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बीवी को गैर मर्द से चुदवाने की मंशा

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लेखिका:-आलिया सन्नी

दोस्तो, मैं आलिया हूँ.. मेरी उम्र 25 साल है। मेरी शादी को अभी कुल 3 साल हुए हैं। शादी से पहले मैं एक छोटे से गाँव में रहती थी। शादी के बाद अहमदाबाद अपने शौहर के साथ रहने आई। यह अपनी सच्ची कहानी आपके सामने रख रही हूँ।

कहानी लिखने में मेरा साथ देने वाले मेरे रियल हीरो आनन्द के साथ की मेरी चुदाई की यह सच्ची कहानी है।

मेरे Cuckold शौहर सलीम को threesome का जो भूत चढ़ा था उसका नतीजा सलीम जो भी भुगत रहा हो.. वो भुगते.. लेकिन मुझे मेरा आनन्द मिल गया।

कैसे.. वो आप खुद ही पढ़ लीजिए..

तीन साल पहले की बात है.. जब मेरी शादी नहीं हुई थी। मैं अपने परिवार के साथ अहमदाबाद से करीब 100 किलोमीटर दूर एक छोटे से गाँव में रहती थी।

मुझसे छोटी मेरी और 2 बहनें हैं। मेरे उम्र 22 होने को थी.. पापा मेरी शादी के लिए लड़का ढूँढ रहे थे।

मुझे देखने 2-3 लड़के आकर भी गए.. लेकिन बात कुछ जमी नहीं।

फिर एक दूर के रिश्ते में से कोई आया और उन्होंने एक लड़का.. जो अहमदाबाद में रहता है.. उसके बारे में बताया।

पिताजी ने जाकर पहले उसके घर मिल कर आए।

उस लड़के का खुद का घर था और सरकारी नौकरी करता था, अहमदाबाद में अकेले रहता था।

उसके माँ और पापा उनके गाँव में रहते थे।

मेरे पिताजी को सब ठीक लगा.. तब उन्होंने उस लड़के को हमारे गाँव में मुझे देखने के लिए बुलाया।

लड़का अगले हफ्ते रविवार को आने वाला था।

रविवार के दिन मैं सुबह से तैयार होने लग गई.. मेरा कद 5’5″ है.. मैं दिखने में गोरी और खूबसूरत हूँ और मेरा फिगर 34-28-36 है।

हमारे गाँव में सबसे खूबसूरत लड़की मैं ही हूँ।

मैं भी हमेशा सपने देखती थी कि मेरी शादी किसी राजकुमार से होगी।

तब मुझे पता नहीं था आगे क्या होने वाला है।

मैं बहुत अच्छे से मेकअप करके तैयार हुई… गुलाबी रंग का सलवार कमीज़ पहन कर आईने में देख कर खुद पर गर्व महसूस होने लगा।

सुबह के 11 बजे वो लोग आए… मैं अपनी छोटी बहनों के साथ रसोई में थी।

माँ ने मुझे बताया कि लड़का और उसकी माँ आए हैं।

कुछ देर बाद मैं चाय लेकर बाहर गई… सब को चाय दी और सामने कुर्सी पर बैठ गई और डरते हुए लड़के की ओर देखा।

उसे देख कर मुझे धक्का सा लगा.. लड़का दिखने में खास नहीं था।

उसका सांवला रंग और चेहरा ज़रा भी अच्छा नहीं था।

मैंने झट से नजरें झुका लीं और मन ही मन में सोचने लगी कि मैं इस लड़के को पसंद नहीं करूँगी.. ना ही इसके साथ शादी करूँगी।

फिर मेरे पापा ने एक-दूसरे से पहचान करा दी।

मैंने देखा.. लड़का मुझे घूर रहा था, मुझे उसकी नज़र भी अच्छी नहीं लगी।

फिर मैं अन्दर चली गई.. कुछ देर बाद मुझे वापिस बाहर बुलाया गया।

उस लड़के की माँ ने मुझसे कुछ सवाल किए… फिर लड़के ने भी मुझसे पूछा- क्या पढ़ी-लिखी हैं.. खाना बनाना आता है या नहीं?

फिर नाश्ता वगैरह करने के बाद वे चले गए।

तब मेरी जान में जान आई।

उनके जाते ही मैं माँ से बोली- मुझे लड़का पसंद नहीं है और मैं उसके साथ शादी नहीं करूँगी।

माँ कुछ नहीं बोली… लेकिन मेरी किस्मत खराब थी।

दो दिन बाद उनका मैसेज आया कि उन्हें लड़की पसंद है.. आगे की बात करने दो दिन में आ रहे हैं।

मैं तो रोने लगी… मैंने पापा से कहा- मुझे नहीं करनी शादी..

लेकिन पापा बोले- उस लड़के की सरकारी नौकरी है और अहमदाबाद में खुद का घर है.. ऐसा लड़का फिर नहीं मिलेगा।

लेकिन मैं नहीं मानी… 2 दिन तक रोती रही।

माँ ने भी मुझे समझाया कि तेरे पीछे तेरी 2 बहनें भी शादी के लिए हैं। तू ऐसे करती रही तो उनका क्या होगा.? और तुम्हें लड़का कैसा दिखता है.. तू उस पर मत जा… लड़का गुणों में कैसा है वो देख…

मैं कुछ नहीं बोली… उस वक़्त मुझे मेरे सपने चकनाचूर होते दिखाए दिए।

अगले 2 दिन बाद उन की तरफ से कुछ लोग आए और शादी के बारे में बातचीत की.. और शादी की तारीख भी तय हो गई।

अब मेरे हाथ मे उसके साथ शादी करने के सिवाय कुछ नहीं बचा था।

मुझे अब ज़रा भी उम्मीद नहीं थी कि ये शादी टूट पाएगी।

अब शादी के लिए मैंने भी अपना मन बना लिया, मेरे पास कोई चारा भी नहीं था।

शादी का दिन आ गया… अहमदाबाद में एक बड़े से हॉल में शादी थी।

मेरे शौहर का नाम सलीम था। शादी में सलीम के 12-13 दोस्त और काफ़ी रिलेटिव थे।

मैं दुल्हन बन कर पूरी तरह सज चुकी थी। मैंने अच्छा साज़-श्रृंगार किया था… फिर शादी हो गई.. और सब दोस्त लोग.. सलीम और मुझसे मिलने स्टेज पर आने लगे।

उनमें से एक दोस्त स्टेज पर मिलने आया.. तब धीरे से सलीम के कान में बोला- तूने क्या मस्त माल ढूँढा है यार..

सलीम बोला- गाँव से गँवारन माल लेकर आया हूँ।

उनकी बातें सुन कर मैं हैरान रह गई।

एक शौहर अपनी पत्नी के बारे में ऐसे बातें कर रहा है.. जिससे शादी हुए अभी एक घंटा भी नहीं हुआ।

पता नहीं मेरे नसीब में आगे क्या-क्या लिखा है।

सब से मिलने के बाद खाना खाने बैठे।

खाना खाते वक़्त सलीम ने मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर ज़ोर से दबाया और एक आँख मारी।

मैं शर्मा कर कहीं और देखने लगी।

सब प्रोग्राम पूरे होने के बाद हम शादी के हॉल से निकले और सलीम के घर पहुँचे।

मैंने देखा वो एक दो कमरे और रसोई वाला फ्लैट था।

छोटा सा हॉल और रसोई थी।

उस दिन घर पर बहुत मेहमान थे। रात में सबको सोने को ठीक से जगह नहीं थी।

करीब सब मेहमान चले गए.. अंत में 3 दिन बाद मेरे सास और ससुर भी चले गए।

सलीम उनको बस स्टॉप पर छोड़ने गया।

तब दिन के 3 बजे थे.. मैं रसोई में साफ़-सफाई करने लग गई।

एक घंटे बाद सलीम घर आया… अन्दर आते ही सलीम ने मुझे दबोच लिया और पागलों के जैसे चूमने लगा।

सलीम के होंठ बहुत मोटे थे.. वो मेरे होंठों को चूसने लगा।

एक हाथ से मेरे दायें मम्मे को दबाने लगा.. मानो उसके दिमाग़ में शैतान घुस गया हो.. ऐसे पागलों जैसे मुझे दबाने लगा।

लगभग 15 मिनट तक मेरी समझ में नहीं आ रहा था.. कि क्या हो रहा है।

कुछ देर में मुझे महसूस हुआ कि सलीम ने मेरी सलवार निकाल दी है और कमीज़ भी उतार फेंका।

वैसे ही मुझे नीचे लिटाया और मेरे ऊपर आकर एक जानवर जैसे मुझे दबोचने लगा।

मैंने उससे कहा- प्लीज़ धीरे करो.. मुझे दर्द हो रहा है।

तो बोला- आज हमारी सुहागरात है.. सुहागरात में तो दर्द होता ही है।

फिर उसने मेरी ब्रा एक झटके में खींची और दोनों मम्मों को देख कर मुझे उसकी आँखों में एक अलग सी चमक दिखी।

फिर उसने ज़ोर से मेरे रसीले आमों को दबाना शुरू किया.. दबाना क्या.. निचोड़ना शुरू किया।

वैसे भी हमारे शौहर गंदे होते हैं, पूरे जिस्म से बास आती हैं, और गंदे दाँत होते हैं.. जो मुझे पसंद नहीं है।

मैं दर्द के मारे चीख रही थी।

कुछ देर में उसने मुझे पूरी तरह नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया।

उसका काला-कलूटा लंड देख कर मैं डर गई।

वो मेरे मुँह के पास अपना लंड लेकर आया और मुझे चूसने को कहा.. मैंने मना किया, फिर भी वो ज़बरदस्ती मुँह में डालने लगा।

उसके लंड से मुझे बड़ी दुर्गन्ध आ रही थी।

मैंने मेरा सिर घुमा दिया लेकिन उसने मेरे बाल खींच कर ज़बरदस्ती मेरे मुँह में दिया और चूसने को कहा.. मैं मजबूर थी।

सुहागरात ऐसी होती क्या.. मैं ये सोचने लगी।

मेरी इस सच्ची घटना पर आप सभी के सभ्य भाषा में विचारों का स्वागत है।

कहानी आगे जारी रहेगी

 
मैं दर्द के मारे चीख रही थी।

कुछ देर में उसने मुझे पूरी तरह नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया।

उसका काला-कलूटा लंड देख कर मैं डर गई।

वो मेरे मुँह के पास अपना लंड लेकर आया और मुझे चूसने को कहा.. मैंने मना किया, फिर भी वो ज़बरदस्ती मुँह में डालने लगा।

उसके लंड से मुझे बड़ी दुर्गन्ध आ रही थी।

मैंने मेरा सिर घुमा दिया लेकिन उसने मेरे बाल खींच कर ज़बरदस्ती मेरे मुँह में दिया और चूसने को कहा.. मैं मजबूर थी।

