• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

भैया का ख़याल मैं रखूँगी complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
आशना: इनकी थकान तो मैं चुटकियो मे दूर कर दूँगी. काका आप चाइ बनाइए मैं अभी आती हूँ. यह कह कर आशना वीरेंदर के रूम की तरफ चल दी.

बिहारी(रागिनी को इशारे से): क्या हुआ????

रागिनी: थक गया है बेचारा, दो बार लंड चूसा है बेचारे का मैने.

बिहारी फटी आँखों से रागिनी को देखता रहा.

रागिनी: विराट, बहुत जल्द आपका सपना पूरा होने वाला है. बहुत जल्द यह मेरी मुट्ठी में होगा.

बिहारी(खुशी से चहकते हुए): तुमने तो कमाल ही कर दिया.

रागिनी: कमाल तो मैं आगे करने वाली हूँ, आप बस देखते जाइए.

बिहारी: अब आगे क्या तुम इस से चुदवाने वाली हो?????

रागिनी: हां भी और नहीं भी.

बिहारी: मतलब????

रागिनी: मतलब यह कि बस इसको इसका लंड अपनी चूत में नहीं डालने दूँगी, बाकी सब कुछ करना पड़ेगा तो करूँगी.

बिहारी: तुम तो कमाल की लड़की हो यार. दो दिन में ही बात यहाँ तक पहुँच गई.

रागिनी: सिर्फ़ आपके लिए विराट, बस आप मुझे कभी ग़लत मत समझना.

बिहारी: अरे पगली, तू तो मेरी जान है. मेरे लिए इतना बलिदान दे रही है तो मैं क्यूँ तुम पर कभी उंगली उठाउंगा, बस जल्दी से इस झंझट से छुटकारा मिले तो हम किसी अलग शहर में चले जाएँगे.

बिहारी: अरे हां याद आया, वो मेजर का क्या बना???

रागिनी: साला नामर्द कहीं का, एक चुस्की मे ही झड गया. ठर्कि बूढ़ा साला. लंड मे दम नहीं और चला हर जवान लड़की को चोदने.

बिहारी: वाह ! तो आज दो दो लंड ठंडे करके आई है मेरी जान.

रागिनी: हां, लेकिन मेरी चूत मैं आग लगी है.

बिहारी: तू रुक आज रात मैं तेरी सारी खुजली मिटाता हूँ.

रागिनी: मैं टाँगे खोले आपका इंतज़ार करूँगी विराट.

आशना उपर पहुँची तो वीरेंदर वॉशरूम में घुस चुका था. आशना वहीं सोफे पर बैठ गई और वीरेंदर का इंतज़ार करने लगी. वॉशरूम के अंदर वीरेंदर शवर के नीचे खड़ा आँसू बहा रहा था. उसे अपने किए पर बहुत पछतावा हो रहा था.

वीरेंदर(मन में): पता नहीं मुझे यह क्या हो जाता है, मैं क्यूँ रोक नहीं पाता अपने आप को??? आशना को मैं क्या मुँह दिखाउन्गा???? मैं तो उसके काबिल ही नहीं हूँ. मुझ जैसा कमीना इंसान उसे डिज़र्व ही नहीं करता. मैं क्या करूँ आशना, मैं अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पाता. मुझे संभाल लो आशना, मुझे समझो आशना. सेक्स मेरी ज़रूरत ही नहीं मेरी कमज़ोरी भी बन गई है. अगर यह मुझे नहीं मिले तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ, किसी भी हद तक गिर सकता हूँ मे. मैं बहुत नीच इंसान हूँ आशना. मैं तुम्हे धोखा दे रहा हूँ लेकिन सच यह भी है कि मैं तुमसे बहुत ज़्यादा प्यार करता हूँ और तुम्हारे सिवा किसी और को अपनाने की सोच भी नहीं चाहता. मुझे माफ़ कर दो आशना, मुझे माफ़ कर दो.

तभी उसके अंदर से आवाज़ आई: कितनी बार माफी माँगेगा तू वीरेंदर और कितनी बार वो तुझे माफ़ करेगी????? क्या तेरे जिस्म की ज़रूरतें ज़्यादा हैं???? वो भी तो जवान है, उसके दिल मैं भी तो उमंगे हैं, तो क्या वो भी तेरी तरह इतना गिर जाए कि हर ऐरे गैरे मर्द के साथ रिश्ता जोड़ती फिरे??? क्या तू यह सब बर्दाश्त कर पाएगा???? अगर नहीं तो तुझे कोई हक नहीं कि तू उस लड़की के साथ धोखा करे जो तेरे लिए अपना सब कुछ छोड़ कर तेरा साथ देने यहाँ चली आई.

अभी वीरेंदर किसी नतीजे पर पहुँचता इस से पहले ही उसके दिल ने बगवात छेड़ दी.

वीरेंदर का दिल: अरे क्या सोच रहा है तू, छोड़ यह सब और अपनी लाइफ को एंजाय कर. तेरी लाइफ है, तू अपनी मर्ज़ी से जी. आशना को इस से कोई फरक नहीं पड़ना चाहिए कि तू बाहर क्या करता है. अगर तू खुश है तो सोचना छोड़ और जो चल रहा है उसे चलने दे. आख़िर हर इंसान को खुश रहने का हक है, तो फिर तू क्यूँ अपने आप को दोषी मान रहा है. तूने कोई ज़बरदस्ती नहीं की, रागिनी तो खुद ही तेरी झोली में पके फल की तरह गिर गई तो उसे चखने में कोई हर्ज़ नहीं है. जी भर कर मज़े लूट और फिर उसके बाद रागिनी का एक अलग जगह इंतज़ाम कर दे. मेरी मान तो जो हो रहा है उसे चलने दे और ध्यान रख के किसी को इस बात की खबर ना हो.

वीरेंदर अपने दिल-ओ- दिमाग़ की जंग मे पिस रहा था. उसे बाथरूम मे घुसे काफ़ी समय हो चुका था. आशना ने घबरा कर वीरेंदर को आवाज़ लगाई.

आशना: वीरेंदर, क्या कर रहे हैं आप, कितनी देर से वॉशरूम में घुसे हैं??? तबीयत तो ठीक हैं ना आपकी????

वीरेंदर, आशना की आवाज़ सुन कर चौंक गया. अपने आप को संभालते हुए वीरेंदर बोला: आशना वो दिन भर की दौड़ धूप से काफ़ी थक गया था, इस लिए शवर ले रहा था. तुम नीचे चलो, मैं अभी आता हूँ.

आशना: आप जल्दी से बाहर आइए, मैं यहीं पर आपका वेट कर रही हूँ.

आशना रूम से बाहर आई और बोली: काका, आप 10-15 मिनट तक चाइ वीरेंदर के रूम में ही ले आइए, हम यहीं बैठ कर चाइ पिएँगे. आप और रागिनी भी चाइ पी लीजिए. यह कह कर आशना दोबारा से रूम में चली गई.

रागिनी(जो कि हाल मे बैठी आशना और वीरेंदर का वेट कर रही थी, बिहारी को देख कर धीमे से बोली):कमरे बैठ कर पी लो या कहीं भी बैठ कर पियो, तीर तो मैने छोड़ ही दिया है. अब थोड़ा बहुत दर्द तो होगा ही. उस ज़ख़्म को कुरेद कुरेद कर अगर मैने नासूर ना बना दिया तो मैं भी अपने पति की रंडी बीवी नहीं.

बिहारी उसे देख कर बस मुस्कुरा दिया.

बिहारी: चल इन 10-15 मिंटो में एक बार तेरी चूत को ठंडा कर लूं, नहीं तो रात तक यह पिघल ना जाए.

रागिनी खुशी से झूम उठी और झट से कमरे में जाकर नंगी हो गई और बिना किसी फोरप्ले के बिहारी ने अपना तगड़ा लोड्‍ा रागिनी की चूत में पेल दिया. 10 मिनट की तूफ़ानी चुदाई के बाद बिहारी ने अपने लावे से रागिनी की कोख भर दी और उसके उपेर पड़े हुए अपनी साँसें संभालने लगा.

