S
StoryPublisher
Guest
“तो क्या करूं मैं अगर वो गायब हो गए।” जगमोहन के माथे पर बल नजर आने लगे।
“सोहनलाल तुम्हें बंगले से बाहर उतारकर, खुद कार ले गया और अभी तक वापस नहीं लौटा। कई घंटे बीत गए। फोन मिलाओ तो उसका फोन नहीं मिल रहा।” देवराज चौहान ने चुभते स्वर में कहा—“ये तीनों आखिरी बार सिर्फ तुम्हारे सम्पर्क में आए और गायब हो गए। अब तुम्हें पूर्वाभास भी नहीं हो रहा। रुस्तम गायब हुआ तो कोई पूर्वाभास नहीं। उससे पहले सोहनलाल की कोई खबर नहीं...।”
“नगीना भाभी का पूर्वाभास हुआ...।” जगमोहन ने कहना चाहा।।
“रुस्तम के गायब होने के बाद तुम्हें उसका पूर्वाभास नहीं हुआ। जबकि बारी-बारी सबका हो रहा था।”
“तो इसमें मेरी क्या गलती है, नहीं हुआ तो नहीं हुआ ।” जगमोहन झल्लाया।
“तुम जगमोहन नहीं, बल्कि उसके चेहरे में बहरुपिये हो ।” देवराज चौहान ने होंठ भींचकर कहा।
“तुम्हारा दिमाग खराब हो गया।” ।
तुम इस बात को नकार नहीं सकते।” देवराज चौहान के दांत भिंच गए।
“देवा अंधेरे में तीर चला रहा है। तू लगा रह अपनी लाइन पर।” शौहरी की फुसफुसाहट पुनः कानों में पड़ी।
“मुझे लगता है कि जथूरा अब अपनी कोशिश में कामयाब होने लगा है।” जगमोहन चिढ़कर बोला–“वो हममें झगड़ा करवाना चाहता है, एक-दूसरे के प्रति मन में शक डालना चाहता है और वो सफल हो गया। तुम्हारे मन में मेरे लिए शक आ गया कि मैं, मैं नहीं तो आगे कुछ भी कहना बेकार होगा।”
देवराज चौहान जगमोहन को देखता रहा। जगमोहन ने कुछ नहीं कहा।
अब हमारी बारी है।” देवराज चौहान ने गम्भीर स्वर में कहा।
“हमारी बारी?” जगमोहन ने उसे देखा।
हां, जथूरा का कालचक्र तेजी से काम कर रहा है। वो सबको गायब करता जा रहा है। नगीना, मोना चौधरी, महाजन, बांके, रुस्तम राव, सोहनलाल, ये सब कालचक्र के फंदे में फंस चुके हैं।” देवराज चौहान ने गम्भीर स्वर में कहा।
“फिर तो हम दोनों और पारसनाथ ही बचे हैं।”
हां ।” देवराज चौहान ने उसे देखा–“क्या पता पारसनाथ भी फंस चुका हो।” ।
मैं उसे फोन करके देखता हूं।” जगमोहन ने पारसनाथ का नम्बर मिलाया। बात हो गई। “तू ठीक है?" जगमोहन ने व्याकुलता से पूछा।
तू घबराया हुआ क्यों है?”
