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"नीलकंठ की कोई नई बात?” ___
“नहीं अभी तक तो वो दोबारा मिन्नो में नहीं आया। तुम्हें बताने को मेरे पास कुछ है।"
"कहो।"
“तवेरा मुझसे ब्याह करने को तैयार है। सफर के दौरान उसने ये बात मुझसे कही।"
"ये तो अच्छी खबर है।"
“तवेरा से नई बात मुझे पता चली। तवेरा ने देवा-मिन्नो को इस बात के लिए तैयार कर लिया है कि वो जथूरा तक पहुंचकर जथूरा को खत्म कर दें। इसके लिए उसने देवा-मिन्नो को कीमती पत्थरों का बोरा देने और उन्हें उनकी दुनिया में पहुंचाने का वादा किया है। तवेरा कहती है कि देवा-मिन्नो बहुत लालची हैं।" यंत्र से गरुड़ की महीन आवाज निकली।
“असम्भव।" सोबरा के होंठों से निकला।
"क्या मतलब?”
“न तो तवेरा ऐसी है न ही देवा-मिन्नो।"
"ये बात मुझे तवेरा ने स्वयं कही है।"
“कुछ तो गड़बड़ है गरुड़।"
"कैसी गड़बड़?"
"मुझे पूरा यकीन है कि तवेरा अपने पिता को बहुत चाहती है। वो ऐसा कभी नहीं चाहेगी और देवा-मिन्नो भी ऐसे नहीं हैं कि कीमती पत्थरों के लालच में जथूरा की जान लेने को तैयार हो जाएं।” सोबरा ने सोच-भरे स्वर में कहा।
“तवेरा ने ये बातें मुझसे कही है। वो झूठ क्यों कहेगी।"
“तुमने तवेरा के सामने कोई बेवकूफी तो नहीं कर दी।"
"कैसी बेवकफी?"
"कि वो पहचान गई हो कि तुम मुझे खबरें दे रहे हो।"
"क्या तुम्हें लगता है कि मैं ऐसा करूंगा?"
“तवेरा के साथ, करीबी क्षणों में तुमने ये सब उगल दिया हो कि तुम मुझे खबरें देते हो।"
“गलत बात मत कहो। क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं?" गरुड़ का नाराजगी-भरा स्वर यंत्र से निकला।
“भरोसा है, परंतु ये सब बहुत अजीब हो रहा है।"
"तुम ये ही सब तो चाहते थे।"
“परंतु मैं जथूरा की मौत नहीं चाहता। उसे कैद रखने से उसकी तकलीफ ज्यादा बढ़ेगी।"
“ये मेरी नहीं, तवेरा, देवा-मिन्नो की योजना है।" सोबरा के चेहरे पर सोचें दौड़ रही थीं। वो बोला।
"तुम तवेरा के पास ही रहने की चेष्टा करो।"
“वो मेरे पास ही है। सिर्फ मुझ पर ही भरोसा कर रही है। वो मुझे चाहने लगी है। जब जथूरा मर जाएगा तो तवेरा मुझसे शादी कर लेगी। तब जथरा की हर चीज का मालिक मैं बन जाऊंगा। उसके बाद तुम जैसे कहोगे, जथुरा की नगरियों का मैं वैसा ही करूंगा। यानी कि करूंगा मैं, परंतु हुक्म तुम्हारा होगा।"
“मुझे तुमसे यही आशा है गरुड़ । तुम मेरे बेटे की तरह हो। मेरे बाद सब कुछ तुम्हारा ही तो है।"
“तुमने मुझसे वादा कर रखा है कि अपने अंतिम वक्त में तुम अपनी सारी शक्तियां, नगरी, सब कुछ मुझे दोगे।"
“मैं अभी भी अपने वादे पर कायम हूं और कायम ही रहूंगा।"
“अब मैं बाद में बात करूंगा।"
"ठीक है।" बातचीत समाप्त हो गई।
सोबरा ने यंत्र का बटन दबाकर वापस जेब में रखा और बड़बड़ा उठा।
