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मिनी की कातिल अदाएं

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मैंने उसके मुंह से हटते ही उसकी ठोड़ी और गले पर चुम्बन करते हुए उसके भरे हुए बूब्स की ओर बढ़ने लगा जहाँ जहाँ शराब से गीली थी, वहाँ वहाँ तक मेरी जीभ नीचे जा रही थी।

जैसे ही मैंने बूब्स को चूसा और नीचे जाने लगा, मिनी ने हाथ से रोक दिया और शरमाते हुए बोली- हटो अब! आपने पिलाई तो मैंने पी ली न।

हम जैसे ही अलग हुए आरके ने ताली बजा दी, बोला- यार mindblowing है तुम दोनों की जोड़ी। तुम दोनों कहीं और किसी भी चीज़ में रोमांस ढूंढ ही लेते हो।

शाम धीरे धीरे जवान हो रही थी, हमारे जिस्मों की खुमरियाँ बढ़ती जा रही थी। आरके को देखकर पता चल रहा था कि वो लाइव रोमांटिक सीन देखकर उत्साहित हो गया है, उसके टॉवल के ऊपर से उसके लण्ड का प्रतिबिम्ब साफ़ दिखाई पड़ रहा था।

मेरे मन में मिनी को आरके के सामने ही चोदने का मन करने लगा। फिर मैंने सोचा की इस तरह से मिनी अभी आरके के सामने खुल जाएगी तो जब उसकी बीवी कोमल आएगी तो उसे हमारे इस चंगुल में फ़साना शायद आसान हो जाए।

मेरी बहुत पुरानी मरी हुई इच्छा फिर से सांस लेने लगी, शादी से पहले मेरी इच्छा थी कि मैं ग्रुप सेक्स करूँ पर कभी मौका ही नहीं लगा।

मिनी 2 ड्रिंक तो पी ही चुकी थी जिसके कारण वो थोड़ी ज्यादा रोमांटिक हो रही थी और उसे आरके से ज्यादा शर्म भी नहीं आ रही थी।

आरके बोला- यार आजा एक एक सिगरेट पी कर आते है।

मैंने मिनी को देखते हुए कहा- आज के लिए घर में ही सिगरेट पी लें?

मिनी की थोड़ी आँखें चढ़ी हुई थी, बोली- मैंने कभी आपको ‘घर के अंदर सिगरेट नहीं पियो’ ऐसा तो नहीं बोला, वो तो आप अपनी मर्ज़ी से बाहर पीते हो। तो अभी भी आप मुझसे मत पूछो, आपका जहाँ दिल करे, वहाँ सिगरेट पी सकते हो।

मैंने आरके को बोला- जला।

आरके ने बात खत्म होने से पहले ही सिगरेट मुंह में लगा ली थी और आदेश मिलते ही उसमें आग लगा ली।

शराब का असली असर सिगरेट के धुएं के साथ ही शुरू होता है।

अब शराब का सुरूर और मदमस्त बनाने लगा।

मैंने आरके को बोला- तू कभी भोपाल में अपनी बीवी को गोद में बैठा के सुट्टे मारते हुए शराब पीता है?

आरके बोला- नहीं यार, मेरी ऐसी किस्मत कहाँ… हम ये सारे काम अलग अलग और छुप छुप के करते है और हंसने लगा।

मैंने कहा- यार, छुप छुप के काम करने का मज़ा भी कुछ और ही है। पर हाँ यह बात भी सही है कि हमेशा छुप छुप के मज़ा नहीं आता। कभी छुप छुप के तो कभी खुल्लम खुल्ला पर थोड़ा परिवर्तन आना तो ज़रूरी है। एक ही एक जैसा काम करो तो बोरियत होने लगती है।

मैं और मेरी प्यारी बीवी मिनी तो बहुत डायनामिक है इस मामले में, हम अपनी ज़िन्दगी को स्पाइस अप करते रहते हैं किसी न किसी तरह।

मिनी सोफे पर आधी लेटी हुई थी, उसने अपना सर हैंड रेस्ट पर टिकाया हुआ था, उसकी एक टांग मेरी पीठ के पीछे थी और एक मेरी जांघों के ऊपर, मैं सोफे पर बैठा हुआ था। उसने एक लॉन्ग स्कर्ट पहना हुआ था और ऊपर शार्ट टॉप, अंदर कोई गारमेंट्स नहीं।

मैंने उसकी जांघों तक हाथ फेरते हुए कहा- क्यूँ, मैं सही कह रहा हूँ न?

उसने एक हाथ से अपनी लॉन्ग स्कर्ट को घुटने के नीचे तक करके रखा हुआ था जिससे आरके को कुछ न दिखे, पर मेरे हाथ को नहीं रोका और हाँ में सर हिला दिया।

मैंने सिगरेट का कश मारते हुए मिनी से पूछा- पीयेगी?

तो मिनी बिना कुछ बोले जिस हाथ से स्कर्ट पकड़ी थी वो हाथ बढ़ाया और सिगरेट मेरे हाथ से ले ली। मैंने उसकी आँखों में इतनी मस्ती कभी नहीं देखी थी।

उसने मुंह में सिगरेट लगाते ही जोर का दम लगाया और मैंने अपने हाथ को थोड़ा और नीचे ले गया जहाँ उसकी चूत टच हो सके। उसके कारण उसकी स्कर्ट थोड़ी सी और ऊपर उठ गई जो अब घुटने से थोड़ी ऊपर हो गई थी।

मिनी सुट्टा लगाते ही खांसने लगी।

मैंने उसे थोड़ा सा उठाया उसकी पीठ सहलाते हुए बोला- धीरे धीरे पीनी चाहिए थी, एकदम से पूरी सिगरेट थोड़े ही पीनी होती है।

और उसकी बूब्स को ऊपर से ऐसे दबाया जैसे मरीज को सांस न आने पर दबाया जाता है।

आरके ने पानी की बोतल उठा के दे दी, मैंने बोतल मिनी के मुंह से लगा दी।

वो थोड़ा पानी पीकर नार्मल हो गई पर इसी सब उठा पटक में उसका टॉप और ऊपर चला गया जहां से उसके उभार की पहली किरण दिखने लगी थी। जैसे कोई ईद के चाँद हो और इधर जांघों तक स्कर्ट ऊपर उठ गई।

थ आरके मेरी तरफ देखता हुआ आँखों से इशारे से बताने की कोशिश कर रहा था कि स्कर्ट और टॉप थोड़ा नीचे कर दूँ पर वो अभी मेरा प्लान जानता ही कहाँ था, मैंने उसकी बातों को अनदेखा कर दिया।

अब आखिर वो भी जवान लौंडा, और ऊपर से तना हुआ लण्ड! उसने भी मिनी के जिस्म को निहारना शुरू कर दिया।

मिनी भी मदहोश थी, उसकी आँखें बंद और उसके ऊपर मेरा स्पर्श उसे और भी ज्यादा मादक बना रहा था, उसकी चूत पर प्यार से मेरा सहलाना उसकी ठोड़ी को थिरका रहा है।

इधर टीवी पर किसी का कोई ध्यान नहीं है और आरके टॉवल के ऊपर से ही अपने लण्ड को दबा रहा है।

मैं अभी अपने एक हाथ से अपने लण्ड को टॉवल से थोड़ा बाहर निकाल के उसके टोपे को रगड़ रहा हूँ। मिनी की चूत अब तक काफी गीली हो चुकी है, वो इस समय अपनी कामाग्नि के चरम पर है।

मैं धीरे से उसके बूब्स को छूने की इच्छा से टॉप के ऊपर से ही अपना हाथ लेकर गया। मिनी को जैसे करंट लग गया हो उसने तुरंत मेरा हाथ अपने टॉप और नीचे से हटा दिया।

आरके को देखा तो वो बहुत फुर्ती से टीवी की ओर देखने लगा और उसकी पीठ हमारी तरफ थी। यह देख कर मिनी ने मेरी तरफ आश्चर्य के भाव से देखा जैसे वो कहना चाहती हो कि क्या तुम मुझे इसी के सामने चोदोगे।

मैंने कोई रिएक्शन नहीं दिया, मिनी उठने की कोशिश करने लगी, मैंने उसकी उठने में मदद की और उसे बाँहों में भर कर उठाया।

उसने पहले थोड़े कपड़े सही किये, मतलब नीचे किये, फिर बैडरूम में चली गई।

उसके पीछे पीछे बैडरूम में गया तो वो बाथरूम में जा चुकी थी, में वापस ड्राइंग रूम में आ गया।

आरके ने पूछा सब ठीक तो है न?

मैंने कहा- हाँ यार, सब ठीक है।

फिर धीरे से कहा- तू बस शो एन्जॉय कर!

मैंने एक सिगरेट निकाली और जला ली।

तभी किचन में कुछ आवाज़ हुई, मैंने जाकर देखा तो मिनी अपना बचा हुआ पैग एक घूंट में खत्म कर रही थी।

उसने मेरी तरफ देखा और अपने बूब्स को दबाते हुए नशीली अदा से अपने करीब बुलाया।

मैंने जाकर मिनी को बाँहों में जकड़ लिया और उसकी स्कर्ट उठा कर अपने लण्ड को उसकी चूत पर टच करते हुए उसके टॉप को ऊपर उठा कर उसके बूब्स को अपने सीने से दबाने लगा।

मिनी की सिसकारियाँ निकलने लगी, वो धीरे से मेरे कान में बोली- देखा न, तुम हारने वाले हो। मेरा कंट्रोल तुमसे अच्छा है।

मैंने उसकी बात को अनसुना करके अपना आधा लण्ड उसकी चूत में आधा ठेल दिया।

अब तो मिनी से रहा ही नहीं गया और वो जोर से चिल्ला उठी- उहह आहह…

उसका पानी मेरे लण्ड पे महसूस होने लगा।

मैंने अपना लण्ड बाहर निकला और मिनी को अपने आप से दूर कर दिया, फिर धीरे से कहा- इसे कहते हैं कंट्रोल!

और जोर जोर से हंसने लगा।

मिनी नाटकीय रूप से गुस्सा होने लगी, बोली- जाओ, मैं आपसे बात नहीं करती। ऐसे भी कोई करता है क्या अपनी बीवी के साथ?

मैंने कहा- अभी तो पूरी रात पड़ी है, अभी तुम्हारे पास और भी बहुत मौके हैं, उकसाओ मुझे इतना कि मैं तुम्हें पागलों की तरह चोदूँ। मिनी बोली- आपको उकसाना तो आसान है पर आरके भईया के चक्कर में बहुत से अपने जलवे नहीं दिखा पा रही जिसका आप फायदा उठा रहे हो।

मैंने धीरे से बोला- आज तुझे उसी के सामने चोदूँगा मेरी जान!

मिनी को इस बात का कतई बुरा नहीं लगा क्योंकि वो यह जानती है कि जब मैं चोदने के लिए उत्साहित होता हूँ तो ऐसे ही गन्दी गन्दी बातें करता हूँ।

तो वो मेरी ताल में ताल मिला कर बोली- जहाँ मर्जी आये, वहाँ पर मेरे बदन के साथ खेलो जहांपनाह!

वो मेरी रग रग से वाकिफ थी, उसे पता था अगर पलट कर ऐसे जवाब देगी तो मैं इतना उत्तेजित हो जाऊँगा कि उसे वहीं चोद डालूँगा।

पर मैंने ऐसा नहीं किया और जाकर सोफे पर बैठ गया।

आरके के तो आँख कान सब हमारी बातों में ही लगे थे।

मैंने अपने आप को कंट्रोल करने के लिए अपना ध्यान टीवी में लगाना शुरू किया और आरके के हाथ से बिना कुछ बोले उसकी बची हुई सिगरेट ले ली।

2-4 कश लगाने के बाद ही सिगरेट खत्म हो गई थी तो उसे बुझाने के लिए मैं मुड़ा तो किचन के दरवाज़े की तरफ देखकर भौंचक्का ही रह गया।

उधर मिनी सिर्फ टॉवल में खड़ी थी।

किचन के दरवाज़े से सटकर जो सोफे से दिख रहा था, शायद आरके जहाँ बैठा था वहाँ से नहीं।

मैंने उसको इशारे से बोला- आ जा यहाँ आ जा!

किचन से ही मिनी बोलती हुई आई- मैंने सोचा क्यूँ न आप लोगों का साथ दूँ आप लोगों की तरह टॉवल में… और मैं भी पैग पीना चाहती हूँ। क्यूँ भइया, आपको बुरा तो नहीं लगेगा न?

