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मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन complete

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अपने मम्मो को चुसवा कर नरगिस फिर से गरम हो चुकी थी….उसने मुझे नीचे उतरने को कहा….जैसे ही मेने नरगिस को नीचे उतारा उसने अपने पाजामे को दोनो तरफ से पकड़ कर धीरे-2 नीचे सरकाते हुए अपनी एक टाँग पाजामे से निकाल दी…और फिर सोफे के पुष्ट पर अपने एक घुटने को रखा और डॉगी स्टाइल में आ गयी…..

“समीर अब इसके सामने अपना लंड मेरी फुद्दि में डाल कर इसके मन का वेहम निकाल दो….ताकि ये आइन्दा से अपनी टाँग मेरी पर्सनल लाइफ में अडाने की कॉसिश ना करे..” नरगिस ने अपने एक हाथ की उंगलयों पर थूक उगलते हुए कहा…और फिर अपना हाथ पीछे की तरफ लेजा कर अपनी फुद्दि पर थूक को फैलाने लगी…मेने अपनी पेंट को उतार फेंका और नरगिस के पीछे आते हुए अपने लंड की कॅप को नरगिस की फुद्दि के सूराख पर सेट करते हुए जैसे ही हल्का सा दबाया तो, मेरे लंड का कॅप उसकी फुद्दि के सूराख को फैलाता हुआ अंदर जा घुसा….बाकी की कसर नरगिस ने अपनी बुन्द को पीछे की तरफ पुश करके मेरे लंड को अपनी फुद्दि की गहराइयों में लेते हुए पूरी कर दी…”

मेने धीरे धीरे अपने लंड को नरगिस की फुद्दि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….” नरगिस तुम ये सब ठीक नही कर रही हो…इसके बारे में मैं तुम्हारी मोम को ज़रूर बताउन्गी…” नाज़िया ने खिसियानी बिल्ली की तरह खंबा नोचते हुए कहा…

.”अर्रे जा बता देना…मेरी अम्मी को ही क्या पूरी दुनिया को भी बता देगी तो, भी मुझे कुछ फरक नही पड़ता….” नरगिस ने अपनी बुन्द को धीरे-2 पीछे करते हुए कहा…”ओह्ह्ह फकक्क्क्क समीरररर तुम क्यों रुक गये…मेरी फुद्दि मारो ना…बोलने दो इस साली गश्ती को…जलन हो रही है इसे….फुददी तो इसकी भी लार टपका रही होगी…पर साली की अकड़ है कि, बेचारी के मूह पर ताला लगा हुआ है…”

नरगिस ने नाज़िया की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए अपनी बूँद को पीछे की तरफ पुश करने लगी…मेरा लंड बुरी तरह से नरगिस की फुद्दि की दीवारो से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर हो रहा था…”ओह्ह्ह्ह फक फक मी डीपर समीर ओह्ह्ह्ह खुदा आइ आम कमिंग ओह आइ नेवेर कम्ड सो फास्ट ओह गॉड इट्स सो फक्किंग गुड….” नरगिस ने पूरी जोश के साथ अपनी बुन्द को पीछे की ओर पुश करना शुरू कर दिया…

मैं: ओह्ह्ह नरगिस मेरा लंड भी माल छोड़ने वाला है….

नरगिस: ओह्ह्ह्ह वेट समीर….वेट….

नरगिस ने झड़ते हुए कहा…उसका पूरा बदन थरथरा उठा…और अगले ही पल वो सोफे की पुष्ट से नीचे उतर कर घुटनो के बल बैठ गयी….और मेरे लंड के कॅप को मूह में लेकर ऐसे ज़ोर ज़ोर से चूसा कि, मेरे लंड की नसें वीर्य से एक दम फूल गयी…नरगिस ने मेरे लंड की कॅप को मूह से निकाला और अपना मूह खोल कर एक हाथ से मेरे टट्टो को सहलाने लगी…”कम इन माइ माउत कम समीर….ओह्ह आइ आम वेटिंग समीर कम फॉर मी…कम फॉर युवर कम हंग्री स्लट…” नरगिस की बातें सुन कर में इस कदर मदहोश हो गया कि, मेरे लंड की कॅप से वीर्य की पिचकारियाँ निकल कर उसके मूह के अंदर गिरने लगी….दूसरी तरफ बैठी नाज़िया ये सब बड़ी हैरानी से देख रही थी….

उसने तो कभी सपने में भी सोचा नही होगा कि, एक दिन उसे अपनी लाइफ में ऐसा भी कुछ देखने को मिलेगा….जैसे ही मेरे लंड से वीर्य की आख़िरी बूँद टापकी. मेने फर्श पर पड़ी अपनी पेंट उठाई और नरगिस के रूम के बाथरूम में चला गया…..जब में फ्रेश होकर बाहर आया तो नरगिस और नाज़िया दोनो आपस में कुछ बात कर रही थी….मैं बाहर आकर सोफे पर बैठ गया…..

”ओके ओके इट्स ओके नरगिस….अक्चुअली मैं सोचती थी कि, हम दोनो एक दूसरे को प्यार करते है…और हम दोनो के बीच कोई लड़का नही आ सकता….”

नरगिस: नाज़िया मेरी बात सुनो मैं तुम्हे सब कुछ बताने वाली थी….

नाज़िया: इट्स ओके नरगिस….ऐक्चुअली मैं ये भूल गयी थी कि, रियल लाइफ में ऐसा नही होता. एनी वेज मैं तुम्हारे लिए बहुत खुश हूँ….अच्छा तो मैं चलती हूँ..बाइ….

नरगिस: आई बड़ी मुझे समझाने वाली…..मुझे पता है समीर….तुम्हारे अब्बू और इसके संबंध भी ठीक नही है….

मैं: हां…वैसे तुम्हारी आवाज़ को क्या हुआ है….

मेने नरगिस की बैठी हुई आवाज़ सुन कर कहा….तो नरगिस ने अपने गले को खंखारते हुए मुस्कुराना शुरू कर दिया… “क्या हुआ…? बताओगी भी या नही….?” मेने थोड़ा सा खीजते हुए कहा….

“अब ऐसे ज़ोर ज़ोर से चिल्लाउन्गी तो, गला और आवाज़ बैठेगी ही ना….” नरगिस ने थोड़ा सा शरमाते हुए कहा….”

मैं: अच्छा ठीक है….अब मुझे चलना चाहिए….कही ये ना हो कि, वो तुम्हारे अम्मी अब्बू को लेकर यहाँ आ जाए….

नरगिस: हां समीर तुम जाओ….वैसे भी मुझे इस पर यकीन नही है..….

मैं वहाँ से निकल कर नाज़िया की अम्मी के घर आ गया…..देखा तो अभी सिर्फ़ 12:30 ही हुए थे…एक-2 पल काटना मुस्किल हुआ जा रहा था…नाज़िया शायद वापिस अपने चाचा के घर चली गयी थी….मैं नीचे बैठा टीवी देख रहा था कि, अचानक से डोर बेल बजी.. मेने जाकर डोर खोला तो देखा सामने सबा रानी नाज़िया और नाज़िया की अम्मी खड़ी थी…उन्होने शाम को आना था…पर उन सब को एक साथ पहले यहाँ देख कर मेरी फटने लगी….कहीं नाज़िया ने जाकर अपनी अम्मी से कुछ कह तो नही दिया…

इससे पहले कि मैं कुछ बोलता तो, वो सब अंदर आ गये….”क्या हुआ आप सब इतनी जल्दी क्यों आ गये…” मेने सबा और रानी की तरफ देखते हुए कहा…तो नाज़िया ने एक बार मेरी तरफ जहर भरी नज़रों से देखा और अंदर चली गयी….” वो फ़ैज़ का फोन आया था समीर….उसकी तबीयत बहुत खराब है…और घर पर कोई भी नही है… उसकी दादी का तो तुम्हे पता है….वो अकेली क्या करेगी…मुझे आज ही वापिस जाना होगा…”

मैं: ठीक है हम अभी पॅकिंग करके निकलते है….

“नही समीर…तुम्हे ऐसे कैसी भेज दें….तुम पहली बार यहाँ आए हो…. तुम्हे खाली हाथ तो नही जाने दे सकते…आख़िर कार तुम हमारे जवाई के बेटे हो…. तुम एक दो दिन रुक जाओ…..” नाज़िया की अम्मी ने मेरे सर पर हाथ फेरते हुए कहा…. तो मेने सबा की तरफ देखा….तो सबा ने भी मुस्कुराते हुए कहा…” फुफो ठीक कह रही है….तुम एक दिन रुक जाओ….मैं और रानी चले जाते है…वैसी भी फ़ैज़ को सिर्फ़ बुखार ही है….”

मैं: पक्का…..

सबा: हां रुक जाओ….

मैं: ठीक है…..

उसके बाद सबा और रानी ने अपनी पॅकिंग की और मैं सबा और रानी को बस स्टॅंड पर बस में बैठा कर वापिस आ गया….

 


49

उसके बाद और कोई ख़ास बात नही हुई….शाम को मैं मार्केट चला गया….घूमने के लिए…और वहाँ मेरी नज़र एक शॉप पर पड़ी….वहाँ बाहर शोकेश में बहुत सेक्सी-2 नाइटीस लटक रही थी…सोचा नरगिस के लिए एक नाइटी खरीद कर उसे गिफ्ट कर दूं…क्योंकि वो तो लंडन में रहती है….और वहाँ वो ऐसी कपड़े पहन सकती है….वो खुश हो जाएगी….मेने वहाँ से एक रेड कलर के शॉर्ट नाइटी खरीद ली..उसके बाद मेने उसे पॅक करवाया और घर वापिस आ गया…

मैं ऊपेर रूम में आकर सो गया…शाम को मेरी आँख खुली तो मुझे अहसास हुआ कि, कोई मुझे आवाज़ देकर मुझे उठा रहा था… मेने आँखे खोल कर देखा तो, नाज़िया बेड के किनारे पर खड़ी थी….मुझे आँखे खोलते हुए देख कर नाज़िया ने अपना फेस दूसरी तरफ घुमा लिया….”नीचे आकर चाइ पी लो….” और नाज़िया नीचे चली गयी…मैं उठा हाथ मूह धो कर नीचे आया और नाज़िया की अम्मी के पास बैठ गया,…थोड़ी देर बाद नाज़िया चाइ लेकर आ गयी….और मैं चाइ पीते हुए नाज़िया की अम्मी के साथ बातें करने लगा….”बेटा आज रात को हमें मेरे देवर के घर जाना है….तुम भी तैयार हो जाओ….आज रात का खाना वही है….”