'गलत हो रहा है। बहुत कुछ गलत हो रहा है।' सोबरा बेचैनी-भरे अंदाज में कमर पर हाथ बांधे टहलने लगा। पेशानी पर बल नजर आ रहे थे। होंठ भिंचे हुए थे। यही वो वक्त था, जब मनीराम ने भीतर प्रवेश करते हुए कहा।
"आज आप महल से बाहर नहीं निकले। खबर आई है कि कोटरा जाति वाले लोग आपसे कुछ कहना चाहते हैं। वो सुबह से ही आपके आने के इंतजार में अपने गांव में इकट्ठे हुए पड़े हैं।"
सोबरा आगे बढ़कर कुर्सी पर जा बैठा। तभी मनीराम, सोबरा के माथे पर बल देखकर बोला।
“आप कुछ परेशान लग रहे हैं।"
"बात ही ऐसी है मनीराम।" सोबरा ने उसे देखा।
"मैं भी तो जानूं।”
“उलझन ही उलझन है। कुछ भी समझ नहीं आ रहा। असम्भव बातें सामने आ रही हैं। गरुड़ ने खबर दी है कि तवेरा अपने पिता जथूरा की मौत चाहती है, ताकि हर चीज की मालकिन बन सके।"
“तवेरा ऐसी नहीं है।"
“गरुड़ कहता है कि तवेरा ने कीमती पत्थर की बोरी और देवा-मिन्नो को उनकी दुनिया में पहुंचा देने की एवज में, जथूरा को खत्म करा देने का सौदा किया है। देवा-मिन्नो तिलिस्मी पहाड़ी में प्रवेश करके, जथूरा को तलाश करके उसे मार देंगे।"
मनीराम के चेहरे पर असहमति के भाव दिखने लगे।
"आपका मतलब देवा-मिन्नो जथुरा को आजाद कराने नहीं, उसे खत्म करने तिलिस्मी पहाड़ी पर जा रहे हैं।"
“गरुड़ ने ऐसी ही खबर दी।” सोबरा बोला। मनीराम गम्भीर नजर आने लगा।
"मुझे लगता है जैसे आपके खिलाफ चाल खेली जा रही है।"
“नहीं अभी तक तो वो दोबारा मिन्नो में नहीं आया। तुम्हें बताने को मेरे पास कुछ है।"
"कहो।"
“तवेरा मुझसे ब्याह करने को तैयार है। सफर के दौरान उसने ये बात मुझसे कही।"
"ये तो अच्छी खबर है।"
“तवेरा से नई बात मुझे पता चली। तवेरा ने देवा-मिन्नो को इस बात के लिए तैयार कर लिया है कि वो जथूरा तक पहुंचकर जथूरा को खत्म कर दें। इसके लिए उसने देवा-मिन्नो को कीमती पत्थरों का बोरा देने और उन्हें उनकी दुनिया में पहुंचाने का वादा किया है। तवेरा कहती है कि देवा-मिन्नो बहुत लालची हैं।" यंत्र से गरुड़ की महीन आवाज निकली।
“असम्भव।" सोबरा के होंठों से निकला।
"क्या मतलब?”
“न तो तवेरा ऐसी है न ही देवा-मिन्नो।"
"ये बात मुझे तवेरा ने स्वयं कही है।"
“कुछ तो गड़बड़ है गरुड़।"
"कैसी गड़बड़?"
"मुझे पूरा यकीन है कि तवेरा अपने पिता को बहुत चाहती है। वो ऐसा कभी नहीं चाहेगी और देवा-मिन्नो भी ऐसे नहीं हैं कि कीमती पत्थरों के लालच में जथूरा की जान लेने को तैयार हो जाएं।” सोबरा ने सोच-भरे स्वर में कहा।
“तवेरा ने ये बातें मुझसे कही है। वो झूठ क्यों कहेगी।"
“तुमने तवेरा के सामने कोई बेवकूफी तो नहीं कर दी।"
"कैसी बेवकफी?"
"कि वो पहचान गई हो कि तुम मुझे खबरें दे रहे हो।"
"क्या तुम्हें लगता है कि मैं ऐसा करूंगा?"