सुहागरात ऐसी होती क्या.. मैं ये सोचने लगी।

लगभग 5 मिनट चूसने के बाद उसका पानी मेरे मुँह में ही निकल गया।

वैसे मैं बाथरूम में भागी और मुँह साफ़ किया।

अब मेरा बाहर जाने को मन नहीं था.. मैं बाथरूम में ही रुकी रही।

मेरे शौहर बाथरूम में आए और वो फिर मुझे दबोचने लगा।

कुछ देर बाद हम वापिस हॉल में आ गए और उसने मुझे वापिस से लंड चूसने को कहा।

मेरा मन नहीं कर रहा था.. लेकिन मैं कुछ बोली नहीं और चूसने लगी।

कुछ देर में वो वापिस मूड में आ गया.. फिर उसने मुझे सीधा लिटा कर मेरे ऊपर आया और मेरी चूत पर लंड रख कर एक ज़ोर का धक्का दिया।

मैं ज़ोर से चीख पड़ी.. उसने मेरे मुँह में मुँह डाल दिया और मुझे बड़ी बेरहमी से चोदने लगा।

मुझे बहुत दर्द होने लगा.. लेकिन 5 मिनट बाद मुझे अच्छा लगने लगा.. अब मेरी चूत में से कुछ पानी निकलने लगा इसलिए दर्द भी कुछ कम हो गया और अच्छा भी लगने लगा।

मैंने भी अब ज़ोर से मेरे शौहर को पकड़ लिया और उसकी चूमा-चाटी का जबाव देने लगी।

अभी मेरी मस्ती शुरू ही हुई थी कि तब सलीम ने 3-4 ज़ोर के झटके दिए और मेरी चूत में पानी निकाल दिया और मेरे बदन पर ही गिर गया।

मेरी संतुष्टि हुई ही नहीं.. अभी कहाँ मैं गरम ही हुई थी और उसने पानी निकाल दिया.. मैं तड़पती रही।

कुछ देर बाद उसने मेरी चूत में से लंड निकाला तो उसमें खून लगा हुआ था और मेरी चूत में से भी खून बह रहा था।

मैं डर गई.. लेकिन शौहर खून देख कर हँसने लगा और इतना ही बोला- उम्मीद नहीं थी मुझे.. कि तुम वर्जिन मिलोगी..

मैं उस वक़्त उसकी बात समझी ही नहीं। दिन में ही हमारी सुहागरात हो गई थी। उस रात को उसने मुझे 4 बार चोदा।

दूसरे दिन सलीम काम पर चला गया…

घर पर मैं अकेली थी।

घर में एक छोटा टीवी था और कंप्यूटर… मैं टीवी देखती रही.. दोपहर में सो गई।

शाम को सलीम मेरे लिए कुछ कपड़े ले आया।

मैंने देखा 2-3 छोटी-छोटी ड्रेस थीं और एक पारदर्शी नाइट-गाउन था।

कपड़े देख कर ही मुझे शरम आई.. फिर भी उन्होंने मुझे पहनने को कहा।

उस रात में उसने फिर मेरा साथ जी भर के चुदाई की।

दूसरे दिन मुझे वो छोटा सा पारदर्शी नाइट-गाउन पहनने को कहा और बोले- दिन भर इसी गाउन में रहना।

वो काम पर चले गए… मैं दिन भर उसी गाउन में थी…

मुझे शरम आ रही थी क्योंकि उस गाउन में से मेरा बदन साफ-साफ दिखाई दे रहा था।

शाम को दरवाजे की घन्टी बज़ी.. मैंने दरवाजा खोला तो देखा.. मेरे शौहर और उसके 3 दोस्त साथ में आए हैं।

मैं शरमा कर जल्दी से रसोई में चली गई।

मुझे उम्मीद ही नहीं थी कि शौहर अपने साथ किसी को लेकर घर पर आएंगे.. नहीं तो मैं दूसरे कपड़े पहन लेती।

दोस्तों को हॉल में बिठा कर सलीम रसोई में आए और मुझसे कहा- मेरे दोस्तों के लिए पानी लेकर आओ।

मैंने कहा- आप ही लेकर जाओ.. मैं इस नाइट-गाउन में हूँ।

सलीम मुझ पर गुस्सा हुए और बोले- पहली बार मेरे दोस्त घर आए हैं.. जितना कहा उतना सुन..

वो बाहर चले गए… मैंने ट्रे में पानी के 3 गिलास लिए और शरमाते हुए हॉल में आई.. सबको पानी दिया और अन्दर जाने लगी।

तभी सलीम मुझसे बोले- यहीं पर बैठो.. मुझे इनसे तुम्हारी पहचान करानी है।

मैं शरमाते हुए सामने एक कुर्सी पर बैठी, मेरे दोनों टाँगें और जांघें खुली थीं.. वो बहुत छोटी सी नाईटी थी। सब दोस्त मुझे घूरने लगे।

उस नाइट गाउन में से मेरा पूरा बदन साफ़ दिखाई दे रहा था।

सब मुझे भूखे भेड़िए के जैसे घूर रहे थे।

मैं शरमा कर नीचे देखने लगी…

फिर मैंने सबको चाय दी। मेरा मन कर रहा था कि नाईटी चेंज कर लूँ.. लेकिन मेरे सब कपड़े उसी हॉल में थे और हॉल में सब बैठे थे।

फिर सलीम ने मुझे वापिस बाहर बुलाया.. एक दोस्त बोला- भाभी.. सच में तुम सेक्सी और हॉट हो..

मैंने शरमा कर नजरें झुका लीं।

दूसरा दोस्त मेरे शौहर से बोला- यार तू तो पूरी रात मेरी भाभी को सोने नहीं देता होगा.. रात भर बिस्तर गरम करता होगा..

सब हँसने लगे… मैं शरमा कर पानी-पानी हो गई।

कुछ देर बाद सब चले गए और सलीम ने मुझे पकड़ कर मेरे साथ ज़बरदस्ती चुदाई की..

चुदाई करते वक़्त वो मुझसे बोला- डार्लिंग.. तूने आज तो मेरे सब दोस्तों के लंड खड़े कर दिए।

 
यह बात सुन कर मुझे अच्छी नहीं लगी, कोई पत्नी नहीं चाहेगी कि उसका शौहर पत्नी के बारे में ऐसी बात करे।

मैं चुप रही।

खाना खाने के बाद सलीम मुझसे बोला- चलो तुमको कंप्यूटर सिखाता हूँ।

फिर मुझे कंप्यूटर के बारे में सब बताया.. और 4-5 दिन में मैं सीख गई।

अब शादी हुए 20 दिन हो गए थे।

रोज का रूटीन यही थी…

दिन भर टीवी.. रात में बिस्तर पर शौहर के साथ चुदाई.. कभी-कभी सलीम रात में मुझे इंटरनेट पर पॉर्न पिक्स और वीडियो क्लिप दिखाता था।

सब क्लिप गंदी ही होती थीं।

फिर कभी-कभी रात में चैट करता था। शुरू में याहू चैट क्या है.. मुझे नहीं पता था।

बाद में धीरे-धीरे सब समझने लगी.. चैट क्या होती है।

एक दिन वो मुझसे बोला- चलो तुमको छुट्टी के दिन ‘कांकरिया लेक’ दिखा कर लाता हूँ।

मैं भी खुश हो गई.. शादी के बाद पहली बार शौहर के साथ कहीं बाहर निकल रही थी।

अहमदाबाद देखने का भी एक सपना था मैंने उस दिन साड़ी पहनी थी।

रास्ते में सिटी बस में काफ़ी भीड़ थी.. मैं पूरी तरह दब गई।

साँसें लेने को जगह नहीं थी.. 3-4 मर्दो ने मुझे ऐसे दबोचा कि मैं डर गई..

करीब 30 मिनट तक उस भीड़ में कोई ना कोई मर्द.. मेरे बदन को छू रहा था तो कोई मौके का फ़ायदा लेकर मेरे मम्मों को दबा रहा था।

मुझे भीड़ में एक आवाज़ सुनाई दी- क्या माल है यार सन्नी.. और उसका शौहर देख कैसा सड़ा हुआ है.. लंगूर के हाथ अंगूर..

फिर दोनों हँसने लगे।

मैंने देखा सलीम ने भी वो बात सुनी लेकिन चुप था।

अंत में स्टेशन आया तब कुछ चैन हुआ।

फिर ‘कांकरिया लेक’ देखा और बहुत सारी जगह घूमी। शाम को हम लोग माणेक चौक गए.. रात में 11 बजे घर पहुँचे।

उस रात को सलीम ने मुझे चैट करना सिखाया.. याहू पर मेरी भी एक आईडी बना दी।

दो दिन बाद मुझसे मिलने मेरे माँ और पापा आए..

रात में सलीम भी आया, सबने बातें करते हुए खाना खाया।

खाना ख़ाकर माँ और पापा को भी हमारे बाजू में सोने के लिए जगह की.. गर्मी का मौसम था और AC हमारे कमरे में ही था।

लाइट बंद होने के 10 मिनट बाद सलीम ने मेरे बदन पर हाथ डाला।

मैंने झट से हटा दिया और कहा- प्लीज़ आज के दिन नहीं.. आज मम्मी-पापा हैं।

लेकिन वो कहाँ मानने वाला था, ज़बरदस्ती मुझे दबोचने लगा…15 मिनट में मुझे नंगा कर दिया और मेरे ऊपर आकर मुझे चोदने लगा।

अब मैं भी कंट्रोल खोने लगी थी… जैसे ही सलीम ने मेरी चूत में लंड डाल कर ज़ोर का धक्का मारा.. मैं चिल्ला पड़ी।

शौहर के कान में बोली- प्लीज़ ज़रा धीरे से…

लेकिन वो अपनी स्टाइल में मुझे चोद रहा था।

मुझे पता था.. माँ-पापा अभी सोए नहीं हैं.. मुझे बहुत शरम आने लगी।

लगभग 15 मिनट तक हमारी चुदाई चली, फिर सलीम सो गया.. मैं भी कुछ देर बाद सो गई।

दूसरे दिन माँ-पापा अपने गाँव चले गए।

रात को मैं सलीम पर बहुत गुस्सा हुई और कहा- कल मेरे माँ-पापा के सामने क्यों मेरे साथ सेक्स किया.. क्या आपको शरम नहीं आई?

सलीम बोला- डियर उन्होंने भी चुदाई की.. तब तू पैदा हुई ना.. इसमें शरम कैसी.. अच्छा है कि उन्होंने भी कल अपनी बेटी को चुदते हुए देखा।

उसकी बात सुन कर मैं और क्या बोलती…
 
दो दिन बाद रविवार था, सलीम घर पर ही था… नाश्ता होने के बाद बोला- चलो नेट पर चैट करते हैं.. तू साथ में रुक।

उन्होंने लॉग-इन करने के बाद याहू चैट रूम में एंटर किया और पेज पर बड़े फ़ॉन्ट में मैसेज लिखा- एनी वन इंटरेसटेड फॉर threesome.. कपल हियर..

मैं उस वक़्त उसका मतलब कुछ नहीं समझी.. उस वक़्त बहुत सारे रिप्लाई आए।

सब अपनी-अपनी ASL बताने लगे। फिर सलीम ने हम दोनों की उम्र बताई। उनकी चैट शुरू हुई.. तीन से चैट करते वक़्त वे सब मेरे बारे मे पूछने लगे। मेरी लम्बाई.. फिगर.. कैसी दिखती हूँ?