मैं: जी मैं वहाँ जाकर क्या करूँगा….वैसी भी मैं वहाँ किसी को जानता नही हूँ..

“लो जी अगर नही जानते तो, जान पहचान हो जाएगी….हो स्कता है वहाँ तुम्हे कोई लड़की ही पसंद आ जाए…..” नाज़िया की अम्मी ने हंसते हुए कहा….तो में मुस्कुराते हुए नीचे देखने लगा….” आप चले जाएँ….मैं यही ठीक हूँ….” मेने मुस्कुराते हुए कहा….तो नाज़िया की अम्मी ने थोड़ा अपना पन दिखाते हुए बोला… “चलो सिर्फ़ खाना खा कर ही वापिस आ जाना….”

मैं: ठीक है अब आप इतना कह रही है तो मैं आपको कैसे मना कर सकता हूँ…

उसके बाद चाइ पीकर में ऊपेर आ गया…..रात को 7 बजे तैयार होकर मैं नीचे आया…और नाज़िया और उसकी अम्मी के साथ उसके चाचा के घर चला गया…..नाज़िया और उसकी अम्मी वहाँ जाते ही अपने रिश्तेदारों में बिज़ी हो गये….हां नाज़िया की अम्मी ने अपने देवर के छोटे बेटे जो मेरी ही उम्र का था….उसे मेरा ख़याल रखने को कह दिया था….उसने मुझे वहाँ खाना खिलाया…..और फिर किसी तरह मेने नाज़िया की अम्मी को ढूँढा….और कहा कि, मुझे नींद आ रही है…और में घर जाना चाहता हूँ…. नाज़िया की अम्मी ने मुझे घर की चाबी दे दी…और मैं वहाँ से जैसे ही निकल कर गली में आया तो, पीछे से नाज़िया की अम्मी ने मुझे आवाज़ देकर रोका….मेने मूड कर पीछे देखा तो पीछे नाज़िया अपनी अम्मी के साथ खड़ी थी….

“जाओ इसे भी साथ ले जाओ….मैं रात को यही रुकूंगी….” नाज़िया की अम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा….मैं कुछ नही बोला….और चल पड़ा….पीछे नाज़िया भी चल पड़ी….हम दोनो चुप चाप चल रहे थी….डेच के मिड्ल चल रहा था….और सर्दी इस क़दर बढ़ गयी थी….जब ठंडी हवा बदन को छूती तो हड्डियाँ तक काँप जाती… हम सुनसान गली में चुप चाप चलते जा रहे थे….मुझे एक बात समझ नही आ रही थी कि, आख़िर नाज़िया क्यों मेरे साथ आ गयी…वो तो मुझसे दूर भागती है… आख़िर इसके दिमाग़ में चल क्या रहा है….लेकिन कोई बात नही हुई….हम घर पहुँचे और मेने लॉक खोला और फिर अंदर आकर मेने गेट लॉक किया…और नाज़िया को की पकड़ा कर जैसे ही ऊपेर जाने लगा….तो नाज़िया ने मुझे पीछे से आवाज़ दी… “रूको…..” मेने मूड कर पीछे देखा तो, नाज़िया मेरी तरफ देख कर मुझे खा जाने वाली नज़रों से देख रही थी…मुझे उसका इस तरह देखना बिल्कुल भी अच्छा नही लगा…और मेने उसके ही अंदाज़ में उसे जवाब दिया….

मैं: हां बोलो……

नाज़िया: आज जो करतूत तुमने की है….ये मत समझना…कि मेने तुम्हे छोड़ दिया… उस वक़्त मैं कोई बखेड़ा नही खड़ा करना चाहती थी….इसलिए मेने वहाँ कुछ नही कहा….और अब तो तुमने बेशर्मी की इंतिहा कर दी है….मैं अब और सहन नही कर सकती….इसके बारे में मुझे तुम्हारे अब्बू से बात करनी ही होगी…अभी भी वक़्त है तुम सुधर जाओ…..

मैं: अच्छा क्या चाहती हो तुम….

नाज़िया ने मुझे गुस्से से देखा और फिर कुछ सोच कर बोली…. “अपनी ये बेशर्मी वाली हरक़तें छोड़ दो….सबा रानी और नरगिस से दूर रहो….और अपने काम से काम मतलब रखो….

मैं: ठीक है सब कुछ छोड़ देता हूँ….पर मेरी भी एक शर्त है….

नाज़िया: बोलो….

मैं: देखो सीधी सी बात है….मैं सबा रानी और नरगिस को छोड़ देता हूँ… पर उनकी कमी तुम्हे पूरी करने होगी…..

नाज़िया: तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये सब कहने की….

मैं: जैसे तुम्हारी हिम्मत हुई मुझे ये सब छोड़ने के लिए कहने की….

नाज़िया: अब तुम्हारी खैर नही…..मैं तुम्हारे अब्बू को सब बता दूँगी….

नाज़िया की बात सुन कर मेरा दिमाग़ खराब होने लगा…मेने अपना मोबाइल निकाला और अब्बू का नंबर डायल किया….और स्पीकर पर लगा कर नाज़िया की तरफ बढ़ा दिया…. “लो करो बात…और बता दो….और साथ में ये भी बता देना कि, तुम उनकी पीठ के पीछे अपने यार फ़ारूक़ के साथ रात को मोज मस्ती करती थी…” मेरी बात सुन कर नाज़िया के होश उड़ गये….नाज़िया ने मेरे हाथ से फोन पकड़ा और कॉल कट कर दी….मेने नाज़िया से मोबाइल छीना…..”अब क्या हुआ….?”

नाज़िया कभी मेरे मोबाइल की तरफ देखती तो, कभी मेरी तरफ तभी मेरा मोबाइल बजने लगा….मिस कॉल देख कर अब्बू ने बॅक कॉल की थी…”लो आ गया अब्बू का फोन….अब तुम्हारी वो सारी रेकॉर्डिंग सेंड कर दूँगा अब्बू को…और फिर जवाब देती रहना…..” मेने कॉल पिक की और अब्बू से बात करने लगा….मेने अब्बू को सलाम किया……

अब्बू: और सूनाओ कैसे हो….

मैं: में ठीक हूँ अब्बू आप कैसे हो….

अब्बू: में भी ठीक हूँ….बताओ कैसे फोन किया…..

मैं: ऐसे ही आपसे बात करने का दिल किया तो…..

अब्बू: मुझे बहुत खुशी हुई कि तुमने मुझे कॉल की…..

मैं: अच्छा अब्बू आपको कुछ रेकॉर्डिंग सेंड करूँगा थोड़ी देर बाद उसे सुन लेना….

मेने उसके बाद कॉल कट की और नाज़िया की तरफ देखा उसके चेहरे का रंग जर्द हो चुका था….”आख़िर तुम चाहते क्या हो….क्यों मेरे पीछे पड़े हो….क्यों मुझे दुख देते हो….” नाज़िया ने रुआंसी सी आवाज़ में कहा….

मैं: मैं पीछे पड़ा हूँ….पीछे तो तुम पड़ी हो….मेने तुमसे कहा था ना कि, में तुम्हारे साथ कुछ ग़लत नही करूँगा…और तुम भी मेरी ज़ाती जिंदगी में दखल नही देना…पर हार बार तुम मेरी लाइफ में दखल देती हो….पर अब बहुत हुआ मेने तुम्हारी लाइफ खराब नही की तुमने मेरे जीना हराम कर रखा है… अब मैं तुम्हारी वो रेकॉर्डिंग अब्बू को भेज दूँगा….और वो तुम्हे अपनी और मेरी जिंदगी से बाहर निकाल फेंकेंगे गये…..और पूरी दुनिया रिश्तेदारों को तुम्हे जवाब देना होगा…

नाज़िया: प्लीज़ समीर ऐसा कुछ मत करना….मैं आगे से तुम्हारे किसी काम में दखल नही दूँगी…..जो तुम चाहते हो वही करूँगी….

मैं: पक्का….

मेरी बात सुन कर नाज़िया को झटका सा लगा….”पक्का जो में कहूँगा वो तुम करोगी…”

नाज़िया ने हैरत से मेरी तरफ देखा….”तुम कहना क्या चाहते हो…” नाज़िया ने मुझे सवालिया नज़रों से देखते हुए कहा…

.”नाज़िया मैं आज की रात तुम्हे प्यार करना चाहता हूँ….प्लीज़ आज की रात मुझे प्यार करने दो….में वादा करता हूँ… सिर्फ़ प्यार करूँगा…तुम्हारी फुद्दि नही लूँगा….” मेने मुस्कुराते हुए कहा…

“नही समीर ये मुमकिन नही है….”

मैं: क्यों मुमकिन नही है…मैं तुम्हारे साथ ज़बरदस्ती नही करूँगा….कसम से… सिर्फ़ प्यार करूँगा…सिर्फ़ आज की रात….उसके बाद तुम अपने रास्ते में अपने रास्ते…. सोच लो…..

नाज़िया कुछ देर सोचने के बाद धीरे से बोली “ठीक है समीर…..मैं भी इस किस्से को यहीं ख़तम कर देना चाहती हो….”

