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महाकाली--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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कुछ देर बाद शौहरी की फुसफसाहट पुनः कानों में पड़ी। मखानी, तेरा काम बन गया।

” कैसे?”

“तू कमला रानी की सहायता कर। लेकिन भौरी कहती है कि तू कहीं काम भूलकर कमला रानी के साथ न चिपक जाए।”

काम के बाद चिपलूंगा।”

“ठीक है। चल तेरे को कमला रानी के पास ले चलता हूं।”

“तेरे को पता है वो कहां है?”

सब पता है। क्या नहीं पता मेरे को ।”

“वो मुझे पहचानेगी कैसे?”

मैं हूं तेरे साथ, फिक्र क्यों करता है। लेकिन पहले काम। उसके बाद बाकी कुछ।”

सुन लिया—सुन लिया। बार-बार मत कह ।”

…………………………………………………

मोना चौधरी ने कॉफी बनाई और पूंट भरा। तभी कॉलबेल बजी।।

कॉफी का प्याला थामे, मोना चौधरी दरवाजे के पास पहुंची और दरवाजा खोला।

सामने जगमोहन खड़ा था। दोनों की नजरें मिलीं।

कमला रानी।” तभी भौरी का स्वर मोना चौधरी के कानों में पड़ा-“ये मखानी है, तेरे को बताया था मैंने।” ।

हां, याद है।” मोना चौधरी के चेहरे पर मुस्कान उभरी।

कैसा लगा ये तेरे को?” ।

“बढ़िया।” मोना चौधरी जगमोहन को देखते मुस्करा रही थी।

“सोएगी इसके साथ?” ।

“मैं तो अभी से बे-सब्र हो रही हूं।” मोना चौधरी ने गहरी सांस ली। ।

“लेकिन पहले तेरे को मिन्नो को पकड़ना है। एक बार वो तेरे हाथों से बच निकली।” ।

अब सामने पड़ी तो वो भाग नहीं सकेगी।”

मखानी तेरी सहायता करेगा उसे पकड़ने में। इसमें जग्गू जैसा दम और चालाकियां भरी पड़ी हैं।”

“समझ गई।” कमला रानी ने सिर हिलाया और जगमोहन से बोली-“भीतर आ जाओ मखानी ।” ।

जगमोहन मुस्कराया और भीतर आ गया। कमला रानी ने दरवाजा बंद किया।

तू मुझे अच्छा लगा।” कमला रानी मुस्करा रही थी।

“तू भी मुझे अच्छी लगी।” मखानी बोला–“मैं तो तेरे को पाने के लिए कब का तड़प रहा हूं।”

आग इधर भी लगी है।” कमला रानी ने तड़प भरे स्वर में कहा।।

“तो सोचती क्या है, अभी...।” ।

भौरी कहती है कि पहले मिन्नो को पकड़ना है। उसके बाद हम प्यार करेंगे।”

“मिन्नो है कहां?” ।

पता नहीं। सुबह मेरे सामने पड़ी थी। मेरा मुकाबला नहीं कर सकी तो भाग निकली।”

“तूने उसे जकड़ लेना था, वो...।”

मौका ही कहां दिया उसने । फुर्तीली है। पर अब नहीं छोडूंगी। एक बार सामने आने दे।”

जगमोहन आगे बढ़कर कुर्सी पर बैठता कह उठा।

मैं ये काम जल्दी पूरा करना चाहता हूं, कमला रानी।”

“मुझे तो तेरे से भी जल्दी है, पर क्या करू, भौरी की बात माननी पड़ती है। तू शौहरी की बात नहीं मानता?”

“मानता हूं। वो दोनों भी चक्कर में हैं।”

चक्कर?”

शौहरी और भौरी भी मिलने के चक्कर में हैं। एक-दूसरे को चारा फेंकते रहते हैं।” मखानी हंसकर बोला।

“ऐ मखानी।” शौहरी की फुसफुसाहट कानों में पड़ी-“तू मेरी पोल क्यों खोलता है?"

“इसमें गलत क्या है?”

“नहीं, तू मेरी बात नहीं करेगा। करेगा तो आगे से तू मेरे बारे में कुछ नहीं जान पाएगा।”

“ठीक है। तेरी बात नहीं करता।”

“शौहरी ने मना कर दिया, उसकी बात क्यों की?” कमला रानी मुस्कराई। ।

“पागल है वो। तू बैठ मेरे पास बातें तो कर ही सकते हैं हम।

जब मैं जवान हुआ करता था तो बहुत मौज करता था।”
 
“मौज तो मैंने भी की ।” कमला रानी बोली-“पर तेरे जितनी नहीं। मुझे कम ही मौके हाथ लगे।” ।

जवानी के वो दिन भी क्या दिन...।

” ठीक उसी समय कॉलबेल बजी।। दोनों ने दरवाजे की तरफ देखा। कौन आ गया?" मखानी बोला।

“तू पीछे कमरे में चला जा। मैं देखती हूं।” कमला रानी कॉफी का घूट भरके बोली।

जगमोहन उठा और पीछे वाले कमरे में चला गया।

कमला रानी ने कॉफी का मग टेबल पर रखा और दरवाजे की तरफ बढ़ गई। दरवाजा खोला, तो जोरों से चौंकी। फिर संभली ।

| सामने मोना चौधरी खड़ी थी।

“तो तू आ गई फिर ।” कमला रानी गुर्रा उठी।

तूने मुझे पलक झपकते ही घर से बेघर कर दिया ।” मोना चौधरी कठोर स्वर में बोली-“मेरी पहचान वाले मुझे पहचानने से इंकार कर रहे हैं। आखिर तू चाहती क्या है?”

कमला रानी मुस्कराई।

जो मैं चाहती हूं, वो ही होके रहेगा। तू अपने को बचा नहीं सकती मिन्नो ।”

मैं तेरे से आराम से बात करना चाहती हूं।”

“ठीक है, भीतर आ-जा। आराम से बात कर ले।”

मोना चौधरी उसे शक-भरी निगाहों से देखती भीतर आ गई। अपने ही घर में जैसे वो पराई हो गई थी।

कमला रानी ने दरवाजा बंद किया और पलटकर कह उठी। “ये तेरा ही घर है। आराम से बैठ ।”

होंठ भींचे मोना चौधरी ने कमला रानी को देखा। “एक मेहमान भी आया है, उससे नहीं मिलेगी।”

मेहमान ।”

मखानी ।” कमला रानी ऊंचे स्वर में बोली-“देख तो, कौन आया है।” ।

दूसरे कमरे से मखानी वहां आ पहुंचा। मोना चौधरी जगमोहन के डुप्लीकेट को देखते ही चौंकी।

इससे तो मैं रात मिला था।” मखानी बोला—“जब महाजन को उठाया था।”

मोना चौधरी के दांत भिंच गए।

मैं नहीं जानती थी कि तुम दोनों मिले हुए हो।”

“हम कालचक्र का ही हिस्सा हैं।” एकाएक कमला रानी बोली-“इसलिए हमारी तारें एक-दूसरे से बंधी हैं, क्यों मखानी?”

