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ब्रा वाली दुकान complete

शाज़िया की इस बात ने मुझे अंदर तक घायल कर दिया था। मुझे गुस्सा तो बहुत आया शाज़िया पर मगर क्या करता बात तो उसने सच ही थी। महज मैट्रिक पास व्यक्ति था और उच्च वर्ग समाज में उठने बैठने का तरीका मुझे नहीं आता था उसके अलावा जिस तरह शाज़िया के पास पैसा था मेरे पास तो वैसे पैसा नहीं था फिर भला मैं शाज़िया का प्रेमी बनने का सपना क्यों देख रहा था । बहरहाल शाज़िया अब अपने कपड़े पहन चुकी थी और लंड वाली पैन्टी उसने अपने कॉलेज बैग में डाल ली थी मैं भी अपने आप कोसते हुए सलवार कमीज पहन चुका था। शाज़िया ने सामने लगे शीशे में अपने बाल ठीक किए और अपने कपड़ों को भी ठीक करने लगी ताकि बाहर निकल कर उसके हुलिए से यह न लगे कि वह किसी के साथ सेक्स करके आई है। मैंने दरवाजे के लॉक खोला था और साइन बोर्ड भी बदल दिया था। वापश शाज़िया के पास आया तो उसने पर्स में से 4000 निकालकर मुझे दिया, मैंने कहा शाज़िया जी यह 4000 क्यों ??? शाज़िया ने कहा 2500 इस का, 500 जो तुमने कहा था कि यह ब्रा पैन्टी सेट पहनकर तस्वीरें बना लूँ खरीदने की बजाय। मैंने कहा और बाकी 1000 ??? शाज़िया ने आगे बढ़कर फिर मेरे होंठ चूसे और बोली यह 1000 मेरी चूत को आराम पहुंचाने के लिए जो आप ने इतना जबरदस्त चोदा है। मैंने 1000 वापस शाज़िया पकड़ाते हुए कहा नहीं शाज़िया जी चुदाई करने के पैसे नहीं लूँगा आपको मज़ा आया तो मैंने भी आपके शरीर से खूब मज़ा लिया है हिसाब बराबर। यह बाकी के 3000 में रख रहा हूँ। शाज़िया ने कहा कोई बात नहीं आप 4000 से ही रखो। मैंने कहा नहीं शाज़िया जी यह नहीं हो सकता कि मैं आपको चोदने के पैसे लूँ। यह कह कर मैंने वह 1000 का नोट शाज़िया को दे दिया और वापस काउन्टर में जाकर खड़ा हो गया।

शाज़िया ने कहा ठीक है जैसे तुम्हारी इच्छा मगर फिर एनर्जी जगा रहे हैं। यह कह कर शाज़िया ने मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखा और 1000 के नोट को पर्स में रखकर दुकान से निकल गई। जैसे ही शाज़िया दुकान से निकली ठीक उसी समय लैला मैडम ने दुकान में प्रवेश किया। उनके चेहरे पर आश्चर्य के आसार थे, वह अंदर आई लेकिन उनकी नजरें शाज़िया पर थीं जब तक शाज़िया निकल नहीं गई लैला मेडम शाज़िया को ही देखे जा रही थी। मैंने लैला मेडम पूछा मैम खैरियत तो है आप कुछ देर पहले ही तो गईं थीं ??? लैला मैम ने मुझे शक भरी नज़रों से देखा और बोलीं यह लड़की इतनी देर तक अपनी दुकान में क्या कर रही थी ???

मुझे एक झटका लगा कि लैला मैम को कैसे पता कि यह लड़की पिछले 2 घंटे से मेरी दुकान पर थीं, लेकिन मैंने मुस्कान के साथ कहा मैम यह तो अभी आई थी। मैम ने कहा नहीं जब मैं गई थी तो यह लड़की रिक्शा से उतरी थी और इसने सीधी अपनी दुकान में प्रवेश किया था। अब मैं वापस आई तो अपनी दुकान के दरवाजे पर दुकान बंद है का साइन बोर्ड लगा हुआ था तो मैं सामने वाली दुकान में चली गई वहाँ भी मुझे काम था। अब जब आपने फिर से साइन बोर्ड बदला दुकान खुली है तो मैं इस दुकान से अपनी दुकान में आई हूँ और यह लड़की अब निकली है तुम्हारी दुकान से ... में बुरी तरह फंस गया था। एक बार तो मुझे लगा कि बस सलमान आज तेरी खैर नहीं। मगर फिर तुरंत ही मेरा दिमाग चला और मैंने लैला मैम को कहा कि मैम ऐसी बात नहीं, यह इस समय जरूर आई थी जब आप कह रहे हैं, लेकिन यह ब्रा लेकर चली गई थी, और अभी 15 मिनट पहले ही आई थी, मेरी दुकान का कार्ड उसके पास था तो उसने भी दुकान बंद देखकर मुझे फोन किया तो मैंने उसे बताया कि यह समय मेरे आराम करने का होता है, तो उस लड़की ने अनुरोध किया कि अब दुकान खोल लो उसे अपनी बहन के लिए भी ब्रा लेने हैं क्योंकि आज रात ही उनका मुर्री जाने का कार्यक्रम बन गया है तो घर से बहन का फोन आया कि उसके पास ब्रा नहीं हैं वह उसके लिए भी लेती आए। तो इसलिए मैंने साइन बोर्ड नहीं बदला बस दुकान खोलकर उसे अंदर आने दिया और उसने अपनी बहन के लिए ब्रा लिए 15 से 20 मिनट ही रुकी है यहाँ और फिर अब आपके सामने बाहर गई है।

मैंने तुरंत कहानी तो बना ली थी, लेकिन शायद मेरे चेहरे के भाव मेरी कहानी के विपरीत थे जिसे लैला मेडम ने बखूबी पढ़ लिया था। मगर उन्होंने कुछ कहा नहीं मुझे और सिर्फ इतना ही कहा अच्छा चलो छोड़ो वास्तव में मेरे वापस आने की वजह यह है कि मुझे भी अपने गांव से बहन का फोन आया है कल कुछ दिनों के लिए गांव जा रही हूँ तो मुझे अपनी बहन के लिए भी ब्रा चाहिए होगा। मैंने कहा कोई समस्या नहीं मेडम आप आकार बताओ मैं आपको और ब्रा दिखा देता हूँ। लैला मैम ने अपनी बहन के मम्मों का आकार बताया और मैंने उन्हें उसके अनुसार ब्रा दिखा दिए जिनमें से कुछ ब्रा पसंद करके वह चली गईं, लेकिन वो अब तक संदेह भरी नजरों से दुकान की समीक्षा करती रही थीं और मुझे भी अजीब नज़रों से देख रही थीं लेकिन उन्होंने कहा कुछ नहीं।

