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नहीं। ऐसा नहीं करेंगे हम।”
समझा करो यार, दिखावा ही तो करना है। वर्ना मखानी ने रिपोर्ट आगे भेज दी कि मोमो जिन्न पर मुझे शक है तो मशीनों पर वैठे जथूरा के सेवक, फौरन मशीनों द्वारा मेरी तारों को चैक करेंगे और उन्हें पता लगते देर नहीं लगेगी कि मेरे में इच्छाएं जाग गई हैं। वो फौरन मुझे मार देंगे। उसके बाद तुम्हारे लिए लोमा जिन्न को भेज देंगे जो बात बाद में करेगा और सिर में चपत पहले...।”
“ठीक है, ठीक है दिमाग मत खा।”
“तूने हमसे वादा किया था कि मौका मिलते ही हमें आजाद कर देगा।”
वादा याद है।”
याद ही नहीं रखना, कुछ करना भी है हमें आजाद कराने के लिए।”
जरूर करूंगा। अब एक काम और करो।”
“क्या?"
बोलो जथूरा महान है।”
लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा ने मोमो जिन्न को घूरा।
कह दो यार ।” मोमो जिन्न खुशामद भरे स्वर में बोला “इधर तुम ये कहोगे तो उधर मेरे खाते में चढ़ जाएगा कि मोमो जिन्न का काम ठीक चल रहा है। मेरा भला होगा ये कह दोगे।”
“तुम बहुत कमीने हो।”
जो भी कहो, परंतु एक बार कह दो कि जथूरा महान है।”
“तेरी हमारीं ज्यादा पटने वाली नहीं ।” सपन चड्ढा ने चेतावनी भरे स्वर में कहा। ।
“जितना समय निकलता है वो तो निकाल। फिर की फिर देखेंगे।”
लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा की नजरें मिलीं।
कह दो यार ।”
जथूरा महान है।” लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा ने एक ही स्वर में कहा।।
“जान बची।” मोमो जिन्न ने गहरी सांस ली–“आओ, उस तरफ चलते हैं। वहां कालचक्र का हिस्सा मखानी मौजूद है।”
ये कौन है?” लक्ष्मण दास ने पूछा।
पूछ मत बहुत बड़ा हरामी है।” मोमो जिन्न बोला।
तुझसे भी बड़ा?”
मुझ जैसे शरीफ को क्यों बदनाम करते हो। मौज तो मखानी ले रहा है।” मोमो जिन्न कह उठा।
तीनों वहां से आगे बढ़े और चलते हुए उस जगह को पार करके वहां आ पहुंचे, जहां उन्हें हरियाली और पेड़ नजर आ रहे थे। चट्टानों से टकराने की लहरों की आवाज यहां भी स्पष्ट सुनाई दे रही थी।
कुछ आगे बढ़े कि सपन चड्ढा ठिटककर कह उठा।
ये क्या।” लक्ष्मण दास भी ठिठका।।
सामने पेड़ों के बीच काफी बड़ी खुली जगह थी। वहां घास भी थी और पहाड़ी पत्थर भी बिखरे हुए थे। जहां कई लोग बेहोश पड़े नजर आ रहे थे। आसमान में सूरज के सामने बार-बार बादलों के टुकड़े आ जाते थे, जिसकी वजह से नीचे कुछ देर के लिए छाया हो जाती थी।
मोमो जिन्न ने अपनी चोंचदार नाक में पड़ी नथनी को छुआ। दोनों को देखा।
बहुत सारे लोग बेहोश हैं यहां ।”
ये देवराज चौहान, मोना चौधरी और उनके साथी हैं।” मोमो जिन्न ने कहा।
“देवराज चौहान ने मुझे यहां तुम्हारे साथ देख लिया तो वो मुझे छोड़ेगा नहीं।” लक्ष्मण दास बोला।
“क्यों?” मोमो जिन्न बोला।
क्योंकि हम तुम्हारे साथ हैं। तुम्हारे कहने पर हम देवराज चौहान और मोना चौधरी का झगड़ा करा रहे थे। ये बात सबको मालूम हो चुकी हैं। एक बार तो इन लोगों ने हमें छोड़ दिया, परंतु अब...।”
“वो देख लक्ष्मण।” लक्ष्मण दास ने नजर घुमाई। मोमो जिन्न ने भी उधर देखा। जगमोहन एक तरफ से चला आ रहा था।
सावधान।” मोमो जिन्न धीमे स्वर में बोला “इसके सामने ये ही जाहिर करना कि तुम दोनों मेरे गुलाम हो। ये कालचक्र का ही हिस्सा मखानी है। सतर्क रहना इसके सामने ।”
सपन चड्ढा और लक्ष्मण दास की नजरें मिलीं।
जगमोहन यानी मखानी पास आया और मुस्कराकर मोमो जिन्न से बोला।
“मुझे पहचानते हो?”
