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मेरा चुदाई का सफ़र

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अगले दिन दशहरा था तो घर के सब लोग इस पर्व को देखने की तैयारी में लगे हुए थे। एक दो बार निम्मो आई मेरे कमरे में चाय वाय देने और हर बार वो मेरी और मुस्करा कर चली जाती थी।

थोड़ी देर बाद आई यह कहने के लिए कि ‘खाना तैयार है’ तो मैं उठा और झट से निम्मो को अपनी बाहों में ले लिया और कस कर उसको जफ्फी मारी।

वो कसमसाती रही लेकिन मैंने भी नहीं छोड़ा और एक दो चुम्मियाँ उसके गीले होटों पर जड़ दी और उसके गोल मोटे स्तनों को भी दबाता रहा और उसके गालों को चूमता रहा।

वो बोलती रही- छोड़ दो छोटे मालिक, कोई देख लेगा… जाने दो मुझको!

लेकिन मैंने भी नहीं छोड़ा और अच्छी तरह से उसको हाथ वाथ लगा कर ही छोड़ा।

शाम को हम सब कार में बैठ कर बारी बारी रामलीला मैदान में जाने के लिए तैयार हो गए और मेहमानों को भेज कर ही मैं और कम्मो कार में बैठे लेकिन अभी कार चली भी ना थी कि वो दोनों लड़कियाँ भागती हुई आई और कार के बाहर खड़ी होकर इंतज़ार करने लगी कि कैसे बैठेंगी कार में!

मैं कार में से निकला और उनको पिछली सीट पर बिठा दिया जहाँ कम्मो और निम्मो भी बैठी थी, उन दोनों के बैठ जाने के बाद अब कोई जगह नहीं बची थी तो मैंने कहा- आप लोग चलो, मैं पैदल आता हूँ!

लेकिन कम्मो भी घाघ थी, वो बोली- नहीं छोटे मालिक, आप आ जाओ, इनमें से एक लड़की मेरी गोद में बैठ जायेगी, आप आ जाओ! आपके लिए जगह हो जायेगी।

मैं भी ज़बरदस्ती बैठ गया और मैंने ध्यान से देखा तो मैं उस गोरी लड़की के साथ बैठा था जिसका नाम रेवा था।

बैठते ही मेरी कोहनी उसके गोल मुम्मों में जाकर टिक गई और मैं बिल्कुल बेखबर हुआ उसके साथ जांघों के साथ जांघों को जोड़ कर बैठा हुआ था और ऐसा बेखबर बैठा था जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं।

रेवा का भी हाथ एक दो बार मेरे लौड़े के ऊपर रखा हुआ लगा था लेकिन मैंने भी उसकी तरफ देखा तक नहीं।

जब दशहरा के मैदान पर पहुँचे तो कम्मो ने दोनों लड़कियों के हाथ पकड़े और मुझसे कहा कि आप सब पीछे पीछे आओ!

मैदान एकदम खचाखच भरा हुआ था तो कम्मो ने मुझको अपने आगे कर लिया और मैं दोनों लड़कियों के एकदम पीछे हो गया और चलते चलते मेरे हाथ कभी रेवा के चूतड़ों पर लग रहे थे या फिर सांवरी को लग रहे थे और कम्मो कोशिश करती रही कि मैं उन दोनों लड़कियों के पीछे ही रहूँ और उस खींचा तानी में अक्सर मेरे लौड़ा रेवा की गांड में फिट हो जाता था और उसको सख्त लौड़ा बार बार टच करता रहा और वो भी कभी हाथ लगा कर लौड़े को छू रही थी और सांवरी तो कई बार लौड़े को छू चुकी थी।

एक जगह हम भीड़ के रेले में फंस गए और अब मेरा पूरा खड़ा लौड़ा रेवा को छू रहा था, उसके गोल चूतड़ों को बार बार छेड़ रहा था।

उधर सांवरी अब कोशिश करके मेरे पीछे हो गई और उसके मुम्मे मुझको मेरी पीठ पर रगड़ रहे थे और उसकी उभरी हुई चूत भी मुझ को बार बार मेरे चूतड़ों पर लग रही थी।

अब मैं अपने हाथ भी रेवा के चूतड़ों पर रखने लगा ताकि किसी और मर्द का हाथ वहाँ ना लग जाए और यह हकीकत रेवा से छुपी नहीं थी, वो भी अपने चूतड़ों को आगे पीछे करके मेरे और ज़्यादा नज़दीक आने की कोशिश कर रही थी।

अब मैं एक किस्म से दोनों लड़कियों के बीच में था यानि आगे रेवा थी और पीछे सांवरी थी और दोनों ही मुझ को दबा रही थी।

यह सारा तमाशा कम्मो देख रही थी और वो मुस्करा भी रही थी क्यूंकि उसको लग रहा था कि ये दोनों अनछुई कलियाँ भी शायद मेरे हरम में दाखिल होने के लिए काफी तैयार लग रही थी।

कम्मो की वजह से हम सब सही सलामत आगे विशिष्ट मेहमानों के लिए लगी कुर्सियों पर बैठने के लिए पहुँच गए और जो कुर्सियाँ खाली पड़ी थी उनमें से एक में रेवा बैठ गई और दूसरी पर मैं, उसके साथ वाली पर सांवरी बैठ गई और कम्मो, निम्मो और पर्बती हमारे पीछे वाली सीटों पर बैठ गई।

जब सब बैठ गई तो मैंने अपने चारों तरफ देखा तो सबसे आगे सीटों पर मम्मी पापा और विशिष्ट अतिथि उनके साथ बैठे थे और बाकी की सीटों पर कई स्त्रियाँ और कन्यायें बैठी थी, जिनको मैं नहीं जानता था।

अब मैंने अपनी बाईं तरफ देखा तो रेवा और मेरी दायें तरफ सांवरी बैठी थी और हम सबकी टांगें एक दूसरे को छू रही थी और मैंने अपनी टांगों का दबाव दोनों अनछुई कलियों की टांगों पर बनाये रखा, वे भी इस दबाव का जवाब हल्के से दबाव से दे रही थी।

मैंने पीछे मुड़ कर देखा और जब मेरी नज़र कम्मो से मिली तो मैंने एक हल्की सी आँख उसको मारी।

थोड़ी देर बाद रामलीला के राम जी रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण को जलाने के लिए आगे बड़े और अपने जलते हुए तीर उन तीनों पर बारी बारी से चला दिए।

इन तीनों के बुतों पर तीर लगते ही वो एकदम से धू धू कर जल उठे और उनमें भरे हुए पटाखे बहुत तीव्र आवाज़ से फट पड़े और उनके फटने की ध्वनि से लड़कियाँ औरतें और बच्चे घबरा से गए और उठने लगे अपनी सीटों से लेकिन मैंने रेवा और सांवरी को बिठाए रखा और ऐसा करते हुए मैंने उन दोनों को अपने और भी निकट बिठा लिया और दोनों की कमर में अपने हाथ डाल कर अपने से चिपटाए रखा।

दोनों ने मेरी तरफ बड़ी प्यार भरी नज़रों से देखा।

जब रावण जल गया तो हम सब खड़े हो गए लेकिन मैंने उन सबको रुके रहने के लिए कहा ताकि भीड़ निकल जाने दें और फिर चले।

इस सारे समय मैंने दोनों लड़कियों को कमर से पकड़ रखा था और अपने से चिपकाए रखा था और अँधेरा भी बढ़ गया था सो किसी ने कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया।

फिर जब भीड़ छंट गई तो हम भी कार की तरफ चल दिए लेकिन कार तो मम्मी और पापा को लेकर चली गई, हम सब वहीं खड़े कार का इंतज़ार करते रहे और जब कार वापस आई तो मैंने सबसे पहले दोनों भाभियों को और बाकी लड़कियों को बिठा दिया।

रेवा और सांवरी को भी कहा कि वो चली जायें लेकिन दोनों ने कहा ‘वो मेरे साथ जाएंगी…’

हम वापसी में भी एक दूसरे को हाथ लगाते हुए घर पहुँचे।

वो रात आये हुए सब मेहमानों की आखिरी रात थी हमारी हवेली में तो बहुत ही अच्छा और उम्दा खाना बनाया गया था जिसको खाकर सबने बहुत तारीफ की और पर्बती को शाबाशी दी गई।

कम्मो को मैंने मेले में हुई बातों से वाकिफ करवा दिया था और उसका भी मानना था यह दोनों लड़कियाँ भी तैयार हो जाएँगी।

मैंने कम्मो को उनसे पूछने को कहा।

खाने के बाद हम सब बच्चे और दोनों भाभी जान बैठक में बैठे हुए गप्पें मार रहे थे। मैं रेवा और सांवरी के बीच बैठा था और बाकी सब सामने वाले सोफे पर बैठी थी और अक्सर मेरा हाथ उनके बाज़ू से टकरा जाता था और एक दो बार रेवा का हाथ मेरी गोद में आ लगा लेकिन मैंने कोई ध्यान नहीं दिया।

जब हम सब उठने वाले थे तो बड़ी भाभी बोली- सोमू भैया, जाने से पहले एक छोटी सी मुलाकात हो जाए तुम्हारे कमरे में क्यों?

मैंने कम्मो की तरफ देखा और उसने बात को शुरू किया- भाभी जी, अब छोटे मालिक के कमरे में जाना ठीक नहीं होगा। मम्मी पापा भी अभी जाग रहे हैं तो आप अपने कमरे में सब लेट जाओ, मैं वहाँ आकर बता दूँगी कि क्या कैसे करें? ठीक है ना?

मैं अब अपने कमरे में आ गया और और अपना कुरता पजामा पहन कर इंतज़ार करने लगा।

 
इंतज़ार करते हुए थोड़ी देर ही हुई थी कि कम्मो आ गई और मुस्कराते हुए बोली- वो दोनों भी आपके पास आने के लिए राज़ी हो गई हैं। वैसे उनकी मर्ज़ी बहुत थी लेकिन वो बन रही थीं कि कोई उनसे ख़ास तौर से कहे तो वो जाएँ।

मैंने कम्मो से पूछा- क्या तुमने अपनी तरफ से पूछा या फिर उन दोनों ने खुद ही पहल की?

कम्मो फिर मुस्कराई और बोली- वो ऐसा है छोटे मालिक, मुझको इतना तो ख्याल है कि हम नहीं चाहते कि उनसे ज़बरदस्ती की जाए। मैंने उनसे पूछा कि वो कब वापस जा रही हैं तो वो दोनों बोली कि उनको लेने आने वाले भाई का फ़ोन आया था कि वो परसों आएंगे तो वे दिन और ठहरेंगी। मैंने उनसे कह दिया कोई बात नहीं जब तक वो चाहे वो ठहर सकती हैं।

मैं बोला- फिर उन्होंने क्या कहा?

कम्मो बोली- उनको आप से अकेले में मिलने की बहुत इच्छा है। मैंने कहा कि वो आज रात आ सकती हैं मिलने के लिए अगर उनकी मर्ज़ी है तो!

दोनों ने कहा कि वो आएँगी आज रात ज़रूर।

मैंने कहा- क्या तुमने उनको बता दिया कि मिलने पर क्या संभव है?

कम्मो बोली- साफ़ साफ़ तो नहीं बताया लेकिन इतना ज़रूर पूछा कि क्या वो कुंवारी हैं? दोनों ने कहा कि ‘नहीं उनकी तो सील टूटी हुई है।’

हम यह बातें कर ही रहे थे कि दरवाज़ा जो खुला था थोड़ा खटका और फिर वो दोनों अंदर आ गई।

मैंने बड़ी गरम जोशी से कहा- आइये आपका ही इंतज़ार कर रहे थे हम दोनों !

दोनों काफी शरमा रही थी और उनकी सुन्दर फुलकारी साड़ियाँ बहुत ही सुंदर लग रही थी उनके शरीर पर!

कम्मो ने कोक की बोतलें मंगवा के रखी हुई थी, वो उनको पीने को दी और फिर बातों ही बातों में कम्मो ने उनसे पूछ लिया कि क्या वो किसिंग के लिए या फिर चुदाई के लिए आई हैं?

दोनों ने सर नीचे किये ही कहा कि जैसा सोमू जी कहें वो उनको मंज़ूर है।

मैं बोला- तो फिर देर काहे की आइये शुरू करें।

मैं उन दोनों के पास गया और उनको अपने आलिंगन में ले लिया और फिर मैंने उनको लबों पर एक एक गर्म चुम्मी जड़ दी।

पहले रेवा को और फिर सांवरी को लबों पर चूमने और चाटने लगा और उनके ब्लाउज के ऊपर से उनके गोल और सॉलिड मुम्मों को दबाने लगा।

दोनों ने आँखें बंद की हुई थी लेकिन मैं समझ रहा था कि उनको बहुत आनन्द आ रहा था।

अब कम्मो ने आगे बढ़ कर उनके कपड़े उतारने शुरू कर दिए।

 
सब से पहले रेवा के कपड़े उतारे और वो बहुत ही खूबसूरत जिस्म वाली लड़की लग रही थी, उसके उरोज उन्नत और सॉलिड थे और एकदम मस्त सफेदी लिए हुए थे।

मैं सांवरी के कपड़े उतारने लगा और उसके ब्लाउज को उतारते ही उसके सॉलिड सांवले मम्मे जम्प करके सामने आ गए।

सांवरी का जिस्म सांवला ज़रूर था लेकिन निहायत ही सेक्सी और आकर्षण वाला जिस्म था।

जब मैंने उसका पेटीकोट नीचे किया तो उसके काले चमकीले बालों से भरी हुई चूत एकदम आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी।

उधर कम्मो भी रेवा को नग्न कर के मेरे सामने ले आई।

अब कम्मो मेरे कपड़े उतारने के लिए आगे बढ़ी तो रेवा ने उसको रोक दिया, स्वयं आगे आकर मेरे कुर्ते को उतार दिया और जैसे ही उसने मेरा कुरता उतारा, मैंने झुक कर उन दोनों का अभिवादन किया।

और फिर जब उसने मेरा पजामा उतारा तो मैंने अपने खड़े लंड के साथ फिर एक बार झुक कर दोनों का अभिवादन किया ठीक उसी तरह जैसे कि रेवा ने नदी किनारे अपने कपड़े उतारते हुए किया था।

रेवा यह देख कर झेंप गई लकिन मैं बड़ा ही आनन्दित महसूस कर था।

मैंने रेवा को उसके लबों पर चूमना शुरू कर दिया अपनी जीभ को उसके मुंह में डाल कर उसकी जीभ से खेलने लगा।