आरके ने जैसे ही पीछे मुड़ कर देखा तो उसके पसीने छूट गए बोला- नहीं भाभी, यह आपका घर है, आप जैसे चाहे वैसे रह सकती हैं। और आप लोग मुझसे संकोच करेंगे तो मुझे लगेगा कि मैं आप लोगों के यहाँ गलत आ गया हूँ और मुझे शायद वापस जाना पड़े। प्लीज आप लोग comfortable रहे।

फिर हंसते हुए बोला- आज मैं आपको फालतू सवाल पूछ कर डिस्टर्ब भी नहीं करूँगा, चाहे कैसी भी आवाज़ें आयें।

हम तीनों इस बात पर हंस दिए।

मैं उठा और उसका गिलास जो किचन में रखा था, वो उठा लाया।

अब तीन पैग बने पर अब मिनी बैठ नहीं रही थी क्योंकि उसका तौलिया बहुत ऊपर तक था।

वो तो मुझे उसकाने के लिए आरके के सामने पहन कर आई थी।

वो सोफे के दूसरी तरफ खड़ी रही, मैं सोफे पर बैठा रहा और बेचारे आरके को अपने तने हुए लण्ड को छुपाने के लिए चादर अपने ऊपर डालनी पड़ी।

मैं सोफे पर बैठा बैठा अपना हाथ बढ़ा कर उसकी चिकनी चूत को सहला रहा था। वो सोफे की तरफ झुकी हुई थी और उसके एक हाथ में गिलास था।

मेरे एक हाथ में गिलास था और दूसरा उसकी चूत पर… थोड़ी देर में मेरी पूरी उंगली गीली हो गई।

इतने में आरके उठा और बोला- मैं वाशरूम होकर आता हूँ।

मैंने कहा- क्यूँ बे… मेरी बीवी को टॉवल में देखकर कही तेरा….

बोलते बोलते मिनी ने मेरे मुंह पे हाथ रख दिया, बोली- भइया इन्होंने थोड़ी ज्यादा पी ली है, कुछ भी बोले जा रहे हैं। आप प्लीज वाशरूम होकर आइये।

आरके बेचारा बिन पानी की मछली जैसा महसूस कर रहा था।

उसके जाते ही मैं मिनी का टॉवल थोड़ा पीछे से उठकर उसकी गांड सहलाने लगा।

मिनी बोली- आप भी कैसे बात करते हो?

मैंने कहा- चिंता मत कर, वो भी पीया हुआ है, उसे कल थोड़े ही न कुछ याद रहेगा। मैं उसे अच्छे से जानता हूँ।

मैंने मिनी को बोला- मैं जैसा कहूँ, वैसा ही करना।

उसने आँखों आँखों में ही हामी भर दी।

जब आरके वाशरूम से लौटा तो मैंने मिनी का टॉवल नीचे नहीं किया, आराम से उसके आते समय मिनी की गांड सहलाता रहा।

मिनी मुझे घूर रही थी और धीरे से बोली- टॉवल नीचे कर दो, वो देख रहे है।

मैंने कहा- तू चिंता मत कर, मुझे पता है कि मैं क्या कर रहा हूँ।

आरके आराम से नंगी गांड की गोलाई नापता हुआ अपनी जगह पर आकर बैठ गया।

मैं धीरे से मिनी से बोला- अगर वो पीये नहीं होता तो कुछ कहता, या वो भी तुम पर चांस मार कर तुम्हें छूने की कोशिश करता। पर वो बहुत पीया हुआ है इसलिए चिंता मत करो उसे कुछ याद नहीं रहने वाला।

आरके ने थोड़ी बात सुन के ही आईडिया लगा लिया कि मैंने मिनी से क्या बोला होगा।

तो आरके टीवी के किसी सीन के बारे में कुछ बोलने लगा। इससे मिनी को और भरोसा हो गया कि आरके को कुछ समझ नहीं आ रहा और वो बहुत ड्रंक है।

उसी का फायदा उठाते हुए मिनी ने सोफे के पीछे से ही मेरा लण्ड टॉवल के ऊपर से पकड़ लिया और सहलाने लगी जो आरके देख रहा था।

धीरे से मिनी आरके को देखते हुए ही मेरा टॉवल हटाते हुए अब सीधे मेरे नंगे लण्ड को सहलाने लगी।

मैंने फिर मिनी से कहा- देख… वो देख रहा है पर कोई रिएक्शन नहीं है। और अगर ऐसा होता तो मैं भी तो शर्माता जब तूने मेरा लण्ड बाहर निकाला तो।

फिर मैंने मिनी का हाथ पकड़ा और उसे सोफे पर बैठने के लिए घुमा कर अपनी तरफ बुलाया।

मिनी सोफे पर आकर बैठी।

अब मैं आधा लेटा हुआ था और मेरी एक टांग मिनी की पीठ के पीछे और और एक जांघ के ऊपर! मेरी टाँगें चौड़ी होने की वजह से मेरा लण्ड अब पूरी तरह तौलिये से बाहर था, मिनी का हाथ मेरे लण्ड से प्यार कर रहा था और मिनी की आँखें केवल आरके को देख रही थी, वो अपने आप पर विश्वास नहीं कर पा रही थी कि यह आदमी सुबह सब भूल जायेगा और इसे अभी कुछ समझ नहीं आ रहा।

 
मिनी मेरे लण्ड को छोड़ कर बोली- यार, आप अंदर चलो न! मैं हार गई, प्लीज मुझे अंदर ले जाकर मेरी प्यास बुझा दो। इनको चाहे कुछ याद रहे या न रहे पर इनके सामने में शायद कुछ नहीं कर पाऊँगी, चलो न अंदर!मैंने कहा- ओके, चलो पर देखो ये भी यादगार पल होंगे तुम्हारी ज़िन्दगी के जब तुम एक दूसरे मर्द के सामने चुदवा रही हो। बाकी मैं तुम्हे फ़ोर्स नहीं करूँगा, तुम जैसा कहो वैसा कर लूंगा। पर मैं इसे बहुत सालों से जानता हूँ, इसे दारु के दूसरे पेग के बाद कुछ याद नहीं रहता, इसके साथ कुछ भी करो।

मिनी ने कुछ देर सोचा फिर बोली- ठीक है, आज किसी और के सामने नंगी होकर देखती हूँ!

मुझे सोच कर ही करंट दौड़ रहा था।

और मिनी ने फिर से मेरे लण्ड को पकड़ कर सहलाने और पुचकारने लगी।

मैंने अपने पांव से मिनी का तौलिया हटाना शुरू कर दिया।

मिनी ने मेरे लण्ड को चूसना शुरू किया मैंने मिनी का तौलिया पूरी तरह उसके बदन से अलग कर दिया। मिनी ने भी मेरा तौलिया हटा दिया।

और जब मिनी मेरे लण्ड को चूस रही थी मैंने आरके को इशारा किया कि ऐसे ही चुतिया बना रह!

मिनी अच्छे से लण्ड चूसने के बाद 69 में आने लगी, बोली- आप भी करना चाह रहे होगे न? मैं मरी जा रही हूँ। वाकयी कितना अच्छा लग रहा है।

मैंने कहा- और मजा आएगा, अभी रुक तो सही।

मैंने बोला- आरके भाई, कैसी लग रही है मेरी प्यारी नंगी बीवी?

आरके बोला- भाभी तो बहुत खूबसूरत हैं।

मिनी एकदम चौंक गई और जल्दी से मेरे ऊपर से हट कर तौलिया उठाने लगी।

मैंने कहा- वो ज़िंदा है, सब देख रहा है सब कुछ कर सकता है, पर सुबह सब भूल जायेगा, कोई सोया या मरा हुआ आदमी थोड़े ही है। मिनी के चेहरे पर थोड़ी सी शान्ति का भाव आया।

फिर उसने देखा कि जल्दी के कारण वो आरके के काफी करीब खड़ी थी, आरके का लण्ड भी बाहर की ओर निकला हुआ था।

मैंने मिनी का हाथ पकड़ा और अपनी ओर खींच लिया।

मिनी बोली- सच में भैया को सुबह कुछ याद नहीं रहेगा न?

मैंने कहा- हाँ यार, सही कह रहा हूँ।

मिनी फिर बोली- मैं इनके सामने आपसे और उनसे कैसी भी बातें करूँ न?

मैंने कहा- दिल खोल के जो चाहो करो।

मिनी आरके से बोली- भैया, आपके टॉवल के अंदर से सब कुछ दिख रहा है।

आरके बोला- भाभी, उसे लण्ड बोलते है, हाँ वो बाहर आ गया है। आपको कैसा लगा मेरा लण्ड?

मिनी बोली- आपका दिखने में बहुत सुन्दर है।

मैंने कहा- तुम चाहो तो उसे छू कर देख सकती हो।

मिनी बोली- सच में? मेरा मन कर ही रहा था पर मैंने सोचा कि शायद आपको अच्छा न लगे।

मैंने कहा- यार तुम भी कैसी बातें करती हो? अगर किसी और के लौड़े को देखने या छूने से तुम्हारे मेरे लिए प्यार कम थोड़े ही होने वाला है।

थोड़ा रूक कर मैं आरके से बोला- आरके भाई, अपना टॉवल हटा कर आओ मेरी बीवी को अपना लण्ड दिखाओ, उसे अपने लण्ड को छूने दो।

आरके उठ कर खड़ा हो गया और सोफे से बिल्कुल करीब आकर बिल्कुल नंगा मेरी प्यारी बीवी मिनी की आँखों के सामने अपने लौड़े को पेश कर दिया।

मेरी बीवी ने मेरी तरफ देखते हुए उसके लण्ड को धीरे से छूने के लिए हाथ बढ़ाये, फिर पूरा मुट्ठी में भर लिया।

मिनी बोली- भैया, आपका लंड बहुत अच्छा और तना हुआ है।

आरके बोला- भाभी, क्या आप मेरे लंड को चूस कर मेरा पानी निकाल सकती हैं।

मिनी बोली- हाँ भैया, क्यूँ नहीं। पर अभी थोड़ी देर आप अपने लंड को ऐसे ही रखिये, आप आराम से हम दोनों को प्यार करते हुए देखेंगे तो आपको चुसवाने में और भी मज़ा आएगा।

फिर बीवी ने हम दोनों के लंड को पकड़ के खेलना शुरू किया, मेरे लंड को चूमती कभी आरके के लंड को।

आरके भी आहें भर रहा था और मैं भी।

मैं आरके से बोला- बहनचोद, तूने अपना लंड पकड़वाया हुआ है और वो देख, तेरे लंड को चूम भी रही है और तू है कि मेरी बीवी को प्यार भी नहीं कर रहा! चल तू भी अपना हाथ चला… मेरी बीवी को आज तक किसी और मर्द ने नहीं छुआ है। तू मेरी बीवी के किसी भी अंग को चूम और छू सकता है।

आरके बोला- भाई थैंक यू, तूने तो दिल की बात कर दी।

फिर आरके मेरी बीवी के बूब्स को सहलाने लगा और निप्पलों के साथ खेलने लगा। मिनी की साँसें गहरी होती जा रही थी, मिनी बोली अब तो आप अपना लंड मेरे अंदर डाल दो, मैं मरने वाली हूँ, कब से तड़प रही हूँ आपके लंड के लिए!

मैंने कहा- चाहो तो आज इसका लंड ले सकती हो।

मिनी बोली- नहीं, मुझे आपका ही लौड़ा अपने अंदर डलवाना है।

अब मिनी को सोफे पे लिटाया और मैं उसके ऊपर आ गया।

पर जगह कम थी इसके कारण स्ट्रोक्स अच्छे नहीं लग पा रहे थे, मैंने कहा- चल अंदर बिस्तर पे ही तेरी चुदाई करता हूँ।

मिनी बोली- हाँ, यहाँ अच्छे से लेट भी नहीं पा रही मैं।

हम तीनो नंगे ही बिस्तर पे चले गए।

आरके ने बोला- भाई क्या मैं तेरी बीवी की चूत चाट सकता हूँ? बहुत देर से इनकी खुशबू ने मुझे दीवाना बनाया हुआ है।

मैंने कहा- मुझसे क्या पूछता है, मेरी बीवी से पूछ!

उसने फिर कहा- भाभी, क्या मैं आपकी चूत चाट लूँ?

मिनी बोली- नहीं भैया, अभी नहीं अभी मुझे लौड़े की ज़रूरत है, प्लीज आप माइंड मत करना।

मैंने कहा- एक काम कर, तू मेरा लंड चूस ले!

मिनी बोली- ओह्ह… आप किसी मर्द से लंड चुसवा सकते हो, और ये किसी और लंड चूस सकते हैं?

मैंने कहा- अभी उसे चढ़ी हुई है, अभी वो कुछ भी कर सकता है। और मुंह तो औरत का हो या आदमी का रहेगा तो वैसा ही न!

