ।

कान के पर्दे फाड देने वाला एक जबरदस्त धमाका हुआ ।

धरती बुरी तरह डगनगा गई ।

सारा हेडक्वार्टर कागज की भांति हिल उटा ।

आधा हेडक्वार्टर उसकी पहली टक्कर से धराशायी हो गया । शेष दूसरी टक्कर से ।

इधर विजयं डगमगाती धंरती पर भागता चला गया ।

अब हिम्बोरा की नजरों से वह दूर हो गया था ।

दूर जाकर उसने द्रेखा ।

अनगिनत चीखे फैलाती हैडक्वार्टर के नीचे दबकर रह गई-थीं । आग की-लपटों में लिपटा हुआ हैडक्वार्टर धूं-धूं कंरकें जल रहा था ।

सब कुछ स्वाहा हो गया था--सब कुछ ।

विजय जैसे अभी थका नही था ।

वह भागता ही जा रहा था ।

इस हैडक्वाटर का अंत उसने बड़े अजीब ढंग से किया था ।

धरती अभी तक डोल रही थी ।
 
जासुसों का बादशाह दौडता ही जा रहा था कदाचित विश्व के सबसे भयानक खेल मे सफल होकर ।

यह सोचने का समय उस समय नही था कि कौन बचा और कौन तबाह हो गया ।

.....................

विकास सुभ्रांत और पूजा तेजी के साथ भागते हुए जाम्बु के अड्डे की ओर जा रहे थे हालाकि भागते हुए विकास का साथ देती पूजा थक गई थी ।

लेकिन क्या मजाल कि उसके चेहरे पर हल्की…स्री भी शिकन आई हो अथवा वह ज़रा भी शिथिल हुई हो ।

यहां तक आते-आते उनका टकराव अनेकं लोगों से हुआ था । पूजा की तो टामीगन खाली हो गई थी ।

इसलिए व्यर्थ समझकर उसे फेक दिया था ।

विकास के हाथ में अभी टमीगन थीं लेकिन यह निश्चयपूर्वक नहीं कहा जा सकता था कि उसमे कितनी गोलियां शेष थी ।

बस! जब तक वह प्रयोग में आ रही थी विकास प्रयोग कर रहा था ।

अचानक एक उल्टा मानव उसके सामने आया और साथ ही उसकी बदनसीबी भी उसके सामने आ गई क्योंकि विकास के सामने आते ही बिकास की टामीगन से एक गोली निकली और उसके प्राण निकल गए … ।

तब जबकि वे तीनों जाम्बू के अड्डे पर पहुंच गए ।।

वे अभी एक गैलरी में ही थे कि…

धांय.................!

एक फायर हुआ और गोली सीधी विकास की टामीगन से टकराई ।

झनझनाकर टामीगन दूर जा गिरी ।विकास ने तेजी के साथ उस पर झपटना चाहा लेकिन तभी एक फायर और हुआ और यह गोली भी फर्श पर पडी टामीगन पर ही लगी ।

हटकर टामीगन और अधिक दूर जा गिरी।

तभी-------हा. . .हा. . हा !" भयानक कहकहे से सारा क्वार्टर दहल उठा ।

तभी एक खंबे की बैक से वह कहकहे का मालिक निकलकर सामने आया ।

उसे देखकर पूजा सुभ्रांत कांप गए ।

विकास का चेहरा किसी भट्ठी की भांति तप उठा ।

" क्यों वेटे ! भागना चाहते थे?" वह बोला…“अमेरिका के साथ इतना बड़ा मजाक करके तुम्हें वाकई भागने नहीं दूगा । भारत अगर तुम्हारा देश है तो अमेरिका मेरा देश है ।" टामीगन संभालकर -वह आगे बढता हुआ बोला…" जब विजय ने अलफांसे से कहा था, मैने तभी सुन लिया था कि तुम यहां पहुंच रहे हो और तुम्ही तो मेरे शिकार हो बेटे! तुम्हारा कत्त्ल ही मेरा अभियान है और अब तुम किसी भी कीमत पर बच नही सकते ।"

वास्तव में वह माइक था' ।

पूरी तरह सतर्क वह टामीगन थामे विकास के सामने खडा था । पूजा और सुभ्रांत विकास के दाएं-बाए सहमे-से खड़े थे ।

