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महाकाली--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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“तो क्या करूं मैं अगर वो गायब हो गए।” जगमोहन के माथे पर बल नजर आने लगे।

“सोहनलाल तुम्हें बंगले से बाहर उतारकर, खुद कार ले गया और अभी तक वापस नहीं लौटा। कई घंटे बीत गए। फोन मिलाओ तो उसका फोन नहीं मिल रहा।” देवराज चौहान ने चुभते स्वर में कहा—“ये तीनों आखिरी बार सिर्फ तुम्हारे सम्पर्क में आए और गायब हो गए। अब तुम्हें पूर्वाभास भी नहीं हो रहा। रुस्तम गायब हुआ तो कोई पूर्वाभास नहीं। उससे पहले सोहनलाल की कोई खबर नहीं...।”

“नगीना भाभी का पूर्वाभास हुआ...।” जगमोहन ने कहना चाहा।।

“रुस्तम के गायब होने के बाद तुम्हें उसका पूर्वाभास नहीं हुआ। जबकि बारी-बारी सबका हो रहा था।”

“तो इसमें मेरी क्या गलती है, नहीं हुआ तो नहीं हुआ ।” जगमोहन झल्लाया।

“तुम जगमोहन नहीं, बल्कि उसके चेहरे में बहरुपिये हो ।” देवराज चौहान ने होंठ भींचकर कहा।

“तुम्हारा दिमाग खराब हो गया।” ।

तुम इस बात को नकार नहीं सकते।” देवराज चौहान के दांत भिंच गए।

“देवा अंधेरे में तीर चला रहा है। तू लगा रह अपनी लाइन पर।” शौहरी की फुसफुसाहट पुनः कानों में पड़ी।

“मुझे लगता है कि जथूरा अब अपनी कोशिश में कामयाब होने लगा है।” जगमोहन चिढ़कर बोला–“वो हममें झगड़ा करवाना चाहता है, एक-दूसरे के प्रति मन में शक डालना चाहता है और वो सफल हो गया। तुम्हारे मन में मेरे लिए शक आ गया कि मैं, मैं नहीं तो आगे कुछ भी कहना बेकार होगा।”

देवराज चौहान जगमोहन को देखता रहा। जगमोहन ने कुछ नहीं कहा।

अब हमारी बारी है।” देवराज चौहान ने गम्भीर स्वर में कहा।

“हमारी बारी?” जगमोहन ने उसे देखा।

हां, जथूरा का कालचक्र तेजी से काम कर रहा है। वो सबको गायब करता जा रहा है। नगीना, मोना चौधरी, महाजन, बांके, रुस्तम राव, सोहनलाल, ये सब कालचक्र के फंदे में फंस चुके हैं।” देवराज चौहान ने गम्भीर स्वर में कहा।

“फिर तो हम दोनों और पारसनाथ ही बचे हैं।”

हां ।” देवराज चौहान ने उसे देखा–“क्या पता पारसनाथ भी फंस चुका हो।” ।

मैं उसे फोन करके देखता हूं।” जगमोहन ने पारसनाथ का नम्बर मिलाया। बात हो गई। “तू ठीक है?" जगमोहन ने व्याकुलता से पूछा।

तू घबराया हुआ क्यों है?”

बांके और रुस्तम भी जाने कहां गायब हो गए। हम तीनों ही बचे हैं। सोहनलाल का भी कुछ पता नहीं चल रहा।”

ओह।” बात करके जगमोहन ने देवराज चौहान से कहा।

अभी तक तो पारसनाथ ठीक है।”

जथूरा इस बात की पूरी चेष्टा कर रहा है कि हम पूर्वजन्म में प्रवेश कर सकें।” देवराज चौहान बोला।

“मुझे समझ नहीं आता कि आखिर हम पूर्वजन्म में प्रवेश करना ही क्यों चाहते हैं?” जगमोहन झल्लाया।

“हम नहीं प्रवेश करना चाहते। परंतु हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि हम चुप भी नहीं बैठ सकते। हम नहीं जानते कि जथूरा हम सबको गायब करके कहां ले जा रहा है। वो करना क्या चाहता है।” देवराज चौहान ने परेशान स्वर में कहा—“हम सिर्फ इतना जानते हैं कि जथूरा तब तक हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता, जब तक हम पूर्वजन्म की धरती पर कदम न रख दे। और वो हमें हर हाल में रोकने की चेष्टा में है कि हम पूर्वजन्म में प्रवेश न कर सकें।”
 
मखानी ।” कानों में शौहरी की फुसफुसाहट पड़ी—“देवा का दिमाग खराब होता जा रहा है। इसे कुछ भी ठीक से समझ नहीं आ रहा। कुछ ही देर की बात है, कमला रानी के आते ही, ये भी पिशाचों के कब्जे में होगा।”

“मैं इसे भी बेहोश करूं क्या?” जगमोहन धीमे स्वर में बड़बड़ा उठा।।

“तू अकेला देवा को नहीं संभाल सकता। मामला खराब मत कर देना। कमला रानी को आ लेने दे।”

देवराज चौहान ने जगमोहन को देखकर कहा।

कुछ कहा तुमने?”