उधर कम्मो ने सांवरी को पकड़ रखा था और उसको लेकर पलंग की ओर बढ़ रही थी और उसको लिटा कर उसके मुम्मों और चूतड़ों को छेड़ रही थी।

मेरा एक हाथ रेवा की चूत में गश्त लगा रहा था और उसकी मुलायम चूत के बालों में ऊँगली चलाते हुए कभी कभी उसकी भग पर भी उंगली चला रहा था।

रेवा की चूत एकदम गीली हो चुकी थी, मैंने उसको अपनी बाहों में उठा लिया और उसकी चूत को लंड के सामने लाकर उसकी चूत में अपना लोहे के समान लंड घुसेड़ दिया। एक ही धक्के में लंड पूरा का पूरा अंदर घुस गया और मैंने उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर उसको लंड के ऊपर आगे पीछे करने लगा और साथ में अपने मुंह में उसके मुम्मों के गोल चूचुकों को चूसने लगा।

रेवा ने अपने बाहें मेरे गले में डाल रखी थी और वो झूला झूलते हुए चुद रही थी।

अब मैंने एक उंगली रेवा की गांड में भी डाल दी जिससे वो बहुत भड़क उठी और तेज़ी से मेरे हाथों के झूले में आगे पीछे होने लगी और जल्दी ही अपनी गर्दन को एकदम पीछे कर के ज़ोर से हुंकार भरती हुई झड़ गई।

जैसे ही उसकी चूत से ढेर सारा पानी छूटा, वो कांपती हुई मेरे जिस्म से चिपक गई।

मैंने उसको ले जाकर पलंग पर लिटा दिया और वहीं लेटी हुए सांवरी के साथ दूसरी तरफ जा कर लेट गया।

अब कम्मो उठ कर रेवा के पास आ गई और उसके जिस्म को पौंछने लगी और उसकी चूत में से निकल रहे रस को साफ़ करने लगी।

इधर मैंने सांवरी की टांगों में बैठ कर उसकी चूत में हाथ डाला तो वो कम्मो ने पूरी तरह से तैयार कर रखी थी। उसके होटों पर एक गर्म चुम्मी जड़ते हुए मैंने अपने खड़े लंड को सांवरी की चूत के ऊपर रख दिया और एक हल्का सा धक्का मारा और लंड सारा का सारा अंदर चला गया।

मैं अब बड़े धीरे धीरे सांवरी की फैली हुई टांगों के बीच चूत के अंदर गए लंड को आगे पीछे करने लगा।

सांवरी की टांगों को मैंने हवा में उठा दिया था सो उसको बड़े ही हल्के और कभी तेज़ धक्कों से इत्मीनान से चोदने लगा।

वो भी हर धक्के का जवाब दे रही थी और अपनी चुदाई में पूरी तरह से सहायक बन रही थी, उसके छोटे मगर सॉलिड मुम्मे मेरी छाती से चिपके हुए थे और बाद में मैं उनके चूचुकों को अपने मुंह भी ले रहा था और गोल गोल चूस रहा था।

थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि सांवरी जल्दी ही छूट जायेगी, मैंने धक्कों की स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी और उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर मैं बहुत ही गहरी स्ट्रोक्स मारने लगा जो पूरी उसकी चूत के अंत तक जा रही थी।

जब वो हाय-हाय करने लगी तो मैंने उसकी कमर को कस कर अपने हाथों में ले कर बहुत ही तेज़ स्पीड से उसकी चुदाई शुरू कर दी।

वो जल्दी ही ‘उफ्फ मेरी माआआआ मैं गई…’ कहती हुए छूट गई। तब उसने अपनी बाहों में मुझको पूरी ताकत से बाँध लिया और कमर से मुझको अपनी कैद में ले लिया।

मैं ज़रा भी नहीं हिल सकता था जब तक सांवरी पूरी तरह से स्खलित नहीं हो गई।

उसके बाद ही उसने मुझको अपनी लोहे के समान गिरफ़्त से आज़ाद किया, उसके ऊपर से उठने से पहले मैंने उसको एक भाव भीनी चुम्मी दी उसके लबों पर और उसके मुम्मों को चूमते हुए मैं उसके ऊपर से उठ गया।

कम्मो ने इशारे से मेरी नज़र उसकी चूत में से निकले पानी की तरह दिलाई जो उस वक्त बिस्तर की चादर के ऊपर पड़ा हुआ था।

कम्मो बोली- वाह, कमाल की छुटास है सांवरी की चूत की, ऐसी मैंने कभी न देखी ना सुनी थी इससे पहले!

रेवा भी आ गई और सांवरी की चूत से निकले पानी को देख कर वो भी हैरान थी।

सांवरी चुप रही और कुछ नहीं बोली और ना ही हम में से किसी ने इस बात को दुबारा उठाया।

कम्मो बोली- क्यों लड़कियों, अब क्या मर्ज़ी है तुम दोनों की?

रेवा और सांवरी एक साथ बोली- एक बार और कर देते सोमू जी तो मज़ा आ जाता!

कम्मो बोली- आप दोनों तो कल रात भी रुक रही हो ना, कल फिर तुम्हारा काम कर देंगे छोटे मालिक। क्यों छोटे मालिक?

मैं बोला- हाँ हाँ क्यों नहीं, अगर दोनों की यही इच्छा है तो कल फिर इनको मज़ा दे देंगे।

कम्मो बोली- चलो तो फिर आप कपड़े पहनो और मैं आपको आप के कमरे में छोड़ आती हूँ।

दोनों कपड़े पहनने लगी और मैं उनको बड़ी हसरत से देखता रहा क्यूंकि रेवा और सांवरी दोनों ही सुंदर शरीर की मालकिन थी और उनकी टाइट चूतों को चोद कर बड़ा आनन्द आया था।

जाने से पहले दोनों ही मेरे पास आईं और मेरे खड़े लंड को चूम कर जाने लगी तो मैंने रोक दिया और उनको होटों पर एक मस्त चुम्मी देकर कहा- कल फिर आप का स्वागत करेंगे हम सब!

यह कह कर वो चली गई।

कम्मो कहने लगी- अभी तो रात के 11 बजे हैं, आप कम से कम दो और लड़कियों का काम कर सकते हैं। क्यों छोटे मालिक?

मैं बोला- मुझको तो कोई ऐतराज़ नहीं लेकिन कम्मो डार्लिंग क्या यह सब मम्मी के जागते हुए संभव है क्या? अभी हमने रिस्क लिया था लेकिन रिस्क बार बार लेना उचित होगा क्या?

कम्मो बोली- शायद आप ठीक कह रहे हैं छोटे मालिक, मैं उनको कह आती हूँ कि और किसी का यहाँ आना सम्भव नहीं आज!

मैं बोला- कम्मो डार्लिंग उनमें ऐसी कौन है जिसको खुश करना ज़रूरी है अभी? सब तो चुद चुकी है एक दो बार कम से कम, ऐसा करो उन सबको यहाँ बुला लेते हैं और खूब मस्ती करते हैं सब मिलकर, क्यूँ यह ठीक है ना? जो बहुत गर्म हो जायेगी उसको चोद भी देंगे हम सब मिल कर, क्यों यह ठीक है ना?

कम्मो एकदम खुश हो गयी और बोली- मैं उनको बुला लाती हूँ. साली कुछ की चूत में तो बहुत ही खुजली होवत है रे!

मैं बोला- तो इन सब का लाइए ना, हम खुजली मिटावन का ही तो काम करते हैं न!

कम्मो ज़ोर से हंस दी और लड़कियों के कमरे में चली गई।

 
उन सबके कमरे दूसरे फ्लोर पर ही मेरे कमरे के साथ लगे हुए थे तो उन लड़कियों को वहाँ लाने में कोई ख़ास वक्त नहीं लगा।

सबने अपनी अपनी नाइटी पहन रखी थी, सबने आते ही मुझको जफ्फी मारी और मैंने भी उनके मुम्मों और चूत को हाथ लगाया।

एक भाभी और 4 अनब्याही कन्याएँ आ धमकी और सब मेरे इर्द गिर्द घूम रही थी।

कम्मो ने पूछा- अब आप कैसे क्या करना चाहती हैं?

सबसे तेज़ रिया ही थी, वो बोली- चुपके चुपके और शांत ढंग से हम एक गेम खेलते हैं… ताश के पत्ते बांटे जाएंगे हम सबमें, जिसका पत्ता सब से कम नंबर का होगा उसको अपनी नाइटी उतारने होगी, इसके बाद जब सबकी नाइटी उतर जायेगी तो फिर हम तय करेंगी कि कौन सी लड़की पहले चुदेगी सोमू से! ठीक है ना?

कम्मो बोली- मेरे ख्याल से हम ऐसे ताश के पत्ते खेलते हैं जिसका पत्ता सब से बड़ा निकलेगा, उसको पहले चोदा जाएगा और इसी तरह हम यह तय कर लेते हैं कि किसकी बारी कब! क्यों यह ठीक नहीं क्या? इससे छोटे मालिक को भी वक्त मिल जाएगा आराम के लिए?

सबने कहा- हाँ हाँ यह ठीक रहेगा।

ताश के पत्ते बंटने लगे और जब सबने अपने पत्ते खोले गए तो जूही भाभी नो.1 पर थी और प्रेमा न. 2 पर और इसी तरह ही बाकी सबका नंबर लग गया।

कम्मो ने कहा- जूही भाभी और प्रेमा अपनी नाइटी उतार दें और बाकी भी सब अपनी अपनी नाइटी उतार दें और सब आपस में प्यार करना शुरू कर दें। छोटे मालिक के पास इतना वक्त नहीं होगा कि हर किसी लड़की को तैयार करें सो आप सब अपनी अपनी साथिन के साथ लग जाओ, चूमो, चाटो और खूब आनन्द लो लेकिन ध्यान रहे कि कोई भी शोर नहीं होना चाहिए।

मैं बोला- कम्मो रानी, मैं चाहता हूँ कि आज सब लड़कियाँ मिल कर या फिर बारी बारी मेरा रेप करें। एक समय में कम से कम दो लड़कियाँ मुझ पर पीछे से हमला करेंगी और फिर मेरा रेप करेंगी। मेरे हाथ बाँध दिए जायें ताकि मैं किसी को रोक नहीं सकूँ। क्यों यह खेल कैसा रहेगा सुंदरियों?

सब लड़कियाँ और भाभी चहक उठी और कम्मो ने फैसला किया कि सब अपनी अपनी बारी से दो दो कर के मुझको रेप करेंगी।

सबसे पहले कम्मो ने मेरे हाथ एक दुपट्टे से बाँध दिए और फिर मुझको नंगा करके खड़ा कर दिया और सबसे पहली टोली जिस में जूही भाभी और प्रेमा शामिल थी, ने मिल कर मुझको पीछे से पकड़ा और मुझ को खींचते हुए बेड पर ले गई।

जूही भाभी मुझको बेतहाशा होटों पर चूमने लगी और उनके मोटे मुम्मे मेरी छाती में धंसे जा रहे थे लेकिन मैं उनको हाथ नहीं लगा सकता था।

उधर प्रेमा ने मेरे लंड को अपने कब्ज़े में किया हुआ था और वो उसको ज़ोर ज़ोर से चूस रही थी।

अब भाभी ने अपनी पोजीशन प्रेमा के साथ बदली और वो मेरा लंड चूसने लगी और प्रेमा मेरे सारे चेहरे को चुम्मियों से गीला करने में लगी हुई थी, वो भी बार बार अपने मुम्मों को मेरी छाती से रगड़ रही थी।

थोड़ी देर में ही जूही भाभी मेरे ऊपर बैठ सी गई और मेरे लंड को अपनी चूत में डाल कर जल्दी जल्दी ऊपर नीचे होने लगी। उसकी आँखें मेरी आँखों पर टिकी हुई थी और वो ऐसे व्यवहार कर रही थी कि मेरे द्वारा किये हुए सारे ज़ुल्मों की सजा मुझको अभी दे देना चाहती थी।

इस कश्मकश में जूही भाभी बहुत ही जल्दी ही छूट गई और कंपकपाती हुई मेरे ऊपर लेट गई और तब कम्मो ने उसको मेरे ऊपर से उठाया और प्रेमा ने जल्दी से उसका स्थान लेने के लिए आगे आने लगी।

फिर कुछ सोच कर उसने मुझ को पलंग पर से उठा दिया और कहने लगी कि वो खड़ी होकर चुदवाना चाहती है, मुझको सहारा देकर उसने उठाया और खुद पलंग पकड़ कर झुक कर खड़ी हो गई और मैंने उसके पीछे खड़े होकर अपने अकड़े लंड को उसके चूतड़ों पर रख दिया और प्रेमा ने हाथ डाल कर उसको चूत के मुंह पर रख कर कहा- धक्का मारो मेरी सरकार!

मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा और मेरा लंड एकदम गीली चूत में फटाक से घुस गया। जैसे ही मेरा गर्म लोहे के समान सख्त लंड प्रेमा के अंदर गया तो वो एकदम से तिलमिला उठी।

मैंने भी बड़ी तेज़ धक्काशाही शुरू कर दी और अपने बंधे हाथों को प्रेमा के चूतड़ों पर रख कर बड़ी तेज़ स्पीड से चुदाई शुरू कर दी क्योंकि मैं चाहता था कि वो जल्दी ही झड़ जाए तो तीसरी चूत से मिलन हो जाये।

प्रेम की टाइट चूत में भी जल्दी ही हरकते उल अंसार होने लगी और वो जल्दी ही हाय हाय करती हुई झड़ गई।

झड़ते वक्त उसकी चूत में सिकुड़न होने लगी और उसकी चूत मेरे लंड को दोहने की कोशिश करने लगी लेकिन आखिर में चूत को ही हारना पड़ा।

जैसे ही प्रेमा झड़ी, उसी वक़्त दो और लड़कियाँ आ गई और मुझसे चिपट कर मुझको चूमने और चाटने लगी। उनमें से एक रिया थी और दूसरी सुधा थी।

रिया नीचे बैठ कर मेरे गीले लंड को चूसने लगी और सुधा मेरी छाती के छोटे निप्पल को चूसने लगी। सुधा के ऐसे करने से मुझको बहुत गुदगुदी हो रही थी लेकिन मैं भी हँसते हुए उछल कूद रहा था।

मैंने बंधे हाथों से ही सुधा के सॉलिड बूब्स को छूना शुरू कर दिया और अपने मुंह को नीचे कर के उनके निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और अपने लंड को भी रिया के मुंह में आगे पीछे करने लगा।

अब रिया उठी और पलंग पर घोड़ी बन गई, मैं भी उसके पीछे बैठ गया और अपने लंड को चूत के मुंह पर रखा और एक धक्के में पूरा का पूरा अंदर कर दिया।

रिया पूरे जोश में थी, वो शुरू से हर धक्के का जवाब डबल धक्के से दे रही थी और मेरी इस चुदाई को पूरी तरह से एन्जॉय कर रही थी क्यूंकि उसको पता था कि कल वो सब अपने अपने घरों में चले जाएँगी।

रिया की तेज़ी की वजह से वो जल्दी ही छूटने के कगार पर पहुँच रही थी लेकिन मैं रिया को काफ़ी चाहने लगा था तो मैं अपनी स्पीड धीरे कर देता था जिसके कारण रिया का छूटना भी रुक जाता था।

यह सब कम्मो की तेज़ नज़रों से नहीं छुप सका, उसने मेरे कान में कहा- मालिक जल्दी कीजिये, अभी लाइन में और भी हैं।

मैंने फिर अपनी स्पीड तेज़ कर दी और अंतिम क्षणों में इतने तेज़ धक्के मारे कि रिया जल्दी ही स्खलित हो गई और ज़ोर से मेरे लंड से अपने चूतड़ों को चिपका दिया और काफी कांपती रही कुछ देर तक!

