S
StoryPublisher
Guest
आशना(त्रिवेणी को आँख मारते हुए): वैसे, इतने सालों में कोई चान्स लगा कि नहीं????
त्रिवेणी: काश ऐसा हो पता मगर लगता है भगवान को इस कन्या पर अभी तक दया नहीं आई.
त्रिवेणी: तू अपनी सुना तुम दोनो तो एक ही घर में रहते हो.
आशना: अपनी भी स्टोरी तेरे जैसी है मगर हां उन्हे "प्लीज़" कर देती हूँ.
त्रिवेणी: अरे वाह, आख़िर फ्रेंड किसकी है.
आशना: तो इसका मतलब तुम भी???
त्रिवेणी: तो तुम्हे क्या लगा मुँह चलाना बस तुम्हे ही आता है????
आशना: यार तुम कैसे सारी बातें डाइरेक्ट बोल देती हो, मुझे तो शरम आती है.
त्रिवेणी: गन्ना चूस्ते शरम नहीं आती लेकिन नाम लेने में शरम आती है.
आशना: चल अब यहाँ से वरना तू थोड़े ही टाइम में मुझे भी बेशरम बना देगी और वैसे भी अगला प्रोग्राम मूवी का है तो कहीं लेट ना हो जाएँ.
यह कहकर आशना आगे चल दी.
त्रिवेणी: आए ज़ालिम प्यार में बेशर्मी ना दिखाई तो क्या प्यार किया.
आशना और त्रिवेणी जब टेबल पर पहुँचे तो देखा आइस क्रीम पिघलना शुरू हो गयी है.
आशना(त्रिवेणी की तरफ देखते हुए): ओह आइस क्रीम तो पिघल रही है, चलो जल्दी से खा लो.
त्रिवेणी: दट'स व्हाई आइ हेट आइस-क्रीम. मुझे तो कोन ही पसंद है.
टेबल पर बैठे सभी लोग त्रिवेणी की बात का मतलब समझ गये मगर सभी ने ऐसे बिहेव किया जैसे उन्होने वो बात सुनी ही नहीं.
त्रिवेणी: हे गाइस, अगर आपने मेरी बात इग्नोर कर दी है तो इट्स ओके बट अगर आपको सच में समझ नहीं आया तो मेरे ख़याल से मूवी कॅन्सल कर देते हैं.
सब त्रिवेणी की तरफ हैरानी से देखने लगे.
त्रिवेणी: मूवी देखने का कोई फ़ायदा नहीं होगा, घर जाकर पोगो देखो बच्चो.
त्रिवेणी की बात सुनकर सभी ठहाका लगा कर हंस दिए.
4:30 बजे के करीब सबने थियेटर चलने का प्रोग्राम बनाया. वीरेंदर ने पहले से ही बुकिंग करवा ली थी.
त्रिवेणी(वीरेंदर से): जीजू आप और विजय साथ में आइए, मैं अपनी बहना के साथ आ जाती हूँ.
वीरेंदर: मैने तो सोचा था तुम मेरे साथ चलोगि.
त्रिवेणी: ज़रूर चलती जीजू मगर विजय पर भरोसा नहीं है मुझे, सो नो रिस्क.
विजय: अच्छा अब मेरी खिंचाई शुरू.
त्रिवेणी(कान पकड़ते हुए): सॉरी वीजू.
विजय: यह बात तो माफ़ कर दी मगर मैं इस बात के लिए तुम्हे कभी माफ़ नहीं करूँगा कि तुमने आशना को मेरे साथ नहीं जाने दिया.
त्रिवेणी(कमर पर हाथ रख कर): व्हाट डू यू मीन, मिस्टर. विजय?????
आशना ने बीच में आकर उन दोनो की नोक झोंक ख़तम करवाई और सब लोग थियेटर की तरफ चल दिए. रास्ते में त्रिवेणी और आशना की चपड चपड चलती रही और वही दूसरी गाड़ी में वीरेंदर और विजय अपने अपने अफेर्स की बातें करते रहे. थियेटर कोई 15-20 मिनट की दूरी पर ही था. वीरेंदर ने टिकेट्स कलेक्ट की और सब अंदर की तरफ चल दिए.
आशना: वीरेंदर, हमारा सीट नंबर. क्या है????
वीरेंदर: लास्ट रो कॉर्नर सीट.
त्रिवेणी: वाउ जीजू यू आर सो रोमॅंटिक.
वीरेंदर: आपकी बहना के लिए तो कुछ भी कर सकता हूँ.