विकास खौफनाक लग रहा था ।

“अब अपने भगवान को याद कर ले लड़के, तेरा अंतिम समय आ गया है ।"

" अमेरिकन अंकल !" विकास गुर्रा उठा-----------" अमेरिका ने अभी वो शस्त्र तैयार नहीं किया है, जो विकास के प्राण ले सके । कसम तुम्हारी अंकल, मैं तुम्हारा दुश्मन नहीं हूँ बल्कि तुम्हारे देश की नीतियों का दुश्मन हूं।"

"मेरे देश का दुश्मन, मेरा दुश्मन है ।” माइक गुर्राया-"मैंने सुना था कि तुम यहां से किसी ग्लोब में बैठकर भागने का प्लान बना रहे थे? बहुत तलाश कर लिया लेकिन मुझें यहां कोई ग्लोब नहीं मिला लेकिन कोई बात नहीं, भागने वाले ही न रहेगे तो गलोब किस काम का !

"इन बातों को भूल जाओ अंकल ।" विकास चीखा ---" विकास की जान के लिए गज भर का कलेजा चाहिए !"

“जानता हू लड़के कि तू पक्का शैतान है । शैतान को अधिक देर तक जिंदा रखना खतरनाक है और बैसे भी कुछ ही देर मैं तेरे गुरू लोग पहुंचने वाले है इसलिए तेरा अंत जल्दी होना चाहिए ।” कहते हुए उस उसकी उगली का दबाव ट्रेगर पर कस गया ।

" धांय ।"

माइक ने यह गोली विकास के पेट को लक्ष्य बनाकर चलाई लेकिन... ।

"नहीँ. . .!” तभी पागल-सी होकर पूजा चीख पडी । न केवल चीख पडी बल्कि बिजली की…सी गति से वह बिकास के सामने आ गई ।

जो गोली विकास के पेट में लगती वह पूजा का सीना फाड़ गई । ये सब कुछ एक ही पल में हो गया था । विकास तक नहीं समझ सका था कि अचानक यह सब कुछ इस तेजी से हो कैसे गया? उसने अपने सामने खडी हुई पूजा को थाम लिया ।

"पूजा..!" जरे-जर्रे तक को बिकास की आवाज़ ने कंपकंपा दिया ।

…'धांम्-धांय......

तभी दो गोलियाँ और चली और फिर पूजा के जिस्म में धंसती चली गई । पूजा के जिस्म से छीटों के रूप में खून उछला ।

खुद विकास का चेहरा लथपथ हो गया । ये सब कुछ बड्री तेजी के साथ हो गया । सामने हत्यारा माइक खडा था । विकास उसकी ओर पलटकर संपूर्ण शक्ति से चीखा ।

" माइक हरामजादे! इस मासूम पर गोलियां बरसाता है । पूजा की कसम, पाताल में भी तुझे जिंदा नहीं छोडूगां । फाड़कर सुखा दूंगा तुझे !" उसने इतना ही कहा था कि माइक ने एक…फ़ायर उस पर भी झोंक दिया,.लेकिन एक तरफ विकास पर जहाँ खून सवार था, वहाँ वह संगआर्ट का भी पूर्ण ज्ञाता था । वह न केवल खुद को बचा गया बल्कि अगले ही पल उसकां जिस्म सीर्धा माइक पर जाकर गिरा । माइक संभल न सका, टामीगन उसके हाथ से निकल गई । विकास खूनी भेड्रिए की भांति उससे लिपट गया, , साथ ही गुरांया-"गुरु का दोस्त है कुत्ते, इसलिए मैं तेरी इज्जत करता था. . लेकिन मुझें नहीं पता था कि असेरिक्रा का श्रेष्ठ जासूस इस से कदर नीच होगा । अंब किसी की इज्जत नहीं करूण । कमीने! लाशें बिछा दूँगा ।"

कहते हुए विकास ने माइक की सिर से ऊंचा उठाकर नीचे पटक दिया ।

यह था विकास के जीवन का सबसे खूंखार रूप ।

सबसे अधिक भयानक विकास आज हुआ और ऐसे पागलपन में इंसानी जिस्म से एक अज्ञात-शक्ति भर जाती है । उस शक्ति का मुकाबला कोई नहीं कर सकता । तभी तो माइक बौखला कर ऱह गया ।

अचानक भागता हुआ बागारोफ वहां प्रविष्ट हुआ एकदम चीखा-------"अबे ओ हरामी लड़के! ये क्या....... ?”

