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मासूम बहु Incest(sasur-bahu)
वक़्त भी क्या क्या खेल दिखता है ,अभी दो साल पहले की ही बात है जब मेरी माँ का देहांत हो गया था,लगा की जैसे दुनिया ही लूट गई ,मेरी मा ही थी जिनसे मेरे दिल का रिश्ता था ,वो मेरे और पिता जी के बीच संवाद का माध्यम थी ,मेरे पिता जी फौज में थे बहुत ही अनुशासित जीवन का पालन करने वाले और बहुत ही कड़क उनसे मेरे कभी नही बनी ,मैं उनसे इतना डरता था की उनके सामने होने से हकलाने लगता था वो भी मुझे बिल्कुल भी पसन्द नही करते थे ,मैं उनके जैसा नही था उन्हें एक कड़क मर्द चाहिए था और मैं एक सामान्य सा लड़का था जो जोर से चिल्लाने से ही डर जाया करता था ,मैं अपनी मा पर गया था,उनकी कोमलता शायद औरत होने के कारण सबको बहुत पसंद आती थी लेकिन मेरी कोमलता मेरे पिता को बिल्कुल भी पसन्द नही थी ,मैं हमेशा ही अपनी मा के पल्लू में छिपकर रहा करता था,कुछ चाहिए तो अपनी मा से मांगता वो मेरे पिता से कहती थी ,
“उसे मेरे सामने आने से इतना डर क्यो लगता है ,अब वो बड़ा हो गया है जो कहना है मेरे सामने आ कर कहे “ये आवाज अक्सर मेरे कानो में पड़ा करती थी ,पिता जी लंबे चौड़े और भारी भरकम शरीर के मालिक थे और साथ ही उनका व्यक्तित्व बहुत ही जानदार था,अक्सर लडकिया उनपर मर जाया करती थी ,वो मेरे लिए कितने भी सख्त क्यो ना रहे पर माँ की हर बात वो मान ही लिया करते थे ,वो माँ से बहुत प्यार करते थे और कभी उनपर रौब झड़ते हुए मैंने उन्हें नही देखा वो आखरी समय में भी उनका बहुत ख्याल रखते थे,यही वजह थी की जब माँ ने अपनी आखरी इच्छा रखी तो वो ना नही कर पाए …
“मेरे जाने के बाद विकास की शादी कर देना ,ये तो तुमसे नही कह पायेगा लेकिन मेरे जाने के बाद वो बेसहारा ना हो जाय ,और इस घर में एक लड़की का होना जरूरी है “माँ ने जब ये बात कही थी तो मेरे और पिता जी के आँखों में आंसू आ गए ,माँ के जाने के कुछ ही महीनों के बाद मेरी शादी कर दी गई ,मैं शहर में एक साफ्टवेयर इंजीनियर था और शहर में ही रहता था ,पिता जी गांव में रहकर गांव की खेती देखते थे ,ना मेरी कभी इतनी हिम्मत हुई की मैं उन्हें अपने साथ शहर आने का निमंत्रण दु ना ही वो खुद से कभी शहर आये ,लेकिन सब कुछ बदलने वाला था ,ये बदलाव आया मेरी पत्नी की वजह से नेहा …
रूप की रानी और मासूमियत की देवी नेहा ,गांव की लड़की थी,बेहद ही सुंदर ,मेरी अच्छी नॉकरी और मेरे परिवार की इज्जत का परिणाम थी नेहा,एक बड़े किसान परिवार से आयी थी और संस्कारो से भरी हुई थी ,घर आने के कुछ ही दिनों में उसने ना जाने क्या जादू चला दिया ,वो मेरे और पिता जी के दिलो में राज करने लगी ,मैं तो उसकी सुंदरता पर मोहित था ही ,पिता जी भी उसे बेहद प्यार किया करते थे,उसने कुछ ही दिनों में मेरी मा की जगह ले ली ,लेकिन अब मुझे गांव से शहर जाना था …
“पिता जी आप भी चलिए ना हमारे साथ “