यह सुनकर आशना का दिल ज़ोर से धड़कने लगा.
त्रिवेणी: जीजू आप मेरे साथ बैठोगे या मेरी बहना के साथ.
आशना: यह मेरे साथ ही बैःटेंगे, तुम चाहो तो मेरे जीजू के साथ बैठ सकती हो.
त्रिवेणी: आइ थिंक आइ डॉन'ट हॅव ऑप्षन.
सब अपनी अपनी सीट पर बैठ गये. सबसे पहले वीरेंदर, उसके लेफ्ट में आशना फिर त्रिवेणी और सबसे आख़िर में विजय. पिछली सीट पर उन चारो के अलावा और कोई नहीं था. उनके अगली वाली रो भी खाली थी जबकि बाकी सारी सीट्स फुल थी.
आशना(धीमे से त्रिवेणी से): यार बड़ी अजीब बात है, सारा हाल फुल है मगर लास्ट को दोनो रोस खाली हैं. हमारे सिवा यहाँ कोई दिख नहीं रहा.
त्रिवेणी: काश यह ऐसे ही खाली रहें तो मज़ा आ जाए.
आशना: क्या मतलब?????
त्रिवेणी: थियेटर में गन्ना चूसने का मज़ा ही कुछ और होता है. पब्लिक प्लेस पर ऐसी हरकत रोमांच को चार गुना बढ़ा देती है.
आशना: शट अप यार, जब देखो मज़ाक, कभी तो सीरीयस हुआ करो.
त्रिवेणी: सीरियस????? अरे यार बाय्फ्रेंड के साथ मूवी देखने आई हो, पेरेंट्स के साथ मंदिर में नहीं. वैसे तुम्हे क्या लगता है वीरेंदर तुम्हे यहाँ मूवी दिखाने लाया होगा???
आशना: सब तुम्हारे जैसे नहीं होते मिस त्रिवेणी.
त्रिवेणी: सब मेरे जैसे नहीं होते, आइ नो आइ आम यूनीक बट सोच सबकी एक जैसी होती है. फरक सिर्फ़ इतना है कि मैं हिम्मत करती हूँ और लाइफ एंजाय करती हूँ.
आशना: इसे तुम एंजाय्मेंट कहती हो????
त्रिवेणी: चलो छोड़ यार, तुम नहीं समझोगी. बेचारा वीरेंदर कहाँ आकर फस गया.
आशना: बच्चू बाहर चल दिखाती हूँ तुझे.
त्रिवेणी: अरे यहीं पर दिखा दे उसे थोड़ा बहुत, देखना पागल हो जाएगा तेरे पीछे और तू भी इतनी मदहोश हो जाएगी कि रोज़ रोज़ थियेटर जाने का मन करेगा.
विजय: अरे यार तुम दोनो ने आपस में ही बातें करनी हैं तो कम से कम हम दोनो को साथ बैठने दो ताकि हम बोर ना हो जाएँ.
वीरेंदर ने भी विजय की बात का समर्थन किया.
त्रिवेणी(विजय से): सोच लो, फिर ना कहना कि मूवी अच्छी नहीं लगी.
विजय, त्रिवेणी की बात सुनकर झैन्प गया. क्यूंकी वो त्रिवेणी की बात का मतलब अच्छे से जानता था. आशना भी त्रिवेणी की बात का कुछ कुछ मतलब समझ गयी मगर वीरेंदर हैरान सा कभी आशना को, कभी त्रिवेणी को तो कभी विजय को देखता.
वीरेंदर: साथ बैठने से मूवी का अच्छा होने से क्या मतलब????
त्रिवेणी: जीजू मेरी बहना आप को सब बता देगी. डॉन'ट वरी, मैं आपके साथ अन्याय नहीं होने दूँगी.
वीरेंदर, कन्फ्यूज़्ड सा त्रिवेणी की बात का मतलब निकालने लगा.
आशना: इसकी बातों को मत सोचिए यह तो है ही ऐसी.
त्रिवेणी: आशना यू नो फर्स्ट इंप्रेशन ईज़ दा लास्ट इंप्रेशन आंड फर्स्ट इंप्रेशन में जीजू ने मेरे बारे में क्या कहा था मुझे बस उसी से मतलब है. तुम चाहे मेरी जितनी भी बुराई कर लो मगर जीजू के दिमाग़ में जो मेरी पहली छवि बनी है उसे मिटाने में बहुत टाइम लगेगा. वीरेंदर यह सुनकर एकदम झैन्प गया के आशना ने त्रिवेणी को होटेल के बाहर वाली बात बता दी है.