“तवेरा के साथ, करीबी क्षणों में तुमने ये सब उगल दिया हो कि तुम मुझे खबरें देते हो।"
“गलत बात मत कहो। क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं?" गरुड़ का नाराजगी-भरा स्वर यंत्र से निकला।
“भरोसा है, परंतु ये सब बहुत अजीब हो रहा है।"
"तुम ये ही सब तो चाहते थे।"
“परंतु मैं जथूरा की मौत नहीं चाहता। उसे कैद रखने से उसकी तकलीफ ज्यादा बढ़ेगी।"
“ये मेरी नहीं, तवेरा, देवा-मिन्नो की योजना है।" सोबरा के चेहरे पर सोचें दौड़ रही थीं। वो बोला।
"तुम तवेरा के पास ही रहने की चेष्टा करो।"
“वो मेरे पास ही है। सिर्फ मुझ पर ही भरोसा कर रही है। वो मुझे चाहने लगी है। जब जथूरा मर जाएगा तो तवेरा मुझसे शादी कर लेगी। तब जथरा की हर चीज का मालिक मैं बन जाऊंगा। उसके बाद तुम जैसे कहोगे, जथुरा की नगरियों का मैं वैसा ही करूंगा। यानी कि करूंगा मैं, परंतु हुक्म तुम्हारा होगा।"
“मुझे तुमसे यही आशा है गरुड़ । तुम मेरे बेटे की तरह हो। मेरे बाद सब कुछ तुम्हारा ही तो है।"
“तुमने मुझसे वादा कर रखा है कि अपने अंतिम वक्त में तुम अपनी सारी शक्तियां, नगरी, सब कुछ मुझे दोगे।"
“मैं अभी भी अपने वादे पर कायम हूं और कायम ही रहूंगा।"
“अब मैं बाद में बात करूंगा।"
"ठीक है।" बातचीत समाप्त हो गई।
सोबरा ने यंत्र का बटन दबाकर वापस जेब में रखा और बड़बड़ा उठा।
'गलत हो रहा है। बहुत कुछ गलत हो रहा है।' सोबरा बेचैनी-भरे अंदाज में कमर पर हाथ बांधे टहलने लगा। पेशानी पर बल नजर आ रहे थे। होंठ भिंचे हुए थे। यही वो वक्त था, जब मनीराम ने भीतर प्रवेश करते हुए कहा।
"आज आप महल से बाहर नहीं निकले। खबर आई है कि कोटरा जाति वाले लोग आपसे कुछ कहना चाहते हैं। वो सुबह से ही आपके आने के इंतजार में अपने गांव में इकट्ठे हुए पड़े हैं।"
सोबरा आगे बढ़कर कुर्सी पर जा बैठा। तभी मनीराम, सोबरा के माथे पर बल देखकर बोला।
“आप कुछ परेशान लग रहे हैं।"
"बात ही ऐसी है मनीराम।" सोबरा ने उसे देखा।
"मैं भी तो जानूं।”
“उलझन ही उलझन है। कुछ भी समझ नहीं आ रहा। असम्भव बातें सामने आ रही हैं। गरुड़ ने खबर दी है कि तवेरा अपने पिता जथूरा की मौत चाहती है, ताकि हर चीज की मालकिन बन सके।"
“तवेरा ऐसी नहीं है।"
“गरुड़ कहता है कि तवेरा ने कीमती पत्थर की बोरी और देवा-मिन्नो को उनकी दुनिया में पहुंचा देने की एवज में, जथूरा को खत्म करा देने का सौदा किया है। देवा-मिन्नो तिलिस्मी पहाड़ी में प्रवेश करके, जथूरा को तलाश करके उसे मार देंगे।"
मनीराम के चेहरे पर असहमति के भाव दिखने लगे।
"आपका मतलब देवा-मिन्नो जथुरा को आजाद कराने नहीं, उसे खत्म करने तिलिस्मी पहाड़ी पर जा रहे हैं।"
“गरुड़ ने ऐसी ही खबर दी।” सोबरा बोला। मनीराम गम्भीर नजर आने लगा।
"मुझे लगता है जैसे आपके खिलाफ चाल खेली जा रही है।"