रागिनी: विराट, क्या बीना जी उस रात वीरेंदर से मिलने आई थी?????

रागिनी का सवाल सुनकर बिहारी एक दम घबरा गया.

बिहारी: हाँ, हाां मेरा मतलब क्यूँ तुम क्यूँ पूछ रही हो????

रागिनी: ऐसे ही, आपने ही तो कहा था कि उस रात बीना जी वीरेंदर से मिलने ज़रूर आएँगी. तो क्या उस रात उन दोनो में कुछ हुआ होगा????

बिहारी: आई तो थी वो यहाँ लेकिन उन दोनो के बीच क्या हुआ, वो मुझे नहीं पता.

रागिनी:हुउऊउम्म्म्म.

 


रागिनी को गहरी सोच मे डूबते हुए देख बिहारी ने पूछा: क्या हुआ, क्या सोच रही हो????

रागिनी: आक्च्युयली, हॉस्पिटल में मेरी एक सहेली है उसने मुझे बताया कि ऐक्सीडेंट वाली रात बीना जी के शरीर मे काफ़ी मात्रा में आल्कोहॉल पाया गया था. मैं जानती हूँ कि वो कभी शराब नहीं पीती.

बिहारी को भी पता था कि बीना शराब नहीं पीती. बीना को पहली बार शराब बिहारी ने ही पिलाई थी जब उन दोनो की नयी नयी दोस्ती हुई थी. उसने तो खुद उस दिन के बाद बीना को उस रात पहली बार शराब के नशे मे धुत्त देखा था.

रागिनी: क्या हुआ???क्या सोचने लगे???

बिहारी: सोच रहा हूँ कि क्या वीरेंदर ने ही उसे इतनी शराब पिलाई कि नशे में होने के कारण बीना जी का एक्सिडेंट हो गया.

रागिनी: मुझे भी यही लगता है लेकिन इस बात का कोई पक्का सबूत नहीं है मेरे पास.

बिहारी: तुम कहना क्या चाहती हो???

रागिनी: अगर हमे किसी तरह प्रूफ मिल जाए कि उस रात बीना जी ने वीरेंदर के साथ शराब पी थी तो हम डॉक्टर. अभय को इस बारे में बता कर वीरेंदर को इस केस में फसा सकते हैं.

बिहारी(तेज़ स्वर में): तू अपना दिमाग़ ना लगा बस जो मैने कहा है वो करती जा. पोलीस के पचडे में एक बार पड़ गये तो हम भी फस सकते हैं.

रागिनी: लेकिन.......

इस से पहले के रागिनी आगे बोलती, बिहारी उस पर से उठा और अपना सुस्त पड़ चुका लोड्‍ा उसकी चूत से निकालते हुए कहा, तू आराम कर ले मैं दोनो को चाइ देकर आता हूँ. अगला राउंड और बाकी की बातें रात को करेंगे.

रागिनी: आज पूरी रात मुझे आपका साथ चाहिए विराट.

बिहारी: मेरा सारा वक्त तुम्हारे लिए हे है, मगर सोचो अगर रात को वीरेंदर तुम्हारे कमरे में आ गया तो हम पकड़े जा सकते हैं. इस लिए अब हमे काफ़ी सावधान रहना होगा. तुमने शेर के मुँह में खून जो लगा दिया है, अब तो वो कभी भी आकर तुम्हारा शिकार कर सकता है.

यह कह कर बिहारी रागिनी के कमरे से बाहर चला गया.

रागिनी(दिल में सोचते हुए): मैने तो बस शेर के मुँह को खून लगाया है विराट लेकिन आपने तो शेरनी को ही ज़ख़्मी कर दिया है और अब यह शेरनी पता नहीं क्या क्या कर जाएगी अपने ज़ख़्म भरने के लिए. आपको आपकी दौलत तो दिलवाकर ही रहूंगी, यह एक बीवी का वादा है अपने पति से लेकिन साथ ही एक सेक्स से भरपूर जवान लड़की अपने आप से भी वादा करती है कि अपनी खुशी के लिए वो किसी भी हद तक जाएगी. चाहे उसके लिए उसे वीरेंदर के लंड से क्यूँ ना चुदना पड़े. वीरेंदर के लंड के बारे में सोचते ही रागिनी की चूत में पानी आ गया और वो फिर से गरम होने लगी.

वहीं बिहारी उपर जाकर वीरेंदर के कमरे में चाइ रख आया.

आशना: काका, मैं थोड़ी देर मैं नीचे आती हूँ. आज सारा खाना वीरेंदर की पसंद का बनेगा, आप उसमें मेरी हेल्प कीजिएगा.

बिहारी: लेकिन बिटिया आपकी तबीयत ठीक नहीं है तो आप आराम कीजिए, मैं सब काम देख लूँगा.

आशना: नहीं काका, मैं अब बिल्कुल ठीक हूँ और आज का दिन वीरेंदर के लिए बहुत बड़ा दिन है, बहुत बड़ा टेंडर मिला है तो मैं चाहती हूँ कि आज मैं खुद अपने हाथो से वीरेंदर का मनपसंद खाना बनाऊ.

बिहारी: ठीक है बेटी और यह कहकर बिहारी नीचे चला गया. रास्ते मे बिहारी मन मे सोचता है, आज तो सच मे बहुत बड़ा दिन है, आज मेरा प्यादा पहली चाल चल चुका है. बस एक बार वीरेंदर मेरे प्यादे को चोद दे उसके बाद तो रानी मेरी ही होगी. आज रात को रागिनी और वीरेंदर के खाने में इतनी उत्तेजना भर दूँगा कि दोनो के लिए एक दूसरे से दूर रहना नामुमकिन हो जाएगा.

वीरेंदर ने अपने मन को समझाया और जब वो हल्का महसूस करने लगा तो वो बाथरूम से बाहर निकला. इस वक्त वीरेंदर ने एक हाफ स्लीव टी-शर्ट और एक लोवर पहना था.

आशना ने वीरेंदर के मसल्स की तरफ इशारा करके कहा : नाइस मसल्स.

आशना से नज़रें मिलते ही वीरेंदर के दिल मे एक बार फिर से ग्लानि के भाव आने लगे. आशना ने वीरेंदर को परेशान देखा तो झट से उसके पास गई और अपनी बाहें उसके गले में डाल कर उसकी आँखो में आँखें डाल कर बोली: सुबह की बात से नाराज़ हो????

वीरेंदर: हां, न्न्नाहीं.

आशना (स्माइल करते हुए): तो जनाब को मुँह मीठा करना है, क्यूँ????

आशना ने शरारत भरी नज़रों से वीरेंदर की तरफ देखा.

वीरेंदर(थोड़ा हल्का महसूस करते हुए): नहीं ऐसी बात नहीं है, वो थोड़ा काम का बोझ है, अभी पूरी तरह से रिकवर नहीं हुआ हूँ तो शायद थकान ज़्यादा हो गई है.

आशना: अच्छा जी, तो आपको मुँह मीठा नहीं करना. ह्म्म्म्म म राजकुमार नाराज़ हो गये हैं, अब तो कुछ करना ही पड़ेगा.

वीरेंदर के दिल की धड़कनें तेज़ होने लगी. उसने अपनी बाहें आशना की कमर में लपेटी और उसे अपने साथ सटा लिया.

आशना: ऊउच.

वीरेंदर के चेहरे पर स्माइल आ गई. वीरेंदर: क्यूँ अब क्या हुआ????

आशना का चेहरा शरम से झुक गया. आशना(सर झुकाए): वीरेंदर छोड़िए मुझे, नीचे किचन में बहुत काम है.

वीरेंदर: तो मेरा काम क्या कम इंपॉर्टेंट है???

