उस रात मैं अपने गुज़रे हुए दिनो की यादो मे खोया कब सो गया पता नही चला…अगली सुबह मुझे बाहर से आवाज़ आई तो मेरी आँख खुल गयी…मैने उठ कर टाइम देखा तो सुबह के 5:30 बजे थे….रूम मे उस वक्त ज़ीरो वाट का बल्ब जल रहा था..बाहर अब्बू नजीबा से बात कर रहे थे….शायद वो और मेरी सौतेली अम्मी कही जा रहे थे….उनकी बातों से मैं अंदाज़ा नही लगा पाया कि, वो इतनी सुबह-2 कहाँ जा रहे है…मैं रज़ाई के अंदर लेटा हुआ था…फिर थोड़ी देर बाद मुझे गेट खुलने और बंद होने की आवाज़ आई….इसका मतलब कि मे और नजीबा दोनो घर मे अकेले थे…ऐसा नही था कि, पहले कभी हम घर पर अकेले नही होते थे….लेकिन पिछले कुछ दिनो के हादसों ने मेरे सोचने समझने का रवैया और बदल दिया था…
मैं बेड से नीचे उतरा और बाहर आया…बाहर बेहद ठंड थी…हल्की-2 धुन्ध छाई हुई थी…बरामदे मे एक लाइट जल रही थी….किचन और अब्बू के रूम का डोर बंद था…आगे वाले कमरो के डोर भी बंद थे…..नजीबा अपने रूम मे जा चुकी थी….मुझे पता नही उस वक़्त क्या सूझा..मे नजीबा के रूम की तरफ बढ़ने लगा….मैने नजीबा के रूम के डोर के सामने जाकर देखा तो, अंदर लाइट ऑफ थी….मैने डोर नॉक किया तो, अंदर से नजीबा की आवाज़ आई…”कॉन है…”
मैं: मे हूँ समीर…..
फिर खामोशी छा गयी….थोड़ी देर बाद डोर खुला तो, नजीबा सामने खड़ी थी…उसने येल्लो कलर का पतला सा सलवार सूट पहना हुआ था…”जी…कुछ चाहिए….” नजीबा ने मेरी तरफ देखते हुए पूछा…
”वो अम्मी और अब्बू सुबह -2 कहाँ गये है….?’
नजीबा: उनके एक दोस्त के बेटे के शादी है….वही पर गये है…जहाँ जाना था….वो जगह दूर है…इसलिए सुबह-2 ही निकल गये…
मैं सिर्फ़ टी-शर्ट और पाजामा पहने खड़ा था…और बाहर मौसम बहुत सर्द था…. “मैं आपके लिए चाइ बना दूं….” नजीबा ने मेरी तरफ देखते हुए पूछा…
“नही तुम सो जाओ….मेरे ख़याल से तुम्हारी नींद अभी पूरी नही हुई होगी….वैसे भी बाहर बहुत ठंड है….” मैने इधर उधर देखते हुए कहा तो, नजीबा ने सर झुकाते हुए मुस्कुरा कर कहा…”हां ठंड तो है…आप अंदर आ जाएँ…”
मैं: नही तुम परेशान हो जाओ गी….
मैं वहाँ से अपने रूम मे आ गया…और बेड पर चढ़ कर रज़ाई के अंदर घुस गया….मेरी फिर से हल्की सी आँख लग गयी….फिर जब आँख खुली तो, किचन से आवाज़ आ रही थी…शायद नजीबा उठ चुकी थी…और चाइ बना रही थी….मैने लेटे-2 टाइम देखा तो, सुबह के 6:15 हो रहे थे…और लाइट बंद थी…सुबह-2 ही कट लग चुका था…मैं बेड से उतरा और रूम से बाहर आकर बाथरूम की तरफ जाने लगा तो देखा नजीबा चाइ बना रही थी….मेरे कदमो की आवाज़ सुन कर उसने पीछे मूड कर देखा…लेकिन मुझे जल्दी थी बाथरूम जाने की, इसीलिए मे बाथरूम मे चला गया…जब फ्रेश होकर बाहर आया तो, सीधा किचन मे चला गया…चाइ बन चुकी थी….मैने देखा कि, नजीबा के बाल खुले हुए थे…और गीले थे….शायद उसने आज सुबह-2 ही नहा लिया था…
“चाइ बन गयी….?” मैने उसके पास खड़े होते हुए पूछा….”जी….” जैसे ही नजीबा बोली तो मुझे अहसास हुआ कि वो ठंड के कारण काँप रही थी….सर्दी ज़यादा थी…इसलिए मैने कोई ख़ास गोर नही किया….नजीबा चाइ कप मे डाली और मैं वहाँ से कप उठा कर अपने रूम मे आ गया…और चाइ पीने लगा….
