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ब्रा वाली दुकान complete

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kunal wrote: ↑ 03 Apr 2017 15:35
rajsharma wrote: अति सुंदर पर.........
 
sexi munda wrote: ↑ 16 Jun 2017 15:15
bahut hi umda our ek alag tarah ki kahani hai mitr
 
s_bajaj4u wrote: ↑ 02 Aug 2017 02:29
बहुत ही शानदार कहानी इस कहानी को पढ़ कर मेरी इच्छा भी ब्रा की दूकान खोलने की हो गयी है
 
pongapandit wrote: ↑ 07 Aug 2017 21:07
Jab ye kahani maine padhna shuru ki to mujhe laga tha ki is kahani ke lekhak Rajsharma hi ho sakte hain our dekho last me kunal bhai ne ye maan hi liya
 
ब्रा वाली दुकान



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हैलो दोस्तो .. मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा आपके लिए आज एक ऐसी स्टोरी लेकर आया हूँ आप भी पढ़ कर मस्त हो जाएँगे ....दोस्तों ये स्टोरी उम्मीद करता हूँ आपको पसंद आएगी...कोई ग़लती हो जाए तो मूवाफी चाहता हूँ...फिर शायद आपके मार्गदर्शन, सजेशन्स से उन कमियों को दूर कर सकू..आज मैं आपको अपनी एक छोटी सी कहानी सुनाने जा रहा हूं जिसमें मैंने अलग अलग लड़कियों और आन्टियो की चुदाई की। लंबी भूमिका बांधने की बजाय सीधे मुद्दे की बात पर आते हैं। तो दोस्तो मेरा नाम सलमान है। अधिक पढ़ा लिखा तो नहीं मगर किसी लड़की की चूत को कैसे चोदना है यह मैं अच्छी तरह जानता हूँ। मेरी शिक्षा मात्र दसवी पास है। और मेरी उम्र 24 साल है। , 5 फीट 7 इंच लंबा है, अधिक शिक्षा न होने की वजह से कोई काम तो मिला नहीं घर में सबसे बड़ा होने के कारण घर की सारी जिम्मेदारी मुझ पर आ गई थी। 20 साल की उम्र में मैंने काम शुरू किया। अरे मैं आपको यह बताना तो भूल ही गया कि मेरा संबंध पाकिस्तान से है। कीर्ति नगर में एक छोटा सा घर है जो पिताजी ने अच्छे समय में अपने जीवन में ही बना लिया था जो अब हमारी एकमात्र संपत्ति था। 20 साल की उम्र में जब पिताजी इस दुनिया से चले गए तो मेरी माँ ने मुझे कोई काम धंधा देखने के लिए कहा क्योंकि घर का खर्च भी चलाना था और सबसे बड़ा होने के नाते यह काम मुझी को करना था। मुझसे छोटा एक भाई और 3 बहनें थीं जिनकी उम्र अभी बहुत कम थी।

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ब्रा खरीदने में क्यों झिझकती हैं महिलाएं! जानिए कारण, महिलाओं को कपडे खरीदने में भी काफी दिक्कत होती हैं ख़ास कर अपने इनरवियर खरीदने में।

यह बात सभी को मालुम हैं की दुनिया की लगभग हर महिला या लड़की ब्रा पहनती हैं। मगर भारत और पाकिस्तान में ब्रा खरीदना किसी टास्क से कम नहीं है।

विदेशो में ब्रा खरीदने के लिए अलग दुकाने होती हैं मगर भारत में कई बार बीच बाज़ार या सड़क के किनारे महिलाओं के अन्त्रवस्त्र बिकते है जहा से ब्रा खरीदने में लडकिया कतराती है। इसके अलावा ज़्यादातर दुकानों में पुरुष इसे बेचते है। महिलाए पुरुषों से ब्रा खरीदना पसंद नहीं करती है।


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काम ढूंढने हेतु में मैं सदर बाजार चला गया जहां थोड़ी सी संघर्ष के बाद मुझे एक व्यक्ति ने एक दुकान का पता बताया जिन्हें एक सेल्स मेन की जरूरत थी जो न केवल ग्राहक से बात कर सके बल्कि हिसाब का भी पक्का हो। मैं उन साहब की बताई हुई दुकान पर पहुंच गया। दोपहर 12 बजे का समय था अब बाजार में ज्यादा हलचल नहीं थी। दुकान में प्रवेश हो गया तो सामने एक दाढ़ी वाले बुजुर्ग वहाँ पर मौजूद थे और उनके सामने कुछ महिलाओं खड़ी थीं, मुझे दुकान पर आता देखकर उन बुजुर्ग ने एक कपड़ा आगे कर दिया जो वह पर्दे के लिए इस्तेमाल करते थे, अब मैं बुजुर्ग को तो देख सकता था मगर महिलाओं और मेरे बीच अब एक पर्दा आ चुका था और मैं मन ही मन सोचने लगा कि आखिर ऐसी भी क्या बात है कि उन्हें पर्दे की जरूरत पड़ गई जबकि वह महिलाएँ पहले से ही बुर्का पहने हुए थीं। खैर मैं दुकान की समीक्षा करने लगा। यह सौंदर्य प्रसाधन और आरटीनिशल ज्वैलरी की दुकान थी। कुछ देर बाद पर्दा हटा और वह महिला वहां से निकल गईं। अब बुजुर्ग मेरी ओर आकर्षित हुए और बोले बोलो बेटा क्या चाहिए ???

मैं बुजुर्ग को देखा और कहा सर मुझे जॉब चाहिए। मैंने सुना है कि आपको एक सेल्स मेन की जरूरत है। यह सुनकर बुजुर्ग ने कहा, हां हां मैंने मुनब्बर को कहा था कि कोई अच्छे घराने का बच्चा हो तो बता मुझे सेल्स मेन की बहुत जरूरत है। क्या लगते हो मुनब्बर के तुम ???

मैंने कहा कुछ नहीं अंकल, मैं तो विभिन्न दुकानों पर जा जाकर नौकरी का पूछ रहा था तो कुछ पीछे एक दुकानदार ने ही मुझे आपके बारे में बताया कि आपको जरूरत है तो इधर आ गया। इस पर उन्होंने कहा कि बेटा ऐसे तो मैं किसी को नहीं रख सकता, मुझे तो विश्वास वाला लड़का चाहिए। इन बुजुर्ग नाम इकबाल था। मैंने कहा सर आप बेफिक्र रहें मुझसे आपको कभी कोई शिकायत नहीं होगी, मुझे जॉब की बहुत सख्त जरूरत है, मैंने इकबाल साहब को घरका पता और घर की स्थिति सब कुछ बता दिया। इस पर इकबाल साहब के स्वर में पहले से अधिक मिठास और प्यार आ गया, लेकिन वह अभी हिचक रहे थे, तो उन्होंने कहा बेटा महिलाओं और लड़कियों से बात करनी पड़े तो कर लोगे ??? मैंने उन्हें बताया जी अंकल मेरे स्कूल में लड़कियां भी थीं और आपको मेरी वजह से कभी कोई परेशानी नहीं होगी।

फिर उन्होंने मुझे कहा अच्छा चलो तुम अब जाओ, मैं थोड़ा सोच लूं, कल सुबह 10 बजे आ जाना तुम मगर किसी बड़े को लेकर आना अच्छा है इसी बाजार में कोई परिचित हो तो उसे ले आना। मैं अंकल से हाथ मिलाया और उनका शुक्रिया अदा करते हुए तुरंत घर चला गया। घर जाकर मैंने अम्मी से इस बारे में बात की तो उन्होंने काफी सोचने के बाद अबू के एक अच्छे दोस्त का पता मुझे बताया कि उनसे जाकर मिलना शायद वह कोई मदद कर सकें इस संबंध में। उसी समय अबू के दोस्त से मिलने चला गया, कुछ देर बाद उनके घर पहुंचा तो किस्मत से वह घर पर ही मिल गये, वह अपनी पत्नी और 2 बेटियों के साथ कहीं घूमने के लिए जा रहे थे, लेकिन मेरे आने की वजह से वे अपना कार्यक्रम थोड़ी देर के लिए निलंबित कर दिया था। मैं अपना परिचय तो जाते ही करवा चुका था जिसकी वजह से मुझे अंकल और आंटी ने बड़े प्यार से अपने घर में बिठाया और उनकी एक बेटी जिसकी उम्र मुश्किल से 15 साल होगी मेरे लिए मीठे पानी की एक सुराही और एक सिरप ले आए। में गटा गट 2 गिलास चढ़ा गया था क्योंकि सुबह से फिर फिर कर मुझे काफी प्यास लगी हुई थी। [/size][/color]
 