“नहीं ।” जगमोहन ने चेहरे पर परेशानी ओढे, इंकार में सिर हिला दिया।

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जगमोहन और सोहनलाल कमला रानी का पीछा करते, कब के मुम्बई से बाहर निकल चुके थे। वो मोना चौधरी को नजरों से ओझल नहीं होने देना चाहते थे और जानना चाहते थे कि कहां जाती है। उसका कोई ठिकाना है तो कहां पर है। पीछा करते हुए अब तो दोपहर भी ढलने लगी थी। हाइवे पर उनकी कारें दौड़ी जा रही थीं।

“ये आखिर जा कहां रही है?” सोहनलाल बोला।

जहां भी जाए।” जगमोहन के होंठ भिंच गए–“मैं इसे छोडूंगा नहीं। ये मोना चौधरी असली नहीं, उसका बहुरूप है।”

। “देवराज चौहान तुम्हारा-मेरा इंतजार कर रहा होगा।”

“उसे फोन करके बता दो कि हम किस काम में व्यस्त हैं। अब तक तो देवराज चौहान का फोन आ जाना चाहिए था।”

सोहनलाल जेब से फोन निकालता कह उठा।

जथूरा ने हम लोगों के बहरूप पेश करके, हमारा दिमाग खराब कर रखा है।”

“जथूरा का ये तमाशा ज्यादा नहीं चलने वाला।” जगमोहन कड़वे स्वर में बोला-“जल्दी ही सब ठीक हो जाएगा।”

सोहनलाल ने देवराज चौहान का नम्बर मिलाया। दो-चार बार कोशिश की, परंतु नम्बर नहीं मिला।

मेरे फोन में शायद सिगनल नहीं आ रहा।”

“मेरा फोन ले लो।” जगमोहन ने जेब से अपना फोन निकालकर उसे दिया।

तभी काफी आगे जा रही कमला रानी की कार को सड़क से उतरकर कच्चे में जाते देखा।

ये कहां जा रही है?”

सोहनलाल ने गर्दन घुमाकर सामने देखा। साथ ही नम्बर मिला रहा था।

उधर गांव है कोई।” नम्बर मिलाने के बाद सोहनलाल ने फोन कान से लगाया।

परंतु नम्बर नहीं लगा।

तुम्हारे फोन से भी नम्बर नहीं लग रहा ।” सोहनलाल ने कहा।
 
रहने दो। मेरे खयाल में हम मंजिल पर आ पहुंचे हैं। मोना चौधरी का बहरूप उस गांव की तरफ जा रहा है। वहीं उसका ठिकाना होगा ।”

“उस गांव में। मुझे नहीं लगता।”

“हाईवे छोड़कर उस गांव की तरफ जाने का तो यही मतलब है सोहनलाल ।”

वो अभी तक पीछे हैं कमला रानी।” भौरी की आवाज कानों में पड़ी।

“जग्गू और गुलचंद सोचते हैं कि जैसे मुझे उनके पीछे आने का पता नहीं है।” कमला रानी मुस्करा पड़ी। ।

“तेरे को जैसा समझाया है, वैसा ही करना। जल्दी से काम को पूरा कर।” ।

“कर तो रही हूं भौरी।”

“मैं देख रही हूं तेरे में सुस्ती आ रही है। तू ऐसे ही ढीली होती रही तो मखानी से कैसे मिलेगी?”

“मखानी।” कमला रानी की आंखों में चमक आ गई—“वो कहां तेरे इंतजार में बैठा है।

” किधर?”

देवा के पास। उसने अपना काम पूरा कर लिया है। वो तेरे से तेज है।”

“क्यों न होगा।” कमला रानी मुस्कराई–“आखिर मर्द जो ठहरा।” ।

“हमारी दुनिया में मर्द-औरत एक ही फुर्ती से काम करते हैं। तूने मखानी के साथ वहां जाना है कि नहीं ।”

मखानी को पूछंगी।” ।

“पूछ लिया है। शौहरी से मेरी बात हो गई है। मखानी तेरे साथ पूर्वजन्म में जाने को तैयार है।” ।

“सच?” कमला रानी का चेहरा खिल उठा–“मखानी मेरे से कितना प्यार करता है?”

“जग्गू की कार भी इधर मुड़ गई है।” भौरी की आवाज कमला रानी के कानों में पड़ी—“वो तेरे को मिन्नो समझ रहा है।” फिर तुरंत ही कह उठी–“एक मिनट–शौहरी कुछ कह रहा है।” * दो पलों के बाद भौरी कह उठी।

“मैंने तेरे को गलत कहा, जग्गू और गुलचंद जानते हैं कि तू मिन्नो नहीं, उसका बहरूप है। इसलिए वो तेरे पीछे हैं कि देख सके तू जाती कहां है, क्या कर रही है।”

कमला रानी कुछ नहीं बोली।

सामने के कच्चे मकान के पीछे है कुआं, सीधे वहीं चल ।” कमला रानी कार को वहीं ले गई।

बस, अब बाहर आ जा।” कमला रानी बाहर निकली और पलटकर पीछे देखा। काफी दूर से कार इधर आती दिखाई दी।

 
सब याद है तेरे को?

