तभी अरुन पंडित को रोक कर सिन्दुर अपने हाथ में ले कर सरला की मांग में लगा देता है।
तभी सरिता देवी:
ये क्या किया तुमने अरुण।
अरुण: वो नानी।
सरला: बीच में, गलती से लग गया होगा माँ।
सरिता : पर इसने तुम्हारी मांग में लगा दिया।
सरला: तो क्या हुआ माँ बच्चा है।
सरिता कुछ कहना चाहती है पर सरला रोक देती है।
अरुण: ग़ुस्सा हो जाता है और बाहर आ जाता है।
सरला: क्या माँ आप भी गलती से हो गया कौन सी बड़ी बात है।
गुस्सा कर दिया ना।
सरिता: ये कोई बड़ी बात नही।
सरला: नहीं माँ ।
और अरुन के पीछे पीछे आ जाती है।
और अरुन सुनो तो अरुण।
अरून रुक जाता है।
और हँस देता है।
सरला: ये क्या है जान आप आ क्यों गये।
अरुण: देखने के लिए अपनी माँ की बात का क्या जवाब देति हो।
सरला: तो क्या मिला ।
अरुण: यही आप से ज्यादा मुझे कोई प्यार नहीं कर सकता।
सरला: थैंक्स समझने के लिए।
आज आप ने शादी ले बाद पहली बार मेरी मांग में सिंदूर भरा है ।
अरुण: हाँ तो।
सरला: अब से रोज आप ही भरोगे अपने हाथ से।
अरुण: ओके जान तभी सरिता आ जाती है।
सरिता: क्या हुआ इसको ।
सरला: कुछ नहीं अब ठीक है।
सरिता: मैंने क्या बोला था।
सरला: कुछ नहीं माँ।
कुछ मत बोला करो इसे बहुत जल्दी ग़ुस्सा हो जाता है
और तीनो घर के लिए निकल जाते है।
घर पहुच कर
और अरुन रूम में आ जाता है।
और सरिता अपने पति के पास।
और सरला किचन में शीला के पास खाना बनाने में हेल्प करने।
शीला: आ गये मंदिर से।
सरला: हाँ काफी दिनों के बाद मंदिर गई थी।
शीला: दी आप से एक बात पुछु।
सरला: हाँ पुछो क्या हुआ।
शीला: वो आप के अन्देरगरर्मेन्ट्स बहुत सेक्सी और स्टाइलिश है।
सरला: चौंक जाती है।
उसने कपडे सुखाने को शीला से बोल तो दिया पर ये भूल गई की पहले जब आती थी तो वही इंडियन स्टाइल वाले अंडरगारर्मेन्ट्स पहनती थी और अब अरुन के दिलाने के बाद वो ये स्टाइलिश ब्रा पेंटी पहनती है ।
शीला: दी क्या हुआ।
सरला: हाँ वो तुम्हारे जीजाजी की पसंद है।
शीला: या ये भी अरुन के पसंद के है।
सरला: भाभी क्या बोल रही हो।
शीला: वही जो सुबह आप बोल रही थी ।
क्या अरुन के पसंद के कपडे पहनती हो ।
तो मैंने सोचा शायद ये भी अरुन के पसंद के हो ।
क्यूं की आज कल यही फैशन चल रहा है।
और जीजाजी इतने मॉडर्न तो हो नहीं सकते।
जो आप को सूट पहनने नहीं देते वो ये स्टाइलिश ब्रा पेंटी कैसे पहनने देंगे जिसमें से दीखता ज्यादा होगा ढकता कम ।
सरला कुछ बोलना चाहती है।
शीला दी पर बहुत ही सेक्सी है मैं भी उनसे लेने के लिए बोलुंगी।
सरला: अगर तुम्हे पसंद है तो तुम रख लो।
मै और खरीद लुंगी।
शीला: खरीद लुंगी या अरुन ला देगा और भी मॉडर्न और सेक्सी।
पर सरला अभी भी सोच रही थी शीला क्या सोच रही होगी मेरे बारे में।
