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महाकाली--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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“मुझे तुम्हारी जरूरत है।”

तभी सोहनलाल नानिया से बोला।

“तुम तो कहती थी कि कालचक्र के भीतर वाले एक-दूसरे की जान नहीं ले सकते।” ।

“गलत क्या कहा मैंने।” ।

तुम्हारा कोचवान तो...।” ।

वो कुछ देर में उठ जाएगा। उसके घाव खुद-ब-खुद ही भर जाएंगे।”

“ओह।”

“अब मैं क्या करूं। ये मेरा कुंआरापन खत्म कर देगा जबकि तुम्हारे आ जाने की वजह से, ये वक्त, मेरे लिए कालचक्र से मुक्ति का है।” नानिया ने चिंतित स्वर में कहा-“इस वक्त मैं तुम्हें भी नहीं बचा सकती।”

लेकिन मैं तुम्हें बचा सकता हूं।” सोहनलाल मुस्कराया।

“असम्भव ।”

“मेरा सेवक, बोगस को हरा देगा, बल्कि मार देगा। क्योंकि हम कालचक्र के नहीं हैं। यहां पर हम किसी को भी मार सकते हैं और कोई भी हमें मार सकता है।” सोहनलाल ने शांत स्वर में कहा।

“बोगस बहुत ताकतवर हैं और तुम्हारा सेवक मुझे किसी काम का नहीं लगता।”

“ठीक है। अब तुम मेरे सेवक का काम देखो।” कहकर सोहनलाल ने जगमोहन को देखा।

क्या करूं?” जगमोहन ने पूछा।

मार साले को।”

हमें क्या फायदा इससे?”

फायदा नुकसान तो पता नहीं। लेकिन इस वक्त तो इसे खत्म कर। रिवॉल्वर है न?”

है।” जगमोहन ने कहा और बोगस की तरफ बढ़ा। उसे अपनी तरफ आते पाकर बोगस की आंखें सिकुड़ीं। जगमोहन चंद कदम पहले ठिठका और शांत स्वर में कह उठा।

मैं तुम्हें मारना नहीं चाहता। बेहतर है कि तुम यहां से चले जाओ।”

बोगस हंस पड़ा।

तो तुम मेरी जान लोगे। ठीक है लो।

” मैं मजाक नहीं कर रहा।” जगमोहन बोला—“चले जाओ यहां

मैं भी मजाक नहीं कर रहा। तुम मेरी जान लो ।”

नानिया सोहनलाल से कह उठी।

“तुम्हारा सेवक तो पागल है। क्या इस तरह बातों से किसी को सबक सिखाया जाता है। फिर ये खाली हाथ बोगस का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता। बोगस अभी इसे मार देगा।”

सोहनलाल की शांत निगाह जगमोहन और बोगस पर थी। जगमोहन ने रिवॉल्वर निकाली और बोगस से कहा।

अभी भी तुम्हारे पास मौका है यहां से भाग जाने का ।” बोगस ने उसके हाथ में पकड़ी रिवॉल्वर को अजीब-सी नजरों से देखा।

क्या तुम इससे मुझे मारोगे?”

“हां।”

“हैरानी है कि इस जरा-सी चीज से तुम तलवार का मुकाबला कैसे करोगे। आओ, हम मुकाबला करें। मैं भी तो देखें कि तुम किस बूते पर मुझे यहां से चले जाने के लिए धमका रहे हो।”

जगमोहन ने रिवॉल्वर वाला हाथ घोड़े पर बैठे बोगस की तरफ किया और गोली चला दी।

कानों को फाड़ देने वाला धमाका गूंजा।

बोगस के हिलने की वजह से निशाना चूक गया और गोली कंधे पर रगड़ दे गई।

बोगस के होंठों से हल्की-सी कराह निकली।

उसी क्षण जगमोहन ने दूसरा फायर किया। बोगस के सिर में गोलीं जा लगी।

बोगस उछलकर घोड़े से नीचे गिरा और फिर हिला भी नहीं। जगमोहन ने रिवॉल्वर जेब में रख ली।

ये क्या हुआ?” नानिया के होंठों से हैरानी भरा स्वर निकला।

बोगस मर गया।”

 
बोगस मर गया।”

क...कैसे?"

मेरे सेवक ने मार दिया उसे ।”

“ओह, कितनी हैरानी की बात है कि तलवार के बिना मार दिया उसे। उसके हाथ में क्या था, जिससे...।”

“वो हमारा हथियार है। हम तलवारों से नहीं लड़ते।” सोहनलाल मुस्कराया—“अब तो तुम खुश हो?”

। “बहुत खुश।” नानिया वास्तव में खुश थी—“धमाके की आवाज कितनी मधुर है।”

मधुर?” सोहनलाल ने नानिया को देखा।

*और नहीं तो क्या। मुझे धमाके की आवाज बहुत अच्छी लगी।”

लेकिन हमारी दुनिया के लोग तो इस धमाके से डरते हैं।” मैं नहीं डरती।” कहकर नानिया बोगस की लाश की तरफ बढ़ गई।

सोहनलाल जगमोहन के पास पहुंचा।

तुम्हारा क्या खयाल है कि हमें क्या करना चाहिए?” सोहनलाल बोला।

मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा।”

तो नानिया के साथ ही रहें? अंधेरे में रोशनी का बिंदु तो है हमारे लिए।” ।

“जैसा तुम्हें ठीक लगे। हमारे पास कोई और रास्ता भी तों नहीं ।”

तभी नानिया की आवाज आई। वो बोगस की लाश के पास खड़ी थी।

ये तो सच में मर गया।”

“तुम क्या समझी थी इस तरह गिरकर मजाक कर रहा था।” सोहनलाल हंसा।।

“मुझे इस पर भरोसा नहीं।” जगमोहन बोला–“नानिया कालचक्र का ही हिस्सा है।”

“मैं नानिया पर पूरा भरोसा नहीं कर रहा। उससे सतर्क हूं।” सोहनलाल ने कहा।

नानिया जिस किताब का जिक्र कर रही है मैं वो किताब देखना चाहता हूं।” जगमोहन बोला।

किताब उसके महल में है। वो हमें वहीं तो ले जा रही है।”

नानिया कोचवान के पास पहुंची। सोहनलाल भी उस तरफ बढ़ गया।

अब तुम कैसे हो?”

