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बिनाश दूत बिकास-विकास की वापसी complete

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उसके बाद जैकी इस जबरदस्त रहस्योंद्घाटन पर धमाकेदार न्यूज तैयार करने बैठ गया । .

और उसी रात..........

उस समय रात के बारह वजे थे ।

'जमूरा जाफरान' नामक अखबार का संपादक अपने बिस्तर में घुसा खार्राटे ले रहा था । वह बांस की तरह पतला दुबला और ताड़ की भांति लंबा था ।

उसकी एक-एक हड्डी सरलता से गिनी जा सकती थी ! बेचारे के गाल अंदर को धंसे हुए थे और नाक उसके चेहरे पर किसी ट्रैक्टर की भांति खडी थी ।

उसका नाम अललटप लफडुद्दीन था । भगवान ही जाने उसका यह नाम किस बदनसीब को पसंद आया था । हराम का माल खूब खाता था लेकिन मोटा नहीं होता था ।

उस समय कदाचित अललटप । यमराज का स्वप्न देख रहा था । जिसके, कारण उसके मुखारबिंद पर भिन्न-भिन्न प्रकार के परिवर्तनों का आवागमन हो रहा था ।

उसी समय उसकी खिडकियों के रास्ते से काला लबादा ओढे एक रहस्यमय इंसान अंदर आया, जबकि उसे कानो कान खबर तक नहीं हो सकी ।

उस इंसान ने रिवॉल्वर निकाला और उसकी चिमनी जैसी नाक पर चिपका दिया । नीद में डूबे हुए अललटप को क्या पता था कि उसकी नाक से मौत का फ़रिश्ता आ चिपका है ।

उसने एक-आध बार कोई मच्छर इत्यादि समझकर हाथ चलाया लेकिन मच्छर होता तभी तो हटता । रिवॉल्वर न हटना था, न ही हटा ।

साए ने रिवॉल्वर दबाव डालकर उसकी चिमनी रूपी नाक को नीचे दबाया और इस सीमा तक दबाया कि अललटप लफ़डुद्दीन को वह गवारा न हुआ और झट अपनी भरभुट्टो-सी आखें खोल दीं ।

आखें खुलते ही जैसे अललटप के पजामे को गीला होने का खतरा हो गया । उसकी सांस इस तेजी से चलने लगी मानो मीलो से दौड़कर चला आ रहा हो । भरभुट्टो-सी आंखो में याचना उभर आई ।

पतला-दुबाला जिस्म किसी सूखे पते की मांति कांप रहा था ।

" डांस करना है तो पलंग से नीचे उतरकर करो !" नकाबपोश गुर्राया ।

एक झटके के साथ अललटप तुरंत बैठ गया!

"आ. अ... आप क्या चीज हैं?” पुछते पूछते अललटप रो पडा !

--"'रोओ मत !" वह गुर्राया-" बिस्तर से नीचे उतरकर डास करो!" उसने बडा अजीब-सा आदेश दिया ।

कांपता हुआ अललटप रिवॉल्वर की नोंक परे खड़ा हो गया और रोता हुआ बोला-"कौन-सा डांस करूं ।"

"तिगनी का डांस करो?" उसने आदेश दिया ।

"जी....... जी !" वह कांपता हुआ बुदबुदाया--"पर वो तो मुझे नहीं आता !‘"

"अगर इस रिवॉल्वर की गोली तुम्हारे जिस्म ने धंस गई तो आ जाएगा ।" वह खतरनाक स्वर में गुर्राया ।

अललटप के फरिश्ते तक कांप उठे । उसने अपनी नाजुक कमर पर रखा और एक ठूमका लगाया है अभी वह नृत्य की मुद्रा मे आने की चेष्टा ही कर रहा था कि नकाबपोश गुर्राया---“ठहरो !"

जैसे एकदम ब्रेक लग गए । आंसू भरे चेहरे से उसने कांपते हुए नकाबपोश की ओर देखा ।

"तुम्हारे अखबार का नाम क्या है?" नकाबपोश ने खूंखार स्वर में पूछा ।

--“जमूरा जाफरान ।" कहते-कहते जैसे अललटप का पेशाब निकल ही गया।

“कल के अखबार में प्रथम पेज पर यह खबर होनी चाहिए ।" नकाबपोश ने गुर्राकर कहा----" अगर नही छपी तो नंगा करके चौराहे पर तिगनी का नाच कराया जाएगा और उसके बाद गोली अंदर, दम बाहर कर दिया जाएगा ।" कहते हुए नकाबपोश ने टाइप किया हुआ एक कागज उसे थमा दिया । "

अललटप महोदय की कांपती हुई पतली-पतली उंगलिपो ने झट वह कागज ले लिया । कुछ इस तरह जैसे अगर उसने यह कागज नहीं लिया तो वह अभी मर जाएगा है ।

वह बोला-------" अगर इतना-सा काम था मेरे बाप को......!"

"बको मत!" नकाबपोश ने गुर्राकर उसकी बात काटी…"बिस्तर पर मुंह ढककर लेट जाओं । अगर दस मिनट से पहले मुह खोला तो गोली मारकर भेजा फाड दूगा ।"

भला अललटप को क्या आपत्ति हो सकती थी । पलक झपकते ही वह बिस्तर में घुस गया । यह अन्य बात है कि वह अंदर ही-अंदर इस तरह कांप रहा था जैसे बर्फ के बीच नग्न पडा हो । अपने सभी देवताओं के नाम वह बार…बार जप रहा था ।

दस मिनद के स्थान पर बीस मिनट के बाद वह विना मुंह खोते अंदर से ही बोला---"अरे, क्या आप अब भी है !"

लगातार तीन बार कहने के बाद भी जब उसे जवाब नहीं मिला 'तो उसने मुंह खोला । कमरा खाली देखते ही उसका कांपता हुआ जिस्म एकदम निश्चिंत हो गया, मगर सारा जिस्म पसीने से लथपथ था ।

वह बुदबुदा उठा -----" बाप रे । बच गये । यब साला अखबार निकालना भी दिक्कत का काम है !"

............................

अगले दिन अमेरिका के सभी अखबारों में प्रथम पृष्ठ पर एक ही धमाकेदार … न्यूज थी ।

सव अखबारों का मेटर एक-सा था । सबने एक ही भाषा में यह लिखा था-----इंसानो को बिल्ली बनाना और सियुडाड ज्यूरज जैसी घटना करके शहरों में विनाश फैलाना विकास का कार्य नहीं बल्कि अपराधी सम्राट सिंगही का कार्य है ।

जनता में जव यह बात फैली कि सिगंही यह सब करके विकास का नाम बदनाम कर रहा है तो सबको विकास से जैसे सहानुभूति होगई । विकास का अभी तक अमेरिकी जनता पर जो आतंक था , वह सहानुभूति में बदल गया ।

हर स्थान, पर यही चर्चा थी अपने-आपको थोडा-सा नेता जाहिर करने वाला युवक अपने दोस्तों मे खडा कह रहा था…"अजी , मै पहले ही कहतां था कि बो लडका ऐसा नहीं है । पहली वार भी वह हमारी सरकार से नहीं टकराया था, माफिया से टकराया था । यह तो मानना ही होगा कि लड़का चतुर और शक्तिशाली है लेकिन उसकी सारीं योग्यता अच्छे कार्यों के लिए है । वो तो साला सिंगही बदमाश है...... !"

" वह पहले भी कई बार दुनिया के लिए ख़तरा बन चुका है !"

एक दूसरा यूवक बोला…" इस बार साले ने नई चाल खेली । विकास को अपूनी मे डाल लिया और उसके नाम से विनाश फैलाता रहा । ।अब तुम ही बताओ मुर्गीराम !" उसने अपने दोस्त के कंघे पऱ हाथ मारते हुए कहा--"भला कैद में पड़ा हुआ कोई बेचारा अपनी स्थिति कैसे साफ करे?"

और इस प्रकार... । अधिकांश जनता की सहानुभूति विकास के साथ हो गई । रेडियों और टेलीविजन पर भी यह समाचार प्रसारित हो गया ।सब कुछ हो गया लेकिन सी.आई.ए. सीक्रेट सर्विस और अमेरिकन सरकार को यह बात सरासर नहीं जमी ।

सी आई ए. . . के नए चीफ मॉडल नार्वे का ख्याल था कि यह सब एक स्टंट है जबकि वास्तव में यह सव बिकास ही कर रहा था लेकिन अब विश्व और यू एन ओ. के सामने वह खुद को निर्दोष साबित करने के लिए यह सब कुछ कर रहा है । अपनी बात को शक्तिशाली बनाने के अमेरिका के विशेष अधिकारियों से कहा कि जो आदमी हैरी नामक लडके ने पकड़वाएं हैं, हो सकता है वास्तव में वे विकास के आदमी हो जबरदस्ती यह कहलवाया जा रहा हो कि ये सिंग़ही के आदमी हैं । मिस्टर मॉडल नार्वें ने यह भी कहा है कि हमे भूलना नहीं चाहिए कि हैरी नामक यह लडका पहले-माफिया वाले केस में भी विकास के साथ था…संभव है, इस बार भी यह लडका उसी का साथ दे रहा हो! नार्वे ने यह भी कहा कि यह कथन भी हैरी का ही है कि खुद उसने सिगंही से बाते की हैं । संभव है, यह भी गलत हो ।

मांडल नार्वे की यह बात पूरी अमेरिकन सरकारी मशीनरी को जंच रही थी । सीक्रेट सर्विस के चीफ़ की माइक से संबंध स्थापित करने की चेष्टा की जा चुकी थी परंतु असफलता का खजाना हाथ लगा था ।

हैरी के पीछे सी.आई.ए. के जासूस लगा दिए गए थे । कदाचित यह पता लगाने के लिए कि वह विकास का दोस्त है या दूश्मन?

और इधर…।

अमेरिका में प्रकाशित होने वाले आज़ के सारे अखवार इसी खबर से भरे पड़े थे । सबमें छपी उसी खबर को जैकी ने बड़े ध्यान से पढा था ।

उसके सामने उसकी पत्नी जूलिया और पुत्र हैरी बैठा था ।

काफी देरसे कमरे मे सन्नाटा था-इस सन्नाटे को भंग किया हैरी ने ।

"आप अलग-अलग अखबार में बार…बार उसी ख़बर को क्यों पढ़ रहे है डैडी !"

"ये खबर केवल एक नहीं बेटे बल्कि एक ही ढंग से छपी है ।" जैकी बोला-------" अगर एक ही खबर प्रत्येक अखबार वाले को मिले तो हर अखबार वाला उसे अपने ढंग से चटपटा बनाकर छापता है । हर अखबार वाले का शीर्षक अलग होता है लेकिन इस खबर मे विशेषता यह है कि प्रत्येक अखवार वाले ने न केवल इसका एक-सा ही शीर्षक दिया है बल्कि खबर भी एक-सी प्रकाशित की गई है यानी सब अखबारों में छपी खबर की लैंगवेज एक ही है ।"

"आप कहना क्या चाहते है डैडी? "
 
"मैं कहना केवल यह चाहता हूं कि यह खबर अखबार वालो ने अपनी तरफ़ से नहीं छापी है बल्कि किसी ने एक ही खबर की अनेक कापियां करके इन अखबार बालों से ज़बरदस्ती छपवाई है ।"

“यह कैसे ,संभव है डैडी?” हैरी बोला------"यह भी तो हो सकता है कि यह न्यूज पहले किसी एक अखबार वाले को प्राप्त हुई हो, उसके बाद उसने वही खबर अपने अन्य संपादक साथियों को दे दी हो।"

" ऐसा कभी नहीं हुआ करता हैरी वेटे!" बड़े व्यंग्यात्मक ढंग से मुस्कराते हुए जैकी ने कहा-" जिस अखबार वाले को ऐसी धमाकेदार खबर मिल जाती, है, वह उस समय तक किसी अन्य अखवार वाले के कानों-कान खबर भी नहीं लगने देता, जव तक कि पहले उसके अखबार से न छप जाए । ऐसी धमाकेदार खबरों से ही तो प्रत्येक अखवार का महत्त्व बनता है । जो अखबार इसं तरह की खबरों को छापकर सबसे पहले किसी रहस्यमय धटना का ऱहस्योद्घाटन करता है, वहीँ अखबार श्रेष्ठ माना जाता है और फिर ऐसा मुर्ख संपादक कौन होगा जो ऐसी खबर दूसरे संपादक को बताए !"

जैकी के इस कथन पर हैरी निरुत्तर हो गया, फिर . बोला…"लेकिन् डैडी, आप कहना क्या चाहते हैं ?"

-"कहना केवल यह चाहता है हैरी बेटे! कि यह खबर किसी ने छपवाई [ जैकी अपनी पैनी दृष्टि हैरी के चेहरे पर गड़ाकर बोला और विकास के पक्ष में यह खबर इतनी तेजी से फैलाने का इच्छुक हो सकता है जो या तो उसका साथी हो या उसका हमदर्द ।"

"लगता है डैडी कि आप मुझ पर संदेह कर रहे है !"

