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मेरा चुदाई का सफ़र

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जब सबने थोड़ी देर आराम कर लिया तो कम्मो सबके लिए रूह अफजा का शरबत ले आई।

शरबत पीने के बाद तीनों लड़कियाँ मेरे चारों तरफ खड़ी हो गई और बिना कुछ कहे ही बहुत सी बातें अपनी आँखों से कह गई जिसमें मुख्य बात थी कि अब फिर कब? तब सिर्फ़ मेरे साथ!

मेरी भी आँखें जवाब दे रही थी- देखेंगे तब की तब, फिर आ जाना सब की सब!

कम्मो बोली- चलिए खेल खत्म करें या अभी कुछ मन में बाकी है?

हिना ने सब की तरफ देख कर कहा- बोलो क्या मर्ज़ी है आप सब की?

लड़के सब चुप थे लेकिन उर्मि और निशि की मर्ज़ी अभी बाकी खेल खलने की थी.

कम्मो ने कहा- लड़के तो खेल खत्म करना चाहते है सो अच्छा हो गा अगर यह आज का शो यहीं खत्म किया जाए. चलिए लड़कियां और लड़के अलग अलग बाथरूम में अपने कपडे पहन लें.

कम्मो लड़कों को साथ वाले कमरे के बाथरूम में ले गई और तीनों लड़कियाँ वहीं बाथरूम में कपड़े पहनने लगी।

कपड़े पहन कर हम सब फिर बैठक में इकट्ठे हुए।

हिना बोली- कहो, कैसा रहा यह ग्रुप सेक्स का एक नमूना। आशा है आप सब ने इस प्रोग्राम का आनन्द लिया होगा। आगे का प्रोग्राम रखा जाए या नहीं उसके बारे में बाद में सोचेंगे। अब लड़के अपने घर जा सकते हैं लेकिन यह याद रहे कि जो कसम हम सबने खाई है उसका पूरा निर्वाह होना चाहये।

मैं विनोद और राज को कोठी के बाहर तक छोड़ आया जहाँ से उन्होंने रिक्शा कर ली थी।

वापस आया तो लड़कियों में बहस चल रही थी, उन सब का कहना था कि सिवाए मेरे बाकी दोनों लड़के बिल्कुल नौसिखिया थे, उनको काम क्रिया का ज़्यादा अनुभव नहीं था।

कम्मो बोली- मेरा भी यही ख्याल है, उसका मुख्य कारण मैं यह समझ रही हूँ कि शायद यह उनका सेक्स का पहला ही मौका था।

हिना बोली- मैं नहीं समझती कि आगे का प्रोग्राम हम अभी बना सकते हैं क्यूंकि जब तक हमको अनुभवी लड़के और लड़कियां नहीं मिल जाते, आगे के प्रोग्राम के बारे में सोचना भी बेकार है। क्यों कम्मो दीदी?

कम्मो बोली- बिल्कुल ठीक कह रही हो हिना जी!

हिना बोली- लेकिन एक बात जो साफ़ हो गई है वो है कि अपना सोमू कमाल का लड़का है यार, तीन तीन को तीन बार चोद देना और फिर तीन बार हर एक का छूटा भी देना और फिर खुद ज़रा सा भी नहीं थकना… वाह वाह… यह सब किस से सीखा तुमने सोमू? सच सच बताना?

मैं थोड़ा शरमाया और फिर बोला- सच बताऊँ, मेरी सेक्स गुरु कम्मो रानी है, ये सब दांव पेच कम्मो जी ने सिखाये हैं।

तीनो लड़कियों ने खूब तालियाँ बजाई।

हिना बोली- मुझको भी पूरा सेक्स का ज्ञान नहीं है और इन दोनों को भी शायद बहुत कम ज्ञान होगा, क्यों?

उर्मि और निशि ने हाँ में सर हिला दिया।

हिना बोली- कम्मो दीदी, क्या आप हम लड़कियों को भी सेक्स के मामले में ट्रेनिंग दे सकती हो?

कम्मो ने मेरी तरफ देखा और कहा- अगर छोटे मालिक इजाज़त दें तो यह काम हो सकता है।

मैं बोला- हाँ हाँ, ज़रूर ट्रेनिंग दो इनको भी और जो दूसरी लड़कियाँ भी ट्रेनिंग लेना चाहें, उनको भी ट्रेनिंग दो, यह तो पुण्य का काम है।

कम्मो बोली- लेकिन छोटे मालिक इसमें प्रैक्टिकल कर के भी दिखाना पड़ सकता है तो ऐसा पुरुष कहाँ से लाएँगे जो प्रैक्टिकल कर के लड़कियों को समझा सके?

मैं चुप रहा लेकिन हिना बोली- क्यों, अपना सोमू प्रैक्टिकल करके दिखा सकता है अगर ज़रूरत पड़ेगी तो!

मैं चुप रहा और फिर थोड़ी देर सोचने के बाद बोला- खैर वो मदद तो मैं करने को तैयार हूँ, बाकी जो कम्मो कहेगी वो हम सबको करना पड़ेगा। इस काम के लिए कम्मो को भी तो कुछ फीस मिलनी चाहिए न, बेचारी कॅाफ़ी मेहनत करेगी।

हिना बोली- उसकी आप चिंता छोड़ दीजिये, वो मैं संभाल लूंगी। अगले हफ्ते हम फिर यहाँ ही मिलते हैं आगे का कार्यक्रम तय करने के लिए!

 
कॉलेज की लेडी प्रोफेसर

सब लड़कियों के जाने के बाद मैं और कम्मो बैठक में बैठे थे और सोच रहे थे कि हमारा जीवन किस दिशा की ओर जा रहा है।

कॉलेज ग्रुप सेक्स तो एक बुरा एक्सपेरीमेंट था क्योंकि मैं समझता हूँ सबसे कमज़ोर कड़ी वो लड़के थे जिनको इस ग्रुप में शामिल किया गया था।

हिना ने बगैर उनकी कार्य कुशलता जाने ही उनको इस काम के लिए चुन कर बहुत बड़ी गलती की।

जब मैंने कम्मो से पूछा तो वो भी इसी विचार की थी।

फिर मैंने उससे पूछा कि उसका जो अपना क्लिनिक खुलने वाला था उसका क्या हुआ?

उसका जवाब था कि कोई खास पूछताछ नहीं हुई है हालाँकि उसने एक दो दाइयों को कहा भी था।

मैंने कम्मो से पूछा- वो सेठानियों का फ़ोन या वो खुद नहीं आई क्या?

कम्मो मुस्कराते हुए बोली- अगले अफ्ते उनका चेकअप होना है, देखो तब कुछ बात हो सके, क्या आपको उनकी चाहिये?

मैं बोला- देखो कम्मो, तुम्हारे अलावा अगर कोई खूबसूरत औरत या लड़की मेरे जीवन में आई है तो वो हैं रानी और प्रेमा, उनके जैसा शरीर न मैंने अभी तक देखा है और ना देखने की कोई उम्मीद है।

कम्मो बोली- ठीक है आज हम दोनों आपको चोदेंगी और आपका सारा रस निकाल कर ले जाएंगी। वैसे छोटे मालिक, आज शाम को मैं आपकी नज़र भी उतार दूंगी।

अगले दिन मैं टाइम पर कॉलेज चला गया। लंच इंटरवल में मुझको हिना मिल गई और मुझको लेकर कॉलेज के गार्डन में घूमने लगी।

घूमते हुए उसने कहा कि आज छुट्टी के बाद मैं उसके साथ उसके घर में चलूँ, एक ज़रूरी काम है।

मैंने पूछा- वही काम है क्या?

हिना हँसते हुए बोली- नहीं सोमू यार, तुमको किसी ख़ास बन्दे से मिलवाना है।

मैं बोला- बन्दा या बंदी?

हिना बोली- वहीं देख लेना न कि वो बंदा है या बंदी?

मैं बोला- ठीक है, मैं कम्मो को फ़ोन पर बता देता हूँ कि शाम हो जायेगी मुझको घर आते हुए।

कॉलेज की छुट्टी के बाद मुझको अपनी कार में लेकर हिना अपने बंगले में पहुँच गई।

उस वक्त बंगले में उसकी एक मेड थी और एक कुक थी और बाकी परिवार के सदस्य शहर के बाहर गए हुए थे।

उसकी नौकरानी शरबत ले आई और हम पीने लगे।

तभी कोठी में एक और कार आ कर रुकी और एक स्मार्ट लेडी उस में से निकल कर बैठक मैं आई।

हिना ने उठ कर उनका स्वागत किया।

मैं फ़ौरन पहचान गया कि वो तो हमारे कॉलेज की प्रोफेसर थी, मैंने भी उठ कर उनको नमस्कार किया।

हिना ने कहा- मैडम, यह सोमू है अपने ही कॉलेज में प्रथम साल का आर्ट्स का छात्र है। और सोमू, तुम तो मैडम को तो जानते ही होगे।

मैंने कहा- मैडम को कौन नहीं जानता।

मैडम बोली- अरे यार, तुम तो फॉर्मल हो गए हो, हम तो अभी कॉलेज से बाहर हैं न, मेरा नाम निर्मला है, उससे ही पुकारो तुम दोनों।

मैं बोला- जैसा आप कहें निर्मला मैडम!

तब तक मेड कोल्डड्रिंक ले आई थी।

हिना बोली- सोमू, निर्मला मैडम यहाँ एक ख़ास मकसद से आईं हैं। वो मैं खाना खाने के बाद बताऊँगी, चलिए खाना लग गया है।

हम सब उठ कर डाइनिंग टेबल पर आकर बैठ गए और काफी स्वादिष्ट खाना खाने लगे लेकिन मैं इस खाने का पारो के बनाये खाने से मिलान करता रहा और पाया कि पारो के हाथ का खाना ज़्यादा स्वादिष्ट बनता है।

खाने से फ़ारिग़ होकर हम फिर बैठक में आकर बैठ गए।

तब हिना बोली- निर्मला मैडम बेचारी बड़ी मुसीबत में हैं, उनके पति उनकी इच्छा को पूरा नहीं कर पाते क्यूंकि वो ज़्यादा समय अपने कारोबार में बिजी रहते हैं।

यह कह कर हिना मेरी तरफ देखने लगी लेकिन मैं मुंह झुका कर चुप बैठा रहा।

हिना फिर बोली- उनकी प्रॉब्लम को समझ रहे हो सोमू?

मैं बोला- समझ तो रहा हूँ लेकिन मैं उनकी क्या मदद कर सकता हूँ इस मामले में?

हिना बोली- वही जो तुम अक्सर सबकी करते हो?

मैं बोला- क्या मदद चाहिए और कब चाहिए यह निर्मला मैडम को कहने दो हिना प्लीज!

निर्मला मैडम सर झुका कर बैठी रही लेकिन उसके चेहरे के हाव भाव से लग रहा था कि वे काफी दुखी हैं।

मेरा मन तो किया कह दूँ कि मैं मदद के लिए तैयार हूँ लेकिन फिर कम्मो के शब्द मन में गूँज रहे थे कि जब तक कोई भी औरत स्वयं यौन संबंध के लिए नहीं कहे, मुझको आगे नहीं बढ़ना चाहिए।

मैंने कहा- निर्मला मैडम जी, मैं हर प्रकार से आप की सहायता करने के लिए तैयार हूँ लेकिन आप कुछ बताएँ तो सही?

निर्मला मैडम मेरी तरफ देखते हुए बोली- मैं सेक्स की प्यासी हूँ। मेरे पति मेरा बिल्कुल ध्यान नहीं देते और आज 10 साल से मेरे घर बच्चा नहीं हुआ क्योंकि मेरे पति को सेक्स के प्रति कोई लगाव ही नहीं, न उनमें इसकी कोई इच्छा है लेकिन मैं उनसे तलाक भी नहीं ले सकती।

यह कहते हुए निर्मला मैडम फूट फूट कर रोने लगी।

मैं और हिना उनके पास गये और उनको तसल्ली देने लगे।

फिर वो एकदम से उठी और मुझको कस कर आलिंगन में ले लिया और मेरे होटों को बेतहाशा चूमने लगी।

मैंने भी उनको जफ़्फ़ी डाली और उनकी चूमाचाटी का वैसे ही जवाब देने लगा।

तब हिना बोली- आओ सोमू और मैडम, हम सब मेरे बैडरूम में चलते हैं।

बैडरूम में पहुँचते ही निर्मला तो मेरे ऊपर भूखे शेर की तरह से टूट पड़ी, चूमने चाटने के अलावा मेरे लंड को भी पैंट के बाहर से पकड़ कर मसलने लगी।

हिना ने जल्दी से मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। कमीज और पैंट उतार कर मेरे अंडरवियर में हाथ डालने लगी तो मैंने उसका हाथ रोक दिया और कहा- पहले आप दोनों।

यह सुन कर निर्मला मुस्कराने लगी और हिना भी हंस दी, फिर दोनों ही अपनी साड़ियाँ उतार कर और ब्लाउज उतार रही थी कि मैंने निर्मला का हाथ रोक दिया और बोला- आपको निर्वस्त्र करने का सौभाग्य मुझको दीजिये मैडम जी!

अब मैं निर्मला के ब्लाउज और पेटीकोट को बहुत धीरे धीरे से उतारने लगा और फिर उसकी ब्रा पर जब हाथ रखा तो उसके गोल और सॉलिड मम्मों को देख कर दिल एकदम से खुश हो गया।

उसके पेटीकोट को उतारा तो उसकी चूत पर हल्के काले बाल थे जिनको ट्रिम किया गया था।

मैं एकदम से झुका और अपना मुंह निर्मला जी की चूत में डाल दिया और उसकी चूत के लबों पर हल्के हल्के जीभ फेरने लगा।

ऐसा करते ही निर्मला एकदम से अकड़ गई और मेरा सर पकड़ कर उसने अपनी चूत में और ज़ोर से घुसेड़ दिया, अब उसकी भगनासा मेरे मुंह में थी और मैं उसको धीरे धीरे चूस रहा था।

मैंने अपना मुंह उसकी चूत से निकाल कर उसके मोटे मम्मों पर रख दिया और उसके चुचूकों को मज़ा लेकर चूसने लगा।

उधर देखा तो हिना भी अपने सारे कपड़े उतार कर मेरे अंडरवियर के पीछे लगी हुई थी, उसको जैसे ही उतारा तो मेरा गुसाया हुआ लंड टन से सीधा खड़ा हो गया।

मेरा लंड अब निर्मला की चूत में घुस रहा था और बाहर से घर्षण रगड़ण कर रहा था।

मैंने अपने मुंह को निर्मला के मुंह से जोड़ दिया और उसकी जीभ को चूसने लगा, उसकी जीभ भी मेरे मुंह में प्रवेश कर रही थी। अब मैंने निर्मला को उसके चूतड़ों से उठाया और अपनी बाँहों में लेकर उसको पलंग पर लिटा दिया, फ़िर मैं उसकी गोल और सफ़ेद गुदाज़ झांगों में बैठ कर अपने लंड का उसकी चूत में गृह प्रवेश करवा दिया।

मैंने हिना को इशारा किया कि वो निर्मला के मम्मों को चूसे।

जैसे ही लंड कुछ अंदर जा कर सारा निरीक्षण परीक्षण कर बैठा तो मैंने लंड से धीरे धीरे धक्के मारने लगा, पूरा का पूरा निकाल कर सिर्फ अगली टिप अंदर रख के मैं फिर पूरा अंदर धकेल देता था, एक दो बार लंड को बाहर निकाल कर उसकी भग को थोड़ा लंड से रगड़ा और फिर पूरा घुसेड़ दिया।

इसी क्रम से मैंने निर्मला को चोदना शुरू किया और थोड़ी मेहनत के बाद पहला नतीजा सामने आया जब निर्मला कांपती हुई झड़ गई और मुझको अपने से चपटा लिया।

अब मैंने उसको अपने जांघों के ऊपर बिठा लिया बगैर लंड को निकाले, उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर उसको आगे पीछे करने लगा और साथ ही उसके मम्मों को चूसने लगा।

हिना उसके पीछे बैठ गई और उसको आगे पीछे होने में मदद करने लगी, मैं कभी उसके लबों को चूसता और कभी उसकी जीभ के चुसके लेता, वो काफ़ी ज़ोर ज़ोर से अपनी कमर से धक्के मार रही थी।

मैंने उसको कस कर जफ़्फ़ी मारी हुई थी और उसके मम्मों को अपनी छाती से क्रश किया हुआ था।