“तूने ठीक कहा कमला रानी।”

एकाएक मोना चौधरी को लगा, उसने यहां आकर गलती कर दी है। वो सतर्क हो चुकी थी।

“सारा झंझट ही तेरा और देवराज चौहान का है। दोनों में से एक मर जाए तो जथूरा खुश हो जाएगा ।” मखानी बोला।।

“लेकिन जथूरा की ताकत, पूर्व जन्म वाले इंसान पर तब काम करेगी, जब वो पूर्वजन्म में होगा। यही वजह है कि अभी तुम लोग बचे हुए हो।” कमला रानी मुस्कराई–“लेकिन अब तू फंस गई मोना चौधरी ।”

। “क्या मतलब?” मोना चौधरी ने क्रोध भरी नजरों से दोनों को देखा ।।
 
कमला रानी ने मखानी को देखा, आंखें नचाईं, फिर कह उठी।

चल मखानी इसे मतलब समझा देते हैं।” मोना चौधरी फुर्ती से दरवाजे की तरफ दौड़ी।

“वो देख–भागी...।” मखानी के होंठों से निकला।

मोना चौधरी दरवाजे तक पहुंच चुकी थी। परंतु दरवाजा खोलने का उसे मौका न मिल सका। | कमला रानी फुर्ती से उसके पास पहुंच चुकी थी और उसके सिर के बाल कसकर पकड़ लिए।

मोना चौधरी के होंठों से कराह निकली।

“अब तू नहीं भाग सकती। डरपोक कहीं की। मुकाबला नहीं कर सकती तो भागती है।”

तो तूने ही देवराज चौहान की पत्नी नगीना को उठाया था।” मोना चौधरी दांत किटकिटा उठी।

बहुत देर से समझी तू तो ।” कमला रानी हंसी।। मैंने महाजन को...।” पास पहुंचता मखानी कह उठा।।

“कहां हैं वे दोनों?” मोना चौधरी अपने बालों को छुड़ाने की चेष्टा में बोली।।

“ये तो हम तेरे को नहीं बताएंगे, लेकिन तेरे को भी वहीं पहुंचा देते हैं। फिर उसने पुकारा–“शौहरी ।”

“क्या है?” शौहरी की झल्लाहट भरी फुसफुसाहट उसके कानों में पड़ी।

बेहोश कर दे इसे?”

“तू बातें बहुत करता है और काम कम करता है।”

मेरा मतलब है इसे भी वहीं पहुंचाने का इंतजाम कर लिया है या फिर अभी...।” ।

“मैंने पिशाचों को बुला लिया है। वो पहुंचते ही होंगे। तू बेहोश कर मिन्नो को ।” |

मोना चौधरी खुद को आजाद नहीं करा पा रही थी। कमला रानी उसके सिर के बाल छोड़ने को तैयार नहीं थी और पकड़ ऐसी मजबूत थी कि बाल उखड़ जाए, परंतु कमला रानी की मुट्ठी ढीली न हो।

मखानी ने मोना चौधरी का सिर थामा और जोर से दरवाजे पर मारा। तेज आवाज उभरी।।

मोना चौधरी के होंठों से चीख निकली। | अगली बार मखानी ने एक साथ दो बार उसका सिर, दरवाजे से टकराया। बेदम होती मोना चौधरी उसी पल बेहोश होकर नीचे गिरती चली गई। कमला रानी ने उसके सिर के बाल छोड़ दिए थे।

| मखानी ने नीचे पड़ी मोना चौधरी को चैक किया।

वो बेहोश थी। कितना आसान था इस पर काबू पाना।” कह उठा मखानी।

“मौके की बात थी। पकड़ में आ गई। वरना कम नहीं है ये।” कमला रानी हंसी और मखानी को देखा।

ऐसे मत देख। अभी पिशाचों को आकर, इसे ले जाने दे। कुछ और इंतजार कर ले ।”

कमला रानी ने गहरी सांस ली। तभी कॉलबेल बजी। दोनों की नजरें मिलीं।

मखानी ने नीचे पड़ी मोना चौधरी को थोड़ा-सा इस तरफ घसीटा कि दरवाजा खुले तो वो दरवाजे की ओट में आ जाए। खुद भी उसके पास ही खड़ा हो गया और कमला रानी को दरवाजा खोलने का इशारा किया।

| कमला रानी ने दरवाजा खोला।।

सामने नंदराम खड़ा था। सामने के फ्लैट में रहने वाला नंदराम।

मोन्ना चौधरी सब ठीक तो है नी। बोत ठक-ठक की आवाजें आ रही थीं नी ।” ।

“ओह, नंदराम, माई डार्लिंग।” मोना चौधरी के चेहरे में, कमला रानी गहरी सांस लेकर कह उठी।।

माई डार्लिंग?” नंदराम चौंका–“वड़ी सब ठीक तो है नी ।”

“हां, मेरी जान सब ठीक है। तेरे पास दो बियर हैं, फ्रिज में। एकदम चिल्ड।”

“तेरे को कैसे पता नी?” नंदराम सकपकाया।

अभी मेरे को कहने वाला था कि मारते हैं बियर। तेरी बीवी घर पर नहीं है।”

तू तो सब जानती है वड़ी।”

ओह माई डार्लिंग–नंदराम ।”

नंदराम घबराकर दो कदम पीछे हुआ।

ये तेरे को आज किया हो गया है नी । तू मेरे को डार्लिंग बोल रही है।”

“ये ही तो तू चाहता है।” कमला रानी ने गहरी सांस ली–“आ, भीतर आ जा ।”

क...क्यों—नी?” नंदराम हड़बड़ाया। “मेरे पास दो बीयर हैं। एकदम ठंडी। पास-पास बैठ के बियर मारेंगे।”

वो—ठक-ठक...।”

वो भी करेंगे। ठक-ठक भी होगी। तू आ तो भीतर।”

नंदराम ने दोनों हाथों से पेट पकड़ लिया। वो पलटकर अपने फ्लैट के दरवाजे की तरफ बढ़ गया।

“नंदराम।” पीछे से कमला रानी ने पुकारा।

“सांई। मेरे पेट में मरोड़ उठ रहा है नी। तेरी बात सुनकर तबीयत बोत खराब हो गई।” दरवाजा खोला नंदराम घबराहट भरे स्वर में कह उठा–“मेरे कू दो दिन पूरा आराम करना पड़ेगा।” कहकर नंदराम ने दरवाजा बंद कर लिया।

कमला रानी ने भी दरवाजा बंद किया।

“तू तो बोत रोमांटिक बातें करती है।” मखानी मुस्कराकर कह उठा।

अपनी जवानी में मैं कम रोमांटिक नहीं थी। बस, बुढ़ापे ने सारा जोश ठंडा कर दिया था।” कमला रानी ने गहरी सांस ली।

अब तो फिर तू जवान हो गई है।”

कुछ देर बाद तेरे को जवानी का जलवा दिखाऊंगी।” कमला रानी ने आंख दबाकर कहा।।

मखानी ने ठंडी आह भरी। तभी कमरे में दो काली-काली परछाइयां नजर आने लगीं। फिर वो परछाइयां बेहोश पड़ी मोना चौधरी पर छा गईं।

देखते-ही-देखते मोना चौधरी का शरीर सिकुड़ने लगा। वो शरीर इस हद तक सिकुड़ गया कि बिंदु बनकर उन परछाइयों में गुम हो गया और वो परछाइयां लुप्त हो गईं।

अब वहां मोना चौधरी नहीं थी। मखानी और कमला रानी ने एक-दूसरे को देखा। “आ कमला रानी, मेरी बांहों में...।”
 
“मखानी।” उसी पल उसके कानों में, शौहरी की फुसफुसाहट पड़ी।

क्या है?" मखानी ने उखड़े स्वर में कहा। अब जान ले कि तेरे को अगला काम क्या करना...।”

मैं नहीं करूंगा।” मखानी गुस्से से चीखा।

क्या? तेरे को फिर बूढ़ा बना दूं।” ।

ऐसी जवानी का क्या फायदा कि तू मजे लेने नहीं देता। जवान बनाकर तू अपने काम ही लिए जा रहा है। मुझे भी अपना काम करने दे। पेट भरा हो तो मैं शांति से काम करूंगा तेरे ।”

बहुत बेसब्र है तू।”

“बूढ़े से जवान हुआ हूं, मैं चैक कर लें कि ये जवानी असली है कि नकली। बेचारी कमला रानी भी मेरे बिना तड़प-तड़प के जी रही है। उसकी आग भी तो बुझानी है। तेरे को अपने कामों की पड़ी है।”

“मेरे काम जब तक तू करेगा तब तक ही तेरी जवानी कायम रहेगी। ये बात समझ ले।”

जानता हूं मैं। अब तू चुप हो जा। मुझे ये काम कर लेने दे।

” कर ले ।”

तो क्या तू आंखें फाड़कर देखता रहेगा कि हम क्या कर रहे हैं। तू जा यहां से ।” मखानी झल्लाया।

“मैं नहीं जा सकता।”

क्यों?”