"संदेह नहीं कर रहा हूं हेरी बेटे बल्कि तुम्हें बता रहा हूं कि मुझें मालूम है कि यह खबर तुमने रात को मेरे टाइप राइटर पर टाइप की नकाबपोश के रूपं मेँ तुमने संपादकों तक पहुंचाई ।

" क्या ?” जूलिया चौंक पड्री ।

" तुम चुप रहो!" जैकी ने सख्त स्वर मे जूलिया को डाटा फिर हैरी से बोला-------'“क्यों हैरी, क्या यह गलत है?"

" एकदम गलत है डैडी?" हैरी ने कहा ।

"मैं जानता था कि तुम यह बोलोगे" जैकी कठोर स्वर में बोला…"लेकिन झूठ बोलने से पहले तुम्हें यह सोच लेना चाहिए कि मैं तुम्हारा बाप हू । वर्षो से एक क्राइम पेपर चला रहा हूं। न जाने के कितने जासूसो को मै जाजूसी शिक्षा दे चुका हूं।" कहते हुए जैकी मेज की दराज से एक टाइप किया हुआ कागज निकाला और मेज पर फैलाता हुआ बोला:-----“देखो, ये है बो कागज जो कल रात एक नकाबपोश ने अललटप लफ़डुद्दीन नामक संपादक को रिवॉल्वर की नोक पर छापने के लिए दिया था । उसने एक साथी होने के नाते मुझे सब कुछ उसी समय फोन पर बता दिया था । लेकिन अन्य किसी को बताने का उसमे साहस नहीं है क्योंकि उस नकाबपोश से वह बुरी तरह भयभीत है । उसके यह बताते ही मेरा संदेह फौरन तुम पर गया था । मैं उसी समय तुम्हारे कमरे मे गया ।

लेकिन तुम कमरे से गायब थे । मेरे सामने ही तुम पाइप के सहारे चढकर आए कमरे में पहुंचकर आराम से हो गए ।"

"लेकिन...... ।"

"बोलो मत, पहले पूरी बात सुनो ।" जैकी ने कहा… "चाहता तो मै उसी समय तुमसे पूछ सकता था कि कहां से आ रहे हो है लेकिन मेरे विचार से यह अच्छा काम नही होता क्योक्रि उस समय किसी भी तरह का बहाना लगाकर बोल संकते थे । अत: तुम्हें उस समय न छेढ़कर सुबह ही होते ही टाइप किया हुआ

कागज़ अललटप के नौकर से यहां मंगवा लिया कागज़ और यह कागज एकदम इस बात को सिद्ध करता है कि यह मेरे टाइपराइटर पर टाइप किया हुआ है क्योंकि मैं जानता हू कि मेरे टाइपराइटर के (स) और (ब) खराब हैं और तुम आसानी से देख सकते हो कि पत्र मे अक्षर ठीक आ पा रहे हैं।"

जैकी के इतने तथ्यों के बाद हैरी निरुत्तर होकर अपने हैडी का चेहरा देखता रह गया ।

"बोलो क्या तुम अब भी झूठ बोलने का साहस रखते हो?" जैकी ने सख्त स्वर में पूछा ।

"यह ठीक है डैडी कि मैं वह नकाबपोश था, लेकिन मै .......!'

"बको मत! ” जैकी एकदम ताव खा गया… अगर एक भी लफ्ज बोले तो जुबान खीच लूगां । तुम विकास के इतने हमदर्द हो गए । गैर -कानूनी काम भी करने लगे?"

" लेकिन डैडी सही खबर को छपवाना क्या गेर-कानूनी काम है ?" हेरी ने कहा ।

"तुम्हारा ढंग गैर-कानूनी है ।" क्रोध में जैकी चीख पडा-------"अगर यह खबर छपवानी ही थी तो तुम...... तुम कलियुगी हो न अपने से ज्यादा बुद्धिमान किसी को समझते ही नहीं हों अब तो मुझे यह विश्वास भी नहीं रहा कि यह खबर जो तुम उडा रहे हो, सच भी हो सकती है ।"

" क्या मतलब डैडी?"

" यह खबर तुमने पैदा की है । हो सकता है कि तुमने विकास के साथियों को किसी तरह डरा-धमका दिया हो और उनसे जबरदस्ती यह कहलवा रहै हो कि वे सिगंही के आदमी है ।"

"डैडी.. !" एकदम गुर्रा उठा हैरी------" यह एकदम गलत है । मैं-विकस का दोस्त हू लेकिन देश का गद्दार नहीं? आपकी कसम खाकर कहता हूं कि यह खबर एकदम सही है । सिगंही ही विकास के नाम पर सब कुछ कर रहा है !*

"चीखो मत !" जैकी भी गुर्रा उठा --" झूठ बोलते हो और उस पर अकड़ दिखाते हो !"

" नंहीं डैडी ।" एक झटके के साथ हैरी क्रोध में फुर्ती से खड्रा हो गया-" जब तक आप सही थे, मैं चुप था लेकिन अब आप गलत है आपका बेटा गलती के आगे सिर नहीं झुकाएगा । यह ठीक है , नकाब पोश बनकर अखबारों में यह खबर छपवाई । लेकिन यह सरासर गलत है कि यह खबर झूठी है ।"

" इस खबर की सच्चाई में तुम्हारे पास कोई ठोस सबूत है?”

-"जो सबूत हैं, उन्हें आप मेरा धोखा बता रहे है !" हैरी बोला ।

" या तो कोई ऐसा सुबूत पेश करों जिससे यह साबित हो कि वह खबर सच है, वरना मैं इसी समय तुम्हें देशद्रोही के रूप मे पुलिस कों सौप दूँगा? "

" क्या?" जूलिया चिहुक उठी-" आप हैरी के.... .. . ।"

“ बीच मत बोलो ।" जैकी ने गुरकिर उसे चुप करा दिया, फिर से बोला-" बोलो! केई सबूत है...... ।"

हैरी का चेहरा कांपटी तक सुर्ख हो गया था । दांत एक-दूसरे पर ज़म गए, आंखों में दृढ़ता के भाव उभर आए, बोला-" ये सरासर अन्याय है डैडी और अन्याय के सामने मैं सिर नहीं झुका सकता । माना कि आप मेरे डैडी है । आपकी आज्ञा या पालन करना मेरा धर्म है लेकिन इसका मतलब यह कभी नहीं कि आप गलत-सलत जो कहे ,मैं वो मान लूं । किसी भी कीमत पर आप मुझें गिरफ्तार नहीं करा सकते ।"

पलक झपकते ही झटके के साथ जैकी ने रिवॉल्वर निकाल लिया और हैरी की ऑर तानकर गरजा-"भै जानता था कि तुम यह हरकत कर सकते हो । अपनी जगह से अगर एक कदम भी हिले तो तुम जानते हो कि तुम्हारा बाप सिद्वार्तों का पक्का है । मै गोली चलाने मेँ जरा भी नही हिचकूगा ।"

" आपने मुझे खुद इस गोली से बचना सिखाया है डैडी?" मुस्कराकर पीछे हटता हुआ हैरी बोला------" माफ़ करना, में अब वो सबूत लेकर ही वापस आपके पास आऊंगा जिससे सिद्ध ही सके कि मै ठीक कह रहा हू ।

"रुक जाओ हैरी, वरना !"

…"हाथ ऊपर उठा तो मिस्टर हैरी !" तभी हैरी के पीछे से एक आवाज़ गुजी ।

विद्युत गति से हैरी उसकी ओर घूम गया । सामने एक अपरिचित व्यक्ति को हाथ में रिवॉल्वर लिए खड़ा पाया । हैरी एकदम बोला---"आप किस खेत की गाजर है और खेत खेत क्यों घूम रहे हैं?"

"मैं सी आई ए का एजेंट हू ।" अपने हाथ में दबे हुए रिवॉल्वर को वह बड़ी स्टाइल से घुमाता हुआ बोला----- "सी अई ए, को भी आप पर इसी बात का संदेह है कि आपने यह समाचार झूठा उड़ाया है ।"

" ओह! !' हैरी सब कुछ समझता हुआ बोला-------" इसका मतलब यह हुआ कि वास्तव मे से यहाँ से भागना ?" कहता हुआ वह पुन: अपने डैडी यानी की जैकी ओर मुडा और एकदम चौका-----"नहीं मम्मी !"

और हैरी के इस अभिनय पर जैकी जैसा इंसान भी धोखा खा गया ।

बडी तेजी के साथ वह जुलिया की ओर घूमा और इसी बीच हैरी ने अपना करतब दिखा गया था । उसका जिस्म कबूतर की भांति कलाबाजी खाता हुआ सीधा सी आई ए के एजेंट के ऊपर जा गिरा ।

वह अभी कुछ समझ नहीं था कि हैरी का एक जोरदार दुहत्तड उसकी गुद्दी पर पडा ।

तब तक जब तक कि जैकी अथवा बह ऐजेण्ट कुछ समझते, हैरी कमरे से आंधी-तूफांन की भाति गायब हो गया । अपनी तरफ से जैकी पूर्ण फूतिं के साथ रिवॉल्वर सम्भालकर कमरे के बाहर झपटा लेकिन हैरी कहीं नजर नहीं आया । पलक झपकते ही यह अपना कमाल दिखाकर कमरे से ही नही बल्कि उनकी नजरों से भी गायब-हो गया ।।

........................

उस ग्लोब की गति आश्चर्यचकित कर देने वाली गति से भी' अधिक थी । बड़े ही तीव्रतम वेग के साथ वह निरन्तर मंगल से धरती की ओर अग्रसर था ।

उस ग्लोब में विजय, विकास, अशरफ, अलफासे -धनुषटकार और प्रोफेसर सुभ्रांत थे ।

एक वैज्ञानिक होने के नाते सुभ्रांत उस ग्लोब के इंजन की कार्यविधि को भलि-भाति समझ गए थे और इस समय वे स्वयं ही उसकी ड्राइविंग सीट पर बैठे हुऐ थे ।

ग्लोब के इंजन की कार्यविधि जटिल न होकर अत्यन्त सरल थी ।

सुभ्रांत के अतिरिक्त सभी एक कक्ष में बैठे हुए थे ।

विकास पूजा पर अभी तक काफी गम्भीर था ।

हालाकि विजय और अलफासे उसे हसाने की चेष्टा करते,, लेकिन जवाब में विकास के होंठों पर एक फीकी सी मुस्कान दोड़ जाती । जब भी पूजा की बात उसे याद आती तो उससे जुडा हुआ माइक का चेहरा उसके सामने र्दोड़ जीता था । उसकी याद आते ही उसका चेहरा बेंहद भयानक हो जाता था और खूनी स्वर में गुर्रा उठता-" गुरु, आज़ अच्छी तरह समझ लो-----" अब अगर दुनिया में विकास का सबसे बडा दुश्मन है तो वो है माइक ।

अपनी पूजा की कसम है गुरु, आखों के सामने आते ही माइक , का अन्त इतनी बेरहमी से करूगा कि सारा विश्व काप उठेगा ।

उसके बाद चाहे जो हो गुरु, मुझें चिन्ता नहीं है । चाहे सारा विश्व मेरा दुश्मन हो जाए लेकिन माइक से बदला जरूर लूगा ।

तुम देखना-गुरु, देखना कि विकास का प्रतिशोध कितना भयानक होगा ! वह चाहे जहाँ मिले…उसका अन्त निश्चित है !"

विकास के इस कथन पर विजय और अलफांसे कांप उठते ।
 
उसे समझाने का प्रयास करते लेकिन वह ऐसा कहाँ था जो, किसी के समझाने से मान जाए ? वब तो जिद्दी है…पक्का जिद्दी । उसके चरित्र की यहीं तो विशेषता है कि जो सोच लेगा, वही करेगा, जो निर्णय लेगा, वह अन्तिम निर्णय होगा अपने इस जिद्दी स्वभाव के कारण वह कई बार मुसीबत में फंस जाता है । कि अब उसके इस जिद्दीपन को अवगुण कहें अथवा सदुगुण लेकिन … उसके चरित्र की यह विशेषता अवश्य है ।

इस समय भी विजय उसका मन बहलाने की चेष्टा करता हुआ बोला----" प्यारे दिलजले, एक बात बताओ ।"

" पूछो, गुरू !" शांत स्वर में विकास ने कहा ।

" ये तो सव समझ में आ गया कि तुमने वास्तव में हमें अपराधी बनकर दिखा दिया ।" विजय बोला……"यंह भी समझ मे आ गया कि तुम्हारा दिमाग इतना. खुराफाती है कि तुम सिगंही और जैक्सन के पद--चिन्हों पर भी चल सकते हो, लेकिन केवल एक बात समझ में नही आई यह यह कि तुम अमेरिका के शहरों में यह विनाश कैसे फैलाते थे ?"