आशना: आपका काम भी हो जाएगा, बस आज की रात रुक जाइए. मिठाई अभी प्योर्(शुद्ध) नहीं है.

वीरेंदर(शरारत से): माइ गॉड, लेकिन मैने तो होंठो की चुम्मि माँगी थी.

आशना ने शरमाते हुए वीरेंदर की छाती पर मुक्का मारा और उसकी पकड़ से निकल कर भागते हुए बोली: मैं तो आपको पूरी मिठाई खिलाने की सोच रही थी. अगर आपको खाली डिब्बा ही चाटना है तो कोई बात नहीं.

वीरेंदर: तेरी तो, यह कहकर वीरेंदर आशना के पीछे भागा मगर एक मदमस्त नवयौवना हिरनी को कॉन पकड़ पाया है.

आशना: तेज़ी से नीचे पहुँची और सीधा किचन में घुस गई.

उसकी साँसें फूली हुई थी, तेज़ साँस लेने से आशना के भरपूर उभार हर सांस के साथ उठ बैठ रहे थे. बिहारी पहले तो आशना के एकदम किचन के अंदर आ जाने से डर सा गया लेकिन जैसे ही उसकी नज़र आशना के वक्षो मे उठ रही तरंगो पर पड़ी, उसके मुँह मे पानी आ गया और उसके लंड मे तनाव.

 


आशना ने जब बिहारी की नज़रें अपने वक्षो पर महसूस की (गर्ल'स सिक्स्त सेन्स) तो वो एक दम हड़बड़ा गई और उसने एक साइड होकर अपने दुपट्टे को ठीक किया. अपनी तरफ से आश्वस्त होकर वो बिहारी की तरफ मूडी तो उसे बिहारी की नज़रें अपने नितंबो पर गढ़ी दिखी.

आशना(मन में): यह काका को आज क्या हो गेया है??? कितनी गंदी नज़र से देख रहे हैं. मैं तो इन्हे एक सीधा साधा इंसान समझती थी लेकिन यह तो बहुत ही बदतमीज़ी से पेश आ रहे हैं. आशना ने बिहारी की आँखो की गंदगी को सॉफ सॉफ पढ़ लिया था.

आशना सोचने लगी "सारे मर्द एक जैसे होते हैं. यह भी नहीं देखते कि सामने वाली लड़की उनकी बेटी की उम्र की होगी".

आशना ने बात पलटने के लहजे से कहा: काका, आपने अपने बारे मे कभी कुछ बताया ही नहीं.

बिहारी(अभी भी आशना के यौवन की मस्ती मे था): मेरे बारे मे ज़्यादा कुछ है ही नहीं जानने के लिए.

आशना: फिर भी, आपकी बीवी-बच्चे वागेहरा वागेहरा.

बिहारी: शादी की ज़रूरत ही नहीं पड़ी.

आशना चौंक कर बिहारी की तरफ देखने लगी.

बिहारी(संभालते हुए):मेरा मतलब कि इस घर मे आने के बाद, अपनी सारी ज़िंदगी यहीं लगा दी. जब शादी का ख़याल आया तो उम्र निकल चुकी थी.

आशना को बिहारी की बातों पर यकीन नहीं हुआ.

आशना: लेकिन कभी तो लगता होगा कि काश आपने शादी कर ली होती तो इस उम्र मे आप दोनो एक दूसरे का सहारा तो बनते.

आशना बातें करते हुए किचन का काम भी करने लगी थी. उसकी पीठ बिहारी की तरफ थी और आशना के टाइट सूट मे बाहर को उभरे हुए भारी नितंब देख कर बिहारी धीमे से बोला: अब तो ऐसे ही हिला लेता हूँ.

बिहारी ने हालाँकि यह बात बड़े धीरे से बोली थी मगर आशना ने उसकी बात सुन ली. उसने चौंक कर एक दम पीछे मुड़कर बिहारी की तरफ देखा. सबसे पहले तो उसकी नज़र बिहारी की आँखो पर पड़ी जो कि उसके नितंबो पर थी और उसके बाद उसकी नज़र बिहारी के पाजामे पर पड़ी जहाँ एक टेंट बना हुआ था.

बिहारी ने अपने टेंट को छुपाने की कोशिश भी नहीं की. आशना ने आँखो में गुस्सा भर कर बिहारी की तरफ देखा तो बिहारी ने बात पलटते हुए बोला: अब तो ऐसे ही काम चला लेता हूँ बिटिया. आशना को लगा कि शायद उसने पहले ही ग़लत सुना था लेकिन बिहारी की नज़रों और उसकी हालत से वो अनकंफर्टबल फील कर रही थी.

आशना ने बिहारी की आँखो मे देखा जो सेक्स की तपिश से एक दम लाल लग रही थी.

आशना: काका, आप शायद बहुत थक गये हैं, आप आराम करिए और रागिनी को मेरे पास भेज दीजिए. हम दोनो किचन का काम संभाल लेंगी. बिहारी को भी लगा कि यहाँ से जाने में ही भलाई है वरना वो आशना के नशीले जिस्म के पागलपन में पता नहीं क्या कर बैठे और सारा बना बनाया खेल ना बिगड़ जाए.

बिहारी रागिनी के कमरे की तरफ चल पड़ा.

आशना सोचने लगी: काका जैसे अपने आप को दिखाने की कोशिश करते हैं वैसे हैं नहीं, बहुत ही शातिर किसाम के इंसान लगते हैं.

तभी उसके दिमाग़ में बॅंगलॉर वाले सवाल उठ खड़े हुए. डॉक्टर. बीना पर उसे पूरा शक था लेकिन अब उनकी मौत के बाद उसे देल्ही आकर उन सब सवालो के बारे में सोचने का वक्त ही नहीं मिला. अब आशना ने अपने शक की सुई बिहारी पर रखकर सोचने की सोची. उसे याद आया कि वीरेंदर ने उसे बताया था कि डॉक्टर. बीना का इस घर मे काफ़ी आना जाना था और वो बिहारी काका से भी काफ़ी मिल घुल-मिल गई थी. हो सकता है कि इन सब के पीछे यह दोनो ही हो. इतना तो वो समझ गई थी कि बिहारी काका उसे गंदी नज़र से देख रहे थे. लेकिन उसने पहले यह सब महसूस क्यूँ नही किया. शायद इस से पहले उसने कभी बिहारी की हरकतों और नज़रो पर कभी ध्यान ही नहीं दिया . आशना ने आगे से बिहारी की हरकतों पर नज़र रखने का डिसीजन लिया और काम में मगन हो गई.

थोड़ी देर बाद रागिनी भी किचन में आ गई.

रागिनी: अरे दीदी आप की तबीयत ठीक नहीं है, लाइए मैं यह सब काम कर देती हूँ, आप आराम करिए.

आशना: मैं बिल्कुल ठीक हूँ और यह सब काम मैं कर लूँगी. बिहारी काका से कहलवाकर तुम्हे इस लिए बुलवाया कि तुमसे दो बातें भी हो जाएँगी.

रागिनी: हां हां दीदी क्यूँ नहीं. वैसे भी जब से आई हूँ हमे तो बात करने का टाइम ही नहीं मिला.

आशना(एक स्टूल की तरफ इशारा करते हुए):तुम वहाँ बैठो, मैं तुम्हारे लिए जूस लाती हूँ.

रागिनी: दीदी आप फॉरमॅलिटीस क्यूँ कर रही हैं, मुझे जूस नहीं पीना और प्लीज़ आप मुझे शर्मिंदा ना करें.

आशना: चलो ठीक है तो तुम भी मेरी मदद कर दो. रागिनी भी आशना की हेल्प करने लगी. थोड़ी देर खामोशी छाई रही, फिर आशना बोली: तुम्हारी उम्र कितनी है रागिनी???

रागिनी: दीदी 18+.

आशना: तो इसका मतलब तुमने 12थ तक ही पढ़ाई की है.