अगले दिन सुबह 11 बजे मुनब्बर अंकल के घर पहुँच गया। शुक्रवार का दिन था सरकारी छुट्टी न होने के कारण मुनब्बर अंकल घर पर नहीं थे, जबकि उनकी बेटी शमीना अभी स्कूल से वापस नहीं आई थीं। शमीना से छोटी बेटी अभी जो 10 साल की थी उसकी तबीयत खराब थी जिसकी वजह से वह स्कूल नहीं गई और घर पर ही एक कमरे में सो रही थी। घर गया तो सलमा आंटी ने खुश होकर मुझे अंदर बुला लिया। मगर वह कुछ कुछ मुझसे शर्मा भी रही थीं। उन्होंने मुझे उसी कमरे में बिठा दिया जहां मुनब्बर अंकल के होते हुए बैठा था। यह मुख्य कक्ष था टीवी भी लगा हुआ था। मुझे बैठाकर आंटी किचन में चली गई और कुछ ही देर में मीठे सिरप का एक गिलास बनाकर मेरे लिए ले आई मेरे सामने पड़ी टेबल पर सलमा आंटी झुकी और सिरप का जग जो एक बड़ी ट्रे में था मेरे सामने रखा, जिसके दौरान झुकने की वजह से उनकी कमीज से उनके बड़े 38 आकार के मम्मे कमीज से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे, मेरी नजर उनकी कमीज के अंदर मौजूद मम्मों और उनके बीच की गहरी लाइन पर पड़ी तो मुझे कुछ कुछ होने लगा, मैंने तुरंत ही अपना चेहरा नीचे कर लिया। आंटी भी तुरंत ही सीधी हो गई और मेरे साथ वाली कुर्सी पर बैठ गईं और बोलीं बेटा पानी पियो।

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उनकी नजरें मेरे हाथ में मौजूद शापर पर थीं। मगर वह मुझसे शापर मांगते हुए संकोच कर रही थीं। गर्मी अधिक थी मैंने जल्दी जल्दी सिरप का एक गिलास पिया और फिर आंटी को देखा। आंटी ने तब सफेद रंग की एक कमीज पहन रखी थी और गले में दुपट्टा ले रखा था, कमीज ठीक थी और गर्मी की वजह से शायद आंटी ने समीज़ भी नहीं पहनी थी जिसकी वजह से उनका काले रंग का ब्रा भी सफेद कमीज में से बड़ा स्पष्ट नजर आ रहा था। उन्हें ऐसी हालत में देख कर मुझे अपने अंडरवेअर में बेचैनी महसूस होने लगी थी, मगर मैं पूरी कोशिश कर रहा था कि सलवार में मौजूद हथियार अपना सिर न उठाए तो अच्छा है वरना सलमा आंटी ने नोट कर लिया तो शर्मिंदगी होगी। सिरप पीने के बाद आंटी ने शापर को देखते हुए पूछा और बेटा तुम्हारा काम कैसा जा रहा है, मैंने कहा आंटी काम तो अच्छा जा रहा है, और बहुत जल्दी सीख भी गया हूँ, अब तो इकबाल साहब दुकान पर हों या न हों पूरी दुकान में ही संभालता हूं, चाहे किसी को अपने लिए ब्रा लेने हों या मेकअप का समान, सब कुछ में ही डील करता हूँ। यह कहते हुए मैंने शापर पकड़ कर उसमें हाथ डाला और सारे ब्रा निकालकर आंटी सामने टेबल पर रख दिए।

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आंटी ने ब्रा पर नज़र पड़ते ही पहले तो बौखला कर इधर उधर देखना शुरू कर दिया जैसे तसल्ली कर रही हों कि हमें कोई देख तो नहीं रहा और नज़रें चुरा चुरा कर ब्रा देखने लगीं। मैं समझ गया था कि वे वास्तव में दुकान पर जाते हुए शरमाती होंगी गैर मर्दों से अपने अंदर पहनने वाली चीजें लेते हुए। मगर पिछले कुछ महीनों के दौरान मैं एक अच्छा सेल्स मेन बन चुका था, और महिलाओं को ब्रा दिखाने के लिए पर्याप्त अनुभव भी हो गया था। मैंने पहले एक काले रंग का ही फोम वाला ब्रा उठाया और आंटी के पास खिसक कर बैठ गया, और मैंने वह ब्रा आंटी के सामने किया और आंटी को दिखाते हुए बोला, यह देखना आंटी यह बहुत अच्छी है। कितनी सॉफ्ट है और उसके अंदर फोम भी लगा हुआ है जिससे आकार थोड़ा बड़ा लगता है और सौंदर्य में वृद्धि होती है। अब की बार आंटी के हाथ कांपते हुए लग रहे थे, उन्होने कांपते हाथों मेरे हाथ से ब्रा पकड़ा और उसको ध्यान से देखने लगीं, लेकिन उनके चेहरे से परेशानी स्पष्ट हो रही थी। मैंने फिर आंटी को देखते हुए कहा आपने पहले भी काले रंग का ब्रा ही पहन रखा है, यह रंग तो आपके पास है। आप रहने दें, लाल रंग में देख लें मैंने उनके हाथ से ब्रा पकड़ लिया और लाल रंग का फोम वाला ब्रा उठाकर उन्हें पकड़ा दिया।

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आंटी ने कहा मेरा आकार तो पहले से ही बहुत बड़ा है उससे तो और भी बड़ा दिखेगा ... मैंने मुस्कुराते हुए कहा नहीं आंटी आपका आकार तो अच्छा है, पुरुषों को यही आकार की पसंद होता है और अगर थोड़े बड़े भी लगेंगे तो भी ब्रा नहीं लगेगा बल्कि आपकी सुंदरता में और वृद्धि हो जाएगी। यह सुनकर सलमा आंटी होंठो ही होंठो मे मुस्कुराई और बोली अच्छा तुम कहते हो तो मान लेती हूँ मगर मुझे तो लगता है कि मेरा आकार बड़ा बड़ा है। सलमा आंटी की हिचकिचाहट धीरे धीरे कम हो रही थी। फिर मैंने कहा आंटी पहले तुम पहन कर देख लो तो मैं आपको और भी दिखा देता हूं। आंटी ने कहा नहीं पहनने की क्या जरूरत है, बाद में देख लूँगी नहीं। मैंने कहा अरे आंटी फायदा क्या फिर अपनी दुकान होने का ... यह तो आप दुकान से जाकर भी इस तरह बिना देखे ला सकती हैं, अगर आकार बाद में खराब निकले तो चेंज करना पड़ता है। अब मैं आया हुआ हूँ तो पहन कर जाँच लें अगर ये ठीक नहीं तो कोई और दिखा दूँगा। मेरी बात सुनकर आंटी ने सोचा कि सलमान तू सही है। यही सोचकर वह लाल रंग का फोम वाला ब्रा लेकर उठी और अपने कमरे में चली गईं।

कमरे में जाकर आंटी ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और थोड़ी देर के बाद बाहर आईं तो अब उनकी कमीज के नीचे काले की बजाय लाल रंग का ब्रा लग रहा था। आंटी मेरे पास आई तो मैं ने पूछा आंटी कैसा लगा ब्रा ??? आंटी ने कुछ सोचते हुए कहा ठीक है, लेकिन मुझे लग रहा है कि इससे सीने का आकार और अधिक बड़ा लगने लगा है। मैंने आंटी के बूब्स को घूरते हुए कहा अरे नहीं आंटी, यह तो बहुत सुंदर लग रहा है आप पर। अंकल मुनब्बर तो आपका यह लाल रंग का ब्रा देखेंगे तो लट्टू हो जाएंगे आप पर .

मेरी बात सुनकर आंटी शरमाते हुए बोलीं, चल बदमाश .. फिर मैंने आंटी से पूछा, आंटी आकार तो ठीक है ना इस ब्रा का ???

आंटी ने कहा हां बेटा ठीक है। मैंने पूछा और कोई प्रॉब्लम आदि या फिटिंग कोई समस्या तो नहीं ??