लैला मैम गईं तो मैंने सुख का सांस लिया और 2 गिलास पानी अपने गले में डाल लिया जो सूख चुका था। फिर मेरा सारा दिन परेशानी में ही गुज़रा कि कहीं लैला मैम को अगर यह शक हो गया कि मैंने इस लड़की को दुकान में चोदा है तो कहीं लैला मैम मुझे दुकान खाली करने का ही नहीं कह दें। इस परेशानी मैं खाना नहीं खाया और सीधा घर जाकर ही अम्मी को खाने के लिए कहा।

अम्मी ने मुझे खाना ला दिया और बोलीं बेटा परेशान लग रहे हो कुछ। । । मैंने कहा नहीं अम्मी ऐसी तो कोई बात नहीं। अम्मी ने कहा नहीं बेटा कोई तो बात है। मैं बहाना बनाया कि बस अम्मी आज तबीयत खराब रही, दुकान मे, दोपहर का खाना भी नहीं खाया इसीलिए .... अम्मी ने मेरे सिर पर हाथ फेरा और मुझे खाने को बोला। जब मैंने खाना खा लिया और सोने के लिए ऊपर चबारे पर अपने कमरे में जाने लगा तो अम्मी ने कहा रुको बेटा मैंने आपसे एक बात करनी है। मैंने कहा जी अम्मी कहिए अम्मी ने मुझे पूछा बेटा कारोबार कैसा जा रहा है तुम्हारा? मैंने कहा अम्मी बहुत बेहतर है करम है ऊपर वाले का। अम्मी को पता तो था ही क्योंकि अब मैं घर में अम्मी के लिए अच्छा खासा खर्च करने लग गया था जिसकी बदौलत मेरे छोटे भाई और बहनों की पढ़ाई भी अच्छे स्कूलों में हो रही थी और घर में खाना-पीना भी काफी अच्छा हो गया था फिर अम्मी ने कहा बेटा जब तुम्हारी लैला मेडम किराया लेना शुरू करेंगी तब भी इसी तरह खर्च होगा घर पर ??? मैंने कहा जी अम्मी आप चिंता न करें। बस यह पिछले महीने ही है। अगले महीने से लैला मैम को किराया देने का करार है। मगर पिछले 3 महीने से 15 दिन से किराया निकाल कर देख रहा हूं ताकि मुझे अंदाज़ा हो सके कि दुकान का किराया निकालने के बाद भी हमारा खर्च इसी तरह चलेगा या नहीं। पिछले 3 महीने और इस महीने के किराया 60 हजार मेरे पास मौजूद है अगले महीने से किराया देना शुरू करना है तो इसी 60 हजार को फिर से दुकान में निवेश करूंगा और माल दुकान मे भर जाएगा। अम्मी ने मेरे सिर पर फिर हाथ फेरा और मेरा माथा चूम कर बोलीं मेरा बेटा काफी समझदार हो गया है। अम्मी के इस प्यार में मैं अपनी परेशानियां भूल गया और मेरा मन बिल्कुल हल्का सा हो गया जो पहले काफी बोझिल था। फिर अम्मी ने मुझे कहा बेटा वास्तव में खर्च में इसलिए पूछ रही हूँ कि अब मुझ से घर का काम नहीं होता तेरी बहनें भी अभी छोटी हैं और उन्हें पढ़ाना भी होता है .... अम्मी की बात अभी पूरी नहीं हुई थी कि मैंने कहा कोई बात नहीं अम्मी आप काम वाली रख लें में उसे वेतन दे दिया करूँगा अम्मी ने प्यार से मुझे देखा और कहा नहीं बेटा काम वाली नहीं रखनी अब तो घर वाली लानी है। मैंने कुछ समझते और कुछ न समझते हुए अम्मी की तरफ देखा तो अम्मी ने कहा बेटा तेरे लिए एक लड़की देखी है। बहुत प्यारी है। बस यदि हां कर दे तो मैं उस लड़की से तेरी बात पक्की कर दूँ और फिर जल्द ही तेरी शादी भी कर दूं। शादी का सुनकर मेरे चेहरे पर एक रंग आया और एक गया था। अम्मी ने कहा शर्मा मत, जल्दी बता .. तुझे लड़की की तस्वीर भी दिखा देती हूँ। मैंने कहा नहीं अम्मी तस्वीर नहीं अगर आपको लड़की पसंद है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं तो बात पक्की कर दें। यह सुनकर अम्मी ने मुझे अपने सीने से लगा लिया और कहा सदा खुश रहो बेटा। कल ही जाकर तेरी बात पक्की करती हूँ। यह कह कर अम्मी उठकर अपने कमरे में चली गईं और मैं भी अपने कमरे में जाकर आराम की नींद सो गया।

अगले दिन सुबह उठा तो अम्मी ने मुझे 5000 रुपये मांगे। 3000 तो मेरे पास शाज़िया वाला ही पड़ा था बाकी 2000 मैंने जेब से निकालकर अम्मी को दिया और दुकान पर चला गया। शाम के समय अम्मी का फोन आया कि बेटा बहुत बहुत मुबारक हो, मैं तुम्हारी बात पक्की कर आई हूँ, लड़की वालों को तुम्हारी तस्वीर भी दिखा दी है उन्हें तुम पसंद हो। आज मैं मिठाई लेकर गई थी और लड़की के हाथ में पैसे रख दिए हैं। मैंने कहा अम्मी जैसे आपकी खुशी। अम्मी ने कहा कि बेटा कल तुम दुकान से छुट्टी कर लो लड़की वालों ने तुम्हें देखने आना है। और रस्म करनी है मैंने कहा अम्मी छुट्टी तो नहीं कर सकता लेकिन दोपहर 2 बजे आ सकता हूँ घर इसी समय लड़की वालों को बुला लें।

 
अम्मी ने कहा ठीक है बेटा कल उन्हें उसी समय बुला लेती हूँ। अम्मी की आवाज में बहुत खुशी थी और मैं भी थोड़ा-थोड़ा खुश हो रहा था, लड़की तो मैं नहीं देखी थी कि कौन कैसी है, लेकिन मन ही मन में एक खुशी थी कि अब मेरी भी जीवन साथी होगी, रात को घर जाऊंगा तो एक प्यारी सी मुस्कान मे वह मेरा स्वागत करेगी और रात को मेरी रात रंगीन करेगी, इसके अलावा अम्मी के साथ भी काम में हाथ बँटाया करेगी। अगले दिन दुकान पर आया तो मुझे अजीब चिंता थी कि 2 बजे घर जाना है, न जाने क्या होगा, मुझे देखकर लड़की वाले क्या प्रतिक्रिया देंगे। कहीं वह इनकार ही न कर दें, और वे मुझे काम के बारे में पूछेंगे तो मैं क्या जवाब दूँगा कि मैं लड़कियों को ब्रा और पैंटी बेचता हूँ ???

