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बेनाम सी जिंदगी compleet

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बड़ी क्यूट सी लग रही थी वो. छोटी सी,क्यूट सी…गेहूवा रंग उसका और मासूम शक़्ल.. उतने मे ही मम्मी बोली;

मम्मी: सम्राट…वो देख..वो धीरज से जो लड़की बात कर रही ना?

मे: कॉनसी लड़की?

मम्मी: अर्रे वो देख ना..ब्लॅक कलर की साड़ी पहनी हैं उसने.. दिखी??

मे: हाँ हाँ..दिखी..क्या उसका?

मम्मी: अरे तू पहचाना नही क्या उसे?

मे: नही तो? कौन हैं वो?

पापा: अरे चीक्की हैं ना वो!!

मेरी तो आखे,कान,नाक, गान्ड..सारे छेद फट गये.. और अंजाने मे ही मैने कह दिया..

मे: फफफफफकुकक….!!

मम्मी: हुहह?क्या??

मैने रीयलाइज़ किया कि मैने ज़ोर्से कह दिया..

मे: सच???

मम्मी: तू कुछ और बोला.

मे: नही मम्मी.. सच ही बोला..

मम्मी: क्या बेशरम हैं तू.. ऐसी बाते कब्से करने लग गया तू?

मे: अरे..मैने सच ही कहा

पापा: सच ‘फ’ से स्टार्ट होता??

मे: ओह…वो तो ऐसे ही..फॅक बोला…आक्च्युयली एक फरन्ड हैं मेरी. मनीषा.. वो ‘स’ को ‘फ’ बोलती..सो आदत लग गयी..

मम्मी: ऐसा क्या! बना उल्लू और..

मे: बनाना क्या पड़ता है?

मैने दबी आवाज़ मे कहा..

मम्मी: फिर कुछ बोला?

मे: अरे कुछ नही..जाता हूँ अब मैं उपर.. फ्रेश होना हैं..

मम्मी: हाँ जा..

मैं काल्टी मारके निकल गया और उपर आके चेंज करके अपना काम करने लगा.. राटको खाना खाने के बाद भी 1 बजे तक काम चला. मैने एक अंगड़ाई भरी और सीधा चेयर पर से बेड पर उड़ी मारके पसर गया. मेरे दिमाग़ मे चिकी घूम रही थी अब. मैं जानता हूँ लोगो के लुक्स चेंज होते हैं मगर ये नही जानता था कि कोई ‘ए’ लड़की सीधा ‘XXX’ हो जाएगी. कसम से क्या लग रही थी वो..और ऐसी लड़की ने मेरा नंबर माँगी..अब मैं बेसब्री से वेट कर रहा था कि कब वो मेसेज या कॉल करे..ज़्यादा जल्दी भी नही कर सकता था मैं नही तो समझ जाती कि आइ आम ईगर टू टॉक टू हर..उतने मे ही मुझे यूथिका की याद आई. मैने फट से मेरा सिम चेंज किया..सेल स्टार्ट होते ही मुझे मेसेज आने स्टार्ट हो गये.

‘हे!’

“यौ देयर?’

‘हेल्ल्लो???’

मैं खुश हो गया.. बंदी, आइ मीन होप्फुली बंदी ही हो, डेस्परेट हैं बात करने के लिए हम से…मैने भी रिप्लाइ कर दिया.

‘हे’

और वेट करने लगा.. 15-20 मिनट बात करने के बात मैने सोचा कि अब शायद इसका रिप्लाइ ना आए..सो गयी होगी लगता..सब मेरे जैसे भूत तो रहते नही हैं.. मैने सोचा मैं भी सो ही जाता हूँ.

अगले दिन मैं सुबह उठके कॉलेज चला गया.कॉलेज जाके मैने सबसे पहले पायल को कॉल किया..’आउट ऑफ कवरेज एरिया’.

मे: हुहह? आउट ऑफ कवरेज एरिया?? कोन्से जंगल मे हैं मेडम.

मैने सोचा कि कॉलेज आएगी तो खुद ही कॉल करेगी.. लेक्चर्स स्टार्ट हो गये मगर पायल का कही आता पता नही था. मैने 3 4 बार कॉल किया,,सेम रेस्पॉन्स. .कॉलेज ख़त्म हो गया..मुझे लगा कि शायद आई नही अब तक वो नासिक से. मैने सोचा जाने दो.. जब भी पासिबल होगा कॉल करेगी खुद ही वो.. कॉलेज के बाद मैं घर चला गया..पढ़ाई की, असिगमेंट्स लिखे..वो सब करते करते शाम हो गयी.. मैं शाम का वेट ही कर रहा था क्योकि आज वो पागल मिलेगी. मैं थोड़ा सा एग्ज़ाइटेड था उसे मिलने के लिए. मैं फ्रेश होने चला गया..फाटसे चेंज किया और बाग भरने लाहा. इतने मे ही मुझे यूथिका की यादाई. कल रात को उसका कोई रिप्लाइ नही आया सो मैने सोचा एक बार चेक करने मे क्या हर्ज़ हैं. मैने सिम चेंज किया और सिम चेंज करते ही मेसेज आने लगे.

“हे! श्र्य मैं थोड़ी बिजी थी तो रिप्लाइ नही कर पाई. वस्सूप?”

मैने भी रिप्लाइ ठोक दिया;

“इट्स ओके.. आइ आम गुड. हाउ अबाउट यू?”

मसेज सेंड ही करने वाला था की मुझे याद आया कुछ;

“लिसन. आइ थिंक हम ने एक टाइम डिसाइड कर लेना चाहिए हमारी बात करने का. ऐसे तो कभी हमारी बात नही हो पाएगी. मैं रात मे अवेलबल रहता हूँ. लेम्मे नो!”

मसेज सेंड कर के मैने सिम चेंज कर दिया और जिम चला गया. रास्ते मे मैं सोच रहा था कि आज बात होगी या नही मेडम से. या आज आएगी भी या नही जिम को..कल के आइटम के बाद. ऐसे कई सारे सवाल मेरे दिमाग़ मे घूम रहे थे. मैं जिम पहुँच गया और पार्किंग मे गाड़ी पार्क करके उपर जाने ही वाला था तो मैने सोचा कि क्यू ना पार्किंग मे एक बार मेडम की गाड़ी देख ली जाए कि हैं या नही. मैने पूरी पार्किंग छान मारी. कही कोई आता पता नही था. मैं थोड़ा मायूस हो गया..कही उसने दूसरा जिम तो जाय्न नही कर लिया? मैं अपना मन मारके उपर चला गया..

ज्यों जिम मे घुसा रजत ने पकड़ लिया मुझे मेरे हाथ से जाकड़ के.. अब वो साला हल्क की पैदाइश, मेरा नन्हा सा बाइस्प उसके हाथ मे अपनी जान तोड़ रहा था..

मे: अर्रे सर!! एक ही हाथ हैं मुझे..

रजत: हुहह??

मे: आइ मीन राइट वाला सर..एक ही हैं..तो थोड़ा सा….

वो समझ गया..हँसके उसने हाथ छोड़ दिया मेरा और बोला;

रजत: कल क्या चल रहा था रे तेरा और वो लड़की का सम्राट? वो भी भाग गयी आंड उसके पीछे तू भी? चक्कर क्या हैं?

मे: अर्ररे कुछ नही सर.. उसको पूछना था कि जिम मे फीमेल ट्रेनर का कितना फीस हैं.

रजत: तो तुझसे क्यू पूछ रही थी वो??

मे: उसको लगा कि मैं ट्रेनर हूँ..

मेरी इस बात पे वो सांड़ ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा और बोला;

रजत: तू?? ट्रेनर?? जा भाई जा.. अंदर हैं तेरी स्टूडेंट…कर ट्रेन उसको.

मेरी तो बत्ती ही जल गयी ये सुनके की वो ऑलरेडी अंदर हैं जिम के.

मे: ओके सर.. मैं जाता हूँ अंदर..

इतना कह के मैं अंदर चला गया. शूस पहने और सीधा जिम फ्लोर पे. फ्लोर पे जाके मैं अपने पहचान के लोगो को ही हेलो करने लगा. रोज़ का ही रिचुयल था.. थोड़ा है शाइ करना और देन अपने काम मे लग जाना.. मैं इधर उधर ही बोलता हुआ आगे बढ़ता गया और उतने मे ही….

‘अरी.आआईई???’

मैं किसी से टकरा गया..2 सेकेंड संभलने को लगे और उसका आधा ये जानने मे कि टकराया भी किस से??

मे: ओह्ह.. यू!!

‘अर्रे कुठे बघतोस?? क्या मेरे पीछे पड़ गये तुम??’

मेडम ने आज ग्राइश कलर का टॉप पहना था और ब्लॅक स्वेट पॅंट्स.. थोड़ा सा क्लीवेज दिख रहा था टॉप मे से.तो नॅचुरली मेरी नज़र नीचे चली गयी. आप भी देख लो खुद..

