मैने एक दफ़ा अपने शोहर से इस की वजह पूछी.तो उस का जवाब था कि इस तरीके में मेरी चौड़ी गान्ड मजीद चौड़ी हो जाती है. जिस को देख कर उस के लंड में और ज़्यादा तर आ जाती है और वो मजीद मस्त हो कर चुदाई का मज़ा लेता है.
गुल नवाज़ के कहने के मुताबिक मैने अपनी गान्ड को उपर किया और घोड़ी बन गई. गुल नवाज़ ने मेरी कमर पकड़ कर अपना मोटा लंड पीछे से मेरी चूत में डाल दिया.
में अब अपनी गान्ड को पीछे पुश कर कर के ताल से ताल मिलाने लगी.
और फिर कुछ देर की चुदाई के बाद उस ने अपना पानी मेरी चूत में छोड़ दिया.
इस मोके पर मुझ एक लतीफ़ा याद आ गया है कि,
एक आदमी की शादी के कुछ महीने बाद उस की बीवी का पेट थोड़ा बाहर गया तो वो समझा कि बीवी प्रेग्नेंट है.वो अपनी बीवी को डॉक्टर के पास चेक अप के लिए लिए गया.
चेक अप के बाद डॉक्टर बोला: कुछ नही बस हवा ही है,
दूसरे साल और फिर तीसरे साल भी जब डॉक्टर ने चेक अप के बाद कहा कि “कुछ नही बस हवा ही है”
वो आदमी गुस्से में आया और डॉक्टर के सामने अपना लंड निकालते हुए बोला: ”डॉक्टर साब ज़रा चेक तो करिए ये मेरा लंड है या पंप जो हर वक़्त हवा ही मारता है”
दूसरे दिन सब मेरी अम्मी अब्बू और मेरे सास सुसर मुल्तान वाले मज़ार पर तिजारत करने के लिए घर से चले गये.
मेरा शोहर गुल नवाज़ और मेरा भाई सुल्तान दोनो उन सब को करीबी शहर के बस स्टेशन तक छोड़ने उन के साथ निकल गये.अब घर में नुसरत उस के बच्चे और में ही रह गये.
में उस दिन बहुत उदास थी. क्यों कि मुझ पता था कि मेरी सास की मज़ार से वापिसी पर मेरा घर उजड़ने का काउंट डाउन शुरू हो जाएगा.
ये ही बात सोच सोच कर मेरा दिल डूबा जा रहा था. मगर मेरे अपने इकतियार में तो कुछ भी नही था.
इस लिए मैने ना चाहते हुए भी अपने आप को घर के काम काज में मसरूफ़ कर लिए और मुझ पता ही ना चला कि दिन गुजर गया.
शाम का अंधेरा फैलने लगा मगर मेरा भाई और शोहर अभी तक वापिस नही लोटे थे.
वो दोनो जाते वक़्त हम को बता कर गये थे कि उन को शहर में कुछ काम हैं. जिस की वजह से वो रात को शायद देर से घर वापिस आएँगे.
शाम की रोटी पका और खा कर मेने और नुसरत ने अपने अपने शोहर के लिए उन की रोटी को और सालन को डोंगे में डाल कर रसोई में रख दिया कि अगर वो हमेशा की तरह रात देर से लोटे तो खुद ही अपना खाना रसोई में खा लेंगे.
रात के तकरीबन 10 बजे जब सब कामों से फारिग हो कर में अपने कमरे में जाने लगी तो मैने नुसरत को अपने बच्चों को उन के दादा दादी के कमरे में सुला कर अपने कमरे में दाखिल होते देखा तो मैने उसे आवाज़ दी.
नुसरत मेरे पुकारने पर अपने कमरे के दरवाज़े से मूड कर मेरे पास चली आई.
में: मैने तुम से एक बात करनी है नुसरत.
नुसरत: हां कहो.
में: मैने तुम से उस दिन जो बात डेरे पर की थी इस के बारे में तुम ने क्या सोचा है?.
नुसरत: रुखसाना इस बारे में सोचना क्या है. मेरा उस वक़्त भी जवाब “ना” में था और आज भी जवाब “ना” ही है.
“वैसे एक बात में तुम से पूछना चाहती हूँ कि तुम ने इस काम के लिए अपने ही भाई का क्यों और कैसी सोच लिया. अगर तुम कोई ऐसा वैसा काम करनी पर तूल ही गई हो तो फिर अपने ही भाई के साथ ये “गुनाह” करने की बजाय कोई बाहर का मर्द क्यों नही?” नुसरत ने मुझ से सवाल किया.
में: नुसरत तुम को पता है कि गुनाह तो गुनाह (अडल्टरी) है. चाहे बाहर के किसी मर्द से क्या जाय या फिर घर के किसी मर्द से दोनो का गुनाह का एक ही जैसा होता है. मगर बात ये है कि बाहर के मर्द के साथ ये काम करने में बदनामी का डर हर वक़्त होता है. जब कि सुल्तान के साथ शायद ये मामला ना हो.
“वो कैसे? नुसरत ने मेरी इस मुन्ता क पर हैरान होते हुए सवाल किया.
“वो ऐसे नुसरत कि तुम को पता है कि मेरा और तुम्हारा भाई दोनो ही रात को घर पी कर आते हैं. नशे की ऐसी हालत में उन को कोई होश नही होता कि वो किधर हैं और क्या कर रहे हैं. और उस हालत में तुम्हारे और मेरे भाई दोनो को एक “सुराख” ही चाहिए होता है. जिस में वो अपना लंड डाल कर अपना पानी निकाल सकैं.