मैं: ठीक है मैं चेंज करके आता हूँ….मैं ऊपर आया तो, मेरी नज़र उस शॉपर पर पड़ी….जिसमे मे वो नाइटी थी…जो में नरगिस के लिए लाया था… उसे देख कर मेरे दिमाग़ में ख्याल आया…..मेने उसको उठया और नीचे आ गया….नीचे नाज़िया अपनी अम्मी के रूम में बैठी हुई थी…मुझे देख कर नाजिया बेड से खड़ी हो गयी….मेने उसकी तरफ शॉपर बढ़ा दिया…

 
.”ये क्या है…” नाज़िया ने शॉपर की तरफ देखते हुए कहा…

.इसे पहन लो… सोच लेना कि तुम मेरी आख़िरी ख्वाहिश पूरी कर रही हो….” उसके बाद में फिर से ऊपेर आ गया….

मेने मुस्कुराते हुए कहा और ऊपेर आ गया….कपड़े चेंज किए….और टी-शर्ट और पाजामा पहन कर नीचे आ गया….आख़िर कार वक़्त आ ही गया था…आज नाज़िया एक बार फिर से मेरे लंड के नीचे लेटने वाली थी…..और यही सोच -2 कर मेरा लंड लोहे की रोड की तरफ सख़्त खड़ा होकर झटके खा रहा था…चेंज करने के बाद में नीचे आया तो देखा कि नाज़िया अपनी अम्मी के रूम में सोफे पर बैठी थी….मुझे देख कर वो एक दम से खड़ी हो गयी…और उसकी नज़र सीधे मेरे पाजामे में बने तंबू पर पड़ी….और उसने एक दम से अपनी नज़रें झुका ली….

वो नज़रें झुका कर खड़ी थी, और बीच -2 में मेरी तरफ देख रही थी….उसके हाथ पैर अंजाने डर के कारण काँप रहे थी….वो सोच समझ नही पा रही थी, कि वो जो करने जा रही हे, ग़लत है या ठीक…..पर नाज़िया के पास इतना सोचने का टाइम नही था.. मैं उसके बिल्कुल पास आ चुका था…मेने नाज़िया की कमर के दोनो और अपने हाथ रख लिए…पतली सी नाइटी के ऊपेर से मेरे हाथों को अपनी कमर पर महसूस करके, नाज़िया के बदन में कपकपि दौड़ गयी….और आने वाले पलों के बारें में सोच कर उसके दिल ने धड़कना बंद कर दिया….

नाज़िया को ऐसे बिना कोई विरोध के खड़ा देख कर मेरी हिम्मत बढ़ने लगी. पर उसका हाल नाज़िया से भी बुरा था…मेने कभी सोचा भी नही था, कि नाज़िया जैसी बहुत ही खूबसूरत और भरे हुए जिस्म की मालकिन मेरे सामने ऐसे खड़ी हो गी…अपने सामने खड़ी उस अप्सरा जैसी खूबसूरत औरत को देख कर मेरे हाथ पाँव भी काँप रहे थे… मेरे दिल की धड़कन भी तेज चल रही थी….

मेने नाज़िया को उसकी कमर से थामते हुए, धीरे -2 उसे अपनी तरफ सरकाने लगा. हम दोनो के जिस्मो का फाँसला हर पल कम हो रहा था….जैसे -2 हम दोनो के जिस्म नज़दीक आ रहे थे.. नाज़िया की आँखें धीरे-2 बंद होती जा रही थी…आख़िर कार मेने हिम्मत करके नाज़िया को अपनी बाहों में भर कर अपने जिस्म से चिपका लिया….नाज़िया मेरी बाहों में कसमसा गयी…

नाज़िया ने अपनी आँखें बंद कर रखी थी…उसके होंठ थरथरा रहे थे…जिसे देख कर मेरी आँखों में चमक आ गयी…मैं अपनी किस्मत पर बड़ा इतरा रहा था….आख़िर कार मैं आज नाज़िया के गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठो का रस पीने वाला था.. मेने नाज़िया की ओर देखते हुए, उसके थरथरा रहे गुलाबी रसीले होंठो की तरफ अपने होंठो को बढ़ाना चालू कर दिया….

नाज़िया अपने फेस और होंठो पर मेरी साँसों को महसूस करके मचल उठी….पर अगले ही पल उसके दिमाग़ में ये आ गया कि, वो मुझे को किस से आगे नही बढ़ने देगी. चाहे कुछ भी हो जाए….वो अपनी इज़्ज़त को बर्बाद नही होने दे गी….

मेने एक बार फिर से नाज़िया की ओर देखा…..और अपने होंठो को नाज़िया के नाज़ुक होंठो पर रख दिया….नाज़िया एक दम से कसमसा गयी…..मेने नाज़िया को अपनी बाहों में और कस लिया….और धीरे -2 नाज़िया के होंठो को चूसने लगा…..नाज़िया अपने होंठो को बंद किए हुए थी…पर मैं जी भर के नाज़िया के होंठो को रस पीना चाहता था….इसीलिए मेने सिर्फ़ नाज़िया के नीचे वाले होंठ को अपने दोनो होंठो में दबा लिया…जिससे नाज़िया के दोनो होंठो में थोड़ा सा गॅप बन गया….और मोका देखते हुए, मेने नाज़िया के नीचे वाले होंठ को अपने दोनो होंठो में ले लिया….और ज़ोर -2 चूसने लगा….ना चाहते हुए भी नाज़िया के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गयी…

मेरे हाथ नाज़िया की कमर पर अपना कमाल दिखा रहे थे…..मैं कमर को सहलाता हुआ धीरे-2 अपने हाथों को नाज़िया की बुन्द की तरफ लेजा रहा था…नाज़िया मुझसे एक दम चिपकी हुई थी….नाज़िया की मस्त कर देने वाले मम्मे मेरी चेस्ट में धन्से हुए थे….नाज़िया का बदन मेरी बाहों में धीरे-2 ढीला पड़ने लगा….

जिसे मैं अच्छी तरह समझ रहा था…..ना चाहते हुए भी नाज़िया की फुद्दि में नामी आने लगी थी….नाज़िया अपनी पैंटी में आए हुए गीले पन को सॉफ महसूस कर पा रही थी…मेने नाज़िया को गरम होते देख अपने हाथों को नाज़िया की बुन्द पर रख दिया. नाज़िया मेरे हाथों को अपनी नाइटी के ऊपेर से अपनी बुन्द पर महसूस करके मचल उठी…..पर वो बोली कुछ नही…बल्कि उसके होंठ और खुल गये…मैं पागलों की तरह नाज़िया की होंठो को चूसने लगा…मेने धीरे -2 नाज़िया की बूँद के दोनो पार्ट्स को दबाना शुरू कर दिया…..

नाज़िया के बदन में मस्ती के लहर दौड़ गये….नाज़िया के हाथ जो कुछ देर पहले मेरे कंधों पर थे…अब वो दोनो हाथ मेरे सर के पीछे आ चुके थे…और वो अपने हाथों से धीरे-2 मेरे बालों को सहला रही थी… नाज़िया एक दम मदहोश हो चुकी थी….वो अब अपने आप पर काबू नही रख पा रही थी…नीचे मेरा लंड भी अब अपनी औकात पर आ चुका था….और वो नाज़िया की फुद्दि के लिप्स पर नाइटी और पैंटी के ऊपेर से लगा हुआ रगड़ खाने लगा…….

नाज़िया की फुद्दि में सरसराहट दौड़ गयी….जैसे ही उसी अपनी नाइटी और पैंटी के ऊपेर से मेरा लंड अपनी फुद्दि के लिप्स पर महसूस हुआ, उसने अपनी बाहों को मेरी पीठ पर कस लिया……जिसे देख कर मेरे हिम्मत और बढ़ गयी….और मैं धीरे- 2 नाज़िया की बुन्द से नाइटी को पकड़ कर ऊपेर उठाने लगा……नाज़िया इतनी मस्त हो चुकी थी, कि उसे पता नही चला कि उसकी नाइटी उसकी रानो से ऊपेर तक उठ चुकी ही. मुझ को अपना मकसद पूरा होता हुआ नज़र आ रहा था…..

 


50

नाज़िया अब एक दम गरम हो चुकी थी…उसके हाथ पैर उतेज्ना के मारे काँप रहे थे….और वो अब पूरी तरहा अपने होंठो को खोल कर चुस्वा रही थी….और मैं नाज़िया के होंठो को बहुत ही मस्ती के साथ चूसे जा रहा था……नाज़िया की फुद्दि के लिप्स अब फड़कने लगे थी….

अब नाज़िया की बर्दस्त से भी बाहर हो रहा था…..मेने धीरे-2 अपनी जीभ को नाज़िया के मूह के अंदर करना शुरू कर दिया…बदले में नाज़िया ने भी अपने होंठो को और खोल दिया, और कुछ ही पलों में दोनो की जीभ आपस में टकराने लगी….मेने नाज़िया की जीभ को अपनी होंठो में कस लिया…..और उसकी ज़ुबान को चूसने लगा…मेरी इस हरक़त से नाज़िया मुझसे और बुरी तरह लिपट गयी…उसके मम्मे और ज़्यादा सख्ती से मेरी चेस्ट में दब गये… मेरा मन नाज़िया के मम्मो को अपनी चेस्ट पर महसूस करके और मचल उठा…..

धीरे – 2 नाज़िया की नाइटी भी उसकी बुन्द से ऊपेर तक चढ़ चुकी थी….और जैसे ही मेने अपने हाथो को उसकी पैंटी के इलास्टिक के अंदर डाल कर उसकी नंगी बूँद के दोनो पार्ट्स को अपने हाथ में लेकर दबाया तो, नाज़िया को झटका सा लगा…वो मुझसे एक दम से अलग हो गयी…

नाज़िया: (तेज़ी से साँस लेते हुए) अपनी हद में रहो समीर……ये ठीक नही हे…मेने अब तुम्हारी एक बात मान ली. जाओ अब यहाँ से चले जाओ..

मैं: पर….

नाज़िया: अब मुझे कुछ और नही सुनना…जाओ यहाँ से……..

मैं : नही अभी मेरा मन नही भरा है……मुझे कुछ देर और किस करने दो…

नाज़िया: देखो समीर इससे पहले कि मुझे गुस्सा आए यहाँ से चले जाओ….

