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डॉली ने जैसे ही अपने छोटे भाई राज की आँखों में आँखें डाल कर देखा, उसका खुद का चेहरा शरम से लाल हो गया. शायद धीरज सही कर रहा था, उन दोनो के बीच अभी बहुत कुछ होना बाकी है. डॉली ने अपने भाई का हाथ अपने हाथों में लेकर, उसको ज़ोर से दबा दिया.
"चलो अब चलना चाहिए," डॉली ने नीचे राज के स्विम्मिंग ट्रंक में बन रहे टेंट की तरफ देखते हुए कहा.
"आइ मीन इट, डॉली दीदी," राज बोला जैसे ही डॉली बीच हाउस की तरफ मुड़कर आगे बढ़ने लगी.
"मुझे मालूम है राज," वो धीमे से फुसफुसाते हुए बोली.
“वो दोनो इसी तरफ आ रहे हैं!” धीरज ने तान्या की गले तक अपने लंड को पेलते हुए कहा. :”मैं बस होने ही वाला हूँ!” वो तान्या के बालों को पकड़ कर, ज़ोर ज़ोर से साँसें लेने लगा. तान्या उसके टट्टों को सहलाने लगी, और उसके होंठ लंड की पूरी लंबाई पर फिसलने लगे. तान्या अपनी जीभ को सुपाडे पर फिराने लगी, और धीरज अपने चरम पर पहुँच गया.
"ओह्ह्ह्ह! बेहनचोद!" धीरज ज़ोर से चीख कर बोला, जैसे ही उसके लंड ने वीर्य के पानी के तेज पिचकारी तान्या के मूँह के अंदर छोड़ी. तान्या लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर उपर नीच कर रही थी, उसको चूस रही थी और वीर्य के पानी को निगल रही थी, और दोनो ने समय रहते काम ख़तम कर लिया, धीरज ने तुरंत अपना लंड स्विम्मिंग ट्रंक के अंदर घुस लिया.
"चलो खाना को रेस्टोरेंट से आए काफ़ी टाइम हो चुका है, इसको माइक्रोवेव में गरम कर लेते हैं," तान्या ने डॉली और राज को बीच हाउस के डोर में से अंदर दाखिल होते हुए देखकर कहा. तान्या अपना मूँह पोंछ चुकी थी और डाइरेक्ट कोक की कॅन से कोक के बड़े बड़े घूँट ले रही थी.
"ठीक है," डॉली ने बिना कुछ सोचे जवाब दिया, और अपनी भाभी के पीछे पीछे किचन की तरफ चल दी.
दोपहर में लंच के बाद, राज गोआ के चर्चस देखने के लिए अकेला चला गया, बाकी तीनों में से चर्च देखने में कोई इंट्रेस्टेड नही था, तीनों आराम करके एक एक नींद निकालने में ज़्यादा इंट्रेस्टेड थे.
शाम को डिन्नर के बाद, सभी ने एक साथ बैठकर डीवीडी पर ग्रांड मस्ती मूवी देखी. धीरज ने सब कुछ इस तरह से प्लान किया, कि अगले दिन सुबह लाइटहाउस देखने जाने के लिए बस धीरज और तान्या ही तय्यार हुए, और तान्या को अगले दिन सुबह जल्दी टाइम से लाइटहाउस देखने जाने का प्रोग्राम फाइनल कर लिया.
बेड रूम में पहुँचने के बाद डॉली ने अपने कपड़े उतारते हुए, धीरज से सुबह को बीच में छूटी हुई बात को आगे बढ़ाते हुए धीरे से कहा, “मुझे लगता है तुम सही कह रहे थे.”
"किस बारे में?" धीरज ने बेड पर कपड़े उतारकर नंगे ही चढ़ते हुए कहा, और अपनी बीवी को नंगा होते हुए देखने लगा.
"कि अभी भी राज और मेरे बीच बहुत कुछ होना बाकी है," डॉली ने अपनी पैंटी को उतारकर दूर फेंकते हुए, और बेड के पास खड़े होते हुए कहा. डॉली अपने पति के रिक्षन का इंतेजार करने लगी. धीरज बस मुस्कुरा कर रह गया.
