• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

बिन बुलाया मेहमान compleet

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
बिन बुलाया मेहमान-5

गतान्क से आगे……………………

"तुम हटते हो कि नही. मैं गगन को बता दूँगी हट जाओ." मैने चेतावनी दी.

"बता देना. नुकसान तुम्हारा ही होगा. हर कोई मेरी तरह गान्ड से नही खेल सकता."

"शट अप. कुछ तो शरम करो मैं तुम्हारी बेटी के समान हूँ." मैने कहा.

"तुमने बड़ा सम्मान दिया है मुझे. जबसे यहाँ आया हूँ तुम्हारी आँखो में तिरस्कार ही देखा है."

"आहह...छ्चोड़ो मुझे...तुम मुझे यहाँ नही छू सकते." मैने कहा.

मेरे नितंबो के उपर सलवार के कपड़े को अंदर धकेलते हुए चाचा की उंगली मेरे नितंब के छिद्र तक जा पहुँची थी. आज तक किसी ने भी मुझे वहाँ नही छुआ था. मैं थर थर काँपने लगी थी.

"ह्म...बहुत मस्त गान्ड है तुम्हारी. गगन इसके साथ खेलता है कि नही."चाचा ने घिनोनी आवाज़ में पूछा.

"तुम्हे उस से क्या मतलब. छ्चोड़ो मुझे."

चाचा ने मेरी बात अनसुनी करके मेरे नितंब के छिद्र को रगड़ना शुरू कर दिया.

मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था चाचा पर मगर जब वो मेरे पिछले छिद्र को उंगली से रगड़ रहा था तो मेरे शरीर में अजीब सी हलचल हो रही थी. सबसे बड़ा झटका मुझे तब लगा जब मुँझे अपनी जाँघो के बीच गीला गीला महसूस हुआ.

मेरे पीछले छिद्र पर हो रही रगड़ के कारण मेरी योनि ने पानी छ्चोड़ दिया था. उस वक्त मैं बिल्कुल खामोस हो गयी थी.

"क्या हुआ अच्छा लग रहा है ना तुम्हे निधि बेटी." चाचा ने बेशर्मी से कहा.

"तुम्हे शरम आनी चाहिए ये सब करते हुए."

"आ रही है पर दिल के हाथो मजबूर हूँ. क्या करूँ तुम्हारी गान्ड ही ऐसी है."

"शट अप."

अचानक चाचा ने कुछ अजीब तरीके से मेरे पिछले छिद्र को रगड़ा जिसके कारण मेरे मूह से खुद ब खुद सिसकी निकल गयी. "आहह..."

चाचा ने मेरे नितंब से अपना हाथ हटा लिया और मेरे मरोड़े हुए हाथ को भी छ्चोड़ दिया.

"आगे से तमीज़ से बात करना मेरे साथ समझी."चाचा ने कहा.

"मैं शाम को गगन को सब बताउन्गि. देखना शाम को तुम्हारी खैर नही." मैं चिल्लाई और भाग कर अपने बेडरूम में घुस गयी. बेडरूम में आते ही मैने कुण्डी लगा ली और बिस्तर पर गिर गयी. मेरा शरीर थर थर काँप रहा था. आज तक कभी भी किसी ने मेरे साथ ऐसी हरकत नही की थी.

मैं अपने बिस्तर पर पड़ी हुई थर थर काँप रही थी. मेरे पिछले छिद्र पर मुझे अभी भी चाचा की उंगली महसूस हो रही थी. मैं विस्वास नही कर पा रही थी कि मेरे साथ मेरे ही घर में ऐसा हुआ है. मैं चाचा को बुरी तरह कोस रही थी.

"आज गगन के सामने इसकी पॉल खोल दूँगी मैं. बड़ा बाल ब्रह्म चारी बना फिरता है. आज इसकी खैर नही." मैने निस्चय किया.

शाम को गगन ने डोर बेल बजाई तो मुझसे पहले चाचा ने दरवाजा खोल दिया.

"कुछ भी करले देहाती आज तू बचेगा नही"मैने मन ही मन कहा.

गगन चाचा के साथ उसके कमरे में चला गया. मैं टाय्लेट में गयी तो मेरी आँखे चमक उठी. टाय्लेट टॅंक पर चाचा की डाइयरी पड़ी थी. मैने वो तुरंत उठाई और चाचा के कमरे में घुस गयी. मैने डायरी गगन को थमा दी और बोली,"

गगन ये चाचा जी की डाइयरी है. देखो इन्होने कितना अच्छा अच्छा लिखा है अपने बाल ब्रहचारी जीवन के बारे में.

गगन ने तुरंत डाइयरी ले ली.

 
चाचा ने तुरंत गगन से डाइयरी ले ली और बोला, "नही बेटा कुछ ख़ास नही है इसमे रहने दो बाद में इतमीनान से पढ़ना."

"नही चाचा जी पढ़ने दीजिए ना इन्हे. गगन पढ़ो बहुत अच्छी अच्छी बाते लिखी है इसमे."मैने तुरंत गगन को उकसाया. चाचा मेरी तरफ गुस्से में घूर रहा था.

"निधि इतना कह रही है तो पढ़ ही लेता हूँ चाचा जी" गगन ने चाचा के हाथ से डाइयरी वापिस ले ली.

चाचा की हालत पतली होती दिख रही थी. गगन ने डाइयरी पढ़नी शुरू कर दी. मैं वही दीवार से सॅट कर खड़ी हो गयी.

डाइयरी के 2 पेज पढ़ने के बाद गगन ने मेरी तरफ देखा और बोला, "सच में बहुत अच्छी अच्छी बाते लिखी हैं इस डायरी में. ब्रह्म्चर्य के बारे में बहुत अच्छा लिखा है चाचा जी ने. थॅंक्स निधि मैं ये डाइयरी आज रात को पूरी पढ़ लूँगा."

ये सुनते ही मेरे होश उड़ गये. मैने तुरंत गगन के हाथ से डायरी खींच ली और पढ़ने लगी. उसमे सच में ब्रह्म्चर्य के बारे में लिखा था. मेरा तो सर घूमने लगा.

"क्या हुआ बेटी. गगन को पढ़ने दो ना. तुम तो पढ़ ही चुकी हो."चाचा ने मुस्कुराते हुए कहा.

"हां निधि मुझे दो. चाचा जी शायद ये दुबारा पढ़ना चाहती है. पर निधि अब पहले मैं पढ़ुंगा तब तुम दुबारा पढ़ना ओक."गगन डाइयरी हाथ में लिए वहाँ से उठ गया और कमरे से बाहर चला गया.

मैं इतने सदमे में थी कि समझ ही नही पा रही थी कि क्या हो रहा है. चाचा बेड से उठ कर मेरे पास आया और धीरे से बोला, "क्या हुआ तुम इतनी हैरान और परेशान सी क्यों हो गयी अचानक निधि बेटी. सब ठीक तो है ना."