सुधा रिया के हटने की इंतज़ार कर रही थी और जैसे ही रिया हटी तो सुधा मेरे से लिपट गई और मुझको बड़ी बेरहमी से चूमने लगी और मेरे सारे शरीर पर हाथ फेरती रही।

फिर उसने मुझको बिस्तर पर बैठा दिया और खुद अपनी टांगें चौड़ी कर मेरे सामने बैठ गई, अपनी टांगें मेरी दोनों तरफ करके खुद मेरे लंड की सीध में बैठ गई और मेरे बंधे हाथों को अपनी पीठ के पीछे ले गई जिससे हम दोनों छाती से छाती जोड़ कर बैठ गए।

अब उसने अपनी गीली चूत में मेरा लंड फिट किया और खुद ही धक्का मार कर लंड को पूरा अंदर ले गई।

मेरे बंधे हाथ सुधा की पीठ के पीछे थे, मैंने उनको उसके चूतड़ों के नीचे फिट किया और उनके सहारे सुधा मुझको सही मायने में चोदने लगी।

धक्कों की स्पीड अब पूरी सुधा के हाथ में थी, उसने पहले धीरे धीरे धक्कों से शुरू कर के तेज़ धक्कों की और बढ़ने लगी और मैं भी उसके गोल सॉलिड मुम्मों को चूसने में लगा हुआ था।

जब वो धक्कों की तेज़ स्पीड पकड़ने लगी तो मैंने अपनी एक हाथ की मध्य तर्जनी को उसकी गांड में डाल दिया। और वो तो अब इतनी तेज़ी से धक्के मारने लगी कि कुछ ही क्षणों में वो धराशायी हो गई और उसकी चूत ने मेरे लंड के रस को दूध की तरह दोहने का प्रयत्न शुरू कर दिया।

फिर वो बेइन्तेहा जोश से मुझसे चिपकी रही काफी देर तक और वो शायद अभी भी ना हटती अगर कम्मो उसको मुझको छोड़ने के लिए ना कहती।

अब कम्मो ने कहा- चुदाई में अब इंटरवल दिया जाता है, छोटे मालिक के बंधे हाथ खोल दिए जाएँ ताकि वो बाथरूम वगैरह जा सकें।

बाथरूम से आकर मैंने पूछा- कितनी और?

कम्मो बोली- अभी दो और हैं, अगर आप थक गए हैं तो इन दो को रात में चोद देना तो इस तरह सारी चुद जाएंगी।

मैंने कहा- यह ठीक है, इन चारों को अपने कमरे में छोड़ आओ और बाकी दो मेरे बिस्तर की शोभा बढ़ाती रहेंगी।

जब बाकी चारों कपड़े पहनने शुरू कर ही रही थी तो मैंने कहा- इन सबका ब्यूटी कांटेस्ट कर लेती ना लेकिन वो तन्वी भाभी, रेवा और सांवरी भी नहीं हैं तो रहने दो।

सबने अपने नाइटी पहननी शुरू कर दी और थोड़ी देर में वो सब अपनी नाइटी पहन कर तैयार हो गई जाने के लिए। जूही भाभी और बाकी सब लड़कियों ने मुझको जाने से पहले भाव भीनी चुम्मियाँ और टाइट जफ्फी मारी और मेरा शुक्रिया अदा किया और कहा- सोमू यार, तुम तो कमाल की चीज़ हो, तुम जैसा लड़का हमने आज तक नहीं देखा जिसका लंड हमेशा ही खड़ा रहता है? ऐसे कैसे हो सकता है यार?

मेरी जगह कम्मो ने जवाब दिया- ऐसा है भाभी जी, मैंने छोटे मालिक को बड़ी छोटी उम्र से पाला है और मैं इनके साथ काफ़ी समय से हूँ। मैं इनको बहुत अच्छी तरह से जानती हूँ, इनको एक मेडिकल प्रॉब्लम है जिसके कारण ज़रा सा भी कोई इनके लंड को छूता है तो वो तुरंत खड़ा हो जाता और काफी समय वो ऐसे ही खड़े रहता है चाहे वो इसका इस्तेमाल करें या ना करें।

डॉक्टरों से भी चेक करवाया था लेकिन वो यही कहते हैं कि यह बिमारी लाइलाज है। वैसे छोटे मालिक अगर ना चाहें तो भी इनके खड़ा लंड से वीर्य डिस्चार्ज नहीं होता। आप सब ने नोट किया हो गा कि आप सब की चुदाई करते समय छोटे मालिक के लंड से कोई वीर्य नहीं निकला आप किसी की भी चूत में!

यह इस बात की गारंटी है कि इनके द्वारा चुदाई एकदम सेफ है और किसी भी लड़की या औरत को कभी कोई नुक्सान नहीं होने देते अगर उसकी स्वयं की मर्ज़ी प्रेग्नेंट होने की ना हो तो!

भाभी बोली- अच्छा ऐसा है क्या? मुझ को पहले बतला नहीं सकते थे क्या? उफ्फ्फ मेरे से कितनी बड़ी गलती हो गई।

कम्मो बोली- क्या गलती हो गई भाभी?

भाभी बात छुपाते हुए बोली- कुछ नहीं, लड़कियो, तुम अपना काम करवा चुकी हो, जाओ यहाँ से, जल्दी करो कहीं कोई ना आ जाए यहाँ।

तभी सब लड़कियाँ कपड़े पहनने लगी जल्दी जल्दी और फिर कम्मो उन सबको छोड़ने के लिए उनके साथ चली गई।

अब सिर्फ जूही भाभी ही रह गई और वो मुझको बड़ी प्यार भरी नज़रों से देखने लगी और धीरे धीरे वो मेरे निकट आने लगी, पास आकर मुझसे लिपट गई और मेरे होटों पर प्रगाढ़ चुम्बन देने लगी।

मैं भी भाभी की चूत पर छाई काली ज़ुल्फ़ों के साथ खेलने लगा और उसके मस्त गोल और मोटे स्तनों को मसलने लगा। मैंने मज़ाक में पूछा- क्यों भाभी, अभी और चुदवाने की इच्छा है क्या?

भाभी मेरे गले में बाहें डालते हुए बोली- यार सोमू, कम्मो ने पहले नहीं बताया कि तुम मुझको गर्भवती बना सकते हो, नहीं तो मैंने अभी तक तुमसे गर्भ धारण कर लिया होता।

अब मैं समझा कि जूही भाभी क्यों रुक गई थी, बाकी लड़कियों के साथ नहीं गई थी।

जब कम्मो वापस आई तो दरवाज़ा थोड़ा भिड़ा हुआ था, उसको खोल कर वो कमरे के अंदर आ गई।

जूही भाभी ने झट उसको घेर लिया और शिकायत के लहजे में बहभी बोली- कम्मो बहन, बता देती तो मैं भी सोमू से प्रेग्नेंट होने की कोशिश करती ना! तुम तो जानती हो मेरा पति तो एकदम निकम्मा है साले से कुछ नहीं होता। यह मौका था कि मैं सोमू से गर्भ धारण कर लेती?

भाभी यह कहते हुए एकदम से रोने लगी और तब कम्मो ने उसको मुश्किल से चुप करवाया।

कम्मो बोली- भाभी, अब तो कुछ नहीं हो सकता, आप तो कल वापस जा रही हो ना?

भाभी बोली- अगर मैं कल रुक जाऊँ तो कुछ हो सकता है क्या?

कम्मो भाभी को लेकर एक कोने में चली गई और उससे कुछ पूछताछ करने लगी और फिर वापस आकर कहने लगी- छोटे मालिक, भाभी गर्भ के लिए तैयार है, आप उसको आज रात दो तीन बार चोद दो तो शायद यह भी गर्भवती हो जाए, कोशिश कर देखने में क्या हर्ज है?

मैं बोला- कोई हर्ज नहीं, पर अभी भाभी को मेरे साथ सोना पड़ेगा?

भाभी बोली- वो तुम्हारी मम्मी ने तो यह कमरा मुझको और एक लड़की को सोने के लिए दिया था और तुम्हारे साथ रूम शेयर करने के लिए भी कहा था।

कम्मो बोली- तो फिर ठीक है छोटे मालिक, आज रात को आपको चोदेंगे और आगे आपकी किस्मत है कि आप गर्भवती हो जाती हो या नहीं!

मैंने कहा- कम्मो तुम को भी यहाँ सोना पड़ेगा आज की रात और मैं छोड़ूंगा नहीं तुमको भी!

कम्मो हँसते हुए बोली- मत छोड़ना मुझको और भाभी को भी!

 
पर्बती की ना और बाद में मेरी भी ना

मैंने कहा- कम्मो, तुमको भी यहाँ सोना पड़ेगा आज की रात और मैं छोड़ूंगा नहीं तुमको भी!

कम्मो हँसते हुए बोली- मत छोड़ना मुझको लेकिन भाभी का काम कर दो, वरना वो बच्चा कहाँ से लाएगी अपने जीवन में!

मैं बोला- भाभी की मुराद तो पूरी करनी ही है लेकिन उनसे पूछ लो की उनका पति वापस जाने पर चोद सकेगा क्या?

भाभी बोली- वो साला अफीमची है तो मैं उसको जाते ही घेर लूंगी और जैसे भी होगा, उससे चुदवा लूंगी।

कम्मो बोली- तो फिर उतारो नाइटी और शुरू हो जाओ!

मैं तो तैयार था ही और जल्दी से भाभी को जफ्फी मारी, उसके सुंदर होटों पर एक हॉट किस करते हुए मैं उसको जल्दी ही बेड पर ले गया और उधर कम्मो ने भी अपने कपड़े उतार दिए और वो भी चुदाई के मैदान में कूद पड़ी!

जूही भाभी को उस रात मैंने 3 बार चोदा और हर बार मैंने उसकी चूत मैं अपना गाढ़े वीर्य की पिचकारी छोड़ी जो उसके गर्भदानी के अंदर तक चली गई होगी, ऐसा मेरा अनुमान है।

हर बार भाभी की चूत को कम्मो ने गर्भ वाली पोजीशन में रखा ताकि उसको गर्भ ठहरने की पूरी उम्मीद बनी रहे।

जब भाभी थक कर गहरी नींद में सो गई तो मैंने कम्मो की एकदम गीली चूत को भी चोदा और उसका दो बार छुटाया और साथ में यह वायदा भी ले लिया कम्मो से की अगली रात में वो निम्मो और पर्बती को भी घेर कर लाएगी मेरे पास!

कम्मो बोली- हाँ, कल तक तो सारे मेहमान चले ही जाएँगे तो वो खाली होंगी दोनों। निम्मो को तो आपने पहले ही चोद रखा है, पर्बती है जो नई है. उसका भी कुछ जुगाड़ करती हूँ, आप निश्चिन्त रहे छोटे मालिक।

रात को हम दोनों काफी देर बाद सोये लेकिन सोने से पहले मैंने कम्मो से पूछा कि यह भाभी गर्भवती हो पायेगी कि कह नहीं सकते।

कम्मो ने विश्वास दिलाया कि सवेरे तक वो बता देगी कि उसका कुछ काम हुआ या नहीं अन्यथा उसको लखनऊ शहर में बुला लेंगे और वहाँ इतमीनान से इन को गर्भवती कर देना।

अगले दिन जाने से पहले सब लड़कियाँ मुझ से मेरे कमरे में मिलने आयी और मुझ को बहुत ही हॉट जफ्फी मारी चुम्मियाँ भी ली और थैंक्स भी कहा।

सांवरी और रेवा जो बाद में जाने वाली थी, उनके भी भाई आ गए थे, वो भी सबके साथ सवेरे का नाश्ता पानी करके अपने अपने घरों के लिए चली गई थी।

लड़कियों से मिलने के बाद दोनों भाभियाँ भी आईं मुझसे मिलने और मेरा बहुत धन्यवाद करने लगी क्यूंकि कम्मो ने कन्फर्म कर दिया था कि वो दोनों भी प्रेग्नेंट हो चुकी हैं।

सब मेहमानों के जाने के बाद मम्मी और पापा और मैं बैठक में बैठे थे कि पापा जी बोले- वाह सोमू, तुम तो लखनऊ जाकर पूरे ट्रेंड हो गए कि कैसे मेहमानों का स्वागत करना है और कैसे उनका ध्यान रखना है… बहुत खूब सोमू, वेल डन!

मम्मी भी हँसते हुए बोली- तुमने लड़कियों का काफी अच्छा ख्याल रखा और सब तुम्हारी तारीफ़ कर रही थी। अच्छा कोई इनमें से पसंद आई तुमको अपनी दुल्हन के रूप में?

मैं एकदम से हैरान हो गया- क्या बात कर रही मम्मी जी? मैं और शादी अभी? कभी नहीं। अभी में तो कॉलेज के प्रथम साल में हूँ मम्मी जी! मुझ को कम से कम बी ए तो कर लेने दो फिर सोचना शादी का, क्यों पापा जी आपका ख्याल है?

पापा बोले- सोमू ठीक कह रहा है अभी इसको पढ़ने दो शादी की बाद में सोचेंगे।

आज कोई काम नहीं था, मैं पापा की बाइक लेकर अपने गाँव ही घूम आने की बात सोच ही रहा था कि कम्मो मेरे कमरे में आ गई और बोली- छोटे मालिक क्या करने का विचार है आज आपका?

