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नाज़िया बाहर बाथरूम मे चली गयी….और मैं पानी पीने के लिए किचन मे चला गया….पानी पीने के बाद जब मैं नाज़िया के रूम मे पहुँचा तो, देखा कि नाज़िया बेड पर घुटनो के बल थी….और आगे की तरफ झुक कर बेडशीट को ठीक कर रही थी….उसकी बाहर की तरफ निकली बुन्द देख कर मेरा मन फिर से मचल उठा…मैने आगे बढ़ कर पीछे नाज़िया की बूँद को मुत्थियों में भर कर मसलना शुरू कर दिया…..”अहह सीईईईईईईईई समीर…..” नाज़िया ने सिसकते हुए गर्दन घुमा कर पीछे की तरफ देखा पर उसने कोई रियेक्शन नही दिया…..और आगे की तरफ खिसकती गयी…..नाज़िया ने रज़ाई पकड़ी और अपने ऊपए लेकर करवट के बल लेट गयी…. उसकी पीठ मेरी तरफ थी…… वो फिर से ऐसे रिएक्ट कर रही थी…..जैसे हम दोनो के दर्मियान कुछ हो ही ना….पर मैं आज अपने दोनो के बीच की सारी दूरियाँ मिटा देना चाहता था…
मैं बेड पर चढ़ा और रज़ाई के अंदर घुस गया….और पीछे से नाज़िया को अपनी बाज़ों मैं लेकर उसके जिस्म से लग गया…..नाज़िया की पूरी बॅक साइड मेरे फ्रंट से टच हो रही थी….यहाँ तक कि मुझे अपना आधा खड़ा लंड भी उसकी नंगी बुन्द के पार्ट्स के दर्मियान महसूस हो रहा था….
मैं: क्या हुआ नाराज़ हो….?
मैने अपने हाथ को धीरे उसके पेट पर फेरते हुए कहा….और साथ ही धीरे-2 अपने लंड को उसकी बुन्द की लाइन में दबाने लगा….
.”समीर…..” नाज़िया ने सरगोशी से भरी पर बड़ी ही सीरीयस आवाज़ में मेरा नाम लिया….
.”हां बोलो….क्या बात है….?” मैने धीरे-2 अपने हाथ को नाइटी के ऊपेर से नाज़िया के राइट मम्मे पर रख कर दबाते हुए कहा….
”समीर हम जो भी कर रहे है वो ठीक नही है…हम दोनो के बीच से सब कुछ नही होना चाहिए…..”
मैं: क्यों क्या हुआ…नाज़िया मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ…..
नाज़िया: शायद तुम सच कह रहे हो समीर…..पर ये मुनकीन नही है….हम दोनो को ऐसे रिश्ते में नही पड़ना चाहिए…जिसका कोई अंज़ाम ही ना हो…..
मैं: मैं कुछ समझा नही….देखो तुम खुल के बात करो….
नाज़िया: देखो समीर…..मैं तुम्हे पहले भी ये बता चुकी हूँ कि, तुम्हारे अब्बू अब मुझसे प्यार नही करते…और वो अब दूसरी शादी करना चाहते है….
मैं: तो क्या तुम भी अब्बू से अलग होने के बाद दूसरी शादी करना चाहती हो…
नाज़िया: नही समीर…..मैं थक चुकी हूँ… मैं सिर्फ़ यही कहना चाहती हूँ….. आज नही तो कल तुम्हारे अब्बू मुझसे इस बारे में ज़रूर बात करेंगे….और फिर मुझे मजबूरन उनको तलाक़ देना पड़ेगा…फिर मुझे और नज़ीबा को ये घर हमेशा के लिए छोड़ कर जाना पड़ेगा…..और मैं नही चाहती कि, तुम मेरे पीछे अपनी लाइफ बर्बाद करो…..तुम्हारे आगे सारी जिंदगी पड़ी है….तुम्हारा फ्यूचर तुम्हारे अब्बू के साथ है…मेरे पीछे पड़ कर तुम्हे क्या मिलेगा…सिर्फ़ बदनामी ही मिलीगी….ये दुनिया हमारे इस बेनाम रिश्ते को कभी कबूल नही करेगी….मैं अकेली होती तो और बात थी….पर नज़ीबा…..मुझे उसके फ्यूचर के बारे में भी सोचना है….समीर तुम समझदार हो….मुझे उम्मीद है कि तुम मेरी बात को समझोगे…..
मैं: मैं सब समझता हूँ नाज़िया…..पर मैं अब तुम्हारे बिना नही रह सकता…. तुम मुझ पर भरोसा रखो….तुम्हारी तरफ कोई आँख भी उठा के नही देखेगा….मैं वादा करता हूँ…तुम्हारी इज़्ज़त पर कोई दाग नही आएगा….पर प्लीज़ मुझसे दूर मत होना… मैं सब कुछ संभाल लूँगा…मुझे एक बार मोका देकर तो देखो….
नाज़िया: समीर मुझे कुछ समझ में नही आ रहा…..और तुम भी तो समझने की कॉसिश नही कर रहे….समीर मुझे सोचने के लिए थोड़ा सा वक़्त दो…..
मैं: ठीक है सोच लो…पर एक बात याद रखना….अगर तुम मुझसे दूर हुई तो, मैं जिंदा नही रह पाउन्गा….