चूँकि तुम्हारे और मेरे मम्मे गान्ड और बाकी जिस्म एक दूसरे से काफ़ी मिलता जुलता है. इस लिए में सोच रही हूँ कि अगर एक रात में और तुम अपना कमरा तब्दील कर लें .तो हो सकता है कि रात के अंधेरे में मेरा भाई सुल्तान मुझे तुम्हारे धोके में अपनी बीवी समझ कर मेरे साथ चुदाई कर ले तो मैं माँ बन सकती हूँ.. क्योंकि नशे की हालत और रात के अंधेरे में सुल्तान को क्या पता चले गा कि ये चूत जिस को वो चोद रहा है उस की बीवी की है या उस की अपनी सग़ी बेहन की. में नुसरत की तरफ देख कर मुस्कराते हुए बोली.
मेरी बात सुन कर नुसरत के तो जैसे होश ही उड़ गये. वो थोड़ी के लिए किसी “गहरी” सोच में पड़ गई और फिर कुछ लम्हे बाद बोली,
“देखो रुखसाना मैने इस मसले पर काफ़ी गौर किया है और वाकई ही मुझे भी अब ये ही लगता है कि बीमारी तुम में नही बल्कि मेरे अपने भाई में है.तुम जानती हो कि मैने हमेशा तुम को अपनी बेहन समझा है इस लिए में ये हरगिज़ नही बर्दाश्त कर सकती कि मेरी बेहन का घर किसी कीमत पर उजड़े.
मगर ये मत भूलो कि तुम्हारी कज़िन होने के साथ साथ में एक औरत भी हूँ. और एक औरत ये कभी बर्दाश्त नही करती कि उस का शोहर उस के अलावा किसी दूसरी औरत के साथ सोए. जब कि वो औरत कोई और ना हो बल्कि उस की अपनी “नंद” हो तो ये तो एक बहुत बड़ा “गुनाह” भी है. और में तुम्हारे साथ इन “गुनाह” में सरीक नही सो सकती. इस लिए मेरी तरफ से तो सॉफ इनकार है”ये कहते हुए नुसरत पलट कर अपने कमरे में जाने के लिए मूडी.
मुझे पूरी उमीद थी कि नुसरत मुझे बेकसूर जानते हुए मेरा घर बचाने में मेरा पूरा साथ दे गी. मगर उस के इस जवाब ने मुझे एक दम आग बगोला कर दिया. अब मेरा घर उजडने में कोई कमी बाकी नही रह गई थी.
अब में “दो और दिए” वाली सूरते हाल में थी. और फिर अपना घर बचाने के लिए में भी जैसे बग़ावत पर उतर आई.
“नुसरत ये बात मत भूलो कि मेरी और तुम्हारी वाटे साटे की शादी है. इस लिए अगर तुम्हारा भाई गुल नवाज़ मुझे तलाक़ दे गा तो में तुम्हारा घर भी कायम नही रहने दूं गी.मैने सख़्त लहजे में नुसरत को पीछे से पुकारा.
मेरी बात सुन कर कमरे में जाते हुए नुसरत के कदम जैसे ज़मीन में जकड गये और वो किसी सोच में पड़ गई.
कुछ देर के बाद नुसरत एक नफ़रत भरे लहजे में बोली ”अच्छा तुम मुझे ये बताओ कि बच्चा लेने के लिए तुम ने तो अपने भाई के साथ हम बिस्तरी करनी है. पर में किस खुशी में अपने भाई के साथ एक ही बिस्तर पर रात बसर करूँ”
नुसरत की इस बात को मैने उस की रज़ा मंदी समझा. मुझ यकीन था कि नुसरत मेरी इस बात पर कभी राज़ी नही हो गी.मगर लगता था कि शायद मेरी उसे भी तलाक़ दिलवाने वाली धमकी काम कर गई थी.
और अब अपना काम पूरा होते देख कर मेरी तो आँखों में खुशी के आँसू उमड़ आए. मगर अपनी खुशी को छुपाते हुए मैने नुसरत से कहा के,“तुम इस लिए अपने भाई के साथ एक रात एक ही बिस्तर पर गुजारोगी ताकि मुझे अपने साथ बिस्तर पर ना पा कर गुल नवाज़ को किसी किसम का शक ना हो जाय”
में जानती थी कि जिस तरह मेरे लिए ये “गुनाह” भरा फ़ैसला करना एक बहुत ही मुश्किल अमल था. उसी तरह नुसरत के लिए भी अपने सगे भाई के साथ एक ही बिस्तर पर रात बसर करना एक बड़े दिल गुर्दे का काम है.
“लेकिन अगर मेरा भाई गुल नवाज़ मुझे अपनी बीवी समझ कर बहक गया और मेरे साथ कुछ कर दिया तो क्या हो गा” नुसरत ने झिझकते हुए मगर गुस्से भरे लहजे में एक सवाल पूछा.
में समझ गई कि नुसरत के “कुछ” का क्या मतलब है. लगता था कि नुसरत को अपने भाई के साथ “चुदाई” का लफ़्ज इस्तेमाल करने में शरम महसूस हो रही थी.