“जब तक तेरे भीतर हूं, तू जवान रहेगा। नहीं तो मर जाएगा। बोल जाऊँ?”

“नहीं। तू-तू मेरे भीतर ही रह।” मखानी घबराकर बोला। शौहरी की आवाज नहीं आई। मखानी का चेहरा पसीने से भरने लगा।

“क्या हुआ?” कमला रानी ने उसे देखा।

शौहरी ने ऐसी बात कही कि मैं ठंडा हो गया हूं।” मखानी ने मुंह लटकाकर कहा।

फिक्र क्यों करता है।” कमला रानी पास आ पहुंची—उसका हाथ थामा–“तेरे को अभी गर्म कर देती हूं।” ।

“हो गया गर्म ।” मखानी ने कहा और कमला रानी पर झपट पड़ा।

“मिल गई शांति?” शौहरी की आवाज मखानी के कानों में पड़ी।

“मजा आ गया। जवानी के वो दिन फिर से याद आ गए।” मखानी ने लम्बी आह भरकर कहा।।

“अब भी तो तू जवान है। जग्गू के रूप में है तू।” शौहरी ने शरारत भरे स्वर में कह।

ये तो कमला रानी बताएगी।” मखानी ने मोना चौधरी के बहरुप की तरफ देखा–“क्यों, जवान हूँ मैं?”

बहुत ।” कमला रानी ने छाती पर हाथ रखकर कहा-“तूने तो मेरी जान ही ले ली थी।”

तेरी जान लेकर मैं क्या करूंगा। पर अभी दिल नहीं भरा।”

मखानी।” शौहरी की आवाज पुनः सुनाई दी–“होश में आ। काम की सोच।”

“आराम का वक्त भी तो मिलना चाहिए।”

अभी आराम नहीं मिलेगा। कालचक्र गति में है। कोई भी आराम नहीं कर सकता।” ।

कब आराम करने को मिलेगा?

” जब कालचक्र थम जाएगा।

” कब थमेगा?” ।

जब सारे काम पूरे हो जाएंगे। लेकिन अगले काम के साथ तेरे को खुशी भी होगी।”

“कोई लड़की मिलेगी क्या?” मखानी के होंठों से निकला। ।

“अगला काम तू कमला रानी के साथ मिलकर करेगा।” शौहरी की आवाज सुनाई दी।

“सच?” मखानी ने खुश होकर कमला रानी को देखा। कमला रानी मुस्कराई।।

लेकिन तुम दोनों सिर्फ मेरा कहा काम करोगे, और कुछ नहीं करना है। समझ गए?

काम बता ।” मखानी बोला।

जग्गू को देवा के पास से दूर करना है। कोई शक्ति उसे कालचक्र की हरकतों का भी पूर्वाभास करा रही है, जो कि ठीक नहीं है। देवा कभी भी कालचक्र के खिलाफ कोई चाल चल सकता है। देवा को मौका नहीं मिलना चाहिए।” ।

लेकिन वो दोनों तो मुम्बई में हैं।” कमला रानी ने कहा।

“मैं तुम दोनों को पलों में मुम्बई पहुंचा दूंगा।”

ये सब करना कैसे है, तुमने सोचा है कुछ।” ।

हां। जग्गू को भटकाकर देवा से दूर ले जाना है। मैं बताता हूं ये कैसे होगा। मेरी बात सुन लो, परंतु मौके पर तुम लोगों को जो ठीक लगे, वही करना। काम को हर हाल में पूरा होना चाहिए।”

। “जब तक भौरी मुझे इजाजत नहीं देगी, मैं ये काम नहीं करूंगी।” कमला रानी बोल पड़ी।

“भौरी की ‘हां है।” शौहरी की आवाज आई। तभी भौरी की आवाज, कमला रानी के कानों में पड़ी।

शौहरी की बात मान । मेरी सहमति है उसकी बातों में ।

” “ठीक है।”

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उस वक्त सुबह के नौ बज रहे थे।

जगमोहन नहा-धोकर किचन में जा पहुंचा था कि नाश्ता तैयार करे। देवराज चौहान अभी नहाने-धोने में व्यस्त था। बांकेलाल राठौर और रुस्तम राव, रात यहीं पर सो गए थे। आधी रात तो उन्हें यहां ही हो गई थी। वो दोनों अभी नींद में थे। जगमोहन ने उन्हें उठाने की चेष्टा भी नहीं की थी।

किचन में काम में व्यस्त जगमोहन, अपनी ही सोचों में उलझा हुआ था, देवराज चौहान ठीक कह रहा था कि उनके पास करने को कुछ नहीं है। उनके सामने ऐसा कोई दुश्मन नहीं है कि जिसका वे मुकाबला कर सके। पूर्वजन्म की शक्तियों का मामला था। जथूरा का मामला था जो कि अपनी विद्या में ताकत रखता था और भरसक इस प्रयत्न में था कि वे लोग पूर्वजन्म की यात्रा न कर सकें। मोना चौधरी और देवराज चौहान के ग्रहों के अनुसार, अगर वो पूर्वजन्म की यात्रा करते हैं तो वो जथूरा के लिए नुकसानदेह हो सकती है।

परंतु जथूरा की कोई दुश्मन शक्ति उसे जथूरा की हरकतों का पूर्वाभास करा रही थी कि वो पूर्वजन्म की यात्रा करें। वे सब इन्हीं बातों में बुरी तरह उलझ चुके थे।

जथूरा ने कालचक्र उन पर छोड़ दिया था।

और कालचक्र उनके ही रूप ओढ़कर, कुछ इस तरह काम कर रहा था कि उनकी समझ ने ठीक से काम करना बंद कर दिया था। अब इस बात की उलझन होने लगी थी कि कौन बहरूप है, कौन असली है। ये हालात खतरनाक थे। कभी भी, किसी के भीतर का गुस्सा फूट सकता था और वो दूसरे पर जानलेवा वार कर सकता था। जथूरा उनमें और मोना चौधरी में झगड़ा करवा देना चाहता था। परंतु वे सतर्क थे कि झगड़ा न हो। जथूरा की चालों को समझ चुके थे।

लेकिन किसी के भी सब्र का बांध, कभी भी टूट सकता था। ‘साला जथूरा।' जगमोहन बडबडाया-नज़र भी तो नहीं आता।

“तूने मुझसे कुछ कहा जग्गू?” पोतेबाबा की आवाज जगमोहन ने सुनी।

जगमोहन चौंककर पलटा। नजरें घुमाईं। किचन खाली था।

तो तू आ गया पोतेबाबा ।” जगमोहन ने कहा और अपने काम में व्यस्त हो गया। उसके होंठ भिंच गए थे।

“मुझे तो तेरे भले के लिए बार-बार तेरे पास आना पड़ता है।”

“जथूरा से मिलवा दो एक बार ।”

“वो पूर्वजन्म में है। अभी बाहर नहीं आ सकता।” पोतेबाबा की आवाज आई।

“हमसे डरकर वो सामने नहीं आ रहा।” जगमोहन ने कड़वे स्वर में कहा।

“ये सोचकर तू खुश होता है तो मैं तेरी खुशी में बाधा नहीं डालूंगा।” पोतेबाबा कहने के साथ हंसा।

तू कमीना है।”

“तू मुझे कुछ भी कह, बुरा नहीं मानूंगा।”

जथूरा का कालचक्र क्या कर रहा है, हम सब समझ चुके हैं। हम आपस में झगड़ेंगे नहीं ।”

“ये तो अच्छी बात है। दुश्मन एक हो तो सबको एक हो जाना चाहिए। लेकिन कालचक्र को कोई भी नहीं समझ सकता।”

क्यों?”