” हां।”

मैं तेरा रूप बदल रही हूं। जग्गू और गुलचंद आए तो...” ।

“सब संभाल लूंगी, तू मेरा रूप बदल ।”

मात्र दस सेकंड बीते कि कमला रानी का रूप बदलने लगा। देखते-ही-देखते वो गांव की बूढ़ी औरत में परिवर्तित हो गई। झुर्रियों से भरा चेहरा । शरीर पर सूती, मैला हो रहा सूट। बालों की चुटिया हुई पड़ी थी। पांवों में टूटी-सी चप्पल थी। कमला रानी पीठ झुकाए, सामने नजर आ रहे कुएं की तरफ बढ़ने लगी।

इस वक्त यहां गांव का कोई इंसान नजर नहीं आ रहा था।

“ये काम खत्म कर ।” भौरी की आवाज कमला रानी के कानों में पड़ी—“इसके बाद तेरे को देवा के पास भेजूंगी। वहां मखानी भी होगा।” ।

जगमोहन ने कार को कुछ पहले ही रोक दिया था।

वो उस तरफ गई है।” सोहनलाल गांव के मकानों के पीछे देखता कह उठा।

दोनों आगे बढ़े।

यहां क्या करने आई होगी वो?

” देखते हैं।”

दोनों उस कार के पास पहुंचे। कार के भीतर झांका। वो खाली थी।

वो आगे बढ़ते चले गए।

ज्योंही गांव के कच्चे मकान को पार किया तो उन्हें कुआं दिखा। कुएं के पास बूढ़ी औरत दिखी जो कुएं के भीतर झांक रही थी। दोनों की निगाह इधर-उधर गई, परंतु उन्हें मोना चौधरी न दिखी।

कहां गई वो?”

“उस बुढ़िया से पूछते हैं।”

दोनों बुढ़िया के पास जा पहुंचे।

“सुनो।” सोहनलाल ने बुढ़िया से कहा-“अभी-अभी यहां एक लड़की आई थी। किधर गई?”

बुढ़िया कुएं में झांकना छोड़कर, सीधी हुई और पलटी।

क्या कहा?” उसने पूछा।

“अभी-अभी यहां एक लड़की आई थी। वो कहां गई। तुमने देखा होगा उसे ।” सोहनलाल ने पुनः कहा।

शर्म नहीं आती।” बुढिया ने आंखें निकालकर कहा।

हमने ऐसा क्या कह दिया जो...।”

लड़की का पीछा करते हो और पूछते हो क्या कह दिया।” बुढ़िया ने डांट वाले अंदाज में कहा।

“व...वो मेरी बहन है।” सोहनलाल जल्दी से बोला।

“तो यूं कहो न ।” बुढ़िया ने सिर हिलाया-“लेकिन वो गांव में क्या करने आई है?”

उसे कुछ काम होगा।”

तो तुम लोग अपनी बहन का पीछा क्यों कर रहे हो?”

 
सोहनलाल ने जगमोहन को देखा। जगमोहन ने जेब से सौ का नोट निकालकर उसे दिखाया।

तुम हमें बताओ वो लड़की किस तरफ गई है, तब ये नोट तुम्हें दे देंगे।”

| “मुझे नोट नहीं चाहिए।” बुढ़िया बोली-“मेरी बाल्टी कुएं में गिर गई है, वो निकाल दो ।”

“बाल्टी?”

उस लड़की ने मुझसे किसी का नाम बताकर पूछा था कि वो कहां रहता है। मैं जानती हूं वो कहां गई है, मेरी बाल्टी निकाल दो तो, मैं बता दूंगी।” बुढ़िया ने कहा।

“तू इसकी बाल्टी देख, मैं आस-पास देखता हूं।” सोहनलाल ने कहा और आगे बढ़ गया।

जगमोहन जल्दी से कुएं के पास पहुंचा।

तीन-साढ़े तीन फीट ऊंची दीवार थी कुएं की। दीवार पर हाथ रखकर जगमोहन ने भीतर झांका तो नीचे कुएं में पानी चमका। रस्सी नीचे तक जा रही थी, परंतु नीचे जाने के लिए सीढ़ियों जैसा कुछ नहीं था। स्पष्ट था कि कुएं में नीचे उतरना कठिन था। बाल्टी नहीं निकाली जा सकती थी।

इससे पहले कि जगमोहन वहां से हटता, सीधा होता। | बुढ़िया फुर्ती से नीचे झुकी और जगमोहन की दोनों पिंडलियां पकड़कर ऊपर उठाती चली गई। जगमोहन को संभलने का मौका नहीं मिला और बुढ़िया ने पिंडलियां उठाकर, जगमोहन को कुएं में धकेल दिया।

जगमोहन की जोरदार चीख पूंजी।। ‘छपाक’ उसके कुएं के पानी में गिरने की आवाज आई। बुढ़िया मुंडेर पर हाथ रखे, नीचे झांकने लगी।

वाह कमला रानी, तूने तो कमाल कर दिया। उसके कानों में भौरी की आवाज़ पड़ी।

जगमोहन की वो चीख सोहनलाल के कानों तक पहुंच गई थी। सोहनलाल दौड़ा आया।

क्या हुआ?”