मैं ये सब बातें पढ़ कर कन्फ्यूज़ हो गई।

फिर कुछ देर में सलीम ने मेरी पिक उनको फोटो शेयर में दिखाई।

मेरे पिक देख कर सबका तुरन्त रिप्लाई आया- वाउ.. सेक्सी.. माल है.. एक्सीलेंट…

ऐसे बहुत सारे भद्दे कमेंट्स पढ़ कर मुझसे रहा नहीं गया।

मैंने सलीम से पूछा- ये सब क्या हो रहा है?

वो हँसने लगा और मुझसे बोला- डियर तेरे लिए एक अच्छा मर्द ढूँढ़ रहा हूँ। threesome के लिए।

मैं बोली- ये threesome क्या है?

वो बोला- मेरे सामने कोई और मर्द तेरे साथ चुदाई करेगा और मैं मज़े से देखूँगा।

मैं यह सुन कर गुस्सा हो गई और बोली- छि:.. क्या तुमको शरम नहीं आती है अपनी पत्नी के बारे में ऐसी बातें करने में.. बंद कर दो ये तमाशा…

मैं वहाँ से रसोई में चली गई लेकिन मन ही मन सोचने लगी कि ये कैसा मेरा शौहर है जो अपनी पत्नी के बारे में ऐसे गंदी बात सोचता है।

मेरा दिमाग़ कुछ काम नहीं कर रहा था।

दोपहर में खाना खाते वक़्त हम कुछ नहीं बोले।

खाना ख़ाकर सलीम ने मेरे साथ अपनी हवस पूरी की।

मैं सोने चली गई और वो फिर से नेट पर चैट करने लगा।

शाम को चाय पीने के बाद वो मुझसे बोला- डियर.. 2 लोग मिले हैं.. मुझे वे अच्छे लगे.. रात में दोनों कैम पर आने वाले हैं.. तुम भी देख कर पसंद कर लो.. दोनों में से एक के साथ तुमको मेरे सामने चुदाई करना है।

यह सुन कर मैं गुस्सा हो गई और बोली- मुझे कुछ नहीं करना.. ये सब.. मुझसे ऐसी बातें करो भी मत..

तब सलीम मेरे पास आया और मुझे एक गाली दी और मुझसे बोला- कुतिया.. तेरा शौहर हूँ मैं.. जो चाहूँ कर सकता हूँ.. मेरी बात नहीं मानी तो अपने मायके में जाकर अपनी माँ चुदा.. मैं तुझे अपने पास नहीं रखूँगा।

इतना कह कर वो बाहर चला गया… उसकी बात सुन कर मेरी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा।

उसने मुझे इतनी ज़ोर से डांटा था.. कि मेरे चेहरे पर उसका भय छा गया था।

मैं बहुत देर तक रोती रही।

मैं सपने में भी सोच नहीं सकती थी कि मेरा अपना शौहर मेरे बारे में ऐसा सोच रहा है..

रात में 10 बजे वो घर आया उसने शराब पी हुई थी।

उसने घर आकर मुझे फिर से मारा और गंदी-गंदी गालियाँ दीं।

मैं रोती रही.. चीखती रही लेकिन उसको मुझ पर तरस नहीं आया।

बस इतना ही कह रहा था- तुझे मेरे सामने दूसरे मर्द से चुदाई करना है।

अंत में मैं रोते-रोते उससे बोली- प्लीज़ मुझे और मत सताओ.. आप जैसा चाहो मैं सब करूँगी।

मेरी बात सुन कर उसकी आँखों में एक अलग सी चमक आ गई।

मैं नीचे ज़मीन पर पड़ी थी।

वैसे ही मेरे ऊपर आकर उसने मेरे साथ चुदाई की और बोला- जल्दी ही उसकी फेंटेसी पूरी होने वाली है..

अगले दिन उसके ऑफिस जाने के बाद मैं नहाने गई।

मेरा पूरा बदन दर्द कर रहा था.. मुझे उन्होंने बहुत मसला था।

मैंने दोपहर में ठीक से खाना भी नहीं खाया।

रात में शौहर घर आए तब बहुत खुश लग रहे थे।

खाना ख़ाकर नेट पर आए और मुझे भी पास बुलाया और चैट करने लगे।

चैट पर उनको आज भी 3-4 लोग मिले.. सब मेरे बारे में गंदे-गंदे सवाल करने लगे और वो सबको जवाब भी दे रहे थे।

फिर सब को मेरे पिक दिखाए… मेरे पिक देख कर सब ‘आहें’ भरने लगे और मेरे बारे में गंदी-गंदी बातें बकने लगे।

मुझे वो सब पढ़ कर शरम आने लगी थी।

फिर सलीम ने उनको कैम पर आने को कहा।

दो लोगों के पास कैम था.. एक के पास नहीं था। पहला जो कैम पर आया उसकी उम्र शायद 24-25 थी… वो देखने में ठीक था और सिंपल सा दिख रहा था।

दूसरे लड़के की उम्र 22-23 रही होगी.. वो दिखने में क्यूट था और हैंडसम भी था। उसका नाम रेहान था… सलीम ने उसका मोबाइल नंबर लिया और फिर उसको फोन लगाया।

सलीम और रेहान ने कुछ देर बात की फिर सलीम ने मेरे हाथ में मोबाइल दे दिया और बात करने को कहा।

मैं डर गई लेकिन सलीम मेरी तरफ गुस्से से देखने लगे.. फिर मैं उससे बात करने लगी।

मैं- हाय…

रेहान- हाय डियर.. कैसी हो..

मैं- ठीक हूँ.. आप कैसे हो?

रेहान- मैं भी ठीक हूँ डियर… तुम फोटो में मुझे बहुत सेक्सी लग रही हो… जब मिलेंगे.. तब हम बहुत मस्ती करेंगे।

मैं चुप रही..

रेहान- तुम अपनी फिगर बताओ ना.. डियर..

मैं मौन..

रेहान- अरे शरमाओ नहीं डियर, तुम्हारे शौहर चाहते हैं.. मैं तुम्हारे साथ सेक्स करूँ..

मैं- बाय..

मैंने मोबाइल उनके पास दे दिया।

कुछ देर दोनों ने बात की.. फिर फोन रख दिया और हम सोने आ गए। आज सलीम मेरे साथ चुदाई करते वक्त बहुत उत्तेजित थे।

चुदाई करते वक़्त बार-बार रेहान की बातें निकाल रहे थे और मुझे भी उत्तेजित करने लगे।

रेहान तेरे साथ ऐसा करेगा.. वैसा करेगा कह रहे थे.. और रेहान की कल्पना करके उनका आज जल्दी ही पानी निकल गया।

पता नहीं लेकिन मेरे सामने भी रेहान बार-बार आने लगा, मुझे भी उसका क्यूट फेस याद आने लगा।

अगले दिन भी हमारी फिर से चैट हुई… आज मैंने 10 मिनट तक रेहान से बात की.. मेरा थोड़ा डर कम हुआ था।

फिर रेहान ने सलीम से बात की और पूछा- कब मिलना है?

सलीम ने कहा- अगले हफ्ते में प्लान बनाते हैं।

दो दिन के बाद रात में ऐसे ही सलीम चैट पर थे.. मैं उनके पास थी।

चैट रूम में सलीम को एक आदमी मिला।

उसने अपना नाम आनन्द बताया।

कुछ देर चैट हुई.. उसने अपनी उम्र 35 बताई और अहमदाबाद का ही रहने वाला बताया।

उसने कहा- मेरा पत्नी से तलाक़ हुआ है और अब अकेला ही घर पर रहता हूँ।

सलीम ने कास्ट पूछी तो बोला- हिंदू हूँ.. फिर सलीम ने कहा- आज देर हो गई है कल रात को चैट करते हैं.. कल तुम कैम पर आना।

सलीम ने उसको एड करके लॉग-ऑफ कर दिया और दूसरे दिन रात में 10 बजे हम ऑनलाइन आए।

पता नहीं लेकिन उसकी उम्र 35 सुन कर मुझे अच्छा नहीं लगा।

सलीम से कहा- रेहान से बात हुई है.. तो फिर आनन्द से क्यों चैट कर रहे हो?

तब सलीम बोले- चैट करने में क्या है? देखते हैं कैसा है..

मैं चुप रही.. कुछ देर में आनन्द भी चैट पर आया… दोनों की चैट शुरू हुई।

सलीम- आनन्द.. तुम्हारी पत्नी तुम्हारे साथ नहीं रहती हैं?

आनन्द- नहीं.. तलाक़ दे दिया है।

सलीम- क्यों?

आनन्द- मेरा बड़ा लंड रोज-रोज सहन नहीं कर पा रही थी.. वो रंडी मुझसे तंग आकर अलग हो गई..

सलीम- सच में आनन्द.. इतना बड़ा लंड हैं तुम्हारा.. और इतना वाइल्ड सेक्स करते हो कि तुम्हारी बीवी उसे चूत में ले नहीं सकती थी।

आनन्द- खुद से क्या अपनी तारीफ करूँ.. तुम्हारी पत्नी को मेरे साथ लिटा कर देख लो.. पता चल जाएगा।

यह बात सुन कर मैं डर गई कि इंसान है या जानवर..

 
मैं चुप रही.. कुछ देर में आनन्द भी चैट पर आया… दोनों की चैट शुरू हुई

सलीम- आनन्द.. तुम्हारी पत्नी तुम्हारे साथ नहीं रहती हैं?

आनन्द- नहीं.. तलाक़ दे दिया है।

सलीम- क्यों?

आनन्द- मेरा बड़ा लंड रोज-रोज सहन नहीं कर पा रही थी.. वो रंडी मुझसे तंग आकर अलग हो गई..

सलीम- सच में आनन्द.. इतना बड़ा लंड हैं तुम्हारा.. और इतना वाइल्ड सेक्स करते हो कि तुम्हारी बीवी उसे चूत में ले नहीं सकती थी।

आनन्द- खुद से क्या अपनी तारीफ करूँ.. तुम्हारी पत्नी को मेरे साथ लिटा कर देख लो.. पता चल जाएगा।

ये बात सुन कर मैं डर गई कि इंसान है या जानवर..

फिर आगे उनकी चैट देखने लगी।

सलीम- मेरी तो फैंटेसी है आनन्द कि अपने सामने अपनी खूबसूरत पत्नी को तुम्हारे जैसे वाइल्ड इंसान से चुदवाऊँ।

आनन्द- फिर देर किस बात की है?

सलीम- आनन्द भाई… आप कैम पर आओ ना..

आनन्द- ओके.. दो मिनट प्लीज़।

फिर 2-3 मिनट में आनन्द का कैम शुरू होता है.. कैम पर मैंने देखा.. एक हट्टा-कट्टा जवान दिखाई दिया। उसका जिस्म भी सन्नी देओल जैसा मजबूत दिख रहा था।

हाँ.. चेहरा ज्यादा अच्छा नहीं था। ओमपुरी जैसा चेहरा था।

सलीम- आनन्द.. अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो क्या आप कैम पर अपना बड़ा लंड दिखा सकते हो?