"इसका शुद्ध वैज्ञानिक फार्मूला तो तुंगलामा ही जानता था गुरु !" विकास बोला…"मुझे उसने साधारण सी बात बताई थी, उससे केवल समझ में आता है कि यह संभव है । उसने बताया था कि अगर इसको वैज्ञानिक ढंग से समझाने लगे तो कुछ भी समझ में नहीं आएगा और सुनते-सुनाते एक साधारण इंसान को भी बोरिंयत हो जाएगी !"

“तुम हमेँ मोटी-मोटी बाते बता दो !"

“पहती बात ये है गुरु कि काले बादल, वादल न होकर "मिनी टारगेट" का गाढा काला धुंआ होता था ! इस धुंए को एन्टीसेफ्टिक किरणों से बांध लिया जाता था । आप इन किरणों के विषय ने थोडी-सी भी जानकारी रखते होगे तो यह अवश्य जानते होगें कि आप इन किरणों के विषय ने थोडी-सी भी जानकारी रखते होगे तो यह अवश्य जानते होगें कि------- एंटीसेफ्टिक किरणे लचीली होती है । इनमे लचीलापन रबर से भी अधिक होता है और कम भी किया जा सकता है ।

यह बताना आवश्यक हो गया कि मिनी टारगेट के काले बादलो के के चारों ओर बाउंड्री पर इन्हीं किरणों का पहरा रहता था ! यानी

बादल सीमाओं को छोड़कर बाहर नहीं निकल सकता था । .. अतः हम इन किरणों के जरिए बादल को… उतने ही एरिया मे रखते थे, जितने मे रखना होता था । उदाहरणार्थ --- जब ज्यूरज मे बिनाश फैलाया तो किरर्णो को ज्यूरज के चारों ओर फैला दिया और धूआं केवल ज्यूरेज के उपर रहा ।"

"ये धुआं उत्पन्न किस तरह होता था गुरु?” घनुषटंकार ने लिखकर विकस को थमा दिया!"

"इसका निर्माण तुंगलामा द्वारा बनाई गई मशीन करती थी ।" विकांस ने बताया--------" अब ये मत पूछना कि वह मशीन धुएं का निर्माण कैसे करती थी क्योंकि जब यहीं प्रश्न मैंने तुगलामा से पूछा था तो उसने कहा था कि यह विज्ञान का जटिल प्रश्न है । अगर मे उत्तर बता भी दू तो तुम्हारी समझ में कछ भी नहीं आएगा ।"

"इसे किसी शहर पर फैलाया कैसै जाता था?" अलफांसे ने प्रश्न किया ।

“जिस स्थान पर फैलाना होता ता पहले उसे विशेष स्क्रीन पर सेट कर लिया जाता बड़े-बड़े ब्लाडरों की मदद से फैला दिया जाता था ।"

" और वे अक्षर क्या थे?” ये प्रश्न विजय ने किया ।

" कोई विशेष बात नहीं थी । वे सभी अक्षर "बर्लिन 'सेफ्टान' तथा ग्लार्मिक्सेन' नामक तीन घातक एवं विस्फोटक पदार्थों के विशेष आधुनिक मिश्रण से जो बारूद बनता है ऐसा बारूद "ऐटम-बम्"में भी नहीं है, यह तुंगलामा का कथन था । यह तो आप लोग जानतै ही है जिये तीनों खतरनाक विस्फोटक पदार्थ है । इन्हें किस अनुपात में मिलाने पर ये एटम-बम से भी घातक सिद्ध होते हैं, यह तुंगलामा ने मुझे नहीं बताया ।"

"लेकिन वे अक्षर बिजली की गर्जना के साथ चमकते किस प्रकार थे?" यह प्रश्न अशरफ ने किया ।

"इसकी कार्यविधि ठीक उसी प्रकार है, जैसे बिजली चमकने की कार्यविधि होती है ।" विकास ने बताया----" आप लोग जानते है कि बादल दो प्रकार के होते है 'ऋणात्मक' 'धनात्मक' । इन के दोनों के आपसी सहयोग से विजली चमकती है । इसी सिद्धांत् पर आधारित करके तुंगलामा ने "मिनी टारगेट' नामक धुएं का आविष्कार किया था । उसके भी बादलो की भांति दो आवेश थे । मशीन का एक बटन दबाने पर वे दोनो क्रिया करते थे और सिद्धांत के मुताबिक बिजली कड़कती थी । अंतर केवल इतना था, कि साधारण तथा वक्र रेखा के रूप से विजली कड़कती है मगर वह 'विनाश दूत विकास' की शक्ल में चमकती थी ।"

“ये अक्षर टूटकर किस प्रकार गिरते थे?" बिजय ने प्रश्न किया !

“प्रत्येक अलग अक्षर का बटन मशीन के अलग बटन से होता था ।" विकास ने बताया-हमें जिस अक्षर को जहां फैलाना होता था मशीन द्वारा उसे उसी डायेरेक्शन मैं एडजस्ट कर लेते थे और बिजली चमकने वाले बटन के साथ उसे भी दबा देते थे । इसी कारण एक चमक के साथ अक्षर टूटकर वहीं गिरता था, जहां हम चाहते थे ।"

इसके बाद इन लोगों ने विकास से इसी प्रकार के अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न किए और विकास ने उन्हें सतुष्ट कर दिया लेकिन बिजय फिर भी सब कुछ पूछने के बाद एकदम बोला ।

"अजी छोडो भी मियां दिलजले, क्या बोगस टॉपिक लेकर बैठ गएं!" वह अपनी धुन में कहता ही चला गया--" क्या साला वैज्ञानिक चक्कर लेकर बैठे हो, कोई दिलजली या झकझकी की बात हो जाए ।"

“गुरू !" विकास बोला… पह्रले यह बताओ कि लबू अकल को साथ क्यो नहीं लाए?"

"लेकिन वे अक्षर बिजली की गर्जना के साथ चमकते किस प्रकार थे?" यह प्रश्न अशरफ ने किया ।

"इसकी कार्यविधि ठीक उसी प्रकार है, जैसे बिजली चमकने की कार्यविधि होती है ।" विकास ने बताया----" आप लोग जानते है कि बादल दो प्रकार के होते है 'ऋणात्मक' 'धनात्मक' । इन के दोनों के आपसी सहयोग से विजली चमकती है । इसी सिद्धांत् पर आधारित करके तुंगलामा ने "मिनी टारगेट' नामक धुएं का आविष्कार किया था । उसके भी बादलो की भांति दो आवेश थे । मशीन का एक बटन दबाने पर वे दोनो क्रिया करते थे और सिद्धांत के मुताबिक बिजली कड़कती थी । अंतर केवल इतना था, कि साधारण तथा वक्र रेखा के रूप से विजली कड़कती है मगर वह 'विनाश दूत विकास' की शक्ल में चमकती थी ।"

“ये अक्षर टूटकर किस प्रकार गिरते थे?" बिजय ने प्रश्न किया !

“प्रत्येक अलग अक्षर का बटन मशीन के अलग बटन से होता था ।" विकास ने बताया-हमें जिस अक्षर को जहां फैलाना होता था मशीन द्वारा उसे उसी डायेरेक्शन मैं एडजस्ट कर लेते थे और बिजली चमकने वाले बटन के साथ उसे भी दबा देते थे । इसी कारण एक चमक के साथ अक्षर टूटकर वहीं गिरता था, जहां हम चाहते थे ।"

इसके बाद इन लोगों ने विकास से इसी प्रकार के अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न किए और विकास ने उन्हें सतुष्ट कर दिया लेकिन बिजय फिर भी सब कुछ पूछने के बाद एकदम बोला ।

"अजी छोडो भी मियां दिलजले, क्या बोगस टॉपिक लेकर बैठ गएं!" वह अपनी धुन में कहता ही चला गया--" क्या साला वैज्ञानिक चक्कर लेकर बैठे हो, कोई दिलजली या झकझकी की बात हो जाए ।"

“गुरू !" विकास बोला… पह्रले यह बताओ कि लबू अकल को साथ क्यो नहीं लाए?"

“क्यों वे लूमड़ खान?” विजय तेजी के साथ अलफासे की ओर पलटकर बोला -----" तुमसे उस कार्टून को साथ लाने को कहा था , फिर उसका क्या हुआ ? यानी की क्यों नही लाए ?"

"ज़ब मैं, अशरफ़ और धनुष्टंकार वहां से चले तो खोज करने पर भी टुम्बकटू कही नजर नहीं आया ।"

अभी विकास कुछ कहना ही चाहता था कि अचानक कक्ष मे सुभ्रांत की आवज गुजीं ।

" मिस्टर विजय धरती के कुछ लोग हमसे संबंध स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं ।"

सब चौंके! सबसे पहले चालक कक्ष की और झपटा विकास ।

अमेरिका के खगोलशास्त्री एनडी. राबर्ट की गिद्ध दृष्टि हमेशा अंतरिक्ष में जमी रहती थी ।

उसकी प्रयोगशाला बेहद विशाल थी । इस समय भी उसकी छोटी-छोटी परंतु चमकीली आंखें एक स्क्रीन पर जमी हुई थी । कल रात ग्यारह बजे उसने अपनी स्क्रीन पर उभरने वाला एक नन्हा-सा विंदु देखा था ।

राबर्ट रात से विंदु मे उलझकर रह गया था ।

वह लगातार उसे देखता रहा और अब यानी दिन के ग्यारह बजे अर्थात पूरे बारह घंटे पश्चात विंदु बड़ा होते…होते एक ग्लोब में बदल गया ।

स्क्रीन पर चमकता हुआ ग्लोब अब पूर्णतया स्पष्ट नजर आ रहा था ।सबसे पहले इस ग्लोब को देखकर राबर्ट चौका फिर उसने अन्य वैज्ञानिको को चौका दिया ।

उसके बाद यह समाचार जव रेडियो पर प्रसारित किया गया तो सारा अमेरिका चोक

पडा । सब इस ग्लोब के रहस्य के जानना चाह रहे थे ।

जबकि इधर राबर्ट इसी कार्य में प्रयत्नशील था यानी वह पिछले पाच घंटे से लगातार उनसे संबध स्थापित करने का प्रयास कर रहा था । लेकिन संबंधं उस समय मिला, जव वह बुरी तरह बोर हो चुका था ।

लेकिन संबध मिलते ही उसके जिस्म से एक नई स्फूर्ति का संचार हुआ ।

राबर्ट तेजी के साथ यांत्रिक माइक पर झुका बोला ।

"हैलो …हैलो.. ओवर ओवर हैलो!"
 
दूसरी और से भी कुछ इसी प्रकार की आवाजे उभर रही थीं । आवाजें दोनो ओर से अभी कुछ अस्पष्ट सी थी । जब स्पष्ट होगई तो राबर्ट ने पूछा…"हेलो हैलो. आप कौन लोग हैं ओबर !"

"आप लोग धरती के किस देश से बोल रहे हैं…ओवर !", दूसरी ओर से उल्टा प्रश्न किया गया ।

"अमेरिका से ओबर! " राबर्ट ने जोर से कहा ।

" वेरी गुड ।” इस तरह की प्रसन्नता भरी आवाज आई! मानो दुसरी ओर से सुनने वाला अमेरिका शब्द पर बेहद खुश हो, आवाज पुन आई…" हम लोग वापस आ रहे हैं ।"

" आप कौन लोग हैं?" राबर्ट ने प्रश्न किया ।

"मुझें भाइक कहते हैं ।" दूसरी ओर से आबाज उभरी-" कदाचित आपको मालूम होगा कि हम यानी विश्व के जासूसों का ग्रुप मंगल ग्रह के लिए बिकास को गिरफ्तार करने हेतु रवाना हुआ था ।"

" क्या आप लोगों ने विकास को गिरफ्तार कर लिया है--ओवर ।" राबर्ट ने प्रश्न किया !