"तुमको ऐसा क्यों लगता है?" धीरज ने बेड पर खिसक कर डॉली के लिए जगह बनाते हुए पूछा. डॉली कुछ भी बोलने से पहले, बेड पर उसके पास आकर बैठ गयी.
"जो कुछ राज ने दोपहर को उसके साथ हुई बात चीत में कहा, उसको सुनकर मुझको ऐसा ही लगता है." डॉली उसके पास चिपक कर लेटते हुए और उसके शरीर पर हाथ फिराते हुए बोली. “लेकिन अभी भी मैं स्योर नही हूँ, की हमको ऐसा करना चाहिए या नही."
"मैने इस विषय पर आज दोपहर को बहुत रिसर्च की, मैने इस बारे में चर्च के एक पादरी से भी बात की," धीरज ने उसको बताया.
"क्या चर्च के पादरी से इस बारे में बात की?" डॉली ने अविश्वास में उसकी तरफ घूरते हुए पूछा.
"डॉन'ट वरी. मैने उनको बताया कि मैं एक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हूँ, और इस टॉपिक पर रिसर्च कर रहा हूँ. पादरी ने बताया कि इन्सेस्ट इतना भी रेर नही है जितना लोग समझते हैं, लेकिन फिर भी इसको समाज में प्रोत्साहित करना ग़लत होगा. जो इन्सेस्ट करते हैं, उनको ही इसके सही या ग़लत के बारे में फ़ैसला लेने के लिए छोड़ देना चाहिए.”
"सच में उन्होने ऐसा कहा?" डॉली ने अपना सिर धीरज के कंधे पर रख दिया, और कुछ सोचने लगी. “तो तुम ने क्या सोचा, क्या मुझे और राज को.....” डॉली ने अपनी बात को बीच में अधूरा छोड़ दिया.
"सब कुछ तुम्हारे उपर है, जैसा तुम ठीक समझो वैसा करो," धीरज ने उसको सिर के उपर किस करते हुए कहा. "ऑल आइ'म सेयिंग ईज़... कि मुझे इस बारे में कोई आपत्ति नही है."
"मुझे समझ में नही आ रहा, मैं राज से कैसे इस बारे में बात करूँगी," डॉली ने कहा, और अंजाने में ही वो धीरज के सजेशन को स्वीकार कर चुकी थी.
"चलो अब चलना चाहिए," डॉली ने नीचे राज के स्विम्मिंग ट्रंक में बन रहे टेंट की तरफ देखते हुए कहा.
"आइ मीन इट, डॉली दीदी," राज बोला जैसे ही डॉली बीच हाउस की तरफ मुड़कर आगे बढ़ने लगी.
"मुझे मालूम है राज," वो धीमे से फुसफुसाते हुए बोली.
“वो दोनो इसी तरफ आ रहे हैं!” धीरज ने तान्या की गले तक अपने लंड को पेलते हुए कहा. :”मैं बस होने ही वाला हूँ!” वो तान्या के बालों को पकड़ कर, ज़ोर ज़ोर से साँसें लेने लगा. तान्या उसके टट्टों को सहलाने लगी, और उसके होंठ लंड की पूरी लंबाई पर फिसलने लगे. तान्या अपनी जीभ को सुपाडे पर फिराने लगी, और धीरज अपने चरम पर पहुँच गया.
"ओह्ह्ह्ह! बेहनचोद!" धीरज ज़ोर से चीख कर बोला, जैसे ही उसके लंड ने वीर्य के पानी के तेज पिचकारी तान्या के मूँह के अंदर छोड़ी. तान्या लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर उपर नीच कर रही थी, उसको चूस रही थी और वीर्य के पानी को निगल रही थी, और दोनो ने समय रहते काम ख़तम कर लिया, धीरज ने तुरंत अपना लंड स्विम्मिंग ट्रंक के अंदर घुस लिया.
"चलो खाना को रेस्टोरेंट से आए काफ़ी टाइम हो चुका है, इसको माइक्रोवेव में गरम कर लेते हैं," तान्या ने डॉली और राज को बीच हाउस के डोर में से अंदर दाखिल होते हुए देखकर कहा. तान्या अपना मूँह पोंछ चुकी थी और डाइरेक्ट कोक की कॅन से कोक के बड़े बड़े घूँट ले रही थी.