क्योंकि कालचक्र का रुख कभी भी मोड़ा नहीं जा सकता है। जथूरा स्वयं कालचक्र को संभाल रहा है। कालचक्र से जरूरत पड़ने पर एक नहीं ढेरों काम लिए जा सकते हैं। कालचक्र को कोई भी ठीक से नहीं समझ सकता।”

“तुम समझ सकते हो?”

“नहीं, कालचक्र कब क्या करेगा, ये बात वो ही जान सकता है, जो कालचक्र को संभाल रहा हो। जथूरा कालचक्र को संभाल रहा है। वो ही कालचक्र को आदेश दे रहा है कि अब उसे क्या करना है।” पोतेबाबा का सुनाई देने वाला स्वर शांत था—“वैसे अब जथूरा को खास चिंता नहीं रही इस बात की कि तुम लोग पूर्वजन्म में प्रवेश कर पाते हो या नहीं।”

" “क्यों—अब क्या हो गया?" ।

“जथूरा ने देवा और मिन्नो के ग्रहों से बचने का रास्ता निकाल लिया है।”

फिर तो जथूरा को चाहिए कि कालचक्र का काम बंद कर दे।”

जथूरा इतना भी निश्चिंत नहीं हुआ कि ऐसा कर दे।” उस शक्ति का पता लगा, जो मुझे पूर्वाभास करा रही है।”

नहीं। वो चालाक शक्ति है। अपना एहसास नहीं होने दे रही। पकड़ में आने से पहले ही बच निकलती है।”

मेरे पास क्यों आया?”

यूं ही, बातें करने, सोचा तेरे से बात करके, मन को कुछ बहला लेता हूं।”
 
“तू कमीना है।” ।

पोतेबाबा के हंसने की आवाज गूंजी।

“अपनी तारीफ सुनकर हंसता है।”

मुझे तेरी बातों पे गुस्सा नहीं आएगा।”

क्यों?”

क्योंकि मैं तेरा दुश्मन नहीं हूं। तेरा अपना हूं।”

“तू क्या है, मैं जानता हूं।” जगमोहन ने कड़वे स्वर में कहा-“हम क्या करते हैं, जथूरा को खबर रहती है?”

पूरी तरह।

” “कैसे?”

कालचक्र ने अपनी छाया तुम पर छोड़ रखी है। पल-पल की खबर कालचक्र में तुम्हारी हरकतें रिकॉर्ड होकर जथूरा तक... ।”

“क्या होकर?”

रिकॉर्ड होकर। पूर्वजन्म के कुछ हिस्से ने बहुत तरक्की कर ली है। ये अब पहले वाली दुनिया नहीं रही। जथूरा के हिस्से वाली जगह पर, मशीनों से काम होता है। सच में जथूरा महान है।”

“मशीनों से काम होता है और साथ में कालचक्र जैसी शक्तियां भी काम करती हैं?” जगमोहन ठिठक गया।

“हां। ये सब जथूरा की देन है। उसी ने ही मेहनत करके, अपने लोगों को यहां तक पहुंचाया। वो बहुत प्यारा इंसान है। अपने लोगों की बहुत देखभाल करता है। तभी तो उसके लिए हर कोई जान देने को तैयार रहता है।”

“मेरे सामने जथूरा की तारीफ मत कर।” जगमोहन का स्वर सख्त हो गया।

“मैंने कुछ गलत नहीं कहा।”

उसके बारे में सही बातें भी मत कर।”

“तेरे को नहीं अच्छा लगता तो नहीं करता। लेकिन ये जरूर कहूंगा कि तुम लोगों ने पूर्वजन्म में प्रवेश किया तो मारे जाओगे।”

“अब उस तरह की बातें न करके, इस तरह की बातें करके मुझे रोकना चाहते हो?” जगमोहन ने व्यंग से कहा। ।

“तेरा दिमाग उलटा है। सीधी बात को भी गलत तरीके से लेगा।” पोतेबाबा की आवाज कानों में पड़ी-“मैंने सच कहा है। पूर्वजन्म में प्रवेश किया तो इस बात का एहसास हो जाएगा।” पोर्तबाबा का स्वर गम्भीर था।

“मैं तेरी बेकार की बातों का भरोसा नहीं करता। एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देता हूं।”

तभी देवराज चौहान ने वहां प्रवेश किया। उसने सिगरेट सुलगा रखी थी। सिगरेट के धुएं में पोते बाबा का दाढ़ी वाला चेहरा चमक उठा। देवराज चौहान की तीखी निगाह पोतेबाबा के चेहरे की धुएं से भरी आकृति पर जा टिकी।

“अब क्या कह रहा है ये?” देवराज चौहान ने जगमोहन से पूछा। *

“ये इस बात की कोशिश में है कि हम पूर्वजन्म में प्रवेश न करें।” जगमोहन बोला।

“इस वक्त मैं जथूरा के हक में ये बात नहीं कर रहा। तुम लोगों के भले के लिए कह रहा हूं।” पोतेबाबा के चेहरे के होंठ हिले।।

“तुमने हमारा भला कब से सोचना शुरू कर दिया?” देवराज चौहान ने सख्त स्वर में कहा।

“नादान हो, नहीं समझोगे।” इसके साथ ही पोतेबाबा का चेहरा दरवाजे की तरफ जाते दिखा।

देवराज चौहान उसे देखता रहा। वो बाहर निकल गया।

“हम घिरे पड़े हैं जथूरा की चालों से ।” देवराज चौहान कह उठा।।

बांकेलाल राठौर और रुस्तम राव अभी तक नींद में थे।

देवराज चौहान और जगमोहन ने नाश्ता समाप्त किया और कॉफी के प्याले अपनी तरफ सरका लिए।

“हमें सोहनलाल को सम्पर्क में रखना चाहिए। पूर्वजन्म का होने के नाते, वो भी हर मामले से जुड़ा है।”

“फोन कर लो उसे ।”

उसे ये भी बताना होगा कि रात मोना चौधरी यहां आई थी और दूसरी दिल्ली में थी। और महाजन को भी बेहोश करके नगीना भाभी के पास पहुंचा दिया गया।” उठते हुए जगमोहन कह उठा–“पारसनाथ की तो बुरी हालत होगी। वो समझ नहीं पा रहा होगा कि किसे असली समझे और किसे नकली। पहले पारसनाथ को फोन करता हूं, शायद कोई नई बात पता चले ।”

जगमोहन फोन के पास पहुंचा और रिसीवर उठाकर नम्बर मिलाने लगा।

दो-तीन बार नम्बर मिलाने पर पारसनाथ से बात हो सकी। "हैलो ।” उसका स्वर नींद से भरा था।

नींद में हो।” जगमोहन बोला।

ओह, तुम ।” पारसनाथ का संभला स्वर कानों में पड़ा-“कोई नई बात?”

“नहीं। यहीं पूछने के लिए तुम्हें फोन किया।” |

“मैं परेशान हो चुका हूं इस बात से कि असली मोना चौधरी कौन-सी है।”

पूरी बात बताओ।”

पारसनाथ ने मोना चौधरी से वास्ता रखते, अपने सारे हालात बता दिए।

“तुम तो सच में मुश्किल में हो। इसमें मैं तुम्हारी कोई सहायता नहीं कर सकता।” ।

“कोई भी कुछ नहीं कर सकता।” पारसनाथ के गहरी सांस लेने का स्वर कानों में पड़ा।

महाजन की कोई खबर?

” जरा भी नहीं ।”

मेरा पूर्वाभास मुझे इस बात का एहसास करा चुका है कि महाजन नगीना भाभी के पास ही बेहोश पड़ा है।”

वो जगह कौन-सी है?”

