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ये तुम्हारा नहीं मेरा काम है।” मेरी वजह से तुम...।” “मोना चौधरी से मेरी बहुत पुरानी पहचान है। तुम इस बात को नहीं समझोगे लक्ष्मण दास ।”
लक्ष्मण दास देवराज चौहान को देखने लगा। मोना चौधरी का क्या करोगे?
” अभी कह नहीं सकता।
” “अभी तुम मेरे पास, यहीं पर रहो।” लक्ष्मण दास बोला–“सपन का मैनेजर मोना चौधरी के बारे में कोई नई खबर दे सकता है। तुम्हारे काम की हो सकती है।”
“मेरा तुम्हारे पास रहना ठीक नहीं। मैं कहीं होटल में रहूंगा और बता दूंगा कि किस होटल में हूं।”
“जैसी तुम्हारी मर्जी।” लक्ष्मण दास के चेहरे पर चिंता थी। देवराज चौहान बंगले से चला गया।
लक्ष्मण दास जब उसे छोड़कर वापस कमरे में आया तो मोमो जिन्न को चार फीट का, कुर्सी पर बैठे देखा।
“तुम तो कमाल के एक्टर हो। कितनी अच्छी तरह से तुमने देवा को बेवकूफ बनाया ।” ।
“देवराज चौहान को गलत बात कहना मुझे अच्छा नहीं लगा।” लक्ष्मण दास ने नाराजगी से कहा।
“अपने प्यारे मोमो जिन्न के लिए तुम्हें सब कुछ करना पड़ेगा लक्ष्मण दास ।” मोमो जिन्न ने बेढंगे-से दांत फाड़े।
सब कुछ नहीं। सिर्फ यही काम।
” । सब कुछ।” मोमो जिन्न हंसा ।।
तुमने सिर्फ इसी काम के लिए कहा था।”
अब तुम मेरे गुलाम हो। वो ही करोगे जो मैं कहूंगा, वरना अभी तुम्हारा दिमाग घुमा दूंगा तो तुम पागलों की तरह हरकतें करने लगोगे। अपने कपड़े उतारकर, नंगे होकर सड़कों पर दौड़ते फिरोगे।”
नहीं, ऐसा मत करना।” लक्ष्मण दास घबरा उठा।
तुम्हें मेरी बातें मानती रहनी होंगी।
” कब तक?
” जब तक तुम जिंदा हो ।”
“पहले तो तुमने कहा था कि एक ही काम...।”
नए गुलाम को धीरे-धीरे फांसना पड़ता है। एक ही बार में सब कुछ कह दूंगा तो तुम जीते जी ही मर जाओगे।”
| लक्ष्मण दास ने सूखे होंठों पर जीभ फेरी।
“अब मैं तुम्हें बताऊंगा कि मिन्नो, कब कहां मिलेगी और तुम ये खबर देवा को दोगे।”
तुम दोनों में खून-खराबा कराना चाहते हो ।
” तुम्हें एतराज है?" मोमो जिन्न ने उसे घूरा।
म...मुझे क्यों एतराज होगा।” लक्ष्मण दास घबराकर बोला।
देवराज चौहान करोलबाग स्थित होटल में ठहरा और लक्ष्मण दास को होटल के बारे में फोन पर बताया। इस दौरान जगमोहन का फोन भी आया था, परंतु उसने जगमोहन को नहीं बताया कि वो किस मामले में है। क्योंकि देवराज चौहान जानता था कि मोना चौधरी के बारे में सुनकर जगमोहन चिंता करेगा।
अब देवराज चौहान को तलाश थी मोना चौधरी की। परंतु मोना चौधरी का पता-ठिकाना वो नहीं जानता था। लेकिन पारसनाथ के रेस्टोरेंट के बारे में उसे पता था।
देवराज चौहान ने टैक्सी ली और पारसनाथ के रेस्टोरेंट जा पहुंचा। शाम के 3.30 हो रहे थे और रेस्टोरेंट में लंच चल रहा था। देवराज चौहान ने लंच का ऑर्डर दिया।
बीस मिनट बाद उसे लंच सर्व कर दिया गया।
इसी के साथ ही रेस्टोरेंट ने अब लंच टाइम समाप्त करने की घोषणा कर दी थी। शाम के चार बजने जा रहे थे। खाने के दौरान देवराज चौहान की निगाह हर तरफ घूम रही थी कि पारसनाथ दिख जाए, परंतु पारसनाथ कहीं भी नजर न आया। देवराज चौहान ने लंच समाप्त किया।
लक्ष्मण दास देवराज चौहान को देखने लगा। मोना चौधरी का क्या करोगे?
