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मैं भी कहाँ पीछे रहने वाला था….मैने अपने होंटो को नाज़िया की कमीज़ के गले से बाहर आ रहे मम्मों पर लगाते हुए पागलों की तरह चूमना शुरू कर दिया…और नाज़िया की बुन्द को दबाते हुए मजीद अपने लंड पर दबाए जा रहा था.. मैने नाज़िया की नेक और कमीज़ के ऊपेर वाले खुले हिस्से को चूमते हुए अपना एक हाथ उसकी बुन्द से हटा कर नाज़िया की कमीज़ के गले को पकड़ कर नीचे की तरफ पुश करते हुए, उसके मम्मों को और बाहर निकालने की कॉसिश करने लगा…और लगातार उसके हर इंच पर अपने होंटो को फेर रहा था….”सीईईई ओह्ह्ह समीर……” नाज़िया ने सिसकते हुए मेरे सर को पकड़ कर पीछे किया और फिर उसने एक दम से अपनी कमीज़ को पकड़ कर ऊपेर उठाया…..जब उसकी कमीज़ उसकी ब्रा तक ऊपेर उठी तो उसके साथ मैने अपने ब्रा के कप्स को पकड़ कर भी ऊपेर खेंच दिया….
नाज़िया के 36 साइज़ के मम्मे उसके ब्लॅक कलर के ब्रा से उछल कर जैसे ही बाहर आए… मैने सर झुका कर नाज़िया के लेफ्ट मम्मे को जितना हो सकता था…उतना मूह मैं लेकर सक करना शुरू कर दिया….जिस वेहशिपन के साथ मैने नाज़िया के मम्मों को चूसना शुरू किया…नाज़िया का पूरा बदन थरथरा गया…..उसने अपने बाज़ुओं को फिर से मेरे सर पर कस लिया और मजीद मुझे अपने मम्मों पर दबाने लगी…मैं भी इस स्मोक का पूरा पूरा फ़ायदा उठाना चाहता था….मैं जितना हो सकता था….उतना मूह खोल कर नाज़िया के मम्मे को मूह में लेकर चूस रहा था….नाज़िया अब पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी….और अब उसकी हरक़तों में भी हवस सॉफ झलकने लगी थी….नाज़िया सीईईई आह सीईइ करते हुए अपनी कमर को अब और तेज़ी से हिलाते हुए शलवार के ऊपेर से अपनी फुद्दि को मेरे लंड पर रगड़ रही थी….
“ओह्ह समीर सीईईईईईईईईईईईईईई अहह समीर मैं पागल हो जाउन्गा समीर ओह हाईए…..” क्योंकि नाज़िया मेरी गोद मे बैठी हुई थी….उसकी वजह से मुझे सर को झुका कर उसके मम्मों को चूसने में दिक्कत हो रही थी….शायद नाज़िया ने भी इस बात को नोट कर लिया था….नाज़िया ने सिसकते हुए एक हाथ से अपने राइट मम्मे को नीचे से पकड़ा और अपने एक इंच के सख़्त मोटे भूरे निपल को मेरे होंटो पर लगा दिया….और फिर जैसे ही मैने नाज़िया के मम्मे को मूह में लेकर सक करना शुरू किया….
तो नाज़िया ने अपने सर को पीछे के तरफ गिराते हुए, अपने जिस्म को आकड़ा लिया….” अहह ओह समीर हां खा जाओ मुझे अहह समीर प्लीज़ मेरे अंदर समा जाओ हमेशा हमेशा के लिए….” नाज़िया ने और ज़ोर से शलवार के ऊपेर से अपनी फुद्दि को मेरे लंड पर दबाते हुए कहा….नाज़िया की बात सुन कर मैने नाज़िया के मम्मे को मूह से बाहर निकाला….और उसके एक दम लाल सुराख हो चुके फेस की तरफ देखते हुए कहा…” मैं तो सिर्फ़ एक ही तरीके से तुम्हें समा सकता हूँ….” मैने नाज़िया के फेस को पकड़ कर उसके आँखो में आँखे डाल कर कहा तो,
नाज़िया ने अपनी मदहोशी और वासना से भरी आखो को खोला और अजीब से अंदाज़ मैं मुझे देखने लगी….और फिर कुछ लम्हो बाद नाज़िया ने अपने बाज़ुओं को मेरे कंधे से हटाया और नज़रें नीचे करके धीरे-2 मेरी गोद से खड़ी हो गयी…उसके कमीज़ जो उसके गले मे इकट्ठी हो चुकी थी….उसके उठने की वजह से उसके मम्मों तक नीचे आ गयी थी….जिसे नाज़िया ने जल्दी से नीचे कर लिया…मैं अपने आप को दिल ही दिल में कोसने लगा की, ये मैने क्या कह दिया…अच्छा भला एंजाय कर रहा था…मुझे लग रहा था…जैसे वो खुस्गवार पल अब ख़तम हो चुके थे….नाज़िया के चेहरे पर बड़े ही सीरीयस भाव थे….मैं अभी भी नीचे वैसे ही बैठा हुआ था….
