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भैया का ख़याल मैं रखूँगी complete



बिहारी भी दिन भर बीना की चुदाई करके काफ़ी थक चुका था. आशना के ऐसा कहने पर वो जूस का ग्लास लेकर उपर चला गया वीरेंदर को देने और फिर अपने रूम मे जाकर बेड पर लेट गया. आशना ने अपना समान उठा कर अपने रूम मे रखा और फ्रेश होकर रात के खाने की तैयारी शुरू कर दी. फ्रिड्ज से कुछ सब्ज़ियाँ निकाल कर उसने वेज- बिरयानी के लिए समान इकट्ठा कर लिए और सोचा कि जब खाने का टाइम होगा उस से पहले गरम-गरम बना देगी. रात के खाने की सारी तैयारी करके वो अपने रूम मे चली आई. उसे चैन नहीं आ रहा था कि वो वीरेंदर को कैसे बताए लेकिन फिर भी उसने आज की रात एक बार फिर से पूरे घटनाक्रम के बारे मे सोचने का फ़ैसला किया.

बिहारी अपने कमरे मे लेटा काफ़ी खुश था. उसने सोच रखा था कि वीरेंदर जैसे ही आशना से शादी कर लेगा, वो रागिनी को अपने घर ले आएगा. बिहारी, बीना के साथ हुई आज की मुलाकात के बारे मे सोचने लगा.

सुबह करीब 10:15 बजे बीना की गाड़ी वीरेंदर के गॅरेज मे खड़ी थी. बीना ने हॉर्न दबाया तो बिहारी दौड़ता हुआ गाड़ी की तरफ आया और जैसे ही बीना गाड़ी से बाहर निकली, बिहारी ने उसे गोद मे उठा लिया और घर के अंदर आ गया.

बीना: नीचे तो उतार, आज क्या पूरा दिन गोदी मे ही उठाकर रखोगे.

बिहारी: आज तो पूरा दिन तुझे नंगा करके कुतिया की तरह चोदुन्गा.

बीना: मैं तो कब से तैयार हूँ राजा, मगर पहले एक काम की बात सुनो. तुमने रागिनी के लिए बोला था तो मुझे तुमपर तरस आ गया, अब सोच रही हूँ कि उस कली को फूल बनाने का जिम्मा तुझे जल्द ही दे दूं.

बिहारी: वाह रे मेरी छमिया, यह हुई ना बात. लेकिन यह तो बता, माल असली है या किसी ने चख लिया है.

बीना: अब यह तो तू ही चेक कर लेना, तुझे कॉन सा पैसे देकर खरीदना है. फ्री का माल है, जब तक मन चाहे दिल बहला लेना और फिर दोबारा मेरे पास छोड़ देना.

बिहारी: अरे बच्ची है, 3-4 साल तो रागडूंगा ही उसे. इतनी जल्दी थोड़े ही छोड़ दूँगा.

बीना: तो फिर आशना का क्या होगा.

बिहारी: आशना को तो मैं पूरी उम्र अपने साथ रख सकता हूँ लेकिन अपनी रखैल बना कर.

बीना: साले तू मर्द है या टार्ज़ॅन.

बिहारी: घोड़ा जब बूढ़ा होने लगता है तो और ताकतवर हो जाता है. तू तो मेरी प्रेमिका रहेगी, रागिनी को मैं अपनी बीवी बना कर रखूँगा और रही बात आशना की तो वो बस मेरे बच्चों की माँ कहलाएगी मगर मैं उसे दर्जा रखैल का दूँगा.

बीना: तो सुन फिर राघिनी के लिए क्या प्लान है. बीना जैसे जैसे उसे रागिनी के प्लान के लिए बता रही थी, बिहारी उसके दिमाग़ की दाद देते जा रहा था.

बिहारी: साली उसे मालकिन बनाने के खवाब दिखाकर एक नौकर की बीवी बना देगी तू तो.

बीना: दो दिन बाद मैं उसे लेकर आउन्गि, आगे तू संभाल लेना.

बिहारी: आने दे साली को, उसे ऐसा फसाउन्गा कि वो मेरे टटटे पकड़ कर रहम की भीख माँगेगी.

उसके बाद बिहारी और बीना की चुदाई का जो सिलसिला शुरू हुआ वो शाम के करीब 4:00 बजे तक चला. इस दौरान बिहारी ने 4 बार बीना के जिस्म को रौंदा और बीना के सारे कस बल ढीले कर दिए. जाते जाते बीना कह गई, मैं आज ही अपना काम शुरू कर देती हूँ, तुम किसी तरह दो दिन बाद इन दोनो को कहीं बाहर भेज देना थोड़ी देर के लिए.

बिहारी: तू उसकी चिंता ना कर, बस भगवान से दुआ कर कि माल असली हो. साला 40 साल हो गये लेकिन कोई कुँवारी चूत नहीं खोली.

बीना: साले चूत नहीं खोली तो क्या, गांडे तो बहुत खोली हैं इन सालों मे.

बिहारी: हां यह बात तो है तुझे मिलाकर करीब 8 गान्डो पर अपनी मुहर लगा चुका हूँ.अब लग रहा है कि जल्द ही इस गिनती मे दो गांडे और जुड़ने वाली है.

बीना: बच्चियों की गान्डो को ध्यान से चोदना, नहीं तो अगली बार थूकने भी नहीं देंगी.

बिहारी: एक बार ग़लती कर चुका हूँ, बार बार थोड़े करूँगा.

रात करीब 8:00 बजे वीरेंदर के सेल पर बीना की कॉल आई. वीरेंदर ने नंबर. देखा तो झट से फोन उठा लिया.

बीना: क्या हुआ रोमीयो, सुबह तुम्हे कॉल किया था, तुमने रिसीव ही नहीं किया.

वीरेंदर: वो मैं तब उस समय ऑफीस मे था, पता ही नहीं लगा.

बीना: क्या??? तुमने ऑफीस शुरू कर दिया? देखो जानू अभी तुम्हें आराम की ज़रूरत है, वैसे भी अभी तुम्हारे लिए आशना है, काम तो होता ही रहेगा. थोड़ा टाइम उसे भी दो ताकि वो तुम्हारे करीब आ सके.

वीरेंदर: उसे ही घुमाने के लिए ले गया था और जाते जाते शोरुम पर थोड़ी देर रुक कर वहाँ के काम का जायज़ा लिया.

बीना: ओके, तो कहाँ तक बात पहुँची.

वीरेंदर:आ जाएगी धीरे धीरे लाइन पर, टाइम तो लगेगा थोड़ा सा.

बीना: जल्दी से मना ले ना उसे राजा, मैं अब तेरे बिना नहीं रह सकती.

वीरेंदर: मेरा हाल भी तेरे जैसा है मगर मुझे नहीं लगता कि वो इतनी जल्दी हां करेगी.

बीना: खैर तुम लगे रहो, मुझे पूरा यकीन है कि वो तुम्हे ना नही करेगी, कोशिश करते रहो, फल ज़रूर मिलेगा.

वीरेंदर जो कि आज आशना के जाने की बात सुनकर टूट गया था, बीना की बातें सुनकर उसे थोड़ा हॉंसला हुआ.

वीरेंदर:मैं कल शाम को बॅंगलॉर जा रहा हूँ कुछ बिज़्नेस डील है, सोच रहा हूँ कि आशना को भी साथ ले जाऊ.