मैं बोला- मैं सोच रहा था कि ज़रा गाँव ही घूम आते हैं! क्यों ठीक नहीं क्या?

कम्मो बोली- ठीक है, घूम आइये लेकिन मैंने पर्बती से बातचीत की है, वो कह रही थी हवेली में तो आपसे मिलना उसके लिए ठीक नहीं सो कहीं और जगह मिल लेते हैं?

मैं हैरान होकर बोला- वो ऐसा क्यों बोली?

कम्मो हँसते हुए बोली- उसको मम्मी जी का डर है, इसलिए! मैंने कहा भी कि मम्मी जी कभी ऊपर सोमू के कमरे में रात को नहीं जाती लेकिन वो अभी भी डर रही है।

मैं बोला- तो फिर क्या करें?

कम्मो बोली- आप उसको कॉटेज में क्यों नहीं मिल लेते आज लंच के बाद?

मैं बोला- तुमको भी तो वहाँ रहना ज़रूरी है ना तो तुम भी चलो!

कम्मो बोली- ठीक है मैं भी चल पडूँगी उसके साथ!

खाना खाकर कम्मो आ गई और कहने लगी- कैसे चलेंगे वहाँ?

मैंने कहा- बाइक पर चलते हैं, तुम दोनों पीछे बैठ जाना, क्यों ठीक नहीं क्या?

कम्मो बोली- ठीक तो है, पर यह गाँव खेड़ा है यहाँ मालिक और नौकरों के बीच फर्क रखा जाता है।

मैं बोला- ठीक है, मैं पहले चलता हूँ बाइक पर, तुम दोनों आ जाना पैदल।

मैं बाहर निकला और पापा की बाइक उठाई और थोड़े समय में कॉटेज पहुँच गया और चौकीदार को कोक की बोतलें और बर्फ लाने के लिए भेज दिया।

दस पंद्रह मिन्ट में वो दोनों भी पहुँच गई।

पर्बती दिखने में सुंदर थी, चाहे उसका रंग सांवला था लेकिन उसका जिस्म भरापूरा था और वो चाल में मस्तानी और आँखों से शराबी लग रही थी।

वो बिना कुछ बोले ही अंदर आ गई और कम्मो उसके पीछे आई।

दोनों को बिठा कर मैं अंदर घूमने लगा और फिर थोड़ी देर बाद चौकीदार कोकाकोला की बोतलें भी दे गया।

कम्मो ने बोतलें खोल कर हम सब के हाथ में दे दी।

फिर मैं बोला- क्यों कम्मो। आगे का क्या प्रोग्राम है?

कम्मो बोली- आप बोलो, क्या करना है। पर्बती से बात की थी लेकिन वो बोली कि छोटे मालिक तो लड़के लगते हैं वो पूरी तरह से मर्द नहीं हैं। अभी तो मैं चुप कर गई।

मैं हंस पड़ा- हाँ, पर्बती ठीक कहती है लेकिन एक बात तो है यह खाना बड़ा ही लज़ीज़ बनाती है इसमें कोई शक नहीं। बिल्कुल अपनी पारो की तरह… क्यों?

कम्मो बोली- हाँ छोटे मालिक, वो भी तो कहती थी ना कि आप तो अभी लड़के लगते हैं।

मैं बोला- वही तो, ऐसा करते हैं हम दोनों पर्बती को एक नमूना दिखाते हैं फिर उसके ऊपर छोड़ देते हैं जैसे वो चाहे, क्यों पर्बती?

पर्बती कुछ नहीं बोली और हम तीनों बैडरूम में चले गये। वहाँ कम्मो मेरे कपड़े उतारने लगी, जब वो मेरे कच्छे तक पहँची तो अपना मुंह पीछे कर लिया और फिर मेरे कच्छे को नीचे खींच लिया।

जैसे ही उसने कच्छे को उतारा मेरा लंड एकदम खड़े नाग की तरह उछल कर बाहर आ गया और कम्मो ने उसको अपने मुंह में ले लिया और उसको चूसने लगी।

मैंने उसको उठाया और उसके कपड़े उतारने लगा जैसे कि पहले उसकी साड़ी को उतारा और फिर उसके हल्के नीले ब्लाउज को उतार दिया और एकदम सफ़ेद ब्रा से ढके मुम्मों को आज़ाद किया।

और अब मैंने उसके पेटीकोट के नाड़े को खोल दिया, उसका पेटीकोट झट से नीचे उतर गया, मैंने अपने मुंह को उसकी चूत पर छाई काली घटाओं में छुपा लिया और उसकी चूत में से निकल रही खुशबू को सूंघने लगा।

फिर मैं खड़ा हो कर उसके मुम्मों के चूचुकों को चूसने लगा और कम्मो का हाथ मेरे लौड़े से खेल रहा था।

हम दोनों पर्बती से बेखबर अपनी काम क्रीड़ा में लगे हुए थे और अब कम्मो खड़े होकर चुदवाने के लिए तैयार हो गई। मैंने उसको बिस्तर पर थोड़ा झुकाया और पीछे से अपने लम्बे लंड को उसकी गरम चूत में डाल दिया और फिर मैंने धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने में लग गया।

मेरे हाथ पीछे से कम्मो के मोटे और सॉलिड मुम्मों को मसलने में लगे हुए थे और कभी कभी उसके चूतड़ों पर भी हाथ की थपकी मार रहा था, कम्मो भी मेरे मूड को समझती हुई मज़े में चुदवा रही थी।

मैं अब उसको काफी गहरे धक्कों की चुदाई करने लगा था। मैंने महसूस किया कि कम्मो अपने छूटने की कगार पर पहुँच रही थी और अब मैंने उसकी बड़ी तेज़ चुदाई शुरू कर दी।

मेरी अंधाधुंध स्पीड के आगे मेरी गुरु कम्मो भी नहीं टिक सकी और अपने शिष्य से हार बैठी और जैसे ही उसका छूटा वो ज़ोर ज़ोर से काँपने लगी और मैंने उसको कस कर उसके चूतड़ों को अपने लंड के साथ जोड़ लिया।

जब वो छूट गई तो उसने मुझको अपने गले से लगा लिया और मेरे मुंह पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी।

जवाब में मैं भी उसको बार बार जफ्फी लगाने लगा और उसके गालों को चूमने लगा।

फिर हम दोनों थक कर पलंग पर एक दूसरे की बाहों में लेट गए।

तब मैंने पर्बती की तरफ देखा तो वो अपने एक हाथ को अपनी साड़ी के अंदर डाल कर चूत घर्षण कर रही थी।

मैंने और कम्मो ने पर्बती को पूरी तरह से इग्नोर किया और फिर हम दोनों अपने कपड़े पहनने लगे और वापस जाने के लिए तैयार हो गए।

तब पर्बती बोली- मेरा क्या होगा?

कम्मो बोली- तुम्हारा क्या होना है पर्बती? तुमने तो छोटे मालिक से करवाने के लिए इंकार कर दिया था, हम अब वापस चल रहे हैं।

पर्बती ने कहा- नहीं, मैंने दुबारा सोचा, मैं तैयार हूँ छोटे मालिक से करवाने के लिए!

मैं बोला- पर्बती, तुमने एक बार ना कर दी, मैं अब तैयार नहीं हूँ तुम्हारे साथ कुछ भी करने के लिए, चलिए कम्मो।

यह कह कर मैं बाहर निकल आया और अपने मोटर साइकिल की तरफ जाने लगा।

तब कम्मो मेरे पास आई और बोली- जाने दो छोटे मालिक, पर्बती से गलती हो गई है, उसको सुधारने दो ना!

मैं बोला- ऐसा नहीं कम्मो, मैं बिना किसी की मर्ज़ी के कुछ भी नहीं करता, पर्बती ने अपनी मर्ज़ी बता दी तो कहानी यहीं खत्म करो ना! अच्छा मैं चलता हूँ, तुम दोनों पीछे आ जाना।

यह कह कर मैं हवेली की तरफ चल दिया।

दोपहर के खाने के बाद मैं अपने कमरे में आराम कर रहा था और ना जाने कब मेरी आँख लग गई।

शाम की चाय लेकर कम्मो मेरे पास आई और कहने लगी- वो पर्बती बड़ी पछता रही है, आपसे माफ़ी माँगना चाहती है, आप मान जाइए ना प्लीज?

मैं बोला- ऐसा है कम्मो, मैं चाहता हूँ एक दो दिन उसको ज़्यादा घास मत डालो, उसके बाद देखेंगे! और हाँ, आज रात तुम और निम्मो आ जाना मेरे कमरे में!

कम्मो बोली- ठीक है छोटे मालिक, जैसे आप कहो! वैसे मेरी सलाह मानिए, पर्बती हमारे सारे राज़ जानती है, जैसे आपने उन मेहमान लड़कियों से कुछ किया, यह वो जानती है, हालांकि पूरी तरह से नहीं लेकिन थोड़ी बहुत तो जानती है। और फिर आज उसने हम दोनों को देखा है तो आप उसको माफ़ कर दीजिये और आज रात उसका काँटा खींच दीजिये।

मैं थोड़ी देर सोचता रहा और फिर बोला- ठीक है कम्मो डार्लिंग, जैसे तुम कहो वैसे ही कर लेंगे। और कोई नई लड़की या औरत आई है हवेली में?

कम्मो बोली- हाँ, आई तो है लेकिन वो सिर्फ दिन के काम के लिए है, रात को नहीं रहती यहाँ।

मैं बोला- कैसी है दिखने में? सेक्सी है क्या?

कम्मो अब हँसते हुए बोली- छोटे मालिक, आप भी न… कभी कभी सरकारी सांड की तरह व्यवाहर करते हो? अच्छी है देखने में और सेक्सी भी है और उसका पति भी यहाँ नहीं है, कई महीनों से वो आम भी पका हुआ है, तोड़ लेंगे कभी उसको।

मैंने कम्मो को जफ्फी मारते हुए कहा- वाह कम्मो रानी… अच्छा सुनो, उस दिन नदी पर एक बड़ी ही सुन्दर सांवली सी औरत नहा रही थी, उसके बारे में पता करो ना प्लीज!

कम्मो मुस्कराते हुए बोली- मैं उस दिन ही समझ गई थी कि आपकी नज़र इस काले हीरे पर ज़रूर पड़ेगी, मैंने उसके बारे में पूरा पता कर लिया है और समय आने पर उसको भी आपकी झोली में ज़रूर डाल दूँगी।

मैं इतना ज़्यादा खुश हो गया कि मैंने कम्मो को बाहों में भर कर एक ज़ोरदार किस उसके रसीले होटों पर जड़ दी।

उस रात पर्बती और निम्मो कम्मो के साथ आई और आते ही पर्बती ने मुझसे माफ़ी मांगी।

मैंने पर्बती से कहा- देखो पर्बती, मैं किसी भी औरत के साथ कोई ज़बरदस्ती नहीं करता और ना ही मैं अपने ज़मींदार साहिब के लड़के होने का नाजायज़ फायदा ही उठाता हूँ। आज तक जितनी भी औरतों या फिर लड़कियों से मेरे सम्बन्ध रहे है वो सब उनकी ख़ुशी और इच्छ से ही रहे हैं। जब कभी भी तुमको लगे कि तुमको किसी काम को करने की मर्ज़ी नहीं है तो खुल कर मुझसे या फिर कम्मो से कह दो और वो काम करने के लिए तुमको कोई मजबूर नहीं करेगा।

पर्बती बोली- आप ठीक कह रहे हैं छोटे मालिक, जैसा आप या फिर कम्मो बहन कहेंगी मैं वैसा ही करूंगी।

मैं बोला- तो आओ मुझको एक जफ्फी मारो और लबों पर गर्मागर्म चुम्मी दो।

 
पर्बती फ़ौरन आई, मुझको एक टाइट जफ्फी मारी और अपने गर्म होंट मेरे होंटों पर रख दिए और मैंने भी उसके मुम्मों को अपने हाथों में ले कर खूब मसला और एक हाथ उसकी चूत में उसकी नीली साड़ी के ऊपर से ही रख दिया।

उसको छोड़ कर मैं निम्मो की तरफ मुड़ा और उसको भी एक टाइट जफ्फी मारी और उसके होटों पर एक रस भरी चुम्मी कर दी।

फिर मैंने कम्मो की तरफ देखा और उसको भी जफ्फी मारने के बाद एक गर्म चुम्मी भी की और फिर बाकी औरतों की तरफ देख कर मैं बोला- पर्बती और निम्मो शायद यह नहीं जानती कि कम्मो और मेरा रिश्ता एक गुरु और चेले का रिश्ता है। जो कुछ भी मैंने आज तक कामकला के बारे में सीखा है वो सब कम्मो की देन है। यह कम्मो ही थी जिसने मुझमें मौजूद असाधारण काम शक्ति को पहचान लिया था शुरू से ही और उसको ठीक रास्ते पर ले कर गई, अब तक वरना अगर वो ना होती तो हो सकता है मैं बहुत ही गलत रास्ते पर चल पड़ा होता। इस लिए हमेश से कम्मो का बहुत अधिक ऋणी हूँ और आगे चल कर भी रहूंगा। धन्यवाद आप दोनों ने मेरी कहानी का एक छिपा हुआ अध्याय सुना और मैं यह उम्मीद करता हूँ कि आप इस को केवल अपने तक ही रखेंगे।

कम्मो ने अपनी आँखें पौंछते हुए दोनों से कहा- चलो शुरू हो जाओ चुदाने वाली कन्याओं। उतारो अपनी धोतियाँ और ब्लाउज पेटीकोट।

मैं बोला- पर्बती के कपड़े मैं उतारूंगा क्यूंकि नई लड़की या फिर औरत का चीरहरण मैं स्वयं ही करता हूँ! इधर आओ पर्बती।

और जब वो मेरे पास आ गई तो मैंने पहले उसकी साड़ी को उतार दिया और फिर उसका ब्लाउज, और फिर उसका पेटीकोट भी निकाल दिया। और फिर मैं थोड़ा पीछे हट कर उसकी जिस्मानी ख़ूबसूरती को देखने लगा जो वाकयी में ही बड़ी सुंदर थी। उसके मुम्मे बड़े गोल और सॉलिड और सांवले थे लेकिन मक्खन की तरह मुलायम थे और इसी तरह ही उसकी जांघें भी गोल और मुलायम थी।

उसकी चूत पर छाई काली घटायें बड़ी ही आकर्षक लग रही थी, कुल मिला कर वो एकदम सेक्स का मजस्मा लग रही थी।

उधर देखा तो निम्मो और उसकी बहन कम्मो दोनों नंगी खड़ी थी और दोनों भी अपने स्टाइल में काफी सेक्सी लग रही थी।

मैंने पर्बती को कहा- मेरे भी कपड़े उतारो न कोई?

