S
StoryPublisher
Guest
“मैं जथूरा की परवाह नहीं करता।”
जाता हूं, अब जो होगा, उसका जिम्मेवार तू ही होगा।” उसके बाद पोतेबाबा की आवाज नहीं आई।
जगमोहन की नजरें वहां नजर आ रहे व्यक्तियों के चेहरों पर फिर रही थीं, वो उस व्यक्ति को ढूंढ़ रहा था, जिसका चेहरा उसके मस्तिष्क ने देखी थी। जिसके लिए वो यहां आया था। तभी उसकी निगाह बार काउंटर के पीछे वाली दीवार पर पड़ी, जहां पर बड़ी सी वो ही वाल क्लॉक लगी हुई थी, जो उसके मस्तिष्क ने पहले ही देखी थी। उस घड़ी पर इस वक्त 11.15 हो रहे थे। अजीब बातें हो रहीं थीं उसके साथ।
अदृश्य पोतेबाबा जाने कैसी रहस्यमय ताकत था, धुएं में जिसकी आकृति नजर आने लगती थी। वो उस पर नजर रख रहा था। वो यहां आया तो पोतेबाबा भी उसके पास आ पहुंचा। वो चाहता था कि वो इन कामों में दखल न दे। होने वाले हादसे को रोकने की चेष्टा न करे।
जथूरा! ये सब उसकी पूर्वजन्म की दुनिया में से थे।
जगमोहन ये सोचकर सिहर-सा उठा कि क्या ये सब बातें पुनः उसके पूर्वजन्म में जाने की तैयारी के लिए हो रही हैं? परंतु वो अकेला तो कभी नहीं गया, पूर्वजन्म में । हमेशा देवराज चौहान के साथ गया। मोना चौधरी भी तब पूर्व जन्म के रास्तों पर ही मिलती थी। बाकी लोग भी तो होते थे। फिर इस बार वो ही क्यों? इसका जवाब जगमोहन के पास नहीं था। जगमोहन ने पुनः घड़ी को देखा। 11.20 हो चुके थे। उसे घड़ी में तब 11.30 का हुआ वक्त दिखा था। परेशान-से जगमोहन ने हर तरफ निगाहें घुमाईं। अगले ही पल जगमोहन का दिल धड़का। आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ।
वो ही व्यक्ति जिसे उसका मस्तिष्क पहले देख चुका था, आ रहा था इस तरफ।
जगमोहन उसे देखता रह गया। उस व्यक्ति के चेहरे पर गम्भीरता और क्रोध नजर आ रहा था। वो उसके पास वाले स्टूल पर आ बैठा और हजार का नोट बार टैंडर की तरफ बढ़ाता बोला।
“लार्ज पैग, बढ़िया ब्रांड का ।”
जगमोहन ने महसूस किया कि उसने पहले भी पी रखी है। | इस वक्त जगमोहन का दिमाग तेजी से काम कर रहा था। ये व्यक्ति अब यहां से सीधा अपने घर जाएगा और अपनी पत्नी और बच्चे को शूट कर देगा।
लेकिन जगमोहन इस हादसे को होने से रोकना चाहता था। उस औरत और बच्चे की जिंदगी बचाना चाहता था।
हैलो ।” एकाएक जगमोहन ने कहा।
उस व्यक्ति ने जगमोहन को देखा।
“आपका पैग।”
उस व्यक्ति ने नजरें घुमाईं तो बार मैन को तैयार गिलास रखते पाया। उसने गिलास उठाया और एक ही सांस में खत्म करके पुनः बार मैन से कह उठा।
“एक और।” साथ ही उसने हजार का नोट खाली गिलास के | नीचे रख दिया।
। “लोग मुझे पालकी वाला के नाम से जानते हैं।” जगमोहन बोला–“मैं भविष्यज्ञाता हूं
।”
“तो?” उसने बेमन से कहा।
“मैं लोगों के चेहरों का हाल देखकर, उनका भविष्य और भूतकाल बता सकता हूं।”
बकवास है।” नशे में उसकी आवाज भारी हो रही थी।
“आजमा लो।” जगमोहन सतर्कता से उससे बात कर रहा था।
कैसे?”