मिनी बोली- नहीं, मुझे अभी आपका लौड़ा अपनी चूत में चाहिए।

और मुझे उठाने की कोशिश करने लगी। मैं उठकर उसके ऊपर चढ़ गया और दो ही बार में उसकी चूत में अपना पूरा लंड पेल दिया। अब आरके मेरी बीवी के बूब्स के ऊपर अपने लंड से मार रहा था और मुट्ठ मार रहा था।

मैंने आरके से बोला- तू अपना मुंह लंड के पास लेकर आ।

आरके उल्टा लेट गया, अब उसकी टाँगें बीवी के मुंह की तरफ और उसका मुंह मेरी बीवी की चूत और मेरे लंड के करीब था, आरके की गर्म साँसे में अपने टट्टे पर महसूस कर रहा था।

मैंने अपना लंड मिनी की चूत से बाहर निकला और आरके के मुंह पे रख दिया, आरके को जैसे ही गीला गीला महसूस हुआ, उसने तुरंत उसे अपने मुंह में ले लिया।

मैंने फिर उसके मुंह से बाहर निकाला और बीवी की चूत में डाल दिया, फिर 2 धक्के बीवी की चूत में और 2 धक्के आरके के मुंह में मारने लगा।

आरके को मिनी का पानी पीना था, उसका इससे अच्छा उपाय नहीं था। जब मैं मिनी की चूत में धक्के मारता तो आरके कभी मेरी गांड चाटता और कभी मिनी की।

इधर जब मिनी को उसकी गांड पे जीभ महसूस हुई तो और ज्यादा उत्साहित हो गई और उसने भी आरके के लंड को सहलाना और मुट्ठ मारना शुरू कर दिया, मैं मिनी की चुदाई के साथ साथ उसके बूब्स भी मसल रहा था।

हम तीनों की सिसकारियाँ और आहें कमरे में गूंजने लगी।

मिनी बोली- भैया, आप वहाँ से हट जाओ, मैं आने वाली हूँ।

आरके बोला- भाभी, आप आ जाओ, पूरा पानी मेरे ऊपर निकाल दो, कोई बात नहीं, मुझे अच्छा लगेगा।

मैंने कहा- मिनी, तुम किसी की चिंता मत करो, बस चुदो मुझसे, मैं भी आने वाला हूँ।

मेरी आवाज़ें तेज़ होती जा रही थी, मैंने कहा- रंडी साली कुतिया, दूसरे लंड को कैसे मसल रही है? तेरी माँ की चूत। तेरी चूत को मार मार के भोसड़ा बना दूंगा माँ की लौड़ी।

मिनी बोली- और चोदिये न, आपकी ही चूत है, जितना मर्जी आये, उतना इसे चोदिये, मैं तो आपसे चुदने के लिए ही बनी हूँ, आपकी रंडी बनकर ही रहना चाहती हूँ।

हम दोनों का लगभग एक साथ स्खलन हो गया।

इधर आरके लगातार मेरी और मिनी की गांड चाटे जा रहा था।

फिर जब मैं पूरी तरह मिनी की चूत में झड़ गया तो मैंने अपना लंड बाहर निकाला जिसे आरके ने बहुत अच्छे से साफ़ किया। फिर उसने मेरी बीवी मिनी की चूत को भी अच्छे से चाट के साफ़ कर दिया।

इधर मिनी ने आरके को भी हिला हिला के पागल सा कर रखा था।

मैंने अपनी बीवी से उसका लंड छुड़ाया और आरके के लंड को अपनी बीवी के सामने ही चूसने लगा।

मिनी बोली- आप?

मैंने कहा- जिसने तुम्हें इतना अच्छी अनुभूति दी है, उसके लिए ये क्या मैं कुछ भी कर सकता हूँ।

मिनी बोली- आप हटो, मैं चूस लेती हूँ। आदमी का लंड औरत चूसे तो ज्यादा अच्छा लगता है।

मैंने कहा- ठीक है, पर आरके को बहुत अच्छे से तृप्त कर देना।

मैंने कहा- तुम उसके ऊपर लेट जाओ, अपने बदन से उसके बदन को रगड़ कर उसकी मलाई का कतरा कतरा निकाल दो।

 
आरके के नंगे बदन पर मिनी लेट गई और मछली की तरह उसके बदन पर फिसलने लगी।

आरके ने मिनी को बाँहों में जकड़ा और बोला- भाभी आप ग्रेट हो, आप जिस तरह मेरे बदन की आग भड़का रही हो, मुझे मन कर रहा है कि मेरी मलाई कभी न निकले और मैं आपके साथ आपके पति के सामने ऐसे ही नंगा पड़ा रहूँ। भाभी अपनी चिकनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ दीजिये प्लीज!

मिनी बोली- भइया, आप मुझे जकड़े हुए हैं, मैं हिल भी नहीं पा रही। आप छोड़िए तो मुझे, मैं आपका दिल खुश कर दूंगी।

मैंने कहा- आरके, मज़ा आ रहा है मेरी बीवी के साथ?

आरके बोला- यार ये ज़िन्दगी का सबसे सुहाना पल है, मैं इसे कभी नहीं भूल पाऊँगा।

फिर बोला- भाभी, आप तो सेक्स की देवी हो। कितने अच्छे से सारे काम करती हो।

मिनी बोली- थैंक यू!

आरके बोला- भाभी में थोड़े अपशब्द का उपयोग कर लूँ, मेरे लंड की मलाई का फव्वारा बस निकलने ही वाला है।

मिनी बोली- भइया, आप कुछ भी बोलिए, अब तो मैं आपके साथ नंगी ही पड़ी हूँ, मुझे जैसे चाहे उपयोग करिये। आपका लंड बहुत प्यारा है, बिल्कुल रंगीला जैसा लंड। क्या आप मेरी चूत में अपना ये लंड डालना चाहेंगे?

आरके ने मेरी तरफ देखा, मैंने कहा- तेरी और मिनी की इच्छा होनी चाहिए, मुझे कोई दिक्कत नहीं है। चूत क्या है, सिर्फ एक छेद है उसमें कोई और लंड चला जायेगा तो वो बर्बाद थोड़े ही हो जाएगी? 4 दिन की ज़िन्दगी है, हंस खेल कर गुज़ार लें।

मैंने मिनी से कहा- तुम दोनों को खेलते देख मेरा फिर से खड़ा हो गया है।

मिनी तब तक फिसल कर आरके की टांगों की बीच अपना मुंह ला चुकी थी, वो उसके टट्टों को चाट चाट के लाल कर चुकी थी।

उसने वहीं से अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को भी हिलाने लगी।

मैंने कहा- मिनी, दो लंड लोगी? आरके तुम्हारी चूत मार देगा, मैं तुम्हारी गांड मार देता हूँ।

मिनी बोली- मैं तैयार हूँ, पर पहले आप दोनों मुझे मेरे पूरे बदन को चूमो और चाटो।

मिनी धीरे धीरे बहुत खुल गई थी।

आरके उठ गया, मिनी लेट गई।

अब आरके मिनी की टांगों के बीच अपना मुंह ले गया और एक हाथ से एक बूबे को रगड़ने लगा।

मैंने उसके दूसरे बूबे को मुंह में लिया और चूसने लगा और एक ऊँगली से मिनी के चूत के दाने को रगड़ने लगा।

मिनी बोली- कितना अच्छा लग रहा है, आप दोनों कितने अच्छे हो, कितने प्यार से मेरे साथ खेल रहे हो।

मिनी ने एक हाथ मेरे सर पे और दूसरा आरके के सर पे रख हुआ था, वो धीरे धीरे पर कड़क हाथों से हमारे सर को सहला रही थी।

मिनी फिर बोली- भइया, आप बहुत अच्छे से चाट रहे हो। क्या मैं आपके मुंह में अपना पानी निकाल सकती हूँ?

आरके बोला- भाभी मैं तो कब से आपका पानी पीने के लिए मरा जा रहा हूँ। आप एन्जॉय करो और निकाल दो पूरा पानी मेरे मुंह में। विश्वास मानो मुझे बहुत अच्छा लगेगा।

मिनी बोली- सुनो, क्या आप भी मेरे नीचे जा सकते हो? मेरे दूसरे छेद को प्लीज चाट दो। जब हम चुदाई कर रहे थे और भैया चाट रहे थे तो बहुत अच्छा लग रहा था।

मैंने कहा- ओके डार्लिंग, तुम्हारे लिए में कुछ भी कर सकता हूँ।

अब मिनी डॉगी स्टाइल में बिस्तर पर उलटी लेट गई आरके उसकी चूत के नीचे आ गया और मैंने अपना लंड आरके के लंड पे रख दिया और मिनी की गांड पे अपना मुंह रख दिया। चाटने की आवाज़ और मिनी की सिसकारियों से कमरे में माहौल और भी ज्यादा सेक्सी हो गया था। मिनी की कमर से झटके महसूस होने लगे जैसे वो अपने पानी को बाहर की और ठेल रही हो। मिनी ने 2-3 मिनट में ही पूरा बिस्तर और आरके का मुंह पूरी तरह गीला कर दिया।

इतना वो नॉर्मली कभी पानी नहीं निकालती आज तो बहुत पानी निकला उसका।

मिनी बुदबुदाती हुई बोली आप दोनों अपने अपने लंड को मेरे अंदर डाल दो जल्दी। आरके अपनी ही जगह पर ऊपर सरक गया, अब उसका तनतनाता हुआ लंड मिनी की चूत के बिल्कुल सामने था और मैंने उठ कर मिनी की गांड पर अपना लौड़ा तैनात कर दिया।

मैंने और आरके ने मिनी को सैंडविच बना लिया था।

मैंने कहा- आरके, एक साथ लंड डालेंगे, जब मैं 3 बोलूँ तो तू भी डालना, मैं भी डालूंगा… मेरी प्यारी जानेमन मिनी को पता न चले कि दर्द हो कहाँ हो रहा है।

आरके बोला- ओके!

मैंने कहा- 1 – 2 – 3

तीन बोलते ही दोनों ने एक साथ उसके अलग अलग छेदों में लंड डाल दिए।

मैं मिनी की गांड कम ही मारता हूँ इसलिए वो अभी भी कड़क है।

मिनी के मुंह के सामने आरके था, मिनी बोली- भइया, जी भर के चोदो अपनी भाभी को। आपका लंड अंदर जाकर और भी अच्छा लग रहा है।

आरके मिनी को किस करने के लिए अपना मुंह आगे लेकर आया तो मिनी पीछे हट गई।

आरके बोला- भाभी, आपने सब कुछ किया पर लिप टू लिप किस में आप पीछे हट गई, ऐसा क्यूँ?

मिनी बोली- आपके पूरे मुंह में मेरा पानी है, मैं आप दोनों की मलाई तो खा जाती हूँ पर अपने खुद के पानी का टेस्ट मुझे ठीक नहीं लगता। सॉरी। आप अभी चुदाई कर दो मेरी, फिर मुंह धोकर मैं आपको किस भी कर दूंगी।

आरके हंसते हुए बोला- ठीक है भाभी डार्लिंग!

फिर 2-3 धक्कों के बाद ही आरके बड़बड़ाने लगा- ले माँ की लौड़ी ले, अपनी चूत में ले मेरा लौड़ा… मादरचोद! रंगीला तेरी बीवी तो माल है, साली कुतिया, क्या मस्त उछल उछल के लेती है। रंडी मेरी रंडी, चोद चोद के तेरी चूत मेरी मलाई से भर दूंगा बहन की लौड़ी।

मिनी आरके के बालों को पुचकारते हुए बोली- भइया, आप बहुत अच्छी चुदाई करते हैं। आपका कड़क लंड ऐसा लग रहा है जैसे लोहे की रॉड अंदर डाल दी हो। आप तो… आह ओह्ह्ह आह… भर दो ओह्ह्ह आह आह मेरी चूत को!

इधर मैं भी स्पीड बढ़ा चुका था।

मिनी बोली- रंगीला, आज प्लीज आह ओह्ह्ह… मेरे ऊपर कोई रहम मत करो, मेरी गांड फाड़ डालो। आपका लंड गांड में आह ओह्ह्ह आह आह ओह्ह्ह आह… चोद डालो।

आरके बोला- मैं आ रहा हूँ। भाभी आपकी चूत में ही डाल दू या मुंह में लोगी?

मैं बोला- भर दे इसकी चूत को, साली ज़िन्दगी भर याद रखेगी तुझे।

मिनी और आरके दोनों कराहते हुए एक दूसरे में समां गए।

मैं अभी भी मिनी की गांड तेज़ तेज़ मार रहा था, मिनी बोली- रंगीला, प्लीज निकाल लो, मुझे दर्द हो रहा है।

मैंने कहा- अभी तो तू बोल रही थी कि मुझ पर कोई रहम मत करना? अब ले!

आरके हंसने लगा।

मैं हांफते हांफते बोला- एक शर्त पे छोड़ सकता हूँ, अगर तुम दोनों साथ में मेरा लंड चूसोगे?

मिनी बोली- हाँ बाबा हाँ, प्लीज छोड़ दो मुझे, मेरी गांड फट गई है।

मैं बिस्तर पर सीधा लेट गया, मिनी बोली- भैया, आप मुंह धोकर आ जाओ।

आरके बिना कुछ बोले मुंह धोने चला गया, मिनी ने मेरा लंड पहले कपड़े से अच्छे से साफ़ किया फिर मेरे लंड पे जीभ फेरने लगी।

इतनी देर में आरके भी मुंह धोकर आ गया और वो भी जीभ से मेरे लंड को सहलाने लगा।

दोनों की जीभ बीच में टकरा रही थी।

अब दोनों ने मेरे लंड को बीच में रखकर एक दूसरे को लिप तो लिप किस करना शुरू किया।

मेरे लंड के टोपे पर दोनों के ऊपर के होंठ थे और जीभ जब एक दूसरे के मुंह में डालने की कोशिश करते वो मेरे लंड से होकर ही गुज़रती।

मैं तो पहले ही बहुत उत्तेजित था कि मैंने उन दोनों के मुंह में अपनी मलाई उड़ेलना शुरू कर दिया, 3-4 पिचकारी निकली, दोनों के किस में कोई फर्क नहीं पड़ा, वैसे ही स्लो मोशन में वो एक दूसरे को किस करते रहे और मेरी मलाई मिनी अपने मुंह से उसके मुंह में रखती आरके अपने मुंह से मिनी के मुंह में।

आरके और मिनी एक एक हाथ मेरे अंडकोष पर और मिनी को दूसरा हाथ आरके के अंडकोष पर और आरके का एक हाथ मिनी के बूब्स पर था।

मुझे अब बहुत तेज़ नींद आ रही थी।

यही आखरी बात याद है मुझे उस रात की!