“तुम इस की फिकर ना करो, गुल नवाज़ ने कल रात को ही मेरे साथ चुदाई की है. इस लिए मुझ उमीद है कि वो आज तुम्हें तंग नही करे गा और शराब के नशे में होने की वजह से बिस्तर पर लेटते ही खर्राटे मारने लगे गा. मैने नुसरत को तसल्ली देते हुए कहा.
“लेकिन कहीं भाई गुल नवाज़ या सुल्तान को किसी किसम का शक पड़ गया तो” नुसरत ने मेरा साथ देने की हामी तो भर ली थी मगर लगता था कि पकड़े जाने के ख़ौफ़ से वो डर भी बहुत रही थी.
“ में और तुम गुल नवाज़ और सुल्तान के आने से पहले ही जा कर एक दूसरे के कमरे में लेट जाते हैं. और साथ ही अपने कमरे की लालटेन को बिल्कुल भुजा देंगे.ता कि कमरे में किसी किसम की कोई रोशनी ना हो और इस तरह मेरा काम आसान हो जाएगा” मैने नुसरत को अपने मंसूबे की मज़ीद तफ़सील बताई.
मेरी बात ख़तम होते ही नुसरत दुबारा अपने कमरे की तरफ चली तो मैने दुबारा उसे पुकरा “नुसरत उधर कहाँ जा रही हो आज में उधर तुम्हारे पलंग पर सोऊगी”
“आज ही क्यों” नुसरत ने पूछा.
“क्यों कि आज घर में अम्मी अब्बू वगेरा नही है और आज ही मोका है” मैने उसे कहा.
मेरी बात सुन कर नुसरत ने मेरी तरफ एक नफ़रत भरी निगाह डाली और गुस्से से अपने पैर पटकती हुई मेरे कमरे में दाखिल हो गई.
नुसरत ने अंदर जाते ही मेरे कमरे का दरवाज़ा ज़ोर से बंद कर दिया. मुझ अंदाज़ा था कि वो बहुत गुस्से में है. मगर में क्या करती. आज में जो भी करने जा रही थी वो बहुत ही मजबूर हो कर करने वाली थी.
थोड़ी देर के बाद मेरे कदम भी आहिस्ता आहिस्ता नुसरत के कमरे की तरफ उठने लगे.
कमरे में पहुँच कर में पलंग पर लेट गई और साथ ही मैने बिस्तर के साइड में पड़ी लालटेन की बत्ती को गुल कर दिया. बत्ती के भुजते ही कमरे में गुप्प अंधेरा छा गया.
अभी मुझे अपने भाई के बिस्तर पर लेटे कुछ ही देर गुज़री थी कि मुझे महसूस हुआ कि कमरे का दरवाज़ा हल्की आवाज़ में खुला है.
कमरे में अंधेरा होने के बावजूद मुझे अंदाज़ा हो गया कि मेरा भाई सुल्तान कमरे में दाखिल हो गया है.
अपने भाई की कमरे में मौजूदगी का अहसास करते ही मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा.
सुल्तान ने दरवाज़े की कुण्डी लगाई और फिर आहिस्ता आहिस्ता लड खडाता हुए बिस्तर पे आन बैठा.
बिस्तर पर बैठते ही भाई सुल्तान ने नशे की हालत में मुझे अपनी बीवी नुसरत समझ कर मेरे जिस्म को हाथ लगाते हुए अपने मुँह को मेरे कान के पास ला कर एक हल्की सी आवाज़ में पुकरा “नुसरत सो गई हो क्याआआआआआआअ”
भाई के काँपते हुए हाथों और फिर उस के मुँह से आती हुई शराब की बू से मेरा मेरा अंदाज़ा सही निकला कि आज मेरा शोहर और भाई दोनो पी कर ज़रूर आएँगे.
मैने भाई के पुकारने का कोई जवाब नही दिया और बिस्तर पर एक करवट बदल कर लेटी हुई सोने का नाटक करती रही.
मेरी तरफ से कोई जवाब ना पा कर मेरा भाई सुल्तान मेरे साथ ही पलंग पर चढ़ कर लेट गया.
में जिस तरह पलंग पर लेटी हुई थी. इस पोज़िशन में मेरा मुँह कमरे की दीवार की तरफ था. जब कि मेरी पीठ अपने भाई सुल्तान की तरफ थी.
बिस्तर पर मेरे साथ लेटने के थोड़ी देर बाद सुल्तान भाई ने भी करवट बदली और मेरे पीछे से मेरे जिस्म को अपनी बाहों में जकड कर मेरे जिस्म को अपने साथ लगा लिया.
अब कमरे में ये हालत थी. कि मेरा भाई मेरे जिस्म के साथ पीछे से चिपटा हुआ था. और उस का एक हाथ मेरे जिस्म के नीचे से होता हुआ मेरे पेट पर आ गया और दूसरा हाथ मेरी गुदाज रान पर आहिस्ता आहिस्ता इधर उधर फिसल रहा था.
में अपनी और भाई की शलवार की मौजूदगी में भी अपने सगे भाई का तने हुए लंड को अपनी गुदाज रानो में से सरकता हुआ अपनी चूत की दीवारों से टकराता हुआ महसूस करने लगी.
अपने भाई की बाहों में खुद को पा कर और उस के लंड की गर्मी को अपनी चूत पर महसूस कर के मेरी हालत उस वक़्त ये हो गई कि “काटो तो बदन में खून नही”
कहते हैं कि सेक्स का ताल्लुक आप के दिमाग़ से होता है. अगर आप दिमागी तौर पर पुर सकून हों तो आप को चुदाई में मज़ा आता है. और दिमाग़ में बे सकूनी हो तो फिर आप का ज़हन चुदाई की तरफ हो ही नही पाता.