” अभी कह नहीं सकता।
” “अभी तुम मेरे पास, यहीं पर रहो।” लक्ष्मण दास बोला–“सपन का मैनेजर मोना चौधरी के बारे में कोई नई खबर दे सकता है। तुम्हारे काम की हो सकती है।”
“मेरा तुम्हारे पास रहना ठीक नहीं। मैं कहीं होटल में रहूंगा और बता दूंगा कि किस होटल में हूं।”
“जैसी तुम्हारी मर्जी।” लक्ष्मण दास के चेहरे पर चिंता थी। देवराज चौहान बंगले से चला गया।
लक्ष्मण दास जब उसे छोड़कर वापस कमरे में आया तो मोमो जिन्न को चार फीट का, कुर्सी पर बैठे देखा।
“तुम तो कमाल के एक्टर हो। कितनी अच्छी तरह से तुमने देवा को बेवकूफ बनाया ।” ।
“देवराज चौहान को गलत बात कहना मुझे अच्छा नहीं लगा।” लक्ष्मण दास ने नाराजगी से कहा।
“अपने प्यारे मोमो जिन्न के लिए तुम्हें सब कुछ करना पड़ेगा लक्ष्मण दास ।” मोमो जिन्न ने बेढंगे-से दांत फाड़े।
सब कुछ नहीं। सिर्फ यही काम।
” । सब कुछ।” मोमो जिन्न हंसा ।।
तुमने सिर्फ इसी काम के लिए कहा था।”
अब तुम मेरे गुलाम हो। वो ही करोगे जो मैं कहूंगा, वरना अभी तुम्हारा दिमाग घुमा दूंगा तो तुम पागलों की तरह हरकतें करने लगोगे। अपने कपड़े उतारकर, नंगे होकर सड़कों पर दौड़ते फिरोगे।”
नहीं, ऐसा मत करना।” लक्ष्मण दास घबरा उठा।
तुम्हें मेरी बातें मानती रहनी होंगी।
” कब तक?
” जब तक तुम जिंदा हो ।”
“पहले तो तुमने कहा था कि एक ही काम...।”
नए गुलाम को धीरे-धीरे फांसना पड़ता है। एक ही बार में सब कुछ कह दूंगा तो तुम जीते जी ही मर जाओगे।”
| लक्ष्मण दास ने सूखे होंठों पर जीभ फेरी।
“अब मैं तुम्हें बताऊंगा कि मिन्नो, कब कहां मिलेगी और तुम ये खबर देवा को दोगे।”
तुम दोनों में खून-खराबा कराना चाहते हो ।
” तुम्हें एतराज है?" मोमो जिन्न ने उसे घूरा।
म...मुझे क्यों एतराज होगा।” लक्ष्मण दास घबराकर बोला।
देवराज चौहान करोलबाग स्थित होटल में ठहरा और लक्ष्मण दास को होटल के बारे में फोन पर बताया। इस दौरान जगमोहन का फोन भी आया था, परंतु उसने जगमोहन को नहीं बताया कि वो किस मामले में है। क्योंकि देवराज चौहान जानता था कि मोना चौधरी के बारे में सुनकर जगमोहन चिंता करेगा।
अब देवराज चौहान को तलाश थी मोना चौधरी की। परंतु मोना चौधरी का पता-ठिकाना वो नहीं जानता था। लेकिन पारसनाथ के रेस्टोरेंट के बारे में उसे पता था।
देवराज चौहान ने टैक्सी ली और पारसनाथ के रेस्टोरेंट जा पहुंचा। शाम के 3.30 हो रहे थे और रेस्टोरेंट में लंच चल रहा था। देवराज चौहान ने लंच का ऑर्डर दिया।
बीस मिनट बाद उसे लंच सर्व कर दिया गया।
इसी के साथ ही रेस्टोरेंट ने अब लंच टाइम समाप्त करने की घोषणा कर दी थी। शाम के चार बजने जा रहे थे। खाने के दौरान देवराज चौहान की निगाह हर तरफ घूम रही थी कि पारसनाथ दिख जाए, परंतु पारसनाथ कहीं भी नजर न आया। देवराज चौहान ने लंच समाप्त किया।