रागिनी: जी दीदी.

आशना: लेकिन इतनी जल्दी पदाई क्यूँ छोड़ दी.

रागिनी: दीदी वो घर के हालात ही कुछ ऐसे थे कि इस से आगे की पढ़ाई मेरे पेरेंट्स अफोर्ड नहीं कर सकते थे. इसी लिए यहाँ जॉब ढूँढने चली आई.

आशना: वो तो ठीक है, लेकिन तुम्हे काम के साथ साथ अपनी पढ़ाई भी कंटिन्यू रखनी चाहिए. इस क्वालिफिकेशन में तुम्हे कोई अच्छी जॉब नहीं मिल सकती.

रागिनी: जानती हूँ दीदी मगर इस वक्त तो मेरे लिए ऐसे सिचुयेशन थी कि जो भी जॉब मिल जाती मैं कर लेती. वीरेंदर सर ने मुझ पर बहुत बड़ा एहसान किया है अपने शोरुम मे जॉब देकर.

आशना: वो दिल के बहुत ही अच्छे इंसान हैं, दूसरो की मदद को हमेशा तैयार रहते हैं.

रागिनी(दिल मे): माइ फुट अच्छा इंसान है, मेरे पति की तो सारी दौलत हड़प ली और अच्छा इंसान होने का झूठा दिखावा करता है.

आशना: अच्छा तुम तो जम्बू&कश्मीर से बिलॉंग करती हो ना????

रागिनी: जी दीदी.

आशना: मेरी भी एक फ्रेंड देल्ही में एमबी कर रही है जो कि जम्बू&कश्मीर मे रहती है.

रागिनी: सच दीदी, लेकिन जम्बू&कश्मीर कहाँ से???

आशना: प्रॉपर लोकेशन तो मैं भी नहीं जानती. हां, इतना जानती हूँ कि वो जम्मू सिटी की रहने वाली है.

रागिनी: दीदी मैं राजौरी (जम्मू की एक डिस्ट्रिक्ट) की रहने वाली हूँ.

आशना: अच्छा तुम्हारे परिवार में कॉन कॉन है????

रागिनी: दीदी मेरे माँ-बाप के अलावा एक बढ़ा भाई है जिनकी शादी हो गई है. भैया भी पापा के साथ ही दुकान पर बैठते हैं(यह बात रागिनी ने आशना से झूठ बोली, जबकि उसकी फॅमिली का भी अच्छा ख़ासा बिज़्नेस था). मिलिटन्सी के कारण दुकान का काम ऑलमोस्ट ठप्प हो गया तो घर में दो वक्त की रोटी भी बड़ी मुश्किल से चलने लगी. इसी लिए मैने यहाँ आने का फ़ैसला किया.

 
शाम 5:30 बजे तक दोनो घर में पहुँच चुके थे. आशना ने आते ही वीरेंदर के गले लग कर उसे मुबारकबाद दी. इस वक्त आशना ने अफ़गानी सूट पहना था. ब्राउन रंग की टाइट पयज़ामी और मल्टी कलर की कुरती जिसका बेस लाइट येल्लो था, आशना पर खूब जच रहा था. आशना के चेहरे की मासूमियत देख कर ही वीरेंदर के मन मे रागिनी के साथ बिताए हुए पलों को सोचकर अपने आप से घिंन आने लगी. वो बिना रुके सीडीयाँ चढ़कर अपने कमरे मे चला गया.

आशना(रागिनी की तरफ देख कर): इन्हे क्या हुआ????

रागिनी(बिल्कुल नॉर्मल बिहेव करते हुए): सर, शायद ऑफीस में बहुत ज़्यादा काम से थक गये हैं.

आशना: बहुत अच्छा किया जो तुम यहाँ चली आई. और देखो आते ही तुम्हे जॉब भी मिल गई.

रागिनी: दीदी मैं आपका और वीरेंदर सर का एहसान ज़िंदगी भर नहीं भूलूंगी.

आशना: एक काम करो, तुम कटहल सॉफ कर दो, तब तक मटन और खीर तैयार हो जाएगी. मैं तब तक आटा गूँथ लेती हूँ. कटहल बनने के बाद चावल बना देंगे और फिर गरम गरम रोटियाँ सैक लेंगे.

रागिनी: जी दीदी और रोटियाँ मैं गरम गरम बना दूँगी, आप सर के साथ खाना शुरू कर दीजिएगा.

आशना: रोटियाँ बेशक तुम बना लेना लेकिन खाना हम सब मिलकर ही खाएँगे. आज के टेंडर का श्रेय तुम्हे भी तो जाता है.

रागिनी का दिल एक दम से धक धक कर उठा यह सुनकर.

रागिनी: मुझे क्यूँ????

आशना: देखो तुमने कल ही ऑफीस जाय्न किया और आज हमे यह टेंडर मिल गया, तो हुई ना तुम लकी.

रागिनी: दीदी आप मुझे शर्मिंदा कर रही हैं. भला यह तो सर की मेहनत है जो उन्हे यह टेंडर मिला.

यूँही बातों बातों मैं खाना भी तैयार हो गया.

आशना: रागिनी तुम उपेर जाकर वीरेंदर को नीचे आने के लिए बोल दो. तब तक मैं भी फ्रेश हो लेती हूँ.

रागिनी: जी दीदी.

आशना अपने कमरे मैं घुसी तो रागिनी भी वीरेंदर को बुलाने चल दी . उसके दिमाग़ मे दोपहर को वीरेंदर के साथ बिताए पल ताज़ा होने लगे. उसकी चूत फड़कने लगी वीरेंदर के दम दार लंड के बारे मे सोच कर. रागिनी ने धीरे से वीरेंदर का डोर नॉक किया लेकिन कोई जवाब नहीं आया. रागिनी ने एक बार फिर से नॉक किया लेकिन अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई. उसने बोल्ट घुमा कर दरवाज़ा खोला तो देखा के अंदर काफ़ी अंधेरा था.

रागिनी(दिल मैं):यहाँ तो कोई नहीं है, तो फिर वीरेंदर कहीं आशना के कमरे मैं तो नहीं चला गया .

कमरे मे झाँकते ही रागिनी को अपनी सुहाग रात याद आ गई. इसी कमरे मे उसने अपना कोमार्य विराट को सौंपा था. एक लड़की के लिए वो कमरा, वो बिस्तर बहुत मायने रखता है जिस पर उसने सबसे पहली बार मर्द के जिस्म का सुख भोगा हो. इन्ही ख़यालों मे खोई रागिनी अंदर घुसी तो किसी ने उसे पीछे से दबोच लिया. इस से पहले कि वो कुछ समझ पाती या कोई हरकत कर पाती, उसे किसी ने पलटा और तेज़ी से उसके होंठ अपने होंठो मे लेकर चूसने लगा.

रागिनी तो पहले से बेकरार थी, इस मर्दाना चुंबन ने उसे और भी पिघला दिया और वो पूरे जी-जान से उसका साथ देने लगी. जैसे ही रागिनी ने अपनी बाहें उस शक्स के इर्द गिर्द लपेटी, उस शक्स ने झट से अपनी पकड़ ढीली की और पीछे हट कर झट से लाइट ऑन कर दी. लाइट जलते ही रागिनी ने देखा कि वो शक्स वीरेंदर था.

वीरेंदर(तेज़ आवाज़ में): तुम, तुम यहाँ क्या कर रही हो????

रागिनी ने शरमा कर चेहरा झुका लिया और कुछ ना बोली. वीरेंदर को लगा कि शायद उसने कुछ ज़्यादा ही उँची आवाज़ मे रागिनी से पूछ लिया है.

वीरेंदर: आइ, आइ आम सॉरी फॉर बीयिंग सो रूड बट तुम यहाँ कैसे, मेरा मतलब आशना कहाँ है????