" विकास को नहीं बल्कि मुजरिम को गिरफ्तार कर लिया है ।" उधर से माइक की आवाज आई------" असल मुजरिम विकास ऩहीँ था । उसका तो केवल नाम-हीं-नाम था । वास्तविक मुजरिम सिगंही था । सिगंही ने विकास को अपनी केद में डाल रखा था ! उसे विश्व मे बदनाम करने के लिए अपना हर अपराध उसके नाम से कर रहा था ।"

" तो क्या जाप लोगों ने सिगंही को, गिरफ्तार कर लिया है--ओवर!" राबर्ट ने प्रश्न किया ।

" हम मंगल ग्रह पर स्थित सिगंही का अड्डा समाप्त कर आए हैं " दूसरी ओर से स्वंर उभरा-- “सिगंही को हम अपने साथ उसके ही इस ग्लोब में बैठाकर अमेरिका ला रहे हैं । आप लोग हमारे स्वागत की तैयारी रखें ।"

"तो इसका मतलब यह हुआ कि अमेरिका अब खतरे से बाहर है?” राबर्ट ने प्रसन्नता से डूबे स्वर, में पूछा ।

"एकदम बाहर ।" दूसरी ओर से आवाज आई…"घबराने की जरा भी बात नहीं है [ सारे देश में यह खबर फैला दो कि देश खतरे से बाहर है । सिंगही को कैद करके ला रहे है ।"

और इफ प्रकार…

एन डी राबर्ट ने पूरी बातें की।

फिर यह सारी सूचना उसकी प्रयोगशाला से निकलकर रेडियो के स्टेशन तक पहुची और रेडियो स्टेशन से अमेरिका के ही नहीं बल्कि विश्व के जन जन तक पहुच गई ।

सिंगही के कैद हो जाने की खुशी से सारा विश्व खुशी से नाच उठा लेकिन…

अमेरिका तो जैसे झूम उठा ।

ऐसा लगा जैसे समाप्त होते-होता अमेरिका एकदम बंच हो । अमेरिका के बच्चे-बच्चे ने खुशी मनाई । भारत में जैसे खुशी के उपलक्ष्य में दीवाली मनाई जाती है, इसी प्रकार वहां भी खुशी मनाई गई ।

सारा अमेरिका झूम उठा ।

सरकारी दफ्तरों एक दिन का अवकाश मनाया गया ।

सरकार ने अपनी ओर से मिठाइयां बंटवाईं ।

हर तरफ़ खुशी… खुशी ही थी लेकिन…

वे क्या थे कि शेतानों ने कितनी भयानक चाल चली है ।

...........................

" लेकिन इसका मालम तो ये हुआ कि अमेरिका की धरती पर हमारा विशेष स्वागत किया जाएगा!" अशरफ कह रहा है, था--"जब देखेगे कि माइक के स्थान पर हम लोग है तो जो हाथ हमे पुष्प मालाएं पहनाते , वे ही हमे गोली से उडा देगें ।"

"मूर्खता की बात मत क़रो ।" यह बात डायरी पर लिखकर धनुषटंकार ने अशरफ को डायरी थमा दी

खा जाने वाली दृष्टि से अशरफ ने धनुषटंकार को ,फिर बोला-----" तुम अपने आपको कुछ ज्यादा बुद्धिमान समझते हो ?"

"हमारे शिष्य ने आपकी बिलकुल ठीक उपाधि दी है झानाझरोखे अंकल! " जबाब विकास ने दिया…"बात दरअसल यह है कि तुम मंगत ग्रह पर जांते समय देख चुके हो कि सिगंही का ये , ग्लोब कितना करामाती है । तुंम जानते हो कि यह ऐसी धातु का बना है कि जिस पर धरती का बोई शस्त्र प्रभाव नहीं डाल पाता । आपकी जानकारी के लिए यह भी बता दु कि इसे जब चाहे अदृश्य भी किया जा सकता है ।"

" क्या मालव? अशरफ थोडा उलझा ।

… "मतलब के चक्कर में मत पडो प्यारे झानझरोखे ! वरना खाओगे खूबसूरत धोखे, यानीकि मतलब तो साला पहले ही मिट्टी के तेल की लेइन में लग चुका है और कसम वनस्पति धी की तीन महीने से वहीं पड़ा है।"

"अभी तक इस यान को अदृश्य नहीं किया गया है ।" अलफांसे बोला-" अत: धरती के श्रेष्ठ खगोलशास्त्री सरलता के साथ अपनी स्क्रीन पर इसे देख सकते हे.....यानी पता लगा सकते हैं कि हम किस समय कहाँ उतरेगे लेकिन जब हम अदृश्य हो जाएंगे, तो उनकी कोई भी स्क्रीन उन्हें हमारी स्थिति नहीं बता सकेगी अत: वे यह भी नहीं जान पाएंगे कि हम लोग कहा उतर रहे है।"

उन लोगों. के इसी प्रकार की बाते होती रहीं और ग्लोबल धरती की ओर अग्रसर रहा अब उनके धरती पर पहुचने में अधिक समय नही था ।

कुछ ही देर बाद एक बटन दबाकर ग्लोब को अदृश्य कर दिया गया । उसी क्षण कक्ष में रखी एक टी वी स्क्रीन का बिजय ने बटन दबा दिया ।

स्क्रीन ऑन हो गई और उस पर एन डी राबर्ट की प्रयोगशाला का दृश्य उभर आया ।स्क्रीन पर साफ़ देखा जा सकता था कि अपनी प्रयोगशाला में राबर्ट एक स्क्रीन के सामने बैठा था । उस स्क्रीन पर कहीं कोई चिंह नहीं था ।

राबर्ट बड़े ध्यान से स्क्रीन को घूर रहा था । उसके चेहरे पर बौखलाहट के भाव थे ।

" देखा मियाँ लूमड खान! साला कैसा चौंका है?” विजय बोला… यहीं बैठा हुआ साला स्क्रीन पर हमारा और हमारे बाप का ग्लोब देख रहा था । ये नहीं जानता कि हम भी खलीफा है । अब स्क्रीन पर धतूरा भी नजर नहीं-जाएगा । "

और वास्तब मे विज़य की यह बात सत्य र्थी।

अभी तक आराम से राबर्ट ग्लोब को अपनी स्कीन पर देख रहा था लेकिन अचानक ही इस प्रकार गायब हो जांने पर वह बुरी तरह बौखला गया । उसने स्कीन के बटन इत्यादि दबाए लेकिन व्यर्थ! ग्लोब उसकी स्कीन पर अव न उभरना था न उभरा ।

उसने अन्य वैज्ञानिकों से संबंध स्थापित किए।।

लेकिन…

प्रत्येक की यही रिपोर्ट थी कि अचानक ये ग्लोब स्क्रीन से गायब होगया ।।

और ग्लोब मे बैठे हुए ये शातिर अपनी स्क्रीन पर उभरने वाले दृश्यों के जरिए राबर्ट की बौखलाहट का मजा लूट रहे थे ।
 
राबर्ट जब सब कामों से थक गया तो उसी शक्तिशाली ट्रांसमीटर परे झपटा जिसके जरिए उसने ग्लोब यात्रियों से संबंध स्थापित करके बाते की थीं ।

वह पुन उसी मीटर पर संबंध स्थापित करने का प्रयास करता रहा ।

इधर… ग्लोब के इस कक्ष मे रखा ट्रांसमीटर स्पार्क करने लगा लेकिन प्लान के मुताबिक कोई उधर नहीं बढा ।

बह स्पार्क करता रहा ।

किसी ने उसे स्पर्श तक करने का कष्ट नहीं उठाया ।

उधर स्क्रीन पर उन्होंने देखा कि राबर्ट लगातार तीस मिनट तक संबंध स्थापित करने की चेष्टा करने के बाद भी जब सफल न हुआ तो बुरी तरह झुंझला उटा ।

उसके बाद. , .स्क्रीन के दृश्य को वे धुमाते चले गए। उन्होंने देखा-अचानक उनके ग्लोब के अदृश्य हो जाने पर सारे अमेरिका में खलबली मच गई थी ।

कोई सोच भी नहीं पा रहा था, अचानक ग्लोब कहाँ गायब हो गया?

सबका एक ही ख्याल था ।

कहीँ सिंगही ने फिर कोई हरकत तो नहीं दिखा दी है?

सारा अमेरिका उस ग्लोब के लिए परेशान था जबकि अमेरिका के शातिर दुश्मनों का यह ग्लोब निरंतर घरती की ओर बढ रहा था ।

पता नहीं अमरिका की धरती पर पहुचते ही ये क्या करें? उसके बाद उन्होंने स्क्रीन साफ कर दी ।

सुभ्रांत ने बता दिया था कि पंद्रह घंटे पश्चात ग्लोब धरती को स्पर्श करेगा ।

दस घंटे की नीद लेने के लिए सब आराम से सो गए । केवल एक ही इंसान था जिसकी सोने की जरा भी इच्छा नहीं थी , वह था विजय । वह अकेला ही चालक सीट पर जमा हुआ ग्लोब का न केवल चालन कर रहा था बल्कि खुद को अपनी ही बनाई हुई नई-नई झकझकियां भी सुना रहा था ।

और तब ......

उनके ग्लोब ने अमेरिका की धरती को’स्पर्श किया ।

उस समय तक न केवल सब जाग चुके थे, बल्कि सभी एकंदम अलर्ट थे क्योंकि वे भली भाँति जानते थे कि वे ऐसी धरती पर पहुच . चुके है जहाँ पग-पग पर उनके खुन के प्यासे लोग हैं ।

कमाल यह था कि ग्लोब के इंजन की आवाज भी केवल ग्लोब के अदंर तक ही गुंजकर रह जाती थी ।

ग्लोब एक जंगल में लैंड कर लिया गया था ।

उसके बाद वे सब बाबर आगए ।

हैरी के संपुर्ण जिस्म पर सफेद लिबास था । चेहरे पर काली नकाब थी ।

उसे सी आई ए के साथ-साथ न्यूयार्क की पुलिस भी बराबर तलाश कर रही थी । लेकिन लडके पर सबूत एकत्र करने का भूत सबार था ।

इस समय रात के दो बज रहे थे रात काली मगर शांत थी ।

हैरी फुर्ती के साथ उस गंदे पानी के पाइप के सहारे ऊपर चढता जा रहा था । जल्दी ही वह उस ऊंची इमारत की छत पर पहुच गया ।

विना किसी विध्न के वह इमारत की दूसरी मंजिल की गैलरी तक पहुंच गया। उस समय हैरी के हाथ में रिवॉल्वर थी जो किसी भी क्षण नि:संकोच आग उगलने के लिए तत्पर थी ।

वह इस तरह आगे बढ रहा था । जैसे उसे निश्चित रूप से सब कुछ मालूम हो।

गैलरी के एक मोड पर वह रुक गया । पहले जेब से साइलेंसर निकालकर रिवॉल्वर की नाल पर फिट किया, फिर पूर्णतया तैयार होने के बाद बडी सतर्कता के साथ उसने गैलरी के दूसरी और झाका । दूसरी और का दुश्य देखते ही नकाब के पीछे छुपे उसके चेहरे पर मुस्कान दौड़ गई।

गैलरी के बीचो बीच उनमे शायद एक कर्नल था । शेष दो सधारण मिलिट्री सेनिक ।

कर्नल एक कमरे के आगे स्टूल पर बैठा था और शेष दोनो सैनिक मुस्तैदी के साथ-हाथ में मशीनगन थामे उस कमरे के दाएँ-बांएं पहरेदार वाली मुद्रा मेँ खड़े थे। हैरी ने विलंब करना उचित नहीं समझा ।

उसने अपना रिवाॅल्बर सीधा किया और फिस..... . फिस की हल्की ध्वनि केवल तीन बार गूंजी'। तीन वार हैरी के रिवॉल्वर ने आग उँगली और वह तीन पहरेदार अपने अपने सीने पकड़े चीख पडे ।

अंतिम चीख के साथ वे फर्श पर गिर गए ।

हैरी रिवॉल्वर संभालकर उसी तेजी के साथ उस कमरे की ओर झपटा । तभी उस कमरे में से भागते दो सेनिक बाहर आए लेकिन हैरी तो मानो इसं समय पागल हो गया था ।

बिना सोचे-समझे उसने साइलेसर-युक्त रिवॉल्वर से उन्हें भी उडा दिया ।

लेकिन तभी सारी इमारत में सायरन की आवाज गुज उठी । हैरी समझ गया । खतरा सिर पर आ पहुचा है । यह सोचकऱ उसके

जिस्म में अधिक फुर्ती भर गई । इस पर वहाँ उसने एक सेनिक की मशीनगन उठा ली रिबॉंत्वर जेब के हवाले करके अंदर जंप लगा दी ।

तभी एक ही मशनीनगन से किसी ने लगातार दो…तीन फायर उस पर किए ।

लेकिन हैरी पूरी तरह सतर्क था । वह फ़र्श पर लुढ़कता ही चला गया । वह सीधा एक टार्चर चेयर के पीछे जाकर स्थिर हुआ ।

उसकी दृष्टि ९क सेनिक पर पडी और उसी क्षण हैऱी की गन गरज उठी ।

बुरी तरह घायल होकर सैनिक धाराशायी हो गया ।

सायरन अब भी लगातार बज रहा था । सारी इमारत भारी बूटों की ध्वनि से गूंज़ रही थी।

कमरा इस समय खाली था मगर शीघ्र ही वहां दुश्मन पहुंचने ।

हैरी तेजी के साथ अपने स्थान से उठा । उसने देखा-वह जिस टार्चर चेयर के पीछे छुपा हुआ था, उस परं बंधनों में कसा हुअ सोबर वैठा हुआ था । वही सोबर जिसे खुद हैरी ने गिरफ्तार करवाया था ।

" आप कौन हैं?” सोबर ने हैरी से प्रश्न किया ।

" मैं तुम्हारा मददगार हूं । इस कैद से तुम्हें निकालने आया हू।”

“तो जल्दी से यह बटन दबाओ ।" सोबर ने एक बटन की और संकेत करके कहा ।

हैरी ने जल्दी से वह बटन दबा दिया ।

बटन दबते ही इलेक्ट्रिक सिस्टम के सारे बंधन एक साथ खुल गए । सोबर वेहद फुर्ती के साथ टॉर्चर चेयर से कूदा और कमरे मे पड़े एक सेनिक की गन उठा ली ।

हैरी बोला---"मेरे साथ आओ !"