मैं तुम्हारे बारे में कई बातें बता सकता हूं।” ।
जाता हूं, अब जो होगा, उसका जिम्मेवार तू ही होगा।” उसके बाद पोतेबाबा की आवाज नहीं आई।
जगमोहन की नजरें वहां नजर आ रहे व्यक्तियों के चेहरों पर फिर रही थीं, वो उस व्यक्ति को ढूंढ़ रहा था, जिसका चेहरा उसके मस्तिष्क ने देखी थी। जिसके लिए वो यहां आया था। तभी उसकी निगाह बार काउंटर के पीछे वाली दीवार पर पड़ी, जहां पर बड़ी सी वो ही वाल क्लॉक लगी हुई थी, जो उसके मस्तिष्क ने पहले ही देखी थी। उस घड़ी पर इस वक्त 11.15 हो रहे थे। अजीब बातें हो रहीं थीं उसके साथ।
अदृश्य पोतेबाबा जाने कैसी रहस्यमय ताकत था, धुएं में जिसकी आकृति नजर आने लगती थी। वो उस पर नजर रख रहा था। वो यहां आया तो पोतेबाबा भी उसके पास आ पहुंचा। वो चाहता था कि वो इन कामों में दखल न दे। होने वाले हादसे को रोकने की चेष्टा न करे।
जथूरा! ये सब उसकी पूर्वजन्म की दुनिया में से थे।
जगमोहन ये सोचकर सिहर-सा उठा कि क्या ये सब बातें पुनः उसके पूर्वजन्म में जाने की तैयारी के लिए हो रही हैं? परंतु वो अकेला तो कभी नहीं गया, पूर्वजन्म में । हमेशा देवराज चौहान के साथ गया। मोना चौधरी भी तब पूर्व जन्म के रास्तों पर ही मिलती थी। बाकी लोग भी तो होते थे। फिर इस बार वो ही क्यों? इसका जवाब जगमोहन के पास नहीं था। जगमोहन ने पुनः घड़ी को देखा। 11.20 हो चुके थे। उसे घड़ी में तब 11.30 का हुआ वक्त दिखा था। परेशान-से जगमोहन ने हर तरफ निगाहें घुमाईं। अगले ही पल जगमोहन का दिल धड़का। आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ।
वो ही व्यक्ति जिसे उसका मस्तिष्क पहले देख चुका था, आ रहा था इस तरफ।
जगमोहन उसे देखता रह गया। उस व्यक्ति के चेहरे पर गम्भीरता और क्रोध नजर आ रहा था। वो उसके पास वाले स्टूल पर आ बैठा और हजार का नोट बार टैंडर की तरफ बढ़ाता बोला।
“लार्ज पैग, बढ़िया ब्रांड का ।”
जगमोहन ने महसूस किया कि उसने पहले भी पी रखी है। | इस वक्त जगमोहन का दिमाग तेजी से काम कर रहा था। ये व्यक्ति अब यहां से सीधा अपने घर जाएगा और अपनी पत्नी और बच्चे को शूट कर देगा।
लेकिन जगमोहन इस हादसे को होने से रोकना चाहता था। उस औरत और बच्चे की जिंदगी बचाना चाहता था।
हैलो ।” एकाएक जगमोहन ने कहा।
उस व्यक्ति ने जगमोहन को देखा।
“आपका पैग।”
उस व्यक्ति ने नजरें घुमाईं तो बार मैन को तैयार गिलास रखते पाया। उसने गिलास उठाया और एक ही सांस में खत्म करके पुनः बार मैन से कह उठा।
“एक और।” साथ ही उसने हजार का नोट खाली गिलास के | नीचे रख दिया।
। “लोग मुझे पालकी वाला के नाम से जानते हैं।” जगमोहन बोला–“मैं भविष्यज्ञाता हूं
।”
“तो?” उसने बेमन से कहा।
“मैं लोगों के चेहरों का हाल देखकर, उनका भविष्य और भूतकाल बता सकता हूं।”
बकवास है।” नशे में उसकी आवाज भारी हो रही थी।
“आजमा लो।” जगमोहन सतर्कता से उससे बात कर रहा था।
कैसे?”
मैं तुम्हारे बारे में कई बातें बता सकता हूं।” ।