नाज़िया ने खड़े होकर एक बार चारो तरफ का जायज़ा लिया….मैने सोचा चलो अब मोज मस्ती ख़तम….पर मैने महॉल को साजगार बनाने के लिए पास मे पड़ा वही डंडा उठा कर नाज़िया की तरफ बढ़ते हुए कहा…”ये लो अब चाहे जितना दिल करे मेरी पिटाई कर लो….” पर नाज़िया के फेस एक्सप्रेशन नही बदले…उसने डंडा पकड़ा और फिर से गद्दे पर फेंक दिया…मुझे समझ में नही आ रहा था कि, आख़िर नाज़िया के दिल में क्या है…फिर वो हुआ जिसके बारे मैं मैने सोचा भी नही था… नाज़िया ने अपने दोनो हाथो को अपनी कमीज़ के पल्ले के नीचे से डालते हुए अपनी सलवार का नाडा खोलना शुरू कर दिया….”समीर बाहर निकालो उसे….?” नाज़ी ने सामने देखते हुए कहा… और अपनी शलवार का नाडा खोलने लगी…मुझे इस बात की बिल्कुल भी उम्मीद नही थी.. और मुझे समझ मैं नही आया कि, मैं कैसे रिएक्ट करूँ…और अचानक ही मेरे मूह से निकला…”क्या…?”
नाज़िया तब तक अपनी शलवार का नाडा खोल चुकी थी….जैसे ही उसके शलवार उसके कमर पर ढीली हुई तो, नाज़िया ने अपनी शलवार के जबरन को छोड़ दिया…और फिर मेरे देखते ही देखते उसकी शलवार सरकती हुई उसके पैरो में आ गिरी…”अपना डंडा बाहर निकालो…” नाज़िया ने अपना एक पैर उठा कर उसे शलवार से बाहर निकाला और फिर वैसे ही दूसरा….नाज़िया की शलवार उसके जिस्म से अलग हो चुकी थी….नाज़िया आगे बढ़ी और मेरी रानो के दोनो तरफ पैर करके खड़ी हो गयी…मैने जल्दी से अपनी पाजामे और अंडरवेर को पकड़ कर खेंचा और उसे अपने घुटनो तक नीचे उतार दिया… जैसे ही मेरे लंड ने हवा में बाहर आकर झटका खाया तो नाज़िया ने नीचे पैरो के बल बैठते हुए एक हाथ नीचे करके मेरे लंड को पकड़ लिया…और मेरे लंड की कॅप को अपनी फुद्दि के लिप्स के बीच रगड़ते हुए फुद्दि के सूराख पर सेट करते हुए सिसक उठी….
मैं भी कहाँ पीछे रहने वाला था….मैने अपने होंटो को नाज़िया की कमीज़ के गले से बाहर आ रहे मम्मों पर लगाते हुए पागलों की तरह चूमना शुरू कर दिया…और नाज़िया की बुन्द को दबाते हुए मजीद अपने लंड पर दबाए जा रहा था.. मैने नाज़िया की नेक और कमीज़ के ऊपेर वाले खुले हिस्से को चूमते हुए अपना एक हाथ उसकी बुन्द से हटा कर नाज़िया की कमीज़ के गले को पकड़ कर नीचे की तरफ पुश करते हुए, उसके मम्मों को और बाहर निकालने की कॉसिश करने लगा…और लगातार उसके हर इंच पर अपने होंटो को फेर रहा था….”सीईईई ओह्ह्ह समीर……” नाज़िया ने सिसकते हुए मेरे सर को पकड़ कर पीछे किया और फिर उसने एक दम से अपनी कमीज़ को पकड़ कर ऊपेर उठाया…..जब उसकी कमीज़ उसकी ब्रा तक ऊपेर उठी तो उसके साथ मैने अपने ब्रा के कप्स को पकड़ कर भी ऊपेर खेंच दिया….
नाज़िया के 36 साइज़ के मम्मे उसके ब्लॅक कलर के ब्रा से उछल कर जैसे ही बाहर आए… मैने सर झुका कर नाज़िया के लेफ्ट मम्मे को जितना हो सकता था…उतना मूह मैं लेकर सक करना शुरू कर दिया….जिस वेहशिपन के साथ मैने नाज़िया के मम्मों को चूसना शुरू किया…नाज़िया का पूरा बदन थरथरा गया…..उसने अपने बाज़ुओं को फिर से मेरे सर पर कस लिया और मजीद मुझे अपने मम्मों पर दबाने लगी…मैं भी इस स्मोक का पूरा पूरा फ़ायदा उठाना चाहता था….मैं जितना हो सकता था….उतना मूह खोल कर नाज़िया के मम्मे को मूह में लेकर चूस रहा था….नाज़िया अब पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी….और अब उसकी हरक़तों में भी हवस सॉफ झलकने लगी थी….नाज़िया सीईईई आह सीईइ करते हुए अपनी कमर को अब और तेज़ी से हिलाते हुए शलवार के ऊपेर से अपनी फुद्दि को मेरे लंड पर रगड़ रही थी….