मैं कब नींद की ख़ामोशी में सो गया, मुझे याद नहीं।

जब सुबह नींद खुली तो मैं बिस्तर पर अकेला ही था, पूरी चादर कल रात की हुई घमासान चुदाई की दास्ताँ बयां कर रही थी।

नींद खुलते ही मेरी आँखों के सामने से रात की पूरी कहानी एक पल में रिवाइंड हो गई, मैंने सोचा सबसे पहले तो देखा जाये कि कौन कहाँ है।

उठकर किचन की तरफ कूच किया तो देखा कि मिनी नाश्ता बनाने में लगी है, आरके बाहर के कमरे में जांघिए में ही बिल्कुल धराशाई होकर सो रहा है।

मैंने पीछे से जाकर मिनी को पकड़ लिया, उसने अभी भी अंदर कुछ नहीं पहना था।

मिनी बोली- गुड मॉर्निंग जान, आप कब उठे?

मैंने कहा- अभी उठा हूँ।

वो बोली- आप जाकर बैडरूम मैं बैठो, मैं चाय लेकर आ रही हूँ।

 
मैं आकर बैडरूम में बैठ गया, मिनी चाय लेकर आई, मैंने अपने ऊपर चादर डाल ली थी क्योंकि रात की बातें सोच सोच कर लंड में फिर से अकड़ आनी शुरू हो गई थी।

मैंने कहा- मुझे तो पता ही नहीं चला, मेरी कब नींद लग गई? तुम दोनों कब सोये?

मिनी मुस्कुरा कर बोली- आप भी न बहुत शैतान हो! हम लोग भी तुरंत ही सो गए थे और सुबह तक यहाँ पर सारे लोग बिना कपड़ों के ही एक दूसरे से चिपक कर सो रहे थे। वो तो जब सुबह मेरी नींद खुली तब मैं वाशरूम गई और लौट कर आई तो भइया बाहर जाकर सो गए थे।

मैंने अपना सर पकड़ लिया, मैंने कहा- यार यह तो गलत हो गया। दारु का असर ज्यादा से ज्यादा 2 घंटे रहा होगा पर सुबह तक तो निश्चित रूप से नहीं रहा होगा। अब उस कमीने को यह बात याद रहेगी कि कल रात क्या हुआ था।

मिनी थोड़ी टेंशन में आ गई, बोली- अब क्या करें?

मैंने कहा- करेंगे क्या, देखते हैं, उसे कुछ याद है या नहीं। वैसे यह बताओ कि कल मज़ा आया या नहीं?

मिनी बोली- आप तो मेरे हीरो हो, मुझे बहुत मज़ा आया। और सबसे ज्यादा आपको उत्तेजित देखकर बार बार में उत्तेजित हो रही थी। मैं तो अभी तक आपको अपने अंदर महसूस कर रही हूँ। हम लोग नॉर्मली इतनी देर कहाँ सेक्स करते हैं, कभी कभार जब आप ड्रिंक करके वीकेंड्स में प्यार करते हो तो भले ही हम 2 घंटे कर लें, पर नॉर्मली तो वही 20-25 मिनट करके सो जाते हैं। कल रात हम लोगों ने 6 घंटे तक लगातार सेक्स किया है। मुझे तो बहुत मज़ा आया।

तो मैंने कहा- तो फिर अगर उसे याद भी रह जाता है तो कोई बहुत परेशानी की बात नहीं है। देखता हूँ जगा के… क्या हाल हैं भाई के! और मैं हंस दिया, मैंने कहा- तुम जल्दी से खाना बना लो, मुझे ऑफिस जाना है।

मिनी बोली- मुझे पता था कि आप ऑफिस जाओगे, इसलिए खाना तो रेडी सा ही है, आप तैयार हो जाओ, मैं खाना पैक कर देती हूँ।

मैं चाय पीकर आरके को जगाने पंहुचा। आरके जो थोड़ा सा पहले ही जगा सा ही था, मेरी आवाज़ सुन कर बोला- रंगीला यार, एक सिगरेट तो पिला दे।

मैंने कहा- लोड़ू उठ तो जा… पहले सिगरेट चाहिए।

तो आरके बोला- पिला न यार?

मैंने कहा- चल छत पे सिगरेट पिएंगे।

वो बोला- मिनी भाभी, गुड मॉर्निंग!

मिनी तब तक चाय लेकर आ गई, मैंने कहा- मुझे भी एक और कप दे दो, हम छत पे सिगरेट पी के आते हैं।

मिनी ने कहा- गुड मॉर्निंग भइया।

दोनों की गुड मॉर्निग में बहुत गर्माहट थी।

मैं और आरके छत पे गए, सिगरेट जलाई, फिर मैंने कहा- क्यू बे भोसड़ी के… कैसी रही रात?

वो बोला- मान गए यार रंगीला… तू तो चैंपियन है। क्या कहानी बनाई तूने कि मैं 2 पैग के बाद सब भूल जाता हूँ! और वो बात ‘वो ज़िंदा है, सब देख रहा है, सब कुछ कर सकता है पर सुबह सब भूल जायेगा… कोई सोया या मरा हुआ आदमी थोड़े ही है!’

मैं बस मुस्कुरा दिया- तो अब ये बता कि तुझे सब याद है या भूल गया?

आरके बोला- तू जैसा बोल? वैसे तो भूलने में भी भलाई है, नहीं तो भाभी को लगेगा कि उनके साथ धोखा किया गया है।

मैंने कहा- तू उसकी चिंता छोड़, उसका भी सब जुगाड़ है मेरे पास, बस इतना बता कि तुझे याद रखना है या भूलना है?

आरके लगभग गिड़गिड़ाता हुआ बोला- अगर याद रख सकूँ तो अच्छा रहेगा, दिन भर भाभी को छेड़ता रहूँगा।

मैंने कहा- चल तू चिंता मत कर, मैं बता दूंगा कि तुझे याद है रात की सारे बातें। बस तू उस बारे में मिनी से कोई बात मत करना। आरके बोला- ओके!

मैंने कहा- मुझे तो ऑफिस जाना है, मैं तैयार होता हूँ, चल तू चाय पीकर और सिगरेट खत्म करके आ जाना।

मैं नीचे जाकर मिनी को बोला- उसे रात की सारी बातें याद हैं।

मिनी बोली- ठीक है, कोई नहीं, मैं हैंडल कर लूँगी।

मैं नहा कर आया, तैयार हुआ और ऑफिस चला गया।

 


इससे आगे की कहानी मेरी बीबी बताएगी

जय; मिनी जी जल्दी बताइए आपकी कहानी बहुत मज़ेदार है

मिनी-ठीक है जय अब मेरी कहानी सुनो ...................

जब ये ऑफिस जा रहे थे तो मैं बालकनी से इन्हें बाय कर रही थी, भैया भी मेरे पीछे आकर खड़े हो गए, वो भी रंगीला को बाय का इशारा कर रहे थे और एक हाथ से बाय करते हुए दूसरे हाथ से उन्होंने मेरा कूल्हा दबा दिया।

मैंने पीछे मुड़ कर घूर कर उन्हें देखा जैसे मुझे अच्छा न लगा हो।

मैं अंदर आ गई, मैंने उनसे उस बारे में कुछ नहीं कहा, शायद वो भी डर से गए थे मेरे आँखों की ज्वाला से।

मैंने थोड़ा गुस्से में बोला- आप नहाकर आएंगे या मैं खाना लगा दूँ?

आरके भैया बोले- भाभी, आप गुस्सा हो क्या मुझसे? सॉरी प्लीज पर आप मुझसे ऐसे बात मत करो। मैंने अगर गलती की है तो आप मेरी पिटाई कर दो, पर ऐसे मत करो मेरे साथ।

मैंने कहा- आपने जो बाहर मेरे साथ किया वो, क्या वो सही था? यहाँ लोगों की आँखें हमेशा दूसरों के घर में ही झाँक रही होती हैं। आपका ऐसा व्यवहार मुझे पसंद नहीं आया।

आरके भैया थोड़े से चिंतित होते हुए, बोले- सॉरी भाभी, आगे से गलती हो तो उल्टा लटका के मारना पर अभी तो मुझे माफ़ कर दो। यह मेरी पहली और आखरी गलती थी।

मुझे अच्छा लगा कि उन्होंने अपनी गलती भी मानी और सॉरी भी बोला तो मैंने मुस्कुरा कर बोला- अब आप नाश्ता नहा कर करेंगे या अभी लेकर आ जाऊँ?

भैया बोले- मैं ज़रा फ्रेश हो आऊँ, फिर नाश्ता करता हूँ।

जब भैया बाथरूम में गए तो मेरे पास कोई काम नहीं था, कल रात की सारी बातें और हरकतें मेरी आँखों के सामने चल रही थी।

बस फिर क्या था, मैं बेधड़क बैडरूम से होती हुई बाथरूम में घुसने लगी।

हमारे बाथरूम में कुण्डी तो है पर वो लगाओ न लगाओ एक बराबर है, कुण्डी लगाने से दरवाज़ा अपने आप नहीं खुलता पर अगर को बाहर से धक्का मारे तो खुल जाता है।

मैंने देखा कि भैया कमोड पर बैठ कर मोबाइल पर कुछ करते हुए अपने लंड को भी सहला रहे थे, एकदम से मुझे बाथरूम में देखकर थोड़े शॉक हो गए और बोले- भाभी, मैंने कुन कुण्डी लगाई थी, सॉरी!मैंने कहा- सॉरी भैया, आप जो कर रहे हो, कर लो, मैं बस अपनी ब्रा पैंटी लेने आई थी, लेकर जा रही हूँ।

मैंने अपने अंडरगार्मेंट्स उठाये और बाहर आ गई, आकर मैंने अपने पति रंगीला को मैसेज किया- डार्लिंग, तुम वापस आ जाओ, मुझे चुदना है।

‘हा हा… हा… हा… हा…’ पति का मैसेज आया- मैं तुझे रात को चोद दूँगा, अभी तेरे पास एक लंड है, उससे काम चला ले।

मैंने जवाब में लिखा- थैंक यू, बस यही पूछना था।

जैसे ही आरके भैया बाहर आये, मैंने कहा- भैया सॉरी, वो अकेले रहने की ऐसी आदत है कि याद ही नहीं रहा कि आप वहाँ हो सकते हो।भैया बोले- कोई नहीं भाभी, अब जो हो गया सो हो गया। आप नाश्ता दे दो, बहुत भूख लगी है।

मैं बोली- ओके भैया, अभी लेकर आती हूँ।

भैया ने तब तक टीवी पर अच्छे से गाने लगा दिए। उन्होंने नाश्ता किया, मैं बर्तन वगैरह लेकर किचन में चली गई और बर्तन साफ़ करने लगी।

भैया भी किचन में आ गये, बोले- भाभी पानी!

मैंने कहा- भैया, हाथ गंदे हैं, मैं अभी देती हूँ।

भैया बोले- नहीं, मैं ले लूंगा।

पानी पीकर बोले- मैं यहीं बैठ जाऊँ आपके पास? बातें करते हैं।

मैं तो चाहती ही यही थी, मैंने कहा- हाँ भैया।

वो प्लेटफार्म पर बैठ गए और सुबह के तेवर देखकर उनकी कुछ करने की हिम्मत नहीं पड़ रही थी इसलिए इधर उधर की बातें कर रहे थे।

मैंने सोचा मुझे ही कुछ करना पड़ेगा, पर तुरंत ही मन पलट गया, मैंने सोचा मैं नहीं करूँगी, इन्ही से करवाऊँगी ,तभी तो ज्यादा मज़ा आएगा।

जब आदमी पहल करता है तो बहुत अच्छे से चुदाई करता है।

मैं सोच ही रही थी, तब तक भैया बोले- भाभी, आप बहुत अच्छी हो।

मैंने कहा- कैसे भैया?

तो भैया बोले- आप इतना स्वादिष्ट खाना बनाती हो, रंगीला की कितना ध्यान रखती हो। हर मर्द अपने सपने में आप जैसी ही बीवी मांगता होगा।मैंने कहा- थैंक यू भैया।

फिर मैंने सोचा कि आदमी साला तारीफ़ सिर्फ इसलिए करता है जिससे उसे चूत मिल सके। अब मुझे भी एक कदम आगे बढ़ाना चाहिए। कल रात की घमासान चुदाई के बावजूद कितनी हिचक है अभी भी।

मैंने कहा- भैया, पैरों में बड़ा दर्द हो रहा है पर अगर बैठ गई तो काम कैसे होगा।

आरके भैया बोले- भाभी, आप बताओ, मैं कर देता हूँ।

मैंने कहा- नहीं भैया, ऐसा थोड़े ही होता है… लेकिन थैंक्स, आपने इतना सोचा।

आरके भैया फिर बोले- भाभी बताओ न, आपकी किस तरह मदद कर सकता हूँ। जो भी आपके किसी काम आ जाऊँ तो लगेगा कि जीवन सफल हो गया।

सेंटी डायलाग सुन कर मुझे हंसी आ गई, मैंने कहा- भैया आप मेरी कुर्सी बन जाओगे, मैं काम भी कर लूँगी और बैठ भी जाऊँगी।

भैया बोले- शौक से!