अब ऐसा नज़ारा सामने आया तो कौन भला अपनी नज़रें मोड़ ले?? मैं भी देखने लगा.. मगर ज़्यादा देर नही देख पाया..

‘ओये हेलो??’

मैने सोचा अगर आज भी ये पकड़ लेगी मुझे घूरते हुए..तो वांदे हो सकते.. कुछ तो सोचना पड़ेगा..

मे: हुहह?? मैं..मैं तुम्हारे पीछे पड़ा हूँ?? ठीक हैं..मानता हूँ मेरा ध्यान नही था आगे की तरफ कॉज़ मैं मेरे फरन्डस को ग्रीट कर रहा था.. मगर तुम?? तुम्हारा ध्यान कहाँ था?? हुहह?? तुम तो आगे ही देख रही थी ना? और आगे मैं था.. मतलब तुमने मुझको देख कर भी सीधा मुझसे भीड़ गयी… हैं ना??

उसने शायद सोचा नही होगा कि मैं ऐसा भी कहूँगा..मेरे सवाल से वो कन्फ्यूज़ हो गयी..और हड़बड़ाने लगी.

‘ वो…माआ..मैं… उधाअर… तुमने….’

मे: क्या कोडवर्ड हैं क्या ये? हिन्दी मराठी इंग्लीश?? आती क्या कुछ? अभी तो बड़ी टॅपर टॅपर चल रही थी.. अब क्या हुआ?? बोलती बंद?? कल घुटने पे चोट लगी तो क्या दिमाग़ बंद हो गया?? हुहह?? बोलो

मैने सोचा कि अब ज़रा ऊट पहाड़ के नीचे आया.. इतने आसानी से तो नही छोड़ुगा.

 
मे: सो मतलब तुमने जान बुझ कर मुझे धक्का मारा..

‘नही’

मे: तो टकराई कैसे मुझसे?

‘ तू आला माज़या आंगवार..नालयक’

मे: अरे चुप!! मे तार बघात पन नवहतो तुज़या कड़े आनी तू माला बघात होती तरी ही सरल माला धड़कली.. म्हन्जे जानूँ बुझुँ ना..हरस्स्मेंट??

‘अर्ररे आएएयएए…. काका न्ड कुठला हरस्स्मेंट? ग़लती से धड़क लग गयी..सॉरी..

मे: ऐसे कैसे धड़क लग गयी ग़लती से?? हुहह? नाम क्या हैं तुम्हारा?

‘हुहह??’

मे: नाव नाव..नेम ..नाम!

‘वो मैं क्यू सांगू??..उहह…बताऊ?’

मे: मैं विचार रहा इसलिए सांग..जितना बोला उतना सांगो..

‘सस्स.सस्स्ससा…’

मे: क्या सस्स्सस्स…? साप हैं क्या??

‘अरे सारिका’

मे: अरे सारिका?? ये कैसा नाम हुआ??

‘पतच्छ…सारिका..सिर्फ़,,’

मे: ओके सारिका सिर्फ़.. अभी मुझे जाना है..जिम हैं..वर्क आउट करते लोग.. अभी मुझे धड़क दी ना..मैं तुम्हारा नाम की कंप्लेंट कर दूँगा…समझी क्या??’

‘ आईई तू जा रे.’

मे: अर्रे??

इतना कह के वो भाग गयी मेरे सामने से.. मैं मन ही मन हँसने लगा.. मज़ा आ गया आज तो.

जिम मे सारिका से मेरी फिर ना ही कोई टक्कर हुई और ना कोई मुलाकात हुई उस दिन. वो जैसे पर्पस्ली ही मुझसे दूर रही उस दिन. मैं सोचने लगा कि वैसे तो बंदी उस दिन बड़ा आटिट्यूड दिखा रही थी..मगर आज जब ज़रा मैने उसके उपर दबाव डाला तो झट्से बोलती बंद हो गयी उसकी.. मुझे ताज्जुब होने लगा कि ऐसे कैसे हो सकता हैं. मैने ज़्यादा ध्यान नही दिया उस बात पे और अपना काम करने लगा. जिम के बाद मैं घर जाने के लिए निकलने लगा तो मुझे कॉल आया. पायल थी;

मे: हेलो??

पायल: हे

मे: अबे कहाँ हैं तू? मैने कितने कॉल किए तुझे..कोई रिप्लाइ ही नही की तूने.. नासिकसे आई नही क्या अब तक?

पायल: अर्रे वहाँ से तो कबका आ गयी मैं!

मे: क्या?? सो मिली क्यू नही अब तक?? कब्से वेट कर रहा मैं कि तू अब आएगी,तब आएगी. तेरा तो कोई अता पता ही नही.. अभी कहाँ हैं?

पायल:उम्म्म..अभी तो बाहर हूँ मैं..कल मिलती हूँ ना.

मे: बाहर कहाँ? अभी मिलते हैं ना.मैं जिम से घर ही जा रहा था अभी.

पायल: अभी..अभी नही..मम्मी के साथ बाहर आई हूँ..तेरा मिस कॉल देखा तो सोचा कॉल करलू..

मे: कॉल मैने सुबह किया था..तूने अभी देखी वो??

पायल: अरे सोई थी ना..

मे: दिन भर??

पायल: तू क्या ऐसे पीसी सरकार जैसे 50 सवाल कर रहा है?? थक गयी थी सो नींद लग गयी..ऱात को लेट आई मैं. इतना क्या पूछ रहा? और कुछ पूछना हैं??

मे: हाँ..व्हाट आर यू वेआरिंग?

पायल: पतच्छ…तू नही सुधरेगा…कामीने! अब मार्केट मे आई हूँ तो कपड़े पहन के ही . ना..

मे: अर्ररे?? इतना क्यू भड़क रही है? ऐसे ही टाँग खीच रहा था मैं तेरी..

पायल: वेल..दूर रह टाँगो से मेरी..

मे: उम्म्म…वो तो मुश्किल हैं पायल.. तेरी टाँगो के बीच मे ही सोने का वेट कर रहा था मैं.. कितने दिन हो गये…!!!

पायल: 5 दिन हुए..ऐसा कर रहा है जैसे सालो से नही मिली.. ड्रामेबाज़ साला..

उतने मे ही उसे उसकी मम्मी ने पीछे से आवाज़ दी..

पायल: हाँ..आई…अच्छा सुन..कल मिलते कॉलेज मे. स्या!

मे: हाँ..स्या.

कॉल कट करके मैं निकल ही रहा था कि उतने मे सारिका दिख गयी..वो सीढ़ियो से उतर रही थी..उतरते हुए उसके बूब्स मस्त उपर नीचे बाउन्स कर रहे थे.. देख के ही मज़ा आ रहा था इतना तो सोचो कि उन्हे मसल्ने मे कितना मज़ा आएगा? उतने मे ही उसकी नज़र मुझ पड़ी..तो वो थोड़ा रुक गयी..हिचकिचाके 2 सीढ़िया पीछे हो गयी.... मैं मन मे ही हंसा और मामला समझ गया. मैने बाइक स्टार्ट की तो वो एक दम कॉर्नर से मुझे देख रही थी मैं अब जाउन्गा तब जाउन्गा.. मैं भी कमीना तो हूँ. मैने बॅस बाइक स्टार्ट की मगर गियर नही डाला. तो वो फिर से रुक गयी.. मैने बाइक बंद करदी.. तो वो वही रुकी रही और मुझे घूर्ने लगी.. मैने एक बार दोबारा बाइक स्टार्ट की..1 2 बार रेज़ की और गियर डाल दिया इस बार. तो वो आश्वासित हो गयी कि मैं निकल रहा हूँ.. मैने बाइक आगे बढ़ाई और ऐसा दिखाया कि उसे मैने देखा ही नही. तो वो फिर से सीढ़ियो से उतरने लगी. 3 4स्टेप्स के उतरने के बाद ही मैने गाड़ी ठीक सीढ़ियो के सामने रोक दी. तो वो चौंक के उसी स्टेप पर खड़ी हो गयी.. मैने बाइक बंद कर दी और इस बार ठीक उसकी तरफ देखने लगा. वो अब नीचे देख रही थी.. तो मैं बाइक से उतरा और साइड स्टॅंड पे लगा दी.. जो ही मैने बाइक स्टॅंड पे लगाई वो एक दम से पीछे मूड गयी और वापिस सीढ़िया चढ़ने लगी.. वो 2सरी स्टेप चढ़ पाती उसे पहले मैं ही बोल पड़ा;

मे: अगर मैं रात भर यही खड़ा रहा तो क्या तुम घर नही जाओगी??

मेरे सवाल से वो ज़रा खिसिया गयी.. मगर कुछ बोली नही..सो मैं फिर बोला..

मे: ओये! हेलो?? मैं तुमसे ही कह रहा हूँ..

इस बार वो पलटी..और सीधा नीचे उतर कर मेरे ठीक सामने 2 स्टेप्स उपर आके रुक गयी..मैं उसकी तरफ देखने लगा..कुछ बोलता उससे पहले ही वो बोल पड़ी..

सारिका: ये देखो….