सोबर और हैरी हाथ में गन थामे तेजी परंतु सतर्कता के साथ कमरे से बाहर में आए । भागते कदमों की आहट से इमारत थर्रा रही थी ।

हैरी आगे सोबर उसके पीछे भागता जा रहा था । अचानक एक मोड़ पर घूमते ही सैनिकों का एक जत्था-का-जत्था हैरी के सामने आ गया ।

हैरी तुरंत फर्श पर लेट गया गन ने अपना भयानक जबडा खोल दिया । चीखों के साथ सारे सेनिक मारे गए।

और इस प्रकार...... ।

हैरी जिस रास्ते से ऊपर आया था, उसी रास्ते से सोबर को भी सुरक्षित इमारत से बाहर निकलकर ले गया ।

सोबर उसके साथ जाता हुआ सुनसान सडक के दाई ओर लंबी झाड्रिर्यो में आ गया ।

झाडियों में छुपी हुई एक कार खडी थी । कार के समीप पहुंचकर हेरी तेजी से बोला--- "मिस्टर सोबर । आप कार ही ड्राइविंग सीट पर पहुचे-मैं एक कांम समाप्त करुके आता हूं।"

" ओके......!" तेजी से कहकर सोबर ड्राइविग सीट पर जम गया ।

"अब तुम ठीक से पहुँच जाओगे?" हैरी बोला ।

"लगता है आप पहली वार सोबर से मिल रहे हैं ।" सोवर ने कहा-" जब सोबर के पास गन होती है तो दुनिया की कोई ताकत उसे अपनी मंजिल तक पहुचने से नहीं रोक सकती । उस लडके हैरी से जरूर बदला लेना है । उसने ऐसा फसाया कि कुछ करने का मौका हीँ नही मिला।"

"खैर तुम चलो !" यह कहकर हैरी एक तरफ की झाडियों में घुस गया ।

सोबर ने कार स्टार्ट कर दी लेकिन उसके फेरिश्ते भी यह नही जान सके कि वही नकाबपोश जो उसे बचाकर यहां तक लाया है, कार के स्टार्ट होने की आवाज के साथ ही डिक्की में पहुच चुका है ।

सोवर ने कार झाडियों से निकालकर सडक पर डाल दी ।

हैरी अपनी सफ़लता पर खुश था ।

न्यूयार्क स्थित रूसी, जासूसी संस्था के जी बी का हेडक्वार्टर विजय को पता था ! वह सबको लेकर वहीं पहुच गया । उस हेडक्वार्टर का चीफ़ पहले से ही विजय को पहचानता था । के जी बी के इस हैडक्वार्टर पर सब लोगों के छिपने में बड़ा अच्छा स्थान था ।

आने-जाने की औपचारिकता के बाद विजय अशरफ और अलफासे एक कमरे में बैठे सोच रहे थे कि अब उन्हें क्या-क्या करना है और किस-किसं काम के लिए कौन-कौन उपयुक्त रहेगे ।

"लूमड़ प्यारे! ” विजय कह रहा था---" मेरे विचार से हमें अपने कार्य जल्दी से निबटा लेने चाहिए क्योंकि अगर पीछे से विश्व के जासूस, अब्बा सिगंही, जैक्सन, टुम्बकटू मे से कोई आगया तो फिर लफडेबाजी कुछ ज्यादा फैल जाएगी ।”

"मजा तो तभी आएगा !” अलफांसे कुछ मुस्कराकर बोला ।

विजय कुछ कहना ही चाहता था कि के जी बी का एजेंट लगभग भगता हुआ उस कमरे मे प्रविष्ट हुआ ।

तीनों ने चौंककर उसकी तरफ देखा । उसकी फूली हुई सांस देखकर विजय बोला…"क्यो प्यारे क्या ड्रामा है?”

" गजब हो गया मिस्टर विजय! ”

"जरूर हो गया होया प्यारे ।" विजय शांति के साथ अपने ही मूड में बोला-" बैसे भाई ये साला गज़ब हुआ कैसे?"

"मिस्टर विकास हमारे अड्डे से गायब हो गए !"

" क्या? ” तीनो एक साथ उछल पड़े ।

"जी हा ।” वह बोला-----"उनकै साथ उनका बंदर धनुषटंकार भी गायब है ।”
 
"अवे लूमड़ .. !” विजय इस प्रकार बोला जैसे कोई वहुत गंभीर बात कहने जा रहा हो…… "इस लड़के को उठाकर ले जाने यानी गायब करने की ताकत किसमे हो सकती है?”

"नही मिस्टर विजय । के जी-बी. का,वह एजेंट तुरंत बोला "उन्हें किसी ने गायब नहीं किया, बल्कि वे यहाँ से खुद गायब हो गए है । अवश्य ही वे किसी विशेष काम से गए है ।"

"तुम्हें यह ज्ञान की बाते कैसे पता?”

"उनके कमरे में से यह पत्र मिला है ।" उसने कहते हुए अपनी जेब से एक कागज निकालकर विजय को थमा दिया । विजय वह पत्र खोलकर पढने लगा । लिखा था :

आदरणीय गुरूदेव ।

चरण स्पर्श,

क्षमा चाहुगां कि कुछ कार्य अपनी मर्जी से कर रह्वा हूँ । में जानता हू गुरू कि आप यह प्लान बना रहे है कि मुझे किस तरह बचाया जा सकता है? यानी अपराधी होने का वह कलंक जो मेंरे माथे पर लग चूका है, अब किस तरह धुल सकता है लाकिन एक बार फिर कहूगा गुरू इस बात को दिमाग से निकाल दो । वह सब मैं खुद कर लूगा और उन्हीं कुछ कार्यों को पुरा करने जा रहा हूं । आप वह कार्य करे जिसका आपने मुझसे वायदा किया है यानि आप अपने ढंग से भारत से सीआईए. के एजेंटों का सफाया करे । मैं अपने साथ अपने प्यारे शिष्य धनुष्टंकार को भी ले जा रहा हूँ । चिंता करने की कोई -आवश्यकता नही है । मेरा सबने शिकार न्यूयॉर्क में स्थित सिगंही दादा का दूसरा अड्डा हौगा और यह कार्य इतना सरल है कि गुरू लोगों को ये छोटे-छोटे काम करने शोभा नहीं देते इसलिए अब आपकै बच्चे यह कार्य काने जा रहे हैं । वैसे मैंनै यह इसलिए लिख दिया है ताकि आप चितां न करें । आपको सिगंही का यह अड्डा पता नहीं है इसलिए आप आ तो सकेंगे नहीं । वैसे तो मंगल पर सिगंही बनकर कार्य किया है इसलिए मालूम है कि उसके अड्ड़े कहाँ-कहां हैं । कल रात को यहीं मिलना गुरू । उछल कर अलफासे गुरू की एक प्यारी-प्यारी पप्पी लेना ।

आपका बच्चा

विकास ।

पढने के एकदम बाद ही बिजय फुर्ती से उछला और अलफासे का गाल चूमकर बोला--“ वाह प्यारे लूमड़ मियां, मजा आया है । सोलह साल की कन्या के चुंबन में भी इतना मजा नहीं आता । ये साला अपना दिलजला भी खूब है । क्या ध्यान दिलवाया है । कसम, चुंबन ताई की, अगर दिलज़ला नहीं लिखता तो मैं कभी लूमड़ की पप्पी नहीँ लेता और कसम मिट्टी के तेल की, कभी नही जान पाता कि लूमड मियाँ के गाल इतने मीठे है ।"

"विजय ।" झुंझत्ताकर अशरफ बोला…“ये क्या बेबकूफी है?"

"हाय! " विजय एकदम झटका-सा खाकर बोला……" ये बेवकूफी है? प्यारे, एक बार लेकर देखो तो......!"

" जासूस प्यारे!" अलफासे उसकी बात बीच में ही काटकर बोला…"जरा ये तो सोचो कि विकास एक बार फिर उस्तादी दिखा गया । हम सोचते ही रह गए और वह खुद ही सोचकर चला भी गया ।।

अलफांसे के इस कथन पर विजय ने ओर देखकर मुर्खों की भाति पलकें झपकाईं और बोला-"कह तो तुम सोलह आने सच रहे हो लूमड़ भाई किया क्या जाए? गलती है हंमारी और तुम्हारी, न साले को इतना ट्रेंड करते और न आज ये हमारे बाजे बजाता । अब पता नहीं, अमेरिका मे क्या हंगामा मचाएगा ।"

"क्यों न हम भी चलें?" अशरफ ने कहा ।

"एक दम चलो प्यारे!" एक झटके के साथ विजय खडा होता हुआ बोला ।

अलफांसे भी जैसे तैयार था । वे लोग भी अपने अभियान पर चल के लिए तेजी से तैयार होने : लगे ।

विकास के साथ था बंदर धनुषटंकार उस समय रात का अंतिम पहर था यानी तीन बज रहे थे । के .जी .बी के अड्डे से ही वे एक कार होकर गायब हुए थे । इस समय कार विकास ड्राइव कर रहा था !

धनुषटंकार समीप ही बैठा सिंगार के धुएं के छल्ले बनाने मे व्यस्त था । विकस को अपना लक्ष्य विदित था इसलिए वह सूनी पडी हुई सडक पर कार तेजी के साथ दौड़ा रहा था ।

इस समय वह जिस सडक पर बढ़ रहा था, वह न्यूयार्क से बाहर जाने वाली एक सड़क थी ।

शहर से बाहर का यह इलाका एमदम सुनसान था ।

उसी सुनसान इलाके मे एक स्थान पर विकास ने कार रोक ली । उसके बाद कार को वही छोड़कर दोनों पैदल ही आगे बढे , एक विशाल इमारत के समीप पहुंचकर विकास ठिठक गया बोला-" प्यारे धनुषटंकार इमारत तो पते के अनुसार यही होनी चाहिए ।"

गूंगे बच्चे की भाँति संकेत से धनुषटंकार ने इमारत में दाखिल होने के लिए कहा ।

मुस्कराकर विकास आगे बढ गया । कोठी के बाहर एक दीवार खिंची हुई थी । उसके अंदर लाॅन था । कोठी के चारों ओर लान-ही लॉंन था । दीवार के सहारे-सहारे चलते हुए वे कोठी के पीछे पहुच गए । पीछे बंजर खेत इत्यादि पड़े थे । बडी सरलता से दोनो ने एक-एक जंप ली और दीवार को फांद कर कोठी के लॉन में पहुच गए ।

उन्होंने देखा… ।

यू तो सारी कोठी में अंधकार था लेकिन पीछे वाले कमरे की लाइट आॅन थी । एक खिड़की से प्रकाश छनकर बगिया मे पड़ रहा था । उस खिडकी के पट खुले हुए थे । वे दोनों दबे पाव वहाँ पहुचे ।

खिडकी से अंदर झांका ।

कमरे का दृश्य देखते ही विकास चौंक पडा ।

कुछ लोगों ने एक चेयर एक लडके को बांध रखा था दो इंसान उसके सामने खड़े थे और पाच गुंडे से नजर आने वाले इंसान उस चेयर के पीछे खड़े थे ।

" हेरी!" विकास के होंठ बुदबुदा उठे-" और यहां ?"

वास्तव मे वह लड़का हैरी था उन लोगों ने चेयर से बांध रखा था ।

सामने खड़े दो इंसानों ने से एक कह रहा था----- "तुम थोडासा धोखा खा गए मिस्टर सोबर, मैंने अपने किसी आदमी को तुम्हें सी आई ऐ की कैद से मुक्त कराने नहीं भेजा था । नकाबपोश के रूप में इसने ही तुम्हें छुडाया और ऐसी चाल चली कि यह यहां छलने हमारे दूसरे अड्डे तक भी पहुच गया । दरअसल यह उस कार की डिक्की में छुप गया था जिसने ज़रिए तुम यहां आए। यह लडका बहुत चालाक है !"

"यह हमारे लिए बहुत खतरनाक साबित हो रहा है ।" सोबर बोला…अब इसके अंत मे ही हमारी भलाई है !"

" कही ऐसा तो नहीं कि इस बार भी सी आई ए से मिला हुआ हो !" दूसरा बोला ।

"नहीँ!" सोबर ने दृढ स्वर में कहा… ……"इस बाऱ इसने मेरी आखों के आमने सी.आईं.ए एजेंटों को मौत के घाट उतारा है ।"

" हो सकता है ।" दूसरा बोला…" हमें कुछ ऐसा पता लगा है कि इस बार यह अपने पिता से झगडा करके धर से भागा है । इसने अपने पिता से यह वादा किया है कि अब वह उसी समय घर में धुसेगा जब यह सिद्ध कर देगा कि वास्तव में ये सव विनाश विकास नहीं, बल्कि हमारे महामहिम सिगंही कर रहे हैं ।”

"इस लड़के ने महामहिम के सारे इरादों पर पानी फेर दिया ।" सोबर गुर्राया ।

"लेकिन अब हम इसे जिंदा नहीं छोड़ेगे ।" कहते हुए उसने कहा…'"इसे तुरंत गोली से उड़ा दो !"