"देख लूँगी तुम्हे मैं. छ्चोड़ूँगी नही तुम्हे मैं." मैने कहा.

मैं कमरे से जाने लगी तो चाचा ने मेरे नितंबो पर ज़ोर से हाथ मारा और बोला, "बहुत मस्त गान्ड है तुम्हारी. मज़ा आ गया आज."

मैं दाँत भींच कर रह गयी और बिना कुछ कहे कमरे से बाहर आ गयी. मैं सीधा अपने बेडरूम में आई. गगन डाइयरी पढ़ने में मगन था.

"गगन चाचा जी वैसे नही हैं जैसे दिखते हैं." मैने कहा.

"हां ये पढ़ कर अब मुझे भी यही लग रहा है. बहुत उँची और गहरी बाते लिखी है जीवन के बारे में चाचा जी ने. थॅंक्स आ लॉट डार्लिंग फॉर गिविंग दिस डाइयरी टू मी. और हां मैं बताना भूल गया. तुम तैयार हो जाओ. हम मूवी देखने जा रहे हैं."

सुनते ही मैं झूम उठी. और तुरंत सब कुछ भूल कर तैयार होने लगी. जब हम निकलने लगे तो मुझे बहुत बड़ा शॉक लगा. गगन ने मुझे नही बताया था कि चाचा भी हमारे साथ मूवी देखने चल रहा है. वो तैयार खड़ा था दरवाजे के पास. मेरा उसे देखते ही सारा मूड खराब हो गया.हम ने मेट्रो स्टेशन के लिए ऑटो किया और 5 मिनिट में स्टेशन पहुँच गये. मेट्रो में बहुत भीड़ थी. लोग एक दूसरे से सॅट कर खड़े थे. बैठने को सीट नही थी सभी भरी हुई थी. मैं गगन और चाचा एक साथ खड़े हो गये थे. गगन मेरे बाई तरफ था और चाचा मेरे पीछे. मुझे पूरा यकीन था कि चाचा ज़रूर कोई ना कोई छेड़खानी करेगा. मैने प्लान बनाया कि जैसे ही वो मुझे कही छुएगा मैं गगन को बोल दूँगी देखने को कि देखो कॉन छू रहा है मुझे. कुछ देर तक कुछ नही हुआ.

अचानक मुझे मेरे नितंबो पर हाथ महसूस हुआ. मैने धीरे से गगन के कान में कहा कि कोई मेरी बॅक को टच कर रहा है. गगन ने मुझे चुप रहने को कहा ताकि टच करने वाले को रंगे हाथो पकड़ा जा सके. मैने आँखो से इशारा किया कि हाथ अभी वही है तो गगन ने तुरंत वो हाथ पकड़ लिया. हैरत की बात ये थी कि वो हाथ चाचा का नही बल्कि मेरे दाहिनी तरफ खड़े आदमी का था. जैसे ही गगन ने उस आदमी का हाथ पकड़ा वो घबरा गया. चाचा ने मोका देख कर उसके मूह पर एक थप्पड़ जड़ दिया. वो माफी माँगने लगा. बाकी लोगो ने भी उसे खरी खोटी सुनाई. मगर मेरा प्लान फिरसे फैल हो गया था. चाचा फिर से बच गया था.

 
“सिनिमा में बहुत भीड़ थी. मैने जानबूझ कर चाचा से दूर बैठी थी. चाचा को गगन की साइड वाली सीट पर बैठा दिया था. मुस्किल से 15 मिनिट ही बीते थे कि गगन का मोबाइल बज उठा. गगन ये बोल कर बाहर चला गया कि बॉस का फोन है. गगन के बाहर जाते ही चाचा मेरे पास आ गया और मेरे कान में बोला,

"हर कोई तुम्हारी गान्ड के पीछे पड़ा है. पड़े भी क्यों ना गान्ड ही ऐसी है तुम्हारी."

"चुपचाप मूवी देखो मुझे डिस्टर्ब मत करो." मैने कहा.

गगन आता दीखाई दिया तो चाचा वापिस अपनी सीट पर चला गया. गगन ने आकर मुझे बहुत बड़ा शॉक दिया.

"हनी मुझे जाना होगा. बॉस ने तुरंत ऑफीस बुलाया है कुछ अर्जेंट काम है. तुम लोग मूवी देख कर मेट्रो से ही वापिस चले जाना."

"मैं चाचा के साथ मूवी कैसे देखूँगी."मैने धीरे से कहा.

"वो तो एक सीट छ्चोड़ कर बैठे हैं. वैसे भी कॉमेडी मूवी है. प्लीज़ मुझे जाना ही होगा."गगन चाचा की तरफ बढ़ गया बोल कर और उनके कान में कुछ बोल कर थियेटर से बाहर निकल गया.

मैं अपना सा मूह लेकर रह गयी. गगन के जाते ही चाचा मेरे पास वाली सीट पर आ गया.

"अब हम दोनो साथ में सिनिमा देखेंगे." चाचा ने कहा.

"तुम्हारे गाँव में तो सिनिमा नाम की चीज़ भी नही होगी है ना. बड़ी मुस्किल से नसीब हुई है ये सिनिमा देखने की ऑपर्चुनिटी तुम्हे. इसलिए चुपचाप मूवी देखो बैठ कर." मैने कठोरता से कहा.

"सच सच बताओ क्या कल तुम्हे मज़ा नही आया था. मेरा हाथ लगते ही औरत का अंग अंग थिरकने लगता है. तुम्हारी गान्ड के छेद को बहुत अच्छे से रगड़ा था मैने. कहो तो आज फिर सेवा कर दूं तुम्हारी थोड़ी सी."

"तुम देखो मूवी बैठ कर मैं जा रही हूँ." मैं उठने लगी तो चाचा ने हाथ पकड़ कर बैठा दिया मुझे वापिस.

"नही देखो तुम भी. मैं अब चुप रहूँगा."

क्रमशः…………………………………
 
Bin Bulaya Mehmaan-5

gataank se aage……………………

"tum hatate ho ki nahi. main gagan ko bata dungi hat jaao." maine chetavni di.

"bata dena. nuksaan tumhara hi hoga. har koyi meri tarah gaanD se nahi khel sakta."

"shut up. kuch to sharam karo main tumhari beti ke samaan hun." maine kaha.

"tumne bada sammaan diya hai mujhe. jabse yaha aaya hun tumhari aankho mein tiraskaar hi dekha hai."

"aahhhh...chhodo mujhe...tum mujhe yaha nahi cho sakte." maine kaha.

mere nitambo ke upar salwar ke kapde ko ander dhakailte hue chacha ki ungli mere nitamb ke chidra tak ja pahunchi thi. aaj tak kisi ne bhi mujhe vaha nahi chua tha. main thar thar kaampne lagi thi.