आंटी ने कहा नहीं बेटा बिल्कुल सही है, कोई समस्या नहीं। फिर मैंने आंटी को एक नेट का ब्रा दिखाया। यह हल्के नीले रंग का ब्रा था जिसके ऊपरी हिस्से पर जालीदार नेट लगी हुई थी। इस ब्रा से मम्मों का आकार स्पष्ट नजर आता था, जबकि निपल्स और निचला हिस्सा ढका रहता था मैंने आंटी को ब्रा पकड़ा दिया और कहा आंटी भी चेक कर लें। आंटी ने मेरे हाथ से वह ब्रा पकड़ा और उसको पलट कर देखने लगी, फिर बोलीं इसमें तो नजर आएंगे। मैंने कहा जी आंटी, यह बहुत सेक्सी ब्रा है, मॉर्डन महिलाए मेरे से नेट का ब्रा लेकर जाती हैं। मेरी बात सुनकर आंटी धीरे आवाज में बोलीं, हां मगर तुम्हारे अंकल सेक्सी नहीं हैं ना आंटी ने यह बात बड़ी धीरे आवाज़ में कही थी मगर मैंने सुना था, लेकिन मैं अनजान बना रहा और आंटी से पूछा, आंटी आपने मुझसे कुछ कहा ??? आंटी बोलीं नहीं बेटा कुछ नहीं। यह चेक कर लेती हूँ।

आंटी फिर अपने कमरे की तरफ जाने लगी तो इस बार मैं भी आंटी के पीछे ब्रा उठाकर चल पड़ा। आंटी दरवाजा बंद करने लगीं तो मुझे दरवाजे पर ही देखकर बोली क्या है ?? मैंने कहा आंटी आप बार बार कमीज उतारेन्गी, फिर ब्रा पहनकर कमीज फिर पहनेंगी, तो फिर से बाहर आकर दूसरा ब्रा लेंगी, मैं यहीं कमरे के बाहर ही खड़ा हो जाता हूं, आप ब्रा पहनकर जाँच करें, जो ठीक लगे वह रख लें, और फिर वह उतारकर मुझसे दूसरा ब्रा मांग ले, मैं बाहर से ही आपको पकड़ा दूंगा जिससे आपका समय बचेगा। आंटी ने कहा ये ठीक है। और दरवाजा बंद कर लिया। कुछ देर बाद दरवाजा खुला तो आंटी ने एक हाथ बाहर निकाल कर ब्रा मेरी तरफ बढ़ाया और बोलीं यह ठीक नहीं, काफी तंग है कोई और दिखा। मैंने आंटी का गोरा गोरा हाथ देखा और एक पल के लिए सोचा कितना मज़ा अगर यह हाथ पकड़ कर आंटी को ऐसे ही बाहर खींच लूँ, मगर मैंने तुरंत ही इस विचार को अपने मन से झटक दिया। और एक और नेट का ब्रा जो पिंक कलर का था आंटी की ओर बढ़ा दिया। आंटी ने वह ब्रा पकड़ा और दरवाजा बंद कर लिया। थोड़े इंतजार के बाद दरवाजा खुला और आंटी ने कहा बेटा उसका आकार ठीक है, और मैंने आईने में देखा है, यह अच्छा भी लग रहा है। मैंने कहा ठीक है आंटी वह उतारकर आप एक साइड पर रख दें, मैं आपको और ब्रा पकड़ाता हूँ। आंटी ने ठीक है

आंटी ने ब्रा उतारना शुरू किया, मगर इस बार वह शायद दरवाजा बंद करना भूल गई थी। मैंने थोड़ा आगे होकर डरते डरते अंदर झांकने की कोशिश की तो आंटी की कमर मेरी तरफ थी, उनके दोनों हाथ पीछे कमर पर थे और वह अपने ब्रा के हुक खोल रही थीं। क्या चिकनी और सुंदर कमर थी आंटी की, देखने मे मज़ा आ गया था, नीचे सलवार में उनके बड़ेबड़े चूतड़ बहुत सुंदर लग रहे थे, मन कर रहा था कि अब आगे बढ़ुँ और उनके चूतड़ों की लाइन में अपना लंड फंसा दूं आंटी ने ब्रा उतार कर सामने पड़ी मेज पर रख दिया और वापस मुड़ने लगी। जैसे ही आंटी वापस मूडी, मैं एकदम से पीछे हो गया और ऐसे इधर उधर देखने लगा जैसे मुझे कुछ पता ही न हो।

फिर आंटी का फिर से एक हाथ बाहर आया और आंटी ने कहा बेटा और कौन सा ब्रा है वह भी दिखा दो। मैंने एक और ब्रा जो कपास का था और स्किन कलर का था वह आगे बढ़ा दिया, आंटी ने कलर देखकर कहा बेटा ये कलर तो पड़े हैं पहले भी मेरे पास।

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मैंने कहा कोई बात नहीं आंटी, आप पहन कर तो देखें हो सकता है यह आपको पसंद आ जाए। दरअसल मैं आंटी को फिर से देखने का चांस लेना चाहता था, इसलिए मैंने सोचा, अब आंटी यह पहन कर देंगी कि नहीं कोई और दो, तो 2 बार अधिक आंटी को देखने का चांस मिल सकता है, और हो सकता है इस से ज़्यादा भी मिले

एक बात तो मानने वाली थी कि 40 साल की उम्र होने के बावजूद आंटी का शरीर बहुत सेक्सी था। उन्होंने अपने शरीर को न तो अधिक मोटा होने दिया था और न ही उनका शरीर लटकना शुरू हुआ था, इस उम्र में आमतौर पर पाकिस्तानी महिलाए या तो बहुत मोटी हो जाती हैं, या फिर उनका मास लटकना शुरू हो जाता है, मगर आंटी का शरीर ऐसा बिल्कुल नहीं था। खैर आंटी ने अब फिर मेरे हाथ से स्किन कलर का ब्रा पकड़ लिया था और फिर पहले की तरह ही उन्होंने दरवाजा बंद नहीं किया था। जैसे ही आंटी ने मेरे हाथ से ब्रा पकड़ा में फिर से आगे खिसका और आंटी के दर्शन करने के लिए दरवाजे में मौजूद थोड़ी सी जगह से आंटी के शरीर देखने की कोशिश करने लगा। जैसे ही मैं आगे बढ़कर अंदर देखने लगा, तब आंटी का चेहरा मेरी तरफ ही था, लेकिन उनकी निगाहें अपने हाथ में मौजूद ब्रा पर थीं। और वह धीरे धीरे दूसरी ओर मुड़ रही थीं। इसी दौरान मैंने सौभाग्य से आंटी के 38 आकार के मम्मे देख लिए। वाह ..... क्या मम्मे थे। दिल किया कि उनको अपने मुंह में लेकर उनका सारा दूध पी जाऊं, लेकिन फिलहाल मुझे जूते खाने से डर लग रहा था इसलिए मैंने इस इच्छा को मन में ही दबा लिया।

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इस उम्र में भी आंटी के मम्मे चूसने लायक थे। और उनके मम्मों पर ब्राउन रंग का दायरा कुछ ज्यादा ही बड़ा था, और उनके निपल्स भी कुछ बड़े थे, लेकिन वह किसी भी आदमी को आकर्षित करने के लिए अच्छे मम्मे थे। अब आंटी अपना मुंह दूसरी तरफ कर चुकी थीं और स्किन कलर का ब्रा पहन रही थीं, आंटी के दूसरी तरफ शीशा माजूद था जो मुझे नजर नहीं आ रहा था, ब्रा पहनने के बाद आंटी ने अपने आप को इस शीशे में देखा, लेकिन शायद उन्हें यह ब्रा पसंद नहीं आया तो उन्होंने वह ब्रा उतारा और वापस मूड गई, इस बीच मैं तुरंत ही वापस पीछे होकर खड़ा हो गया था। मैं तो पीछे हो गया, मगर मेरा लंड जो इस समय मेरी सलवार में था वह खड़ा होकर अपनी उपस्थिति का एहसास दिलाने लगा था। आंटी फिर बाहर हुईं, यानी अपना हाथ बाहर निकाला और ब्रा मुझे पकड़ा दिया, इस बीच एक और ब्रा आंटी को पकड़ाया इसी तरह, 2, 3 ब्रा आंटी ने चेक किए। इस दौरान दरवाजा थोड़ा और खुल गया था और अब मेरे लिए अंदर का नज़ारा पहले से बहुत बेहतर हो गया था। अब मुझे आंटी के सामने मौजूद दर्पण भी नजर आ रहा था, और जब आंटी अपना ब्रा उतार रही थीं और दूसरा ब्रा पहन रही थीं, उस दौरान मैंने आंटी के बूब्स का बड़ी बारीकी से निरीक्षण कर लिया था और उन्हें देखकर अब मेरे लंड की बुरी हालत हो रही थी, मेरा लंड की टोपी से निकलने वाला फीता दार पानी अब मेरी सलवार को गीला कर रहा था मगर मुझे उसकी कोई चिंता नहीं थी, मुझे तो उस समय बस मम्मे देखने का शौक था। संक्षेप में आंटी सलमा ने एक एक करके सारे ब्रा चेक कर लिए और फिर एक अंतिम ब्रा जो मैंने उन्हें दिखाया, वह हल्के पीले रंग का था और उसके ऊपर लाल और हल्के नीले रंग के छोटे फूल बने हुए थे। वह ब्रा पहन कर आंटी ने ऊपर से कमीज पहनी और फिर अन्य 2 ब्रा उठाकर कमरे से बाहर आ गई।