नहीं जानता। बंद करता हूं, फिर बात करूंगा।” जगमोहन ने फोन बंद करके, सोहनलाल का नम्बर मिलाया।

कई बार बेल होने पर भी सोहनलाल ने उधर से बात नहीं की।

“सोहनलाल से बात नहीं हो पा रही। वो कॉल रिसीव नहीं कर रहा...।”

पारसनाथ ने क्या कहा?” देवराज चौहान ने पूछा। जगमोहन ने बताकर कहा।

मैं सोहनलाल के पास जा रहा हूं। पता नहीं वो अपने घर पर है भी या नहीं।” । | देवराज चौहान कुछ कहने लगा कि जगमोहन के चेहरे के बदलते भाव देखकर ठिठक गया। |

जगमोहन के मस्तिष्क में बिजलियां सी कौंधीं। दोनों हाथों से उसने सिर को थाम लिया। आंखें बंद होती चली गईं। मस्तिष्क में जैसे धमाके फूट रहे थे। फिर उसके मस्तिष्क ने वो ही समुद्र के किनारे वाली जगह देखी। लहरों के चट्टानों से टकराने की आवाजें उसे स्पष्ट सुनाई दे रही थीं। हवा से पेड़ों के पत्ते और टहनियां हिल रही थीं। वो ही चट्टानें और हरी घास से भरी जगह। नगीना और महाजन उसी जगह बेहोश पड़े थे, जहां उन्हें वो पहले भी देख चुका था। परंतु अब वहां कोई तीसरा भी बेहोश पड़ा था। वो कुछ हट के था। जगमोहन का मस्तिष्क उसे स्पष्ट देख पा रहा था। वो कोई युवती थी। उलझन में घिरा वो आगे बढ़ा और पास जा पहुंचा। वो मोना चौधरी थी। उसने पहचान लिया–वो...।

तभी उसके मस्तिष्क में उठी बिजलियां थमती चली गईं। सब कुछ शांत हो गया।
 
जगमोहन ने लम्बी-गहरी सांस ली और सिर से हाथ हटाकर आंखें खोलीं।

देवराज चौहान की एकटक निगाह उस पर ही थीं।

क्या हुआ अब?” देवराज चौहान ने पूछा।

मैंने मौना चौधरी को वहां बेहोश देखा। नगीना भाभी और महाजन के पास ।” जगमोहन कह उठा।

“ओह, तो मोना चौधरी भी कालचक्र के फंदे में जा फंसी।”

हां ।”

“लेकिन तुम्हें इस बात का पूर्वाभास क्यों कराया जा रहा है। कि कौन-कौन कालचक्र में फंस चुका है।” देवराज चौहान ने कहा।

“इसलिए कि इनमें से कोई हमारे सामने आए तो हम समझ जाए कि वो कोई बहरूपिया है।”

“शायद यही बात होगी। तुम्हें ये बात पारसनाथ को बता देनी चाहिए।” ।

जरूर ।” जगमोहन ने पारसनाथ को पुनः फोन किया। बात हो गई।

बुरी खबर है तुम्हारे लिए।” जगमोहन बोला“मोना चौधरी भी कालचक्र में जा फंसी है।”

तुम्हें कैसे...”

“मुझे अभी-अभी पूर्वाभास हुआ है। मैंने मोना चौधरी को नगीना भाभी और महाजन के पास बेहोश देखा।”

ओह।”

अब तुम्हें कोई मोना चौधरी दिखे तो उसे बहरूप समझना उसका।”

“मैं समझ गया।” पारसनाथ की आवाज कानों में पड़ी।

जगमोहन रिसीवर रखकर, देवराज चौहान से बोला। “मैं सोहनलाल के पास जा रहा हूं।”

उसे यहीं ले आना।” देवराज चौहान ने कहा। जगमोहन ने सिर हिलाया और बाहर की तरफ बढ़ता चला गया।

देवराज चौहान के बंगले के बाहर, एक कार में मखानी और कमला रानी बैठे थे। उनकी नजरें बंगले के गेट की तरफ थीं। कमला रानी कह उठी।

जगमोहन कभी भी बाहर आ सकता है।

” तुझे कैसे पता?”

भौरी ने बताया।”

“उसे कैसे पता चला कि जगमोहन...।”

भौरी कह रही थी कि कुछ देर पहले जगमोहन ने सोहनलाल को फोन किया। परंतु सोहनलाल से बात नहीं हो सकी। जानता है मखानी क्यों?” कमला रानी मुस्करा पड़ी।

“क्यों?" ।

“भौरी ने कालचक्र का पिचाश, पहले ही सोहनलाल के पास भेज दिया था। जब जुगमोहन ने फोन किया तो पिशाच ने अपनी ताकतों के दम पर सोहनलाल के फोन की आवाज बंद कर दी। सोहनलाल को फोन आने का पता ही नहीं लगा।”

“तो भौरी इस तरह जगमोहन को बाहर निकालना चाहती है। कि वो सोहनलाल के पास जाए।”

“हां। भौरी कहती है कि जगमोहन सोहनलाल के पास जाने के लिए, बाहर आने ही वाला है।”

कमला रानी।” मखानी ने प्यार से कहा।

हम कितनी बढ़िया जिंदगी जी रहे हैं। हम इन इंसानों से बढ़कर हो गए हैं। हमारे साथ जथूरा की ताकतें हैं।”

ठीक कहा तुमने ।” कमला रानी हंसी-“मैं तो लाठी लेकर चला करती थी और सोचती थी कि जल्दी ही मर जाऊंगी।”

“लेकिन हम फिर जवान हो गए। अब दोबारा जिंदगी के मजे ले रहे हैं।” मखानी ने उसका हाथ थाम लिया।

“हाथ छोड़।”

“क्यों-मैं तो...।”

“तू जल्दी गर्म हो जाता है। इस वक्त इस काम पर...वो देख–बंगले से एक कार...।” ।

“उसे जगमोहन ही चला रहा है।” मखानी कार स्टार्ट करता कह उठा।

“पहचान लिया, तेरी नजरें बहुत तेज हैं।” कमला रानी बोली।

“लेकिन किसी के कपड़ों के भीतर नहीं देख सकतीं ।” मखानी ने कार आगे बढ़ाई और वे जगमोहन के पीछे चल दिए।

“जथूरा की मेहरबानी रही तो ये भी हो जाएगा।” कमला रानी ने शरारती स्वर में कहा।।

“तू बड़ी हरामी है, सच में।”

जगमोहन ने दो-तीन बार कॉलबेल बजाई तो सोहनलाल ने दरवाजा खोला।

“अभी तक सो रहा है।” जगमोहन कह उठा।

सब ठीक है?” सोहनलाल शंका-भरे स्वर में कह उठा।

“ठीक ही है।” जगमोहन भीतर प्रवेश करता कह उटा–“मोना चौधरी भी कालचक्र की कैद में पहुंच गई है। रात महाजन भी...।”

“ओह, ये तो बुरी खबर है।” सोहनलाल ने दरवाजा बंद करते हुए कहा। *

“हम कुछ नहीं कर सकते। रात मोना चौधरी लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा के साथ हमारे पास बंगले पर आई। परंतु एक मोना चौधरी और मैं दिल्ली में थे।”

क्या?”

मेरे बहरूप वाले व्यक्ति ने ही महाजन को उठाया...।”

“ये सब बातें हमें पागल कर देंगी।” सोहनलाल ने गम्भीर स्वर में कहा और बैठ गया।
 
मैंने तेरे को फोन किया, परंतु तूने...।” ।

“मेरा फोन नहीं बजा। बजा होता तो मेरी आंख खुल जाती।” ककर सोहनलाल ने अपना फोन उठाया।

स्क्रीन पर मिस्ड कॉल आया देखा।

बजा होगा। परंतु मैंने नहीं सुना शायद ।” सोहनलाल के होंठों से निकला।

चल मेरे साथ। हालात ऐसे हैं कि हमें एक साथ रहना चाहिए।” जगमोहन गम्भीर स्वर में बोला।

बांके और रुस्तम भी वहीं हैं?"