"hmm...bahut mast gaanD hai tumhari. gagan iske saath khelta hai ki nahi."chacha ne ghinoni awaaj mein pucha.

"tumhe us se kya matlab. chhodo mujhe."

chacha ne meri baat ansuni karke mere nitamb ke chidra ko ragadna shuru kar diya.

mujhe bahut gussa aa raha tha chacha par magar jab vo mere peechle chidra ko ungli se ragad raha tha to mere sharir mein ajeeb si halchal ho rahi thi. sabse bada jhatka mujhe tab laga jab munjhe apni jaangho ke beech gila gila mahsus hua.

mere peechle chidra par ho rahi ragad ke kaaran meri yoni ne paani chhod diya tha. us vakt main bilkul khaamos ho gayi thi.

"kya hua achha lag raha hai na tumhe nidhi beti." chacha ne besharmi se kaha.

"tumhe sharam aani chaahiye ye sab karte hue."

"aa rahi hai par dil ke haatho majboor hun. kya karun tumhari gaanD hi aisi hai."

"shut up."

achaanak chacha ne kuch ajeeb tarike se mere peechle chidra ko ragda jiske kaaran mere muh se khud b khud shisiki nikal gayi. "aahhh..."

chacha ne mere nitamb se apna haath hata liya aur mere marode hue haath ko bhi chhod diya.

"aage se tamiz se baat karna mere saath samjhi."chacha ne kaha.

"main shaam ko gagan ko sab bataungi. dekhna shaam ko tumhaari khair nahi." main chillaai aur bhaag kar apne bedroom mein ghuss gayi. bedroom mein aate hi maine kundi laga li aur bistar par gir gayi. mera sharir thar thar kaamp raha tha. aaj tak kabhi bhi kisi ne mere saath aisi harkat nahi ki thi.

main apne bistar par padi huyi thar thar kaamp rahi thi. mere peechle chhidra par mujhe abhi bhi chacha ki ungli mahsus ho rahi thi. main viswaas nahi kar pa rahi thi ki mere saath mere hi ghar mein aisa hua hai. main chacha ko buri tarah kos rahi thi.

"aaj gagan ke saamne iski pol khol dungi main. bada baal brahm chaari bana phirta hai. aaj iski khair nahi." maine nischay kiya.

shaam ko gagan ne door bell bajaayi to mujhse pahle chacha ne darvaja khol diya.

"kuch bhi karle dehaati aaj tu bachega nahi"maine man hi man kaha.

gagan chacha ke saath uske kamre mein chala gaya. main toilet mein gayi to meri aankhe chamak uthi. toilet tank par chacha ki diary padi thi. maine vo turant uthayi aur chacha ke kamre mein ghuss gayi. maine dairy gagan ko thama di aur boli,"

gagan ye chacha ji ki diary hai. dekho inhone kitna achha achha likha hai apne baal brahchari jeevan ke baare mein.

gagan ne turant diary le li.
 


chacha ne turant gagan se diary le li aor bola, "nahi beta kuch khaas nahi hai isme rahne do baad mein itminaan se padhna."

"nahi chacha ji padhne dijiye na inhe. gagan padho bahut achhi achhi baate likhi hai isme."maine turant gagan ko uksaya. chacha meri taraf gusse mein ghoor raha tha.

"nidhi itna kah rahi hai to padh hi leta hun chacha ji" gagan ne chacha ke haath se diary vaapis le li.

chacha ki haalat patli hoti dikh rahi thi. gagan ne diary padhni shuru kar di. main vahi deewar se sat kar khadi ho gayi.

diary ke 2 page padhne ke baad gagan ne meri taraf dekha aur bola, "sach mein bahut achhi achhi baate likhi hain is dairy mein. brahmcharya ke baare mein bahut achha likha hai chacha ji ne. thanks nidhi main ye diary aaj raat ko puri padh lunga."

ye shunte hi mere hosh ud gaye. maine turant gagan ke haath se dairy kheench li aur padhne lagi. usme sach mein brahmcharya ke baare mein likha tha. mera to sar ghumne laga.

"kya hua beti. gagan ko padhne do na. tum to padh hi chuki ho."chacha ne muskurate hue kaha.

"haan nidhi mujhe do. chacha ji shayad ye dubara padhna chaahti hai. par nidhi ab pahle main padhunga tab tum dubara padhna ok."gagan diary haath mein liye vaha se uth gaya aur kamre se baahar chala gaya.

main itne sadme mein thi ki samajh hi nahi pa rahi thi ki kya ho raha hai. chacha bed se uth kar mere paas aaya aur dheere se bola, "kya hua tum itni hairaan aur pareshaan si kyon ho gayi achaanak nidhi beti. sab theek to hai na."

"dekh lungi tumhe main. chhodungi nahi tumhe main." maine kaha.

main kamre se jaane lagi to chacha ne mere nitambo par jor se haath maara aur bola, "bahut mast gaanD hai tumhari. maja aa gaya aaj."

main daant bheench kar rah gayi aur bina kuch kahe kamre se baahar aa gayi. main seedha apne bedroom mein aayi. gagan diary padhne mein magan tha.

"gagan chacha ji vaise nahi hain jaise dikhte hain." maine kaha.

"haan ye padh kar ab mujhe bhi yahi lag raha hai. bahut unchi aur gahri baate likhi hai jeevan ke baare mein chacha ji ne. thanks a lot darling for giving this diary to me. aur haan main bataana bhool gaya. tum taiyaar ho jaao. hum movie dekhne ja rahe hain."

sunte hi main jhum uthi. aur turant sab kuch bhool kar taiaar hone lagi. jab hum nikalne lage to mujhe bahut bada shock laga. gagan ne mujhe nahi bataya tha ki chacha bhi hamaare saath movie dekhne chal raha hai. vo taiyar khada tha darvaaje ke paas. mera use dekhte hi sara mood khraab ho gaya.humne metro station ke liye auto kiya aur 5 minute mein station pahunch gaye. metro mein bahut bheed thi. log ek dusre se sat kar khade the. baithne ko seat nahi thi sabhi bhari huyi thi. main gagan aur chacha ek saath khade ho gaye the. gagan mere baayi tataf tha aur chacha mere peeche. mujhe pura yakin tha ki chacha jaroor koyi na koyi chhedkhani karega. maine plan banaya ki jaise hi vo mujhe kahi chuega main gagan ko bol dungi dekhne ko ki dekho kon chu raha hai mujhe. kuch der tak kuch nahi hua.

achaanak mujhe mere nitambo par haath mahsus hua. maine dheere se gagan ke kaan mein kaha ki koyi meri back ko touch kar raha hai. gagan ne mujhe chup rahne ko kaha taaki touch karne wale ko range haatho pakda ja sake. maine aankho se isaara kiya ki haath abhi vahi hai to gagan ne turant vo haath pakad liya. hairat ki baat ye thi ki vo haath chacha ka nahi balki mere daahini taraf khade aadmi ka tha. jaise hi gagan ne us aadmi ka haath pakda vo ghabra gaya. chacha ne moka dekh kar uske muh par ek thappad jad diya. vo maafi maangne laga. baaki logo ne bhi use khari khoti sunayi. magar mera plan firse fail ho gaya tha. chacha fir se bach gaya tha.

