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“कोमल तुम हो बड़ी हॉट. मैं तो जैसे जलने लगा हूँ. तुमने बताया था की गुड़गावां में तुम्हारी सहेलियों के पापा तुम्हारा अच्छे दोस्त हुआ करते थे. क्या इसका ये मतलब है की वहां के अंकल लोग और तुम आपस में ….”
“सेक्स करते थे मिस्टर वी”, कोमल ने बेबाकी से रंगीला का वाक्य पूरा किया.
“तो मैं भी तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूँ कोमल”
“मुझे मालूम है मिस्टर वी…वो लोग मुझे थोडा पॉकेट मनी भी देते थे”
“मैं भी दूंगा”
“और कभी कभी सिगरेट भी पिलाते थे”
“ओह सिगरेट? ये लो” रंगीला ने पैकेट निकाल कर दिया.
कोमल ने एक सिगरेट निकाल कर होठों पर लगाया और जलाया. पहला काश जोर से खींचा और फिर से रंगीला के होठों पर होठ रख कर चुम्मा लेते हुए सारा का सारा धुँआ रंगीला के मुंह के अन्दर फूंक दिया. रंगीला को कोमल की ये अदा ऐसी भाई की उसका लंड एक टाइट हो गया.
रंगीला ने भी एक सिगरेट जला ली.
“मेरे मम्मी पापा कैसे लगे मिस्टर वी?”
“ओह.. बहुत खूब लगे. हमें बड़ी खुशी है की तुम्हारे जैसे फॅमिली यहाँ रहने आयी है.”
“पापा ने मिनी आंटी को मजा दिया की नहीं?”
“अरे भरपूर दिया कोमल. क्या तुम अपने पापा मम्मी के साथ भी?”
कोमल ने धुएं का कश छोड़ते हुए बोला, “मेरे परिवार में सब लोग बड़े ओपन माइंडेड हैं. इस लिए जब जिसका जो मन करता है, दुसरे को उससे कोई तकलीफ नहीं होती है.”
“ओह.. अच्छा …” रंगीला तो जैसे हकला रहा था.
“और मैंने डॉली को ये सब बता दिया है..ताकि आपको आगे बढ़ने में थोडा आराम रहे मिस्टर वी”
“थैंक यू कोमल” रंगीला की जैसे बांछे ही खिल गयीं.
दोनों की सिगरेट अब ख़तम हो गए थी.
“तो चलें अब?”
“जरूर”
रंगीला और कोमल लगभग दौड़ते हुए कोमल के घर में घुसे. घुसते ही रंगीला ने अपने हाथ डॉली के स्कर्ट में डाल के उसके नंगी बुर सहलानी शुरू कर दी. कोमल अपनी मिनी स्कर्ट के नीचे कुछ नहीं पहना था. रंगीला के शॉर्ट्स अपन आप जमीन पर गिर गए. रंगीला ने उसका टॉप उतार कर के उसकी जवान चुन्चियों को आज़ाद कर दिया. अब तक दोनों एकदम नंगे हो चुके थे. रंगीला ने देखा की कोमल को जितना उसने सोचा था वो उससे भी कहीं ज्यादा सेक्सी और हॉट थी.
कोमल बोली,
“ओह यस मिस्टर वी, प्लीज मुझे चोदो…जल्दी.”
रंगीला ने कोमल को आगे की तरफ झुकाया और अपने लंड को उसकी गांड के तरफ से चूत के मुहाने पर टिकाया. कोमल की चूत पहले से ही गीली थी. रंगीला ने सोचा की हो सकता है की डॉली ने भी कोमल की चूत चाटी हो और इसकी वज़ह से ये गीली हुई हो.
कोमल ने अपनी गांड पीछे की तरफ ठेली जिससे रंगीला का लंड आधा घुस गया.
“ओह मिस्टर वी..प्लीज डालो पूरा..”
रंगीला ने अगले ही धक्के में पूरा पेल दिया. वो जानता था कि जवानी में चुदाई का बड़ा उन्माद होता है. सो उसने जल्दी जल्दी धक्के लगाने शुरु कर दिए. कोमल का ये पहला टाइम तो था नहीं मोटे और लम्बे लंड लेने का, सो वो बड़े ही मजे ले कर चुदाई करवाने लगी. थोड़ी ही देर में कोमल झड गयी. तो उसने रंगीला का लंड अपनी चूत ने निकाल लिया. वो घुटने के बल बैठ गयी, रंगीला का लंड अपने हाथों में लिया और बोली,
“मुझे चूत के रस से सना हुआ लंड बड़ा स्वादिष्ट लगता है”
वह रंगीला का लंड अपने मुंह में लेकर उसे मुंह से चोदने लगी. जवान मुंह की गर्मी और गीलपन से रंगीला थोड़ी ही देर में झड गया. कोमल रंगीला का पूरा वीर्य अपने मुंह में ले कर पी गयी.