इस पोज़ में भी वो ज़्यादा देर नहीं टिक सकी और जल्दी ही ‘ओह्ह्ह आआह’ कह कर उसने अपना सर मेरे कंधे पर लुढ़का दिया और कम्कम्पाते हुई चूत से ढेर सारा पानी गिरा दिया।

मैंने देखा वो काफी थक चुकी थी तो मैंने उसको लेट जाने दिया।

मैं उठा और हिना के पीछे पड़ गया क्यूंकि मेरा लाला लंडम बहुत ही खूंखार मूड में था। मैं हिना को लेकर बेड में आ गया, निर्मला के पास ही उसको घोड़ी बनने के लिए कहा और खुद पीछे से उस पर बड़ा तीव्र हमला बोल दिया।

निर्मला भी यह खेल देख रही थी।

मैं लंड को पूरा हिना की चूत में अंदर डाल कर आहिस्ता आहिस्ता अंदर बाहर करने लगा पूरा अंदर और फिर पूरा बाहर। हिना की चूत भी पूरी तरह से पनिया रही थी तो उसको भी चोदने का अलग ही आनन्द था, दोनों की चूत का पूरा हालाते हाजरा भी मिल रहा था, निर्मला की चूत ज़्यादा खुली और लचकीली थी लेकिन हिना की चूत टाइट और रसीली थी, निर्मला काफी सालों से ब्याहता थी लेकिन हिना तो अनब्याही थी।

मेरे धीमे धक्के अब तेज़ी में बदल रहे थे और मैं घोड़ी की लगाम अब कस के रख रहा था और साथ ही उसको थोड़ी ढील भी दे रहा था, वो भी अब आगे से पीछे को धक्के मारने लगी, जिसका मतलब साफ़ था कि वो भी अब छुटाई की कगार पर पहुँच चुकी थी।

मेरी चुदाई की स्पीड एकदम से बहुत तेज़ और फिर बहुत धीमी होने लगी, इस प्रकार मैंने हिना को जल्दी ही छूटा दिया।
 
लेडी प्रोफेसर की सन्तान की चाह

मेरा लाला लंडम बहुत ही खूंखार मूड में था। मैं हिना को लेकर बेड में आ गया, निर्मला के पास ही उसको घोड़ी बनने के लिए कहा और खुद पीछे से उस पर बड़ा तीव्र हमला बोल दिया।

निर्मला भी यह खेल देख रही थी।

मैं लंड को पूरा हिना की चूत में अंदर डाल कर आहिस्ता आहिस्ता अंदर बाहर करने लगा पूरा अंदर और फिर पूरा बाहर। हिना की चूत भी पूरी तरह से पनिया रही थी तो उसको भी चोदने का अलग ही आनन्द था, दोनों की चूत का पूरा हालाते हाजरा भी मिल रहा था, निर्मला की चूत ज़्यादा खुली और लचकीली थी लेकिन हिना की चूत टाइट और रसीली थी, निर्मला काफी सालों से ब्याहता थी लेकिन हिना तो अनब्याही थी।

मेरे धीमे धक्के अब तेज़ी में बदल रहे थे और मैं घोड़ी की लगाम अब कस के रख रहा था और साथ ही उसको थोड़ी ढील भी दे रहा था, वो भी अब आगे से पीछे को धक्के मारने लगी, जिसका मतलब साफ़ था कि वो भी अब छुटाई की कगार पर पहुँच चुकी थी।

मेरी चुदाई की स्पीड एकदम से बहुत तेज़ और फिर बहुत धीमी होने लगी, इस प्रकार मैंने हिना को जल्दी ही छूटा दिया।

उधर देखा तो निर्मला अब अपनी ऊँगली चूत में डाल रही थी जो हरकत मेरे लंड को पसंद नहीं आई।

मैंने लेट कर निर्मला को अपने ऊपर आने के लिए निमंत्रित किया जिसको उसने सहर्ष स्वीकार कर लिया। मैं लेटा था और वो मेरे ऊपर बैठी थी और खुले आम वो मुझ गरीब को चोद रही थी।

मौका देख कर मैं उसके मम्मों के साथ खेल रहा था या फिर उसकी चूत में ऊँगली डाल कर उसकी भग को मसल रहा था।

ऐसा करने से निर्मला का मज़ा दुगना हो रहा था लेकिन मुझको काफी आराम मिल रहा था और मुझको ऐसा लग रहा था कि मेरी मोटरसाइकिल निर्मला के गेराज में खड़ी है और उसकी चूत उसकी सफाई कर रही हो।

थोड़ी देर बाद गेराज वाली चूत पकड़ धकड़ में लग गई और फिर आखिर में उस गेराज में लगे फ़व्वारे खुल गए और मेरी मोटरसाइकिल की पूरी धुलाई हो गई।

यानि निर्मला एक बार फिर झड़ गई और उतर के सीधे मेरे मुंह से अपना मुंह चिपका लिया।

हिना जो पास ही खड़ी थी वो निर्मला के हटते ही मेरे लौड़े पर झपट पड़ी और उसको मुंह में ले कर चूसने लगी जैसे मलाई वाले पान की ग्लोरी हो!

जब हिना ने पूरी मलाई चाट ली तो मैंने पूछा- क्यों देवियो? बस करें या फिर अभी और मैच खेलने की इच्छा है?

निर्मला मेरे मज़ाक को समझ गई और हँसते हुए बोली- बस अब और नहीं, सारे प्लेयर्स बहुत थक गए हैं।

हिना ने अभी भी मेरे लौड़े को पकड़ा हुआ था तो मैंने उससे प्रार्थना की- आप कृपा कर हमारे बॉलर को तो छोड़ दें, वो बेचारा घर जाए!

कपड़े पहन कर बैठे ही थे कि हिना ने चाय मंगवा ली और हम सब गर्म गर्म चाय पीने लगे।

फिर निर्मला बोली- जैसा कि मैंने बताया था, मेरी माँ बनने की बहुत इच्छा है लेकिन कोई साधन नहीं जुट रहा है।

मैं बोला- कैसा साधन जुटाने की कोशिश कर रही हैं मैडम आप?

निर्मला बोली- किसी पुरुष की मदद से गर्भाधान हो सके तो अच्छा है!

मैं बोला- अगर आप संजीदा हैं तो मैं इसकी राह सुझा सकता हूँ।

निर्मला बोली- कैसी राह?

मैं बोला- हमारी कोठी में एक हाउसकीपर है वो काफी होशियार दाई भी है, आप चाहें तो उससे मैं आपको मिलवा सकता हूँ, आगे वो सलाह देगी कि क्या करना है।

निर्मला ने खुश होते हुए कहा- बहुत अच्छा, मैं उससे अवश्य मिलना चाहूंगी।

मैंने निर्मला और हिना का थैंक्स किया और घर के लिए निकलने लगा की निर्मला बोली- सोमू तुमने किस तरफ जाना है?

मैंने अपनी कोठी का पता बता दिया।

निर्मला बोली- चलो सोमू, मैं तुमको तुम्हारी कोठी में ड्राप कर देती हूँ मेरे तो रास्ते में पड़ेगी वो!

मैं इंकार करता रहा पर वो नहीं मानी और मुझको कार में बिठा लिया, हिना से बाई और थैंक्स किया और ‘फिर कल मिलते हैं’ का वायदा किया।

मेरे घर के पास आते ही वो चौंक कर बोली- अरे यह तो हमारे जानने वाले ठाकुर साहब की कोठी है, क्या तुम उनको जानते हो?

मैंने कहा- मैं उनका ही बेटा हूँ।

वो बड़ी गर्म जोशी से बोली- वाह सोमू यार, तुम तो अपने ख़ास निकले।

मैं भी ख़ुशी से बोला- मैडम जी क्या पता था कि आप हमारी जानकार निकलेगी, अंदर आइये, मैं आपको कम्मो से मिलवाता हूँ।

वो नानुकर करने लगी लेकिन मैं भी ज़बरदस्ती उनको अपनी कोठी में ले आया।

चोकीदार राम लाल ने सलाम किया।

फिर मैं मैडम को लेकर बैठक में आ गया और जल्दी ही कम्मो भी वहाँ आ गई।

मैंने उनका परिचय कराया और उनकी प्रॉब्लम भी बताई तो कम्मो बोली- अगर आप कल आ जाएँ तो मैं आपका पूरा चेकअप कर लूंगी और उसके बाद सोचेंगे कि क्या करना है।

अगले दिन निर्मला मैडम मेरे साथ ही मेरे घर आ गई.

खाना खाने से पहले कम्मो उनको लेकर मेरे बेडरूम में चली गई और आधे घंटे बाद वापस आई।

कम्मो ने आते ही कहा- मैडम तो बिल्कुल ठीक हैं, जो भी कमी है वो इनके पति में होगी।

मैं बोला- फिर क्या सोचा मैडम जी?

निर्मला मैडम बोली- कम्मो का सुझाव है कि मैं किसी दूसरे मर्द द्वारा गर्भाधान कर लूँ। लेकिन ऐसा मर्द मुझको कहाँ से मिलेगा?

कम्मो बोली- अगर आप बुरा ना मानें तो मेरा सुझाव है कि छोटे मालिक यह काम भली भांति कर सकते हैं।

निर्मला मैडम बोली- लेकिन यहाँ छोटे मालिक कहा मिलेंगे और वो क्यों तैयार होंगे इस काम के लिए?

कम्मो और मैं ज़ोर से हंस दिये और मैडम हमको हैरानी से देख रही थी।

निर्मला मैडम बोली- आप दोनों हंस क्यों रहे हैं? क्या मैंने कुछ गलत कह दिया?

कम्मो हँसते हुए बोली- अरे मैडम छोटे मालिक तो आपके सामने ही खड़े हैं, और आप इन का थोड़ा सा लुत्फ़ भी ले चुकी हैं आज!

मैडम हैरानी से बोली- तुम्हारा मतलब छोटे मालिक सोमू है क्या?

मैं मुस्कराते हुए बोला- आपका सेवक मैडम, आपके सामने खड़ा है।

निर्मला मैडम इतनी खुश हुई कि आगे बढ़ कर मुझ को गले लगा लिया और मेरे लबों पर चुम्मियों का अम्बार लगा दिया।

वो सारे घटना चक्र से घबरा गई और सोफे पर बैठ गई और कम्मो उसके लिए कोक ले आई।

थोड़ी देर बाद वो संयत हो गई।

मैडम बोली- कम्मो क्या तुम जानती हो तुम क्या कह रही हो? क्या सोमू गर्भाधान कर सकेगा?

कम्मो फिर हंसने लगी और बोली- ऐसा है मैडम जी, सबसे पहले इस छोटे मालिक ने मुझको गर्भवती किया, इसके बाद कम कम से इस सांड नुमा छोटे मालिक ने अब तक 10 औरतों को गर्भवती किया है और सब की सब ने इन से गर्भधारण केवल अपनी मर्ज़ी से किया है, इन्होंने कभी भी किसी लड़की या स्त्री को उसकी मर्ज़ी के खिलाफ ना तो यौन क्रिया की है न उसको गर्भाधान किया है।

मैडम बोली- वो तो मैंने आज हिना के बंगले में देख लिया है, इसने मुझसे 3-4 बार सेक्स किया है लेकिन एक बार भी इसका नहीं छूटा था मेरे या फिर हिना के अंदर। ऐसा क्यों?

कम्मो बोली- छोटे मालिक को मैंने सेक्स ट्रेनिंग दी है बचपन से और इनको अपने पर पूरा कंट्रोल करना सिखाया है। इसलिए जब तक इनकी मर्ज़ी ना हो यह कभी नहीं छुटाते।

मैडम अभी भी हैरान थी और हैरानगी से सर हिलाते हुए बोली- कुछ विश्वास नहीं हो रहा, लेकिन मैं तो आज सोमू का जलवा देख चुकी हूँ, अच्छा कम्मो, मुझको आगे क्या करना होगा?

कम्मो मैडम को एक तरफ ले गई और कुछ पूछा जिसका जवाब मैडम ने दे दिया।

कम्मो बोली- मैडम, अभी समय ठीक नहीं है आप इस काम के लिए कम से कम 20 दिन इंतज़ार कर लीजिये फिर आपका काम शुरू करेंगे। ठीक है? इस बीच आप जब चाहें, सोमू के साथ यहाँ आ सकती है।
 
मेरी मौसेरी बहन की चूत

अभी हम यह बातें कर ही रहे थे की फ़ोन की घंटी बजी।

मैंने फ़ोन सुना और वो मम्मी जी का था।

हाल चाल पूछने के बाद वो बोली- सोमू, वो कानपुर वाली मौसी जी और उनकी दो बेटियाँ वहाँ लखनऊ आ रही हैं, वो कुछ दिन वहाँ ठहरने का प्रोग्राम बना रही हैं, कह रही थी कि वे हमारी कोठी में ठहरना चाहती हैं, बेटा, मैंने हाँ कर दी है, उनका ख़ास ख्याल रखना। वो कम्मो अगर तेरे नज़दीक है तो उसको फ़ोन देना, मैं उसको समझा देती हूँ।

मैं बोला- ठीक है मम्मी जी!

यह कह कर मैंने फ़ोन कम्मो को दे दिया।

फ़ोन पर बात करने के बाद कम्मो बोली- छोटे मालिक, आपने अपनी मौसी को पहले देख रखा है क्या?

मैंने कहा- हाँ देखा है कई बार, क्यों?

कम्मो बोली- मालकिन कह रही थी कि वो थोड़ी सनकी हैं, उनकी बातों का बुरा ना मानना आप सब!

मैं बोला- हाँ हैं तो थोड़ी सनकी लेकिन ऐसी डरने की को कोई बात नहीं, मैं उनको संभाल लूँगा। हाँ आज रात को तुम दोनों चुदवा लेना नहीं तो काफी दिन टाइम नहीं मिलने वाला। मैंने भी आज की चुदाई में नहीं छुटाया सो रात को तुम्हारी या फिर पारो की चूत को हरा करना है।

अगले दिन कॉलेज से वापस आया तो मौसी और उसकी बेटियाँ अभी तक नहीं आई थी। मैं खाने पर उनका इंतज़ार करने लगा।

थोड़ी देर बाद ही चौकीदार रामलाल मौसी जी और उनकी बेटियों का सामान ले कर अंदर आ गया।

मौसी जी से चरणवंदना के बाद उनकी दोनों बेटियों की तरफ देखा तो दोनों ही सुन्दर और स्मार्ट लगी, साड़ी ब्लाउज में दोनों ही काफी अछी लग रही थी।

मिल कर हेलो हॉय हुई और मैंने अपना नाम बताया और उन दोनों ने भी अपने नाम बताये, बड़की का नाम मिन्नी और छोटी का नाम टिन्नी था।

मिन्नी थोड़ी ठहरे हुए स्वभाव की थी और टिन्नी काफी चंचल थी लेकिन दोनों थी बहुत ही बातूनी। मिन्नी कानपुर में गर्ल्स कॉलेज में इंटर के फाइनल में थी और टिन्नी मेरी तरह फर्स्ट ईयर में थी।

मिन्नी उम्र में भी मुझ से साल दो साल बड़ी थीं। ये मौसी जी मेरी मम्मी के रिश्ते में बहन थी, मेरी सगी मौसी नहीं थी।

उन्होंने आते ही अपना सनकीपन दिखाना शुरू कर दिया।

वो रसोई में गई और पारो को बोली- जितने दिन हम यहाँ हैं, खाना हम से पूछ कर बनाया जायेगा और सिर्फ कुछ चुनी हुई सब्जियाँ ही बनेगी, मीट रोज़ बनेगा और वो भी सिर्फ बकरे का!

मौसी ने यह भी बताया कि कल मौसा जी भी आ रहे हैं तो उनका कमरा तैयार कर दिया जाये।

कम्मो ने मेरे साथ वाला कमरा लड़कियों को दिया था और उनसे काफी दूर वाला कमरा मौसी के लिए तैयार किया गया था।

वो मौसी को लेकर दोनों कमरे उनको दिखा आई और मौसी को दोनों ही कमरे पसंद आ गए थे।

उस रात कुछ नहीं हुआ सिवाय इसके कि हम तीनों काफी देर मेरे कमरे में बैठ कर गपशप करते रहे।

मिन्नी ने कई बार कोशिश कि वो मेरी आँखों में आँखें डाल कर बात कर सके लेकिन मैंने उसको ज़्यादा छूट नहीं दी।

अगले दिन जब मैं कॉलेज से लौटा तो मौसा जी भी पहुँच चुके थे, उनसे मिल कर चरण स्पर्श किया और पूछा- आपको अपना कमरा पसंद आया है न?