मे: हांजी??

अब उसकी शक़्ल पे सॉफ दिख रहा था कि वो चिड गयी हैं..

सारिका: शट अप! तुम ये जो कर रहे हो ना..मुझे सब पता हैं..अकेले नही हो जो तुम ऐसा कर रहे हो मेरे सामने..50 आके गये तुम जैसे और 1000 आके जाएगे..इसलिए ये जो तुम्हारा आइडिया हैं ना पटाने का मुझे.. उसे अपने दिमाग़ से निकाल दो..सो चुप चाप यहाँ से निकल जाओ..वरना आई शप्पत लाता खाशील.. मुझे हॅंडल करना आता हैं तुम जैसो को..

मे: अर्रे अरे अरे?? चेन्नई एक्सप्रेस..ज़रा ब्रेक लगाओ..

मैं उसे बीच मे टोकते हुए बोला.

मे: तुमसे किसने कहा कि मैं तुम्हे पटाने की कोशिश कर रहा हूँ? मैने कहा ऐसा कुछ?

सारिका: कहने की ज़रूरत ही नही कुछ..मुझे सब समझता है.. तुम्हे लगता है कि तुम कुछ ओरिजिनल हो.. ट्रस्ट मी.. बहुत देखे तुम जैसे.. ये बाइक रोक के खड़े हो गये मेरे सामने..बपाछ आहे का रास्ता?

 


मे: नही.. रजत छा! तुज़ा भाउ.. जो मारवाड़ी आहे बाइ दा वे!

मैने उसे चिढ़ाते हुए कहा..वो और चिड गयी इस बात पे.

सारिका: ये देखो.. मुझे परेशान मत करो..और मुझे पटाने का सपना भी मत देखो.. ये सब जो तुम कर रहे हो ना मुझे पता हैं सब..सब जानती मैं..

मे: ओके! मतलब मैं बाइक रुका के यहाँ खड़ा रहा इसका मतलब मैं तुम्हे पटाना चाहता हूँ.. ऐसा तुमको लगता हैं.

सारिका: लगने का क्या? आइसयच हैं..

मे: ठीक हैं..देन आइ गेस इट्स वेरी बॅड आइडिया कि मैने ऐसा सोचा भी..सो सॉरी

मुझे हार मानते देख कर वो ज़रा खुश हुई..

सारिका: गेट लॉस्ट नाउ..

मे: श्योर श्योर.. अब मुझे नही पिटना तुम्हारे बाय्फ्रेंड से..

वो मुझे घूर्ने लगी..टमाटर से थोड़ा हल्का रेड सा चेहरा उसका..और रॅबिट जैसे डऔट..फुल कार्टून..

सारिका: आए…काय बड़बड़ आहे हे??

मे: बड़बड़?? अरे? अब अगर मैं बाइक रोक के खड़ा हूँ इसका मतलब तुमने ये निकाला कि मैं तुम्हे पटाना चाहता हूँ..राइट?

वो कुछ नही बोली;

मे: सो…..बाइ दट लॉजिक..वो जो ऑटो वाला भैया रोज़ खड़ा रहता वो तुम्हारा बाय्फ्रेंड ही हुआ ना? कब्से चल रहा है तुम्हारा प्रेम प्रकरण??

सारिका: व्हाट नॉनसेन्स! हटो रास्ते से नही तो मैं पोलीस कंप्लेंट कर दुगी.. कि तुमने मुझे छेड़ा..

मे: यार तुम बचपन से ही ऐसी कड़वी करेला हो या ये टेलेन्त अभी अभी आया हैं तुम मे??

सारिका: आइ आम वॉर्निंग यू!

मे: सिंपल क्वेस्चन हैं..

सारिका: तुम्हे इससे क्या?

मे: वेल..मुझे कुछ ख़ास तो नही इससे.. बट आइ थिंक वी स्टार्टेड अट आ रॉंग फुट..सो आइ वॉंट टू मेक अप टू इट..

सारिका: मुझे कोई इंटेरेस्ट नही हैं. ये जिम मेरे घर के पास हैं..इसलिए यहाँ आती हूँ..परेशान कर रहे हो तुम मुझे जबसे मिले हो..आज भी टकराए मुझसे..

मे: आब्बी? मैं टकराया? फिर से बताऊ क्या कि कौन और कैसे टकराया?? बोलो!!?

बोलती बंद..

मे: इतना गरम मत रहा कर हमेशा..मेल्ट हो जाओगी कभी.. देखो..लाइन नही मार रहा तुमपे.. लाइन मार रहा होता तो सॉफ सॉफ बता देता कि मार रहा हूँ लाइन..यहाँ सब मेरे फरन्डस हैं..सो मुझे अच्छा नही लगेगा कि किसी मिसांडरस्टॅंडिंग की वजह से एक दुश्मन हो जाए..

वो मेरे तरफ देखने लगी अब;

मे: एस्पेशली इतनी क्यूट दुश्मन.. मुश्किल होती हैं निभाने मे दुश्मनी..

मेरे ऐसा कहते ही, वो एक दम गाल के गाल मे हसी. मुझे दिखाई नही मगर मैं समझ गया.

सारिका: व्हाटेवेर.. हटो अब! जाने दो..

मे: मेरे हटने की ज़रूरत नही कुछ..तुम वैसे भी जा सकती हो..बोहोत जगह हैं..और तुम्हे देख कर लगता नही कि तुम्हे ज़्यादा स्पेस चाहिए ऐसा..खुद ही रुकी तुम. गॉड नोस व्हाई!!

मैं उसे छेड़ते हुए बोला..

सारिका: व्हाटेवेर!!!

मे: लगता हैं आज घर से एक ही वर्ड याद करके आई हो इंग्लीश का..

सारिका: क्या??

मे: कुछ नही कुछ नही..जाओ..

मैने फिर भी थोड़ी बाइक पीछे ले ली ताकि वो जा सके..अच्छे से..वो सीढ़ियो से उतार कर चलती बनी..

मे: अरे बाइ नही बोलते क्या तुम लोगो मे?

नो रिप्लाइ! मैं हँस दिया.. इस लड़की से जितनी बार बात करूँ..और भी ज़्यादा कार्टून होते जाती हैं ये..

मैं उसके बारे मे सोचता हुआ घर आ गया. घर आते आते 8 बज गये. मैं फ्रेश हुआ और डिन्नर करने नीचे चला गया. .आकांक्षा नीचे डाइनिंग टेबल पे बैठी थी.. अब जबसे वो सुबह का किस्सा हुआ था तबसे वो मुझे सॉर्ट ऑफ अवाय्ड ही कर रही थी. मैने 2 बार नोटीस किया इससे पहले भी कॉज़ ऐसा हुआ कि मैं और वो साथ मे ही अपने अपने रूम्स से निकले मगर उसने मुझे देखते ही डोर बंद कर लिया.. पहले मुझे ऐसा लगा कि ये तो पागल ही हैं..सो हो सकता हैं कोई नया भूत सवार हो गया हैं. मगर अब जब मैं डाइनिंग टेबल के पास आया और रूम मे कोई नही था, आकांक्षा ने झट्से अपनी नज़रें नीचे झुका ली.

मैं समझ गया कि ये अब भी उस दिन के किस्से की वजह से मुझसे नज़रें नही मिला पा रही.. तो मैने सोचा कि मैं ही चला जाता हूँ..मैं किचन मे चला गया… मम्मी खाना बना रही थी.

मे: क्या पकाया हैं?

मम्मी: आलो मेथी…

मे: अर्र्र्ररर….

मम्मी:क्या अर्ररर??

मे: मम्मी..मेथी खाना अच्छा नही रहता..

मम्मी: ऐसा क्या?! क्यू अच्छा नही रहता?

मे: क्यूकी मेथी खाने से मुझे अच्छा नही लगता.. सो उससे मेरा मूड खराब होता..मूड खराब रहा तो उसका डाइरेक्ट असर इंसान के दिमाग़ पे होता हैं..

मम्मी हँसने लग गयी..

मम्मी: क्या लंबी लंबी फैंकते तू… बाप रे! कहाँ से सीखा?

मे: हेयरिडेटरी…

मम्मी: हाँ क्या!! जा अब..बनाने दे खाना..

मैं मुड़ने से पहले मम्मी बोली;

मम्मी: अच्छा सुन..चिकी का कॉल आया था??

मे: नही ना मम्मी..ऐसा ही कहते हैं ये रिलेटिव्स सब. तुमको नही पता..ऐसा दिखाते हैं कि जैसे बोहुत ही इच्छा हैं मिलने जुलने की..और रिश्ता बढ़ाने की..इसीलिए पूछ लिया उसने आपको मेरे बारे मे..नंबर भी ले लिया ताकि आपको लगे कि सच मे कॉल करेगी..सब बंड्लबाज हैं…

मैं आगे कहूँ उससे पहले ही;

‘मुझे आया था दीदी का फोन…आज सुबह ही आया था’

मे: आंड व्हाट आ सर्प्राइज़? एक पागल ने दूसरी पागल को कॉल किया..आज की ताज़ा खबर…

मम्मी: सम्राट!!!