पर अब मुझ पर हवस का भूत इस कदर सवार हो चुका था, कि मैं ये सोच भी नही पा रहा था, मैं क्या कर रहा हूँ…..नाज़िया मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी….. और उसकी नाइटी अभी उसकी कमर तक ऊपर चढ़ि हुई थी…. मेने आगे बढ़ कर नाज़िया को पीछे से फिर से अपनी बाहों में भर लिया….और अपने होंठो को उसकी पीठ के ऊपेरी खुले हिस्से पर लगा दिया….नाज़िया अपनी पीठ पर मेरे गरम होंठो को महसूस करके मचल उठी….वो मेरी बाहों से आज़ाद होना चाहती थी…..पर इस बार मेरी पकड़ बहुत मजबूत थी…..

मेरे हाथ धीरे-2 नाज़िया के पेट से होते हुए, उसके मम्मो की तरफ बढ़ रहे थे. और नाज़िया का बदन मेरे हाथों को महसूस करके झटके खा रहा था…आख़िर कार मेरे दोनो हाथ नाज़िया के दोनो बड़े-2 ठोस मम्मो पर पहुँचा ही दिए….मेने नाज़िया के मुलायम 36 साइज़ के बूब्स को अपने हाथों में पकड़ कर धीरे-2 दबाना शुरू कर दिया…..

नाज़िया की आँखें फिर से मस्ती में बंद होने लगी….मैं अपने होंठो को नाज़िया की खुली पीठ के हर हिस्से पर रगड़ कर चाट रहा था…और नाज़िया के मूह से हलकी-2 आहह ओह्ह्ह जैसी आवाज़ें निकल रही थी…..उसकी आवाज़ में मदहोशी और वासना घुली हुई थी..

मेरा लंड अब पाजामे में एक दम तन कर आकड़ा हुआ था, जो पाजामा फाड़ कर बाहर आने को बेताब था…मेने नाज़िया की पीठ से अपने होंठो को हटा दिया…और नाज़िया के मम्मो को धीरे- 2 दबाते हुए, अपने लंड को नाज़िया की बुन्द की लाइन में नाइटी के ऊपेर से दबाने लगा…….

नाज़िया: (काँपती हुए आवाज़ में) ओह्ह्ह्ह समीर रुक जाओ….प्लीज़ मेरे साथ ऐसा ओह्ह ना करो. समीर हट जाऊ पीचईए आह सीईईईईई…

पर मेने नाज़िया की बातों को अनसुना करते हुए अपनी कमर हिला कर, अपने लंड को नाज़िया की बुन्द की लाइन में आगे पीछे करते हुए रगड़ रहा था……फिर अचानक मेने नाज़िया के मम्मो को छोड़ दिया…..और दोनो हाथों से नाज़िया की नाइटी को पकड़ कर एक ही झटके में ऊपेर उठा दिया…..

नाज़िया का दिल जोरों से धड़कने लगा….अब नाज़िया की मोटी बुन्द और मेरी आँखों के सामने ब्लॅक कलर की पैंटी थी….नाज़िया की वीशेप पैंटी उसकी बुन्द की लाइन में इकट्ठी होकर फँसी हुई थी. और उसके दोनो पहाड़ जैसे चूतड़ मेरी आँखों के बिकुल सामने थे

बस नाज़िया की बुन्द का सूराख उस पैंटी से ढका हुआ था……

नाज़िया ये सोच कर शरम से मरी जा रही थी……कि उसकी बुन्द मेरी आँखों के सामने है….नाज़िया की साँसें ये सोचते ही और तेज हो गयी….

नाज़िया: (लड़खड़ाती हुई आवाज़ में) प्लीज़ समीर मान जाऊओ छोड़ दो मुझे ओह्ह्ह्ह पीछे हट जाओ….में तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ……चले जाओ यहाँ से……..

पर मेरे मन में तो कुछ और ही था, आज मेने सोच लिया था, कि मैं किसी भी कीमत पर पीछे नही हटूँगा….मेने रूम में चारो तरफ देखा…वहाँ पर दीवार के साथ एक टेबल लगा हुआ था…जिस पर एक फ्लवर पॉट रखा हुआ था…वो टेबल सिर्फ़ 4 फुट की दूरी पर था….

मेने नाज़िया को बाहों में भर लिया….और नाज़िया की नेक को पीछे से किस करते हुए, उस टेबल के पास ले गया….मेने अपने एक हाथ से फ्लवर पॉट को नीचे रखा……और नाज़िया को अपनी तरफ घुमा लिया…..नाज़िया के गाल उतेजना के कारण एक दम लाल सुर्ख हो रखे थे….उसकी मदहोशी से भरी आँखें बहुत ही मुस्किल से खुल पा रही थी….मेने नाज़िया के होंठो की ओर देखते हुए, नाज़िया को अपनी बाहों में भर लिया…उसकी नाइटी अभी भी उसकी कमर में अटकी हुई थी……

मेरे हाथ नाज़िया की मुलायम बुन्द पर आ गये…..और मेने नाज़िया की बुन्द को धीरे-2 मसलते हुए, अपने होंठो को नाज़िया के होंठो की तरफ बढ़ाना चालू कर दिया. उसकी फुद्दि से उसका काम रस निकाल कर उसकी पैंटी को गीला कर रहा था…..जिसे वो अच्छे से महसूस कर पा रही थी…..

कुछ ही पलों में मेने फिर से अपने होंठो को नाज़िया की गुलाबी रसीले होंठो पर रख दिया….इस बार नाज़िया ने बिना विरोध किए, अपने होंठो को खोल लिए, और मैं धीरे-2 नाज़िया के होंठो को चूसने लगा…..और साथ साथ में नाज़िया की बुन्द की लाइन में अपनी एक उंगली को ऊपेर नीचे करके रगड़ने लगा….नाज़िया के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गयी……उसने मेरे कंधों को कस के पकड़ लिया…….यहाँ तक नाज़िया के हाथों के नाख़ून भी मेरे कंधों में धँस गये……

अपने कंधों में नाज़िया के नाख़ून की चुभन को महसूस करके और गरम हो रहा था….ये नाज़िया की मस्ती में आने के इशारे थे….तभी अचानक मेने नाज़िया की बुन्द को अपने पंजों में दबोच कर उसे ऊपेर उठा कर टेबल पर बैठा दिया….टेबल 4 फीट लंबा और सिर्फ़ 2 फीट चौड़ा था…. नाज़िया का दिल अंजाने डर के कारण जोरों से धड़क रहा था….उसके दिमाग़ में बस यही चल रहा था, कि अब मैं क्या करने वाला हूँ…

 
फिर मेने नाज़िया की दोनो टाँगों को पकड़ कर नाज़िया के पैरों को टेबल के ऊपेर रख दिया….जिससे नाज़िया की पिंडलियाँ, उसकी थाइस से चिपक गयी….और नाज़िया पीछे की तरफ लूड़क गयी…पर पीछे दीवार थी…जिसके कारण उसकी पीठ दीवार से लग गयी… अब नाज़िया अपनी आँखें बंद किए हुए, तेज़ी से साँसें लेती हुई, टेबल पर बैठी थी…

नीचे उसकी वीशेप ब्लॅक कलर की पैंटी देख कर मेरा लंड पाजामे में झटके खाने लगा…उसकी पैंटी पर गीले पन के निशान देख कर मेरे होंठो पर मुस्कान आ गयी…..नाज़िया शरम के मारे मरी जा रही थी, उसने अपनी टाँगों को आपस में कस लिया… पर अगले ही पल मेरे होंठो पर मुस्कान आ गयी, और मेने नाज़िया की थाइस को पकड़ कर खोल दिया…..

नाज़िया ने अपनी आँखों को एक बार खोला , और मेरी ओर देखते हुए फिर से अपनी आँखों को बंद कर लिया…..

नाज़िया: ये क्या कर रहे हो समीर……..ऐसे मत देखो…….प्लीज़ मुझे जाने दो…..

मेरे होंठो पर सिर्फ़ मुस्कान ही आई, पर मेने नाज़िया की बात का कोई जवाब नही दिया. फिर मेने अपने घुटनो को थोड़ा से मोड़ लिया, और नाज़िया की फुद्दि के सामने आ गया.. नाज़िया आने वाले पलों के बारें में सोच कर घबरा रही थी…….वो ना चाहते हुए भी मुझे रोक नही पा रही थी…..

फिर मेने नाज़िया की पैंटी के आगे हुए गीले पन को देखते हुए, उसकी तरफ अपने होंठो को बढ़ाना चालू कर दिया…..नाज़िया मेरी गरम साँसों को अपनी थाइस की जड़ों और फुद्दि के आस पास महसूस करके एक दम से मचल उठी, नाज़िया ने अपनी गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठो को अपने दाँतों में दबा लिया. उसके मम्मे उसके तेज सांस लेने के कारण ऊपेर नीचे हो रहे थी….

मेने तिरछी नज़रों से नाज़िया के फेस की ओर देखा….उस हसीना का चेहरा बिल्कुल लाल सुर्ख हो कर दहक रहा था….मेरे होंठो की मुस्कान हर पल बढ़ती जा रही थी. मेने नाज़िया की ओर देखते हुए, अपने होंठो को नाज़िया की फुद्दि पर पैंटी के ऊपेर से रख दिया. जैसे ही मेरे होंठ नाज़िया की पैंटी के ऊपेर से उसकी फुद्दि पर लगे…नाज़िया एक दम सिसक उठी, और मेने अपने दोनो हाथों से टेबल को कस के पकड़ लिया….

नाज़िया: ओह अहह उंगग्गग सामीएर क्या कर रहीए हूऊओ. बस बुसस्स्स कारूव ओह्ह्ह्ह क्यों तडपा रहे हो . छोड़ दो मुझीई आह सीईईईईईई . उंह.