भैया घोड़ी बन गए, मैंने अपने फ्रॉक को थोड़ा उठाया और उनकी नंगी पीठ पर अपने नंगे चूतड़ रख दिए।

भैया की आँखें बंद होते हुए देखी थी मैंने, मुझे महसूस हो गया था कि इनकी टांगों के बीच का राकेट अब गुलाटियां खाने ही वाला होगा।

मैंने कहा- भैया, बैठक बहुत नीची हो गई है, मेरा हाथ सिंक तक नहीं जा रहा, रहने दीजिये, ऐसे काम नहीं हो पाएगा।

तो भैया बोले- रुकिए, मैं सीधा बैठ जाता हूँ आप मेरे कंधे पर बैठ जाइये।

मुझे आईडिया पसंद आ गया, मैंने कहा- ठीक है!

मैं उठी और भैया सीधे बैठ गए। पर वो मेरे से उलटी दिशा में मुंह किये हुए थे।

मैंने सोचा ‘यह भी ठीक ही है, सीधे मेरी चूत इनके मुंह के पास ही पहुंचेगी।

मैंने अपनी टांग उठाई और जान करके अपनी चूत के आगे फ्रॉक कर दी थोड़ा नाटक तो ज़रूरी था न।

अब मैं आराम से उनके कंधे पर बैठी हुई थी और वो मेरी टांगों को घुटने से नीचे सहला रहे थे।

मैंने पैंटी तो पहनी ही नहीं थी इसलिए उनकी गर्म साँसें तो मेरी चूत तक जा रही थी।

उन्होंने अपने हाथ को धीरे धीरे मेरी जांघों तक लेकर आना शुरू किया और अपने मुंह के पास से फ्रॉक को हटाने की कोशिश करने लगे। धीरे धीरे अपने हाथों और होंठों से वो कामयाब हुए और मेरी फ्रॉक के अंदर घुस गए और मेरी चूत सामने आते ही जीभ गहराई तक डाल दी।

मैंने घायल शेर को खून तो लगा ही दिया था इसलिए मैं उनके ऊपर से उठ गई और बोली- थैंक यू भैया, हो गया मेरा काम खत्म, सारे बर्तन धुल गए।

जैसे मुझे उनकी जीभ अपनी चूत पर महसूस ही नहीं हुई हो।

भैया थोड़े परेशान से होकर बोले- अरे भाभी थैंक्स कैसा? मुझे तो अच्छा लगा कि मैं आपके किसी काम तो आया। मैं ज़रा नहा कर आता हूँ।

वो अपने कपड़े टॉवल लेकर बाथरूम में चले गए लेकिन इस बार उन्होंने दरवाज़ा लगाया ही नहीं।

मैं बैडरूम में आई तो देखा कि वो नंगे नहा रहे हैं।

मैंने कहा- भैया, डोर तो बंद कर लेते?

तो भैया बोले- भाभी, क्या फायदा… वो वैसे भी खुल ही जाता है।

मैंने कहा- ठीक है।

उनका लंड अभी आधा खड़ा हुआ था और वो जान बूझ कर मेरी तरफ मुंह करके ही नहा रहे थे जिससे मैं उन्हें देखूँ।

उनका गीला नंगा बदन देखकर मेरी चुदने की तमन्ना और भी ज्यादा बढ़ गई, मैं बेधड़क बाथरूम में गई और बाथरूम में रंगीला के कपड़े उठाने लगी।

अब आरके भैया की हिम्मत और बढ़ गई, उन्होंने कहा- क्या आप मेरी पीठ पर साबुन लगा देंगी?

मैंने थोड़ा नाटक करते हुए कहा- अगर आप जांघिया पहन कर नहाते तो ज़रूर लगा देती।

तो भैया के सब्र का बांध टूट गया, बोले- अब रात को मैंने आपका क्या और आपने मेरा कौन सा अंग नहीं देखा। अब काहे की शर्म… मैं तो आपसे कहने वाला था कि क्या आप मेरे लौड़े को साबुन लगा देंगी?

और हंस दिए।

उनकी बेबाकी मुझे बुरी नहीं लगी, मैंने कहा- पीठ की जगह वही बोला होता तो मैं थोड़े ही न मना करती।

और मैं भी हंस दी।

मैंने हाथ में साबुन लेकर उनकी पीठ पर मलना शुरू कर दिया।

भैया बोले- थोड़ा सा लंड पे भी लगा दो।

मैंने उनके लंड को नाजुकता के साथ पकड़ कर उनकी गांड, लंड और टांगों के बीच पूरी जगह अच्छे से साबुन लगा दिया।

वो बोले- अरे आप भी कपड़े पहन कर साबुन लगा रही हैं, आइये आपको अभी अच्छे से नहला दूँ।

इस पर मैंने कहा- मैं सुबह एक बार नहा चुकी हूँ।

खैर साबुन लगा कर पानी से अच्छे से धोकर मतलब पूरी तरह गर्म करके मैं उन्हें उसी हालत में छोड़ आई। वो बाथरूम से अच्छे से पौंछ कर बिना कपड़ों के ही बाहर आ गये।

मैंने कहा- भैया, आप नंगे ही बाहर आ गये?

तो वो बोले- हाँ मिनी भाभी, अब आपसे शर्म नहीं आ रही।

वो बाथरूम से अच्छे से पौंछ कर बिना कपड़ों के ही बाहर आ गये।

मैंने कहा- भैया, आप नंगे ही बाहर आ गये?

तो वो बोले- हाँ मिनी भाभी, अब आपसे शर्म नहीं आ रही।

मैंने कहा- आप नाश्ता तो कर लो।

वो बोले- हाँ, भाभी ज़रूर… ले आइये।

 


वो बाहर ड्राइंग रूम में कालीन पर जाकर बैठ गए, परदे लगा दिए, AC ऑन कर दिया, टीवी पर ब्लू फिल्म लगा दी और आवाज़ न के बराबर ही रखी।

मैं जब खाना लेकर पहुँची तो मैंने जान बूझ कर उनके लंड को छूते हुए ही खाना रखा, वो आराम से मूवी देखते हुए खाते रहे और मुझसे बातें भी करते रहे, बोले- देखो भाभी, क्या मस्त पोजीशन है ना?

वो बिल्कुल ऐसे बात कर रहे थे जैसे कि कुछ गलत नहीं हो।

मैं भी अपने सामने एक पराये मर्द को नंगा खाना खाते देख और सामने ब्लू फिल्म के चलते अपने हाथ को चूत पर ले गई और रगड़ने लगी।

अब तो भैया और भी दबंग होते जा रहे थे, बोले- चूत बाद में रगड़ना पहले पानी ले के आ जा।

मैं उठी, पानी लाकर दिया, बैडरूम में गई और पूरी नंगी हो गई।

मैंने वहीं से आवाज़ लगा कर बोला- भैया, आप बर्तन उठा के सिंक में रख देना।

भैया बोले- ओके!

जब मुझे बर्तन रखने की आवाज़ आई, उसके 2 मिनट के बाद मैं उठी और जाकर ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठ गई।

मैं बोली- भैया, कुछ डेजर्ट?

भैया तो समझदार थे ही, बोले- हाँ भाभी, डेजर्ट की बहुत ज़रूरत है।

और आकर सीधा मेरी चूत पर अपना मुंह टिका दिया।

5-7 मिनट चाटने के बाद बोले- आपकी चूत का टेस्ट तो वाकई लाजवाब है। मेरा बस चले तो में दिन भर बस इसे ही चाटता रहूँ।

मैंने कहा- भैया, आप बहुत अच्छी चूत की चटाई करते हैं। मेरा भी मन करता है कि आपकी जीभ दिन भर मेरी चूत को अंदर तक सहलाती रहे।

भैया बोले- आपका तो हर अंग इतना खूबसूरत है कि अगर ज़िन्दगी भर बैठ कर तारीफ़ की जाए तो भी कम है। आपकी गर्दन एक सुराही की तरह चमकदार और लम्बी है, आपके बूब्स परफेक्ट साइज और शेप में हैं, आपकी कमर माशाल्लाह कयामत है, आपकी चिकनी चूत और उसका पानी ऐसा लगता है जैसे सोने के प्याले में अमृत परस दिया हो।

और फिर बोलते बोलते वो मेरे बूब्स चूसने लगे, मैं भी मज़े लेने के लिए आँखें बंद करके पराये मर्द से चुदने की अनुभूति का मजा लेने लगी और उनकी पीठ सहलाने लगी।

अब उनका हथियार मेरी जांघों में चुभ रहा था, मुझे उसे अपनी चूत में लेने की ललक बढ़ रही थी, मैंने कहा- भैया, लाइए आपके हथियार की सेवा कर दूँ, लाइए उसकी थोड़ी मलाई निकाल दूँ।

भैया बोले- हाँ भाभी, वो आपके मुंह में जाने को बेताब है। मैं आपकी चूत चाटता हूँ, आप मेरे लंड को चूस डालिए, चलिए 69 में दोनों अपने अपने गुप्तांगों को परम सुख दें, हथियारों को थोड़ी धार देते हैं।

फिर हम काफी देर तक एक दूसरे को चूसते और चाटते रहे, वो कभी मेरी गांड चाटते, कभी मेरी चूत और कभी अपनी उंगली मेरी गांड में डाल देते, कभी मेरी चूत में।

मैं भी कभी उनके गोलियों को मुंह में ले लेती कभी उनके लंड को तो कभी उनकी गांड में उंगली फेर देती थी।

हम दोनों जब अपने चरम पर थे तो मैंने कहा- भैया, आपके लंड का पानी आप मेरी चूत में डाल दीजिये।

भैया क्या बोलते, उनके मन में यही चल रहा था कि कब इस चूत में लंड डालें, अब वो मेरे ऊपर चढ़ गए और मेरी चूत पर अपना लंड रख दिया।

चाटने और चुसाई के कारण लंड और चूत बहुत गीले थे और थोड़ा थोड़ा रस हम दोनों छोड़ चुके थे इसलिए चूत पर लंड टिकाते ही वो सुरंग में अंदर तक फिसल गया।

भैया बोले- भाभी, कल रात भी बड़ा मन था आप में उतरने का। पर कल रात तो कयामत ही थी वो कभी भी नहीं भूल सकता मैं। आप दोनों बहुत ही मस्त और दिलदार हो, इतने खुले विचार होने के बावजूद आपकी भाषा कितनी सरल और अच्छी है। क्यूँ भाभी, आप कभी चुदाई के टाइम गाली गलौच नहीं करती?

मैंने कहा- मैं सेक्स का सहारा लेकर गाली नहीं देती, मुझे देना होता है तो मैं वैसे ही दे लेती हूँ पर मुझे गाली गलौच पसंद नहीं है। वो तो रंगीला को चुदाई के टाइम गाली देना अच्छा लगता है इसलिए सुन लेती हूँ। आप भी जब अपना पानी छोड़ने वाले होते हो तो गन्दी गन्दी और भद्दी गालियां देते हो। कल रात को आपने मुझे पता नहीं क्या क्या बोला।

भैया बोले- सॉरी भाभी, शायद मैं और रंगीला एक से ही हैं, हम दोनों को पानी निकालते समय पता नहीं क्या हो जाता है, कितना भी कंट्रोल करें गाली निकल ही जाती है।

मैंने कहा- भैया, आप कंट्रोल मत करो, जैसे अच्छा लगता है वैसे आप चुदाई करो, मैं गाली देना पसंद नहीं करती पर सुनने में मुझे कोई कष्ट नहीं है। जब चूत में लंड होता है तो वैसे भी गालियाँ मीठी ही लगती हैं। आप कंट्रोल में सेक्स करोगे तो आप एन्जॉय नहीं कर पाओगे। मैं चाहती हूँ कि आप एन्जॉय करो।

आरके भाई बोले- नहीं भाभी, आपकी ये अच्छी अच्छी बातें सुन कर सेक्स करने में और भी मज़ा आता है। इसलिए ऐसे ही करेंगे, मैं एन्जॉय कर रहा हूँ, आप भी मेरे लंड को अपनी चूत में एन्जॉय करो।

मैंने कहा- हाँ, बस रंगीला ने बहुत बार बोल बोल कर मुझे लंड और चूत बोलना सीखा दिया है तो अब वो तो जुबान पर चढ़ गया है। आप ऐसे ही धीरे धीरे धक्के मारते रहो, स्पीड मत बढ़ाओ।

ये सब बातें करते हुए हमने धक्के मारने बंद कभी भी नहीं किये थे।

आरके भैया बोले- भाभी, मैं झड़ने वाला हूँ, मुझे स्पीड बढ़ानी है।

मैंने कहा- तो फाड़ दो मेरी चूत!

