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“मुझे तुम्हारी जरूरत है।”
तभी सोहनलाल नानिया से बोला।
“तुम तो कहती थी कि कालचक्र के भीतर वाले एक-दूसरे की जान नहीं ले सकते।” ।
“गलत क्या कहा मैंने।” ।
तुम्हारा कोचवान तो...।” ।
वो कुछ देर में उठ जाएगा। उसके घाव खुद-ब-खुद ही भर जाएंगे।”
“ओह।”
“अब मैं क्या करूं। ये मेरा कुंआरापन खत्म कर देगा जबकि तुम्हारे आ जाने की वजह से, ये वक्त, मेरे लिए कालचक्र से मुक्ति का है।” नानिया ने चिंतित स्वर में कहा-“इस वक्त मैं तुम्हें भी नहीं बचा सकती।”
लेकिन मैं तुम्हें बचा सकता हूं।” सोहनलाल मुस्कराया।
“असम्भव ।”
“मेरा सेवक, बोगस को हरा देगा, बल्कि मार देगा। क्योंकि हम कालचक्र के नहीं हैं। यहां पर हम किसी को भी मार सकते हैं और कोई भी हमें मार सकता है।” सोहनलाल ने शांत स्वर में कहा।
“बोगस बहुत ताकतवर हैं और तुम्हारा सेवक मुझे किसी काम का नहीं लगता।”
“ठीक है। अब तुम मेरे सेवक का काम देखो।” कहकर सोहनलाल ने जगमोहन को देखा।
क्या करूं?” जगमोहन ने पूछा।
मार साले को।”
हमें क्या फायदा इससे?”
फायदा नुकसान तो पता नहीं। लेकिन इस वक्त तो इसे खत्म कर। रिवॉल्वर है न?”
है।” जगमोहन ने कहा और बोगस की तरफ बढ़ा। उसे अपनी तरफ आते पाकर बोगस की आंखें सिकुड़ीं। जगमोहन चंद कदम पहले ठिठका और शांत स्वर में कह उठा।
मैं तुम्हें मारना नहीं चाहता। बेहतर है कि तुम यहां से चले जाओ।”
बोगस हंस पड़ा।
तो तुम मेरी जान लोगे। ठीक है लो।
” मैं मजाक नहीं कर रहा।” जगमोहन बोला—“चले जाओ यहां
मैं भी मजाक नहीं कर रहा। तुम मेरी जान लो ।”
नानिया सोहनलाल से कह उठी।
“तुम्हारा सेवक तो पागल है। क्या इस तरह बातों से किसी को सबक सिखाया जाता है। फिर ये खाली हाथ बोगस का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता। बोगस अभी इसे मार देगा।”
सोहनलाल की शांत निगाह जगमोहन और बोगस पर थी। जगमोहन ने रिवॉल्वर निकाली और बोगस से कहा।
अभी भी तुम्हारे पास मौका है यहां से भाग जाने का ।” बोगस ने उसके हाथ में पकड़ी रिवॉल्वर को अजीब-सी नजरों से देखा।
क्या तुम इससे मुझे मारोगे?”
