S
StoryPublisher
Guest
वीरेंदर, जो कि टाइट कपड़ों मे आशना के हुश्न को निहार रहा था, आशना को सुनकर भी इग्नोर कर दिया और एकटक उसे देखता ही रहा. वीरेंदर के ज़हन मे रात वाली बात आ गई कि कैसे ज़िंदगी मे पहली बार इस लड़की ने उसे मास्टरबेट करने पर मजबूर कर दिया. आशना ने जब वीरेंदर की नज़रों का पीछा किया तो उसका दिल ज़ोरो से धड़कने लगा और उसका गुलाबी रंग और निखर गया. उसकी नज़रें नीचे को झुक गई और होंठों पर हल्की सी शर्मीली मुस्कान तैर गई. आशना ने जैसे ही फिर से नज़रें उठानी चाही तो उसे एक और झटका लगा, उसकी नज़र वीरेंदर के पीछे पड़े मेज़ पर गई जहाँ पर उसका अंडरवेर झूल रहा था (याद है ना बिहारी ने झल्ला के जब पैर हवा मे उछाला था).. आशना की साँसें तेज़ चलने लगी और वो मूह फेर कर वीरेंदर की तरफ पीठ करके खड़ी हो गई. वीरेंदर की तो जैसे सांस ही अटक गई. कहाँ पहले उसकी नज़रें आशना के गोल सुढ़ॉल उभारों का जायज़ा ले रही थी और कहाँ अब उसकी नज़रें आशना के गोल भारी नितंबो पर आकर अटक गई थी. वीरेंदर के लिंग मे हलचल होनी शुरू हुई तो उसे ख़याल आया कि वो तो जल्दी मे अंडरवेर पहनना ही भूल गया है. वीरेंदर को इसका आभास होते ही वो शरम से आँखें झुका कर वहीं बैठा रहा, लेकिन आशना के नितंब बार बार उसे न्योता दे रहे थे. जब काफ़ी देर तक कोई कुछ ना बोला तो आशना को अपनी ग़लती का एहसास हुआ, उसे एकदम वीरेंदर की नज़रें अपने नितंबों में गढ़ती हुई महसूस हुई और पहली बार उसकी पुसी ने अपने भाई के कारण एक छोटी सी लहर बहा दी.
वहीं वीरेंदर का लिंग भी कहाँ पीछे रहने वाला था, वो भी प्रेकुं की बूँदें टपकाने लगा. कुछ ऐसे ही थोड़ी देर सब शांत रहा. वो दोनो होश मे आए जब वीरेंदर के मोबाइल की घंटी बजी "कहता है पल-पल तुमसे होके दिल यह दीवाना, एक पल भी जान-ए-जाना मुझसे मुझसे दूर नहीं जाना. प्यार किया तो निभाना". वीरेंदर ने हड़बड़ाहट मे फोन उठाया (तब तक आशना भी सम्भल चुकी थी और वीरेंदर के सामने वाले सोफे पर बैठ चुकी थी).
वीरेंदर: हेलो डॉक्टर. आंटी, .................,जी हां मैं बिल्कुल ठीक महसूस कर रहा हूँ. ................हां-हां आइए ना, आज लंच साथ ही करते हैं. जी वो अपने रूम मे होगी, मैं बात कर्वाऊ आपसे.......ओके आंटी सी यू लेटर, और फोन काट दिया.
वीरेंदर आशना की तरफ देखते हुए: वो डॉक्टर. आंटी का फोन आया था, वो कह रही थी कि आज दोपहर को वो आएँगी, चेकप भी हो जाएगा और साथ मे लंच भी कर लेंगी.
आशना: आप उन्हें डॉक्टर. आंटी क्यूँ कहते है, वो इतनी एज्ड थोड़े ही हैं( आशना ने बात पलटते हुए कहा). इस बार वीरेंदर मुस्कुरा पड़ा जिस से कमरे मे फैला तनाव थोड़ा हल्का होने लगा.
वीरेंदर: यह तो मैं उन्हें चिडाने के लिए कहता था, लेकिन अब तो आदत हो गई है. ऐकचुली जब वो अभय अंकल से शादी करके नयी नयी आई थी तो मैं उन्हें आंटी कहता था और वो काफ़ी चिड़ती थी. बस उनको चिडाने के चक्कर मे मेरे मुँह पर यह शब्द बैठ सा गया है.
आशना(स्माइल करते हुए): आप ऐसे ही हँसते रहा करो, आप पर स्माइल बहुत सूट करती है.
