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Guest
बड़ी क्यूट सी लग रही थी वो. छोटी सी,क्यूट सी…गेहूवा रंग उसका और मासूम शक़्ल.. उतने मे ही मम्मी बोली;
मम्मी: सम्राट…वो देख..वो धीरज से जो लड़की बात कर रही ना?
मे: कॉनसी लड़की?
मम्मी: अर्रे वो देख ना..ब्लॅक कलर की साड़ी पहनी हैं उसने.. दिखी??
मे: हाँ हाँ..दिखी..क्या उसका?
मम्मी: अरे तू पहचाना नही क्या उसे?
मे: नही तो? कौन हैं वो?
पापा: अरे चीक्की हैं ना वो!!
मेरी तो आखे,कान,नाक, गान्ड..सारे छेद फट गये.. और अंजाने मे ही मैने कह दिया..
मे: फफफफफकुकक….!!
मम्मी: हुहह?क्या??
मैने रीयलाइज़ किया कि मैने ज़ोर्से कह दिया..
मे: सच???
मम्मी: तू कुछ और बोला.
मे: नही मम्मी.. सच ही बोला..
मम्मी: क्या बेशरम हैं तू.. ऐसी बाते कब्से करने लग गया तू?
मे: अरे..मैने सच ही कहा
पापा: सच ‘फ’ से स्टार्ट होता??
मे: ओह…वो तो ऐसे ही..फॅक बोला…आक्च्युयली एक फरन्ड हैं मेरी. मनीषा.. वो ‘स’ को ‘फ’ बोलती..सो आदत लग गयी..
मम्मी: ऐसा क्या! बना उल्लू और..
मे: बनाना क्या पड़ता है?
मैने दबी आवाज़ मे कहा..
मम्मी: फिर कुछ बोला?
मे: अरे कुछ नही..जाता हूँ अब मैं उपर.. फ्रेश होना हैं..
मम्मी: हाँ जा..
मैं काल्टी मारके निकल गया और उपर आके चेंज करके अपना काम करने लगा.. राटको खाना खाने के बाद भी 1 बजे तक काम चला. मैने एक अंगड़ाई भरी और सीधा चेयर पर से बेड पर उड़ी मारके पसर गया. मेरे दिमाग़ मे चिकी घूम रही थी अब. मैं जानता हूँ लोगो के लुक्स चेंज होते हैं मगर ये नही जानता था कि कोई ‘ए’ लड़की सीधा ‘XXX’ हो जाएगी. कसम से क्या लग रही थी वो..और ऐसी लड़की ने मेरा नंबर माँगी..अब मैं बेसब्री से वेट कर रहा था कि कब वो मेसेज या कॉल करे..ज़्यादा जल्दी भी नही कर सकता था मैं नही तो समझ जाती कि आइ आम ईगर टू टॉक टू हर..उतने मे ही मुझे यूथिका की याद आई. मैने फट से मेरा सिम चेंज किया..सेल स्टार्ट होते ही मुझे मेसेज आने स्टार्ट हो गये.
‘हे!’
“यौ देयर?’
‘हेल्ल्लो???’
मैं खुश हो गया.. बंदी, आइ मीन होप्फुली बंदी ही हो, डेस्परेट हैं बात करने के लिए हम से…मैने भी रिप्लाइ कर दिया.
‘हे’
और वेट करने लगा.. 15-20 मिनट बात करने के बात मैने सोचा कि अब शायद इसका रिप्लाइ ना आए..सो गयी होगी लगता..सब मेरे जैसे भूत तो रहते नही हैं.. मैने सोचा मैं भी सो ही जाता हूँ.
अगले दिन मैं सुबह उठके कॉलेज चला गया.कॉलेज जाके मैने सबसे पहले पायल को कॉल किया..’आउट ऑफ कवरेज एरिया’.
मे: हुहह? आउट ऑफ कवरेज एरिया?? कोन्से जंगल मे हैं मेडम.
