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“अब तुम दोनों नहीं बचोगे।” कमला रानी कड़वे स्वर में कह उठी–“तुमने हमें मारा, हमारा काम बिगाड़ा।”
मोमो जिन्न।” लक्ष्मण दास घबराकर बोला–“ये...।”
“इनकी फिक्र मत करो।” मोमो जिन्न ने मुंह बनाकर कहा-“मैं इनसे नहीं डरता।”
“ले...लेकिन हम तो डरते हैं।” सपन चड्ढा ने सूखे होंठों पर जीभ फेरी।
“तुम भी मत डरो। जब तक मैं हूं पास में, तब तक ये दोनों तुम्हें छू भी नहीं सकते।” ।
तुम हमारे पास ही रहना ।” सपन चड्ढा घबराया हुआ था।
फिक्र क्यों करते हो। तुम तो हमारे यार हो।”
“हां, हम तो तुम्हारे यार हैं।” दोनों शराफत से सिर हिलाने लगे।
इस मोमो जिन्न की भी खैर नहीं। एक बार हम जथूरा की जमीन पर पहुंच जाएं—फिर...।” ।
“मुंह बंद रखो।” मोमो जिन्न तीखे स्वर में बोला–“वरना तुम दोनों पछताओगे, अगर मुझे गुस्सा आ गया तो ।”
“चुप रह मखानी ।” कमला रानी ने कहा-“मोमो जिन्न को तो बाद में सीधा करेंगे।”
| तभी कांच की पनडुब्बी में कम्पन-सा हुआ। सब संभल गए। नजरें पानी की तरफ उठ गईं।
| वो पनडुब्बी धीरे-धीरे पानी में सरकने लगी।
मार दयो जथूरो ने तो।” बांकेलाल राठौर कह उठा–“जथूरो क्या बढ़ियो चीजो पेश करो हो।” ।
“दिन के उजाले में पनडुब्बी के बाहर, समुद्र के भीतरी हिस्से के और भी शानदार दृश्य नजर आएंगे।” मोमो जिन्न बोला। |
“तुम पहले भी ऐसी पनडुब्बी में सफर कर चुके हो?” मोना चौधरी ने पूछा।। ।
“कई बार। मेरा तो तुम लोगों की दुनिया में आना-जाना लगा ही रहता है।” मोमो जिन्न ने कहा।
“तो क्या जथूरा के पूर्वजन्म को, समुद्र से ही रास्ता जाता है?” नगीना ने पूछा। ।
“हर तरफ का रास्ता है जथूरा के पास। मैंने हर तरफ का रास्ता तय किया हुआ है।”
“कितनी देर का रास्ता है, कितना वक्त लगेगा हमें?”
रात पूरी। फिर दिन आएगा तो, आधे दिन के बाद हम पूर्वजन्म की जथूरा की धरती पर पहुंच जाएंगे।”
लम्बा रास्ता है।”
“तुम बैठ क्यों नहीं जाते?” पारसनाथ बोला।
जिन्न को कभी भी थकावट नहीं होती।” मोमो जिन्न ने कहा।
खड़े रहो। म्हारे को चौकीदारों की भी जरूरतो हौवे ।”
पनडुब्बी की रफ्तार अब धीरे-धीरे तेज होने लगी थी। सबकी नजरें पानी के बाहर लगी थीं। मोमो जिन्न के हाथ की उंगली से निकलने वाली रोशनी ही, अंधेरे में उनका सहारा बनी हुई थी।
तभी वहां बेहद शांत और भारी आवाज गूंजी। “मुझे खुशी है कि आप लोग हमारी दुनिया की तरफ बढ़ रहे
“ये कौन है?” देवराज चौहान के माथे पर बल पड़े। उसने मोमो जिन्न को देखा।
जथूरा महान है।” मोमो जिन्न फौरन कह उठा“उससे महान कोई दूसरा नहीं है।”
ये जथूरा का आवाज होईला बाप?”