बहरहाल 2 बजने में अभी आधा घंटा बाकी था कि अम्मी का फोन आ गया कि बेटा लड़की वाले आ गए हैं तुम भी घर आ जाओ मैंने शीशे में अपने आपको देख कर अपने बाल आदि सेट किए और कुछ ही देर में घर पहुंच गया। घर पहुँच कर मैंने डरते डरते घर का दरवाजा खोला तो अंदर आंगन में 2,3 बच्चे खेल रहे थे जिन्हे में नहीं जानता था यह निश्चित रूप से मेरे होने वाले ससुरालियों के बच्चे होंगे। मुझे देखकर उन्होंने मुझे सलाम किया और अपने खेल में व्यस्त हो गए। सामने कमरे में मेरी बहन ने मुझे देखा और कमरे में पहुंच कर जोर से बोली भैया आ गए हैं। यह सुनकर अम्मी उठकर बाहर आ गई और मुझे अपनी ओर बुलाया आ जाओ बेटा इधर है। में डरते डरते अम्मी की तरफ बढ़ने लगा। न जाने क्यों मुझे अजीब सा डर लग रहा था, शायद हर लड़के को उसी तरह महसूस होता होगा मगर मुझे अपना पता है कि मुझे डर लग रहा था मेहमानों का सामना करते हुए। बहरहाल कमरे में प्रवेश किया तो मेरी नजरें सामने बैठी अपनी होने वाली सास पर पड़ी, वह मुझे देख कर अपनी जगह से खड़ी हुई तो मैंने आगे बढ़कर उन्हें सलाम किया और उनके आगे सिर झुकाया तो उन्होंने मेरे सलाम का जवाब दिया और मेरे सिर पर प्यार किया। साथ बैठे ससुर जी के सामने भी थोड़ा झुका तो उन्होंने जीते रहो बेटा कह कर मेरे कंधे पर थपकी दी और मुझसे हाथ मिलाया। उनके साथ बैठी उनकी छोटी बेटी पर मेरी नज़र पड़ी तो मुझे एकदम शॉक लगा।

यह लड़की मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी जब मेरी नज़र उस पर पड़ी तो उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और कहा कैसे हैं जीजा जी आप .... मैंने सदमे से सभल कर मुस्कराते हुए उससे हाथ मिलाया और कहा आप यहाँ कैसे ??? मेरी बात पर उसने जवाब दिया मेरी बड़ी आपी से ही आपकी बात पक्की हुई है। अम्मी ने कहा बेटा तुम एक दूसरे जानते ??? इस पर मेरी सास ने कहा जी बहन जी, जब आप ने सलमान की तस्वीर हमें दी तो राफिया ने हमें बताया था सलमान के बारे में कि उसकी शरीफ प्लाजा मे आरटीनिशल गहने और सौंदर्य प्रसाधन की दुकान है। राफिया अपनी दोस्तों के साथ सलमान बेटे की दुकान पर जा चुकी है 2, 3 बार, तो उसी की सिफारिश पर हमने आपके बेटे को पसंद किया है। राफिया को देखने के बाद में थोड़ा रिलैक्स हो गया था। मुझे ऐसे लग रहा था कि जैसे मुझे कोई अपना अपना मिल गया हो मेहमानो में

क्योंकि एक राफिया ही थी जिसे मैं पहले से जानता था। राफिया भी थोड़ी देर के बाद उठ कर मेरे साथ वाली कुर्सी पर बैठ गई और उसने मुझे बोर होने नहीं दिया। आज उसने चादर भी नहीं ली थी लेकिन सिर पर एक मामूली दुपट्टा मौजूद था। मगर ये राफिया और दुकान वाली राफिया से काफी अलग थी। दुकान पर तो यह राफिया बिल्कुल शांत और चुपचाप खड़ी रहती थी मगर आज उसकी ज़ुबान रुकने का नाम नहीं ले रही थी। उसने मेरा दिल लगाए रखा और बातों बातों में अपनी बड़ी आपी का खूब परिचय भी करवाया और उसके बारे में बातें करती रही। मेरी सास साहिबा ने मुझे अंगूठी पहनाई तो राफिया ने अपने मोबाइल से तस्वीरें बनाई और बोली आपी को दिखाउन्गी यह तस्वीरें। मेरे ससुराल वाले कोई 3 घंटे मौजूद रहे और इधर उधर की बातें करते रहे। ससुर ने मेरी दुकान के बारे में जानकारी ली कि क्या दुकान मेरी अपनी है या किराए पर है और कितना कमा लेता हूँ मैं आदि आदि। जबकि सास साहिबा और अम्मी आपस में बातें करती रहीं, अम्मी मेरी और मेरी सास अपनी बेटी मलीहह की बढ़ाई करती रहीं। हाँ मेरी मंगेतर का नाम मलीहह था और वह राफिया की बड़ी बहन थी। 5 बजे के करीब मेरे ससुराल वाले जाने लगे तो फिर मेरी सास ने प्यार दिया और ससुर ने दिल लगाकर काम करने की हिदायत की। राफिया ने भी बड़ी गर्मजोशी से हाथ मिलाया और मेरे करीब होकर मेरे कान में बोली जीजाजी मलीहह बाजी के साथ आएगी दुकान पर अब मैं .... यह कह कर उसने मुझे आँख मारी और मैं उसकी इस बात पर खुश होते हुए दुकान पर चला गया।
 
अगले दिन मैं उत्सुकता से राफिया और अपनी मंगेतर मलीहा का उत्सुकता से इंतजार करता रहा मगर सारा दिन बीत गया और दोनों में से कोई नहीं आया। 3, 4 दिन बीत गए न तो राफिया आई न ही उसकी दोस्तें नीलोफर और ना शाज़िया आईं और न ही सलमा आंटी ने कोई लिफ्ट करवाई। फिर करीब एक सप्ताह के बाद लैला आंटी दुकान पर आईं तो उन्हें देखकर बहुत खुश हुआ। क्योंकि जब से मेरी सगाई हुई थी लैला मेडम दुकान पर नहीं आई थीं और न ही मैं उन्हें यह खुशखबरी सुना सका था। लैला मैम दुकान पर आईं तो वह खुश दिखाई दे रही थीं, मैंने उनसे उनकी खुशी का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि काफी दिनों के बाद वह अपने गांव गई और अपनी बहन और अन्य रिश्तेदारों के साथ कुछ समय बिताकर आई हैं । इसलिए उनका मूड बहुत अच्छा था,