“तुम्हारा भाई कुएं में गिर गया है।” बुढ़िया ने कहा।

“क्या?” सोहनलाल ने उसी पल आगे बढ़कर कुएं में झांका। उसे कुएं के पानी में जगमोहन दिखा। “ठीक है तू?” सोहनलाल ने ऊंचे स्वर में पूछा।

हां। मुझे इसी बुढ़िया ने कुएं में फेंका है।” नीचे से जगमोहन ने गुस्से से कहा।।

“क्या?” सोहनलाल ने अचकचाकर, पास खड़ी बुढ़िया को देखा।

“तुम्हारा भाई तो पागल है।” बुढ़िया ने भोलेपन से कहा-“भला मैं बूढ़ीं, उसे कैसे नीचे फेंक सकती हूं।” ।

“वो झूठ नहीं बोलेगा।” सोहनलाल ने बुढ़िया को घूरा।

“सत्यवादी की औलाद है कि वो झूठ नहीं बोलेगा।” बुढ़िया ने तीखे स्वर में कहा—“वो झूठ ही तो बोल रहा है। कुएं में झांक रहा था, खुद को संभाल नहीं सका और नीचे जा गिरा। अब गुस्से में मेरी तरफ उंगली उठा रहा है।” ।

तेरे से बाद में बात करूंगा। इसे निकालें कैसे?

” रस्सी नीचे लटका दे। ऊपर चढ़ आएगा।” बुढ़िया बोली।

सोहनलाल ने नीचे झांककर कहा।

जगमोहन रस्सी लटक रही है। मैं इधर से रस्सी पकड़ लेता हूं, तू ऊपर चढ़ आ ।” ।

“इस बुढ़िया से बचकर रहना। इसने मुझे कुएं में फेंका है।” नीचे से जगमोहन ने कहा।

“तू ऊपर आ, फिर इस बुढ़िया से भी बात कर लेंगे।” सोहनलाल ने ऊपर रस्सी कसकर पकड़ ली।
 
तभी बुढ़िया मुस्कराई और सोहनलाल के पास आ गई। “तू कुछ खाता-पीता नहीं है।” वो बोली।

क्यों?” सोहनलाल रस्सी पकड़े कह उठा।

इतना दुबला-पतला क्यों है?” ।

तेरे को क्यों चिंता हो रही है?”

चिंता नहीं हो रही, सोच रही हूं कि तेरे को तो मैं इस तरह उठा लूंगी, जैसे बच्चे को उठाया जाता है।”

“मुझे उठाने की जरूरत क्या पड़ गई तेरे को?” सोहनलाल ने उसे देखते हुए तीखे स्वर में कहा।

कुएं में जो फेंकना है तेरे को।” बुढ़िया मुस्करा पड़ी।

क्या?" सोहनलाल चौंका। तभी बुढ़िया ने बिल्ली की तरह सोहनलाल पर झपट्टा मारा और उसे अपने आगोश में जकड़ लिया।

सोहनलाल ने रस्सी छोड़ी और बुढ़िया से भिड़ गया।

परंतु अगले ही पल उसे महसूस हो गया कि बुढ़िया में बेपनाह ताकत है।

बुढ़िया ने सोहनलाल को दोनों हाथों में उठाया और आगे बढ़कर उसे कुएं में फेंक दिया।

उसके पानी में गिरने की ‘छपाक' आवाज ऊपर तक आई।

“मान गई कमला रानी तुझे ।” भौरी की आवाज उसके कानों में पड़ी।

“कोई गांव वाला आएगा और उन्हें कुएं से निकाल लेगा।” कमला रानी ने कहा।

कालचक्र से वो नहीं बच पाएंगे।

” क्या मतलब?”

इस वक्त कालचक्र का जोर चल रहा है। होगा वही, जो कालचक्र चाहेगा। कालचक्र जग्गू और गुलचंद को भटका देगा।”

भटका देगा, कैसे—वो तो कुएं में हैं।

” ये आम कुआं नहीं है।” भौरी के हंसने की आवाज आई।

“मैं समझी नहीं।” ।

“तुझे समझने की जरूरत क्या है। तू मेरे संग रह और मजे कर। अब तेरा रूप बदल रही हूँ मैं।” ।

मोना चौधरी बनाएगी मुझे?"

