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भाई बहन की दोस्ती compleet

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मेरी ये बात सुन कर समीर ने मेरी टांगें और खोल दी और उनके बीच सीधा बैठ गया. पहली बार अब समीर का लन्ड नज़र आया मुझे...... ........हे भगवान ......... .वो तो बहुत बडा था........

मै फ़ोरन बोली: समीर ये तो सुनील भैया से भी बडा है.

समीर ये सुन कर हंस पडा और उसने मेरा हाथ अपने लन्ड पर रख दिया. पहेले तो मैने पीछे हटाया पर जब उसने फिर पकडाया तो मह्सूस किया के बहुत ही सख्त और गरम था. समीर: अब इस का कमाल देखो सिर्फ़ तुम. ये कह कर वो अपना लन्ड मेरी चूत के ऊपर रगडने लगा. समीर की इस हर्कत से मुझे एक अजीब सा मज़ा आ राहा था. फिर उसने अपने लन्ड को आहिस्ता से मेरी चूत के अन्दर की तरफ़ धकेल दिया जिससे थोडा सा लन्ड मेरे अन्दर चला गया. अब मै आप को क्या बताऊं. इतना दर्द हुआ के बता नही सकती. लेकिन मै समीर से वादा कर चुकी थी इस लिये अपने होंठों को अपने दांतों मे दबा कर चुप रही. समीर मेरी हालत देख कर बोला: अभी तो सिर्फ़ १०% ही गया है.

ये सुन कर मेरी तो जान ही निकल गयी. अगर १०% पर ये हाल है तो आगे क्या होगा. लेकिन मै फिर भी चुप रही. समीर अब आहिस्ता आहिस्ता लन्ड को और अन्दर धकेल राहा था और मेरी जान निकल रही थी. फिर उसने एक ज़ोर क धक्का मारा और पूरा लन्ड एक झटके से अन्दर घुसा दिया. मेरी तो चीख निकल गयी. आवाज़ इतनी थी के अगर हम कमरे मे होते तो शायद सब जाग जाते. समीर ने अकलमन्दी की और एक्दम अपने होंठ मेरे होंठों के साथ जोड दिये जिससे मेरी आवाज़ कम हो गयी. अब दर्द मेरी बर्दाश्त के बाहर था. मैने आंसू भरी आवाज़ मे काहा: समीर प्लीज़ निकाल दो नही तो मै मर जाऊंगी.

समीर: बस मेरी जान हो गया........ ...कुछ देर मे ही दर्द खत्म हो जायेगा.......... ...बस थोडी देर रुक जाओ........ ......मेरे लिये.

समीर की बात ने मुझे मजबूर कर दिया और मै चुप कर के बर्दाश्त करती रही. वो भी बगैर हिले मुझ पर लेटा राहा अपने लन्ड को मेरी चूत मे घुसाये. काफ़ी देर हम ऐसे ही रहे. अब वाकयी मुझे दर्द थोडा कम होता मह्सूस हुआ. मेरे चहरे को देख कर समीर को पता चल गया की अब मै पहले से ठीक हूं.

समीर का लन्ड एक गरम सलाख की तरह मेह्सूस हो राहा था. अब समीर आहिस्ता आहिस्ता अपने लन्ड को आगे पीछे करने लगा.

पहली ५ या ६ बार आगे पीछे करने पर मुझे फिर दर्द हुआ लेकिन वो भी आहिस्ता आहिस्ता एक अजीब से सरूर मे बदल राहा था. और कुछ देर के बाद मुझे सच मे मज़ा आने लगा. एक ऐसा मज़ा जिसका मुझे अन्दाज़ा भी नही था और मै बता भी नही सकती. मै अपने ही भाई का लन्ड अपने अन्दर ले चुकी थी. मै वो हर लिमिट पार कर चुकी थी जो शायद आज तक किसी देसी लडकी ने नही की थी. अपने भाई की मानो बीवी या लवर बन चुकी थी.