पहले से ठीक हूं। घाव भर गया है। मैं बोगस से हार गया।”

कोई बात नहीं। वो तुमसे ज्यादा ताकतवर था। उठ जाओ अब । हमें महल के लिए रवाना होना है।”

नानिया की दोनों सेविकाओं में से एक जगमोहन के पास पहुंची।

तुम तो बहुत बहादुर हो।”

जगमोहन ने उसे देखा।

वो सांवले रंग की, तीखे नैन-नक्श वाली, खूबसूरत युवती थी। इतनी देर साथ रहने पर भी, जगमोहन ने अभी तक उसे नहीं देखा था। इस वक्त वो खुश थी।

“शुक्रिया।”

“तुम्हें मालूम है कि मैं भी अभी तक कुंआरी हूं।” वो फिर कह उठी।

“अच्छा। इसमें मेरी तो कोई गलती नहीं।”

रानी साहिबा के करीब रहने वाली सेविका, कुंआरी ही हो। ये रानी साहिबा का हुक्म है। परंतु अब रानी साहिबा को वो मिल गया है, जिसका उन्हें इंतजार था। इसलिए हम पर से भी ये बंदिश रूट जाएगी।”

तो मैं क्या करूं?”

“मैं तुम्हारे साथ प्यार करूंगी। मेरा नाम कोमा है।”

मेरे साथ?” जगमोहन ने उसे घूरा।।

“हां, तुम बहादुर हों। बोगस को तुमने जिस तरह मारा, वो काम हर कोई नहीं कर सकता।”

“तुम मेरे पास से दूर चली जाओ वरना मैं तुम्हें भी बोगस की तरह मार दूंगा।”

 
मैं जानती हूं तुम ऐसा नहीं करोगे।” कोमा मुस्कराई।

क्यों नहीं करूंगा?”

“तुम सिर्फ रानी साहिबा के दुश्मन को ही मारोगे।”

जगमोहन ने उसे घूरा। कोमा प्यार से जगमोहन को देख रही थी।

जगमोहन सोहनलाल और नानिया की तरफ बढ़ गया, जो कि कोचवान के पास मौजूद थे।

कोचवान अब उठ खड़ा हुआ था। वो स्वस्थ था। उसका घाव जैसे जादुई ताकत ने भर दिया था।

तुम तो ठीक हो गए।” जगमोहन उसे देखकर मुस्कराया।

परंतु मुझे दुख है कि मैं बोगस को हरा नहीं पाया।”

कोई भी हराएं, काम होना चाहिए।”

सोहनलाल ने नानिया को देखकर पूछा। “तुम हमसे मिलने से पहले, काफिले के साथ कहां से आ रही थीं?

“अपने माता-पिता से मिलकर ।”

“माता-पिता?” ।

हां, वो भी कालचक्र का अंश बने हुए कैद हैं। कहीं दूर रहते हैं वो। कभी-कभी मैं उनसे मिलने जाती हूं। परंतु जब तुम मुझे आजाद कर दोगे, तो मेरे माता-पिता खुद-ब-खुद ही आजाद हो जाएंगे।”

वो कैसे?

“कालचक्र में एक ही खून के लोग, जो भी करते हैं, उसका असर दूसरे पर होता है। मैं मरूंगी तो मेरे माता-पिता भी मर जाएंगे। मैं आजाद होऊंगी तो वो भी कालचक्र से बाहर आ जाएंगे।”

अजीब बात है।”

सोबरा के कालचक्र को कोई समझ नहीं पाया।” नानिया बोली-“बहुत कुछ ऐसा है जो उलझन में डाल देता है।”

“मैं तुम्हारी वो किताब देखना चाहता हूं, जिसमें लिखा है कि धुआं उड़ाने वाला आकर तुम्हें कालचक्र से मुक्ति दिलाएगा ।” ।

“अवश्य सेवक। वो किताब मेरे महल में है। वहां पहुंचकर तुम किताब देख लेना।”

“उसमें और भी कई बातें लिखी हैं?”

हां। परंतु वो मेरी समझ में नहीं आतीं।”

तभी कोचवान कह उठा।

हमें फौरन आगे बढ़ जाना चाहिए, ताकि दिन की रोशनी रहते महल तक पहुंच सके।”

अवश्य...हम...।” नानिया अपने शब्द पूरे न कर सकी। तभी कुछ दूर जैसे किसी ने होंठों से अजीब शब्द निकाला हो। कोचवान घबराकर कह उठा। “ओह ये तो चिमटा जाति के लोग हैं। आपके पक्के दुश्मन हैं। आपने कुछ महीने पहले ही इनके पचास लोगों को कैद कर लिया था। क्योंकि ये आपके सेवक बनने से इंकार कर रहे थे।”

ये यहां क्या कर रहे हैं?”