“हां ।” इन सब बातों से हमें कैसे छुटकारा मिलेगा?”

मैं नहीं जानता कि इन सब बातों का अंत कहां और कब होगा।” जगमोहन के होंठ भिंच गए।

पूर्वजन्म की यात्रा तो नहीं करनी...।”

“जथूरा हमें रोक रहा है कि हम पूर्वजन्म की यात्रा न करें ।”

जगमोहन ने कठोर स्वर में कहा-“हमारे पूर्वजन्म में जाने में जथूरा को भारी नुकसान है, तभी तो वो ऐसी कोशिश कर रहा है। इसलिए हमें पूर्वजन्म में जाने पर एतराज नहीं होना चाहिए।”

वहां खतरे हैं।”

अवश्य, वो तो हर बार होते हैं।”

लेकिन तुम्हारा पूर्वाभास, तुम्हें इस बात का एहसास दिला रहा है कि कालचक्र सबको एक ही जगह पर इकट्ठे कर रहा है। वो ऐसा क्यों कर रहा है, उसकी मंशा क्या है?”

“हममें झगड़ा करवाने की । ताकि जब वहां सब होश में आए तो एक-दूसरे पर टूट पड़े। लेकिन ऐसा नहीं होगा। हम सब हालातों से वाकिफ हो चुके हैं। हम झगड़ेंगे नहीं। तुम तैयार हो जाओ, बंगले पर चलने को।”

आधे घंटे में चलते हैं।” कहने के साथ ही सोहनलाल उठ खड़ा हुआ।

एक घंटे बाद जगमोहन और सोहनलाल बाहर निकले।

सोहनलाल ने फ्लैट का दरवाजा लॉक किया। दोनों सामने खड़ी कार की तरफ बढ़ गए।

वे कार में बैठे कि जगमोहन का फोन बजा। बात हुई।

हैलो।”

देवराज चौहान था दूसरी तरफ–“सोहनलाल मिला?”

“हां, हम आ रहे हैं।”

“ठीक है।” उधर से देवराज चौहान ने फोन बंद कर दिया।

जगमोहन ने फोन रखा और कार स्टार्ट की। तभी वो बुरी तरह चौंका।

सामने से मोना चौधरी जा रही थी। जगमोहन हैरानी से उसे देखने लगा।

जगमोहन। मोना चौधरी...।” सोहनलाल के होंठों से निकला।

ये मोना चौधरी नहीं है।” जगमोहन ने भिंचे स्वर में कहा।

क्या कह रहा है।”

ये उसकी बहरूप है। असली मोना चौधरी को कालचक्र ने कहीं पर बेहोश कर रखा है।”

ओह।” । तभी दोनों ने मोना चौधरी को एक कार में बैठते देखा।

ये यहां क्या कर रही है?" सोहनलाल बोला। “इसने हमें नहीं देखा।”

नहीं देखा। मैं इस बात को नोट कर रहा था।”

“हम इसके पीछे चलेंगे, देखते हैं कि ये क्या करती है।” जगमोहन ने दृढ़ स्वर में कहा।

मोना चौधरी की कार आगे बढ़ती देखी तो जगमोहन ने अपनी कार पीछे लगा दी।

वो मोना चौधरी नहीं, कमला रानी थी। कालचक्र अपना खेल खेल रहा था।

जगमोहन और सोहनलाल नहीं जान सके कि कालचक्र का जाल उन पर पड़ चुका है।

“कमला रानी।” भौरी का स्वर उसके कानों में पड़ा-“जग्गू और गुलचंद तेरे पीछे आ रहे हैं।”

“ये ही तो हम चाहते थे।” मोना चौधरी के बहरूप में कमला रानी मुस्करा पड़ी।

आगे तेरे को क्या करना है, तुझे सब याद है?”

“हां, मैं भूलती नहीं ।”

जहां जरूरत पड़े, मेरे से बात कर लेना, मैं तेरे पास ही हूं।” भौरी की आवाज उसे सुनाई दी।

ठीक है भौरी, लेकिन मखानी कहां है?”

वो अपना काम करेगा।”

मेरे को मखानी पसंद आया। उसे, मुझे दे दे भौरी ।”

ठीक है तू ले लेना। शौहरी से बात करूंगी। लेकिन जब तक काम पड़े हैं, तब तक मखानी को सोच भी नहीं।”

काम के बाद ।” ।

शौहरी से बात करके बताऊंगी।” ।

कमला रानी ने बैक मिरर में पीछे आती कार को देखा फिर बोली।

“मैंने अपनी जिंदगी में कभी कार नहीं चलाई थी।” कमला रानी बोली।

“हमने तेरे में ताकतें डाली हैं। जरूरत के हिसाब से ही हम सामने वाले में ताकतें डालते हैं। जब तक तू हमारे साथ है, तू खुश रहेगी।”

“तू बहुत अच्छी है भौरी ।”

“तू चाहे तो तेरे को पूर्वजन्म की उस दुनिया में ले जाऊंगी।”

“मखानी मेरे साथ हो तो मैं कहीं भी चलने को तैयार हूं।”

तो बात कर लेना मखानी से।”

वो मेरी बात जरूर मान जाएगा। पूर्वजन्म की दुनिया में क्या होता है?”

“वो अपने तरह की दुनिया है, ये अपनी तरह की । वहां तेरे को मेरी सेविका बनकर रहना होगा।”

और मखानी?"

वो शौहरी के काम करेगा।”

फिर मैं और मखानी मिलेंगे कब?”

“मिलते रहोगे। सप्ताह में एक बार तो मिल ही लिया करोगे।”

“ओह भौरी। तू सच में अच्छी है। मैं तेरे को देखना चाहती हूं।” कमला रानी ने कहा। "

“अभी तो मैं कालचक्र के काम कर रही हूं। मेरा शरीर उस दुनिया में पड़ा है। जब तू मेरे साथ वहां चलेगी, तभी देख पाएगी मुझे। अब बातें न बना, काम की तरफ ध्यान दे। जग्गू और गुलचंद तेरे पीछे हैं।”

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मखानी जगमोहन के बहरूप में दूर खड़ा था, जब उसने कमला रानी को कार पर जाते देखा तो उदास हो गया।

तेरा चेहरा क्यों लटक गया?” कानों में शौहरी की फुसफुसाहट पड़ी।

कमला रानी चली गई!” मखानी ने बिगड़कर कहा।

“हमेशा के लिए थोड़े ना गई है। आ जाएगी।”

कब?”

जग्गू और गुलचंद को भटकाकर। तब तक तू भी अपने काम पूरे कर ।”

मखानी का चेहरा लटका ही रहा।

नखरे मत दिखा, काम कर। नहीं तो मैं तेरे को छोड़कर चला जाऊंगा।”

नहीं, मत जाना। नहीं तो मैं मर जाऊंगा।” मखानी जल्दी-से बोला।

तो काम के लिए तैयार हो न?”

“मैंने कब मना किया है। अब मैं जगमोहन बनकर देवा के पास जाऊं?" ।

“हां। सब बताया है तेरे को। अब तेरे लिए वो देवा नहीं देवराज चौहान होगा। पूर्वजन्म का कोई नाम उसके सामने मत लेना।”

समझ गया।”

अब उधर जा, दीवार की ओट में।” शौहरी की आवाज कानों में पड़ी।

“वहां क्या करूंगा?”