मे: सॉरी…

मम्मी: क्या बोली चिकी? कैसी हैं वो?

आकांक्षा: अरे बोहोत ही अच्छी हैं वो..इतना मज़ाक करती ना वो कि क्या बताऊ मम्मी तुमको..ओह माइ गॉड…

मे:ऊऊहहानन्न नॅना ना…ओ माइ गॉड वो भी इंग्लीश मे..

आकांक्षा: ममी!!!!!!?

मम्मी: सम्राट!! बॅस कर.

मे: हुफफफ्फ़…..ओके!

आकांक्षा ने टेप स्टार्ट कर दिया अपना..

 


आकांक्षा: बता रही थी सब कुछ.. भैया भाभी हनिमून को गये हैं बोली. बहुत लंबी बात चली हमारी.. मुझे ना मम्मी आपने बड़ी बेहन देनी चाहिए थी..ये यूस्लेस जानवर दे दिया..

मे: हाँ मम्मी… मैं भी कयि बार ऐसा ही सोचता हूँ.. ये यूस्लेस जानवर कहाँ से दे दिए आपने मुझे.. हमारे ख़यालात काफ़ी मिलते हैं.. हैं ना जानवर??

वो मूह बनाते हुए मेरी ओर देखने लगी और बोली;

आकांक्षा: अब ऐसे लड़के से कौन बात करेगा आप ही बताओ?

मे: हू केर्स…? बात ना भी करे तो मेरा क्या जा रहा है…

मम्मी: अच्छा ये अब नेवेर एंडिंग वॉर ख़त्म करो और पानी वानी लो..चलो जल्दी..

हम खाना खाते हुए बाते करने लगे..

मम्मी: तू खुद ही कॉल कर लेना उसे?

मे: अर्ररे यार..अब ये क्या नया नाटक हैं? इतनी पीछे क्यो लगी हैं? अब मेरा कोई कॉंटॅक्ट नही हैं. क्या बात करूँ उससे? वैसे भी रिलेटिव्स से बात करना मुझे नही आता.. कुछ सूझता ही नही हैं..

पापा: सिर्फ़ रिलेटिव्स से बात करते वक़्त ही नही सूझता हैं ऐसा नही हैं सम्राट..

आकांक्षा: हाहहहाहा….

मे: हहा.. आपकी ही कमी थी.. आ जाओ आप भी मैदान मे.. आंड ओये..तू क्या हँस रही? खाना खा चुप चाप से..

पापा: देख बेटा.. अब उसने तेरे बारे मे पूछा तेरी मम्मी से.. और नंबर भी लिया तेरा.. मतलब वो बात करना चाहती हैं. बेहन हैं तेरी. रिश्तो को ऐसे नही तोड़ते रहते बेटा.

मे: पापा..उसने मेरा नंबर लिया? करेक्ट?

पापा: हाँ..तो?

मे: तो नंबर क्या दिन भर देखते रहती हैं क्या? इस पागल को अगर वो कॉल कर सकती हैं तो क्या मुझे नही?

मम्मी: अर्रे..अककु छोटी हैं उससे..तू तो बड़ा हैं ना..?

मे: ओके..अगर मैं कह दूं कि मैं उसे कॉल करूगा तो क्या आप लोग मेरी जान खाना छोड़के खाना खाओगे?

मम्मी: हाँ..ठीक हैं.

पापा: नही.. नही..

मे: हुहह? नही क्या नही? अब क्या हुआ? कह तो दिया कॉल करने के लिए..और क्या चाहिए?

पापा: बेटा..मैं बाप हूँ तेरा..मुझे ही टोपी पहनाएगा.

मे: अभी तो नही पहना रहा..यूष्यूयली आइ डू..

पापा: अच्छा??

मे: हाँ बट अब क्यू नही कहा?

पापा: जब तू कॉल करेगा तब हम तेरी जान खाना छोड़ेगे..

मे: मुझे समझ नही आता.. इससे पहले तो किसी और को कॉल करने के लिए आपने नही ऐसा फोर्स किया..अब क्या हुआ??इसमे ऐसा क्या हैं?

पापा: वेल..टू बी ऑनेस्ट.. तेरी मम्मी कह रही हैं..बॅस..

मम्मी ने पापा को थोड़ा लुक दिया..

पापा: मे ,…मेरा मतलब हैं कि मम्मी कह रही हैं इसलिए ही बॅस नही.. करना चाहिए तूने कॉल..

आकांक्षा: हहहे…स्मार्ट पापा..

मे: तुझे तो हहेहहे करने के लिए ही पैदा किया हैं बस. और कुछ काम की नही..

मम्मी: अरे बॅस भी करो अब तुम लोग..और सम्राट..

मे: हां माताजी..मैं धरती माँ की सौगंध खाता हूँ कि मैं कल कॉल करूगा?

आकांक्षा: किसे?

पापा: गुड क्वेस्चन बेटा..

मे: अरे वोही..चैत्राली को..खुश? खाना खाओ अब शांति से सब..

मैने टेबल के नीचे से आकांक्षा को एक लात मारी और कहा;

मे: तू तो रुक..बताता हू तुझे मैं..देख ना तू.

वो मुझे जीभ दिखाती हुई चिढ़ाने लगी..

खाना ख़ाके मैं रूम मे चला गया.. और सोचने लगा कि क्या नया झोल हैं साला ये? क्या घंटा बात करू मैं उससे? एक तो रिलेटिव,उसमे भी लड़की.. कुछ हैं ही नही बात करने के लिए मेरे पास उससे..? जहा तक मुझे याद था बचपन मे बोहोत ही ज़्यादा हद तक बोरिंग लड़की थी वो. कुछ नही कहेगी? बॅस पागल जैसी एक जगह बैठी रहेगी..

मे: फक ब्बीयी..

मैं अपना काम करने लगा..उतने मे ही मसेज आया वाट्सॅप पे.. पायल का था.

‘हे’

मैने एक घुस्से वाला एमो सेंड कर दिया..

मे:

पायल:ओई?? ये क्या?

मे:तुझे मीनिंग नही सम्ज़ा इस एमो का

पायल:अरे..वो पता हैं..बट ये???

मे:व्हाई?? कहाँ मर गयी तू?

पायल:अरे मरे मेरे ढहूऊस्समन..

मैं क्यू मारने लगी??

मे:लग तो ऐसा ही रहा हैं? कल कितने मेसेज किए तुझे..नो रिप्लाइ.नो मसेज..अम्तंग.

पायल:अरे बताया था ना..नासिक आई थी

नेटवर्क का झोल हैं वहाँ.

मे:और उसके बाद.??

पायल:अरे..काम मे थी..तेरे जैसी नही मैं....

मे:हाँ हाँ..दुनिया मे एक तुझे ही काम रहते हैं ना.

पायल:अरे बॅस ना अब..फ्री होते ही तुझे.मसेज की मैने..सी!!

मे:हाँ..आपका बोहोत बोहोत शुक्रिया मेसेज करने का..

पायल:इतना क्या भड़क रहा तू..शांत होज़ा..वस्सूप

मे:नतिंग..जस्ट हॅड डिन्नर..यू?

पायल:मी टू.

मे:ह्म्म्मय…

पायल:क्या ह्म्म्म ?? भड़क तो ऐसे रहा हैं तू..जैसे 1000 बाते करनी थी मुझसे..

मे: हाँ तो करनी ही थी..नोट एग्ज़ॅक्ट्ली बाते..बट 1000 बार करना हैं ना कुछ..

पायल:क्या करना हैं?द

मे:अरे वोही..जो करने मे बोहोत मज़ा आता हैं..हम दोनो को..

पायल:ऐसा क्या हैं जो करने मे दोनो को मज़ा आता हैं??

मे:सोच ना तू ही..

पायल:उम्म्म..नही तो ..ऐसा तो कुछ नही जो करने मे हम दोनो को मज़ा आता हैं.

मे:सीरियस्ली? कुछ नही याद आ रहा ?

पायल:नही नाअ.नोथनग..

मे:हिंट दूं?

पायल:हाँ दे ना.

मे:वो करते वक़्त हम ने कपड़े नही पहने होते हैं.

पायल:ओह्ह…कमीना..समझ गयी..तू ना…

मे: वोही…

पायल:ह्म..वो तो हो गया कबका!!

मे:हुहह??हो गया?? कैसे हो गया?अकेले कैसे की??

पायल:अरे? उसमे क्या हैं? अकेले ही करती हूँ वो मैं.

मे:वोही तो पूछ रहा??

पायल:अरे..बोहोत मज़ा आया..सीरियस्ली.. बड़ा सुकून मिला मुझे तो वो करके!

मे:तू क्या कह रही??

पायल:तू नहाने की ही बात कर रहा ना??

मे:अर्रे उल्लू की दूंम..मरजा कही ..मर जा कही जाके तू..

पायल:अब्बे?? मैं क्यू मरूं? मैने क्या किया..??