बीना एक दम खुश होते हुए:यह तो बड़ी अच्छी बात है. हो सकता है इसी ट्रिप में वो तुम्हे आक्सेप्ट करले. ऑल दा बेस्ट, लेकिन एक बात याद रखना, जल्दी आ जाना और अपनी सुहागरात अपने घर पर ही आकर मानना, कहीं बॅंगलॉर मे ही हनिमून शुरू ना कर देना.

वीरेंदर: डॉन'त वरी,, तुम्हारी बेटी के साथ जो कुछ भी करूँगा, सबसे पहले "शर्मा निवास" में ही करूँगा.

बीना: अच्छा चल बाइ, टेक केर ऑफ युवरसेल्फ आंड आशना इन जर्नी.

वीरेंदर ने फोन काट दिया. वीरेंदर आशना को इतनी आसानी से अपनी ज़िंदगी से जाने नहीं देना चाहता था. उसने ठान लिया था कि वो भी आशना को बिना बताए बॅंगलॉर चला जाएगा और उसे मनाने की कोशिश करेगा. वो कम से कम एक बार तो आशना को अपने दिल की बात बताना ही चाहता था.

 
उधर बीना को अपने हर प्लान मे कामयाबी मिलने से वो काफ़ी खुश थी. वीरेंदर कुछ दिनो के लिए बॅंगलॉर जा रहा था, जिस से बिहारी का रास्ता सॉफ था. बीना की इतनी मदद करने के लिए वो बिहारी से काफ़ी खुश थी और तोहफे के रूप मे रागिनी को उसके लिए परोसने वाली थी. बीना का इस मे भी स्वार्थ था. वो बिहारी के उपर एहसान करके उसे अपने काबू मे करना चाहती थी ताकि वक़्त आने पर वो बिहारी से वीरेंदर का कत्ल करवा सके. बीना जानती थी कि बिहारी चाहे कितना भी कमीना क्यूँ ना हो लेकिन एक वक़्त ऐसा था कि वो "शर्मा निवास" का एक वफ़ादार कुत्ता था तो उसके लिए वीरेंदर को अपने हाथो से मारना इतना आसान नहीं होगा. रागिनी द्वारा वो बिहारी को इस काम के लिए मनाने वाली थी. बीना जानती थी कि वीरेंदर को अगर यह पता चल गया कि रागिनी बिहारी के साथ उसके घर मे रह रही है तो वीरेंदर और बिहारी के बीच झगड़ा होना निश्चित है, वो इसे झगड़े मे घी का कम करेगी और बिहारी को भड़का कर वीरेंदर का कत्ल करवा देगी. इस से दो फ़ायदे होते एक तो वीरेंदर के कत्ल के इल्ज़ाम मे बिहारी या तो कहीं छुप जाता या पोलीस उसे पकड़ लेती तो दोनो ही सुरतों मे बीना उसकी मदद करती तो बिहारी हमेशा बीना का गुलाम बना रहता. बीना नहीं चाहती थी कि काम हो जाने के बाद बिहारी उस पर हावी रहे.

बीना ने एक नर्स के द्वारा रागिनी को मेसेज भिजवा दिया कि खाना खाने के बाद वो यहीं आ जाए, उसके कॅबिन मे.

उधर आशना को अपने रूम मे आए काफ़ी समय हो चुका था. वीरेंदर के लिए सोच कर उसका बुरा हाल था. वो वीरेंदर को बताना चाहती थी कि वो कुछ दिनों के लिए जा रही है ताकि हमेशा के लिए उसके पास आ सके लेकिन वीरेंदर ने उसे एक बार भी रुकने को नहीं कहा. आशना चाहती थी कि एक बार बस एक बार वीरेंदर उसे रुकने के लिए तो बोले वो हमेशा के लिए उसके पास ही रहेगी उसकी आँखों के सामने. आशना लड़की थी इसलिए पहल वीरेंदर से चाहती थी और वीरेंदर यह सोच रहा था कि आशना अपने कॅरियर को दाव पर लगाकर उसके लिए यहाँ कैसे रुक सकती थी. वो जानता था कि आशना एक बहुत ही महत्वाकान्छि लड़की है वो किसी भी कीमत पर अपनी पड़ाई अधूरी छोड़ कर यहाँ नहीं रुक सकती. फिर वीरेंदर ने अपने आप से हे सवाल किया "आशना यहाँ रुके भी तो किसके लिए, क्या मैने एक बार भी उसको रुकने के लिए बोला, क्या हमारा रिश्ता यहाँ तक पहुँचा है कि मैं उसपे हक़ जता कर रोक लूँ".

वीरेंदर भी सोच सोच कर परेशान था मगर उसका कोई हल नहीं निकल रहा था. वो बार बार अपने आप को दोष दे रहा था कि शायद अगर कल उसने बीना के साथ वो सब ना किया होता और आशना को इसका पता ना लगता तो ऐसे उसे छोड़ कर नहीं जाती. वीरेंदर उसे किसी भी तरह मना लेता मगर वो यह भी जानता था कि किसी भी लड़की के लिए यह बात बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल है. वीरेंदर ने सोचा कि एक बार आशना से बात कर लूँ उसके बाद जो उसका फ़ैसला होगा वो उसे मंज़ूर कर लेगा. यही सोच कर वीरेंदर आशना के रूम की तरफ चल दिया. आशना के रूम के दरवाज़े के पास पहुँच कर उसे नॉक करने ही वाला था तो उसने सोच कर वो आशना के सामने बीना के साथ गुज़ारे लम्हे कैसे कन्फेस कर पाएगा और अगर आशना ने उसे माफ़ नहीं किया तो वो क्या करेगा. यही सोच कर वीरेंदर अपने कमरे मे आया और अपना मोबाइल उठाकर आशना का नंबर. मिला दिया. उसे यह जानकार गहरा आघात पहुँचा कि आशना ने अपना मोबाइल स्विचऑफ कर रखा है. उसे पता था एक आशना समझ चुकी है कि उसने आशना से नंबर. क्यूँ लिया, लेकिन आशना ने मोबाइल ही स्विचऑफ कर दिया. क्या आशना सच मे उस से नफ़रत करने लगी है?? क्या वो अब कभी उसे माफ़ नहीं करेगी?? यह सोचते सोचते उसका मन काफ़ी उदास हो गया.

थोड़ी देर बाद बिहारी ने वीरेंदर का दरवाज़ा नॉक कर के कहा कि आशना बिटिया ने खाना बना दिया है, आ कर खा लीजिए.

वीरेंदर: काका मुझे भूख नहीं है और नींद भी बड़ी आ रही है, आप खा लीजिए.

आशना को जब यह पता लगा कि वीरेंदर खाना नहीं खाएगा तो उसका दिल और उदास हो गया. वो भी बिना खाना खाए उपर आ गई और काका को बोल दिया कि आप खाना खा कर बर्तन समेट लेना.

बिहारी दोनो के इस रवैये से परेशान हो उठा. उसने तो सोचा था कि आज के खाने मे इतनी डोज डालूँगा कि दोनो सेक्स किए बिना रह नहीं पाएँगे लेकिन यहाँ तो सारा काम उल्टा हो गया. उसने झट से अपने कमरे मे जाकर मोबाइल ऑन किया और बीना का नंबर. लगा दिया.

