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भाभी का बदला

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मैं फिर नीचे बैठी, और बाथरूम में और अपनी चूत को चौड़ा करके करके मूतने लगी और मुतते टाइम मेरी चूत से बहुत मीठी आवाज आ रही थी, जो पहले बहुत कम आती थी, आज वो आवाज भी बहुत तेज थी। मैं मूतने लगी और मूतने के बाद मैं वापस राज के रूम में आई और दोनों को देखने लगी।

राज का लण्ड अभी भी अकड़ा हुआ था, यानी कुछ फूला हुआ था। वो शायद बाथरूम के कारण ऐसा दिख रहा था। फिर मैं चुपचाप उसके लण्ड के पास बैठी और अपने हाथों में ले लिया और उसको किस करने लगी और फिर किस करने के बाद मैं राज के बगल में लेट गई।

राज के लण्ड को पकड़कर उसके सुपाड़े को देखने लगी और सोच रही थी कि कोई लड़की इसकी इतनी दीवानी क्यों होती है? कितना मस्त लण्ड है ये, जो दर्द भी देता है और बाद में मजा भी। ऐसे ही सोचते-सोचते मेरी आँखे लग गई, यानी मैं फिर से सो गई। हम तीनों ही पूरे नंगे सोए हुए थे।

उसके बाद सुबह-सुबह मेरी भाभी ने मुझे मेरी गाण्ड पर चांटे मारने शुरू कर दिए और जोर से बोली-“साली रंडी खड़ी हो, देख 6:00 बज गये हैं…”

मैं हड़बड़ाकर उठी और देखा तो राज भी जगा हुआ है और दोनों अभी तक नंगे थे, राज का लण्ड पेशाब भरे होने के कारण फूला हुआ है। मैं खड़ी हुई और उनको देखने लगी।

मुझसे राज बोला-“साली रंडी लगता है तेरी चूत की गर्मी नहीं बुझी …” और खड़ा होकर मेरे पास आया और बोला-“साली मेरा लण्ड पकड़कर सोई है ना… अब देख कैसे टाइट है, इसे ठंडा कौन तेरी माँ करेगी आकर?” और जोर से मेरी चुची को मसल दिया।

मैं एक बार फिर चीख पड़ी-“ओह्ह… माँ ऽ आराम से भोसड़ी के कुत्ते…”

राज ने मुझे छोड़ दिया। फिर भाभी मेरे पास आ गई और मेरे बालों को पकड़ा और मुझसे बोली-“साली रंडी, गाली देती है माँ की लौड़ी, अपने मालिक को भैनचोद कुतिया चुदक्कड़… अभी देख कैसे तेरी माँ को चोदते हैं हम…” और दोनों हँसने लगे।

मैं बोली-“प्लीज़ सुबह-सुबह तो सोने दो, बाद में खूब चोद लेना। अभी मुझे सोना है प्लीज़्ज़ भाभी मुझे सोने दो…”

राज बोला-“साली हरामन छीनाल, तुझे नंगा देखकर कोई बूढ़ा भी तुझे नहीं छोड़ेगा, मैं तो फिर जवान हूँ साली… तेरी जवानी को सारा रस मुझे पीना है और तुझे सोने की लगी है कुतिया…” और मुझे किस करने लगा। उसने मेरे बालों को कसकर पकड़ा था और मेरे होंठों को बेरहमी से चूस ने लगा और काटने लगा और अपने एक हाथ से मेरी चुची को रगड़ने लगा।

जिसके कारण मेरी चुची में जलन होने लगी और मैं कराहने लगी और अपने पैरों को हिलाने लगी। तभी मेरी भाभी ने मेरे पैरों को पकड़ा और मेरी टांगों को चौड़ा दिया और साली कुतिया ने मेरी चूत में दो उंगली घुसा दी और मुझे अपनी उंगलियों से चोदने लगी, और अपनी जीभ से मेरी चूत को चाटने लगी।

करीब 5 मिनट तक भाभी ने मेरे चुची को रगड़ा और मेरी चूत को चूसा , जिसके कारण मैं फिर से गरम हो गई और भाभी के सिर को अपनी चूत पर दबाने लगी, और उसे अंदर घुसाने लगी, और राज के लण्ड को पकड़कर हिलाने लगी।

उसके बाद राज का लण्ड पूरा टाइट हो गया और राज ने मुझे छोड़कर भाभी को हटा दिया और मेरी चूत में अपने लण्ड को टिका कर रगड़ने लगा। मेरी चूत गीली होने के कारण उसका लण्ड भी गीला हो रहा था। फिर उसने मेरी चूत में एक झटके में अपना सारा लण्ड पेल दिया और मेरे ऊपर आ गया।

मैं पूरी तरह से चुदासी हो चुकी थी और राज के लण्ड को अपनी चूत में लेने लगी। पर राज का इरादा कुछ और था, तो उसने दो चार झटके मारे और लण्ड निकाल लिया और मुझे और भाभी को 69 में लेटा दिया। मैं ऊपर थी और भाभी नीचे थी, हम दोनों एक दूसरे की चूत को चाटने लगे।

तभी राज ने पीछे से मेरी गाण्ड को पकड़ा और अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया और झटके देने लगा। उसके लण्ड को मैं मजे से चूत में लेने लगी। राज ने फिर मेरी चूत में धक्के देने शुरू कर दिए। मैं भी पूरी तरह से साथ देने ही लगी थी की राज ने मेरी चूत में अपना मूत भरना शुरू कर दिया।

उसका गरम-गरम मूत मेरी चूत में करते ही मैं उसे हटाने लगी। पर राज ने मुझे टाइट पकड़ लिया और मेरी चूत में अपना मूत करने लगा। नीचे से मेरी भाभी बाहर आ रहे राज के मूत को चाटने लगी और पीने लगी। राज ने आधा ही मूता मेरी चूत में और अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और मुझे और भाभी को बैठने को बोला, तो हम दोनों बैठ गये।

उसके बाद राज ने हमें लण्ड चूस ने का इशारा किया। जैसे ही हम लण्ड चूस ने लगे तो उसने फिर से हमारे मुँह में मूत ना शुरू कर दिया। उसने पहले भाभी के मुँह में मूता , रंडी आराम से राज का मूत पी गई, और मुझे पकड़कर मेरे मुँह में मूता और मुझे जबरदस्ती पिलाया। फिर नीचे से मुझे चटवाया। मैं भी अब मजा लेने लगी और उसके मूत को चाटने लगी।

उसके बाद मेरी भाभी खड़ी हुई और राज से बोली-“राजा, मेरा भी मूत आ रहा है…”

तो मैंने झट से भाभी की चूत के मुँह लगा दिया।

राज भी वहीं बैठ गया और बोला-“कर दे रंडी साली…”

और भाभी मेरे और राज के ऊपर मूतने लगी। मैं और राज भाभी का मूत पी गये। राज तो बड़े मजे से भाभी की चूत में अपना मुँह घुसा-घुसाकर उसका मूत पी रहा था।

उसके बाद राज ने मुझे बोला-“साली कुतिया तेरी चूत का भी पिला दे रंडी मुझे…” तो मैं भी खड़ी हो गई और राज ने मेरी चूत पर मुँह लगा दिया। मैं भी सुर्र्ररर सुर्र्ररर की आवाज से मूतने लगी। राज ने मेरी चूत को चाट-चाटकर मेरा सारा मूत पिया और फिर हम तीनों एक दूसरे के होंठों को किस करने लगे।

उसके बाद राज ने मुझे घोड़ी बना दिया और भाभी को मेरे सामने लेटा दिया और मुझे भाभी की चूत चाटने को बोला। मैं उसकी चूत को चाटने लगी, और राज पीछे से मेरी चूत में अपना लण्ड पेलने लगा, और झटके देने शुरू कर दिए।

उसके बाद राज ने ने मेरी चूत में उंगली घुसाकर और चूत के रस से गीली करके बाहर निकाली और लण्ड को फिर से घुसाकर मुझे चोदने लगा। राज के हर झटके के साथ मेरा मुँह भाभी की चूत से चिपक जाता और राज गीली उंगली को मेरी गाण्ड के छेद में घुसाने लगा। उसकी उंगली मुझे अच्छा आनंद दे रही थी।

राज ने धीरे-धीरे अपनी उंगली पूरी मेरी गाण्ड में घुसाकर उसे अंदर-बाहर करने लगा और मेरी चुदाई करने लगा। कमरे में एक बार फिर से चुदाई का माहौल हो गया था। और फिर राज ने मेरी गाण्ड पर कुछ क्रीम टाइप डाला और मेरी गाण्ड में अंदर तक डालने लगा। मुझे कुछ अजीब सा लगा तो मैं उसे रोकने लगी, तो उसने मेरी गाण्ड पर चांटे मारे।

मैं फिर से भाभी की चूत चाटने लगी और राज ने ढेर सारी वो क्रीम मेरी गाण्ड में अपनी उंगली से भरने लगा। उसके बाद उसने अपना लण्ड मेरी चूत से निकाला और मेरी गाण्ड के छेद पर रख दिया, और उसे मेरी गाण्ड पर रगड़ने लगा। उसके लण्ड रखते ही मैं कांप गई और उसे ना करने को बोलने लगी।

दोस्तो उस दिन भाभी और राज ने मेरा बुरा हाल कर दिया फिर शाम को मैं और भाभी घर आ गये . पर अब मेरी चूत को लंड खाने की लत लग गई थी और इसी तरह २ दिन और निकल गये

 
दोस्तो बहुत दिनों से आपके पास आ नही पाया इसके लिए माफी चाहता हूँ पर अब मैं इस कहानी को पूरा करके ही थोड़ा ब्रेक लूँगा
 
लेकिन धीरे धीरे मुझे भी मज़ा आने लग गया था थोड़ी ही देर में मैं मस्ती मैं झूम उठी मेरे बदन में चुदाई शोले बुलंद होनेलगे.