अब भैया की स्पीड 200% बढ़ गई, उनके माथे पर पसीने की बड़ी बड़ी बूंदें थी, मैं उन्हें पौंछ रही थी और बोली- भैया आँखें बंद करके नहीं, खोल कर मेरे जिस्म को देखकर चोदिये।

भैया ने मेरे चूचे ज़ोर से दबाए और बोले- हाँ भाभी, तेरा जिस्म तो क़यामत है। कितनी अच्छी और प्यारी चुदक्कड़ है तू भाभी। लंड लेने में माहिर है तू मेरी जान। मैं तेरी चूत को अपनी मलाई से भर दूंगा माँ की लौड़ी।

अब उनकी स्पीड के साथ मैंने भी अपनी कमर को झटके देना शुरू किये जिससे मैं भी उनके साथ परम आनन्द तक आ सकूँ, पर भैया बहुत उत्तेजित थे तो वो मेरे अंदर बहुत देर तक और बहुत ज्यादा मात्रा में झड़ गए।

मैं भी अपने चरम पर थी, मैं उनके झड़ने के बाद तक हिलती रही कि उनका लौड़ा मेरी आग बुझा दे…

पर भइया पूरी तरह लस्त होकर मेरे बदन पर गिर गए।

अभी मेरी तो इच्छा पूरी हुई नहीं थी इसलिए मैं उन्हें सहला कर चाहती थी कि वो मेरे अंदर 4-5 जोर के धक्के और मार दें, पर वो नहीं उठे।

मुझे थोड़ा बुरा लगा, मैंने उन्हें अपने ऊपर से उठाया वो बगल में चारों खाने चित्त वाले स्टाइल में पड़ गए।

मैंने पूरा चाट के उन्हें साफ़ किया, चाटने के साथ साथ मैं उनके लंड को पूरा मुंह में लेकर चूस रही थी जिससे वो दुबारा खड़ा हो जाये। भैया थोड़े होश में आने पर बोले- भाभी आप सीधी लेट जाओ।

मैं अपनी चूत की आग में झुलस रही थी और अभी कुछ भी करने को तैयार थी लेकिन वो तो बस लेटने को बोल रहे थे।

वो मेरी टांगों के बीच जाकर मेरी चूत जो उनकी खुद की मलाई से भरी थी, उसको चाटने लगे।

मुझे पहले तो थोड़ी घिन सी आई पर फिर मज़ा आने लगा।

अब चूत का पानी छूटने ही वाला था, मैंने कहा- भैया उंगली डाल दीजिये अंदर, मेरा पानी छूटने वाला है।

भैया बोले- आप सिर्फ एन्जॉय करना।

उन्होंने एक उंगली दाने पर घुमानी शुरू कर दी, दो उंगलियाँ मेरी चूत के अंदर डाल दी और अंगूठे का सिरा मेरी गांड के छेद पर रख दिया और चूत के निचले हिस्से पर अपनी जीभ से चाटने लगे।

 


मैंने महसूस किया कि मेरी टांगें अपने आप थोड़ी ज्यादा खुल गई हैं और मुझे बहुत मज़ा आ रहा है। मैंने अपने पेट से लेकर चूत तक एक बहुत बड़ा लोड बाहर की ओर आता महसूस किया, ऐसा लगा जैसे बाढ़ आने वाली है।

मैं अपनी चूत की मालिश की मस्ती में इतनी मस्त थी कि मैंने भैया को कुछ नहीं बोला। बहुत सारा पानी वो भी प्रेशर से, उतने प्रेशर से तो मूत भी नहीं सकती, उतने प्रेशर से पानी निकलने लगा।

भैया भी एक्सपर्ट थे, उन्होंने न उँगलियाँ हटाई न मुंह बस वैसे ही मेरी चूत की सेवा करते रहे, मैं 2-3 मिनट तक झड़ती रही।

इतने प्रेशर से तो मैं कभी भी नहीं झड़ी थी, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरी जान निकाल दी हो। मेरी इतनी जोर से चीख निकल गई थी कि उसकी इको मुझे अभी भी सुनाई दे रही थी।

मैं इतनी बुरी तरह झड़ी थी कि मैं पूरी सिकुड़ गई और मुझे ठण्ड लगने लगी।

भैया ने अंदर के कमरे से रजाई लाकर उढ़ाई और खुद भी रजाई के अंदर आकर मुझे जकड़ लिया और बोले- भाभी, आप ठीक हैं न?

मैंने कांपते और मस्ती में कहा- हाँ!

भैया ने मेरे चूतड़ों को हाथ में लिया, बोले- भाभी आप अभी भी थोड़ा थोड़ा डिस्चार्ज हो रही हो। आप कहो तो कोई टॉवल आपके नीचे लगा दूँ जिससे रजाई ख़राब न हो।

मैंने सिर्फ गर्दन हाँ में हिला दी।

भैया एक तौलिया लाये, मेरी टांगों के बीच रख दिया जहाँ से रिसता हुआ पानी देख हंसते हुए बोले- भाभी, आपने तो बाल्टी भर पानी फैला दिया।

मैंने मुस्कुरा कर थके हुए थिरकते हुए होंठों से कहा- भैया, आपने तो जान ही निकाल दी थी, बहुत मज़ा आया। जैसे आप कल रात नहीं भूलोगे वैसे ही मैं आज का दिन नहीं भूलूंगी। थैंक यू भैया, थैंक यू!

भैया बोले- क्या भाभी, आप जैसी हसीना ने मेरा लंड चूसा और चूत में लिया, थैंक्स तो मुझे बोलना चाहिए। अब आप थोड़ी देर आराम कर लो जिससे आप रिलैक्स हो जाओगी।

मैंने कहा- भैया, आपकी बाँहों में सोना है मुझे, प्लीज अपनी बाँहों में सुला लो।

मैंने उन्हें अपने आलिंगन में लिया और कब आँख लगी पता नहीं।

मिनी-; इससे आगे की कहानी रंगीला सुनाएँगे

 
कोमल-; अरे ये क्या मिनी आंटी

मिनी-; कोमल यहाँ से आगे रंगीला पूरी डीटेल मे बता पाएँगे इसीलिए

कोमल-; चलिए ठीक है मिस्टर वी शुरू हो जाइए

रंगीला-; तो सुनिए उस दिन ..................

मैंने सोचा ‘आज ऑफिस से थोड़ा जल्दी चलता हूँ’ जिससे आरके और मिनी के साथ ज्यादा टाइम गुज़ार पाऊँ।

मुझे ऑफिस से लौटते लौटते कम से कम 8 तो बज ही जाते हैं पर आज में 4 बजे ही ऑफिस से निकल गया।

मैंने सोचा जल्दी जाकर दोनों को सरप्राइज देता हूँ।

मैं बिल्कुल धीरे से बाहर का दरवाज़ा खोल फिर बिना आहट किये घर का प्रवेश द्वार खोलने लगा।

पर वो बंद था, तो मैंने अपनी चाबी निकाली और ताला खोल कर अंदर आया, दरवाज़ा जैसे ही खुला, दोनों सकपका गए।

अगले ही पल दोनों नार्मल होकर बोले- अच्छा तो तुम हो।

मैंने देखा मेरी बीवी मिनी आरके की बाँहों में नंगी पड़ी थी, आरके के हाथ मेरी बीवी के बोबे सहला रहे थे और मेरी बीवी की टांगें आरके के लंड पे रखी थी।रजाई साइड में पड़ी हुई थी और मिनी की टांगों के बीच एक तौलिया लगा हुआ था।

मैंने कहा- तुम दोनों मस्त रहो, मैं चेंज करके आता हूँ।

मिनी बोली- मैं आपके लिए चाय बनाती हूँ, आप जब तक हाथ मुंह धो कर आओ।

मैंने कहा- तुम दोनों बैठो, मैं चाय लेकर आता हूँ।

आरके बोला- यार, सुबह से भाभी की सेवा कर रहा हूँ, एक सिगरेट तो पिला दे।

मैंने कहा- माँ के लवडे, सिगरेट तेरे पास ही पड़ी है, पी ले और एक मेरे लिए भी जला!

मिनी बोली- रंगीला, पता है आज भैया ने इतना अच्छा अनुभव दिया है कि आप ख़ुशी से इनको चूम लोगे। देखो मेरे नीचे जो पानी से गीलापन दिख रहा है वो सब इन्होंने मेरी चूत में से ही निकाला है।

मेरे कुछ बोलने से पहले आरके बोला- भाभी, आप उसे क्या बता रही हो। यही तो मेरे गुरू हैं, जब भी ज्ञान चाहिए होता है, इन्ही से ज्ञान लेता हूँ। यह हुनर मैंने रंगीला से ही सीखा है।

मिनी की आँखें आश्चर्य से बड़ी हो गई, बोली- अच्छा तो ये बात है? मतलब मेरे पतिदेव सेक्स गुरु है।

मैं बातें करते करते कपड़े उतार रहा था, मैंने कहा- चलो दोनों एक जिस्म दो जान, ज़रा दोनों कुछ पहन लो, शाम होने वाली है तेरी बीवी को लेने भी जाना है।

आरके ने सर पकड़ा और बोला- यार क्यूँ आ गई कवाब में हड्डी! अब मैं अपनी भाभी को कैसे प्यार करूँगा?

मिनी हंसती हुई बोली- छुप छुप के!

मैं भी हंसने लगा, मैंने कहा चल- अभी तेरी बीवी के आने में टाइम है, तू तब तक मिनी को एक बार चोद ले… फिर पता नहीं कब मौका मिले तुझे मेरी बीवी को प्यार करने का!

आरके बोला- मेरा तो बहुत मन है भाभी की चूत मारने का… पर साला अब मेरा लंड खड़ा नहीं होने वाला। इसे पिछले आधे घंटे से भाभी मसल रही है और यह साला कुम्भकरण की तरह सोया पड़ा है।

मिनी हंसने लगी।

मैंने कहा- तो फिर चल तू ही खड़ा हो जा भेनचोद… तेरा तो खड़ा होने से रहा। रात को तेरी बीवी आ जायेगी थोड़ा मलाई उसके लिए भी बचा ले, वो भी तो काफी दिनों से मायके में है।

आरके खड़ा हो गया, बीवी चाय बनाने चली गई, मैं अपने जांघिए में सोफे पे बैठा गया।

आरके ने सिगरेट जला ली और मुझे दी।

मैंने कहा- क्यूँ भाई, मानता है अब तुझे अपनी बीवी को रेडी करना है।

आरके बोला- भाई, मैं पूरी कोशिश करूँगा कि वो हम लोगों के गैंग में शामिल हो जाए… बाकी खुद की मर्जी!

मैंने कहा- कोई चिंता नहीं है, तू बस कोशिश करना बाकी फल की इच्छा तो हम करते ही नहीं हैं।

आरके बोला- यार, मैं तेरा कैसे शुक्रिया अदा करूँ, तूने मेरी ज़िन्दगी में चार चाँद लगा दिए हैं।

मैंने कहा- मुंह में ले ले।

यह हमारे यहाँ का तकिया कलाम है, जब किसी से कहना होता है ‘Mention not’ तो उससे कह देते है मुंह में ले ले।

वो अभी तक नंगा ही खड़ा था, वो घुटनों पर बैठा और मेरा लंड जो आधा जगा हुआ था, चड्डी से बाहर निकाला और मुंह में ले लिया। मैं सिगरेट का कश लेने लगा।

इतने में बीवी अंदर से चाय लेकर आ गई, उसने भी अब तक कोई कपड़ा नहीं पहना था, बोली- आप अपना लंड इनसे क्यूँ चुसवा रहे हो?

मैंने कहा- मैंने सिर्फ इतना कहा था कि ‘मुंह में ले ले’ इसने सही में ले लिया।

और मैं हंसने लगा।

आरके ने अपने मुंह से लंड निकाला और बोला- भाभी, मुझे लंड मुंह में लेना भी उतना ही अच्छा लगता है जितना चूत को। इसलिए इसने कहा तो मैंने ले लिया।

मैंने थोड़ा हिल ढुल कर अपनी चड्डी पूरी उतार दी।

मिनी बोली- फिर तो भैया आप अपनी गांड में लंड भी ले लेते होंगे।

आरके ने फिर से मुंह से लंड निकाला और बोला- नहीं भाभी, इसका अनुभव नहीं है। पर देखूंगा किसी दिन शायद रंगीला मेरी गांड मारने को बोलेगा और मैं मरवाने की कोशिश करूँगा। अभी तो यह नहीं पता कि गांड मरवाने में कितना दर्द होगा।

और फिर से लौड़ा चूसने लगा।

मैंने कहा- तू छोड़ न उसे, मुझे चाय दे।

मैं आराम से चाय पिता रहा आरके लंड चूसता रहा और मिनी चाय पीते पीते उसे मेरा लंड चूसते हुए देखती रही।

मैंने कहा- आरके, तेरी चाय ठंडी हो रही है, चल चाय पी और लेकर आ तेरी बीवी को क्योंकि मेरे लिए तो सरप्राइज है न!

