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उसके बाद जैकी इस जबरदस्त रहस्योंद्घाटन पर धमाकेदार न्यूज तैयार करने बैठ गया । .
और उसी रात..........
उस समय रात के बारह वजे थे ।
'जमूरा जाफरान' नामक अखबार का संपादक अपने बिस्तर में घुसा खार्राटे ले रहा था । वह बांस की तरह पतला दुबला और ताड़ की भांति लंबा था ।
उसकी एक-एक हड्डी सरलता से गिनी जा सकती थी ! बेचारे के गाल अंदर को धंसे हुए थे और नाक उसके चेहरे पर किसी ट्रैक्टर की भांति खडी थी ।
उसका नाम अललटप लफडुद्दीन था । भगवान ही जाने उसका यह नाम किस बदनसीब को पसंद आया था । हराम का माल खूब खाता था लेकिन मोटा नहीं होता था ।
उस समय कदाचित अललटप । यमराज का स्वप्न देख रहा था । जिसके, कारण उसके मुखारबिंद पर भिन्न-भिन्न प्रकार के परिवर्तनों का आवागमन हो रहा था ।
उसी समय उसकी खिडकियों के रास्ते से काला लबादा ओढे एक रहस्यमय इंसान अंदर आया, जबकि उसे कानो कान खबर तक नहीं हो सकी ।
उस इंसान ने रिवॉल्वर निकाला और उसकी चिमनी जैसी नाक पर चिपका दिया । नीद में डूबे हुए अललटप को क्या पता था कि उसकी नाक से मौत का फ़रिश्ता आ चिपका है ।
उसने एक-आध बार कोई मच्छर इत्यादि समझकर हाथ चलाया लेकिन मच्छर होता तभी तो हटता । रिवॉल्वर न हटना था, न ही हटा ।
साए ने रिवॉल्वर दबाव डालकर उसकी चिमनी रूपी नाक को नीचे दबाया और इस सीमा तक दबाया कि अललटप लफ़डुद्दीन को वह गवारा न हुआ और झट अपनी भरभुट्टो-सी आखें खोल दीं ।
आखें खुलते ही जैसे अललटप के पजामे को गीला होने का खतरा हो गया । उसकी सांस इस तेजी से चलने लगी मानो मीलो से दौड़कर चला आ रहा हो । भरभुट्टो-सी आंखो में याचना उभर आई ।
पतला-दुबाला जिस्म किसी सूखे पते की मांति कांप रहा था ।
" डांस करना है तो पलंग से नीचे उतरकर करो !" नकाबपोश गुर्राया ।
एक झटके के साथ अललटप तुरंत बैठ गया!
"आ. अ... आप क्या चीज हैं?” पुछते पूछते अललटप रो पडा !
--"'रोओ मत !" वह गुर्राया-" बिस्तर से नीचे उतरकर डास करो!" उसने बडा अजीब-सा आदेश दिया ।
कांपता हुआ अललटप रिवॉल्वर की नोंक परे खड़ा हो गया और रोता हुआ बोला-"कौन-सा डांस करूं ।"
"तिगनी का डांस करो?" उसने आदेश दिया ।
"जी....... जी !" वह कांपता हुआ बुदबुदाया--"पर वो तो मुझे नहीं आता !‘"
"अगर इस रिवॉल्वर की गोली तुम्हारे जिस्म ने धंस गई तो आ जाएगा ।" वह खतरनाक स्वर में गुर्राया ।
अललटप के फरिश्ते तक कांप उठे । उसने अपनी नाजुक कमर पर रखा और एक ठूमका लगाया है अभी वह नृत्य की मुद्रा मे आने की चेष्टा ही कर रहा था कि नकाबपोश गुर्राया---“ठहरो !"
जैसे एकदम ब्रेक लग गए । आंसू भरे चेहरे से उसने कांपते हुए नकाबपोश की ओर देखा ।
"तुम्हारे अखबार का नाम क्या है?" नकाबपोश ने खूंखार स्वर में पूछा ।
--“जमूरा जाफरान ।" कहते-कहते जैसे अललटप का पेशाब निकल ही गया।
“कल के अखबार में प्रथम पेज पर यह खबर होनी चाहिए ।" नकाबपोश ने गुर्राकर कहा----" अगर नही छपी तो नंगा करके चौराहे पर तिगनी का नाच कराया जाएगा और उसके बाद गोली अंदर, दम बाहर कर दिया जाएगा ।" कहते हुए नकाबपोश ने टाइप किया हुआ एक कागज उसे थमा दिया । "
अललटप महोदय की कांपती हुई पतली-पतली उंगलिपो ने झट वह कागज ले लिया । कुछ इस तरह जैसे अगर उसने यह कागज नहीं लिया तो वह अभी मर जाएगा है ।
वह बोला-------" अगर इतना-सा काम था मेरे बाप को......!"