तब मौसी ने बताया कि वो बड़की मिन्नी की सगाई पक्की करने आये हैं, यहीं लखनऊ का लड़का है और अपना कारोबार है।

मैंने ख़ुशी का इज़हार किया और फिर हम सबने मिल कर खाना खाया।

आते जाते दो बार मिन्नी से मेरी टक्कर होते होते रह गई और हर बार वो मेरी बाँहों में आकर झूल जाती थी।

मैं समझ गया कि मिन्नी टक्कर के अलावा भी कुछ और चाहती है।

अगली बार जब वो मेरे रास्ते से गुज़री तो मैं सावधानी से एक साइड हो गया लेकिन वो जानबूझ कर मेरे लौड़े को हाथ से छूते हुए निकल गई।

अब जब मौका लगा तो मैं भी साइड से निकलते हुए उसके चूतड़ों को हाथ लगाता गया।

थोड़ी देर बाद वो फिर मुझको रास्ते में मिली और इस बार उसने जानबूझ कर अपना बायां मुम्मा मेरी बाज़ू से टकरा दिया।

मैंने मुड़ कर उसको देखा और फिर अपने कमरे में चला गया।

वो भी इधर उधर देखती हुई मेरे पीछे मेरे कमरे में घुस आई और आते ही मुझको कस के जफ़्फ़ी मार दी और लबों पर चुम्मी जड़ कर फ़ौरन भाग कर कमरे से बाहर निकल गई।

मैं कुछ हैरान था, फिर मैं सोचने लगा कि यह तो गेम खेल रही है, मैंने भी सोचा कि चलो इसके साथ गेम ही खेल लेते हैं।

खाने के समय भी हम दोनों डाइनिंग टेबल पर आमने सामने बैठे हुए थे, टेबल पर टेबल क्लॉथ पड़ा हुआ था, मिन्नी उसके नीचे से मेरी जांघों में अपना पैर टिका कर बैठी हुई थी और बार बार मेरे लंड को पैर से छू रही थी।

खाना खाकर हम जब अपने कमरे में आये तो पता चला कि मौसा मौसी कहीं बाहर जा रहे थे।

जैसे ही वो गेट के बाहर हुए तो मिन्नी और टिन्नी दोनों दौड़ कर मेरे कमरे में आ गई और मेरे कमरे का निरीक्षण करने लगी। मैं भी उनको बहुत मना कर रहा था लेकिन वो मान ही नहीं रही थी।

तब मैं मिन्नी के पीछे अपना पैंट में से खड़े लंड को उसके साड़ी से ढके चूतड़ों में टिका कर खड़ा हो गया। वो भी मेरे लंड को महसूस कर रही थी और उसने भी धीरे धीरे अपने चूतड़ों को हिलाना शुरू कर दिया।

उधर टिन्नी हम दोनों के खेल से अनजान मेरी किताबों को देख रही थी।

मिन्नी ज़्यादा भरे हुए शरीर वाली और उभरे चूतड़ों और मोटे सॉलिड मुम्मों वाली लड़की थी। मिन्नी ने इस लंड चूत के घर्षण का आनन्द लेना शुरू कर दिया, अब उसने अपना बायां हाथ मेरे लंड पर रख दिया और सहलाने लगी।

मैंने उसके कान में कहा- अगर तुम चाहो तो और भी ज़्यादा आनन्द लिया जा सकता है।

उसने बगैर मुड़े ही फुसफुसा दिया- कैसे और कहाँ?

मैं बोला- मैं जा रहा हूँ और तुम थोड़ी दूर से मेरे पीछे आना शुरू कर दो और टिन्नी को भी बता आना कि तुम यहीं हो।

उसने हामी में सर हिला दिया और मैं चुपके से बाहर निकल आया और चलते चलते पीछे मुड़ कर भी देखता रहा कि मिन्नी आ रही है न!

मैं चुपके से चलते हुए पीछे के एक कमरे में चला गया जिसका दरवाज़ा खुला रहता था।

थोड़ी देर बाद मिन्नी भी वहाँ आ गई और मैंने झट से उसको अंदर खींच लिया और दरवाज़ा बंद कर दिया।

अब मैंने उसको कस कर आलिंगन में ले लिया और उसके लबों पर एक बहुत ही हॉट किस करने लगा और अपने हाथों को उसके मोटे चूतड़ों पर फेरने लगा, ब्लाउज के बाहर से ही मैं उसके मुम्मों को किस करने लगा।

वो भी मेरे लौड़े पर टूट पड़ी और पैंट के बटन खोलकर मेरे खड़े लौड़े को अपने हाथ में लेकर मुठी मारने लगी।

अब मैं और बर्दाश्त नहीं कर सका और मिन्नी की साड़ी को ऊपर कर के उसकी चूत को सहलाने लगा, उसकी बालों से भरी चूत एकदम रंगारंग हो रही थी।

मैंने भी पैंट को नीचे सरकाया और लाल मोटे लंड को निकाल लिया और मिन्नी को पलंग पर हाथ रखवाकर खड़ा किया और उसकी चूत को सामने कर लिया और अपने लंड का निशाना साध कर उसकी चूत में पूरी ताकत से डाल दिया।

जैसे ही लंड चूत में गया, मिन्नी का मुंह खुल गया और वो आँखें बंद कर चुदाई का मज़ा लेने लगी।

मैंने भी लंड की धक्काशाही तेज़ कर दी और अँधाधुंध लंडबाज़ी शुरू कर दी।

इस धक्कमपेल में मिन्नी दो बार छूट गई और दूसरी बार छूटने के बाद उसने खुद ही जल्दी से चूत पर पर्दा गिरा दिया यानि साड़ी नीचे कर के बाहर की तरफ भागी।

यह कमरा असल में हमारा स्पेयर गेस्ट रूम था लेकिन पूरी तरह से सामान से सुसज्जित था। इस कमरे के बारे में सिर्फ मैं और कम्मो ही जानते थे।

जब मैं कमरे में वापस पहुँचा तो टिन्नी वहीं बैठी हुई मेरी किताब को पढ़ रही थी।

मैं पलंग पर लेट गया और सोच ही रहा था कि अच्छा हुआ मिन्नी की चुदाई का किसी को पता नहीं चला।

तभी टिन्नी बोली- दीदी का काम कर दिया सोमू?

मैं घबरा कर बोला- दीदी का कौन सा काम?

मिन्नी बोली- वही… जिसके लिए तुम पर दीदी बार बार दाना फैंक रही थी?

मैं बोला- कौन सा दाना और कैसा दाना? बताओ न प्लीज?

टिन्नी बोली- तुम मेरे सामने प्लीज वलीज़ ना करो और सीधे से बताओ कि मेरी बारी कब की है?

मैं बोला- कौन सी बारी और कैसी बारी?

टिन्नी चेयर से उठी और मेरे बेड पर आ कर बैठ गई और आते ही मेरे लंड को पैंट के बाहर निकाल कर उसको घूरने लगी और फिर बोली- अच्छा है मोटा भी है और लम्बा भी है, मुझको कब चखा रहे हो यह केला?

मैं चुप रहा और फिर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा, हँसते हुए बोला- तुम दोनों बहनें कमाल की चीज़ हो।

टिन्नी बोली- मैं रात को आपका केला खाने आ रही हूँ।
 
दोनों बहनों की चूत चुदाई

टिन्नी बोली- दीदी का काम कर दिया सोमू?

मैं घबरा कर बोला- दीदी का कौन सा काम?

मिन्नी बोली- वही… जिसके लिए तुम पर दीदी बार बार दाना फैंक रही थी?

मैं बोला- कौन सा दाना और कैसा दाना? बताओ न प्लीज?

टिन्नी बोली- तुम मेरे सामने प्लीज वलीज़ ना करो और सीधे से बताओ कि मेरी बारी कब की है?

मैं बोला- कौन सी बारी और कैसी बारी?

टिन्नी चेयर से उठी और मेरे बेड पर आ कर बैठ गई और आते ही मेरे लंड को पैंट के बाहर निकाल कर उसको घूरने लगी और फिर बोली- अच्छा है मोटा भी है और लम्बा भी है, मुझको कब चखा रहे हो यह केला?

मैं चुप रहा और फिर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा, हँसते हुए बोला- तुम दोनों बहनें कमाल की चीज़ हो।

टिन्नी बोली- मैं रात को आपका केला खाने आ रही हूँ।

मैं बोला- मौसी जी और मौसा जी भी तो हैं क्या उनका डर नहीं है तुम को?

टिन्नी बोली- उनको मैं संभाल लूंगी वैसे भी दोनों रात को नींद की दवाई खा कर सोते हैं सो उनको कुछ पता नहीं चलेगा।

मैं बोला- मिन्नी को तो पता चल जाएगा न उसका क्या करोगी?

टिन्नी बोली- हम दोनों एक दूसरी से कुछ भी नहीं छुपाती।

मैं बोला- इतना भरोसा है तो आ जाओ अभी कुछ नमूना पेश कर देते हैं!

टिन्नी बोली- ठहरो, मैं ज़रा देख कर आती हूँ कि मिन्नी क्या कर रही है।

यह कह कर टिन्नी गई और जल्दी ही वापस आ गई और बोली- मिन्नी तो सो रही है तुमसे सेक्स करवाने के बाद शायद थक गई होगी।

जल्दी से उसने भी अपनी साड़ी ऊपर उठा दी और मैं उसकी काली झांटों से भरी चूत को साफ़ देख सकता था, काफी उभरी हुई चूत थी।

उसने मेरे लौड़े को पैंट से निकाला और झट से मेरे ऊपर बैठ गई, अपने आप ही उसने मेरे लंड को अपनी टाइट चूत में डाला और मेरे गले में बाहों को डाल कर ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे होने लगी।

मैंने उसके छोटे गोल चूतड़ों को अपने हाथ में थामा हुआ था और वो मज़े से झूला झूल रही थी।

उसकी चूत टाइट और बहुत ही रसीली थी और अपनी बड़ी बहन से वो ज़्यादा जानकार और चुदक्कड़ लगी। 5-6 मिन्ट में वो झड़ गई और मेरे जिस्म से चिपक कर हल्के से काम्पने लगी।

लेकिन अभी उसका मज़ा पूरा नहीं हुआ था, मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और मैं उसके ऊपर पैंट और शर्ट पहने ही चढ़ गया, उसके छोटे और गोल मुम्मों को हाथ से सहलाने लगा और फिर मैंने उसको ठीक ढंग से चोदना शुरू किया।

तेज़ और धीमे धक्कों से मैं उसको फिर छूटने के कगार पर ले आया, पूरा निकाल कर पूरा अंदर डालने लगा और वो चंद मिनटों में फिर से झड़ गई।

मैं जल्दी से उसके ऊपर से उठा और अपने कपड़े ठीक ठाक करने लगा और वो भी साड़ी नीचे कर के कमरे के बाहर हो गई।

उसके जाने के बाद कम्मो कमरे में आई और मुस्कराते हुए बोली- वाह छोटे मालिक, दोनों लड़कियों का काँटा खींच दिया आपने?

मैंने हैरान होकर उससे पूछा- तुमको कैसे पता चला कम्मो डार्लिंग? तुम तो सारा टाइम बाहर थी ना!

कम्मो हँसते हुए बोली- मुझ से कुछ नहीं छुपा रहता, मैंने इन लड़कियों को कल ही भांप लिया था कि दोनों ही चुदक्कड़ हैं और फिर लंच पर आपके साथ वो जो कुछ कर रही थी उसको मैं दबी आँखों से देख रही थी।

मैं बोला- वो दोनों रात को भी आने का प्रोग्राम बनाना चाहती हैं लेकिन मुझको डर लग रहा है मौसी से, वो बड़ी ही तेज़ है।

कम्मो बोली- वही तो, मेरी मानो तो इनसे दूर रहो तो अच्छा है।

मैं बोला- वो टिन्नी कह रही थी कि मौसी और मौसा जी रात को सोने की दवाई खा कर सोते हैं, तो उनको कुछ पता नहीं चलता है।

कम्मो बोली- छोटे मालिक, आप की क्या मर्ज़ी है? दोनों को चोद तो बैठे हो, क्या अभी और चोदने की इच्छा है?

मैं बोला- वो तो जल्दी जल्दी की चुदाई थी, मज़ा नहीं आया ख़ास… तुम कहो तो रात को उन दोनों के साथ फिर हो जाए?

कम्मो मेरी मर्ज़ी जान गई थी, बोली- ठीक है मैं उन दोनों का इंतज़ाम कर दूंगी और मौसा मौसी को भी संभाल लूंगी।

मैं बोला- कम्मो रानी, तुम वाकयी में हीरा हो मेरे दिल में बसे प्यार का ज़खीरा हो।

रात को पारो ने खाना इस कदर लज़ीज़ बनाया कि सबने बड़ी तारीफ की ख़ास तौर से मौसा जी ने!

खाना खाने के बाद हम बच्चे बैठक में ही बैठ कर बातें करने लगे और वहीं कम्मो ने उन दोनों बहनों की मर्ज़ी जानने की कोशिश की।

मिन्नी बोली- 12 बजे तक मम्मी पापा गोली खाकर बड़ी गहरी नींद में सो जाते हैं, उस टाइम हम दोनों सोमू के कमरे में आने वाली हैं।

कम्मो बोली- वो तो ठीक है लेकिन अगर कहीं मौसी जाग गई तो फिर क्या होगा?

मिन्नी बोली- हम अभी उनके कमरे में जाएंगी और वो खुद मेरे हाथ से रोज़ की तरह अपनी दवाई खाएंगे। तब तो कोई प्रॉब्लम नहीं कम्मो दीदी?

कम्मो मुस्कराते हुए बोली- क्या कानपुर में भी यही सिस्टम था?

टिन्नी हँसते हुए बोली- काफी अरसे से यही सिस्टम चल रहा है, आप मुस्करा क्यों रहीं हैं दीदी?

कम्मो बोली- तभी शायद तुम्हारे मित्र घर में आते होंगे तुम दोनों का कल्याण करने।

मिन्नी और टिन्नी भी यह सुन कर मुस्कराने लगी।

फिर हम थोड़ी देर यों हीं ही बातें करते रहे और फिर दोनों उठ कर अपने कमरे में चली गई और मौसी भी एक बार सारे घर का क्कर लगा आई।

कम्मो मौसी के जाने के बाद मेरे कमरे में आ आकर बैठ गई।

मैंने पूछा- कम्मो तुमको मालूम था कि मौसी घर का चक्कर लगाएगी?

कम्मो बोली- मालूम तो नहीं था लेकिन ऐसा अंदाजा था कि शायद मौसी घर का चक्कर लगाएगी।

इतने में दोनों बहनें अपनी अपनी अपनी नाइटी पहन कर आ गई मेरे कमरे में और वहाँ कम्मो को देख कर चकरा गई।

मैंने कहा- कम्मो दीदी से आप लोग घबराओ नहीं, वो हमारे साथ ही रहेंगी और हम सबकी मदद भी करेंगी। पहले कमरे का दरवाज़ा तो बंद कर आओ प्लीज।

मिन्नी जा कर दरवाज़ा बंद कर आई।

मैं उठा और सबसे पहले मिन्नी और टिन्नी को होटों पर एक एक किस की और दोनों को बारी बारी से जफ़्फ़ी भी डाली।

कम्मो उठ कर आ गई और मिन्नी की नाइटी उतारने लगी और उसके बाद उसने टिन्नी की भी नाइटी उतार दी।

फिर उसने मेरा पजामा और कुरता भी उतार दिया।

जब हम तीनो नंगे हो गए तो वो खुद भी अपने कपड़े उतारने लगी।

अब हम सब एक दूसरे को देखने लगे। मिन्नी का जिस्म थोड़ा मोटापा लिए हुए था और टिन्नी का जिस्म एक कच्ची कली की तरह लग रहा था। दोनों की चूतें काले और घने बालों से ढकी हुई थी, मिन्नी के मुम्मे काफी सुन्दर लग रहे थे, एकदम सफ़ेद और मुलायम!