पर मुझे तो आज मन माँगी मुराद मिल गयी थी….मैं नाज़िया की फुद्दि के लिप्स को पैंटी के ऊपेर से अपने होंठो में भर कर ज़ोर-2 से चूसने लगा…नाज़िया की फुद्दि से निकले हुए काम रस, जो कि उसकी पैंटी पर लगा हुआ था. मेरे मूह में उसका स्वाद घुल गया…जिससे मेरी आँखों में अजीब सा नशा छा गया…..जैसे मेने कोई नशीली चीज़ चख ली हो….नाज़िया का पूरा बदन उतेजना के मारें काँप रहा था…

नाज़िया के बदन में मस्ती की लहर छाने लगी….वो अब काफ़ी गरम हो चुकी थी. फिर मेने अचानक से नाज़िया की पैंटी को आगे से अपने हाथ से हटा दिया… सामने नाज़िया की गोरी फूली हुई फुद्दि के लिप्स उसके काम रस से लबलबा रहे थे…उसकी फुद्दि का सूराख उत्तेजना के कारण सिकुड और फेल रहा था…मुझ को अपनी आँखों पर विश्वास नही हो रहा था……कि नाज़िया की गोरी फुद्दि और उसकी फुद्दि का गुलाबी रस से भरा सूराख मेरी आँखों के सामने ही है…

मेरी आँखों की चमक और बढ़ गयी थी….मैं अपने आप को रोक ना सका, और मेने अपने होंठो को नाज़िया की फुद्दि के लिप्स पर लगा दिया….नाज़िया ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगी.. वो अपने दोनो हाथों से अपने बालों को पकड़ कर नोचने लगी…उसकी सिसकारियाँ पूरी घर में गूंजने लगी…………

नाज़िया: अहह समीर ये क्या ओह उंह सीयी सीईईईईईईईईईई अहह उंघह उंघह बस करो ओह्ह्ह अहह उंह सीईईईईईईईई रवीीईईईईईई

नाज़िया अब लगभग चीखते हुए सिसकारियाँ भर रही थी…..उसकी आवाज़ में मदहोशी और वासना घुली हुई थी….उसका पूरा बदन झटके खा रहा था….धीरे-2 उसके दोनो हाथ मेरे सर पर आ गये….और वो मेरे सर को पीछे की और धकेलने लगी….मेने नाज़िया की फुद्दि को चाटते हुए, अपने शॉर्ट्स को घुटनो तक सरका दिया…..और फिर एक दम से खड़ा हो गया…

मेरे लंड की नसें एक दम फूली हुई थी…..और लंड अकड़ कर झटके खा रहा था…मेने अपने लंड की कॅप को एक दम से नाज़िया की फुद्दि के सूराख पर लगा दिया.. जैसे ही मेरे लंड का गरम कॅप नाज़िया की फुद्दि के सूराख पर लगा….नाज़िया के बदन में करेंट सा दौड़ गया…..

अचानक उसे अपनी हालत का अहसास हुआ….वो एक दम से घबरा गयी….उसने अपनी वासना से भरी हुई आँखों को बड़ी मुस्किल से खोला, और मेरी ओर देखते हुए, काँपती आवाज़ में बोली…..

नाज़िया: समीर प्लीज़ तुम्हें मेरी कसम है……बस करो…अब और नही…..

मेने नाज़िया की बात सुनते ही, अपने लंड की कॅप को नाज़िया की फुद्दि के सूराख से हटा लाया….और नाज़िया की ओर देखते हुए, मुस्कुराते हुए बोला.

मैं: चलो जैसे आप कहें. पर आप को भी मेरे एक बात माननी होगी…..

नाज़िया: (काँपती हुई आवाज़ में. अब नाज़िया के पास मेरी बात को मानने के अलावा और कोई चारा भी नही था) हां बोलो….में तुम्हारी हर बात मानने को तैयार हूँ….

मैं: (नाज़िया को अपनी बाहों में भर कर टेबल से नीचे उतारते हुए) में तुम्हें जी भर कर प्यार करना चाहता हूँ…..जब तक तुम नही कहोगी…में तुम्हारी फुद्दि में अपना लंड नही घुसाउन्गा….बोलो मुझे प्यार करने से तो नही रोकोगी…

नाज़िया के पास अब कोई चारा नही था….वो मेरे मूह से लंड और फुद्दि जैसे शब्द सुन कर एक दम से शरमा गयी….उसने अपने सर को झुका लिया….और हां में सर हिला दिया…..

ये देखते ही मेरे होंठो पर जीत की खुशी की मुस्कान फेल गयी…मेने नाज़िया को अपनी बाहों में भर लिया, और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए…नाज़िया को अपनी फुद्दि के रस से भीगे हुए, मेरे होंठ बड़े अजीब से लग रहे थे…..पर ना चाहते हुए भी उसे मेरा साथ देना पड़ रहा था….मैं जी भर कर नाज़िया के दोनो होंठो को बारी-2 चूस रहा था…और नाज़िया मेरी बाहों में कसमासाए जा रही थी….

मैं नाज़िया का हाथ पकड़ कर उसे बेड के पास ले गया…..और नाज़िया को बेड पर धक्का दे दिया…..नाज़िया बेड पर गिर पड़ी….उसकी टाँगें बेड के नीचे लटक रही थी. नाज़िया हैरत से भरी नज़रों से मुझे देख रही थी…

 
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मेने नाज़िया की टाँगों को उठा कर घुटनो से मोड़ दिया….जिससे नाज़िया की नाइटी सरक कर उसकी कमर में आ गयी….और फिर मेने नाज़िया की ब्लॅक कलर की वीशेप पैंटी को दोनो साइड से पकड़ कर एक झटके से खेंच दिया….कुछ ही पलों में नाज़िया की पैंटी उसकी टाँगों से निकल कर फर्श पर पड़ी….नाज़िया ने अपनी आँखों को बंद कर लिया…मेरी आँखों के सामने नाज़िया की फुद्दि का सूराख फदफडा रहा था….जो उसके काम रस से भीग कर चमक रहा था….

मैं पैरों के बल नीचे बैठ गया….और अपने हाथों से नाज़िया की फुद्दि के लिप्स को फैला कर उसकी फुद्दि के एक लिप्स को अपने मूह में भर लाया…नाज़िया एक दम से मचल उठी….उसका पूरा बदन झटके खाने लगा….

नाज़िया: अहह उंघह उंघह सीईईईईईई ओह ब्स्स्स ब्स्स्स्स करो ओह अम्मी उफ़फ्फ़ उफफफफफ्फ़ अहह…..

नाज़िया की मस्ती और वासना से भरी सिसकारियाँ मेरे जोश को और बढ़ा रही थी… मेने अपने होंठो में नाज़िया की फुद्दि के एक लिप्स को पूरा भरा हुआ था…मैं अपने होंठो का दबाव उसकी फुद्दि के लिप्स पे डालता हुआ, धीरे -2 फुद्दि के लिप्स को खेंचने लगा….नाज़िया की फुद्दि का लिप मेरे होंठो से रगड़ ख़ाता हुआ, धीरे -2 बाहर आ रहा था…जिसके कारण नाज़िया वासना के सागर में डूबी जा रही थी…..उसकी सिसकारियाँ अब चीखो में बदल गयी थी….और वो अहह ओह उंह उंह सीईईईईई नही समीर ओह बस करूऊ अहह ऐसे मस्ती से भरी हुई सिसकारियाँ निकाल रही थी..

जैसे ही नाज़िया की फुद्दि के लिप्स खिंचते हुए, मेरे होंठो से बाहर आए…नाज़िया एक दम से कांप गयी……उसने अपने खुले हुए बालों को कस के पकड़ लिया….और तेज़ी से अपना सर इधर उधर हिलाने लगी….

नाज़िया: बस बस करो समीर…….बस करो……

नाज़िया ठीक से साँस भी नही ले पा रही थी….मुझ पर नाज़िया की किसी भी बात का कोई असर नही हो रहा था…..फिर मेने नाज़िया की फुद्दि के दूसरे लिप को अपने मूह में भर लिया…..और फिर से उसे अपने होंठो के बीच में दबाते हुए, धीरे-2 खेंचने लगा…जैसे -2 नाज़िया की फुद्दि के लिप्स मेरे होंठो से रगड़ खाते हुई मेरे होंठो से बाहर आ रहे थे…वैसे -2 नाज़िया के बदन में मस्ती की लहर बढ़ती जा रही थी…

अब नाज़िया एक दम से मस्त हो चुकी थी…….मेने इस बार नाज़िया की फुद्दि के दोनो लिप्स को अपने मूह में भर लिया…और ज़ोर ज़ोर से चूस्ते हुए, होंठो में दबा -2 कर खेंचने लगा….नाज़िया की सिसकारिया में वासना का असर बढ़ता जा रहा था….जो मेरे लिए आग में घी का काम कर रहा था….नाज़िया का पूरा का पूरा बदन कांप रहा था….मेरे हाथ नाज़िया के पेट में हो रही थरथराहट को सॉफ महसूस कर पा रहे थे….

अचानक से नाज़िया का बदन अकड़ने लगा….नाज़िया की फुद्दि में से कामरस की नदी अपना बाँध तोड़ने को तैयार थी…उसकी कमर ऐसे झटके खाने लगी…जैसे वो खुद अपनी फुद्दि को मेरे मूह पर रगड़ रही हो……फिर अचानक से नाज़िया की फुद्दि से काम रस का सैलाब उमड़ पड़ा….और गरम पानी की नदी उसकी फुद्दि से निकल कर उसकी बुन्द के सूराख की ओर बढ़ने लगी…. मेने झट से नाज़िया की फुद्दि से अपना मूह हटा लिया… और पास मे गिरी हुई पैंटी से नाज़िया की फुद्दि को सॉफ करने लगा…..

नाज़िया ने अपनी वासना से भरी हुई आँखों को खोल कर मेरी ओर देखा….मैं अपनी चमकती आँखों से उसकी फुद्दि को देख रहा था….नाज़िया एक दम से शरम्शार हो गयी. उसने फिर से अपनी आँखों को बंद कर लिया…..

नाज़िया: (काँपती हुई आवाज़ में) अब तो बस करो समीर….देखो मेने तुम्हारी बात मान ली हैं….अब मुझे जाने दो……….