रागिनी: जी दीदी, फ्रेश होने अपने रूम में गई हैं और मुझे बोला कि आपको खाने के लिए बोल दूं.

वीरेंदर: ओह, इट्स जस्ट आ मिस्टेक. प्लीज़. प्लीज़ डॉन'ट माइंड.

रागिनी ने चेहरा उठाकर वीरेंदर की तरफ देखा और बोली: नो प्राब्लम सर, आइ आम ऑल्वेज़ देयर टू सर्व यू. यू डॉन'ट हॅव दा नीड टू से सॉरी. इट्स माइ ड्यूटी टू प्लीज़ यू.

वीरेंदर एक दम बौखला गया. अभी कुछ देर पहले अपने से किए हुए सारे वादे वो भूल गया और बोला: मैं जानता हूँ रागिनी के तुमने अपना सब कुछ मुझे सौंप दिया है मगर इस घर में तुम्हे काफ़ी सावधानी रखनी पड़ेगी.

रागिनी: आइ अंडरस्टॅंड सर. डॉन'ट वरी, आइ विल वेट फॉर यू अट मिडनाइट टू सर्व यू युवर लंच आंड डिन्नर.

वीरेंदर की नसों में खून का प्रवाह तेज़ हो गया.

रागिनी: लेकिन आपने अंधेरे मे कैसे पहचाना कि मैं आशना दीदी नहीं हूँ????

वीरेंदर: ई नो हर फ्रेग्रेन्स.

रागिनी: ओह, तो इसका मतलब आप उनके साथ......

वीरेंदर: गो डाउन, आइ विल कम इन फ्यू मिनट्स.

रागिनी बड़ी अदा से मूडी और अपनी भारी भरकम गान्ड हिलाती हुई कमरे से बाहर निकल गई.वीरेंदर ने उसकी गान्ड की थिरकन देखी तो सोचा:साली की गान्ड तो ज़रूर मारूँगा, चाहे कुछ भी हो जाए.आशना मेरा प्यार है, उसे मैं कभी दुखी नहीं करूँगा मगर यह तो मेरी लस्ट बन गई है. और यह लस्ट तो मैं आज रात ही पूरी कर लूँगा.

जब तक रागिनी नीचे पहुँची, बिहारी ने मटन की दो कटोरियों मे काफ़ी मात्रा में अफ़रोडियासिक मिला दी थी. आशना की कटोरी मे उसने नींद की दवाई मिला दी. वो चाहता था कि आज रात को ही वीरेंदर, रागिनी को चोद दे ताकि जल्द से जल्द वीरेंदर रागिनी का गुलाम बन जाए और फिर आशना की सच्चाई वीरेंदर के सामने लाकर पहले तो आशना को घर से निकलवाए और उसके बाद रागिनी के जिस्म के सरूर से वीरेंदर को प्रॉपर्टी के काग़ज़ात बदलने पर मजबूर कर दे.

रागिनी नीचे आकर सीधा अपने कमरे में चली गई. वहाँ से फ्रेश होकर वो सीधा डाइनिंग हॉल मे पहुँची जहाँ पर वीरेंदर, आशना और बिहारी उसी का वेट कर रहे थे.

रागिनी: अरे आप लोग शुरू कीजिए ना.

वीरेंदर: हम तो तुम्हारे साथ ही शुरू करना चाहते हैं, तभी तो इंतज़ार कर रहे हैं.

कोई और उस बात का मतलब समझा या ना समझा हो मगर रागिनी इस बात का मतलब अच्छे से समझ गई.

रागिनी: मुझे खुशी है कि आप मेरे साथ ही शुरू करना चाहते हैं, मेरे लिए इस से बढ़िया बात क्या हो सकती है.

आशना: अच्छा चलो, अब जल्दी से बैठो, बहुत भूख लगी है.

रागिनी बिहारी के साथ वाली एक चेयर पर बैठ गई. आशना और वीरेंदर उनके बिल्कुल सामने अगल बगल मैं बैठे थे. रागिनी वीरेंदर के बिल्कुल सामने बैठी थी. रागिनी ने सबकी प्लेट्स में राइस डाले और बिहारी ने बड़ी चालाकी से अफ़रोडियासिक वाली कटोरियों में मटन डाल कर एक रागिनी को देदि और एक वीरेंदर को. नींद की गोलियों वाली कटोरी मे उसने जैसे ही मटन डालना शुरू किया तो आशना ने कहा "काका बस थोड़ा सा ही " और बिहारी ने थोड़ा सा मटन डाल कर कटोरी आशना को दे दी.

वीरेंदर: वाउ आज मटन बना है, थॅंक्स आशना.

आशना: आज तो सब आपकी मर्ज़ी का ही बना है. दाल, कटहल, खीर सब आपकी मनपसंद चीज़ें हैं.

रागिनी: सर आज सुबह से ही सारे काम आपके मनपसंद के ही हो रहे हैं.

वीरेंदर, रागिनी की बात सुनकर हडबडा गया और कुछ बोल नहीं पाया.

आशना: और क्या, इन्होने इतनी मेहनत जो की थी इस टेंडर के लिए तो इन्हे उसी का रिवॉर्ड मिला.ही रियली डिज़र्व दिस.

रागिनी: यॅ, सर डेफनेट्ली डिज़र्व्स.

बिहारी को इंग्लीश मे हो रही बातें तो समझ मे नही आ रही थी मगर इतना तो वो समझ गया था कि रागिनी आज दोपहर वाली बात को बड़ी सफाई से पेश कर रही है. वीरेंदर खामोश बैठा रहा. रागिनी ने सबकी प्लेट्स मे खाना डाला और फिर अपनी प्लेट मे थोड़े से चावल डाले.

आशना: अरे तुम क्या इतना से ही खाओगी????

रागिनी: जी दीदी, आज ऑफीस मैं सर ने खूब पेट भर कर खिलाया-पिलाया.

वीरेंदर की तो जैसे साँस ही अटक गई यह सुनकर.

आशना(वीरेंदर की तरफ देखते हुए): अरे ऐसा क्या खिला दिया कि अभी तक भूख ही नहीं लगी.

वीरेंदर: वो, वो मैने....

रागिनी: मलाई, रस मलाई खिलाई थी सर ने. आपको तो पता ही है कि वो कितनी हेवी होती है और सर ने तो मुझे कुछ ज़्यादा ही खिला दी. मैने मना भी किया था मगर यह कहाँ मानने वाले थे.

वीरेंदर की हालत खराब हो चुकी थी. उसकी भूख बिल्कुल मिट चुकी थी.

आशना: ऑफीस में तो पेट भर कर खा लिया, अब घर मैं भी खाना पड़ेगा, क्यूँ वीरेंदर?????

वीरेंदर(हड़बड़ाते हुए):हाँ हां क्यूँ नहीं.

रागिनी: अब सर ने कह दिया तो घर पर भी खा लूँगी.

वीरेंदर इसका मतलब भली भाँति समझता था.

आशना(वीरेंदर की तरफ देखते हुए): तो सर जी आप खुद ही डाल दो इसकी प्लेट मे.

वीरेंदर, आशना की तरफ देखने लगा.

आशना(मुस्कुराते हुए): आप खुद ही उसकी प्लेट में और चावल डाल दीजिए, वो आपको मना नहीं करेगी. आख़िर आप उसके बॉस जो हैं.

वीरेंदर ने राइस स्पून से थोड़े चावल रागिनी की प्लेट मे डाले.

रागिनी: बस कीजिए सर, इतना ज़्यादा नहीं ले पाउन्गि मे.

वीरेंदर के हाथों से स्पून गिरते गिरते बचा.

आशना: अरे वाह, ऐसे कैसे नहीं ले पाओगी??? अभी खीर भी तो लेनी है.