टिन्नी के मुम्मे अभी काफी छोटे लेकिन सॉलिड लग रहे थे। ऐसा लगता था कि दोनों बहनों के मुम्मों की चुसाई ज़्यादा नहीं हुई थी।

टिन्नी और मिन्नी ने जब कम्मो को नग्न देखा तो उनके मुख से अपने आप ही ऊऊह्ह्ह निकल गया।

दोनों कम्मो के पास गईं और उसके शरीर के साथ खेलने लगी, उसके मुम्मों, चूतड़ों से वो बहुत ही प्रभावित हुई थी।

कम्मो ने भी उसके मुम्मों को हाथ लगा कर देखा कि कैसे हैं।

कम्मो पहले मिन्नी को ले आई मेरे पास, उसने आते ही प्रगाढ़ आलिंगन किया मुझको और फिर मैं उसके लबों को चूसने लगा।

मिन्नी से मैंने पूछा- तुम मुझ से बहुत बड़ी हो इसलिए पूछता हूँ कि कैसे मुझसे चुदना पसंद करोगी?

मिन्नी ने मेरे लौड़े को देखा और उसको हाथ में लिया और फिर झुक कर उसको मुंह में लिया और थोड़ा सा चूसा और फिर खड़ी हो गई और बोली- लगता तो है कि यह लम्बी दौड़ का घोड़ा है, सबसे पहले मैं इस घोड़े पर खुद सवारी करूंगी।

कम्मो ने कहा- ठीक है आ जाओ मैदान में!

मैं जा कर बेड में लेट गया, मिन्नी आई मेरे दोनों तरफ टांगें रख कर बैठ गई और मेरा खड़ा लंड अपनी चूत में डाल लिया। मैं बड़े शांत भाव से लेटा रहा और उसको अपने घुड़सवारी के अहंकार को मिटाने के उपाय सोचता रहा।

मिन्नी ने लंड अंदर डालने की कारवाई पूरी की और अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगी, उसकी चूत काफी टाइट थी और गीली भी कुछ कम थी, तो रगड़ ज्यादा रही थी।

मैं उसके मुम्मों को छूने लगा और चूचियों के साथ गोलम गोलाई का खेल खलने लगा।

मिन्नी ने धीरे से शुरू करके अब अपनी स्पीड बढ़ा दी थी और आँखें बंद कर के ऊपर नीचे हो रही थी और उसके हर धक्के का असर उसके मोटे मुम्मों पर पड़ रहा था जो उछल रहे थे बेरोकटोक!

मैं और कम्मो उसके मुम्मों का नाटक देख रहे थे।

लेकिन कम्मो अपने हाथ से टिन्नी की चूत को गर्म कर रही थी और हल्के से उसकी भग को रगड़ रही थी।

मिन्नी 5 मिन्ट ऐसे ही मुझको चोदती रही और फिर उसके मुंह से यह शब्द निकल रहे थे- मार दूंगी साले, तुझ को छोडूंगी नहीं, हर बार बीच में छोड़ जाता है भड़वे।

ऐसी बातों के साथ वो पागलों की तरह चोद रही थी मुझको!

मैं और कम्मो थोड़ी हैरानी से उसके इस अजीब रवैये को देख रहे थे।

फुल स्पीड से ऊपर नीचे होते हुए वो एक ज़ोर की चीख मार कर मेरे ऊपर पसर गई और उसका जिस्म ज़ोर ज़ोर से काम्पने लगा। मैंने उसको एक कस के जफ़्फ़ी भी डाली हुई थी फिर भी वो बेहद कांप रही थी।

कम्मो टिन्नी को बुला लाई और उससे कहने लगी- यह देख यह क्या हो रहा है तेरी बहन को?

टिन्नी बड़े आराम से बोली- दीदी को ऐसे ही होता है जब इसका छूट जाता है। आप फ़िक्र ना करें, अभी ठीक हो जायेगी।

मैं भी उठ कर कम्मो के पीछे खड़ा हो गया और मेरा मोटा खड़ा लंड कम्मो की गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था।

यह देख कर टिन्नी जल्दी से आई और कम्मो को हटा कर खुद खड़ी हो गई।

मेरी नज़र तो मिन्नी के नज़ारे पर लगी हुई थी तो मैंने ध्यान नहीं दिया।

टिन्नी अब मेरे लौड़े को पकड़ कर आगे पीछे करने लगी और उसको अपनी चूत पर भी रगड़ने लगी।

मैंने कम्मो की तरफ देखा तो उसने आँख से इशारा किया कि मैं टिन्नी के साथ शुरू हो जाऊँ।

टिन्नी से पूछा- कैसे चुदवाना है?

तो वो बोली- घोड़ी बन कर यार सोमू!

उधर कम्मो मिन्नी को होश में लाने की कोशिश कर रही थी और उसके गले और मुंह पर पानी के छींटे मर रही थी। थोड़ी देर में वो कुछ संयत हुई।

टिन्नी अपनी बहन की बीमारी की परवाह किये बगैर चुदाई के लिए घोड़ी बन गई थी और मुझको जल्दी घोड़ी पर चढ़ने के लिए उकसा रही थी।

मैं बड़ी बेदिली से टिन्नी पर चढ़ा और बगैर कुछ सोचे समझे चुदाई की स्पीड तेज़ कर दी। जितनी तेज़ी से मैं उसको चोद रहा था वो और भी तेज़ी के लिए मुझको उकसा रही थी।

मैंने उसकी कमर को अपने दोनों हाथो में कस कर पकड़ा और अंधाधुंध चुदाई शुरू कर दी, टिन्नी ज़ोर से चिल्लाने लगी- तेज़ और तेज़!

कम्मो उठी और और टिन्नी के मुंह पर हाथ रख दिया और कहा- साली सबको जगा देगी, धीरे बोल!

पर उस पर कोई असर नहीं पड़ा और वो अपने चूतड़ तेज़ी से मेरे लंड की स्पीड के साथ मैच करते हुई चुदवा रही थी।

मैंने अब गहरे और तेज़ धक्के शुरू किए और साथ में उसके भग को भी हाथ से मसलना शुरू किया।

भग का मसलना जैसे निशाने पर तीर लगाना था, वो कुछ ही क्षण में ‘यह जा वो जा’ हो गई और वहीं ढेर हो गई।

कम्मो ने दोनों को कोकाकोला पिलाया और उनके कमरे में छोड़ आई।

मैंने कहा- कम्मो रानी वो तो दोनों बेकार निकली। अब क्या होगा?

कम्मो मुस्कराते हुए बोली- मैं हूँ न छोटे मालिक, चलो जी भर के चोदते हैं एक दूसरे को!

कम्मो गई और दरवाज़ा बंद कर आई और फिर शुरू हुई गुरु और शिष्य की जंग-ऐ-आज़म!

अगले दिन जब मैं कॉलेज से वापस आया और बैठक में गया तो पता चला कि मौसा मौसी कल कानपुर वापस जा रहे हैं।

उनसे पूछा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

मैंने मिन्नी से पूछा तो वो बोली- सगाई वाली बात पूरी नहीं हो सकी है तो हम वापस जा रहे हैं।

मिन्नी ने मुझको बैठक में अकेले देखा तो मेरे पास आकर बोली- आज रात एक बार फिर से मेरी चूत चुदाई दो ना सोमू।

मैं बोला- मिन्नी, कभी नहीं, तुम को चोदना तो बहुत ही खतरनाक साबित हुआ, तुमको तो अपने ऊपर कंट्रोल ही नहीं।

मिन्नी बोली- नहीं, ऐसा है तुमने मेरे साथ बहुत अरसे के बाद सैक्स किया बल्कि किसी पुरुष ने मेरे साथ बहुत अरसे बाद सैक्स किया था तो उस कारण मैं अपना आपा खो बैठी थी।

मैं बोला- बिलकुल नहीं, तुम्हारे साथ चुदाई करना बहुत ही महंगा पड़ सकता है।

मिन्नी बोली- प्लीज सोमू, सिर्फ एक बार कर दो ना?

मैं बोला- क्या कर दूँ? बोलो तो सही, क्या चाहती हो तुम मुझसे?

मिन्नी बेशरम हो कर बोली- तुम्हारा लंड चाहिए मुझको।

यह शोर सुन कर कम्मो भी आ गई वहाँ- क्या बात है? क्यों शोर मचा रही हो तुम?

मैं बोला- इसको मेरा लंड चाहिए और आज ही!

कम्मो बोली- चुप रहो छोटे मालिक, मैं बात कर रहीं हूँ ना, आप जाओ न यहाँ से!

कम्मो मिन्नी को लेकर दूसरे कमरे में चली गई।

और फिर थोड़ी देर बाद मेरे कमरे में आ कर बोली- छोटे मालिक, अब थोड़ा सब्र से काम लीजिये। मैंने उसको समझा दिया है वो रात को एक बार चुदाई के लिए आयेगी। उसकी इच्छा पूरी कर देना, नहीं तो ख्वामखाह में यह बवाल खड़ा कर देगी।

रात को जब मौसा मौसी सो गए तो कम्मो मिन्नी को लाई और मैं जब गहरी नींद सोया हुआ था उसने उसको मेरे खड़े लंड से चुदवा दिया।

बाद में कम्मो ने बताया कि मिन्नी आई थी और 3 बार अपना छूटा कर चली गई थी।
 
लेडी प्रोफेसर की चूत

अगले दिन कॉलेज गया तो हिना गेट पर ही मिल गई और बोली- सोमू मैडम तुम को याद कर रही थी, लंच टाइम में उनको प्रोफेसर्स के कमरे में मिल लेना।

मैंने हामी में सर हिला दिया और अपनी क्लास में चला गया।

इंटरवल में मैं निर्मला मैडम से मिलने चला गया, वो अपने कमरे में अकेली ही बैठी थी तो मुझको देख कर बोली- थैंक यू सोमू, मैंने तुमको यह पूछने के लिये बुलाया है कि क्या तुम आज शाम फ्री हो?

मैं बोला- हाँ मैडम, अभी तक तो कोई प्रोग्राम नहीं बनाया है, आप बताओ क्या काम है?

मैडम बोली- आज छुट्टी के बाद मेरे साथ मेरे घर चल सकते हो क्या?

मैं बोला- हाँ हाँ क्यों नहीं। आप कब जाने का सोच रही हैं?

निर्मला मैडम बोली- यही 2 बजे के करीब, वहीं तुम खाना भी खा लेना।

मैं बोला- ठीक है मैडम।

छुट्टी के वक्त मैडम मेरा कार के पास इंतज़ार कर रही थी, रास्ते में मैडम ने बताया कि उनके पति कुछ दिनों के लिए बाहर गए हैं तो उन्होंने सोचा कि क्यों ना आज सोमू को अपना घर दिखा दूँ।

मैं समझ गया कि घर देखने का तो बहाना है असली काम तो वही चोदम चोदाई है।

मैडम बोली- क्यों सोमू, तुमको बुरा तो नहीं लगा मेरा ऐसे बुलाना?

मैं बोला- नहीं मैडम, मुझको क्यों बुरा लगता? आप इतनी सुन्दर हैं कोई भी आपका दीवाना हो जाए!

मैडम हंसती हुए बोली- अच्छा तुमको तारीफ करना भी आता है। क्या यह कम्मो ने ही ही सिखाया है?

मैं भी हँसते हुए बोला- नहीं मैडम, कुछ कुछ तो सोहबत और संगत ने सिखा दिया है।

जल्दी ही हम मैडम के बंगले में पहुँच गए।

बैठक में बैठे ही थे कि उनकी नौकरानी शर्बत के गिलास लेकर आई, मैंने नौकरानी की तरफ कोई ज़्यादा ध्यान नहीं दिया।

खाने से फारिग होकर हम बैडरूम में आ गए।

इधर उधर की बातें चल ही रही थी कि वही नौकरानी भी बैडरूम में आ गई।

उसको देख कर मैडम ने कहा- सोमू तुम को ऐतराज़ तो नहीं अगर मेरी निम्मो भी कमरे में हमारी हेल्प के लिए रहे?

मैं बोला- नहीं नहीं मैडम। जैसा आप चाहें वही करें!

अब मैंने निम्मो को ध्यान से देखा और देख कर हैरान रह गया कि वो तो बिल्कुल कम्मो की कॉपी लग रही थी।

मैंने मैडम से पूछा- यह निम्मो तो हमारी कम्मो जैसी ही लग रही है। कौन से गाँव की है?

निम्मो बोली- मेरा गाँव यहाँ से ज़्यादा दूर नहीं है, 3-4 घण्टे में बस से पहुँच जाते हैं।

मैं बोला- गाँव का नाम क्या है?

निम्मो ने गाओं का नाम बता दिया।

मैं सुन कर हैरान हो गया क्यूंकि वो तो हमारे ही गाँव का नाम ले रही थी, मैंने उससे पूछा- क्या तुम कम्मो को जानती हो?

निम्मो बोली- हाँ वो तो मेरी चचेरी बहन है।

मैं बोला- तुम को मालूम है वो आजकल कहाँ रहती है?

निम्मो बोली- सुना था कि वो गाँव छोड़ कर कहीं चली गई है।

मैंने मैडम की तरफ देखा और वो समझ गई कि हमारे घर वाली कम्मो ही इसकी बहन है।

लेकिन वो चुप रही और निम्मो से बोली- चलो शुरू हो जाओ निम्मो।

निम्मो मैडम के कपड़े उतारने लगी लेकिन मैंने उसको रोक दिया और खुद ही यह काम करने लगा।

पहले मैडम की सिल्क की साड़ी उतारी धीरे धीरे और फिर उसके ब्लाउज को खोलने लगा लेकिन साथ साथ ही मैं मैडम के लबों पर गरमा गरम चुम्बन भी देने लगा।

मैडम का कद शायद 5 फ़ीट 5 इंच था लेकिन मेरे साथ वो एकदम फिट बैठ रही थी, उनका जिस्म भरा हुआ था, हर हिस्सा साँचे में ढला हुआ लग रहा था, कमर और पेट एकदम स्पाट और मुम्मे मस्त गोल और एकदम सीधे अकड़े हुए लग रहे थे जो 28-30 साल की उम्र में अक्सर कम ही होता है।

मैंने उनके मुम्मों को ब्लाउज के बाहर से चूसना चूसना शुरू किया और एक हाथ उनके गोल और मोटे चूतड़ों पर रख दिया और उन को धीरे से मसलने लगा।

उधर निम्मो मेरे कपड़े उतारने लगी थी, पहले कमीज और फिर पैंट उतार कर वो मेरे अंडरवियर को उतार रही थी। उसका मुंह मेरे लंड की सीध में था और जैसे ही उसने अंडरवियर को हटाया, मेरा खड़ा लंड उसके मुंह पर ज़ोर से लगा और वो पीछे की तरफ गिर गई।

यह देख कर मैडम हंसने लगी लेकिन मैं संजीदा हो रहा था और उससे प्यार से पूछा- निम्मो जी कहीं चोट तो नहीं लगी?

निम्मो पहले तो हैरान हुई और फिर ज़ोर से हंसने लगी और बोली- वाह, क्या लंड है, आँख पड़ते ही मारने लगा है यह तो?

यह कह कर वो मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी।

मैं मैडम ब्लाउज का उतार चुका था और उसकी सिल्क की ब्रा से ढके गोल मोटे और सॉलिड मुम्मों को तारीफ की नज़रों से देख रहा था। फिर वो सिल्की ब्रा भी हटा दी और वो दोनों कबूतर की तरह बाहर उछल कर निकले, तभी मैं मैडम के मुम्मों का मैं आशिक हो गया।

पेटीकोट उतारा तो मैडम की बालों से भरी हुई उभरी चूत को देख कर मैं उसका शैदाई हो गया।

मैं थोड़ा सा हट कर मैडम को ध्यान से देखने लगा।

हुस्न का मुज़स्मा था मैडम का शरीर… देखो तो देखते ही रह जाओ!

काफी मेहनत से अपने शरीर के रख रखाव में लगी थी मैडम, ऐसा साफ़ दिख रहा था।

अब मैडम का यौवन उबाल पर था और मेरा लंड भी उस पर निहाल था और मैं पूरा बेहाल था।

दूसरी तरफ देखा तो निम्मो भी अपने कपड़े उतार चुकी थी। माशाअल्लाह क्या जिस्म था उसका!

कम्मो का दूसरा रूप था लेकिन शरीर थोड़ा कसा हुआ था।

कदोकाठी वैसी ही, शक्ल में उन्नीस बीस का फरक और आँखों में कामातुरता, जिसका मतलब यह था यह भी अपनी मैडम की तरह सेक्स की भूखी थी।

अब मैं पूरी नंगी मैडम को लेकर बिस्तर की तरफ आया और उनसे पूछा- आप की कोई ख़ास पोजीशन की इच्छा है क्या?