मैने मस्ती मे आते हुए राज से पूछा राज क्या तुम मुझे अपने बारे में कुछ बताओगे ?

राज- क्या जानना चाहती हो मेरे बारे में ?

पायल- जैसे तुम्हारे घर में कौन कौन हैं तुमने पहली चुदाई किसके साथ की और इसकी शुरुआत कैसे हुई

राज - ठीक है तो सुनो आज मैं तुम्हे अपनी पूरी कहानी बता ही देता हूँ हालाँकि रजनी मेरी बेस्ट फ्रेंड है लेकिन मैने अपनी कहानी आज तक उसे भी नही बताई है . पर तुम्हारे आग्रह पर आज मैं तुम दोनो को अपनी कहानी शुरुआत से बताता हूँ

राज की कहानी राज की ज़ुबानी...............

हमारे घर में मैं राज उमर 20 साल, मेरी डॉली दीदी उमर 21 साल और हमारे मम्मी पापा रहते हैं, हम लोग अप्पर मिड्ल क्लास से है, और हमारा घर काफ़ी बड़ा है, घर में सारी सुख सुविधायें हैं.

एक रात मैं अपने कमरे मे सभी घर वालों के साथ टीवी देखकर और खाना खाने के बाद लौटा था. मैं अपने लॅपटॉप पे कुछ पॉर्न वीडियोस देखने के बाद मूठ मारकर सोने के मूड में था.

मैने अपनी फॅवुरेट पॉर्न साइट को ब्राउज़ करना शुरू ही किया था तभी किसी ने मेरे डोर को खटखटाया, मैने डोर बोल्ट नही किया था, इसलिए उसके खुलने की आवाज़ भी आई, मैने तुरंत ओपन साइट्स को तुरंत मिनिमाइज़ करना शुरू किया, लेकिन डॉली दीदी जो बिल्कुल करीब आ चुकी थी उन्होने सब कुछ देख लिया था.

दीदी (गुस्से में) : राज, ये सब तुम क्या कर रहे थे?

राज: दीदी, तुम यहाँ क्या कर रही हो?

दीदी: मैं ये तुम्हारी टेक्स्ट बुक वापस करने आई थी, जो तुम ड्रॉयिंग रूम में छोड़ आए थे, लेकिन इसके अंदर ये तुमने छुपा कर ये गंदी पॉर्न बुक क्यों छुपा रखी है? क्या कर रहे हो तुम आज कल?

दीदी काफ़ी गुस्से में थी, उनके गाल गुस्से की वजह से लाल हो गये थे, मैने तुरंत मॉनिटर बंद किया और दीदी की तरफ घूम के ज़ोर से बोला: दीदी, तुम अपने कमरे में जाओ, अपना काम करो और प्लीज़ मेरे कामों में इंटर्फियर मत किया करो.

दीदी गुस्से में मेरी तरफ देखती हुई मेरे कमरे से चली गयी, मैने डोर बंद किया, , मैं भी इस इन्सिडेंट से काफ़ी घबरा गया था, मेरा भी हार्ट तेज़ी से धड़क रहा था. मेरी फॅमिली काफ़ी कन्सर्वेटिव थी, और कोई सोच नही सकता था कि मैं पॉर्न साइट्स पे नंगी लड़कियों की चुदाई देखकर मूठ मारता हूँ. मेरे को आत्म ग्लानि होने लगी कि मैने अपनी दीदी का दिल दुखाया है.

थोड़ी देर बाद शांत होने के बाद मैने दीदी से उनके रूम में जाकर बात करने का डिसाइड किया. मम्मी पापा उपर जाकर अपने रूम में सो चुके थे, उनकी जल्दी सोने की आदत थी. मैने जैसे ही दीदी के रूम का दरवाजा नॉक किया, दीदी ने धीरे से कहा: अंदर आ जाओ.

मैं दीदी के रूम में अंदर घुसा और देखा दीदी अपने बेड पर अपनी बाहें क्रॉस करके गुस्से में मेरी तरफ देख रही हैं. दीदी गुस्से मैं कम और मायूस ज़्यादा लग रही थी.

राज: दीदी, मुझे माफ़ कर दो, अब मैं कभी गंदी पॉर्न साइट्स इंटरनेट पर नही देखूँगा

दीदी: ठीक है, लेकिन तुम ये सब गंदे काम करते क्यों हो, अपनी पढ़ाई पे ध्यान लगाओ. मुझे बड़ा दुख होता है, मैं अपने छोटे भाई को बिगड़ते हुए नही देख सकती

राज: लेकिन दीदी ये तो सब लड़के करते हैं

दीदी: ये ग़लत है राज, इस से लड़कों की मानसिकता का पता चलता है, वो लड़कियों को सिर्फ़ ग़लत दृष्टि से देखते हैं और उन्हे केवल भोग की वस्तु समझता हैं, ये घिनोना है राज

राज: दीदी, क्या आपको लगता है कि मैं भी ऐसा ही सोचता हूँ?

दीदी (कुछ देर सोचने के बाद): नही मुझे ऐसा अभी तो नही लगता

मैं दीदी के बेड पर उनके पैरों के पास चुप चाप बैठ गया. कुछ देर बाद मैने पूछा दीदी, क्या मैं फ्रॅंक्ली आप से कुछ कह सकता हूँ? दीदी ने हां में सिर हिलाया. मैने कहा दीदी, मैं ये सब इसलिए करता हूँ क्यों कि मैं नही चाहता कि मेरा अंडरवेर गीला हो, मुझे वो सब बहुत गंदा लगता है.

दीदी ने अपना मूँह दूसरी तरफ घूमा लिया और सोच में पड़ गयी. मैं भी कुछ रुका क्यों कि दीदी से मैं पहली बार ऐसी पर्सनल बातें कर रहा था.

राज: दीदी, सच में, मुझे हर 4-5 दिनों के बाद अपने आप हिलाकर पानी निकालना पड़ता है, नही तो रात में अपने आप पानी निकल जाता है, और मेरा अंडरवेर गीला हो जाता है, जो मुझे अच्छा नही लगता

दीदी: तो इस से क्या मतलब है तुम्हारा

राज: दीदी, ऐसा लगता है जैसे नींद में मैने पेशाब कर दिया हो

दीदी चुप थी मैने कहना जारी रखा, दीदी, मुझे मालूम है कि मैं बेवकूफो जैसी बात कर रहा हूँ, लेकिन पॉर्न देखकर मुझे पानी निकालने में आसानी होती है, मैं सच बोल रहा हूँ मैं लड़कियों को कभी उस ग़लत नज़र से नही देखता जैसी वो पॉर्न साइट्स पर नज़र आती हैं, मुझे नही मालूम इस को रोकने के लिए क्या करूँ?

दीदी: हर 4-5 दिन बाद, ये कुछ ज़्यादा नही है?

राज: मुझे नही पता, लेकिन 4-5 दिन बाद मुझसे रहा नही जाता और मैं इसके अलावा कुछ सोच भी नही पाता, सॉरी दीदी

मैं चुपचाप धीरे से अपने रूम में आ गया और अपने बेड पर खिन्न मन से लेट कर सो गया

 
अगले कुछ दिन ऐसे ही गुज़रे, मैं कोशिश करता था कि शाम को अपने लॅपटॉप से दूर ही रहूं, और पॉर्न साइट्स ना देखूं जिस से दीदी को दुख पहुँचा था. अगले 5 दिन के बाद मुझे लगा कि ये मैने क्या डिसिशन ले लिया है, लगता था शायद अब नही रहा जाएगा लेकिन मैने अपने आप को रोके रखा था.