मैं: (नाज़िया की बात सुन कर मुस्कुराते हुए) नही नाज़िया मेने कहा था, कि में जी भर कर आपको प्यार करना चाहता हूँ, अभी मेरा मन नही भरा हैं…….

नाज़िया अभी ठीक से अपनी साँसों को दुरस्त भी नही कर पाई थी, कि मेने अपनी बात पूरी होते ही….फिर से नाज़िया की फुद्दि के लिप्स को फैला दिया….पर इस बार मेने अपनी जीभ निकाल कर सीधा नाज़िया की फुद्दि के दह्क्ते और लब्लबा रहे सूराख पर लगा दिया….नाज़िया की कमर ने ऐसे झटका खाया, जैसे उसको किसी ने करेंट लगा दिया हो…

 


नाज़िया: ( अपनी फुद्दि के सूराख पर मेरी गरम जीभ को महसूस करके एक दम से तड़प उठी) ओह अहह अहह उफफफफ्फ़ समीर रुकूऊव ओह उंह सीईईई आह अहह अहह ओह……..

नाज़िया ऐसे मचल रही थी….जैसे कोई मछली पानी के बिना तड़पती है…..जिसे देख मेरा जोश दोगुना हो गया….और मेने और ज़ोर ज़ोर से नाज़िया की फुद्दि के सूराख को अपनी जीभ से चाटने लगा……मेने 5 मिनट तक कभी अपनी जीभ से नाज़िया की फुद्दि के सूराख को चाटता, तो कभी उसकी फुद्दि के लिप्स को अपने होंठो में भर कर चूस्ता………. नाज़िया फिर से फारिघ् होने के बेहद करीब थी……..और उसका बदन फिर से अकड़ने लगा था…इसबार वो खुद इतनी मस्त हो गयी थी, कि वो अपने आप पर काबू नही रख सकी….और मेरे मूह पर फुद्दि को दबाने लगी…..और अगले ही पल उसकी फुद्दि ने फिर से पानी छोड़ दिया….

नाज़िया के तन बदन में आग लगी हुई थी….अब उसके सबर का बाँध भी टूटने वाला था….पर मैं रुकने के मूड में बिल्कुल भी नही था….मेने फिर से नाज़िया के नीचे पड़ी पैंटी को उठा कर, उसकी फुद्दि को सॉफ किया…..और फिर से अपने होंठो को नाज़िया के फुद्दि के सूराख पर लगा दिया…..

अभी अभी झड़ी नाज़िया जो दो बार फारिघ् हो चुकी थी…उसकी बर्दास्त की हद हो चुकी थी… वो फिर से सिसकारियाँ भरने लगी…और अपने हाथों से मेरे सर को पकड़ कर पीछे की और धकेलने लगी….

नाज़िया: (सीसियाते हुए) ओह्ह्ह बस करो समीर बस करो……

रात के 10 बज रहे थे….घर में सन्नाटा छाया हुआ था….बस रूम से नाज़िया की मादक और मस्ती से भरी हुई सिसकारियों की आवाज़ सुनाई दे रही थी…आख़िर कार नाज़िया के बहुत कहने पर मेने अपना मूह उसकी फुद्दि से हटा लिया….. और नाज़िया के ऊपेर लेट गया…और अपने होंठो को नाज़िया के होंठो की तरफ बढ़ाने लगा….

नाज़िया ने अपनी वासना से भरी हुई आँखों को खोल कर मेरी तरफ देखा….जो उसके काम रस से भीगे हुए, अपने होंठो को उसके होंठो की तरफ बढ़ा रहा था….नाज़िया ने अपना फेस दूसरी तरफ घुमा लिया….

मैं: (नाज़िया की ओर देख कर मुस्कुराते हुए) देखो अब तुम मुझे रोक नही सकती…तुमने ने मुझसे वादा किया है….

ये कह कर मेने नाज़िया के फेस को अपने हाथों में भर कर उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए….अपने ही कामरस का स्वाद नाज़िया को बहुत अजीब सा लग रहा था….पर थोड़ी देर बाद नाज़िया ने हथियार डालते हुए, अपने होंठो को खोल दिया…और मैं फिर से नाज़िया के गुलाबी रसीले होंठो का रस पीने लगा…..

नाज़िया के होंठो को धीरे-2 चूस्ते हुए, मेने नाज़िया की नाइटी जो कि उसकी कमर तक चढ़ि हुई थी…उसे और ऊपेर उठाने लगा….नीचे मेरा लंड नाज़िया की फुद्दि के पास उसकी थाइस की जडो में रगड़ खा रहा था…और नाज़िया अपनी फुद्दि के पास मेरे गरम लंड की कॅप की रगड़ महसूस करते हुए, फिर से मस्त होने लगी….

धीरे-2 मेने नाज़िया की नाइटी को उसकी मम्मो तक ऊपेर उठा दिया….जैसे ही नाज़िया के मम्मे नाइटी की क़ैद से बाहर आए….मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा…वाह क्या गोश्त से भरे हुए मम्मे थे…. एक दम सख़्त और तने हुए….मैं तो जैसे नाज़िया के मम्मो को देख कर पागल ही हो गया….मेने दोनो मम्मो को अपने हाथों में भर लिया… और धीरे -2 दबाने लगा….नाज़िया के बड़े-2 गुदाज मम्मे मेरे हाथों में समा नही पा रहे थे…फिर मेने दोनो मम्मो को मसलते हुए, लेफ्ट मम्मे को अपने मूह में भर लिया.

नाज़िया एक दम से मदहोश हो गयी….उसके बदन में सिहरन दौड़ गयी…और उसने अपनी बाहों को मेरी पीठ पर कस लिया….मैं अब पूरे जोश में आ चुका था…मेने नीचे से अपने दोनो हाथों को नाज़िया की टाँगों में डाल कर नाज़िया को बेड के ऊपेर सही से लेटा दिया….और खुद उसकी टाँगों के बीच अपनी टाँगों को अड़जस्ट करके, नाज़िया के ऊपेर लेट गया…..

जिससे मेरे लंड का कॅप नाज़िया की फुद्दि के लिप्स पर रगड़ खाने लग गया….नाज़िया एक दम से मेरे लंड को अपनी फुद्दि के लिप्स पर रगड़ ख़ाता हुआ महसूस करके घबरा गयी….और उसने मेरे कंधों पर हाथ रख कर मुझे पीछे किया तो….नाज़िया का निपल पक की आवाज़ से मेरे मूह से बाहर आ गया…..

मैं: (हैरान होकर नाज़िया की ओर देखते हुए) क्या हुआ….

नाज़िया: नही समीर ये ठीक नही है….

मैं: अब मैं सिर्फ़ तुम्हे प्यार ही तो कर रहा हूँ…..

नाज़िया: पहले उसे वहाँ से हटाओ…..

नाज़िया का इशारा मेरे लंड की तरफ था….जो उसकी फुद्दि के लिप्स पर लगा हुआ था… ये सुनते ही मेरे होंठो पर मुस्कान आ गयी….मेने नाज़िया की बात को मानते हुए, थोड़ा नीचे खिसक गया…अब मेरा लंड नाज़िया के दोनो थाइस के बीच में तन कर झटके खा रहा था….मेने फिर से नाज़िया के मम्मेको मूह में भर लिया…और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा…..

नाज़िया ने फिर से अपनी बाहों को मेरी पीठ पर कस लिया….और वो मेरे सर को अपने मम्मो पर दबाने लगी….में पूरे ज़ोर-2 से नाज़िया के दोनो मम्मो को बारी-2 चूस रहा था…..और नाज़िया मस्ती में उंह सीईइ अहह ओह कर रही थी….उसकी फुद्दि का सूराख फिर से फड़कने लगा था…..नाज़िया अब पूरी तरह मस्त हो चुकी थी… नाज़िया की नाइटी जो उसको मम्मो के ऊपेर तक चढ़ि हुई थी, वो मुझे अपने दोनो के बीच में एक दीवार सी लग रही थी…..

 


मेने नाज़िया के मम्मो को चूस्ते हुए, नाज़िया की नाइटी को दोनो हाथों से पकड़ कर और ऊपर करना शुरू कर दिया….और ये क्या मैं ये देख कर हैरान रह गया कि, नाज़िया ने नाइटी को उतरवाने के लिए अपने दोनो हाथों को ऊपेर कर लिया…और अपने सर को थोड़ा सा ऊपर उठा लिया…जिससे मेने नाज़िया की नाइटी को आसानी से निकाल कर फेंक दिया….

अब हम दोनो बिकुल नंगे एक दूसरे से चिपके हुए थे…..और मैं नाज़िया के राइट मम्मे को मूह में भर कर ज़ोर ज़ोर से चूस रहा था….उसने फिर से मेरे सर को अपने मम्मो पर दबाना चालू कर दिया…..नाज़िया की सिसकारियाँ पूरे घर में गूंजने लगी…

नाज़िया के हाथों की उंगलियाँ तेज़ी से मेरे बालों में घूम रही थी….और मेने नाज़िया के लेफ्ट मम्मेको अपने हथेली में भर कर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा….

नाज़िया: (मस्ती से भरी आवाज़ में) अह्ह्ह्ह बस करूँ समीर में बहक जाउन्गी…उंह सीईईईईईईई बस कार्ररर……

और उसने मेरी पीठ पर अपने हाथों को तेज़ी से घुमाना चालू कर दिया,….ये देखते हुए, मेने भी नाज़िया की फुददी में अपना लंड डालने के लिए सही पोज़ीशन में आने लगा….और मेने बिना अपने हाथ की मदद से अपने लंड की कॅप को नाज़िया की कुलबुला रही फुद्दि के सूराख पर लगा दिया…जैसे ही मेरे लंड का गरम और मोटा कॅप नाज़िया की फुद्दि के सूराख पर लगा….नाज़िया के मूह से आहह निकल गयी….