आवाज सुनकर किसी भेड्रिए की भांति घूम गया विकास ।

विकास का यह रूप देखकर बागारोफ़ की अगली-पिछली सात पुश्ते क्राप उठी । वह कुछ कह भी नहीं पाया था कि विकास गुर्रा उटा [

"बीच में मत आना बागारोफ़!” इतना पागल गया था विकास कि बागारोफ तक का नाम लेकर बोल रहा था------" वरना चीर-फाडकर लाशों में बदल दूगा । इसने मेरी पूजा को मारा है, इसे कोई नहीं बचा सकता-कोई नहीं । अब मैं किसी की इज्जत नहीं करूंगा, किसी को बडा वहीं मानूगां, मेरे रास्ते से हट जाओ ।"

दहल उठा बागारोफ़ लेकिन फिर भी बोला----" अबे क्या बका है हरामजादे! वो यार है अपना ।"

" भाड़ मे गई यारी--दोसूती!" चीख पड़ा विकास------" यार के चक्कर में पड़े तो तुम्हारी भी लाश होगी यहां । विकास के सिद्धातों मे खून का बदला खून है । इसने पूजा जैसी मासूम लड़की को मारा है ।"

"क्या?" चौंका बागारोफ़……" इस मासूम लड़की को माइक ने मारा है?" । "

" और हां इसकी मौत के बदले में मैं इस हरामजादे को नहीं छोडूंगां ।" विकास ने माइक के जबडे पर अपने बूट की एक जोरदार ठोकर माऱते हुए कहा ।

माइक एक चीख के साथ पलट गया ।

"क्यों बे अमेरिकी सुअर !" बागारोफ का रूप एकदम बदल गया-------

"अबे अव इतने नामर्द हो गए कि मासूम लड़कियों को मारने लगे! यार विकास, मारे साले को! हुलिया बे-रंग कर दे इसका ! "

विकास का खून जैसे इस जोश भरी बातों से खौल उटा ।

माइक को हाथों-हाथ ले लिया । न जाने क्यों माइक इस समये खुद को विकास के सामने कमजोर-सा महसूस कर रहा था ।

इसके कई कारण थे, पहला तो ये कि विकास इतना पागल हो गया था कि एक पल के लिए भी वह संभलने का अवसर नहीं दे रहा था, दुसरे बागारोफ के विकास के पक्ष में आ जाने के कारण उसकी हिम्मत दूट गई थी । केवल तीन मिनट में ही विकास ने माइक को लहुलुहान कर दिया ।

तभी वहाँ अलफांसे, अशरफ और धनुषटंकार प्रविष्ट हुए । अँदर का दृश्य देखते ही तीनों के माथे ठनके ।

अलफासे तेज आवाज में बोला-------" विकास यह क्या हो रहा है?”

" गुरु !" विकास पुकार उठा…"इस कमीने ने मेरी पूजा को मार डाला मैं इसे जिंदा नहीं छोडूंगा ।"

"क्या?" पूजा की हत्या के नाम पर अलफांसे भी बुरी तरह चौंका---"पूजा को मार डाला !"

" हां , गुरु, हां ।" विकास चीखा---" इसने मेरी पूजा की जान ले ली । पूजा की मौत का बदला अब केवल इसकी मौत है !” कहकर वह पुन: बुरी तरह माइक पर पिल गया ।

परिस्थिति ऐसी थी कि अलफासे भी विकास के खिलाफ बोल न सका । पूजा इतनी मासूम, भोली थी कि खुद अलफासे को उससे स्नेह हो गया था ।

यह उधर से ध्यान हटाकर पूजा की लाश ओर लपका । पूजा के समीप बैठते ही उसने देखा कि पूजा अभी मरी नहीँ है । उंसके मुह से बहुत हल्की-सी कराह निकल रही थी । "

अलफांसे चीख पडा----- "विकास पूजा अभी जिंदा है ।"

"क्या.....!" विकास के कंठ से एक चीख-सी निकल गई !"