अगले दिन शाम को, मैने नीचे जाकर बाथरूम का दरवाजा नॉक किया, मुझे मालूम था कि दीदी अंदर है. दीदी ने डोर खोला, मैने पूछा क्या मैं फेस वॉश और ब्रश कर लूँ अगर आप का हो गया हो तो? ये सब हमारे बीच बचपन से ही नॉर्मल था. दीदी ने डोर खोला और मुझे अंदर आने दिया. दीदी अभी अभी नहा के टवल से पोछने के बाद, अपने आप को टवल में लपेट कर अपने बालों को कंघी कर रही थी. मैं अपना फेस वॉश करते हुए मिरर में दीदी को देख रहा था, हालाँकि मैं पहले भी दीदी को कई बार ऐसे देख चुका था, लेकिन आज टवल में लिपटी दीदी अलग ही नज़र आ रही थी, उनकी चूंचियों के उपर के उभार टवल में से सॉफ दिख रहे थे और दीदी के लंबे चिकने गोरे पैर और आधी जांघें देख कर कुछ कुछ हो रहा था, मेरा लंड पाजामे में खड़ा होने लगा. मैने अपना ध्यान उधर से हटा कर अपने टूथ ब्रश करने पर लगाया. मैने देखा दीदी बाथरूम से बाहर नही जा रही है.

दीदी: क्या हुआ राज?

मैने अपनी आँखे बंद की और टूथ ब्रश करते हुए बोला सॉरी दीदी

दीदी ने धीरे धीरे अपने बालों में कंघी करना जारी रखा और जब मैने उनकी तरफ देखा तो वो कुछ कन्फ्यूज़ नज़र आई. मैने ब्रश और फेस वॉश कर के टवल से अपने फेस को पोंच्छा और इस सब के बीच घबराहट के कारण मेरा लंड बैठ गया था

दीदी: क्या हुआ, कुछ बोलो ना

राज (अपने कंधे उँचकाते हुए): कुछ नही

दीदी: लगता है पिछले कुछ दिनों से कुछ ज़्यादा ही पॉर्न देख रहे हो

राज: दीदी, आप की कसम, उस दिन के बाद एक बार नही देखी

दीदी को शायद विश्वास नही हुआ

दीदी: क्या सच में

राज: हां दीदी सच कह रहा हूँ

दीदी (स्माइल करते हुए) : ओके ठीक है, मैं तुम्हारा मज़ाक नही बना रही, बस मुझे विश्वास नही हुआ, इसलिए पूछा, मुझे खुशी है

मैं अपने बेडरूम में आ गया, मुझे ख़ुसी थी कि दीदी अब नाराज़ नही है. लेकिन अब अपने लॅपटॉप से दूर रहना मुश्किल होता जा रहा था. किसी तरह अपनी दीदी की खुशी के लिए मैने अपने आप पर कंट्रोल किया और एक रात के लिए अपने आप पे कंट्रोल करने का फ़ैसला किया

अगले दिन सब कुछ नॉर्मल था, दीदी ने ऐसा कुछ नही किया जिस से लगे कि वो कल रात की बात से नाराज़ हैं, हालाँकि वो आज मुझे देख कर कुछ ज़्यादा स्माइल कर रही थी. दिन किसी तरह गुजर गया और मैं अपने कमरे में सोने चला गया. सोने से पहले अपने आप पर कंट्रोल करते हुए और सेक्स के विचारों को दिमाग़ में ना आने के लिए मैने टेक्स्ट बुक पढ़ने का फ़ैसला किया. तभी किसी ने डोर पे नॉक किया, और दीदी डोर खोल के अंदर आ गयी, और मेरे साथ मेरे बेड पर बैठ गयी

दीदी (लंबी साँस लेते हुए): सॉरी, मैने उस दिन कुछ ज़्यादा ही ओवर रिक्ट कर दिया, तुम को तो मालूम है राज, मुझे उन सब चीज़ों से कितनी नफ़रत है.

(मैने हां में सिर हिलाया)

दीदी: मैने नेट पर इस सब के बारे में सर्च किया तो मालूम पड़ा कि जो तुम उस दिन कह रहे थे वो शायद सही है, मुझे तुम लड़कों की शारीरिक ज़रूरतों का अंदाज़ा नही था,

मैने और दीदी ने एक दूसरे की तरफ देख और मुस्कुराने लगे क्यों कि बात ही ऐसी थी

राज: हां दीदी, ऐसा ही है, या तो अपने आप मज़े ले कर पानी निकाल दो, या फिर वो अपने आप निकल जाएगा, मैने स्माइल करते हुए कहा

दीदी (हंसते हुए): हम लड़कियों को इस सब की इतनी ज़रूरत नही पड़ती, (कुछ रुकते हुए) मैने अभी तक सिर्फ़ कुछ बार ही अपने आप को अपनी फिंगर्स से सटीस्फाई किया होगा, और वो भी जब बहुत ज़्यादा ज़रूरत हो और रहा ना जाए...

ये सब बातें करते हुए मेरा लंड खड़ा हो चुका था, मेरी मस्त दीदी मेरे कमरे में पाजामा पहन कर ऐसी बातें कर रही थी. हमारी आँखें मिलते ही हम मुस्कुरा दिए.

दीदी (नीचे देखते हुए): मैने कैसे कहूँ, लेकिन मैं तुम से कुछ पर्सनल बात कर सकती हूँ? मुझे पता नही तुम क्या सोचोगे

राज: प्लीज़ दीदी. बोलो ना, मैं तुम्हारा छोटा भाई हूँ

दीदी (एक बार फिर से लंबी साँस लेते हुए): क्या तुम ऐसा नही कर सकते कि पॉर्न देखने की जगह तुम मुझे देख कर अपना पानी निकाल लिया करो

मेरा दिल एक दम धक सा रह गया, और मुझे तुरंत पसीना आ गया

राज (हकलाते हुए) : ये तुम क्या कह रही हो दीदी?

दीदी: राज, मैं ये बर्दाश्त नही कर सकती कि मेरा छोटा भाई पॉर्न देख कर अपने आप को सॅटिस्फाइ करे, लेकिन मुझे ये भी मालूम है कि तुमको कुछ तो चाहिए जिस से तुम एग्ज़ाइटेड हो कर अपना पानी आसानी से निकाल सको.

मुझे दीदी की बातों पर विश्वास नही हो रहा था, मैने पूछा दीदी क्या सच में, वास्तव में?

दीदी (स्माइल के साथ) : हां राज

हम दोनों ने बैठ कर डिसाइड किया कि मुझे जब भी मूठ मारने की ज़रूरत होगी, मैं दीदी को उनके कमरे में जाकर एक घंटा पहले बता दूँगा. फिर हम ने कुछ और बातें की, जिस से एंबॅरसमेंट ख़तम हो जाए और फिर अपने अपने रूम में सो गये.

 
अब पूरे बारह दिन हो चुके थे, जब से मैने मूठ नही मारी थी. डॉली दीदी को देख के मूठ मारने का आइडिया कुछ समझ में नही आ रहा था, खुद पर कंट्रोल करने की सारे कोशिशें नाकाम होती नज़र आ रही थी, रात होते होते अब मूठ मारने के सिवा और कुछ ऑप्षन नज़र नही आ रहा था,

मैं दीदी के रूम पर पहुँचा और डोर नॉक कर के अपने सिर अंदर घुसाते हुए कहा, है दीदी. दीदी ने सवालिया नज़रों से मुझे देखा और स्माइल करते हुए बोली, ओके राज, बस थोड़ी देर में,

मैं अपने कमरे में आकर अपने बेड पर बैठ गया, मेरे दिमाग़ में तरह तरह के विचार आ रहे थे, और लंड फूँकार मार रहा था. मैं अपने और डॉली दीदी के भाई बेहन के रिश्ते के बारे में सोचने लगा. बचपन से अब तक के हमारे भाई बेहन के रिश्ते की कई सारी तस्वीरें मेरे जेहन में घूम रही थी, मैं कैसे अपनी सग़ी बड़ी बेहन को एक लड़की की तरह देख कर, अपने लंड को उनके सामने हिलाकर कैसे मूठ मार सकता हूँ?

तभी मेरे डोर पर दीदी ने नॉक किया आंड अंदर घुस कर उसे बंद कर दिया, मेरी तरफ देखकर दीदी ने स्माइल किया. दीदी ने निकर और टी-शर्ट पहन रखी थी. टी-शर्ट का गला बड़ा होने के कारण उसमे से उनकी चूंचियों के बीच की दरार कुछ दिखाई पड़ रही थी.

दीदी ने पूछा, तो राज कैसे शुरू करें? कुछ देर के लिए हमारे बीच खामोशी छा गयी, और फिर एक दूसरे की ओर देखकर हम हँसने लगे.

राज: हे भगवान, मुझे नही लगता ये सब मैं दीदी के सामने कर पाउन्गा

दीदी ने स्माइल करते हुए कहा, राज क्यों ना तुम ये सब चादर ओढ़ कर करो, जिस से मैं नही देख पाउन्गी कि तुम क्या कर रहे हो.