"बको मत!" नकाबपोश ने गुर्राकर उसकी बात काटी…"बिस्तर पर मुंह ढककर लेट जाओं । अगर दस मिनट से पहले मुह खोला तो गोली मारकर भेजा फाड दूगा ।"
भला अललटप को क्या आपत्ति हो सकती थी । पलक झपकते ही वह बिस्तर में घुस गया । यह अन्य बात है कि वह अंदर ही-अंदर इस तरह कांप रहा था जैसे बर्फ के बीच नग्न पडा हो । अपने सभी देवताओं के नाम वह बार…बार जप रहा था ।
दस मिनद के स्थान पर बीस मिनट के बाद वह विना मुंह खोते अंदर से ही बोला---"अरे, क्या आप अब भी है !"
लगातार तीन बार कहने के बाद भी जब उसे जवाब नहीं मिला 'तो उसने मुंह खोला । कमरा खाली देखते ही उसका कांपता हुआ जिस्म एकदम निश्चिंत हो गया, मगर सारा जिस्म पसीने से लथपथ था ।
वह बुदबुदा उठा -----" बाप रे । बच गये । यब साला अखबार निकालना भी दिक्कत का काम है !"
............................
अगले दिन अमेरिका के सभी अखबारों में प्रथम पृष्ठ पर एक ही धमाकेदार … न्यूज थी ।
सव अखबारों का मेटर एक-सा था । सबने एक ही भाषा में यह लिखा था-----इंसानो को बिल्ली बनाना और सियुडाड ज्यूरज जैसी घटना करके शहरों में विनाश फैलाना विकास का कार्य नहीं बल्कि अपराधी सम्राट सिंगही का कार्य है ।
जनता में जव यह बात फैली कि सिगंही यह सब करके विकास का नाम बदनाम कर रहा है तो सबको विकास से जैसे सहानुभूति होगई । विकास का अभी तक अमेरिकी जनता पर जो आतंक था , वह सहानुभूति में बदल गया ।
हर स्थान, पर यही चर्चा थी अपने-आपको थोडा-सा नेता जाहिर करने वाला युवक अपने दोस्तों मे खडा कह रहा था…"अजी , मै पहले ही कहतां था कि बो लडका ऐसा नहीं है । पहली वार भी वह हमारी सरकार से नहीं टकराया था, माफिया से टकराया था । यह तो मानना ही होगा कि लड़का चतुर और शक्तिशाली है लेकिन उसकी सारीं योग्यता अच्छे कार्यों के लिए है । वो तो साला सिंगही बदमाश है...... !"
" वह पहले भी कई बार दुनिया के लिए ख़तरा बन चुका है !"
एक दूसरा यूवक बोला…" इस बार साले ने नई चाल खेली । विकास को अपूनी मे डाल लिया और उसके नाम से विनाश फैलाता रहा । ।अब तुम ही बताओ मुर्गीराम !" उसने अपने दोस्त के कंघे पऱ हाथ मारते हुए कहा--"भला कैद में पड़ा हुआ कोई बेचारा अपनी स्थिति कैसे साफ करे?"