“cinema mein bahut bheed thi. maine jaanbujh kar chacha se dur bathi thi. chacha ko gagan ki side wali seat par baitha diya tha. muskil se 15 minute hi beete the ki gagan ka mobile baj utha. gagan ye bol kar baahar chala gaya ki boss ka phone hai. gagan ke baahar jaate hi chacha mere paas aa gaya aur mere kaan mein bola,

"har koyi tumhaari gaanD ke peeche pada hai. pade bhi kyon na gaanD hi aisi hai tumhaari."

"chupchaap movie dekho mujhe disturb mat karo." maine kaha.

gagan aata deekhayi diya to chacha vaapis apni seat par chala gaya. gagan ne aakar mujhe bahut bada shock diya.

"honey mujhe jaana hoga. boss ne turant office bulaya hai kuch urgent kaam hai. tum log movie dekh kar metro se hi vaapis chale jaana."

"main chacha ke saath movie kaise dekhungi."maine dheere se kaha.

"vo to ek seat chhod kar baithe hain. vaise bhi comedy movie hai. please mujhe jaana hi hoga."gagan chacha ki taraf badh gaya bol kar aur unke kaan mein kuch bol kar theater se baahar nikal gaya.

main apna sa muh lekar rah gayi. gagan ke jaate hi chacha mere paas wali seat par aa gaya.

"ab hum dono saath mein cinema dekhenge." chacha ne kaha.

"tumhaare gaanv mein to cinema naam ki cheez bhi nahi hogi hai na. badi muskil se nasib huyi hai ye cinema dekhne ki opportunity tumhe. isliye chupchaap movie dekho baith kar." maine kathorta se kaha.

"sach sach bataao kya kal tumhe maja nahi aaya tha. mera haath lagte hi aurat ka ang ang thirakne lagta hai. tumhaari gaanD ke chhed ko bahut achhe se ragda tha maine. kaho to aaj phir seva kar dun tumhaari thodi si."

"tum dekho movie baith kar main ja rahi hun." main uthne lagi to chacha ne haath pakad kar baitha diya mujhe vaapis.

"nahi dekho tum bhi. main ab chup rahunga."

kramashah…………………………………

 
बिन बुलाया मेहमान-6

गतान्क से आगे……………………

थोड़ी देर चाचा चुपचाप रहा. उसने कोई हरकत नही की. अचानक मुझे मेरी जाँघ पर उसका हाथ महसूस हुआ तो मैं सिहर उठी. मैं चिल्ला कर उसे हाथ हटाने को कहना चाहती थी पर मेरे बाजू में भी सीट पर एक लेडी बैठी थी अपने पति के साथ. मैने चाचा का हाथ पकड़ कर चुपचाप मेरी जाँघ से हटा दिया. मैं समझ गयी कि चाचा मुझे परेशान करने वाला है. मैं बिना कुछ कहे वहाँ से उठ कर बाहर आ गयी.

मैं जल्द से जल्द थियेटर से निकलना चाहती थी. मेरी नज़र टाय्लेट पर पड़ी तो मुझे प्रेशर महसूस हुआ और मैं टाय्लेट में घुस गयी. मैं खुद को रिलीव करके दरवाजा खोल कर बाहर निकली ही थी कि मेरे होश उड़ गये. मेरे सामने चाचा खड़ा था. मैं कुछ बोलने ही वाली थी कि उसने मेरे मूह पर हाथ रख दिया और मुझे टाय्लेट में खींच लिया वापिस और कुण्डी लगा दी. मैं बुरी तरह छटपटा रही थी. मुझे किसी के बोलने की आवाज़ आई तो मैं एक दम चुप हो गयी. आख़िर मेरी इज़्ज़त का सवाल था.

चाचा ने मेरे मूह से हाथ हटा लिया और मुझे चुप रहने का इशारा किया. मैं गुस्से से उसकी तरफ घूर रही थी. चाचा मुझे उपर से नीचे तक घूर रहा था. एक तरफ मुझे गुस्सा आ रहा था और एक तरफ मैं घबरा रही थी कि किसी ने मुझे चाचा के साथ टाय्लेट में देख लिया तो क्या होगा. मेरा दिमाग़ बुरी तरह घूम रहा था. चाचा मेरी तरफ देख कर मध्यम मध्यम मुस्कुरा रहा था. मुझसे सहा नही गया और मैने घुमा कर एक थप्पड़ जड़ दिया चाचा के मूह पर. चाचा बोखला गया और दोपहर की तरह उसने मेरा हाथ मरोड़ दिया और मुझे टाय्लेट के दरवाजे से सटा दिया. मेरी पीठ उसकी तरफ थी.

"ये कैसी आवाज़ थी." बाहर से आवाज़ आई.

"पता नही शायद कोई टाय्लेट में है. लगता है हम ही बोर नही हो रहे मूवी से. बड़ी बेकार मूवी है यार."

"हां सही कहा."

मैं बिल्कुल खामोश दीवार से सटी खड़ी थी. मेरे हाथ में बहुत दर्द हो रहा था. चाचा ने हाथ बड़ी बेरहमी से मरोड़ रखा था. फिर जैसा कि दोपहर को हुआ था. चाचा के हाथ मेरे नितंबो से खेलने लगे. मगर एक मिनिट बाद ही चाचा का हाथ उपर बढ़ता गया और उसने मेरे उभारो को मसलना शुरू कर दिया.

"तुम्हारे संतरे बहुत बड़े बड़े हैं निधि बेटा. कैसे इतने बड़े किए तुमने." चाचा ने मेरे कान में कहा.

मैं शरम से पानी पानी हो गयी. उसे ज़ोर से गाली देना चाहती थी पर अपनी इज़्ज़त के कारण मजबूर थी.

चाचा ने अचानक बहुत ज़ोर से मेरे उभारों को दबाया. मेरी चीन्ख निकलते निकलते बची. मेरे उभारो को मसलते हुए मेरे बहुत नज़दीक आ गया. मुझे मेरे नितंबो पर कुछ हार्ड सी चीज़ महसूस हुई तो मेरी साँस अटक गयी.

"तेरी गान्ड को छू रहा है मेरा लंड. बता कैसा लग रहा है." चाचा ने मेरे कान में कहा.

"तुम एक नंबर के कमिने हो."मैने धीरे से कहा.

अचानक चाचा का हाथ मेरे उभारों से नीचे की ओर बढ़ा. मैं समझ गयी कि उसका क्या इरादा है.

"खबरदार मेरे वहाँ हाथ लगाया तो."