मैने तुरंत अपने कपड़े उतारे और अपने को चादर से ओढ़ लिया. हम एक दूसरे को देखकर स्माइल करने लगे.

दीदी: राज, अब शुरू करने के लिए मैं क्या करूँ?

राज (अपना गला सॉफ करते हुए): अब मैं क्या बताऊं, दीदी जो तुम्हे ठीक लगे. आज ज़्यादा टाइम नही लगेगा (मैं सच कह रहा था क्यूँ कि मेरा लंड एक दम लक्कड़ की तरह खड़ा हो चुका था)

मेरे शरीर में खून तेज़ी से दौड़ने लगा, जब मैने देखा दीदी ने अपने चेहरे पर आए हुए बाल एक तरफ किए, कातिल नज़रों से मेरी तरफ देखा और अपनी टी शर्ट में से एक हाथ बाहर निकाला, फिर दूसरा, जैसे ही दीदी ने टी-शर्ट को अपने गले से बाहर निकाला उनकी दोनो चूंचियाँ, वाइट ब्रा में क़ैद नज़र आ गयी. दीदी के गोरे गोरे बदन और सफेद ब्रा में बंद चूंचियों को देख कर मैं ज़ोर ज़ोर से मूठ मारने लगा. तभी दीदी मेरे सामने झुक गयी, जिस से उनकी चूंचियाँ ब्रा में से निकलने को बेकरार हो उठी, दीदी के क्लीवेज का व्यू जबरदस्त था.

दीदी ने झुकते हुए पूछा कैसा लगा राज? तभी मैने अपना पानी छोड़ दिया और मूँह से आहह आहह की आवाज़ों के साथ मेरे लंड से पानी की जबरदस्त फवारे निकलने लगे, मैं परम सुख पर पहुँच चुका था.

मूठ मारने में ऐसा आनंद आज से पहले कभी नही आया था, मुझे खुशी थी कि मैने चादर ओढ़ रखी थी और दीदी कुछ नही देख पाई. कुछ देर बाद जब तक लंड से आख़िरी बूँद नही निकल गयी मेरा शरीर अब धीरे धीरे शांत होने लगा और मैं अब सब कुछ सॉफ सॉफ देख पा रहा था, मैने देखा दीदी मेरी तरफ देख कर स्माइल कर रही है.

दीदी काफ़ी खुश थी, उन्होने फ्लोर पर पड़ी अपनी टी शर्ट उठाई, और पहन ली, और डोर की तरफ चल दी. जाते जाते दीदी बोली अब सब कुछ सफाई कर लेना, और बता देना जब भी तुम्हे मेरी ज़रूरत हो. मैं दीदी को जाते देखता रहा, फिर जल्दी से सफाई कर के, अपने बेड पर थक कर सो गया.

अगले दिन सुबह जब उठा तो सोचने लगा कि अब क्या होगा? लेकिन मेरा सोचना ग़लत था. सब कुछ नॉर्मल था, मम्मी पापा अपने अपने ऑफीस जाने की तय्यारी कर रहे थे, मैने और डॉली दीदी ने एक साथ डाइनिंग टेबल पर बैठ के ब्रेकफास्ट किया, एक दूसरे की तरफ देखकर हम दोनो कई बार स्माइल कर रहे थे, फिर हम दोनो अपने अपने कॉलेज चले गये. शाम को सभी का मूड काफ़ी अच्छा था. मैने और दीदी ने डिसाइड किया कि हम एक डीवीडी पर मूवी देखेंगे.

3 दिन के बाद मेरा लंड फिर मूठ मारने के लिए मचलने लगा. हालाँकि मैने लंड के बार बार खड़े होने को इग्नोर करने की काफ़ी कोशिश की. लेकिन जिस तरफ से ध्यान हटाने की कोशिश करो बार बार ध्यान उसी तरफ जाता है.

रात में जब मम्मी पापा सोने चले गये, मैं और दीदी टीवी देख रहे थे. दीदी मेरे बगल वाले सोफे पर बैठी थी. मैने दीदी की तरफ देखा, उन्होने स्माइल कर दिया.

मेरी तरफ देखते हुए दीदी ने कहा, मैने सोचा था हर 4-5 दिन बाद होगा फिर? उन्होने मुझे छेड़ते हुए कहा फिर स्माइल कर के बोला ओके अभी थोड़ी देर में तुम्हारे रूम में आती हूँ.

करीब एक घंटे बाद दीदी मेरे रूम में आ गयी, डोर बंद कर के मेरे बेड के पास आते हुए उन्होने पूछा कुछ सजेस्ट करोगे राज?

मैने जल्दी जल्दी अपने कपड़े उतारने लगा और बोला, दीदी आप को जो अच्छा लगे

मैने अपने आप को चादर से पिछली बार की तरह ओढ़ रखा था, अपने लंड को मैं चादर के अंदर हिलाने लगा. दीदी थोड़ी शरमा गयी, और फ्लोर की तरफ देखते हुए वो अपने निकर/ शॉर्ट के बटन खोलने लगी. दीदी मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दी. धीरे धीरे दीदी ने अपना शॉर्ट नीचे कर दिया. अब डॉली दीदी मेरे सामने पिंक कलर की पैंटी में खड़ी थी.

मैने सोचा था कि शायद दीदी अपना शॉर्ट पूरा नही उतारेगी, लेकिन दीदी ने शॉर्ट पूरा उतार दिया था. दीदी मेरी तरफ पीठ कर के खड़ी थी, उन्होने अपने टाँगें थोड़ी फैला ली और घूम कर मेरी तरफ देखा.

दीदी ने वैसी ही पैंटी पहन रखी थी जैसी जनरली इंडिया में सब लड़कियाँ पहनती हैं, पैंटी ने दीदी के हिप्स को पूरा कवर कर रखा था, लेकिन थोड़ी सी हिप्स के क्रॅक के बीच फँसी हुई थी. दीदी की गान्ड का क्या मस्त नज़ारा था, दीदी की गान्ड पैंटी में देख कर मेरा लंड फूँकार मारने लगा.

 
दीदी ने फिर से स्माइल किया और अपनी टी-शर्ट थोड़ी उपर उठा दी. दीदी की गोरी गोरी पीठ देख कर मेरा दिल मचलने लगा. दीदी मेरे को चादर के अंदर मूठ मारते हुए देख रही थी. दीदी का चेहरा भी थोड़ा सुर्ख होने लगा था. दीदी ने मेरी तरफ देखा और पूछा, राज और कुछ?

मेरे जवाब देने से पहले, दीदी ने अपनी टी-शर्ट पूरी उतार दी और अपनी पैटी को थोड़ा नीचे कर दिया , जिस से जहाँ से गान्ड के बीच की दरार शुरू होती है वो थोड़ी थोड़ी दिखाई देने लगी.

मैं परम सुख के करीब पहुँच चुका था, मैं पानी की धार छोड़ने लगा. दीदी देख रही थी कि कैसे मेरे मूठ मारने के कारण चादर हिल रही थी. जैसे ही मैं फारिग हुआ मैने ज़ोर की साँस ली. दीदी ने अपना शॉर्ट उठा कर पहन लिया. इस से पहले कि मैं कुछ सोचता या कहता, दीदी मेरे पास आई और मेरे गाल पर एक प्यारी सी पप्पी ले ली, फिर डोर की तरफ चल दी. मैने चादर उठा कर फैंक दी, मेरा वीर्य मेरे पेट पर लगा था, उसी वीर्य से सनी हुई अवस्था में, खुश हो कर सो गया

अगला वीक काफ़ी आराम से गुजरा, मुझे मूठ मारने की ऐसी कोई तीव्र इच्छा नही हुई. लेकिन 7-8 दिन बाद मैं अपने रूम के डोर पर नॉक सुन के सर्प्राइज़ हो गया, डॉली दीदी मेरे रूम में अपने आप आ गयी, दीदी ने ब्लू शॉर्ट्स और पिंक टी-शर्ट पहन रखी थी.

दीदी: और राज क्या हाल हैं? अब तो काफ़ी दिन हो गये

राज: हां दीदी, सब ठीक है, क्या आप को अभी भी डाउट है कि मैं लॅपटॉप यूज़ कर रहा हूँ?

दीदी: नही ऐसा नही है, मुझे तुम पर भरोसा है, लेकिन मैं कन्फर्म करने आई थी कि तुम्हारा आज मूड है या नही (ऐसा कहते हुए दीदी थोड़ा शरमा गयी)

राज: दीदी मैं एक लड़का हूँ, और मूड में तुरंत आ जाता हूँ

दीदी ने झटके के साथ अपने बाल पीछे किए और बोली तो फिर करना चाहोगे?