“हां। खबर मिल गई है मुझे तुम्हारे बारे में। तुम मखानी हो।”
सहीं कहा।” ।
“अब जगमोहन के रूप में हो।” मोमो जिन्न ने अपनी अकड़ कायम रखी।
हां, इस बात को कोई नहीं जानता। ये दोनों तुम्हारे गुलाम हैं?” मखानी ने लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा को देखा।
समझा करो यार, दिखावा ही तो करना है। वर्ना मखानी ने रिपोर्ट आगे भेज दी कि मोमो जिन्न पर मुझे शक है तो मशीनों पर वैठे जथूरा के सेवक, फौरन मशीनों द्वारा मेरी तारों को चैक करेंगे और उन्हें पता लगते देर नहीं लगेगी कि मेरे में इच्छाएं जाग गई हैं। वो फौरन मुझे मार देंगे। उसके बाद तुम्हारे लिए लोमा जिन्न को भेज देंगे जो बात बाद में करेगा और सिर में चपत पहले...।”
“ठीक है, ठीक है दिमाग मत खा।”
“तूने हमसे वादा किया था कि मौका मिलते ही हमें आजाद कर देगा।”
वादा याद है।”
याद ही नहीं रखना, कुछ करना भी है हमें आजाद कराने के लिए।”
जरूर करूंगा। अब एक काम और करो।”
“क्या?"
बोलो जथूरा महान है।”
लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा ने मोमो जिन्न को घूरा।
कह दो यार ।” मोमो जिन्न खुशामद भरे स्वर में बोला “इधर तुम ये कहोगे तो उधर मेरे खाते में चढ़ जाएगा कि मोमो जिन्न का काम ठीक चल रहा है। मेरा भला होगा ये कह दोगे।”
“तुम बहुत कमीने हो।”
जो भी कहो, परंतु एक बार कह दो कि जथूरा महान है।”
“तेरी हमारीं ज्यादा पटने वाली नहीं ।” सपन चड्ढा ने चेतावनी भरे स्वर में कहा। ।
“जितना समय निकलता है वो तो निकाल। फिर की फिर देखेंगे।”
लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा की नजरें मिलीं।
कह दो यार ।”
जथूरा महान है।” लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा ने एक ही स्वर में कहा।।
“जान बची।” मोमो जिन्न ने गहरी सांस ली–“आओ, उस तरफ चलते हैं। वहां कालचक्र का हिस्सा मखानी मौजूद है।”
ये कौन है?” लक्ष्मण दास ने पूछा।
पूछ मत बहुत बड़ा हरामी है।” मोमो जिन्न बोला।
तुझसे भी बड़ा?”
मुझ जैसे शरीफ को क्यों बदनाम करते हो। मौज तो मखानी ले रहा है।” मोमो जिन्न कह उठा।
तीनों वहां से आगे बढ़े और चलते हुए उस जगह को पार करके वहां आ पहुंचे, जहां उन्हें हरियाली और पेड़ नजर आ रहे थे। चट्टानों से टकराने की लहरों की आवाज यहां भी स्पष्ट सुनाई दे रही थी।
कुछ आगे बढ़े कि सपन चड्ढा ठिटककर कह उठा।
ये क्या।” लक्ष्मण दास भी ठिठका।।
सामने पेड़ों के बीच काफी बड़ी खुली जगह थी। वहां घास भी थी और पहाड़ी पत्थर भी बिखरे हुए थे। जहां कई लोग बेहोश पड़े नजर आ रहे थे। आसमान में सूरज के सामने बार-बार बादलों के टुकड़े आ जाते थे, जिसकी वजह से नीचे कुछ देर के लिए छाया हो जाती थी।
मोमो जिन्न ने अपनी चोंचदार नाक में पड़ी नथनी को छुआ। दोनों को देखा।
बहुत सारे लोग बेहोश हैं यहां ।”
ये देवराज चौहान, मोना चौधरी और उनके साथी हैं।” मोमो जिन्न ने कहा।
“देवराज चौहान ने मुझे यहां तुम्हारे साथ देख लिया तो वो मुझे छोड़ेगा नहीं।” लक्ष्मण दास बोला।
“क्यों?” मोमो जिन्न बोला।
क्योंकि हम तुम्हारे साथ हैं। तुम्हारे कहने पर हम देवराज चौहान और मोना चौधरी का झगड़ा करा रहे थे। ये बात सबको मालूम हो चुकी हैं। एक बार तो इन लोगों ने हमें छोड़ दिया, परंतु अब...।”
“वो देख लक्ष्मण।” लक्ष्मण दास ने नजर घुमाई। मोमो जिन्न ने भी उधर देखा। जगमोहन एक तरफ से चला आ रहा था।
सावधान।” मोमो जिन्न धीमे स्वर में बोला “इसके सामने ये ही जाहिर करना कि तुम दोनों मेरे गुलाम हो। ये कालचक्र का ही हिस्सा मखानी है। सतर्क रहना इसके सामने ।”
सपन चड्ढा और लक्ष्मण दास की नजरें मिलीं।
जगमोहन यानी मखानी पास आया और मुस्कराकर मोमो जिन्न से बोला।
“मुझे पहचानते हो?”
“हां। खबर मिल गई है मुझे तुम्हारे बारे में। तुम मखानी हो।”
सहीं कहा।” ।
“अब जगमोहन के रूप में हो।” मोमो जिन्न ने अपनी अकड़ कायम रखी।
हां, इस बात को कोई नहीं जानता। ये दोनों तुम्हारे गुलाम हैं?” मखानी ने लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा को देखा।