आनन्द- क्यों नहीं?

अब आनन्द ने कैम की स्थिति ठीक की और पैन्ट में से उसका लंड बाहर निकाला। उसका हलब्बी लौड़ा देख कर मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं।

कम से कम 8 या 9 इंच का मोटा लंड था और पूरा काला नाग था। मेरी धड़कनें तेज हो गईं.. पहली बार शौहर के सामने दूसरे मर्द का लंड देख रही थी।

मैंने सलीम की तरफ देखा तो उसकी भी आँखें चमकने लगी थीं.. सलीम उसका लंड देख कर खुश हो गया।

तभी आनन्द ने कैम बंद कर दिया।

आनन्द- बोल साले.. कैसा लगा मेरा लंड?

आनन्द की बात सुन कर हम दोनों चौंक गए… आनन्द ने सलीम को साला बोला था।

अब उसकी बात करने का टोन ही बदल गया था।

सलीम- हाँ आनन्द.. सच में आपका लंड बड़ा है।

आनन्द- फिर मुझसे कब चुदा रहा.. अपनी रंडी पत्नी को..

मैं चौंक गई.. उसने मुझे रंडी कहा।

सलीम की तरफ देखा.. आनन्द ने मुझे रंडी बोला तो वो खुश लगा..

सलीम- हाँ आनन्द.. इसी हफ्ते में शनिवार या इतवार को प्रोग्राम करते हैं।

आनन्द- तू अपनी बीवी को शनिवार नाइट को मेरे पास लेकर आ.. साली को तेरे सामने पूरी रात चोदूँगा।

अब मुझे आनन्द की भाषा अच्छी नहीं लग रही थी।

सलीम- हाँ आनन्द.. शनिवार नाइट अच्छा रहेगा।

आनन्द- उस रात तेरे बीवी क्या पहनेगी?

सलीम- कोई अच्छी से सेक्सी ड्रेस में लेकर आता हूँ।

आनन्द- नहीं.. मुझे तेरे बीवी शादी के जोड़े में चाहिए.. तेरी शादी हुई.. तब तेरी बीवी ने जो दुल्हन का जोड़ा पहन था… उसी में लेकर आ.. तू उस साली को..

सलीम- जैसा आप कहो आनन्द भाई.. आपके सामने अपनी पत्नी को मैं दुल्हन बना कर लाऊँगा..

आनन्द- हाँ.. पूरी तरह से दुल्हन लगनी चाहिए.. मुझे उसके साथ सुहागरात जो मनानी है।

सलीम- ओके सर.. लेकिन एक शर्त है आनन्द..

आनन्द- क्या.. बोल..

सलीम- आपको मेरी जोरू के साथ कन्डोम में ही चुदाई करनी होगी।

आनन्द- साले मादरचोद.. पहले लेकर तो आ तू उस रंडी को.. फिर देखते हैं..

सलीम- ठीक है.. शनिवार नाइट लेकर आता हूँ।

फिर दोनों ने अपने-अपने मोबाइल नम्बर लिए और दिए।

सलीम ने नेट बंद किया और हम कमरे में आ गए।

मैंने उनको कहा- सलीम.. मुझे यह आनन्द ठीक नहीं लग रहा है.. उस दिन रेहान से बात की.. वही लड़का ठीक है।

वो बोला- तुझे क्या समझ है.. आदमियों की.. उस रेहान में क्या है.. 22-23 साल का लड़का है.. उसको चुदाई का कुछ अनुभव भी नहीं है.. इस आनन्द की उम्र 35 है और खेला-खाया भी है.. लंड भी बड़ा है.. तुझे आनन्द के साथ खूब मज़ा आएगा..

उनकी बात सुन कर मैं चुप रही..

आगे कुछ नहीं बोली..

उस रात में सलीम ने आनन्द को कल्पना में लेकर मेरे साथ चुदाई की.. और सो गया..

लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी।

मैं आनन्द के बारे में सोच रही थी… पता नहीं लेकिन मुझे बार-बार उसका लंड याद आने लगा।

लेकिन एक मन कह रहा था कि यह आनन्द अच्छा इंसान नहीं है.. हमको उसके घर नहीं जाना चाहिए… लेकिन मुझे यह भी पता था कि सलीम मेरी बात नहीं मानने वाला है।

बस यही सोचते-सोचते नींद आ गई।

सुबह 8 बजे नींद खुली… आज शुक्रवार था और कल शनिवार.. कल रात को हमको आनन्द के घर जाना था।

सोच कर ही मुझे डर लग रहा था… जैसे-तैसे कर के दिन निकल गया.. रात में खाना खाते वक़्त आनन्द का फोन आया कि नेट पर आ जाओ।

हम खाना ख़ाकर वापिस नेट पर आ गए।

आनन्द- हाय!

सलीम- हाय आनन्द..

आनन्द- तो कल लेके आ रहा ना तू.. तेरी रंडी बीवी को.. मेरे साथ चुदाने को..

सलीम- हाँ यार.. कल का पक्का है।

 
मैं चुप रही.. कुछ देर में आनन्द भी चैट पर आया… दोनों की चैट शुरू हुई

सलीम- आनन्द.. तुम्हारी पत्नी तुम्हारे साथ नहीं रहती हैं?

आनन्द- नहीं.. तलाक़ दे दिया है।

सलीम- क्यों?

आनन्द- मेरा बड़ा लंड रोज-रोज सहन नहीं कर पा रही थी.. वो रंडी मुझसे तंग आकर अलग हो गई..

सलीम- सच में आनन्द.. इतना बड़ा लंड हैं तुम्हारा.. और इतना वाइल्ड सेक्स करते हो कि तुम्हारी बीवी उसे चूत में ले नहीं सकती थी।

आनन्द- खुद से क्या अपनी तारीफ करूँ.. तुम्हारी पत्नी को मेरे साथ लिटा कर देख लो.. पता चल जाएगा।

ये बात सुन कर मैं डर गई कि इंसान है या जानवर..

फिर आगे उनकी चैट देखने लगी।

सलीम- मेरी तो फैंटेसी है आनन्द कि अपने सामने अपनी खूबसूरत पत्नी को तुम्हारे जैसे वाइल्ड इंसान से चुदवाऊँ।

आनन्द- फिर देर किस बात की है?

सलीम- आनन्द भाई… आप कैम पर आओ ना..

आनन्द- ओके.. दो मिनट प्लीज़।

फिर 2-3 मिनट में आनन्द का कैम शुरू होता है.. कैम पर मैंने देखा.. एक हट्टा-कट्टा जवान दिखाई दिया। उसका जिस्म भी सन्नी देओल जैसा मजबूत दिख रहा था।

हाँ.. चेहरा ज्यादा अच्छा नहीं था। ओमपुरी जैसा चेहरा था।

सलीम- आनन्द.. अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो क्या आप कैम पर अपना बड़ा लंड दिखा सकते हो?

आनन्द- क्यों नहीं?

अब आनन्द ने कैम की स्थिति ठीक की और पैन्ट में से उसका लंड बाहर निकाला। उसका हलब्बी लौड़ा देख कर मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं।

कम से कम 8 या 9 इंच का मोटा लंड था और पूरा काला नाग था। मेरी धड़कनें तेज हो गईं.. पहली बार शौहर के सामने दूसरे मर्द का लंड देख रही थी।

मैंने सलीम की तरफ देखा तो उसकी भी आँखें चमकने लगी थीं.. सलीम उसका लंड देख कर खुश हो गया।

तभी आनन्द ने कैम बंद कर दिया।

आनन्द- बोल साले.. कैसा लगा मेरा लंड?

आनन्द की बात सुन कर हम दोनों चौंक गए… आनन्द ने सलीम को साला बोला था।

अब उसकी बात करने का टोन ही बदल गया था।

सलीम- हाँ आनन्द.. सच में आपका लंड बड़ा है।

आनन्द- फिर मुझसे कब चुदा रहा.. अपनी रंडी पत्नी को..

मैं चौंक गई.. उसने मुझे रंडी कहा।

सलीम की तरफ देखा.. आनन्द ने मुझे रंडी बोला तो वो खुश लगा..

सलीम- हाँ आनन्द.. इसी हफ्ते में शनिवार या इतवार को प्रोग्राम करते हैं।

आनन्द- तू अपनी बीवी को शनिवार नाइट को मेरे पास लेकर आ.. साली को तेरे सामने पूरी रात चोदूँगा।

अब मुझे आनन्द की भाषा अच्छी नहीं लग रही थी।

सलीम- हाँ आनन्द.. शनिवार नाइट अच्छा रहेगा।

आनन्द- उस रात तेरे बीवी क्या पहनेगी?

सलीम- कोई अच्छी से सेक्सी ड्रेस में लेकर आता हूँ।

आनन्द- नहीं.. मुझे तेरे बीवी शादी के जोड़े में चाहिए.. तेरी शादी हुई.. तब तेरी बीवी ने जो दुल्हन का जोड़ा पहन था… उसी में लेकर आ.. तू उस साली को..

सलीम- जैसा आप कहो आनन्द भाई.. आपके सामने अपनी पत्नी को मैं दुल्हन बना कर लाऊँगा..

आनन्द- हाँ.. पूरी तरह से दुल्हन लगनी चाहिए.. मुझे उसके साथ सुहागरात जो मनानी है।

सलीम- ओके सर.. लेकिन एक शर्त है आनन्द..

आनन्द- क्या.. बोल..

सलीम- आपको मेरी जोरू के साथ कन्डोम में ही चुदाई करनी होगी।

आनन्द- साले मादरचोद.. पहले लेकर तो आ तू उस रंडी को.. फिर देखते हैं..

सलीम- ठीक है.. शनिवार नाइट लेकर आता हूँ।

फिर दोनों ने अपने-अपने मोबाइल नम्बर लिए और दिए।

सलीम ने नेट बंद किया और हम कमरे में आ गए।

मैंने उनको कहा- सलीम.. मुझे यह आनन्द ठीक नहीं लग रहा है.. उस दिन रेहान से बात की.. वही लड़का ठीक है।

वो बोला- तुझे क्या समझ है.. आदमियों की.. उस रेहान में क्या है.. 22-23 साल का लड़का है.. उसको चुदाई का कुछ अनुभव भी नहीं है.. इस आनन्द की उम्र 35 है और खेला-खाया भी है.. लंड भी बड़ा है.. तुझे आनन्द के साथ खूब मज़ा आएगा..

उनकी बात सुन कर मैं चुप रही..

आगे कुछ नहीं बोली..

उस रात में सलीम ने आनन्द को कल्पना में लेकर मेरे साथ चुदाई की.. और सो गया..

लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी।

मैं आनन्द के बारे में सोच रही थी… पता नहीं लेकिन मुझे बार-बार उसका लंड याद आने लगा।

लेकिन एक मन कह रहा था कि यह आनन्द अच्छा इंसान नहीं है.. हमको उसके घर नहीं जाना चाहिए… लेकिन मुझे यह भी पता था कि सलीम मेरी बात नहीं मानने वाला है।

बस यही सोचते-सोचते नींद आ गई।

सुबह 8 बजे नींद खुली… आज शुक्रवार था और कल शनिवार.. कल रात को हमको आनन्द के घर जाना था।

सोच कर ही मुझे डर लग रहा था… जैसे-तैसे कर के दिन निकल गया.. रात में खाना खाते वक़्त आनन्द का फोन आया कि नेट पर आ जाओ।

हम खाना ख़ाकर वापिस नेट पर आ गए।

आनन्द- हाय!

सलीम- हाय आनन्द..

आनन्द- तो कल लेके आ रहा ना तू.. तेरी रंडी बीवी को.. मेरे साथ चुदाने को..

सलीम- हाँ यार.. कल का पक्का है।

आनन्द- और सुन.. तेरी पत्नी मुझे दुल्हन के लिबास में ही

चाहिए.. नहीं तो साले तुझे घर में नहीं घुसने दूँगा.. समझा क्या गान्डू..

सलीम- आनन्द भाई.. आपने जैसा कहा.. सब वैसा ही होगा।

आनन्द- ठीक हैं फिर.. कल रात को 8 बजे तक मेरे घर आ जा..

सलीम- ओके बॉस..

नेट बंद करके वो मेरी तरफ देखने लगा।

मैंने अपनी नजरें झुका लीं.. हिम्मत करके उनको कहा- सलीम.. एक बार और सोच लो.. कितनी गंदी तरीके से बात कर रहा आपसे.. मुझे यह अच्छा इंसान नहीं लग रहा..

सलीम बोला- डियर ये रण्डियों के दीवाने लोगों की ज़ुबान ऐसी ही होती है.. दिमाग मत लगा।

मैं चुप रही.. अगले दिन.. आज शनिवार था।

सलीम ने मुझसे कहा- दोपहर में पार्लर जाकर आ.. और तू मुझे एकदम ‘फ्रेश-लुक’ में दिखनी चाहिए..

वैक्स भी कर ले.. मैं आज हाफ-डे की छुट्टी लेकर 4 बजे तक घर आता हूँ।

सलीम ऑफिस चला गया।

मैंने खाना बना कर खुद ही वैक्स किया.. चूत शेव की.. अंडरआर्म भी साफ़ किए और दोपहर में पार्लर गई.. वहाँ ब्लीचिंग.. फेशियल सब कुछ किया।

अब मैं बहुत खूबसूरत दिखने लगी थी.. पार्लर वाली ने मेरी हेयर स्टाइल भी अच्छी की थी.. बाल खुले रखे थे। घर आते हुए 3.30 हो गए.. 4 बजे सलीम भी घर आ गया.. आते समय कुछ सामान लेकर आया था।

मैंने देखा उसमें मेरे लिए एक लाल रंग की ब्रा और एक लाल रंग की जाली वाली पैन्टी थी और बहुत सारी लाल रंग की चूड़ियाँ भी थीं और कुछ साज़-श्रृंगार का सामान था साथ ही दो कन्डोम के पैकेट भी थे।

करीब 6 बजे मैं फ्रेश होकर तैयार होने लगी।

आज पहली बार शौहर के सामने मैं किसी दूसरे मर्द के लिए सज रही थी और शौहर देख रहा था।

पहले मैंने सलीम के लाए हुए पैन्टी पहनी और ब्रा.. फिर सलीम ने हमारे शादी का लाल रंग का शरारा मुझे पहनने को दिया।

शरारा पहनने के बाद सलीम ने मुझे चूड़ियाँ पहनने को कहा।

मैंने दोनों हाथों में 20-20 चूड़ियाँ पहन लीं।

फिर सलीम ने नाक की नथ पहनने को दी… हल्के गुलाबी रंग की लिपस्टिक लगाई।

अब मैं पूरी तरह से दुल्हन बन गई थी, अच्छे से मेकअप किया और नये सैंडल पहन लिए।

सलीम भी कपड़े पहन कर तैयार हुआ… अब सवा सात बजे थे।

सलीम मेरे पास आकर बोला- सच में तू बहुत खूबसूरत लग रही हैं.. आनन्द तुझे देख कर खुश हो जाएगा।

मैं शर्मा गई और चुप रही… फिर वो मुझसे बोला- सुनो डियर.. आज तू तेरा मोबाइल घर पर ही रख और वहाँ आनन्द को बोलना मत कि तेरे पास मोबाइल है.. ग़लती से भी तू उसको अपना मोबाइल नम्बर नहीं देना और ना ही हमारे घर का पता बताना।

सलीम की बातों से मुझे पता चला कि वो ज़रा भी नहीं चाह रहा था कि आनन्द मुझसे चुपके से कोई रिश्ता बनाए।

उसके मन में यह डर था कि हम बाद में चुपके से रिश्ते न रख लें.. मैं बस चुप रही।

 
सलीम मेरे पास आकर बोला- सच में तू बहुत खूबसूरत लग रही हैं.. आनन्द तुझे देख कर खुश हो जाएगा।

मैं शर्मा गई और चुप रही…

फिर वो मुझसे बोला- सुनो डियर.. आज तू तेरा मोबाइल घर पर ही रख और वहाँ आनन्द को बोलना मत कि तेरे पास मोबाइल है.. ग़लती से भी तू उसको अपना मोबाइल नम्बर नहीं देना और ना ही हमारे घर का पता बताना।

सलीम की बातों से मुझे पता चला कि वो ज़रा भी नहीं चाह रहा था कि आनन्द मुझसे चुपके से कोई रिश्ता बनाए।

उसके मन में यह डर था कि हम बाद में चुपके से रिश्ते न रख लें.. मैं बस चुप रही।

निकलते वक़्त एक बार फिर सलीम मुझसे बोला- उसको कहना कि तुम्हारे पास मोबाइल ही नहीं है।

मैंने ‘हाँ कहा और हम घर से निकल पड़े। ऑटो वाले को सलीम ने पता दिया और हम निकल पड़े।

करीब 7.50 को आनन्द के बताए हुए पते पर पहुँच गए।

जैसे ही उस बिल्डिंग में एंट्री की.. मेरी धड़कनें तेज हो गईं.. एक डर सा लगने लगा।

आनन्द का फ्लैट सेकंड फ्लोर पर था।

सलीम ने दरवाजे की घन्टी बजाई।

आनन्द ने दरवाजा खोला और हमको अन्दर बुला लिया।

मैंने देखा आनन्द का कद करीबन 6 फीट और पहलवानी जिस्म था।

कपड़ों में उसके मसल्स दिखाई दे रहे थे।

उस कमरे में 2 सोफे रखे थे, एक पर आनन्द बैठा और दूसरे सोफे पर मैं और मेरा शौहर बैठ गए।

आनन्द मुझे देख कर बोला- सलीम.. यह नगीना कहाँ से ढूँढ लाया रे तू.. साले मुझे तो यह तेरी बीवी लगती ही नहीं है.. कोई अप्सरा लग रही है।

मैं शर्मा कर नीचे देखने लगी…

फिर आनन्द ने हमको कोल्ड ड्रिंक दिया।

कुछ देर तक नॉर्मल बातें हुईं।

फिर आनन्द सलीम से बोला- बोल गान्डू, क्या-क्या करवाना चाहता है तू.. इस छिनाल से..

मैं उसकी बातों से चौंक गई।

सलीम बोला- आनन्द.. आज तू मेरी इस रंडी बीवी को ऐसे चोद कि इसको इसकी नानी याद आ जाए.. चिल्लाने तक चोद इसको.. मुझे बहुत मज़ा आएगा।

सलीम की बात सुनकर मैं और डर गई, मेरी समझ नहीं आ रहा था कि आज रात में क्या होने वाला है।

तब आनन्द बोला- तू देखते जा.. आज मैं इसकी गान्ड भी और चूत भी कैसे फाड़ने वाला हूँ.. ऐसा चिकना माल बार-बार थोड़ी ना मिलता है.. तेरे सामने आज तेरी पत्नी से मैं सुहागरात मनाने वाला हूँ।

इतना कह कर वो मेरे पास आया और मुझे सोफे से उठा कर खड़ा किया।

मैं नीचे देख रही थी.. तब आनन्द ने मेरा सिर ऊपर किया..

दो मिनट तक मुझे निहारता रहा।

फिर अचानक से उसने मुझे पास खींच कर मेरे मुँह पर अपना मुँह रख दिया और चूमा-चाटी करने लगा।

वो चुम्बन करते-करते मेरे होंठ भी काट रहा था।

पाँच मिनट हो चुके थे लेकिन आनन्द अपना मुँह मेरे मुँह से निकाल ही नहीं रहा था।

कुछ देर बाद मेरे बदन में भी कुछ-कुछ होने लगा, मैं भी आनन्द को चुम्बन करने लगी..

चुम्बन करते-करते मैंने सलीम की तरफ देखा.. वो बड़े ध्यान से हमारी ओर ही देख रहा था।

उस वक़्त मुझे कुछ शरम आई..

तभी अचानक आनन्द ने अपना मुँह अलग किया और एक झटके में मेरा शरारा खींच दिया.. दूसरे झटके में फाड़ कर मेरे जिस्म से निकाल फेंका।

अब मैं एकदम डर गई।

आनन्द के लिए 2 घंटे से मैं तैयार हो रही थी और उसने 2 मिनट में मेरे कपड़े फाड़ कर निकाल दिए।

अब मैं आनन्द के सामने सिर्फ़ पैन्टी और ब्रा में थी।

आनन्द सलीम को बोला- ओए गान्डू.. इधर आ और तेरी रंडी पत्नी की ब्रा निकाल…

सलीम मेरे पास आया और पीछे से ब्रा का हुक खोला और ब्रा निकाल दिया और वहीं खड़ा रहा।

तब आनन्द चिल्लाया- अब यहाँ क्यों अपनी माँ चुदा रहा है तू.. चल सोफे पर जा..

सलीम सोफे पर जाकर बैठ गया।

आनन्द मेरे पास आया और मेरे दोनों मम्मों पर हाथ रख के बोला- क्या मस्त बॉल हैं.. वो दोनों हाथों से मेरे मम्मों को दबाने लगा।

दो मिनट बाद आनन्द ने मेरे दोनों मम्मों इतने ज़ोर से दबाए कि मेरी चीख निकल आई।

मैं ज़ोर से चिल्लाई तब आनन्द भी ज़ोर से मुझसे बोला- चुप रंडी.. बाहर आवाज़ जाएगी ना.. अब चिल्लाई तो तेरा मुँह तोड़ दूँगा..

मैं चुप हो गई।

अब आनन्द ज़ोर-ज़ोर से मेरे मम्मों को मसलने लगा.. चूचुकों को मींजने लगा.. मुझे बहुत दर्द हो रहा था।

दस मिनट बाद आनन्द ने अपने कपड़े निकाल दिए.. वो अब सिर्फ़ अंडरवियर में था। फिर उसने मुझे नीचे बैठने को बोला।

‘चल अपने हाथ से मेरा कच्छा निकाल..’