तेरे को दूसरे कपड़े पहनाने हैं, जो जग्गू ने पहने थे।” मखानी सिर हिलाता, दीवार की तरफ बढ़ गया।

दो मिनट में ही वापस आ गया। अब उसके शरीर पर वैसे ही कपड़े थे, जैसे जगमोहन पहनकर बंगले से आया था।

“जगमोहन के पास मोबाइल भी होगा।”

तेरे पास भी है। जेब देख। वो ही फोन और वो ही नम्बर । जग्गू का फोन हमने खराब कर दिया है। देवा तुझे फोन करेगा या कोई भी करेगा तो तेरा ही फोन बजेगा। तब तूने जगमोहन बनकर बात करनी है।” ।

“समझ गया।”

जग्गू के सारे हालात मैंने तेरे दिमाग में डाल दिए हैं। तेरे को कोई परेशानी नहीं आएगी।”

“जगमोहन कार पर बंगले से बाहर निकला था।” मखानी बोला। ।

“देवा जानता है कि जग्गू-गुलचंद के साथ, बंगले पर आ रहा है, तु वहां जाकर देवा से कहना कि गुलचंद कार ले गया है, कुछ देर में आ जाएगा। ये सुनकर देवराज चौहान फिर कुछ नहीं पूछेगा।”

लेकिन सोहनलाल तो आएगा नहीं, वो...।”

“न आए। तू क्यों चिंता करता है। देवराज चौहान पूछे ये बात तो तू भी उसे थोड़ा परेशान होकर दिखा देना।”

समझ गया।” ।

“तू बहुत समझदार है। सब काम तू बढ़िया ढंग से करेगा।” शौहरी की आवाज कानों में पड़ी–“भंवर सिंह और त्रिवेणी देवा के पास ही हैं, तूने बढ़िया मौका देखकर उन्हें बेहोश करना है कि पिशाच उन्हें ले जा सके।” |

“वो मैं कर दूंगा।” मखानी ने सिर हिलाया—“परंतु देवराज चौहान भी तो है वहां ।”

“उसको बाद में देखेंगे। पहले वो ही काम कर, जो तेरे को कहा है। चल टैक्सी पकड़ ।”

। “कमला रानी...।”

चुप ।” शौहरी गुस्से से बोला—“तू बार-बार मुझसे कमला रानी की बात क्यों करता है?”

“तू नाराज क्यों होता है शौहरी। बात ही तो कर रहा हूं। इससे मेरा दिल बहल जाता है।”

इस वक्त सिर्फ काम की तरफ ध्यान दे। ये जथूरा का फेंका कालचक्र है। मौत का खेल है ये। होशियार रह हर वक्त। तेरी एक भूल तेरे साथ-साथ मुझे भी हमेशा-हमेशा के लिए नर्क में धकेल देगी। तूने नर्क देखा है?”

न...न...हीं ।” ।

बहुत तड़पन होती है वहां। घोर यातना मिलती है। हर तरफ गहरा होता है। कोई बात नहीं करता। हर वक्त वो भयानक पिशाच गला घोंटते रहते हैं। वहां सब कुछ बहुत भयानक है। तू अनजाने में जथूरा के कालचक्र का हिस्सा बन चुका है। अगर तूने कोई गलती की तो तेरे को वो ही नर्क मिलेगा, जो हमें मिलता है। हम दोनों का भाग्य जुड़ चुका है।

जगमोहन यानी कि मखानी बंगले पर पहुंचा।

वे सोच भी नहीं सकते थे कि कालचक्र की छाया उनके बंगले में प्रवेश कर आई है।

| देवराज चौहान ड्राइंग रूम में बैठा मिला। बांकेलाल राठौर नहाया-धोया वहीं था। रुस्तम राव नहाने गया था।

“जगमोनो।” बांकेलाल राठौर उसे देखते ही मूंछों पर उंगली फेरता कह उठा–“तंम म्हारे साथ सौतेलो व्यवहार करो हो ।”

“क्यों?” जगमोहन मुस्कराकर पास ही आ बैठा।

“तंम देवराज चौहानो वास्ते नाश्ता बनायो। अपने वास्ते बनायो। पर म्हारे वास्ते न बनायो ।”

तुम और रुस्तम नींद में थे।”

“तो का हो गयो, उठनो तो था।”

“अब बना दें?”

ईब का बनायो। अंम खुद ही नाश्तो बना लायो। खा-पी के हजम भी कर लयो ईब तको ।” बांकेलाल राठौर बोला–“छोरो तो नाश्तो के बादो ही नहानो गयो हो ।”

“सोहनलाल कहां है?” देवराज चौहान ने पूछा।

कह रहा था कोई काम है। मेरे को बाहर उतारकर कार ले गया। कुछ देर में आ जाएगा।” जगमोहन ने कहा।

“उसने फोन पर क्यों नहीं बात की, जब तुमने फोन किया था?” देवराज चौहान कह उठा।

उसे फोन बजना सुनाई नहीं दिया।”

म्हारे को यो न समझ आयो कि अंम सबों यां पे बैठे का करत हो?”

हमारे पास करने को कुछ भी नहीं है बांके ।”

“क्या करें, तुम ही कहो।।

जथूरो को ‘वड' देतो है।” बांकेलाल राठौर का हाथ मूंछ पर पहुंच गया।

“ठीक है, चलो।” देवराज चौहान मुस्करा पड़ा।

“किधरो?”

जथूरा के पास ।”

वो किधर हौवे?”

यही तो समस्या है कि हम नहीं जानते वो कहां है। वो पूर्वजन्म की दुनिया में बैठा, यहां पर अपनी शक्तियों के सहारे हमारे साथ खेल खेल रहा है और हम कुछ भी कर सकने की स्थिति में नहीं हैं। उसकी ताकतें हमें नजर नहीं आतीं। वो जो कर रहा है, उसका मतलब हमारी समझ में नहीं आ रहा।” देवराज चौहान गम्भीर हो उठा।।

उसो को कोई ठिकाणो भी न हौवे ।”

“एक तरह से हम हवा में सिर मार रहे हैं।” जगमोहन कह उठा।

“हां ।” देवराज चौहान ने गर्दन हिलाई–“जथूरा हम सब लोगों के बहरूप से, हमें गुस्सा दिलाने की चेष्टा कर रहा है। परंतु हम उसका खेल समझ चुके हैं, इसलिए वो अपनी कोशिशों में सफल नहीं हो सकता।”

“क्या पता उसका असली मकसद क्या है।” जगमोहन बोला—“हो सकता है, हम उसकी चालों को अभी तक समझे ही न हों।” |

देवराज चौहान गम्भीर निगाहों से जगमोहन को देखने लगा।
 
“हम जो भी जानते हैं, वो सब कुछ पोतेबाबा की कही उन बातों के आधार पर है, जो उसने मुझसे कही। परंतु ये कौन जानता है कि पोतेबाबा ने मुझे सच कहा। वो जथूरा का सेवक है। जो कहेगा, जो करेगा, जथुरा के भले के लिए ही होगा।” ।

“मैं तुम्हारी बात से सहमत हूं।” “जगमोनो। ईबी तको कौणो-कौणो बेहोश पड़ो हो?”

“नगीना भाभी, मोना चौधरी और महाजन ।”

वो कालचक्रो म्हारे को भी वहां ले जाने की ट्राई करो हो ।”

पक्का ।” देवराज चौहान ने कहा-“तभी तो हम एक साथ मौजूद हैं कि जथूरा ऐसी किसी कोशिश में सफल न हो सके।”

“बाप ।” रुस्तम राव पास आता कह उठा–“कालचक्र बोत फदेबाज है, चांस नेई उससे बचने का ।” ।

छोरे, अंम कालचक्र को ‘वड' दयो ।”

“नेई बाप । फालतू बात नेई बोलने का। हम लोग उसका मुकाबला नेई कर सकेला ।”

बांकेलाल राठौर ने पहलू बदला।

गलत बोला बाप ।

” “तू ठीको कहो हो।” जथूरो के पास शक्तियों हौवो हो।”

“वो आपुन लोगों के साथ कोई चाल खेएला। बोत खतरनाक होएला वो।”

हमें हर वक्त सतर्क रहना होगा।” देवराज चौहान ने कहा-“इसके अलावा हम कुछ नहीं कर सकते ।”

| जगमोहन ने आंखें बंद कर रखी थीं। बांके उससे कह उठा।।

जगमोनो। तंम पारसनाथो को फोनो करो। पूछो, कोई नेई बात हौवो का?”