बीना: बोलो राजा, आज भी मन नहीं भरा क्या.

बिहारी: मन तो मेरा कभी नहीं भरता लेकिन लगता है कि उन दोनो का मन एक दूसरे से भर गया है. यह कह कर बिहारी ने बीना को सारी बात बता दी.

बीना: तू भी ना कितनी फिकर करता है अपनी होने वाली रखैल की. अरे आज दोनो घूमने गये थे तो हो सकता है वीरेंदर ने उसे अपने दिल का हाल कहा हो. यह तो तू भी जानता है कि आशना उसकी सग़ी बेहन है तो उसे थोड़ा तो अटपटा लगेगा ही ना. तू टेन्षन मत ले, मेरे पास तेरे लिए एक बहुत अच्छी खबर है.

बिहारी: रागिनी मान गई क्या?

बीना: वो भी मान जाएगी, लेकिन अच्छी खबर यह है कि भाई -बेहन कल दोनो बॅंगलॉर जा रहे हैं 2-3 दिन के लिए. मैं शाम को रागिनी को लेकर आ जाउन्गी, बाकी तू वही करना जैसा बताया गया था.

बिहारी(खुश होते हुए): यह तो बड़ी अच्छी खबर है.

मैं तो बेकार ही इनकी परेशानी ले रहा था, इन भाई-बहनो ने तो हनिमून का प्रोग्राम भी बना लिया. मुझे यकीन है कि बॅंगलॉर मे कुछ ना कुछ तो ज़रूर होगा.

बीना: मुझे भी यही लगता है, चल अब रखती हूँ तेरी चिड़िया को बुलाया है आज अपने कमरे मे. आज रात ही उस से बात करके तेरे लिए तैयार कर लेता हूँ.

बिहारी: ओके, ऑल दा बेस्ट ऑफ लक.

बीना: चल गँवार कहीं का और फोन काट दिया.

उधर आशना और वीरेंदर दोनो ही अपने अपने बेड पर लेटे हुए करवटें बदल रहे थे, नींद दोनो की आँखों से दूर थी. आज भी आशना ने अपने रूम का दरवाज़ा बंद नहीं किया था लेकिन आज उसने अपनी पैंटी नहीं उतारी थी. वो चाहती थी कि जब वीरेंदर उस के रूम मे आए तो वो उस से बात करेगी, उसका मन हल्का करने की कोशिश करेगी. उसे यह सोच कर वीरेंदर पर गुस्सा आ रहा था कि उसने वीरेंदर को अपना नंबर. भी दिया था मगर वो उसे फोन क्यूँ नहीं कर रहा. मानती हूँ कि वो मेरे कमरे मे आकर मुझसे बात करने मे हिचकिचाएगा मगर फोन पर तो बात कर ही सकता है. आशना बार बार अपने सेल को देखे जा रही थी. काश उसने भी दिन मैं वीरेंदर का नो. ले लिया होता तो दिल के हाथून मजबूर होकर वो उसे फोन कर ही देती.ऐसे ही काफ़ी रात बीत गई मगर किसी को नींद नहीं आ रही थी. अजीब बात थी कि दो रातों से जागने वाला बिहारी आज चैन की नींद सो रहा था और आने वाले कल के हसीन सपने देख रहा था और दो दिल इस काली रात मे चैन से सांस भी नहीं ले पा रहे थे.

 


काफ़ी देर करवटें बदलते हहे अचानक आशना को याद आया कि वीरेंदर ने गाड़ी मे कुछ समान रखा था. उसके दिल मे बेचैनी होने लगी कि ऐसा क्या था उसमे जो वीरेंदर ने कहा था कि "अब इसकी ज़रूरत नहीं है" आशना को पता था कि वीरेंदर उस से पहले ही घर मे दाखिल हो गया था तो गाड़ी तो खुली ही होगी. इतनी सर्दी मे और इतनी गहरी रात मे उसे बाहर जाते डर भी लग रहा था लेकिन उसने हिम्मत करके बाहर जाकर देखने की सोची. उसके जॅकेट पहनी और दबे पावं नीचे सीडीयाँ उतरने लगी. हाल मे काफ़ी अंधेरा था, वो अंदाज़ा लगाकर आगे बढ़ने लगी तो बिहारी के कमरे से उसे रोशनी आती दिखाई दी. वो वही ठिठक कर रुक गई. उसे लगा कि बिहारी अभी भी शायद जाग रहा है या शायद आज फिर से शराब पी रहा है. आशना दबे पाँव उसके कमरे के पास पहुँची, कमरे का दरवाज़ा थोड़ा सा खुला था. उसने झाँक कर देखा तो बिहारी अपने बेड पर आँखें मून्दे हुआ दिखाई दिया. आशना ने राहत की सांस ली. उसने सिर अंदर करके देखा तो काका के कमरे की एलसीडी चल रही थी, उसी की रोशनी बाहर हाल मे आ रही थी. आशना ने पहले तो एलसीडी बंद करने की सोची मगर यह सोच कर रहने दी कि शायद सुबह काका को शक़ हो जाए कि उनके रूम मे कोई आया था. आशना ने धीरे से दरवाज़ा फिर से वैसे हे बंद किया और मेन दरवाज़े की तरफ चल दी.

जैसे ही आशना ने दरवाज़ा खोला, ठंडी हवा की एक तेज़ लहर उस से टकरा गई. एक बार के लिए तो आशना का शरीर वहीं जम गया. उसने झट से बाहर आकर दरवाज़ा बंद किया और अपने हाथ जॅकेट मे डाल कर जॅकेट की कॅप पहन ली. काफ़ी डरते हुए वो गाड़ी तक पहुँची और डोर का हॅंडल पकड़ कर उसे खींचा. क्लिक की आवाज़ के साथ गाड़ी का दरवाज़ा खुल गया. आशना फ्रंट सीट पर घुटनों के बल बैठ गई और गाड़ी के अंदर की टॉप लाइट ऑन कर दी और पीछे रखे समान को देखने लगी. समान देखते देखते उसकी आँखें फटी की फटी रह गई. आशना को याद आया कि जिस जिस चीज़ को उसने वीरेंदर के शोरुम मे हाथ लगा कर देखा और सराहा था वो सब वहाँ मौजूद थी. आशना की आँखों मे आँसू आ गये.

आशना(मन मे सोचते हुए): इतना प्यार करते हैं आप मुझे वीरेंदर कि हर वो चीज़ जिसे मैने सिर्फ़ हाथ लगाया आपने मेरे कदमों मे रख दी. ऐसा मत करो वीरेंदर, शायद मेरी असलियत जानने के बाद आप मुझसे उतनी ही नफ़रत करोगे. मैं सब कुछ बर्दाश्त कर सकती हूँ पर आपकी आँखों मे मेरे लिए नफ़रत नहीं देख पाउन्गी. वीरेंदर अगर आप मेरे भाई ना होते तो मैं आपको इतना प्यार देती कि आप के सब गम भुला देती. आप मुझसे प्यार करते हैं तो मैं भी तो आप से प्यार करने लगी हूँ यह जानते हुए भी कि आप मेरे कॉन हैं. आइ लव यू वीरेंदर, आइ लव यू वेरी मच. आशना काफ़ी एमोशनल हो गई थी. उसका दिल किया कि अभी वीरेंदर के कमरे मे जाकर उस से लिपट जाए और उस से अपने दिल का हाल बयान कर दे. फिर उसने डिसाइड किया कि यह सारा समान अपने रूम मे रखकर वो सुबह वीरेंदर को अपने रूम मे बुलाएगी और उसकी मोहब्बत को स्वीकार करेगी. तीन फेरों मे आशना ने सारा समान अपने कमरे मे एक टेबल पर रख दिया.