उस समय उसने माइक का गिरेबान पकड़ रखा था । एक झटके के साथ उसने माइक को वहीं छोड़ दिया और आंघी-तूफान की तरह भागता हुआ पूजा के पास आया ।

"पूजा.. पूजा! तुम चिंता मत करना......मै तुम्हें मरने नहीं दूगा ।"

अलफासे थोड़ा-सा अलग हट गया !

विकास, ने पूजा का सिर अपनी गोद में रख लिया । पूजा ने अपनी आंख खोलने का प्रयास किया और खून से सने अपने कोमल हाथ विकास के चेहरे पर फिराती हुई बोली------"विकास.....मेरे विकास... तुम ठीकं तो हो?”
 
"हां. . हां. .पूजा मै ठीक हूं ।" रो पडा विकास…"लेकिन , तुम.....तुम मुझें अकेला मत छोडना,.तुम्हाऱी जुदाई मुझे जीने नहीं देगी । पूजा.. मुझे अकेला मत छोडना.. .तुम............तुम पूजा !" कहते सिसक पड़ा वह----""तुम पगली हो पूजा-तुम सामने क्यों आई?"

"वि. . .विं. . .विकास! " पूजा पीडा से तिलमिलाती हुई कठिनता से बोली------" मैंने कहा था न.. तुम मेरी उम्र लेकर जीओगे. .विकास.. मेरी उम्र लेकर… …!"

" पूजा ..... पूजा..... पूजा !" विकास कराह उठा---- "ऐसा मत कहो!"

"तुम पूजा को.. अपने रास्ते से हटवाने के लिए कहते थे न विकास!" टूटे स्वर में पूजा बोली---" पूजा तुम्हारे रास्ते से हट रही है तुम खुश रहना !”

"नहीं पूजा नहीं !" वह सिसक पडा…“वह बिल्कुलं गलत था.... झूठ था..... तुमने मेरा दिल जीत लिया.. .मैं. . .मैं. . .मी तुमसे प्यार करने लगा पूजा मुझे भी और मुझे भी प्यार हो गया !"

"विकास..मेरे विकास !" विकास के मुंह से ये वाक्य सुनकर पूजा जैसे पागल हो गईं----" मुझे गले से लगा तो मुझे प्यार दो विकास.. अंतिम बार. तुमने मुझें कभी प्यार नहीं किया विकास.. मैं जा रही हू ।"

"नहीं पूजा नहीं !" बुरी तरह से पड़ा विकास--" मुझे छोड़कर मत जाओ, मत जाओ!" कहते हुए बिकास ने पूजा को अपनी बांहों में समेट लिय और पागल-से विकासं ने पूजा के मुखडे पर चुबनो की झडी लगा दी । किसी की भी उपस्थिति का उसे ध्यान नहीं रहा । पूजा को चूमता चला गया । ।

तब, जबकि पूजा का जिस्म ढीला पड चुका था ।

तब विकास को इन बातो का होश आया तो उसने पूजा का भुख़ड़ा देखा वह एकदम शान्त था-प्यारे-प्यारे होंठो पर अंतिम मुस्कान थी । मृगनयन खुले हुए थे--मानो अब भी विकास की चाहत कर हो ।

" पूजा........पूजा?" दो बार विकास ने धीरे से पुकारा, लेकिन अब पूजा भला कहां सुनती! वह तो वहुत दूर जा चुकी थी । जव विकास ने यह महसूस किया तो----" पूजा !" इतनी जोर से चीखा विकास कि सारा अड्डा हिलकर रह गया ।

पागल विकास पूजा की लाश से लिपट गया-और फूट फूटकर रोने लगा । फिर एकदम उसे जैसे ध्यान जाया । आसुओं से भीगा, खुन से लथपथ चेहरों उसने ऊपर उठाया और गुर्रा उठा ।

" कहां है माइक? कहा है मेरी पूजा का हत्यारा? मै लाशे बिछा दूंगा !"

सबने चौंककर उस तरफ देखा जहाँ माइक को होना चाहिए सव अवाक रह गए ।

वहां माइक नहीं था । सबका ध्यान पूजा, विकास की ओर था । इस बीच माइक वहां से भाग गया था ।

" कहां है माइक?” पागल…सा होकर विकास चीखा…"बोलो गुरु बोलो माइक कहा हैं?"