"क्या कर लोगि. चिल्लाओगी. चिल्लाओ. हहेहहे." चाचा ने मेरी योनि पर हाथ रख दिया और हाथ रख कर मुझे पीछे को धक्का दिया. मेरे नितंब चाचा के लिंग के और ज़्यादा नज़दीक पहुँच गये. अब उसका लिंग बहुत ज़्यादा फील हो रहा था मुझे मेरे नितंबो पर. पहले गगन के लिंग के अलावा कोई दूसरा लिंग मेरे इतने नज़दीक था. मुझे बहुत ही अजीब सी बेचैनी हो रही थी.

चाचा ने कपड़े के उपर से ही मेरी योनि को सहलाना शुरू कर दिया. मैं चाह कर भी कुछ नही कर सकती थी. मेरा हाथ अभी भी बहुत ज़ोर से मरोड़ रखा था उसने और दर्द के कारण मैं खुद को असहाय महसूस कर रही थी.

चाचा मेरी योनि को बुरी तरह से रगड़ रहा था. कपड़े के उपर से ही उसने मेरी योनि की पंखुड़ियों को उँगुलियों के बीच जाकड़ लिया था और उन्हे बुरी तरह रगड़ रहा था. ना चाहते हुए भी मेरे शरीर में एक अजीब सी लहर दौड़ रही थी. कब मेरी योनि गीली हो गयी और कब उसने पानी छोड़ दिया मुझे पता भी नही चला.

अचानक चाचा हट गया और मेरे कान में बोला, "चलो घर चलते हैं. कब तक यहाँ टाय्लेट में खड़ी हुई अपनी चूत रगडवाती रहोगी. किसी ने देख लिया तो बदनामी होगी."

मैने बिना कुछ कहे चाचा को घूर कर देखा.

"पहले तुम जाओ. मैं बाद में आता हूँ."चाचा ने धीरे से कहा.

मैं दरवाजा खोल कर तुरंत बाहर आ गयी और बाहर आते ही थियेटर के एग्ज़िट की तरफ लपकी. मैने मेट्रो से जाने की बजाए ऑटो पकड़ा और सीधा घर आ गयी. चाचा से मुझे कोई लेना देना नही था कि वो अंजान शहर में कैसे घर तक आएगा.

"अच्छा हो कि कही मर जाए कमीना."मैने मन में बहुत गालिया दी चाचा को.

ऑटो में बैठते वक्त मुझे ख्याल भी नही आया था कि मैं एक नयी मुसीबत

में फँस सकती हूँ. ऑटो वाला हर स्टॉप पर पीछे मूड कर मुझे देखता था.

मुझसे रहा नही गया तो मैने पूछ ही लिया कि क्या बात है है. वो दाँत निकाल

कर हँसने लगा.

"आपने मुझे पहचाना नही क्या. मैं गंगू का भाई हूँ."

 
मुझे तुरंत याद आ गया. गंगू हमारे घर रोज सुबह दूध देने आता था. एक

दिन वो बीमार था तो उसकी जगह ऑटो वाला दूध देने आया था.

उसकी उमर कोई 31 या 32 साल थी.

"मेरा नाम पार्कश है. शायद मैने बताया था आपको?"

"ओके...ज़रा जल्दी करो मैं लेट हो रही हूँ."

"क्या करू मेडम जी हर तरफ ट्रॅफिक ही ट्रॅफिक है. देल्ही में ये सबसे बड़ी

दिक्कत है."

मैं उसकी बातों पर रिएक्ट नही कर रही थी. मगर कुछ ना कुछ बोले जा रहा

था. अचानक उसने ऑटो रोक दिया.

"क्या हुआ?"

"मेडम जी आपकी इजाज़त हो तो एक पान ले लूँ."

"ठीक है...जल्दी करो"

5 मिनिट बाद वो पान चबता हुआ ऑटो की तरफ आ रहा था. मेरी नज़र उस पर

पड़ी तो उसने बड़े अश्लील तरीके से अपनी पॅंट में तने हुए लिंग को मेरी तरफ

देखते हुए मसला. मैने तुरंत अपना सर घुमा लिया.

"क्या आपने कभी पान खाया है मेडम जी."

"नही...ज़रा जल्दी करो."

"मेडम जी साहिब क्या काम करते हैं?"

"तुमसे मतलब...तुम ऑटो चलाने पर ध्यान दो."

उसने मुझे घर के बाहर उतार दिया. मैने पैसे पुच्छे तो उसने मना कर दिया.

"रहने दीजिए मेडम जी. आपके यहा दूध देते हैं हम"

"वो तो तुम्हारा भाई देता है ना."

"अगले महीने वो कुछ काम से बाहर जा रहा है. फिर मैं ही देने आउन्गा."

"जो भी हो पैसे तो तुम्हे लेने ही पड़ेंगे. बताओ कितने हुए?"

"आप इतना कह रही हैं तो 100 दे दीजिए."

100 मुझे ज़्यादा लगे मगर फिर भी मैने तुरंत उसे पर्स से निकाल कर दे

दिए.

मगर जाते जाते वो कुछ अजीब बोल गया.

"मेडम जी मेरे लिए लड़की ढूंढी जा रही है. काश आपके जैसी लड़की मुझे मिल

जाए."

मैं उसे देखती रह गयी और बिना कुछ कहे घर की तरफ चल दी. मैने पीछे

मूड कर देखा तो वो ऑटो लिए वही खड़ा था. कमीना हिलते हुए मेरे नितंबो को

घूर रहा था.

घर में घुसते ही मुझे एक प्लान सूझा. मैने किचन में एक कॅमरा फिट कर

दिया ताकि जब भी चाचा मुझे छेड़े उसकी करतूत कॅमरा में रेकॉर्ड हो जाए.

जैसे ही मैं कॅमरा फिट करके हटी डोर बेल बज उठी. मैने दरवाजा खोला तो

चाचा मेरे सामने खड़ा मुस्कुरा रहा था.

"तुम सिनिमा से अकेली भाग आई. हम साथ आते तो अच्छा रहता. चलो कोई बात

नही."

मन तो कर रहा था की उसके मूह पर दरवाजा पटक दूं और उसे घर में ना घुसने दूं पर अपने प्लान का ख्याल आने पर मैने खुद को थाम लिया.

मैं चुपचाप बिना कुछ कहे किचन में आ गयी और कॅमरा ऑन कर दिया. प्लान

के मुताबिक मुझे किचन में ही रुकना था. मुझे पूरा यकीन था कि वो किचन

में आकर छेड़खानी ज़रूर करेगा. मैं किचन के छोटे मोटे कामों में लग

गयी.

"गगन कब तक आएगा निधि?"

मैने मूड कर देखा तो चाचा किचन के दरवाजे पर खड़ा था.