नगीना बनाऊंगी। अब तू देवा के पास जाएगी।” भौरी की आवाज कानों में पड़ी।

एक बात मुझे समझ में नहीं आई।”

जग्गू और गुलचंद को क्यों नहीं बेहोश करके, पिशाचों के हवाले किया?”

“इसकी दो वजहें हैं कमला रानी।

” “क्या?”

पहली वजह तो ये है कि जग्गू पर किसी पवित्र शक्ति का साया है, जो उसे पूर्वाभास करा रही है। कालचक्र को इस बात का अंदेशा था कि वो जग्गू पर सीधे-सीधे हाथ डालेगा तो वो पवित्र शक्ति मुकाबले पर उतर सकती है।”

तो क्या कालचक्र उस शक्ति से डरता है?"

नहीं डरता। परंतु झगड़े में वक्त खराब करने का भी क्या फायदा । कालचक्र ने इस प्रकार जग्गू को झटका दिया। गुलचंद जग्गू के पास था तो उसके साथ कालचक्र को यही सलूक करना पड़ा।”

और दूसरी वजह क्या है?”

दूसरी ये कि मखानी, जग्गू के रूप में वहां पर मौजूद रहेगा, जहां वो सब हैं। वहां ऐसे काम करेगा कि उनमें झगड़ा हो ।”

“समझ गई।” कमला रानी ने सिर हिलाया-“अब तू मुझे नगीना बना।” ।
 
दो पल बीते कि कमला रानी का रूप परिवर्तित होने लगा। देखते ही देखते वहां बुढ़िया के बदले नगीना खड़ी थी।

सच में तू खूबसूरत है।”

“मैं या नगीना?”

नगीना के बारे में ही कह रही हूं।” । कमला रानी कुएं के पास पहुंची और नीचे झांका ।

नीचे कमर-भर पानी में जगमोहन और सोहनलाल दिखे। वो ऊपर ही देख रहे थे।

“भाभी।” तभी कुएं के भीतर फंसा जगमोहन कह उठा–“तुम यहां...।” ।

। “हां मेरे प्यारे देवर, मैं यहां ।” कमला रानी हंसी-“कुएं में तू कितना अच्छा लग रहा है और गुलचंद भी।” ।

ये भाभी का बहरूप है।” सोहनलाल ने कहा। कमला रानी वहां से हटी और भौरी से बोली। चलें अब।” कहकर वे कार की तरफ बढ़ीं।

कार की क्या जरूरत है। मैं तेरे को वैसे ही, पलों में मुम्बई पहुंचा देती हूं।” भौरी बोली।

ओह, मैं तो भूल ही गई थी।” कमला रानी ठिठकी। अगले ही पल देखते ही देखते कमला रानी का शरीर छोटा हुआ और नजरों से ओझल हो गया।

अब वहां कोई भी नहीं था। जगमोहन और सोहनलाल कुएं के भीतर फंसे पड़े थे।

देवराज चौहान ड्राइंग रूम में टहल रहा था। चेहरे पर गम्भीरता थी।

जगमोहन बना मखानी सोफा चेयर पर खामोशी से बैठा था।

काफी देर से उनके बीच खामोशी थी। शाम के छः बजने जा रहे थे।

“सोहनलाल अभी तक नहीं लौटा।” जगमोहन कह उठा–“अब मुझे पूरा विश्वास है कि वो मुसीबत में फंस चुका है।”

देवराज चौहान ने जगमोहन को देखा, कहा कुछ नहीं। टहलता रहा।

तुम चुप क्यों हो, कुछ तो बोलो।” जगमोहन ने झल्लाकर कहा।

क्या कहूं, मेरे पास कहने को कुछ भी नहीं है। जथूरा एक-एक करके सबको गायब करता जा रहा है।” देवराज चौहान ने ठिठककर होंठ भींचते हुए कहा-“हैरानी की बात है कि बांके और रुस्तम को बंगले से ही गायब कर दिया। ये बात स्पष्ट है कि जथूरा की पहुंच बंगले के भीतर तक है और हम सुरक्षित नहीं हैं।”

“बचाव में भी कुछ नहीं कर सकते।” जगमोहन ने गहरी सांस ली।

“पहले पता तो चले कि किस चीज से बचाव करना है।” देवराज चौहान ने कड़वे स्वर में कहा-“अंजानी ताकतों से हम मुकाबला नहीं कर सकते। हम सब साधारण इंसान हैं और जथूरा पूर्वजन्म में ताकत रखता है। उसके पास विद्या है। तुम भूले नहीं होंगे कि पूर्वजन्म में क्या-क्या होता है। हम वहां पर बेबस से हो जाते हैं।”

“इतने भी बेबस नहीं होते, जितना कि तुम कह रहे हो। हम वहां के हालातों का मुकाबला करते हैं।”

फिर भी, पूर्वजन्म में हमारे लिए कठिनाइयां हैं।”