रागिनी खामोश रही. सब ने खाना शुरू किया. बिहारी रात के प्लान के बारे मे खोया हुआ था. उसने सोच लिया था कि आज की रात जाग कर वो रागिनी और वीरेंदर की चुदाई की फिल्म बनाएगा. वहीं आशना भी बिहारी पर नज़र रखे हुए थी. बेशक वो रागिनी के साथ बातों में शामिल थी मगर उसका ध्यान बिहारी पर ही था. वो उसकी हर गतिविधि को नोट कर रही थी. बिहारी ने एक दो बार आशना के उभार चोर नज़रों से देखने की कोशिश की मगर आशना की नज़र से बच ना पाया. वीरेंदर की तो हालत ही खराब थी. बिहारी ने जल्दी से खाना ख़तम किया और वो अपने कमरे मे चला गया. अपने कमरे से कॅमरा निकाल कर वो सीधा रागिनी के कमरे की तरफ चल पड़ा और उसे एक महफूज़ जगह रख कर किचन मे आ गया.

बिहारी के उठते ही आशना का ध्यान वीरेंदर की तरफ गया. उसने देखा कि वीरेंदर खाना खाते हुए किसी गहरी सोच में है.

आशना: वीरेंदर, क्या बात है???? एनी टेन्षन????

वीरेंदर (अपने ख़यालो से बाहर आते हुए): नो, नो नोट अट ऑल.

आशना: तो फिर आपको खाना पसंद नहीं आया क्या???

वीरेंदर(संभलते हुए): अरे खाना बहुत ही लज़ीज़ है, जी करता है कि बनाने वाले ही हाथ चूम लूँ.

आशना शरमा गई. रागिनी का कलेजा जल भुन गया.

आशना: तो फिर अपने मटन तो टेस्ट ही नहीं किया.

वीरेंदर: ओह, हां मैं तो भूल ही गया था. तुम एक काम करो, अपनी कटोरी मुझे देदो, मैं बस थोड़ा सा ही खाउन्गा.

आशना: वाह, क्या बात है. लगता है मेरी सोहबत का असर हो रहा है जनाब को.

रागिनी: लगता है सर का टेस्ट चेंज हो गया है.

वीरेंदर ने उसकी बात सुनकर उसे गुस्से भरी नज़र से देखा तो रागिनी ने जल्दी से नज़रें झुका कर खाना शुरू कर दिया.

आशना ने भी बात पर ज़्यादा गौर नहीं किया.उसने अपनी कटोरी वीरेंदर को देदि और उसकी कटोरी खुद ले ली.

आशना: देखो अब आपके कारण मुझे कितना खाना पड़ेगा.

वीरेंदर: कल से वैसे भी तुम्हारी योगा क्लासस शुरू कर दूँगा, कोई फरक नहीं पड़ेगा.

आशना वीरेंदर का मतलब समझ कर शरमा गई.

रागिनी: वाउ, सर आप मुझे भी योगा कराएँगे.

रागिनी की बात सुनते ही आशना ज़ोर से हंस दी और वीरेंदर झेंप गया.

रागिनी(हैरानी से): क्या हुआ??? मैने कुछ ग़लत बोल दिया क्या????

आशना(हँसते हुए): नो, नो मैं तो इस लिए हंस रही हूँ कि यह कब से मुझे योगा सिखाना चाहते हैं लेकिन मैं ही मना करती रही और तुम एक दम से तैयार भी हो गई.

रागिनी: तो इस मैं मना करने वाली कॉन सी बात है. योगा से तो शरीर फिट रहता है.

आशना: तुम चाहो तो घर के पीछे जिम मे वर्काउट कर सकती हो.

रागिनी: ओह, थॅंक्स दीदी.

वीरेंदर: लेकिन सिर्फ़ शाम को, नहीं तो ऑफीस मे दिन भर थकान रहेगी.

रागिनी: यस बॉस.

 
आशना जानती थी की सुबह के टाइम वीरेंदर खुद वर्काउट करते हैं तो इसीलिए उन्होने रागिनी को शाम के लिए बोला. खाना ख़तम करके रागिनी और बिहारी ने बर्तन समेटे.

वीरेंदर: आशना क्या तुम मेरे साथ कुछ देर बाहर तक टहलने चलोगि.

आशना: हां, हां क्यूँ नहीं. बस आप बैठिए मैं अपने लिए और आपके लिए जॅकेट लेकर आती हूँ.

बाहर आते ही दोनो ने देखा कि आज चाँदनी रात थी. कुछ देर खामोशी से टहलने के बाद आशना ने पूछा: वीरेंदर, आप मुझ से कुछ छिपा तो नहीं रहे ना????

आशना का सवाल सुनकर वीरेंदर एक दम चौंक गया. हालाँकि बाहर काफ़ी अंधेरा था मगर चाँद की चाँदनी मे दोनो एक दूसरे की आँखो में देख सकते थे.

वीरेंदर: तुम्हे ऐसा क्यूँ लग रहा है????

आशना: शाम को भी जब आप गहर पर आए तो एक दम से अपने कमरे मे चले गये और फिर डिन्नर के दौरान भी आप खोए खोए से लग रहे थे.

वीरेंदर: ऐसी कोई बात नहीं है. शायद आज बहुत दिन बाद ऑफीस गया था तो काम की थकान के कारण ऐसा हो रहा है.

आशना ने वीरेंदर का हाथ पकड़ लिया और बोली: कहीं आप मुझ से किसी बात को लेकर नज़राज़ तो नहीं हैं.

वीरेंदर का हाथ पकड़ते ही आशना के जिस्म मे खून की रवानगी एक दम तेज़ हो गई और अफ़रोडियासिक ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया. आशना एक दम से मदहोश हो गई.

उसका मन चाहा के वो एकदम वीरेंदर से लिपट जाए मगर वीरेंदर ने उस से अपना हाथ छुड़ाया और बोला: आओ वहाँ चेयर पर बैठते हैं.

लॉन मे रखी चेयर पर दोनो आमने सामने बैठ गये.

वीरेंदर: तुमसे भला मैं क्यूँ नाराज़ होऊँगा. मेरे लिए तुम अपना सब कुछ छोड़ कर मेरे साथ चली आई. मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात है.

आशना(एमोशनल होकर): मेरा सब कुछ तो यहीं है वीरेंदर. मैने कुछ भी नहीं छोड़ा, हां यहाँ आकर बहुत कुछ पाया ज़रूर है.

वीरेंदर आशना की आँखो मे देखने लगा. आशना शर्मा गई और आँखें झुका ली. अचानक से आशना को कुछ याद आया और वो चौंक कर खड़ी हो गई.

वीरेंदर: क्या हुआ????

आशना: मैं जब से देल्ही आई हूँ मैं तो भूल ही गई, मैने तो ना ही प्रिया से बात की और ना ही त्रिवेणी से.

वीरेंदर: प्रिया को तो मैं जनता हूँ लेकिन यह त्रिवेणी कॉन है???

आशना: मेरी फ्रेंड है और आप को इस के आगे जानने की कोई ज़रूरत नहीं है.

वीरेंदर: क्यूँ, क्या वो तुम से ज़्यादा खूबसूरत है????

आशना: आप भी ना बस, जब देखो एक ही बात. पता नहीं इतना बड़ा बिज़्नेस कैसे संभाल लिया, आपको तो कोई आशिक होना चाहिए था.

वीरेंदर: चाहिए था से क्या मतलब??? हम तो आशिक हैं आपके, कोई शक???

आशना: कोई शक नहीं बट आप यहीं बैठ कर वेट करें, मैं उन दोनो से बात करके जल्द ही आती हूँ.

वीरेंदर: ऐसी क्या प्राइवेट बात है जो तुम मुझसे दूर जाकर करना चाहती हो.

आशना(मुस्कुरकर): है कुछ लड़कियों वाली बातें.

वीरेंदर: गंदी कहीं की.

आशना, वीरेंदर को आँखें दिखाकर हँसते हुए उस से दूर चली गई.

सबसे पहले आशना ने प्रिया का नंबर. डाइयल किया. एक ही बेल में प्रिया ने फोन उठा लिया.

