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और जथूरा की कोशिश को मैंने नाकाम करना है।” जगमोहन गम्भीर स्वर में कह उठा–“वैसे मुझे मोना चौधरी से ऐसा कोई मतलब नहीं, वो जिंदा रहें या मरें। परंतु मैं उसे इसलिए बचाऊंगा कि उसकी हत्या के बारे में मेरे को पहले ही पता चल गया है।”
मोन्नो चौधरी से मिल्ले बोत देर हो गई म्हारे को, क्यों छोरे?”
“हां बाप ।” रुस्तम राव के चेहरे पर गम्भीरता थी।
तुम जाने क्यों मुझे रोक रहे थे उस पर गोली चलाने को।” जगमोहन बोला-
“वो कौन था?" ।
“मुझे क्या पता, अभी वो वक्त आया नहीं कि तुम्हें बता सकें वो कौन था।” सोहनलाल ने कहा।
“वो मेरे पास से निकला था।” जगमोहन होंठ सिकोड़कर कह उठा–“मैं उसका चेहरा नहीं देख सका। पीठ ही देखी...”
“म्हारी बात सुन ।” बांकेलाल ने कहा-“थारे को सोहनलालो रोको हो, गोली चलाने से।”
“हां ।”
“ईब अपणों दिमाग में भर लयो कि थारो को उस पर गोली नेई चलानी ।”
“मैं भी कुछ ऐसा ही सोच रहा हूं। सोहनलाल नहीं चाहता कि मैं उस पर गोली चलाऊं तो अवश्य कोई बात होगी। लेकिन मैं उसे कुछ न कहूंगा तो वो मोना चौधरी पर गोली चला देगा। जथूरा का हादसा सफल हो जाएगा।”
“यो बात तो हौवे हीं ।”
ये सब बातें ।” सोहनलाल ने कहा-“मौके पर सोची जानी चाहिए। इस वक्त कोई फायदा न होगा।”
मुझे मोना चौधरी से पहले ही बात कर लेनी चाहिए। मैं उसके पीछे नहीं रहूंगा।”
उससे क्या होगा?”
मैं मोना चौधरी को सतर्क करूंगा कि कोई उसे मारने की कोशिश करने वाला है।” ।
वो थारी बात की परवाह न करो हो ।”
“मेरे ख्याल में वो मेरी बात गम्भीरता से सुनेगी। मैं उसे मैट्रो स्टेशन की उन सीढ़ियों की तरफ ही नहीं जाने दूंगा। जहां उस पर गोली चलाई जानी है। मैं उस वक्त मोना चौधरी की जगह हीं बदल
“अंम भी थारे संग दिल्ली चलो हो ।”
“बेशक चलो।” जगमोहन ने कहा-“हमें ये हादसा हर हाल में रोकना है।”
कोशिश तो पुरों करो हो अंम—आगे भगवान मालिको हौवे ।”
सोहनलाल ने खामोश बैठे रुस्तम राव से कहा। “तुम क्यों चुप हो रुस्तम?” ।
बाप, आपुन को कुछ ठीक नेई लग रेईला ।
” क्या मतलब?” ।
“इधर आपुन सब लोगों का इकट्ठा होना। उधर कल मोना चौधरी के पास पौंचना। पोतेबाबा ठीक कहेला कि आपुन लोग पूर्वजन्म की धरती पर फिर जाईला । आपून लोग नई मुसीबत में फंसेला बाप ।”
“तुम पोतेबाबा की बात पर भरोसा कर रहे हो ।” सोहनलाल ने कहा।
“क्यों नेई करेला बाप ।
” “हम उसे नहीं जानते—वो ।”
उसे पूरी तरह झूठा मत समझेला बाप। आधी बातें तो वो सच कहेला ही ।” ।
“छोरे। तू पूर्वोजन्मो के सफर की परवाह क्यों करेला। इधर जथूरा को ‘वड' देगा अंम ।”
“मैं रुस्तम की बात से सहमत हूं।” जगमोहन ने कहा-“मेरी हरकतें पूर्वजन्म के सफर की तैयारी हो सकती हैं। लेकिन इस बारे में हमें ज्यादा नहीं सोचना है। हमें सोचना है कल के बारे में। मोना चौधरी को बचाने के बारे में।”
“मैं प्लेन में टिकटें बुक कराता हूं। ट्रेबल एजेंसी वाला अपना यार है। उसे कहता हूं।” सोहनलाल ने कहा।
म्हारी भी करा लयो। भूलो मत जाइयो ।”
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मोन्नो चौधरी से मिल्ले बोत देर हो गई म्हारे को, क्यों छोरे?”