नाज़िया बाहर बाथरूम मे चली गयी….और मैं पानी पीने के लिए किचन मे चला गया….पानी पीने के बाद जब मैं नाज़िया के रूम मे पहुँचा तो, देखा कि नाज़िया बेड पर घुटनो के बल थी….और आगे की तरफ झुक कर बेडशीट को ठीक कर रही थी….उसकी बाहर की तरफ निकली बुन्द देख कर मेरा मन फिर से मचल उठा…मैने आगे बढ़ कर पीछे नाज़िया की बूँद को मुत्थियों में भर कर मसलना शुरू कर दिया…..”अहह सीईईईईईईईई समीर…..” नाज़िया ने सिसकते हुए गर्दन घुमा कर पीछे की तरफ देखा पर उसने कोई रियेक्शन नही दिया…..और आगे की तरफ खिसकती गयी…..नाज़िया ने रज़ाई पकड़ी और अपने ऊपए लेकर करवट के बल लेट गयी…. उसकी पीठ मेरी तरफ थी…… वो फिर से ऐसे रिएक्ट कर रही थी…..जैसे हम दोनो के दर्मियान कुछ हो ही ना….पर मैं आज अपने दोनो के बीच की सारी दूरियाँ मिटा देना चाहता था…
मैं बेड पर चढ़ा और रज़ाई के अंदर घुस गया….और पीछे से नाज़िया को अपनी बाज़ों मैं लेकर उसके जिस्म से लग गया…..नाज़िया की पूरी बॅक साइड मेरे फ्रंट से टच हो रही थी….यहाँ तक कि मुझे अपना आधा खड़ा लंड भी उसकी नंगी बुन्द के पार्ट्स के दर्मियान महसूस हो रहा था….
मैं: क्या हुआ नाराज़ हो….?
मैने अपने हाथ को धीरे उसके पेट पर फेरते हुए कहा….और साथ ही धीरे-2 अपने लंड को उसकी बुन्द की लाइन में दबाने लगा….
.”समीर…..” नाज़िया ने सरगोशी से भरी पर बड़ी ही सीरीयस आवाज़ में मेरा नाम लिया….
.”हां बोलो….क्या बात है….?” मैने धीरे-2 अपने हाथ को नाइटी के ऊपेर से नाज़िया के राइट मम्मे पर रख कर दबाते हुए कहा….
”समीर हम जो भी कर रहे है वो ठीक नही है…हम दोनो के बीच से सब कुछ नही होना चाहिए…..”
मैं: क्यों क्या हुआ…नाज़िया मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ…..
नाज़िया: शायद तुम सच कह रहे हो समीर…..पर ये मुनकीन नही है….हम दोनो को ऐसे रिश्ते में नही पड़ना चाहिए…जिसका कोई अंज़ाम ही ना हो…..
मैं: मैं कुछ समझा नही….देखो तुम खुल के बात करो….
नाज़िया: देखो समीर…..मैं तुम्हे पहले भी ये बता चुकी हूँ कि, तुम्हारे अब्बू अब मुझसे प्यार नही करते…और वो अब दूसरी शादी करना चाहते है….
मैं: तो क्या तुम भी अब्बू से अलग होने के बाद दूसरी शादी करना चाहती हो…
नाज़िया: नही समीर…..मैं थक चुकी हूँ… मैं सिर्फ़ यही कहना चाहती हूँ….. आज नही तो कल तुम्हारे अब्बू मुझसे इस बारे में ज़रूर बात करेंगे….और फिर मुझे मजबूरन उनको तलाक़ देना पड़ेगा…फिर मुझे और नज़ीबा को ये घर हमेशा के लिए छोड़ कर जाना पड़ेगा…..और मैं नही चाहती कि, तुम मेरे पीछे अपनी लाइफ बर्बाद करो…..तुम्हारे आगे सारी जिंदगी पड़ी है….तुम्हारा फ्यूचर तुम्हारे अब्बू के साथ है…मेरे पीछे पड़ कर तुम्हे क्या मिलेगा…सिर्फ़ बदनामी ही मिलीगी….ये दुनिया हमारे इस बेनाम रिश्ते को कभी कबूल नही करेगी….मैं अकेली होती तो और बात थी….पर नज़ीबा…..मुझे उसके फ्यूचर के बारे में भी सोचना है….समीर तुम समझदार हो….मुझे उम्मीद है कि तुम मेरी बात को समझोगे…..
मैं: मैं सब समझता हूँ नाज़िया…..पर मैं अब तुम्हारे बिना नही रह सकता…. तुम मुझ पर भरोसा रखो….तुम्हारी तरफ कोई आँख भी उठा के नही देखेगा….मैं वादा करता हूँ…तुम्हारी इज़्ज़त पर कोई दाग नही आएगा….पर प्लीज़ मुझसे दूर मत होना… मैं सब कुछ संभाल लूँगा…मुझे एक बार मोका देकर तो देखो….
नाज़िया: समीर मुझे कुछ समझ में नही आ रहा…..और तुम भी तो समझने की कॉसिश नही कर रहे….समीर मुझे सोचने के लिए थोड़ा सा वक़्त दो…..
मैं: ठीक है सोच लो…पर एक बात याद रखना….अगर तुम मुझसे दूर हुई तो, मैं जिंदा नही रह पाउन्गा….