नेहा सर में घूंघट डाले पिता जी के सामने खड़ी थी जो अभी एक आराम कुर्सी में बैठे थे,नेहा का चहरा साफ दिख रहा था वो नई दुल्हन के लिबास में ही रहना पसंद करती थी ,हाथो में भरी चूड़ियां और मांग में भरा हुआ सिंदूर . हाथो में एक ट्रे था जिसमे पानी का एक ग्लास और चाय का कप था ,पिता जी ने पहले पानी पी फिर चाय का कप पकड़ते हुए कुर्सी में पसर गए ,
“नही बहु यहां बहुत काम है ,और इस गांव में ही तो मेरा सबकुछ है इसे छोड़कर कैसे जा सकता हु ,यहां बसी यादे ….”बस वो इतना ही बोल पाए
“तो क्या हम आपके अपने नही है “
पिता जी के होठो पर मुसकान आ गई
“बेटा ये तुमसे किसने कह दिया की तुम मेरे अपने नही हो ,लेकिन अभी अभी तो तुम दोनो ही शादी हुई है ,थोड़ा प्रिवेसी भी तो चाहिए तुम दोनो को ,और यहां मेरी सेवा करने के लिए नॉकर भी तो है “
नेहा के आंखों में आंसू आ गए थे
“क्या मेरे होते हुए आपकी सेवा नॉकर किया करेंगे ,”वो सुबकते हुए बोली ,पिता जी खड़े हो गए और उसके सर पर अपना हाथ फेरने लगे ,नेहा पिता जी के छातियों तक ही आ रही थी ,
“अरे बेटा उदास क्यो हो रही हो ,मैं आऊंगा ना तुमसे मिलने के लिए ,लेकिन अभी नही अभी तुम दोनो जाओ अपनी गृहस्थी सम्हालो “
पिता जी मेरी तरफ देखने लगे ,अचानक उनके चहरे में आये भाव से मेरा कलेजा कांप गया ,वो मुझसे कभी इतने प्यार से बात नही करते थे …
“विकास “
“जी जी पिता जी “मैं हकलाया जिससे नेहा थोड़ी हँस पड़ी ,जिससे मैं और भी नर्वस हो गया
“अगर बहु को कोई भी शिकायत हुई तो …..”
“जी जी पिता जी ,”
नेहा सर गड़ा कर हँसने लगी वही पिता जी नेहा को देखकर मुस्कुराने लगे ………...conti....................
वक़्त भी क्या क्या खेल दिखता है ,अभी दो साल पहले की ही बात है जब मेरी माँ का देहांत हो गया था,लगा की जैसे दुनिया ही लूट गई ,मेरी मा ही थी जिनसे मेरे दिल का रिश्ता था ,वो मेरे और पिता जी के बीच संवाद का माध्यम थी ,मेरे पिता जी फौज में थे बहुत ही अनुशासित जीवन का पालन करने वाले और बहुत ही कड़क उनसे मेरे कभी नही बनी ,मैं उनसे इतना डरता था की उनके सामने होने से हकलाने लगता था वो भी मुझे बिल्कुल भी पसन्द नही करते थे ,मैं उनके जैसा नही था उन्हें एक कड़क मर्द चाहिए था और मैं एक सामान्य सा लड़का था जो जोर से चिल्लाने से ही डर जाया करता था ,मैं अपनी मा पर गया था,उनकी कोमलता शायद औरत होने के कारण सबको बहुत पसंद आती थी लेकिन मेरी कोमलता मेरे पिता को बिल्कुल भी पसन्द नही थी ,मैं हमेशा ही अपनी मा के पल्लू में छिपकर रहा करता था,कुछ चाहिए तो अपनी मा से मांगता वो मेरे पिता से कहती थी ,
“उसे मेरे सामने आने से इतना डर क्यो लगता है ,अब वो बड़ा हो गया है जो कहना है मेरे सामने आ कर कहे “ये आवाज अक्सर मेरे कानो में पड़ा करती थी ,पिता जी लंबे चौड़े और भारी भरकम शरीर के मालिक थे और साथ ही उनका व्यक्तित्व बहुत ही जानदार था,अक्सर लडकिया उनपर मर जाया करती थी ,वो मेरे लिए कितने भी सख्त क्यो ना रहे पर माँ की हर बात वो मान ही लिया करते थे ,वो माँ से बहुत प्यार करते थे और कभी उनपर रौब झड़ते हुए मैंने उन्हें नही देखा वो आखरी समय में भी उनका बहुत ख्याल रखते थे,यही वजह थी की जब माँ ने अपनी आखरी इच्छा रखी तो वो ना नही कर पाए …