मे:ग्न..म स्लीपिंग..

पायल:ओये…

हेलो??

 


सम्राट? कहाँ गया?? हहहीहे..

लॉल…..

तू तो चिढ़ गया.. हहे…

गुडनाइट

पायल से बात करने के बाद मैं अपना काम करने लगा. काम करते करते मुझे यूथिका की याद आई. मैने उसे लास्ट टाइम मसेज किया था अबाउट सेट्टिंग अप आ टाइम सो दट वी कॅन टॉक. मैने सोचा चलो चेक करते हैं कि कुछ रिप्लाइ आया हैं या नही. मैने दूसरा सिम डाल दिया मोबाइल मे और वेट करने लगा. कुछ ही देर मे मेसेज आने स्टार्ट हो गये.

“हे… हा.. आइ ऑल्सो थिंक सो. व्हाट टाइम आर यू फ्री?”

मे: हाई.. अरे बताया ना कि आइ गेट फ्री अट नाइट..

यूथिका: ओह्ह हाँ.. कूल..

मे:सो?? हाउ’स इट गोयिंग??

यूथिका:चल रहा हैं..जस्ट हॅड डिन्नर.

मे: सेम हियर..एनीवे.. तुमने बताया नही कि तुम हो कौनसी सिटी से?

यूथिका: ई नो!

मे: सो?? व्हेयर आर यू फ्रॉम?

यूथिका: अगर मुझे वो बताना ही होता तो पहले ही बता दिया होता.. दा फॅक्ट दट आइ हेवन’ट टोल्ड इट टू यू सो फार मीन्स दट आइ डॉन’ट वॉंट यू टू नो..राइट?

मे: व्हाई? सीक्रेट एजेंट हो क्या? 007??

यूथिका: नही..लड़की हूँ ना..

मे: अगर इतनी ही कन्सर्वेटिव हो तो तुम ऐसी साइट पे क्या कर रही थी?

यूथिका: मतलब?

मे: मतलब ये कि इट’स आ सेक्स चॅट साइट.. आंड जैसा तुम दिखा रही हो कि तुम ‘वो’ टाइप की लड़की नही.. सो व्हाट वर यू डूयिंग देयर? कॉज़ वहाँ मोस्ट्ली सब हॉर्नी लोग ही रहते हैं.

यूथिका: दट’स नोन सेन्स..

मे: ईज़ इट?? चेक दा नेम ऑफ दा साइट.. यू विल फाइंड दा सेन्स..

यूथिका: आइ नो कि इट’स आ सेक्स साइट.. बट डज़न्’ट मीन दट यू हॅव टू बी देयर जस्ट फॉर सेक्स ओन्ली.. पीपल कम देयर टू जस्ट टॉक ऑल्सो..

मे: या..राइट..एवर सिन्स फ़ेसबुक वाज़ शट डाउन..सब लोग वही तो आते हैं सोशियल नेटवर्किंग के लिए.. इट्स बूमिंग रियली..

यूथिका: हुहह? फ़ेसबुक क्लोज़ हो गया? ये कब हुआ?

मे: हे राम! सार्कॅज़म से कोई रीलेशन नही लग रहा तुम्हारा दूर दूर तक..

यूथिका: इसमे क्या सार्कॅज़म? आइ आम जस्ट आस्किंग..

मे: व्हेन वाज़ दा लास्ट टाइम यू चेक्ड युवर फ्ब पेज?

यूथिका: अभी 15 मिनट पहले..

मे: सो अगर फ्ब क्लोज़ होता तो चेक कैसे कर पाती फ्ब पेज खुदका? यू डॉन’ट सीम टू बी वेरी ब्राइट..

यूथिका: शट अप! आइ आम ब्राइट..

मे: हा हा..चमक दिख रही हैं.

यूथिका: लुक अगर तुम मेरी इन्सल्ट ही करना चाहते हो तो आइ डॉन’ट थिंक आइ वाना टॉक टू यू.

मे: इन्सल्ट का क्या इसमे? यू आर दा वन हू ईज़ ट्राइयिंग टू बी सम्वन एल्स एंटाइर्ली आंड हाइडिंग व्हाट यू आर ट्रूली लुकिंग फॉर..

यूथिका: व्हाट डज़ दट ईवन मीन?

मे: वेल..फॉर स्टार्टर्स.. यू अरे रियली ट्राइयिंग हार्ड टू शो दट यू आर आब्सोल्यूट्ली कन्सर्वेटिव गर्ल.

यूथिका:व्हाट डू यू मीन ‘ट्राइयिंग?’ आइ आम व्हाट आइ से आइ आम..

मे: आर यू?? रियली? लुक..आइ सी प्लेंटी ऑफ गर्ल्स लाइक यू अवर्रडे..ट्राइयिंग टू फूल अदर्स..

यूथिका: आइ आम नोट फूलिंग यू..तुम्हे अब भी लगता हैं कि मैं लड़का हूँ? लड़की नही?

मे: ओह्ह आइ नो कि तुम लड़की हो..वो डाउट नही रहा मुझे अब

यूथिका: सो?? व्हाट इट ईज़ युवर डाउट नाउ?

मे: क्वेस्चन ईज़ व्हाट ईज़ युवर डाउट नाउ?

यूथिका: लुक…यू आर बीयिंग रियली वियर्ड.. लगता हैं ग़लती हो गयी मेरी जो तुम्हे मैने अपना नंबर दिया.

मे: मेबी यस.. बट आ गर्ल हू गोज़ टू सेक्स चॅट साइट्स जस्ट सो दट शी कुड टॉक टू सम्वन आंड नोट अबाउट सेक्स.. इट’स मोर वियर्ड दॅन यू थिंक आइ आम बीयिंग…. सो दो ही बाते हो सकती हैं.. या तो तुम बोहोत ही ज़्यादा दिखावा कर रही हो कि तुम बोहोत ही अच्छी लड़की हो और सेक्स के बारे मे कुछ भी नही जानती..या तुम बोहोत ही अकेली हो कि तुम्हारी लाइफ मे कोई नही हैं जिससे तुम बात कर सको..

 
यूथिका: तुम मुझे जानते भी नही हो और इतनी बकवास करने लगे मेरे बारे मे.. समझते क्या हो तुम खुद को? ईडियट.. ग़लती हो गयी तुमसे बात की जो मैने.. इसीलिए हम इंडियन गर्ल्स देसी लड़को से चॅट नही करती हैं..तुम्हारे सवाल का जवाब मिल गया अब? गुडबाइ..गेट लॉस्ट..

मे: हाँ.इंडियन लड़किया होती ही ईडियट हैं..तभी तो ऐसी बाते करती हैं.. गेट लॉस्ट टू यू टू..

मैने फोन बेड पे रख दिया और कहा;

मे: ह्म्म्म …नाउ लेट्स वेट फॉर दा आउटकम..

आप सोच रहे होगे कि ये क्या चूतिया लड़का हैं जो हाथ आई लड़की से ऐसे बाते करके उसको भगाने के पीछे पड़ा हैं.. वेल. इट मे लुक लाइक दिस.. बट अगर आप किसी से कुछ चाहते हो तो आपको उस इंसान को मनिपुलेट करना ज़रूरी होता हैं. उससे सिवा आपको वो चीज़ कभी नही मिलेगी जो आप चाहते हो.और किसी को मनिपुलेट करने का सबसे आसान तरीका हैं कि ये पता करो कि वो इंसान चाहता क्या हैं? ऐसी कौनसी चीज़ हैं जो वो ढूँढ रहा हैं मगर उसे मिल नही रही हैं? ऐसे लोगो को ये यकीन होता हैं कि कभी ना कभी जो वो ढूँढ रहे हैं,ज़रूर मिल जाएगा..चाहे आज,या कल या परसो..कभी ना कभी तो मिलेगा. एक बार अगर आप ये पता कर लेते हो कि वो इंसान चाहता क्या हैं तो आपको बॅस एक सिंपल सी चीज़ करनी होती हैं.. वो ये कि उस इंसान को इस धोके मे रखो कि वो चीज़ उसे मिलने नही वाली.. और जो चीज़ हमे नही मिलती, उस चीज़ के लिए तड़प बढ़ती ही जाती हैं. जितना तडपाओगे, उतना ही वो अपना आपा खोते जाते हैं और जल्दबाज़ी मे ऐसा कुछ कर देते हैं जिससे कंट्रोल आपके हाथ मे आ जाता हैं.

यूथिका,एक लड़की जो सिर्फ़ इसलिए साइट्स तो साइट्स घूमती हैं ताकि उसे कोई बात करने के लिए मिल जाए. इसका एक ही मतलब हो सकता हैं..वो ये कि वो बोहोत ही ज़्यादा अकेली हैं और चाहती हैं कि कोई उसे सुने जो वो कहना चाहती हैं. लोन्लिनेस ईज़ दा मदर ऑफ डेस्परेशन..और एक डेस्परेट इंसान कुछ भी कर सकता हैं. मैने बॅस उसे इस डेस्परेशन की याद दिलाई हैं. अब मुझे वेट करना हैं कि वो बात उसे कब चुभती हैं और वो कब अपना आपा खो कर मुझे मेसेज करती हैं. अगर मेरा प्लान सक्सेसफुल हुआ तो मैं इस लड़की को जैसा चाहूं वैसा मनिपुलेट कर सकता हूँ. ये मनिप्युलेशन की टेक्नीक आप किसी भी इंसान पे चला सकते हो.. बॅस आपमे उतनी समझ और उतना पेशियेन्स होना चाहिए.