अंम थारे को ‘वड' दयो जथूरो।” बांकेलाल राठौर गुर्रा उठा।
लगता है भंवर सिंह जथूरा से मिलने को बहुत बेताब है।” उस आवाज में खुशनुमा भाव थे।
“स्वागत है भंवर सिंह अगर मैं तुम्हारे किसी काम आ सका परंतु मैं जथूरा नहीं, उसका सेवक हूं।”
मोमो जिन्न।” लक्ष्मण दास घबराकर बोला–“ये...।”
“इनकी फिक्र मत करो।” मोमो जिन्न ने मुंह बनाकर कहा-“मैं इनसे नहीं डरता।”
“ले...लेकिन हम तो डरते हैं।” सपन चड्ढा ने सूखे होंठों पर जीभ फेरी।
“तुम भी मत डरो। जब तक मैं हूं पास में, तब तक ये दोनों तुम्हें छू भी नहीं सकते।” ।
तुम हमारे पास ही रहना ।” सपन चड्ढा घबराया हुआ था।
फिक्र क्यों करते हो। तुम तो हमारे यार हो।”
“हां, हम तो तुम्हारे यार हैं।” दोनों शराफत से सिर हिलाने लगे।
इस मोमो जिन्न की भी खैर नहीं। एक बार हम जथूरा की जमीन पर पहुंच जाएं—फिर...।” ।
“मुंह बंद रखो।” मोमो जिन्न तीखे स्वर में बोला–“वरना तुम दोनों पछताओगे, अगर मुझे गुस्सा आ गया तो ।”
“चुप रह मखानी ।” कमला रानी ने कहा-“मोमो जिन्न को तो बाद में सीधा करेंगे।”
| तभी कांच की पनडुब्बी में कम्पन-सा हुआ। सब संभल गए। नजरें पानी की तरफ उठ गईं।
| वो पनडुब्बी धीरे-धीरे पानी में सरकने लगी।
मार दयो जथूरो ने तो।” बांकेलाल राठौर कह उठा–“जथूरो क्या बढ़ियो चीजो पेश करो हो।” ।
“दिन के उजाले में पनडुब्बी के बाहर, समुद्र के भीतरी हिस्से के और भी शानदार दृश्य नजर आएंगे।” मोमो जिन्न बोला। |
“तुम पहले भी ऐसी पनडुब्बी में सफर कर चुके हो?” मोना चौधरी ने पूछा।। ।
“कई बार। मेरा तो तुम लोगों की दुनिया में आना-जाना लगा ही रहता है।” मोमो जिन्न ने कहा।
“तो क्या जथूरा के पूर्वजन्म को, समुद्र से ही रास्ता जाता है?” नगीना ने पूछा। ।
“हर तरफ का रास्ता है जथूरा के पास। मैंने हर तरफ का रास्ता तय किया हुआ है।”
“कितनी देर का रास्ता है, कितना वक्त लगेगा हमें?”
रात पूरी। फिर दिन आएगा तो, आधे दिन के बाद हम पूर्वजन्म की जथूरा की धरती पर पहुंच जाएंगे।”
लम्बा रास्ता है।”
“तुम बैठ क्यों नहीं जाते?” पारसनाथ बोला।
जिन्न को कभी भी थकावट नहीं होती।” मोमो जिन्न ने कहा।
खड़े रहो। म्हारे को चौकीदारों की भी जरूरतो हौवे ।”
पनडुब्बी की रफ्तार अब धीरे-धीरे तेज होने लगी थी। सबकी नजरें पानी के बाहर लगी थीं। मोमो जिन्न के हाथ की उंगली से निकलने वाली रोशनी ही, अंधेरे में उनका सहारा बनी हुई थी।
तभी वहां बेहद शांत और भारी आवाज गूंजी। “मुझे खुशी है कि आप लोग हमारी दुनिया की तरफ बढ़ रहे
“ये कौन है?” देवराज चौहान के माथे पर बल पड़े। उसने मोमो जिन्न को देखा।
जथूरा महान है।” मोमो जिन्न फौरन कह उठा“उससे महान कोई दूसरा नहीं है।”
ये जथूरा का आवाज होईला बाप?”
अंम थारे को ‘वड' दयो जथूरो।” बांकेलाल राठौर गुर्रा उठा।
लगता है भंवर सिंह जथूरा से मिलने को बहुत बेताब है।” उस आवाज में खुशनुमा भाव थे।
“स्वागत है भंवर सिंह अगर मैं तुम्हारे किसी काम आ सका परंतु मैं जथूरा नहीं, उसका सेवक हूं।”