इधर ही, जंगल में चिमटा जाति रहती है। वो लोग शायद धमाके सुनकर इस तरफ आ गए हैं। होंठों से आवाजें निकालकर वे इस तरह का इशारा तब देते हैं, जब वे जंगल में बहुत बड़ा घेरा बनाकर आगे बढ़ रहे हों।” |

अबकी बार दूसरी तरफ से होंठों से निकलने वाली कल-कल की तीव्र आवाज गूंजी।।

“ये तो बहुत बुरा होने वाला है रानी साहिबा। चिमटा जाति के लोग आपको कैद कर लेंगे।” ।

“घबराने की कोई जरूरत नहीं।” नानिया ने विश्वास-भरे स्वर में कहा।

ये आप क्या कह रही हैं।” कोचवान ने व्याकुल निगाहों से रानी साहिबा को देखा।

सोहनलाल का सेवक, उन सबको मार देगा।” ।

 
क्या?" जगमोहन के होंठों से निकला।

“जिस तरह तुमने बोगस को मारा, उस तरह...।”

दो-चार की बात हो तो, जुदा बात है, ज्यादा संख्या हो तो मैं नहीं मार सकता।” जगमोहन बोला।

ये क्या कह रहे हो।” नानिया कह उठीं।

“ये सच कह रहा है।” सोहनलाल बोला—“पांच-सात से ज्यादा के मरने की उम्मीद मत करना ।” ।

और रानी साहिबा ।” कोचवान घबराया हुआ था—“उनकी संख्या तो ज्यादा होगी । वो समूह में एक साथ निकलते हैं।”

कितनी संख्या हो सकती है?”

*50 या फिर 100 ।”

जगमोहन ने सोहनलाल से कहा। हम उनसे बच नहीं सकते।” लेकिन हमें बचना है।” सोहनलाल बोला।

कैसे बचेंगे?” ।

सोहनलाल ने नानिया से पूछा। “तुम बताओ कैसे बचेंगे?”

“मैं क्या बताऊं। अगर मेरे पास सैनिक होते तो उन्हें देखकर वो भाग जाते ।” नानिया परेशान स्वर में कह उठी।

ये सोचो कि हम कैसे बच सकते हैं।”

मैं...मैं नहीं जानती।”

“तुम बताओ।” जगमोहन ने कोचवान से पूछा।

“मैं भी नहीं जानता। वो...वो हमें कैद कर लेंगे। रानी साहिबा से खार खाते हैं।” कोचवान ने कहा।

। “यहां तो मुसीबतें ही मुसीबतें हैं।” सोहनलाल कह उठा।

एक बार महल में पहुंच जाएं, फिर सब ठीक हो जाएगा।” नानिया ने जैसे उसे तसल्ली दी।

पहुचेंगे, तब ना।” सोहनलाल ने बुरा सा मुंह बनाया।

“सब पेड़ पर चढ़ जाओ।” जगमोहन बोला-ऊपरी डाल पर खुद को छिपाने की चेष्टा करो। सतर्क रहकर ये काम करना होगा, ताकि वे लोग नीचे से निकल जाएं। सब अलग-अलग पेड़ों पर चढ़ेंगे।”

अब यहीं एकमात्र रास्ता था। वे सब अलग-अलग पेड़ों पर चढ़ने लगे।

जगमोहन पेड़ पर चढ़ा। बीस फुट ऊपर चढ़कर नीचे देखा तो झल्ला उठा। कोमा भी उसी पेड़ पर चढ़ीं आ रही थीं। जगमोहन से जब नजरें मिलीं तो वो मुस्कराई।

“दांत क्या फाड़ रही है। अब ऊपर आ जा।” जगमोहन ने तीखे स्वर में कहा।।

कुछ ही पलों में कोमा ऊपर उसके पास आ पहुंची। दोनों मोटी डाल पर बैठ गए।

“तू गुस्से में बहुत अच्छा लगता है।” ।

“चुप कर । जब मैंने कहा था कि अलग-अलग पेड़ पर चढ़ना है तो तू क्यों...।”

तू मुझे अच्छा लगता...।”

“चुप...चुप। चुप कर ।” जगमोहन मुंह बनाकर बोला। कोमा चुप कर गई। ऊपर बैठे जगमोहन की निगाह हर तरफ घूमने लगी।

 
वहां से जगमोहन को बोगस की लाश नजर आ रही थी। बोगस का घोड़ा नजर आ रहा था। जगमोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ। जो लोग भी इस तरफ आ रहे थे, वो बोगस की लाश और घोड़ा देखकर यहीं रुक जाएंगे और आसपास की जगह की अच्छी तरह तलाशी लेंगे। शायद वे देख लें कि, वे पेड़ों पर हैं। उन्हें यहां से कुछ दूर जाकर पेड़ों पर छिपना चाहिए था। परंतु अब कुछ नहीं हो सकता था। वो लोग कभी भी यहां पहुंच सकते थे।

तभी कल-कल की आवाज जंगल में गूंजी।

वो आवाज पहले की अपेक्षा, करीब से आई थी। जगमोहन ने कोमा को देखा तो उसे देखती कोमा मुस्करा पड़ी। जगमोहन ने मुंह फेर लिया।

जग्गू।” जगमोहन इस आवाज को सुनकर चिहुंका।

कोमा भी हैरान हुई। वो कह उठी। “हमारे पास कोई है।”

“चुप कर ।” जगमोहन कह उठा।।

“तू बहुत किस्मत वाला है जग्गू।” वो धीमी आवाज पुनः कान में पड़ी।

जगमोहन के होंठ सिकुड़ चुके थे।

पहचाना नहीं मुझे क्या। मैं वो ही हूँ जो तेरे को जथूरा के हादसों का पूर्वाभास कराता रहा हूं।” (ये विस्तार से जानने के लिए पढ़े राजा पॉकेट बुक्स से प्रकाशित अनिल मोहन का पूर्व प्रकाशित उपन्यास 'जथूरा' ।)

पहचानता हूं तेरी आवाज को। लेकिन तू है कौन?”