क्या हम पूर्वजन्म में जाएंगे?” पूछा जगमोहन ने।
 
पक्का जाएंगे।” देवराज चौहान ने दृढ़ता से कहा-“जिस तरह जथूरा हमें रोकने के लिए अपनी ताकतें लगा रहा है, उसी तरह, पवित्र शक्तियां भी हरकत में आ चुकी होंगी कि हमें पूर्वजन्म में भेजा जा सके। जब-जब भी हालात बने हैं हम पूर्वजन्म में अवश्य गए हैं। एक बार भी ऐसा नहीं हुआ कि हमें रुके हो।”

तभी मखानी के कानों में शौहरी की फुसफुसाहट पड़ी।

मखानी। कमला रानी आ गई है।” मखानी का दिल जोरों से उछला परंतु चेहरा शांत ही बनाए रखा।

तभी बेल बज उठी।।

जगमोहन रूपी मखानी अपने पर काबू रखे, शांत भाव से उठा।

देवराज चौहान ठिठका।

कौन हो सकता है?” जगमोहन बोला।

“शायद, सोहनलाल आया हो।” ।

“देखता हूं।”

कहकर जगमोहन दरवाजे की तरफ बढ़ गया। जगमोहन ने दरवाजा खोला। सामने नगीना खड़ी थी।

“भाभी।” जगमोहन खुशी भरे स्वर में कह उठा।

“तेरे भैया कहां हैं?” नगीना व्याकुल स्वर में कह उठी।

नगीना की आवाज सुनकर देवराज चौहान चौंका। नजरें दरवाजे की तरफ गईं।

उसने नगीना को भीतर आते देखा।

देवराज चौहान के चेहरे पर खुशी की हल्की-सी चमक आ गई ।। | “कैसे हैं आप?” भीतर आने पर नगीना ने देवराज चौहान को देखा तो उसकी तरफ दौड़ी।

“नगीना।” देवराज चौहान के स्वर में खुशी थी। पास आकर नगीना देवराज चौहान से लिपट गई।

भाभी।” पास आता जगमोहन बोला–“मुझे पूर्वाभास हुआ था कि तुम बंगले पर आओगी?”

नगीना और देवराज चौहान अलग हुए।

“तुम कहां थी नगीना?” पूछा देवराज चौहान ने।

वो जगह मैं नहीं जानती। होश आने पर बहुत घबराई हुई थी। मोना चौधरी मुझे बेहोश करके, उठा ले गई थी। वो कोई जंगल जैसी जगह थी। पास में कहीं समुद्र भी था। मैं वहां से भाग आई। टैक्सी पर यहां पहुंची।” ।

“वहां।” देवराज चौहान बोला-“मोना चौधरी, महाजन, रुस्तम, बांके, सोहनलाल भी बेहोश दिखे होंगे।”

“नहीं, वहां मुझे कोई और नहीं दिखा।” ।

देवराज चौहान ने जगमोहन को देखकर कहा।

“तुमने तो पूर्वजन्म में सबको एक ही जगह पर, पास-पास बेहोश पड़े देखा था।”

“हां, देखा था।”

“नगीना कहती है कि वहां पर इसे कोई दूसरा नहीं दिखा।” देवराज चौहान बोला।

तो इसमें मैं क्या कर सकता हूं। जो मुझे महसूस हुआ, वो बताया था मैंने ।” जगमोहन का स्वर सरल था—“भाभी, मैं तुम्हारे लिए चाय बनाता हूं। तुम आ गईं हो तो, हौसला मिला कि शायद बाकी भी लौट आएंगे।”

जगमोहन किचन में चला गया। देवराज चौहान और नगीना सोफों पर आमने-सामने जा बैठे।

ये सब क्या हो रहा है। मोना चौधरी ने मेरा अपहरण क्यों किया?” नगीना ने पूछा।

“मोना चौधरी नहीं थी वो।” देवराज चौहान गम्भीर स्वर में बोला—“तुम शायद कुछ नहीं जानती ।”

“हां, मैं कुछ नहीं जानती, मुझे बताओ कि...।”

पूर्वजन्म का साया फिर हम पर पड़ रहा है।

” क्या?" नगीना चौंकी।

“हां। पूर्वजन्म की कोई शक्ति है जथूरा। जिसके बारे में किसी को याद नहीं आया कि वो कौन है। वो जथूरा चाहता है कि हम पूर्वजन्म का सफर न करें, परंतु कोई शक्ति जगमोहन को पूर्वाभास कराकर, पूर्वजन्म के सफर की तैयारी करवा रही है।”

“क्या मतलब–मुझे सारी बात बताइए कि हालातों को समझ सहूं।”

देवराज चौहान नगीना को सब कुछ बताने लगा।

इस दौरान जगमोहन कॉफी बनाकर ले आया। वो भी पास बैठ गया।

नगीना ने सब कुछ सुना। देवराज चौहान खामोश हुआ तो वो चिंतित स्वर में कह उठी।

ये तो बहुत खतरनाक बातें बताईं आपने।”
 
हम सब इन्हीं हालातों में फंसे पड़े हैं।”

मुझे तो आप दोनों की चिंता होने लगी है कि कहीं...।”