तब पर्बती आगे बढ़ कर मेरे कपड़े भी उतारने लगी, पहले कुरता, फिर पयजामा उतार दिया और उसके बाद मेरे अंडरवियर तक जब पहुँची तो कम्मो और निम्मो दोनों एकदम रुक गई और मेरे कच्छा उतारने का नाटक देखने लगी।

पर्बती का चेहरा मेरे लंड की सीध में ही था, जैसे ही उसने कच्छे को नीचे की तरफ खींचा तो मेरा नाग की तरह लंड उछल कर सीधा उसके मुंह पर लगा और वो हतप्रभ हुई पीछे गिर गई।

दोनों औरतों इतने ज़ोर से हंस दी कि मुझको लगा ज़रूर यह आवाज़ मम्मी के कमरे तक पहुँच गई होगी।

मैंने पर्बती को उठाते हुए कहा- पर्बती कहीं चोट तो नहीं लगी न?

अब वो सारी शरारत समझ गई थी तो ज़बरदस्ती मुस्कराने की कोशिश करते हुए बोली- कल तो कम्मो के साथ ऐसा नहीं हुआ था?

कम्मो और निम्मो बोली- हमारे साथ भी यह हो चुका है लेकिन अब हम इस लंड लाल की काली करतूत समझते हैं तो छोटे मालिक का कच्छा बड़े ध्यान से उतारती हैं।

मैंने पर्बती को अपने गले लगाया और उसके होटों पर एक ज़बरदस्त चुम्मी की और उसके गोल और सॉलिड मुम्मों को चूसने लगा, एक ऊँगली उसकी चूत में डाल कर उसकी भग को रगड़ने लगा।

पर्बती ने भी मेरा लंड अपने हाथों में पकड़ लिया, उससे खेलने लगी।

उसकी चूत अभी इतनी गीली नहीं हुई थी, मैंने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी जांघों में बैठ कर उसकी चूत को चूसने लगा। जैसे ही मैंने उसकी चूत में मुंह लगाया तो वो एकदम से बिदक उठी और अपने हाथों से मेरे सर को हटाने लगी।

मैंने पूछा- क्या हुआ पर्बती?

पर्बती बोली- यह आप क्या कर रहे हो छोटे मालिक? यहाँ क्यों मुंह लगा रहे हो?

मैं हैरान हो गया और फिर पूछा- क्यों पर्बती, क्या तुम्हारी चूत में किसी ने मुंह से नहीं किया कुछ भी?

पर्बती बोली- नहीं छोटे मालिक, यह तो गन्दी चीज़ है ना, यहाँ कभी मुंह नहीं डालते!

कम्मो जो सब देख रही थी बोली- देख पर्बती, मैं भी तो निम्मो की चूत को चाट रही हूँ ना? यहाँ चाटने से हम औरतों को बड़ा मज़ा आता है। तू एक बार अपनी चूत को चटवा तो सही और मुंह से करवा तो सही ना छोटे मालिक से?

अब पर्बती ने अपनी टांगें फैला दी और मैं फिर से उसकी जाँघों में बैठ कर उसकी चूत को मुंह से चाटने लगा।

जैसे ही उसकी चूत पर मुंह रखा तो पर्बती के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई और जैसे ही मैंने उसकी भग को चूसना शुरू किया, उसकी कमर ऊपर को मेरे मुंह से जुड़ गई, मैंने तब उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर उसकी भग को पूरी तरह से चूसना शुरू किया। तब उसका एक हाथ मेरे बालों में उनको पकड़ कर और ऊपर खींचने लगा।

कुछ मिनटों में पर्बती का भग चुसाई में पानी ज़ोर से झड़ गया और उसकी जाँघों ने मेरे सर को पूरी तरह से कैद कर दिया

अब मैंने अपना मुंह उठाया, सीधा उसके खुले हुए होटों पर रख दिया, उसके होटों को चूसने लगा और नीचे से मैंने अपने लंड को चूत के मुंह के ऊपर रख कर एक हल्का सा धक्का मारा और लंड फ़च से अंदर चला गया, फिर मैं इत्मीनान से पर्बती को चोदने लगा।

उधर कम्मो अपनी बहन के साथ लेस्बो सेक्स में व्यस्त थी और दोंनो एक दूसरे से गुत्थम गुत्था हो रही थी।

अब पर्बती के दोनों बाहें मेरे गले का हार बनी हुई थी और उसकी कमर मेरे धक्कों का पूरा जवाब दे रही थी। उसकी चूत बहुत ही टाइट थी और उसकी पकड़ भी काफी जानदार थी, ऐसा लगता था कि वो बहुत ही कम चुदी हुई चूत थी।

अब मैं उसके चेहरे पर आने वाले भावों से साफ़ देख रहा था कि वो चुदाई को काफी एन्जॉय कर रही थी और काफी आनंदित हो रही थी।

कोई 10 मिन्ट की चुदाई के बाद पर्बती एकदम पगला सी गई और अपने सर को इधर उधर मारने लगी और मुझको एकदम अपने से चिपका लिया और फिर उसकी चूत से सहस्रधारा बह निकली।

पर्बती की आँखें बंद थी और सांसें ज़ोर ज़ोर से चल रही थी और हम दोनों दो शरीर एक जान हो गए थे, कम्मो और निम्मो हम दोनों को आँखें फाड़ कर देख रहीं थी।

जब पर्बती कुछ संयत हुई तो उसने मुझको अपनी कैद से छोड़ा और मैं उठ कर कम्मो के पास आकर खड़ा हो गया।

निम्मो भी अपनी ऊँगली चूत में डाले हुए यह सारा गरम नज़ारा देख रही थी।

अब कम्मो पर्बती के पास गई और उससे पूछा- क्यों री पर्बती, कितने अरसे से नहीं चुदी तू?

पर्बती की आँखों से जल की धारा बह चली, उसने रोते हुए ही बताया कि जब से उसका पति उसको छोड़ कर नाचने वाली के साथ भागा, तब से उसने कभी भी चुदाई नही की। उसको भागे हुए अब 3 साल हो गए थे।

कम्मो और निम्मो हैरान हो कर बोली- साली, तू 3 साल से नहीं चुदी और छोटे मालिक से कल तो ऐसे भाग रही थी जैसे कि तुझको लण्डों की लाइन लगी है। यह तो शुक्र कर, छोटे मालिक ने तुझको माफ़ कर दिया वरना आज भी तू आधी अधूरी ही रहती।

अब मैंने निम्मो को पकड़ा, उसको थोड़ी देर चूमा चाटी के बाद उसको घोड़ी बना कर चोदना शुरू कर दिया। थोड़े समय में ही वो परास्त हो गई और फिर आई कम्मो की बारी जिस को चोदना एक रोज़ का नियम सा बन गया था जैसे कि अक्सर मियां बीवी में होता है।

बाकी की रात पर्बती और निम्मो को दो दो बार चोदा और उसके बाद हम एक ही पलंग पर घोड़े बेच कर सो गए।

 
पुरानी मोहब्बतें, फुलवा और चम्पा

सुबह उठे तो मेरी चाय फुलवा ले कर आई और मैं फुलवा को देख कर हैरान रह गया।

चाय उसके हाथों से लेने से पहले मैंने उठ कर उसको एक बड़ी ही सेक्सी जफ्फी मारी और एक गरमागरम चुम्मी उसके होटों पर दे दी।

अब मैं चाय पीते हुए उससे सारा हाल पूछने लगा तो उसने बताया- छोटे मालिक, आपकी किरपा से मेरा घर अब बिल्कुल ठीक चल रहा है, मेरा पति अब मेरा पूरा ख्याल रखता है और मेरे बच्चे से भी बहुत प्यार करता है। सब आपकी वजह से हुआ यह… वो अब अपना काम करता है और अच्छी कमाई कर लेता है।

मैं बड़ा खुश हुआ और उसको फिर गले लगाया और पूछा कि अब कभी अपनी दोगी मुझको?

वो हँसते हुए बोली- वही तो बताने के लिए मैं यहाँ आई हूँ, मेरा पति और उधर चम्पा का पति कुछ दिनों के लिए बाहर गए हैं काम से तो हम दोनों आप से मिलना चाहती हैं कॉटेज में!

मैं बड़ा ही खुश हुआ और फुलवा को फिर बाहों में भर कर एक चुम्मी दे दी उसके होटों पर और कहा- हाथ तो लगा ज़रा, मेरा लौड़ा तो तुझ को देखकर पगला गया है देख क्या फन फैलाये लहलहा रहा है तेरी चूत के लिए… बोल शुरू हो जायें अभी क्या?

फुलवा हँसते हुए बोली- नहीं छोटे मालिक, अभी कोई आ सकता है! आज खाने के बाद आ जाना कॉटेज में, वहीं चंपा को भी बुला लूंगी और कम्मो बहन को भी ले आना, हम मिल कर ढेर सारी बातें करेंगे और जो तुम कहोगे वो भी करेंगे।

मैं खुश होकर बोला- ठीक है फुलवा हम ज़रूर आएंगे वहाँ।

इससे पहले वो जाती, मैंने अच्छी तरह से उसके मुम्मे और चूतड़ों को टीपा और कई चुम्मियाँ दे डाली उसके होटों पर!

वो भी खाली कप लेकर चली गई, उसके जाने के बाद कम्मो आई कमरे में, बोली- मिल गई आपकी चहेती आपको? तो दोपहर को चलने का विचार है क्या?

मैं बोला- हाँ हाँ यार, पूरा इरादा है और तुमने भी चलना है गुरु जी!

कम्मो खुश होते हुए बोली- हाँ चलेंगे, आपकी पुरानी रानियों से मिलना जो है!

लंच करने के बाद मैंने कम्मो को अपनी बाइक पर बिठाया और उसको लेकर कॉटेज पहुँच गया।

हमारे जाने के थोड़ी देर बाद ही फुलवा और चम्पा भी आ गई।

हम सब बड़ी गर्म जोशी से एक दूसरे से मिले और खूब चूमाचाटी हुई, फिर हम सब एकदम नंगे हो गए और ध्यान से एक दूसरे को देखने लगे।

फुलवा और चंपा में काफी फर्क आ गया था जब से वो दोनों माँ बनी थी। उन दोनों का जिस्म अब पूरी तरह से मातृत्व से खिल उठा था और उन दोनों की सुंदरता में निखार भी आ गया था। उनके मुम्मे अब दूध से भरे होने के कारण बड़े भारी और मोटे हो गए थे और उनके चूतड़ भी गोल और मोटे हो गए थे।

दोनों मुझको बड़े ध्यान से देख रही थी और मेरे शरीर की तुलना मेरे पहले वाले शरीर से कर रही थी। फिर दोनों मेरे लंड को पकड़ कर उसका नरीक्षण परीक्षण करने लगी।

दोनों एक ही नतीजे पर पहुँची कि यह उनके टाइम से ज़्यादा लम्बा और मोटा हो गया है और अब बिल्कुल एक क्रोधी नाग की तरह लहलहाता है।

फिर कम्मो ने कहा- अब छोटे मालिक को अपने अपने बच्चों का भी तो बताओ ना कुछ?

दोनों एक साथ बोल पड़ी- छोटे मालिक, आपका कोटि कोटि धन्यवाद, आप ने हमको गर्भ दान दिया।

मैं बोला- नहीं नहीं, मेरा इस में कुछ भी योगदान नहीं, यह सब तुम्हें तुम्हारे पतियों ने तुम को दिया है और हमेशा उनका ही शुक्रिया अदा किया करो।

दोनों बोली- छोटे मालिक, आप महान हैं।

तब कम्मो बोली- चलिए महान जी, अब इन भूखी गायों को हरा कर दीजिये एक सरकारी सांड की तरह!

पहले मैंने फुलवा को ही लिया चुदाई के लिए और उसको बिस्तर की तरफ ले जाने लगा, तब मैंने उससे पूछा- तेरा पति कैसे चोदता है तुझको?

वो फिर उदास हो कर बोली- कहाँ छोटे मालिक, वो तो कभी कभी जब शराब के नशे में होता है तो एक आध बार चोद देता है वर्ना कई कई दिन मेरी तरफ देखता भी नहीं।

कम्मो बोली- तुम कल मेरे पास आना हवेली में, मैं तुमको एक नुस्खा दूंगी, जिससे हो सकता है तेरा काम ठीक होने लगे!

और फिर फुलवा मुझ से बेतहाशा लिपट गई, मैं उसको लेकर बिस्तर में लेट गया और उसके मुम्मों को छोड़ कर सारे शरीर को चूमने लगा।

तभी कम्मो ने चम्पा को भी बिस्तर में हमारे साथ लिटा दिया और एक तरफ से चम्पा मेरे साथ जुड़ गई और दूसरी तरफ फुलवा… और मैं उन दोनों की पुरानी यादों के साथ अपना दूसरा हनीमून मनाने लगा।

बारी बारी से पहले फुलवा के ऊपर चढ़ा और उसको बड़े आराम से चोदने के बाद मैं चंपा के ऊपर चढ़ गया और उन दोनों का 2-3 बार छुटाने के लिए मैंने उन दोनों को कभी घोड़ी बना कर चोदा और कभी खड़ा करके चोदा और कभी अपने ऊपर बिठा कर चोदा और उन को तभी छोड़ा जब दोनों ने कहा- बस करो छोटे मालिक, हमारा महीनों का काम आपने कर दिया।

उसके बाद मैंने उन दोनों को 100-100 रूपए का इनाम भी दिया जो उनको बहुत ही पसंद आया और दोनों ने बार बार मेरा शुक्रिया अदा किया।

पुरानी यादों को ताज़ा करके मैं और कम्मो हवेली में वापस आये।

 
डांस डायरेक्टर की चूत चुदाई

अगले दिन पापा ने मुझको नाश्ते के टेबल पर बताया- बॉम्बे से फिल्म वाले आने वाले हैं और वो यहाँ गाँव में फिल्म की शूटिंग करने आ रहे हैं, उस फ़िल्म का फ़ाइनेंस भी हम कर रहे हैं।

मैं एकदम से खुश हो गया और बड़े ही जोश में पूछने लगा- पापा कौन सी फिल्म की शूटिंग करेंगे वो यहाँ?