*अभी अपने बारे में नहीं बता सकता। कालचक्र की भीतरी परतों में हूं। अपने बारे में कुछ कहा तो बात जथूरा तक पहुंच जाएगी।”

तूने मेरे को किस्मत वाला कहा?”

हां। शायद तू है।” कानों में पड़ने वाली मध्यम-सी आवाज में मुस्कान भरी थी।

“कैसे?”

“जथूरा ने अंजाने में तुझे कालचक्र के ऐसे हिस्से में ला फेंका है, जो कि कुछ खास है।”

“मैं समझा नहीं कि क्या खास है?”

यूं तो कालचक्र दुश्मन को नुकसान ही पहुंचाता है। मैंने तो सोचा था कि तुम लोगों के सामने ढेरों खतरे आएंगे, परंतु कालचक्र का ये हिस्सा, शायद तुम लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।”

क्यों?”

“ये कालचक्र सोबरा का है। जिस पर जथूरा ने कब्जा कर रखा है। शायद ऐसा ही कोई अंदेशा होंगा सोबरा को, तो उसने कालचक्र के इस हिस्से को ऐसा बनाया कि यहां कोई फंसे तो उसे जान का खतरा न हों।”

ये बात तुम कैसे जानते हो?” जगमोहन ने पूछा।

“मैंने कालचक्र के इस हिस्से की जानकारी पाने के लिए भाग-दौड़ की तो मुझे कहीं भी खतरा नजर नहीं आया।”

तो अब मैं क्या करूं?”

*अपनी समझ के हिसाब से चलो।”

“मैं कालचक्र से बाहर कैसे निकलूंगा।”

नहीं जानता। कालचक्र को समझना मेरे लिए भी आसान नहीं।” धीमी आवाज कानों में पड़ी।

मतलब कि तुम मेरी कोई सहायता नहीं कर सकते।”

अभी तक तो नहीं। वैसे भी कालचक्र के इस हिस्से में तुम्हारे लिए खतरे कम हैं। सोबरा ने कालचक्र का ये हिस्सा जाने क्यों बनाया है। क्योंकि ये हिस्सा कमजोर है और कालचक्र के मालिक को नुकसान दे सकता है।” ।

“चिमटा जाति के लोग इस तरफ आ रहे हैं, उनसे हमें खतरा

“मुझे तो ऐसा नहीं लगता। तुम समझदारी से काम लेना।” आवाज कानों में पड़ी।

“मुझे वापस पहुंचना है। देवराज चौहान मेरा इंतजार...।” । देवा तो इस तरह उलझ चुका है कि उसे तेरा ध्यान ही नहीं

“क्या मतलब?”

कालचक्र में फंस चुके हैं वो।”

“ओह।” ।

कालचक्र का ही कोई इंसान जग्गू बना इस वक्त देवा के पास मौजूद है।”

*नहीं ।”

“मैंने सच कहा है। उसका नाम मखानी है।”

“वो देवराज चौहान को धोखे से नुकसान पहुंचा सकता है।” जगमोहन ने बेचैनी से कहा-“ये बात देवराज चौहान को बतानी होगी।”

। “देवा तेरी बात क्यों मानेगा। वो तो उसी को असली जग्गू समझेगा, जो उसके पास है।”

ओह।”

तू अपनी फिक्र कर। मत भूल कि तू भी कालचक्र में फंसा है। यहाँ कभी भी कुछ भी हो सकता है। वो देख, चिमटा जाति वाले लोग आ गए हैं। अब तू उनसे निबट। मैं जाता हूं।” इसके साथ ही खामोशी छा गई।

जगमोहन ने कुछ दूरी पर नीचे देखा। बोगस की लाश पर तीन-चार लोग झुके हुए थे। दो आदमी उसके घोड़े पर हाथ फेर रहे थे। उनके जिस्म पर कमर पर, कपड़ा लिपटा हुआ था। शरीर के रंग काले जैसे थे। उनके हाथों में कुल्हाड़ी जैसे हथियार थे।

जगमोहन खामोशी से उन्हें देखता रहा। तभी कुछ लोग और वहां आ गए।

उसी पल एक ने मुंह में उंगली डालकर जोरों से कल-कल की आवाज निकाली।

जवाब में कुछ दूर से वैसी ही आवाज आई।

ये बोगस है।” एक आदमी बोला—“मैं इसे पहचानता हूँ, लेकिन ये तो मरा पड़ा है।” ।

“असम्भव ।” दूसरा बोला—“यहां कोई अपनी जान कैसे गंवा सकता है। कालचक्र वाले किसी की जान ले ही नहीं सकते।”

वो लोग आपस में एक-दूसरे को देखने लगे।

बोगस की मौत से ये तो स्पष्ट है कि कोई बाहरी व्यक्ति कालचक्र में आ गया है। वो हम सबको मार सकता है।”

“वो ताकतवर होगा।”

“अवश्य वो ताकतवर है, तभी कालचक्र का सामना करता हुआ, वो यहां तक आ गया है।”

वो तो हमारे लिए भी खतरा बन सकता है।”

“ओह, उसने तो हमें भी चिंता में डाल दिया है।”

जगमोहन सब कुछ सुन रहा था।

 
तभी तीस-चालीस लोग इकट्ठे वहां आ पहुंचे। उस भीड़ के आगे साढ़े चार फुट का एक व्यक्ति चल रहा था। जिसके सिर के बाल सफेद थे। वो फुर्तीला और सेहतमंद लग रहा था।

“सरदार ।” पहले खड़े लोगों में से एक ने कहा-“गजब हो गया। बोगस की किसी ने हत्या कर दी।”

हत्या? ये कैसे सम्भव है। कालचक्र में फंसा कोई भी दूसरे की जान लेने में सफल नहीं हो सकता।” सरदार ने कहा।

“आप खुद ही देख लीजिए।” ।

सरदार आगे बढ़ा और बोगस की लाश के पास पहुंचा।

सरदार के माथे पर बल पड़ गए। वो नीचे झुका और टटोलकर बोगस की लाश को देखने लगा फिर माथे पर देखा, जहां गोली धंसी थी और वहां से खून बाहर आ गया था।

। “ओह।” सरदार का चेहरा एकाएक खुशी से भर उठा–“तो वो आ गया कालचक्र में।”

कौन सरदार?”