फिर उसने उस समान से वो मोबाइल उठाया जो वीरेंदर उसके लिए लाया था. उसने अपने पुराने मोबाइल से सिम निकाल कर नये मोबाइल मे डाली और मुस्कुराने लगी. वो मन मे सोचने लगी "जनाब ने मेरे लिए सर्प्राइज़ रखा था, सुबह उनके रूम मे जाकर उनसे उनका नंबर. लूँगी और जब उनके सामने इस मोबाइल में फीड करूँगी वो खुद ही सर्प्राइज़ हो जाएँगे". आशना के सीने से कुछ बोझ तो हल्का हो ही गया था और रज़ाई के गरम एहसास ने उसे सपनों की दुनिया मे धकेल दिया.

वहीं रागिनी खाना खा कर और पेशेंट्स को दवाई वगेरह देकर जब बीना के कॅबिन मे आई तो बीना अपने टेबल पर बैठी किसी फाइल को पढ़ रही थी.

बीना:आओ रागिनी, मैं तुम्हारा हे वेट कर रही थी, उसने फाइल हो एक साइड रख के कहा.

रागिनी: जी मॅम बोलिए.

बीना:तुम फ्री हो ना अभी? मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है.

रागिनी: जी मॅम मैने सभी पेशेंट्स को स्टडी कर लिया है और उन्हें दवाइयाँ भी दे दी हैं.

बीना: गुड, तुम्हारे रहते मुझे कोई चिंता नहीं.

रागिनी: ऐसा कह कर आप मुझे शर्मिंदा कर रही हैं मॅम, अगर आप उस दिन मेरी हेल्प ना करती तो आज मैं शायद ज़िंदा भी ना होती.

बीना: अब कभी दोबारा मरने की बात भी मत करना, तुम मेरी बेटी जैसी हो. मैने तुम पर कोई एहसान नहीं किया बस तुम्हे काम दिया है जिस से तुम आत्म-निर्भर बन सको.

रागिनी खामोश रही.

बीना: रागिनी एक बात पूछूँ बुरा तो नहीं मनोगी?

रागिनी: पूछिए ना, मुझे आपकी किसी भी बात का कभी बुरा नहीं लगेगा.

बीना ने अपने चेहरे पर गंभीरता लाते हुए पूछा: रागिनी देखो मेरी बात का बुरा मत मानना मगर तुम एक अच्छे घर की लड़की लगती हो तो फिर यह सब क्यूँ किया.

रागिनी जानती थी कि कभी ना कभी उस से यह सवाल ज़रूर पूछा जाएगा, वो इस के लिए तैयार थी. आख़िर कोई लड़की जब अपने घर से भागने का सोचती है तो वो आगे होने वाले सारे ख़तरों का सोच कर ही निकलती है.

रागिनी: मॅम, मैने यह फ़ैसला काफ़ी सोच समझ कर लिया था. मैं और जावेद एक दूसरे से प्यार करते थे मगर मेरे माँ-बाप कभी हमारी शादी नहीं करवाते. मैं एक हिंदू लड़की और वो एक मुस्लिम. मॅम हम जे&के मे रहकर शादी नहीं कर सकते थे, इसलिए हमने भाग कर शादी करने की सोची मगर मुझे क्या पता था कि जावेद भी मुझे धोखा दे जाएगा.

बीना बड़े ध्यान से उसे सुन रही थी.

बीना: तो इसका मतलब तुम जे&के से बिलॉंग करती हो.

रागिनी: जी मॅम.

बीना: तभी तुम इतनी सुन्दर हो. मैने सुना था कि जे&के की लड़कियाँ काफ़ी सुंदर होती है, आज देख भी लिया. बीना के ऐसा कहने से रागिनी शरमा जाती है.

बीना: अच्छा यह बताओ कि क्या तुम्हारे घर वालों को पता है कि तुम जावेद के साथ भागी हो.

 


रागिनी: शायद अब तक पता लग गया होगा. मेरे भाई ने एक दिन हमे घूमते हुए देख लिया था और उसने रास्ते मे ही जावेद की काफ़ी पिटाई भी की थी. घर लाकर मुझे भी काफ़ी मारा गया और मुझे एक कमरे मे बंद करके यह फ़ैसला सुनाया गया कि आज से मेरा बाहर निकलना बंद.मेरे पापा और भाई कट्टर राजपूत हैं, वो किसी भी कीमत पर हमारा मिलना बर्दाश्त नहीं कर सकते थे. उन्होने मेरी शादी करने का भी फ़ैसला कर लिया था लेकिन मैं उस वक़्त 18 साल की नहीं हुई थी तो उन्होने मेरे 18 साल पूरे होने का वेट किया. उस घटना के दो महीने बाद जब मैं 18 की हुई तो उन्होने मेरा रिश्ता एक राजपूताना घर मे कर दिया. अगर मैं वहाँ से भागी ना होती तो आज तक मेरी शादी हो चुकी होती.

मगर मैने तो जावेद को ही अपना सब कुछ मान लिया था. एक रात जब सब घरवाले कहीं शादी पर गये थे तो जावेद दीवार फाँद कर हमारे घर मे आ गया. उसने मुझे बंद कमरे से बाहर निकाला और बोला कि मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता, मैं भी इतने दिनों मे उस से मिले बिना पागल हो गई थी. मैने घर से जेवरात (जो उन्होने मेरी शादी के लिए बनवा रखे थे) और कैफ़ सारे पैसे लिए और जावेद के साथ घर से भाग गई. वहाँ से हम सीधा बस स्टॅंड से बस पकड़ कर देल्ही आ गये. हम जानते थे कि अगर हम जे&के मे रहेंगे तो कभी ना कभी पकड़े जाएँगे. वहाँ से वो मुझे रेलवे स्टेशन के पास एक होटेल मे छोड़ गया और मेरा सारा समान लेकर यह कह कर चला गया कि वो टिकेट्स अरेंज करने के लिए जा रहा है. शाम तक हम यहाँ से निकल कर भोपाल चले जाएँगे.उसने बताया कि भोपाल मे उसका एक दोस्त रहता है कुछ दिन हम वहीं रुकेंगे.उसने कहा कि मैं अच्छी तरह से नहा लूँ और अपनी सफाई वागेहरा कर लूँ वो कुछ ही देर मे आएगा और इसी होटेल मे हम अपनी सुहागरात मनाएँगे और फिर भोपाल जाकर हम शादी कर लेंगे.

इतना कह कर रागिनी के गाल सुर्ख लाल हो गये और जैसे ही बीना ने उसे देखा रागिनी ने नज़रें झुका ली.

बीना: तो इसका मतलब कि तुम तब तक कुँवारी......, मेरा मतलब कि उसने कभी तुम्हारे साथ..........