मैडम बोली- तुम्हारे ऊपर चढ़ कर तुम से करना है।

मैं बोला- मैडम क्या करना है आपने?

मैडम थोड़ी शरमाई और फिर बोली- वही जो उस दिन किया था।

मैं बोला- नहीं मैडम, आप नाम बताओ उस दिन क्या क्या किया था?

मैडम मेरे मज़ाक को समझ रही थी फिर भी बोली- वही न!

मैं बोला- नहीं मैडम आप साफ़ साफ़ बताओ क्या करना है मुझको?

मैडम अब थोड़ी बेबस महसूस कर रही थी और वो निम्मो की तरफ देख रही थी।

निम्मो मैडम की तरफ से बोली- यह वही चोदम चुदाई के लिए कह रही हैं!

मैं बोला- देखो, मैं भी कितना नादान हूँ इत्ती से बात नहीं समझ सका… अच्छा मैडम, मैं आज अपने तरीके से आपको चोदूंगा। क्यों मंज़ूर है न मैडम?

मैडम ने हामी में सर हिला दिया।

मैंने मैडम को पलंग पर लिटा दिया, मैंने निम्मो को कहा कि वो मैडम के मुम्मों को चूसे और चाटे।

मैं अब मैडम की जांघों को फैला कर उनके बीच मुंह से उनकी चूत को चूस कर उनकी खातिर करने लगा।

निम्मो भी उनके मुम्मों को चूस रही थी, मेरे हाथ मैडम के गोल चूतड़ों के नीचे थे और उनको ऊपर उठा कर मैं अपने मुंह के समांतर ले आया था।

जीभ के कमाल से उनकी भग को चूसा और फिर उनकी चूत के लबों को चूसा और काफी सारी जीभ चूत के अंदर घुमाता रहा था।

मैडम एकदम बेसब्र हो गई थी, उनका जीभ से एक बार छूट ही गया था तो अब उनकी इच्छा थी कि लंड का स्वाद चखा जाए।

अब मैं लेट गया और उनको मेरे ऊपर आने के लिए कहा, वो तो तैयार बैठी ही थी झट से मेरे ऊपर बैठ कर लंड को चूत के अंदर डाल कर धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगी।

मैं भी नीचे से उनके सॉलिड संगमरमरी मुम्मों के साथ खेल रहा था। उधर निम्मो भी मेरे जांघों में अपने मुंह से मेरे अंडकोष को चूस रही थी।

उसके गोल और सॉलिड मम्मे काफी सुन्दर थे।

मेरा बड़ा दिल था कि उन मम्मों का भी मज़ा लूँ लेकिन मैडम की तरफ से हाँ ही नहीं हो रही थी।

थोड़ी देर में मैडम छूटने के निकट पहुँच गई थी और मैंने अब नीचे से खुद धक्के मारने शुरू कर दिए ताकि वो जल्दी छूटें तो मैं निम्मो की लूँ।

अब वो खुद ही धक्के तेज़ी से मार रही थी और मैंने उनको सपोर्ट देने के लिए अपने हाथ उनकी पीठ पर रख दिये और उसके साथ मैचिंग धक्के नीचे से मारने लगा।

चंद मिनटों में ही मैडम का छूट गया और वो मेरे ऊपर पसर गई और उनका शरीर काफी कांप रहा था, मेरे लंड को भी चूत की पकड़ फ़कड़न महसूस हो रही थी।

पूरा छूट जाने के बाद वो मेरे ऊपर से उठ गई और साइड में बिस्तर पर लेट गई।

मैंने निम्मो की तरफ देखा, उसका एक हाथ अपनी चूत में था और दूसरे से वो अपने दूधी को मसल रही थी।

मेरे दिल में रहम आ गया, मैं उठा और निम्मो को बिस्तर पर हाथ रख कर खड़ा कर दिया और पीछे से उसकी प्यासी चूत में लंड घुसेड़ दिया।

वो बेहद पनिया रही थी और मेरे गरम लौड़े को महसूस करके उसकी आँखें मुंद गई और मैं धीरे धीरे धक्के मार कर उसकी चूत को जगाने की कोशिश कर रहा था, पूरा लंड अंदर डाल कर मैं फिर पूरा बाहर निकाल कर सिर्फ लंड की टिप को अंदर रख कर धक्का मार रहा था और साथ में मेरे हाथ उसके मुम्मों पर थे और उनको प्रेम से मसल रहे थे।

काफी दिनों से वंचित चूत बहुत ही जल्दी झड़ जाती है, वैसा ही हुआ निम्मो के साथ, वो चंद मिनटों की चुदाई में झड़ गई।

लेकिन मैं भी लगा रहा धक्कम धकाई में! मेरी इच्छा थी कि इस गरीब का भी काम हो जाए और थोड़ा बहुत आनन्द मैं उसको दे सकूँ तो अच्छा है।

दूसरी बार मैं बहुत ही धीरे धीरे शुरू हुआ और साथ में उसकी चूत पर हाथ रख कर उसकी भग को भी मसल रहा था। यह दोहरा हमला अक्सर औरतें ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर सकती और जल्दी ही हथियार डाल देती हैं।

निम्मो के साथ भी यही हुआ, अब वो अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी और 5 मिन्ट में वो दुबारा छुट गई।

जब उसकी कंपकपी कम हुई तो मैंने उसके लबों को चूमा और उसके कान में कहा- कम्मो, तुम्हारी बहन मेरे घर में रहती है।

उधर मैडम अभी भी आँखें बंद किये लेटी थी तो मैं निम्मो को छोड़ कर मैडम के पास जाकर लेट गया और उनके गालों और कानों पर चुम्मी देने लगा।

मैडम थोड़ी चौकन्नी हुई, मैंने उसके होटों को चूमना शुरू किया और फिर उनके मोटे मलाईदार मुम्मों को बारी बारी से चूसना आरम्भ कर दिया।

अब मैडम की चूत में हाथ डाला तो वो गीली हो रही थी, मैंने उनको घोड़ी बना दिया और अपने खड़े लंड को चूत में डाल कर हल्का धक्का मारा और फिच्च कर के पूरा अंदर चला गया।

अब मैं मैडम को धीरे और तेज़ के मिलेजुले हमले से चोदने लगा।

थोड़ी देर में मैडम के अंदर से उनका खुश्बूदार रस निकल पलंग की चादर पर गिर रहा था।

मैंने थोड़ा सा अपने मुंह में डाला चखने के लिए और थोड़ा मैडम के मुंह में डाल दिया। अपने ही रस को चख कर मैडम तो जैसे पागल हो गई और लगी ज़ोर ज़ोर से पीछे की तरफ धक्के मारने।

मैंने मैडम के कान में कहा- मैं आज आपके अंदर छूटा रहा हूँ ताकि शायद आपका काम बन जाए।

मैडम ने मुस्करा कर हामी भर दी।

मैंने निम्मो को कहा- दो तकिये मैडम के नीचे रख देना।

वो झट से तकिये लाई और उनको मैडमके ठीक चूतड़ों के नीचे रख दिए।

अब मैं हर धक्के में मैडम के गर्भाशय के मुंह को लंड द्वारा ढून्ढ रहा था।

थोड़ी कोशिश के बाद मैंने उसको ढून्ढ लिया और अब जैसे ही मैडम का जोरदार छूटा मैंने भी उनके अंदर गर्भाशय के मुंह पर अपनी पिचकारी छोड़ दी।

वो कोशिश कर रही थी कि वो घोड़ी का पोज़ छोड़ कर नीचे लेट जाए लेकिन मैंने उनके चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से पकड़ रखा था।

जब मेरा रस पूरा अंदर गिर गया तो मैंने लौड़ा निकाले बगैर ही उनको नीचे लिटा दिया और तकियों को एकदम चूत के नीचे एडजस्ट कर दिया।

फिर ही मैंने अपना लौड़ा निकाला और निम्मो को कहा कि वो उसको तौलिये से पौंछ दे।

फिर थोड़ी देर के लिए मैं मैडम के साथ ही लेट गया और एक छोटी सी झपकी भी ले ली।

आधे घंटे बाद उठा और कपड़े पहनने लगा।

मैडम भी उठ गई थी और कपड़े पहन रही थी।

मैं उनके खूबसूरत अंगों को देख रहा था जो धीरे धीरे आँखों से ओझल हो रहे थे जैसे चाँद बादलों के जमघट में ओझल हो जाता है।

जाने लगा तो मैडम बोली- मैं तुमको घर छोड़ आती हूँ!

लेकिन मैं बोला- मैं चला जाऊँगा, आप तकलीफ ना करें।

उनके बंगलो के बाहर से रिक्शा मिल गई, मैं आधे घंटे में घर पहुँच गया।

कम्मो को निम्मो के बारे में बताया सुन कर हैरान हुई कि उसकी चचेरी बहन लखनऊ में रहती है और यह बात उसको मालूम ही नहीं।

कम्मो ने मैडम का फ़ोन नंबर मेरे से लिया और मैडम के नंबर पर फ़ोन किया।

फ़ोन मैडम ने ही उठाया और कम्मो ने जब बताया वो कम्मो बोल रही है तो मैडम ने कहा- सोमू ने तुमको निम्मो के बारे में तो बताया ही होगा। मैं चाहती थी कि यह खबर मैं तुमको सुनाऊँ लेकिन लगता है सोमू ने तुमको पहले ही बता दिया है।

कम्मो बोली- मैडम, मैं निम्मो से मिलना चाहती हूँ अगर आप इजाज़त दें तो!

मैडम बोली- अभी तो मैं कहीं जा रही हूँ पर तुम और सोमू कल दोपहर में दोनों यहाँ आ जाओ तो तुम निम्मो से मिल लेना।

कम्मो ने कहा- ठीक है मैडम जी, हम दोनों कल आ जाएंगे।

मैं बोला- आज मैंने मैडम के अंदर छुटाया है।

कम्मो बोली- अभी कोई फायदा नहीं है, उनकी माहवारी कुछ दिन पहले ही खत्म हुई है।

फिर कम्मो ने बताया कि मौसा मौसी चले गए थे आपके कॉलेज जाने के बाद ही… दोनों काफी दुखी लग रहे थे।
 
बालसखी से मुलाकात

आज मैंने बड़े दिनों बाद अपनी क्लास में बैठे लड़के और लड़कियों को ध्यान से देखा और परखा।

लड़कियाँ अक्सर आगे के दो बेंचों पर बैठती थी लेकिन मैं हर रोज़ आखरी बेंच पर ही बैठ पाता था.

आज जब जल्दी से मैं क्लास में घुसा तो एक लड़की जो बाहर जा रही थी वो मुझ से टकरा गई, मैंने झट उससे सॉरी कहा और अपने लास्ट बेंच पर जाकर बैठ गया।

लेकिन वो लड़की रुक कर मुझ को देख रही थी और मुझको ऐसा लगा कि वो मेरे सॉरी कहने से संतुष्ट नहीं थी, वो जल्दी से पीछे मेरे बेंच के पास आ रही थी।

मैं डर गया और चौकन्ना होकर बैठ गया।

लड़की जल्दी से मेरे पास आई, इससे पहले वो कुछ कह पाती मैंने उससे कहा- मिस, गलती मेरी थी जो आप से टकरा गया था अनजाने में, प्लीज मुझको माफ़ कर दीजिये।

वो लड़की मेरे पास आई और आते ही कहने लगी- तुम सोमू हो ना?

मैं चकरा गया और डरते हुए बोला- जी हाँ, मैं सोमू ही हूँ, क्यों कुछ ख़ास बात है क्या?

लड़की एकदम चहक उठी- अरे सोमू, मुझको नहीं पहचाना क्या?

मैं हैरान था कि मैंने इसको कब देखा है, मैंने सर हिला दिया कि मैं नहीं पहचान पाया।

तब लड़की हँसते हुए बोली- तुमको याद नहीं जब हम बहुत छोटे थे तो एक साथ खेला करते थे।

मैं बोला- सॉरी, मैंने आपको अब भी नहीं पहचाना।

लड़की बोली- अरे, वो प्रतापगढ़ वाले तुम्हारे चाचा जी हैं न, मैं उनकी बेटी हूँ।

मैं एकदम हैरान हो कर बोला- ओह्ह्ह माय गॉड, तुम पूनम हो क्या?

वो बोली- हाँ मैं पूनम ही हूँ तुम्हारी बचपन की गर्लफ्रेंड।

मैं फिर हैरान होकर बोला- लेकिन तुम आज कॉलेज मैं कैसे? पहले तो कभी देखा नहीं?

पूनम बोली- कल ही तो एडमिशन ली है इस कॉलेज में, आज पहला दिन है मेरा इस कॉलेज में और किस्मत देखो मुझको भी वही क्लास मिली जिसमें सोमू पहले से बैठा हुआ है।

मैं भी बहुत खुश होकर बोला- चलो कैंटीन चलते हैं, वहीं बातें होंगी।

पूनम बोली- नहीं सोमू, आज मेरा पहला दिन है, आज नहीं, फिर कभी सही!

मैं बोला- अच्छा यह बताओ, कहाँ ठहरी हो?

पूनम बोली- मेरे एक दूर के कजिन हैं उनके मकान में ठहरी हूँ फिलहाल!

इससे पहले मैं कुछ आगे बोल पाता, प्रोफेसर साहिब कमरे में आ गए।

लंच की छुट्टी में सीधा कैंटीन की तरफ भागा। किस्मत से पूनम वहाँ मिल गई। वो एक टेबल पर अकेली बैठ कर लंच कर रही थी।

मैं उसके पास गया, मुझको देखते ही उसका चेहरा खिल उठा, पूनम बोली- आओ लंच करो ठाकुर साहब!

मैं भी शरारत के मूड में बोला- लंच तो कर लेते ठकुराइन लेकिन मैं तो अक्सर घर में जाकर लंच करता हूँ। आओ तुमको भी घर ले चलता हूँ, लंच भी कर लेना और घर भी देख लेना।

पूनम बोली- क्या नज़दीक ही रहते हो तुम यहाँ से?

मैं बोला- हाँ पास ही है 10 मिन्ट लगते हों रिक्शा से! और सुनाओ बाकी सबका क्या हाल है, आज मम्मी को फ़ोन करता हूँ, तुम यहाँ आ गई हो पढ़ने के लिए और यह सुन कर तो वो काफी खुश होंगी।

पूनम बोली- ठीक है सोमू यार, तुम तो काफी लम्बे और तगड़े हो गए हो।

मैं बोला- ठकुराइन तुम कहाँ कम हो, तुम भी तो इतनी प्यारी और सुन्दर हो गई हो।

खाना खत्म करके हम अपनी क्लास में आ गए। पूनम मेरे ही बेंच पर बैठ गई क्यूंकि आगे के कन्या बेंच सब फुल थे।

आखिरी पीरियड खत्म होने की घंटी बजी तो मैं पूनम को यह कह कर चल पड़ा कि आज कुछ काम है सो कल मिलते हैं।

वो बोली- ठीक है ठाकुर साहब।

अगले दिन जैसे ही कॉलेज में घुसा तो पूनम के अंकल उसको छोड़ कर जा रहे थे। पूनम ने मुझको उनसे मिलवाया और वो बड़े तपाक से मिले और बोले- आप आना बेटा कभी हमारे घर में, थोड़ा दूर तो है लेकिन इतना नहीं।

मैंने ओपचारिक तौर से कह दिया- अवश्य आऊँगा।

फिर मैं और पूनम क्लास में चले गए। जाते जाते हम दोनों के हाथ और एक दूसरे को छू रहे थे और एक बार उसका हाथ मेरे लंड पर भी लगा।

पूनम देखने में काफी अच्छी लड़की लग रही थी, साड़ी और ब्लाउज में लड़कियाँ वैसे ही लड़कों से बड़ी बड़ी लगती हैं। पूनम भी मुझसे उम्र में काफी बड़ी लग रही थी।

हमारा बेंच लास्ट बेंच था क्लास में और वो भी दो सीटर था, मैं और पूनम उस पर काफी कम्फ़र्टेबल बैठे हुए थे।

दूसरी क्लास के दौरान पूनम का हाथ कई बार मेरे जांघों को टच कर रहा था और हम दोनों के घुटने भी अक्सर आपस में रगड़ खा रहे थे।

मैंने पूनम की आँखों में अपनी आँखें डाली तो वो हल्के से मुस्कराई थी और जवाब में भी मैं भी मुस्करा दिया था।

अब मैंने मौका देख कर उसकी कमर में पीछे से हाथ डाल दिया और धीरे से उसको दबा दिया।

पूनम और भी मेरे निकट आ गई लेकिन इस डर से कहीं प्रोफेसर साहिब की नज़र ना पड़ जाए, मैंने अपना हाथ हटा लिया।

लेकिन अब पूनम ने अपन दाहिना हाथ मेरे बाईं जांघ पर रख दिया और मैंने भी शरारत से उसका हाथ उठा कर अपने लंड पर रख दिया।

पहले उसने अपना हाथ ज़रा हटा लिया लेकिन फिर थोड़े टाइम बाद उसने हाथ पुनः मेरे लंड के ऊपर रख दिया।

मैंने भी अपना बायाँ हाथ बेंच के नीचे से उसकी जांघों के ऊपर रख दिया। इस तरह हम एक दूसरे के साथ खेलते रहे जब तक रिसेस नहीं हो गई।

फिर मैंने पूनम का हाथ पकड़ कर उसको उठाया और हम दोनों कैंटीन चल पड़े।

पूनम घर से खाना लाई थी जो हमने मिल कर खाया।

मेरे कुछ मित्र भी हमारे पास आये और उन सबसे मैंने पूनम को मिलवाया कि यह मेरी कजिन है।

फिर मैंने पूनम को आइसक्रीम खिलाई जो आम तौर पर गाँव में नहीं मिलती थी।

कैंटीन में ही बैठे मैंने पूनम को कहा कि वो हमारी कोठी में आकर ही रहे!