उसी क्षण वहाँ विजय प्रविष्ट हुआ । उसकी सास फूली हुई थो ।

वहां का दृश्य देखते ही वह ठिठक गया।

विज़य को देखते ही विकास किसी मासूम बच्चे की भांति दौड़कर उससे लिपट गया और रोते रोते बोला !

"मेरी पूजा मर गई गुरु-पूजा ने मुझे अकेला छोड दिया गुरु वो चली गई..उसे आपके, दोस्त ने भार डाला । गुरु माइक ने माऱ डाला. मैं उसे नही छोडूगा । मेरी जगह पूजा ने जान दे दी गूरू...... मेरे सीने पर लगती हुई गोली उसने अपने जिगर पर खाई है !"

अवाक-सा रह गया विजय । बोलना चाहकर भी कुछ न बोल सका । उसने विकास को अपनी बांहों में समेट लिया । सबको देखा ।

यह देखकर वह बुत की तरह खडा हो गया कि अलफांसे और धनुष्टंकार तक की आखों में भी आसूं थे । पूजा की लाश सामने पड्री थी।

विजय की आंखें भी छलछला आई । उसने कसकर विकस को अपने सीने से लगा लिया ।

विकास फूट-फूटकर रोता ही रहा । अंत में वह बेहोश ही गया । काफी समय पश्चात वातावरण सामान्य हो सका ।

तव, अलफांसे बोला-"क्यों न अब यहां से चला जाए?"

"अब तुम जाओगे कहां हरामजादो?" बागारोफ़ बोला ।

"मैंने विकास से वादा किया है चचा! कि हम भारत से सी.आई.ए. का पतन करके ही दम लेगे । हमे वह वादा निभाना है । पहले यहां से अमेरिका जाना है ।"

"अबे ओ उल्लू के चरखे! यहां क्या बाते मिला रहा है-जल्दी से रपटो!"

"और चचा , आप .....?" विजय ने कहा ।

"अब मैं जिनके साथ आया था, उन्हीं के साथ जाऊंगा तुम चलो उधेड़ दो इस सारे अमेरिका की । मैं भी पीछे से आ रहा हूं ।"

" लेकिन गलोब कहां है, ये तो केवल विकास को पता है चचा !"

"अबे तो ये क्या मर गया है?" बागरोफ़ ने आंखें निकाली-" बड़ा हरामजादा लडका है ये । मरेगा नहीँ-सिर्फ बेहोश है । होश में लाकर पता करों कि ग्लोब कहाँ है?"

उसके बाद विकास को होश में लाकर ग्लोब के विषय में पूछा गया। ग्लोब उसने काफी सुरक्षित स्यान पर छुपा रखा था ।

बागरोफ के अतिरिक्त सभी उससे सवार हो गए ।

पूजा का शव वही रह गया , जैसे अनंत तक विकास की प्रतिक्षा करता रहेगा ।।

बागरोफ ने पाँच सौ पचपन गालियों के साथ उन्हें विदा किया ।

हैरी को अच्छा-भला देखकर जैकी जूलिया चमत्कृत रह गए । जूलिया के कंठ से तो प्रसन्नता में एक चीख निकल गई ।

जैकी को विश्वास नहीं आया कि सामने दो पैरों पर चलता हुआ आने वाला उनका अपना बेटा हैरी ही है जो बिल्ली वन चुका था ।

जैकी तो अवाक-सा उसे देखता रह गया । हेरी के चेहरे पर उसने गहन गंभीरता के भाव देखे थे ।

जूलिया ने लपककर हैरी को गले से लगा लिया और बोला…"हैरी मेरे बेटे! तुम ठीक हो?"

" एकदम ठीक हूं मम्मी? हैरी ने कहा ----"आज मैं एक बडी सफ़लता प्राप्त करके आया हूं ।"

"तुम क्या कहना चाहते हो?” जैकी ने कहा----"ये सब चक्कर-क्या है?"