रंगीला ने अपाने कपडे पहने और बोला,
“मैं तुम्हें ऐसे ही रोज चोदना चाहना हूँ कोमल.”
“कभी भी और कैसे भी मिस्टर वी. मुझे चुदाई बहुत पसंद है. अब तो आप समझ ही गए होंगे की ये हमारा खानदानी खेल है”
“तो क्या तुम्हें बुर चाटना भी पसंद है कोमल?”
कोमल मुस्कराई. वो समझ गयी की रंगीला ने उसके होंठो पर लगा हुआ डॉली के चूत का रस टेस्ट किया है.
“हाँ जी मिस्टर वी.”
रंगीला धीरे धीरे घर की तरफ बढ़ने को हुआ. कोमल बोली
“मिस्टर वी! मुझे लगता है की डॉली भी इस सब के लिए एकदम तैयार है. आज शाम को मैंने उसे काफी कुच्छ सिखाया है. उम्मीद है की आप को इससे कोई आपत्ति नहीं है”
“ओह बिलकुल नहीं. तुमने एक दुसरे के साथ जो भी किया उम्मीद है की दोनों को पसन्द आया. है न?”
“बिलकुल. डॉली तो जैसे मजे के मारे पागल ही हो गयी जब मैंने उसकी बुर चाटनी शुरू की. वो कई बार मेरे मुंह के ऊपर झड़ी. बाद में उसें मजे से मेरे चूत भी चाटी”
दरवाजे पर रंगीला ने कोमल को एक बार फिर से चूमा. कोमल बोली,
“अगली बार आप मेरी गाड़ मारना मिस्टर वी! मुझे गांड में लंड बड़ा अच्छा लगता है.”
“वो तो मुझे भी पसंद है कोमल, अगली बार जरूर से.” रंगीला बोला और उसकी गांड सहला दी.
जैसे ही रंगीला जाने लगा, कोमल बोली,
“आपको अब डॉली को चोदना चहिये मिस्टर वी. वो इसके लिए पूरी तरह से तैयार है. उसके लिए अच्छा रहेगा की घर से उसकी चुदाई की शुरुआत हो. मुझे चोदने वाले पहले आदमी मेरे पापा ही थे और मुझे ये बात हमेशा याद रहेगी. मुझे अभी भी पापा का लंड बेस्ट लगता है मिस्टर वी.”
“सेक्स करते थे मिस्टर वी”, कोमल ने बेबाकी से रंगीला का वाक्य पूरा किया.
“तो मैं भी तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूँ कोमल”
“मुझे मालूम है मिस्टर वी…वो लोग मुझे थोडा पॉकेट मनी भी देते थे”
“मैं भी दूंगा”
“और कभी कभी सिगरेट भी पिलाते थे”
“ओह सिगरेट? ये लो” रंगीला ने पैकेट निकाल कर दिया.
कोमल ने एक सिगरेट निकाल कर होठों पर लगाया और जलाया. पहला काश जोर से खींचा और फिर से रंगीला के होठों पर होठ रख कर चुम्मा लेते हुए सारा का सारा धुँआ रंगीला के मुंह के अन्दर फूंक दिया. रंगीला को कोमल की ये अदा ऐसी भाई की उसका लंड एक टाइट हो गया.
रंगीला ने भी एक सिगरेट जला ली.
“मेरे मम्मी पापा कैसे लगे मिस्टर वी?”
“ओह.. बहुत खूब लगे. हमें बड़ी खुशी है की तुम्हारे जैसे फॅमिली यहाँ रहने आयी है.”
“पापा ने मिनी आंटी को मजा दिया की नहीं?”
“अरे भरपूर दिया कोमल. क्या तुम अपने पापा मम्मी के साथ भी?”
कोमल ने धुएं का कश छोड़ते हुए बोला, “मेरे परिवार में सब लोग बड़े ओपन माइंडेड हैं. इस लिए जब जिसका जो मन करता है, दुसरे को उससे कोई तकलीफ नहीं होती है.”
“ओह.. अच्छा …” रंगीला तो जैसे हकला रहा था.
“और मैंने डॉली को ये सब बता दिया है..ताकि आपको आगे बढ़ने में थोडा आराम रहे मिस्टर वी”
“थैंक यू कोमल” रंगीला की जैसे बांछे ही खिल गयीं.
दोनों की सिगरेट अब ख़तम हो गए थी.
“तो चलें अब?”