मेरे खयाल में अब सब कुछ ठीक होने लगा है।” देवराज चौहान बोला।

वो कैसे?” नगींना के होंठों से निकला।

“तुम जो वापस आ गईं। हो सकता है इसी तरह बाकी सब भी वापस आ जाएं।” ।

आपका मतलब कि जथूरा अपनी कोशिशों से पीछे हट गया है।” नगीना बोली।

कह नहीं सकता।”

जथूरा पीछे हटने वालों में से नहीं है।” जगमोहन कह उठा–“हमें किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए।

तुम्हारा मतलब कि बात अभी और आगे चलेगी।” नगीना ने जगमोहन को देखा।

हां। मुझे तो लगता है कि ये भी जथूरा की कोई चाल है, तुम्हारा वापस आ जाना।” जगमोहन बोला।

ओह, जाने क्यों मेरा मन घबरा रहा है।” नगीना ने कहा।

“हमारे पास इस बात की जानकारी है कि जथूरा ने हम सब के लिए कालचक्र छोड़ा हुआ है। वो हम सबको बुरी तरह फंसा देना चाहता है।” जगमोहन ने गम्भीर स्वर में कहा-“बांके और रुस्तम तो बंगले से ही गायब हो गए।” ।

देवराज चौहान को चुप देखकर नगीना बेचैनी से बोली। “आप कुछ करते क्यों नहीं?”

“मैं नहीं समझ पा रहा हूं कि क्या करूं, क्योंकि हालातों को मैं ठीक से समझ नहीं पा रहा कि आखिर जथूरा करना क्या चाहता है। इतना जरूर है कि उसने हमें बेहद परेशान कर रखा है। वो बहुत कुछ कर रहा है और हमारे करने को कुछ नहीं।”

अब हम क्या करें?” नगीना ने उलझन भरे स्वर में कहा।

“मैंने पहले ही कहा है कि हम कुछ नहीं कर सकते। ये हाथ-पांवों का खेल नहीं, जथूरा की ताकतों की चाल है। परंतु मैं इतना जानता हूं कि जथूरा कुछ भी कर ले, हमारी पूर्वजन्म की यात्रा को नहीं रोक सकता। जब-जब भी पूर्वजन्म के सफर का संयोग बना है, तब-तब हमने पूर्वजन्म में प्रवेश किया है। अब भी कुछ ऐसा होगा कि हम पूर्वजन्म में प्रवेश कर जाएंगे।”

तीनों एक-दूसरे को देख रहे थे।

कॉफी ठंडी हो रही है।” जगमोहन बोला।

सबने कॉफी का प्याला उठा लिया।

“ऐसे मौके पर अक्सर पेशीराम (फकीर बाबा) आकर हमें सलाह देता है। उलझनें दूर करता है, परंतु इस बार पेशीराम हमसे बात करने नहीं आया।” देवराज चौहान ने गम्भीर स्वर में कहा-“उसका न आना भी हमारे सामने सवाल खड़ा करता है कि...।”

“कोई तो बात होगी ही जो, इन हालातों में भी वो नहीं आया।” जगमोहन सोच-भरे स्वर में बोला।

“पेशीराम को सिर्फ एक ही काम है, वो है कि मेरी और मोना चौधरी की दुश्मनी खत्म कराकर, श्राप से मुक्ति पा लें। वो तीन जन्मों से मुक्ति पाने के लिए ही भटक रहा है। इस वक्त मैं और मोना चौधरी को हालातों ने करीब-करीब कर रखा है। इस मौके को पेशीराम कभी भी गंवाना नहीं चाहेगा। मुझे हैरानी है कि वो अभी तक आया क्यों नहीं?” देवराज चौहान ने जगमोहन को देखा।

“इस बारे में तो पेशीराम ही जवाब दे सकता है।” जगमोहन ने गम्भीर स्वर में कहा।

इसी तरह की बातें उनमें होती रही। कॉफी समाप्त करके नगीना देवराज चौहान से बोली।

मैं इसी बंगले पर रहना चाहती हूं अभी, आपको एतराज तो नहीं?" ।

मैं स्वयं, तुम्हें अपने पास ही देखना चाहता हूं।” देवराज चौहान गम्भीर स्वर में बोला—“जो हालात हैं उन्हें देखते हुए कुछ नहीं कहा जा सकता कि कब क्या हो जाए। हम कभी भी किसी नई मुसीबत में घिर सकते हैं।”

* “मैं कुछ देर आराम करना चाहूंगी।” कहकर नगीना उठी और भीतर के कमरे की तरफ बढ़ गई।

देवराज चौहान के चेहरे का तनाव अब कुछ कम था।

कितनी अच्छी बात है कि भाभी लौट आई।” जगमोहन मुस्कराकर बोला।।

“हां, बात तो तब बने, जब बाकी भी इसी तरह लौट आएं ।” देवराज चौहान गम्भीर था।

शायद वो भी लौट...।” ।

“मुझे नहीं लगता।” देवराज चौहान ने जगमोहन को देखा।

क्या मतलब?”