उसको यह भी बताया कि कोठी में सिर्फ मैं अकेला रहता हूँ और साथ में दो मेड्स हैं, एक कुक है और दूसरी घर की देखभाल के लिए है।

पूनम बोली- मैं तो तैयार हूँ लेकिन मम्मी पापा से पूछना पड़ेगा न!

मैं बोला- तुम्हारी हाँ है तो उनको मैं राज़ी कर लूंगा। मैं आज ही अपनी मम्मी से बात करूंगा। तुम राज़ी हो तभी तो?

पूनम बोली- ज़्यादा तंग तो नहीं करोगे तुम मुझको?

मैं बोला- आज तो तुम तंग कर रही हो मुझको? हर जगह हाथ रख देती हो?

पूनम बोली- अच्छा जी, और तुम जो मेरी कमर पे पीछे से हाथ रख रहे थे वो क्या था?

मैंने पूनम के कान में कहा- दो दोस्त जो इतने टाइम बाद मिले, थोड़ा थोड़ा प्यार था तो प्रकट तो करना ज़रूरी था ना! क्यों ठीक नहीं क्या?

पूनम बोली- मुझको तो याद नहीं कि तुम मुझको कभी प्यार व्यार करते थे भी या नहीं। हमेशा ही लड़ते झगड़ते थे तुम मुझसे!

मैं खिसयाना होकर बोला- वो बच्चों के झगड़े भी तो प्यार की निशानी थे, क्यों तुम नहीं मानती क्या?

पूनम प्यारी सी हंसी हंस दी- मानती हूँ यार! चलें क्लास में?

घर पहुँच कर मैंने मम्मी को फ़ोन किया और पूनम की सारी बात बताई तो मम्मी बोली कि अभी वो चाचाजी जी को फ़ोन करती हैं।

शाम को ही मम्मी जी का फ़ोन आ गया कि चाचा जी मान गए है, कल तुम पूनम को घर ले आना!

अब मैंने कम्मो को भी बता दिया और पूछा- क्या पूनम के यहाँ आने से हमारे खुले व्यवाहर में कोई फर्क तो नहीं पड़ेगा?

कम्मो बोली- उम्मीद तो नहीं, लेकिन कोई प्रॉब्लम हो गई तो मिल कर सोचेंगे क्या करें?

अगले दिन पूनम क्लास में मेरे वाले बेंच पर ही बैठी थी। जब मैं उसके पास बैठा तो मैंने कहा- फिर कब आऊँ विदाई करवाने?

पूनम मुस्करा कर बोली- डोली लेकर आओगे या ऐसे ही आओगे?

मैं बोला- जैसे तुम चाहो, कहो तो डोली ले कर आ जाता हूँ… क्यों क्या मर्ज़ी है?

पूनम बोली- अभी डोली रहने दो, सिर्फ रिक्शा लेकर आ जाना।

मैं बोला- चाचा जी से बात कर ली है तुमने?

पूनम बोली- कर तो ली है लेकिन क्या यह हम ठीक कर रहे हैं?

मैं बोला- क्या तुम नहीं चाहती मेरे साथ रहना? तुम्हारे मन में कोई संदेह है तो रहने दो! मैं तो तुम्हारे भले के लिए ही कह रहा था।

पूनम बोली- सोमू क्या तुम नाराज़ हो गए हो? मैं यह सोच रही थी कि जब हम साथ रहेंगे तो क्या एक दूसरे से बच पाएंगे?

मैं बोला- क्या तुम बचना चाहती हो मुझसे?

पूनम मेरी आँखों में देखती हुई धीरे से बोली- वही तो, मैं बहुत ही कामातुर हो जाती हूँ कभी कभी!

हम बातें इतनी धीरे से कर रहे थे कि शायद ही किसी के कान में पड़ी हो, फिर भी मैंने पूनम को इशारा किया और कहा- आओ क्लास के बाहर चलते हैं, यहाँ यह बातें करना सेफ नहीं।

हम दोनों उठ कर कैंटीन में चले गए और एक एक कोक पीते हुए बातें करने लगे।

मैं मुस्करा कर बोला- तुम कामातुर हो जाती हो कभी कभी लेकिन मैं तो हर वक्त कामातुर रहता हूँ। चलो अच्छी निभ जाएगी जब मिलेंगे दो महाकामातुर… तुम मेरी लेना और मैं तुम्हारी।

पूनम बोली- उफ़ सोमू, यह तुम कह रहे हो? तुम जो कल तक दूध पीते बच्चे ही थे, आज काम वासना की बातें कर रहे हो?

मैं बोला- कामवासना में तो तब से लिप्त हूँ जब से दूध पीने लगा था।

पूनम शरारतन बोली- किसका दूध पीने लगे थे और कब से?

मैं भी शरारत से बोला- जिसने भी अपनी दूधी मुझको दी मैंने उसी का जी भर के दूध भी पिया और अपना दूध भी पिलाया। यही है अभी तक के मेरे जीवन का सार… दूध पीते और पिलाते रहो!

पूनम अब ज़ोर सोर से हंसने लगी और मेरा हाथ पकड़ कर बोली- मेरा भी पियोगे क्या दूध?

मैंने उस का हाथ पकड़ कर कहा- अगर तुम पिलाओगी तो ज़रूर पियूँगा और रात दिन पियूँगा।

अब पूनम सीरियस हो गई और शर्माते हुए बोली- मैं तो मज़ाक कर रही थी।

मैं बोला- मैं कौन सा सच्ची कह रहा था, मैंने तो आज तक दूध चखा ही नहीं।

अब हम दोनों हंसने लगे।

कॉलेज ख़त्म होने के बाद मैं पूनम को रिक्शा में लेकर उसके चाचा के घर ले गया।

चाचा का घर काफी छोटा था, सिर्फ 2 ही कमरे थे, मैं पूनम का समान लेकर चाची से विदाई ले आया और उनसे कहा कि वो हमारी कोठी ज़रूर आएं।

कोठी पहुँचा तो कम्मो ने पूनम का स्वागत किया और पूनम का समान मेरे साथ वाले कमरे में लगा दिया। पूनम को कमरा बहुत ही पसंद आया।

कोठी के आगे पीछे का लॉन जिसकी देखभाल माली करता था, कई तरह के फूलों से सजा हुआ था।

मैंने उसको वहाँ थोड़ा घुमाया और एक बहुत ही सुन्दर लाल गुलाब का फूल उसको भेंट किया और कहा- वेलकम टू सोमू’ज़ हाउस।

कम्मो हम सबके लिए चाय ले आई और बैठक में ही हम सबने चाय पी और साथ में लखनवी कचौड़ी भी खाई।

अब कम्मो भी आकर हमारे साथ बैठ गई।

मैंने पूनम को बताया- कम्मो ही घर की मालकिन है और सारा घर वो संभालती है।

रात को पारो ने बहुत ही स्वादिष्ट मटन कीमा और हरा पुलाव बनाया था, वो हम सब ने बड़े चाव से खाया।

खाने के बाद मैं और पूनम मेरे कमरे में आ गए और आते ही मैंने पूनम को बाहों में भर लिया।

पूनम थोड़ा कसमसाई लेकिन जब मैंने उसके लबों पर एक लम्बा और गहरा चुम्बन दिया तो उसने अपने हाथ पैर ढीले छोड़ दिए और मेरी बाँहों में झूल गई।

मैं उसकी आँखों को चूमता हुआ उसके गालों को चूम ही रहा था कि अचानक कम्मो कमरे में आ गई।

पूनम मुझसे दूर हटना चाहती थी लेकिन मैंने उसको कस के बाहों में पकड़े रखा और कहा- कम्मो हमारी गुरु है हर काम में और मैं बगैर कम्मो के आज्ञा के कोई भी काम नहीं करता। तुमको कोई ऐतराज़ तो नहीं पूनम?

पहले वो चुप रही और फिर बोली- कम्मो दीदी जब तुम्हारी गुरु है तो मेरी भी गुरु हुई ना, तो उनसे क्या पर्दा?

मैंने ज़ोर ज़ोर से तालियाँ बजाईं और पूनम और कम्मो दोनों को अपनी बाँहों के घेरे में ले लिया, पूनम को किस किया और साथ ही कम्मो को भी किस किया।

मैंने पूनम को कहा- मैं तो बहुत ही कामातुर हो रहा हूँ और मैं पूनम और कम्मो की आँखों से देख रहा हूँ कि वो भी काफी कामातुर हो चुकी हैं तो यदि पूनम जी की आज्ञा हो तो श्रीगणेश करें?

पूनम बोली- मेरी आज्ञा नहीं गुरुदेव की आज्ञा चाहिए? क्यों गुरुदेव आज्ञा है?

कम्मो बोली- ज़रा सब्र करो, तुम दोनों एक दूसरे के बारे में जान तो लो?

पूनम बोली- हम एक दूसरे को खूब अच्छी तरह से जानते हैं। बचपन में सोमू की नाक अक्सर मैं ही पौंछा करती थी! क्यूँ सोमू?

मैं बोला- क्या कह रही हो पूनम? मम्मी जी तो कहती थी कि बचपन में मेरी नाक हुआ ही नहीं करती थी, यह तो जवान होने पर ही उगी थी जैसे मेरी कई चीज़ें जवानी में ही उगी हैं।

यह सुन कर पूनम झेंप गई।

कम्मो बोली- ठीक है तो वस्त्र विसर्जन करें?

पूनम बोली- कहाँ विसर्जन करना है कपड़ों को कम्मो दीदी?

मैं और कम्मो ज़ोर से हंस दिए और मैं बोला- कम्मो का मतलब है कि कपड़े उतारें क्या?

पूनम और भी शरमाई।

लेकिन कम्मो सबसे पहले मेरे ही कपड़े उतारने लगी और जब पूनम ने मेरा लंड देखा तो वो एकदम आश्चर्य में पड़ गई।

लंडप्रकाश जी वैसे ही खड़े थे जैसी कि उनकी आदत थी,

यह देख कर पूनम बोली- अरे सोमू, यह चीज़ कहाँ से खरीद के लाये हो? इतनी मोटी और सख्त छड़ी कहाँ से चुराई?

अब हैरान होने की बारी मेरी थी, मैं हैरानी से बोला- अरे यह मेरा ही है पूनम।

पूनम ज़ोर से बोली- तुम बिल्कुल झूठ कह रहे हो! खेल खेल में मैंने जब इसको देखा था तो उस टाइम यह इत्ता सा था। यह तुम्हारा हो ही नहीं सकता सोमू चोर?

कम्मो का हंसी के मारे बुरा हाल हो रहा था और वो अपने को संभाल नहीं पा रही थी।

मैं भी खिसयाना हो कर बोला- कम्मो हंसी छोड़ो और पूनम के भी कपड़े उतारो। देखें तो सही उसने क्या कहाँ से चुराया है?

कम्मो हँसते हुए पूनम के कपड़े उतारने लगी।

जब वो पूरी नंगी हो गई तो मैंने भी उँगलियों पर गिनना शुरू किया और बोला- यह गोल गोल जो तुम्हारी छाती पे लगे हैं वो भी तुम्हारे नहीं हैं, यह शायद तुमने किसी फिल्म एक्ट्रेस के चुराए हैं और जो यह पीछे गोल और मोटे चूतड़ हैं वो भी तुम्हारे नहीं हैं और कहीं से चुराए लगते हैं। और जो यह तुम ने काले बाल नीचे लगाये हैं यहाँ पता नहीं तुमने क्या छुपा रखा है?

शर्माने की बारी अब पूनम की थी।

मैं नकली गुस्से में बोला- आप तो तीन तीन चीज़ें चुरा कर अपने ऊपर लगा ली है और मेरी एक चीज़ देख कर इतना शोर मचा रही यह लड़की उफ्फ्फ मेरी माँ!

हमारी इस नकली लड़ाई से कम्मो बड़ी खुश थी, उसकी ख़ुशी उसके होटों और आँखों से झलक रही थी।

मैं आगे बढ़ कर कम्मो के कपड़े उतारने लगा। पहले तो वो हक्का बक्का होकर मुझको देख रही थी लेकिन मैंने उसकी साड़ी खींच डाली और फिर उसका ब्लाउज भी उतारने लगा और फिर उसका पेटीकोट भी खींच डाला।

यह सारा काण्ड पूनम चुपचाप देख रही थी।

कम्मो बनावटी गुस्से में बोली- यह क्या कर रहे हो छोटे मालिक, मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो आप?

मैं बोला- मैं चेक कर रहा था कि कहीं तुम्हारे गोल मुम्मे, चूतड़ और काले बाल तो नहीं चुरा लिए पूनम ने? और अपने ऊपर लगा लिए हों क्यूंकि इस लड़की का कोई भरोसा नहीं? बचपन में यह मेरे साथ भी ऐसे ही किया करती थी!

अब तो पूनम और कम्मो मुंह में कपडा ठूंस कर ज़ोर ज़ोर से हंस रही थी।

मैं भी नकली गुस्से में बोला- हंस लो हंस लो तुम दोनों… मैं जानता हूँ बचपन से ही इस लड़की की मेरे लौड़े पर नज़र थी, यह हमेशा इस को अपने ऊपर लगाना चाहती थी! क्यों है न पूनम? सच बोलना?

पूनम भी गुस्साई हुई बोली- हाँ तो थी मेरी मर्ज़ी वो मैं अब पूरी कर लूंगी। कम्मो दीदी देना ज़रा अपनी कैंची, मैं काट ही देती हूँ इस साले को! ना होगी यह लण्डी न बजेगी चूती।

पूनम गुस्से में कैंची ढून्ढ रही थी और मैं अब वाकयी में ही डर कर भाग रहा था और पूनम मुझ को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। और इस भागा भागी में ना जाने कब मैंने पूनम को पकड़ लिया और उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसके लबों पर एक हॉट किस जड़ दी।

उसने भी किस का जवाब किस से दिया और मेरा लौड़ा पकड़ कर उससे खेलने लगी।
 
बालसखी की चूत चुदाई

मैं भी नकली गुस्से में बोला- हंस लो हंस लो तुम दोनों… मैं जानता हूँ बचपन से ही इस लड़की की मेरे लौड़े पर नज़र थी, यह हमेशा इस को अपने ऊपर लगाना चाहती थी! क्यों है न पूनम? सच बोलना?