“हां बाप ।” रुस्तम राव के चेहरे पर गम्भीरता थी।
तुम जाने क्यों मुझे रोक रहे थे उस पर गोली चलाने को।” जगमोहन बोला-
“वो कौन था?" ।
“मुझे क्या पता, अभी वो वक्त आया नहीं कि तुम्हें बता सकें वो कौन था।” सोहनलाल ने कहा।
“वो मेरे पास से निकला था।” जगमोहन होंठ सिकोड़कर कह उठा–“मैं उसका चेहरा नहीं देख सका। पीठ ही देखी...”
“म्हारी बात सुन ।” बांकेलाल ने कहा-“थारे को सोहनलालो रोको हो, गोली चलाने से।”
“हां ।”
“ईब अपणों दिमाग में भर लयो कि थारो को उस पर गोली नेई चलानी ।”
“मैं भी कुछ ऐसा ही सोच रहा हूं। सोहनलाल नहीं चाहता कि मैं उस पर गोली चलाऊं तो अवश्य कोई बात होगी। लेकिन मैं उसे कुछ न कहूंगा तो वो मोना चौधरी पर गोली चला देगा। जथूरा का हादसा सफल हो जाएगा।”
“यो बात तो हौवे हीं ।”
ये सब बातें ।” सोहनलाल ने कहा-“मौके पर सोची जानी चाहिए। इस वक्त कोई फायदा न होगा।”
मुझे मोना चौधरी से पहले ही बात कर लेनी चाहिए। मैं उसके पीछे नहीं रहूंगा।”
उससे क्या होगा?”
मैं मोना चौधरी को सतर्क करूंगा कि कोई उसे मारने की कोशिश करने वाला है।” ।
वो थारी बात की परवाह न करो हो ।”
“मेरे ख्याल में वो मेरी बात गम्भीरता से सुनेगी। मैं उसे मैट्रो स्टेशन की उन सीढ़ियों की तरफ ही नहीं जाने दूंगा। जहां उस पर गोली चलाई जानी है। मैं उस वक्त मोना चौधरी की जगह हीं बदल
“अंम भी थारे संग दिल्ली चलो हो ।”
“बेशक चलो।” जगमोहन ने कहा-“हमें ये हादसा हर हाल में रोकना है।”
कोशिश तो पुरों करो हो अंम—आगे भगवान मालिको हौवे ।”
सोहनलाल ने खामोश बैठे रुस्तम राव से कहा। “तुम क्यों चुप हो रुस्तम?” ।
बाप, आपुन को कुछ ठीक नेई लग रेईला ।
” क्या मतलब?” ।
“इधर आपुन सब लोगों का इकट्ठा होना। उधर कल मोना चौधरी के पास पौंचना। पोतेबाबा ठीक कहेला कि आपुन लोग पूर्वजन्म की धरती पर फिर जाईला । आपून लोग नई मुसीबत में फंसेला बाप ।”
“तुम पोतेबाबा की बात पर भरोसा कर रहे हो ।” सोहनलाल ने कहा।
“क्यों नेई करेला बाप ।
” “हम उसे नहीं जानते—वो ।”
उसे पूरी तरह झूठा मत समझेला बाप। आधी बातें तो वो सच कहेला ही ।” ।
“छोरे। तू पूर्वोजन्मो के सफर की परवाह क्यों करेला। इधर जथूरा को ‘वड' देगा अंम ।”
“मैं रुस्तम की बात से सहमत हूं।” जगमोहन ने कहा-“मेरी हरकतें पूर्वजन्म के सफर की तैयारी हो सकती हैं। लेकिन इस बारे में हमें ज्यादा नहीं सोचना है। हमें सोचना है कल के बारे में। मोना चौधरी को बचाने के बारे में।”
“मैं प्लेन में टिकटें बुक कराता हूं। ट्रेबल एजेंसी वाला अपना यार है। उसे कहता हूं।” सोहनलाल ने कहा।
म्हारी भी करा लयो। भूलो मत जाइयो ।”
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