जगमोहन ने आंखें खोलकर उसे देखा। “क्या फायदा फोन करने का?”

वो भी खतरे में है।” देवराज चौहान बोला“मोना चौधरी और महाजन के बाद वो भी गायब हो सकता है।”

बात करता हूं उससे।” जगमोहन ने फोन निकाला और पारसनाथ का नम्बर मिलाने लगा।

“उसे कहना कि अकेले रहना ठीक नहीं । बेहतर होगा कि इन हालातों में वो हमारे पास आ जाए।”

नम्बर लग गया। बात भी हो गई।

कुछ नया हुआ पारसनाथ?” पूछा जगमोहन ने।।

मैं मोना चौधरी के फ्लैट पर गया था। फ्लैट खुला पड़ा था। वो वहां नहीं थी ।” पारसनाथ की आवाज आई।

“मैंने तुमसे कहा तो था कि मुझे पूर्वाभास हुआ है कि मोना चौधरी, महाजन भी नगीना भाभी के पास ही बेहोश पड़े

“मुझे उन दोनों की चिंता हो रही है।”

“मैं नहीं जानता कि वो कहां पर हैं, पता होता तो कब का उन्हें ले आते ।”

ये सब कुछ कहां पहुंचकर रुकेगा?”

कुछ पता नहीं, लेकिन तुम्हें ज्यादा खतरा है। क्योंकि तुम अकेले रह गए हो।”

जानता हूं।”

“तुम हमारे पास आ जाओ। इधर हम सब एक साथ हैं।”

“इधर सितारा और राधा हैं, उन्हें अकेला छोड़ना ठीक नहीं। मैं दिल्ली में ही रहूंगा।”

“ठीक है। इतना याद रखना कि हमें आपस में झगड़ना नहीं है। जथूरा यही तो चाहता है कि हम झगड़े और...।”

समझता हूं सब ।” । जगमोहन ने फोन बंद करके, देवराज चौहान से कहा। पारसनाथ, वहीं रहना चाहता है।” ।

देवराज चौहान ने सिगरेट सुलगा ली।

“इन हालातों ने हमें कितना बेबस कर दिया है।” जगमोहन कह उठा।।

म्हारा तो खून खौलो हो ।”

जगमोहन उठता हुआ बोला।

“मैं भीतर कमरे में जा रहा हूं। सोहनलाल आए तो बता देना।” कहकर वो भीतर की तरफ बढ़ गया।

कमरे में पहुंचकर बेड पर जा लेटा। “मखानी।” कानों में शौहरी की फुसफुसाहट पड़ी।

हां ।” मौका देख और त्रिवेणी, भंवर सिंह को बेहोश कर ।

” मौका तो मिलने दे।” ।

“मौका तुमने तलाशना है, इन लोगों के साथ बैठने में तेरे को कोई परेशानी तो नहीं हुई न?" ।

नहीं ।” ।

“मैंने नहीं होने दी। जगमोहन के दिमाग के सारे हालात, तेरे भीतर मैंने पहले ही डाल दिए थे।” मखानी ने कुछ नहीं कहा।

एक बात और, तेरे को पूर्वाभास का दिखावा करना है।

” वो क्यों?" ।

कमला रानी तेरे पास आएगी अपना काम निबटाकर, वो देवराज चौहान की पत्नी नगीना के रूप में होगी ।” ।

“ओह।” मखानी खुश हो उठा–“कमला रानी यहां आ रही है?”

“अभी नहीं । वो उधर का अपना काम निबटाने के बाद आएगी, जब तू त्रिवेणी-भंवरसिंह को बेहोश करके पिशाचों के हवाले कर देगा। तूने पूर्वाभास का ये दिखावा करना है कि तूने नगीना को इस बंगले में देखा है।”

समझ गया। ताकि नगीना के आने पर देवराज चौहान शक न करे कि वो बहरूप हो सकती है।” मखानी बोला।

“अब तू बहुत समझदार हो गया है मखानी।”

मैं अभी करता हूं ये दिखावा।”

जल्दी-जल्दी काम पूरे कर। कमला रानी भी तो तेरे से मिलने को बहुत बेचैन है।” शौहरी की फुसफुसाहट कानों में पड़ी।

“सच में?” । । “हां, भौरी ने मुझे बताया कि कमला रानी तेरे को पसंद करने लगी है।”

“तू भौरी से कब मिला?”

मेरी और भौरी की तारें मिली हुई हैं। हममें सीधी बात हो जाती है।”

एक बात तो बता ।

” “पूछ।”

क्या मेरी किस्मत में कमला रानी ही है। स्वाद बदलने के लिए कभी-कभी दूसरी नहीं मिल सकती?”

“क्यों नहीं मिल सकती । तू किसी को भी प्यार कर सकता है।”

“ये बात कमला रानी को मत बताना।”

“तू बहुत चालाक है मखानी।” कानों में शौहरी की हंसी पड़ी—“आखिर है तो मर्द ही।” ।

“मैंने तो यूं ही पूछा था कि कहीं मैं कमला रानी के साथ बंध तो नहीं गया।”

“प्यार करने के मामले में तू आजाद है, कमला रानी भी आजाद है। जहां चाहो वहीं दिल लगाओ।”

कमला रानी भी आजाद है।” मखानी ने मुंह बनाया।

“हां, हमारी दुनिया में औरत और मर्द को बराबरी का दर्जा हासिल है। तुम्हारी दुनिया की तरह नहीं कि औरत को दो कदम नीचे दबा के रखो। हमारी दुनिया में जो हक मर्दो को है, वो ही औरतें को। अब तू वो काम कर, जो कहा है।”

जगमोहन ने तेजी से ड्राइंग रूम में प्रवेश किया। देवराज चौहान, बांके और रुस्तम राव ने उसे देखा।

“मुझे अभी-अभी पूर्वाभास हुआ है।” जगमोहन तेज स्वर में बोला-“मैंने नगीना भाभी को इस बंगले में आते देखा।”

“क्या?” एकाएक देवराज चौहान ने चौंककर जगमोहन की तरफ देखा।

शायद भाभी को होश आ गया होगा, वो वहां से कैद से निकल आई होगी।”

फिर तो बाप, मोना चौधरी और महाजन का पता चलेगा।”

कब आएगी नगीना यहां?” ।

ये तो पता नहीं, परंतु पूर्वाभास में मैंने नगीना भाभी को उस दरवाजे से भीतर प्रवेश करते देखा।” ।

देवराज चौहान, थारी तो लाटरो लगो हो। भाभी जल्दी ही वापस आयो हो ।”

ये अच्छा संकेत मिला है हमें।” जगमोहन ने कहा। देवराज चौहान के चेहरे पर सोच के भाव थे।

“इस तरह नगीना का वापस आना, हैरान करने वाली बात है।” देवराज चौहान बोला।

क्यों?” “जथूरा उसे इस तरह नहीं आने दे सकता। उसकी जादुई कैद से निकल पाना आसान नहीं ।”

“परंतु मैंने भाभी को, पूर्वाभास में, यहां इस बंगले में आते देखा

“ये जथूरा की कोई चाल हो सकती है।” देवराज चौहान ने होंठ भींचकर कहा।

“चाल?”

आपुन को भी बहना का वापस लौटना हजम नेई होईला बाप ।” रुस्तम राव गम्भीर स्वर में बोला।

जगमोहन सब पर नजर मारता बोला। । “नगीना भाभी जब आएगी, तभी पता चलेगा कि क्या हो रहा है ये सब ।”

“ठीक कहते हो।” देवराज चौहान बोला–“नगीना के आने पर ही, सोच सकेंगे हम कि वो असली है या नकली?” ।

“पूर्वाभास मुझे असली लोगों को लेकर ही होता है।” जगमोहन ने कहा।

देवराज चौहान ने सिर हिला दिया।
 
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