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मैं आंटी के आगे चलता चलता वापस पहले वाले कमरे में अपनी जगह पर बैठ गया और बैठने से पहले अपने लंड को पकड़ पैरों के बीच दबा दिया। मेरे पीछे पीछे आंटी सलमा भी आकर बैठ गईं और बोलीं बस बेटा यह 3 ब्रा ही रखूंगी। इनका बता दो कितने पैसे बनते हैं। मैंने कहा आंटी आप यह बताएं आपको पसंद भी आया है या नहीं ?? आंटी बोलीं अच्छे हैं, सभी अच्छे हैं, लेकिन मुझे बस 3 चाहिए, पहले वाले फटे पुराने हैं, उनसे 3 से 2 महीने तो निकल ही जाएंगे आराम से। मैंने आंटी के बूब्स पर नज़र डालते हुए कहा, आंटी मुझे तो यही अधिक पसंद आया था जो इस समय आपने पहना हुआ है ... आंटी ने चौंक कर अपने मम्मों की ओर देखा और यह देखकर थोड़ी शर्मिंदा हुई कि उनका ब्रा कमीज से दिख रहा है, लेकिन फिर वह बोलीं हां यह भी अच्छा है, बाकी भी अच्छे हैं। अब तुम पैसे बता दो।

 
मैंने शापर में एक बार फिर से हाथ डाला और कहा आंटी यह आपने अंडर इनर भी मंगवाए थे, अंडर इन्नर भी मैंने आंटी के हाथ में पकड़ा दिया, आंटी ने उन्हें खोलकर देखा और बोलीं हां यह ठीक है आकार। मैंने आंटी से पूछा आंटी यह तो आपने शमीना के लिए मंगवाए हैं न, सायरा के लिए नहीं चाहिए ?? आंटी ने कहा हां बेटा ये शमीना के लिए हैं, सायरा अभी छोटी है उसे जरूरत नहीं। मैंने कहा ठीक है आंटी, आगे भी कभी आपको अपने लिए या शमीना को ब्रा या अंडर इन्नर चाहिए हो तो बिना हिचक आप मुझे कह सकती हैं, दुकान पर जाकर गैर मर्दों से लेने से बेहतर है कि मैं आपके लिए घर पर ही पहुंचा दूं। यह सुनकर आंटी ने कहा हां इसीलिए मैंने तुम्हें कहा था अब और अधिक बातें मत बनाओ और यह बताओ पैसे कितने बने? मैंने आंटी को पैसे बताए, आंटी ने कमरे में जाकर पैसे उठाए और लाकर मुझे दे दिए। मैं समझ गया था कि आंटी अब बिना कुछ कहे मुझे यह समझा रही हैं कि अब तुम जा सकते हो, मैंने भी उनके सिर पर सवार होना बेहतर नहीं समझा और उनसे पैसे लेकर उन्हें नमस्कार करके वापस घर आ गया। घर आकर सबसे पहले मैं अपने शौचालय में गया और आंटी सलमा के 38 इंच के मम्मों को याद करके उनके नाम की एक जबरदस्त सी मुठ मारी और अपने लंड को आराम पहुंचाया। दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे हैं
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अगले दिन फिर इसी तरह दैनिक जीवन चलता रहा इस दौरान विभिन्न तरह की औरतें और कभी-कभी जवान लड़कियां भी दुकान पर आतीं और उन्हें अपनी पसंद के अनुसार ब्रा दिखाता , वह मेडम जिन्हें मैंने पहली बार खराब बेच दिया था, वह भी एक बार फिर से आईं और तब हाजी साहब और मैं दोनों ही दुकान पर थे, लेकिन वह सीधे मेरे पास आईं और मैंने फिर से उन्हें ब्रा बेचे, लेकिन इस बार वह मेरी डीलिंग से काफी खुश नजर आ रही थीं, उनके जाने के बाद मैंने हाजी साहब को भी बताया कि यह मेडम थीं जिन्हें मैंने पहली बार ब्रा बेचे थे, हाजी साहब ने मुस्कुराते हुए कहा मेडम तो बहुत टाइट मिली हैं तुम्हे, मैं उनकी बात सुनकर हंसने लगा फिर हाजी साहब और मैं अपने काम में व्यस्त हो गए और कुछ समय तक कोई विशेष घटना नही हुई और जीवन दिनचर्या चलती रही।

फिर एक दिन जब मैं दुकान पर बैठा था मुनब्बर अंकल दुकान पर आए और उन्होंने हाजी साहब से कहा कि अगर आप बुरा ना माने तो आज सलमान को छुट्टी दे दे, मुझे कुछ काम है इससे .. हाजी साहब ने कहा कोई समस्या नहीं बच्चा बड़ा मेहनती है और अभी तक कोई अनावश्यक छुट्टी भी नहीं की है, अगर आपको कोई काम है तो आप जरूर ले जाएं मुझे कोई आपत्ति नहीं। मुनब्बर अंकल ने हाजी साहब को धन्यवाद दिया और मुझे लेकर बाइक पर अपने घर ले गए। घर गया तो सामने सलमा आंटी मेकअप आदि कर कहीं जाने के लिए तैयार बैठी थीं। मैंने आंटी को सलाम किया और मुनब्बर चाचा की तरफ सवालिया नज़रों से देखा तो उन्होंने मुझे बताया कि सलमा अचानक जाना पड़ रहा है, तो मैं चाहता हूँ तुम साथ चले जाओ। वहां उनकी बहन की बेटी की शादी की तारीख रखने का फन्कशन है तो इन्हे वहाँ होना चाहिए, शाम को वापसी हो जाएगी और कल वैसे ही शुक्रवार है तो आप छुट्टी कर सकते हो। मैंने कहा ठीक है चाचा कोई समस्या नहीं कब जाना है? मेरी बात पर आंटी सलमा बोलीं अभी, मैं तैयार हूँ। मैंने आंटी को कहा ठीक है मैं मुंह हाथ धो लूँ और घर अम्मी को सूचना दे दूँ, फिर चलते हैं। अंकल ने कहा ठीक है तुम दोनों ने जब जाना हो चले जाना, मैं तो काम पर जा रहा हूँ। यह कह कर अंकल चले गए और आंटी सलमा ने कहा, तुम मुँह हाथ धो आओ, नहाना हो तो नहा भी लो, मैं तुम्हारी अम्मी को फोन करके बता देती हूँ। मैंने कहा ठीक है आप अम्मी को बता दें।

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यह कह कर मैं शौचालय चला गया, और कपड़े उतार कर शावर के नीचे खड़ा हो गया, मैंने सोचा आंटी की बहन के यहाँ मेहमान आए होंगे तो थोड़ा साफ होकर जाना चाहिए यही सोचकर मैंने स्नान किया और बाल बनाकर बाहर आया। कपड़े मेरे नये ही थे जो किसी समारोह में जाने के लिए ठीक ठाक थे। मैं बाहर आया तो आंटी ने बताया कि वह अम्मी को फोन करके मेरे बारे में सूचना दे चुकी हैं, लेकिन तुम्हे खाना आदि खाना है तो बताओ, मैंने कहा नहीं आंटी भोजन नहीं बस निकलते हैं हम। ( दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे हैं ) आंटी ने शमीना और सायरा को साथ लिया और हम रिक्शे में बैठकर बस स्टॉप तक गए। वहाँ आंटी ने एक लोकल बस का चयन किया तो मैंने आंटी को कहा लोकल बस बहुत देर लगा देती है हम पिंडी इस्लामाबाद जाने वाली बस में चलते हैं आधे घंटे में हम कबैरोालह होंगे। आंटी ने कहा, हां यह भी ठीक है। फिर हम एक पिंडी जाने वाली बस में सवार हो गए जो चलने के लिए पूरी तरह तैयार थी, मगर इसमें कोई खाली सीट नहीं थी तो हम बस के बीच में जाकर खड़े हो गए। 2, 3 मिनट बस रुकी रही तो काफी सवारियां और भी सवार हो गईं मगर किसी को भी सीट उपलब्ध नहीं थी। हम जहां जाकर खड़े हुए वहां साथ वाली सीट पर 2 औरतें बैठी थीं, उन्होंने सायरा को अपने साथ कर लिया अब शमीना आंटी के साथ खड़ी थी और उनके पीछे खड़ा था