शायद इसी लिए में जो कुछ देर पहले तक ये चाहती थी. कि कब वो मोका आए और में रात के अंधेरे में अपने ही भाई से चुदवा कर एक बच्चे को जनम दूं ताकि मेरा घर बच जाय.
मगर अब अपने आप को अपने सगे भाई की बाहों में क़ैद पा कर मेरी तो “रूहह” ही जैसे मेरे जिस्म ने “फ़ना” हो गई थी.
लगता था कि मेरे अंदर की मशराकी औरत अचानक जाग पड़ी थी. और अब वो मेरे उपर लानत मालमंत करते हुए मुझे इस गुनाह भरे अमल से रोकने की कोशिस कर रही थी.
और शायद इस बात का ये असर था कि मेरी चूत जो कि हर वक़्त अपने शोहर के लंड के इंतिज़ार में गरम हो कर पानी टपकाती रहती थी. इस वक़्त किसी बंजर ज़मीन की तरह बिल्कुल खुसक थी.
अब मेरे भाई सुल्तान के हाथ मेरी कमर पर बहुत तेज़ी से रगड़ खा रहे थे. और फिर भाई के हाथ आहिस्ता आहिस्ता मेरी छातियों की तरफ़ झपटे और इस से पहले कि में सम्भल पाती. भाई ने मेरी कमीज़ के उपर से ही मेरी एक चूची को अपने हाथ में ले कर ज़ोर से मसल दिया.
अपने मम्मे को अपने भाई की मुट्ठी में पाते ही में काँप गई और में अपने मुँह से निकलने वाली चीख को बहुत मुस्किल से रोक पाई.
इस से पहले कि मेरे भाई के हाथों की गुस्ताखियाँ मजीद आगे बढ़ती और जिस के नतीजे में जिस्म गरम हो कर मेरे इख्तियार से बाहर होता में इस खेल को रोक देना चाहती थी.
इस लिए ज्यूँ ही सुल्तान भाई के हाथों की उंगिलिओं ने मेरे मम्मे को मेरी कमीज़ के उपर से अपनी गिरफ़्त में लिया.
तो मैने एक अंगड़ाई लेने के अंदाज़ में अपनी बाहों को फैला दिया.
जिस की वजह से सुल्तान भाई का हाथ स्लिप हो कर मेरे मम्मे से एलहदा हो गया.
“बेहन चोद हर वक़्त सोती ही रहती है तू” मेरी इस हरकत से मेरे भाई को ये अंदाज़ा हुआ कि उस की बीवी नुसरत शायद गहरी नींद में सो रही है. और अपनी बीवी की चूत मारने से महरूम रह जाने पर सुल्तान भाई को गुस्सा आ गया.
सुल्तान भाई ने इसी गुस्से में दूसरी तरफ करवट बदल ली और वो भी सोने की कोशिश करने लगा.
थोड़ी देर बाद ही कमरे में सुल्तान भाई के खर्राटे ज़ोर ज़ोर से गूंजने लगे.
भाई को अपने आप से अलग होते ही और फिर दूसरी तरफ मुँह मूर कर सोता हुआ पा कर मेरी तो जान में जान आई..
भाई के खर्राटे सुनते ही मुझे यकीन हो गया कि आज में एक गुनाहे अज़ीम से बच गई हूँ.
क्यों कि नुसरत की ज़ुबानी मुझे ये ईलम था. कि मेरे शोहर गुल नवाज़ की तरह मेरा भाई सुल्तान भी एक दफ़ा रात को आँख लग जाने के बाद फिर दूसरी सुबह ही जागते हैं.
भाई की तरफ से पूर सकून होने के बाद अब में सोचने लगी कि कब सुबह की अज़ान हो.ताकि में और नुसरत बाथ रूम जाने के बहाने अपने अपने कमरे में वापिस जा सके.
अभी सुबह होने में काफ़ी देर थी और मुझे पानी की प्यास बहुत लग रही थी.
काफ़ी देर प्यास को बर्दास्त करनी के बाद मुझ से रहा नही गया और में पानी पीने के लिए कमरे से बाहर निकल कर रसोई की तरफ चल पड़ी.
रसोई की तरफ जाते वक़्त रात की खामोशी में मेरे कानों में एक हल्की सी आवाज़ पड़ी “"आआअहह”.
में ये आवाज़ सुन कर रुक गई और इधर उधर नज़र दौड़ा के देखू तो सही कि ये आवाज़ किधर से आ रही है.
सहन में नज़रें घुमाते हुए मेरी नज़र घर के दूसरे कोने में बने हुए बाथ रूम पर गई.
बाथरूम के अंदर जलती हुई लालटेन की रोशनी को देख कर मुझ अंदाज़ा हुआ कि कोई बाथरूम में मौजूद है और ये आवाज़ उधर से ही आ रही है.
में दबे पावं चलती हुई बाथरूम के दरवाज़े के करीब पहुँची. तो बाथरूम का दरवाज़ा जो पहले ही थोड़ा टूटा हुआ था उस को बिल्कुल खुला पाया.
में बाथरूम की दीवार की साथ लग कर खड़ी हो गई. इस तरह खड़ी हो कर में किसी की नज़रों में आए बेगैर ब आसानी बाहर से बाथरूम में देख सकती थी.