हमेशा से ये सब मैं नही जानता था. नही समझ पाता था कि कैसे किसी को यूज़ किया जा सकता हैं, या किसी को कंट्रोल किया जा सकता हैं. कंट्रोल की पवर क्या होती हैं? नही जानता था. मगर जब आप खुद पवरलेस होते हो तो आपको उसकी एहमियत समझ आती हैं. नेहा से ब्रेक अप होने के बाद मैने इस बात को समझा. सिर्फ़ समझा ही नही, उसे महसूस भी किया हैं कि कंट्रोल जब छूट जाता हैं तो कैसा लगता हैं. सो,ऑनेस्ट्ली, क्रेडिट गोज़ टू माइ डियरेस्ट फरन्ड वरुण.

 
10 मिनट हो चुके थे लास्ट मेसेज आने को यूथिका का.

मे: दट’स अबाउट टाइम नाउ.. टिक टिक 1………….

नतिंग..

मे: टिक टिक 2……………

स्टिल नतिंग…

मे: टिक ती……….

‘बीप’

मे: बिंगूऊऊ…..!!!!!

मोबाइल पे मेसेज आया..चेक किया…

‘यू देयर??’……………………

मसेज देख कर मैं मुस्कुरा दिया..नाउ ऑल आइ हॅव टू डू ईज़ टू चेक दा लेवेल ऑफ हर डेस्परेशन. मैने मोबाइल मे से सिम निकाल दिया. उसका एक बड़ा सिंपल रीज़न हैं. हम मसेज पॅक आक्टीवेट करते हैं.पैसे देकर रीचार्ज करवाते हैं. चाहे कोई भी क्यू ना हो, अपने पैसे वेस्ट तो नही जा रहे ना इस बात की गॅरेंटी सभी लोगो को चाहिए होती हैं. इसीलये लोग,स्पेशली हम लोग, मसेज डेलिवर हुए या नही इस के लिए ‘डेलिवरी रिपोर्ट’ आक्टिव करके रखते हैं. अगर मसेज डेलिवर हुआ तो एक रिपोर्ट मेसेज आ जाएगा. सिंपल! अब अगर मेसेज डेलिवर नही हुआ तो बेचैनी बढ़ती जाती हैं. धीरे धीरे..मैने मोबाइल स्विच ऑफ करने से मुझे मेसेज डेलिवर नही हो रहे थे. मगर ये बात उसे नही समझ आएगी., उसकी बेचैनी बढ़ती जाएगी. कॉज़ आइ हॅव पोक्ड हर व्हेयर इट मॅटर्स दा मोस्ट. दा फॅक्ट दट शी ईज़ लोन्ली मेक्स हर वल्नरबल.

आइ नो, आइ नो..आप सोचोगे कि कितना कमीना इंसान हूँ मैं.. मगर भाइयो और उनकी बहनो.. कभी कभी कुछ जीतने के लिए,कुछ हारना भी पड़ता हैं.. जो मुझे चाहिए वो पाने के लिए मैने अपनी अच्छाई खोई..अब यूथिका मेसेज पे मेसेज करेगी..बार बार लगातार..जो मुझे डेलिवर होगे नही..गेम बिगिन्स..

मैं मोबाइल मे से सिम निकाल के आराम से सो गया और अब सीधा कल रात को ही चेक करूगा मैं यूथिका के मेसेज. कल आने वाले उसके मसेज की टोन पर से मैं समझ जाउन्गा की आख़िर ये लड़की चाहती क्या हैं और किस हद तक चाहती है. कुछ ही देर मे मुझे नींद लग गयी और मैं सो गया. अगले दिन सॅटर्डे था इसीलिए मुझे सुबह उठने की ज़्यादा कोई गड़बड़ नही थी. आरामसे सो सकता हूँ. इतना सोच के उतने मे ही मेरे दिमाग़ मे घंटी बजी;

‘आकांक्षा की डाइयरी!!!’

मेरे दिमाग़ मे से ही निकल गया था कि मैने आकांक्षा के रूम मे जीतने भी लॉक्स हैं, सबकी एक एक कॉपी कीस बनाके रखी हैं. ट्यूसडे को आकांक्षा का बर्थ’डे भी हैं. मतलब वो कल ही शॉपिंग को जाएगी. देन आइ कॅन स्नीक इंटो हर रूम आंड सी व्हाट’स नेक्स्ट? मैं एग्ज़ाइटेड हो गया था सोच के कि कल मुझे आगे क्या क्या हुआ वो पता चलेगा..मैं सो गया.

सुबह 9 बजे मेरी नींद खुल गयी. मैं आराम से ब्रश करते करते घर मे घूमने लगा. ऐज एक्सपेक्टेड घर मे कोई नही था. मैने ब्रश किया,बढ़िया सी कॉफी बनाके अपनी रूम मे गया,कॉफी का मग टेबल पे रखा,क्लॉज़ेट खोला और आकांक्षा के रूम की कीस निकाली. उस दिन के बाद आज पहली बार मैं आकांक्षा के रूम मे आया हूँ. ऐज यूषुयल, एवेरितिंग वाज़ पिंक..मुझे समझ नही आता कि ये पिंक का अब्सेशन क्या होता हैं गर्ल्स को इतना? एक बार रूम का एक चक्कर लगाया.. आकांक्षा कैसी भी बेवकूफ़ क्यू ना हो,मगर रूम एक दम क्लीन रखती हैं वो. इनफॅक्ट एक धीमी धीमी सी खुश्बू सी आती हैं उसकी रूम मे. वेरी प्लेज़ेंट!

 
मैने ज़्यादा टाइम वेस्ट करना ज़रूरी नही समझा. आइ वाज़ जस्ट टू डॅम एग्ज़ाइटेड अबाउट रीडिंग डाइयरी. मैने बेड के नीचे का प्लांक उपर उठाया और सब कुछ उसी तरह से रखा था जैसा मैने पहली बार देखा था. टिप टॉप! बॉक्स के अंदर डाइयरीस रखी थी. मैने लास्ट पढ़ी हुई डाइयरी उठाई और वापिस से प्लांक नीचे करने ही वाला था तो मुझे कुछ याद आया और मैने लेटेस्ट वाली डाइयरी भी साथ मे ले ली और रूम मे चला गया. डोर लॉक किया और कॉफी पीते पीते डाइयरी पढ़ने लगा.

..

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आज पहली बार ऐसा हुआ हैं कि मैं एक ही दिन मे दो दो बार लिख रही हूँ डाइयरी मे कुछ.. आज स्कूल से आने के बाद जो हुआ मेरे साथ..वो मैं किसी के साथ शेयर नही कर सकती. इसीलिए मैं फिर से लिख रही हूँ. क्योकि जबसे मैं अपने रूम मे आई हूँ,मेरे दिमाग़ से वो बात जा नही रही बिल्कुल. और ना ही वो एहसास मैं भुला पा रही हूँ जो मुझे तभी हो रहा था. मम्मी ने तभी डोर नॉक करके जैसे मुझसे कुछ छीन लिया. मैं समझ नही पा रही कि आख़िर मैं करूँ तो क्या करूँ? क्या मैं दोबारा????...आख़िर ये सब क्या हो रहा हैं? शायद निशा इस के बारे मे कुछ जानती होगी..मगर उससे बात करना सही होगा या नही? मैं नही जानती. वो मेरी दोस्त हैं..सबसे अच्छी.. मुझे पीरियड्स के वक़्त भी उसीने समझाया था. मैं कल उसीको पूछ कर देखती हू इस बारे मे….

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अगले दिन मैं स्कूल बस का वेट कर रही थी और मेरे दिमाग़ मे 1000 बार एक ही सवाल घूम रहा था. राजीव मेरे बारे मे क्या सोच रहा होगा मेरी कल की हरकत के बाद? और 500 बार ये सवाल घूम रहा था कि निशा से कैसे बात करूँ. मैं अपनी सोच मे ही थी कि मुझे स्कूल बस के हॉर्न की आवाज़ आई..मैं बस मे चढ़ते से ही…

“ओईए…”

मैने नज़र घुमा कर देखी..निशा थी..इशारा कर के बुला रही थी..

निशा: कितना टाइम लगाती तू आने मे? कब से सीट बचा कर रखी तेरे लिए!!

मे: मैं खुद तो बस नही चलाती जो मेरी ग़लती होगी! अब जब बस आती हैं तब मैं बैठ जाती हूँ..

निशा: व्हाटेवेर!!

मे: हहे..आ गयी तेरी गाड़ी व्हाटेवेर पे??? अच्छा सुन..