बांके और रुस्तम भी जाने कहां गायब हो गए। हम तीनों ही बचे हैं। सोहनलाल का भी कुछ पता नहीं चल रहा।”
ओह।” बात करके जगमोहन ने देवराज चौहान से कहा।
अभी तक तो पारसनाथ ठीक है।”
जथूरा इस बात की पूरी चेष्टा कर रहा है कि हम पूर्वजन्म में प्रवेश कर सकें।” देवराज चौहान बोला।
“मुझे समझ नहीं आता कि आखिर हम पूर्वजन्म में प्रवेश करना ही क्यों चाहते हैं?” जगमोहन झल्लाया।
“हम नहीं प्रवेश करना चाहते। परंतु हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि हम चुप भी नहीं बैठ सकते। हम नहीं जानते कि जथूरा हम सबको गायब करके कहां ले जा रहा है। वो करना क्या चाहता है।” देवराज चौहान ने परेशान स्वर में कहा—“हम सिर्फ इतना जानते हैं कि जथूरा तब तक हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता, जब तक हम पूर्वजन्म की धरती पर कदम न रख दे। और वो हमें हर हाल में रोकने की चेष्टा में है कि हम पूर्वजन्म में प्रवेश न कर सकें।”
“सोहनलाल तुम्हें बंगले से बाहर उतारकर, खुद कार ले गया और अभी तक वापस नहीं लौटा। कई घंटे बीत गए। फोन मिलाओ तो उसका फोन नहीं मिल रहा।” देवराज चौहान ने चुभते स्वर में कहा—“ये तीनों आखिरी बार सिर्फ तुम्हारे सम्पर्क में आए और गायब हो गए। अब तुम्हें पूर्वाभास भी नहीं हो रहा। रुस्तम गायब हुआ तो कोई पूर्वाभास नहीं। उससे पहले सोहनलाल की कोई खबर नहीं...।”
“नगीना भाभी का पूर्वाभास हुआ...।” जगमोहन ने कहना चाहा।।
“रुस्तम के गायब होने के बाद तुम्हें उसका पूर्वाभास नहीं हुआ। जबकि बारी-बारी सबका हो रहा था।”
“तो इसमें मेरी क्या गलती है, नहीं हुआ तो नहीं हुआ ।” जगमोहन झल्लाया।
“तुम जगमोहन नहीं, बल्कि उसके चेहरे में बहरुपिये हो ।” देवराज चौहान ने होंठ भींचकर कहा।
“तुम्हारा दिमाग खराब हो गया।” ।
तुम इस बात को नकार नहीं सकते।” देवराज चौहान के दांत भिंच गए।
“देवा अंधेरे में तीर चला रहा है। तू लगा रह अपनी लाइन पर।” शौहरी की फुसफुसाहट पुनः कानों में पड़ी।
“मुझे लगता है कि जथूरा अब अपनी कोशिश में कामयाब होने लगा है।” जगमोहन चिढ़कर बोला–“वो हममें झगड़ा करवाना चाहता है, एक-दूसरे के प्रति मन में शक डालना चाहता है और वो सफल हो गया। तुम्हारे मन में मेरे लिए शक आ गया कि मैं, मैं नहीं तो आगे कुछ भी कहना बेकार होगा।”
देवराज चौहान जगमोहन को देखता रहा। जगमोहन ने कुछ नहीं कहा।
अब हमारी बारी है।” देवराज चौहान ने गम्भीर स्वर में कहा।
“हमारी बारी?” जगमोहन ने उसे देखा।
हां, जथूरा का कालचक्र तेजी से काम कर रहा है। वो सबको गायब करता जा रहा है। नगीना, मोना चौधरी, महाजन, बांके, रुस्तम राव, सोहनलाल, ये सब कालचक्र के फंदे में फंस चुके हैं।” देवराज चौहान ने गम्भीर स्वर में कहा।
“फिर तो हम दोनों और पारसनाथ ही बचे हैं।”
हां ।” देवराज चौहान ने उसे देखा–“क्या पता पारसनाथ भी फंस चुका हो।” ।
मैं उसे फोन करके देखता हूं।” जगमोहन ने पारसनाथ का नम्बर मिलाया। बात हो गई। “तू ठीक है?" जगमोहन ने व्याकुलता से पूछा।
तू घबराया हुआ क्यों है?”
बांके और रुस्तम भी जाने कहां गायब हो गए। हम तीनों ही बचे हैं। सोहनलाल का भी कुछ पता नहीं चल रहा।”
ओह।” बात करके जगमोहन ने देवराज चौहान से कहा।
अभी तक तो पारसनाथ ठीक है।”
जथूरा इस बात की पूरी चेष्टा कर रहा है कि हम पूर्वजन्म में प्रवेश कर सकें।” देवराज चौहान बोला।
“मुझे समझ नहीं आता कि आखिर हम पूर्वजन्म में प्रवेश करना ही क्यों चाहते हैं?” जगमोहन झल्लाया।
“हम नहीं प्रवेश करना चाहते। परंतु हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि हम चुप भी नहीं बैठ सकते। हम नहीं जानते कि जथूरा हम सबको गायब करके कहां ले जा रहा है। वो करना क्या चाहता है।” देवराज चौहान ने परेशान स्वर में कहा—“हम सिर्फ इतना जानते हैं कि जथूरा तब तक हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता, जब तक हम पूर्वजन्म की धरती पर कदम न रख दे। और वो हमें हर हाल में रोकने की चेष्टा में है कि हम पूर्वजन्म में प्रवेश न कर सकें।”