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Guest
अपने मम्मो को चुसवा कर नरगिस फिर से गरम हो चुकी थी….उसने मुझे नीचे उतरने को कहा….जैसे ही मेने नरगिस को नीचे उतारा उसने अपने पाजामे को दोनो तरफ से पकड़ कर धीरे-2 नीचे सरकाते हुए अपनी एक टाँग पाजामे से निकाल दी…और फिर सोफे के पुष्ट पर अपने एक घुटने को रखा और डॉगी स्टाइल में आ गयी…..
“समीर अब इसके सामने अपना लंड मेरी फुद्दि में डाल कर इसके मन का वेहम निकाल दो….ताकि ये आइन्दा से अपनी टाँग मेरी पर्सनल लाइफ में अडाने की कॉसिश ना करे..” नरगिस ने अपने एक हाथ की उंगलयों पर थूक उगलते हुए कहा…और फिर अपना हाथ पीछे की तरफ लेजा कर अपनी फुद्दि पर थूक को फैलाने लगी…मेने अपनी पेंट को उतार फेंका और नरगिस के पीछे आते हुए अपने लंड की कॅप को नरगिस की फुद्दि के सूराख पर सेट करते हुए जैसे ही हल्का सा दबाया तो, मेरे लंड का कॅप उसकी फुद्दि के सूराख को फैलाता हुआ अंदर जा घुसा….बाकी की कसर नरगिस ने अपनी बुन्द को पीछे की तरफ पुश करके मेरे लंड को अपनी फुद्दि की गहराइयों में लेते हुए पूरी कर दी…”
मेने धीरे धीरे अपने लंड को नरगिस की फुद्दि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….” नरगिस तुम ये सब ठीक नही कर रही हो…इसके बारे में मैं तुम्हारी मोम को ज़रूर बताउन्गी…” नाज़िया ने खिसियानी बिल्ली की तरह खंबा नोचते हुए कहा…
.”अर्रे जा बता देना…मेरी अम्मी को ही क्या पूरी दुनिया को भी बता देगी तो, भी मुझे कुछ फरक नही पड़ता….” नरगिस ने अपनी बुन्द को धीरे-2 पीछे करते हुए कहा…”ओह्ह्ह फकक्क्क्क समीरररर तुम क्यों रुक गये…मेरी फुद्दि मारो ना…बोलने दो इस साली गश्ती को…जलन हो रही है इसे….फुददी तो इसकी भी लार टपका रही होगी…पर साली की अकड़ है कि, बेचारी के मूह पर ताला लगा हुआ है…”
नरगिस ने नाज़िया की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए अपनी बूँद को पीछे की तरफ पुश करने लगी…मेरा लंड बुरी तरह से नरगिस की फुद्दि की दीवारो से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर हो रहा था…”ओह्ह्ह्ह फक फक मी डीपर समीर ओह्ह्ह्ह खुदा आइ आम कमिंग ओह आइ नेवेर कम्ड सो फास्ट ओह गॉड इट्स सो फक्किंग गुड….” नरगिस ने पूरी जोश के साथ अपनी बुन्द को पीछे की ओर पुश करना शुरू कर दिया…
मैं: ओह्ह्ह नरगिस मेरा लंड भी माल छोड़ने वाला है….
नरगिस: ओह्ह्ह्ह वेट समीर….वेट….
नरगिस ने झड़ते हुए कहा…उसका पूरा बदन थरथरा उठा…और अगले ही पल वो सोफे की पुष्ट से नीचे उतर कर घुटनो के बल बैठ गयी….और मेरे लंड के कॅप को मूह में लेकर ऐसे ज़ोर ज़ोर से चूसा कि, मेरे लंड की नसें वीर्य से एक दम फूल गयी…नरगिस ने मेरे लंड की कॅप को मूह से निकाला और अपना मूह खोल कर एक हाथ से मेरे टट्टो को सहलाने लगी…”कम इन माइ माउत कम समीर….ओह्ह आइ आम वेटिंग समीर कम फॉर मी…कम फॉर युवर कम हंग्री स्लट…” नरगिस की बातें सुन कर में इस कदर मदहोश हो गया कि, मेरे लंड की कॅप से वीर्य की पिचकारियाँ निकल कर उसके मूह के अंदर गिरने लगी….दूसरी तरफ बैठी नाज़िया ये सब बड़ी हैरानी से देख रही थी….