“मेरे जाने के बाद विकास की शादी कर देना ,ये तो तुमसे नही कह पायेगा लेकिन मेरे जाने के बाद वो बेसहारा ना हो जाय ,और इस घर में एक लड़की का होना जरूरी है “माँ ने जब ये बात कही थी तो मेरे और पिता जी के आँखों में आंसू आ गए ,माँ के जाने के कुछ ही महीनों के बाद मेरी शादी कर दी गई ,मैं शहर में एक साफ्टवेयर इंजीनियर था और शहर में ही रहता था ,पिता जी गांव में रहकर गांव की खेती देखते थे ,ना मेरी कभी इतनी हिम्मत हुई की मैं उन्हें अपने साथ शहर आने का निमंत्रण दु ना ही वो खुद से कभी शहर आये ,लेकिन सब कुछ बदलने वाला था ,ये बदलाव आया मेरी पत्नी की वजह से नेहा …
रूप की रानी और मासूमियत की देवी नेहा ,गांव की लड़की थी,बेहद ही सुंदर ,मेरी अच्छी नॉकरी और मेरे परिवार की इज्जत का परिणाम थी नेहा,एक बड़े किसान परिवार से आयी थी और संस्कारो से भरी हुई थी ,घर आने के कुछ ही दिनों में उसने ना जाने क्या जादू चला दिया ,वो मेरे और पिता जी के दिलो में राज करने लगी ,मैं तो उसकी सुंदरता पर मोहित था ही ,पिता जी भी उसे बेहद प्यार किया करते थे,उसने कुछ ही दिनों में मेरी मा की जगह ले ली ,लेकिन अब मुझे गांव से शहर जाना था …
“पिता जी आप भी चलिए ना हमारे साथ “
नेहा सर में घूंघट डाले पिता जी के सामने खड़ी थी जो अभी एक आराम कुर्सी में बैठे थे,नेहा का चहरा साफ दिख रहा था वो नई दुल्हन के लिबास में ही रहना पसंद करती थी ,हाथो में भरी चूड़ियां और मांग में भरा हुआ सिंदूर . हाथो में एक ट्रे था जिसमे पानी का एक ग्लास और चाय का कप था ,पिता जी ने पहले पानी पी फिर चाय का कप पकड़ते हुए कुर्सी में पसर गए ,
“नही बहु यहां बहुत काम है ,और इस गांव में ही तो मेरा सबकुछ है इसे छोड़कर कैसे जा सकता हु ,यहां बसी यादे ….”बस वो इतना ही बोल पाए
“तो क्या हम आपके अपने नही है “
पिता जी के होठो पर मुसकान आ गई
“बेटा ये तुमसे किसने कह दिया की तुम मेरे अपने नही हो ,लेकिन अभी अभी तो तुम दोनो ही शादी हुई है ,थोड़ा प्रिवेसी भी तो चाहिए तुम दोनो को ,और यहां मेरी सेवा करने के लिए नॉकर भी तो है “
नेहा के आंखों में आंसू आ गए थे
“क्या मेरे होते हुए आपकी सेवा नॉकर किया करेंगे ,”वो सुबकते हुए बोली ,पिता जी खड़े हो गए और उसके सर पर अपना हाथ फेरने लगे ,नेहा पिता जी के छातियों तक ही आ रही थी ,
“अरे बेटा उदास क्यो हो रही हो ,मैं आऊंगा ना तुमसे मिलने के लिए ,लेकिन अभी नही अभी तुम दोनो जाओ अपनी गृहस्थी सम्हालो “
पिता जी मेरी तरफ देखने लगे ,अचानक उनके चहरे में आये भाव से मेरा कलेजा कांप गया ,वो मुझसे कभी इतने प्यार से बात नही करते थे …
“विकास “
“जी जी पिता जी “मैं हकलाया जिससे नेहा थोड़ी हँस पड़ी ,जिससे मैं और भी नर्वस हो गया
“अगर बहु को कोई भी शिकायत हुई तो …..”
“जी जी पिता जी ,”
नेहा सर गड़ा कर हँसने लगी वही पिता जी नेहा को देखकर मुस्कुराने लगे ………...conti....................