इस से पहले कि बीना अपना सेंटेन्स पूरा करती, रागिनी बोल पड़ी: जी मॅम तब तक मैने उसे कुछ भी नहीं करने दिया था. हालाँकि हमारा अफेर पिछले दो साल से चल रहा था, उसने काफ़ी बार मुझे टच करने की कोशिश की मगर अपने भाई और पापा के डर से मैं हमेशा उसे रोक देती. मैं उसे हर बार यही कहती कि शादी के बाद तो मैं हमेशा के लिए तुम्हारी हो ही जाउन्गी और वो हर बार मुझे कहता कि हमारी शादी हो कर रहेगी. इतना कह कर रागिनी चुप हो गई.

बीना: लेकिन तुम उसके चुंगल मे फसी कैसे, तब तो तुम काफ़ी छोटी थी.

रागिनी: वो हमारे घर के ड्राइवर का बेटा था, कभी कभी अपने पापा के साथ हमारे घर आ जाता था. भैया की शादी के दौरान वो हमारे घर मे ही रुका और इसी दौरान हमारी नज़दीकियाँ बढ़ी.

बीना: ह्म्म्म्म मम, छोटी उम्र की अट्रॅक्षन.

रागिनी चुप रही.

बीना: तो फिर वो उस दिन वापिस नहीं आया क्या?

रागिनी: उसके जाने के बाद मैं नहाने चली गई और उसके कहे अनुसार अपने आप को अच्छी तरह सॉफ किया. उस दिन पहली बार मैने अपने बदन को हेर रिमूवर क्रीम से सॉफ किया और उसके बाद के रेशमी एहसास से रोमांचित होने लगी. काफ़ी देर तक मैं कमरा सजाती रही और उसके बाद खुद भी तैयार हो गई. दोपहर को करीब 2:00 बजे मेरे मोबाइल पर उसका फोन आया कि उसे शायद थोड़ा टाइम और लग जाएगा, उसने कहा कि तुम खाना खा लो और अगर मैं नहीं आ पाया तो अपने एक दोस्त को भेजूँगा जो तुम्हें लेकर रेलवे स्टेशन आ जाएगा. अपनी सुहागरात हम भोपाल में जाकर शादी के बाद ही मनाएँगे. उस वक़्त उसकी आवाज़ कुछ कुछ बहक रही थी, ऐसा लग रहा था कि वो नशे मे है लेकिन मैने इस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया.

 


मैं सुबह से ही हमारे पहले मिलन को लेकर रोमांचित थी तो भूख तो मुझे थी ही नहीं. मैने खाना नहीं खाया और बिस्तर पर लेटे लेटे ही सो गई. शाम को करीब 5:00 बजे मेरी नींद खुली जब कोई डोर नॉक कर रहा था. मैं खुशी से चहक उठी कि शायद जावेद आ गया है लेकिन दरवाज़ा खोलकर देखा तो जावेद नहीं कोई और था. कोई 40-45 साल का एक आदमी सूट बूट मैं दरवाज़े पर खड़ा था. मेरी तरफ देख कर और फिर कमरे की सजावट देख कर बोला: लगता है जावेद भाई ने आज बहुत कुछ मिस कर दिया है. मैने घबरा कर उसकी ओर देखा तो वो बोला: अरे परेशान मत होइए भाभी जी मैं जावेद का दोस्त हूँ, उसी ने मुझे आपको लेने के लिए भेजा है. मैने उस से पूछा कि जावेद कहाँ है तो उसने कहा कि वो मेरे घर पर है, मैने ही उसे ज़िद करके वहाँ रोक लिया और कहा कि अपनी होने वाली भाभी को मैं खुद लेकर आउन्गा. उस आदमी के बार बार मुझे भाभी कहने से शरम आ रही थी. उम्र के हिसाब से वो मेरे पापा के बराबर था जिस से मैं काफ़ी अनकंफर्टबल फील कर रही थी.

बीना: ऐसा होता है जब एक लड़की की शादी हो जाती है तो नये रिश्तों मे अड्जस्ट होने मे उसे शुरू शुरू मे थोड़ा अजीब लगता है.

बीना: तो फिर तुम चली गई.

रागिनी: जी हां, मैने जो लाल जोड़ा पहन रखा था वो बाथरूम मे जाकर चेंज किया और वही कपड़े पहन लिए जो घर से भागते वक़्त पहने थे.

आदमी: भाभी जी चेंज क्यूँ किया, ऐसे ही चल पड़ती आप काफ़ी अच्छी लग रही थी. मैने कहा कि ट्रेन के सफ़र मे यह ड्रेस काफ़ी अनकंफर्टबल हो जाता.

आदमी: हां वो तो है ही. मैने अपना बॅग उठाया और उस आदमी को चलने के लिए बोला. काउंटर पर जाकर उस ने पेमेंट की और हम बाहर आ गये.

बाहर एक बड़ी सी गाड़ी हमारा वेट कर रही थी. मैने मन मे सोचा कि जावेद तो बड़ी पहुँची हुई चीज़ निकला, इतने मालदार लोगों से दोस्ती है उसकी तो. थोड़ी देर के बाद हम एक आलीशान बंगले के बाहर जाकर गाड़ी से उतर गये.

मैने उस से पूछा कि जावेद कहाँ है तो उस ने कहा कि अंदर तो चलो वो वहीं है. मैं घर के अंदर आ गई. अंदर आते ही मेरी आँखें चौंधिया गई. कोठी देखने मे जितनी बाहर से सुंदर थी, अंदर से तो बिल्कुल स्वर्ग थी.

मैने हैरान होकर पूछा: यह कोठी आपकी है??

आदमी: कोठी कहाँ भाबी जी, यह तो छोटा सा मकान है, ऐसे ही कई मकान हैं मेरे इस शहर और यहाँ से बाहर भी.

मैने पूछा कि आपके बीवी बच्चे नहीं हैं क्या घर पर?

आदमी: बीवी तो कब की छोड़ कर चली गई भगवान को और बच्चा पैदा करने लायक शायद वो थी ही नहीं. शादी के 15 साल तक भी जब वो माँ ना बन सकी तो यह गम उसे भी ले गया. इतना कह कर वो चुप हो गया.

मैने पूछा जावेद दिखाई नहीं दे रहा.

आदमी: यहीं तो छोड़ कर गया था, पता नहीं कहाँ चला गया. अभी उसे फोन करता हूँ. उसने नंबर. डाइयल करके फोन कान से लगाया तो बोला "यह लो तुम्हारे जावेद का तो फोन ही स्विचऑफ हो गया है, शायद बॅटरी डेड हो गई होगी."तुम चिंता ना करो अभी आ जाएगा.

आदमी: तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए चाइ/कॉफी का इंतज़ाम करता हूँ.

मैने कहा कि तकलीफ़ की कोई ज़रूरत नहीं है.

आदमी: अरे इस मे तकलीफ़ कैसी.

तो मैने बोला: आप मुझे किचन दिखा दीजिए, मैं खुद ही बना देती हूँ अपने लिए भी और आपके लिए भी. मैं उसके साथ किचन मे आ गई और बोली: आप सारा काम खुद ही करते हैं तो शादी क्यूँ नहीं कर लेते दोबारा.