बाहर का आदमी। सोबरा ने कहा था कि बाहर से आने वाला ही हमें कालचक्र से मुक्ति दिलाएगा। वो हमें कालचक्र से बाहर ले जाएगा। मुझे अभी तक सोबरा की ये बात याद है।”

ये तो सोबरा का कालचक्र है फिर उसने हमारी आजादी का रास्ता, तुम्हें क्यों बताया है?”

“ये मैं नहीं जानता। परंतु जो मैंने कहा, वो सच है।” सरदार सीधा खड़े होते कह उठा। उसका चेहरा खुशी से चमक रहा था—“हमारी आजादी का वक्त करीब आ गया है। पूरा जंगल छान मारो। उसे ढूंढ़ो और इज्जत से बस्ती तक ले आओ।”

“वो हमारे साथ क्यों आएगा। वो तो हमें भी मार देगा।”

जगमोहन को उनकी बातें सुनकर महसूस हो गया कि इनसे उसे कोई खतरा नहीं। नानिया की तरह ये लोग भी यहीं सोचते हैं कि बाहर से आने वाला इंसान उन्हें कालचक्र से मुक्ति दिलाएगा। जगमोहन ने कोमा से कहा।

“तुम यहीं रहो।”

लेकिन तुम कहां जा रहे हो?”

*नीचे ।

“वों चिमटा जाति के हैं। खतरनाक हैं। तुम्हें मार देंगे।”

मेरी फिक्र करने की जरूरत नहीं। तुम यहीं रहो।” जगमोहन ने कहा और नीचे उतरने लगा।

जगमोहन उस तरफ बढ़ा जिधर वे सब खड़े थे। चंद पलों में ही उनकी निगाह जगमोहन पर पड़ गई। जगमोहन को पास आता पाकर, वो पीछे हटने लगे। परंतु सरदार वहीं खड़ा, उसे देखता रहा। जगमोहन पांच कदमों के फासले पर पहुंचकर ठिठक गया।

बोगस को तुमने मारा?” सरदार ने तेज स्वर में पूछा।

हो ।” जगमोहन ने कहा।

“हमें कैसे यकीन हो?”

जगमोहन ने रिवॉल्वर निकाली और हाथ सरदार की तरफ उठाकुर बोला।।

तुम्हें मार के दिखाऊं?"

नहीं। मुझे मत मारना। तुम मुझे कालचक्र के नहीं लगते?” सरदार बोला।

 
“मैं बाहर से आया हूं।” जगमोहन रिवॉल्वर को जेब में रखता कह उठा।

एकाएक सरदार मुस्कराया और आगे बढ़कर जगमोहन का हाथ थाम लिया।

“तुम तो हमारे दोस्त हो।”

“तुम कौन हो?”

मैं चिमटा जाति का सरदार हूं। मुझे तो कब से तुम्हारा इंतजार था।”

क्यों?”

“सोबरा ने कहा था कि कालचक्र के इस हिस्से में कोई बाहरी व्यक्ति आएगा जो हम सबको आजाद कराएगा।”

*और क्या कहा था?” ।

सोबरा ने कहा था कि ये वो वक्त होगा, जब उसके कालचक्र पर जथूरा अधिकार कर चुका होगा।”

तो सोबरा को पहले ही पता था कि कालचक्र जथूरा के अधिकार में चला जाएगा।” जगमोहन बोला।

“तभी तो उसने ऐसा कहा।”

“लेकिन मैं तुम लोगों को कैसे कालचक्र से बाहर ले जा सकता हूं। मुझे बाहर जाने का रास्ता नहीं मालूम।”

“मुझे मालूम है।” सरदार कह उठा।

तुम्हें मालूम है?” जगमोहन के होंठों से अजीब-सा स्वर निकला।

हां, रास्ता मैं जानता...।”

जानते हो तो तुम बाहर क्यों न निकल गए?”

मैंने बाहर जाने की चेष्टा की, परंतु सफल नहीं हो सका। हर बार भटक जाता हूं।” सरदार उसका हाथ थपथपाकर कह उठा–“तुम हमें कालचक्र से बाहर निकाल दो। हम तुम्हारे एहसानमंद रहेंगे।”

“तुम्हारी बातें कालचक्र की कोई चाल भी हो सकती हैं।” सरदार फौरन उसका हाथ छोड़कर दो कदम पीछे हटा।

क्या तुम्हें मेरी बातों का भरोसा नहीं?” ।

नहीं।” जगमोहन ने इंकार में सिर हिलाया।

“ऐसा मत कहो। तुम्हें मेरा कहा मान लेना चाहिए।” सरदार बोला।

अब तक बाकी लोगों के मन से जगमोहन का डर निकल गया था। वो जरा-जरा पास आने लगे थे।

यही वो वक्त था कि जब सोहनलाल पेड़ से उतरा और सामने आ गया।

सरदार और उसके साथी सोहनलाल को देखकर चौंके।

ये कौन है?” सरदार ने सोहनलाल को घूरते हुए पूछा।

मेरा साथी है?”

“तुम दो हो?”