" चक्कर बहुत सीधा-सादा है डैडी!" हैरी ने कह्य… "मुझे किसी ने बिल्ली बनांया नहीं था, बल्कि मैं जान-बूझकर बिल्ली बन गया था । और उसके बादं हैरी ने सारी घटना विवरण सहित अपने डैडी को बता दी । उसने यह भी बता दिया कि यह चाल उसने सीं आई ए वालो के साथ मिलकर चली थी । वह अपने कार्य में सफल भी हो गया है ।

सुनकर अवाक-सा जैकी अपने लडके के चेहरे को देखता रह गया । उसने तो कभी कल्पना भी नही की थी कि उंसका लड़का इतनी गहरी चाल चल सकता है । एक तरफ सब कुछ सुनकर जहां जैकी आश्चर्यचकित रह गया । बहीं मन-ही-मन उसे गर्व भी हुआ । यह हैरी का ऐसा कार्य था जिससे हैरी अमेरिका सरकार की नजरों में चढ गया था ।

अपनी प्रसन्नता को दबाने की चेष्टा करता हुआ जैकी बोला ।

“लेकिन तुमने हमे यह सब पहले क्यों नहीं बताया?"

"फिर हम उन लोगों के सामने इतना सुंदर नाटक कैसे कर पाते?" हैरी ने कहा ।

" हमाऱी तो तुमने जान ही निकाल दी हेरी!" जूलिया बोली ।

" आपने कल के अखबार का मेटर प्रेस में पहुचाया नहीं डैडी?" हैरी ने डैडी से प्रश्न किया ।

" क्यों?" जैकी है उल्टा प्रश्न किया----"अखबार से तुम्हारा क्या मतलब? आज से पहले तो कभी तुमने अखबार के बारे मे नही

पूछा ।

" आपके अखबार को मे एक बडी धमाकेदार न्यूज देना चाहता हूं डेडी!" हैरी ने कहा-" ये मेरा दावा है कि इससे धमाकेदार न्यूज न आपने पहले कभी छापी होगी और न ही आगे कभी छाप सकेंगे ।"

“क्या न्यूज है?”

"न्यूज यह है डैडी कि अमेरिका में जो कुछ भी होरहा है यानी ज्यूरज इत्यादि में विनाश और अमेरिकन अधिकारियों को बिल्ली वनाने इत्यादि जैसे अपराध विकास नहीं अपराधी सम्राट सिंगहीँ कर रहा है।"

" क्या?" उछल पडा जैकी ।

"मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं डैडी ।" हैरी ने गंभीरता से कहा… 'वास्तव में यह सबकुछ विकास नहीं, सिंगही कर रहा है । प्रत्येक अपराध के पीछे वह बिकास का नाम इसलिए जोड़ रहा है ताकि विश्व में विकास बदनाम हो जाए औंर एक दिन वह भारत का सफ़ल जासूस बनकर उसके विरूध खडा न हो सके ।"

" कहीं यह कोई स्टंट तो नहीं है?” जैकी हैरी को घूरता हुआ बोला-" 'ऐसा भी तो हो सकता है कि तुम बिकास को बचाने के लिए अमेरिका के साथ-साथ पूरे विश्व में यह स्टट फैला रहे हो ताकि विकास इतने अपराध के बाद भी सुरक्षित रहे !"

“अपने बेटे को आपने आज तक नहीं पहचाना डैडी?" हैरी गंभीरता से बोला

हैरी गंभीर स्वर से बोला------" विकास का दोस्त जरूर हूं, लेकिन अपने देश का इतना बडा गद्दार नहीं हूं । मैंने खुद सिगंही से बात की है । मंगल पर विकास सिगंही की कैद में है । जो आदमी पकड़े गए हैं, वे सिगंही के ही आदमी हैं । सिगंही ने मुझे धमकी दी है कि अगर मैंने यह असलियत किसी को बताई तो वह विकस को मौत के घाट उतार देगा । लेकिन एक बात कान खोलकर सुन लो डैडी! अगर सिगंही ने विकास को जरा भी हानि पहुचाईं तो सिगंही को पाताल मे भी जिंदा नहीं छोडूंगा ।" अंतिम वाक्य कहते-कहते हैरी का चेहरा किसी भट्ठी भांति तप उठा था ।

जैकी और जूलिया उसे देखते ही रह गए।

" हम अपने अखबार मे इस रहस्योंद्घाटन का सबूत क्या देंगे?" जैकी ने पूछा !"

“सिंगही के उन आदमियों के बयान जिन्हें मैंने, सी आईं ए. के साथ मिलकर पकड़ा है !"

जैकी के पास हैरी के विरोध में बोलने के लिए कुछ नहीं रहा ।

उसने हैरी से सारी बाते विवरण सहित अवश्य पूछी ।
 
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