कही उनको कोई शक़ तो नहीं हो गया।
और रूम में आ जाती है ।
थोड़ी देर में सरिता देवी आ जाती है।
सरिता: अरुन नाराज़ हो ।
अरुण: नहीं नानी।
सरिता: बेटा जो तुमने किया था वो सिर्फ पति करता है।
सरला: ठीक है माँ हो गया सो हो गया।
सरिता: पता है अगर ये दोबारा लगाये तो ।
सरला: पहले तो लगाएगा नहीं और हो गया तो हो गया
मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पडता।
वेसे भी उनको मेरी फ़िक्र कहाँ है ।
क्या कर रही हूँ। कहा जा रही हूँ। क्या पहन रही हूँ। ।
सिर्फ मेरे बेटे को चिंता है मेरी इसलिए इसकी कोई भी गलती माफ़ कर सकती हूँ।
तभी
शीला अंदर आते हुए।
सही कह रही हो दी।
जब जीजाजी को कोई मतलब नहीं तो आप कुछ भी करो उन्हें क्या फर्क पडेगा।
सरला शीला को देख कर चुप हो जाती है।
लगता है भाभी ने सब सुन लिया।
सरिता: तू चुप कर शीला तुझे पता है मंदिर में क्या हुआ
अरून ने सरला की मांग भर दी सिन्दूर से।
शीला: क्या ।
सरिता: हाँ।
सरला: ऐसे कोई बात नहीं भाभी।वो माथे पे लगा रहा था गलती से मांग में लग गया।
और माँ ने उस बात के लिए अरुन को काफी सुनाया।
सरिता: क्या बोला मैंने उसे ,कुछ नही।
शीला: माँ जी आप अरुन को कुछ मत बोलो दीदी उसके बारे में कुछ नहीं सुनेंगी।
सरिता: मतलब ।
शीला: कुछ नहीं आप जाओ आराम करो।
और सरितदेवी चलि जाती है।
और शीला
दीदी आप और अरुन भी आराम कर लो काफी थक गये होगे।
सरला: भाभी वो क्या है न की।
शीला: मैं सब समझ रही हूँ दी और मैं आप के साथ
हूँ।
मै भी अगर आप की जगह होती तो यही करती जो आप ने किया।
इँसान कब तक ज़िंदा लाश की तरह जिए उसकी ख़ुशी भी इम्पोर्टेन्ट है ।
मै पहले भी आप से कई बार कहने की कोशिश की पर हिम्मत नहीं हुई पर आप ने सही फैसला लिया।
और सब से बड़ी बात घर की बात घर में रहेगी।
सरला: क्या बोल रही हो भाभी ।
शीला : कुछ नहीं समझदार के लिए इशारा काफी है।
और बाहर चली जाती है।
सरला थोड़ी टेंशन में।
अरुण: क्या हुआ जान।
सरला: मुझे लग रहा है भाभी को हम पे शक़ हो गया है।
अरुण: किस बात का।
सरला: अरुन को सारी बात बता देती है।
अरुण: तो इसमें ड़रने की क्या बात है ।
तूम मुझे इसीलिए लाई थी न की घर के दामाद की तरह ।
तो अब क्या प्रॉब्लम है अगर पता चल गया तो क्या फ़र्क़ पड़ता है।
ज़स्ट चिल बेबी।
सरला:मैं अभी आई।
अरुण:कहा जा रही है मेरी बुलबुल।
सरला: अभी आती हूँ मेरे खसम।
और शीला के पास जाती है।
शीला अपने रूम में।
शीला: दी आप यहाँ।
सरला: भाभी तुम क्या बोल रही थी।
शीला: कुछ नहीं और हँस देती है।
सरला: भाभी क्या हुआ।
शीला: इसे कहते है चोर की दाढ़ी में तिनका।
सरला: मैं समझी नही।
शीला: मुझे सिर्फ शक़ था पर आप ने यहाँ आ कर साबित कर दिया की जो मैं सोच रही हु वो सही है।