पापा बोले- वो आज लंच से पहले आ रहे हैं सो यह सारी बात उन से ही पूछ लेना।

लंच से पहले ही दो बड़ी बड़ी कारें हमारी हवेली के अंदर आकर रुकी और मैंने और पापा ने फिल्म यूनिट का स्वागत किया और उनको बैठक में ले आए।

आने वालों में एक तो अधेड़ उम्र वाले सज्जन थे और दो चालीस की उम्र वाले आदमी थे और साथ ही उन में दो बड़ी खूबसूरत औरतें भी थी।

उनको देख कर मेरे मन में कोई ख़ास उत्सुकता तो नहीं उत्पन्न हुई और ना ही उन फ़िल्मी सुंदरियों को देख कर मेरे मन में कोई हलचल उत्पन्न हुई।

बातों बातों में पता चला कि ये दोनों औरतें फिल्म में होने वाले डांस का सीन नदी किनारे करेंगी।

फ़िल्म यूनिट को एक तो अपने स्टाफ़ के रहने की समस्या थी, दूसरे उनको फ़िल्मी डांस के लिए उपयुक्त स्थान को ढूंढना था।

जो थोड़े बज़ुर्ग से दिखने वाले सज्जन थे, वो ही पापा से बात कर रहे थे।

नाश्ता पानी के बाद पापा उनको अपनी कार में गाँव घुमाने के लिए ले गए।

अगले दिन यह तय हुआ कि फिल्म यूनिट कॉटेज में रहेगी और फिल्म कम्पनी कॉटेज और गाँव की भूमि का इस्तेमाल करेगी और उस का तयशुदा पैसा भी देगी ज़मींदार साहब को!

उनको बावर्ची और बर्तन इत्यादि दिलवा दिए जाएंगे ताकि वो अपनी पसन्द का खाना खुद बनवा सकें।

पापा ने मुझसे कहा कि मैं उनको समस्त सुविधाएँ देने का जिम्मा अपने ऊपर ले लूँ।

उनमें से जो एक हीरोइन जैसी सुंदर स्त्री थी मुझ को उसे रहने की जगाह दिखानी थी तो मैं उनकी बड़ी गाड़ी में उनको लेकर कॉटेज में गया और वहाँ की सारी सुविधाएँ उनको दिखा दी।

कमरे तो केवल 5 ही थे लेकिन उनके साथ टॉयलेट बहुत काम के थे उनके लिये।

उस सुन्दरी ने अपना नाम मधु बताया था और देखने में वो खासी खूबसूरत लग रही थी और उसने बड़े ही फैशनेबुल कपड़े पहन रखे थ।

जब वो हमारी कॉटेज के मुख्य बैडरूम में पहुँचे तो वो कहने लगी कि वो थोड़ा आराम करना चाहती है और उसको प्यास भी लगी है।

मैं झट से उनके लिए कोकाकोला की बोतल खोल कर ले आया और उसको देख कर वो बेहद खुश हुई।

फिर उन्होंने मुझ से पूछा- तुम्हारा नाम क्या है?

मैंने मुस्कराते हुए कहा- मेरा नाम सोमेश्वर है लेकिन सब मुझ को प्यार से सोमू बुलाते हैं और आप भी मुझको इसी नाम से बुला सकती हैं।

मधु बोली- क्या कॉलेज में पढ़ते हो तुम?

मैं बोला- जी हाँ मैं लखनऊ में कॉलेज में फर्स्ट ईयर इंटर में पढ़ता हूँ और वहीं ही रहता हूँ।

मधु बोली- अच्छा है! तुम जानते हो तुम काफी हैंडसम दिखते हो बिलकुल फिल्म के हीरो के माफिक।

मैं बोला- थैंक्यू मधु आंटी लेकिन मेरी सूरत कोई ख़ास नहीं है ना!

मधु बोली- मुझ को आंटी मत कहो ना प्लीज। तुम मुझको मधु के नाम से बुला सकते हो!

मैं बोला- आप इस फिल्म की हिरोइन हैं क्या?

मधु बोली- नहीं रे, मैं तो सिर्फ फिल्म की डांस डायरेक्टर हूँ. कल जो लड़कियाँ डांस करने के लिए आ रही हैं मैं उनको डांस के स्टेप्स सिखाऊँगी और कैसे डांस करना है यह बताऊँगी। तुमको डांस करना आता है क्या?

मैं बोला- नहीं मैडम जी, मैंने कभी डांस नहीं किया।

मधु बोली- अरे सोमू, कुछ भी मुश्किल नहीं है, मैं सिखा दूंगी तुमको, इधर आओ मैं तुमको बताती हूँ कुछ स्टेप्स।

मधु मैडम ने मेरा हाथ अपने हाथ में पकड़ा और दूसरा हाथ मेरी कमर में डाला और मुझको कमरे में गोल गोल घुमाने लगी और इसी चक्कर में मेरा हाथ दो तीन बार उसके गोल उभरे हुए स्तनों पर जा लगा और दो तीन बार उसका भी हाथ मेरे लंड पर लग था।

मैडम की हाइट होगी 5.6 फ़ीट थी और मेरी हाइट जो 5 .11 फ़ीट से बड़ी मैच कर रही थी।

हम दोनों थोड़ी देर हाथों में हाथ डाले कमरे के चारों तरफ चक्कर काटते रहे और मैंने मौका देख कर उसके गोल चूतड़ों पर भी दो बार हाथ लगा दिया।

फिर चक्कर लगाते हुए मैडम का पैर मेरे पैरों से उलझा और वो गिरने लगी तो मैंने उसको अपनी बाहों में संभाल लिया और उस को अपनी छाती से लगा लिया।

कुछ समय वो मेरी छाती से ही चिपकी रही और मैं भी उसके सुडोल मुम्मों का आनन्द लूटता रहा, फिर वो मुझसे अलग हुई और उसने अपने होटों को मेरे होटों पर रख कर एक हलकी सी चुम्मी कर दी।

मैं भी कम्मो का सिखाया हुआ शिष्य था, झट से मैंने उसको अपनी बाँहों में भींच लिया और उसके गर्म लबों पर कई चुम्मियाँ कर दीं।

इस जफ्फी के दौरान मेरा खड़ा लौड़ा उसकी साड़ी के बाहर से उसकी चूत पर लग रहा था और तभी मैंने महसूस किया कि उसका एक हाथ मेरे लंड के साथ पैंट के ऊपर से खेल रहा था।

उसने मेरी तरफ देखा एक भेद भरी नज़र से और मैंने भी उसको एक हल्की सी आँख मार दी।

अब मैंने उसको अपनी बाहों में लेकर बहुत ज़ोर से जफ्फी डाल दी और फिर उसकी साड़ी को उतारने के लिए हाथ आगे बढ़ाया तब वो बोली- अरे कमरे के दरवाजे को तो बंद कर लो ना प्लीज।

मैंने कहा- मैडम जी, फ़िक्र ना करें, बाहर चौकीदार है ना… वो किसी को अंदर नहीं आने देगा।

फिर भी मैडम की तसल्ली के लिए मैंने कमरे को बंद करके कुण्डी लगा दी और अब मैंने मैडम की साड़ी की तरफ हाथ बढ़ाया।

मैडम स्वयं ही अपनी साड़ी उतारने लगी और मैं एक फैशनेबुल लेडी को कपड़े उतारने का जलवा देखने लगा।

मैडम सच में फ़िल्मी स्टाइल में अपनी साड़ी उतारने लगी, थोड़ी सी साड़ी खोली और फिर एक चक्कर कमरे का और मेरे इर्दगिर्द लगाया और फिर उसने सारी साड़ी उतार दी और उसी कलर का सिल्क का पेटीकोट सामने आ गया जो बेहद सेक्सी लग रहा था।

फिर उसका एक हाथ अपने ब्लाउज की तरफ बढ़ा और उसने मुझको आँख से इशारा किया मैं भी अपने कपड़े उतारने शुरू करूँ।

मैडम का ब्लाउज़ और मेरी कमीज एक साथ उतरे और फिर उसने अपनी रेशमी ब्रा के हुक्स को खोलने के लिए हाथ बढ़ाया तो मैंने अपनी बनियान उतार दी और जैसे ही मेरी छाती नंगी हुई वैसे ही मैडम की ब्रा खुल कर नीचे गिरी और उसके मुम्मे उछल कर बाहर आ गए।

अब मैडम ने अपने सिल्क के चमकते हुए पेटीकोट में हाथ डाला और मैंने अपनी पैंट के बटन खोलना शुरू कर दिया।

उसने पेटीकोट को धीरे धीरे अपनी कमर से खिसकाना शुरू किया और मैंने उसके साथ साथ ही अपनी पैंट नीचे खिसकानी शुरू कर दिया।

जैसे ही उसका पेटीकोट नीचे गिरा वैसे ही मेरी पैंट नीचे गिरी और उसने मेरे अंडरवियर के नीचे बने टैंट को देखा और कहने लगी- उफ़्फ़ सोमू, क्या चीज़ है यह!

और मैंने देखा कि उसने भी सिल्क की पैंटी पहन रखी थी।

अब मैंने कहा- आप मेरा अंडरवियर उतारो और मैं आपकी पैंटी उतारता हूँ, क्यों ठीक है ना?

मैडम बोली- ठीक है, आओ मेरे पास!

मैं मैडम के पास गया और पहले उसकी पैंटी उतार दी और फिर मैं मैडम के सामने खड़ा हो गया और वो मेर अंडरवियर उतारने लगी और जैसे ही उसने अंडरवियर को नीचे खींचा, मेरा नाग नुमा लंड उछल कर मैडम की तरफ लपका लेकिन मैडम भी चतुर थी सो उस ने झट अपना चेहरा पीछे कर लिया।

यह देख कर मैडम बहुत ज़ोर से हंस पड़ी और कहने लगी- सोमू लाल मैं तुम्हारी चाल समझ गई थी जब मैंने तुम्हारे टेंट का साइज देखा तो यह बात साफ़ हो गई थी कि तुम एक नागपाल हो और यह मैंने गेस कर लिया था।

मैं थोड़ा शर्मिंदा हुआ और थोड़ा हिचकते हुए बोला- यह बात नहीं है मैडम जी, लेकिन क्या करूँ जब कोई बेध्यानी से नाग का ढक्कन खोलता है तो उसको उसका परिणाम तो भुगतना पड़ता है न!

अब मैडम खड़ी हुई तो यह देख कर मैं हैरान रह गया कि उसकी चूत पर काले बालों की लटें छाई हुई थी जबकि मुझको उम्मीद थी कि वो भी सफाचट चूत वाली होगी क्योंकि वो इतनी फैशनेबुल औरत है।

मैंने उससे पूछ ही लिया तो उसने जवाब में कहा- मेरे पति को सफाचट पुसी नहीं अच्छी लगती क्यूंकि वो मानते हैं सफाचट पुसी रखने वाली औरतें और लड़कियाँ सिर्फ रंडियों के समान होती हैं।

मैं वहीं बैठ गया और उसकी चूत में मुंह डाल कर उसकी चूत को चूसने लगा, धीरे धीरे जीभ को उसकी भग पर रख कर हल्के हल्के चूसने लगा और यह मैडम को इतना पसंद आया कि वो मुझको उठा कर बेड पर ले गई और मैं वहाँ लेट कर उसके मुम्मों को बड़ी ही बेसब्री से चूसने लगा।

फिर उसने मेरे लौड़े को खींचना शुरू कर दिया और तब मैंने उसकी टांगें चौड़ी कर उसके ऊपर से लंड लाल को लटों से भरी चूत के मुंह पर रख दिया और उसकी एकदम गीली चूत के अंदर धकेल दिया।

उसकी चूत और उसके पेट पर झुरियाँ ना होने से मैं समझ गया कि वो अभी तक माँ नहीं बनी थी और लंड उसकी बहुत ही टाइट चूत में एकदम से दूर तक चला गया।

अब मैं मैडम के अंदर से पूरा लंड निकाल कर फिर पूरा का पूरा अंदर डाल कर चोदने लगा और हर बार मैडम अपनी कमर उठा कर लंड का स्वागत करती थी और फिर हम दोनों एक दूसरे को खूब एन्जॉय करते हुए चोदने लगे।

जीवन में पहली बार एक बहुत ही फैशनेबुल औरत को चोदने का मौका मिला था तो मैं पूरी कोशिश में था कि मैडम को किसी नए ढंग से चोदूं लेकिन मुझको समझ नहीं आ रहा था कि वो नया ढंग क्या हो सकता है।

मैं अब मैडम को निहायत ही कामातुर हुआ चोद रहा था, कभी उसके गोल मुम्मों को चूसता था और कभी उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर धक्के मार रहा था।

थोड़ी देर में मधु मैडम झड़ने के करीब पहुँच गई थी, उसकी आँखें मुंदी हुई थी, होंट खुले हुए थे, सांसें तेज़ चल रही थी और मैं पूरे जोश और खरोश से लंड के धक्के मार रहा था।

और फिर मेरे लंड ने महसूस किया कि उसकी चूत में सिकुड़न आरम्भ हो गई और उसकी चूत में से हल्की सी जलधारा बहनी शुरू हो गयी थी।

अब मैंने मैडम की टांगों को हवा में कर दिया, सरपट धक्कों की स्पीड चला दी और कुछ ही क्षणों में मैडम ने मुझको अपनी टांगों में बाँध लिया, उसकी कमर ज़ोर ज़ोर से कांपने लगी और मैडम ने मुझको कस कर अपनी छाती से बाँध लिया।

थोड़ी देर हम दोनों एकदम से शांत हुए एक दूसरे से जुड़े हुए पड़े रहे और फिर मैडम अपनी टांगें सीधी करने लगी और मैं एक गहन चुम्बन मैडम के लबों पर देकर बेड पर लेट गया।

 
डांस डायरेक्टर ने मुझे चोदा

थोड़ी देर में मधु मैडम झड़ने के करीब पहुँच गई थी, उसकी आँखें मुंदी हुई थी, होंट खुले हुए थे, सांसें तेज़ चल रही थी और मैं पूरे जोश और खरोश से लंड के धक्के मार रहा था।

और फिर मेरे लंड ने महसूस किया कि उसकी चूत में सिकुड़न आरम्भ हो गई और उसकी चूत में से हल्की सी जलधारा बहनी शुरू हो गयी थी।

अब मैंने मैडम की टांगों को हवा में कर दिया, सरपट धक्कों की स्पीड चला दी और कुछ ही क्षणों में मैडम ने मुझको अपनी टांगों में बाँध लिया, उसकी कमर ज़ोर ज़ोर से कांपने लगी और मैडम ने मुझको कस कर अपनी छाती से बाँध लिया।

थोड़ी देर हम दोनों एकदम से शांत हुए एक दूसरे से जुड़े हुए पड़े रहे और फिर मैडम अपनी टांगें सीधी करने लगी और मैं एक गहन चुम्बन मैडम के लबों पर देकर बेड पर लेट गया।

काफी देर हम ऐसे ही पड़े रहे, फिर मैडम ने आँखें खोली और मुझको देख कर कहा- सोमु यार, तुम तो गज़ब के फकर हो। तुमने मुझ को आज बड़ी ही अच्छी तरह से फ़क किया है और ऐसे फक किया जैसे कि बहुत ही ज़्यादा तुम को इस काम का अनुभव हो। कहाँ से सीखा यह सब?