पूनम भी गुस्साई हुई बोली- हाँ तो थी मेरी मर्ज़ी वो मैं अब पूरी कर लूंगी। कम्मो दीदी देना ज़रा अपनी कैंची, मैं काट ही देती हूँ इस साले को! ना होगी यह लण्डी न बजेगी चूती।

पूनम गुस्से में कैंची ढून्ढ रही थी और मैं अब वाकयी में ही डर कर भाग रहा था और पूनम मुझ को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। और इस भागा भागी में ना जाने कब मैंने पूनम को पकड़ लिया और उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसके लबों पर एक हॉट किस जड़ दी।

उसने भी किस का जवाब किस से दिया और मेरा लौड़ा पकड़ कर उसके संग खेलने लगी।

मैं भी उसके गोल सॉलिड मम्मों को हाथ से मसलने लगा और एक हाथ उसकी काले बालों से ढकी चूत पर रख दिया, ऊँगली से चूत को टटोला तो बहुत ही पनिया रही थी।

फिर मैं ने पूनम को लबों पर एक हॉट चुम्मी दी जिसमें मेरी जीभ उसके मुंह के अंदर उसकी जीभ के साथ दंगा कर रही थी।

कम्मो भी पूनम के पीछे खड़ी होकर उसके गोल मोटे चूतड़ों को प्यार से सहला रही थी।

पूनम भी बार बार अपनी चूत को मेरे लंड से छू रही थी और मेरे लंड की टिप को चूत में छुपे भग से रगड़ रही थी, साथ ही अपनी कमर को आगे पीछे कर रही थी।

अब कम्मो हम दोनों के बीच खड़ी होकर हम दोनों को टाइट जफ्फी डाल रही थी, पूनम अब तकरीबन मेरे से पूरी तरह चिपकी हुई थी। कम्मो के इशारे पर मैंने उसको उठा लिया अपने दोनों हाथों में और लंड को उसकी उभरी चूत के मुंह पर रख कर एक दो चक्कर कमरे के लगा आया और इस दौरान पूनम का मुंह मेरे मुंह से चिपका हुआ था और हम एक दूसरे को बहुत ही कामातुर चुम्बन देने में लगे हुए थे।

पूनम ने अपनी कमर को थोड़ा सा धक्का दिया और लंड एकदम गीली और पनियाई चूत में प्रवेश कर गया।

कम्मो ने कहा- क्या गृह प्रवेश हो गया? छोटे मालिक बधाई हो आपका ‘इत्ता’ सा पूनम की ‘उत्ती’ सी में चला गया।

मैं बोला- देखिये, ध्यान से देखिए, दो दोस्त एक दूसरे को खूब चोद रहे हैं।

और यह कह कर मैंने पूनम को पलंग की साइड में लिटा दिया और आप खड़ा होकर उसकी चूत में लंडा लंड धक्के मारने लगा।

पूनम की गोरी टांगें मेरी कमर के इर्द गिर्द हो रही थी, पूनम बहुत गर्म हो चुकी थी सो कुछ ही क्षण में धराशायी होने के लक्षण दिखाने लगी, उसकी दोनों टांगें जो मेरी कमर के इर्द गिर्द थीं, वो उन को दबा कर मेरी कमर का हिलना डुलना रोक रही थी।

जब वो छूटी तो उसकी टांगों ने मेरा घेराव पक्की तरह से कर दिया था।

वो फिर ज़रा सम्भली तो मैंने उसको बिस्तर पर पूरा लिटा दिया और खुद जल्दी से उसकी चौड़ी हुई टांगों में घुस कर अपना लौड़ा फिर उसकी चूत के हवाले कर दिया।

कम्मो भी मेरे पीछे बैठे हुई थी पलंग पर और मेरे और पूनम को पूरी मदद दे रही थी।

अब मैंने पारम्परिक आसन में पूनम की चुदाई शुरू कर दी यानि वो बिस्तर में लेटी थी और मैं उसके ऊपर लेटा था और लंड मेरा अंदर चूत में समाया था और उसकी गोल टांगें हवा में लहरा रही थी।

प्रतिद्वंदी की आँखें बंद थी, मुँह ज़रा सा खुला था और सांस ज़ोर से चल रही थी।

लेकिन मेरा लंड भी बड़ा बेरहम बना हुआ चुदाई चूत की मर्ज़ी के अनुसार कर रहा था न वो मेरी सुन रहा था न वो पूनम की सुन रहा था।

बस लगा था धक्कम पेल में और चोद रहा था ऐसे कि जैसे हम बैठे हों रेल में!

धीरे से पूरा नाभि तक अंदर डाल कर फिर उसी तरह से धीरे से निकलना उसका चूत के मुंह तक, और फिर यही खेल दुबारा और कितनी बार और लेकिन फिर जब चूत कहने लगे माशाअल्लाह क्या सोच सोच कर चोद रहा है बे? जल्दी कर साले।

मैं बीच में धक्कम पेल छोड़ कर मुम्मों को चूसना और चूचियों को गोल गोल मुंह में घुमाना भी कर रहा था।

अब पूनम ने अपनी कमर ऊपर उठा कर मुझको इशारा किया कि जल्दी करो तो मैं फिर शुरू हुआ तेज़म तेज़ धक्का धक्की में और अपने हाथों को उसके गोल सॉलिड चूतड़ों के नीचे रख कर ऐसी ज़ोर से शुरू कर दी पेलमपेल कि पूनम आनन्द में अपना सर इधर से उधर हिलाने लगी और मुंह सी आअह्हह ऊऊहहह के स्वर अपने आप निकलने लगे!

चंद मिनटों में पूनम अपनी दोनों बाँहों मेरे गले में डाल कर और टांगों को मेरी कमर में लपेट कर मेरे धक्कों को सहन करती हुई यह जा और वो जा हो गई, उसका मुंह मेरे मुंह से चिपक गया और चूतड़ मेरे लौड़े से चिपक गए।

यह देख कर कम्मो ने ताली बजाई और कहा- वाह छोटे मालिक, क्या खूब चोदा है अपनी बचपन की फ्रेंड को!

पूनम के कान के पास अपना मुंह ले जा कर कम्मो ने पूछा- अभी और आये लंडम प्रसाद या फिर थोड़ी देर ठहर के?

पूनम ने दबी ज़बान से कहा- अभी और नहीं और रात में फिर कभी नहीं।

मैं यह सुन कर हट गया पूनम के ऊपर से और अपना गीला और अकड़ा लंड निकाला और कम्मो की चूत में डाला।

कम्मो ने कहा- छोटे मालिक, आप मेरे नीचे आ जाओ अब मुझ को मेहनत करने दो आप तो थक गए होंगे।

यह कर कम्मो मेरे ऊपर आ गई और मेरा गीला लंड उसने झट से अपनी चूत में डाल लिया।

पूनम अधखुली आँखों से यह सब देख रही थी लेकिन मैंने आँखें बंद कर लीं और कम्मो को मेहनत करने दी।

जब देखा कि पूनम को शायद नागवार लगा है तो मैंने अपना दायाँ हाथ बढ़ा कर उसको अपने नज़दीक कर लिया और उसके मोटे मुम्मों से खेलने लगा और साथ ही उसके मुंह से मुंह जोड़ कर उसको चूमने लगा।

उधर कम्मो अपनी ही धुन में मुझको कभी धीरे और कभी तेज़ ऊपर से चोद रही थी।

जब कम्मो ने देखा कि पूनम शायद बुरा मान रही है तो उसने भी पूनम की चूत में उंगली डाल कर उसके भग को सहलाना शुरू कर दिया और जब वो थोड़ी सी गरम हुई तो कम्मो बोली- पूनम, मैं नीचे आती हूँ, तुम आ जाओ और चुदा लो छोटे मालिक से!

पूनम बोली- नहीं नहीं कम्मो दीदी, आप लगे रहो, मुझको ज़रा भी बुरा नहीं लगा है।

कम्मो तब बोली- छोटे मालिक आप ज़रा रुको मैं नीचे आती हूँ और आप मुझको ऊपर से धीरे धीरे ही चोद दो!

यह कह कर कम्मो नीचे आ गई और मैं कम्मो के ऊपर चढ़ गया।

तब कम्मो ने पूनम से कहा- तुम अपनी चूत को मेरे मुंह पर रख दो।

पूनम उठ कर टांगों के सहारे बैठ गई और उसकी चूत कम्मो के मुंह पर आ गई।

अब कम्मो ने नीचे से पूनम की चूत को चूसना शुरू किया और थोड़ी देर में उसके भग को चूस रही ही थी कि पूनम एकदम अकड़ गई और ऐसा लगा कि वो झड़ गई और वो कम्मो के ऊपर से उठने लगी लेकिन कम्मो ने उसको रोक दिया।

उधर मैं ऊपर से कम्मो को धीरे धीरे चोद रहा था और उसकी गीली चूत को चोदने में बहुत आनन्द आ रहा था। पूनम की चूत को कम्मो अभी भी चाट रही थी, पूरी जीभ गोल कर के अंदर डाल रही थी या फिर उसकी भग को चूस रही थी और पूनम को अब फिर से बहुत मज़ा आना शुरू हो गया था।

मेरी चुदाई से और पूनम की चूत चुसाई से कम्मो भी जल्दी ही झड़ गई।

फिर हम तीनों बिस्तर पर लेट गए।

थोड़ी देर आराम करने के बाद पूनम बोली- अब मैं अपने कमरे में जाती हूँ।

मैंने पूनम को रोक लिया- मित्रवर कहाँ जा रहे हो?

पूनम बोली- अपने कमर्वा में जात रहीं।

मैं बोला- काहे जात हो, यहीं सोवत नाहीं का?

पूनम बोली- नहीं न, तुम डिस्टर्ब्वा होगे ना?

मैं बोला- डिस्टर्ब्वा? अभी चुदायन का मज़ा आवत रहिंन और अभो ही ससुर तुम चल पड़े. यही तो कतई ठीक नाही है रे?

यह सुन कर कम्मो और पूनम ज़ोर ज़ोर से हंस पड़ी, हमने हाथ पकड़ कर पूनम को अपने बिस्तर पर लिटा लिया।

हम तीनो एक साथ ही सो गए, एक तरफ पूनम थी और दूसरी तरफ कम्मो।

रात को मैं काफी बार उन दोनों पर चढ़ा था लेकिन यह याद नहीं किस पर कितनी बार!

सुबह जब नींद खुली तो मैं सिर्फ पूनम के साथ नंगा ही सोया था और पूनम भी पूर्ण रूप से नग्न ही थी।

कुछ देर में उसकी चूत के काले बालों से खेलता रहा और फिर उसके मम्मों को चूसने लगा उसकी चूत को हाथ लगाया तो वह काफी गीली हो रही थी।

मैं उस पर चढ़ने की सोच ही रहा था कि इतने में कम्मो चाय के कप ले कर आ गई और मुझको पूनम पर चढ़ने के लिए तैयार होते देख कर बोली- छोटे मालिक, आप तो कभी कभी कमाल ही कर देते हो. बेचारी पूनम पर आप रात में कम से कम 4 बार चढ़े थे और मेरे ऊपर 3 बार और अभी भी आप का मन नहीं भरा है?

मैं हैरान होकर बोला- हाँ, यह हो सकता है कम्मो रानी, क्यूंकि मेरा रात भर एक बार भी नहीं छूटा सो सारा माल तो मेरे अंदर ही जमा हो रहा है और वो मुझ को बार बार तुम सब को चोदने के लिए विवश कर देता है। मुझ को ऐसा लगता है जैसे मेरे लंड में हर वक्त खुजली होती रहती है और वो तभी शांत होती है जब मैं किसी लड़की पर चढ़ जाता हूँ जंगली सांड की तरह!

मैं यह बातें कर ही रहा था की पूनम की नींद खुल गई और वो मुझको और कम्मो को देख कर हैरान हो गई और अपने हाथ से अपने नंगे मम्मे और चूत को छिपाने की कोशिश करने लगी।

मैं बोला- पूनम बेबी रहने दो, हम सब ने तुम्हारा सब कुछ देख रखा है, उठो और चाय पी लो यार!

पूनम मेरे को देख कर बोली- तुम्हारी इत्ती सी तो अभी भी खड़ी है क्या मुझ पर फिर हमला करने वाले थे तुम?

मैं हँसते हुए बोला- हाँ, करने वाला ही था कि कम्मो आ गई और तुम को मेरे पंजों से बचा लिया।

कम्मो बोली- पूनम, तुम को याद है कि कितनी बार इन्होंने तुम पर हमला किया है रात भर में?

पूनम बोली- पूरी तरह तो याद नहीं लेकिन शायद यह मुझ पर 3-4 बार चढ़ा है, मेरी चूत की तो दुर्गति हो गई होगी अब तक!

कम्मो हँसते हुए बोली- घबराओ नहीं, मैंने सुबह देख लिया था, तुम्हारी चूत सही सलामत है, हाँ थोड़ी सी सूजी हुई ज़रूर है।

पूनम रोने का मुंह बना कर बोली- ज़ालिम सोमू, तुम तो मुझको बर्बाद कर दोगे… उफ़ मेरी चूत? कम्मो दीदी मैं चल तो सकूंगी ना?

कम्मो हँसते हुए बोली- चल तो पाओगी लेकिन छोटे मालिक के सहारे की ज़रूरत पड़ेगी!

पूनम रूठते हुए बोली- कभी नहीं, सोमू का सहारा लेना मतलब कई बार चुदाना। कभी नहीं… सोमु का चोदना, चूत का सत्यानाश !!! उफ़ मेरी माँ!

पूनम चाय पीने का बाद कपड़े पहन कर जाने लगी तो मुड़ के मेरी तरफ देखने लगी और मुस्कराते हुए बोली- सोमू आज रात का प्रोग्राम कितने बजे शुरू होगा?

कम्मो हैरान होकर हंसने हुए बोली- छोटे मालिक, यह लड़की आपकी चोट की है, देख लेना यह तुम को हरा देगी।
 
पूनम की दिल खोल कर चूत चुदाई

कम्मो हैरान होकर हंसने हुए बोली- छोटे मालिक, यह लड़की आपकी चोट की है, देख लेना यह तुमको हरा देगी।

अगले दिन पूनम और मैं जब कॉलेज पहुँचे तो मेरे एक सहपाठी मित्र मिल गए और बोले- सोमू यार, तुमने नोटिस बोर्ड देखा क्या?

मैं बोला- नहीं यार, मैं तो अभी कॉलेज आया हूँ। क्या ख़ास बात लिखी है वहाँ?

वो बोला- तुम देख लो तो पता चल जाएगा। यह कौन है तुम्हारे साथ?

मैं बोला- यह पूनम है, मेरी कजिन मेरी ही क्लास में आई है अभी अभी!

दोनों ने एक दूसरे को नमस्कार किया और फिर हम तीनों नोटिस बोर्ड पढ़ने चले गए।

वहाँ एक ट्रिप के बारे में नोटिस लगा था जो उसी महीने होना था।

यह ट्रिप दिल्ली और आगरा भर्मण के बारे में था, दो रात और 3 दिन का ट्रिप था और खास तौर से इतिहास के छात्रों के लिए था, एक सौ रूपए प्रति छात्र का खर्च था, वो छात्र जो इस ट्रिप में भाग लेना चाहते थे 3 दिन में जमा करवाना था।

मैं और पूनम अपनी क्लास में पहुँचे तो वहाँ इस ट्रिप की ख़ास चर्चा हो रही थी।

मैंने पूनम से कहा- तुम चलोगी क्या इस ट्रिप में?

पूनम बोली- जाने की इच्छा तो है लेकिन मम्मी पापा से पूछना पड़ेगा और इतनी जल्दी पैसों का भी इंतज़ाम होना मुश्किल है तो तुम हो आओ!

मैंने कहा- मैं मम्मी पापा से पूछता हूँ और तुम भी आज घर में जाकर पूछ लेना। पैसों की फ़िक्र ना करो!

बाद में पता चला कि ट्रिप की इंचार्ज निर्मला मैडम होंगी और उनका साथ एक और लेडी प्रोफ़ेसर देंगी।

शाम को घर पहुँच कर मैंने मम्मी को फ़ोन से पूछ लिया और उन्होंने कहा- चले जाओ, लेकिन हर रोज़ फ़ोन ज़रूर करते रहना।

पूनम ने जब घर में पूछा तो उन्होंने कहा- क्या सोमू भी जा रहा है और पूनम ने कहा हाँ तो उन्होंने कहा ‘चली जाओ’ लेकिन अपना प्रोग्राम बताती रहना हर रोज़।

रात आई और खाना खाकर हम तीनों बैठक में बैठे दिल्ली आगरा ट्रिप की ही बात कर रहे थे।

हम तीनों ने यह जगह अभी तक नहीं देखी थी तो नई जगह देखने की उत्सुकता थी लेकिन फिर मन में संशय भी था कि आपसी चुदाई कैसे हो पायेगी।

कम्मो ने मेरी तरफ भेदभरी नज़र से देखा और शायद वो नैनीताल ट्रिप के बारे में सोच रही थी।

मैंने कम्मो से पूछा- वो नैनीताल ट्रिप के बारे में पूनम को बता दें क्या?