आदमी: नहीं आज नौकर छुट्टी पर है और रही बात बीवी की तो उसकी कमी तो पूरी कर ही लेता हूँ. उसकी बात सुनकर मेरे दिल की धड़कन एक दम तेज हो गई. मैने चाइ बनाई और वो वहीं खड़ा रहा. उसके वहाँ खड़ा रहने से मैं काफ़ी अनकंफर्टबल फील कर रही थी. मैने झट से चाइ बनाकर एक कप उसे दिया और एक कप खुद लेकर सिट्टिंग हॉल मे आ गई. चाइ पीते हुए मैं उसकी नज़र सॉफ अपने बदन पर महसूस कर रही थी.

मैं जल्द से जल्द यहाँ से निकलना चाहती थी. मैने बोला आप एक काम करो आप मुझे रेलवे स्टेशन ही छोड़ दो शायद जावेद वहीं चला गया होगा.

आदमी: वो वहाँ भी नहीं मिला तो? मैने कहा कि जब हमे घर पर नहीं देखेगा तो वो भी वहीं आ जाएगा.

आदमी: लेकिन अब तक तो ट्रेन निकल भी गई होगी.

मैं हैरानी से उसे देखती रही.

आदमी: मैं खुद उसे ट्रेन मे चढ़ाकर आपको लेने आया था.

मैं झट से वहाँ से खड़ी हो गई और बोली तो अपने मुझे पहले क्यूँ नही बताया.

आदमी: चुप चाप बैठी रह, ज़्यादा आवाज़ की तो ज़ुबान खींच लूँगा. उसके चहरे के बदलते तेवर से मैं कांप उठी और रोने लगी.

आदमी: रो ले जितना रोना है साली. तेरा आशिक़ तुझे 2 लाख मे बेच कर यहाँ से चला गया है और तेरा सारा समान भी ले गया है. उसने मुझ से वादा किया है कि तू एकदम कोरा माल है, और अगर साला झूठ हुआ तो भोपला मे जाकर उसकी गान्ड मार लूँगा.

इतना सुनते ही मेरे होश उड़ गये. जिस लड़के के लिए मैने अपना घर छोड़ा वो मुझे एक आदमी को बेच कर मेरा सब कुछ लेके निकल गया. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था मैं क्या करूँ.

मैने रोते हुए उस आदमी से अपनी इज़्ज़त की भीख माँगी "देखिए मैं आपकी बेटी जैसी हूँ, प्लीज़ मुझे छोड़ दीजिए मैं किसी को मूह दिखाने लायक नहीं रहूंगी".

वो आदमी ज़ोर से हंसा और बोला: चिंता ना कर आज से मैं तुझे मेरी बीवी बना कर रखूँगा. बेटी जैसी है तो क्या हुआ, मेरे बच्चे पैदा करके मुझे बाप बनने का सुख दे दे, यकीन मान मैं तुझे रानी की तरह रखूँगा. उसकी बातें सुनकर मुझे चक्कर आने लगे. वो फिर बोला: अगर प्यार से मान जाएगी तो ठीक वरना तेरे दोनो छेदो को उधेड़ कर तुझे किसी कोठे पर बिठा दूँगा. मैं रोए जा रही थी मगर वो कमीना इंसान हँसता ही जा रहा था. वो मेरी तरफ झपटा तो मैं खिसक कर उस से दूर हट गई.

 


आदमी: वाह, तीखी मिर्च है तू तो, आज तेरी चूत का खून अपने इस लोड्‍े को पिलाकर तुझे अपनी बना लूँगा. तू चाहे जो भी कर, गिडगिडा, चाहे रो, अपने 2 लाख तो मैं तुझ से वसूल करके ही रहूँगा.

उस वक्त मुझे अपने आप से भी घिंन आ रही थी कि कैसे मैं उस इंसान के झाँसे मे आ गई जिसने सिर्फ़ पैसो से प्यार किया और जब उसे वो सब मिल गया तो वो मेरे जिस्म को बेचने से भी नहीं चुका. उस आदमी ने एक बार फिर मुझ पर झपटने की कोशिश की मगर मेरे हाथ मे कोई भारी सी चीज़ आ गई और मैने ज़ोर से उसके सिर पर दे मारी. वो आदमी एक घुटि हुई चीख के साथ फर्श पर लेट गया. मैं फटी आँखों से उसे देखती रही, मुझे समझ नही आ रहा था कि यह क्या हो गया.

मैं झट से वहाँ से भागी लेकिन फिर तेज़ी से चाइ के कप उठाकर किचन मे सारे बर्तन सॉफ करके फिर से वहीं रख दिए जहाँ से उठाए थे. बाहर आकर देखा कि वो आदमी अभी भी बेसूध होकर पड़ा था लेकिन उसकी साँसें चल रही थी. मैने देखा कि मैने उसके सिर पर एक गुल्दान मारा था. उस गुल्दान को कपड़े से साफ करके मैने उसे भी अपनी जगह रख दिया. अपने सारा समान उठाकर मैं वहाँ से चोरी से निकल गई. थोड़ी दूर आते ही मैं एक ऑटो मे बैठी और रेलवे स्टेशन पर आ गई. मेरे पास केवल 500 रुपे थे, मैने ऑटो का किराया दिया और रिज़र्वेशन काउंटर की तरफ चल दी.

मैने सोच लिया था कि अब घर तो जा नही सकती तो भोपाल जाकर जावेद को ढूंढूँगी और उस से बदला लूँगी. भोपाल के लिए अगली ट्रेन 3 घंटे बाद थी लेकिन ऑटो का किराया देने के बाद मेरे पास सिर्फ़ 325 रुपये बचे थे जबकि भोपाल के लिए ट्रेन की टिकेट 405 रुपये की थी. मेरे पास आत्महत्या के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचा था. मैं काफ़ी परेशान हो कर रेलवे स्टेशन के एक कोने मे खड़ी होकर आत्महत्या का सोच रही थी जब आपकी नज़र मुझ पर पड़ी. अगर आप उस वक्त मुझे ना मिलती तो आज मैं ज़िंदा ना होती.

बीना ने उसकी कहानी ख़तम होते ही झूठा रोने का नाटक किया और रागिनी को अपने सीने से चिपका कर अपने गले लगा लिया.

बीना: मेरे होते हुए कभी मरने का सोचना भी मत.

रागिनी बीना से लिपटकर और ज़ोर से रो पड़ी.

बीना: अब तुमने क्या सोचा है? क्या तुम वापिस अपने घर जाना चाहती हो?

रागिनी ने रोते रोते ही ना मे अपना सिर हिलाया और बोली: मैं अब कभी भी उन्हें अपना मूह नहीं दिखा सकती. अगर मैं वहाँ चली भी जाऊ तो वो लोग मुझे मार ही देंगे, मैं जीना चाहती हूँ और भोपाल जाकर कम से कम एक बार जावेद से मिलकर उसके मूह पर थूकना चाहती हूँ.

बीना: मेरे होते हुए कोई भी तुम्हे हाथ भी नहीं लगा सकता मगर यहाँ तुम कब तक दिन रात काम करती रहोगी. जब तक मैं हूँ तब तक तो ठीक है लेकिन मेरे बाद तुम क्या करोगी.

रागिनी ने बीना के सीने से अपना सिर उठा कर बीना की ओर देखा और बोली: आप कहाँ जा रही हैं क्या?.