क्रमशः…………………………………
 


thodi der chacha chupchaap raha. usne koyi harkat nahi ki. achaanak mujhe meri jaangh par uska haath mahsus huva to main sihar uthi. main cheella kar use haath hataane ko kahna chaahti thi par mere baju mein bhi seat par ek lady baithi thi apne pati ke saath. maine chacha ka haath pakad kar chupchaap meri jaangh se hata diya. main samajh gayi ki chacha mujhe pareshaan karne wala hai. main bina kuch kahe vaha se uth kar baahar aa gayi. main jald se jald theater se nikalna chaahti thi. meri nazar toilet par padi to mujhe pressure mahsus huva aur main toilet mein ghuss gayi. main khud ko relieve karke darvaja khol kar baahar nikli hi thi ki mere hosh ud gaye. mere saamne chacha khada tha. main kuch bolne hi wali thi ki usne mere muh par haath rakh diya aur mujhe toilet mein kheench liya vaapis aur kundi laga di. main buri tarah chatpata rahi thi. mujhe kisi ke bolne ki awaaj aayi to main ek dum chup ho gayi. aakhir meri ijjat ka sawaal tha.

chacha ne mere muh se haath hata liya aur mujhe chup rahne ka isaara kiya. main gusse se uski taraf ghur rahi thi. chacha mujhe upar se neeche tak ghur raha tha. ek taraf mujhe gussa aa raha tha aur ek taraf main ghabra rahi thi ki kisi ne mujhe chacha ke saath toilet mein dekh liya to kya hoga. mera deemag buri tarah ghum raha tha. chacha meri taraf dekh kar madham madham muskura raha tha. mujhse saha nahi gaya aur maine ghuma kar eki thappad jad diya chacha ke muh par. chacha bokhla gaya aur dopahar ki tarah usne mera haath marod diya aur mujhe toilet ke darvaje se sata diya. meri peeth uski taraf thi.

"ye kaisi awaaj thi." baahar se awaaj aayi.

"pata nahi shaayad koyi toilet mein hai. lagta hai hum hi bore nahi ho rahe movie se. badi bekaar movie hai yaar."

"haan sahi kaha."

main bilkul khaamos deewar se sati khadi thi. mere haath mein bahut dard ho raha tha. chacha ne haath badi berahmi se marod rakha tha. phir jaisa ki dopahar ko huva tha. chacha ke haath mere nitambo se khelne lage. magar ek minute baad hi chacha ka haath upar badhta gaya aur usne mere ubhaaro ko masalna shuru kar diya.

"tumhare santre bahut bade bade hain nidhi beta. kaise itne bade kiye tumne." chacha ne mere kaan mein kaha.

main sharam se paani paani ho gayi. use jor se gaali dena chaahti thi par apni ijjat ke kaaran majboor thi.

chacha ne achaanak bahut jor se mere ubhaaron ko dabaya. meri cheenkh nikalte nikalte bachi. mere ubhaaro ko maslte huve mere bahut nazdik aa gaya. mujhe mere nitambo par kuch hard si cheez mahsus huyi to meri saans atak gayi.

"teri gaand ko chu raha hai mera lund. bata kaisa lag raha hai." chacha ne mere kaan mein kaha.

"tum ek number ke kamine ho."maine dheere se kaha.

achaanak chacha ka haath mere ubharon se neeche ki aur badha. main samajh gayi ki uska kya iraada hai.

"khabardaar mere vaha haath lagaya to."

"kya kar logi. cheellaogi. cheellao. hehehehe." chacha ne meri yoni par haath rakh diya aur haath rakh kar mujhe peeche ko dhakka diya. mere nitamb chacha ke ling ke aur jyada nazdik pahunch gaye. ab uska ling bahut jyada feel ho raha tha mujhe mere nitamo par. pahli gagan ke ling ke alawa koyi dusra ling mere itne nazdik tha. mujhe bahut hi ajeeb si bechaini ho rahi thi.

chacha ne kamde ke upar se hi meri yoni ko sahlana shuru kar diya. main chaah kar bhi kuch nahi kar sakti thi. mera haath abhi bhi bahut jor se marod rakha tha usne aur dard ke kaaran main khud ko ashaay mahsus kar rahi thi.

chacha meri yoni ko buri tarah se ragad raha tha. kapde ke upar se hi usne meri yonki ki pankhudiyon ko unguliyon ke beech jakad liya tha aur unhe buri tarah ragad raha tha. na chaahte huve bhi mere sharir mein ek ajeeb si lahar daud rahi thi. kab meri yoni gili ho gayi aur kab usne paani chhod diya mujhe pata bhi nahi chala.

achaanak chacha hat gaya aur mere kaan mein bola, "chalo ghar chalte hain. kab tak yaha toilet mein khadi huyi apni choot ragadvati rahogi. kisi ne dekh liya to badnami hogi."

maine bina kuch kahe chacha ko ghur kar dekha.

"pahle tum jaao. main baad mein aata hun."chacha ne dheere se kaha.

main darvaja khol kar turant baahar aa gayi aur baahar aate hi theater ke exit ki taraf lapki. maine metro se jaane ki bajaaye auto pakda aur seedha ghar aa gayi. chacha se mujhe koyi lena dena nahi tha ki vo anjaan sahar mein kaise ghar tak aayega.

"achha ho ki kahi mar jaaye kamina."maine man mein bahut gaaliya di chacha ko.

auto mein baithte vakt mujhe khyaal bhi nahi aaya tha ki main ek nayi musibat

mein phans sakti hun. Auto wala har stop par peeche mud kar mujhe dekhta tha.

Mujhse raha nahi gaya to maine puch hi liya ki kya baat hai hai. Vo daant nikaal

kar hansne laga.

"aapne mujhe pahchana nahi kya. Main gangu ka bhai hun."

mujhe turant yaad aa gaya. Gangu hamaare ghar roj subah dudh dene aata tha. Ek

din vo beemar tha to uski jagah auto wala dudh dene aaya tha.

Uski umar koyi 31 ya 32 saal thi.

"mera naam parkash hai. Shayad maine bataaya tha aapko?"

"okay...jara jaldi karo main late ho rahi hun."

"kya karu madam ji har taraf traffic hi traffic hai. Delhi mein ye sabse badi

dikkat hai."

main uski baaton par react nahi kar rahi thi. Magar kuch na kuch bole ja raha

tha. Achaanak usne auto rok diya.

"kya huva?"

"madam ji aapki ijaajat ho to ek paan le lun."

"theek hai...jaldi karo"

5 minute baad vo paan chabata huva auto ki taraf aa raha tha. Meri nazar us par

padi to usne bade ashlil tarike se apni pant mein tane huve ling ko meri taraf

dekhte huve masla. Maine turant apna sar ghuma liya.

"kya aapne kabhi paan khaya hai madam ji."

"nahi...jara jaldi karo."

"madam ji sahib kya kaam karte hain?"