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उसके साथ लैला मेडम ने यह भी बताया कि कल उनकी शादी की सालगिरह है और इस संबंध में वे कुछ तैयारी कर रही हैं। साथ ही उन्होंने मुझे भी अपनी पार्टी में आमंत्रित किया तो मैंने लैला मेडम बताया कि दुकान बंद करते करते काफी रात हो जाती है तो मेरा आना मुश्किल होगा, लेकिन लैला मेडम ने मुझे सख्ती से आने को कहा और कहा कि अगर एक दिन दुकान जल्दी बंद कर दोगे तो कोई नुकसान नहीं होगा, थोड़ा समय अपने लिए भी निकाल लेना चाहिए। फिर इससे पहले कि लैला मेडम अगली कोई बात करतीं मैंने मेडम को अपनी सगाई के बारे में बताया जिसे सुनकर वह बहुत खुश हुईं और मुझे बधाई दी। दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे हैंऔर शादी कब तक करने का इरादा है, लड़की क्या करती है, आदि आदि इस तरह की बातें पूछने लगीं। फिर लैला मेडम ने पूछा कि अपनी मंगेतर की फोटो दिखाओ तो मैं ने लैला मेडम को बताया कि अब तक तो मैंने खुद भी उसे नहीं देखा। यह सुनकर मेडम बहुत हैरान हुईं और बोलीं अगर देखा नहीं तो सगाई कैसे हो गई? मैंने मेडम बताया कि मेरे घर वाले उसके घर गए और फिर उनके घर वाले हमारे घर आए , न तो मैं उधर गया और न ही मलीहा मेरी मंगेतर हमारे घर आई। और न ही मोबाइल में उसकी कोई तस्वीर देखी है। बस अम्मी को पसंद है मैंने हाँ कर दी। मेरी बात सुनकर लैला मेडम कहा आश्चर्य आजके दौर में भी ऐसे आज्ञाकारी बच्चे हैं। फिर उन्होंने मुझे आने वाले जीवन में सुखों का आशीर्वाद दिया और फिर बोलीं कि कल उन्होंने साड़ी पहननी है काले रंग की तो उसके साथ कोई अच्छा सा ब्रा दिखा दो।

मैंने मेडम से पूछा साड़ी के साथ ब्रा पहनेंगे या ब्लाऊज़ के नीचे ब्रा पहनेंगे ??? मेरी बात सुनकर लैला मेडम हल्का सा मुस्कुराई और बोली तुम्हें कैसा पसंद है ?? थोड़ा संकोच से मैने कहा क्या मतलब मेडम ?? लैला मेडम ने कहा मतलब सीधा सा है तुम्हें साड़ी के साथ ब्रा पहना हुआ अच्छा लगता है या ब्लाऊज़ के नीचे से ब्रा अच्छा लगता है? मैं अब अपने सवाल पर थोड़ा शर्मिंदा हुआ और कहा नहीं मेरा मतलब था कि आप साड़ी के साथ ब्रा पहनेंगी इसीलिए मैं समझा कि शायद आप को अपने पति के सामने पहननी है साड़ी तो उसके साथ ब्रा पहनेंगे, वैसे तो ब्लाऊज़ ही पहना जाता है साड़ी के साथ। मेरी बात सुनकर मेडम के चेहरे पर एक बार फिर से कुछ उदासी सी दिखने लगी, तो वे बोलीं मैंने तुम्हें बताया तो था कि वह हिल डुल भी नहीं सकते तो कैसे उनके लिए ऐसे कपड़े पहनना चाहिए। यह कहते हुए उनकी आंखों से उदासी साफ झलक रही थी और मैं मन ही मन में एक बार फिर से अपने आप को कोस रहा था।

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फिर मैंने कहा वैसे आप चाहें तो मैं आपको ब्लाऊज़ नुमा ब्रा भी दिखा सकता हूँ, जो साड़ी के साथ बहुत सुंदर लगती हैं। मेडम ने कहा, दिखा। मैंने ब्रा पैन्टी सेट में से कुछ ऐसे ब्रा निकाले जो ब्लाऊज़ की तरह बने हुए थे, यानी वे केवल मम्मों को ही नहीं बल्कि थोड़ा छाती और कुछ हद तक पेट को कवर करते थे। इस तरह के ब्रा या ब्रा से अधिक उन्हें शर्ट कहना उचित होगा नाइटी के साथ आते हैं और रात को ही पहने जा सकते हैं, लेकिन अगर उसको साड़ी के साथ भी पहन लिया जाए तो न केवल बहुत सुंदर लगते हैं बल्कि सेक्सी भी लगते हैं। मैंने ऐसी ही एक छोटी शर्ट मेडम दिखाई जिसके बाजू नहीं थे, उसमें कंधे नंगे रहते हैं,दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे हैं लेकिन गर्दन के आसपास उसका कॉलर सा बना हुआ था और नीचे मम्मों से कुछ ऊपर शर्ट पर लाल रंग का कढ़ाई वाला काम शुरू होता था और क्लीवेज़ बनाता हुआ मम्मों को छिपाने के बाद नाभि से कुछ ऊपर यह शर्ट खत्म हो जाती थी। पीछे से शर्ट मे 3 स्ट्रिप थीं, एक हाथ पिछे कंधों की हड्डी के बराबर, एक जहां ब्रा स्ट्रिप होती है वहाँ और एक से कुछ नीचे कमर पर। इस शर्ट में लगभग सारी ही कमर नंगी रहती थी मेडम यह शर्ट बहुत पसंद आई और बोलीं यह तो बहुत सुंदर लगेगी। मैंने कहा जी मेडम यह आपके शरीर पर बहुत सुंदर लगेगी।

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मेडम ने कहा ठीक है फिर ये पैक कर दो कल यही पहनूँगी पार्टी में। फिर मैं ने मेडम से पूछा कि मेडम और कौन आ रहा है पार्टी में ?? मेडम ने कहा कोई खास लोग नहीं, बस मैं और मेरी 2, 3 दोस्त होंगी उनके पति होंगे और तुम होगे। कुल मिलाकर 6 से 7 लोग ही होंगे। मैंने कहा ठीक है मेडम में पहुंच जाऊंगा। मैं ने मेडम से पार्टी का समय पूछा और मेडम को शर्ट शॉपिंग बैग में डाल दी और मेडम मुझे आने की ताकीद कर दुकान से चली गईं। वास्तव में मेरा कोई इरादा नहीं था पार्टी में जाने का,दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे हैं लेकिन जब मेडम ने शर्ट खरीद ली जो निश्चित रूप से ब्रा नीचे नहीं पहनी जा सकती थी तो मुझे यकीन हो गया कि मेडम साड़ी के साथ यही शर्ट पहनेंगी, इसलिए अब मेरा दिल करने लगा था कि लैला मेडम को साड़ी के साथ यह शर्ट पहने देखूं कि वह कैसी लगती हैं। मुझे पूरा विश्वास था कि मेडम इस शर्ट को पहनकर बहुत सेक्सी लगेंगी। इसीलिए मैंने पार्टी में जाने की ठान ली थी। अगले दिन दोपहर को जब भोजन का समय होता है और दुकान बंद करके थोड़ा आराम लेता हूँ तब मैंने दुकान बंद की और घर चला गया, घर जाकर मैंने अपनी पसंदीदा रंग की शर्ट निकाली जिस बहुत ही कम पहनता था उसको इस्त्री करके अच्छी तरह नहाया और अंडर वेअर पॅंट पहन कर वापस दुकान पर आ गया। अंडर वेअर मैंने विशेष रूप से पहना था हालांकि मुझे अंडर वेअर मे बहुत उलझन होती है और यह पहनना पसंद नही करता मगर मुझे डर था कि मेडम को इतने सेक्सी पोशाक में देखकर मेरा लोड़ा बहुत स्पष्ट रूप से खड़ा दिखेगा इसलिए उसे बांधकर रखना जरूरी था।