चाइ पीते हुए मेरे दिमाग़ मे आया कि, लाइट तो पता नही कब से कट है….तो फिर कहीं नजीबा ने सुबह-2 ठंडे पानी से तो नही नहा लिया…जैसे ही मेरे मन मे ये ख़याल आया…मेने चाइ के कप को वही रखा और नजीबा के रूम की तरफ चला गया.. जब मैने रूम के डोर को नॉक करने के लिए हाथ बढ़ाया तो, रूम का डोर खुल गया….जब मे अंदर दाखिल हुआ था..तब नजीबा रज़ाई मे लेटी हुई थी….उसके रूम के विंडोस के आगे से पर्दे हटे हुए थे….जिससे अब बाहर की हल्की रोशनी अंदर आ रही थी…उसने मेरी तरफ देखा और कापती हुई आवाज़ मे बोली…”कुछ चाहिए था,…..” उसकी आवाज़ सुन कर मुझे उसकी हालत का अंदाज़ा हुआ….
मैं उसके पास जाकर बेड पर बैठा तो, मैने महसूस किया कि वो बुरी तरह से काँप रही थी….”क्या हुआ तुम्हे….ऐसे काँप क्यों रही हो….?” मैने उसके माथे पर हाथ लगा कर चेक करते हुए कहा…” उसने कहा कुछ नही वो सुबह-2 नहा लिया इसीलिए….”
मैं: तो तुम्हे किसने कहा था सुबह-2 नहाने के लिए ऊपेर से लाइट भी नही है… फिर ठंडे पानी से नहाने की क्या ज़रूरत थी…
क्योंकि जब मैं बाथरूम मे गया था….तो मुझे टंकी के अंदर के पानी की ठंडक के बारे मे पता था….हमारी पानी की टंकी छत पर खुले मे है…तो जाहिर से बात थी कि, रात को बाहर सर्दी मे होने की वजह से पानी कितना ठंडा होता है… “ मजबूरी थी….?” नजीबा ने काँपते हुए कहा….”
मैं: ऐसी भी क्या मजबूरी थी…..जो सुबह-2 ठंडे पानी से नहा लिया वो भी इतनी सर्दी मे…
नजीबा: वो वो जब नहाने गयी थी…तब लाइट थी…गीजेर ऑन किया…थोड़ा सा पानी गरम हुआ तो नहाना शुरू कर दिया…बीच मे लाइट चली गयी…बदन पर साबुन लगा हुआ था…तो फिर मजबूरन ठंडे पानी से नहाना पड़ा….
मैं: तुम्हारा भी कोई हल नही है….
मैं बात को बड़ी आसानी से ले रहा था…मुझे उस वक़्त तक नजीबा की हालात का कोई अंदाज़ा नही था कि, उसे किस क़दर सर्दी लग रही है….उसने करवट बदली और मेरी तरफ पीठ कर ली….और अपने ऊपेर ओढ़ रखी रज़ाई को कस्के पकड़ लिया….मैने रज़ाई के ऊपेर से जैसे ही उसके कंधे पर हाथ रखा तो, उसके बदन को बुरी तरह काँपते हुए महसूस करके मेरे होश एक दम से उड़ गये…”नजीबा तुम्हारा बदन तो बहुत ज़यादा काँप रहा है…” मैने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा…
“आप फिकर ना करें थोड़ी देर मे ठीक हो जाएगा….”
मैं उसकी बात सुन कर चुप हो गया… और वही बैठा रहा…मजीद 5 मिनट गुजर चुके थे…लेकिन नजीबा का कांपना कम ना हुआ….वो पहले से ज़्यादा काँप रही थी….