बीना: अभय शायद ये क्लिनिक बेच कर अपनी मेडिकल प्राक्टिज़ के लिए अब्रॉड शिफ्ट होना चाहते हैं, उसी सिलसिले मे वो डील करने के लिए गये हुए हैं. अब अभय जाएँगे तो मुझे भी उनके साथ जाना पड़ेगा. अगर हमने यह क्लिनिक बेच दिया तो फिर तुम्हारा क्या होगा.

रागिनी: आप ही मुझे बताइए मैं क्या करूँ, मैने तो 12थ के पपर्स भी मिस कर दिए हैं इस चक्कर मे.

बीना: खैर तुम दो चाइ बना कर ले आओ मैं कुछ सोचती हूँ.

इतना सुनकर रागिनी बीना के रूम के साथ बने किचन मे घुस गई और चाइ बनाने लगी. एक कप बीना को दिया और एक कप खुद लेकर दोनो चाइ पीने लगी. बीना गहरी सोच मे होने का नाटक करने लगी.

काफ़ी सोचने के बाद बीना बोली: देखो रागिनी, जहाँ तक मुझे लगता है कि तुम्हारे पास घर जाने के सिवा और कोई रास्ता नहीं है क्यूंकी देल्ही जैसे बड़े शहर मे बिना किसी क्वालिफिकेशन के ज़िंदगी गुज़ारना बहुत मुश्किल काम है और अकेली लड़की के लिए तो यह शहर सेफ भी नहीं है. मान लो कि मैं तुम्हारी सिफारिश करके अपने किसी डॉक्टर दोस्त के पास तुम्हें काम दिला भी दिया तो क्या गॅरेंटी है कि वो मेरे जाने के बाद तुम्हे निकाल ना दें या तुम्हे कोई 4थ क्लास काम ना दे दें.

रागिनी: मैं छोटा मोटा काम करने को भी तैयार हूँ.

बीना: अरे छोटा मोटा काम क्यूँ करोगी तुम? मैने तुम्हे अपनी बेटी बोला है तो मेरा फ़र्ज़ है कि तुम्हे कहीं अच्छा काम दिलाऊ जिस से तुम अपनी आने वाली ज़िंदगी अच्छे से जी सको.

बीना: अरे हां, एक आइडिया है मेरे पास, क्यूँ ना मैं तुम्हारी शादी ही करवा दूं जिस से तुम्हें काम करने की ज़रूरत ही ना पड़े. रहने के लिए घर भी मिल जाएगा और सेक्यूरिटी के लिए हज़्बेंड भी.

रागिनी कुछ ना बोली और शरमा कर अपनी आँखें झुका ली.

बीना: लेकिन उस मे भी प्राब्लम है कि आजकेल के लड़के पढ़ी लिखी और जॉब करने वाली लड़कियाँ ढूँढते है तो ऐसा लड़का कहाँ मिलेगा जो तुम्हे बिना किसी शर्त के अपना ले. मुझे कोई ऐसा लड़का ढूंडना पड़ेगा जिसे जॉब वाली लड़की की ज़रूरत ना हो बस घर संभालने के लिए बीवी चाहिए हो.

बीना: ओह, मैने तो तुमसे पूछा ही नहीं, क्या तुम शादी करना चाहोगी?

रागिनी के गाल सुर्ख लाल हो गये इतना सुनते ही.

बीना: अरे यार शरमाने से काम थोड़े ही होगा. अच्छा तुम मुझे अपना दोस्त समझो और बताओ कि तुम्हे कैसा लड़का चाहिए.

रागिन कुछ ना बोली बस शरमाती रही.

बीना: इतना शरमाओगी तो शादी के बाद क्या करोगी?

बीना के इतना कहने से ही रागिनी के दिल की धड़कने तेज़ हो गई.

बीना: लगता है मुझे ही ढूंडना पड़ेगा अपने हिसाब से कोई लड़का तुम तो बताने से रही कि तुम्हे कैसा लड़का चाहिए.

रागिनी (शरमाते हुए): आप खुद ही ढूंड लीजिए, मुझे क्या पता.

 


बीना: देखो रागिनी बात ऐसी है कि मुझे तुम्हारे लिए उस लड़के की तलाश करनी है जो काफ़ी अमीर परिवार से हो हो या जिसका बिज़्नेस वेल सेटल्ड हो क्यूंकी उस लड़के को यह फरक नहीं पड़ेगा कि तुम जॉब करो या ना करो और ना ही उसके लिए तुम्हारी क्वालिफिकेशन मायने रहेगी. उसे बस घर संभालने के लिए बीवी चाहिए होगी.

रागिनी बड़े ध्यान से बीना की बात सुन और समझ रही थी.

बीना: लेकिन, प्राब्लम यह है कि एक आदमी को वेल सेटल्ड होने मैं काफ़ी टाइम लग जाता है और इसी चक्कर मे उसकी शादी की उम्र भी निकल जाती है. तुम समझ तो रही हो ना कि मैं क्या कहना चाहती हूँ?

रागिनी ने गर्दन झुका कर हां मे जवाब दिया.

बीना: तो मान लो कि तुम्हारी शादी अगर किसी ऐसे लड़के से करवा दूं जो तुमसे उम्र मे 10-12 साल बड़ा होगा तो तुम्हे कोई प्राब्लम तो नहीं.

रागिनी को लगा कि बीना जो भी करेगी उसके भले के लिए ही करेगी और वैसे भी और कोई तो था नहीं जिस पर वो भरोसा कर सके तो उसने कहा: आप को जैसा ठीक लगे.

बीना( मुस्कुराते हुए): यह हुई ना बात. वैसे इस मैं फ़ायदा तुम्हारा ही है.

रागिनी ने सवालिया नज़रो से बीना की ओर देखा.

बीना: एक तो तुम उस घर मे रानी बनकर रहोगी और दूसरा यह कि मर्द उम्र मे जितना बड़ा होता है उसे उतने ही एक्षपरिएन्स भी होता है. मान लो कि अगर तुम्हारी शादी तुमसे 10-15 साल बड़े आदमी से होती है तो तुम्हे काफ़ी खुश रखेगा वो. बीना के इस तरह कहने से रागिनी शरम से दोहरी हो गई.

बीना: हाए रे मेरी बन्नो, अब शरमाना छोड़ और शादी की तैयारियाँ शुरू कर दे.

रागिनी: इतनी जल्दी, मेरा मतलब अभी तो आपने लड़का भी ढूंडना है.

बीना: वो तो मैने तुमसे बात करते करते ढूंड भी लिया.

रागिनी उसे ऐसी नज़रो से देखती है जैसे उस से पूछ रही हो कि कॉन है.

बीना: तुम्हे याद है कुछ दिन पहले यहाँ वीरेंदर शर्मा नाम का एक पेशेंट अड्मिट था.

रागिनी( कुछ देर सोचते हुए): हाँ, जिन्हे माइनर अटॅक आया था?

बीना: हां वोही, वीरेंदर का एक सौतेला भाई है विराट. (बिहारी का नाम जो बीना ने उसे दिया इस खेल के लिए) अब दोनो भाइयों के नाम पर कितने करोड़ों की प्रॉपर्टरी है यह तो उन्हे भी नहीं पता लेकिन सुना है कि कम से कम दोनो के हिस्से मे 100-100 करोड़ तो आएँगे ही. अभी सारी प्रॉपर्टी वीरेंदर ने अपने नाम पर कर रखी है, उसकी शर्त है कि जब तक विराट शादी ना कर ले वो उसके नाम पर प्रॉपर्टी नहीं करेगा.