मैं काफी शरमाया और चुप रहा।

मैं नंगा ही उठा और किचन से कोका कोला की बोतलें उठ लाया और मैडम को एक खोल कर दी और दूसरी स्वयं पीने लग गया।

खाने के लिए कुछ बिस्कुट पड़े थे, वो मैंने मैडम को खाने के लिए दिए लेकिन मैंने देखा कि मैडम की नज़र मेरे लंड पर टिकी हुई थी।

मैंने पूछा- क्या देख रही हो मेरे लंड में?

मैडम बोली- तेरा यह अभी भी खड़ा है क्या?

मैं बोला- मैडम जी, यह तब तक खड़ा रहता है जब तक मेरे सामने वाली औरत या फिर लड़की मेरे सामने से चली नहीं जाती और जहाँ यह नंगी औरत को देखता है यह अपना सर उठा लेता है और नीचे नहीं झुकाता जब तक वो कपड़े नहीं पहन लेती या फिर चली नहीं जाती।

मधु मैडम बोली- वाह सोमू राजा, तुम्हारा यह लंड दर्जनों औरतों को चोदने की क्षमता रखता है क्या?

मैं बोला- दर्जनों को तो कभी नहीं एक साथ चोदा लेकिन मैंने अभी तक 5-6 औरतों को एक के बाद एक को चोदा है और मेरा लौड़ा उस के बाद भी खड़ा था।

मधु मैडम बोली- यह कैसे पॉसिबल है सोमू? तुम गप्प मार रहे हो या फिर लम्बी हाँक रहे हो या फिर बम्बईया भाषा में बहुत फ़ेंक रहे हो?

मैं बोला- अपने मुंह अपनी तारीफ़ क्या करूँ, आप कभी आज़मा कर देख लेना।

मैडम बोली- चलो आ जाओ, अभी फिर आज़मा लेते हैं।

मैं मुस्कराया और बोला- जितना चाहे आज़मा लो मैडम जी!

और मैं अब फिर मैडम के पास चला गया और उनके साथ पलंग पर लेट गया। मेरा लंड तब भी हवा में लहलहा रहा था और मैडम उस को हाथ में पकड़ कर उस के साथ खेल रही थी।

मैं बोला- अब बोलिए कैसे चुदवाना पसंद करेंगी आप?

मैडम बोली- मैं अब तुमको ऊपर से फ़क करती हूँ… क्यों ठीक है ना?

मैं बोला- मैडम आप जैसे चाहे फक कर लीजिये, बंदा तो तैयार है आपके लिए!

अब मैडम मेरे ऊपर बैठ गई अपनी दोनों टांगों को मेरी दोनों साइड में रख कर, फिर उसने अपने हाथ से मेरे खड़े लौड़े को अपनी चूत में डाला और पूरा डाल कर वो बड़े मज़े से धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगी।

मैं नीचे से मैडम के उरोजों के साथ खेल रहा था और उसके मोटे चूतड़ों को लगातार एक हाथ से मसल रहा था, वो काफी मोटे उभरे हुए और गोल शेप में थे।

थोड़ी देर में मैडम की चूत में से सफ़ेद क्रीम की तरह रस निकलने लगा और वो मेरे लौड़े के ऊपर से बहता हुआ मेरे पेट पर जमा होने लगा।

मैडम अब पूरे जोश के साथ मुझको चोदने में लगी हुई थी और उसके धक्कों की गति भी तेज़ होती जा रही थी।

मैडम की आँखें बंद थी और मुंह खुला हुआ था और उसके दोनों हाथ मेरी सफाचट चौड़ी छाती पर पड़े हुए थे और वो ऊपर से धक्के पर धक्के मारने में पूरी तरह से संलग्न थी।

थोड़ी देर में ही मैडम की उछल कूद और तेज़ हो गई और अब मैं भी नीचे से उसकी चूत में अपने लंड को पेल रहा था। मैंने एक ऊँगली से उसकी भग को भी मसलना शुरू कर दिया और इस दोहरे हमले के सामने मैडम की चूत बिलबिलाती हुई परास्त हो गई और मैडम मेरी छाती पर पूरी तरह से पसर गई।

मैडम की चूत में सुकड़न हो रही थी और उसकी चूत से बहते हुए क्रीमी रस से मेरा पेट भर गया था।

मैडम मेरे ऊपर से उठी, बिस्तर पर लेट कर अपनी साँसों को नियंत्रित करने लगी।

थोड़ी देर हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे, फिर मैं उठा, तौलिये से अपना लौड़ा और अपना पेट साफ़ किया और वहीं बिछी एक कुर्सी पर जा बैठा।

थोड़ी देर में मैडम संयत हो गई, उठ कर मेरे पास आई और झुक कर मेरे होटों पर एक बड़ी हॉट किस जड़ दी।

फिर वो मेरे साथ वाली कुर्सी पर बैठ गई और मेरे अभी भी खड़े लंड के साथ खेलने लगी।

मैडम ने बड़े ध्यान से मेरे लंड को देखा और बोली- क्या तुम्हारे लंड से तुम्हारा वीर्य नहीं निकलता? क्योंकि दोनों बार मेरी चूत सूखी रही और उसमें एक भी कतरा वीर्य का नहीं था, यह कैसे मुमकिन है सोमू?

मैं बोला- मैडम, मुझको अपने वीर्य को कंट्रोल करने की विधि आती है और मैं अपने वीर्य को तब तक नहीं छूटने देता जब तक मेरी इच्छा ना हो!

मैडम बोली- ओह माय गॉड !! तुम क्या चीज हो सोमू? क्या तुम भगवान हो या फिर कोई देवता जिस का लिंग हर वक्त खड़ा भी रहता है और उसमें से वीर्य भी नहीं निकलता हर बार!

मैं अपना सर नीचे कर के बोला- मैडम, मैं एक लाइलाज बिमारी में फंसा हुआ हूँ जिसको अंग्रेजी में PRIAPISM कहते है और इसका कोई इलाज भी नहीं है।

मैडम बोली- हाँ नाम तो सुन रखा है लेकिन क्या बिमारी है यह तुम बताओ ज़रा डिटेल में?

मैं बोला- इसके बारे में शायद मैं भी इतना नहीं जानता जितना मेरी हाउसमेड जानती है.फिर भी मुझको जो मालूम है वो मैं आपको बताता हूँ। वो क्या होता है जब मेरा लंड खड़ा होता है तो मेरा खून लंड की नसों में आ जाता है जैसा कि नार्मल इरेक्शन में पुरुषों के साथ होता है लेकिन मेरे लंड की नसों में जो खून आ जाता है वो कई घंटे वापस नहीं जाता जिसके कारण मेरा लंड खड़ा रहता है, यह है असली बिमारी। लेकिन मेरे साथ एक काम बहुत ही अच्छा होता है वो यह है कि जब भी मेरे मन से सेक्स का विचार दूर हो जाता है तो मेरे लंड में आया खून वापस चला जाता है।

यह नार्मल PRIAPISM के बीमारों के साथ नहीं होता उनकी लंड की नसों में खून हर वक्त जमा रहता है जिके कारण उन का लंड हर वक्त खड़ा रहता है और कुछ ही वर्षों में वो नपुंसक हो जाते है यानी उनका लंड खड़ा होने की शक्ति खो देता है।

इसके अलावा जो कुदरत की मुझ पर मेहरबानी रही है वो यह है कि मेरे लंड से वीर्य भी निकलता है जैसे की नार्मल पुरुषों के साथ होता है लेकिन यह क्रिया PRIAPISM के असली बीमार मर्दों में नहीं होती। वो बेचारे फुल इरेक्शन होते हुए ही भी किसी स्त्री को गर्भवती नहीं कर सकते।

मैडम हैरान होते हुए बोली- वाह सोमू, यह तुम बहुत ही लकी रहे हो इस मामले में, तुम्हारा केस अजीब और अनोखा है लेकिन हम औरतों के लिए बहुत ही फायेदमंद है।

मैं धीमी आवाज़ में बोला- वो तो ठीक है लेकिन कई बार मैं अपने आपको काफी बदकिस्मत महसूस करता हूँ।

मैडम ने इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और वो बेहद ख़ुशी से इधर से उधर नाच रही थी।

मैडम अपने आप से बोल रही थी- कल वो 10 लड़कियाँ जो डांस करने आ रही हैं, उन सबको मैं तुमसे चुदवाऊँगी और सिर्फ उनको चुदवाऊँगी जो अच्छा डांस करेंगी। वाह वाह… क्या हथियार मिल गया है मुझको!

मैं थोड़ा नाराज़ होते हुए बोला- नहीं मैडम, मैं ऐसा नहीं होने दूंगा मैं सिर्फ अपनी मर्ज़ी से चुदाई का काम करूंगा। ना कि आपके कहने पर, ना किसी और के कहने पर! जो मुझको पसंद होगा वही करूँगा!

मैडम एकदम बात पलट गई- नहीं सोमू, बिना तुम्हारी मर्ज़ी के यह कैसे हो सकता है, वो 10 डांसर तुम्हारे कॉटेज में ही रहेंगी न तो उनके रहने खाने पीने का इंतज़ाम भी तो करना पड़ेगा। कैसे होगा वो सब?

मैं बोला- आप बेफिक्र रहिये, यह सब हो जाएगा। अब आप कपड़े पहन लीजिये, वापिस चलते हैं।

मैडम बोली- सोमू यार, तुमने यह कहानी सुना कर मुझ को फिर गर्म कर दिया है तो एक बार और मेरी चूत चोदो न प्लीज?
 
मधु और रूबी मैडम

मैं बोला- आप बेफिक्र रहिये यह सब हो जाएगा। अब आप कपड़े पहन लीजिये वापस चलते हैं!

मैडम बोली- सोमू यार, तुमने यह कहानी सुना कर मुझको फिर गर्म कर दिया है… एक बार और चोद दो मुझे प्लीज?

मैडम ने मेरे लंड को पकड़ रखा था और वो उसके संग खेल भी रही थी।

मैंने फिर से मैडम के गोरे शरीर को चूमना और चाटना शुरू कर दिया, उसके उरोजों के चूचुक एकदम सख्त हो रहे थे, उनको चूसना शुरू कर दिया और एक ऊँगली से मैडम की चूत में भग को सहलाना शुरू कर दिया।

मैडम भग की छेड़ा छाड़ी से बड़ी जल्दी उत्तेजित हो जाती थी, मैंने झुक कर उसकी चूत में स्थित भग को अपने मुंह में ले लिया और उसको हल्के हल्के चूसने लगा।

मैडम की उत्तेजना धीरे धीरे बढ़ने लगी और वो अपने चूतड़ो को उठा कर मेरी ऊँगली का स्वागत कर रही थी, उसने मेरे लंड को खींचना आरम्भ कर दिया तो मैंने मैडम को घोड़ी बना कर उसकी उबलती हुई चूत में अपना लंड डाल दिया और बड़ी तेज़ी से चोदने लगा।

मैडम तो मेरी बिमारी का सुन कर इतनी खुश हुई थी कि वो कोई भी मौका मुझसे चुदवाये बगैर नहीं छोड़ना चाहती थी।

मेरी चुदाई की स्पीड इतनी तेज़ हो गई थी कि मैडम को अपने चूतड़ों की आगे पीछे करने की हरकत बंद करनी पड़ी और वो सांस रोक कर मेरी तेज़ चुदाई का आनन्द लेने लगी और जैसा कि मुझको यकीन था, मैडम भी जल्दी ही स्पीडी चुदाई के सामने अपने घुटने टेकने में ज़्यादा समय नहीं लगा पाई, थोड़ी देर में मैडम ने अपनी चूत से निकलने वाले क्रीम भरे रस से मेरे लौड़े को एकदम नहला दिया और स्वयं कुछ कांपती हुई बिस्तर में लेट गई लेकिन मैंने भी अपना लौड़ा नहीं निकाला जब तक मैडम ने नहीं कहा- बस कर यार सोमू!

मैं भी मैडम के साथ लेट गया और उसकी गीली चूत में ऊँगली डाल कर उसके काली गीली लटों के साथ खेलता रहा।

अबकी बार मैडम को नींद की झपकी सी लग गई और मैं वहाँ से उठ कर सारी कॉटेज में घूमने लगा।

जैसे कि मधु मैडम कह रही थी कि डांस करने वाली दस लड़कियाँ आ रही हैं लेकिन हमारे पास तो सिर्फ 5 कमरे थे जिन में पलंग बिछे हुए थे तो इन लड़कियों को कमरे शेयर करने पड़ेंगे और बाकी मधु मैडम और अन्य कर्मी जो शूटिंग के लिए आ रहे थे, उनके सोने का इंतज़ाम तो करना पड़ेगा ना!

जब मैं वापस कमरे में पहुँचा तो मैडम अपने कपड़े पहन कर तैयार हो चुकी थी लेकिन जैसे ही उसने मेरे नंगे शरीर को देखा, वो जल्दी से आई, झुक कर मेरे लंड को मुंह में ले लिया और मेरे गोल सॉलिड चूतड़ों के साथ खेलने लगी।

बड़ी मुश्किल से मैंने अपने को मैडम के पंजों से छुड़ाया।

अब मैंने मधु मैडम से पूछा- आपकी डांस वाली लड़कियाँ कहाँ सोयेंगी?

मैडम बोली- कॉटेज में 5 बैडरूम हैं ना, दो दो एक कमरे में आ जाएंगी और आराम से रह सकती है न सब.. अब रह गई उनके खाने और नाश्ते इत्यादि की व्यस्था, वो तुमको करनी है ना?

मैं बोला- वो आपके साथ आई जो दूसरी लेडी, वो क्या करेगी?

मधु मैडम बोली- वो मेरी असिस्टेंट है और वो लड़कियों से डांस करवाएगी।

मैं बोला- चलिए फिर हवेली चलते है बाकी लोग वहीं हैं ना।

मधु मैडम बोली- चलते है सोमू यार, इतनी भी क्या जल्दी है लेकिन आज तुम ने मेरी अन्तर्वासना काफी शांत कर दी।

और उसने आगे बढ़ कर फिर मुझको बाहों में ले कर चुम्मी कर दी होटों पर!