कुछ देर बाद गाड़ी चल पड़ी और 5 मिनट में ही हम मुल्तान शहर से बाहर निकल चुके थे। बस चालक घोड़े पर सवार था। बस में भीड़ अधिक होने की वजह से सलमा आंटी मेरे काफी करीब खड़ी थीं, बुर्का वह पहनती नहीं थी बस एक बड़ी सी चादर सिर पर ली हुई थी उन्होंने। इस दौरान ब्रेक लगने के कारण मैं एक दो बार आगे हुआ तो सलमा आंटी के बदन से मेरा बदन टच हो गया। नरम नरम पैर और फोम की तरह नरम उनके चूतड़ मेरे शरीर से टकराए तो मेरे अंदर हलचल होने लगी। मैंने नीचे चेहरा करके सलमा आंटी की गाण्ड देखी तो देखता ही रह गया, उनकी कमर 32 इंच थी मगर उनके चूतड़ों का आकार 36 "था जो काफी बड़ा था। मेरी नजर उनके चूतड़ों पर पड़ी तो मुझे आंटी के मम्मे भी याद आ गए जो मैंने आंटी के घर में ही कुछ महीने पहले देखे थे जब आंटी के यहाँ ब्रा देने गया था। सलमा आंटी की 36 "गाण्ड देखना और उनके 38" के मम्मों के बारे में सोच सोच कर मेरा लंड सलवार में सिर उठाकर खड़ा हो गया था और सलमा आंटी की फोम जैसी गाण्ड को सलयूट करने के लिए तैयार था।

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आदत अनुसार मेंने भी अंडर इन्नर नहीं पहना था उसी कारण मेरी सलवार में हल्का सा कूबड़ दिखने लग गया था, मैं कोशिश तो कर रहा था कि लंड बैठा ही रहे, लेकिन सलमा आंटी की गाण्ड उसको शायद अपनी ओर खींच रही थी और वो अपने आप उनकी तरफ खिंचा चला जा रहा था। मुझे डर था कि कहीं यह सलमा आंटी के बदन से न टकरा जाए इसलिए मैं उनसे कुछ दूरी पर होकर खड़ा हुआ मगर भीड़ अधिक होने की वजह से यह दूरी भी महज कुछ इंच की ही थी ड्राइवर को शायद मेरी इस हरकत पसंद नहीं आई इसलिए उसने एक जोरदार ब्रेक लगाई मेरे सहित सारी सवारियां आगे हुई और एक दूसरे से टकरानेलगें यही वह समय था जब मेरा सैनिक भी सीधा सलमा आंटी के 2 पहाड़ों के बीच मौजूद घाटी में घुस गया। मेरा लंड फिलहाल जोबन पर था और जब सलमा आंटी से टकराया तो मुझे उनके नरम नरम चूतड़ों का एहसास अपनी टांगों पर हुआ, मेरा सख्त लोहे का लंड जब उनकी गाण्ड से लगा तो निश्चित रूप से उन्हें भी वह महसूस हुआ होगा, मैं तुरंत पीछे हटा और सलमा आंटी का करारा थप्पड़ खाने के लिए तैयार हो गया, मगर उन्होंने सरसरी तौर पर पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा और फिर नीचे देखने लगी कि उनकी गाण्ड में क्या आकर लगा, मगर फिर बिना कुछ कहे फिर से आगे की ओर देखने लगीं। दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे हैं

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फिर एक और ब्रेक लगी और मेरा लंड पहले की तरह फिर से सलमा आंटी के चूतड़ों में घुसने की कोशिश करने लगा और मैं जल्दी से पीछे होकर खड़ा हो गया, फिर सलमा आंटी ने पीछे मुड़ कर देखा और फिर पुनः सीधी होकर खड़ी हो गईं। मुझे डर लगने लगा था और दुआएं मांग रहा था कि मेरा लंड बैठ जाए, मगर फिर अचानक पता नहीं क्या हुआ कि ब्रेक नहीं लगी मगर मेरा लंड फिर सलमा आंटी के चूतड़ों से टकराने लगा। मैं एक झटके से थोड़ा पीछे हुआ तो पीछे खड़े एक आदमी ने मुझे डांटते हुए कहा कि अपने वजन पर खड़े रहो और मुझे थोड़ा सा आगे की ओर धकेल दिया। अब मेरा लंड सलमा आंटी की चूत से कुछ ही दूरी पर था मगर फिर एक बार फिर से सलमा आंटी पूर्ण रूप से पीछे हुई तो मेरा लंड फिर से उनके पहाड़ जैसे चूतड़ों के बीच मौजूद लाइन में घुस गया, पता नहीं क्यों, लेकिन इस बार मेंने पीछे की कोशिश नहीं की और आश्चर्यजनक रूप से सलमा आंटी भी ऐसे ही खड़ी रहीं उन्होंने फिर से आगे की कोशिश नहीं की।

 


मैंने कहा आंटी उस दिन बस में जब से आप ने अपने हाथ में पकड़ा है तब से मेरी और मेरे लंड की तो हालत बुरी है, कैसे न खड़ा हो तो आपको देखकर। इस बीच आंटी के चूतड़ों को पकड़ कर अपना लंड आगे कर चुका था, आंटी ने मेरी बात सुन कर कहा, तुम्हारा पहले से ही खड़ा था और बार बार मेरे पीछे स्पर्श हो रहा था इसीलिए तो पकड़ा था। मैंने कहा आंटी आपके नितंबों हैं ही इतने जबरदस्त कि हर आदमी का लंड आपको देख कर खड़ा हो जाए, यह कह कर मैंने अपने दोनों हाथों से एक बार फिर आंटी के मम्मे पकड़ लिए और उन्हें जोर से दबा दिया और अपनी जीभ निकाल कर आंटी की कमर को चाटना शुरू कर दिया। मेरी इस हरकत से आंटी को मस्ती चढ़ गई थी, आंटी ने कहा अभी तो मेरी उम्र अधिक हो गई है तुम मुझे जवानी में देख लेते तो मेरे पतले शरीर पर मेरे ये बड़े मम्मे और बाहर निकले हुए चूतड़ देख कर तुम सलवार में ही झड जाते, अब तो मेरा बदन काफी मोटा हो गया है।

मैंने कहा आंटी आपकी जवानी का तो पता नहीं, मगर आज भी आप किसी जवान हसीना से कम नहीं, आपके निकले हुए चूतड़ देख कर तो आपकी गाण्ड मारने का मन करता है और आपके 38 मम्मे देख कर मुंह में तो पानी आता ही है, लंड पर भी पानी की बूंदे आना शुरू हो जाती हैं। यह कह कर मैंने के आंटी ब्रा की हुक खोल दी और आंटी का ब्रा उतार दिया। ब्रा उतार कर मैंने पीछे खड़े खड़े ही आंटी के बूब्स को अपने हाथ में पकड़ लिया और उन्हें धीरे धीरे मसलने लगा। जिससे आंटी की मस्ती में अधिक वृद्धि हो रही थी मैं आंटी की कमर चाटने के साथ साथ अपने लंड को धीरे धीरे आंटी के चूतड़ों में हल्के हल्के धक्के भी लगा रहा था और आंटी के बूब्स को भी हाथ में पकड़ कर दबा रहा था। (https://www.raj69.com )आंटी के मम्मे इतने बड़े थे कि मेरे हाथों में पूरे नहीं आ रहे थे। मगर एक बात थी कि आंटी के चूतड़ों में फंसा लंड और आंटी के नरम नरम मम्मे जो मज़ा दे रहे थे वह मजा तो मेरी पड़ोसी लड़की को चोदने मे भी नहीं आता था जिसकी उम्र अभी सिर्फ 20 या 21 साल थी और जवानी की आग उसकी चूत में लगी हुई थी। मगर उसको चोदने मे भी कभी ऐसा मज़ा नहीं आया था जो अभी कपड़े उतारे बिना ही आंटी से सेक्स करने मे आ रहा था। कुछ देर तक आंटी अपने चूतड़ों में लंड के मजे लेती रही, इस दौरान आंटी की सांसें अभी से बहाल हो चुकी थी और उन्हें जो पहले थोड़ी झिझक थी अब वह नहीं रही थी बल्कि वह अब रिलैक्स हो गईं थीं। फिर आंटी ने अपने मम्मों से मेरा हाथ हटाया और मेरी ओर मुड़ कर बोलीं उन्हें दबाते ही रहोगे या इनमे से दूध भी पीओगे ?