आरके बोला- यार, घंटा सरप्राइज है, मैं उसे फ़ोन कर देता हूँ कि मैं रंगीला के साथ ही तुझे लेने आ रहा हूँ।

उसने फ़ोन उठाया मिनी मेरी गोद में आकर खड़े लौड़े पर बैठ गई, मुझसे बोली- आप मेरी चूत मार लो, फिर चलते हैं। भैया को बोलो वो पूछ लें कि गाड़ी कितनी लेट चल रही है और फिर वो बाहर जाकर थोड़ा घूम आयें, तब तक हम एक बाज़ी निबटा लेंगे।

मैंने जोर से कहा- आरके, पूछ कहाँ तक पहुँची हैं उसकी ट्रेन।

फिर थोड़ा धीरे से बोला- उसको बाहर क्यूँ भेजेंगे? उसके सामने अपने पति से चुदने में शर्म आएगी क्या?

मिनी थोड़ा शर्मा गई और बोली- आप भी न? आपसे तो मैं सड़क पे चुदवा सकती हूँ… उनके सामने काहे की शर्म जब उनके साथ तो कल से नंगी ही पड़ी हूँ।

वो बोला- भाई गाड़ी ऑन टाइम है और पलवल क्रॉस कर गई है, चलो जल्दी से!

मैंने मिनी को बोला- चल कोई नी, तुझे आकर चोदता हूँ।

मिनी बोली- मैं घर में पड़ी पड़ी क्या करुँगी, मुझे भी ले चलो।

मैंने कहा- तो ठीक है, चल तैयार हो जा।

अब हम कार में बैठे, मैंने मिनी को आगे बैठाया और आरके को पीछे, मैंने कहा- मिनी साथ में चुदाई में बहुत आनन्द आता है न?

मिनी बोली- हाँ, बहुत मज़ा आता है। दिन भर कोई न कोई आपके आसपास रहता ही है लंड और चूत के मिलन चाहे जब हो जाता है। और पति के अलावा कोई और जब देख या छू रहा हो तो चुदाई का मज़ा और बढ़ जाता है।

पीछे बैठे आरके ने मिनी की तरफ हाथ बढ़ाये और उसके बूब्स दबा दिए।

मिनी बोली- भैया, ऐसे मत करो, कोई देख लेगा।

आरके बोला- सॉरी भाभी, पर बीवी के आने के बाद आपको पता नहीं कब छू पाऊँगा? उसी टेंशन के मारे सोच रहा हूँ कि वो ना आती तो ही अच्छा होता। हम तीनों कैसे दिन भर एक दूसरे की बाहों में पड़े रहते पर अब कोमल के आने के बाद सबको कपड़े पहनने पड़ेंगे।

 
मेरी और मिनी की बहुत बुरी तरह हंसी छूट गई, मैंने मिनी से कहा- जब हम तीनों को मज़ा आया तो कोमल को भी आएगा मज़ा। आरके तू उसे पटाने की कोशिश करना, मिनी तुम भी कुछ ऐसा करो कि वो हमारी गैंग में शामिल हो जाए। मैं तो खैर कोशिश करूँगा ही। क्यूँ मिनी, करोगी न?

मिनी थोड़ी सोच में पड़ गई, फिर बोली- मैं आपके लिए कुछ भी कर सकती हूँ। आपको कोमल अच्छी लगती है क्या?

मैंने कहा- मैंने उसे कभी देखा ही नहीं। शादी में स्टेज पर देखा था पर उस समय तो इतना मेकअप लहंगा और ज्वेलरी होती है कि लड़की कहाँ दिखती है। इसलिए ऐसा कुछ नहीं है। पर हाँ, ग्रुप सेक्स में मज़ा तो आएगा ही। तुम्हे भी तो तुम्हारे भैया का लंड और अदाएँ मिलता रहेगा।

मिनी बोली- चलो, मैं देखती हूँ कि मैं क्या कर सकती हूँ, जो बन पड़ेगा वो करुँगी। वैसे रंगीला तुम प्लान करो और हम दोनों को गाइड करो तो शायद सक्सेस जल्दी मिल जाये।

आरके बोला- क्या बात है भाभी, मैं भी यही कहने वाला था।

और उसने मिनी की जांघ दबा दी- भाभी, अब ये मत बोलना की कोई देख लेगा, अब कार के बाहर से आपकी जाघें थोड़े ही दिख रही हैं।

मैंने कहा- तू सीधा बैठ जा चूतिये, तेरी बीवी के चक्कर में हम दोनों बिना चुदाई के आ गये हैं। दोनों में भयानक आग लगी है और ऊपर से तू बकचोदी में लगा है।

मैंने ड्राइव करते करते अपना लंड बाहर निकाला और बोला- तुम दोनों मुझे सोचने दो।

मिनी बोली- ये सड़क पे लंड बाहर निकाल के क्या सोच रहे हो?

मैंने कहा- तू अभी बोली थी न, सड़क पे चुद सकती है। चल अभी रास्ता खाली है मैं गाड़ी चला रहा हूँ, तू मेरा लौड़ा चूस।

वो फटाक से बिना कुछ कहे मेरे लंड पे झुक गई, उसके बूब्स गियर के ऊपर थे तो आरके ने नीचे से हाथ डाल के उन्हें सहलाना शुरू कर दिया।

मिनी ने भी एक हाथ ले जाकर आरके के लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगी।

थोड़ी ही देर में मैंने मिनी को बोला- चल उठ जा, मुझे आईडिया आ गया है। बस तुम जब भी में कुछ पूछूँ या करने को कहूँ तो सवाल किये बिना करना शुरू कर देना। मिनी, मेरे लंड को मेरे जीन्स में डाल के चैन बंद कर दे, सामने पुलिस की गाडी खड़ी है।

हम लोग स्टेशन पहुंचे, गाड़ी से बाहर निकल के अंगड़ाई ली और मैंने एक सिगरेट जला ली।

आरके फ़ोन पर कोमल को हमारी लोकेशन बता रहा था।

5-7 मिनट में ही कोमल एक बेहद खूबसूरत जवान मदमस्त हसीना हमारी आँखों के सामने आ गई। उसे देखते ही मैंने उसे अपने ख्यालों न जितने पोजीशन में चोद दिया।

आरके कोमल के हाथों से बैग लेने आगे बढ़ा, मेरे हाथ का सिगरेट फेंकते हुए मैं आगे बढ़ा, वो पाव छूने झुकी, मैंने उसको उठाया और बोला- इतना बड़ा मत बनाओ, बुड्ढों वाली फीलिंग आ जाती है!

और गले लगा लिया।

गले लगाते ही उसके सीने का नाप तोल और झाँक का कूल्हों का माप ले लिया था मैंने।

कोमल को मैंने अलग किया तो वो जाकर मिनी के पाँव छूने लगी, मिनी ने भी उससे पाँव नहीं छुआए, बोली- जब मेरे पति ने पाँव नहीं छुआए तो में कैसे? आओ गले लगो।

मैंने और आरके ने सामान गाड़ी में रखा और मैंने कहा- मिनी तुम आगे बैठो, और आरके तुम पीछे।

मिनी मुझे देख रही थी, मैंने कहा- अब वो दोनों इतने दिनों बाद मिले हैं, बैठने दो साथ में!

और मैं हंस दिय, मिनी भी मुस्कुरा कर आगे बैठ गई।

गाड़ी में काफी देर ख़ामोशी रही फिर मैंने ही आइस ब्रेक करते हुए कहा- कोमल, तुम्हारा सफर कैसा रहा/

बोली- भैया अच्छा था सफर!

मैंने कहा- सैयां के इंतज़ार में सफर लम्बा लगा या जल्दी कट गया?

वो थोड़ा मुस्कुराई और आरके की आँखों में देख कर बोली- जब इंतज़ार करो तो सफर लम्बा ही लगता है।

मैंने बात आगे बढ़ाते हुए कहा- ये बात तो सही है। पर अब तुम यहाँ बिल्कुल पर्दा वरदा मत करना, हम दोनों भाई बाद में पहले दोस्त हैं। और दोस्ती में ये सब औपचारिकता ठीक नहीं है। सही कहा न मैंने मिनी?

मिनी बोली- हाँ कोमल, तुम आराम से रहो जैसे किसी दोस्त के यहाँ आई हो! और हमारे यहाँ का एक नियम है कि कोई नियम नहीं है।

सब लोग थोड़ा चुप हुए फिर एक सेकंड बाद सब लोग जोर जोर से हंसने लगे।

मैंने कहा- मेरे साथ रहकर तुम तो बहुत अच्छे डॉयलॉग देने लगी हो बे।

हम मस्ती मज़ाक और हंसते मुस्कुराते हुए घर पहुंचे।

आरके बीवी को छोड़ के और सामान रखकर वापस आकर गाड़ी में बैठ गया।

मिनी और कोमल घर पर एक दूसरे से गप्पें लड़ाने वाली थी तो मैंने और आरके ने सोचा थोड़ा घूम के आयें।

हमने गाड़ी घर पे ही खड़ी करके पैदल चल के जाने के बारे में सोचा।

आरके ने पूछा- क्यूँ, कैसी लगी कोमल?

मैंने कहा- भाई चलती फिरती एटम बम है वो तो, और तू जिस हिसाब से बता रहा था उससे तो मिलने का मन ही नहीं था मेरा। आरके बोला- चल यार, इतनी भी खूबसूरत नहीं है… तू तो ऐसे ही तारीफों के पुल बाँध रहा है।

तो मैंने हंसते हुए कहा- तो फिर तू जितने भी दिन यहाँ है, उतने दिन और रात तेरी बीवी को मैं चोदता हूँ और तू तेरी भाभी की ले! तू भी खुश में भी।

आरके बोला- तुझे सच में इतनी अच्छी लगी कोमल?

मैंने कहा- कोई शक?

आरके बोला- यार, तू कैसे भी बस ग्रुप सेक्स का इंतज़ाम कर, ज़िन्दगी का मज़ा आ जायेगा जब अपनी बीवी कोमल के सामने मिनी भाभी को चोदूँगा… और तू मेरे सामने मेरी बीवी की चूत बजाएगा।

मैंने कहा- हाँ यार, कुछ चल तो रहा है दिमाग में… पर ढंग से कोई सटीक आईडिया नहीं आ रहा! खैर तू चिंता मत कर, कोमल की चुदाई के लिए मैं कुछ भी करूँगा।

आरके बोला- यार, अब तो तू हद कर रहा है, इतनी भी सुन्दर नहीं है कोमल और मिनी भाभी के सामने तो कुछ भी नहीं है।

मैं बोला- वो तेरी बीवी है इसलिए तुझे छोड़ के सबको अच्छी लगेगी!

और हम दोनों हंसने लगे।

 


टहलते टहलते हम दोनों ठेके के करीब आ गये थे, मैंने कहा- तेरी बीवी को ड्रिंकिंग से कोई परहेज़ तो नहीं है न?

आरके बोला- वो नहीं पीती पर कोई और पिए तो शायद उसे कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए। चल लेकर चलते हैं, अपन तो पिएंगे ही। मैंने फटाफट एक बोतल, कुछ खाने पीने के सामान वगैरह लिए और घर की ओर चल दिए।

हमने गाड़ी घर पे ही खड़ी करके पैदल चल के जाने के बारे में सोचा।

आरके ने पूछा- क्यूँ, कैसी लगी कोमल?

मैंने कहा- भाई चलती फिरती एटम बम है वो तो, और तू जिस हिसाब से बता रहा था उससे तो मिलने का मन ही नहीं था मेरा। आरके बोला- चल यार, इतनी भी खूबसूरत नहीं है… तू तो ऐसे ही तारीफों के पुल बाँध रहा है।

तो मैंने हंसते हुए कहा- तो फिर तू जितने भी दिन यहाँ है, उतने दिन और रात तेरी बीवी को मैं चोदता हूँ और तू तेरी भाभी की ले! तू भी खुश में भी।

आरके बोला- तुझे सच में इतनी अच्छी लगी कोमल?

मैंने कहा- कोई शक?

आरके बोला- यार, तू कैसे भी बस ग्रुप सेक्स का इंतज़ाम कर, ज़िन्दगी का मज़ा आ जायेगा जब अपनी बीवी कोमल के सामने मिनी भाभी को चोदूँगा… और तू मेरे सामने मेरी बीवी की चूत बजाएगा।

मैंने कहा- हाँ यार, कुछ चल तो रहा है दिमाग में… पर ढंग से कोई सटीक आईडिया नहीं आ रहा! खैर तू चिंता मत कर, कोमल की चुदाई के लिए मैं कुछ भी करूँगा।

आरके बोला- यार, अब तो तू हद कर रहा है, इतनी भी सुन्दर नहीं है कोमल और मिनी भाभी के सामने तो कुछ भी नहीं है।

मैं बोला- वो तेरी बीवी है इसलिए तुझे छोड़ के सबको अच्छी लगेगी!

और हम दोनों हंसने लगे।

टहलते टहलते हम दोनों ठेके के करीब आ गये थे, मैंने कहा- तेरी बीवी को ड्रिंकिंग से कोई परहेज़ तो नहीं है न?