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अब मैं उत्सुकता से रात 8 बजने का इंतजार कर रहा था क्योंकि मुझे रिक्शा में जाना था और मेडम के घर जाते जाते कोई 20 से 30 मिनट का समय आवश्यक था और 9 बजे पार्टी का समय था। इस दौरान कुछ ग्राहक भी आईं दुकान पर और मेरा बदला हुआ हुलिया देखकर हैरान भी हुईं। क्योंकि पहले वह मुझे सलवार कमीज में एक दो बारी देख चुकी थीं। दुकान बंद करते करते मुझे थोड़ी सी देर हो गई क्योंकि 8 बजे भी एक ग्राहक अपने लिए ब्रा खरीदने के लिए आई हुई थी जो ट्राई रूम में जाकर ब्रा पहनकर जाँच भी कर रही थी। मेरा लोड़ा काफी देर से सख्त हो रहा था क्योंकि मुझे मेडम को सेक्सी पोशाक में देखने की जल्दी थी। इसीलिए लोड़े की दृढ़ता ने मुझे मजबूर किया कि ट्राई रूम का कैमरा ऑन कर के उस औरत का हुस्न देख लूँ। इसलिए मैंने पहली बार अपने सिद्धांतों के खिलाफ जाते हुए मात्र ग्राहक का शरीर देखने के लिए कैमरा ऑन कर लिया। उफ़ क्या नज़ारा था, इस औरत का शरीर बहुत ही सुंदर था, 28 साल की उम्र और पेट नगण्य। 36 के गोरे गोरे कसे हुए मम्मे क़यामत ढा रहे थे। उसके मम्मों पर नज़र पड़ते ही मेरा हाथ अपनी पैंट पर चला गया जहां मेरे लोड़े की दृढ़ता अब चरम पर पहुंच चुकी थी

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महिला ने अब मेरा दिया हुआ ब्रा पहना और उसको प्रत्येक एंगल से शीशे में देखने लगी। उसकी फिटिंग से संतुष्ट होकर वह फिर मेरी ब्रा की हुक खोलनी शुरू की तो मैंने एक बार फिर बूब्स का नज़ारा करने के लिए अपनी आँखें स्क्रीन पर गढ़ा लीं फिर उसने अपना ब्रा उतारा तो उसके मम्मे ब्रा की कैद से मुक्त होकर जेली की तरह हिलने लगे और मेरे लोड़े की कठोरता में और वृद्धि करने लगे। फिर उस स्त्री ने अपने दोनों बूब्स को अपने हाथों से पकड़ लिया और शीशे में उनके आकार का निरीक्षण करने लगी। दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे हैं कुछ देर वह अकारण ही शीशे में अपने मम्मों की बनावट को देखती रही और फिर वह फिर से अपना पहले वाला ब्रा पहन लिया और ऊपर से कमीज पहन कर बाहर आ गई तो मैंने भी तुरंत ही ट्राई रूम का कैमरा बंद कर दिया। इसने मुझे ब्रा शॉपिंग बैग में डालने को कहा और अपने पर्स से पैसे निकालने लगी जबकि मेरी नज़रें उसके सीने पर जमी हुई थीं। उसके मम्मों की सुंदरता देख अब जी कर रहा था कि मैं अभी उसके मम्मों को हाथ में पकड़ कर उनकी सहजता और बनावट की जाँच करू, मगर अफसोस कि ऐसा न हो सका और वह स्त्री पैसे देकर चलती बनी। कुछ देर उस औरत की याद मे अपने लोड़े को सहलाता रहा फिर अचानक ही मुझे लैला मेडम की पार्टी याद आई तो मैंने अपना कैश गिना और उसे अपने गुप्त दराज में रख कर दुकान बंद कर दी।

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मेरी साथ वाली दुकान के दुकानदारों ने मुझे उस समय दुकान बंद करते देखा और पेंट शर्ट पहने देखा तो वह भी हंसने लगे और बोले वाह सलमान साहब, आज तो बाबू बन गए हो तुम भी कहाँ की तैयारियां हैं ??? मैंने उन्हें बताया बस एक दोस्त की शादी है उसकी शादी में शिरकत करनी है तो सोचा थोड़ा बन ठन कर जाऊं क्या पता कोई लड़की फिदा होजाए आपके भाई पर। मेरी इस बात पर वह दुकानदार भी हंसने लगे और फिर अपने कामों में व्यस्त हो गए, मैंने दुकान बंद की और फ्लाई के नीचे से होता हुआ दूसरी ओर चला गया, वहाँ से एक ऑटो रिक्शा वाले को पकड़कर मेडम के घर का पता समझाया और मेडम के घर की ओर रवाना हो गया। घर पहुंच कर मैंने अपने मोबाइल पर समय देखा तो करीब 9 बजकर 20 मिनट हो रहे थे। में डरते डरते मेडम के घर के दरवाजे के सामने पहुंचा तो चौकीदार ने मुझे अंदर जाने की अनुमति दे दी, वह मुझे पहचानता था और मेडम ने भी उसे मेरे आने की सूचना दी होगी तभी उसने कहा कि आप जाएं अतिथि आपका ही इंतजार कर रहे हैं।

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मैं डरते डरते अंदर जाने लगा। एक अनजाना सा डर मेरे दिल में था कि कहीं मुझे इस तरह पेंट शर्ट में देख मेडम हंसी ही न शुरू कर दें और एक डर यह भी था कि मेडम की फ्रेंड्स और उनके पति तो खाते पीते परिवारों से होंगे उनकी ड्रेसिंग और मेरी ड्रेसिंग में बहुत अंतर होगा, कहीं वह मेरी बेइज्जती ही न कर दें। दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे हैंऔर फिर एक अनजाना सा डर भी था कि जो कुछ देखने यहाँ आया हूँ वह देख भी पाउन्गा या नहीं। यानी मेडम इस ब्रा नाइट के साथ वाली शर्ट साड़ी के साथ पहने देखना नसीब होगा या फिर मेडम कोई और ब्लाऊज़ पहनें होंगी जिससे उनका सारा शरीर कवर हुआ हो। बहरहाल डरता डरता अंदर पहुंचा और मुख्य हॉल का दरवाजा खोला तो अंदर पूरा सन्नाटा था,[/SIZE]

