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कुछ देर बाद शौहरी की फुसफसाहट पुनः कानों में पड़ी। मखानी, तेरा काम बन गया।
” कैसे?”
“तू कमला रानी की सहायता कर। लेकिन भौरी कहती है कि तू कहीं काम भूलकर कमला रानी के साथ न चिपक जाए।”
काम के बाद चिपलूंगा।”
“ठीक है। चल तेरे को कमला रानी के पास ले चलता हूं।”
“तेरे को पता है वो कहां है?”
सब पता है। क्या नहीं पता मेरे को ।”
“वो मुझे पहचानेगी कैसे?”
मैं हूं तेरे साथ, फिक्र क्यों करता है। लेकिन पहले काम। उसके बाद बाकी कुछ।”
सुन लिया—सुन लिया। बार-बार मत कह ।”
…………………………………………………
मोना चौधरी ने कॉफी बनाई और पूंट भरा। तभी कॉलबेल बजी।।
कॉफी का प्याला थामे, मोना चौधरी दरवाजे के पास पहुंची और दरवाजा खोला।
सामने जगमोहन खड़ा था। दोनों की नजरें मिलीं।
कमला रानी।” तभी भौरी का स्वर मोना चौधरी के कानों में पड़ा-“ये मखानी है, तेरे को बताया था मैंने।” ।
हां, याद है।” मोना चौधरी के चेहरे पर मुस्कान उभरी।
कैसा लगा ये तेरे को?” ।
“बढ़िया।” मोना चौधरी जगमोहन को देखते मुस्करा रही थी।
“सोएगी इसके साथ?” ।
“मैं तो अभी से बे-सब्र हो रही हूं।” मोना चौधरी ने गहरी सांस ली। ।
“लेकिन पहले तेरे को मिन्नो को पकड़ना है। एक बार वो तेरे हाथों से बच निकली।” ।
अब सामने पड़ी तो वो भाग नहीं सकेगी।”
मखानी तेरी सहायता करेगा उसे पकड़ने में। इसमें जग्गू जैसा दम और चालाकियां भरी पड़ी हैं।”
“समझ गई।” कमला रानी ने सिर हिलाया और जगमोहन से बोली-“भीतर आ जाओ मखानी ।” ।
जगमोहन मुस्कराया और भीतर आ गया। कमला रानी ने दरवाजा बंद किया।
तू मुझे अच्छा लगा।” कमला रानी मुस्करा रही थी।
“तू भी मुझे अच्छी लगी।” मखानी बोला–“मैं तो तेरे को पाने के लिए कब का तड़प रहा हूं।”
आग इधर भी लगी है।” कमला रानी ने तड़प भरे स्वर में कहा।।
“तो सोचती क्या है, अभी...।” ।
भौरी कहती है कि पहले मिन्नो को पकड़ना है। उसके बाद हम प्यार करेंगे।”
“मिन्नो है कहां?” ।
पता नहीं। सुबह मेरे सामने पड़ी थी। मेरा मुकाबला नहीं कर सकी तो भाग निकली।”
“तूने उसे जकड़ लेना था, वो...।”
मौका ही कहां दिया उसने । फुर्तीली है। पर अब नहीं छोडूंगी। एक बार सामने आने दे।”
जगमोहन आगे बढ़कर कुर्सी पर बैठता कह उठा।
मैं ये काम जल्दी पूरा करना चाहता हूं, कमला रानी।”
“मुझे तो तेरे से भी जल्दी है, पर क्या करू, भौरी की बात माननी पड़ती है। तू शौहरी की बात नहीं मानता?”
“मानता हूं। वो दोनों भी चक्कर में हैं।”
चक्कर?”
शौहरी और भौरी भी मिलने के चक्कर में हैं। एक-दूसरे को चारा फेंकते रहते हैं।” मखानी हंसकर बोला।
“ऐ मखानी।” शौहरी की फुसफुसाहट कानों में पड़ी-“तू मेरी पोल क्यों खोलता है?"
“इसमें गलत क्या है?”
“नहीं, तू मेरी बात नहीं करेगा। करेगा तो आगे से तू मेरे बारे में कुछ नहीं जान पाएगा।”
“ठीक है। तेरी बात नहीं करता।”
“शौहरी ने मना कर दिया, उसकी बात क्यों की?” कमला रानी मुस्कराई। ।
“पागल है वो। तू बैठ मेरे पास बातें तो कर ही सकते हैं हम।
जब मैं जवान हुआ करता था तो बहुत मौज करता था।”
” कैसे?”