वीरेंदर उसके चेहरे की तरफ देखता रह जाता है. वो सोचने लगता है कि जब से आशना से उसकी मुलाकात हुई है वो काफ़ी खुश रहने लगा है और रात को तो उसने आशना के बारे मे सोच कर वो कर दिया जो उसने कभी सोचा भी ना था. वीरेंदर के दिल मे आया कि कहीं रात को आशना ने उसकी दर्द भरी चीख और आहें सुन तो नहीं ली तभी आज वो इतना शरमा रही है जबकि आशना यह सोच कर शर्मिंदा थी कि शायद रात को वीरेंदर ने उसे देख लिया था वो सब करते हुए, क्यूंकी दरवाज़ा तो खुला ही रह गया था, इसीलिए वीरेंदर इतनी बेशर्मी से उसे घूर रहा था.
काफ़ी देर तक फिर कोई कुछ ना बोला. उनकी चुप्पी को आशना ने तोड़ते हुए कहा कि आपने डॉक्टर. बीना को झूठ क्यूँ बोला कि मैं अपने रूम मे हूँ.वीरेंदर आशना का सवाल सुन कर हड़बड़ा गया और इस से पहले कुछ जवाब देता , आशना का फोन बज उठा " ज़रा-ज़रा टच मी टच मी टच मी ओ ज़रा- ज़रा किस मी किस मी किस मी". आशना ने फॉरन अपनी पॅंट की जेब से मोबाइल निकाला और उसे ऑन कर दिया. हेलो डॉक्टर. आंट..........मेरा मतलब डॉक्टर. बीना (वीरेंदर ने उसकी तरफ देखा और दोनो के चेहरे खिल उठे)...........जी हां मैं ठीक हूँ, आप बताइए. ......................ओह यह तो काफ़ी अच्छा है, नहीं अभी मैं अपने रूम मे ही हूँ, आप आ जाइए फिर मिलकर बात करेंगे. ...................... ओके यू टू, बाइ और यह कह कर फोन काट दिया.
इस बार वीरेंदर ने गला सॉफ करते हुए कहा "आहें...आहेंम.... तो आप अपने कमरे मे हो".
आशना को कोई जवाब देते नहीं बना. आशना थोड़ी देर बाद चुप्पी तोड़ते हुए बोलती है: आपने झूठ बोला तो आपको बचाने के लिए मुझे भी झूठ बोलना पड़ा और शिकायत भरी नज़रो से वीरेंदर को देखने लगी.
वीरेंदर आशना की इस मासूमियत से निहाल हो उठा. पता नहीं क्यूँ पर पिछले कुछ ही घंटो मे वो उसकी तरफ तेज़ी से आकर्षित हो रहा था. आशना ने जब उसे यूँ घूरते पाया तो जल्दी से सोफे से उठ खड़ी हुई और बोली" चाइ तो ठंडी हो गई, चलिए आप नहा लीजिए मैं आपके लिए दूसरी चाइ बना देती हूँ.
वीरेंदर: तुम क्यूँ बनाओगी, काका को बोल दो वो बना देंगे. आशना ने राहत के सांस ली वो भी अकेले नीचे नहीं जाना चाहती थी.
आशना वीरेंदर के रूम से बाहर निकली और तेज़ आवाज़ मे कहा "काका 15- 20 मिनिट मे दो कप चाइ लेकर उपर साहब के रूम मे आ जाना".
तभी उसे अपने पीछे से कुछ आवाज़ आई. वीरेंदर बिल्कुल उसके करीब आ खड़ा हुआ था, वो एक दम सहम गई तभी वीरेंदर बोला: काका चाइ बाहर लॉन मे ले आना आज हम लॉन मे बैठ कर सनडे एंजाय करेंगे और फिर धीरे से बोला "इन नज़ारो का जी भर कर लुफ्त लेंगे".
इतना सुनते ही आशना के जिस्म मे एक और लहर दौड़ी और उसकी पैंटी थोड़ी सी और गीली हो गई. वो तेज़ी से अपने रूम के दरवाज़े के पास पहुँची और फिर मूड कर देखते हुआ बड़ी अदा से कहा "बड़े आए लुफ्त लेने वाले". इतना कह कर आशना ने अपने रूम का दरवाज़ा खोला और वीरेंदर की तरफ देखता हुए कहा " अंदर से कुछ पहन लेना, सुबह सुबह काफ़ी ठंड होगी बाहर". आशना ने तो वीरेंदर की केर करते हुए यह कहा था पर उसे नहीं पता था कि जब वीरेंदर अपने रूम मे जाएगा तो उसे एक झटका लगने वाला है.