मैं आनन्द के सामने बैठी थी और दोनों हाथ उसके अंडरवियर पर रख कर धीरे से नीचे खींचा.. वैसे ही उसका 9 इंच का लंड मेरे सामने आ गया।

अब मेरी धड़कनें बहुत तेज हो गई थीं। मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि इतना बड़ा लंड भी होता है।

आनन्द का लंड मेरे शौहर से डबल साइज़ का और मोटा भी था।

कुछ सोचे बिना ही मैंने दोनों हाथों से उसको पकड़ लिया, ऐसा लगा कि मैंने कोई गरम लोहा पकड़ा है।

फिर ऊपर नज़र आनन्द की तरफ घुमाई..

तब वो मुस्कुराते हुए बोला- कैसा लगा.. जानू..?

मैं शर्मा कर नीचे देखने लगी और ध्यान से आनन्द का लंड देखने लगी।

लंड एकदम काला था और बहुत ही क्यूट था।

तब आनन्द बोला- सिर्फ़ देख मत कुतिया.. इसको मुँह में लेकर चूस भी.. जैसे ही मैं लंड के और करीब गई तो मुझे वहाँ से कुछ गंदी बदबू आने लगी और मैं वापिस पीछे हटी।

तब आनन्द बोला- क्या हुआ?

मैं डरते हुए बोली- बहुत बदबू आ रही है..

वो ज़ोर से हँसने लगा और बोला- रंडी.. सुबह से मैंने इस लंड को धोया नहीं है.. क्योंकि मैं चाहता हूँ कि तू अपने मुँह से इस लंड को साफ़ करे.. चल अब नखरे मत कर.. मुँह में लौड़ा लेकर साफ़ कर..

अब मैं समझ गई कि ऐसा करने के सिवाय कोई चारा नहीं है।

मैंने 3-4 सेकेंड के लिए अपने साँसें बंद करके उसका लंड मुँह में भर लिया और चूसना शुरू किया।

मेरे मुँह में उसका लंड केवल 4-5 इंच ही जा रहा था।

करीब 5 मिनट चूसने के बाद अब मेरी चूत में से भी पानी बहना शुरू हो गया था।

मुझे महसूस होने लगा कि मेरी पैन्टी भी गीली हो गई है।

अब मैं और मूड में आकर लंड चूसने लगी।

तब आनन्द ने मेरा सिर और दबा कर पूरा लंड मुँह में लेने को कहा…

लेकिन मुँह मे पूरा जा ही नहीं रहा था.. उसका लंड मेरे गले तक ही आ रहा था।

दस मिनट बाद मुझे खड़ा किया और बोला- चल अब कमरे में चल।

उसने सलीम से भी कहा- एक कुर्सी लेकर तू भी आ जा कमरे में..

कमरा बड़ा था और एक बड़ा सा बिस्तर था वहाँ मैं बिस्तर पर बैठ गई और सलीम बाजू में कुर्सी लगा कर बैठ गया।

अब आनन्द ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी पैन्टी निकाल कर चूत देखने लगा और बोला- ओए सलीम यहाँ आ.. देख मेरा लंड चूस कर तेरे रंडी बीवी की चूत कैसी गीली हो गई है.. ज़रा पास आकर तो देख।

आनन्द की बात सुन कर मुझे बहुत शरम आ गई।

सलीम भी अब पास आकर मेरी चूत का पानी देखने लगा… तो मैं और शरमा गई।

फिर आनन्द ने मेरी दोनों टाँगें फैला कर अपना मुँह मेरी चूत पर रखा और चाटना शुरू कर दिया.. वो कुत्ते जैसे चाटने लगा… मेरी चिकनी बुर में ज़ोर-ज़ोर से जुबान अन्दर-बाहर करने लगा।

मैं तो उसकी नुकीली जीभ की रगड़ से पागल होने लगी और 3-4 मिनट में ही झड़ गई और मेरा पानी चूत में से बहने लगा।

आनन्द ने सब पानी चाट कर साफ़ कर दिया।

अब आनन्द मेरे ऊपर आ गया और मुझे चूमने लगा.. मेरे मम्मों को मसलने लगा।

पाँच मिनट तक वही करता रहा।

अब मुझसे सहा नहीं जा रहा था.. मैं दुबारा अपनी चूत में चुनचुनी महसूस करने लगी थी.. मुझे ऐसा लग रहा था कि कब आनन्द मेरी चूत में लंड डालेगा और मुझे ठंडी करेगा।

फिर आनन्द ने एक हाथ से लंड सैट करके चूत पर रखा..

तभी सलीम की आवाज़ आई- आनन्द भाई.. प्लीज़ कन्डोम लगा कर करो ना..

 
आनन्द बोला- साले डर मत.. तेरी पत्नी को मैं प्रेग्नेंट नहीं करने वाला हूँ।

फिर आनन्द ने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत पर रखा…

मेरी चूत में से तो पानी बहने लगा था.. दिल की धड़कनें तेज हो गई थीं।

फिर आनन्द ने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत में धीरे से धकेला और कुछ देर वैसे ही रहने दिया.. मुझे अपनी चूत में उत्तेजना इतनी ज्यादा थी कि सुपारा बड़ा लगने के बाद भी ठीक लगा.. उसका लौड़ा बहुत बड़ा सा था.. पर तभी अचानक से आनन्द ने एक ज़ोर का झटका मारा और उसका आधा लंड मेरी चूत को चीरते हुए अन्दर घुस गया।

मैं ज़ोर से चिल्लाई और आनन्द को पीछे धकेलने लगी.. लेकिन उसी वक़्त आनन्द ने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों हाथ बिस्तर पर दबा कर रखे और अपना मुँह मेरे मुँह से लगा कर मेरी आवाज़ बंद कर दी।

मैं छ्टपटाने लगी.. मुझसे इतना बड़ा लंड नहीं सहा जा रहा था..

मुझे ऐसा लग रहा था कि किसी ने लोहे की गरम कोई चीज़ अन्दर डाल दी है।

अब मेरी चूत के अन्दर जलन शुरू हो गई थी। मैं आनन्द से ज़ोर से लिपट गई।

एक मिनट बाद आनन्द ने वापिस से एक ज़ोर का धक्का मारा और 6 या 7 इंच लंड और अन्दर घुसा दिया।

अब मेरी हालत सच में बहुत बुरी हो गई थी.. मेरा पूरा बदन काँपने लगा.. मैं छ्टपटाने लगी।

फिर आनन्द कुछ देर वैसे ही रुका रहा.. जब उसने देखा कि उसके मोटे लंड को मेरी चूत के छोटे से सुराख ने एडजस्ट कर लिया है.. तब उसने अपना लंड आगे-पीछे करना शुरू कर दिया..

लेकिन मेरा दर्द कम नहीं हुआ और मेरी चूत से और पानी निकलने लगा।

कुछ देर उसी अवस्था में आनन्द अपना लंड अन्दर-बाहर करता रहा था।

मेरी चूत के पानी से लौड़े में चिकनाई आ गई थी और अब सटासट चुदाई से मैं भी पागल हो गई थी.. मुझे दर्द भी अच्छा लगने लगा था।

आनन्द का लंड मेरी चूत में फंसा हुआ था और मेरी चूत के अन्दर से ऐसा लगने लगा कि कोई लावा उबल रहा है और बाहर आने को बेचैन है।

उतने में आनन्द ने अपना लंड मेरी चूत मे से पूरा बाहर निकाला तो मुझे मेरी चूत खाली-खाली लगने लगी और फिर देखते ही देखते आनन्द ने दुबारा इतनी ज़ोर का झटका मारा कि मैं फिर चीख पड़ी- उईई माँआआआआ.. ये क्या कर दिया.. आआअ निकालो.. निकालो प्लीज़…

मुझे ऐसे लगने लगा कि मेरे बदन को चीरते हुए कोई मोटा सा लोहे का सख़्त सरिया मेरी चूत के रास्ते मेरी टाँगों के बीच घुस गया है।

मैं आनन्द से लिपट गई और उसको ज़ोर से पकड़ लिया और फिर ‘टोटल ब्लैक आउट’.. शायद मैं एक लम्हे के लिए बेहोश हो गई थी।

मेरी दोनों आँखों से पानी निकलने लगा।

आनन्द का पूरा का पूरा 9 इंच का लंड अब मेरी चूत के अन्दर घुस चुका था।

मेरा दिमाग़ कुछ काम नहीं कर रहा था.. पता नहीं मैं कितनी देर बेहोश रही थी..

लेकिन जब होश आया तो देखा आनन्द अपने मोटे लंड से मेरी फटी हुए चूत को चोद रहा था।

उसका लंड आगे-पीछे हो रहा था और मेरी चूत में बहुत जलन हो रही थी।

फिर 3-4 मिनट में दर्द कुछ कम होने लगा और मुझे भी अब मज़ा आने लगा।

मैं भी अब नीचे से मेरी कमर उठा कर आनन्द का लंड लेने लगी।

आनन्द मुझे अब नॉनस्टॉप चोद रहा था.. रुकने का नाम नहीं ले रहा था।

मैं आनन्द के बदन से चिपकी हुई थी और उसके फटके पर मेरे दोनों मम्मों आगे-पीछे होने लगे।

अब मेरी चूत ने उसके बड़े लंड को अपने छोटे से सुराख में एडजस्ट कर लिया था।

अब आनन्द भी बड़ी मस्ती में आ गया था.. वो मुझे दनादन चोदे जा रहा था।

जैसे ही लंड अन्दर-बाहर हो रहा था तो मुझे भी बहुत मज़ा आने लगा।

जिंदगी मे ऐसा मज़ा कभी नहीं आया था मुझे अब आनन्द मेरे दोनों कंधे पर हाथ रख कर अपनी गान्ड उठा-उठा कर लंड को पूरे सिरे तक बाहर निकालता था और ज़ोर के झटके से अन्दर घुसा रहा था।

अब आनन्द की चोदने की रफ़्तार बढ़ चुकी थी।

मैं वापिस से झड़ चुकी थी.. अब मुझे मेरी चूत मे महसूस होने लगा कि आनन्द का लंड फूलता ही जा रहा है।

उसने और ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू किया… मैं तो अब जन्नत की सैर कर रही थी।

मेरी नज़र मेरे शौहर पर गई तो देखा हमारी चुदाई देख कर उसकी आँखें फटी की फटी रह गई थीं।

अब आनन्द पूरा लंड बाहर निकाल कर एक झटके में पूरा का पूरा अन्दर डालता था फिर निकालता और फिर वही तेज रफ्तार से अन्दर कर रहा था।

हमारी चुदाई को कम से कम 30 या 35 मिनट हो गए थे।

मैं अपनी गान्ड उठा-उठा कर आनन्द का पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में लेना चाह रही थी।

मेरी पूरी शरम खत्म हो चुकी थी।

मैं आनन्द के मुँह में मुँह डाल के उससे ‘फ्रेंच-किस’ करने लगी थी।

अब आनन्द का लोहे जैसा सख़्त लंड मेरी चूत के चिथड़े उड़ा रहा था।

मैं मदहोश हो चुकी थी.. पूरी मस्ती में आनन्द से चुद रही थी।

अब हम दोनों की कमर की आगे पीछे होने की चाल इतनी लयबद्ध हो रही थी कि मानो ताल पे ताल मिला रहे हों..