राज: हां दीदी क्यूँ नही. लगता है अब आप को भी उतना ही मज़ा आने लगा है जितना मुझे

दीदी: (शरमा कर स्माइल करते हुए) हां, लगता तो है, लास्ट टाइम मैं भी थोड़ी गरम हो गयी थी

राज: किस चीज़ से?

दीदी: ये देख कर कि मेरा छोटा भाई मुझे देख कर एग्ज़ाइटेड हो रहा है, और तुम्हारे फेस पर जो भाव आते हैं जब तुम फाइनली अपना पानी निकालते हो तब मुझे बहुत अच्छा लगता है, अच्छा प्लीज़ आज एक काम करो मेरे लिए

राज: हां दीदी, प्लीज़ बताओ ना

दीदी: आज प्लीज़ चादर मत ओढना, अपना बॉक्सर पहन के ही कर लो

राज: हां दीदी क्यूँ नही

मुझे थोड़ा अजीब लगा, मैने चादर उठा कर फेंक दी, अब मैं टी-शर्ट और बॉक्सर में बेड पर बैठा था

डॉली दीदी अब थोड़ा रिलॅक्स लग रही थी, दीदी ने मेरे बॉक्सर्स पर एक नज़र डाली और पूछा रेडी? मैने हां में सिर हिलाया. दीदी ज़ोर से घूम गयी, जिस से उनके बाल भी हवा में लहरा गये. दीदी ने सिर घुमा के देखा, और बोली, “मैं वही से शुरू करती हूँ जो तुम्हे अच्छा लगता है.”ऐसा कहते हुए दीदी ने अपना शॉर्ट्स नीचे करना शुरू कर दिया, दीदी आज ब्राउन कलर की हल्की सी पैंटी पहने हुए थी, जो कि काफ़ी टाइट थी. जैसे ही दीदी अपना शॉर्ट नीचे करने के लिए झुकी उनकी गदराई गान्ड का नज़ारा देख के मैं मदमस्त हो गया. दीदी की पैंटी आज चूतदों के क्रेक में कुछ ज़्यादा ही घुसी हुई थी, जिस से उनकी गोल गोल मस्त गान्ड कुछ ज़्यादा दिखाई पड़ रही थी. दीदी सीधी खड़ी हो गयी और सिर घूमाकर मुझे देखा. दीदी को भी आज थोड़ा पसीना आ रहा था.

दीदी की नज़र मेरे बॉक्सर पर थी. मैने पूछा शुरू करूँ दीदी?

दीदी ने हां में सिर हिला दिया, वो कुछ नर्वस हो गयी, जब उन्होने देखा कि मैं अपना लंड बॉक्सर के अंदर हाथ में पकड़ के हिला रहा हूँ. मैं अब ज़ोर ज़ोर से अपने लंड को आगे पीछे करने लगा. मुझे मालूम था कि दीदी मुझे देख रही है, लेकिन मैने इग्नोर करते हुए दीदी की मस्त गान्ड पर अपनी नजरें जमा दी. दीदी के चूतड़ क्या चिकने मस्त और मुलायम थे, उनको छूने और दबाने की कल्पना से ही मेरा लंड हिलोरें लेने लगा. मेरे लंड ने वीर्य से पहले चुदाई के लिए चिकना करने वाली प्रेकुं की कुछ बूँदें छोड़ दी थी. मैने दीदी के फेस की तरफ देखा.

दीदी: थोड़ा और देखोगे

मैने बस स्माइल किया, दीदी ने भी स्माइल किया और अपनी पैंटी को नीचे करना शुरू कर दिया. दीदी ने अपनी पैंटी को इतना नीचे कर दिया कि अब उनके चूतड़ सॉफ नज़र आ रहे थे.

दीदी ने पूछा कैसा लगा?

राज: जबरदस्त दीदी

दीदी ने थोड़ी सी अपनी गान्ड आगे पीछे की, जैसे कि वो किसी गाने पर डॅन्स कर रही हो. अब दीदी ने अपनी पैंटी इतनी नीची कर दी कि उनके चूतदों के बीच का क्रॅक सॉफ नज़र आ रहा था. मुझे तो जैसे जन्नत मिल गयी. मेरी दीदी अपनी मस्त गान्ड के मुझे दर्शन करवा रही थी. दीदी अपनी गान्ड को आगे पीछे हिला रही थी. जब दीदी गान्ड को आगे पीछे करती तो दीदी की गान्ड कभी टाइट और कभी रिलॅक्स हो जाती.?

दीदी: अच्छा लग रहा है

मैने बस एक लंबी सी साँस छोड़ी. दीदी का चेहरा एक दम गुलाबी हो गया था और उनकी स्किन एक दम चमक रही थी.

राज: दीदी अब देखना चाहो तो देख लो, मैं तय्यार हूँ

दीदी ने घूम कर मेरे बॉक्सर की तरफ देखा, मैं अपने लंड को बॉक्सर के अंदर ज़ोर ज़ोर से हिला रहा था, मेरी नज़र दीदी की गदराई गान्ड पर टिकी थी. मैं भी अपनी गान्ड को हर झटके के साथ आगे पीछे कर रहा था. दीदी सर्प्राइज़ हो कर अपने छोटे भाई को मूठ मारते हुए देख रही थी.

मैं अब तेज़ी से मुठिया रहा था, लेकिन पानी निकलने का नाम ही नही ले रहा था. मैने कहा सॉरी दीदी, लगता है आप देख रही हो इसलिए थोड़ा नर्वस हूँ.

दीदी ने हां में सिर हिलाया, और एक हाथ से पैंटी की एलास्टिक बॅंड को पकड़ के उपर किया और दूसरे से नीचे, और पूछा ये कैसा है?

जब तक मैं कुछ कहता मेरे लंड ने पानी की बौछार कर दी, बॉक्सर मेरे पानी के फवारों से पूरा गीला हो चुका था, मैं अपना पानी लगातार झटकों के साथ छोड़े जा रहा था. इतना ढेर सारा पानी और वीर्य निकला की बॉक्सर भी आगे से कुछ सफेद हो गया. दीदी गौर से ये सब देख रही थी. मैं लंबी लंबी साँसें ले रहा था और मेरा पूरा शरीर इस परम सुख का आनंद ले रहा था. जब मैं कुछ नॉर्मल हुआ तो देखा कि पानी की कुछ बूँदें बॉक्सर में से निकल कर मेरी जांघों पर आ चुकी हैं.

 
मैने दीदी की तरफ देखा जो मुझे देखकर थोड़ा नर्वस नज़र आई, लेकिन फिर भी स्माइल किया, अभी भी दीदी ने मेरे दर्शन के लिए अपनी गान्ड फैला रखी थी. दीदी का चेहरा सुर्ख हो चुका था. दीदी ने अपनी पैंटी उपर की और अपना शॉर्ट्स पहन लिया. दीदी मेरे पास आ गयी, मुझे मालूम था कि दीदी को मेरे वीर्य और गीले बॉक्सर्स की गंध आ रही होगी. दीदी जैसे ही मेरे गाल पर पप्पी लेने के लिए झुकी, उनके चेहरे की गर्माहट का मुझे अंदाज़ा हो गया. दीदी घूमी और स्माइल कर के मेरे रूम से चली गयी. मैं दीदी को जाते हुए देखता रहा..... मुझे बॉक्सर के अंदर ज़्यादा पानी छोड़ने के कारण बहुत गीला गीला अजीब सा लग रहा था.....

अगले दिन मेरी डॉली दीदी से कोई मुलाक़ात नही हुई क्योंकि मुझे अपने दोस्त के घर जाना था. लेकिन उसके अगले दिन जब मैं और दीदी ब्रेकफास्ट कर रहे थे, तब तक मम्मी पापा ऑफीस जा चुके थे, दीदी ने मेरी तरफ देखा और शरमा कर स्माइल किया.

दीदी : सॉरी राज, उस दिन कुछ ज़्यादा ही हो गया

राज: ठीक है दीदी, क्या आपको अच्छा नही लगा

दीदी: हां थोड़ा सा, मैं कुछ ज़्यादा ही एग्ज़ाइटेड हो गयी थी, और मैने कुछ ज़्यादा ही कर दिया

मैने अपना एक हाथ दीदी के हाथ के उपर रखा, और बोला, दीदी, मैं आपकी रेस्पेक्ट करता हूँ, मुझे मालूम है आप मेरी मदद मेरा पॉर्न अडिक्षन दूर करने के लिए कर रही हो, मैने भी कितने दिनों से लॅपटॉप को हाथ भी नही लगाया है, अगर आप मेरी हेल्प नही करोगी तो भी मैं अपनी कोशिश जारी रखूँगा.

दीदी (स्माइल के साथ): लेकिन तुमको मेरी मदद अच्छी लग रही है ना

राज (हंसते हुए): हां दीदी एक दम मस्त

मैने अपने हाथ से दीदी का हाथ दबा दिया, फिर ब्रेकफास्ट ख़तम करके हम अपने अपने कॉलेज चले गये, जाने से पहले दीदी ने मेरे गाल पर छोटा सा किस किया, दीदी के उस किस के सहारे पूरा दिन अच्छा गुजरा, क्लास में भी मन नही लगा, उस रात नींद भी नही आई.