मैने सोचा कि कॉलेज आएगी तो खुद ही कॉल करेगी.. लेक्चर्स स्टार्ट हो गये मगर पायल का कही आता पता नही था. मैने 3 4 बार कॉल किया,,सेम रेस्पॉन्स. .कॉलेज ख़त्म हो गया..मुझे लगा कि शायद आई नही अब तक वो नासिक से. मैने सोचा जाने दो.. जब भी पासिबल होगा कॉल करेगी खुद ही वो.. कॉलेज के बाद मैं घर चला गया..पढ़ाई की, असिगमेंट्स लिखे..वो सब करते करते शाम हो गयी.. मैं शाम का वेट ही कर रहा था क्योकि आज वो पागल मिलेगी. मैं थोड़ा सा एग्ज़ाइटेड था उसे मिलने के लिए. मैं फ्रेश होने चला गया..फाटसे चेंज किया और बाग भरने लाहा. इतने मे ही मुझे यूथिका की यादाई. कल रात को उसका कोई रिप्लाइ नही आया सो मैने सोचा एक बार चेक करने मे क्या हर्ज़ हैं. मैने सिम चेंज किया और सिम चेंज करते ही मेसेज आने लगे.
“हे! श्र्य मैं थोड़ी बिजी थी तो रिप्लाइ नही कर पाई. वस्सूप?”
मैने भी रिप्लाइ ठोक दिया;
“इट्स ओके.. आइ आम गुड. हाउ अबाउट यू?”
मसेज सेंड ही करने वाला था की मुझे याद आया कुछ;
“लिसन. आइ थिंक हम ने एक टाइम डिसाइड कर लेना चाहिए हमारी बात करने का. ऐसे तो कभी हमारी बात नही हो पाएगी. मैं रात मे अवेलबल रहता हूँ. लेम्मे नो!”
मसेज सेंड कर के मैने सिम चेंज कर दिया और जिम चला गया. रास्ते मे मैं सोच रहा था कि आज बात होगी या नही मेडम से. या आज आएगी भी या नही जिम को..कल के आइटम के बाद. ऐसे कई सारे सवाल मेरे दिमाग़ मे घूम रहे थे. मैं जिम पहुँच गया और पार्किंग मे गाड़ी पार्क करके उपर जाने ही वाला था तो मैने सोचा कि क्यू ना पार्किंग मे एक बार मेडम की गाड़ी देख ली जाए कि हैं या नही. मैने पूरी पार्किंग छान मारी. कही कोई आता पता नही था. मैं थोड़ा मायूस हो गया..कही उसने दूसरा जिम तो जाय्न नही कर लिया? मैं अपना मन मारके उपर चला गया..
ज्यों जिम मे घुसा रजत ने पकड़ लिया मुझे मेरे हाथ से जाकड़ के.. अब वो साला हल्क की पैदाइश, मेरा नन्हा सा बाइस्प उसके हाथ मे अपनी जान तोड़ रहा था..
मे: अर्रे सर!! एक ही हाथ हैं मुझे..
रजत: हुहह??
मे: आइ मीन राइट वाला सर..एक ही हैं..तो थोड़ा सा….
वो समझ गया..हँसके उसने हाथ छोड़ दिया मेरा और बोला;
रजत: कल क्या चल रहा था रे तेरा और वो लड़की का सम्राट? वो भी भाग गयी आंड उसके पीछे तू भी? चक्कर क्या हैं?
मे: अर्ररे कुछ नही सर.. उसको पूछना था कि जिम मे फीमेल ट्रेनर का कितना फीस हैं.
रजत: तो तुझसे क्यू पूछ रही थी वो??
मे: उसको लगा कि मैं ट्रेनर हूँ..
मेरी इस बात पे वो सांड़ ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा और बोला;
रजत: तू?? ट्रेनर?? जा भाई जा.. अंदर हैं तेरी स्टूडेंट…कर ट्रेन उसको.
मेरी तो बत्ती ही जल गयी ये सुनके की वो ऑलरेडी अंदर हैं जिम के.
मे: ओके सर.. मैं जाता हूँ अंदर..
इतना कह के मैं अंदर चला गया. शूस पहने और सीधा जिम फ्लोर पे. फ्लोर पे जाके मैं अपने पहचान के लोगो को ही हेलो करने लगा. रोज़ का ही रिचुयल था.. थोड़ा है शाइ करना और देन अपने काम मे लग जाना.. मैं इधर उधर ही बोलता हुआ आगे बढ़ता गया और उतने मे ही….
‘अरी.आआईई???’