अब आनन्द के धक्के और तेज हो चुके थे और फिर मेरा बदन अकड़ गया और मैं फिर एक बार झड़ गई।

अब आनन्द इतने ज़ोर से चोदने लगा था कि मुझे महसूस होने लगा कि उसका मोटा लोहे जैसा सख़्त लंड मेरी चूत को फाड़ कर मेरे पेट तक घुस चुका है।

आनन्द ने मेरे दोनों मम्मों को अब कस कर पकड़ लिए और उनको बुरी तरह भंभोड़ना शुरू कर दिया।

वो अपने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को पकड़ कर मुझे बिस्तर से उठा कर फिर बेड पर पटकने लगा..

अब सच में आनन्द जानवर बन चुका था।

मेरी चूत में भी अब तूफान मच चुका था।

मैं ज़ोर से आनन्द से चिपक गई और आनन्द के मुँह में मुँह लगा दिया।

हमारी चुदाई शुरू हुए करीब एक घंटा होने को आया था।

अब आनन्द की साँसें तेज हो गई थीं और वो रफ़्तार बढ़ाने लगा था.. उसका बदन भी कुछ कँपने लगा.. मैं समझ गई कि अब आनन्द झड़ने वाला है।

मैंने भी आनन्द को कस कर पकड़ लिया.. फिर से मेरी चूत का पानी निकलने लगा और उसी वक़्त आनन्द ने ज़ोर से फटके मारने शुरू कर दिया और फिर उसके लंड से मलाई के फुव्वारे निकलने शुरू हो गए।

मुझे महसूस होने लगा आनन्द का गरम पानी मेरी चूत में निकलने लगा है… मैंने आनन्द को कस कर पकड़ लिया..

एक दो तीन चार पाँच… पता नहीं कितनी देर तक आनन्द के लंड से मलाई के फुव्वारे निकलते रहे थे।

फिर आनन्द मेरे बदन पर गिर गया।

 
अब हम दोनों ज़ोर-ज़ोर से हाँफने लगे थे।

मेरी चुदी हुई चूत..

हम दोनों की मलाई से भर चुकी थी।

लेकिन वो मलाई अब भी बाहर नहीं निकल रही थी क्योंकि चूत पर आनन्द के लंड का ढक्कन लगा था।

कुछ देर दोनों गहरी साँसें लेने लगे…

अब मेरी पकड़ भी शिथिल हो गई थी… दोनों के बदन पसीने से भरे थे।

कुछ देर बाद मुझे महसूस होने लगा कि आनन्द का लंड अब छोटा होने लगा है।

फिर कुछ देर बाद आनन्द ने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला.. वैसे ही मेरी चूत में से दोनों की मिक्स मलाई बाहर आकर मेरी टाँगों पर बहने लगी और आनन्द ने लंड निकाल कर सीधे मेरे मुँह में चूसने को दे दिया।

आनन्द के लंड पर भी दोनों की मिक्स मलाई लगी थी.. जो उसने मुझे चाटने को कहा।

यहाँ मेरे शौहर की हालत भी हमारी चुदाई देख कर खराब हो चुकी थी। फिर मैं उठी और लंगड़ाती हुई साफ़ करने बाथरूम चली गई..

वैसे ही मेरे पीछे आनन्द भी आ गया।

उसने मेरे हाथ में अपना लंड देकर साफ़ करने को कहा।

मैं आनन्द का लंड पानी से धो रही थी तब उसने मुझसे पूछा- कैसी लगी डार्लिंग इस सच्चे मर्द की चुदाई।

मैंने जवाब मे सिर्फ़ खड़े होकर उसको चुम्बन किया और आँखों से ही प्यार से कहा- मैं बहुत संतुष्ट हो गई हूँ।

फिर सब बाहर के कमरे में आ गए.. आनन्द ने फोन पर खाने को कुछ ऑर्डर किया।

अब भी हम दोनों नंगे ही थे.. मेरी भी शरम खत्म हो गई थी।

पता नहीं मैं इतनी बेशर्म कैसे हो गई कि मेरे शौहर के सामने आनन्द के पास नंगी बैठी थी।

शायद यह सब आनन्द की चुदाई का कमाल था।

आनन्द सलीम को बोला- देख बे.. गान्डू, औरत को ऐसे चोदते हैं.. साले तुम जैसे कमजोर इंसानों को कैसे ऐसे हसीन औरतें मिल जाती हैं। बेचारी जिंदगी भर असली मर्द के लंड के लिए तड़पती रहती हैं…

सलीम ने इस बार सिर्फ़ स्माइल दी और चुप रहा।

कुछ देर में खाना आ गया.. तब मैं अन्दर कमरे में चली गई थी।

आनन्द ने खाना लेकर बिल दे दिया और मुझे बाहर बुलाया।

हम सब खाना खाने बैठ गए।

आनन्द मुझसे बोला- अपने हाथ से मुझे आज खाना खिला।

मैं भी बिना झिझक के उसके मुँह में निवाला डालने लगी।

सलीम चुपचाप से देख रहा था।

अब मुझे किसी का डर नहीं था… सलीम ही तो मुझे यहाँ लेकर आया था.. तो मैं क्या ग़लत कर रही थी।

सब का खाना हो गया और फिर हम कमरे में आ गए।

अब आनन्द मुझसे बोला- डार्लिंग.. अब की बार मैं तुम्हारी गान्ड मारने वाला हूँ।

मैं ज़ोर से चिल्ला उठी- नहीं आनन्द.. गान्ड नहीं प्लीज़.. बहुत बड़ा है आपका लंड… मेरी गान्ड फट जाएगी.. प्लीज़ ऐसा मत करो..’

आनन्द बोला- डर मत डियर.. तेरी चूत भी छोटी थी.. फिर भी इतना बड़ा लंड ले ही लिया ना.. मैं तेरी गान्ड बड़े आराम से मारूँगा..

पता नहीं फिर भी मुझे डर लगने लगा था।

आनन्द ने मुझे पास बुला कर लंड चूसने को कहा।

कुछ देर चूसने के बाद हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए।

अब आनन्द मेरी चूत चाट रहा था.. मैं आनन्द का लंड चूस रही थी।

दस मिनट बाद आनन्द ने मुझे डॉगी-स्टाइल में कर दिया और मेरी गान्ड के छेद पर लंड का सुपाड़ा रखा।

तब मैं आनन्द से बोली- आनन्द प्लीज़ तेल लगा कर करो ना.. फिर दर्द कम होगा।

आनन्द हंसा और बोला- नहीं डियर, मुझे औरतों की चीखें सुनने में बड़ा मज़ा आता है.. तुझे जितना दर्द होगा.. उतनी मुझे खुशी होगी..

मैं चुप हो गई।

अब आनन्द मेरी गान्ड पर लंड का सुपाड़ा रख कर धीरे-धीरे अन्दर डालने की कोशिश करने लगा..

लेकिन मेरी गान्ड का होल बहुत छोटा था और आनन्द का लंड बहुत बड़ा था.. घुस ही नहीं रहा था।

फिर भी आनन्द डालने की ज़बरदस्ती कर रहा था।

कुछ ही पलों में उसका सुपारा गांड में चला गया.. मैं आँखें बन्द करके दर्द सहने की हिम्मत जुटा रही थी।

अब आनन्द मेरी पीठ के पीछे से हाथ आगे लेकर मेरे मम्मों को सहलाने लगा और पीछे गान्ड में धीरे-धीरे धक्के मारने लगा।

मुझे दर्द होने लगा.. 2-3 मिनट में मुझे महसूस होने लगा कि आनन्द का लंड का सुपाड़ा मेरी गान्ड के अन्दर चला गया है।

अब मेरी चूत भी पानी छोड़ने लगी थी।

फिर आनन्द सलीम को बोला- ओए सलीम.. ज़रा यहाँ आकर तेरी लुगाई की कमर एक हाथ से पकड़ और मेरा लंड दूसरे हाथ से पकड़ कर रख..

सलीम पास आ गया.. उसने एक हाथ से मेरी कमर पकड़ी और एक हाथ से आनन्द का लंड पकड़े रखा।

अब आनन्द धीरे-धीरे अपना लंड अन्दर घुसाने लगा।

मैं चिल्लाने लगी.. लेकिन उसको अब कुछ परवाह ही नहीं थी।

दो-तीन मिनट में शायद 3-4 इंच लंड घुस चुका था।

कुछ देर ऐसे ही रहा.. आनन्द फिर उसने लंड थोड़ा बाहर निकाला और एक ज़ोर का झटका मारा और 5 इंच तक लंड अन्दर घुसा दिया।

मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा गया।

मैं फफक कर रो पड़ी- आनन्द बाहर निकालो.. नहीं सहा जाता.. प्लीज़.. आनन्द मैं आपके पैर पड़ती हूँ.. तुम्हारा इतना मोटा लंड मेरी गान्ड नहीं ले पाएगी.. इसको बाहर निकालो..

लेकिनआनन्द कहाँ सुनने के मूड में था.. थोड़ा लंड बाहर खींच कर एक ज़ोर का धक्का मार कर और लंड को अन्दर धकेलने लगा था।

अब दस मिनट हुए थे लेकिन आनन्द का लंड अभी भी पूरा गया नहीं था।

मैं दर्द से रोने लग गई थी।

तब आनन्द ने लंड बहुत बाहर निकाल कर एक ज़ोरदार धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड मेरी गान्ड में घुसा दिया।

मैं ज़ोर से चीख पड़ी और डॉगी-स्टाइल से गिर कर बिस्तर पर धराशाही हो गई।

मेरे सामने वापिस से ब्लैक आउट हो गया था।

आनन्द का पूरा लंड अब मेरी गान्ड के अन्दर चला गया था और गान्ड में जाकर लोहे जैसे सख़्त हो गया था।

मैं और कुछ समझ पाती तभी आनन्द ने मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया।

मुझे ऐसा लगने लगा कि ये लंड गान्ड में घुस कर चूत से तो बाहर निकल आएगा।

मैं चीख रही थी.. रो रही थी और आनन्द मेरी गान्ड मारते जा रहा था।

मैं मन ही मन में सोचने लगी कि अब के बाद कभी गान्ड नहीं मरवाऊँगी।

आनन्द ने पहले ही मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया था और अब गान्ड को गड्डा बना कर उसकी हालत खराब कर रहा था।

लेकिन कुछ देर बाद मेरा दर्द कम होने लगा और मैं भी आनन्द के साथ कुछ मस्ती करने लगी।

आनन्द मुझे अब ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।

करीब 40-45 मिनट बाद आनन्द की रफ़्तार बढ़ गई और उसने मेरी कमर कस कर पकड़ ली और उसकी मलाई मेरी गान्ड में छूटने लगी।