जथूरा जो भी है, कम-से-कम वो कच्ची गोलियां नहीं खेलता। ये बात तो तुझे महसूस हो चुकी है। वो ताकत रखता है और पक्का खेल खेलता है। नगीना के इस तरह लौट आने में, अवश्य कोई रहस्य छिपा है जथूरा का।” ।

“तुम अब बेकार की बातें कर रहे हो।” जगमोहन ने मुंह बनाया।

“मैं सही कह रहा हूं, जथूरा ने अपने किसी मतलब की ही खातिर, नगीना को अपनी कैद से आजाद किया है।” देवराज चौहान के शब्दों में सोचों के गहरे भाव मौजूद थे—“वरना वो नगीना को छोड़ने वाला नहीं ।” |

जगमोहन उठते हुए बोला।

“मैं तुम्हारी बातों से सहमत नहीं हूं। भाभी पर नजर डालने जा रहा हूं। बांके और रुस्तम की तरह भाभी भी गायब न हो जाए।” कहने के साथ जगमोहन भीतर की तरफ बढ़ गया।
 
कुछ ही पलों में वो नगीना के सामने था।

कमला रानी।”

ओह–मखानी।” दोनों कसके गले जा लगे।

“कितनी शांति मिली है तेरे सीने से लगकर ।” कमला रानी ने आह भरकर कहा।।

“मुझे भी चैन मिला है।” मखानी ने प्यार से डूबे स्वर में कहा। “तू मेरे साथ पूर्वजन्म में चलेगा न?”

तेरे साथ तो मैं हर जगह जाने को तैयार हूं।” ।

भौरी से मैंने बात कर ली है। वो हम दोनों को पूर्वजन्म में ले जाएगी। वहां हम सप्ताह में एक बार मिला करेंगे।”

सिर्फ एक बार।” मखानी ने नाराजगी से कहा।

धीरे-धीरे मैं भौरी को मना लूंगी कि वो हमें दो बार मिलने दे। अब छोड़ मुझे।” ।

नहीं ।”

“समझा कर।” कमला रानी जबरन उससे अलग हुई–“मैं इस वक्त नगीना के रूप में और तू जगमोहन के बहरूप में है।”

“ठीक है, ठीक है।” मखानी ने बुरा सा मुंह बनाकर कहा।

“काम की तरफ ध्यान दे। देवराज चौहान को पिशाच के फंदे में पहुंचाना है।” कमला रानी ने धीमे स्वर में कहा।

मैं कोई रास्ता निकालता हूं।”

“उसके सिर में कुछ मारकर, बेहोश कर दे।” कमला रानी ने कहा।

“मखानी।” शौहरी की आवाज कानों में पड़ी_“देवा आसानी से कब्जे में नहीं आएगा।”

“तुम दोनों मिलकर देवा पर काबू करो।”

मैं उसे काबू में कर लेता।”

अगर ये तेरे अकेले के बस का काम होता तो मैं क्यों कहता, कमला रानी के आने का इंतजार कर। अगर तुम लोग चूक गए तो देवा तुम्हें खत्म कर देगा। वो पहले से ही गुस्से में है।”

क्या करूँ मैं?”

“उसकी कॉफी में बेहोशी की दवा मिला देना। कमला रानी उसे बातों में लगाए रखेगी जिससे स्वाद का पता नहीं चलेगा। दो घंट कॉफी भी उसने पी ली तो वो बेहोश होने से बच नहीं सकेगा। इस बीच अगर उसे शक हो जाए तो तुम लोग ही सब कुछ संभालोगे।”

“बेहोशी की दवा मैं कहां से लाऊंगा?”

“वो तेरे को किचन में, चीनी के डिब्बे के ऊपर रखी पुड़िया में मिलेगी।”

“तो सब इंतजाम पहले ही कर रखा है तूने।” मखानी ने कहा-“अभी तो देवराज चौहान ने कॉफी पी है।”

“कुछ वक्त ठहर कर उसे कॉफी पिलाना। जल्दबाजी मत करना, वरना देवा शक खा जाएगा।”

। “ठीक है।”

“ये काम निबटा, फिर अगला काम करना है।”

“अभी मैं और काम नहीं करूंगा।” मखानी ने बच्चों जैसी जिद-भरे स्वर में कहा।

क्यों?” पहले मैं कमला रानी के साथ...।”

“वो बाद में, पहले काम। हमारी दुनिया में कामों को महत्त्व दिया जाता है। कार्य पूरे हो तो तभी आराम की सोची जाती है।”

“मैं जो कमला रानी के साथ करूंगा, वो भी तो कार्य है, महत्त्वपूर्ण कार्य ।” मखानी चिढ़कर बोला।

“तू मेरी बात नहीं मानेगा तो मैं तुझे छोड़कर चला जाऊंगा।”

जाना मत।” मखानी डरकर बोला “नहीं तो मैं मर जाऊंगा। अगला काम क्या है?”
 
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