वो बोली- देख लो छोटे मालिक, क्या पूनम हमारा यह राज़ रख पाएगी?

पूनम बोली- कौन सा राज़ सोमू?

मैं बोला- बड़ा ही भयानक राज़ है, अगर किसी को पता चल गया तो मैं कहीं का नहीं रहूँगा, मेरी इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ जाएंगी।

पूनम अब बहुत उत्सुक हो गई और ज़ोर देकर पूछने लगी तो मैंने कहा- कसम खाओ यह राज़ तुम किसी को नहीं बताओगी?

पूनम बोली- कसम से, तुम्हारी इत्ती सी की कसम खाती हूँ।

मैं और कम्मो दोनों हंस पड़े।

तब मैंने उसको नैनीताल ट्रिप का राज़ बताया कि कैसे चार लड़कियों ने मिल कर मेरा बलात्कार किया और एक बार नहीं, कई बार किया। और हर बार लड़कियों को कम और मुझको ज़्यादा मज़ा आया और यह था बलात्कारी मज़ा।

पूनम बोली- वो लड़कियाँ अभी कॉलेज में हैं क्या?

मैं बोला- हाँ हैं, और रोज़ मुझको पूछती हैं बलात्कार करें क्या?

पूनम बोली- आप क्या कहते हो उनको?

मैं बोला- मैं कहता हूँ अकेली हो या फिर 3-4 हैं और भी? वो हमेशा यही कहती है वही अकेली है। और मेरा जवाब होता है मैं अकेली लड़की से बलात्कार नहीं करवाता, तीन चार मिल कर आओ तो करवा भी लूंगा।

कम्मो पूनम के पीछे बैठी थी और वो मुंह में साड़ी का पल्लू डाल कर ज़ोर से हंस रही थी।

अब पूनम समझ गई कि मैं उसकी टांग खींच रहा हूँ, वो रूठने का नाटक करते हुए बोली- हमको नहीं सुननी तुम्हारी बलात्कारी कहानी।

मैं बोला- तुम सुनाओ, तुम्हारे साथ क्या हुआ था यार?

पूनम बोली- मेरे साथ क्या होना था सोमू ठाकुर? और क्यों होना था रंगीले ठाकुर?

मैं बोला- कुछ तो हुआ होगा ना जो तुम्हारी सील टूटी थी?

पूनम शर्माती हुई बोली- वो तो आम की वजह से हुआ!

मैं और कम्मो हैरान हो कर बोले- आम? कौन सा आम? कैसा आम? और उससे सील टूटने का क्या सम्बन्ध हो सकता है?

पूनम संजीदा होते हुए बोली- वो ऐसा है, जब मैं छोटी थी तो गाँव में अपने ही आमों के बाग़ में कुछ सहलियों के साथ आम तोड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ी थी लेकिन आम तोड़ने के बाद मैं जब नीचे उतर रही तो मेरा पैर फिसल गया और वहाँ में गिर गई और मेरी जो ‘वो’ है न, उससे बड़ा खून गिरा। फिर डॉक्टर ने मम्मी को बताया कि इस हादसे में सील टूट गई है।

मैंने और कम्मो ने बड़ा अफ़सोस जताया और मैंने उसको तसल्ली दी और कहा- कोई बात नहीं, नई लगवा लेना लखनऊ में!

पूनम बोली- अब नई नहीं लगती प्यारे मोहन!

मैं बोला- ऐसा क्यों? मेरा भी ‘इत्ता’ सा साला चूहा खा गया था एक रात को लेकिन कम्मो मेरे साथ गई थी और नया मोटा और बड़ा लगवा लिया था एक ख़ास दुकान थी हज़रात गंज में। क्यों कम्मो?

कम्मो तो अब हंसी के मारे सोफे के नीचे लुढ़क गई थी।

पूनम कुछ समझ नहीं पा रही थी यह क्या हो रहा है।

फिर भी वो इतना तो समझ गई थी कि मैं उसके साथ मज़ाक कर रहा हूँ।

उसने सोफे के पास एक छड़ी पड़ी देखी तो उसको उठा कर मुझ को मारने के लिए दौड़ी और मैं भी दौड़ कर बाहर निकल गया।

अब वो मेरे पीछे भाग रही थी और मैं छुपने की जगह तलाश रहा था। फिर मैं एक खुले दरवाज़े में घुस गया और वहाँ छुप गया।

पूनम ढूंढती हुई जैसे ही उस कमरे में घुसी, मैंने उसको पीछे से अपनी बाहों में दबोच लिया, मेरा खड़ा लंड उसकी गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था और वो कसमसा कर छूटने की कोशिश कर रही थी।

उसके हाथ की छड़ी मैंने अब अपने हाथ में ले ली थी और बोला- हिम्मत है तो छूट के दिखा पुन्नो?

पूनम बहुत ज़ोर लगा रही थी लेकिन मेरी भी पकड़ ठाकुरों वाली थी सो आसानी से छूटने वाली नहीं थी।

मेरा लौड़ा तो आदतन खड़ा ही था तो उसकी साड़ी के ऊपर से उसकी गांड में घुसने की कोशिश में था।

इस पकड़ा पकड़ी में मेरा लंड बहुत ही अकड़ गया था तो मैं बिना कुछ सोचे समझे ही उसकी साड़ी पीछे से ऊपर उठाई और अपने लौड़े को पैंट से निकाल कर उसकी फूली हुई चूत में घुसेड़ दिया।

लौड़ा अंदर जाते ही पूनम का मुंह मेरी तरफ हुआ और मैंने झट से अपना मुंह उसके मुंह से चेप दिया, उसकी कमर को कस कर पकड़ कर मैं धीरे धीरे से लंड को चूत के अंदर बाहर करने लगा।

जैसे जैसे लंड की गर्मी चूत में जा रही थी वैसे वैसे ही पूनम ढीली पड़ती जा रही थी।

अब मैंने उसको पलंग के किनारे पर हाथ टेक कर खड़ा कर के पीछे से धुआँ धार चुदाई शुरू कर दी। मेरा लंड अब पूनम की चूत से पूरा वाकिफ हो गया था, वो उसकी हर हरकत को पहचान गया था।

थोड़ी देर में पूनम एकदम अकड़ी और फिर काफी ज़ोर से कांपी और बेड पर अपना सर रखने लगी।

मैंने उसको अपनी तरफ मोड़ा और उसके लबों पर एक गहरा चुम्बन दे दिया, वो और भी सब लड़ाई भूल कर मेरे को टाइट जफ्फी डाल कर मेरे गले में झूल गई।

फिर हम दोनों संयत हो कर बैठक में लौटे।

और हम को देखते ही कम्मो समझ गई कि चूत चुदाई हो गई है।

पूनम मुझको छोड़ कर सीधे ही कम्मो की गोद में बैठ गई। मैं भी कम्मो की गोद में बैठने की ज़िद करने लगा और फिर हमारी धींगा मस्ती शुरू हो गई जो उम्मीद के अनुसार बिस्तर पर खत्म होनी थी सो वो वहीं ख़त्म हुई।

आज कम्मो काफी खुश लग रही थी, जब मैंने पूछा- क्या बात है?

तो वो बोली- तुम दोनों की लड़ाई देख कर मन बड़ा प्रसन्न हो रहा है। बड़े दिनों बाद इस कोठी में यह हंसी ठट्ठा हो रहा है।

मैं बोला- हाँ कम्मो, तुम शायद ठीक कह रही हो। बड़े दिनों बाद ऐसी लड़की मिली है जो बहुत ही शरारती और चुलबुली है। यह वाकयी में एक मनमोहक लड़की है, जिस घर में जायेगी वहाँ यह तूफान पैदा कर देगी।

कम्मो बोली- हाँ छोटे मालिक, आप ठीक कह रहे हो।

मैं बोला- सोचो ज़रा देर सोचो की बाग़ में आम खाने गई और अपनी चूत फड़वा आई। वाह वाह… क्या बात है पूनम के चाँद की!

पुन्नो बोली- हाँ हाँ, कह लो जितना कह सकते हो। अपना नहीं देखते जब भी बाहर निकलते हो अपना बलात्कार करवा कर आते हो?

यह सुन कर मैं और कम्मो बड़े ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे.

मैं बोला- तभी मैं कहूँ, वो ससुर रिक्शा वाला भी पूछ रहा था कि सब ठीक है न कहीं बलात्कार तो नहीं हुआ तुम्हारा आज बबुआ?

यह सुन कर पुन्नो और कम्मो बहुत हंसी।
 
अब मैं अपने बैडरूम में आ गया और कपड़े उतार कर सोने की तैयारी में लग गया।

इतने में पूनम भी आ गई और मुझको नंगा लेटा हुआ देख कर ज़ोर ज़ोर से तालियाँ बजाने लगी- सोमू की शेम शेम… शेम शेम… नंग धडंग लेटा है बेशर्म कहीं का! तुझको मालूम नहीं माँ बहन का घर है कपड़े पहन कर लेटते हैं?

मैं नकली हैरानी में बोला- किधर हैं माँ बहन? कहाँ हैं वो दोनों देखूँ तो सही?

पूनम बोली- आ रहीं हैं, अभी तुम्हारे कान पकड़ती हैं।

इतने में कम्मो अंदर आ गई और मुझ को नंगा लेटे देख कर वो तो हंस पड़ी लेकिन पूनम बोली- देखिये ना सासू जी, यह आपका छोरा तो नंग धड़ंग बेशर्म हो कर लेटा है?

कम्मो हँसते हुए बोली- तो बहु, तुम भी नंग धड़ंग उसके संग लेट जाओ। तुम नहीं लेटोगी तो मैं लेट जाऊँगी।

यह कह कर कम्मो भी अपने कपड़े उतारने लगी और नग्न होकर वो मेरे ही पलंग पर आकर लेट गई और मेरे खड़े लंड के साथ खेलने लगी।

यह देख कर पूनम के मुंह पर ताला पड़ गया लेकिन वो भी पक्की ठकुराईन थी, वो भी जल्दी से अपने कपड़े उतार कर मेरे दूसरी तरफ आकर लेट गई।

मैंने भी कम्मो के मुम्मों को सहलाना शुरू कर दिया और साथ में उसकी चूत में ऊँगली से उसकी भग को भी दबा रहा था।

यह देख कर पूनम अब मेरे लौड़े को पकड़ने की कोशिश कर रही थी लेकिन उस पर तो कम्मो ने कब्ज़ा जमाया हुआ था।

पूनम को जब और कुछ नहीं सूझा तो वो मेरे मुंह पर अपना मुंह रख कर मुझको चूमने लगी, मैं भी उसके मुंह में अपनी जीभ डाल दी और उस को गोल गोल घुमाने लगा।

फिर मैंने कम्मो को कहा- कम्मो, तुम आज पूनम को चुदाई की थोड़ी ट्रेनिंग दे दो। कैसे क्या करते हैं यह उसको पूरा मालूम होना चाहिये ना!

कम्मो बोली- ठीक है, पूनम तुम मेरी इस तरफ आ जाओ!

जब पूनम कम्मो की दूसरी साइड में चली गई तो मैं तब कम्मो के मुम्मे चूसने लगा, उसकी बालों से भरी चूत पर हाथ फेरने लगा और फिर उसके एकदम स्पाट पेट पर अपने हाथ फेरने लगा।

कम्मो का जिस्म बहुत ही सुंदर ढंग से तराशा हुआ एक मुजस्मा लग रहा था हालांकि उम्र के हिसाब से वो हम सबसे बड़ी थी। उसके शरीर के सारे अंग एक साँचे में ढले हुए लग रहे थे, उसके सामने पूनम का शरीर अभी एक किशोर बालिका के समान ही लग रहा था।

आज जब मैं कम्मो के बारे में सोचता हूँ तो मुझे खजूराहो के मंदिरों में तराशी हुई सुन्दर स्त्रियों के समान उसका बदन लगता है।

कम्मो इस बीच पूनम को मस्त करने में लगी हुई थी, उसके मुम्मों को चूसने के बाद वो उसके पेट से होती हुई उसकी चूत पर जा कर रुक गई।

कम्मो पूनम की चूत को चाटने लगी, पहले धीरे धीरे से उसने उसकी चूत के उभरे हुए लबों को चूमा और फिर जीभ का तिकोना बना कर उसने उसकी चूत के अंदर डाली और उसको गोल गोल घुमाई।

वहाँ से वो उसके भग पर आ गई और उसको जीभ से पहले हल्के से चाटा और फिर उसको होटों के बीच लेकर चाटने लगी।

यह करते ही पूनम की कमर एकदम ऊपर उठ गई और मैंने मौका देख कर उसके गोल छोटे मुम्मों को अपने मुंह में ले लिया और उनको और उनके चुचूकों को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगा।

इस डबल अटैक से पूनम एकदम बड़ी ज़ोर से झड़ गई और उसकी दोनों गोल सफ़ेद झांगें कम्मो की गर्दन के इर्द गिर्द लिपट गई और उसके चेहरे को उन्होंने जकड़ लिया और साथ ही वो बहुत तीव्र कंपकंपी महसूस करने लगी।

मेरे भी सर को भी उसने अपनी छाती के साथ जोड़ दिया और फिर मेरे मुंह को बेतहाशा चूमने लगी।

देखते देखते ही वो एकदम ढीली पड़ गई.

तब कम्मो मेरी तरफ मुड़ी और पूनम की चूत के रस से भीगा हुआ मुंह उसने मेरे मुंह से जोड़ दिया और मेरी जीभ को चूसने लगी।

पूनम की चूत की भीनी खुशबू मेरे मुंह में भी आ गई और जैसे सांड मुंह ऊपर उठा कर गाय की चूत के रस को सूंघता है वैसे ही मैं भी सूंघता हुआ कम्मो के ऊपर चढ़ गया।

कम्मो की टांगें हवा में लहरा उठी अब मेरी चुदाई का पहला दौर शुरू हुआ।

कम्मो की चूत की हर हरकत से मैं वाकिफ था और वो लंड के सब थपेड़े झेल चुकी थी इसलिए उसने आँखें बंद कर आनन्द लेना शुरू कर दिया।

क्योंकि यह लंड चूत का तमाशा पूनम के लिए खास तौर से आयोजित किया जा रहा था तो उसको इस खेल की हर चाल दिखानी ज़रूरी थी।

अब मैं पलंग पर बैठ गया और बगैर लंड को अलग किये मैंने उसको अपनी गोद में ले लिया और अब मैंने बैठ कर लंड घिसाई का कार्य शुरू किया।

थोड़ी देर इस पोज़ में चोदा कम्मो को, फिर कम्मो को इशारा किया और मैं लेट गया, कम्मो मेरे ऊपर आ गई बिना चूत लंड को अलग किये।

थोड़ी देर इस पोज़ में अपने करतब दिखाए पूनम को… फिर मेरे इशारे पर कम्मो घोड़ी बन गई और मैंने उसको इस पोज़ में खूब ज़ोर ज़ोर से चोदा। जब वह 2-3 झड़ गई तो मैंने उसको आखिरी बार फुल स्पीड से चोदा।

अब मैंने पूनम को इशारा किया तो वो भी कम्मो के साथ घोड़ी बन कर कम्मो के साथ बैठ गई।

मैंने कम्मो के ऊपर चढ़े हुए ही पूनम की चूत में हाथ लगाया तो वो अत्यंत गीली हो चुकी थी, मैं कम्मो की घोड़ी को रोक कर पूनम की घोड़ी पर जा बैठा।

पूनम को काफी देर मैंने इस तरह चोदा और उसने खुद कहा- सोमू, मैं थक गई हूँ प्लीज बस करो।

मैंने कहा- सच्ची में थक गई हो क्या?

पूनम बोली- सोमू, हाँ सच्ची में थक गई हूँ!

मैं बोला- कसम खाओ कि आगे से कभी नहीं छेड़ोगी मुझको?

पूनम बोली- कसम से… कभी नहीं छेड़ूंगी।

मैं बोला- चलो माफ़ किया इस ठकुराईन को, एक बार और छूटा ले ना अगर मन हो तो?

पूनम बोली- नहीं ना… अब और नहीं।

यह सुन कर मैंने एक आखिरी राउंड धक्कों का मारा और नीचे उतर गया।

कम्मो ने हमारे लिए शर्बत तैयार किया हुआ था, वो पी कर हम तीनों एक दूसरे की बाहों में सो गए।

 
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