हां।” ।

रानी साहिबा का कहा सुन रखा है मैंने कि दो लोग आएंगे बाहरी दुनिया से। उनमें से एक धुआं उड़ाने वाला होगा। धुआं उड़ाने वाला ही रानी साहिबा को कालचक्र से मुक्ति दिलाएगा।” सरदार बोला।।

और तुम्हें कौन मुक्ति दिलाएगा?” जगमोहन ने पूछा।

“नहीं जानता। सोबरा ने सिर्फ ये कहा था कि जब भी कालचक्र के इस हिस्से में बाहर से लोग आएंगे, तुम सबको मुक्ति मिलेगी।”

जगमोहन ने सोहनलाल को देखा। तभी सरदार बोला। “तुममें से धुआं उड़ाने वाला कौन है?”

मैं ।” सोहनलाल ने कहा और सिग्रेट सुलगा ली। कश लिया। मुंह से धुआं निकाला।

ओह–वो तुम ही हो। तभी सोहनलाल ने पलटकर ऊंचे स्वर में कहा।

सब नीचे आ जाओ।”

क्या और लोग भी हैं?” सरदार ने पूछा। “

हां, परंतु उन्हें तुम जानते हो ।” जगमोहन ने कहा। तभी कोचवान, नानिया और कोमा, अन्य सेविका पेड़ों से उतर आए।

नानिया को देखते ही सरदार के माथे पर बल पड़ गए थे। जबकि अन्य गुस्से से चिल्लाने लगे।

ये रानी साहिबा है।” इसने हमारे साथियों को कैद करके सेवक बना लिया है।” “हम इसे कैद करेंगे।”

नहीं छोड़ेंगे तुझे ।” सरदार ने हाथ उठाकर अपने लोगों को देखा तो वो खामोश हो गए।

 
नानिया के चेहरे पर गम्भीरता थी। बगल में खड़ा कोचवान धीमे स्वर में कह उठा।

रानी साहिबा, अब हमारी खैर नहीं।” ।

चुप रहो। सोहनलाल सब ठीक कर लेगा। चिमटा जाति भी कालचक्र से बाहर निकलना चाहती है।” नानिया बोली।

सरदार ने जगमोहन और सोहनलाल को देखकर कहा।। मुझे न पता था कि रानी साहिबा तुम लोगों के साथ हैं।”

अब तो पता चल गया।” जगमोहन ने कहा।

रानी साहिबा को हमारे हवाले कर दो।” सरदार ने कहा-“इसने हमारे लोग कैद कर रखे हैं।”

जगमोहन पलटकर नाचिया से बोला।।

ये सच कह रहा है?

” हां।”

तुम्हें इसके लोगों को आजाद करना होगा।” जगमोहन कह उठा।

तुम सेवक होकर मुझे आदेश कैसे दे सकते हो?” नानिया उखड़ी।

क्या तुम्हें सरदार के हवाले कर दें।” जगमोहन ने तीखे स्वर में कहा। ।

“ऐसा मत करना, ये ठीक नहीं होगा।” नानिया जल्दी से कह उठी।

। “ये जो कहे, वो मानो।” सोहनलाल बोला—“इसी में मेरी खुशी

“ठीक है। मैं चिमटा जाति के लोगों को आजाद कर देंगी।” नानिया बोली-“तुम्हारी खुशी के लिए।”

जगमोहन ने सरदार से कहा। सुन लिया तुमने ।”

मुझे रानी साहिबा पर भरोसा नहीं ।” सरदार बोला। पीछे खड़े उसके लोग भी कह उठे।

हां हमें इस औरत पर जरा भी भरोसा नहीं है।”

“मुझ पर भरोसा है?” जगमोहन ने कहा।

तुम पर?”

हां। मैं...।”

लेकिन तुम तो अभी कह रहे थे कि तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है।”

“मुझे नहीं है, परंतु तुम्हें मुझ पर भरोसा है क्या? सोबरा ने कहा था कि मैं तुम लोगों को कालचक्र से बाहर ले जाऊंगा।”

“तुम्हें हम पर भरोसा नहीं तो हम तुम पर कैसे भरोसा कर सकते हैं। भरोसा तो बनते-बनते ही बनता है।”

तो अब तुम क्या चाहते हो?”

“हम रानी साहिबा को तब तक अपने यहां बंदी बनाकर रखेंगे, जब तक हमारे लोग इसकी कैद से लौट नहीं आते ।”

इसके लिए जरूरी है कि नानिया महल में जाए और तुम्हारे साथियों को आजाद करे।”...जगमोहन ने कहा।

ये हम नहीं जानते। परंतु हम रानी साहिबा को कैद...।”

तभी सोहनलाल कह उठा।

“तुम तब तक इसे कैद रख सकते हो जब तक नानिया तुम्हारे लोगों को आजाद नहीं करती।”

“मुझे?” जगमोहन पल-भर के लिए सकपका उठा।

हां-तुम...।”

“मैं ही क्यों, तुम क्यों नहीं?” जगमोहन का स्वर कड़वा हो गया।

“मैं..तो...मैं...।”

“बेटे औरत का नशा तेरे सिर पर चढ़ गया है।” जगमोहन ने तीखे स्वर में कहा।

“ये बात नहीं, मैं तो...।”

तभी सदार कह उठा। “हमें मंजूर है। हम इसे कैद में रखेंगे।”

“हो गया फैसला।” जगमोहन ने सोहनलाल को देखते हुए कड़वे स्वर् में कहा।

“मैं नानिया के साथ महल जाकर, चिमटा जाति के लोगों को कैद से जल्दी छुड़वाऊंगा।” सोहनलाल कह उठा।

“क्यों नहीं, अब तो तू महल का राजा है। क्योंकि रानी तेरे पर फिदा है।”