दो दिनों के बाद मेरा लंड फिर से टाइट होने लगा था, और मुझे दीदी की हेल्प की ज़रूरत महसूस होने लगी. लॅपटॉप के सामने बैठ, पॉर्न वीडियोस देखते हुए मूठ मारने का जबरदस्त माँ करने लगा. लेकिन मुझे दीदी को नाराज़ करने का कोई इरादा नही था. दीदी को देख के मूठ मारने का मज़ा उन घटिया पॉर्न वीडियोस को देखने से लाखों गुना ज़्यादा था.

उस शाम मैने फिर से दीदी के रूम का डोर नॉक किया, दीदी अंदर डेस्कटॉप पर कुछ काम कर रही थी, वो मुझे देख के काफ़ी खुश हुई, जब मैने इशारा किया तो दीदी ने स्माइल कर दिया, मुझे लगा जैसे दीदी मेरा ही इंतेजार कर रही थी.

दीदी: राज, आज मेरे रूम में ही कर लें? तुम चाहो तो यहाँ बैठ सकते हो

मैं दीदी के बेड पर बैठ गया, दीदी ने शरारती लहजे में कहा, आज क्या अपनी जीन्स गंदी करने का इरादा है?

मैने तुरंत कहा ओह नो. मुझे विश्वास नही था कि दीदी इतनी जल्दी तय्यार हो जाएगी. मुझे दीदी के सामने अपनी जीन्स उतारने में थोड़ी शरम आई, मैं अब बॉक्सर्स और टी-शर्ट में अपनी प्यारी दीदी के सामने खड़ा था.

मेरा लंड अपने आप खड़ा हो चुका था, मेरी दीदी मेरे बॉक्सर में बने टेंट को देखकर स्माइल करे बिना ना रह सकी, मैं भी थोड़ा शरमा गया

दीदी थोड़ी देर वैसे ही बैठी रही, और फिर एक दम से बेड पर खड़ी हो गयी, और अपनी गान्ड को हिला हिला के हल्के हल्के डॅन्स करने लगी, जब हमारी आँखें मिलती तो दीदी अपनी गान्ड को थोड़ा ज्याद ही हिला देती. दीदी ने आज भी शॉर्ट और टी-शर्ट ही पहन रखी थी, बालों का पोनी टेल बना रखा था.

मैं दीदी को गौर से देखने लगा, दीदी डॅन्स करने के साथ साथ अपनी टी-शर्ट को भी उपर करती जा रही थी, दीदी अब अपने घुटनों पर बेड पर बैठ गयी थी लेकिन डॅन्स स्टाइल में उसका हिलना जारी था. दीदी ने अपनी टी-शर्ट को थोड़ा और उपर किया. दीदी का क्या गोरा गोरा पेट था, मैं देख के मस्त हो गया, दीदी का अपनी कमर हिलाना जारी था. दीदी टी-शर्ट को उपर उठा के अपनू चूंचियों के बीच तक ले गयी, अब मुझे दीदी का पूरा पेट दिखाई दे रहा था, चूंचियों के नीचे से शॉर्ट्स तक.

मुझे अब पता चला था कि दीदी ने आज टी–शर्ट के अंदर ब्रा नही पहन रखी है

दीदी: कैसा लग रहा है राज?

मैने स्माइल के साथ कहा, वाकई में मस्त दीदी

तो तुम को मज़ा आ रहा है क्यों? दीदी ने अपनी ट शर्ट को थोड़ा और उपर करते हुए कहा. मैने हां में सिर हिला दिया. मेरी नज़र दीदी की टी-शर्ट के निचले हिस्से पर गढ़ी थी जहाँ से थोड़ी थोड़ी चूंचियाँ दिखाई दे रही थी. अब दीदी ने टी-शर्ट को थोड़ा और उपर कर दिया, अब दीदी की चूंचियों की गोलाइयाँ सॉफ नज़र आ रही थी. मेरे हाथ काँप रहे थे, मैं बॉक्सर के अंदर अपने लंड को एक हाथ से हिलाने लगा.

सॉरी, राज, लगता है तुम को पूरा नज़ारा नही मिल रहा है, दीदी ने कहा, और दीदी ने अपने बड़े गले वाली टी-शर्ट को दोनो बाहों से नीचे खीच दिया, अब दीदी का क्लीवेज बहुत ज़्यादा दिखाई दे रहा था. दीदी ने मटकना जारी रखा, वो अपनी गान्ड भी हिला रही थी. दीदी ने टी-शर्ट का निचला हिस्सा अपने एक हाथ से पकड़ रखा था. दूसरे हाथ से दीदी ने अपने शॉर्ट का आगे का हिस्सा नीचे करना शुरू कर दिया. अब दीदी के शरीर का ज़्यादा से ज़्यादा हिस्सा मेरी नज़रों के सामने था. दीदी के गोरे गोरे जिस्म को देखते हुए मैने मूठ मारना जारी रखा.

दीदी अपनी गान्ड को हिलाते हुए मुझे मादक नज़रों से देख रही थी. दीदी अपने हाथों से अपनी चूंचियों को गोल गोल सहला रही तो,और उनको साइड से दबा भी रही थी. दीदी का एक हाथ जो शॉर्ट को पकड़े था वो भी हिल रहा था, कभी मुझे ज़्यादा देखने को मिल जाता कभी कम. अब मैने अपने लंड को कस के पकड़ लिया. मुझे अब दीदी के देखने की कोई परवाह नही थी.

दीदी की हल्की हल्की झान्टे अब शॉर्ट में से दिखाई दे रही थी. दीदी की झान्टे देख के मेरे मूठ मारने की स्पीड बढ़ गयी, मैं अब लंड के सुपाडे को सहलाने लगा. तभी दीदी ने टी-शर्ट को थोड़ा उपर किया तो उनकी एक चून्चि काफ़ी कुछ दिखाई देने लगी. मेरे लंड से प्री कम की चिकनाई अब निकलने लगी थी, उसे मैं सुपाडे पर फैला के लंड को सहलाने लगा. मेरा बॉक्सर आज सिल्क का था, इस वजह से और ज़्यादा मज़ा रहा था.

 
दीदी ने अपनी एक उंगली अपने शॉर्ट के अंदर घुसा दी, सामने से जहाँ से हल्की हल्की झान्टे दिखाई दे रही थी, दीदी ने उसे अंदर तक घुसा दिया. दीदी का वो हाथ जिस से उन्होने टी-शर्ट पकड़ रखी थी वो हिल रहा था, धीरे धीरे वो अपनी चूंचियों को सहला रही थी. मैने मूठ मारना जारी रखा. दीदी का शरीर चमक रहा था, शायद पसीने के कारण. दीदी अपनी उंगली से चूत के दाने को सहला रही ही, जिस की कल्पना मैं शॉर्ट के हिलने डुलने से अच्छी तरह कर पा रहा था.

दीदी ने मेरी तरफ देखा, उनके गाल गुलाबी हो रहे हे, हमारी आँखे मिली. मैं उस वक़्त स्खलित नही होना चाहता था, लेकिन मुझ से कंट्रोल नही हुआ और मेरे लंड ने ढेर सारा वीर्य पिचकारियाँ मार मार के उंड़ेल दिया. जैसे ही मेरे वीर्य की आख़िरी बूँद निकल रही थी, दीदी ने ज़ोर की आवाज़ निकाली आआआआअहह और दीदी का चेहरा एक दम सुर्ख हो गया. मैं अभी भी अपने लंड को सहला रहा था, दीदी भी अपनी चूत सहला रही थी. दोनों के पानी छोड़ने के बाद की एक दूसरे की चिकनाई युक्त सहलाने की आवाज़ें हम क्लियर्ली सुन सकते थे. हम एक दूसरे को आँख मिला कर तब तक देखते रहे जब तक दीदी ने एक लंबी साँस ले कर जोरदार पानी नही छोड़ दिया और एक लंबी साँस ली, दीदी ने अपने लिप्स पर जीभ फिराई और अपनी आँखें बंद कर ली.

दीदी ने टी शर्ट को नीचे कर दिया और अपना हाथ शॉर्ट्स में से बाहर निकाल लिया. दीदी कुछ सेकेंड्स के लिए बेड पर ही बैठी रही. फिर हम दोनो ने के दूसरे की तरफ देख के स्माइल किया. रूम में अब एक दम शांति थी, लेकिन इसमे प्यार की मादक खुश्बू आ रही थी.