और इस प्रकार... । अधिकांश जनता की सहानुभूति विकास के साथ हो गई । रेडियों और टेलीविजन पर भी यह समाचार प्रसारित हो गया ।सब कुछ हो गया लेकिन सी.आई.ए. सीक्रेट सर्विस और अमेरिकन सरकार को यह बात सरासर नहीं जमी ।
सी आई ए. . . के नए चीफ मॉडल नार्वे का ख्याल था कि यह सब एक स्टंट है जबकि वास्तव में यह सव बिकास ही कर रहा था लेकिन अब विश्व और यू एन ओ. के सामने वह खुद को निर्दोष साबित करने के लिए यह सब कुछ कर रहा है । अपनी बात को शक्तिशाली बनाने के अमेरिका के विशेष अधिकारियों से कहा कि जो आदमी हैरी नामक लडके ने पकड़वाएं हैं, हो सकता है वास्तव में वे विकास के आदमी हो जबरदस्ती यह कहलवाया जा रहा हो कि ये सिंग़ही के आदमी हैं । मिस्टर मॉडल नार्वें ने यह भी कहा है कि हमे भूलना नहीं चाहिए कि हैरी नामक यह लडका पहले-माफिया वाले केस में भी विकास के साथ था…संभव है, इस बार भी यह लडका उसी का साथ दे रहा हो! नार्वे ने यह भी कहा कि यह कथन भी हैरी का ही है कि खुद उसने सिगंही से बाते की हैं । संभव है, यह भी गलत हो ।
मांडल नार्वे की यह बात पूरी अमेरिकन सरकारी मशीनरी को जंच रही थी । सीक्रेट सर्विस के चीफ़ की माइक से संबंध स्थापित करने की चेष्टा की जा चुकी थी परंतु असफलता का खजाना हाथ लगा था ।
हैरी के पीछे सी.आई.ए. के जासूस लगा दिए गए थे । कदाचित यह पता लगाने के लिए कि वह विकास का दोस्त है या दूश्मन?
और इधर…।
अमेरिका में प्रकाशित होने वाले आज़ के सारे अखवार इसी खबर से भरे पड़े थे । सबमें छपी उसी खबर को जैकी ने बड़े ध्यान से पढा था ।
उसके सामने उसकी पत्नी जूलिया और पुत्र हैरी बैठा था ।
काफी देरसे कमरे मे सन्नाटा था-इस सन्नाटे को भंग किया हैरी ने ।
"आप अलग-अलग अखबार में बार…बार उसी ख़बर को क्यों पढ़ रहे है डैडी !"
"ये खबर केवल एक नहीं बेटे बल्कि एक ही ढंग से छपी है ।" जैकी बोला-------" अगर एक ही खबर प्रत्येक अखबार वाले को मिले तो हर अखबार वाला उसे अपने ढंग से चटपटा बनाकर छापता है । हर अखबार वाले का शीर्षक अलग होता है लेकिन इस खबर मे विशेषता यह है कि प्रत्येक अखवार वाले ने न केवल इसका एक-सा ही शीर्षक दिया है बल्कि खबर भी एक-सी प्रकाशित की गई है यानी सब अखबारों में छपी खबर की लैंगवेज एक ही है ।"
"आप कहना क्या चाहते है डैडी? "
और उसी रात..........
उस समय रात के बारह वजे थे ।
'जमूरा जाफरान' नामक अखबार का संपादक अपने बिस्तर में घुसा खार्राटे ले रहा था । वह बांस की तरह पतला दुबला और ताड़ की भांति लंबा था ।
उसकी एक-एक हड्डी सरलता से गिनी जा सकती थी ! बेचारे के गाल अंदर को धंसे हुए थे और नाक उसके चेहरे पर किसी ट्रैक्टर की भांति खडी थी ।
उसका नाम अललटप लफडुद्दीन था । भगवान ही जाने उसका यह नाम किस बदनसीब को पसंद आया था । हराम का माल खूब खाता था लेकिन मोटा नहीं होता था ।
उस समय कदाचित अललटप । यमराज का स्वप्न देख रहा था । जिसके, कारण उसके मुखारबिंद पर भिन्न-भिन्न प्रकार के परिवर्तनों का आवागमन हो रहा था ।
उसी समय उसकी खिडकियों के रास्ते से काला लबादा ओढे एक रहस्यमय इंसान अंदर आया, जबकि उसे कानो कान खबर तक नहीं हो सकी ।
उस इंसान ने रिवॉल्वर निकाला और उसकी चिमनी जैसी नाक पर चिपका दिया । नीद में डूबे हुए अललटप को क्या पता था कि उसकी नाक से मौत का फ़रिश्ता आ चिपका है ।
उसने एक-आध बार कोई मच्छर इत्यादि समझकर हाथ चलाया लेकिन मच्छर होता तभी तो हटता । रिवॉल्वर न हटना था, न ही हटा ।
साए ने रिवॉल्वर दबाव डालकर उसकी चिमनी रूपी नाक को नीचे दबाया और इस सीमा तक दबाया कि अललटप लफ़डुद्दीन को वह गवारा न हुआ और झट अपनी भरभुट्टो-सी आखें खोल दीं ।
आखें खुलते ही जैसे अललटप के पजामे को गीला होने का खतरा हो गया । उसकी सांस इस तेजी से चलने लगी मानो मीलो से दौड़कर चला आ रहा हो । भरभुट्टो-सी आंखो में याचना उभर आई ।
पतला-दुबाला जिस्म किसी सूखे पते की मांति कांप रहा था ।
" डांस करना है तो पलंग से नीचे उतरकर करो !" नकाबपोश गुर्राया ।
एक झटके के साथ अललटप तुरंत बैठ गया!