बाहर सहन में बिल्कुल अंधेरा था जब कि बाथरूम में लालटेन जल रही थी. जिस की वजह से सहन में खड़ी हो कर बाथरूम के अंदर का नज़ारा काफ़ी हद तक सॉफ नज़र आ रहा था.
मेरे बाथरूम के करीब पहुँचने तक बाथरूम से आती हुई आवाज़ों का शोर अब थोड़ा मजीद बढ़ गया था. में इन आवाज़ों को सुन कर बहुत हेरान हो रही थी कि ये अंदर हो क्या रहा है .
फिर जब डरते डरते मैने अपना सर आगे बढ़ा कर बाथरूम के अंदर झाँका. तो बाथरूम के अंदर का मंज़र देख कर मेरे तो जैसे “होश” ही उड़ गये.
मैने देखा कि मेरी नंद नुसरत बाथरूम के सिंक के पास झुके हुए अंदाज़ में बिल्कुल नंगी खड़ी थी.
नुसरत के जिस्म से टपकते हुए पानी की बूँदो से अंदाज़ा हो रहा था कि वो अभी अभी नहा करफ़ारिग हुई है.
नुसरत ने अपने सर पर एक बड़ा सा तोलिया (टवल) ओढ़ा हुआ था. जिस की वजह से उस का चेहरा तोलिया के अंदर छुप गया था. इस हालत में नुसरत का मुँह सिंक की तरफ था और उस की कमर बाथरूम के दरवाजे की तरफ थी.
नुसरत के पीछे मेरा शोहर और नुसरत का सागा भाई गुल नवाज़ भी बिल्कुल नंगा हो कर अपनी बेहन के जिस्म से चिपका हुआ था.
गुल नवाज़ पीछे से नुसरत की नंगी कमर और गरदन पर अपनी ज़ुबान फेरते हुए अपनी बेहन के नंगे बदन के मोटे गोश्त को अपनी ज़ुबान और दाँतों से चाट और काट भी रहा था
गुल नवाज़ के एक हाथ की दो उंगलियाँ उस की बेहन के बड़े बड़े मम्मो के निपल्स को मसल रही थीं. जब कि दूसरा हाथ बेहन की चूत के दाने (क्लिट) के साथ बहुत तेज़ी से खेल रहा था.
और ये भाई के हाथों का सरूर ही था. जिस के असर की वजह से नुसरत बहुत बे चैन और गरम हो कर सिसकियाँ भरने पर मजबूर हो गई थी.
साथ ही साथ मैने ये देख कर हेरान रह गई कि ना सिर्फ़ गुल नवाज़ के हाथ उस की बेहन के बदन से खेलने में मसगूल थे.
बल्कि नुसरत ने भी अपने राइट हॅंड से अपने भाई के तने हुए सख़्त लंड को अपनी मुट्ठी में जकड़ा हुआ था. और वो भी अपने हाथ से अपने भाई के लौडे की मूठ लगा कर भाई को मज़ा देने में मसरूफ़ थी.
नुसरत का अपने भाई के साथ प्यार का ये वलहिना अंदाज़ देख कर मुझे अपनी आँखों पे यकीन नही हो रहा था. क्योंकि में जो कुछ देर पहले तक अपने भाई के साथ चुदाई करना चाहती थी.
मगर ऐन मोके पर मेरी हिम्मत जवाब दे गई. और इधर वो ही नुसरत जिस ने मेरे प्लान पर नफ़रत का इज़हार किया था. अब वो खुद अपनेही भाई के साथ बाथ रूम में मस्तियों में मसरूफ़ थी.
इसे कहते हैं कि,
“बदलता है रंग आसमान कैसे कैसे”
मुझ गुनाह का सबक देने वाली का ये रूप देख कर समझ आ गई कि इंसान खुद जो मर्ज़ी चाहे वो कर डाले मगर,
“ में करूँ तो साला कॅरक्टर ढीला है”
की तरह को दूसरा करे तो उस पर फॉरन इल्ज़ाम तराशि शुरू कर देते हैं.
थोड़ी देर बाद गुल नवाज़ ने नुसरत को सिंक की तरफ मजीद झुका दिया. जिस से नुसरत की गान्ड मजीद चौड़ी और फैल कर उपर की तरफ उठ गई और पीछे से नुसरत की चूत बाहर को निकल आई.
गुल नवाज़ ने अपनी बेहन की गान्ड के ब्राउन सुराख पर अपनी उंगली फेरते हुए कहा, "क्या चिकनी गान्ड है तेरी.... ".
गुल नवाज़ अब अपनी बेहन के बिल्कुल पीछे आया और अपने जवान सख़्त लंड को अपनी बेहन की चौड़ी गान्ड में फँसा कर हल्के हल्के धक्के मारने लगा.
ये मंज़र देख कर मेरे जिस्म में चीटियाँ दौड़ने लगी. मेरा हाथ खुद ब खूद मेरी एलास्टिक वाली सलवार के अंदर चला गया और मेरी उंगली मेरी पानी पानी होती हुई चूत में आगे पीछे होने लगी. मेरा दूसरा हाथ मेरे बड़े बड़े मम्मो तक जा पहुँचा और में अपने मम्मो को हाथ में ले कर खुद ही अपने मम्मो को अपने हाथ से दबाने लगी.