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लेकिन मेरे होंठ मैम की गर्दन के करीब पहुंच चुके थे, तभी मैम की आवाज़ आई, सलमान एक बात तो बताओ ... मैंने कहा जी मैम पूछें। मैम ने कहा उस दिन जब मैं अपनी दुकान पर आई जब एक लड़की तुम्हारी दुकान से निकली थी तो वह काफी देर से ही अंदर थी या नहीं। मैं एकदम घबरा गया कि मैम अभी तक वह बात नहीं भूली जब मैं दुकान के अंदर शाज़िया की चुदाई कर रहा था और जैसे ही शाज़िया दुकान से निकली मैम अंदर आ गई थीं। मैंने पहले की तरह ही फिर से झूठ का सहारा लिया और कहा नहीं मैम मैंने आपको बताया तो था कि वह कुछ ब्रा और लेना चाहती थी इसलिए फिर से आई थी दुकान पर। मैम मेरी बात सुनकर एकदम से बोलीं उस दिन भी तुम्हें झूठ बोलना नहीं आया था और आज भी झूठ बोलते हुए तुम्हारा चेहरा तुम्हारी ज़ुबान का साथ नहीं दे रहा। मैम की इस बात से मेरा जागा हुआ लंड धीरे धीरे सोने लगा था क्योंकि मुझे चिंता शुरू हो गई थी कि कहीं मैम इस बात का बुरा न मान जाएं और मुझ से अपनी दुकान खाली करवालें। इससे पहले कि मैं कुछ कहता मैम बोलीं, कब से चल रहा यह सब कुछ दुकान पर ???

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मैंने फिर से शांत स्वर में कहा नहीं मैम आप गलत समझ रही हैं ऐसा कुछ नहीं होता वहाँ। मेरी बात सुनकर मैम काफी देर मुझे देखती रहीं जैसे जानना चाह रही हों कि मैं सच बोल रहा हूँ या झूठ। फिर एक दम से ही फिर मेम मेरे पास हुईं और पहले की तरह ही डांस करना शुरू कर दिया, अब की बार मैम का हाथ मेरे सीने पर था और मेरे हाथ फिर से मैम की कमर पर उनके चूतड़ों के करीब थे मगर मैं अंदर ही अंदर डर रहा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैम यह क्या कर रही हैं। मेरे सीने पर हाथ फेरते फेरते मैम बोलीं तुम्हारा सीना तो बहुत मजबूत लग रहा है, लगता है कि तुम जिम भी जाते हो। मैंने मन ही मन धन्यवाद किया कि मैम वह दुकान वाली बात भूल कर और किसी की बात चल निकली। मैंने कहा जी मैम दुकान बनने से पहले तो मैं रोज अपने एक दोस्त के जिम में जाता था जो खानेवाल रोड पर स्थित है और जब से दुकान बनी है सप्ताह में मुश्किल से एक या 2 दिन ही जा पाता हूँ, मगर जाता अवश्य हूँ। फिर मेरे अपने सीने पर हाथ फेरते हुए कहा तुम्हारे सीने पर बाल हैं या सफाई करते हो उनकी ???? मैंने कहा मैम आपको कैसा सीना पसंद है बालों वाला या बालों से मुक्त ??? मैम ने कुछ देर सोचा और बोलीं अगर बाल थोड़े हों तो फिर तो अच्छा लगता है लेकिन अगर बाल ज्यादा हूँ तो नहीं। लेकिन अगर सीना साफ हो तो वह तो बहुत ही अधिक सुंदर लगता है।

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मैंने कहा मैम छाती के बाल भी साफ करता हूँ। यह सुनकर मैम की आंखों में एक चमक आई और बोलीं देख सकती हूँ ??? मैंने मन में सोचा नेकी और पूछ पूछ, और मेम से कहा आप कहती हैं तो मैं दिखा देता हूँ आपको ... यह सुनकर मैम ने मुझे उसी टेबल तरफ धकेला जिससे कुछ देर पहले वह टेक लगाए मुझसे पूछ रही थीं कि वह कैसी लग रही हैं। मुझे टेबल पर धकेल कर खुद करीब मेरे ऊपर गिर ही गई थीं और खुद ही मैम ने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। मेरा लंड फिर मेम की इस अचानक घटना की वजह से खड़ा हो चुका था मैम मेरी शर्ट के सारे बटन खोल चुकीं तो उन्होंने मेरी शर्ट को साइड में कर दिया और फिर मेरी बनियान ऊपर करके मेरे सीने तक उठा दी। मगर मैम को कोई खास मज़ा नहीं आया तो उन्होंने मेरी शर्ट पूरी उतार दी और फिर मेरी बनियान भी उसके बाद उतार दी। अब मेरे बदन पर पेंट मौजूद थी मगर ऊपर से बिल्कुल नंगा था। और मेरे सीने पर मैम अपनी नर्म और मुलायम उंगलियों को बहुत प्यार के साथ फेर रही थीं।

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मैंने कपकपाती हुई आवाज में मैम से पूछा, मैम कैसा लगा आपको मेरा सीना ??? मैम ने मेरी ओर देखा तो उनकी आंखों में एक चमक थी जो केवल सेक्स की मांग की चमक ही हो सकती थी। मैम ने कहा बहुत ही सुंदर है तुम्हारी बॉडी तो। यह कह कर मैम मेरे और भी करीब हो गईं और अपने दोनों हाथों को मेरे सीने पर प्यार से फेरने लगीं। मैम का दाहिना पैर मेरी दोनों टांगों के बीच था और मुझे उनकी टांग अपने लंड पर लगती महसूस हो रही थी। धीरे धीरे मैम मेरे ऊपर झुकने लगीं और फिर मुझे लगा जैसे मैम के होंठ मेरे सीने को स्पर्श कर रहे थे। मैंने अपनी गर्दन झुका कर देखा तो सच मेम के होंठ मेरे सीने को छू रहे थे और उनके होंठों पर लगी लिप स्टिक मेरे सीने पर अपने निशान छोड़ चुकी थी। मेरा हाथ स्वतः ही मैम की कमर तक पहुँच चुका था और अब की बार मैंने बिना कुछ सोचे अपना हाथ धीरे धीरे कमरे से नीचे लाते हुए मैम के चूतड़ों पर रख दिया।

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मैम ने इस बात का कोई विशेष रिएक्शन नहीं दिया और वह लगातार मेरे सीने पर धीरे धीरे प्यार कर रही थीं। फिर मेम ने अपनी ज़ुबान निकाली और मेरे सीने पर फेरने लगीं। मैम की ज़ुबान मेरे सीने से होती हुई मेरे नपल्स को छूने लगी थी। मेरी छोटे निपल्स खड़े थे और कठोर हो रहे थे, मुझे बहुत पसंद था जब कोई लड़की मेरे नपल्स पर अपनी जीभ फेरती थी। और मैम का सुगंधित शरीर जो मेरे साथ चिपका हुआ था ऊपर से उनकी ज़ुबान मेरे निप्पल को धीरे धीरे रगड़ने में व्यस्त थी तो खुद सोच लें तब मेरा क्या हाल हो रहा होगा। मैंने अपने हाथ का दबाव मैम के चूतड़ पर बढ़ा दिया था और अपना हाथ मज़बूती से मैम के नितंबों पर फेर रहा था। दिल ही दिल में मुझे इस बात का एहसास भी था कि घर के लिए बहुत देर हो गई है। अब 12 बज चुके थे और उस समय तक मैं अपने घर पहुंच कर खाना खाकर सोने की तैयारी करता था। मगर अब तक में मेडम के घर था और मेडम का जो मूड था उसके अनुसार तो मुझे यहाँ और अधिक एक घंटा आराम से लग जाना था क्योंकि चुदाई मे मेरा स्टेमना काफी अच्छा था और मैं देर तक मैम को चोद कर उनकी वर्षों की प्यास मिटा सकता था ।