सरला: भाभी साफ साफ़ बोलो।
शीला: तो सुनो दी।
जब आप पिछली बार आयी थी तो अरुन कुछ शादी की परमिशन मांग रहा था उस टाइम मुझे कुछ समझ नहीं आया था पर ।
अब जब आप आई तो आप का ड्रेसिंग स्टाइल ।
आप के चेहरे की ख़ुशी ।
आप की डिज़ाइनर ब्रा पेंटी , अरुन से पूछ्ना क्या पहनूं, और आज अरुण का मांग भरना और सासु माँ को बताना की अरुन आप का ख्याल रखता है और वही डीसाईड करता है आप को क्या करना है और क्या पहनना है।
तो इससे ये साबित होता है की ये अब नए वाले जीजाजी कर रहे है।
सरला: मतलब।
शीला: अरुन जीजाजी।
सरला: भाभी ऐसा नहीं है।
ऐसा ही है।
सरला मुड के देखती है।
अरून खड़ा था।
हाँ साली साहिबा मैं हूँ तुम्हारे नए इकलौता जीजाजी।
सरिता: रमेश का फ़ोन आया था तुम्हारे पापा के मोबाइल पे।
सरला: क्या बोल रहे थे ।
सरिता: तबीयत की पूछ रहे थे ।
सरिता: फिर ।
सरिता: वो अच्छा हुआ मैं वही थी बात सम्हाल ली।
की सरला का मन था मिलने का और रमेश भेज नहीं रहे थे इसलिए झूठ बोल कर आ गई।
सरला: अब।
सरिता: कुछ नहीं पापा गुस्से में है झूठ क्यों बोला।
शीला : छोडो न तुम दोनों घुमने जाओ।
पापा से वो बात कर लेंगे।
सरला: नहीं अभी रहने देते है बाद में चले जाएंगे।
कुछ देर बाद सभी शाम की चाय पे
शीला: किचन में।
सरला: मैं देखति हु ।।
अरुण:नहीं माँ आप रहने दो मैं मामी की हेल्प करता हूँ।।
और किचन में आ जाता है।
क्या हो रहा है साली साहिबा।
शीला: ओह जीजू यहाँ कैसे।
अरुण: सोचा थोड़ी हेल्प करा दू साली साहिबा की।
शीला: रहने दिजिये मैडम ने देख लिया न तो सारी हेल्प धरी की धरी रह जायेगी।
आओ हाँ मैं चाय लाती हुं
अरुण: कोई हेल्प नहीं चाहिये।
शीला: चाहिए एक बडा ।
क्या आप अपनी बीवी को वो सारी खुशियां देंगे।
जीससे वो अभी तक महरूम है।
अरुण: प्रॉमिस वो सब दूंगा जो वो सोच भी नहीं सकती
और कुछ तो दे भी दिया है।
शीला: जैसे की
अरुण: मन ही मन ( लण्ड)
शीला: कुछ बोला आपने ।
अरुण: नहीं कुछ नही।
तभी सरला आ जाती है।
शीला: सबर नहीं हुआ पति के बिना।
सरला: नहीं ऐसी बात नहीं है वो तो।
शीला: रहने दो दी आप। मन नहीं लगता जीजू के बिना एक पल भी।
सरला: हाँ यही सच है मैं इनके बिना एक पल भी नहीं रह सकती।
शीला: ओके लव बर्ड्स कुछ इन्तज़ाम करती हुँ की
तूम दोनों अकेले साथ वक़्त गुजार सको।
सभी चाय पीते है
इधर उधर की बाते करते हुए
थोडा देर बाद।
शीला ;दी छत पे चले।
सरला: हाँ चलो।
और सभी
अरुन सरला शीला और उसके बच्चेः
अरून बच्चो के साथ खेल रहा था और
सरला शीला के साथ
शीला: दी अगर रमेश जीजू को पता चल गया तो।
सरला: देखते है क्या होगा डर तो बहुत लगता है पर अब मैं पीछे नहीं हट सकती जो होगा देखा जाएगा।
शीला: आप दोनों क रिलेशन सिर्फ शादी तक ही सीमित है या।