पहली बार के मुक़ाबले इस बार कम मलाई निकली और हाँफते हुए मेरी पीठ पर गिर गया।

हम दोनों दस मिनट वैसे ही पड़े रहे.. फिर मैं जैसे तैसे उठी और साफ़ करने बाथरूम गई.. उधर अपनी गान्ड को पानी से साफ़ करने लगी तो मुझे महसूस हुआ कि मेरी गान्ड काफ़ी फैल चुकी है।

मेरी 3 ऊँगलियाँ एक साथ गान्ड में जा रही थीं।

मैंने गान्ड पर पानी डाला.. तो नीचे देखा लाल पानी बह रहा है.. मैं समझ गई मेरी गान्ड में से खून निकल रहा था।

मेरी गान्ड फट चुकी थी।

फिर मुश्किल से खड़े होकर बाहर आई.. मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था। बाहर हॉल में आकर देखा तो आनन्द के सामने सलीम अपना लंड हिला रहा था।

 
हम दोनों दस मिनट वैसे ही पड़े रहे.. फिर मैं जैसे तैसे उठी और साफ़ करने बाथरूम गई.. उधर अपनी गान्ड को पानी से साफ़ करने लगी तो मुझे महसूस हुआ कि मेरी गान्ड काफ़ी फैल चुकी है।

मेरी 3 ऊँगलियाँ एक साथ गान्ड में जा रही थीं।

मैंने गान्ड पर पानी डाला.. तो नीचे देखा लाल पानी बह रहा है.. मैं समझ गई मेरी गान्ड में से खून निकल रहा था।

मेरी गान्ड फट चुकी थी।

फिर मुश्किल से खड़े होकर बाहर आई.. मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था।

बाहर हॉल में आकर देखा तो आनन्द के सामने सलीम अपना लंड हिला रहा था।

मैं आनन्द के बाजू में बैठ कर देखने लगी..

पाँच मिनट में सलीम के लंड से पानी निकलने लगा..

वैसे ही सलीम ने मेरे पास आकर मेरे मुँह पर सब पानी गिरा दिया और शांत हो गया।

मैं वापिस बाथरूम जाकर साफ़ करके आई और आनन्द के पास बैठ गई।

आनन्द ने मुझे पास लेकर चुम्बन करने लगा।

फिर मैंने आनन्द की छाती चाटने लगी और फिर उसके निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगी।

आनन्द की छाती पर बहुत बाल थे।

दस मिनट बाद आनन्द मुझसे बोला- अब अपने कमरे में चलते हैं डियर…

हम कमरे में जाने लगे.. तब सलीम भी हमारे पीछे आने लगा..

तो आनन्द बोला- सलीम.. अब तुम बाहर हॉल में रूको या सो जाओ.. मैंने तुम्हारी फैंटेसी पूरी कर दी है.. अब मुझे तेरी पत्नी को अकेले में चोदना है.. इसलिए हमको डिस्टर्ब मत करना।

सलीम बोला- लेकिन आनन्द भाई.. मैं सिर्फ़..

आनन्द बीच में बोला- कहा ना तुझे.. बाहर रुक अब…

और हम दोनों कमरे मे आ गए और आनन्द ने कमरे का दरवाजा अन्दर से बन्द कर दिया।

मैं आनन्द से लिपट कर उसको प्यार करने लगी।

तब मुझे आनन्द बोला- डियर तुझे मेरा चोदने का तरीका पसंद आया ना.. सच बोल?

मैंने ‘हाँ’ कहा।

फिर आनन्द बोला- तुझे ये चुदाई सिर्फ़ आज की रात भी चाहिए या बाद में और भी चुदेगी।

मैं झट से बोली- मुझे तुम्हारी चुदाई हमेशा चाहिए.. अब मैं तुम्हारे लंड के बिना नहीं रह सकूँगी।

फिर आनन्द मुझसे बोला- देख.. मुझे नहीं लगता आज के बाद तेरा गान्डू शौहर तुझे मेरे पास लेकर आएगा.. अगर तुझे मेरा लंड चाहिए तो तू मुझे अपना मोबाइल नंबर दे दे और मेरा नंबर भी ले ले।

मैं अब सोच में पड़ गई.. सलीम ने मुझे पहले ही कहा था कि आनन्द को अपना नंबर नहीं देना।

फिर मैंने सोचा कि सलीम अगर अपनी खुशी के लिए मुझे आनन्द से चुदा रहा है तो मैं क्यों ना अपनी खुशी से आनन्द से चुदवाऊँ…

और फिर मैंने मोबाइल नंबर आनन्द को दे दिया जो उसने अपने मोबाइल में सेव कर लिया और अपना नंबर भी लिख कर मेरे पर्स में डाल दिया।

मैंने आनन्द से कहा- सलीम को पता नहीं चलना चाहिए कि हमने नंबर एक्सचेंज किए हैं।

फिर रात में दो बार हमने पलंगतोड़ चुदाई की.. हम ऐसे चुदाई करते रहे जैसे हम मियाँ-बीवी हों और हमारी सुहागरात चल रही हो।

हमको सोते-सोते रात के 4 बज गए… और हम सुबह 9 बजे उठे।

मैं नहा कर तैयार हो गई। मुझे सलीम कुछ खुश नहीं लग रहा था क्योंकि रात भर हम दोनों ही सिर्फ़ कमरे में थे इसलिए शायद…

उसने मुझसे ज़्यादा बात नहीं की… हम दोनों तैयार होकर जाने लगे.. तब देखा कि मेरे कपड़े फटे हुए हैं।

आनन्द ने बोला- मेरी बीवी की पुरानी साड़ी वगैरह हैं.. तुम वो पहन लो।

मैंने वही किया और फिर उसने मुझे पास लेकर अपनी बाँहों में भर कर मेरी गान्ड को सहलाते हुए एक लंबा चुम्बन लिया।

फिर हम वहाँ से निकले।

जैसे ही घर आए.. सलीम मुझ पर चिल्लाने लगा कि तू अकेले क्यों सोई उसके साथ?

मैं बोली- तुमको मना करना चाहिए ना.. मेरी क्या ग़लती है.. उसके पास मुझे तुम ही लेकर गए थे ना..

फिर वो चुप हो गया और मुझसे पूछा- अपना मोबाइल नंबर तो नहीं दिया ना तूने?

मैंने ‘ना’ बोली।

पता नहीं फिर भी उसके दिमाग़ में कुछ शक़ था।

उसने मेरा मोबाइल लिया और उसमें से सिम निकाल कर मेरे सामने तोड़ दी और कचरे के डिब्बे में फेंक दी।

मैं चुप रही… 3-4 दिन निकल गए।

वहाँ आनन्द मुझे रोज मोबाइल लगता रहा होगा.. लेकिन सिम तोड़ने की वजह से संपर्क नहीं हो रहा था।

मेरे पास आनन्द का नंबर था.. जो उसने लिख कर मेरे पर्स में रखा था।

चार दिन बाद मैं नीचे जाकर पीसीओ से आनन्द को कॉल किया और सब बताया।

आनन्द बोला- मैं कल 11 बजे तेरे शौहर के जाने के बाद आता हूँ।

अगले दिन आनन्द 11 बजे घर आया।

उसने मुझे एक मोबाइल दिया और कहा- इस मोबाइल को छुपा कर रखना, तेरा शौहर बाहर जाएगा.. तब ऑन करना… हम दोनों इससे बात करते रहेंगे।

मैं खुश हो गई।

पूरे दिन में हमने तीन बार चुदाई की, अब मुझे रोज आनन्द के लंड का चस्का लग चुका था।

मुझे सलीम का लंड ज़रा भी पसंद नहीं आ रहा था।

आनन्द हफ्ते में 5 दिन रोज मेरे घर आकर मेरी चुदाई करता था।

यहाँ मेरे शौहर के दिमाग़ से अब threesome का भूत भी उतर चुका था.. लेकिन उसको पता नहीं था.. कि आनन्द से उसकी पत्नीउसकी पत्नी चुदवा रही है।

अब 7 महीने हो गए उस बात को।

एक दिन मुझे पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूँ। मुझे बहुत खुशी हुई.. सलीम भी खुश हुआ… आनन्द भी सुन कर खुश हुआ।

अब मैं और आनन्द सोच रहे थे कि किसका बच्चा है.. आनन्द या सलीम का?

मैंने आनन्द से कहा- जिसका भी हो.. मैं खुश हूँ.. मैं यही समझूँगी कि ये तुम्हारे पानी से हुआ है।

आनन्द भी खुश हुआ… डॉक्टर ने मुझे इस अवस्था में चुदाई करने से मना किया।

आनन्द भी बोला- अब चुदाई नहीं करते हैं।

फिर आनन्द मुझे दिन भर प्यार करता रहता था।

मैं अब उसकी चुदाई के साथ साथ उसके प्यार से पागल हो रही थी।

मेरा आनन्द मुझे इतना प्यार करता था।

एक दिन आनन्द ने मुझे बताया कि वो अमेरिका जा रहा है…

मेरा छठा महीना चल रहा था.. मेरा पेट भी बाहर निकला हुआ था।

दिन भर हमने बातें की.. सेक्स तो कर नहीं सकते थे पर मैं उसके लंड के लिए बेचैन थी तो मैंने आनन्द का लंड मुँह में लेकर चूसना चालू किया.. वो मेरे मम्मों और गान्ड.. मेरे अंग-अंग को मसल रहा था।

करीब 30 मिनट तक मैंने लंड चूसा और उसने पूरा पानी मेरे मुँह में गिराया।

फिर शाम को चला गया.. जाते वक़्त बोला- अमेरिका से आने के बाद मेरे बच्चे की शक्ल देखूँगा।

वो चला गया… 9 महीने 18 दिन के बाद मैंने एक खूबसूरत से लड़के को जन्म दिया.. सलीम बहुत खुश था।

मैंने ध्यान से देखा तो मुझे उस लड़के में आनन्द की झलक दिखाई दे रही थी।

यह बात सलीम को नहीं पता चली क्योंकि सलीम को ज़रा भी शक़ नहीं था कि उस दिन के बाद मैं कभी आनन्द से मिली हूँ।

अब हम सब खुशी से रहते हैं।

एक दिन मेरे सामने आनन्द का सलीम के मोबाइल पर कॉल आया.. तब सलीम ने बड़ी खुशी से आनन्द से कहा- मैं बाप बन गया हूँ।

मैं मन ही मन मुस्कुराई.. मुझे पता था कि ये लड़का आनन्द से हुआ है।

आनन्द का दो दिन बाद मुझे कॉल आया तब मैंने आनन्द से कहा- बेबी तुम्हारे जैसा ही दिखता है।

आनन्द बहुत खुश हो गया और बोला- इंडिया आऊँगा तब ज़रूर अपने बेटे से मिलूँगा।

यह मेरी एक सच्ची कहानी है.. मैं अब मेरे बच्चे और शौहर के साथ खुश हूँ।अब भी मैं आनंद से चुदती हु सलीम को कुछ पता नही

समाप्त

 
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