ये बात नहीं मैं तो...।”

तभी सरदार जगमोहन से कह उठा।।

तुम हमारे साथ चलो। मुझे तुमसे कई बातें भी करनी हैं।”

बातें?" जगमोहन ने उसे देखा।

हां, यही कि तुम हमें कालचक्र से कैसे बाहर निकालोगे। मैं तुम्हें बाहर निकलने का रास्ता भी बताऊंगा।”

| जगमोहन ने सोहनलाल से कहा।

नानिया जिस किताब का जिक्र कर रही थी, मुझे वो किताब भी चाहिए।”

सरदार के लोगों को छोड़ने के बाद तुम महल में...।” ।

“मैं महल में कैसे आऊंगा। मुझे क्या पता कि महल कहां पर है।” जगमोहन झल्लाया।

सोहनलाल की निगाह नानिया की सेविकाओं पर गई, तभी नानिया कह उठी।

“मेरी एक सेविका तुम्हारे पास रहेगी। वो तुम्हें महल तक ले आएगी।”

“रानी साहिबा का हुक्म सिर-आंखों पर ।” कोमा ने कहा और जगमोहन के पास आ खड़ी हुई।

जगमोहन ने कोमा को घूरा। कोमा मुस्करा पड़ी।

‘हर तरफ मुसीबत ही मुसीबत है।' जगमोहन बड़बड़ा उठा।

नानिया आगे बढ़ी और सोहनलाल का हाथ थाम लिया। सोहनलाल ने कश लिया तो नानिया मुस्कराकर बोली। धुएं की सुगंध कितनी अच्छी है।”

सोहनलाल उसे देखकर मुस्कराया। तभी कोचवान ने नानिया से कहा।

हम चलें रानी साहिबा। फैसला हो गया। अब हमारा यहां कोई काम नहीं ।” ।

“हां, हमें चलना चाहिए। क्यों सोहनलाल?” नानिया ने सोहनलाल

को देखा ।

हां-हां...चलो।”

उल्लू का पट्ठा।” जगमोहन कह उठा–“चिमटा जाति के लोगों को जल्दी ही आजाद करा के भेजना।” ।

“मैं जाते ही ये काम करूंगा।” सोहनलाल बोला—“क्यों नानिया?” ।

“हां, सोहनलाल ।” नानिया ने कहा-“तब अंधेरा हो जाएगा।

परंतु ये काम अंधेरे में कर दिया जाएगा।” ।

उसके बाद कोचवान, एक सेविका, सोहनलाल और नानिया वहां से आगे बढ़ गए।

जगमोहन ने सरदार को देखा। सरदार मुस्कराकर बोला। “तुमने कैसे सोच लिया कि मैं तुम्हें आजाद कर दूंगा।”

क्या कहना चाहते हो?”

तुम मुझे कालचक्र से बाहर निकाल सकते हो। हम सबको बाहर निकाल सकते हो, तो मैं तुम्हें अपने से दूर क्यों जाने दूंगा।”

जगमोहन मुस्करा पड़ा।

ये हमसे चालाकी कर रहा है जग्गू।” कोमा कह उठी।

“जग्गू?” जगमोहन ने कोमा को देखा।

वो तुम किसी से बात कर रहे थे पेड़ पर। वो मुझे नजर नहीं आ रहा था। वो तुम्हें जग्गू ही तो कह रहा था।”

और तुमने मेरा नाम याद रख लिया।”

क्यों न दूंगी। तुम मुझे अच्छे जो लगते हो।” कोमा ने प्यार से कहा।

“कहां जाऊँ? जगमोहन बड़बड़ाया फिर रिवॉल्वर निकालकर सरदार से कहा-“इसे जानते हो। इसी ने मेरे इशारे पर बोगस को मारा था। इससे मैं तुम सब लोगों को मार दूंगा।”

सरदार के चेहरे पर भय के भाव उभरे।

मैं यहां तुम्हारे लिए नहीं, अपने लिए रुका हूं। ताकि तुमसे कालचक्र की बातें जान सकें। उस रास्ते के बारे में जान सकें, जिसका तुम जिक्र कर रहे हो। याद रखो, मुझसे तुम लोग मेहमानों की तरह बर्ताव करोगे। जहां भी तुम लोगों ने चालाकी दिखाई, वहीं मैं सबको बोगस की तरह मार दूंगा।”

सरदार बेचैन दिख रहा था।

रही बात कालचक्र से तुम लोगों को बाहर निकालने की तो अगर मैं ऐसा कर सका तो, जरूर करूंगा। मुझे खुशी होगी तुम लोगों के काम आकर। अब चलो, मुझे वो जगह दिखाओ, जहां पर तुम लोग रहते हो।”

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अब हम दूसरे पात्रों की तरफ चलते हैं। देवराज चौहान, मोना चौधरी, पारसनाथ, महाजन, रुस्तम राव, बांकेलाल राठौर, लक्ष्मण दास,सपन चढ्ढा, मोमो जिन्न और जगमोहन के रूप में मखानी। पूरा मजा लेने के लिए तो आपको पूर्व प्रकाशित उपन्यास ‘जथूरा' पढ़ना पड़ेगा। मोटे तौर पर इतना बता देता हूं कि पूर्वजन्म की महाशक्ति ‘जथूरा नहीं चाहता कि ये लोग पूर्वजन्म की यात्रा करें। क्योंकि इस बार इनका पूर्वजन्म में जाने का मतलब है, जथूरा से टकराव होगा। जो कि जथूरा के लिए नुकसान वाली बात है। जथूरा इन्हें रोकने के लिए भरपूर चेष्टा कर रहा है। अंत में जथूरा ने इन सब पर कालचक्र फेंका। उस कालचक्र में फंसकर ये सब एक-एक करके इस अज्ञात जगह पर आ गए। यहां सब बेहोश हैं। | सिवाय लक्ष्मण दाम, मोमो जिन्न, सपन चढ्ढा और जगमोहन बने मखानी के। हम एक बार फिर पाठकों को याद दिला दें कि मोमो जिन्न की इच्छाएं किसी शक्ति ने जगा दी हैं। अब मोमों जिन्न अपने मन में उठने वाली इंसानी इच्छाओं की वजह से परेशान है। कि अगर ये बात जथूरा के सेवकों को पता चल गई तो वे उसे मार देंगे।