निशा: फरमाइए..

मे: मुझे ना तुझसे कुछ बात करनी हैं..

निशा: हाँ तो बोल ना..

मे: अर्रे पागल.. यहाँ नही..अकेले मे बात करनी हैं.

निशा: ऐसी क्या बात करनी हैं?? ओईईोईए…लगता हैं किसी ख़ास इंसान के बारे मे बात करनी हैं तुझे!!

मे: तू कभी तो सीरियस्ली लिया कर मेरी बाते निशा!!

निशा: अरे रिलॅक्स..इतना क्यू भड़क रही?? करेगे ना बात..वो सब जाने दे..कल क्या कहा राजीव ने??

मैं राजीव का नाम सुनके शरम गयी..

निशा: हाए री मेरी बन्नो रानी.. शर्मा तो ऐसी रही है जैसीए….

मैं निशा की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी..

मे: शट अप निशा..

कहके मैं झूठमूठ का थप्पड़ लगा दिया निशा को..हम इधर उधर की बाते करने लगी..उतने मे स्कूल भी आ गया.

मे: रिसेस मे बात करनी हैं..याद रखना..

निशा: नही नही…शांति से खाना खाना हैं मुझे..रिसेस नही.

मे: तो??

निशा: तू टेन्षन ना ले..मैं मॅनेज कर लुगी..

मैं कुछ कहूँ उससे पहली मेरी नज़र राजीव पर पड़ी.. उसके पापा उसे ड्रॉप करके जाते हैं ऑफीस.. कितना हॅंडसम दिखता हैं वो वाइट शर्ट और ब्लॅक पॅंट मे…वाउ! मैं उसे ही देखने लगी..वो जब भी सामने आता हैं मेरी साँसे उखड़ने लगती हैं और बोलती बंद हो जाती हैं..सो एंबॅरसिंग..मैं उसे घुरे जा रही थी और उतने मे ही उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और मैं तो जैसे डर के मारे पानी पानी होने लगी..वो आगे बढ़ते बढ़ते एक दम रुक गया..

‘ये क्यू रुक गया??’

मैने अपने आपसे ही कहा.. वो अब हमारी तरफ आने लगा..

मे: शिट!!!

निशा: हुहह? अभी? घर पे नही की क्या??

मे: सस्स्सस्स..शट अप निशा…चुप कर..वो देख..

निशा इधर उधर देखने लगी…

णीश: क्या देख??

मे: अरे..अक्कल की बेवकूफ़… वो…राजीव..यहीं आ रहा हैं..चल..

निशा: कहाँ चल?

मे: कही भी चल.. मगर यहाँ से चल..वरना….

मैं कुछ और कह पाती उससे पहले ही..

राजीव: हे!!

निशा: हाई..

मुझे समझ ही नही रहा था कि क्या कहूँ..वो मेरी तरह देखने लगा.

राजीव: आकांक्षा?? हाई..

मेरे फ्यूज़ उड़ गये थे..

मे: हूउहह??

निशा: हाई बोला वो…उल्लू..सॉरी राजीव..कान मे कुछ गया हैं इसके..सुबह से सुनाई नही दे रहा उसे..

निशा ने मुझे पिंच करते हुए कहा;

निशा: हाई बोल!!!

मे: हह..हह..हही…हाई..हेलो..

निशा: इतना नही….

मैं शरम से लाल पीली होने लगी. और वो मुझे ही देख रहा था.. क्या नसीब हैं…

राजीव: हेलो टू यू टू. तुम ठीक तो हो आकांक्षा? कल भी तुम अचानक चली गयी बात करते करते..और आज भी???

मे: वो….. कल….कल…कल कुछ याद आ गया मुझे..सूऊ…..

निशा: लंच बॉक्स छोड़ के आ गयी थी कॅंटीन मे..सो लेने चली गयी…

मे: हां..वो….वो..वोही..भूल गयी थी….मैं…म्म्म्मे रा…वऊू…

निशा: टिफिन..

मे: येस्स..टिफिन…टिफिन..भूल गयी थी…..वो…वाआहाआ…उम्म्म्म…

निशा: टाय्लेट मे!!

मे: हाँ..टाय्लेट मे..टिफिन…

राजीव: हुहह????टाय्लेट मे टिफिन…

मेरी ज़बान डाट नीचे दब गयी.ये क्या कह दिया? टाय्लेट मे टिफिन खाता हैं क्या कोई उल्ल्लू??

मे: नही…वो.टिफिन भूली कॅंटीन मे…. और ..उम्म्म्म…वो…याद आया…वाहा…उम्म्म्म…टाय्लेट मे…

निशा: हां..ये राइट हैं.

राजीव: ओह्ह्ह्ह…ओके कूल..सी यू देन…

निशा: हाँ..सी या राजीव..

 
मैने जस्ट बाइ किया किसी तरह और वो चला गया..वो जाने के बाद मुझे निशा की हँसी सुनाई दी.

मे:निशॅयायाया.आ…कामिनियियीयियी…रुक तो..बताती हूँ तुझे…

मैं उसकी जान ले लेती उससे पहले वो भाग गयी वहाँ से और मैं उसके पीछे पीछे . क्लास शुरू हो गयी.. 1’स्ट लेक्चर होने के बाद पता नही निशा को क्या हो गया..वो अपना सिर डेस्क पे डाल कर सो गयी..पहले 5 मिनट तो कुछ नही हुआ मगर कुछ देर बाद मेडम ने निशा को घूर्ना स्टार्ट काइया. मैने उसे 2-3 बार पोक किया निशा को की वो उठ जाए. मगर वो थी की टॅस से मस्स नही हो रही थी. फाइनली वोही हुआ जिसका डर था. निशा को मेडम ने पकड़ लिया..

मेडम: निशा?? स्टॅंड अप…

सारी क्लास हमारे बेंच की तरफ देखने लगी. मुझे बड़ा डर लगने लगा. वो भी देख रहा था. मेडम के कहने पर भी निशा खड़ी नही हुई तो मदन ने चिढ़ के कहा;

मेडम: निशा!!! आइ सेड स्टॅंड अप..

फिर कही जाके निशा खड़ी हुई..उसकी आखे लाल हो गयी थी जैसे रो रही हैं काफ़ी देर से.

मे: निशा?? क्या हुआ?? निशा?!!

सब लोग घूर रहे थे निशा को.मेडम भी आ गयी निशा के पास?

मेडम: व्हाट हॅपंड निशा? आर यू ओके?

निशा: मॅम`, आइ आम नोट फीलिंग वेल.

मेडम: ओह्ह्ह…क्या हुआ? फीवर हैं?

मे: नही मेडम. अभी स्कूल मे आते वक़्त तो ठीक थी..

मेडम: अचानक क्या हो गया??

निशा: आइ डॉन’ट नो मेडम. अच्छा नही लग रहा..

मेडम: ह्म्म्म्…ओके..यू गो टू दा रेस्टरूम..टेक सम रेस्ट. अगर फिर भी अच्छा ना लगा तो वी विल कॉल युवर पेरेंट्स आंड सेंड यू होम.

निशा कुछ नही बोली;

मेडम: आकांक्षा, गो वित हर!

मे: यस मॅम!

मैने निशा का हाथ पकड़ के उसे सहारा देते हुए बाहर निकली..

मे: आराम से निशा! चल..

उसकी आखे बोहोत लाल हो गयी थी. उसने अपना सर मेरे कंधे पे रख दी और हम क्लास रूम से निकल गये. निशा कुछ नही कह रही थी. मुझे बड़ा डर लगने लगा कि आख़िर अचानक हुआ क्या? रेस्टरूम तक जाने तक वो कुछ नही बोली. हम अंदर पहुँच गये.

निशा: अककु??

बड़ी दबी आवाज़ से वो किसी तरह बोल रही थी.

मे: हाँ निशा!? बोल..क्या चाहिए?

निशा: ज़रा देख तो बाहर कोई हैं क्या? नर्स या और कोई?

मैने बाहर जाके देखा..कोई नही था.

मे: रुक..मैं बुलाके लाती हूँ किसी को अभी.. यही रुक..

मैं मुड़ती उससे पहले ही;

निशा: आब्ब्बे ओये बेवकूफ़…

मैं तो घबरा के वही रुक गयी..

मे: हुहह??

निशा: अबे क्या हुहह हुहह करती रहती है.. बैठ चुप चाप.. तुझे बात करनी थी ना..यहा अब हम आराम से बाते कर सकते हैं..

मेरी समझ मे आ तो सब गया था मगर भरोसा नही हो रहा था कि निशा इतनी नौटंकी हैं.

मे: अरे ड्रामेबाज़ हैं तू बड़ी.. बाप रे!! बताई क्यू नही ऐसा करने वाली हैं? नालयक..

निशा: क्या? तुझे बता दूं और मिस कर दूं इतना फन?? शॅक्ल देखनी चाहिए थी तेरी तूने..मेरी तो हँसी छूट रही थी.

मे: बड़ी कामिनी हैं तू..