दीदी, मैने बोलने की कोशिश की, लेकिन आगे कुछ ना बोल पाया, दीदी मेरे को देख के मुस्कुरा दी

गीले बॉक्सर में मुझे बहुत अनकंफर्टबल लग रहा था, मैं जैसे ही उठने लगा, दीदी ने मुझे रोक लिया.

दीदी: मुझे तुम्हारा ये गीला बॉक्सर देखकर बहुत खुशी हो रही है क्योंकि ये मेरी वजह से हुआ है.

फिर दीदी ने एक शरारती मुस्कुराहट से मुझे देखा. मैने अपने सारे कपड़े उठाए और दीदी की तरफ देखा, जिस तरह दीदी मुझे देख रही ही उस से लगता था कि वो नही चाहती कि मैं वहाँ से जाऊं.

राज: दीदी मैं चेंज कर लूँ, बस एक मिनिट में लौट के आता हूँ

दीदी ने हां में सिर हिला दिया. मैं थोड़ी देर में चेंज कर के फिर से दीदी के रूम में आ गया. हम काफ़ी देर बैठ के बातें करते रहे, ऐसा लग रहा था हमे एक दूसरे की कंपनी की ज़रूरत है. मैं आधी रात के बाद अपने रूम में जा के सो गया.....

....................

घड़ी का अलार्म लगातार बजे जा रहा था, मानो वो चाहता हो कि मुझे अब तक उठ जाना चाहिए था. मैने स्नऊज़ का बटन दबाया, और एक करवट ली.

सूरज की रोशनी खिड़की के ब्लाइंड्स में से थोड़ी सी कमरे में आ रही थी. कुछ मिनिट के बाद मेरी आँखों ने रोशनी के साथ अड्जस्ट किया और मैने अपने रूम में चारों तरफ देखा. जमहाई मारते हुए मुझे एहसास हुआ कि मेरा लंड खड़ा हुआ है, मानो ये बताने के लिए कि लड़का होने का क्या मतलब है. मैने एक अंगड़ाई ली और ओधी हुई चादर को हटा के बैठ गया.

मुझे बहुत अच्छी नींद आई थी और मैं बहुत फ्रेश फील कर रहा था. कुछ हफ्तों पहले की ही तो बात है कि मैं कैसे सेक्स के लिए फ्रस्टरेटेड हुआ करता था, मेरे दिमाग़ में बस सेक्स ही घुमा करता था. जब छोटा था तो मॅगज़ीन्स में ब्रा और पैंटी के एड देखना, पहली सॉफ्टकोर मॅगज़ीन दफ़ा 302 पढ़ना, फिर इंटरनेट पर देसीबाबा की हार्ड पॉर्न तस्वीरें देखना, लगता है इस सब से मुझे पॉर्न का अडिक्षन हो गया था. मुझे याद है जब मैने पहली बार डेबोनाइर मॅगज़ीन में एक पूरी नंगी लड़की की तस्वीर देखी थी. ये बहुत पुरानी बात है, जब एक दोस्त ने किसी विदेशी पॉर्न मॅगज़ीन में छपी एक गोरी विदेशी लड़की जो नहा रही थी उसकी फोटो दिखाई थी, उसके गुलाबी होठ थे, छोटी छोटी चूंचियाँ जिन पर पिंक निपल्स थे और हल्की हल्की ब्राउन झान्टे, जो इतनी बड़ी नहीं थी कि उसकी दोनो जांघों के बीच जा रही चूत की दरार को छुपा सके.

मैं अब पूरी तरह उठ चुका था और सब कुछ अच्छे से इमॅजिन कर पा रहा था कि मैं कैसे इतना ज़्यादा सेक्स के लिए फ्रस्टरेटेड हुआ करता था. सारी तस्वीरे और गंदी चीज़े जो मैं अपने जेहन में उंड़ेल रहा था उस की वजह से मेरे दिल और दिमाग़ इन चीज़ों के आदि हो चुके थे. मेरा पॉर्न देखना और मूठ मारना मेरी आदत में शुमार हो चुका था, इसका अंदाज़ा मुझे जब लगा जब मेरे शरीर ने कहा कि ये सब बहुत हो चुका. असलियत ये थी कि मैं इन सब चीज़ों में खो चुका था. पॉर्न देख के एग्ज़ाइट होना और फिर मूठ मारना.... शायद मैं ऐसा नही करना चाहता था. लेकिन ये सब मैं अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए करता था. मुझे अपने आप पर शरम आती थी कि मेरा कोई करीबी नही है, जिस के साथ मैं सब कुछ शेर कर सकूँ, मैं अपने आप को दुनिया से छुपाने की कोशिश करता. मैं ये सब लगातार करता चला आ रहा था, लेकिन इस सब से मुझे आत्म ग्लानि होती थी.

बस दो हफ्ते पहले की ही तो बात है, मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी, जब दीदी ने मुझे लॅपटॉप पर पॉर्न देखते हुए पकड़ा था. मेरी तो फट ही गयी थी, कितनी बेहूदा बात थी कि मेरी दीदी जो मुझे अपना प्यारा छोटा भाई समझती थी उनको मेरे व्यक्तित्व के इस चेहरे का पता चला था. मैं कितना बेचैन हो उठा था, लेकिन ये मेरे सुधरने की शुरुआत थी, मानो मर्ज का इलाज शुरू हुआ हो. मेरी बेहद खूबसूरत डॉली दीदी ने मुझे माफ़ कर दिया था और मेरी बाकी सब दुनिया से छुपी हुई अलग दुनिया में आकर मेरा हाथ पकड़कर अपनी उस दुनिया के ओर ले चली थी जहाँ मेरे लिए सिर्फ़ प्यार और दुलार था.

जब दीदी को असलियत मालूम पड़ी और मेरे लिए जो कुछ उन्होने करने का फ़ैसला लिया तो मुझे उतना ही सर्प्राइज़ हुआ था जितना कि जब दीदी ने मुझे पॉर्न देखते हुए पकड़ा था. किसी भी नज़रिए से ये ठीक नही था कि मैं पॉर्न अडिक्षन दूर करने के लिए अपनी सग़ी बड़ी बेहन को देख के मूठ मारू. हमारे भाई बेहन के रिश्ते में ये एक बहुत बड़ा बदलाव था. हम दोनो के बीच जो नज़दीकियाँ आ रही थी, वो भाई बेहन के रिश्ते में कुछ अजीब थी.

दीवार पर टॅंगी उस फोटो को देखकर मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी जो कि हमारी गोआ की फॅमिली ट्रिप के दौरान खींची गयी थी, इसमे मैं किसी बीच पर लहरों के बीच चहल कदमी करने के दौरान दीदी के मूँह पर पानी उछाल रहा हूँ.

मैने एक जमहाई ली और बेड से उतर के खड़ा हो गया, फिर सोचने लगा कि आज क्या करना है, तभी मेरे दिमाग़ में कुछ तुरंत कौंधा और मैने अपना मोबाइल फोन उठा के देखा कि आज तो सनडे है, मुझे अपने आप पर बहुत गुस्सा आया कि मैने अलार्म लगाया ही क्यूँ था, आज सनडे को इतनी जल्दी उठने की क्या ज़रूरत थी? मैं फिर से बेड पर लेट गया.

कुछ मिनिट बाद किसी ने डोर नॉक किया, मैने कहा हां......, मैने देखा डॉली दीदी अंदर झाँक रही है.

दीदी ने धीरे से कहा गुड मॉर्निंग, मैने तुम्हारा अलार्म सुन लिया था, क्या अलार्म ऑफ करना भूल गये थे? मैने हां में सिर हिलाया. दीदी अब कमरे के अंदर आ चुकी थी, अभी भी उन्होने कल रात वाले, छोटी सी टी- शर्ट और कॉटन शॉर्ट्स पहन रखे थे. दीदी ने पूछा क्या उठने का इरादा नही है?

इस से पहले कि मैं कुछ बोलता, दीदी हंसते हुए मेरे बेड पर आ गयी और मुझे गुद गुदि कर के हँसाने लगी, मैं दीदी की गिरफ़्त से निकलने की कोशिश करने लगा, मुझे डर था कि कहीं दीदी मेरा खड़ा हुआ लंड ना महसूस कर लें. मैने दीदी से कहा, दीदी प्लीज़ हटो ना, लेकिन शायद तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी और दीदी के फेस से पता चल रहा था कि उन्होने मेरे खड़े लंड को महसूस कर लिया है.

 
धन्यवाद दोस्तो

अपडेट कुछ ही देर में
 
दीदी हँसी और मेरी कमर के उपर से दूर होते हुए उन्होने अपने चेहरा अपने हथेलियों से छुपा लिया और बोली, सॉरी राज, लगी तो नही

नही दीदी.... मैं तो बस... मैं आगे कुछ बोल नही पाया, मेरा दिमाग़ शायद अभी भी सो रहा था..

तो फिर ठीक है... अगर लगी नही तो... दीदी ने चिढ़ाया और मेरे उपर बैठ गयी.