“तू कमला रानी की सहायता कर। लेकिन भौरी कहती है कि तू कहीं काम भूलकर कमला रानी के साथ न चिपक जाए।”
काम के बाद चिपलूंगा।”
“ठीक है। चल तेरे को कमला रानी के पास ले चलता हूं।”
“तेरे को पता है वो कहां है?”
सब पता है। क्या नहीं पता मेरे को ।”
“वो मुझे पहचानेगी कैसे?”
मैं हूं तेरे साथ, फिक्र क्यों करता है। लेकिन पहले काम। उसके बाद बाकी कुछ।”
सुन लिया—सुन लिया। बार-बार मत कह ।”
…………………………………………………
मोना चौधरी ने कॉफी बनाई और पूंट भरा। तभी कॉलबेल बजी।।
कॉफी का प्याला थामे, मोना चौधरी दरवाजे के पास पहुंची और दरवाजा खोला।
सामने जगमोहन खड़ा था। दोनों की नजरें मिलीं।
कमला रानी।” तभी भौरी का स्वर मोना चौधरी के कानों में पड़ा-“ये मखानी है, तेरे को बताया था मैंने।” ।
हां, याद है।” मोना चौधरी के चेहरे पर मुस्कान उभरी।
कैसा लगा ये तेरे को?” ।
“बढ़िया।” मोना चौधरी जगमोहन को देखते मुस्करा रही थी।
“सोएगी इसके साथ?” ।
“मैं तो अभी से बे-सब्र हो रही हूं।” मोना चौधरी ने गहरी सांस ली। ।
“लेकिन पहले तेरे को मिन्नो को पकड़ना है। एक बार वो तेरे हाथों से बच निकली।” ।
अब सामने पड़ी तो वो भाग नहीं सकेगी।”
मखानी तेरी सहायता करेगा उसे पकड़ने में। इसमें जग्गू जैसा दम और चालाकियां भरी पड़ी हैं।”
“समझ गई।” कमला रानी ने सिर हिलाया और जगमोहन से बोली-“भीतर आ जाओ मखानी ।” ।
जगमोहन मुस्कराया और भीतर आ गया। कमला रानी ने दरवाजा बंद किया।
तू मुझे अच्छा लगा।” कमला रानी मुस्करा रही थी।
“तू भी मुझे अच्छी लगी।” मखानी बोला–“मैं तो तेरे को पाने के लिए कब का तड़प रहा हूं।”
आग इधर भी लगी है।” कमला रानी ने तड़प भरे स्वर में कहा।।
“तो सोचती क्या है, अभी...।” ।
भौरी कहती है कि पहले मिन्नो को पकड़ना है। उसके बाद हम प्यार करेंगे।”
“मिन्नो है कहां?” ।
पता नहीं। सुबह मेरे सामने पड़ी थी। मेरा मुकाबला नहीं कर सकी तो भाग निकली।”
“तूने उसे जकड़ लेना था, वो...।”
मौका ही कहां दिया उसने । फुर्तीली है। पर अब नहीं छोडूंगी। एक बार सामने आने दे।”
जगमोहन आगे बढ़कर कुर्सी पर बैठता कह उठा।
मैं ये काम जल्दी पूरा करना चाहता हूं, कमला रानी।”
“मुझे तो तेरे से भी जल्दी है, पर क्या करू, भौरी की बात माननी पड़ती है। तू शौहरी की बात नहीं मानता?”
“मानता हूं। वो दोनों भी चक्कर में हैं।”
चक्कर?”
शौहरी और भौरी भी मिलने के चक्कर में हैं। एक-दूसरे को चारा फेंकते रहते हैं।” मखानी हंसकर बोला।
“ऐ मखानी।” शौहरी की फुसफुसाहट कानों में पड़ी-“तू मेरी पोल क्यों खोलता है?"
“इसमें गलत क्या है?”
“नहीं, तू मेरी बात नहीं करेगा। करेगा तो आगे से तू मेरे बारे में कुछ नहीं जान पाएगा।”
“ठीक है। तेरी बात नहीं करता।”
“शौहरी ने मना कर दिया, उसकी बात क्यों की?” कमला रानी मुस्कराई। ।
“पागल है वो। तू बैठ मेरे पास बातें तो कर ही सकते हैं हम।
जब मैं जवान हुआ करता था तो बहुत मौज करता था।”