समीर अब अपनी स्पीड बढाने लगा और मुझे भी मज़ा आने लगा. अब मै समीर को कमर से पकड कर ज़ोर ज़ोर से अपने अन्दर करवा रही थी. कुछ ही देर मै मेरे अन्दर एक अजीब स तुफ़ान उठा. पता नही क्या हो राहा था मुझे मै पागलों की तरह समीर को नोचने लगी. अब समीर का पीछे हटना भी मन्ज़ूर नही था मुझे. मेरा दिल कर राहा था के वो अन्दर ही अन्दर जाता जाये. मै सरूर की सीमा पर आ चुकी थी. मेरी आह निकली और पूरे शरीर में एक लैहर दौड गयी. मेरा पूरा शरीर अकड गया और मुझे एक इतना ज़बर्दस्त आर्गैस्म आया की मै झटके खाने लगी. फिर एक दम मेरे अन्दर जैसे कोई तुफ़ान थम गया हो. मै बहुत ही ज़्यादा मधोश थी. लेकिन समीर अभी भी लन्ड अन्दर बाहर कर राहा था.

 


फिर पता नही उसे क्या हुआ और उसने अपनी स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी और उसके मुंह सी भी अवाज़ें आने लगी. मुझे ये आवाज़ें बहुत ही अच्छी लग रही थी और फिर उसने एक झटके से अपने लन्ड को बाहर निकाल लिया और अपने हाथ मे पकड कर ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करने लगा. फिर एक दम उस के लन्ड से वीर्य की धार निकली जो सीधी मेरी छाती पर जा गिरी. काफ़ी गरम था वो पानी.

इस के बाद वो भी वैसे ही शान्त हो गया जैसे कुछ देर पहले मै हुई थी. समीर मेरी साएड पर लेट गया. अब हम दोनों बहन भाई खुले आस्मान की तरफ़ देख रहे थे. काफ़ी देर तक ऐसे ही रहे. फिर मुझे खयाल आया की हम तो नंगे हैं और खुली छत पर अगर कोई आ गया तो क्या होगा. ये सारी बातें पहले नही सोची मैने. ये सोचते ही मैने समीर को काहा: जलदी करो........ ......याहां से चलें अब.......... ...कोई आ गया तो.......... ........मेरे कपडे कहां हैं?....... .......काहां रख दिये तुमने......... .?

समीर: वो दीवर के साथ साफ़ जगह पर हैं. उठा लो वहां से और मेरे भी ले आओ.

ये सुन कर जैसे ही मै उठने लगी तो मुझे अभी भी वैजाईना पर दर्द हो राहा था जो मै कुछ देर से भूल चुकी थी. मैने समीर की तरफ़ देखा और झूटे गुस्से से कहा ....... .......समीर . ......... ....मेरे वैजाईना को फाड दिया है तुमने......... ऐसा करता है क्या कोई अपनी बहन के साथ?ये सुन कर समीर हंसने लगा. उस समय मेरा एक हाथ मेरे वैजाईना पर था. मुझे कुछ गीला गीला मह्सूस हुआ. मैने हाथ लगा कर जब चेक किया तो मेरी चीख निकलते निकलते रह गयी........ वो तो खून थ.....ये क्या हुआ?

मै घबरा के बोली: मै तो ज़खमी हो गयी हूं.....अब क्या होगा?

समीर ने बडे प्यार से काहा: कुछ नही होगा बुद्धू ... ......... ऐसा ही होता है पहली बार. अगली बार ऐसा नही होगा

समीर की बात सुन कर मुझे कुछ हौसला हुआ और हम दोनों ने अपने अपने कपडे पहने. और वो जगह साफ़ की जहां खून गिरा था और बडे ही आराम से अपने अपने कमरे मै चले गये. किसी को कुछ पता नही चला. अब अपने बिस्तेर पर लेटी हुई उस रात की सारी बातें याद करने लगी. मै बहुत गिल्टी फ़ील कर रही थी पर साथ साथ मुझे ये भी पता था के मै इस बात से इनकार नही कर सकती थी के मुझे बहुत मज़ा भी आया. मुझपर एक अजीब सा सकून छाया हुआ था. मुझे पता था की आज मैने समीर के साथ आखरी बार चुदाई नही की है और चाहे कुछ भी सोचूं, ये फिर से होगा और मै अपने आप को रोक नही पाऊंगी.

और हुआ भी और एक दो बार तो रीना भाभी और मैने मिल के समीर के साथ चुदाई की.

 
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