“ओह्ह समीर सीईईईईईईईईईईईईईई अहह समीर मैं पागल हो जाउन्गा समीर ओह हाईए…..” क्योंकि नाज़िया मेरी गोद मे बैठी हुई थी….उसकी वजह से मुझे सर को झुका कर उसके मम्मों को चूसने में दिक्कत हो रही थी….शायद नाज़िया ने भी इस बात को नोट कर लिया था….नाज़िया ने सिसकते हुए एक हाथ से अपने राइट मम्मे को नीचे से पकड़ा और अपने एक इंच के सख़्त मोटे भूरे निपल को मेरे होंटो पर लगा दिया….और फिर जैसे ही मैने नाज़िया के मम्मे को मूह में लेकर सक करना शुरू किया….
तो नाज़िया ने अपने सर को पीछे के तरफ गिराते हुए, अपने जिस्म को आकड़ा लिया….” अहह ओह समीर हां खा जाओ मुझे अहह समीर प्लीज़ मेरे अंदर समा जाओ हमेशा हमेशा के लिए….” नाज़िया ने और ज़ोर से शलवार के ऊपेर से अपनी फुद्दि को मेरे लंड पर दबाते हुए कहा….नाज़िया की बात सुन कर मैने नाज़िया के मम्मे को मूह से बाहर निकाला….और उसके एक दम लाल सुराख हो चुके फेस की तरफ देखते हुए कहा…” मैं तो सिर्फ़ एक ही तरीके से तुम्हें समा सकता हूँ….” मैने नाज़िया के फेस को पकड़ कर उसके आँखो में आँखे डाल कर कहा तो,
नाज़िया ने अपनी मदहोशी और वासना से भरी आखो को खोला और अजीब से अंदाज़ मैं मुझे देखने लगी….और फिर कुछ लम्हो बाद नाज़िया ने अपने बाज़ुओं को मेरे कंधे से हटाया और नज़रें नीचे करके धीरे-2 मेरी गोद से खड़ी हो गयी…उसके कमीज़ जो उसके गले मे इकट्ठी हो चुकी थी….उसके उठने की वजह से उसके मम्मों तक नीचे आ गयी थी….जिसे नाज़िया ने जल्दी से नीचे कर लिया…मैं अपने आप को दिल ही दिल में कोसने लगा की, ये मैने क्या कह दिया…अच्छा भला एंजाय कर रहा था…मुझे लग रहा था…जैसे वो खुस्गवार पल अब ख़तम हो चुके थे….नाज़िया के चेहरे पर बड़े ही सीरीयस भाव थे….मैं अभी भी नीचे वैसे ही बैठा हुआ था….
नाज़िया ने खड़े होकर एक बार चारो तरफ का जायज़ा लिया….मैने सोचा चलो अब मोज मस्ती ख़तम….पर मैने महॉल को साजगार बनाने के लिए पास मे पड़ा वही डंडा उठा कर नाज़िया की तरफ बढ़ते हुए कहा…”ये लो अब चाहे जितना दिल करे मेरी पिटाई कर लो….” पर नाज़िया के फेस एक्सप्रेशन नही बदले…उसने डंडा पकड़ा और फिर से गद्दे पर फेंक दिया…मुझे समझ में नही आ रहा था कि, आख़िर नाज़िया के दिल में क्या है…फिर वो हुआ जिसके बारे मैं मैने सोचा भी नही था… नाज़िया ने अपने दोनो हाथो को अपनी कमीज़ के पल्ले के नीचे से डालते हुए अपनी सलवार का नाडा खोलना शुरू कर दिया….”समीर बाहर निकालो उसे….?” नाज़ी ने सामने देखते हुए कहा… और अपनी शलवार का नाडा खोलने लगी…मुझे इस बात की बिल्कुल भी उम्मीद नही थी.. और मुझे समझ मैं नही आया कि, मैं कैसे रिएक्ट करूँ…और अचानक ही मेरे मूह से निकला…”क्या…?”
नाज़िया तब तक अपनी शलवार का नाडा खोल चुकी थी….जैसे ही उसके शलवार उसके कमर पर ढीली हुई तो, नाज़िया ने अपनी शलवार के जबरन को छोड़ दिया…और फिर मेरे देखते ही देखते उसकी शलवार सरकती हुई उसके पैरो में आ गिरी…”अपना डंडा बाहर निकालो…” नाज़िया ने अपना एक पैर उठा कर उसे शलवार से बाहर निकाला और फिर वैसे ही दूसरा….नाज़िया की शलवार उसके जिस्म से अलग हो चुकी थी….नाज़िया आगे बढ़ी और मेरी रानो के दोनो तरफ पैर करके खड़ी हो गयी…मैने जल्दी से अपनी पाजामे और अंडरवेर को पकड़ कर खेंचा और उसे अपने घुटनो तक नीचे उतार दिया… जैसे ही मेरे लंड ने हवा में बाहर आकर झटका खाया तो नाज़िया ने नीचे पैरो के बल बैठते हुए एक हाथ नीचे करके मेरे लंड को पकड़ लिया…और मेरे लंड की कॅप को अपनी फुद्दि के लिप्स के बीच रगड़ते हुए फुद्दि के सूराख पर सेट करते हुए सिसक उठी….