इधर अपनी इच्छाओं को पूरा करने की परेशानी भी उसे और व्याकुल कर रही हैं। अब आगे पढ़ें | मोमो जिन्न की बांहें थामे लक्ष्मण दास और सपन चढ्ढा जिस जगह पहुंचे, वो समुद्र के बीचोबीच जमीन का थोड़ा-सा उभरा हिस्सा था।

टापू भी कह सकते हैं उसे, परंतु वो मात्र एक किलोमीटर से ज्यादा बड़ा नहीं था।

। समुद्र की लहरें किनारे पर पड़े पत्थरों से टकरा रही थीं। पानी की आवाजें उभर रही थीं।

ठंडी नम हवा थी। धूप थी, परंतु बे-असर थी।

सपन।” लक्ष्मण दास कह उठा–“वाह, कितना खूबसूरत नजारा है।”

“सच में ।” सपन चड्ढा समुद्र निहारता कह उठा। “हम कितनी अच्छी जगह आ पहुंचे।”

मुझे तो भूख लग रही है।” दोनों फौरन पलटे। पीछे मोमो जिन्न खड़ा था। दोनों की खुशी हवा हो गई।

ये साला हमारा पीछा कब छोड़ेगा।”

“ऐसा मत कहो। मैं अब तुम्हारे भरोसे हूं।” मोमो जिन्न ने गहरी सांस ली।

हमारे भरोसे?”

जब से मेरे भीतर किसी ने इच्छाएं जगा दी हैं, तब से मैं न तो जिन्न रहा हूं न इंसान। जथूरा द्वारा भेजा गया हूं कि तुम दोनों पर काबू रखें और काम लेता रहूं। लेकिन...।” ।

“तेरे को हम कई दिनों से सह रहे हैं।”

पहले तू कहता था कि हमें नंगा करके सड़कों पर घुमाएगा। जबसे तेरे में इच्छाएं जागी हैं, तब से तूने अपनी मांगों से हमें पागल कर दिया है। एक मिनट भी चैन से नहीं बैठने दिया।” लक्ष्मण दास गुस्से से बोला।

“लक्ष्मण।” सपन ने टोका।।

क्या है?”

अब चिंता की कोई बात नहीं। यहां इस टापू पर ये हमें क्या तंग करेगा।”

ये बात भी ठीक कहीं तूने।”

यहां किसी को बताना मत कि मुझमें इच्छाएं जाग गई हैं।” मोमो जिन्न बोला–“बरना जथूरा मुझे मार देगा।”

मार दे।”

। “ऐसा मत कहो। मैं मर गया तो जथूरा मेरी जगह पर लोमा जिन्न को भेज देगा। लोमा तो वैसे ही बहुत अकडू है। वो बाद में बात करता है, पहले सिर पर चपत मारता है। तुम गंजे हो जाओगे।”

कहां फंस गए।”

मुझे भूख लगी हैं।”

इतनी जल्दी तुम्हें भूख लग गई।”

जल्दी कहां, मैं तुम दोनों को मुम्बई से पलों में यहां ले आया हूं। मेहनत करूंगा तो भूख भी लगेगी। इंसानों को भी तो मेहनत के बाद भूख लगती है। मुझे भी लग रही...।” | मोमो जिन्न कहते-कहते रुका और सिर एक तरफ करके इस तरह हिलाने लगा जैसे किसी की बात सुन रहा हो। इस दौरान उसकी आंखें बंद हो गई थीं।

करीब मिनट भर यही स्थिति रही फिर सिर सीधा करते बोला।

जथूरा के सेवकों ने नए आदेश दिए हैं।” नए आदेश?"

सपन चढ्ढा ने मुसीबत भरे ढंग से उसे देखा।

“हाँ। हमें उस तरफ जाना होगा। वहां पेड़ों के पीछे देवराज चौहान और मोना चौधरी बेहोश पड़े हैं। उनके साथ के लोग भी वहां बेहोश हैं। उनमें जो जगमोहन है, वो कालचक्र का ही हिस्सा है। मखानी है वो...।”

“तो हमें क्या करना है?”

“हमें उन्हें चैन से नहीं रहने देना। उनमें झगड़ा कराना है कि वो चैन से न रह सकें। परंतु ये सब तो दिखावा है, हम कुछ नहीं करेंगे। जथूरा का काम करने का अब मेरा मन नहीं होता। जब से मेरी इच्छाएं जगी हैं, मैं अपने लिए ही कुछ करना चाहता हूं। सुनो, यहां जलेबी मिल सकती है।”

“जलेबी?” लक्ष्मण दास ने बुरा-सा मुंह बनाया।

हां, मीठा खाने का मन हो रहा है। परंतु मैं जानता हूं कि इस वीरान टापू पर ऐसा कुछ नहीं मिलेगा खाने को। चलो मखानी से बात करनी है। इससे पहले कि उन सबको होश आए। ध्यान रखे, मखानी के सामने तुम लोग मेरे सामने इस तरह रहोगे कि जैसे मेरे गुलाम हो।”

 
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