निशा हँसने लगी. मैं झूठ मूट का गुस्सा दिखाने लगी मगर कुछ देर बाद मुझे भी हसी आ ही गयी..

निशा: आ बैठ ज़रा पेशेंट के साथ..

मे: बॅस कर अब…

निशा: फाइन…. बोल,क्या बात करनी थी तुझको?

मे: ओह्ह..वो..आक्च्युयली ना…

निशा:बूओल्ल्ल्ल!!! फिर से कुछ हुआ क्या उस दिन जैसा?

मे:अर्रे नही..वो मंत मे एक ही बार होता हैं ना?

निशा: वोही तो..क्या हुआ देन?

मे: आक्च्युयली ना..कैसे बताऊ तुझे अब?

निशा: अककु..तू मेरी सबसे अच्छी दोस्त हैं..मुझे नही बताएगी तो किसे बताएगी?

बात तो सही थी उसकी.. इतना ड्रामा कोई बेस्ट फरन्ड ही कर सकती हैं. मैने एक गहरी साँस ली;

मे: ह्म्म्म्म …ओके! उस दिन याद हैं जब मैं वाइट टॉप पहन के आई थी? बर्थ’दे के दिन?

निशा: अर्रे कैसे भूल सकती हूँ वो दिन मैं?? क्या लग रही थी तू उस दिन? हर लौंडा तुझे घूर रहा था उ दिन..कसम से.. मेरा भी ईमान डगमगा गया था.

 
निशा हँसने लगी..

मे: ट्च..शट अप! ऐसा करेगी तो नही बताउन्गी मैं कुछ..

निशा: अच्छा..सॉरी सॉरी..बता..क्या हुआ?

मे: उस दिन जब मैं राजीव से बात कर रही थी. तब ना…

निशा: अर्रे बताएगी?

मे: तब बात करते करते मुझे कुछ होने लगा था. मेरी साँस बड़ी तेज़ चलने लगी थी..अजीब सा लग रहा था..और ना..मेरे…वो…

मैं अब भी कशमकश मे थी कि कहूँ या ना कहूँ..

मे: एम्म्म…मेरे….

आगे कहती उससे पहले ही;

निशा: निपल्स हार्ड हो गये थे…

मैं शॉक हो गयी निशा की बात सुनके..

मे: ओह्ह माइ गॉड! तुझे कैसे पता? किसने बताया तुझे? किसी ने देखा क्या उस दिन? हे भगवाअनन!!!

मैने अपना चेहरा हाथ मे छुपा लिया..

निशा: अर्रे ओये ड्रामा क्वीन… किसी ने कुछ नही बताया!

मे: नही नही,.तू झूठ कह रही. किसी ने तो बताया ही होगा. वरना तुझे कैसे पता चलता??

निशा: मुझे कैसे पता चलता??उम्म्म्म…हेलो????

मे: क्या? यही तो हूँ..

निशा: तू कुछ भूल नही रही??

मे: मैं तो खुदका नाम भी नही याद रखना चाहती..माइ लाइफ ईज़ ओवर..

निशा: शट अप!!! तू ये भूल रही हैं कि मैं भी एक लड़की हूँ..

मे: आआआहह….राइट.. तू भी..उम्म्म्म…सूऊओ..उम्म्म..ये जो भी मुझे हुआ..वो तुझे भी???

निशा: ऑफ कोर्स यार! कैसी बात कर रही हैं तू? पागल.. हर लड़की को होता हैं वो. और तुझे याद हैं मैने तुझे कहा था कि अब तेरा बेस्ट टाइम स्टार्ट होने वाला हैं?

मे: हाँ..याद हैं..

निशा: समझ ले हो गया..

मे: अरे मुझे कुछ अमझ नही आ रहा.

निशा: अरे मेरी भोली भाली दोस्त.. एक बात बता. जब तेरे निपल्स हार्ड हो गये थे..तेरे पेट मे भी कुछ फील हो रहा था?

मे: हाँ..

निशा: क्या?

मे: उम्म्म….गुदगुदी सी होने लगी थी.

निशा: और कही कुछ फील हो रहा था?

मे: नही..

निशा: झूठी… बता सच सच..

मैं इतनी एंबरीस्स हो रही थी.

मे: अर्रे..सच मे ना..

निशा: फिर झूठ..बताती हैं या दूं?

मे: ओके फीनी!!!! हो रहा था.

निशा: कहाँ?

मे: वो...वहाँ पर…

निशा: कहाँ पर??

मे: आररीए!!! वही..लेग्स के बीच मे.

निशा: हहेः…लेग्स के बीच मे.. बच्ची ही हैं तू..

मे: अब इसमे बच्ची का क्या हैं? जहा फील हुआ वही पे बताई तुझे…

निशा: हाँ तो उसे लेग्स के बीच मे नही कहते..नाम हैं उसका कुछ..

मे: वो फीलिंग को??

निशा: नही नही.. उस जगह को.

मे: क्या नाम हैं?

निशा: इंग्लीश मे उसे क्रॉच कहते हैं..मैने अपने पापा की एक बुक मे पढ़ा था..कुछ मेडिकल अनॅटमी की कुछ बुक थी..

मे: क्रॉच?

निशा: हाँ..

मे: और हिन्दी मे??

निशा: हिन्दी मे क्या कहते हैं मैं नही जानती…

मे: ओह्ह..

निशा: मगर मैने एक बार कुछ सुना था..

मे: क्या??

निशा: तुझे याद हैं क्या मेरे घर के ठीक सामने एक छोटी सी दुकान हैं?

मे: हाँ..पता हैं..जनरल स्टोर ना?

निशा: हां..वोही वोही.. वहाँ ना शाम को लड़के खड़े रहते है टाइमपास करते हुए..अपने से थोड़े बड़े..

मे: हाँ??

निशा: हाँ..तो उनकी बाते एक दिन मैं सुन रही थी बाल्कनी मे खड़ी होकर..कि आख़िर ये इतनी बाते करते हैं और हँसते क्यू हैं?

मे: तो? क्या सुनी तूने?

निशा: सब ठीक से नही सुनी मैने..मगर वो किसी लड़की के बारे मे बात कर रहे थे. दट’स फॉर श्योर.

मे: क्या कह रहे थे?

निशा: पता नही..मगर वो कह रहे थे कि वो लड़की का फिगर कितना अच्छा हैं..और उसके बोहोत ही बड़े हैं कह रहे थे..

मे: क्या बड़े हैं?

निशा: ओहू..वोही जो तेरे अभी बड़े हो रहे हैं..

पहले तो मुझे समझा नही.मगर जब निशा की नज़र वहाँ गयी तो मैं शरमा गयी.

मे: ओह्ह्ह..वो..ओके..

निशा: और एक लड़का कुछ उसके पैरो के बीच मे इशारा करके कह रहा था..एक वर्ड..मैने ठीक से सुना या नही पता नही..

मे: बता ना..क्या सुनी?

निशा: कुछ अजीब सा वर्ड कहा उसने. लंड!!!

मे: लंड???

निशा: हाँ..आइ थिंक हिन्दी मे ना क्रॉच को लंड कहते हैं..

मे: अजीब सा वर्ड हैं..

निशा: मुझे भी ऐसा लगा..लंड…तू आगे बता ना..

मे: हां तो वहाँ भी गुड़गुली होने लगी थी..

निशा: हां. होता हैं ऐसा..

मे: हाँ मगर घर जाके वो फीलिंग और भी बढ़ गयी. मैं जैसे ही रूम मे गयी उस दिन घर जाने के बाद..मुझे रोना आ गया.

निशा: तू तो किसी भी चीज़पे रोती हैं..

मे: नही निशा..उस दिन मैं डर रही थी.. मैं समझ नही पा रही थी कि निपल्स हार्ड कैसे हो गये. मैं देखना चाहती थी कि आख़िर हो क्या रहा हैं? तो…

निशा: क्या?

मे: तो ना..मैने अपना टॉप निकाली और मिरर के सामने खड़ी हो गयी. मैने पहली बार खुदको उस दिन वैसे देखा.. वो फीलिंग बड़ी स्ट्रॉंग होने लगी थी. मेरी साँस बोहोत तेज़ चलने लगी. पेट मे गुदगुदी होने लगी थी. मैने टॉप के अंदर से मॅक्सी पहनी थी..मगर उसमे से भी..

निशा: वेट….मॅक्सी?? तू अब भी मॅक्सी पहनती हैं?

मे: हां..क्यू? तू नही पहनती??

निशा: नही..

मे: हुहह??!!! मतलब तू वैसी ही??

निशा: अर्रे नही उल्लू..आइ मीन ब्रा पहनती हूँ मैं अब.

मे: ब्रा?

निशा: हाँ.ट्रैनिंग ब्रा..

मे: मैं तो मॅक्सी ही पहनती हूँ..

निशा: मगर अब ज़्यादा दिन नही पहन पाएगी ऐसा लग रहा हैं मुझे.

उसने मुझे छेड़ते हुए कहा..

 
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