उसने तो कभी सपने में भी सोचा नही होगा कि, एक दिन उसे अपनी लाइफ में ऐसा भी कुछ देखने को मिलेगा….जैसे ही मेरे लंड से वीर्य की आख़िरी बूँद टापकी. मेने फर्श पर पड़ी अपनी पेंट उठाई और नरगिस के रूम के बाथरूम में चला गया…..जब में फ्रेश होकर बाहर आया तो नरगिस और नाज़िया दोनो आपस में कुछ बात कर रही थी….मैं बाहर आकर सोफे पर बैठ गया…..
”ओके ओके इट्स ओके नरगिस….अक्चुअली मैं सोचती थी कि, हम दोनो एक दूसरे को प्यार करते है…और हम दोनो के बीच कोई लड़का नही आ सकता….”
नरगिस: नाज़िया मेरी बात सुनो मैं तुम्हे सब कुछ बताने वाली थी….
नाज़िया: इट्स ओके नरगिस….ऐक्चुअली मैं ये भूल गयी थी कि, रियल लाइफ में ऐसा नही होता. एनी वेज मैं तुम्हारे लिए बहुत खुश हूँ….अच्छा तो मैं चलती हूँ..बाइ….
नरगिस: आई बड़ी मुझे समझाने वाली…..मुझे पता है समीर….तुम्हारे अब्बू और इसके संबंध भी ठीक नही है….
मैं: हां…वैसे तुम्हारी आवाज़ को क्या हुआ है….
मेने नरगिस की बैठी हुई आवाज़ सुन कर कहा….तो नरगिस ने अपने गले को खंखारते हुए मुस्कुराना शुरू कर दिया… “क्या हुआ…? बताओगी भी या नही….?” मेने थोड़ा सा खीजते हुए कहा….
“अब ऐसे ज़ोर ज़ोर से चिल्लाउन्गी तो, गला और आवाज़ बैठेगी ही ना….” नरगिस ने थोड़ा सा शरमाते हुए कहा….”
मैं: अच्छा ठीक है….अब मुझे चलना चाहिए….कही ये ना हो कि, वो तुम्हारे अम्मी अब्बू को लेकर यहाँ आ जाए….
नरगिस: हां समीर तुम जाओ….वैसे भी मुझे इस पर यकीन नही है..….
मैं वहाँ से निकल कर नाज़िया की अम्मी के घर आ गया…..देखा तो अभी सिर्फ़ 12:30 ही हुए थे…एक-2 पल काटना मुस्किल हुआ जा रहा था…नाज़िया शायद वापिस अपने चाचा के घर चली गयी थी….मैं नीचे बैठा टीवी देख रहा था कि, अचानक से डोर बेल बजी.. मेने जाकर डोर खोला तो देखा सामने सबा रानी नाज़िया और नाज़िया की अम्मी खड़ी थी…उन्होने शाम को आना था…पर उन सब को एक साथ पहले यहाँ देख कर मेरी फटने लगी….कहीं नाज़िया ने जाकर अपनी अम्मी से कुछ कह तो नही दिया…
इससे पहले कि मैं कुछ बोलता तो, वो सब अंदर आ गये….”क्या हुआ आप सब इतनी जल्दी क्यों आ गये…” मेने सबा और रानी की तरफ देखते हुए कहा…तो नाज़िया ने एक बार मेरी तरफ जहर भरी नज़रों से देखा और अंदर चली गयी….” वो फ़ैज़ का फोन आया था समीर….उसकी तबीयत बहुत खराब है…और घर पर कोई भी नही है… उसकी दादी का तो तुम्हे पता है….वो अकेली क्या करेगी…मुझे आज ही वापिस जाना होगा…”
मैं: ठीक है हम अभी पॅकिंग करके निकलते है….
“नही समीर…तुम्हे ऐसे कैसी भेज दें….तुम पहली बार यहाँ आए हो…. तुम्हे खाली हाथ तो नही जाने दे सकते…आख़िर कार तुम हमारे जवाई के बेटे हो…. तुम एक दो दिन रुक जाओ…..” नाज़िया की अम्मी ने मेरे सर पर हाथ फेरते हुए कहा…. तो मेने सबा की तरफ देखा….तो सबा ने भी मुस्कुराते हुए कहा…” फुफो ठीक कह रही है….तुम एक दिन रुक जाओ….मैं और रानी चले जाते है…वैसी भी फ़ैज़ को सिर्फ़ बुखार ही है….”