ये मंज़र देख कर मेरे जिस्म में चीटियाँ दौड़ने लगी. मेरा हाथ खुद ब खूद मेरी एलास्टिक वाली सलवार के अंदर चला गया और मेरी उंगली मेरी पानी पानी होती हुई चूत में आगे पीछे होने लगी. मेरा दूसरा हाथ मेरे बड़े बड़े मम्मो तक जा पहुँचा और में अपने मम्मो को हाथ में ले कर खुद ही अपने मम्मो को अपने हाथ से दबाने लगी.
इधर में अपनी चूत और मम्मो से खेल कर मज़ा ले रही थी . तो दूसरी तरफ अपनी बेहन के गोश्त से भरपूर चुतड़ों में धक्के मारने से गुल नवाज़ का लंड पत्थर की तरह सख़्त हो चुका था.और उस को नुसरत की टाँगो की गर्मी में घुस कर बहुत मज़ा और स्वाद मिल रहा था.
थोड़ी देर बाद गुल नवाज़ ने नुसरत की टाँगे फैलाई और उस की दोनो टाँगो के दरमियाँ से अपना लौडा गुज़ारते हुए बेहन की चूत के मूह पर रख दिया
भाई के लंड को पहली बार अपनी चूत के साथ टच होता हुआ महसूस कर के नुसरत के मूह से आअहह ओह्ह्ह्ह की मीठी आवाज़ निकल गई.
फिर मेरे देखते ही देखते मेरे शोहर ने अपने मुँह से ढेर सारा थूक निकाल कर उस को अपने लंड पर मसल दिया.
साथ ही गुल नवाज़ ने अपने घुटनों को थोड़ा बेंड किया. जिस की वजह से उस का लंड नुसरत की उपर उठी हुई गान्ड के बिल्कुल नीचे आ गया.
फिर गुल नवाज़ ने अपनी बेहन की चौड़ी गान्ड को अपने दोनो हाथों से मज़बूती से थामा और फिर अपने जिस्म को सीधा उपर उठाते हुए एक झटका मारा.
थूक लगे लंड और पानी छोड़ती बेहन की फुद्दी के लबों से गुल नवाज़ का लंड बगैर किस दिक्कत के फिसलता हुआ नुसरत की चूत के अंदर तक धँस ता चला गया.
भाई के लंड को अपने अंदर जज़्ब करते ही नुसरत एक इंच उपर की तरफ उछली और उस के के मुँह से “आआहह “की आवाज़ निकली...
लेकिन सॉफ लग रहा था कि ये दर्द की आवाज़ नही है. बल्कि ये तो जोश और मस्ती से भरी चुदाई का मज़ा लेने वाली आवाज़ थी...
क्यों मेरी रानी रुखसाना मज़ा आया... गुल नवाज़ ने नुसरत को अपनी बीवी समझते हुए पूछा. मगर नुसरत जवाब में सिर्फ़ “अहह “कर के रह गई.
ज़ाहिर है कि वो जवाब में अगर बोलती तो गुल नवाज़ को पता चल सकता था.कि वो जिसे अपनी बीवी समझ कर मज़े से चोद रहा है वो उस इस की बीवी नही बल्कि सग़ी छोटी बेहन है.
गुल नवाज़ ने आहिस्ता से अपने लंड को बाहर निकाला और फिर एक और धक्का मारा और उस का पूरा लंड दुबारा उस की बेहन की चूत में दाखिल हो गया.
अब गुल नवाज ने पीछे से नुसरत के दोनो मम्मों का अपने दोनो हाथो में पकड़ कर ज़ोर से दबाया और साथ ही अपनी बेहन की चूत में धक्कों की बरसात चालू कर दी.
गुल नवाज़ बाथरूम में पूरे जोश और पूरी स्पीड से अपनी बेहन की फुद्दी को चोद रहा था ...
गुल नवाज़ के टटटे ज़ोर ज़ोर से नुसरत की गान्ड से टकराने की वजह से बाथरूम में ना सिर्फ़ “पिच पिच की आवाज़ गूँजती .
बल्कि ज़ोर दार झटकों की वजह से नुसरत की गान्ड का गोश्त भी थल थल करते हुए उपर नीचे होता. और आगे से नुसरत के जवान भरे भरे मम्मे भी गुल नवाज़ के हाथों से निकल निकल जाते थे.
उधर बाथरूम में चुदाई का ये मज़ा पा कर नुसरत की “सिसकियाँ” अब रुकने का नाम नही ले रही थीं.
इधर बाहर मेरी चूत में भी अब बुरी तरह से खारिश हो रही थी. बेहन भाई के संगम और मिलाप का ये हसीन मंज़र देख कर मेरी चूत भी अब जैसे लंड माँगने लगी थी.
मेरी उंगलियाँ भी मेरी चूत में उसी तेज़ी से चल रही थीं.. जिस तेज़ी से गुल नवाज़ अपनी बेहन की फुद्दी में लंड को अंदर बाहर कर रहा था.
में ऐसे महसूस कर रही थी.जैसे मेरी चूत में एक मोटा लंड है और वो मुझ ज़ोर ज़ोर से चोद रहा हो...मेरी चूत पानी पानी हो रही थी.
उधर गुल नवाज़ ने अपनी बेहन की चूत में धक्के मार-मार कर के उस की टाँगों को ना सिर्फ़ थका दिया था. बल्कि आज इतनी तेज चुदाई करने पर वो खोद भी थक गया और फिर उस ने अपने लंड का पानी अपनी बेहन की चूत में छोड़ दिया.