सरला: या क्या
शीला: आप समझ रही हो।
सरला: जो होना चाहिए वो सब।
शीला: दी ।
सरला: हा सब मतलब सब।
शीला मज़ाक़ करते हुए
तो मजा किसके साथ आया इनके साथ या उनके ।
सरला: चुप हो जाओ भाभी अरुन इधर ही देख रहे है।
शीला: क्यों अब सब कुछ के बाद भी शरम लगती है।
बताओ न दी कौन अच्छा है ज़रूरी नहीं जो प्यार ज्यादा करता हो तो बेड में भी उतना ही प्यार करे।
सरला: भाभी चुप करो।
शीला: बताओ न क्यों की दी अगर आदमी बेड में सही नहीं है तो प्रॉब्लम आनी शुरु हो जाती है और फिर ।
सरला: ऐसा कुछ नहीं होगा हमारे बीच ।
शीला: क्यो
सरला: क्यों की वो बेड पे प्यार से भी ज्यादा खतरनाक है उन्हें झेलना लड़िकियों के बस का नहीं वो तो मैं दो बच्चो की माँ हु तब जाके बरदास्त कर पाई कोई कुवारी होती तो मर् जाती और नज़र झुका लेती है।
शीला: दी ।
सरला: हाँ भाभी बहुत बेदर्द है तुमारे जीजाजी।
और शीला अरुन को देखने लगती है।
सरला: क्या देख रही हो भाभी वो मेरे है आप अपनी सोचो।
शीला: दी मैं उनकी साली हु तो आधा हक़ मेरा भी है।
सरला: वो किसी को कुछ नहीं समझते मेरे सामने।
शीला; इतना कॉंन्फिडेंट ।
सरला: हाँ १००%
शीला: लगा शर्त।
स: हाँ लगा
और दोनों शर्त लगा लेती है जिस से अरुन अन्जान था।
लेकिन कहते है न जो सोचो वो नहीं होता यहाँ भी ये हुआ।और हुआ क्यों की रमेश की कॉल आई सरला की मोबाइल पे जो की निचे था और सरिता उसे ले के उपर आ रही थी और उसने सरला और शीला की सारी बात सुन ली।
पर कुछ कहती नहीं और निचे आ जाती है।
कुछ देर बाद सभी निचे आ जाते है क्यों की शीला का पति ऑफिस से आ गया था और बच्चो को होमवर्क करना था।
सरला निचे आ कर।
मन ही मन यहाँ आ कर गलती कर दी कुछ टाइम ही नहीं मिल रहा अरुन के साथ अकेले में
और अपने रूम में आ जाती है।
अरून अपने मामा के साथ कही गया था।
सरिता सरला के रूम में।
क्या कर रही हो दादी।
सरला: ये क्या बोल रही हो माँ।
सरिता:वही जो सच है।
सरला: मैं समझी नही।
सरिता: जो बात तुझे मुझे बतानी थी वो तू अपनी भाभी को बता रही है।
सरला: कौन सी बात।
सरिता: अरुन वाली।
सरला: मतलब।
सरिता: ये की मैंने सब सुन लिया।
सरला सरिता की नज़रो में देखते हुए।
सरिता: कब से चल रहा है।
सरला: सब कुछ बता देती है ।
सरिता: तुझे डर नहीं लगा अगर किसी को पता चल गया तो क्या होगा।
खास कर रमेश को या तेरे पापा को।
सरला: क्या करती माँ।
बस हो गया मैंने कभी नहीं सोचा था की ऐसा कुछ होगा पर हालत ऐसे बन गये की न मैं रोक पाई और न अरुन
और अब हम एक दूसरे के बिना नहीं रह पाएँगे।
सरिता: पर वो तेरा बेटा है।
सरला: जानती हु माँ।
सरिता: सोचा है 15-20 साल बाद तू बुढ़िया हो जायेगी तो अरुन क्या करेगा तू उसे कैसे खुश रख पायेगी।