इस बार मेने अपने लंड को नाज़िया के सूराख के अंदर नही घुसाया….बस ऐसे ही अपने लंड की कॅप को उसकी फुद्दि के सूराख पर टिका कर, नाज़िया के मम्मो को चूस्ता रहा…आख़िर कार नाज़िया का सबर भी जवाब दे गया….और उसकी कमर धीरे-2 खुद ही ऊपेर के जानिब उठने लगी…जिससे नाज़िया की फुद्दि का दबाव मेरे लंड की कॅप पर बढ़ने लगा….

पर मेने फिर से अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपेर उठा लिया…..मेरे लंड की कॅप का थोड़ा सा जो हिस्सा नाज़िया की भीगी हुई फुद्दि के सूराख में गया था, वो फिर से बाहर आ गया….नाज़िया ने अपनी वासना से भरी हुई आँखों को खोल कर मेरी तरफ देखा…जैसे पूछ रही हो……अब क्यों मुझे चोद नही देते……नाज़िया ने अपनी मस्ती से भरी नशीली आँखों से मुझसे सवाल किया…. और मेने मुस्करा कर अपने होंठो पर जीभ फेरना शुरू कर दिया….नाज़िया ने फिर से अपनी आँखें बंद कर ली….और अपनी कमर को ऊपेर की ओर करते हुए, फिर से अपनी फुद्दि को मेरे लंड की कॅप पर दबाने लगी..

नाज़िया ने अपनी थाइस को पूरी तरह फैला रखा था…..जिससे उसकी फुद्दि के लिप्स फेले हुए थे….और फुद्दि का गुलाबी सूराख खुल कर मेरे लंड को अपने अंदर समा लेने के लिए बेताब था….जैसे ही नाज़िया की फुद्दि का सूराख फिर से मेरे लंड की कॅप पर दबा तो….नाज़िया एक दम से मचल उठी….उसने मुझे अपनी बाहों में ज़ोर से कस लिया…

मेने भी देर करना ठीक नही समझा….और नाज़िया की थाइस के नीचे से अपनी बाजुओं को निकालते हुए, उसकी टाँगों को ऊपेर उठा दिया….और अपनी कमर को पूरी तेज़ी से नीचे की तरफ धकेला…..

नाज़िया: अहह उंह उंघह सीईईईईईईईई अहह

और मेरे लंड का कॅप नाज़िया की फुद्दि के सूराख और दीवारों को फैलाता हुआ, आधा अंदर घुस गया…..नाज़िया अपनी फुद्दि की दीवारों पर मेरे लंड के मोटे कॅप की रगड़ को महसूस करके एक दम गरम हो गयी….उसकी फुद्दि की दीवारें मेरे लंड को अपने अंदर दबा रही थी….जैसे वो मेरे लंड को कभी छोड़ना ही ना चाहती हो….

नाज़िया ने मेरी टी-शर्ट को गले से पकड़ लिया….और मुझ को अपने होंठो पर झुकाने लगी….उसके होंठ गोल आकार ले चुके थी…जैसे वो मुझ को बता रही हो….मेरे होंठो को चूसो…और मेने भी नाज़िया के होंठो को अपने होंठो में भर कर चूसना चालू कर दिया,….इसबार नाज़िया ने मेरे होंठो को अपने होंठो में लेकर खुद चूसना चालू कर दिया,….मैं नाज़िया को इस तरह गरम होता देख हैरान था….

नाज़िया पागलों की तरहा मेरे होंठो को चूस रही थी….और मैं भी नाज़िया के होंठो को चूस्ते हुए, नीचे धीरे-2 अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर कर रहा था.. अभी मेरा आधा लंड ही नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर हो रहा था…पर नाज़िया की मस्ती का आलम इस कदर बढ़ चुका था, कि मेरा लंड अभी से नाज़िया की फुद्दि से निकल रहे पानी से भीग चुका था….

मैं पहली बार ऐसे मोटी और गरम फुद्दि को चोद कर एक दम मस्त हो गया था….मेरे लंड की नसें फूटने को थी….और मेने एक ज़ोर धार धक्का मार कर अपने बाकी लंड को नाज़िया की फुद्दि की गहराइयों में उतार दिया….

नाज़िया: (मेरे होंठो से अपने होंठ अलग करती हुई) अहह अम्मी धीरीईए धीरीए करो ओह्ह्ह्ह ओह समीर बुसस्स्सस्स उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईईईई उन्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह उम्ह्ह

मेने अब अपने लंड को पूरी रफ़्तार नाज़िया की फुद्दि के सूराख के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था…और नाज़िया की फुद्दि की दीवारों पर रगड़ ख़ाता हुआ मेरे लंड का कॅप नाज़िया को मदहोशी के सागर में डुबोये जा रहा था…नाज़िया की फुद्दि उसके काम रस से भीग चुकी थी…दोनो पहले से ही काफ़ी गरम थी….इसलिए नाज़िया का बदन फिर से अकडने लगा….और वो पूरी तरह मस्त हो कर अपनी कमर को ऊपेर के तरफ उछल कर अपनी फुद्दि को मेरे लंड पर पटकने लगी,….’

 
नाज़िया: अहह समीरररर ब्स्स्स और जोर्र्र्रर सीईई आह हाां औसे हीईई..

मैं नाज़िया की वासना से भरी मस्त सिसकारियों को सुन कर और जोश में आ गया…और अपनी कमर को पूरी तेज़ी से हिलाते हुए, अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर करते हुए चोदने लगा….कुछ ही पलों में नाज़िया का बदन फिर से अकड़ गया….और उसकी फुद्दि से गरम पानी की नदी बह निकली…….मैं भी ज़्यादा देर ना टिक पाया…और नाज़िया की फुद्दि में ही फारिघ् होने लगा….दोनो कुछ देर बाद शांत हुए, और मैं अपने सर को नाज़िया के मम्मो के बीच में रख कर लेट गया…..

अब नाज़िया की आँखों में नींद नही थी….मैं भी पीठ के बल लेटा हुआ, छत की तरफ देख रहा था….थोड़ी देर बाद नाज़िया उठी और नाइटी पहन कर बाथरूम की तरफ जाने लगी…तो मेरी नज़र नाज़िया की हिलती हुई बुन्द पर जैसे ही पड़ी….तो मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा….नाज़िया बाथरूम में घुस गयी…मुझे पता नही क्या हुआ मैं जल्दी से खड़ा हुआ और बाथरूम के डोर के पास आकर खड़ा हो गया….

नाज़िया ने बाथरूम के डोर को बंद नही किया था…जैसे ही मैं बाथरूम के डोर के नज़दीक पहुँचा तो, नाज़िया के मूतने की आवाज़ सुन कर मेरे लंड ने जोरदार झटका खाया….नाज़िया ने पेशाब करने के बाद अपने हाथों को धोया, और बाहर आने लगी…पर मेने उसे दूर पर ही रोक लिया….

नाज़िया: (अपनी आँखों को झुकाए हुए) अब क्या है….मुझे जाने दो….रात बहुत हो गयी है..

मैं: (नाज़िया को अपनी बाहों में भरते हुए) तो क्या हुआ…..अभी मेरा दिल नही भरा है..

और ये कहते हुए मेने नाज़िया के होंठो को अपने होंठो में भर लिया…और नाज़िया की बुन्द को उसकी नाइटी के ऊपेर से मसलते हुए, उसके होंठो का रस पीने लगा…नाज़िया के बदन में फिर से मस्ती की लहर दौड़ गयी…और मदहोश होकर उसने भी अपनी बाहों को मेरी पीठ पर कस लिया…. हम दोनो पागलों की तरह एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे…फिर अचानक से मेने नाज़िया की नाइटी को दोनो तरफ से पकड़ कर ऊपेर उठा कर निकाल दिया…

नाज़िया एक दम से शरमा गयी….और वो दीवार की तरफ घूम गयी….मैं पीछे से नाज़िया के कटाव दार बदन को देख कर पागल हो गया…मेरा लंड फिर से पूरी तरह सख़्त हो चुका था…मेने नाज़िया को पीछे से अपनी बाहों में भर कर अपने होंठो को नाज़िया की नंगी पीठ पर टिका दिया…नाज़िया के बदन में मस्ती के लहर दौड़ गयी… मेरा सख़्त खड़ा लंड नाज़िया की बुन्द की दरार में रगड़ खा रहा था……

और नाज़िया भी पीछे की तरफ अपनी बुन्द को मेरे लंड पर दबा कर मेरे लंड को अपने बुन्द की लाइन में महसूस करके मस्त हो रही थी….मेने अपने लंड को पकड़ कर अपने घुटनो को थोड़ा सा मोड़ लिया, और अपने लंड की कॅप को नाज़िया की फुद्दि के सूराख पर टिकाने की कॉसिश करने लगा….नाज़िया ने भी मस्ती में आकर अपनी थाइस को थोड़ा सा खोल दिया…और दीवार पर अपनी हथेलियों को जमा कर पीछे से अपनी बुन्द को थोड़ा सा बाहर निकाल लिया…नाज़िया लगभग सीधी खड़ी थी…इसीलिए मेरा लंड नाज़िया की फुद्दि के सूराख के अंदर नही जा पा रहा था….

फिर नाज़िया ने अपनी बुन्द से थोड़ा ऊपेर की कमर के हिस्से को अंदर की तरफ कर लिया….जिससे उसकी फुद्दि पीछे से बाहर की तरफ आ गयी….मेने अपने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर, नाज़िया की फुद्दि के सूराख पर लगा दिया…नाज़िया के मूह से मस्ती से भरी हुई आह निकल गयी…और उसने अपने होंठो को दाँतों में भींच लिया…मेने नाज़िया की बुन्द के दोनो पार्ट्स को दोनो तरफ से पकड़ कर एक जोरदार धक्का मारा…तो मेरा लंड नाज़िया की फुद्दि की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर जा घुसा….

नाज़िया: अहह उंह समीर पूरा अंदर डालो…….ओह समीर…

मेने एक के बाद एक तीन चार धक्के लगा कर अपने लंड को जड़ तक नाज़िया की फुद्दि में घुसा दिया….और मेने फिर अपने हाथों को नाज़िया की बुन्द से हटा कर नाज़िया के हाथों के पास दीवार पर लगा दिया…और तेज़ी से नाज़िया की फुद्दि में लंड को अंदर बाहर करते हुए चोदने लगा…नाज़िया भी मस्ती होकर मेरा पूरा साथ दे रही थे, और अपनी फुद्दि को पीछे मेरे लंड पर पटक-2 कर चुदवा रही थी…..