रागिनी: ऐसा क्यूँ???

बीना: सुना है कि अपनी जवानी मे विराट काफ़ी अयाश किस्म का आदमी था, उसने अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं की.दिन भर बस आवारगार्दी करता और रात को नशे की हालत मे घर आ जाता.इसी लिए उसके पिता जी ने सारी प्रॉपर्टी वीरेंदर के नाम कर दी के जब कभी विराट अपनी हर्कतो से बाज़ आएगा तो आधी प्रॉपर्टी विराट के नाम कर दी जाएगी. इस से विराट की हैसियत अपने ही घर मे नौकरो जैसी हो गई, दोनो भाइयो मे प्रॉपर्टी को लेकर झगड़े होने लगे, विराट को बात बात पर वीरेंदर के आगे हाथ फैलाना पड़ता और एक दिन एक हादसे मे उनके पिताजी गुज़र गये. अपने पिताजी के गुज़र जाने के बाद विराट एक दम बदल गया. वो काफ़ी सुधर गया लेकिन वीरेंदर को लालच ने घेर लिया. उसे पता था कि विराट जैसे इंसान को कोई भी अपनी लड़की नहीं देगा इसलिए उसने विराट के सामने ऐसी शर्त रखी.

रागिनी: लेकिन विराट जी वीरेंदर जी के सौतेले भाई कैसे हैं??

बीना: विराट की माँ वीरेंदर के पिताजी के शोरुम मे काम करती थी और वहीं दोनो मे प्यार हुआ और जब विराट पैदा हुआ तो उस वक्त तक वीरेंदर के पिताजी की भी शादी नहीं हुई थी.

विराट एक नाजायज़ औलाद थी तो वीरेंदर ने अपने बाप की सारी दौलत अपने नाम करवा ली और यह शर्त रख दी कि अगर विराट शादी कर लेगा तो वो यह जायदाद उसके बच्चे के नाम कर देगा.

बीना: विराट तब से वीरेंदर के ही घर मे रह रहा है. वीरेंदर उस के साथ नौकरो वाला बर्ताब करता है, घर के सारे काम विराट को ही करने पड़ते हैं. जब से विराट उस घर मे आया है, वीरेंदर ने सारे नौकरो को घर से निकाल दिया है. बीना की बातें सुनकर रागिनी को वीरेंदर से नफ़रत होने लगी.कैसे एक भाई अपने दूसरे भाई से ऐसा कर सकता है.

बीना: अब विराट एक बहुत ही सुलझा हुआ इंसान बन गया है मगर उम्र मे शायद वो तुमसे 10-15 साल बड़ा होगा.

रागिनी: मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. आपने अगर विराट जी को मेरे लिए चुना है तो कुछ सोच कर ही चुना होगा.

बीना: गॉड ब्लेस्स यू माइ चाइल्ड.

 


बीना: कल मैं उनसे बात कर लूँगी तो हो सकता है कि कल शाम को हमे उनके घर चलना पड़े. मैं तुम्हे बता दूँगी तुम तैयार रहना.

रागिनी: हमें उनके घर जाना पड़ेगा?

बीना: अरे बड़े लोग हैं, वो थोड़े ही आएँगे और उनके माँ-बाप तो इस दुनिया मे हैं ही नहीं जो वो तुम्हें देखने के लिए आएँ.

रागिनी: जी.

रागिनी के जाने के बाद बीना ने चैन की सांस ली और मन में बोली: साली बिहारी की तो किस्मत खुल गई, बिल्कुल अनच्छुई कली मिल गई साले को. अब वो मेरी मुट्ठी मे होगा.

अगली सुबह आशना जब जागी तो टेबल पर रखे समान को देख कर उसे वीरेंदर का ख़याल आया और उसके मूह से अचानक ही निकला "लव यू वीरेंदर". उसने घड़ी की तरफ देखा और चौंक के उठ कर बैठ गई. नौ बजने वाले थे, रात को देर से नींद आने के कारण वो सुबह उठ नही पाई. जल्दी से सुबह के कार्यो से निपट कर और तैयार होकर उसने अपना नया मोबाइल उठाया और वीरेंदर के रूम की तरफ चल दी. आशना ने आज एक वाइट कलर का सिल्की वाइट टॉप और नीचे डार्क ब्लू कलर की लोंग स्कर्ट पहनी थी. उसकी वाइट शर्ट के अंदर पहनी उसकी लाइट क्रीम कलर की ब्रा दूर से ही देखी जा सकती थी. आशना ने वीरेंदर के कमरे का दरवाज़ा खोला तो वहाँ किसी को ना पाकर उसे बड़ी हैरानी हुई. उसने वीरेंदर को आवाज़ लगाई कि शायद वीरेंदर बाथरूम मे हो. आशना को जब कोई जवाब ना मिला तो उसने बाथरूम का दरवाज़ा खोलकर देखा लेकिन वहाँ भी कोई नहीं था.

आशना(मन मे सोचते हुए): आज जनाब बड़ी जल्दी उठ गये और तैयार होकर नीचे भी चले गये. आशना नीचे आई तो बिहारी काका को आवाज़ लगाई. बिहारी अपने कमरे से बाहर निकला.

आशना: काका वीरेंदर कहाँ है, कहीं दिखाई नही दे रहा.

बिहारी आशना के उभारों को टाइट शर्ट मे देख कर एक दम बौखला गया, उसे पता ही नहीं चला कि आशना उस से क्या पूछ रही है. शर्ट के अंदर उसकी ब्रा दूर से नुमाया हो रही थी जिस से उसके गोल वक्षो का कटाव सॉफ दिख रहा था.

आशना: क्या हुआ काका, अभी भी तबीयत ठीक नहीं हुई क्या??

बिहारी (हड़बड़ाते हुए): नहीं बिटिया, अब ठीक हूँ बस थोड़ी थकावट महसूस हो रही है.

आशना: वीरेंदर कहाँ गये सुबह सुबह.

बिहारी: वो तो सुबह सवेरे ही निकल गये. बोल कर गये है कि आशना जागे तो उसे यह टिकेट दे देना. बिहारी ने आशना को टिकेट्स दे दी.

आशना का दिल एकदम तेज़ी से चलने लगा. यह वीरेंदर को क्या हो गया है. इतनी सुबह सुबह कहाँ चले गये.

आशना: अच्छा काका तुम काम करो और हां मेरे लिए नाश्ता मत बनाना, मैं शोरुम जा रही हूँ, शायद वीरेंदर वहीं गये होंगे हम दोनो वहीं नाश्ता कर लेंगे.

बिहारी: ठीक है बिटिया. आशना टॅक्सी लेकर शोरुम मे पहुँची तो वहाँ भी वीरेंदर नहीं पहुँचा था. आशना को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे. वो वहीं उसके कॅबिन मे आकर बैठ गई. दोपहर 12:00 बजे तक वीरेंदर का कोई आता पता नहीं था. किसी को कुछ पता नहीं था कि वो कहाँ गया था.

 
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