"मुझे गोली से उडाना इतना आसान नहीं है.।"

“बको मत! " अभी हैरी कुछ कहना ही चाहता था कि सोबर गुर्रा उठा । साथ ही उसने मशीनगन सीधी की ओर बोला----“अब तुम यह असलियत कभी साबित नहीं कर सकोगे कि यह सव विकास नहीं बल्कि महामहिम सिगंही कर रहे है !"

"अब साबित क्या कंरना है?" हेरी बोला-----' "सिंगही तो गिरफ्तार हो चुकाहै ।"

"शायद तुमने उस ग्लोब के अचानक गायब हो जाने की खबर नही सुनी ?"

सोबर बोला----“निश्चित रूप से यह करिश्मा हमारे महामहिम के किसी वैज्ञानिक चमत्कार का होगा ।"
 
और इस बीच ........ !

विकास और धनुष्टंकार ने आखो-ही-आखों मे निर्णय लिया और धनुष्टंकार ने नौ राउंड बाली रिवॉल्वर अपनी जेब से निकाली । एक कश सिगार मे लगाया । कमरे के अदर धुंए का छल्ला छोडा और ।

छल्ले कों बिना तोड़े उसके बीच में से होती गोली ने सोबर की कनपटी तोड़ दी । वह एक चीख के साथ ढेर हो गया । शेष इसान बौखलाए लेकिन धनुषटंकार भला चूकने वाला कब था? इससे पुर्व कि कोई कुछ समझे उसके-रिचांलवर ने दनादन छ: शोले और उगले तथा शेष इंसान भी चीखकर वीरगति क्रो प्राप्त हो गए ।

"ज़य छप्पन छुरी की!" एक नारा-सा लगाता हुआ विकास खिडकी के रास्ते से, जंप लगाता हुआ कमरे मे पहुच गया। हैरी कुर्सी पर हैरान-सा बैठा था । कदाचित वह यह सोच रहा था कि वह अचानक उसका मददगार कौन पैदा हो गया?

उसने विकास को देखा और पहचानते ही वह आश्वर्य से चीख पड़ा----“विकास !"

"हां पुत्र, हम ही हैं?" एक जंप के साथ विकास सीधा होता हुआ-बोला-----" पहले जल्दी से ये बताओ कि यहाँ कितने मुर्गे और है ताकि उन्हे भी हलाल करे !"

-“जो थे बो हलाल हो गए ।" हैरी ने जवाब दिया है तभी धनुषटकार भी कमरे मे दाखिल होगया । उसे देखते ही हैरी बोला --'"अरै ये बंदर किसका है ?"

हैरी का बंदर कहना-मानो जहर हो गया । धनुषटंकार की आंखें क्रोध से लाल हो गई । इससे पूर्व कि हैरी कुछ समझे धनुषटंकार ने जंप मारकर एक झन्नाटेदार चाटा हैरी के गाल पर रसीद किया ।

हैरी का गाल झनझनाकर रह गया । उसने बौखलाकर धनुषटंकार को देखा, अब भी वह उसके सामने बैठा बड्री खूंखार नजरों से उसे देख रहा था ।

तभी विकास बोला-'हैंरी प्यारे, इन महाशय का नाम धनुषटंकार है । बंदर कहने वाले को फाढ़कर डाल देते है !"

" ओह! " हैरी समझता हुआ बोला-“तो ये हैं वो ,धनुषटंकार-तुम्हारे कारनार्मो के साथ जुडा हुआ? इन महाशय का नाम भी कई बार सुन चुका हूं।"

-“सबसे पहले क्षमा मांगो ।"

हैरी ने मुस्कराकर धनुषटंकार की ओर देखा और बोला-“धनुषटंकार महोदय । हमारी भूल के लिए माफ़ कर दो । वेसे अगर हाथ खुले होते तो निश्चित रूप से हाथ जोड़कर तुमसे माफी मांगते।"

बस हैरी का इतना कहना था कि धनुषटंकार उछलकर न केवल उसकी गोद में पहुच गया बल्कि हैरी के गोरे-गोरे गालों के दो-तीन चुंबन भी ले डाले, फिर खुद ही हैरी को बंधनों से मुक्त कर दिया ।

मुक्त होते ही धनुषटंकारं ने अपना हाथ हैरी की तरफ़ बढाया । हैरी ने भी उससे फौरन हाथ मिलाया और बोला ---“मुझें हैरी कहते हैं । तुम्हारे गुरु का अमेरिकन दोस्त है । आज से तुम्हारा भी दोस्त ।"

"अबे ओं हैरी की दुम! " विकास बोला…"मैं इधर खड़ा हूँ साले, तड़प रहा हू तेरे लिए । जल्दी से आकर गले से लिपट जा ।"कहने के साथ ही विकास ने अपनी बाहे फैला दी ।

दौड़कंर हैरी उन बांहों में समा गया और खुद अपनी बांहों मे उसने विकास को कस लिया।

वह बोला-"वो साला कमीना सिगंही कहता था कि अगर मेने कुछ किया तो वह तुम्हें मार डालेगा । तुम्हारी कसम विकास अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो सिंगही को जिंदा जला डालता में ।"

विकास ने महसूस किया कि वे सहीं विषय से भटककर बहुत गलत विषय पर पहुच गए हैं, अत बोला---“अरे छोडो ये बाते तो सब वक्त के साथ है , फिलहाल तुम इस इमारत की तलाशी लो ।"

"ओके!”

उसके. हैरी तलाशी लेने लगा ।विकास ने जेब से ताजा ब्लेड निकाला और अपना कार्य करने लगा । उसने अपनी जेब से रेशम की डोरी निकाल ली थी ।

धनुष्टंकार आराम से सिंगार फूक रहा था । तब जबकि हैरी इमारत की तलाशी लेकर वापस उस कमरे मे पहुचा, दरवाजे पहुचते ही वह ठिठक गया । दरंवाजे के बीचोबीच रेशम की डोरी की मदद से सोबर की लाश उल्टी लटकी हुई थी । उसके माथे पर ताजे ब्लेड से गोश्त काटकर विकास लिख दिया गया था । हैरी अंदर प्रविष्ट हुआ तो पाया कि कमरे की प्रत्येक खिडकी पर इसी तरह एक लाश लटकी हुई है ।

" कमरा बड़ा अच्छा लग रहा है ।" हैरी बोला

"जब हमने सजाया है तो अच्छा कैसे नहीं लगेगा?” विकास ने कहा-"वेसे तुम्हें तलाशी में कुछ मिला?"

" हां ! न्यूयार्क में स्थित सिगंही के सात अन्य अड्डों का पता लंगा ।"

" आज की रात ये अड्डे हमें खत्म कर देने हैं ।" विकास ने कहा ।

" चलो !" हैरी भी एक नेक कान के लिए एकदम तैयार था ।

“आओ प्यारे धनुषटंकारा" विकास ने कहा और उसके बाद वे तीनों वहाँ से निकल गए । उसके बाद ......... ।

उस सारी रात मानो उन तीनो शैतानों पर खून सवार रहा ।

आज उनके शिकार समस्त न्यूयार्क में स्थित सिगंही के अड्डे थे । वे अड्डे पर पहुचते, रिवाॅल्बर और लगने चीखती और लाशों के देर लगा देते विकास उनका क्रियाकर्म करना एक बार भी नहीं भूला था ।

उसका नाम गोजालो फार्गिन था ! वह सी.आई.ए. की इस अड्डे का चीफ़ था !

सी.ई.ए का जाल विश्व के में हरेक देश मे था । प्रत्येक देश के एजेंटों की रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए न्यूयॉर्क मे एक अलग हैडक्वाटर था । वह इंडिया में स्थित एजेंटों की रिपोर्ट वाले हेडक्वार्टर का चीफ था । इस हेडक्वार्टर पर बैठकर वह केवल भारत में सी-आई-ए की गतिविधियों के बारे में रिपोर्ट रख़तां था । अंपनी रिपोर्ट सी-आई-ए के हैडक्वाटर को देता था ।

गोजालो फार्गिन एक नंबर का हरामी और ऐयाश व्यक्ति था।

काम-धाम अपने गुर्गो पर छोड़ देता था और खुद एक-नई लडकी को लेकर बिस्तर पर पड़ जाता था ! हर रात उसके गुर्गे उसके लिए एक नई लड़की का प्रबंध करते थे ।

इस समय भी उसके पहलू में एक सुंदर कली थी ।

वह लगभग पिछले तीस मिनट से इस लडकी के साथ इस विस्तर पर था वह लडकी को लिए गर्म करने की चेष्टा कर रहा था । वह लड़की तो पता नहीं गर्म हुई या नहीं लेकिन फार्गिन जरूर गर्म हो गया था कि वह लडकी के गालों, होठों अन्य कोमलांर्गों पर पशु की भांति-दांत गडा देता था ।

लडकी पीडा से बिलबिला उठती लेकिन केवल सिसकाऱी लेकर रह जाती थी । फार्गिन इस सीमा तक. गर्म हो था कि उसने लड़की के जिस्म के सारे कपड़े नोच लिए थे । न उसके कपड़े नोंच लिए थे वल्कि खुद फार्गिन के जिस्म पर भी अब केवल अंडरवियर रह गया था । अव वह लड़की का जिस्म भोगने जा रहा था । जैसे ही वह लडकी को बांहों से बांधकर उसके ऊपर आया ।
 
" धांय! ! ! !"

" उछल पड़ा फार्गिन ।

सारा तहखाचा गोली चलने की जावाज से कांप उठा ।

फार्गिन के सिर पर अभी तक वासना का जो भूत सवार था, वह सिर पर पैर रखकर न जाने कहां भाग गया । लड़की भी बिस्तर से उछलकर खडी हो चुकी थी । एक पल के लिए फार्गिन बुरी तरह बौखला सा गया ।

" -पहली बार यहां गोली चली है !" वह तेजी बुददाया ।

वह लडकी अवाक-सी उसका मुह ताक रही थी । फार्गिन ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा…यह महसूस करके कि वह नंगी है, लड़क्री शरमाकर बड्री अदा के साथ मुस्कराई लेकिन, तभी फार्गिन गुर्राया ।

“कपड़े पहन ।"

वह लड़की काप उठी । बिना एक क्षण का विलंब किए ही वह अपने कपडों पर झपटी लेकिन कपड़े पहनती-पहनती वह यह जरूर सोच रही थी कि कितना खुदगरज है ये आदमी एक ही पल पहले वो उसके प्यार का बखान कर रहा था । वासना के भावावेश में उसके तलवे चाट रहा था । अपनी हवस पूर्ण करने के लिए उसे भगवान से भी ज्यादा मान रहा था । वही अब उस पर गुर्रा रहा था ।

लेकिन इधर--!

गोजालो फार्गिन को तो जैसे अब उस लडकी के विषय में सोचने का समय ही नहीं था । उसका ध्यान तो उस फायर में उलझकर रहं गया था । वह तेजी के साथ अपने कपडों की ओर झपटा और तेजी से अपने कपडे पहनकर बाहर आ गया । वह अपना रिवाॅल्बर साथ लाना नहीं भूला था । गैलरी के वाहर सैनिक गने थामे एक तरफ को भागे चले जा रहे थे । इस फायर की आवाज ने यंहा हंगामा-सा खडा कर दिया था ।

"धांय धांय धांय ।" अचानक अनेक फायरों की आवाज से पुन सारा तहखाना गूंज उठा ।

"क्या बात हैं ?" अचानक फार्गिन गरजा-"ये कौन कुत्ता यहाँ पहुंच गया?"