मैं किसी से टकरा गया..2 सेकेंड संभलने को लगे और उसका आधा ये जानने मे कि टकराया भी किस से??
मे: ओह्ह.. यू!!
‘अर्रे कुठे बघतोस?? क्या मेरे पीछे पड़ गये तुम??’
मेडम ने आज ग्राइश कलर का टॉप पहना था और ब्लॅक स्वेट पॅंट्स.. थोड़ा सा क्लीवेज दिख रहा था टॉप मे से.तो नॅचुरली मेरी नज़र नीचे चली गयी. आप भी देख लो खुद..
अब ऐसा नज़ारा सामने आया तो कौन भला अपनी नज़रें मोड़ ले?? मैं भी देखने लगा.. मगर ज़्यादा देर नही देख पाया..
‘ओये हेलो??’
मैने सोचा अगर आज भी ये पकड़ लेगी मुझे घूरते हुए..तो वांदे हो सकते.. कुछ तो सोचना पड़ेगा..
मे: हुहह?? मैं..मैं तुम्हारे पीछे पड़ा हूँ?? ठीक हैं..मानता हूँ मेरा ध्यान नही था आगे की तरफ कॉज़ मैं मेरे फरन्डस को ग्रीट कर रहा था.. मगर तुम?? तुम्हारा ध्यान कहाँ था?? हुहह?? तुम तो आगे ही देख रही थी ना? और आगे मैं था.. मतलब तुमने मुझको देख कर भी सीधा मुझसे भीड़ गयी… हैं ना??
उसने शायद सोचा नही होगा कि मैं ऐसा भी कहूँगा..मेरे सवाल से वो कन्फ्यूज़ हो गयी..और हड़बड़ाने लगी.
‘ वो…माआ..मैं… उधाअर… तुमने….’
मे: क्या कोडवर्ड हैं क्या ये? हिन्दी मराठी इंग्लीश?? आती क्या कुछ? अभी तो बड़ी टॅपर टॅपर चल रही थी.. अब क्या हुआ?? बोलती बंद?? कल घुटने पे चोट लगी तो क्या दिमाग़ बंद हो गया?? हुहह?? बोलो
मैने सोचा कि अब ज़रा ऊट पहाड़ के नीचे आया.. इतने आसानी से तो नही छोड़ुगा.
मम्मी: सम्राट…वो देख..वो धीरज से जो लड़की बात कर रही ना?
मे: कॉनसी लड़की?
मम्मी: अर्रे वो देख ना..ब्लॅक कलर की साड़ी पहनी हैं उसने.. दिखी??
मे: हाँ हाँ..दिखी..क्या उसका?
मम्मी: अरे तू पहचाना नही क्या उसे?
मे: नही तो? कौन हैं वो?
पापा: अरे चीक्की हैं ना वो!!
मेरी तो आखे,कान,नाक, गान्ड..सारे छेद फट गये.. और अंजाने मे ही मैने कह दिया..
मे: फफफफफकुकक….!!
मम्मी: हुहह?क्या??
मैने रीयलाइज़ किया कि मैने ज़ोर्से कह दिया..
मे: सच???
मम्मी: तू कुछ और बोला.
मे: नही मम्मी.. सच ही बोला..
मम्मी: क्या बेशरम हैं तू.. ऐसी बाते कब्से करने लग गया तू?
मे: अरे..मैने सच ही कहा
पापा: सच ‘फ’ से स्टार्ट होता??
मे: ओह…वो तो ऐसे ही..फॅक बोला…आक्च्युयली एक फरन्ड हैं मेरी. मनीषा.. वो ‘स’ को ‘फ’ बोलती..सो आदत लग गयी..
मम्मी: ऐसा क्या! बना उल्लू और..
मे: बनाना क्या पड़ता है?
मैने दबी आवाज़ मे कहा..
मम्मी: फिर कुछ बोला?
मे: अरे कुछ नही..जाता हूँ अब मैं उपर.. फ्रेश होना हैं..
मम्मी: हाँ जा..