“हां।”
“हैरानी है कि इस जरा-सी चीज से तुम तलवार का मुकाबला कैसे करोगे। आओ, हम मुकाबला करें। मैं भी तो देखें कि तुम किस बूते पर मुझे यहां से चले जाने के लिए धमका रहे हो।”
जगमोहन ने रिवॉल्वर वाला हाथ घोड़े पर बैठे बोगस की तरफ किया और गोली चला दी।
कानों को फाड़ देने वाला धमाका गूंजा।
बोगस के हिलने की वजह से निशाना चूक गया और गोली कंधे पर रगड़ दे गई।
बोगस के होंठों से हल्की-सी कराह निकली।
उसी क्षण जगमोहन ने दूसरा फायर किया। बोगस के सिर में गोलीं जा लगी।
बोगस उछलकर घोड़े से नीचे गिरा और फिर हिला भी नहीं। जगमोहन ने रिवॉल्वर जेब में रख ली।
ये क्या हुआ?” नानिया के होंठों से हैरानी भरा स्वर निकला।
बोगस मर गया।”
तभी सोहनलाल नानिया से बोला।
“तुम तो कहती थी कि कालचक्र के भीतर वाले एक-दूसरे की जान नहीं ले सकते।” ।
“गलत क्या कहा मैंने।” ।
तुम्हारा कोचवान तो...।” ।
वो कुछ देर में उठ जाएगा। उसके घाव खुद-ब-खुद ही भर जाएंगे।”
“ओह।”
“अब मैं क्या करूं। ये मेरा कुंआरापन खत्म कर देगा जबकि तुम्हारे आ जाने की वजह से, ये वक्त, मेरे लिए कालचक्र से मुक्ति का है।” नानिया ने चिंतित स्वर में कहा-“इस वक्त मैं तुम्हें भी नहीं बचा सकती।”
लेकिन मैं तुम्हें बचा सकता हूं।” सोहनलाल मुस्कराया।
“असम्भव ।”
“मेरा सेवक, बोगस को हरा देगा, बल्कि मार देगा। क्योंकि हम कालचक्र के नहीं हैं। यहां पर हम किसी को भी मार सकते हैं और कोई भी हमें मार सकता है।” सोहनलाल ने शांत स्वर में कहा।
“बोगस बहुत ताकतवर हैं और तुम्हारा सेवक मुझे किसी काम का नहीं लगता।”
“ठीक है। अब तुम मेरे सेवक का काम देखो।” कहकर सोहनलाल ने जगमोहन को देखा।
क्या करूं?” जगमोहन ने पूछा।
मार साले को।”
हमें क्या फायदा इससे?”
फायदा नुकसान तो पता नहीं। लेकिन इस वक्त तो इसे खत्म कर। रिवॉल्वर है न?”
है।” जगमोहन ने कहा और बोगस की तरफ बढ़ा। उसे अपनी तरफ आते पाकर बोगस की आंखें सिकुड़ीं। जगमोहन चंद कदम पहले ठिठका और शांत स्वर में कह उठा।
मैं तुम्हें मारना नहीं चाहता। बेहतर है कि तुम यहां से चले जाओ।”
बोगस हंस पड़ा।
तो तुम मेरी जान लोगे। ठीक है लो।
” मैं मजाक नहीं कर रहा।” जगमोहन बोला—“चले जाओ यहां
मैं भी मजाक नहीं कर रहा। तुम मेरी जान लो ।”
नानिया सोहनलाल से कह उठी।
“तुम्हारा सेवक तो पागल है। क्या इस तरह बातों से किसी को सबक सिखाया जाता है। फिर ये खाली हाथ बोगस का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता। बोगस अभी इसे मार देगा।”
सोहनलाल की शांत निगाह जगमोहन और बोगस पर थी। जगमोहन ने रिवॉल्वर निकाली और बोगस से कहा।
अभी भी तुम्हारे पास मौका है यहां से भाग जाने का ।” बोगस ने उसके हाथ में पकड़ी रिवॉल्वर को अजीब-सी नजरों से देखा।
क्या तुम इससे मुझे मारोगे?”
“हां।”
“हैरानी है कि इस जरा-सी चीज से तुम तलवार का मुकाबला कैसे करोगे। आओ, हम मुकाबला करें। मैं भी तो देखें कि तुम किस बूते पर मुझे यहां से चले जाने के लिए धमका रहे हो।”
जगमोहन ने रिवॉल्वर वाला हाथ घोड़े पर बैठे बोगस की तरफ किया और गोली चला दी।
कानों को फाड़ देने वाला धमाका गूंजा।
बोगस के हिलने की वजह से निशाना चूक गया और गोली कंधे पर रगड़ दे गई।
बोगस के होंठों से हल्की-सी कराह निकली।
उसी क्षण जगमोहन ने दूसरा फायर किया। बोगस के सिर में गोलीं जा लगी।
बोगस उछलकर घोड़े से नीचे गिरा और फिर हिला भी नहीं। जगमोहन ने रिवॉल्वर जेब में रख ली।
ये क्या हुआ?” नानिया के होंठों से हैरानी भरा स्वर निकला।
बोगस मर गया।”