नाज़िया: अहह समीर और ज़ोर से चोदो मुझे अहह अहह अहह और तेज जल्दी कर अह्ह्ह्ह ओह समीर उंह

में भी नाज़िया की बातों को सुन कर और जोश में आ गया…और तेज़ी से नाज़िया की फुद्दि में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए शॉट लगाने लगा….मेरी थाइस नाज़िया की मोटी बुन्द पर चोट करके थप-2 की आवाज़ कर रही थी…और नाज़िया इन आवाज़ों को सुन कर और गरम हो रही थी… मैं 10 मिनट लगातार ऐसे ही नाज़िया की फुद्दि में अपने लंड को अंदर बाहर करता रहा.

फिर अचानक से नाज़िया की फुद्दि ने मेरे लंड को अपने अंदर कसना चालू कर दिया… नाज़िया फारिघ् होने के बिल्कुल करीब थी…वो एक दम मस्त हो चुकी थी…उसने अपने होंठो को मेरी कलाईयों पर रगड़ना चालू कर दिया…ये देख कर मैने और तेज़ी से नाज़िया को चोदना शुरू कर दिया….कुछ ही पलों में नाज़िया का बदन अकड़ने लगा….और वो पीछे की तरफ तेज़ी से अपनी बुन्द को धकेलने लगी…..

थोड़ी देर बाद हम दोनो एक साथ फारिघ् हो गये…और फारिघ् होते ही मैं नाज़िया के कंधो पर अपना सर टिका कर खड़ा हो गया…जब दोनो की साँसें दुरुस्त हुई, मेने अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि से बाहर निकाल लिया. मेरा आधा तना हुआ लंड, नाज़िया की फुद्दि से निकले पानी से सना हुआ था….नाज़िया ने अपनी नाइटी उठाई…और पहन कर बेड पर लेट गयी….उसके बाद में बाथरूम से आने के बाद सीधा रूम में चला गया…और बेड पर लेट गया… दोनो को कब नींद आई….दोनो में से किसी को पता नही….

 


53

अगली सुबह जब आँख खुली तो, मेरे जिस्म पर सिर्फ़ रज़ाई थी…..और नीचे में बिल्कुल नंगा था….जैसे ही आँख खुली तो मेरी आँखो के सामने से कल रात बीता हुआ वो सारा हसीन मंज़र घूमता चला गया….मेने बेड पर और रूम में देखा तो, वहाँ नाज़िया नही थी….मेने दीवार पर लगी घड़ी की तरफ देखा तो, सुबह के 6 बज रहे थे…

मैं बेड से नीचे उतरा और यहाँ वहाँ पड़े अपने कपड़े उतार कर पहने और जैसे ही मैं रूम से बाहर आया तो, देखा कि नाज़िया किचिन में खड़ी थे…शायद चाइ बना रही थे…..उसकी पीठ मेरी तरफ थी…..मैं बिना आवाज़ किए धीरे-2 किचिन में गया. और नाज़िया को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया,……पर अगले ही पल नाज़िया एक दम से घूमी और मुझे पीछे धक्का दे दिया….में आँखें फाडे नाज़िया को देखने लगा….”ये क्या बदतमीज़ी है….दूर रहो मुझसे…..” नाज़िया ने गुस्से से भरे लहजे में कहा…

.”क्या हुआ…?” मेने नाज़िया की तरफ हैरत भरी नज़रों से देखते हुए पूछा तो, नाज़िया ने अपने गुस्से पर कंट्रोल करते हुए लंबी साँस ली….और फिर कुछ देर सोचने के बाद बोली…..

नाज़िया: देखो समीर तुमने जो मुझसे कहा था…वो मेने कल रात कर दिया….जो तुमने माँगा दिया था….वो तुम्हे दे दिया….बल्कि उससे कही ज़्यादा अपना सब कुछ तुम्हे दे दिया….और इस दौरान मैं भी बहक गयी थी….मेने अपना वादा पूरा कर दिया…अब तुम भी अपना वादा पूरा करो…..

ये कह कर उसने सेल्फ़ पर पड़ा हुआ मेरा मोबाइल मेरी तरफ बढ़ा दिया…..मेने सवालिया नज़रों से नाज़िया की तरफ देखा……और उसके हाथ से अपना मोबाइल ले लिया…

“समीर अब वो रेकॉर्डिंग डेलीट कर दो….तुम जो चाहते थे वो तुम्हें मिल गया… अब सब कुछ भूल जाओ….और एक नयी जिंदगी की शुरआत करो….कि तुम भी सकून भरी जिंदगी जी सको और में भी…..”

मैं: अगर यही बात थी तो, तुमने खुद रेकॉर्डिंग क्यों डेलीट नही की…मोबाइल तो तुम्हारे पास था….

नाज़िया: हां जब तुम सो रहे थे…..तब मेने उठा लिया था….पर फिर सोचा ऐसी करना ठीक नही होगा…..अब तुम खुद उसे डेलीट कर दो….प्लीज़ में तुमसे रिक्वेस्ट करती हूँ….

मैं: ठीक है…..

मेने मोबाइल से वो रेकॉर्डिंग डेलीट कर दी….और बाहर जाने लगा तो, नाज़िया के आवाज़ सुन कर रुक गया….और नाज़िया के तरफ देखने लगा…”समीर मुझाई लगता है….एब्ब तुम्हाई यहा से चले जाना चाहिए…..कहीं तुम्हारे अब्बू को पता चल गया कि तुम इतने दिनो से यहाँ हो तो, हम दोनो के लिए मुसबीत हो जाएगी…..मैं क्या जवाब दूँगी उन्हे….तुम चले जाओ…..”

मैं: ठीक है जैसे तुम कहो…..

उसके बाद में ऊपर आ गया…..ऊपर आकर में फ्रेश हुआ….और फिर अपनी पॅकिंग करने लगा…थोड़ी देर बाद नाज़िया ऊपर आई….और नाश्ता और चाइ रख कर नीचे चली गयी…पॅकिंग करने के बाद मेने नाश्ता किया और बॅग उठा कर जैसे ही रूम से बाहर आया तो, मेरा मोबाइल बजने लगा….मेने जेब से मोबाइल निकाल कर देखा तो, सबा के घर से लॅंडलाइन से कॉल आ रही थी…मेने कॉल पिक की तो, दूसरी से फ़ैज़ की आवाज़ आई…..

फ़ैज़: हैल्लो समीर….

मैं: हैल्लो फ़ैज़ हां बोलो कैसे हो….?

फ़ैज़: मैं तो ठीक हूँ जनाब आप कहाँ हो कैसे हो….तुम्हे कुछ पता भी है….

मैं: यार में तो ठीक हूँ….पर हुआ क्या है….?

फ़ैज़: भाई जान तीन दिन बाद अपने इंटर्नल एग्ज़ॅम शुरू होने वाले है….और जनाब लापता है….

मैं: नही यार ऐसे ही किसी काम से अब्बू के पास आया था….आज ही वापिस आ रहा हूँ…

फ़ैज़: ठीक है….जैसे ही आए उसके बाद मेरे घर आ जाना….और एग्ज़ॅम की डेट शीट ले लेना….

मैं: ठीक है…..

उसके बाद मेने कॉल कट की और नीचे आ गया…नाज़िया बाहर बरामदे में ही बैठी हुई थी….उसने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर नज़रें झुका ली….मैं बिना कुछ बोले वहाँ से निकाला और बाहर से रिक्क्षा लेकर बसस्टेंड पर चला गया….और फिर वहाँ से बस पकड़ी गाओं जाने के लिए…. में 12 बजे गाँव की रोड पर उतरा….और घर की तरफ चल पड़ा….10 मिनिट पैदल चलने के बाद में घर पहुँचा लॉक खोला और फिर अपने रूम में पहुँचा और कपड़े चेंज करके बेड पर लेट गया….फिर पता नही चला कब नींद आ गयी….

जब आँख खुली तो 3 बज रहे थे….मैं उठ कर फ्रेश हुआ मूह हाथ धो कर घर को लॉक करके फ़ैज़ के घर की तरफ चला गया…..वहाँ जाकर डोर बेल बजाई तो, थोड़ी देर बाद फ़ैज़ ने गेट खोला….मुझे देख कर फ़ैज़ एक दम से खुश हो गया….और मुझे गले मिला….”और सूनाओ फ़ैज़…अब तुम्हारी तबीयत कैसी है…..? “

फ़ैज़: अब ठीक हूँ…तुम कैसे हो…..यार इतने दिनो तक कहाँ थे….

मैं: बताया तो था….कि अब्बू के पास चला गया था….

फ़ैज़: चल अंदर आ….कब आए हो वहाँ से…..?

हम दोनो ऊपेर आ गये….वो मुझे सीधा अपने रूम में ले गया… सबा उस वक़्त शायद अपने रूम में थी….” बस यार 12 बजे यहा पहुँचा था…थक गया था.. तो आते ही नींद आ गयी….”

फ़ैज़: अच्छा तुम रूको में अम्मी को कहता हूँ कि, तुम्हारे लिए खाना बना दे….

मेने फ़ैज़ को मना किया पर वो नही माना….और बाहर चला गया…थोड़ी देर बाद फ़ैज़ वापिस आया…और उसने अपने स्टडी टेबल के ड्रॉयर में से एग्ज़ॅम की डेट शीट निकाली और एक प्लेन पेपर पर मुझे एग्ज़ॅम की डीटेल नोट करके दी….उसके बाद और कोई ख़ास बात नही हुई….हम दोनो कॉलेज की इधर उधर की बातें करते रहे….थोड़ी देर बाद सबा रूम में आई…वो मुझे देख कर मुस्कराते हुए बोली….” क्या बात है समीर बड़े दिनो बाद इधर आए हो….?”

 
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