आशना: कम से कम बेल तो बजने देती.

प्रिया: आशना तू???

आशना: तो और कॉन समझी थी तू.

प्रिया: यार कब से तेरे जीजू के फोन का वेट कर रही हूँ. थोड़ी देर पहले फोन किया तो बोले कि अभी बिज़ी हूँ, 5 मिनट मैं फोन करता हूँ. इस लिए जैसे ही बेल बजी, मैने झट से फोन उठा लिया बिना नंबर. देखे.

आशना: अच्छा जी, इतनी बेकरारी???

प्रिया: और नहीं तो क्या??? तुझे पता है दो दिन बाद हम शादी करने वाली हैं.

आशना: वाउ कोंग्रथस, बट इतनी जल्दी, मेरा मतलब यह सब अचानक कैसे??

प्रिया: हां यार, आक्च्युयली आइ आम प्रेग्नेंट फॉर वन मंत.

आशना: क्या????? मेरा मतलब यह सब कैसे हुआ????

प्रिया: जैसे सब होती हैं यार, सेक्स करने से.

आशना: शट अप आंड बी सीरीयस. यार कम से कम शादी तो कर लेते पहले.

प्रिया: तो परसो कर रहे हैं ना.

आशना: पागल हो तुम दोनो, एनीवे कोंग्रथस. जीज़ को मेरी तरफ से विश कर देना.

प्रिया: और सुना, आज कैसे याद आ गई. आशना: प्रिया ऐसे क्यूँ बोल रही हो यार, तुम जानती हो कि मैं तुम्हे कितना मिस करती हूँ.

प्रिया: सेम हियर यार. तुम्हारी कदर अब पता लगी है. आइ विश वी विल मीट अगेन.

आशना: तो कभी देल्ही आओ ना.

प्रिया: ज़रूर आउन्गि और जब भी आउन्गि तुमसे ज़रूर मिलूंगी. अच्छा फोन रख तुम्हारे जीजू का फोन आ रहा है.

आशना: अच्छा सुन, डॉक्टर. बीना का एक कार असिदेंट में देहांत हो गया यह बताने के लिए तुम्हे फोन किया था.

प्रिया: क्या???????इसका मतलब तुम्हारे कुछ करने से पहले ही वो भगवान को प्यारी हो गई.

आशना: यार ऐसे तो मत बोलो.

प्रिया: आए मेडम, बी प्रॅक्टिकल. मैं यकीन के साथ कह सकती हूँ कि इस वक्त तुम जिस दलदल में छटपटा रही हो उसमे सारा कीचड़ उस बीना ने ही भरा होगा.

आशना: दलदल?????

प्रिया: आशना, तुम जानती हो कि मैं क्या कहना चाहती हूँ. बाकी सब छोड़ो तुम जल्दी से वीरेंदर की शादी करवाकर बॅंगलॉर वापस आ जाओ.

आशना: वीरेंदर की शादी तो मैं जल्द से जल्द करवा दूँगी लेकिन शायद मैं अब कभी बॅंगलॉर नहीं आ पाउन्गी.

प्रिया: लेकिन क्यूँ????

आशना: सोच रही हूँ कि पापा के घर चली जाउ और वहीं पेर सेट्ल हो जाऊ.

प्रिया: और जॉब???

आशना: उसका जुगाड़ भी हो जाएगा. वीरेंदर से कहलवाकर एलेक्ट्रॉनिक्स का एक छोटा मोटा बिज़्नेस खोल लूँगी.

प्रिया: अच्छा चल अब रखती हूँ, तेरे जीज़ बार बार फोन कर रहे हैं, कहीं नाराज़ ना हो जाएँ.

आशना: बाइ प्रिया, टेक केयर आंड बेस्ट विशस फॉर युवर मॅरेज.

प्रिया: थॅंक्स यू, आइ विश यू वुड बी हियर वित मी फॉर माइ मॅरेज.

आशना: इट ईज़ नोट पासिबल प्रिया, अदरवाइज़, यू डॉन'ट हॅव टू अस्क.

प्रिया: चल बाइ आंड कॉंटॅक्ट में रहियो.

आशना: बाइ और आशना ने फोन काट दिया.

आशना (मन में): प्रिया तुझे क्या बताऊ, बीना बेशक चली गई लेकिन जाते जाते अपने पीछे बहुत सारे राज़ छोड़ गई है जिन्हे सुलझाने में मुझे पता नही कितना वक्त लग जाए. हॅपी मॅरीड लाइफ टू बोत ऑफ यू.

आशना ने मोबाइल पर टाइम देखा तो 9:45 हुए थे. आशना ने त्रिवेणी का नंबर. डाइयल किया. हर बार की तरह उसने फोन उठाने में काफ़ी समय लगाया.

फोन उठाते हे, त्रिवेणी बोली: आ गई मेरी याद मेडम को.

आशना: अरे आपकी याद तो दिल से जाती ही नहीं, आप तो मेरी रूह में बस गयी हैं मिस त्रिवेणी.

त्रिवेणी: ओह माइ गॉड, आशना आर यू इन लव????

आशना: व्हाट?????

त्रिवेणी: देखो तुम भी मेरी तरह शायराना अंदाज़ में बात करने लगी हो, कोंग्रथस.

आशना: फॉर व्हाट???

त्रिवेणी: अरे यार, तुम भी किसी से प्यार करने लगी हो, उस के लिए कोंग्रथस बोल रही हूँ.

आशना: तुम इतने यकीन से कैसे कह सकती हो.

त्रिवेणी: अरे जानेमन, हम तो आपकी रग रग से वाकिफ़ हैं.

आशना: अच्छा जी, तो बताइए कॉन होगा वो???

त्रिवेणी: जो भी होगा, लेकिन इतना ज़रूर कह सकती हूँ कि होगा तो वो कोई मर्द ही.

आशना: व्हाट???

त्रिवेणी: मेडम, आइ नो यू आर नोट आ लेज़्बीयन, अदरवाइज़, हम दोनो...........आइ थिंक यू बेटर अंडरस्टॅंड.

त्रिवेणी के ऐसा कहने से आशना शरमा दी.

आशना(झूठा गुस्सा दिखाते हुए):जस्ट शट अप, आइ आम नोट लेसबो.

त्रिवेणी: यही तो गम रहेगा हमे ज़िंदगी भर जानेमन. और सुना क्या नाम है उस खुशनसीब का जिसे तू अपना दिल दे बैठी है.

आशना: है कोई, लेकिन इतना जान ले कि वो लड़का ही है, तेरी तरह उच्च विचार नहीं हैं मेरे.

त्रिवेणी: चल देर से ही सही लेकिन तुझे अपने सपनों का राजकुमार मिला तो सही.

आशना: वो तो है.

त्रिवेणी: तो फिर शादी का क्या इरादा है?????

आशना: बहुत जल्द.

त्रिवेणी: हाई राम, इतनी भी क्या जल्दी है. थोड़ा ठहर जा, नेक्स्ट ईयर हमारी भी शादी है. साथ ही हनिमून पर चलेंगे.

आशना: हनिमून और तेरे साथ, ना बाबा ना. तुम्हारा कोई भरोसा नहीं, तुम मेरे वाले को भी फसा लो वहीं पर.

त्रिवेणी: अरे यार तुझ जैसी हसीन लड़की को छोड़ कर वो मेरे पास क्यूँ आएगा????

आशना: अच्छा????? जानती नहीं कि कॉलेज में सारे लड़के तुझे ही देख कर आहें भरते थे.

त्रिवेणी: अरे यार मत याद दिला वो दिन, कुछ कुछ होता है.

आशना: हाहहहः, तू नहीं सुधरेगी.

त्रिवेणी: अभी बिगड़ी ही कहाँ हूँ जानेमन.

आशना: अच्छा याद है तुझे, कॉलेज का वो फर्स्ट डे, जब एक सीनियर ने तुझे प्रपोज़ किया था और तुमने क्या जवाब दिया था.