" दुश्मन अंदर घुस आए हैं सर ।" एक सैनिक ने उसकै समीप ठहरकर कहा-वह हॉल की ओर हैं ।"

" कौन हैं वो?" फार्गिन गरजा ।

" अभी यह पता नहीं लगा सर! " एक सैनिक नें कहा ।

"कोई भी हो, सामने आते ही भूनकर रख दो !" फार्गिन खूनी स्वर में गुर्राया।

यह जादेश देकर वह खुद गेलरी मे दूसरी ओर भागता चला गया , सैनिक गन संभालकर भाग लिया । फार्गिन का दिमाग इस समय काम नहीं कर रहा था । उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि यहां अचानक कौन दुश्मन आ सकता है । फिर यह दुश्मन अंदर कैसे आ गया? सबसे पहले वह इस घटना की सूचना हैडक्वार्टर देना चाहता था इसलिए वह तेजी के साथ उस कमरे की ओर बढ़ रहा था जिसमें हेडक्वार्टर से संबंध स्थापित करने लिए,ट्रांसमीटर था ।

वह तेजी के साथ उस कमरे में प्रविष्ट हुआ लेकिन उसने तो कभी स्वन में भी नहीँ सोचा था कि दुश्मन उसके इस कक्ष तक पहुच गया है ।

जैसे ही वह अंदर प्रविष्ट हुआ, एक ठोकर किसी ने उसके पीछे से कमर मे मारी ।

इफ ठोकर के लिए वह कतई तैयार नही था ।

इसलिए मुह से एक डकार निकलता हुआ धड़ाम से फर्श पर गिरा ।

तभी उसने ऐसी आवाज सुनी किसी ने उस कमरे का दरवाजा बंद कर दिया हो । अपनी और से वह बेहद फुर्ती के साथ खड़ा होकर पल्टा , तब तक दुश्मन दरवाजा बंद कर चुका था बल्कि अंदर से लॉक करके उसकी ओर मुड़ चुका था । फार्गिन ने देखा कि दुश्मन ठीक उसके सामने केवल दो गज की दूरी पर हाथ में रिवाॅल्बर लिए खडा था । एक पल के लिए उसने दुश्मन की आंखों में आंखें डाल दी, लेकिन उस वह बौखला गया जब उसने अचानक उसे आंख मारी और बोला…“क्यों मियां झाड़झंखाड़! क्या हाल हैं?"

"तुम कौन हो?” फार्गिन गुर्रा कर कहने की चेष्टा करता हुआ बोला ।

" बंदे को विजय कुमार झकझकिया कहते है !" वास्तव में वह विजय ही था । वह अजीब ढंग से सीना फुलाकर कह रहा था ।

" विजय !" फार्गिन के मुंह निकला ।सामने विजय को महसूस करते ही उसकी जुबान लड़खड़ा गई थी । उसके मुंह से एकदम निकला-"तुम विजय हो, वही भारतीय जासूस?"

"क्यों प्यारे, क्या परेशानी है? क्या तुम्हें हमारे विजय होने में संदेह है !"

-"तुप यहां क्यो आए हो ?" फार्गिन ने गुर्राकर कहा !

" देखो प्यारे !" विजय बडे आराम से रिवॉल्वर घूमाता हुआ बोला…"रिबॉंलबर हमारे हाथ मे है गुर्रा तुम हो? अब जरा शराफत से यह बता दो कि भारत स्थित सीआईए. के

एजेंटों के नाम रिकॉर्ड की फाइल कहां हैं ?"

"ओह! " फार्गिन जैसे एकदम समझता हुआ बोला…" तो तुम भारत में स्थित एजेटों के पते लेकर भारत से भी सी.आई.ए का पतन करना चाहते हो । याद रखो! ऐसा नहीं हो सकता ।"

" होगा तो ऐसा ही प्यारे!" विजय-बोले------" या तो शराफत से बता दो वरना भूनकर रख दूंगा ।"

"तुम यहां से जिंदा. ..!"

"धांय !"

फर्गिन की बात बीच में ही रह गई! विजय के रिवॉल्बर से गोली निकली और सीधी फार्गिन के बाएं घुटने में लगी ।

फार्गिन के कंठ से चीख निकल गई और वह त्योराकर धड़ाम से गिरा ।

विजय उसकी ओर बढा तथा गिरेबान पकड़कर ऊपर उठाता हुआ-बोला-" जल्दी से बोल दो प्यारे धतूरा वरना आमलेट वना दूंगा!"

"नही !"

" धांय !"

तभी विजय के रिवॉल्वर ने एक गोली और उगली । इस बार गोली उसके दाएं कंधे के जोड़ पर लगी । कंठ से फिर एक चीख निकल गई । उसकी बांह झूल-सी गई । इस बार विजय ने बडी बेरहमी से उसके बाल पकड़े ऊपर उठाता हुआ बोला…"तुम्हें बता चुका हूं बेटा कटोरीराम कि मेरा नाम विजय है

..........................

या तो अराम से बता दो वरना.....वरना इस बार दूसरा घुटना भी तोड़ दूगा ।"

पीडा के कारण फार्गिन रोने लगा । बिजय ने रिवॉल्वर की नाल उसके घुटने में ठीक उस धाव में धंसा दी जहां गोली लगी थी । यह पीड़ा असहनीय थी । वह मचल उठा, बिलखकर रो पड़ा । विजय ने घाव में नाल देकर एक झटका दिया । पीड़ा के कारण फार्गिन डकरा उठा ।

वह सह न सका ।
 
" बोलो प्यारे. कहाँ है फाइंल?"

" .ठहरो..... ठहरो!" अपनी कराहों के बीच वह बडी कठिनाई से बोला---" वह..व ह ट्रासमीटर के समीप बटन दबाने से दाएं कोने का थोडा- फर्श हट जाएगा । उस फ़र्श के नीचे ही भारत में स्थित एजेंटों के नाम व पतों की फाइल है ।"

बड़ी फुर्ती से विजय ने कैरेट मारकर बेहोशी के दामन में पहुचा दिया । वह उस ओर लपका जिस ओर उसने संकेत् किया था । बटन दबाया…चास्तव में फर्श हटा और फर्श के नीचे कवर की एक मोटी-सी फाइल रखी थी । उसने उसे उठाया और तेजी से एकाध पेज उलटकर देखा । फाइल देखकर वह संतुष्ट हो गया । फाईल को उसने कपडो में छुपाया रिवॉल्वर संभालकर दरवाजे की ओर लपका ।

अपने इन के कार्यों के बीच बह निरंतर तहखाने में हो रही फायरिंग की आवाज़ सुनता रहा था । उसने दरवाजा खोला और एक पल के लिए दरचाजे के पीछे छुप गया । मैदान साफ़ पाकर वह तेजी के साथ बाहर आया । उसके बाद वह गेलरी में दोड्रता हुआ बाहर की ओर लपका । उसका टकराव किसी सेनिक से नहीं हुआ ।

वह जैसे ही हाँल मे पहुचां, दूसरी ओर से अलफांसे आता दिखाई दिया । उसके हाथ मे एक मशीनगन थी । विजय को देखते ही वह बोला~“ अब इस अड्डे के अंदर हमारे दुश्मनों के रूप में कवल लाशे हैं ।"

" वो मारा साले पकोड्री वाले को!", विजय लगंभग नारा-सा लगाता हुआ बोला-"अब दुम दबाकर भाग लो लूमड भाई ।"

"फाइल मिल गई?” अलफांसे ने प्रश्न किया !

" मिल गई प्यारे?" विजय ने कहा--" अब तो भागने की सोचो ।कहने के साथ ही दोनों जिस रास्ते से आए थे ! उसी रास्ते पर वापस भाग लिए ।

तब जबकि वे सीढी चढकर सबसे ऊपर पहुचे, ऊपर से. , निरंतर फायरिंग की आवाज आरही थी ।

अशरफ आराम से झाडियों में पड़ा था ।

सर्चलाइट का प्रकाश रह-रहकर उसकी झाडियों के ऊपर से गुजर जाता था । लगभग पैंतालीस मिनट पश्चात उसके कानों में फायरिंग की आवाज आई!

ऐसा लगता के जैसे फायर घरती के नीचे हो रहे हो, तभी उसने सर्च लाइट और मैदान में हलचल महसूस की । वह समझ गया , कि ये लोग भी इस फायरिंग के कारण ही परेशान है । अशुरफ ने तुरंत निश्चय लिया कि अव उसे कुछ करना है । उसने रिवाॅल्बर सीधा किया सबसे पहला फायर सर्च लाइट पर किया ।

अंधेरे मे फायर के साथ एक तेज धमाके-की आबाज गूजी और गोली ने सर्चलाइट का शीशा और बल्ब फोड़ दिया । घुप्प अधेरा छा गया लेकिन वहां की हलचल बढ गई । अशरफ ने पहले ही निश्चय कर लिया था कि उसे करना क्या हैं । उसने हवा में एक ऊंची जंप ली और काटों की दीवार पार करता हुआ -मेदान के अंदर,पहुंच गया । अनेक सेनिक सर्चलाइट स्टेशन के पीछे की ओर भाग रहे थे । अशरफ भी उन्ही के साथ भागा । इस अंधेरे के कांरण उसे अपने पहचान लिए जाने का खतरा नहीं था । भागता` वह भी अंधेरे में गुम हो गया ।

तभी उसे अपने समीप ही दाईं ओर टार्च जलने का प्रकाश नजर आया । अशरफ तुरंत अपने स्थान पर लेट गया और उधर की कार्यवाही देखने लगा । वह टॉर्च एक सैनिक ने रोशन की थ्री । उन्होंने तेजी के साथ पहरेदार से कहा ।

"जल्दी से बटन दबाओ । " यह कहने के साथ ही उसने टार्च का प्रकाश बटन पर डाला ।

उनसे दूर खडे अशरफ ने वह बटन देखा । तभी उसके कानो में पहरेदार की आवाज आई ।

कोईं बोला…"मान-न-मान ने तेरा मेहमान ।"

और सेनिक का हाथ बटन की ओर बढा लेकिन तभी अशरफ के रिवॉल्वर ने दो छोले उगले सेनिक तथा पहरेदार वही चीखकर शहीद हो गए ।

अशरफ की समझ में अब सब कुछ आ गया था । वह तेजी से उधर ही लपका सेनिक की गन संभालकर वहीं पर लेट गया । उसका यह मोर्चा बहुत ही बढिया था । रह-रहकर भागते हुए सेनिक उधर आ रहे अंघेरे मे पड़ा हुआ अशरफ बही सरलता के साथ उन्हें अपना निशाना बना रहा था । उसका यही क्रम जारी रहा । समय गुजरता रहा और वह मोर्चे पर जमां हुआ लाशों के ढेर लगाता रहा ।

लगभग तीस मिनट पश्चात उसे ऐसा, लगा कि उसने अधिकांश सेनिक मार दिए हैं । अब उसके जबाबं में कोई फायर करने वाता नहीं था । जव उसने यह महसूस किया तो अंधेरे में टटोलकर उसने वह बटन दबा दिया जों उसने टॉर्च के प्रकाश में देखा था । उसके दबाते ही थोड़ा सा फर्श हट गया ।

लाल प्रकाश ने बाहर झांका उसने वहुत धीमे से गर्दन निकालकर नीचे झांका । नीचे देखते ही उसके मुह से एकदम निकल.-----" विजय !"

" हाय! " अंदर एकदम विजय के चहकने की आबाज आई-" यानी कि हो , अपने झानझरोखे । लूमड़ भाई लगता है झानाझरोखे ने मैदान साफ़ कर दिया है ।"

उसके बाद......

वे तीनों फाइल लेकर सुरक्षित उस इलाके से बाहर निक्ल आए ।

सुबह के अखबारों ने अमेरिका में जैसे हंगामा मचा दिया । सात-आठ स्थानों पर कुल मिलाकर पचास लाशें उल्टी लटकी पाई गई थी । उन सबके माथे पर गोश्त काटकर 'विकास' लिखा था ।

सारा अमेरिका एक बार पुन: आतंकित हो उठा । विकास के भय ने एक बार पुन: अमेरिकी जनता के दिमाग जकड लिए ।

चारों ओर पुन: आतंक था ।

सीआईए. के हेडक्वार्टर पर हंगामा मचा हुआ था । उनका भारतीय रिपोर्ट प्राप्त करने वाला अड्डा पूरी तरह खत्म हो चुका था ।

भारत में स्थित सी-आइ-ए के एजेंटों फाइल भी गायब थी । अमेरिकन सरकार ने अखबारों में निकलवाया था कि रात की घटनाओं से यह सिद्ध होता है कि विकास न्यूयार्क में ही कहीं है । विकास के ऊपर अमेरिकन सरकार ने दस हजार डॉलर का इनाम रख दिया ।

पूरी अमेरिकन मशीनरी बौखलाइ हुई थी । किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि कौन क्या करे?