मैंने कहा क्यों नहीं आंटी, मैं तो पता नहीं कब से आपके मम्मों से दूध पीने के लिए तरस रहा हूँ, यह कह कर मैं थोड़ा नीचे झुका और आंटी के बूब्स पर अपना मुँह रख कर उनके निपल्स को चूसने लगा। आंटी के बूब्स पर निपल्स जवान लड़कियों की तरह छोटे नहीं थे वे आकार में थोड़े बड़े थे, मगर उन्हें चूसने का मज़ा बहुत आ रहा था। जैसे ही मैंने आंटी के मम्मे चूसना शुरू किए आंटी ने मेरे लंड पर अपना हाथ रख लिया और बोलीं लगता है तेरी सलवार में यह हथियार खासा मजबूत और बड़ा है, एक बार चेक तो करने दे कि कैसा माल है तेरी सलवार में। मैं आंटी के बूब्स से मुंह हटाया और कहा आंटी आप पहले एक बार यह हथियार चेक करो फिर आपकी चूत और गांड दोनों ही इस हथियार की दीवानी हो जाएंगी और आप बार बार मेरे पास आकर चुदाई करवाया करोगी। यह कह कर मैंने फिर से अपना मुंह आंटी के बूब्स पर रख कर उनके निपल्स चूसना शुरू कर दिए और आंटी ने सलवार के ऊपर से ही मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और उसकी पैमाइश शुरू कर दी। मेरे लंड को अच्छी तरह टटोलने के बाद आंटी ने पूछा तेरा आकार तो किसी हटे कटे पुरुष के लंड के आकार जितना लगता है मगर तेरा रूप देखकर नहीं लगता कि तुम्हारे पास इतना बड़ा लोड़ा होगा। आंटी ने थोड़ी देर मेरे लंड को सलवार के ऊपर से ही मुठ मारी और फिर बोलीं, तेरे अंकलसे तो बड़ा ही लग रहा है यह क्या आकार है उसका ?? मैंने फिर आंटी के निपल्स छोड़े और आंटी को कहा केवल 8 इंच का है आंटी यह।

8 इंच सुनकर आंटी की आँखें खुली की खुली रह गईं और बोलीं बाप रे, तेरे अंकल का तो केवल 6 इंच का है, दिखा तो सही जरा वाकई 8 या ऐसे ही बकवास कर रहा है, यह कह कर आंटी ने खुद ही मेरी सलवार का नाड़ा खोला, सलवार एक झटके से नीचे उतर गई तो आंटी ने मेरी कमीज ऊपर उठा कर मेरे 8 इंच के लंड पर नज़र मारी। कुछ देर वह बिना आंखें झपकाए मेरे लंड को देखती रहीं, फिर उन्होंने मेरी ओर देखा और उसके बाद फिर से लंड को देखने लगीं। मैंने कहा क्यों आंटी कैसा लगा आपको मेरा लंड?

आंटी ने कहा बहुत ही मस्त है यह तो आज तक ऐसा लंड नहीं देखा मैंने, यहाँ तो तेरे अंकल के 6 इंच लंड है, वो भी काफी समय से नसीब नहीं हुआ, या फिर उनके छोटे भाई का 7 इंच का लंड है जो 3, 4 महीनों के बाद एक बार मिलता है। मैंने आश्चर्य से आंटी को देखा और आश्चर्य से पूछा आंटी क्या आप अपने देवर से भी चुदाई करवाती हैं ?? आंटी ने कहा हां तो और जब तेरे अंकल महीनों महीनों मेरी चूत को देखेंगे ही नहीं तो किसी ना किसी के लंड से तो मुझे अपनी प्यास बुझानी ही है न। मैंने कहा आंटी पहले बताती न तुम, मेरे होते हुए आपको इतना इंतजार करने की क्या जरूरत थी, बस अब आपका जब मन करे, तो यहाँ आकर मुझ से चुदाई करवा सकती हैं। इस लंड को अपना लंड ही समझें। आंटी ने कहा अब तेरे लंड की खैर नहीं, ऐसे सवारी करूंगी तेरे लंड पर कि तू जवान और गर्म चूतों को भूल जाएगा और अपनी आंटी की चूत का दीवाना हो जाएगा।

यह कह कर आंटी नीचे बैठ गई और मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया। मैंने कहा आंटी यहाँ ठीक से मज़ा नही आ रहा है, बाहर चलते हैं। आंटी ने कहा पागल हो? लोग बाहर से अंदर देखेंगे, मैंने कहा आंटी बेफिक्र हो जाओ, अंदर से तो बाहर दिखाई देता है पर बाहर से अंदर दिखाई नहीं देगा। आंटी ने कहा सोच लो, अगर कहीं से भी अंदर नजर पड़ गई तो यहीं जूते पड़ जाने हैं तुम्हें भी और मुझे भी। मैंने कहा आंटी बेफिक्र हो जाओ कुछ नही होता, यह कह कर मैंने अपनी कमीज उतार दी और नंगा ही बाहर आने लगा। आंटी भी मेरी पीछे बाहर आ गई, बाहर आकर सोफे पर पैर फैलाकर बैठ गया, आंटी मेरे सामने जमीन पर बैठ गई और मेरा लंड पकड़ कर उस पर पहले अपने मुंह में थूक का गोला बनाकर उस पर फेंका और फिर दोनों हाथों से मेरा 8 इंची लंड पकड़ कर उसे अपने थूक से मालिश देने लगीं। थोड़ी देर तक आंटी अपने दोनों हाथों को घुमा घुमा कर मुझे मज़ा देती रही, आंटी का एक हाथ लंड की टोपी को पकड़ता और दूसरा हाथ नीचे होता,(https://www.raj69.com ) और फिर अपने दोनों हाथों को ऐसे घुमाती जैसे कपड़े निचोड़ने के लिए हाथ घुमाया जाता है, और इसी तरह हाथ घुमा कर नीचे ले आतीं। आंटी यह काम बहुत कौशल से कर रही थीं।

थोड़ी देर तक मेरे लंड की घुमा घुमा कर मुठ मारने के बाद आंटी डागी स्टाइल में मेरे सामने बैठ गईं, उन्होंने अपने दोनों हाथ जमीन पर रख लिए थे और घुटने भी जमीन पर लगे हुए थे और मेरा लंड अब आंटी के मुँह में था। आंटी को चुसाइ लगाने में भी खासी महारत हासिल थी। आंटी शरप शरप की आवाज के साथ मेरे लंड पर अपना मुँह ऊपर नीचे करके सेक्सी दुकान के वातावरण को और सेक्सी बना रही थीं। मैंने आंटी के बाल उनकी गर्दन पर इकट्ठे करके अपने हाथ में पकड़ लिए थे और मैं भी आंटी के बाल खींच खींच कर उन्हें चुसाइ लगाने पर उकसा रहा था जिससे आंटी की मस्ती में अधिक वृद्धि हो रही थी आंटी की गर्म गर्म सांसें, और थूक से भरा मुंह, मेरे लंड को बहुत मज़ा दे रहे थे। फिर आंटी ने अपनी जीभ बाहर निकाली और मेरे लंड की टोपी पर अपनी जीभ को गोल गोल घुमाने लगी। मेरी टोपी की बनावट भी बहुत अच्छी थी जिस पर आंटी अपनी जीब फेर फेर कर मुझे मज़ा दे रही थीं, 5 मिनट तक आंटी मेरे लंड की चुसाइ लगाती रहीं तब मैंने आंटी को कहा आंटी अब अपनी चूत भी दिखा दें मुझे तो मैं भी उसे थोड़ा प्यार कर सकूँ। आंटी ने कहा पहले मुझे इस जवान घोड़े को दिल खोलकर प्यार करने दे, तू ने सिर्फ़ मेरे लिए अपने बाल साफ किए हैं ना आज? मैंने कहा जी आंटी मुझे पूरा यकीन था कि आज मेरा इंतजार खत्म होगा और आपकी चिकनी चूत और टाइट गाण्ड में मेरा यह घोड़ा सरपट दौड़ कर जाएगा। आंटी ने फिर से लंड चूसा और बोलीं दुर्लभ का लंड तो हमेशा बालों से भरा रहता है उसको चूसने में बहुत मज़ा नहीं आता जितना मज़ा आज तेरा यह तगड़ा और सॉफ सुथरा घोड़ा दे रहा है।

मैंने कहा आंटी आपका अपना ही लंड है जब आप आदेश करेंगी आप से चुसाइ लगवा लूँगा मगर इस समय मुझे आपकी चूत देखनी है। यह सुनकर आंटी ने मेरा लंड छोड़ा और मेरे सामने खड़ी हो गईं। मैं थोड़ा आगे बढ़ा और आंटी की सलवार एक ही झटके में उनके घुटनों तक उतार दी। मेरे चेहरे के बिलकुल सामने आंटी की चूत थी जो बिल्कुल साफ था, आंटी ने भी शायद यहाँ आने से पहले ही अपनी चूत की सफाई की थी, मैंने आंटी की तरफ देखा और फिर आंटी की चूत पर एक प्यार भरा चुंबन करके आंटी को कहा आंटी आप ने भी ख़ास मेरे लिए ही अपनी चूत की सफाई की है ना ?? आंटी ने कहा, हां, दुर्लभ और मुनब्बर ने तो कभी चूत देखी ही नहीं वह तो सीधा अपना लंड ही चूत में डालते हैं, लेकिन मुझे पता है आजकल के नौजवानों को चूत चाटने का बहुत शौक होता है इसलिए ख़ास तेरे लिये चूत को बालों से साफ करके आई हूँ। मैंने आंटी की तरफ देखा और कहा आंटी आपको कैसे पता कि युवाओं को चूत चाटना पसंद है ?? दुर्लभ अंकल के अलावा भी है कोई ??? आंटी खिसियानी होकर हँसी और बोलीं हां मोहल्ले का एक लड़का है, सप्ताह मे आकर मेरी चूत को प्यार करता है और गांड को चोदता है। मगर उसका लंड भी तेरे लंड जैसा नहीं। 6 इंच का ही है उसका लंड मगर चूत की प्यास बुझ जाती है उससे .