फारिग होने के कुछ देर बाद गुल नवाज़ ने अपना लंड नुसरत की चूत से निकाला तो मैने उस के लंड पर उस की बेहन की चूत का पानी चमकते देखा.
“ बेहन चोद इतनी रात को नहाने का क्या मकसद है” कहते हुए गुल नवाज़ ने बाथरूम के फर्श पर पड़ी अपनी शलवार को उठा कर उस के साथ अपनी लंड को सॉफ किया और फिर शलवार को पहन का नाडा बाँधने लगा.
नुसरत अभी तक सिंक पर झुकी पूर सकून और बेसूध खड़ी थी. लगता था कि अपने भाई के साथ साथ वो भी फारिग हो गई थी.
मुझ पता चल गया कि बाथरूम में चुदाई का खेल ख़तम हो चुका है और अब किसी भी लम्हे गुल नवाज़ और नुसरत बाहर आ सकते हैं.
इस लिए मैने अपनी चप्पलो को हाथों में थामा और दबे पावं तेज़ी से चलते हुए वापिस कमरे में चली आई…
में जब नुसरत के कमरे में वापिस आई तो अपने भाई सुल्तान के खर्राटे सुन कर मुझ पता चल गया कि मेरा भाई अभी तक सकून से सो रहा है.
में कमरे का दरवाज़ा बंद कर के खामोशी के साथ पलंग पर आ कर लेट गई.
मेरी आँखों के सामने अभी तक नुसरत और उस के भाई की चुदाई का मंज़र एक फिल्म की तरह चल रहा था.
उन्ही दोनो के बारे में सोचते सोचते मेरा हाथ खुद ब खुद मेरी शलवार के अंदर मेरी पानी छोड़ती फुद्दी तक दुबारा जा पहुँचा.और में अपनी उंगलियों से अपनी चूत को मसल्ने लगी.
में अपनी उंगली अपनी चूत मे ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगी. कुछ देर चूत मसल्ने के बाद मेरी स्पीड बढ़ गयी.
मेरे मुँह से सिसकारियाँ हल्की हल्की आवाज़ मे निकलने लगी . मैने अपने आप को थोड़ा संभाला ताकि मेरी सिसकयों की गूँज मेरे भाई के कानों में ना पड़ सके.
अपनी नंद और उस के भाई की चुदाई को याद कर के रात के अंधेरे में अपने ही सगे भाई के साथ एक ही बिस्तर पर लेट कर अपनी चूत के साथ खेलने का ये तजुर्बा मेरे लिए बिल्कुल अनोखा और दिल कश था.
मेरी चूत में एक आग लगी हुई थी और ये आग आहिस्ता आहिस्ता बे काबू होती जा रही थी.
कुछ ही देर बाद मुझ एक झटका लगा और मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया.
में फारिग तो ज़रूर हो गई मगर मेरी चूत में लगी आग शायद अभी बुझी नही थी.फिर रात के किस पहर मेरी आँख लगी मुझे खुद पता ही ना चला.
उस वक़्त रात का शायद आख़िरी पहर था.जब नींद के आलम में मुझे मेरी कमीज़ के अंदर से अपने मम्मो पर किसी के बे चैन हाथ और किसी की गरम ज़ुबान अपनी “धुनि” ( नेवेल ) पर “रेंगते” हुई महसूस हुई.
पहले तो में समझी कि शायद में कोई ख्वाब देख रही हूँ. मगर दूसरे ही लम्हे में महसूस किया. कि मैने अपनी कमीज़ और ब्रेजियर पहनी तो ज़रूर है.
मगर मेरी कमीज़ मेरे मम्मो तक उपर उठी हुई थी और मेरे मम्मे भी ब्रेजियर से आज़ाद हो कर अंधेरे में “नंगे” हो रहे हैं.
जब कि मेरी शलवार मेरे जिस्म से अलग हो चुकी है और अब में बिस्तर पर बगैर शलवार के आधी नगी पड़ी हुई हूँ.
ये सब कुछ महसूस करते ही मुझे समझ आ गई. कि ये कोई ख्वाब नही बल्कि हक़ीकत में मेरा भाई रात के पिछले पहर मुझे अपनी बीवी समझ कर नंगा करने पर तुला हुआ है.और ये बात समझ आते ही में एक दम से हड बड़ा कर उठ गई.
इस से पहले कि में सम्भल पाती. सुल्तान भाई जो कि अब मेरी टाँगों के बीच में बैठा हुआ था. उस ने एक हाथ से मेरी गान्ड को हल्का सा उपर उठाया और अंधेरे में अपना मुँह आगे बढ़ाते हुए अपनी गरम ज़ुबान को मेरी गोश्त से भर पूर रानों के उपर फेरने लगा.
यूँ पहली बार अपनी रानो पर अपने भाई की ज़ुबान को “रेंगता” हुआ महसूस कर के मेरे बदन में एक आग सी जल उठी.
अभी में अपनी रानो पर सरकती हुई अपने भाई की ज़ुबान से ही लुफ्त ओ अंदोज़ हो रही थी. कि इतने में मेरी रानो पर “रेंगती” सुल्तान भाई की ज़ुबान मेरी चूत तक आन पहुँची..
ज्यूँ ही सुल्तान भाई ने मेरी चूत को अपने मुँह में लिया. तो हम दोनो बेहन भाई को जैसे एक शॉक सा लगा.