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]धीरे धीरे मैम के चूतड़ से हाथ अब उनके चूतड़ों की लाइन तक ले जा चुका था। फिर जैसे ही मैंने मैम के चूतड़ों की लाइन में अपनी उंगली का दबाव बढ़ाया तो मैम एकदम सीधी होकर खड़ी हो गईं और मुझसे कुछ दूर हो गईं। मैम ने मुंह दूसरी तरफ कर लिया जैसे मुझ से कुछ छुपाना चाह रही हूँ। भी सीधा खड़ा हो गया और धीरे धीरे मैम की तरफ बढ़ने लगा ताकि फिर से मैम को अपने शरीर से चिपका कर उनके शरीर की गर्मी पा सकूँ। मगर फिर मेम ने मेरी ओर देखा तो एक बार फिर उनके चेहरे पर सेक्स वासना या सेक्स की इच्छा बिल्कुल गायब थी और उनका चेहरा पहले की तरह हशाश बश्शाश और खुश था। वह मेरी ओर देखकर बोली आप ने वाकई बहुत अच्छे तरीके से जिम की है और अधिक व्यायाम नहीं किया, वरना अक्सर लड़के तो जिम करके अपने शरीर को बिल्कुल ही खराब कर लेते हैं, मगर तुम्हारा शरीर सुंदर है। यह कह कर मैम ने संगीत बंद कर दिया और सोफे पर पड़ा साड़ी का पल्लू उठाकर अपने गले में दुपट्टे के रूप में डाल लिया जिससे मैम की क्लीवेज़ भी छुप गई और उनका पेट भी काफी पल्लू से छुप गया। फिर मेम ने रोशनी भी ऑन कर दी और बोलीं, पार्टी के चक्कर में याद ही नहीं रहा काफी देर हो गई। अब तो पता नहीं तुम्हें रिक्शा भी मिलेगा या नहीं।

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मैम की इस बात से मुझे गुस्सा भी बहुत आया और निराशा भी। मेरा तो पूरा मूड बन गया था कि आज मैम की प्यासी चूत को अपने लंड के पानी से सिंचित कर दूँगा, मगर अब मैम जो बात कर रही थीं उसका मतलब था कि बस बहुत हो गया अब अपनी शर्ट पहनो और चलते बनो यहाँ से। लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था क्योंकि जैसा कि मैंने आपको पहले भी बताया कि मैं किसी भी हालत में किसी भी लड़की के साथ जबरदस्ती करने के पक्ष में नहीं हूँ जब तक लड़की खुद चुदाई के लिए पूर्ण रूप से तैयार न हो तब तक उसको चोदने में मज़ा नहीं आता। मैम ने मुझे ऑफर किया कि मैं तुम्हें घर छोड़ दूँगी मगर मैंने कहा नहीं मैं चला जाऊंगा रिक्शा मिल ही जाएगा। मैंने अपनी बनियान पहनी और फिर शर्ट पहन कर मैम को गुड बाय कह कर घर से निकल आया। गिफ्ट तो मैंने जाते ही दे दिया था तो फिर अंदर जाकर मैम के पति से मिलने की कोई खास जरूरत नहीं थी। वापसी में रिक्शा में सारे रास्ते मैं यही सोचता रहा कि मैम लंड की कितनी प्यासी हैं, मगर अपनी शालीनता और विनय हया की वजह से वे खुलकर मुझसे इस बात का इज़हार नहीं कर पारहीं।

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रास्ते में काफी देर सोचता रहा कि क्यों न मैम को एक दिन मजबूर कर दिया जाए और उनकी प्यासी चूत में अपना तगड़ा लंड घुसा कर उनकी चूत को ठंडा कर दिया जाए और वह भी तो यही चाहती हैं, मगर फिर खुद ही अपने दिल समझाया कि जब तक मैम खुद अपना शरीर मेरे सुपुर्द न कर दें और अपनी चूत खोल कर मेरे सामने न लाएँ तब तक उनको चोदना ठीक नहीं रहेगा। अपने आप को समझाकर फिर मेम के सुंदर बदन के बारे में सोचता रहा, भरा शरीर, लंबा कद, सुंदर मम्मे पतली कमर और सबसे बढ़कर उनके शरीर से आने वाली खुशबू ... आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह । । । । । सुंदर पल थे जब मैम मेरे सीने पर हाथ फेर रही थीं और मैं उनकी ग्लैमरस और इत्र से मदहोश हुए जा रहा था। मगर फिर अचानक पता नहीं मैम को क्या हुआ कि उनका मूड ही बदल गया। बहरहाल आधी रात को घर पहुंचा तो शौचालय जाकर मैम के नाम की मुठ मारी और जाकर सो गया[/SIZE]
 
अगले दिन अपनी दिनचर्या के अनुसार दुकान पर चला गया और ग्राहकों को डील करने लगा। बोरियत की हद थी अब तक के सारे दृश्य आँखों में घूम रहे थे जब मैम ने खुद मेरी बनियान उतार कर अपनी जीभ से मेरे निपल्स को टच किया था। और फिर अपनी लगाई हुई आग को खुद ही पानी डालकर बुझा दिया था। दोपहर 2 बजे मैंने दुकान का दरवाजा बंद कर दिया और खाना खाकर सुस्ताने के लिए लेट गया। अब मुझे लेटे हुए 5 मिनट ही बीते होंगे कि मेरे नंबर पर एक अनजान नंबर से फोन आया। मैंने पहले तो कॉल काटने का सोचा लेकिन फिर सोचा शायद किसी का जरूरी फोन हो, यही सोचकर फोन उठाकर कॉल अटेंड की और हाय कहा तो आगे कोई खिलखिलाती हुई नसवानी आवाज़ थी। मैंने पूछा कौन? तो आगे से वह लड़की बोली बूझो तो जानें। मैंने कहा मैंने पहचाना नहीं कौन बोल रही हैं आप ?? आगे से लड़की चहकती हुई बोली तो अब हमारी आवाज भी नहीं पहचान सकते हो ??? मुझे उस पर गुस्सा आया और मैंने कहा बीबी मेरे पास ज़्यादा व्यर्थ बातों के लिए समय नहीं है ये मेरे विश्राम का समय है कोई जरूरी बात है तो बताओ नहीं तो फोन बंद कर रहा हूँ।