इधर केजीबी के अड्डे पर विजय, अलफांसे, अशरफ, बिकास, धनुषटंकार और सुभ्रांत बैठे थे ।

हैरी को किसी बहाने से विकास ने छोड़ था । उसने हैरी को यहां के.जी.बी. के अड्डे पर लाना उचित नहीं समझा था ।

उसने हैरी को विश्वास दिला दिया था कि कल तक खुद अमेरिकन सरकार यह कहने लगेगी कि विकास अपराधी नहीं है । उनके देश का कोई भी मुकदमा विकास पर नहीं है । उसने आज रात को बारह बजे एक स्थान पर मिलने का वादा किया था।

इस समय उनके बीच आज के अखबार पड़े थे । अपने खूनी कारनामे उन्होंने पढे लिए थे ।

एकाएक विजय विकास की ओर देखकर बोला-------"बोलो प्यारे दिलजले, भारत में स्थित सी.आईं.ए. के एजेंटों के नाम और पतो की फाइल हमारे पास है । बडी सरलता से हम भारत से सीआइए. का पतन कर सकते हैं यानी अब हमेँ भारत चलना है । लेकिन इसकी क्या गारंटी है कि अमेरिका यू.एन.ओ. के जरिए तुम्हें मांगेगा नहीं? अब निकालो वह प्वाइंट, जिसके आधार पर तुम कह रहे थे कि तुम पुन: भारत में पहुच जाओगे और अमेरिका यूएनओ. के जरिए तुम्हें नहीं मांग सकेगी बल्कि खुद विश्व में यह घोषणा करेगा कि विकास हमारा अपराधी नहीं ।"

"बस गुरु इस काम के लिए मुझे आज की रात दे दो ।"

" क्यों आज क्या फिर खूनी उत्पात मचाना है ? बेटा दिलजले! तुम्हारी बाते किसी पहेली से कम नहीं हैं ।" विजय बोला-"जरा स्पष्ट करो कि क्या करना चाहते हो, आखिर वह क्या प्वाइंट है?"

"आपकी खुद मालूम हो जाएगा !" विकास ने 'कहा--" आप मेरे लिए केवल एक टेपरिकॉंडंर प्रबंध कर दो ।"

उसके बाद विजय इत्यादि ने काफी चेष्टा की कि विकास कुछ बता दे लेकिन विकास भी अपने नाम का एक ही था । उसने कुछ नहीं बताया । उस रात वह टेपरिकाॅर्डर लेकर अकेला ही गया । जाता-जाता वह विजय, अलफांसे धनुष्टंकार को अपनी कसम दे आया था कि कोई भी पीछे न आए …… ।

"पता नहीं साला ये दिलजला क्या करेगा?" विजय कह रहा था ।

" जो करेगा, ठीक करेगा!" अलफांसे बोला…"लड़का अब गुरु हो गया है, तुम चिंता मत करो !"

"अबे चिंता कैसे न करें साले लुमड !" विजय

बोना-" लडका हीरा है । अगर कुछ हो गया तो.....!'

इधर इस तरह की बाते हो रही थी और उधर........

विकास का शिकार था अमेरिका का राष्ट्रपति भवना पहले उसने अपना यह कार्य पूरी तरह सोच लिया था । राष्ट्रपति भवन पर पहरा तो जरूर रहता था लेकिन वैसा कदापि नहीं होता जैसा सीआईए हेडक्वार्टर पर । बड़ी सरलता से वह छुपता हुआ राष्ट्रपति भवन के इस कक्ष में वह विशेष कार्य करने लगा ।

अपना वहां कार्य समाप्त करके उसने आँफिस का दरवाजा बंद कर दिया और बाहर आ गया ।

लम्बे चौड़े राष्ट्रपति भवन में चारों ओर सन्नाटा था । बिकास गैलरी में बहुत फुर्ती के साथ दबे पाव बढ़ता चला गया । उसने जेब से कम पॉवर का टाइम बम निकाला और उसमें पद्रह मिनट के बाद का टाइम भरकर गैलरी मे एक तरफ लुढका दिया ।

वह जानता था कि इस बम से नुकसान कछ नहीं होगा केवल धमाका होगा । उसने अपनी जेब से एक चाकू निकाला और पास ही की दीवार पर बड़े-बड़े अक्षरों में कुछ लिख दिया । इतना कार्य करने के बाद विकास राष्ट्रपति भवन में जिस शांति के साथ प्रविष्ट हुआ था, उसी शांति के साथ बाहर निकल गया ।

................
 
एक भयानक विस्फोट की आवाज से सारा राष्ट्रपति भवन गूंज उठा । खुद राष्ट्रपति जो अराम से अपने विस्तर पर सोए हुए थे उछल पड़े । सारे भवन में एकदम हंगामा-सा मच गया । राष्ट्रपति ने तेजी के साथ अपने कपड़े पहने बाहर निकलकर आए । उन्होंने देखा बाहर एक कोलाहल-सा था ।

गेलरी मे एक ओर भीड़ लगी हुई थी । उसी वक्त दनादन चार-पांच सेनिक ट्रक वहां रुके और सारा राष्ट्रपति भवन सैनिकों से भर गया । कदाचित किसी ने उन्हें सूचना दे दी थी ।

खुद राष्ट्रपति उस तरफ़ बढे, जहा गेलरी में भीड़ लगी हुई थी ।

" विस्फोट यहीं हुआ था ।" एक सैनिक कह रहा था ।

नए आनेवालों में से एक आफिसर भी था । उसने सबको हटा दिया ।

तब तक वहां कई विशेष हस्तियां भी पहुंच चुकी थी ।

तब जबकि वहां से सबको हटा दिया गया वहाँ कुछ महान हस्तियां रह गई, तब सी आई ए के चीफ़ ने एक टॉर्च का प्रकाश वहा डाला । कुछ देर में टांर्च का प्रकाश उस दीवार पर पड़ा जहां विकास ने चाकू से कुछ लिख दिया था, सबने एक साथ पढा,

"केवल कुछ महान ह्रस्तिया राष्ट्रपति महोदय के ऑफिस पहुँचे । वहां एक टेपरिकाॅर्डर मे अमेरिका सरकार के लिए विशेष संदेश है । उसे ध्यान से सुने और तब आगे की कार्य वाही करें , ध्यान रहे वहां केवल महान हस्तियां हो पहुचे वरना साधारण लोग अगर अमेरिका की इस कमजोरी को जान गये तो काफी नुकसान होगा !"

आप लोगों का चहेता

विकास !

पढकर महान हस्तियों ने एक दूसंरे को देखा । और अंत में यही निश्चय किया कि आँफिस में कुछ बिशेष आदमियों के साथ जाकर देखा जाए कि इस शैतान का संदेश क्या है?

तब जबकि आँफिस का दरवाजों खोला गया । दरवाजा खुलते हीँ टेपरिकार्डर ओंन हो गया । कदाचित विकास ने टेप का स्टार्ट सिस्टम दरवाजे से ही संबधित कर दिया था ।

दरवांजा अंदर से बंद कर लिया गया । टेप में से बराबर आवाज आ रही थी । इस टेप में वे ही सब बाते बातें थी- जो सीआईए के भारत . में स्थित एजेंट 'काली' नें सीआईए. के चीफ को बताई थी । वे ही बाते जहां से यह केस शुरू हुआ था, जिन्हें सुनकर बिकास को भारत में सीआईए के जाल का पता लगा था । उसने क्रालीं की बाते उसी समय एक पाॅकेट टेपरिकॉंर्डर में टेप कर ली थी । उस टेप की बातों से यह बिल्कुल स्पष्ट था कि अमेरिका ने भारत को सीआईए के "जाल" में किस कदर जकड रखा था । वहां वह किस-किस तरह की चाले चल रहे है और किस प्रकार भारत का तख्ता' पलटने का प्लान वना रखा है?

(आप यह टेप-सुनने के लिए ' वेप्रकाश शर्मा' का "टू नइ वन" उपन्यास 'अपराधी विकास और मंगल सम्राट विकास' पढे ।)

उस टेप के समाप्त होते ही वहां कुछ पल के लिए मौत जैसा सन्नाटा छा गंया । अभी कोई कुछु बोल भी नहीं पाया था कि टेप मे पुन: बिकास की आवाज निकली ।

“अमेरिकन हुक्मरानो तुमने ये टेप सुन लिया है। टेप की एक कॉपी अब भी मेरे पास है । माना कि मै अपराधी हूं ।

यू-एन-ओ. के कानून के अनुसार भारत से मुझें ले लोगे, एक बात कान खोलकर सुन लो-------अगर तुमने मुझे अपना अपराधी घोषित कर यू.ऐन.ओ. के जरिए भारत से मांगा तो

ये टेपरिकाॅर्डर यू एन ओ की मेज पर होगा । तुम सोच सकते हो कि इसमें तुम्हारा हर रहस्य है । बह सब यू एन ओ के सामने एक सशक्त प्वाइंट के रूप मे खुल जाएगा ।

कदाचित तुम यह भी जानते होंगे कि यू एन ओ के कानून के अनुसार एक देश का दूसरे देश मे जासूसी का जाल बिछाना संगीन अपराध है ।

अगर तुमने मुझे अपराधी घोषित किया तो निश्चय ही यू-एन-ओ का मुकदमा मुझ परं चलेगा और भारत मुझे तुम्हें सौंपने के लिए बाध्य हो जाएगा ।

लेकिन यूएनओ. की पकड में आने से पहले ही मैं यह टेपं यू. एन .ओ . तक पहुंचा दूंगा । उसके बाद तुम सोच सकते हो कि एक तरफ़ मुकदमा मेरे अकेले के विरुद्ध चलेगा और दूसरी तरफ़ तुम्हारे पूरे देश के ऊपर । सारा विश्व तुम्हारे खिलाफ़ होगा और उससे आगे क्या होगा, यह मेरे कहने की बात नहीं है । वेसे भी यह टेप मेरे अपराधी बनने के अपराध को कम कर देगा क्योकि यूएन.ओ. में यह बात भी उठ सकती है कि जब अमेरिका ने भारत में इतना भयानक जाल फैला रखा है तो उसके मुकाबले भारत का एक साधारण नागरिक अपराधी बनकर अमेरिका पर छा जाए-यह अपराध कोई विशेष अपराध नहीं है । कहने का मतलव केवल यह है कि यू.एन.ओ. में मेरे अपराध से बड़ा अमेरिका का अपराध सिद्ध हो जाएगा । अगर अब भी कुछ न समझे हो तो मुझे यू-एन-ओ. से मांग लेना । लेकिन कहावत यही चरितार्थ करूंगा’--"हम तो डूबेगे सनम, तुमको भी ले डूबेगे । मै अकेला ही डूबूंगा लेकिन तुम्हारे पूरे देश को ले डूबूंगा । तुम्हें विश्व में यह घोषणा करनी होगी कि मैंने तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ा हैं-----मै तुम्हारा अपराधी नहीं हूं लेकिन अगर नासमझी से काम लिया तो…यह टेप तुम्हारी पूरी साजिश, का भंडा फोड़ देगा । तुम लोगों ने मुझें पहचान तो लिया ही होगा, वैसे मुझे के विकास कहते है ।"

टेप के खत्म होते-होते सुनने वाली महान हस्तियाँ कांप उठी ।

उन्होंने एक दूसरे को देखा । सबके चेहरे पीले जर्द पड़े हुए थे,सबको मन-ही-मन यह बात माननी पड रही थी कि विकास को यू.एन.ओं. के जरिए भारत से न मांगना हीँ देश के पक्ष में है ।

वास्तव मे अगर यह टेप यू एन ओ मे पहुंच गया तो विश्व का एक एक देश उनके खिलाफ हो जाएगा ।

"क्या चीज है ये लड़का!"'राष्ट्रपति के होंठ बुदबुदा उठे ।

रात के उसी समय इस बिषय को लेकर अमेरिका की सभी महान हस्तियों को बंद कमरे में यह टेप सुनाया गया इस विषय पर मीटिंगं हुई कि विकस को अपराधी घोषित करके यु-एन-ओ. के जरिए मांगा जाए अथवा विश्व में यह घोषणा कर दी जाए कि बिकास ने हमारा कुछ नहीं बिगाड़ा है, वह हमारा अपराधी नहीं है? दूसरी बात मानते हुए जोर तो सब पर पड़ा लेकिन उनमें से एक भी मूर्ख ऐसा नहीं-निकला, जो पहली बात मानकर केवल एक विकास के लिए पूरे देश पर यू-एन-ओं का मुकदमा चलवाए ।

विवश होकर सबको दूसरी बात मानने लिए विवश होना पड़ा । लेकिन सबके दिमाग में एक ही नाम हथोड़े की तरह बज रहा था ।

विकास........विकास! क्या अमेरिका कभी इस शैतान से बदला ले सकेगा?

सुबह के अखबार वास्तव में विकास के पक्ष में थे । सरकार ने साफ-साफ़ शब्दों में धोषणा की थी कि विकास उनका अपराधी नहीं है । उन्होंने लिखा था कि अमेरिका में जो कुछ भी हुआ, वह बिकास ने नहीं बल्कि विकास को बदनाम करने के लिए विकास के नाम से सब कुछ सिंगहीँ ने किया है । अमेरिकन सरकार ने यू.एन.ओ. से विकास के विरूद्ध किया हुआ दावा वापस ले लिया ।

विजय अलफांसे इत्यादि ने जब विकास से पूछा यह करिश्मा कैसे हुआ तो विकास ने बता दिया ।

सुनकर मन ही मन विजय और अलफासे विकास की प्रशंसा करते रहे !!

रात को राष्ट्रपति भवन से लौटने के बाद विकास हैरी से मिल लिया था ।

हैरी के साथ वह उसके घर गया गुरु जैकी और जूलिया से मिला । वह इस समय जैकी को यकीन दिला रहा था कि यह सब उसने नही सिगंही ने किया है ।
 
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