आरके बोला- वो नहीं पीती पर कोई और पिए तो शायद उसे कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए। चल लेकर चलते हैं, अपन तो पिएंगे ही। मैंने फटाफट एक बोतल, कुछ खाने पीने के सामान वगैरह लिए और घर की ओर चल दिए।

शाम को रंगीन बनाने का इंतज़ार अपने चरम पर था, बोतल, चिकन, चिप्स और बाकी चखना देख कर मिनी दरवाज़े पर ही समझ गई की आज की शाम भी यादगार शाम होने वाली है, उसके चेहरे पर उत्सुकता का भाव साफ़ दिखाई पड़ रहा था, वो भी बेताब थी ये देखने के लिए की आखिर मैं ऐसा क्या करूँगा जिससे कोमल भी हमारी सामूहिक चुदाई का हिस्सा बन जाये।

खैर जब तक हम लौट कर आये, मिनी ने पूरा घर दिवाली की तरह सजा दिया था, हर जगह खुशबू वाली मोमबत्तियाँ लगा कर घर के वातावरण को खुशनुमा और मादक बनाया हुआ था। हर चीज़ सलीके से तरतीब के साथ रखी हुई थी। मैंने घर में घुसते ही ऐसे सुसज्जित घर को देखकर मिनी से कहा- वाह यार, बीवी तुमने तो दिल खुश कर दिया। घर कितना अच्छा लग रहा है बस बेचारा कभी भी तुम्हारी बराबरी नहीं कर पता। घर की सबसे सुन्दर चीज़ तो तुम हो।

मिनी थोड़ा मुस्कुराई और शर्मा कर खाने का सामान हाथ से लेकर किचन में चली गई.

कोमल सोफे पर बैठ कर सब सुन रही थी, बोली- सुनो, देखो भैया कितने अच्छे हैं, अपनी बीवी की कितनी अच्छे से तारीफ़ करते हैं, कुछ सीख लो उनसे!

आरके तुनक कर बोला- तू कुछ ऐसा काम भी तो किया कर कि तारीफ़ कर सकूँ।

कोमल आश्चर्य के भाव से सिर्फ आरके को देखती रही और फिर सर झुका लिया।

मैंने कहा- वाह भाई वाह, इतने दिनों बाद मिल रहे हो और फिर भी लड़ रहे हो? कितना प्यार है तुम दोनों के बीच।

कोमल की तरफ देखकर बोला- कोमल, तुम थक गई होगी, चाहो तो थोड़ी देर कमर सीधी कर लो, अंदर जाकर लेट जाओ।

कोमल बोली- नहीं भैया, मैं ठीक हूँ, गाड़ी में भी में सोती हुई आई हूँ।

मैंने मजाकिया अंदाज़ में आरके की तरफ देखकर बोला- भाई देख ले, ये तो अपनी नींद पूरी करके आई है जिससे…

और मैं चुप होकर बोतल टेबल पर रख कर गिलास लेने किचन में चला गया, गिलास बर्फ सोडा और ज़रूरी सामान के साथ बाहर आया तो आरके और कोमल दोनों सोफे पर बैठ कर कुछ कानाफूसी कर रहे थे, दोनों हाथों में हाथ डाल के नए युगल प्रेमी की तरह दिख रहे थे।

मुझे देखते ही दोनों थोड़ा ठिठक गए और हाथ दूर कर लिए।

मैं सामान टेबल पर रख के दोनों के करीब आया और आरके का हाथ उठाया और कोमल के कंधे पर रख दिया और कोमल का हाथ उठाया और आरके की कमर पर रख दिया और कहा- देखो, इसे दोस्त का घर समझो और दोनों आराम से रहो, अब इतने दिनों बाद मिले हो तो बहुत कुछ होगा एक दूसरे से बतियाने और पूछने को!

कोमल को शायद बहुत अच्छा लगा।

आरके बोला- हाँ यार, मैं तो जानता हूँ फिर भी ये घबराई तो मैं भी पीछे हट गया। अब हम लोग जॉइंट फैमिली में रहते हैं, इसलिए ऐसे ही हो गए हैं।

मैं कोमल को आँख मार कर बोला- ऐसा महसूस करो कि यहाँ कोई है ही नहीं… और हाँ, अगर पीने का मूड हो तो बता देना, मैं सर्व कर दूंगा।

कोमल जैसा एकदम चौक गई और आरके से बोली- यार आप भी न… भाभी बेचारी अकेली लगी हुई है किचन में!

मिनी वहीं से बोली- अरे तुम थकी होगी, बैठो आराम से, मैं भी बस आती हूँ अभी।

पर कोमल कहाँ सुनने वाली थी, वो तब तक तो उठ के किचन में चली ही गई।

कोमल के किचन में जाने के बाद हम दोनों अपने पैग और गाने लगाने में मस्त हो गए। आरके ने मस्त रोमांटिक गानों का कलेक्शन लगा दिया और मैंने बढ़िया से पैग तैयार कर दिए, पैग उठाकर हम दोनों भी किचन में चले गए।

मैं किचन में जाकर मिनी की तरफ पैग बढ़ाकर बोला- चियर्स डार्लिंग!

मिनी ने मेरे गिलास को किस किया और छोटा सा सिप लेकर बोली- चियर्स जान!फिर मैंने गिलास आरके की तरफ बढ़ाया और गिलास से टकरा के बोला- चियर्स!

और अपने पैग को सिप करने लगा।

हमारी इस हरकत को देखकर कोमल को भी लगा कि शराब पीने का यह रोमांटिक अंदाज़ अच्छा है, आरके जो पैग पीने के लिए लगभग मुंह से लगा ही चुका था, उसके घूंट मारने से पहले कोमल ने आरके के हाथ को रोका और अपने होंठों के पास लेकर मिनी की तरह किस करके एक छोटा सा सिप किया और बोली- चियर्स नीलू!

आरके भी अपना पैग थोड़ा ऊँचा उठा कर बोला- थैंक्स एंड चियर्स डार्लिंग!

मेरी कोशिश कामयाब होती सी दिख रही थी, मुझे यही देखना था कि कोमल ऐसी परिस्थिति में कैसी प्रतिक्रिया देती है।

मैंने आरके को थोड़ा छेड़ते हुए कहा- हाँ भाई नीलू?

और हंसने लगा।

आरके बस सर नीचे करके मुस्कुराता रहा।

हम लोग ऐसे ही किचन और ड्राइंग रूम में इधर उधर करते करते गानों का मज़ा लेते हुए दो पैग डाउन हो चुके थे। थोड़ा नशा होने लगा था और थोड़ा मुझे दिखाना था जिससे मेरी हरकत अगर किसी कारण से बुरी लग भी जाए तो नाम शराब का बदनाम हो।

मैंने पीछे से जाकर मिनी को पकड़ा और उसके गले पे धीरे से काट कर किस कर लिया।

आरके कमरे में था पर कोमल वही खड़ी थी, मिनी जान करके मुझे हटा कर बोली- अरे आप भी कहीं भी शुरू हो जाते हो, देखो कोमल यही खड़ी है।

मैंने कोमल की तरफ देखा और बोला- तो खड़ी रहने दो उसे, हमने बता ही दिया था कि यहाँ एक ही नियम है कि कोई नियम नहीं है।

कोमल बोली- भाभी, भैया आपको बहुत प्यार करते हैं।

मिनी बिना कुछ बोले सर झुक कर मुस्कुरा दी।

मैं मिनी के चूतड़ों पर एक चटाक लगा कर किचन से बाहर आ गया।

आरके बोला- यार रंगीला, तू तो रोज़ नहा कर पैग पीता है, तो आज बिना नहाए कैसे पीने लगा?

मैंने थोड़ा झूमते हुए कहा- यार, वो कोमल है न… इसलिये… और अपन को शाम को नहाने के बाद कपड़े पहनना पसंद नहीं है। तो तेरी बीवी को असहज लगता, इसलिए ऐसे ही पी ली आज! आरके बोला- यह तो गलत बात है, मतलब हम लोगों की मौजूदगी की वजह से तुम लोग असहज हो रहे हो।

और जोर से आवाज़ लगा कर बोला- कोमल, चलो हम लोग किसी होटल में रात गुज़ार के आते हैं।

मिनी कोमल से धीरे से बोली- यार लगता है, दोनों को चढ़ गई है। इन लोगों की बातों को ज्यादा दिल से मत लगाना।

कोमल बोली- भाभी, वो भैया को बोलिए न कि वो नहा लें, तो लड़ाई खत्म ही हो जाएगी।

मिनी बोली- तुम जाकर बोल दो, तुम्हारी बात नहीं टालेंगे। हम दोनों में से तो वो किसी की नहीं सुनने वाले!

कोमल किचन के दरवाज़े से खड़े होकर बोली- भइया, आप नहा के आ जाइये।

मैं कोमल की तरफ देख कर बोला- ओके!

आरके बोला- जा अगला पैग तेरे आने के बाद ही बनाएंगे।

मैं थोड़ा गुस्से में बोला- तू नहीं बनाएगा पैग, पैग या तो मैं बनाऊंगा या या… या कोमल बनाएगी।

कोमल की तो शक्ल देखने लायक थी।

खैर मैं नहाने गया और आ गया तौलिया लपेट कर, मैं आकर सोफे पर बैठ गया और बोला- आरके तू भी नहा आ, नहाने के बाद पीने का मज़ा ज्यादा आता है। जो चढ़ी थी, वो थोड़ी सी उतर गई है, और सुरूर बहुत अच्छा है।

आरके कोमल से बोला- मेरा तौलिया दे देना ज़रा!

और वो बाथरूम की तरफ चला गया।

जब तक कोमल ने तौलिया निकाला, तब तक वो बाथरूम में जा चुका था।

मिनी ने कोमल को कोहनी मार कर कहा- जाओ तौलिया दे आओ भैया को।

कोमल इशारे के साथ भावना को समझ गई थी, बोली- अच्छा मैं अभी आई।

आरके बाथरूम से गीला और नग्न अवस्था में बाहर आ गया, कोमल बोली- ये लो तौलिया और अंदर जाओ, कोई आ जाएगा।

आरके बोला- यहाँ कोई बच्चा थोड़े ही है जो कोई आ जायेगा, तुम्हें तौलिया लेकर आने को बोला ही इसलिए था कि तुम्हें थोड़ा सा… बोलते बोलते गीले बदन ही कोमल को बाँहों में भर लिया और उसके होंठों को चूमने लगा।

कोमल के हाथ से तौलिया छूट गया और आरके के खड़े लंड पर जाकर टंग गया।

कोमल के कपड़े भी थोड़े से गीले हो गए पर बेचारी कुछ एक महीने से प्यासी थी इसलिए उसे उस समय कुछ समझ नहीं आ रहा था और वो इस आज़ादी और अपने चुम्बन का रस ले रही थी।

आरके ने कोमल को कपड़ों के ऊपर से ही चूचियाँ और चूतड़ दबा दबा कर और होंठों और गले पर चूम चूम कर बहुत गर्म कर दिया था। कोमल आरके के कान में बोली- कमरा बंद कर लें?

आरके बोला- हाँ, कर तो सकते हैं, पर यह उनका बैडरूम है और बाथरूम भी सिर्फ इसी कमरे के साथ लगा हुआ है। बीच में किसी को कोई ज़रूरत आई तो बड़ा बुरा लगेगा।

कोमल ने आरके को धक्का देकर अपने आप से अलग किया और बोली- हाँ, तुम सही बोल रहे हो, आज बीच में कोई नहीं आना चाहिए। महीने भर से प्यासी हूँ, आज तो तुम्हें खा जाऊँगी मैं!

आरके तौलिया लपेट कर बाहर आ गया।

कोमल अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके बाहर आये, उससे पहले आरके बाहर आकर सीधा मिनी जो की नीचे कालीन पर बैठी हुई थी, के करीब पहुँचा और अपने लंड को बाहर निकाल के मिनी के गाल पे मार दिया।

मिनी ने आरके की तरफ देखकर मुस्कुरा कर लंड को हाथ में लेकर सहला दिया।

जल्दी से आरके मेरे बगल में आकर बैठ गया कि कहीं कोमल देख न ले।

मैंने मिनी को अंदर आने का इशारा किया, मिनी उठी में भी उठ कर जाने लगी बैडरूम की तरफ तो कोमल कमरे से बाहर आ रही थी। कोमल के कपड़े थोड़े से गीले विशेष तौर पर बोबे और कंधे दिख रहे थे।

मैंने मिनी का हाथ पकड़ा हुआ था जिसे देखकर कोमल थोड़ा सर झुक कर मुस्कुरा कर जल्दी से दौड़ती हुई ड्राइंग रूम की तरफ चली गई। मैंने मिनी को कमरे में अंदर बुला कर बोला- यार, तुम अपने ब्रा पैंटी उतार के बाहर आओ।

मिनी बोली- वो तो आप इशारे से बताते तो भी मैं उतार के आ जाती पर अब केवल भैया नहीं है, उसकी बीवी भी है।

मैं बोला- इसलिए तो बोल रहा हूँ। तुम नंगी ही अच्छी लगती हो जानेमन!

 
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