मैं: पक्का…..
सबा: हां रुक जाओ….
मैं: ठीक है…..
उसके बाद सबा और रानी ने अपनी पॅकिंग की और मैं सबा और रानी को बस स्टॅंड पर बस में बैठा कर वापिस आ गया….
“समीर अब इसके सामने अपना लंड मेरी फुद्दि में डाल कर इसके मन का वेहम निकाल दो….ताकि ये आइन्दा से अपनी टाँग मेरी पर्सनल लाइफ में अडाने की कॉसिश ना करे..” नरगिस ने अपने एक हाथ की उंगलयों पर थूक उगलते हुए कहा…और फिर अपना हाथ पीछे की तरफ लेजा कर अपनी फुद्दि पर थूक को फैलाने लगी…मेने अपनी पेंट को उतार फेंका और नरगिस के पीछे आते हुए अपने लंड की कॅप को नरगिस की फुद्दि के सूराख पर सेट करते हुए जैसे ही हल्का सा दबाया तो, मेरे लंड का कॅप उसकी फुद्दि के सूराख को फैलाता हुआ अंदर जा घुसा….बाकी की कसर नरगिस ने अपनी बुन्द को पीछे की तरफ पुश करके मेरे लंड को अपनी फुद्दि की गहराइयों में लेते हुए पूरी कर दी…”
मेने धीरे धीरे अपने लंड को नरगिस की फुद्दि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….” नरगिस तुम ये सब ठीक नही कर रही हो…इसके बारे में मैं तुम्हारी मोम को ज़रूर बताउन्गी…” नाज़िया ने खिसियानी बिल्ली की तरह खंबा नोचते हुए कहा…
.”अर्रे जा बता देना…मेरी अम्मी को ही क्या पूरी दुनिया को भी बता देगी तो, भी मुझे कुछ फरक नही पड़ता….” नरगिस ने अपनी बुन्द को धीरे-2 पीछे करते हुए कहा…”ओह्ह्ह फकक्क्क्क समीरररर तुम क्यों रुक गये…मेरी फुद्दि मारो ना…बोलने दो इस साली गश्ती को…जलन हो रही है इसे….फुददी तो इसकी भी लार टपका रही होगी…पर साली की अकड़ है कि, बेचारी के मूह पर ताला लगा हुआ है…”
नरगिस ने नाज़िया की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए अपनी बूँद को पीछे की तरफ पुश करने लगी…मेरा लंड बुरी तरह से नरगिस की फुद्दि की दीवारो से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर हो रहा था…”ओह्ह्ह्ह फक फक मी डीपर समीर ओह्ह्ह्ह खुदा आइ आम कमिंग ओह आइ नेवेर कम्ड सो फास्ट ओह गॉड इट्स सो फक्किंग गुड….” नरगिस ने पूरी जोश के साथ अपनी बुन्द को पीछे की ओर पुश करना शुरू कर दिया…
मैं: ओह्ह्ह नरगिस मेरा लंड भी माल छोड़ने वाला है….
नरगिस: ओह्ह्ह्ह वेट समीर….वेट….
नरगिस ने झड़ते हुए कहा…उसका पूरा बदन थरथरा उठा…और अगले ही पल वो सोफे की पुष्ट से नीचे उतर कर घुटनो के बल बैठ गयी….और मेरे लंड के कॅप को मूह में लेकर ऐसे ज़ोर ज़ोर से चूसा कि, मेरे लंड की नसें वीर्य से एक दम फूल गयी…नरगिस ने मेरे लंड की कॅप को मूह से निकाला और अपना मूह खोल कर एक हाथ से मेरे टट्टो को सहलाने लगी…”कम इन माइ माउत कम समीर….ओह्ह आइ आम वेटिंग समीर कम फॉर मी…कम फॉर युवर कम हंग्री स्लट…” नरगिस की बातें सुन कर में इस कदर मदहोश हो गया कि, मेरे लंड की कॅप से वीर्य की पिचकारियाँ निकल कर उसके मूह के अंदर गिरने लगी….दूसरी तरफ बैठी नाज़िया ये सब बड़ी हैरानी से देख रही थी….
उसने तो कभी सपने में भी सोचा नही होगा कि, एक दिन उसे अपनी लाइफ में ऐसा भी कुछ देखने को मिलेगा….जैसे ही मेरे लंड से वीर्य की आख़िरी बूँद टापकी. मेने फर्श पर पड़ी अपनी पेंट उठाई और नरगिस के रूम के बाथरूम में चला गया…..जब में फ्रेश होकर बाहर आया तो नरगिस और नाज़िया दोनो आपस में कुछ बात कर रही थी….मैं बाहर आकर सोफे पर बैठ गया…..