"tumse matlab...tum auto chalaane par dhyaan do."

usne mujhe ghar ke baahar utaar diya. Maine paise puchhe to usne mana kar diya.

"rahne dijiye madam ji. Aapke yaha dudh dete hain hum"

"vo to tumhara bhai deta hai na."

"agle mahine vo kuch kaam se baahar ja raha hai. Phir main hi dene aaunga."

"jo bhi ho paise to tumhe lene hi padenge. Bataao kitne huve?"

"aap itna kah rahi hain to 100 de dijiye."

100 mujhe jyada lage magar phir bhi maine turant use purse se nikaal kar de

diye.

Magar jaate jaate vo kuch ajeeb bol gaya.

"madam ji mere liye ladki dhundi ja rahi hai. Kaash aapke jaisi ladki mujhe mil

jaaye."

main use dekhti rah gayi aur bina kuch kahe ghar ki taraf chal di. Maine peeche

mud kar dekha to vo auto liye vahi khada tha. Kamina hilte huve mere nitambo ko

ghur raha tha.

ghar mein ghuste hi mujhe ek plan sujha. maine kitchen mein ek camera fit kar

diya taaki jab bhi chacha mujhe chhede uski kartoot camera mein record ho jaaye.

jaise hi main camera fit karke hati door bell baj uthi. maine darvaaja khola to

chacha mere saamne khada muskura raha tha.

"tum cinema se akeli bhaag aayi. hum saath aate to achha rahta. chalo koyi baat

nahi."

man to kar raha tha ki uske muh par darvaja patak dun aur use ghar mein na

ghusne dun par apne plan ka khyaal aane par maine khud ko thaam liya.

main chupchap bina kuch kahe kitchen mein aa gayi aur camera on kar diya. plan

ke mutaabik mujhe kitchen mein hi rukna tha. mujhe pura yakin tha ki vo kitchen

mein aakar chhedkani jaroor karega. main kitchen ke chhote mote kaamon mein lag

gayi.

"gagan kab tak aayega nidhi?"

maine mud kar dekha to chacha kitchen ke darvaaje par khada tha.

 
बिन बुलाया मेहमान-7

गतान्क से आगे……………………

"मुझे नही पता. उन्होने फोन नही किया. शायद देर हो जाएगी उन्हे आने में.

आप बैठिए मैं खाना तैयार करके आपको बुला लूँगी." मैने जानबूझ कर

शालीनता से जवाब दिया क्योंकि सब कुछ रेकॉर्ड हो रहा था और ये रेकॉर्डिंग

मुझे गगन को दिखानी थी.

मैं वापिस अपने काम में लग गयी. मैं आलू काट रही थी. अचानक मुझे

चाचा के कदम अंदर की और आते महसूस हुए तो मेरे दिल की धड़कन तेज हो

गयी. मेरे पूरे शरीर में अजीब सी हलचल होने लगी.

"बस अब ये मेरे नितंबो को छुएगा और सब कुछ रेकॉर्ड हो जाएगा. जैसे ही ये

मेरे नितंबो को छुएगा मैं घूम कर इसे चाँटा मारूँगी. फिर ये और ज़्यादा

बदतमीज़ी करेगा तो सब कुछ रेकॉर्ड होता जाएगा." मैं एक साथ बहुत सारी

बाते सोच रही थी. मगर जैसा मैं सोच रही थी वैसा कुछ नही हुआ. वो

पानी पी कर चुपचाप बिना कुछ कहे किचन से बाहर चला गया.

मैं असमंजस में पड़ गयी कि आख़िर उसने मुझे छेड़ा क्यों नही.

गगन रात को 12 बजे वापिस आए. इस दौरान मैने कयि बार किचन में

चक्कर लगाए पर चाचा ने कोई ऐसी वैसी हरकत नही की.

अगले दिन मैने कॅमरा ड्रॉयिंग रूम में फिट कर दिया. गगन के जाने के बाद

मैं मॅग्ज़िमम बाहर ही घूमती रही. चाचा मुझे घूरता था मगर मुझे छेड़ने की कॉसिश नही करता था. मुझे समझ नही आ रहा था कि हो क्या रहा है.

मुझे ये भी लगा कि कही उसे मेरे प्लान का पता तो नही चल गया. मैं उसे हर हाल में सबक सिखाना चाहती थी पर ना जाने क्यों वो जाल में फँस ही नही रहा था.

मैं दोपहर को बेडरूम में सोने की बजाए ड्रॉयिंग रूम में ही फॅमीना मॅग्जीन लेकर बैठ गयी. चाचा कुछ देर बाद अपने कमरे से निकला और टाय्लेट में घुस गया. मैं तुरंत उठ कर खिड़की पर आकर खड़ी हो गयी और बाहर देखने का नाटक करने लगी. चाचा कुछ देर बाद टाय्लेट से निकला और सोफे पर आकर बैठ गया. उसने फॅमीना मगज़ीन उठा ली. अब मुझे कुछ ना कुछ होने की आसंका होने लगी थी. मेरे दिमाग़ में कल्पना के घोड़े दौड़ने लगे थे.

मैं सोच रही थी कि अभी चाचा उठेगा और मेरे नितंबो को थाम कर उन्हे मसल्ने लगेगा और मेरे नितंबो के बीच में उंगली भी डालेगा ताकि मेरे छिद्र को अच्छे से रगड़ सके. ये सब ख्याल आते ही मेरी योनि नम हो गयी. जब मुझे मेरी जाँघो में गीला गीला महसूस हुआ तब मुझे अहसास हुआ कि मैं कितनी बेहूदा बाते सोच रही हूँ. मैं हैरान थी कि चाचा की हरकतों को सोच कर ही मेरी योनि गीली हो गयी थी. मैं खुद को कोसने लगी कि मैं कैसे इस देहाती के बारे में सोच कर उत्तेजित हो सकती हूँ.

मैने पीछे मूड कर देखा तो पाया कि चाचा मॅग्जीन में खोया था. वो पन्ने पलट पलट कर बड़े गौर से हर पेज को देख रहा था. अचानक उसने मगजीन टेबल पर वापिस रख दी. मैने तुरंत अपनी गर्दन खिड़की की तरफ घुमा ली.

"अब ये उठेगा और मेरे नितंबो को दोनो हाथो में थाम लेगा और सब कुछ कॅमरा में रेकॉर्ड हो जाएगा. आज इसकी खैर नही."

चाचा उठ कर मेरे पीछे आ गया और बोला, "क्या देख रही हो बाहर निधि बेटी."

मैने कोई जवाब नही दिया और अपनी आँखे बंद कर ली. मेरी टांगे काँपने लगी थी और मेरी योनि फिर से पानी छोड़ने लगी थी. ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं चाचा के हाथो की छुअन के लिए मरी जा रही हूँ.

"क्या हुआ निधि बेटी. तुम कुछ परेशान सी हो." चाचा ने पूछा.