"आ. अ... आप क्या चीज हैं?” पुछते पूछते अललटप रो पडा !
--"'रोओ मत !" वह गुर्राया-" बिस्तर से नीचे उतरकर डास करो!" उसने बडा अजीब-सा आदेश दिया ।
कांपता हुआ अललटप रिवॉल्वर की नोंक परे खड़ा हो गया और रोता हुआ बोला-"कौन-सा डांस करूं ।"
"तिगनी का डांस करो?" उसने आदेश दिया ।
"जी....... जी !" वह कांपता हुआ बुदबुदाया--"पर वो तो मुझे नहीं आता !‘"
"अगर इस रिवॉल्वर की गोली तुम्हारे जिस्म ने धंस गई तो आ जाएगा ।" वह खतरनाक स्वर में गुर्राया ।
अललटप के फरिश्ते तक कांप उठे । उसने अपनी नाजुक कमर पर रखा और एक ठूमका लगाया है अभी वह नृत्य की मुद्रा मे आने की चेष्टा ही कर रहा था कि नकाबपोश गुर्राया---“ठहरो !"
जैसे एकदम ब्रेक लग गए । आंसू भरे चेहरे से उसने कांपते हुए नकाबपोश की ओर देखा ।
"तुम्हारे अखबार का नाम क्या है?" नकाबपोश ने खूंखार स्वर में पूछा ।
--“जमूरा जाफरान ।" कहते-कहते जैसे अललटप का पेशाब निकल ही गया।
“कल के अखबार में प्रथम पेज पर यह खबर होनी चाहिए ।" नकाबपोश ने गुर्राकर कहा----" अगर नही छपी तो नंगा करके चौराहे पर तिगनी का नाच कराया जाएगा और उसके बाद गोली अंदर, दम बाहर कर दिया जाएगा ।" कहते हुए नकाबपोश ने टाइप किया हुआ एक कागज उसे थमा दिया । "
अललटप महोदय की कांपती हुई पतली-पतली उंगलिपो ने झट वह कागज ले लिया । कुछ इस तरह जैसे अगर उसने यह कागज नहीं लिया तो वह अभी मर जाएगा है ।
वह बोला-------" अगर इतना-सा काम था मेरे बाप को......!"
"बको मत!" नकाबपोश ने गुर्राकर उसकी बात काटी…"बिस्तर पर मुंह ढककर लेट जाओं । अगर दस मिनट से पहले मुह खोला तो गोली मारकर भेजा फाड दूगा ।"
भला अललटप को क्या आपत्ति हो सकती थी । पलक झपकते ही वह बिस्तर में घुस गया । यह अन्य बात है कि वह अंदर ही-अंदर इस तरह कांप रहा था जैसे बर्फ के बीच नग्न पडा हो । अपने सभी देवताओं के नाम वह बार…बार जप रहा था ।
दस मिनद के स्थान पर बीस मिनट के बाद वह विना मुंह खोते अंदर से ही बोला---"अरे, क्या आप अब भी है !"
लगातार तीन बार कहने के बाद भी जब उसे जवाब नहीं मिला 'तो उसने मुंह खोला । कमरा खाली देखते ही उसका कांपता हुआ जिस्म एकदम निश्चिंत हो गया, मगर सारा जिस्म पसीने से लथपथ था ।
वह बुदबुदा उठा -----" बाप रे । बच गये । यब साला अखबार निकालना भी दिक्कत का काम है !"
............................
अगले दिन अमेरिका के सभी अखबारों में प्रथम पृष्ठ पर एक ही धमाकेदार … न्यूज थी ।
सव अखबारों का मेटर एक-सा था । सबने एक ही भाषा में यह लिखा था-----इंसानो को बिल्ली बनाना और सियुडाड ज्यूरज जैसी घटना करके शहरों में विनाश फैलाना विकास का कार्य नहीं बल्कि अपराधी सम्राट सिंगही का कार्य है ।
जनता में जव यह बात फैली कि सिगंही यह सब करके विकास का नाम बदनाम कर रहा है तो सबको विकास से जैसे सहानुभूति होगई । विकास का अभी तक अमेरिकी जनता पर जो आतंक था , वह सहानुभूति में बदल गया ।
हर स्थान, पर यही चर्चा थी अपने-आपको थोडा-सा नेता जाहिर करने वाला युवक अपने दोस्तों मे खडा कह रहा था…"अजी , मै पहले ही कहतां था कि बो लडका ऐसा नहीं है । पहली वार भी वह हमारी सरकार से नहीं टकराया था, माफिया से टकराया था । यह तो मानना ही होगा कि लड़का चतुर और शक्तिशाली है लेकिन उसकी सारीं योग्यता अच्छे कार्यों के लिए है । वो तो साला सिंगही बदमाश है...... !"