”ओके ओके इट्स ओके नरगिस….अक्चुअली मैं सोचती थी कि, हम दोनो एक दूसरे को प्यार करते है…और हम दोनो के बीच कोई लड़का नही आ सकता….”
नरगिस: नाज़िया मेरी बात सुनो मैं तुम्हे सब कुछ बताने वाली थी….
नाज़िया: इट्स ओके नरगिस….ऐक्चुअली मैं ये भूल गयी थी कि, रियल लाइफ में ऐसा नही होता. एनी वेज मैं तुम्हारे लिए बहुत खुश हूँ….अच्छा तो मैं चलती हूँ..बाइ….
नरगिस: आई बड़ी मुझे समझाने वाली…..मुझे पता है समीर….तुम्हारे अब्बू और इसके संबंध भी ठीक नही है….
मैं: हां…वैसे तुम्हारी आवाज़ को क्या हुआ है….
मेने नरगिस की बैठी हुई आवाज़ सुन कर कहा….तो नरगिस ने अपने गले को खंखारते हुए मुस्कुराना शुरू कर दिया… “क्या हुआ…? बताओगी भी या नही….?” मेने थोड़ा सा खीजते हुए कहा….
“अब ऐसे ज़ोर ज़ोर से चिल्लाउन्गी तो, गला और आवाज़ बैठेगी ही ना….” नरगिस ने थोड़ा सा शरमाते हुए कहा….”
मैं: अच्छा ठीक है….अब मुझे चलना चाहिए….कही ये ना हो कि, वो तुम्हारे अम्मी अब्बू को लेकर यहाँ आ जाए….
नरगिस: हां समीर तुम जाओ….वैसे भी मुझे इस पर यकीन नही है..….
मैं वहाँ से निकल कर नाज़िया की अम्मी के घर आ गया…..देखा तो अभी सिर्फ़ 12:30 ही हुए थे…एक-2 पल काटना मुस्किल हुआ जा रहा था…नाज़िया शायद वापिस अपने चाचा के घर चली गयी थी….मैं नीचे बैठा टीवी देख रहा था कि, अचानक से डोर बेल बजी.. मेने जाकर डोर खोला तो देखा सामने सबा रानी नाज़िया और नाज़िया की अम्मी खड़ी थी…उन्होने शाम को आना था…पर उन सब को एक साथ पहले यहाँ देख कर मेरी फटने लगी….कहीं नाज़िया ने जाकर अपनी अम्मी से कुछ कह तो नही दिया…
इससे पहले कि मैं कुछ बोलता तो, वो सब अंदर आ गये….”क्या हुआ आप सब इतनी जल्दी क्यों आ गये…” मेने सबा और रानी की तरफ देखते हुए कहा…तो नाज़िया ने एक बार मेरी तरफ जहर भरी नज़रों से देखा और अंदर चली गयी….” वो फ़ैज़ का फोन आया था समीर….उसकी तबीयत बहुत खराब है…और घर पर कोई भी नही है… उसकी दादी का तो तुम्हे पता है….वो अकेली क्या करेगी…मुझे आज ही वापिस जाना होगा…”
मैं: ठीक है हम अभी पॅकिंग करके निकलते है….
“नही समीर…तुम्हे ऐसे कैसी भेज दें….तुम पहली बार यहाँ आए हो…. तुम्हे खाली हाथ तो नही जाने दे सकते…आख़िर कार तुम हमारे जवाई के बेटे हो…. तुम एक दो दिन रुक जाओ…..” नाज़िया की अम्मी ने मेरे सर पर हाथ फेरते हुए कहा…. तो मेने सबा की तरफ देखा….तो सबा ने भी मुस्कुराते हुए कहा…” फुफो ठीक कह रही है….तुम एक दिन रुक जाओ….मैं और रानी चले जाते है…वैसी भी फ़ैज़ को सिर्फ़ बुखार ही है….”
मैं: पक्का…..
सबा: हां रुक जाओ….
मैं: ठीक है…..
उसके बाद सबा और रानी ने अपनी पॅकिंग की और मैं सबा और रानी को बस स्टॅंड पर बस में बैठा कर वापिस आ गया….