"आप क्यों कर रहे हैं ये सब मेरे साथ" मैने चिल्ला कर कहा.

"अब तो मैं कुछ भी नही कर रहा. अब क्या दिक्कत है तुम्हे?" चाचा ने बहुत धीरे से कहा और कह कर अपने कमरे में चला गया. मैं ठगी सी उसे जाते हुए देखती रही.चाचा के जाने के बाद मैं कॅमरा ऑफ करके ड्रॉयिंग से अपने बेडरूम में आ गयी. मुझे समझ में नही आ रहा था कि आख़िर चाचा ने अचानक मेरे साथ छेड़खानी करनी क्यों बंद कर दी. मुझे बार बार यही लग रहा था कि उसे मेरे प्लान की भनक लग गयी है. हो सकता है उसने कॅमरा लगा देख लिया हो. पर मुझे ये भी लग रहा था कि उस देहाती को कॅमरा के बारे में जानकारी कहाँ होगी.

 
लेकिन सबसे बड़ी बात मुझे ये परेशान कर रही थी कि ड्रॉयिंग रूम में चाचा की छेड़खानी को सोचने भर से ही मेरी योनि नाम हो गयी थी. ऐसा क्यों हुआ मुझे समझ में नही आ रहा था. अचानक मुझे ख्याल आया.

"क्या मुझे उसकी छेड़खानी पसंद आने लगी है. हाउ डिज़्गस्टिंग... ऐसा नही हो सकता. कहाँ वो बदसूरत देहाती और कहाँ मैं." मैं बोखला उठी. मैने मन ही मन ठान लिया की गगन के सामने हर हाल में उसका पर्दाफाश करके रहूंगी. मैं इन विचारो में खोई थी कि दरवाजे पर दस्तक हुई.

"आज फिर ये चाय माँगेगा. दे देती हूँ इसे चाय. क्या पता ये मेरे जाल में फँस जाए." सोचते हुए मैने अपने बेडरूम का दरवाजा खोला.

"बेटी मेरे लिए एक कप चाय बना दोगि." चाचा ने कहा.

"जी हां बिल्कुल आप ड्रॉयिंग रूम में बैठिए मैं अभी चाय लेकर आती हूँ."मैने जान बुझ कर उसे ड्रॉयिंग रूम में बैठने को बोल दिया.

"ठीक है निधि बेटी." वो हंसता हुआ वहाँ से चला गया.

किचन में जाते वक्त उसे टाय्लेट में जाते देखा तो मैने तुरंत कॅमरा ऑन कर दिया और फुर्ती से किचन में घुस्स गयी ताकि उसे शक ना हो. चाय बना कर मैं ड्रॉयिंग रूम में आई तो चाचा सोफे पर बैठा फॅमीना मगजीन लिए बैठा था. वो लॅडीस अंडरगार्मेंट्स की अड्वर्टाइज़्मेंट वाले पेज को खोले बैठा था. उसमे एक खूबसूरत मॉडेल सिर्फ़ ब्रा और पॅंटीस में एक पेड़ के सहारे खड़ी थी. चाचा उसके उभारों पर हाथ फेर रहा था. मैने बिना कुछ कहे चाचा की तरफ चाय बढ़ाते हुए कहा, "लीजिए चाचा जी चाय."क्योंकि सब रेकॉर्ड हो रहा था इसलिए मैं उसे कुछ ज़्यादा ही इज़्ज़त दे रही थी.

"कितनी सुंदर चुचियाँ हैं इस लड़की की. गान्ड भी एक दम मस्त है. मगर तुम्हारे आगे ये कुच्छ भी नही है. तुम्हारी चुचियाँ और गान्ड तो जबरदस्त हैं."

"आपको ऐसी बाते सोभा नही देती चाचा जी."मैने शालीनता से कहा

"जब से तुम्हारी गान्ड पकड़ कर मसली है तुम्हे तमीज़ आ गयी है. ऐसा ही होना चाहिए. हमेशा तमीज़ से बात करनी चाहिए तुम्हे."

"चाचा जी आपको मेरे साथ ऐसी बाते नही करनी चाहिए."

"कैसी बाते निधि बेटी हहेहहे." वो हंसते हुए बोला.

"आपको मेरे साथ ऐसा बर्ताव नही करना चाहिए."

"देखो तुम्हारे जैसा शरीर बहुत कम लड़कियों को मिलता है. इसका भरपूर आनंद लो. वक्त दुबारा नही आएगा. आओ मेरी गॉडी में बैठ जाओ और प्रेम से अपने अंगों को मेरे हाथों से मसलवाओ. तुम्हे भरपूर आनंद आएगा."

"चाचा जी ज़ुबान संभाल कर बात कीजिए. आप होश में तो हैं. आप अपने भतीजे की पत्नी से बात कर रहे हैं."

"छोड़ भी ये नाटक. तू भी खूब मज़े करती है मेरे साथ. सिनिमा के टाय्लेट में तूने बड़ी जल्दी अपना पानी छोड़ दिया था. ऐसा तभी होता है जब छोकरी मज़े लूटती है. मान ले मेरी बात तुझे मुझसे अपनी गान्ड और चूत मसलवाना अच्छा लगता है."

मैं ये सुनते ही आग बाबूला हो गयी.

"शट अप यू बस्टर्ड... ऐसा कुछ नही है. मैं कोई मज़े नही लूटती हूँ. शरम आनी चाहिए तुम्हे ऐसी बाते करते हुए."

"अगर मज़े नही लूटती हो तो फिर ये बताओ तुम्हारी चूत क्यों पानी बहा रही थी सिनिमा के टाय्लेट में"

"फ़िजूल की बाते मत करो देहाती ऐसा कुछ नही है जैसा तुम सोच रहे हो. एक तो यहाँ ज़बरदस्ती हमारे घर में घुस गये हो उपर से इतनी गिरी हुई हरकते करते हो."

चाचा ने फुर्ती से सोफे से उठ कर मेरा हाथ पकड़ लिया. मैने बहुत जद्दो जहद की पर फिर से उसने मेरा हाथ मरोड़ ही दिया.

"छोड़ो मेरा हाथ देहाती." मैं छटपटाते हुए बोली.

"चलो अभी देख लेते हैं कि तुम्हारी चूत पानी छोड़ती है कि नही." चाचा ने मेरे नितंबों को मसल्ते हुए कहा.

"ऐसा कुछ नही होगा...छोड़ो मेरा हाथ."

"देखने तो दो मेरी रानी."चाचा ने अब मेरी योनि पर हाथ रखते हुए कहा.

"हाथ हटा लो अपना."

"रूको तो मेरी रानी. आज तो ये और ज़्यादा गरम लग रही है. मेरा हाथ लगते ही फड्क रही है. तुम्हारी चूत को मेरे हाथो की छुअन अच्छी लगती है."

 
Back
Top