मैं बोला- मैडम चलिए ना, वो सब आपका इंतज़ार कर रहे होंगे।

हम दोनों कार में बैठ कर हवेली वापस आ गए, वहाँ बाकी सब लोग भी बैठे थे।

मैडम बोली- मैं जगह देख आई हूँ, लड़कियों के लिए तो अच्छी जगह है, वो दस तो वहाँ टिक जाएँगी लेकिन हम कहाँ रहेंगी? यानि मैं और मेरी असिस्टेंट रूबी?

वो जो बुजुर्ग सज्जन थे वो बोले- क्यों वहाँ आप दोनों के लिए कमरे नहीं हैं क्या?

मैडम बोली- नहीं, वहाँ और जगह नहीं है।

मम्मी जो वहीं बैठी थी, बोली- क्यों ठाकुर साहब, इन दो को हम अपनी हवेली में ठहरा लेते हैं जब तक यह यहाँ हैं? वो सोमू के साथ वाला बैडरूम तो खाली पड़ा है, ये दोनों उस कमरे में रह सकती हैं।

पापा बोले- हाँ, यही ठीक रहेगा अगर आप लोगों को कोई ऐतराज़ ना हो तो?

बु्जुर्ग सज्जन बोले- आप लोगों के रहने की समस्या तो हल हो गई, बाकी जो शूटिंग स्टाफ है वो तो गाँव में एडजस्ट हो ही गया है। बाकी रहा इन सबका खाने पीने का प्रबंध, वो ठाकुर साहिब कुछ आप मदद कर दें तो वो भी निपट जाएगा।

पापा बोले- पंचोली साहिब, हम क्या मदद कर सकते हैं?

सज्जन बोले- जैसे बर्तनों का इंतज़ाम, खाद्य सामग्री और भोजन बनाने का उचित स्थान जिस के लिए हम पूरा खर्चा देने के लिए तैयार हैं।

पापा बोले- क्यों सोमू, कुछ कर सकते हो इस बारे में?

मैं कुछ देर सोचने के बाद बोला- मेरे विचार में खाना बनाने का उचित स्थान तो कॉटेज है. वहाँ हम बावर्ची, बर्तन धोने वालों का इंतज़ाम कर देंगे और खाद्य सामग्री यहाँ दुकान से खरीद ली जायेगी इनके आदमियों के साथ जाकर!

पापा बोले- यह ठीक रहेगा क्यूंकि आपका यूनिट तो सारा काम नदी के किनारे करने वाला है और कॉटेज नदी के एकदम निकट है।

मैं बोला- मम्मी जी, अब रहा काम करने वालों का इंतज़ाम, तो मेरा यह सुझाव है कि इस काम की हैड अपनी मेड कम्मो को बना देते हैं, वो सारा इंतज़ाम देख लेगी।

मम्मी बोली- वेरी गुड सोमू, तुमने तो बिल्कुल सही आदमी का चुनाव किया इस काम के लिए… मैं अभी बुलाती हूँ उसको!

कम्मो के आने पर सारा काम उसको मधु मैडम ने समझा दिया और यह भी कहा कि आपको और आपके साथ काम करने वालों को सही मेहनताना भी दिया जाएगा।

इसके बाद सबने लंच किया साथ साथ और वो सज्जन जो फिल्म के निर्माता और जिनका नाम पंचोली था अपनी कार में वापस शहर चले गए और दूसरी कार स्टाफ के लिए वहीं छोड़ गए।

कम्मो दोनों मैडमों को लेकर उनका कमरा दिखा आई और कहा कि जो चीज़ आपको चाहिए तो यह बेल बजा दें तो नौकर आ जाएंगे।

अब मैं और कम्मो मेरे कमरे में इकट्ठे हुए और सबसे पहले मैंने कम्मो को एक ज़ोरदार जफ्फी मारी और एक जोरदार चुम्मी की उसके लबों पर, फिर उसको कॉटेज का किस्सा सुनाया और फिर हम दोनों डांस डायरेक्टर्स के कमरे में गए।

वो दोनों अपना सामान लगाने में व्यस्त थी, मधु मैडम ने अपनी सहायक रूबी से मुझको और कम्मो को मिलवाया।

रूबी होगी कोई 25-26 वर्ष की आयु लेकिन वो देखने में काफी सुडौल और सुंदर लग रही थी लेकिन मधु मैडम का मुकाबला नहीं कर सकती थी।

मैं कम्मो को लेकर अपने कमरे में आ गया और दरवाज़ा बंद कर दिया और फिर कम्मो को ज़ोरदार जफ़्फ़ी मार कर उसके चूचों और चूतड़ों को भी सहला दिया थोड़ी देर!

मैं बोला- अच्छा कम्मो, अब बताओ कैसे करोगी तुम यह सब इंतज़ाम? पहले करो खाना बनाने वालों का चुनाव! पर्बती तो कहीं जा नहीं सकती और तुमको अच्छी खाना बनानी वाली सब गाँव से चुननी होंगी? तुम फुलवा, चंपा, बिंदु, चंदा इत्यादि को अभी जा कर मिलो और फिर वो जूही दुल्हनिया और वो काली सुंदरी को भी पूछो… ठीक है ना? इन में से जो खाना इत्यादि शहर वालों की माफिक बनाना जानता हो उसको लेकर कॉटेज में आ जाओ। फिर इनके साथ जो लड़की या औरत बर्तन धोने या खाना वगैरह बांटने के काम करना चाहे उसको ले आओ और कुछ आदमी भी ले आओ जो भारी सामान इत्यादि उठाने में मदद करेंगे। कम्मो तुम निम्मो को साथ लेकर फ़ौरन जाओ और रास्ते में बनिये की दुकान पर उसको बोल देना कि फिल्म वालों को काफी खाने पीने का सामान चाहिए होगा, तो वो मंगवा के रखे।

वो दोनों जाने लगी तो मैंने कहा- नीचे कार खड़ी है, उसको लेकर जाओ और सारा इंतज़ाम करके आओ ।

मैंने खुद जाकर उनको कार में बिठा दिया और सारा इंतज़ाम पूरा करके आने के लिए कहा।

थोड़ी देर आराम करने के बाद मैं कॉटेज अपनी बाइक पर पहुँच गया।

अंदर गया तो देखा कि कम्मो एंड पार्टी और उसके गाँव वाली लड़कियाँ और औरतें आई हुई थी। कम्मो ने सब कुछ बताया कि कौन क्या करेगा, फुलवा और चंपा खाना बनाने का काम करेंगी, जूही दुल्हन और उसकी दो सहेलियाँ चाय वगैरह बनाएंगी और समय समय पर परोसने का काम करेंगी। 3 औरतें जो बर्तन साफ़ करेंगी वो भी आ गई थी।

बर्तन लाने के लिए दो आदमी भेज दिए गए थे, कम्मो और उसकी काम करने वालियाँ, सब के नाम एक रजिस्टर में लिख दिए गए और कौन क्या काम करेगा यह भी तय कर दिया गया था।

आखिर में मेरी नज़र उस काले हीरे पर पड़ी जो लाइन के आखिर में बैठी हुई थी।

कम्मो ने मुझ को बताया कि उस औरत का नाम सांवली है और वो खाना मेहमानो में उनके निर्धारित टेबलों पर रखने का काम और खाली प्लेटों को किचन तक पहुंचाने का काम करेगी।

जल्दी ही सब कुछ सेट हो गया और थोड़ी देर में पंचोली साहिब शहर से वापिस आ गए और सबसे पैसों के बारे में बात कर ली और पैसों का काम उन्होंने रूबी मैडम को दे दिया और कहा कि वही पैसों का हिसाब और लेन देन वही करेगी।

अब मैंने गौर से सबको देखा तो गाँव वाली लड़कियाँ और औरतों में मेरे मतलब की सिर्फ 3-4 थीं बाकी तो ख़ास नहीं थी।

मैंने देखा कि रूबी मैडम मुझ को बार बार देख रही थी छुपी नज़रों से तो अब मैं भी उसको आँखों ही आँखों से देखने लगा।

कुछ देर इस तरह चला और फिर जब मधु मैडम घर चली गई तो मैं और रूबी ही रह गई बाकी सब जन तो बाहर बैठे इंतज़ाम की बातें कर रहे थे।

फिर जब इस गहमागहमी में मेरी और कम्मो की नज़रें चार हुई थी तो मैंने आँखों से उसको इशारा कर दिया रूबी की तरफ और कम्मो ने भी हामी में हल्के से सर हिला दिया।

मैं बैठा था मौके के इंतज़ार में और तभी रूबी उठ कर आई और मुझ को कहने लगी- सोमू जी, मुझ को ज़रा इस कॉटेज की सैर तो करवा दीजिये प्लीज।

मैं बोला- ज़रूर करवा देता हूँ।

मैंने रूबी को कॉटेज के सारे कमरे दिखाए और आखिरी कमरा भी दिखाया जहाँ आज मैंने और मधु मैडम ने चुदाई की थी। कमरे को दुबारा साफ़ नहीं किया गया था तो मधु मैडम के छूटे हुए पानी के निशान दिखाई दे रहे थे बेड पर और उनको देख कर रूबी रुक गई और मुझसे पूछने लगी- यह क्या है?

मैंने भी शरारत के मूड में पूछा- आप बताओ कि ये काहे के निशान हैं?

रूबी थोड़ी देर उसको देखती रही फिर उसने ऊँगली लगा कर उन को सूंघा और फिर थोड़ा शर्माते हुए कहा- उसी के हैं।

मैंने भी खुल कर पूछा- उसी के? खुल कर बताइए ना प्लीज।

अब रूबी शर्म से एकदम लाल हो गई और मुंह एकदम नीच करते हुए बोली- फक करने के निशान हैं शायद ये!

मैं हैरान होते हुए बोला- अरे, एकदम सही जवाब है आपका लेकिन आपने कैसे समझ लिया यह सब?

अब रूबी ने सर उठा कर मेरी और देखा और कहा- मधु मैडम ने मुझ को सब कुछ बता दिया है।

मैं बोला- चलो अच्छा हुआ तो क्या आप भी वही चाहती हो एक डीप फक?

रूबी बोली- चाहती तो हूँ अगर तुम बुरा ना मानो तो?

मैं बोला- मैं क्यों बुरा मानूंगा रूबी जी? वैसे आप कहाँ की रहने वाली हैं?

रूबी बोली- मैं मराठी हूँ और अभी शादी नहीं हुई है।

मैं बोला- ग्रेट। आप क्या अभी चुदना चाहती हैं या फिर रात को?

रूबी बोली- रात को कैसे होगा? हवेली में?

मैं बोला- मेरा कमरा आप के कमरे के साथ ही है, रात को आप मेरे कमरे में आ जाएँ, कोई प्रॉब्लम नहीं हैं लेकिन मैं आपको फक एक शर्त पर ही कर सकता हूँ?

रूबी बोली- क्या शर्त है तुम्हारी सोमू?

मैं बोला- कल जो डांस करने आने वाली लड़कियाँ हैं उनकी भी मुझको दिलानी होगी बारी बारी। बोलो मंज़ूर है क्या?

रूबी हंस पड़ी और बोली- सोमू यार तुम बिलकुल निश्चिंत रहो, अगर उनको पता लग गया कि तुम बड़े चोदू हो तो वो सब तुमको कभी नहीं छोड़ेंगी?

मैं बोला- अच्छा ऐसी हैं क्या वो सब? एकदम चुदक्कड़ क्या?

रूबी बोली- फिल्म लाइन में यह सब चलता है, वो कोई भी मौका नहीं छोड़ेंगी अपना मज़ा लेने में, तो तुम बेफिक्र रहो। वो सब तुमको अपने आप बुलाएंगी।

अब मैंने आगे बढ़ कर रूबी मैडम को एक टाइट जफ्फी मार दी और उसके होटों पर एक गर्म चुम्मी जड़ दी।

उसने मेरे पैंट के बटन खोलने शुरू कर दिए और मेरे लौड़े को बाहर निकाल लिया और उसको बड़ी हैरत से देखने लगी क्यूंकि वो एकदम से सख्त खड़ा था और वो उसको हाथों में लेकर सहलाने लगी।

रूबी ने सलवार सूट पहन रखा था, मैंने सिर्फ उसकी सलवार नीचे को की और उसको बेड पर थोड़ा झुका कर पीछे से उसकी गीली चूत में अपना खड़ा लंड डाल दिया, उसकी कमीज के ऊपर से ही उसके मोटे स्तनों को मसलने लगा और धीरे धीरे से नीचे से धक्के भी मारने लगा, पूरा निकाल कर पूरा अंदर डालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी।

रूबी अब खुद भी अपने चूतड़ को आगे पीछे करने लगी और आँखें बंद करके मस्ती करने लगी।

मैं रूबी के मुलायम चूतड़ों पर हाथ फेर रहा था और मज़े से उसको चोद रहा था कि कमरे का दरवाज़ा एकदम से खुल गया और कम्मो कमरे के अंदर आ गई और दरवाज़ा फिर बंद कर दिया।

कम्मो को देख कर रूबी एकदम से सकपका गई और मुझको हटाने की कोशिश करने लगी।

लेकिन मैंने रूबी के चूतड़ों को कड़े हाथों से पकड़ रखा था तो मैं बिना रुके पीछे से रूबी की सफाचट चूत में धक्के मारता रहा।

कम्मो भी मुस्करा कर बोली- कोई बात नहीं रूबी मैडम, आप दोनों लगे रहो, मैं आपको डिस्टर्ब नहीं करूंगी।

और वो हम दोनों के और पास आकर मेरे मुंह से अपना मुंह जोड़ कर चुम्बन करने लगी।

कम्मो ने एक हाथ रूबी की चूत में डाल दिया और उसके भग को ढून्ढ कर मसलने लगी।

जैसे ही कम्मो ने ऐसा किया रूबी एकदम से दहकने लगी और जल्दी ही छूटने वाली हो गई और अब मैंने अपने लंड लाल की तेज़ी दिखानी शुरू की, सरपट घोड़े को भगाते हुए उसको चोदने लगा और चंद मिनटों में रूबी ‘हाय हाय मी जातोस मी जातोस रे…’ कहते हुए ढेर हो गई।

मैंने अपना लंड रूबी की फड़कती चूत से निकाला और कम्मो ने उसको तौलिये से साफ़ कर दिया और रूबी की चूत को भी साफ़ कर दिया।
 
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