“जरूर”
रंगीला और कोमल लगभग दौड़ते हुए कोमल के घर में घुसे. घुसते ही रंगीला ने अपने हाथ डॉली के स्कर्ट में डाल के उसके नंगी बुर सहलानी शुरू कर दी. कोमल अपनी मिनी स्कर्ट के नीचे कुछ नहीं पहना था. रंगीला के शॉर्ट्स अपन आप जमीन पर गिर गए. रंगीला ने उसका टॉप उतार कर के उसकी जवान चुन्चियों को आज़ाद कर दिया. अब तक दोनों एकदम नंगे हो चुके थे. रंगीला ने देखा की कोमल को जितना उसने सोचा था वो उससे भी कहीं ज्यादा सेक्सी और हॉट थी.
कोमल बोली,
“ओह यस मिस्टर वी, प्लीज मुझे चोदो…जल्दी.”
रंगीला ने कोमल को आगे की तरफ झुकाया और अपने लंड को उसकी गांड के तरफ से चूत के मुहाने पर टिकाया. कोमल की चूत पहले से ही गीली थी. रंगीला ने सोचा की हो सकता है की डॉली ने भी कोमल की चूत चाटी हो और इसकी वज़ह से ये गीली हुई हो.
कोमल ने अपनी गांड पीछे की तरफ ठेली जिससे रंगीला का लंड आधा घुस गया.
“ओह मिस्टर वी..प्लीज डालो पूरा..”
रंगीला ने अगले ही धक्के में पूरा पेल दिया. वो जानता था कि जवानी में चुदाई का बड़ा उन्माद होता है. सो उसने जल्दी जल्दी धक्के लगाने शुरु कर दिए. कोमल का ये पहला टाइम तो था नहीं मोटे और लम्बे लंड लेने का, सो वो बड़े ही मजे ले कर चुदाई करवाने लगी. थोड़ी ही देर में कोमल झड गयी. तो उसने रंगीला का लंड अपनी चूत ने निकाल लिया. वो घुटने के बल बैठ गयी, रंगीला का लंड अपने हाथों में लिया और बोली,
“मुझे चूत के रस से सना हुआ लंड बड़ा स्वादिष्ट लगता है”
वह रंगीला का लंड अपने मुंह में लेकर उसे मुंह से चोदने लगी. जवान मुंह की गर्मी और गीलपन से रंगीला थोड़ी ही देर में झड गया. कोमल रंगीला का पूरा वीर्य अपने मुंह में ले कर पी गयी.
रंगीला ने अपाने कपडे पहने और बोला,
“मैं तुम्हें ऐसे ही रोज चोदना चाहना हूँ कोमल.”
“कभी भी और कैसे भी मिस्टर वी. मुझे चुदाई बहुत पसंद है. अब तो आप समझ ही गए होंगे की ये हमारा खानदानी खेल है”
“तो क्या तुम्हें बुर चाटना भी पसंद है कोमल?”
कोमल मुस्कराई. वो समझ गयी की रंगीला ने उसके होंठो पर लगा हुआ डॉली के चूत का रस टेस्ट किया है.
“हाँ जी मिस्टर वी.”
रंगीला धीरे धीरे घर की तरफ बढ़ने को हुआ. कोमल बोली
“मिस्टर वी! मुझे लगता है की डॉली भी इस सब के लिए एकदम तैयार है. आज शाम को मैंने उसे काफी कुच्छ सिखाया है. उम्मीद है की आप को इससे कोई आपत्ति नहीं है”
“ओह बिलकुल नहीं. तुमने एक दुसरे के साथ जो भी किया उम्मीद है की दोनों को पसन्द आया. है न?”
“बिलकुल. डॉली तो जैसे मजे के मारे पागल ही हो गयी जब मैंने उसकी बुर चाटनी शुरू की. वो कई बार मेरे मुंह के ऊपर झड़ी. बाद में उसें मजे से मेरे चूत भी चाटी”
दरवाजे पर रंगीला ने कोमल को एक बार फिर से चूमा. कोमल बोली,
“अगली बार आप मेरी गाड़ मारना मिस्टर वी! मुझे गांड में लंड बड़ा अच्छा लगता है.”
“वो तो मुझे भी पसंद है कोमल, अगली बार जरूर से.” रंगीला बोला और उसकी गांड सहला दी.
जैसे ही रंगीला जाने लगा, कोमल बोली,
“आपको अब डॉली को चोदना चहिये मिस्टर वी. वो इसके लिए पूरी तरह से तैयार है. उसके लिए अच्छा रहेगा की घर से उसकी चुदाई की शुरुआत हो. मुझे चोदने वाले पहले आदमी मेरे पापा ही थे और मुझे ये बात हमेशा याद रहेगी. मुझे अभी भी पापा का लंड बेस्ट लगता है मिस्टर वी.”