" वह पहले भी कई बार दुनिया के लिए ख़तरा बन चुका है !"
एक दूसरा यूवक बोला…" इस बार साले ने नई चाल खेली । विकास को अपूनी मे डाल लिया और उसके नाम से विनाश फैलाता रहा । ।अब तुम ही बताओ मुर्गीराम !" उसने अपने दोस्त के कंघे पऱ हाथ मारते हुए कहा--"भला कैद में पड़ा हुआ कोई बेचारा अपनी स्थिति कैसे साफ करे?"
और इस प्रकार... । अधिकांश जनता की सहानुभूति विकास के साथ हो गई । रेडियों और टेलीविजन पर भी यह समाचार प्रसारित हो गया ।सब कुछ हो गया लेकिन सी.आई.ए. सीक्रेट सर्विस और अमेरिकन सरकार को यह बात सरासर नहीं जमी ।
सी आई ए. . . के नए चीफ मॉडल नार्वे का ख्याल था कि यह सब एक स्टंट है जबकि वास्तव में यह सव बिकास ही कर रहा था लेकिन अब विश्व और यू एन ओ. के सामने वह खुद को निर्दोष साबित करने के लिए यह सब कुछ कर रहा है । अपनी बात को शक्तिशाली बनाने के अमेरिका के विशेष अधिकारियों से कहा कि जो आदमी हैरी नामक लडके ने पकड़वाएं हैं, हो सकता है वास्तव में वे विकास के आदमी हो जबरदस्ती यह कहलवाया जा रहा हो कि ये सिंग़ही के आदमी हैं । मिस्टर मॉडल नार्वें ने यह भी कहा है कि हमे भूलना नहीं चाहिए कि हैरी नामक यह लडका पहले-माफिया वाले केस में भी विकास के साथ था…संभव है, इस बार भी यह लडका उसी का साथ दे रहा हो! नार्वे ने यह भी कहा कि यह कथन भी हैरी का ही है कि खुद उसने सिगंही से बाते की हैं । संभव है, यह भी गलत हो ।
मांडल नार्वे की यह बात पूरी अमेरिकन सरकारी मशीनरी को जंच रही थी । सीक्रेट सर्विस के चीफ़ की माइक से संबंध स्थापित करने की चेष्टा की जा चुकी थी परंतु असफलता का खजाना हाथ लगा था ।
हैरी के पीछे सी.आई.ए. के जासूस लगा दिए गए थे । कदाचित यह पता लगाने के लिए कि वह विकास का दोस्त है या दूश्मन?
और इधर…।
अमेरिका में प्रकाशित होने वाले आज़ के सारे अखवार इसी खबर से भरे पड़े थे । सबमें छपी उसी खबर को जैकी ने बड़े ध्यान से पढा था ।
उसके सामने उसकी पत्नी जूलिया और पुत्र हैरी बैठा था ।
काफी देरसे कमरे मे सन्नाटा था-इस सन्नाटे को भंग किया हैरी ने ।
"आप अलग-अलग अखबार में बार…बार उसी ख़बर को क्यों पढ़ रहे है डैडी !"
"ये खबर केवल एक नहीं बेटे बल्कि एक ही ढंग से छपी है ।" जैकी बोला-------" अगर एक ही खबर प्रत्येक अखबार वाले को मिले तो हर अखबार वाला उसे अपने ढंग से चटपटा बनाकर छापता है । हर अखबार वाले का शीर्षक अलग होता है लेकिन इस खबर मे विशेषता यह है कि प्रत्येक अखवार वाले ने न केवल इसका एक-सा ही शीर्षक दिया है बल्कि खबर भी एक-सी प्रकाशित की गई है यानी सब अखबारों में छपी खबर की लैंगवेज एक ही है ।"
"आप कहना क्या चाहते है डैडी? "