मुझे तो इस लिए ये शॉक पहुँचा. क्यों कि मेरे शोहर गुल नवाज़ ने हमारी तीन साला शादी शुदा ज़िंदगी में आज तक कभी इस तरह मेरी फुद्दी को अपने मुँह में नही लिया था.
जब कि भाई ने मेरी चूत पर थोड़े भरे हुए बालों में अपना मुँह फेरते ही एक हेरत भरी आवाज़ में बोलना चाहा. “ नुसरत कल तो तुम्हारी फुद्दी की शवीईई” ये कहते हुए भाई ने अपना मुँह मेरी चूत से अलग करने की कोशिश की.
“उफफफफफफफ्फ़”भाई के मुँह से ये इलफ़ाज़ सुन कर मेरे तो “होश” की खता हो गये.
में तो जल्दी में नुसरत से पूछना ही भूल गई थी. कि उस ने अपनी फुद्दी की शेव की हुई है या नही.
मगर अब क्या हो सकता था. अब मुझ ही इस काम को बिगड़ने से बचाना था.
वैसे भी नुसरत और उस के भाई की चुदाई के सीन ने मेरी चूत में जो आग लगाई थी.उस की वजह से मेरी पानी छोड़ती चूत को इस वक़्त सिर्फ़ एक लंड की ज़रूरत थी.
और अब सब रिश्तों नातो को भुला कर सुल्तान भाई मुझे एक भाई के रूप में नही बल्कि एक मर्द के रूप में मेरे सामने नज़र आ रहा था.
इस से पहले कि सुल्तान भाई अपना मुँह मेरी फुद्दी से अलग कर पाता. मैने फॉरन अपने हाथ आगे बढ़ा कर उस के सर को ज़ोर से पकड़ कर दुबारा अपनी फुद्दी पा टिका दिया.
में अंधेरे में दिखाई तो कुछ भी नही दे रहा था. मगर भाई के जिस्म की हरकत से में ये महसूस कर रही थी. कि मेरा भाई शायद किसी”शाषो पुंज” में मुब्तला हो कर “हिचकिचाहट” का मुजाइरा कर रहा है.
मगर में तो आज पहली बार किसी मर्द के होंठों को अपनी फुद्दी पर महसूस कर के पूरी पागल हो गई थी. और इस मज़े के कारण में अपनी गान्ड उठा उठा कर अपनी फुद्दी को ऊपर नीचे कर के अपने भाई के मुँह पर रगड़ने लगी.. जिस से मेरी फुद्दी में लगी आग और तेज होने लगी..
मैने अपने दोनों हाथों से सुल्तान भाई के सर को पकड़ा हुआ था. और भाई के होंठों पर अपनी गरमा गरम फुद्दी को ज़ोर ज़ोर से रगड़ रही थी.
मेरे इस वलिहान पन और खुद सुपुर्दगी के दिलकश अंदाज़ ने शायद मेरे भाई को भी पिघला दिया.
भाई ने अपने सर के उपर जकडे हुए मेरे हाथों को आहिस्ता से अलग किया और फिर बहुत ही प्यार से मेरी पानी छोड़ती फुद्दि के होंठों पर अपनी उंगली फेरी और उंगली को अपने मुँह में डाल कर चूसने लगा.
इस के साथ ही भाई ने आहिस्ता आहिस्ता अपने हाथों से मेरी फुद्दी के होंठ खोल कर अपनी ज़ुबान मेरी गुलाबी चूत के अंदर डाल दी. उउफफफफफफफफफफ्फ़ अहह मेरे मुँह से सिसकरीईईईईईईई निकल गई.
मैने अपनी आँखें बंद कर ली ऑर अपनी फुद्दी को बार बार ऊपर की तरफ़ ले जाती ताकि ज़यादा से ज़यादा अपने भाई की ज़ुबान और होंठो का दबाव अपनी फुद्दी के अंदर महसूस कर पाऊ.
सुल्तान भाई मेरी बेचैनी ऑर मज़े से बढ़ी कैफियत को समझ रहा था.इस लिए कभी सुल्तान भाई मेरी चूत के सुराख वाली जगह में ज़ुबान डालता और कभी वो मेरी चूत के दाने को ज़ुबान से रगड़ता और अपने दाँतों से मेरी चूत और जांघों पर काट रहा था.
में तो ज़ोर ज़ोर से “आआआआअहैीन” भर रही थी ओर अपने हाथ उस के बालों में फेर रही थी.
मेरी चूत इतनी गीली हो चुकी थी कि मेरी चूत का रस मेरी टाँगों से होता हुआ मुझे मेरे हिप्पस पर महसूस हो रहा था..
फिर अचानक मुझे लगा कि मेरे जिस्म में एक तूफान सा आ रहा है.वो तूफान एक दम से आया और मेरा सारा जिस्म अकड सा गया और इस के साथ ही मेरी फुद्दी ने अपना पानी भरपूर तरीके से छोड़ दिया. में आआहह आआहह कर रही थी..
थोड़ी देर बाद मेरी फुद्दी से फूटने वाली गरम फुहार बंद हो गई ऑर में बिस्तर पर बेसूध गिर गई..
मेरा झटके ख़ाता जिस्म जब तक ना संभला उस वक़्त तक सुल्तान भाई मेरी टाँगों के दरमियाँ ही मेरी चूत पर अपना मुँह रख कर लेटे रहे.