मुझे भला इससे क्या लेना देना था कि आंटी किस किस से चुदवाती हैं, मैंने मन ही मन में अपनी चुदक्कड़ आंटी को दाद दी और अपनी जीभ निकाल कर उनकी चूत पर फेरने लगा। आंटी की नरम और मुलायम चूत पर अपनी जीभ फेरने के बाद मैंने अपनी ज़ुबान आंटी की चूत के लबों में प्रवेश करा दी जहां आंटी की चूत का गाढ़ा पानी लगा हुआ था। स्वाद तो इतना अच्छा नहीं था, थोड़ा कड़वा और कसैला स्वाद था आंटी की चूत का, परंतु उसकी गर्मी ने मुझे अपनी जीब हटाने नहीं दी और लगातार आंटी की चूत को चाटता रहा। आंटी की मस्ती बढ़ती जा रही थी और आंटी ने अब मुझे सिर से पकड़ रखा था और मुझे अपनी चूत की तरफ धकेल कर सिसकियाँ ले रही थीं। आह ह ह ह ... आह ह ह ह ... जोर से चूस बेटे मेरी चूत को अपनी आंटी की चूत को आह ह ह ह ह ...(https://www.raj69.com )... जीब फेर अंदर जोर से ..... और जोर से .... आह ह ह ह ह ह ह एफ एफ एफ एफ .... आह ह ह ह ह, आह ह ह ह आह ह ह ह ... आंटी की सिसकियाँ तेज होती जा रही थीं और फिर अचानक आंटी ने अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को जोर से पकड़ कर अपनी चूत के साथ लगा लिया और तभी आंटी के ज्वालामुखी ने लावा उगलना शुरू कर दिया। मैं समझ गया था कि आंटी छूटने वाली हैं लेकिन मैंने पहले ही अपना मुंह बंद कर लिया था क्योंकि आंटी की चूत का पानी पीने का मेरा कोई इरादा नहीं था। मगर आंटी के गरम पानी ने मेरा सारा चेहरा भिगो दिया था कि मैं ने आंटी की सलवार से ही साफ किया जो कि अभी तक उन्होंने पहन रखी थी।

 
अगले दिन मैं उत्सुकता से राफिया और अपनी मंगेतर मलीहा का उत्सुकता से इंतजार करता रहा मगर सारा दिन बीत गया और दोनों में से कोई नहीं आया। 3, 4 दिन बीत गए न तो राफिया आई न ही उसकी दोस्तें नीलोफर और ना शाज़िया आईं और न ही सलमा आंटी ने कोई लिफ्ट करवाई। फिर करीब एक सप्ताह के बाद लैला आंटी दुकान पर आईं तो उन्हें देखकर बहुत खुश हुआ। क्योंकि जब से मेरी सगाई हुई थी लैला मेडम दुकान पर नहीं आई थीं और न ही मैं उन्हें यह खुशखबरी सुना सका था। लैला मैम दुकान पर आईं तो वह खुश दिखाई दे रही थीं, मैंने उनसे उनकी खुशी का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि काफी दिनों के बाद वह अपने गांव गई और अपनी बहन और अन्य रिश्तेदारों के साथ कुछ समय बिताकर आई हैं । इसलिए उनका मूड बहुत अच्छा था,

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उसके साथ लैला मेडम ने यह भी बताया कि कल उनकी शादी की सालगिरह है और इस संबंध में वे कुछ तैयारी कर रही हैं। साथ ही उन्होंने मुझे भी अपनी पार्टी में आमंत्रित किया तो मैंने लैला मेडम बताया कि दुकान बंद करते करते काफी रात हो जाती है तो मेरा आना मुश्किल होगा, लेकिन लैला मेडम ने मुझे सख्ती से आने को कहा और कहा कि अगर एक दिन दुकान जल्दी बंद कर दोगे तो कोई नुकसान नहीं होगा, थोड़ा समय अपने लिए भी निकाल लेना चाहिए। फिर इससे पहले कि लैला मेडम अगली कोई बात करतीं मैंने मेडम को अपनी सगाई के बारे में बताया जिसे सुनकर वह बहुत खुश हुईं और मुझे बधाई दी। दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे हैंऔर शादी कब तक करने का इरादा है, लड़की क्या करती है, आदि आदि इस तरह की बातें पूछने लगीं। फिर लैला मेडम ने पूछा कि अपनी मंगेतर की फोटो दिखाओ तो मैं ने लैला मेडम को बताया कि अब तक तो मैंने खुद भी उसे नहीं देखा। यह सुनकर मेडम बहुत हैरान हुईं और बोलीं अगर देखा नहीं तो सगाई कैसे हो गई? मैंने मेडम बताया कि मेरे घर वाले उसके घर गए और फिर उनके घर वाले हमारे घर आए , न तो मैं उधर गया और न ही मलीहा मेरी मंगेतर हमारे घर आई। और न ही मोबाइल में उसकी कोई तस्वीर देखी है। बस अम्मी को पसंद है मैंने हाँ कर दी। मेरी बात सुनकर लैला मेडम कहा आश्चर्य आजके दौर में भी ऐसे आज्ञाकारी बच्चे हैं। फिर उन्होंने मुझे आने वाले जीवन में सुखों का आशीर्वाद दिया और फिर बोलीं कि कल उन्होंने साड़ी पहननी है काले रंग की तो उसके साथ कोई अच्छा सा ब्रा दिखा दो।

मैंने मेडम से पूछा साड़ी के साथ ब्रा पहनेंगे या ब्लाऊज़ के नीचे ब्रा पहनेंगे ??? मेरी बात सुनकर लैला मेडम हल्का सा मुस्कुराई और बोली तुम्हें कैसा पसंद है ?? थोड़ा संकोच से मैने कहा क्या मतलब मेडम ?? लैला मेडम ने कहा मतलब सीधा सा है तुम्हें साड़ी के साथ ब्रा पहना हुआ अच्छा लगता है या ब्लाऊज़ के नीचे से ब्रा अच्छा लगता है? मैं अब अपने सवाल पर थोड़ा शर्मिंदा हुआ और कहा नहीं मेरा मतलब था कि आप साड़ी के साथ ब्रा पहनेंगी इसीलिए मैं समझा कि शायद आप को अपने पति के सामने पहननी है साड़ी तो उसके साथ ब्रा पहनेंगे, वैसे तो ब्लाऊज़ ही पहना जाता है साड़ी के साथ। मेरी बात सुनकर मेडम के चेहरे पर एक बार फिर से कुछ उदासी सी दिखने लगी, तो वे बोलीं मैंने तुम्हें बताया तो था कि वह हिल डुल भी नहीं सकते तो कैसे उनके लिए ऐसे कपड़े पहनना चाहिए। यह कहते हुए उनकी आंखों से उदासी साफ झलक रही थी और मैं मन ही मन में एक बार फिर से अपने आप को कोस रहा था।

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फिर मैंने कहा वैसे आप चाहें तो मैं आपको ब्लाऊज़ नुमा ब्रा भी दिखा सकता हूँ, जो साड़ी के साथ बहुत सुंदर लगती हैं। मेडम ने कहा, दिखा। मैंने ब्रा पैन्टी सेट में से कुछ ऐसे ब्रा निकाले जो ब्लाऊज़ की तरह बने हुए थे, यानी वे केवल मम्मों को ही नहीं बल्कि थोड़ा छाती और कुछ हद तक पेट को कवर करते थे। इस तरह के ब्रा या ब्रा से अधिक उन्हें शर्ट कहना उचित होगा नाइटी के साथ आते हैं और रात को ही पहने जा सकते हैं, लेकिन अगर उसको साड़ी के साथ भी पहन लिया जाए तो न केवल बहुत सुंदर लगते हैं बल्कि सेक्सी भी लगते हैं। मैंने ऐसी ही एक छोटी शर्ट मेडम दिखाई जिसके बाजू नहीं थे, उसमें कंधे नंगे रहते हैं,दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे हैं लेकिन गर्दन के आसपास उसका कॉलर सा बना हुआ था और नीचे मम्मों से कुछ ऊपर शर्ट पर लाल रंग का कढ़ाई वाला काम शुरू होता था और क्लीवेज़ बनाता हुआ मम्मों को छिपाने के बाद नाभि से कुछ ऊपर यह शर्ट खत्म हो जाती थी। पीछे से शर्ट मे 3 स्ट्रिप थीं, एक हाथ पिछे कंधों की हड्डी के बराबर, एक जहां ब्रा स्ट्रिप होती है वहाँ और एक से कुछ नीचे कमर पर। इस शर्ट में लगभग सारी ही कमर नंगी रहती थी मेडम यह शर्ट बहुत पसंद आई और बोलीं यह तो बहुत सुंदर लगेगी। मैंने कहा जी मेडम यह आपके शरीर पर बहुत सुंदर लगेगी।