मैं काल्टी मारके निकल गया और उपर आके चेंज करके अपना काम करने लगा.. राटको खाना खाने के बाद भी 1 बजे तक काम चला. मैने एक अंगड़ाई भरी और सीधा चेयर पर से बेड पर उड़ी मारके पसर गया. मेरे दिमाग़ मे चिकी घूम रही थी अब. मैं जानता हूँ लोगो के लुक्स चेंज होते हैं मगर ये नही जानता था कि कोई ‘ए’ लड़की सीधा ‘XXX’ हो जाएगी. कसम से क्या लग रही थी वो..और ऐसी लड़की ने मेरा नंबर माँगी..अब मैं बेसब्री से वेट कर रहा था कि कब वो मेसेज या कॉल करे..ज़्यादा जल्दी भी नही कर सकता था मैं नही तो समझ जाती कि आइ आम ईगर टू टॉक टू हर..उतने मे ही मुझे यूथिका की याद आई. मैने फट से मेरा सिम चेंज किया..सेल स्टार्ट होते ही मुझे मेसेज आने स्टार्ट हो गये.
‘हे!’
“यौ देयर?’
‘हेल्ल्लो???’
मैं खुश हो गया.. बंदी, आइ मीन होप्फुली बंदी ही हो, डेस्परेट हैं बात करने के लिए हम से…मैने भी रिप्लाइ कर दिया.
‘हे’
और वेट करने लगा.. 15-20 मिनट बात करने के बात मैने सोचा कि अब शायद इसका रिप्लाइ ना आए..सो गयी होगी लगता..सब मेरे जैसे भूत तो रहते नही हैं.. मैने सोचा मैं भी सो ही जाता हूँ.
अगले दिन मैं सुबह उठके कॉलेज चला गया.कॉलेज जाके मैने सबसे पहले पायल को कॉल किया..’आउट ऑफ कवरेज एरिया’.
मे: हुहह? आउट ऑफ कवरेज एरिया?? कोन्से जंगल मे हैं मेडम.
मैने सोचा कि कॉलेज आएगी तो खुद ही कॉल करेगी.. लेक्चर्स स्टार्ट हो गये मगर पायल का कही आता पता नही था. मैने 3 4 बार कॉल किया,,सेम रेस्पॉन्स. .कॉलेज ख़त्म हो गया..मुझे लगा कि शायद आई नही अब तक वो नासिक से. मैने सोचा जाने दो.. जब भी पासिबल होगा कॉल करेगी खुद ही वो.. कॉलेज के बाद मैं घर चला गया..पढ़ाई की, असिगमेंट्स लिखे..वो सब करते करते शाम हो गयी.. मैं शाम का वेट ही कर रहा था क्योकि आज वो पागल मिलेगी. मैं थोड़ा सा एग्ज़ाइटेड था उसे मिलने के लिए. मैं फ्रेश होने चला गया..फाटसे चेंज किया और बाग भरने लाहा. इतने मे ही मुझे यूथिका की यादाई. कल रात को उसका कोई रिप्लाइ नही आया सो मैने सोचा एक बार चेक करने मे क्या हर्ज़ हैं. मैने सिम चेंज किया और सिम चेंज करते ही मेसेज आने लगे.
“हे! श्र्य मैं थोड़ी बिजी थी तो रिप्लाइ नही कर पाई. वस्सूप?”
मैने भी रिप्लाइ ठोक दिया;
“इट्स ओके.. आइ आम गुड. हाउ अबाउट यू?”
मसेज सेंड ही करने वाला था की मुझे याद आया कुछ;
“लिसन. आइ थिंक हम ने एक टाइम डिसाइड कर लेना चाहिए हमारी बात करने का. ऐसे तो कभी हमारी बात नही हो पाएगी. मैं रात मे अवेलबल रहता हूँ. लेम्मे नो!”
मसेज सेंड कर के मैने सिम चेंज कर दिया और जिम चला गया. रास्ते मे मैं सोच रहा था कि आज बात होगी या नही मेडम से. या आज आएगी भी या नही जिम को..कल के आइटम के बाद. ऐसे कई सारे सवाल मेरे दिमाग़ मे घूम रहे थे. मैं जिम पहुँच गया और पार्किंग मे गाड़ी पार्क करके उपर जाने ही वाला था तो मैने सोचा कि क्यू ना पार्किंग मे एक बार मेडम की गाड़ी देख ली जाए कि हैं या नही. मैने पूरी पार्किंग छान मारी. कही कोई आता पता नही था. मैं थोड़ा मायूस हो गया..कही उसने दूसरा जिम तो जाय्न नही कर लिया? मैं अपना मन मारके उपर चला गया..