त्रिवेणी: उस लड़के को कैसे भूल सकती हूँ यार, उस के कारण ही तो सारे कॉलेज के लड़के मेरे पीछे पड़ गये थे.

आशना: तो तेरा जवाब सुनकर तो कोई भी पीछे पड़ जाता. तूने जब उस से कहा कि "सॉरी भैया, मैं इसी कॉलेज में ही किसी और को दिल दे बैठी हूँ". उस वक्त उस बेचारे की हालत देख कर मेरी तो हँसी ही निकला जाती.

त्रिवेणी: यार मैने तो उसे यूँ ही कह दिया था लेकिन उस कमिने ने सारे कॉलेज में खबर फैला दी थी कि मैं इसी कॉलेज के एक लड़के को दिल दे बैठी हूँ. अगले दिन से सारे कॉलेज के लड़कों का नक्शा ही बदल गया था. सब बेचारे अपने अपने दिल में मान बैठे कि शायद वो खुशनसीब वो तो नहीं.

आशना: लेकिन तू तो वहाँ के ही एक जूनियर डॉक्टर. से दिल लगा बैठी थी.

त्रिवेणी: और अब वो जूनियर डॉक्टर. देल्ही का एक मशहूर डॉक्टर. बन गया है.

त्रिवेणी: वो सब छोड़, पहले यह बता कि वो खुशनसीब कॉन है जिसे तू अपना दिल दे बैठी है???

आशना: बता दूँगी , बता दूँगी, इतनी जल्दी क्या है????तुमने भी तो मुझे अपने अफेयर के बारे में दो साल के बाद बताया था.

त्रिवेणी: यार, मैं तुम्हे कैसे बताती कि मैं अपने ही लेक्चरर से प्यार कर बैठी हूँ.

आशना: आइ थिंक प्यार किसी से भी हो सकता है. हां मैं मानती हूँ कि काई बार दुनिया वालों को बताना मुश्किल हो जाता है.

त्रिवेणी: हाई मेरी जान, और पहेलियाँ मत भुजा और जल्दी से जीजू के बारे में बता दे और वो आइ-कार्ड वाला क्या चक्कर था????.

आशना: तो एक काम कर, कल जीजू को लेकर तुम होटेल..................... पर ही आ जाओ. तुम अपने जीजू से मिल भी लेना. इसी बहाने हमारी मुलाकात भी हो जाएगी और बातें भी.

त्रिवेणी: वाउ, व्हाट आ ग्रेट आइडिया. मैं सुबह ही विजय से बात करके तुम्हे बताती हूँ.

आशना: ओके चल बाइ.

त्रिवेणी: बाइ, कल मिलते हैं.
 
आशना ने फोन अपनी पॅंट की पॉकेट में डाला और वीरेंदर की तरफ आ गई. वीरेंदर चेयर पर बैठा बैठा ही सो गया था. उसकी टाँगें सामने रखे टेबल पर थी और गर्दन पीछे को लूड़की हुई थी.

आशना मुस्कुराइ और धीरे से बोली: देखो वीरेंदर, आज मेरा दिल कर रहा है कि आप मेरे साथ ढेर सारी बातें करो लेकिन आज शायद आपका मन नहीं है.

वीरेंदर, नींद की गोलियों के असर से बेसूध सो रहा था और वहीं आशना भी एक अजीब सी बेचैनी महसूस कर रही थी. उसका गला सूख रहा था, कान एक दम गरम हो उठे थे. दिमाग़ सुन्न पड़ना शुरू हो गया था. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है. उसका सारा बदन तप रहा था. उसका दिल कर रहा था कि वीरेंदर उसे ज़ोर से भींच ले तो ही उसे चैन मिलेगा.

आशना ने अपने आप को संभाला और बोली: वीरेंदर, उठिए और अंदर चलिए, क्या आज सारी रात यहीं सोने का इरादा है????.

वीरेंदर तो गहरी नींद में सो रहा था. उस पर तो आशना की बात का कोई असर भी नही हुआ. आशना ने वीरेंदर का हाथ पकड़ कर उसे उठाना चाहा लेकिन वीरेंदर जैसा बलशाली मर्द उस नाज़ुक परी की पूरी कोशिश के बावजूद भी हिल तक नहीं पाया. आशना खड़ी खड़ी ही वीरेंदर के उपर झुक गई और अपने दोनो हाथ वीरेंदर के सर के दोनो तरफ कुर्सी की बॅक पर रख दिए. दोनो के चेहरे एक दूसरे के नज़दीक थे. जैसे ही आशना ने आँखें उठाकर वीरेंदर के चेहरे की तरफ देखा, उसके जिस्म की आग एकदम भड़क उठी. उसका दिल किया कि वीरेंदर उसे जकड ले और उसके होंठो का रस पी ले.

आशना(वीरेंदर की तरफ नशीली आँखो से देखते हुए): वीरेंदर उठिए ना, देखो कितनी ठंड है, चलो अंदर चलें.

लेकिन वीरेंदर की तरफ से कोई हरकत ना हुई. आशना ने एक बार फिर से उसे जगाया लेकिन वीरेंदर टस से मस ना हुआ. आशना की हिम्मत बढ़ी और धड़कते दिल से उसने अपने सुलगते होंठ वीरेंदर के होंठो पर रख दिए. वीरेंदर के होंठो का स्पर्श होते ही आशना पीगाल गई और उस पर झुक कर उसे से सट गई. इस वक्त आशना पागलो की तरह वीरेंदर के होंठ चूसने में लगी थी. वीरेंदर की तरफ से हरकत हुई तो आशना फॉरन पीछे हट गई.

वीरेंदर ने अलसाए से आँखे खोली और आशना की तरफ देख कर बोला: आशना सोने दो ना यार बहुत नींद आ रही है और यह कहकर फिर से आँखें बंद कर ली.

आशना ने झट से वीरेंदर का हाथ पकड़ा और उसे कुर्सी से उठा दिया. वीरेंदर ने हड़बदा कर आँखे खोली और बोला: कि हुआ????

आशना(अपने आप को संभालते हुए): आप बाहर ही सो गये थे, चलिए अंदर चल कर सो जाइए.

वीरेंदर(गाड़ी ती तरफ देखते हुए): ओह, तुमने इतनी देर लगा दी, मुझे यहीं बैठे बैठे नींद लग गयी.

आशना(शरम से अभी भी उसके गाल गुलाबी थे): आक्च्युयली बात करते करते टाइम का पता ही नहीं चला.

आशना ने महसूस किया कि वीरेंदर को गहरी नींद के कारण शायद उसकी हरकत का पता नहीं लग पाया.आशना ने चैन की साँस ली और दोनो अंदर की तरफ चल दिए. उपेर जाकर आशना भी वीरेंदर के साथ उसके रूम मे घुस गई.

रागिनी अपने कमरे के बाहर खड़ी होकर यह सब देख रही थी.

बिहारी: कुतिया के खाने मैं नींद की गोलियाँ मिलाई थी लेकिन अभी तक तो इस पर उसका कोई असर ही नहीं दिख रहा.

रागिनी: आज का हमारा सारा प्लान फैल हो गया.

बिहारी: ऐसे कैसे फैल हो गया प्लान, अभी चान्स है. कुछ देर के बाद नींद के मारे जब यह अपने कमरे मैं जाएगी तब वीरेंदर ज़रूर नीचे आएगा, मुझे पूरा यकीन है.

रागिनी: वो कैसे???

बिहारी: तुम देखती जाओ, वो ज़रूर आएगा.

बिहारी ने रागिनी को यह तो बता दिया था कि उसने आशना के खाने में नींद की गोलियाँ मिला दी थी मगर यह नहीं बताया था कि उसने उसे और वीरेंदर को सेक्स वर्धक दवाई भी खिला दी है.

 
Back
Top