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मेरी बात सुनकर आगे लड़की बोली ... नहीं नहीं .... जीजा जी फोन बंद न करना में राफिया बात कर रही हूँ। राफिया नाम सुनकर मेरा मूड एकदम से ठीक हो गया, अरे ये तो मेरी साली थी और साली अपने जीजा से मजाक नहीं करेगी तो और कौन करेगा। मैंने कहा हां राफिया क्या हालचाल हैं? राफिया ने कहा मैं ठीक हूँ आप कैसे हैं ?? मैंने कहा मुझे कैसा होना है, आपने अपना वचन पूरा नहीं किया .... इस पर राफिया इठलाती हुई बोली अजी आप आदेश तो हमारी क्या मजाल कि आप से किया हुआ वादा पूरा न करें। मैंने कहा बस रहने दो, आपने मलीहा को मुझसे मिलवाने मेरी दुकान पर लाना था और आज इतने दिन बीत गए मगर तुम्हारा कोई अता-पता ही नहीं। मलीहा को छोड़ो आप ने तो अपनी शक्ल भी दिखाना गवारा नहीं किया। चलो गुलाम साली को देख कर ही खुश हो जाता वैसे भी वह भी आधी घरवाली होती है। मेरी बात सुनकर राफिया खिलखिला कर हंसी और फिर बोली में वादा कैसे पूरा करूँ जब आप दरवाजा बंद करके आराम करने में व्यस्त होंगे। मैंने कहा क्या मतलब? राफिया बोली मतलब यह कि मा बदौलत आपकी दुकान के बाहर हैं, लेकिन आप ने दरवाजा बंद कर रखा है। यह सुनकर मैंने एकदम सिर उठा कर सोफे से दरवाजे की ओर देखा तो दरवाजे के बाहर राफिया खड़ी थी। और उसके साथ एक और लड़की भी सिर झुकाए खड़ी थी जो राफिया के पीछे थी उसकी रूप को में सही तरह से देख नहीं पाया।

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मुझे एक झटका लगा और दिन भर की सारी उदासी एकदम से गायब हो गई। पिछली लड़की हो न हो मलीहा ही है उसी विश्वास के साथ मैं एकदम से उठा और फोन बंद कर दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खुलते ही राफिया अंदर आ गई और अपनी आपी को भी अंदर आने के लिए कहा। राफिया ने अंदर आते ही मुझे दिल के साथ हाथ मिलाकर अभिवादन किया और पीछे मलीहा ने भी हल्की आवाज में मुझे सलाम किया तो मैंने प्यार के साथ धीमे स्वर में उसके सलाम का जवाब दिया और उसकी ओर अपना हाथ बढ़ा दिया। मलीहा ने एक अनिच्छा से मुझसे हाथ मिला लिया। और एक पल के लिए आंखें उठाकर मेरी तरफ देखा और फिर तुरंत ही अपनी नज़रें झुका लीं। इन दोनों को सोफे पर बैठने कर मैंने दरवाजा फिर से बंद कर दिया और काउन्टर पर जाकर फोन से साथ ही की एक छोटी दुकान में समोसों और कोल्डड्रिंक का आदेश दिया। इस पर मलीहा ने राफिया को कोहनी मारी उन्हें रोको, मगर राफिया बोली अरे आपी आपको तो अभी से जीजा जी के खर्चों की चिंता होने लग गई, मंगवाने दें मंगवाने दें, वैसे तो उन्होंने हमसे कभी पानी भी नहीं पूछा अब आपके साथ होने से अगर समोसे और कोल्डड्रिंक मिल रही है तो क्यों मेरी दुश्मन बन रही हो। राफिया बात सुनकर मैं मुस्कुराया और कहा बड़ी झूठी है मेरी साली तो। मैंने तो कोल्डड्रिंक का पूछा था मगर आपने खुद ही मना कर दिया तो भला मैं क्या कर सकता था।

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मेरी बात सुनकर राफिया भी मुस्कुराई और बोली नहीं मैं तो ऐसे ही मज़ाक कर रही हूँ। लेकिन आज समोसे तो ज़रूर खाउन्गी आप से। मैं उसकी बात सुन कर मुस्कुराया और कहा कि जो आदेश साली साहिबा का। फिर मलीहा की तरफ मूड गया, उसके चेहरे को गौर से देखा तो वह भी बिल्कुल राफिया की तरह ही दिखती थी। दोनों हमशक्ल और मामले में भी काफी समानता थी सिवाय इसके कि मलीहा के ऊपरी होंठ के ऊपर एक छोटा सा तिल था जबकि राफिया का चेहरा बिल्कुल साफ था। सुंदर आँखें, आँखों में शर्म हो हया के कारण लाल डोरे, चेहरे पर हल्की सी मुस्कान पारदर्शी रंग, हर मामले मे मलीहा राफिया की तरह ही खूबसूरत थी। अच्छी तरह उसका चेहरा देखने के बाद मैंने मन ही मन में अम्मी पसंद की दाद दी कि उन्होंने अपने इस निकम्मे बेटे को इतनी अच्छी जीवन साथी ढूंढ कर दी फिर मैंने मलीहा से पूछा कि आप ऐसे ही चुप रहती हैं या कुछ बोलती भी हैं। मेरी बात सुनकर मलीहा को जैसे झटका लगा[IMG]] वह इसी बात पर बौखला गई कि मैंने इसको संबोधित किया है। मेरी बात का जवाब देने के लिए उसने अपने होंठ खोले तो टूटे फूटे शब्दों में कहने लगी ... नहीं वह ...... बस ऐसे ही .... आपकी बातें सुन रही हूँ। मैंने कहा हमारी भी इच्छा है कि हम आपकी आवाज सुनें आप भी थोड़ा कुछ बोल लेंगी तो अच्छा लगेगा। इससे पहले कि मलीहा कुछ बोलती बाहर समोसों वाला आ गया तो मैं आगे होकर दरवाजा खोला और समोसे और बोतलें पकड़ कर अपने काउन्टर पर लगा दी और वापस जाकर दरवाजा फिर से बंद कर दिया, फिर काउन्टर के पीछे जाकर मैंने मलीहा और राफिया को कहा कि मेरे पास यहाँ आ जाएँ यहाँ कोई टेबल मौजूद नहीं है जो आपके सामने रख सकूँ इसलिए आपको यहीं आकर खड़े होकर खाना होगा। मेरी बात सुनकर राफिया तो फौरन उठ गई और एक समोसा उठाकर हाथ से तोड़कर खाने लगी हालांकि थाली में चम्मच भी पड़ा था और साथ मे सॉस वाली प्लेट भी थी मगर वह बिना चटनी के ही हाथ से तोड़कर समोसा खाने लगी, वह कुछ ज़्यादा ही चटोरी लग रही थी समोसों की। जबकि मलीहा अभी सोफे पर ही बैठी थी। [IMG]]

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