 
मेडम ने कहा ठीक है फिर ये पैक कर दो कल यही पहनूँगी पार्टी में। फिर मैं ने मेडम से पूछा कि मेडम और कौन आ रहा है पार्टी में ?? मेडम ने कहा कोई खास लोग नहीं, बस मैं और मेरी 2, 3 दोस्त होंगी उनके पति होंगे और तुम होगे। कुल मिलाकर 6 से 7 लोग ही होंगे। मैंने कहा ठीक है मेडम में पहुंच जाऊंगा। मैं ने मेडम से पार्टी का समय पूछा और मेडम को शर्ट शॉपिंग बैग में डाल दी और मेडम मुझे आने की ताकीद कर दुकान से चली गईं। वास्तव में मेरा कोई इरादा नहीं था पार्टी में जाने का,दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे हैं लेकिन जब मेडम ने शर्ट खरीद ली जो निश्चित रूप से ब्रा नीचे नहीं पहनी जा सकती थी तो मुझे यकीन हो गया कि मेडम साड़ी के साथ यही शर्ट पहनेंगी, इसलिए अब मेरा दिल करने लगा था कि लैला मेडम को साड़ी के साथ यह शर्ट पहने देखूं कि वह कैसी लगती हैं। मुझे पूरा विश्वास था कि मेडम इस शर्ट को पहनकर बहुत सेक्सी लगेंगी। इसीलिए मैंने पार्टी में जाने की ठान ली थी। अगले दिन दोपहर को जब भोजन का समय होता है और दुकान बंद करके थोड़ा आराम लेता हूँ तब मैंने दुकान बंद की और घर चला गया, घर जाकर मैंने अपनी पसंदीदा रंग की शर्ट निकाली जिस बहुत ही कम पहनता था उसको इस्त्री करके अच्छी तरह नहाया और अंडर वेअर पॅंट पहन कर वापस दुकान पर आ गया। अंडर वेअर मैंने विशेष रूप से पहना था हालांकि मुझे अंडर वेअर मे बहुत उलझन होती है और यह पहनना पसंद नही करता मगर मुझे डर था कि मेडम को इतने सेक्सी पोशाक में देखकर मेरा लोड़ा बहुत स्पष्ट रूप से खड़ा दिखेगा इसलिए उसे बांधकर रखना जरूरी था।

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अब मैं उत्सुकता से रात 8 बजने का इंतजार कर रहा था क्योंकि मुझे रिक्शा में जाना था और मेडम के घर जाते जाते कोई 20 से 30 मिनट का समय आवश्यक था और 9 बजे पार्टी का समय था। इस दौरान कुछ ग्राहक भी आईं दुकान पर और मेरा बदला हुआ हुलिया देखकर हैरान भी हुईं। क्योंकि पहले वह मुझे सलवार कमीज में एक दो बारी देख चुकी थीं। दुकान बंद करते करते मुझे थोड़ी सी देर हो गई क्योंकि 8 बजे भी एक ग्राहक अपने लिए ब्रा खरीदने के लिए आई हुई थी जो ट्राई रूम में जाकर ब्रा पहनकर जाँच भी कर रही थी। मेरा लोड़ा काफी देर से सख्त हो रहा था क्योंकि मुझे मेडम को सेक्सी पोशाक में देखने की जल्दी थी। इसीलिए लोड़े की दृढ़ता ने मुझे मजबूर किया कि ट्राई रूम का कैमरा ऑन कर के उस औरत का हुस्न देख लूँ। इसलिए मैंने पहली बार अपने सिद्धांतों के खिलाफ जाते हुए मात्र ग्राहक का शरीर देखने के लिए कैमरा ऑन कर लिया। उफ़ क्या नज़ारा था, इस औरत का शरीर बहुत ही सुंदर था, 28 साल की उम्र और पेट नगण्य। 36 के गोरे गोरे कसे हुए मम्मे क़यामत ढा रहे थे। उसके मम्मों पर नज़र पड़ते ही मेरा हाथ अपनी पैंट पर चला गया जहां मेरे लोड़े की दृढ़ता अब चरम पर पहुंच चुकी थी

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महिला ने अब मेरा दिया हुआ ब्रा पहना और उसको प्रत्येक एंगल से शीशे में देखने लगी। उसकी फिटिंग से संतुष्ट होकर वह फिर मेरी ब्रा की हुक खोलनी शुरू की तो मैंने एक बार फिर बूब्स का नज़ारा करने के लिए अपनी आँखें स्क्रीन पर गढ़ा लीं फिर उसने अपना ब्रा उतारा तो उसके मम्मे ब्रा की कैद से मुक्त होकर जेली की तरह हिलने लगे और मेरे लोड़े की कठोरता में और वृद्धि करने लगे। फिर उस स्त्री ने अपने दोनों बूब्स को अपने हाथों से पकड़ लिया और शीशे में उनके आकार का निरीक्षण करने लगी। दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे हैं कुछ देर वह अकारण ही शीशे में अपने मम्मों की बनावट को देखती रही और फिर वह फिर से अपना पहले वाला ब्रा पहन लिया और ऊपर से कमीज पहन कर बाहर आ गई तो मैंने भी तुरंत ही ट्राई रूम का कैमरा बंद कर दिया। इसने मुझे ब्रा शॉपिंग बैग में डालने को कहा और अपने पर्स से पैसे निकालने लगी जबकि मेरी नज़रें उसके सीने पर जमी हुई थीं। उसके मम्मों की सुंदरता देख अब जी कर रहा था कि मैं अभी उसके मम्मों को हाथ में पकड़ कर उनकी सहजता और बनावट की जाँच करू, मगर अफसोस कि ऐसा न हो सका और वह स्त्री पैसे देकर चलती बनी। कुछ देर उस औरत की याद मे अपने लोड़े को सहलाता रहा फिर अचानक ही मुझे लैला मेडम की पार्टी याद आई तो मैंने अपना कैश गिना और उसे अपने गुप्त दराज में रख कर दुकान बंद कर दी।

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मेरी साथ वाली दुकान के दुकानदारों ने मुझे उस समय दुकान बंद करते देखा और पेंट शर्ट पहने देखा तो वह भी हंसने लगे और बोले वाह सलमान साहब, आज तो बाबू बन गए हो तुम भी कहाँ की तैयारियां हैं ??? मैंने उन्हें बताया बस एक दोस्त की शादी है उसकी शादी में शिरकत करनी है तो सोचा थोड़ा बन ठन कर जाऊं क्या पता कोई लड़की फिदा होजाए आपके भाई पर। मेरी इस बात पर वह दुकानदार भी हंसने लगे और फिर अपने कामों में व्यस्त हो गए, मैंने दुकान बंद की और फ्लाई के नीचे से होता हुआ दूसरी ओर चला गया, वहाँ से एक ऑटो रिक्शा वाले को पकड़कर मेडम के घर का पता समझाया और मेडम के घर की ओर रवाना हो गया। घर पहुंच कर मैंने अपने मोबाइल पर समय देखा तो करीब 9 बजकर 20 मिनट हो रहे थे। में डरते डरते मेडम के घर के दरवाजे के सामने पहुंचा तो चौकीदार ने मुझे अंदर जाने की अनुमति दे दी, वह मुझे पहचानता था और मेडम ने भी उसे मेरे आने की सूचना दी होगी तभी उसने कहा कि आप जाएं अतिथि आपका ही इंतजार कर रहे हैं।

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मैं डरते डरते अंदर जाने लगा। एक अनजाना सा डर मेरे दिल में था कि कहीं मुझे इस तरह पेंट शर्ट में देख मेडम हंसी ही न शुरू कर दें और एक डर यह भी था कि मेडम की फ्रेंड्स और उनके पति तो खाते पीते परिवारों से होंगे उनकी ड्रेसिंग और मेरी ड्रेसिंग में बहुत अंतर होगा, कहीं वह मेरी बेइज्जती ही न कर दें। दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे हैंऔर फिर एक अनजाना सा डर भी था कि जो कुछ देखने यहाँ आया हूँ वह देख भी पाउन्गा या नहीं। यानी मेडम इस ब्रा नाइट के साथ वाली शर्ट साड़ी के साथ पहने देखना नसीब होगा या फिर मेडम कोई और ब्लाऊज़ पहनें होंगी जिससे उनका सारा शरीर कवर हुआ हो। बहरहाल डरता डरता अंदर पहुंचा और मुख्य हॉल का दरवाजा खोला तो अंदर पूरा सन्नाटा था,


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