"ठीक है," डॉली ने बिना कुछ सोचे जवाब दिया, और अपनी भाभी के पीछे पीछे किचन की तरफ चल दी.
दोपहर में लंच के बाद, राज गोआ के चर्चस देखने के लिए अकेला चला गया, बाकी तीनों में से चर्च देखने में कोई इंट्रेस्टेड नही था, तीनों आराम करके एक एक नींद निकालने में ज़्यादा इंट्रेस्टेड थे.
शाम को डिन्नर के बाद, सभी ने एक साथ बैठकर डीवीडी पर ग्रांड मस्ती मूवी देखी. धीरज ने सब कुछ इस तरह से प्लान किया, कि अगले दिन सुबह लाइटहाउस देखने जाने के लिए बस धीरज और तान्या ही तय्यार हुए, और तान्या को अगले दिन सुबह जल्दी टाइम से लाइटहाउस देखने जाने का प्रोग्राम फाइनल कर लिया.
बेड रूम में पहुँचने के बाद डॉली ने अपने कपड़े उतारते हुए, धीरज से सुबह को बीच में छूटी हुई बात को आगे बढ़ाते हुए धीरे से कहा, “मुझे लगता है तुम सही कह रहे थे.”
"किस बारे में?" धीरज ने बेड पर कपड़े उतारकर नंगे ही चढ़ते हुए कहा, और अपनी बीवी को नंगा होते हुए देखने लगा.
"कि अभी भी राज और मेरे बीच बहुत कुछ होना बाकी है," डॉली ने अपनी पैंटी को उतारकर दूर फेंकते हुए, और बेड के पास खड़े होते हुए कहा. डॉली अपने पति के रिक्षन का इंतेजार करने लगी. धीरज बस मुस्कुरा कर रह गया.
"तुमको ऐसा क्यों लगता है?" धीरज ने बेड पर खिसक कर डॉली के लिए जगह बनाते हुए पूछा. डॉली कुछ भी बोलने से पहले, बेड पर उसके पास आकर बैठ गयी.
"जो कुछ राज ने दोपहर को उसके साथ हुई बात चीत में कहा, उसको सुनकर मुझको ऐसा ही लगता है." डॉली उसके पास चिपक कर लेटते हुए और उसके शरीर पर हाथ फिराते हुए बोली. “लेकिन अभी भी मैं स्योर नही हूँ, की हमको ऐसा करना चाहिए या नही."
"मैने इस विषय पर आज दोपहर को बहुत रिसर्च की, मैने इस बारे में चर्च के एक पादरी से भी बात की," धीरज ने उसको बताया.
"क्या चर्च के पादरी से इस बारे में बात की?" डॉली ने अविश्वास में उसकी तरफ घूरते हुए पूछा.
"डॉन'ट वरी. मैने उनको बताया कि मैं एक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हूँ, और इस टॉपिक पर रिसर्च कर रहा हूँ. पादरी ने बताया कि इन्सेस्ट इतना भी रेर नही है जितना लोग समझते हैं, लेकिन फिर भी इसको समाज में प्रोत्साहित करना ग़लत होगा. जो इन्सेस्ट करते हैं, उनको ही इसके सही या ग़लत के बारे में फ़ैसला लेने के लिए छोड़ देना चाहिए.”
"सच में उन्होने ऐसा कहा?" डॉली ने अपना सिर धीरज के कंधे पर रख दिया, और कुछ सोचने लगी. “तो तुम ने क्या सोचा, क्या मुझे और राज को.....” डॉली ने अपनी बात को बीच में अधूरा छोड़ दिया.
"सब कुछ तुम्हारे उपर है, जैसा तुम ठीक समझो वैसा करो," धीरज ने उसको सिर के उपर किस करते हुए कहा. "ऑल आइ'म सेयिंग ईज़... कि मुझे इस बारे में कोई आपत्ति नही है."
"मुझे समझ में नही आ रहा, मैं राज से कैसे इस बारे में बात करूँगी," डॉली ने कहा, और अंजाने में ही वो धीरज के सजेशन को स्वीकार कर चुकी थी.