ज्यों जिम मे घुसा रजत ने पकड़ लिया मुझे मेरे हाथ से जाकड़ के.. अब वो साला हल्क की पैदाइश, मेरा नन्हा सा बाइस्प उसके हाथ मे अपनी जान तोड़ रहा था..
मे: अर्रे सर!! एक ही हाथ हैं मुझे..
रजत: हुहह??
मे: आइ मीन राइट वाला सर..एक ही हैं..तो थोड़ा सा….
वो समझ गया..हँसके उसने हाथ छोड़ दिया मेरा और बोला;
रजत: कल क्या चल रहा था रे तेरा और वो लड़की का सम्राट? वो भी भाग गयी आंड उसके पीछे तू भी? चक्कर क्या हैं?
मे: अर्ररे कुछ नही सर.. उसको पूछना था कि जिम मे फीमेल ट्रेनर का कितना फीस हैं.
रजत: तो तुझसे क्यू पूछ रही थी वो??
मे: उसको लगा कि मैं ट्रेनर हूँ..
मेरी इस बात पे वो सांड़ ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा और बोला;
रजत: तू?? ट्रेनर?? जा भाई जा.. अंदर हैं तेरी स्टूडेंट…कर ट्रेन उसको.
मेरी तो बत्ती ही जल गयी ये सुनके की वो ऑलरेडी अंदर हैं जिम के.
मे: ओके सर.. मैं जाता हूँ अंदर..
इतना कह के मैं अंदर चला गया. शूस पहने और सीधा जिम फ्लोर पे. फ्लोर पे जाके मैं अपने पहचान के लोगो को ही हेलो करने लगा. रोज़ का ही रिचुयल था.. थोड़ा है शाइ करना और देन अपने काम मे लग जाना.. मैं इधर उधर ही बोलता हुआ आगे बढ़ता गया और उतने मे ही….
‘अरी.आआईई???’
मैं किसी से टकरा गया..2 सेकेंड संभलने को लगे और उसका आधा ये जानने मे कि टकराया भी किस से??
मे: ओह्ह.. यू!!
‘अर्रे कुठे बघतोस?? क्या मेरे पीछे पड़ गये तुम??’
मेडम ने आज ग्राइश कलर का टॉप पहना था और ब्लॅक स्वेट पॅंट्स.. थोड़ा सा क्लीवेज दिख रहा था टॉप मे से.तो नॅचुरली मेरी नज़र नीचे चली गयी. आप भी देख लो खुद..
अब ऐसा नज़ारा सामने आया तो कौन भला अपनी नज़रें मोड़ ले?? मैं भी देखने लगा.. मगर ज़्यादा देर नही देख पाया..
‘ओये हेलो??’
मैने सोचा अगर आज भी ये पकड़ लेगी मुझे घूरते हुए..तो वांदे हो सकते.. कुछ तो सोचना पड़ेगा..
मे: हुहह?? मैं..मैं तुम्हारे पीछे पड़ा हूँ?? ठीक हैं..मानता हूँ मेरा ध्यान नही था आगे की तरफ कॉज़ मैं मेरे फरन्डस को ग्रीट कर रहा था.. मगर तुम?? तुम्हारा ध्यान कहाँ था?? हुहह?? तुम तो आगे ही देख रही थी ना? और आगे मैं था.. मतलब तुमने मुझको देख कर भी सीधा मुझसे भीड़ गयी… हैं ना??
उसने शायद सोचा नही होगा कि मैं ऐसा भी कहूँगा..मेरे सवाल से वो कन्फ्यूज़ हो गयी..और हड़बड़ाने लगी.
‘ वो…माआ..मैं… उधाअर… तुमने….’
मे: क्या कोडवर्ड हैं क्या ये? हिन्दी मराठी इंग्लीश?? आती क्या कुछ? अभी तो बड़ी टॅपर टॅपर चल रही थी.. अब क्या हुआ?? बोलती बंद?? कल घुटने पे चोट लगी तो क्या दिमाग़ बंद हो गया?? हुहह?? बोलो
मैने सोचा कि अब ज़रा ऊट पहाड़ के नीचे आया.. इतने आसानी से तो नही छोड़ुगा.