दीदी मेरे लंड के उपर टाँगें चौड़ी कर के बैठी थी,

मैने कहा दीदी...

दीदी बस हां कहकर चुप हो गयी, मैने देखा दीदी मेरे को देख कर स्माइल कर रही ही, दीदी के स्माइल करने से मैने कुछ रिलॅक्स फील किया

राज: मम्मी और पापा कहाँ हैं?

दीदी: दोनो शॉपिंग करने बिग बाज़ार गये हैं, वहाँ कोई सेल चल रही है

मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था, हालाँकि दीदी और मेरे बीच में चादर थी, लेकिन वो मेरे खड़े लंड को महसूस कर पा रही थी. ना तो दीदी ने मेरे उपर से हटने की और ना मैने उनको हटाने की कोई चेष्टा की, दीदी वैसे ही मेरे उपर बैठी रही.

दीदी: आज कितना अच्छा मौसम है, कितनी अच्छी हवाल चल रही है, सब कुछ सुंदर लग रहा है

दीदी ने थोड़ा झुक कर विंडो के ब्लाइंड्स को टर्न कर के खोल दिया, अब हम दोनो बाहर का सब कुछ देख पा रहे थे

दीदी: अच्छा लग रहा है ना

राज: हां, तुमको भी मज़ा आ रहा है ना दीदी

दीदी ने अपने होठ तो दातों से बाइट करते हुए कहा, लगता है तुम अभी पूरी तरह से जागे नही हो, तुमको उठाना ही पड़ेगा, ऐसा कहते हुए दीदी ने अपना कुछ और वजन मेरे उपर डाल दिया

मैने दीदी के नीचे से निकलने का असफल प्रयास किया

दीदी ने स्माइल किया, और मेरे चेहरे को देखते हुए अपनी गान्ड को गोल गोल मेरे लंड के उपर घुमाने लगी. इस सब से मैं बहुत ज़्यादा एग्ज़ाइटेड हो गया. क्या मस्त नज़ारा था मेरी सुंदर बड़ी बेहन मेरे लंड के उपर अपनी गान्ड घिस रही थी, सूरज की रोशनी रूम में आ रही थी और मैं लेट कर इन सब चीज़ों का आनंद ले रहा था

राज: हे राम

दीदी ने मेरे लंड को दबाना जारी रखा और वो मेरे लंड के उपर अपने आप को चादर के उपर से घिस रही थी, वो एक बारगी रुक गयी, मैने दीदी के चेहरे पर कुछ उत्सुकता देखी

दीदी: राज, तुम्हे अच्छा लग रहा है ना? मुझे पूछ लेना चाहिए था

राज: आअहह दीदी मुझे नही मालूम, थोड़ी देर और दीदी ...मैं बस झड़ने ही वाला हूँ...

दीदी ने हां में गर्दन हिलाई, और बोली बस थोड़ी देर, तो फिर मुझे करते रहना चाहिए. दीदी ने मुझे जीभ निकाल के चिढ़ाया और मेरे उपर थोड़ा और वजन डालकर घिसने लगी. मेरे मूँह से आहह... ऊहह की आवाज़ें निकल रही थी. कुछ सेकेंड्स के बाद मैने दीदी की जांघों को दोनो तरफ से पकड़ा और उनको अपने उपर खींचा, मेरा पानी निकल चुका था, मेरा बॉक्सर और चादर दोनो गीले हो गये थे, कुछ वीर्य की बूँदें मेरी जांघों पर बह रही थी...

दीदी ने खुशी से आहह की आवाज़ निकाली और मेरे उपर से उतर के मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ फेरने लगी

कुछ देर बाद गाड़ी की आवाज़ सुन के हम समझ गये कि मम्मी पाप आ चुके हैं, दीदी तुरंत मेरे कमरे से भाग गयी. मैं भी तुरंत उठकर अपने आप को और अपने बेड को सॉफ करने लगा. हालाँकि मैने डोर बंद कर लिया था, लेकिन अपने गीले शॉर्ट में बैठने का कोई मतलब नही था

जल्दी से नहाने के बाद मैं नीचे पहुँचा तो देखा दीदी वहाँ पर पहले से से ही थी और मम्मी से बात कर रही थी, वो मुझ से ऐसे मिली जैसे आज सुबह हम दोनो पहली बार मिल रहे हो.

आज का दिन कुछ अलग ही था.

मेरे और दीदी के बीच जो कुछ भी चल रहा था, उसकी वजह से हमारे बीच काफ़ी नज़दीकियाँ आ गयी थी, हम दोनो एक दूसरे के साथ ज़्यादा से ज़्यादा टाइम स्पेंड करने लगे, दोनो एक साथ घूमते, और हम गहरे दोस्तों की तरह हो गये थे. हम दोनो बचपन से काफ़ी करीब थे लेकिन इस सब के शुरू होने के बाद हमको पता चला कि हम दोनो एक दूसरे से कितना कुछ सीख सकते हैं और मज़े कर सकते हैं. उस हफ्ते दीदी ने एक बार कहा कि शायद हम एक दूसरे को कितना अच्छी तरह समझने लगे हैं. मैने भी दीदी के साथ अपनी सहमति जताई. जब आप किसी के साथ बहुत दिनों तक रहो तो हम कई बार कुछ ऐसा भी सोच लेते हैं जो कि असलियत में सच नही होता. हम एक दूसरे की ग़लत फ़हमियों को दूर कर चुके थे.

उसके अगले हफ्ते, हमारे संहझौते के मुताबिक, मुझे जब मूठ मारने का बहुत मन किया तो पॉर्न देखने की जगह मैं दीदी के पास गया, और पूछा, दीदी क्या आज रात मेरे कमरे में आओगी? दीदी आसानी से तय्यार हो गयी. मैं अपने रूम में आया, अपने सारे कपड़े उतारे और सिर्फ़ बॉक्सर में अपने बेड पर बैठकर मॅगज़ीन पढ़ने लगा. उस दिन बहुत गर्मी थी मेरे रूम का एसी भी ठीक से काम नही कर रहा था मैं टी-शर्ट उतार के सिर्फ़ बॉक्सर में बैठा हुआ था.

थोड़ी देर बाद, दीदी ने मेरे डोर पर नॉक किया, और दीदी मेरे रूम में अंदर आ गयी. आज दीदी ने वाइट कलर का गाउन पहना हुआ था, जिसमे सामने की तरफ बटन थे, दीदी ने अपने बालों का पोनीटेल बना रखा था. मैने अपनी मॅगज़ीन नीचे रखी और दीदी की तरफ देख कर मुस्कुराया, मैं बेड पर तकिये के सहारे बैठ गया.

दीदी (डोर लॉक करते हुए): राज, मैं तुम्हे आज एक सर्प्राइज़ दूँगी

राज: दीदी, सच में?

दीदी ने हां में सिर हिलाया और एक कुटिल मुस्कान से मेरी तरफ देखा. दीदी अपने गाउन के बटन खोलने लगी, सारे बटन खोलने के बाद उसको दोनो हाथों से पकड़ के मेरे सामने खोल दिया और ज़मीन पर गिरा दिया, अंदर दीदी ने विल्टी कलर की ब्रा और पैंटी पहन रखी थी. ये नज़ारा देख के मैने एक गहरी साँस ली. क्या मस्त बदन था दीदी का, एक दम किसी मूर्ति की माकिफ़, एक दम पर्फेक्ट फिगर था, जैसे किसी शिल्पकार ने बिना किसी ग़लती किए कोई मूरत बनाई हो, दीदी की स्किन बिल्कुल गोरी और स्मूद थी. मैने जी भर के ये नज़ारा देखा, दीदी के गोरे गोरे लंबे लंबे पैर, उनकी मांसल जांघे, दीदी की पर्फेक्ट नेवेल, उनके मस्त उभार ली हुई ब्रा में क़ैद चूंचियाँ और सुरहिदार गर्दन. जो मैने देखा उसका वर्णन करना शायद मुश्किल है.

दीदी एक पोज़ बना के खड़ी हो गयी और मुझसे पूछा, कैसा लगा?

मेरे मूँह से कोई आवाज़ नही निकल रही थी, मैं हैरान होकर केवल अपनी गर्दन हिला पाया. दीदी ने अपने हाथ उठाए और उनको अपनी ब्रा के उपर फिराते हुए नीचे पेट को सहलाते हुए नीचे तक ले गयी और फिर उपर तक ले आई. दीदी अपने हाथों के अंगूठे अपनी ब्रा स्ट्रॅप्स में डाल के मेरे सामने पोज़ देती हुई खड़ी हो गयी.

मैं ये ब्रा भी उतार दूँगी राज जब तुम अपना हाथ अपने बॉक्सर के अंदर डालोगे, लेकिन मैं तुम्हे सब कुछ दिखाउन्गी नही, ओके?

 
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